Category: Lifestyle

  • कॉन्फिडेंस की कमी बन रही है सफलता में रुकावट जानिए आत्मविश्वास बढ़ाने के असरदार तरीके

    कॉन्फिडेंस की कमी बन रही है सफलता में रुकावट जानिए आत्मविश्वास बढ़ाने के असरदार तरीके


    नई दिल्ली। Confidence Gain। कई बार हम पूरी मेहनत और तैयारी के साथ आगे बढ़ते हैं लेकिन आखिरी समय पर आत्मविश्वास की कमी हमें पीछे धकेल देती है। इंटरव्यू हो प्रेजेंटेशन हो या कोई नया काम शुरू करना हो यदि खुद पर भरोसा कमजोर पड़ जाए तो आसान काम भी कठिन लगने लगता है। यही वजह है कि कई लोग प्रतिभाशाली और मेहनती होने के बावजूद अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते।

    आत्मविश्वास कोई जन्म से मिला गुण नहीं है बल्कि इसे रोजमर्रा की आदतों से विकसित किया जा सकता है। अच्छी बात यह है कि छोटे छोटे बदलाव अपनाकर अपने भीतर छिपी क्षमता को बाहर लाया जा सकता है। जब हम खुद को समझते हैं और अपनी प्रगति को पहचानते हैं तो धीरे धीरे आत्मबल मजबूत होने लगता है।

    सबसे पहले जरूरी है कि छोटी छोटी सफलताओं को नजरअंदाज न किया जाए। अक्सर लोग दिनभर की उपलब्धियों को महत्व नहीं देते लेकिन हर छोटा कदम आगे बढ़ने का संकेत होता है। यदि आप अपनी छोटी उपलब्धियों को स्वीकार करते हैं तो दिमाग सकारात्मक संकेत देता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

    स्पष्ट लक्ष्य तय करना भी बेहद जरूरी है। बिना दिशा के आगे बढ़ना मुश्किल होता है। छोटे और व्यावहारिक लक्ष्य बनाएं और उन्हें समय सीमा में पूरा करने की कोशिश करें। जब लक्ष्य पूरे होते हैं तो खुद पर भरोसा मजबूत होता है। बड़े लक्ष्य को छोटे हिस्सों में बांटकर पूरा करना ज्यादा प्रभावी और व्यावहारिक तरीका है।

    पॉजिटिव सेल्फ टॉक आत्मविश्वास बढ़ाने का शक्तिशाली साधन है। अक्सर हम खुद से नकारात्मक बातें करते हैं जिससे मनोबल गिरता है। यदि इन विचारों को बदलकर सकारात्मक संवाद अपनाया जाए तो बड़ा फर्क पड़ सकता है। मैं सक्षम हूं और मैं कोशिश करूंगा जैसे वाक्य मन को मजबूत बनाते हैं और डर को कम करते हैं।

    नई स्किल सीखना भी आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रभावी तरीका है। जब आप कोई नया कौशल सीखते हैं या नई जानकारी हासिल करते हैं तो भीतर से आत्मसंतोष मिलता है। यह अनुभव धीरे धीरे आत्मविश्वास को मजबूत करता है। चाहे कोई कोर्स हो नई भाषा हो या कोई रचनात्मक गतिविधि सीखना हमेशा फायदेमंद रहता है।

    बॉडी लैंग्वेज पर ध्यान देना भी जरूरी है। सीधा खड़े होना आंखों में देखकर बात करना और हल्की मुस्कान बनाए रखना ये छोटी बातें भी आत्मविश्वास को दर्शाती हैं। सकारात्मक शारीरिक हावभाव अपनाने से न केवल दूसरों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है बल्कि खुद को भी भीतर से मजबूती महसूस होती है।

    साथ ही सकारात्मक लोगों के साथ समय बिताना आत्मविश्वास के लिए लाभकारी है। हमारा वातावरण हमारी सोच को प्रभावित करता है। ऐसे लोगों के साथ रहें जो प्रेरित करें और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। नकारात्मक माहौल से दूरी बनाकर ही आत्मबल को सुरक्षित रखा जा सकता है।

    आत्मविश्वास धीरे धीरे विकसित होने वाली शक्ति है। निरंतर अभ्यास और सकारात्मक सोच से इसे मजबूत बनाया जा सकता है। जब खुद पर भरोसा मजबूत होता है तो सफलता की राह भी आसान लगने लगती है।

