Category: Madhya Pradesh

  • भोजशाला फैसले पर सियासी बयानबाज़ी तेज, ‘न्यायपालिका के जरिए सनातनियों की जीत’ पर गरमाई बहस

    भोजशाला फैसले पर सियासी बयानबाज़ी तेज, ‘न्यायपालिका के जरिए सनातनियों की जीत’ पर गरमाई बहस

    मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर दिए गए फैसले के बाद पूरे क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। अदालत के इस निर्णय के बाद विभिन्न पक्षों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।

    फैसले के बाद कुछ जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने इसे सत्य की विजय बताया और कहा कि लंबे समय से चल रहे विवाद पर अब स्थिति स्पष्ट हुई है। उनके अनुसार, यह निर्णय आस्था और परंपरा से जुड़े मुद्दे पर न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि वर्षों से जिस स्थान को लेकर विवाद था, अब उस पर न्यायिक दृष्टिकोण से स्पष्टता आ गई है, जिससे स्थानीय लोगों में संतोष का माहौल देखा जा रहा है।

    इसी क्रम में कुछ जनप्रतिनिधियों ने बयान दिया कि यह निर्णय समाज में आस्था से जुड़े विषयों पर लंबे समय से चल रही अनिश्चितता को समाप्त करता है। उनके अनुसार, धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थलों को लेकर जो विवाद थे, वे अब न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से एक दिशा में आगे बढ़े हैं। उन्होंने इसे सामाजिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया।

    वहीं याचिकाकर्ताओं और पक्षकारों ने भी फैसले को ऐतिहासिक बताया और कहा कि इससे उनके लंबे संघर्ष को न्याय मिला है। उन्होंने यह दावा किया कि भोजशाला का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व बहुत पुराना है और इससे जुड़े कई साक्ष्य पहले से मौजूद हैं। उनके अनुसार, अब इस स्थल के संरक्षण और पुनर्स्थापना को लेकर आगे की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जाएगा।

    कुछ याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि ऐतिहासिक तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर इस स्थान की वास्तविक पहचान को लेकर उनकी ओर से अदालत में दलीलें पेश की गई थीं। अब फैसले के बाद वे आगे की योजना पर काम करेंगे, जिसमें धार्मिक प्रतीकों और परंपराओं से जुड़े पहलुओं को पुनर्स्थापित करने की बात कही गई है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में चर्चा और बहस का माहौल बना हुआ है। अलग-अलग पक्ष अपने-अपने नजरिए से इस निर्णय की व्याख्या कर रहे हैं। जहां एक ओर इसे न्यायिक प्रक्रिया की जीत बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।

  • VIP कल्चर से दूरी: 15-20 गाड़ियों की जगह बस से पहुंचे मंत्री और अधिकारी

    VIP कल्चर से दूरी: 15-20 गाड़ियों की जगह बस से पहुंचे मंत्री और अधिकारी


    नई दिल्ली ।Gautam Tetwal ने बड़वानी दौरे के दौरान वीआईपी कारकेड की परंपरा से हटकर अनोखी पहल की। शुक्रवार को वे अफसरों और जनप्रतिनिधियों के साथ एक ही बस में सफर करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। आमतौर पर 15-20 गाड़ियों के लंबे काफिले के साथ चलने वाले मंत्री का यह अंदाज चर्चा का विषय बन गया।

    बस में उनके साथ Narendra Modi की ऊर्जा बचत अपील का संदेश भी नजर आया। यात्रा में भाजपा जिला अध्यक्ष अजय यादव, पानसेमल विधायक श्याम बरड़े, कलेक्टर जयति सिंह और एसडीएम भूपेंद्र सिंह पटेल समेत कई अधिकारी शामिल रहे।

    ऊर्जा बचत और सामूहिक परिवहन पर जोर
    मंत्री डॉ. टेटवाल ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए ईंधन बचाना समय की जरूरत है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री Mohan Yadav लगातार सामूहिक परिवहन और ईंधन बचत को बढ़ावा देने की अपील कर रहे हैं। इसी सोच के तहत यह पहल की गई।

