Category: Madhya Pradesh

  • ग्वालियर में जमीन विवाद पर फायरिंग, युवक को गोली मारकर बदमाश फरार

    ग्वालियर में जमीन विवाद पर फायरिंग, युवक को गोली मारकर बदमाश फरार


    ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया जब थाटीपुर थाना क्षेत्र के पीएमटी चौराहे पर एक युवक को बदमाशों ने घेरकर बेरहमी से पीट दिया और फिर उस पर गोलियां चला दीं। इस सनसनीखेज वारदात से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग दहशत में आ गए। घायल युवक की पहचान रामवीर गुर्जर के रूप में हुई है, जिसे स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

    बाइक सवार बदमाशों ने पहले पीटा, फिर की फायरिंग
    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रामवीर पीएमटी चौराहे के पास सड़क किनारे खड़ा था, तभी आधा दर्जन से अधिक बाइक सवार बदमाश वहां पहुंचे। उन्होंने पहले उसे घेरकर लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा और फिर अचानक फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों के छर्रे लगने से युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि मारपीट में उसके सिर में भी गहरी चोट आई है। घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए।

    जमीन विवाद से जुड़ा है मामला, पुरानी रंजिश की आशंका
    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह हमला जमीन विवाद से जुड़ा हो सकता है। बताया जा रहा है कि रामवीर गुर्जर का अपने पड़ोसी पिंटू उर्फ उदय गुर्जर से प्लॉट को लेकर पुराना विवाद चल रहा था। करीब दो सप्ताह पहले भी दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और तनाव की स्थिति बनी थी। पुलिस को शक है कि पुरानी रंजिश के चलते इस वारदात को अंजाम दिया गया।

    CCTV फुटेज से खुल सकते हैं राज
    घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, जिसमें हमले की पूरी घटना कैद हुई है। फुटेज में साफ दिख रहा है कि कुछ लोग दौड़ते हुए आते हैं और सड़क किनारे खड़े युवक पर हमला कर देते हैं। इसके बाद मारपीट और फायरिंग की पुष्टि होती है।

    पुलिस की कार्रवाई, आरोपियों की तलाश तेज
    थाटीपुर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की पहचान की जा रही है और उन्हें जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। घायल युवक का इलाज जारी है और डॉक्टर उसकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

    ग्वालियर में दिनदहाड़े हुई यह वारदात एक बार फिर शहर की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। जमीन विवाद ने हिंसक रूप लेकर आम लोगों में दहशत फैला दी है। अब देखना होगा कि पुलिस कितनी जल्दी आरोपियों तक पहुंचती है।

  • वट सावित्री व्रत और अमावस्या का संयोग, ग्वालियर में शनि मंदिरों में विशेष पूजा

    वट सावित्री व्रत और अमावस्या का संयोग, ग्वालियर में शनि मंदिरों में विशेष पूजा


    ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में शनिवार को शनि जयंती के अवसर पर धार्मिक उत्साह चरम पर रहा। न्याय और कर्मफल के देवता भगवान शनिदेव की जयंती इस बार अमावस्या और वट सावित्री व्रत के दुर्लभ संयोग के साथ मनाई जा रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। सुबह से ही शहर के सभी प्रमुख शनि मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। भक्तों ने काले तिल, सरसों का तेल और फूल चढ़ाकर शनिदेव से अपने परिवार में सुख-शांति और लंबी आयु की कामना की।

    नवग्रह मंदिर बना आस्था का केंद्र
    ग्वालियर के बहोड़ापुर स्थित प्राचीन नवग्रह मंदिर में विशेष भीड़ देखने को मिली। यह लगभग 150 साल पुराना मंदिर शहर के सबसे प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। मंदिर परिसर में श्रद्धालु शनि देव सहित सभी नवग्रहों की पूजा कर रहे हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव में राहत मिलती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि हर शनिवार यहां आने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।

    तेल,   और दान का विशेष महत्व
    शनि जयंती पर भक्तों ने विशेष रूप से सरसों का तेल और काले तिल अर्पित किए। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। कंबल, अन्न, तिल और दक्षिणा का दान करने से जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलने की मान्यता है। ज्योतिषाचार्य रोहित उपाध्याय के अनुसार शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है, जो व्यक्ति के कर्मों के अनुसार फल देते हैं। इस दिन पूजा और मंत्रोच्चारण से शनि दोष में राहत मिलती है और जीवन में बाधाएं कम होती हैं।