  • होली 2026: बालों की सुरक्षा और स्टाइल का परफेक्ट कॉम्बिनेशन

    होली 2026: बालों की सुरक्षा और स्टाइल का परफेक्ट कॉम्बिनेशन


    नई दिल्ली । होली का त्योहार आते ही रंग गुलाल मस्ती और धूमधाम शुरू हो जाती है लेकिन अक्सर यह हमारी सुंदरता और बालों की सेहत पर असर डाल देता है। रंग खेलने के बाद बाल रूखे बेजान और नुकसान पहुंचने वाले दिखते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप होली पर बालों की सुरक्षा और स्टाइल दोनों का ध्यान रखें। इस बार होली 2026 पर कुछ आसान ट्रेंडी और सुरक्षित हेयरस्टाइल्स अपनाकर आप न सिर्फ खूबसूरत दिख सकती हैं बल्कि बालों को भी रंग और धूप से बचा सकती हैं।

    सबसे पहले बात करते हैं रोप ब्रेड पोनीटेल की। यह स्टाइल फ्रेंच ब्रेड से अलग और अधिक कूल लगती है। इसे बनाने के लिए बालों को दो हिस्सों में बांटकर ट्विस्ट करें और फिर रस्सी जैसी चोटी बनाकर पोनीटेल में बांध लें। होली खेलने के दौरान यह हेयरस्टाइल बालों को व्यवस्थित और सुरक्षित रखती है।

    दूसरी स्टाइल है साइड ट्विस्ट लो बन। लो बन हर किसी को पसंद आता है लेकिन साइड ट्विस्ट जोड़ने से यह अधिक आकर्षक और एलिगेंट लगती है। यह हेयरस्टाइल चेहरे की शेप को निखारती है और कुर्ता पलाजो या साड़ी हर आउटफिट के साथ परफेक्ट बैठती है।

    इसके बाद आती है क्राउन ब्रेड पोनीटेल। इसमें सिर के आगे से पतली चोटी बनाकर इसे क्राउन की तरह घुमाया जाता है और पोनीटेल में जोड़ दिया जाता है। यह स्टाइल खुली बालों जैसा लुक देती है लेकिन बाल पूरी तरह बंधे रहते हैं जिससे रंग गुलाल से बाल सुरक्षित रहते हैं।

    अगर आप कुछ यूनिक और परफेक्ट होली लुक चाहती हैं तो स्कार्फ बन हेयरस्टाइल ट्राई कर सकती हैं। इसमें बालों में रंगीन स्कार्फ या दुपट्टा लपेटकर बन बनाया जाता है। यह स्टाइल बालों को रंग और धूप से बचाती है और साथ ही ट्रेडिशनल और बोहो लुक देती है।

    अंत में स्पेस बन हेयरस्टाइल भी होली पार्टी के लिए बेहतरीन है। इसमें बालों को दो हिस्सों में बांटकर दो छोटे छोटे बन बनाए जाते हैं। यह हेयरस्टाइल यंग फन और क्यूट लुक देती है। दोस्तों के साथ होली पार्टी में यह स्टाइल आपके पूरे लुक को चार चांद लगा देती है।

    इस होली बालों की सुरक्षा और खूबसूरती को ध्यान में रखते हुए इन आसान और ट्रेंडी हेयरस्टाइल्स को अपनाएं। रोप ब्रेड साइड ट्विस्ट लो बन क्राउन ब्रेड पोनीटेल स्कार्फ बन और स्पेस बन जैसे विकल्प आपके होली लुक को परफेक्ट बनाएंगे और बालों को भी सुरक्षित रखेंगे।

  • गर्मियों में नहीं होगा चेहरा काला और ऑयली! अपनी डेली रूटीन में शामिल करें ये 3 जादुई बदलाव

    गर्मियों में नहीं होगा चेहरा काला और ऑयली! अपनी डेली रूटीन में शामिल करें ये 3 जादुई बदलाव


    नई दिल्ली । गर्मी का मौसम शुरू होते ही हमारी त्वचा की परेशानियां भी बढ़ने लगती हैं. तेज धूप और पसीने की वजह से चेहरा न सिर्फ काला पड़ने लगता है बल्कि बार-बार तेल आने से चेहरे की चमक भी खो जाती है. बहुत से लोग महंगे क्रीम और फेशवॉश इस्तेमाल करते हैं लेकिन फिर भी उन्हें सही रिजल्टनहीं मिलता. असल में गर्मियों में त्वचा का ख्याल रखने के लिए आपको बहुत ज्यादा तामझाम की जरूरत नहीं है. बस अपनी रोज की आदतों में कुछ छोटे और सही बदलाव करने से आप धूप से होने वाले नुकसान से बच सकते हैं. इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे 3 आसान और जादुई तरीकों के बारे में बताएंगे जिन्हें अपनाकर आप तपती गर्मी में भी अपने चेहरे को ठंडा साफ और चमकदार बनाए रख सकते हैं.

