Category: Madhya Pradesh

  • मानसून से पहले निगम का ‘ऑपरेशन डेंजर’ तेज: इंदौर में 100 से अधिक जर्जर इमारतें रडार पर, हादसे रोकने के लिए कार्रवाई शुरू

    मानसून से पहले निगम का ‘ऑपरेशन डेंजर’ तेज: इंदौर में 100 से अधिक जर्जर इमारतें रडार पर, हादसे रोकने के लिए कार्रवाई शुरू


    मध्‍य प्रदेश । मानसून के आगमन से पहले इंदौर नगर निगम ने शहरवासियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जर्जर और खतरनाक भवनों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। बारिश के मौसम में पुराने और कमजोर ढांचों के गिरने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए निगम प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। इसी उद्देश्य से नगर निगम ने ‘ऑपरेशन डेंजर’ के तहत शहरभर में चिन्हित खतरनाक इमारतों पर कार्रवाई तेज कर दी है।

    नगर निगम अधिकारियों के अनुसार शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सर्वेक्षण कर ऐसे भवनों की पहचान की गई है, जो अत्यधिक जर्जर स्थिति में हैं और बारिश के दौरान किसी भी समय हादसे का कारण बन सकते हैं। प्रारंभिक सर्वे में 100 से अधिक भवनों को जोखिमपूर्ण श्रेणी में रखा गया है। इन भवनों को नगर निगम की विशेष निगरानी सूची में शामिल किया गया है और संबंधित संपत्ति मालिकों को कानूनी नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं।

    नगर निगम के अपर आयुक्त प्रखर सिंह के मुताबिक, अभियान का मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि जिन इमारतों की स्थिति अत्यंत खतरनाक पाई गई है, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। कई स्थानों पर निगम की टीमें मौके पर पहुंचकर जर्जर संरचनाओं को हटाने और ध्वस्त करने का कार्य कर रही हैं ताकि किसी अप्रिय घटना की संभावना को पहले ही समाप्त किया जा सके।

    अभियान के तहत शहर के अलग-अलग जोन और वार्डों में निगम की टीमें सक्रिय हैं। तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता से भवनों की स्थिति का मूल्यांकन किया जा रहा है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का लक्ष्य है कि मानसून पूरी तरह सक्रिय होने से पहले सभी गंभीर रूप से खतरनाक भवनों पर आवश्यक कार्रवाई पूरी कर ली जाए।

    नगर निगम ने नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में कोई भवन अत्यधिक जर्जर दिखाई देता है या उसकी स्थिति लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है, तो उसकी सूचना तत्काल प्रशासन को दी जानी चाहिए। इसके अलावा जिन मकान मालिकों के भवन कमजोर या क्षतिग्रस्त स्थिति में हैं, उन्हें भी समय रहते आवश्यक मरम्मत या अन्य सुरक्षा उपाय करने की सलाह दी गई है।

    प्रशासन का मानना है कि नागरिकों की सतर्कता और प्रशासन की सक्रियता मिलकर संभावित दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोक सकती है। इसी कारण निगम लगातार जागरूकता बढ़ाने के प्रयास भी कर रहा है ताकि लोग जोखिमपूर्ण भवनों के प्रति गंभीरता दिखाएं।

    जर्जर भवनों पर कार्रवाई के साथ-साथ नगर निगम ने मानसून से जुड़ी अन्य चुनौतियों से निपटने की तैयारियां भी तेज कर दी हैं। जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी, नालों की सफाई, आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था और कंट्रोल रूम की सक्रियता बढ़ाई गई है। निगम का दावा है कि बारिश के मौसम में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमें चौबीसों घंटे तैयार रहेंगी।

    नगर निगम का कहना है कि सुरक्षित और व्यवस्थित शहर उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी दिशा में मानसून पूर्व यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है ताकि बारिश के दौरान नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और संभावित हादसों को समय रहते रोका जा सके।