    पहले लंबा रहता था कारकेड
    आमतौर पर मंत्री और वीआईपी दौरों में कई सरकारी और निजी वाहन शामिल होते हैं, जिससे ईंधन की खपत बढ़ती है। लेकिन इस बार मंत्री ने अपने प्रोटोकॉल वाहनों की संख्या सीमित रखी और सभी अधिकारियों को एक बस में साथ लेकर पहुंचे।

    लोगों में चर्चा का विषय बनी पहल
    मंत्री की यह पहल जिले में चर्चा का विषय बनी रही। स्थानीय लोगों ने इसे सकारात्मक संदेश बताते हुए कहा कि यदि जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस तरह सामूहिक परिवहन अपनाएं, तो इससे ईंधन बचत के साथ ट्रैफिक और प्रदूषण भी कम हो सकता है।

  • खंडवा में दर्दनाक हादसा: पुल से 200 फीट गहरी खाई में गिरी बोलेरो, ड्राइवर की मौत

    खंडवा में दर्दनाक हादसा: पुल से 200 फीट गहरी खाई में गिरी बोलेरो, ड्राइवर की मौत


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में शुक्रवार सुबह एक भयावह सड़क हादसा हो गया। खंडवा-भोपाल हाईवे पर स्थित नर्मदानगर ओवरब्रिज से एक बोलेरो वाहन अनियंत्रित होकर लगभग 200 फीट गहरी खाई में गिर गया। हादसा इतना भीषण था कि वाहन पूरी तरह चकनाचूर हो गया और ड्राइवर की मौके पर ही मौत हो गई।

    यह दुर्घटना इंदिरा सागर बांध के बाहरी हिस्से में बने ओवरब्रिज पर हुई। बताया जा रहा है कि भोपाल की ओर से आ रही तेज रफ्तार बोलेरो अचानक अनियंत्रित हो गई और सुरक्षा जाल पार करते हुए नीचे जा गिरी। वाहन ने गिरते समय पावर स्टेशन की रिटेनिंग वॉल को भी तोड़ दिया। अधिकारियों के अनुसार यदि यह दीवार नहीं होती, तो बोलेरो सीधे टरबाइन से निकलने वाले तेज बहाव वाले पानी में समा सकती थी।

    सूचना मिलते ही पुलिस और राहत टीम मौके पर पहुंची। करीब 200 फीट नीचे उतरकर पुलिसकर्मियों ने क्षतिग्रस्त बोलेरो के गेट तोड़े और अंदर फंसे ड्राइवर को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। मृतक की पहचान अभिषेक नरगावे (26) निवासी ग्राम अंजनिया खुर्द के रूप में हुई है।

    नर्मदानगर थाना प्रभारी के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर और छाती में गंभीर चोटों को मौत का कारण बताया गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर हादसे की जांच शुरू कर दी है।

    परिजनों ने बताया कि अभिषेक खुद अपनी बोलेरो टैक्सी के रूप में चलाता था। गुरुवार रात वह कुछ यात्रियों को छोड़ने राजगढ़ गया था और लौटते समय यह हादसा हो गया। बताया जा रहा है कि दुर्घटना सुबह करीब 4 बजे हुई। अभिषेक अविवाहित था और परिवार का सहारा माना जाता था।

  • भोजशाला की पहचान अब स्पष्ट': हाईकोर्ट की बड़ी मुहर, हिंदुओं की आस्था की हुई जीत

    भोजशाला की पहचान अब स्पष्ट': हाईकोर्ट की बड़ी मुहर, हिंदुओं की आस्था की हुई जीत


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के चर्चित धार भोजशाला विवाद मामले में शुक्रवार को बड़ा फैसला सामने आया। Madhya Pradesh High Court की इंदौर बेंच ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर माना और हिंदुओं को वहां पूजा करने का अधिकार दिए जाने की बात कही। अदालत ने कहा कि यह स्थान परमार वंश के राजा भोज के समय संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र और देवी सरस्वती का मंदिर था।