    चेहरे को धोने का सही तरीका और समय
    गर्मियों में बार-बार चेहरा धोने से त्वचा का कुदरती तेल खत्म हो जाता है जिससे चेहरा और ज्यादा ऑयली हो जाता है. दिन में सिर्फ दो या तीन बार ही अच्छे फेसवाश का इस्तेमाल करें. जब भी आप बाहर से आएं तो चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे जरूर मारें. इससे धूल-मिट्टी साफ हो जाएगी और चेहरे की गर्मी भी कम होगी. रात को सोने से पहले चेहरा साफ करना कभी न भूलें ताकि आपकी स्किन रात भर सांस ले सके.

    सनस्क्रीन को अपनी आदत बना लें

    सूरज की तेज किरणें चेहरे को काला करने और झुर्रियां पैदा करने का सबसे बड़ा कारण होती हैं. बहुत से लोग सोचते हैं कि घर के अंदर सनस्क्रीन की जरूरत नहीं है लेकिन यह गलत है. घर के अंदर हों या बाहर सनस्क्रीन जरूर लगाएं. यह आपके चेहरे पर एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है और धूप से होने वाले कालेपन को रोकती है. हर 3 से 4 घंटे बाद इसे दोबारा लगाना सबसे अच्छा रहता है.

    पानी और खानपान पर खास ध्यान दें

    बाहर से महंगी क्रीम लगाने से ज्यादा जरूरी है कि आप अंदर से अपनी स्किन का ख्याल रखें. गर्मियों में ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं ताकि शरीर की गंदगी बाहर निकल सके और स्किन हाइड्रेटेड रहे. अपनी डाइट में खीरा तरबूज और नींबू पानी जैसी ठंडी चीजें शामिल करें. तेल-मसाले वाला खाना कम खाएं क्योंकि इससे चेहरे पर पिंपल्स और तेल आने की समस्या बढ़ जाती है. जितना ज्यादा आप फल और सब्जियां खाएंगे आपका चेहरा उतना ही ज्यादा चमकेगा.
  • होली 2026: राजस्थान से बिहार तक, मालपुआ से मिठास का त्योहार

    होली 2026: राजस्थान से बिहार तक, मालपुआ से मिठास का त्योहार


    नई दिल्ली । होली का त्योहार रंगों और मस्ती के साथ साथ स्वाद और पारंपरिक व्यंजनों का भी अवसर है। फाल्गुन के महीने में घरों में गुजिया ठंडाई दही भल्ले और तरह तरह के पकवान बनने लगते हैं लेकिन होली पर एक खास मिठाई है जो पूरे भारत में लोकप्रिय है मालपुआ। यह पारंपरिक मिठाई हर राज्य में अलग अंदाज में बनाई जाती है लेकिन स्वाद में हर जगह लाजवाब होती है। कहीं इसे दूध और खोये से बनाया जाता है तो कहीं गुड़ से। भारत में कई राज्यों में होली और मालपुआ का रिश्ता बहुत पुराना है और बिना मालपुआ के होली अधूरी मानी जाती है।

    राजस्थान रबड़ी वाला शाही मालपुआ

    राजस्थान में मालपुआ को खासतौर पर रबड़ी के साथ तैयार किया जाता है। इसके लिए मैदा खोया और दूध मिलाकर गाढ़ा बैटर तैयार किया जाता है फिर इसमें इलायची और सौंफ डालकर स्वाद बढ़ाया जाता है। बैटर को घी में गोल आकार में तलकर चीनी की चाशनी में डुबोया जाता है और ऊपर से ठंडी रबड़ी डालकर मेहमानों को परोसा जाता है। यह शाही अंदाज इसे खास बनाता है।

    बिहार केला मालपुआ

    बिहार में मालपुआ का स्वाद थोड़ी अलग दिशा में जाता है। यहाँ केले का इस्तेमाल किया जाता है और यह अक्सर बिना चाशनी के ही खाया जाता है। पके केले मैदा खोया और दूध का बैटर बनाकर घी में तलने पर यह नरम और खुशबूदार मालपुआ तैयार होता है।