    वट सावित्री व्रत में महिलाओं की आस्था
    इस अवसर पर महिलाओं ने वट सावित्री व्रत भी रखा, जो पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए किया जाता है। महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर देवी सावित्री और यमराज का स्मरण कर निर्जला व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें पूरे दिन जल और अन्न का त्याग किया जाता है।

     धार्मिक संयोग ने बढ़ाया महत्व
    शनि जयंती, अमावस्या और वट सावित्री व्रत का एक साथ पड़ना इस दिन को अत्यंत विशेष बना रहा है। इस दुर्लभ संयोग को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया और मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना का दौर जारी रहा।

    ग्वालियर में शनि जयंती का यह अवसर सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और विश्वास का संगम बन गया। मंदिरों में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर साबित किया कि शनिदेव के प्रति श्रद्धा लोगों के जीवन में गहराई से जुड़ी हुई है।

  • ओंकारेश्वर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव

    ओंकारेश्वर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव


    इंदौर। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर में शनिश्चरी अमावस्या और रविवार के अवकाश के चलते भारी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन ने विशेष ट्रैफिक प्लान लागू कर दिया है। इस दौरान इंदौर-खंडवा मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया है। प्रशासन के अनुसार 16 मई को शनिश्चरी अमावस्या और 17 मई को रविवार होने के कारण नर्मदा स्नान और ओंकारेश्वर दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। भीड़ और संभावित जाम की स्थिति से बचने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

    भारी वाहनों पर 18 मई सुबह तक रोक
    कलेक्टर शिवम वर्मा द्वारा जारी आदेश के अनुसार तेजाजी नगर चौराहे से खंडवा की ओर जाने वाले और खंडवा से इंदौर आने वाले मार्ग पर भारी मालवाहक वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यह प्रतिबंध 15 मई रात 12 बजे से लागू हो चुका है और 18 मई 2026 की सुबह 8 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान केवल हल्के और आवश्यक सेवा वाहनों को छूट दी गई है।

    भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग तय
    प्रशासन ने भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक रूट भी निर्धारित किए हैं। अब सभी भारी वाहन तेजाजी नगर चौराहा बायपास से धामनोद होते हुए खंडवा की ओर जा सकेंगे। यह व्यवस्था केवल इंदौर जिले की सीमा के भीतर लागू की गई है। अधिकारियों का कहना है कि इंदौर-खंडवा मार्ग पर चल रहे सड़क निर्माण कार्य और बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए यह कदम जरूरी था, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था या जाम की स्थिति न बने।

    किन वाहनों को मिली छूट
    इस ट्रैफिक प्रतिबंध से कुछ आवश्यक सेवाओं को छूट दी गई है
    कार, जीप, दोपहिया वाहन और यात्री बसें सामान्य रूप से चल सकेंगी
    दूध सप्लाई वाहन
    नगर निगम और स्वास्थ्य सेवा वाहन
    पुलिस, फायर ब्रिगेड और पानी के टैंकर
    सेना और बिजली विभाग के वाहन
    कृषि उपज मंडी से जुड़े आवश्यक वाहन

    श्रद्धालुओं की सुविधा प्राथमिकता
    प्रशासन ने साफ किया है कि इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवागमन सुनिश्चित करना है। ओंकारेश्वर में भीड़ के दौरान किसी भी तरह की दुर्घटना या ट्रैफिक जाम से बचने के लिए यह अस्थायी निर्णय लिया गया है। साथ ही आम जनता और वाहन चालकों से अपील की गई है कि वे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें और यातायात नियमों का पालन करें।

    ओंकारेश्वर में बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ और सड़क निर्माण कार्य को देखते हुए इंदौर-खंडवा मार्ग पर भारी वाहनों पर अस्थायी रोक एक एहतियाती कदम है। प्रशासन का लक्ष्य है कि श्रद्धालुओं को बिना किसी परेशानी के दर्शन और स्नान की सुविधा मिल सके।