  • खजराना गणेश मंदिर का होगा भव्य कायाकल्प: दो मंजिला दर्शन कॉरिडोर से लेकर नए सुविधा केंद्र तक, 30 करोड़ के मास्टर प्लान पर काम शुरू

    खजराना गणेश मंदिर का होगा भव्य कायाकल्प: दो मंजिला दर्शन कॉरिडोर से लेकर नए सुविधा केंद्र तक, 30 करोड़ के मास्टर प्लान पर काम शुरू


    मध्‍य प्रदेश । देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र खजराना गणेश मंदिर का स्वरूप अब और अधिक भव्य तथा सुविधाजनक बनने जा रहा है। मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा तैयार किए गए व्यापक मास्टर प्लान के तहत पहले चरण के विकास कार्यों की शुरुआत होने वाली है। इस योजना का उद्देश्य मंदिर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

    मंदिर प्रबंधन के अनुसार पहले चरण में गर्भगृह के प्रवेश द्वार की चौड़ाई बढ़ाई जाएगी। इसके लिए द्वार पर लगी लगभग 150 किलोग्राम चांदी को पहले ही सुरक्षित रूप से हटाकर ट्रेजरी में जमा करा दिया गया है। इसके बाद संरचना की तकनीकी जांच कराई गई, जिसकी रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद निर्माण कार्य की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया है। रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए चरणबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा।

    मंदिर के पुजारी पंडित अशोक भट्ट के अनुसार मास्टर प्लान मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा जिला प्रशासन और नगर निगम के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है। पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 25 से 30 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है, जबकि पहले चरण के कार्यों पर 8 से 10 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। निर्माण कार्य के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी और दर्शन व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए अधिकांश कार्य रात के समय किए जाएंगे।

    मास्टर प्लान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मंदिर के सामने स्थित सभा मंडप में बदलाव है। वर्तमान व्यवस्था में आगे खड़े श्रद्धालुओं के कारण पीछे मौजूद लोगों को भगवान के दर्शन करने में कठिनाई होती है। इसे ध्यान में रखते हुए सभा मंडप को लगभग दो से ढाई फीट नीचे किया जाएगा। इससे लंबी कतार में खड़े श्रद्धालुओं को भी सीधे और सहज रूप से भगवान गणेश के दर्शन हो सकेंगे। साथ ही विशेष अवसरों पर आने वाले अतिथियों और नवविवाहित दंपतियों के लिए भी दर्शन व्यवस्था अधिक सुगम बनेगी।

    योजना के तहत मंदिर परिसर में दो मंजिला दर्शन कॉरिडोर का निर्माण भी किया जाएगा। इस कॉरिडोर में व्यवस्थित रेलिंग और कतार प्रबंधन की आधुनिक व्यवस्था होगी, जिससे एक साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु आसानी से दर्शन कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त स्टेप दर्शन व्यवस्था भी विकसित की जाएगी ताकि किसी भी स्थान पर भीड़ का दबाव न बने और श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव प्राप्त हो।

    मंदिर परिसर के समग्र विकास के लिए कई अन्य सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं। इनमें पार्किंग क्षेत्र का विस्तार, पार्किंग तक पहुंचने के लिए रोटरी निर्माण, नई गाड़ियों की पूजा के लिए अलग व्यवस्था, प्रसाद दुकानों के ऊपर शेड, बच्चों के लिए खेल क्षेत्र, श्रद्धालुओं के लिए सुविधा केंद्र तथा हरित क्षेत्र विकसित करने के लिए वृक्षारोपण शामिल हैं।

    मंदिर परिसर में स्थित 33 छोटे मंदिरों में से कुछ मंदिरों को भी व्यवस्थित तरीके से पुनर्स्थापित किया जाएगा। प्रबंधन का कहना है कि कुछ मंदिरों में झुकाव की स्थिति देखी गई है, इसलिए उनकी संरचनात्मक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया जाएगा। इसके अलावा वैदशाला और यज्ञशाला जैसी धार्मिक एवं सांस्कृतिक सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा।