    मथुरा पारंपरिक मालपुआ

    मथुरा में होली का रंग और स्वाद दोनों खास होते हैं। यहाँ मालपुआ मैदा और सूजी से बनाया जाता है। बैटर तैयार करने के लिए मैदा सूजी और दूध मिलाकर घी में तला जाता है और हल्की चाशनी में डुबोकर परोसा जाता है। इसका स्वाद ज्यादा मीठा नहीं होता लेकिन पारंपरिक लुत्फ देता है।

    ओडिशा अंपुआ

    ओडिशा में मालपुआ को अंपुआ कहा जाता है। यहाँ चावल के आटे और नारियल के साथ गुड़ मिलाकर बैटर तैयार किया जाता है। तेल में तलकर बनाई गई अंपुआ हल्की मीठी और बेहद स्वादिष्ट होती है।

    झारखंड होली पर घर घर में मालपुआ

    झारखंड में भी होली पर मालपुआ बनती है और इसकी रेसिपी बिहार से काफी मिलती जुलती है। घर घर में इसे बनाया जाता है और त्योहार की मिठास को बढ़ाता है।इस तरह होली 2026 पर राजस्थान बिहार मथुरा ओडिशा और झारखंड में मालपुआ का अपना अलग महत्व है। यह सिर्फ मिठाई नहीं बल्कि त्योहार की रंगीन यादों और पारंपरिक स्वाद का प्रतीक है। चाहे आप शाही रबड़ी वाला मालपुआ पसंद करें या केले वाला हर प्रकार में इसका स्वाद लाजवाब और होली के जश्न को और खास बना देता है।

  • सावधान! बचपन का असामान्य वजन बढ़ा सकता है युवावस्था में बीमारियों का खतरा, नई स्टडी में बड़ा खुलासा

    सावधान! बचपन का असामान्य वजन बढ़ा सकता है युवावस्था में बीमारियों का खतरा, नई स्टडी में बड़ा खुलासा


    नई दिल्ली। हर माता पिता अपने बच्चे की लंबाई और वजन को लेकर चिंतित रहते हैं। अक्सर घरों में बच्चे के दुबलेपन या मोटापे को केवल खान पान और खराब लाइफस्टाइल से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन हाल ही में आई एक नई रिसर्च ने इस धारणा को आंशिक रूप से बदल दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चों के वजन और बॉडी मास इंडेक्स BMI में होने वाले बदलावों का एक बड़ा हिस्सा उनके जीन्स पर निर्भर करता है।

    ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित द्वारा की गई इस स्टडी में करीब 6 300 बच्चों और वयस्कों के 66 000 से अधिक BMI मापों का विश्लेषण किया गया। शोध में पाया गया कि 10 वर्ष की आयु तक बच्चे का वजन और 18 वर्ष तक उसकी ग्रोथ की रफ्तार भविष्य में होने वाली बीमारियों का संकेत दे सकती है। यदि बचपन में वजन असामान्य रूप से बढ़ता या घटता है तो आगे चलकर डायबिटीज हाई कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोगों का जोखिम बढ़ सकता है।

    अध्ययन में यह भी सामने आया कि अलग अलग उम्र में अलग जेनेटिक फैक्टर्स सक्रिय होते हैं। यानी छोटे बच्चों के शारीरिक आकार को प्रभावित करने वाले आनुवंशिक कारक किशोरावस्था में असर डालने वाले कारकों से अलग हो सकते हैं। इसका अर्थ यह है कि बचपन में हल्का फुल्का मोटापा हमेशा भविष्य में गंभीर मोटापे का संकेत नहीं होता लेकिन लगातार असामान्य ग्रोथ चिंता का विषय हो सकती है।

    शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल जीन्स ही जिम्मेदार नहीं हैं। पर्यावरण खान पान शारीरिक गतिविधि और पारिवारिक जीवनशैली भी बच्चे के विकास को प्रभावित करते हैं। यानी जेनेटिक प्रवृत्ति और जीवनशैली मिलकर स्वास्थ्य की दिशा तय करते हैं।

    यह अध्ययन आंशिक रूप से ब्रिटेन की प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी ऑफ़ ब्रिस्टल के 90 के दशक के बच्चे स्टडी के डेटा पर भी आधारित है जिसे वैज्ञानिकों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य डेटाबेस माना जाता है। इस लंबे समय तक चले अध्ययन ने बच्चों के विकास और भविष्य के स्वास्थ्य जोखिमों को समझने में अहम भूमिका निभाई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि किस उम्र में हस्तक्षेप सबसे अधिक प्रभावी हो सकता है। यदि सही समय पर पोषण व्यायाम और स्वास्थ्य निगरानी की जाए तो भविष्य में मोटापे और उससे जुड़ी गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।