    कोर्ट ने कहा कि पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) की रिपोर्ट और वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है। अदालत ने यह भी माना कि पुरातत्व एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है और उसके निष्कर्षों पर भरोसा किया जा सकता है।

    कोर्ट ने क्या-क्या कहा?
    हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कई अहम बातें कहीं भोजशाला परिसर एक संरक्षित स्मारक है, यह मूल रूप से हिंदू मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र था, हिंदुओं को पूजा का अधिकार है, ASI परिसर का संरक्षण और प्रबंधन जारी रखेगा, सरकार संस्कृत शिक्षा की व्यवस्था पर भी विचार करे ,श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाएं और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, अदालत ने कहा कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाली संरचनाओं का संरक्षण करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

    नमाज की अनुमति वाला आदेश रद्द
    हाईकोर्ट ने वर्ष 2003 में ASI द्वारा दिए गए उस आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसमें मुस्लिम पक्ष को भोजशाला परिसर में नमाज की अनुमति दी गई थी। हालांकि अदालत ने मुस्लिम पक्ष को यह छूट दी है कि वे नमाज के लिए धार जिले में अलग जमीन उपलब्ध कराने को लेकर सरकार से संपर्क कर सकते हैं।

    ASI सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन पर भरोसा
    कोर्ट ने साफ कहा कि ASI सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन में मिले तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जज ने सुनवाई के दौरान सभी वकीलों का आभार जताते हुए कहा कि अदालत ने सभी तथ्यों, ASI एक्ट और संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों को ध्यान में रखकर फैसला दिया है।

    लंबे समय से चल रहा था विवाद
    धार भोजशाला मामला लंबे समय से विवाद और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा रहा है। हिंदू पक्ष लगातार इसे देवी सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र बताता रहा, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद मानता था। अब हाईकोर्ट के इस फैसले को इस मामले में एक बड़ा और अहम निर्णय माना जा रहा है। प्रशासन ने फैसले के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

  • गर्मी से फसलों पर संकट: किसानों ने पपीता बचाने के लिए लगाए क्रॉप कवर

    गर्मी से फसलों पर संकट: किसानों ने पपीता बचाने के लिए लगाए क्रॉप कवर


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में इन दिनों गर्मी अपने चरम पर है। जिले का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जबकि दोपहर के समय लगभग 25 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल रही गर्म हवाएं लोगों को झुलसा रही हैं। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक हीट वेव का अलर्ट जारी किया है, जिससे लोगों के साथ-साथ किसानों की चिंता भी बढ़ गई है।

    भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर पपीता की खेती पर देखने को मिल रहा है। खेतों का तापमान तेजी से बढ़ने के कारण छोटे पौधों के झुलसने का खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में किसान अपनी फसल को बचाने के लिए विशेष इंतजाम कर रहे हैं। कई किसान खेतों में क्रॉप कवर लगा रहे हैं, जबकि कुछ किसान पुराने कपड़े, जालियां और साड़ियों का इस्तेमाल कर पौधों को तेज धूप और लू से बचा रहे हैं।

    विशेषज्ञ किसान विजय यादव के अनुसार, नर्सरी और खुले खेत के तापमान में करीब 15 डिग्री सेल्सियस का अंतर देखा जा रहा है। यही कारण है कि शुरुआती अवस्था में पौधों को अतिरिक्त सुरक्षा देना जरूरी हो गया है। उन्होंने बताया कि जब तक तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास स्थिर नहीं हो जाता, तब तक क्रॉप कवर हटाना जोखिम भरा हो सकता है।