  • इंदौर में तापमान में हल्की गिरावट, फिर भी गर्मी से नहीं मिली राहत

    इंदौर में तापमान में हल्की गिरावट, फिर भी गर्मी से नहीं मिली राहत


    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में मई के तीसरे सप्ताह में तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद भीषण गर्मी से राहत नहीं मिल पाई है। शुक्रवार को दिन का अधिकतम तापमान 2 डिग्री गिरकर 41.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से अभी भी करीब 2 डिग्री अधिक है। दिन में तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोग घरों से बाहर निकलने से बचते नजर आए। वहीं, रात का तापमान भी 3 डिग्री गिरकर 25.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, लेकिन उमस और गर्मी का असर लगातार बना रहा।

    दोपहर में हालत सबसे खराब, अलर्ट जारी
    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इंदौर में दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच सबसे ज्यादा गर्मी का असर रहेगा। इस दौरान लू जैसे हालात बन सकते हैं। लोगों को सलाह दी गई है कि केवल जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलें और पर्याप्त पानी पिएं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 4 दिन यानी 16 से 19 मई तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी का दौर जारी रहेगा, जिसमें इंदौर संभाग भी प्रभावित रहेगा।

    तापमान में उतार-चढ़ाव, लेकिन राहत नहीं
    हालांकि पिछले कुछ दिनों में तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन यह गिरावट लोगों को राहत देने में नाकाम रही है। 41 से 43 डिग्री के बीच लगातार बना तापमान गर्मी को और ज्यादा असहनीय बना रहा है। इंदौर में हाल के दिनों में तापमान 43 डिग्री से ऊपर भी पहुंच चुका है, जिससे शहरवासियों को लगातार गर्म हवाओं का सामना करना पड़ रहा है।

    मानसून से उम्मीद, जल्दी पहुंचने के संकेत
    भीषण गर्मी के बीच राहत की एक उम्मीद मानसून से जुड़ी है। मौसम विभाग के अनुसार इस बार मानसून सामान्य से पहले आगे बढ़ सकता है। संकेत हैं कि मानसून 26 मई के आसपास केरल पहुंच सकता है और मध्य प्रदेश में 12 जून तक प्रवेश कर सकता है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो इस बार लोगों को जल्दी बारिश की राहत मिल सकती है।

    ऐतिहासिक रिकॉर्ड और बदलता मौसम
    इंदौर में मई का तापमान कई बार 46 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है। 31 मई 1994 को शहर में 46.6 डिग्री सेल्सियस का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था, जो अब तक का सर्वाधिक तापमान माना जाता है। हाल के वर्षों में मई के महीने में बारिश भी देखने को मिली है, जिससे मौसम में अचानक बदलाव आते रहे हैं।

    इंदौर में तापमान भले ही थोड़ा घटा हो, लेकिन गर्मी का प्रकोप अभी भी चरम पर है। आने वाले दिनों में राहत की कोई बड़ी संभावना नजर नहीं आ रही है। ऐसे में सावधानी और स्वास्थ्य सुरक्षा ही सबसे जरूरी उपाय बने हुए हैं।

  • इंदौर हादसा: प्लास्टिक दाना बनाने वाली फैक्ट्री में लगी आग, इलाके में अफरा-तफरी

    इंदौर हादसा: प्लास्टिक दाना बनाने वाली फैक्ट्री में लगी आग, इलाके में अफरा-तफरी

    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में शनिवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई जब धार रोड स्थित प्लास्टिक दाना बनाने वाली फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि फैक्ट्री से उठता काला धुआं कई किलोमीटर दूर से साफ दिखाई देने लगा।

    आग लगने की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 7 दमकल गाड़ियों के साथ-साथ पोकलेन मशीन और फायर फाइटिंग रोबोट भी मंगाया गया है।

    4 घंटे से लगातार जंग, 35 टैंकर पानी का इस्तेमाल
    फायर ब्रिगेड की टीमें पिछले 4 घंटे से लगातार आग पर काबू पाने की कोशिश कर रही हैं। अब तक लगभग 35 टैंकर पानी का उपयोग किया जा चुका है, लेकिन आग पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका है। अधिकारियों के अनुसार फैक्ट्री में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक दाना मौजूद होने के कारण आग तेजी से फैलती गई और स्थिति गंभीर हो गई। टीन शेड हटाकर और मलबा साफ कर आग बुझाने का प्रयास किया जा रहा है।