    इस स्टडी का संदेश स्पष्ट है बच्चों के वजन को लेकर न तो अनावश्यक घबराहट जरूरी है और न ही लापरवाही। नियमित स्वास्थ्य जांच संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर बचपन से ही बेहतर स्वास्थ्य की नींव रखी जा सकती है।

  • Holi Skin Care: होली की मस्ती में ऐसे रखें अपनी खूबसूरत स्किन का ख्याल, एलर्जी भी रहेगी दूर

    Holi Skin Care: होली की मस्ती में ऐसे रखें अपनी खूबसूरत स्किन का ख्याल, एलर्जी भी रहेगी दूर


    नई दिल्ली । होली का त्योहार खुशियों और रंगों का पर्व है लेकिन सावधानी न बरती जाए तो यही रंग आपकी त्वचा के लिए घातक साबित हो सकते हैं. बाजार में मिलने वाले केमिकल वाले रंग और गुलाल त्वचा पर जलन खुजली और एलर्जी पैदा कर सकते हैं. इसी विषय पर लोकल-18 की टीम ने लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज के चर्म एवं गुप्त रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरजीत सिंह से विशेष बातचीत की और जाना कि होली के दौरान त्वचा का ख्याल कैसे रखें.

    होली खेलने से पहले अपनाएं यह सुरक्षा कवच
    डॉ. अमरजीत सिंह ने सलाह दी है कि होली खेलने घर से बाहर निकलने से पहले अपनी त्वचा की सुरक्षा की तैयारी कर लेनी चाहिए. उन्होंने बताया कि केमिकल आधारित रंगों के असर को कम करने के लिए चेहरे और शरीर के खुले हिस्सों पर गोले का तेल नारियल तेल या कोई अच्छा मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं. ऐसा करने से त्वचा पर एक सुरक्षा परत बन जाती है जिससे रंगों का हानिकारक प्रभाव त्वचा के रोमछिद्रों के अंदर नहीं समा पाता और बाद में रंग छुड़ाना भी आसान हो जाता है.

    बदलते मौसम और त्वचा का ध्यान
    चूंकि होली के समय मौसम में भी बदलाव हो रहा होता है इसलिए त्वचा अधिक संवेदनशील हो जाती है. डॉ. सिंह के अनुसार इस समय हल्की सी लापरवाही भी लंबे समय तक त्वचा की परेशानी बढ़ा सकती है. उन्होंने कहा कि जितना संभव हो सके प्राकृतिक और हर्बल रंगों का ही उपयोग करें. कुछ सस्ते गुलाल में भी कांच के कण या हानिकारक रसायन हो सकते हैं जो चेहरे पर रगड़ने से घाव या गंभीर इन्फेक्शन दे सकते हैं.

    अगर लग जाए पक्का रंग तो क्या करें?

    अक्सर लोग पक्का रंग छुड़ाने के लिए त्वचा पर कठोर साबुन या अन्य केमिकल वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने लगते हैं. डॉ. अमरजीत सिंह ने बताया कि यदि चेहरे पर पक्का रंग लग गया है तो उसे सबसे पहले सादे पानी से धोएं और अपने नियमित साबुन का उपयोग करें. यदि रंग नहीं छूट रहा है तो उसे बार-बार न रगड़ें. ज्यादा रगड़ने से त्वचा छिल सकती है और घाव हो सकते हैं. ऐसे में धैर्य रखें और धीरे-धीरे प्राकृतिक तरीके से रंग को निकलने दें.
    लापरवाही पड़ सकती है भारी
    विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि अगर होली खेलने के बाद त्वचा पर खुजली जलन या दाने उभरने लगें तो घर पर खुद से इलाज करने के बजाय तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाएं. अक्सर देखा जाता है कि होली के बाद अस्पतालों में आंखों और त्वचा से जुड़ी समस्याओं के मरीज बढ़ जाते हैं. यदि लोग पहले से ही सावधानी रखें और बचाव के तरीके अपनाएं तो उन्हें अस्पताल जाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी.

  • बोर्ड एग्जाम में घबराहट और भूलने की समस्या से कैसे निपटें..