    उद्यानिकी विभाग के अनुसार जिले में करीब 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में पपीता की खेती की गई है। उद्यानिकी उपसंचालक केके गिरवाल ने किसानों को सलाह दी है कि तेज धूप से बचाने के लिए पौधों के चारों ओर घेरा बनाएं और नियमित सिंचाई करते रहें, ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे।

    गर्मी का असर आम जनजीवन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सुबह 11 बजे के बाद से ही सड़कों पर सन्नाटा छाने लगता है और लोग शाम तक घरों में रहने को मजबूर हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्थान और गुजरात की ओर से आ रही शुष्क और गर्म हवाओं के कारण हीट वेव की स्थिति बनी हुई है। अनुमान है कि 20 मई तक इसी तरह भीषण गर्मी और लू का असर जारी रह सकता है।

  • भोजशाला विवाद पर MP हाईकोर्ट की टिप्पणी चर्चा में, नमाज की अनुमति संबंधी मांग खारिज

    भोजशाला विवाद पर MP हाईकोर्ट की टिप्पणी चर्चा में, नमाज की अनुमति संबंधी मांग खारिज


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के भोजशाला को लेकर दशकों से चला आ रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने हालिया फैसले में भोजशाला को देवी वाग्देवी यानी मां सरस्वती का मंदिर माना है। अदालत ने अपने निर्णय में ऐतिहासिक तथ्यों, पुरातात्विक साक्ष्यों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वैज्ञानिक रिपोर्ट को अहम आधार बनाया। फैसले के बाद जहां हिंदू संगठनों में उत्साह का माहौल है, वहीं मुस्लिम पक्ष ने इस पर आपत्ति जताई है।

    करीब 30 वर्षों से भोजशाला विवाद धार्मिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ था। हिंदू पक्ष का दावा रहा कि यह स्थल परमार राजा भोज द्वारा स्थापित मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर और संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था। दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा। प्रशासन ने वर्षों तक संतुलन बनाए रखने के लिए मंगलवार को हिंदू पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज की व्यवस्था लागू की थी।

    विवाद ने नया मोड़ तब लिया जब वर्ष 2024 में हाईकोर्ट के आदेश पर ASI ने भोजशाला परिसर का 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वे किया। सर्वे के दौरान मिली तस्वीरों और अवशेषों ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी। रिपोर्ट में प्राचीन मंदिर स्थापत्य शैली, देवी-देवताओं की आकृतियों वाले स्तंभ, संस्कृत शिलालेख, कमल और हाथी जैसे हिंदू प्रतीक चिन्हों का उल्लेख किया गया। कई स्तंभों पर टूटी मूर्तियों और नक्काशी के प्रमाण भी मिले, जिन्हें हिंदू पक्ष मंदिर के साक्ष्य के रूप में पेश कर रहा है।

    हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ऐतिहासिक साहित्य और पुरातात्विक रिपोर्ट यह दर्शाती है कि विवादित स्थल का संबंध भोजशाला और देवी सरस्वती की आराधना से रहा है। अदालत ने यह भी माना कि यहां हिंदू पूजा की परंपरा पूरी तरह कभी समाप्त नहीं हुई। कोर्ट ने ASI को परिसर का प्रशासन जारी रखने और केंद्र सरकार को प्रबंधन संबंधी निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

    फैसले के बाद धार में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। संवेदनशील इलाकों में पुलिस और RAF की तैनाती की गई तथा भोजशाला परिसर के बाहर बैरिकेडिंग की गई। हिंदू संगठनों ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे “ऐतिहासिक न्याय” बताया, जबकि मुस्लिम पक्ष ने कहा कि वे कानूनी विकल्पों पर विचार करेंगे।

    यह फैसला केवल एक धार्मिक स्थल का मामला नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और पुरातात्विक साक्ष्यों के बीच लंबे समय से चल रही बहस का महत्वपूर्ण अध्याय बन गया है।

  • भोजशाला मामले में सामने आईं ऐतिहासिक तस्वीरें, हिंदू पक्ष ने बताए मंदिर से जुड़े प्रमाण