    आसपास का इलाका खाली, प्रशासन अलर्ट पर
    आग की भयावहता को देखते हुए एहतियातन आसपास के क्षेत्र को खाली करा दिया गया है ताकि किसी भी तरह की जनहानि से बचा जा सके। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। सांवेर रोड स्थित एक अन्य फैक्ट्री में भी आग लगने की सूचना मिलने से प्रशासन और सतर्क हो गया है।

     पानी की कमी बनी बड़ी चुनौती
    RRCAT के डिप्टी फायर ऑफिसर अजय कुमार ने बताया कि इलाके में पानी के पर्याप्त स्रोत न होने से आग बुझाने में दिक्कत आ रही है। दूर-दूर से टैंकर बुलाकर दमकल वाहनों को बार-बार भरा जा रहा है, जिससे राहत कार्य धीमा पड़ रहा है। नगर निगम कमिश्नर भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

     आग लगने का कारण: शॉर्ट सर्किट की आशंका
    फैक्ट्री संचालक के अनुसार प्रारंभिक जांच में डीपी (डिस्ट्रीब्यूशन पैनल) में शॉर्ट सर्किट को आग लगने का कारण माना जा रहा है। प्लास्टिक सामग्री होने के कारण आग तेजी से फैली और पूरी यूनिट को अपनी चपेट में ले लिया। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आग के वास्तविक कारणों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

     राहत की बात: कोई हताहत नहीं
    अच्छी बात यह है कि घटना के समय फैक्ट्री में मजदूर मौजूद नहीं थे, जिससे किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है। फैक्ट्री में आमतौर पर 30 से 35 लोग दिन और रात की शिफ्ट में काम करते हैं।

    इंदौर की यह भीषण आग एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा और बिजली व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। हालांकि राहत की बात यह है कि बड़ा हादसा टल गया, लेकिन फैक्ट्री को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। आग पर पूरी तरह काबू पाने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • मध्य प्रदेश में वीआईपी काफिले पर सियासी घमासान, दिल्ली तक पहुंचा मामला

    मध्य प्रदेश में वीआईपी काफिले पर सियासी घमासान, दिल्ली तक पहुंचा मामला

    भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत और सादगी की अपील के बावजूद मध्य प्रदेश में बड़े वाहन काफिलों के साथ निकाली गई रैलियों ने अब सियासी हलचल बढ़ा दी है। पार्टी संगठन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए सख्त रुख अपनाया है और ऐसे नेताओं को 17 मई को भोपाल स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में तलब किया गया है।

    सूत्रों के मुताबिक, इन नेताओं से सीधे सवाल-जवाब किए जाएंगे कि पीएम की अपील के बावजूद उन्होंने बड़े काफिले और शक्ति प्रदर्शन वाली रैलियां क्यों निकालीं। इस पूरे मामले की रिपोर्ट दिल्ली स्थित भाजपा हाईकमान ने भी तलब की है, जिससे संगठन स्तर पर दबाव और बढ़ गया है।

    8-9 जगहों पर रैलियां, आलाकमान नाराज
    जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री की 10 मई की अपील के बाद भी प्रदेश में कम से कम 8 से 9 स्थानों पर बड़े वाहन काफिलों के साथ स्वागत रैलियां निकाली गईं। इसे पार्टी नेतृत्व ने गंभीरता से लिया है और इसे सीधे तौर पर अनुशासन और निर्देशों की अनदेखी माना जा रहा है। अब पार्टी का स्पष्ट संदेश है कि संगठनात्मक अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

    कई नेताओं पर पहले ही गिरी गाज
    इस मामले में कुछ नेताओं पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है-
    सज्जन सिंह यादव (भिंड किसान मोर्चा अध्यक्ष) – 100 वाहनों के काफिले के साथ रैली, नियुक्ति रद्द
    सौभाग्य सिंह ठाकुर (पाठ्यपुस्तक निगम अध्यक्ष) – 700 वाहनों के काफिले पर कारण बताओ नोटिस, अधिकारों में कटौती इसके अलावा कई अन्य नेताओं पर भी सवाल उठे हैं, जिनमें बड़े काफिलों के साथ दौरे और कार्यक्रम शामिल हैं।