    बोर्ड एग्जाम में घबराहट और भूलने की समस्या से कैसे निपटें..


    नई दिल्ली।बोर्ड एग्जाम का समय छात्रों के लिए हमेशा तनावपूर्ण होता है। कई बार ऐसा होता है कि घंटों पढ़ाई करने के बाद भी पेपर हाथ में आते ही सब कुछ भूल जाता है। यह सिर्फ छात्रों की कमजोरी नहीं, बल्कि एक सामान्य मानसिक प्रतिक्रिया है। कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, नवी मुंबई के कंसल्टेंट साइकियाट्रिक डॉक्टर पार्थ नागड़ा के अनुसार यह स्ट्रेस और घबराहट का परिणाम होता है। परीक्षाएं आपकी याददाश्त और समझने की क्षमता को परखने का तरीका हैं। इसलिए पॉजिटिव सोच और आत्मविश्वास के साथ इन पर काबू पाना जरूरी है।

    डॉक्टर कहते हैं कि खुद को पॉजिटिव कल्पना में देखें। उदाहरण के लिए सोचें कि आप स्कूल टॉपर बन रहे हैं और अपने जीवन में खुशहाल और संतुलित भविष्य जी रहे हैं। यह मानसिक तैयारी आपको परीक्षा में घबराहट कम करने में मदद करेगी। इतना ही नहीं, यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि परीक्षा सफलता का केवल एक तरीका है, जीवन में अन्य विकल्प भी मौजूद हैं।

    पढ़ाई की तैयारी के टिप्स:
    छोटे और आसान लक्ष्य तय करें। उदाहरण के लिए 25–30 मिनट पढ़ें, 10 मिनट रिवीजन करें और 15 मिनट ब्रेक लें। खुद के नोट्स बनाएं क्योंकि लिखने से याददाश्त तेज होती है। कठिन टॉपिक्स को छोटे हिस्सों में बांटकर अभ्यास करें और आत्मविश्वास बनाए रखें। डायग्राम और चित्रों का इस्तेमाल याददाश्त बढ़ाने में मदद करता है। पढ़ाई के लिए टाइम टेबल तय करें और रोज 7–8 घंटे नींद लें। नींद के दौरान पढ़ा हुआ लंबे समय तक याद रहता है। दोस्तों के साथ मिलकर पढ़ाई करें और घर का पौष्टिक खाना खाएं। रोज 30 मिनट हल्की एक्सरसाइज से दिमाग सक्रिय रहता है।

    परीक्षा का सामना करने के टिप्स:
    आखिरी समय की पढ़ाई से बचें। इससे आत्मविश्वास कमजोर होता है और तनाव बढ़ता है। परीक्षा से एक दिन पहले बैग, पैन-पेंसिल, हॉल टिकट जैसी जरूरी चीजें तैयार रखें। खुद की तुलना दूसरों से न करें। हर छात्र की अपनी ताकत और कमजोरियां होती हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया से दूरी बनाएं। आराम के लिए म्यूजिक सुनें, हल्की टहलें या दोस्तों से बात करें।

    डॉक्टर बताते हैं कि अगर अत्यधिक घबराहट या पैनिक अटैक हो तो गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज, योग और मेडिटेशन अपनाएं। फिर भी अगर राहत न मिले तो किसी अच्छे साइकियाट्रिस्ट से परामर्श जरूर लें।

    इस तरह, पढ़ाई और परीक्षा की सही तैयारी, पॉजिटिव सोच और मानसिक संतुलन के जरिए छात्र अपनी घबराहट को कम कर सकते हैं और बोर्ड एग्जाम का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सकते हैं। याद रखें, असफलता भी सफलता का हिस्सा है और उससे सीखकर आगे बढ़ना सबसे महत्वपूर्ण है।

  • मार्च में बनाएं घूमने का प्लान, सुकून और फ्रेशनेस देंगे ये खास डेस्टिनेशन

    मार्च में बनाएं घूमने का प्लान, सुकून और फ्रेशनेस देंगे ये खास डेस्टिनेशन


    नई दिल्ली । अगर आप रोजमर्रा की भागदौड़ से थोड़ा ब्रेक लेना चाहते हैं तो मार्च का महीना ट्रैवल के लिए बेहतरीन माना जाता है। न कड़ाके की ठंड न चिलचिलाती गर्मी हल्का सुहावना मौसम सफर को आरामदायक बना देता है। यही वजह है कि इस समय पहाड़ हरियाली और आध्यात्मिक स्थलों की खूबसूरती और भी निखर जाती है। अगर आप भी मन को तरोताजा करने और तनाव को पीछे छोड़ने का प्लान बना रहे हैं तो ये तीन जगहें आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होनी चाहिए।