    भोजशाला मामले में सामने आईं ऐतिहासिक तस्वीरें, हिंदू पक्ष ने बताए मंदिर से जुड़े प्रमाण


    नई दिल्ली । मध्यप्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर दशकों से चला आ रहा विवाद एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है। इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने हालिया फैसले में भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर हिंदू पक्ष के दावों को महत्वपूर्ण आधार दिया है। हिंदू संगठनों का कहना है कि भोजशाला राजा भोज द्वारा स्थापित मां वाग्देवी यानी मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता रहा है।

    यह विवाद 1990 के दशक से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। पूजा और नमाज के अधिकार को लेकर कई बार तनाव की स्थिति भी बनी। प्रशासन ने हालात को संभालने के लिए अलग-अलग दिनों में पूजा और नमाज की व्यवस्था लागू की थी। मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति दी जाती थी, जबकि शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष नमाज अदा करता था।

    मामले ने नया मोड़ तब लिया जब वर्ष 2024 में हाईकोर्ट के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे कराया। लंबे समय तक चली इस जांच में परिसर से कई ऐसे अवशेष मिले, जिन्हें हिंदू धार्मिक और स्थापत्य परंपरा से जुड़ा बताया गया। रिपोर्ट में देवी-देवताओं की आकृतियां, प्राचीन मूर्तिकला, स्तंभों पर उकेरी गई कलाकृतियां और संस्कृत शिलालेखों का उल्लेख सामने आया।

    हिंदू पक्ष का दावा है कि ये सभी प्रमाण स्पष्ट करते हैं कि भोजशाला मूल रूप से मां वाग्देवी का मंदिर था, जिसे बाद में मस्जिद के रूप में उपयोग किया गया। ASI की रिपोर्ट में परिसर के कई स्तंभों और संरचनाओं को मंदिर वास्तुकला से जुड़ा बताया गया है। यही वजह है कि हाईकोर्ट का फैसला हिंदू पक्ष के लिए बड़ी कानूनी और धार्मिक जीत माना जा रहा है।

    वहीं, मुस्लिम पक्ष ने ASI रिपोर्ट और अदालत में पेश किए गए कई तथ्यों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भोजशाला लंबे समय से मस्जिद के रूप में उपयोग होती रही है और धार्मिक स्वरूप को लेकर केवल एक पक्ष के दावों के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी नजर बनाए हुए है ताकि किसी प्रकार का तनाव न फैले। संवेदनशील इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

    भोजशाला विवाद केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्व का विषय बन चुका है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब देशभर में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मामला और भी बड़े कानूनी और सामाजिक विमर्श का केंद्र बन सकता है।

  • मध्य प्रदेश में बड़ा हादसा: पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में 5 की मौत, यूपी-बिहार के मजदूर थे शिकार

    मध्य प्रदेश में बड़ा हादसा: पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में 5 की मौत, यूपी-बिहार के मजदूर थे शिकार


    नई दिल्ली । मध्यप्रदेश के देवास जिले के टोंककलां इलाके में गुरुवार सुबह हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। सुबह करीब 11:30 बजे हुए इस धमाके में अब तक 5 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। हादसा इतना भयावह था कि शवों के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक जा गिरे और फैक्ट्री की दीवारें पूरी तरह धराशायी हो गईं। आसपास के मकानों तक धमाके की कंपन महसूस की गई। मृतक मजदूर उत्तर प्रदेश और बिहार के बताए जा रहे हैं।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ब्लास्ट के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई। झुलसे हुए मजदूर बदहवास हालत में बाहर भागते नजर आए। कई लोगों के कपड़े शरीर की त्वचा से चिपक गए थे। फैक्ट्री के बाहर जले हुए अवशेष, बाल और विस्फोटक सामग्री बिखरी पड़ी मिली। हादसे के बाद भी लंबे समय तक पटाखे फूटने की आवाजें आती रहीं।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री में दो केमिकल मिलाकर बारूद तैयार किया जा रहा था। आशंका है कि केमिकल का अनुपात बिगड़ने या मैग्नीशियम पाउडर के पानी के संपर्क में आने से विस्फोट हुआ। श्रम विभाग की शुरुआती रिपोर्ट में यह भी संभावना जताई गई कि बारूद की हैंडलिंग के दौरान स्टैटिक चार्ज बनने से ‘सेल्फ इग्निशन’ हुआ होगा। एफएसएल टीम ने घटनास्थल से केमिकल के सैंपल जुटाए हैं।

    सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि जिस फैक्ट्री में विस्फोट हुआ, उसका निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ था। बावजूद इसके वहां बड़े स्तर पर पटाखा निर्माण किया जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर निर्माणाधीन यूनिट में ही विस्फोटक सामग्री का उत्पादन शुरू कर दिया गया था। फैक्ट्री के पास विस्फोटक लाइसेंस तो था, लेकिन फैक्ट्री एक्ट के तहत जरूरी पंजीकरण और सुरक्षा अनुमतियां नहीं ली गई थीं।

    पुलिस ने फैक्ट्री संचालक अनिल मालवीय को गिरफ्तार कर लिया है। उसके समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासन ने फैक्ट्री को सील कर दिया है। वहीं, उज्जैन संभाग कमिश्नर ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच में फैक्ट्री के लाइसेंस, सुरक्षा इंतजाम और नियमों के पालन की पड़ताल की जाएगी।

    देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने बताया कि घायलों का इलाज देवास, इंदौर के एमवाय, चोइथराम और अमलतास अस्पतालों में चल रहा है। कई मजदूर 80 से 90 प्रतिशत तक झुलस गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घायलों से मुलाकात कर मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है।

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री में पहले भी मार्च 2026 में विस्फोट हो चुका था, लेकिन प्रशासन ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों के मुताबिक, यहां 400 से 500 मजदूर काम करते थे और रोज करीब 18 लाख रुपए का माल तैयार होता था।

  • देवास ब्लास्ट केस में चौंकाने वाली बातें सामने आईं, सुरक्षा नियमों की अनदेखी बनी वजह

    देवास ब्लास्ट केस में चौंकाने वाली बातें सामने आईं, सुरक्षा नियमों की अनदेखी बनी वजह


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के देवास जिले में टोंककलां स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट को लेकर श्रम विभाग की शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में हादसे की दो बड़ी संभावित वजहों का खुलासा हुआ है, साथ ही फैक्ट्री प्रबंधन की गंभीर लापरवाहियां भी उजागर हुई हैं।

    श्रम मंत्री प्रह्लाद पटेल ने बताया कि तकनीकी जांच के अनुसार हादसे के पीछे मैग्नीशियम पाउडर की केमिकल रिएक्शन मुख्य कारण हो सकती है। आशंका है कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान मैग्नीशियम पानी के संपर्क में आ गया, जिससे जोरदार विस्फोट हुआ। दूसरी संभावना यह जताई गई है कि बारूद की हैंडलिंग के दौरान स्टैटिक चार्ज बना और उससे ‘सेल्फ इग्निशन’ यानी स्वतः आग लग गई।

    गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे हुए इस विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया था। धमाके के बाद फैक्ट्री से लगातार पटाखे फूटने की आवाजें आती रहीं और कई मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे में अब तक 5 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि कई घायल अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

    जांच रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि फैक्ट्री का निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ था, लेकिन वहां पटाखा निर्माण शुरू कर दिया गया था। यानी जिस समय सुरक्षा व्यवस्था और ढांचे की टेस्टिंग होनी चाहिए थी, उस समय बारूद और विस्फोटक सामग्री के बीच मजदूरों से काम कराया जा रहा था।