    किन नेताओं को भोपाल तलब किया गया
    अब जिन नेताओं से जवाब मांगा जा रहा है, उनमें शामिल हैं-
    टिकेंद्र प्रताप सिंह – 200 वाहनों के काफिले के साथ जिला कार्यालय पहुंचे
    पवन पाटीदार – 24 वाहनों के साथ चंबल दौरे पर गए
    वीरेंद्र गोयल – 30 से अधिक वाहनों का काफिला, ई-रिक्शा में भी मौजूद
    रेखा यादव – सैकड़ों वाहनों की रैली, छतरपुर में ट्रैफिक जाम
    सत्येंद्र भूषण सिंह – ई-रिक्शा से पहुंचे, लेकिन बड़ा काफिला साथ रहा
    राकेश सिंह जादौन – ई-रिक्शा के साथ वाहन काफिला चर्चा में

    सीएम भी सख्त, काफिला घटाया
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस संदेश को गंभीरता से लेते हुए अपने काफिले से 5 वाहन कम कर दिए हैं। वहीं, डिप्टी सीएम और अन्य मंत्रियों ने भी अपने-अपने काफिलों में कटौती की है। पार्टी अब यह संदेश दे रही है कि प्रधानमंत्री की अपील सिर्फ बयान नहीं, बल्कि संगठनात्मक निर्देश है जिसे हर स्तर पर लागू किया जाना चाहिए।

     17 मई को होगी ‘क्लास’, हो सकती है कार्रवाई
    17 मई को भोपाल में होने वाली बैठक में नेताओं से विस्तृत जवाब मांगा जाएगा। अगर स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं मिला तो संगठनात्मक कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व अनुशासन और छवि को लेकर किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं दिख रहा है।

    वाहन काफिला विवाद ने मध्य प्रदेश बीजेपी संगठन में हलचल बढ़ा दी है। पीएम मोदी की सादगी और ईंधन बचत की अपील के बाद अब पार्टी खुद अपने नेताओं पर सख्त होती दिख रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े फैसले संभव हैं।

  • MP में महंगा पेट्रोल-डीजल: यूपी से ₹14 तक ज्यादा रेट, एक्सपर्ट ने बताए कारण

    MP में महंगा पेट्रोल-डीजल: यूपी से ₹14 तक ज्यादा रेट, एक्सपर्ट ने बताए कारण

    भोपाल। मध्य प्रदेश में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की बढ़ी कीमतों ने आम जनता की जेब पर सीधा असर डाला है। ऑयल कंपनियों द्वारा हाल ही में किए गए रेट संशोधन के बाद राज्य में ईंधन की कीमतों में 3 से 3.50 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 15 मई से लागू नई दरों के बाद कई शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम ऐतिहासिक स्तर के करीब पहुंच गए हैं।

    राज्य के पांढुर्णा और मंडला जैसे जिलों में पेट्रोल की कीमत 111.29 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जबकि मैहर, अलीराजपुर और अनूपपुर जैसे इलाकों में डीजल 96.50 रुपए प्रति लीटर तक बिक रहा है। इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहरों में भी पेट्रोल की कीमतें 109 रुपए प्रति लीटर के आसपास पहुंच चुकी हैं।

    पड़ोसी राज्यों से बड़ा अंतर, एमपी सबसे महंगा
    तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में ईंधन की कीमतें पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी अधिक हैं। उत्तर प्रदेश में पेट्रोल करीब ₹14 और डीजल ₹5 प्रति लीटर तक सस्ता मिल रहा है। गुजरात में पेट्रोल लगभग ₹13 और डीजल ₹3 तक कम है। राजस्थान में दोनों ईंधन करीब ₹2 तक सस्ते हैं, जबकि छत्तीसगढ़ में पेट्रोल की कीमतें लगभग ₹8 तक कम दर्ज की गई हैं। महाराष्ट्र में भी पेट्रोल ₹4 से ₹5 प्रति लीटर तक सस्ता मिल रहा है। इस बड़े अंतर ने राज्य में टैक्स संरचना को लेकर बहस को फिर से तेज कर दिया है।

    टैक्स स्ट्रक्चर पर उठे सवाल, एक्सपर्ट्स ने बताया वजह
    विशेषज्ञों के अनुसार मध्य प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतों की एक बड़ी वजह वैट (VAT) और राज्य करों का अधिक होना है। इसी वजह से ऑयल कंपनियों द्वारा समान बेस प्राइस होने के बावजूद यहां अंतिम कीमत अन्य राज्यों से अधिक हो जाती है।