    कूर्ग भारत का स्कॉटलैंड

    कर्नाटक में बसा कूर्ग अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर है। इसे भारत का स्कॉटलैंड भी कहा जाता है। मार्च के महीने में यहां का मौसम बेहद खुशनुमा रहता है। चारों ओर फैले कॉफी के बागान धुंध से ढकी पहाड़ियां झरनों की कलकल ध्वनि और हरियाली से भरा वातावरण मन को सुकून देता है। अगर आप भीड़भाड़ से दूर प्रकृति के बीच समय बिताना चाहते हैं तो कूर्ग एक परफेक्ट चॉइस है। यहां एबी फॉल्स राजा सीट और दुबारे एलीफेंट कैंप जैसे दर्शनीय स्थल आपकी यात्रा को यादगार बना सकते हैं।

    ऋषिकेश अध्यात्म और एडवेंचर का संगम

    उत्तराखंड का ऋषिकेश मार्च में और भी आकर्षक हो जाता है। वसंत ऋतु में यहां का मौसम सुहावना रहता है जिससे गंगा किनारे बिताया गया समय खास बन जाता है। सुबह की गंगा आरती और शांत वातावरण मन को गहरी शांति देता है। सिर्फ आध्यात्म ही नहीं रोमांच के शौकीनों के लिए भी यह जगह खास है। रिवर राफ्टिंग बंजी जंपिंग और कैंपिंग जैसी गतिविधियां एडवेंचर का अलग ही अनुभव कराती हैं। अगर आप आध्यात्मिक सुकून और रोमांच दोनों चाहते हैं तो ऋषिकेश आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है।

    सिक्किम वादियों में सजा स्वर्ग
    पूर्वोत्तर भारत का सिक्किम मार्च में रंग-बिरंगे फूलों और साफ आसमान के साथ किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। ऊंचे-ऊंचे पहाड़ बर्फ से ढकी चोटियां और शांत वातावरण यहां की पहचान हैं। गंगटोक त्सोमगो लेक और प्राचीन बौद्ध मठों की खूबसूरती यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देती है। साफ हवा और प्राकृतिक नज़ारे तनाव को दूर कर मन को पूरी तरह रिफ्रेश कर देते हैं। अगर आपकी ट्रैवल लिस्ट में सिक्किम अब तक सिर्फ नाम भर था तो मार्च इसे सच में देखने का सही समय है।

  • वजन घटाना हुआ आसान: तमन्ना भाटिया और फिटनेस ट्रेनर सिद्धार्थ सिंह की टिप्स

    वजन घटाना हुआ आसान: तमन्ना भाटिया और फिटनेस ट्रेनर सिद्धार्थ सिंह की टिप्स


    नई दिल्ली।बॉलीवुड एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया की फिटनेस का राज उनके ट्रेनर सिद्धार्थ सिंह ने अब सबके सामने साझा किया है। वजन घटाने की चाहत रखने वाले अक्सर भारी एक्सरसाइज और महंगी डाइट प्लान की ओर रुख करते हैं, लेकिन सिद्धार्थ सिंह का कहना है कि वजन कम करने के लिए सबसे आसान तरीका रोज़मर्रा की थाली में संतुलन बनाए रखना है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो में बताया कि नई डाइट लेने की बजाय अपनी प्लेट स्ट्रक्चर को सही करना ज्यादा प्रभावी साबित होता है।

    सिद्धार्थ के अनुसार हर खाने की थाली में तीन मुख्य घटक होने चाहिए। पहला और सबसे अहम हिस्सा है पाम प्रोटीन। इसमें आप चिकन, पनीर, टोफू, दाल या अंडे शामिल कर सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि दिन के हर खाने में प्रोटीन का होना जरूरी है। बिना प्रोटीन के वजन घटाना मुश्किल है क्योंकि यह मसल्स को बनाए रखने और शरीर की चर्बी कम करने में मदद करता है।

    दूसरा हिस्सा है स्मार्ट कार्ब्स। आम धारणा है कि कार्ब्स खाने से वजन बढ़ता है, लेकिन सिद्धार्थ इसे गलत मानते हैं। यदि कार्ब्स सही मात्रा और सही समय पर शामिल किए जाएं, तो यह वजन घटाने में सहायक हो सकते हैं। इसके लिए आप अपनी प्लेट में एक मुट्ठी रोटी, चावल या शकरकंद जैसी चीजें ले सकते हैं। इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है और आप दिनभर एक्टिव रहते हैं।