    रिपोर्ट के अनुसार, फैक्ट्री प्रबंधन के पास जिला कलेक्टर द्वारा जारी विस्फोटक लाइसेंस तो था, लेकिन फैक्ट्री एक्ट के तहत जरूरी पंजीकरण और अन्य वैधानिक मंजूरियां नहीं ली गई थीं। बिना सुरक्षा मानकों और पर्याप्त इंतजामों के इस खतरनाक यूनिट का संचालन किया जा रहा था।

    श्रम विभाग ने फैक्ट्री में कई गंभीर खामियां पाई हैं, जिनमें अग्निशमन व्यवस्था का अभाव, इमरजेंसी प्लान तैयार न करना, श्रमिकों की हाजिरी और रिकॉर्ड न रखना, तथा मजदूरों को केमिकल सुरक्षा संबंधी जानकारी न देना शामिल है।

    इन सभी मामलों में फैक्ट्री प्रबंधन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। कई धाराओं के तहत 2 साल से लेकर 7 साल तक की सजा और लाखों रुपए के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी हादसे को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि घायलों के इलाज में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी और हादसे के जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।

  • देवास फैक्ट्री विस्फोट: साथियों ने कहा- बिलिंग रूम में आखिरी बार दिखे थे दोनों मजदूर

    देवास फैक्ट्री विस्फोट: साथियों ने कहा- बिलिंग रूम में आखिरी बार दिखे थे दोनों मजदूर


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के देवास जिले में टोंककलां स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। हादसे में अब तक 5 मजदूरों की मौत हो चुकी है, वहीं अब दो और मजदूरों के लापता होने की खबर सामने आने से परिजनों और साथी मजदूरों की चिंता बढ़ गई है।

    घायल मजदूरों का कहना है कि ब्लास्ट के बाद से उनके साथी राजू और बाबुल का कोई पता नहीं चल पाया है। दोनों बिहार के अरहरिया जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं और कुछ महीने पहले ही रोज़गार की तलाश में देवास आए थे।

    देवास जिला अस्पताल में भर्ती घायल मजदूर शशि कुमार ने बताया कि हादसे से पहले उनकी दोनों साथियों से खाना खाते समय बातचीत हुई थी। इसके बाद वे आखिरी बार फैक्ट्री के बिलिंग रूम के पास दिखाई दिए। धमाके के बाद से दोनों न तो अस्पतालों में मिले और न ही किसी से संपर्क हो पाया।

    साथी मजदूरों को आशंका है कि कहीं दोनों भी हादसे का शिकार तो नहीं हो गए। मजदूर लगातार प्रशासन से घटना स्थल पर जाकर तलाश करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अस्पतालों, आसपास के इलाकों और रिश्तेदारों से संपर्क कर लिया, लेकिन दोनों का कोई सुराग नहीं मिला।

    इस दर्दनाक हादसे में अब तक जिन मजदूरों की मौत हुई है, उनमें बिहार के सुमित, धीरज, अमर और गुड्डू शामिल हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी सनी की भी जान गई है। मृतकों के शव देर रात परिजनों को सौंप दिए गए।

    वहीं हादसे में घायल कई मजदूरों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। देवास जिला अस्पताल में 11 लोग भर्ती हैं, जबकि गंभीर घायलों को निजी अस्पतालों में रेफर किया गया है।

    प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री पूरी तरह तैयार होने से पहले ही वहां पटाखा निर्माण शुरू कर दिया गया था। श्रम विभाग की रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई है कि मैग्नीशियम पाउडर के पानी के संपर्क में आने या स्टैटिक चार्ज बनने से विस्फोट हुआ होगा।

    रिपोर्ट में सुरक्षा नियमों की भारी अनदेखी, फैक्ट्री एक्ट के तहत जरूरी लाइसेंस का अभाव, अग्निशमन व्यवस्था में कमी और इमरजेंसी प्लान न होने जैसी गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। इन मामलों में फैक्ट्री प्रबंधन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।