    विश्लेषकों का मानना है कि अगर टैक्स ढांचे में राहत दी जाए, तो उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल सकती है। फिलहाल कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से परिवहन, कृषि और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की लागत भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज
    पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जनता पर “महंगाई का बोझ” लगातार बढ़ाया जा रहा है। उनके अनुसार पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ CNG और गैस सिलेंडर के दाम भी बढ़े हैं, जिससे आम लोगों का बजट बिगड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि सरकार को एक्साइज ड्यूटी और वैट में कमी कर जनता को राहत देनी चाहिए।

    आम जनता पर असर
    पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर ट्रांसपोर्ट, खेती, छोटे व्यापार और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहा है। ग्वालियर, इंदौर और उज्जैन जैसे शहरों में पेट्रोल पंपों पर वाहनों की कतारें और बढ़ी हुई लागत लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं।

    मध्य प्रदेश में ईंधन की कीमतें अब पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी अधिक हो गई हैं, जिससे न सिर्फ आम उपभोक्ता बल्कि पूरा आर्थिक ढांचा प्रभावित हो रहा है। टैक्स नीति और कीमतों के अंतर को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक और प्रशासनिक बहस और तेज होने की संभावना है।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में मध्य प्रदेश बना देश का अग्रणी राज्य

    प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में मध्य प्रदेश बना देश का अग्रणी राज्य


    भोपाल।
    हर जरूरतमंद परिवार को पक्का घर उपलब्ध कराने के संकल्प को साकार करते हुए मध्य प्रदेश ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के क्रियान्वयन में देशभर में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में 10 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे आवास निर्माण एवं हितग्राहियों को आवास उपलब्ध कराने में देश के अग्रणी राज्यों में मध्य प्रदेश ने अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) अंतर्गत मध्य प्रदेश ने आवासों की ग्राउंडिंग में देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश में 98.04 प्रतिशत आवासों की ग्राउंडिंग पूर्ण हो चुकी है। यह प्रभावी क्रियान्वयन, सतत मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध कार्यप्रणाली का परिणाम है। वहीं 9 लाख से अधिक आवार्सी का निर्माण पूर्ण कर पात्र हितग्राहियों को सौंपा जा चुका है। योजना के माध्यम से हजारों परिवारों का अपने पक्के घर का सपना साकार हुआ है, जिससे उनके जीवन स्तर, सामाजिक सुरक्षा एवं सम्मान में सकारात्मक बदलाव आया है।

    उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, निम्न आय वर्ग एवं मध्यम आय वर्ग के शहरी परिवारों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है। योजना अंतर्गत हितग्राहियों को आवास निर्माण हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे मूलभूत सुविधाओं से युक्त पक्के घर में जीवन यापन कर सकें।

    गौरतलब है कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, सतत मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध निर्माण कार्यों के चलते प्रदेश लगातार राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। नगरीय विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया कि नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रत्येक पात्र शहरी परिवार को आवास योजना का लाभ समय पर प्राप्त हो सके। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के माध्यम से प्रदेश में न केवल आवास निर्माण को गति मिली है, बल्कि शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास, रोजगार सृजन एवं सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिला है। राज्य शासन द्वारा भविष्य में भी योजना के प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन हेतु निरंतर प्रयास किए जाते रहेंगे।

  • मुरैना में मीठी रिश्वत… चॉकलेट लेकर अफसर के पास पहुंचा 6वीं का छात्र, बोला- बिना लेन-देन काम नहीं होता… सिस्टम शर्मसार

    मुरैना में मीठी रिश्वत… चॉकलेट लेकर अफसर के पास पहुंचा 6वीं का छात्र, बोला- बिना लेन-देन काम नहीं होता… सिस्टम शर्मसार


    मुरैना।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के मुरैना जिले (Morena district) की जनसुनवाई में उस वक्त सन्नाटा पसर गया, जब कक्षा 6 के एक छात्र ने भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों पर अपनी मासूमियत से प्रहार किया. संजय कॉलोनी के रहने वाले मानवेंद्र सिंह (Manvendra Singh) ने जिला पंचायत सीईओ (District Panchayat CEO) की मेज पर चार चॉकलेट रखीं और गुहार लगाई कि उसके घर के बाहर बह रहे गंदे सीवर को ठीक करा दिया जाए।

    दरअसल, छात्र मानवेंद्र सिंह पिछले कई दिनों से अपने घर के बाहर सीवर लीकेज की समस्या से जूझ रहा है. छात्र का कहना है कि सीवर के गंदे पानी की वजह से न तो वह बाहर खेल पा रहा है और न ही साइकिल चला पा रहा है. स्कूल आने-जाने में भी उसे काफी गंदगी का सामना करना पड़ता है. परिवार की ओर से 4 बार नगर निगम और संबंधित विभाग को शिकायत की गई, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी.