    तीसरा और महत्वपूर्ण हिस्सा है सब्जियां। हर प्लेट में कम से कम दो मुट्ठी हरी सब्जियों का होना जरूरी है। इनमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखती है और बार-बार खाने की इच्छा को कम करती है। फाइबर का सेवन मेटाबॉलिज्म को भी बेहतर बनाता है और वजन घटाने की प्रक्रिया को तेज करता है।

    सिद्धार्थ सिंह बताते हैं कि कई बिजी प्रोफेशनल्स जो केवल 5 से 7 किलो वजन कम करना चाहते हैं, उन्हें कार्ब्स पूरी तरह से हटाने की जरूरत नहीं है। असली फर्क संतुलित प्लेट स्ट्रक्चर से आता है। प्रोटीन, स्मार्ट कार्ब्स और हरी सब्जियों का सही अनुपात रखने से वजन घटाना सरल और स्वस्थ दोनों होता है।

    इसके अलावा सिद्धार्थ ने कहा कि छोटी-छोटी आदतें भी असर डालती हैं। खाने से पहले पानी पीना, धीमी गति से खाना, और रात के समय हल्का खाना शरीर को डिटॉक्स करने और वजन नियंत्रित करने में मदद करता है। इस तरीके को अपनाकर किसी भी व्यक्ति को अतिरिक्त मेहनत किए बिना फिटनेस और वजन में सुधार महसूस हो सकता है।

    वास्तव में, फिट रहने के लिए जरूरी नहीं कि आप महंगी डाइट प्लान या जिम में घंटों समय बिताएं। सही प्लेट स्ट्रक्चर, संतुलित भोजन और थोड़ी जागरूकता से वजन कम करना हर किसी के लिए संभव है। यदि आप भी वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं, तो आज ही अपनी प्लेट को संतुलित करने की शुरुआत करें और छोटे-छोटे बदलाव को जीवनशैली में शामिल करें।

  • आचार्य बालकृष्ण के हेल्थ टिप्स: रोजाना पपीता खाने से घटे कोलेस्ट्रॉल और दिल स्वस्थ

    आचार्य बालकृष्ण के हेल्थ टिप्स: रोजाना पपीता खाने से घटे कोलेस्ट्रॉल और दिल स्वस्थ


    नई दिल्ली । आचार्य बालकृष्ण ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कोलेस्ट्रॉल कम करने और दिल को स्वस्थ रखने का आसान उपाय बताया है। उनका सुझाव है कि प्रतिदिन पपीता खाने से शरीर में जमा बुरा कोलेस्ट्रॉल LDL नियंत्रित होता है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है।

    पपीता क्यों खाएं?

    पपीता एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिनों का प्राकृतिक स्रोत है। इसमें विटामिन C फाइबर और कई पोषक तत्व होते हैं। आचार्य बालकृष्ण के अनुसार नियमित रूप से पपीता खाने से कोलेस्ट्रॉल स्तर नियंत्रित रहता है और दिल से जुड़े रोगों का खतरा भी कम होता है। पपीता आयुर्वेद में पाचन सुधारने वाला फल माना जाता है। यह शरीर में जमा गंदा कोलेस्ट्रॉल बाहर निकालने में मदद करता है और कब्ज एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत देता है। इसके अलावा पपीते में मौजूद फाइबर गुड कोलेस्ट्रॉल HDL बढ़ाने में मदद करता है और ब्लड सर्कुलेशन को सुधारता है।

    प्रतिदिन कितना पपीता खाएं?

    आचार्य बालकृष्ण के अनुसार: रोजाना 1 कटोरी पपीता सुबह या शाम खाया जा सकता है। इसे बिना नमक के खाना चाहिए। सर्दी-जुकाम में पपीते पर थोड़ा काली मिर्च पाउडर छिड़ककर खाया जा सकता है। पपीता तले-भुने भोजन के साथ न मिलाएं।

    आसान और किफायती उपाय

    पपीता घर में आसानी से उपलब्ध होता है और इसका सेवन सरल प्राकृतिक और किफायती तरीका है कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने का। यह न केवल दिल की सेहत के लिए फायदेमंद है बल्कि पाचन तंत्र और कब्ज जैसी सामान्य समस्याओं में भी राहत देता है।