    गुल्लक तोड़ी और खरीदी ‘चॉकलेट रिश्वत’
    जब शिकायतों का कोई असर नहीं हुआ, तो मासूम मानवेंद्र के मन में यह बात बैठ गई कि ‘बिना लेन-देन के सरकारी काम नहीं होते.’ मानवेंद्र ने अपनी गुल्लक से 20 रुपये निकाले. इन पैसों से उसने 4 चॉकलेट खरीदीं और सीधा जनसुनवाई में जिला पंचायत सीईओ कमलेश भार्गव के पास पहुंच गया।

    प्रतिक्रिया और शर्मिंदगी
    एक छोटे बच्चे के मुंह से ‘बिना लेन-देन के काम नहीं होता’ जैसी बात सुनकर वहां मौजूद अधिकारी और कर्मचारी दंग रह गए. सीईओ कमलेश भार्गव ने बच्चे की बात को गंभीरता से सुना और तत्काल संबंधित अधिकारियों को मौके पर जाकर सीवर दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

    भ्रष्टाचार की सामाजिक छवि पर सवाल
    बहरहाल, मध्य प्रदेश की यह घटना सिर्फ एक बच्चे की शिकायत नहीं है, बल्कि उस कड़वी सच्चाई का आइना है जो हमारी भावी पीढ़ी के मन में घर कर रही है. एक 6वीं कक्षा के छात्र का यह सोचना कि उसे अपना हक पाने के लिए भी ‘लेन-देन’ करना पड़ेगा, व्यवस्था के लिए एक बड़ा अलार्म है।

    मानवेंद्र ने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ CEO से कहा कि यदि चॉकलेट देने के बाद भी सीवर ठीक नहीं हुआ, तो वह अपनी चॉकलेट वापस ले जाएगा।

  • एमपी में गर्मी ने किया हाल बेहाल, भोपाल में पिघला सड़क का डामर, 12 शहरों का पारा 43 डिग्री के पार

    एमपी में गर्मी ने किया हाल बेहाल, भोपाल में पिघला सड़क का डामर, 12 शहरों का पारा 43 डिग्री के पार



    भोपाल। मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया है। शुक्रवार को प्रदेश के 12 शहरों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। सबसे ज्यादा तापमान खंडवा में 45.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। राजधानी भोपाल में तेज गर्मी के चलते सड़क का डामर तक पिघल गया।

    मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के 37 जिलों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। वहीं इंदौर, उज्जैन और मंडला में वॉर्म नाइट की स्थिति रहेगी, यानी रात के समय भी तापमान सामान्य से अधिक बना रहेगा। IMD के मुताबिक इंदौर, उज्जैन, रतलाम, धार और देवास में तीव्र लू को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    भोपाल, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, छतरपुर, सागर, दमोह और मंडला समेत कई जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है। हालांकि जबलपुर, रीवा, सतना, सीधी, कटनी, उमरिया, शहडोल, सिवनी, बालाघाट और बैतूल जैसे जिलों में तेज गर्मी पड़ेगी, लेकिन वहां फिलहाल लू का अलर्ट नहीं है।

     सागर, दमोह, जबलपुर, छिंदवाड़ा, शिवपुरी, रायसेन और पन्ना समेत कई जिलों में भी मौसम बदला रहा।

    तापमान की बात करें तो शाजापुर में 44.6 डिग्री, खरगोन में 44.2 डिग्री और रतलाम-नौगांव में 44 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। बड़े शहरों में भोपाल का तापमान 42.8 डिग्री, इंदौर और जबलपुर में 41.8 डिग्री, उज्जैन में 42.5 डिग्री और ग्वालियर में 40.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ।

    मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर 12 से 3 बजे के बीच विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। कहा है कि अगले चार दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी का असर बना रहेगा। विभाग ने लोगों को पर्याप्त पानी पीने, धूप में ज्यादा देर तक नहीं रहने और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने की सलाह दी है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।