    मंदिर प्रबंधन का मानना है कि खजराना गणेश मंदिर एक प्राचीन और ऐतिहासिक धार्मिक स्थल है, जिसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और बदलती जरूरतों को देखते हुए यह मास्टर प्लान भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके पूरा होने के बाद मंदिर परिसर न केवल अधिक सुव्यवस्थित होगा, बल्कि श्रद्धालुओं को भी पहले से बेहतर और सुविधाजनक दर्शन अनुभव प्राप्त होगा।

  • छावनी सड़क चौड़ीकरण विवाद में नया मोड़: विरोधी पोस्टरों के बाद अब आभार संदेशों से सजे इलाके के रास्ते

    छावनी सड़क चौड़ीकरण विवाद में नया मोड़: विरोधी पोस्टरों के बाद अब आभार संदेशों से सजे इलाके के रास्ते


    मध्‍य प्रदेश । इंदौर के छावनी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण को लेकर पिछले कई सप्ताह से जारी विवाद के बीच अब एक नया घटनाक्रम सामने आया है। कुछ दिन पहले तक जहां क्षेत्र में प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में लगाए गए पोस्टर चर्चा का केंद्र बने हुए थे, वहीं अब उन्हीं इलाकों में मुख्यमंत्री, मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करने वाले पोस्टर लगाए गए हैं। इस बदलाव ने क्षेत्रीय राजनीति और स्थानीय जनभावनाओं को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

    नगर निगम द्वारा मास्टर प्लान के तहत छावनी और जिंसी क्षेत्र की सड़कों को 60 फीट चौड़ा करने की कार्रवाई शुरू की गई थी। इस दौरान कई मकानों और दुकानों के हिस्सों को हटाया गया। कार्रवाई के बाद प्रभावित रहवासियों और व्यापारियों ने नाराजगी जताते हुए आरोप लगाए थे कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया तथा कुछ स्थानों पर निर्धारित सीमा से अधिक हिस्से तोड़े गए। इन आरोपों के चलते क्षेत्र में विरोध का माहौल बन गया था।

    कार्रवाई के बाद कई मकानों और दुकानों के बाहर विरोध स्वरूप पोस्टर लगाए गए थे। इन पोस्टरों में प्रशासनिक कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त करते हुए संदेश लिखे गए थे। कुछ पोस्टरों में भविष्य में इसी तरह की कार्रवाई अन्य क्षेत्रों में होने की आशंका जताते हुए चेतावनी जैसे संदेश भी दिए गए थे। इन पोस्टरों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में रही थीं।

    अब उसी क्षेत्र में नए पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक गोलू शुक्ला और भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के प्रति आभार व्यक्त किया गया है। पोस्टरों में मधुमिलन चौराहे से छावनी तक सड़क को 60 फीट चौड़ा किए जाने को व्यापारियों और रहवासियों के हित में बताया गया है। जानकारी के अनुसार ये पोस्टर भाजपा कार्यकर्ता पलक जैन की ओर से लगाए गए हैं।

    सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई के दौरान एक हादसा भी चर्चा में रहा था। 22 मई को निगम की कार्रवाई के बीच बिजली का एक पोल गिर गया था, जिससे एक डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। स्थानीय लोगों के अनुसार घायल डॉक्टर की सर्जरी भी करनी पड़ी थी। इस घटना के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा उपायों को लेकर भी सवाल उठे थे।

    इसके अलावा कुछ रहवासियों ने आरोप लगाया था कि कार्रवाई से पहले मकानों पर लगाए गए निशानों में बदलाव किया गया, जिसके कारण कुछ भवनों को अपेक्षा से अधिक नुकसान पहुंचा। वहीं निगम कर्मचारियों पर बदसलूकी और दबाव बनाने जैसे आरोप भी लगाए गए थे। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से अलग-अलग स्तर पर स्पष्टीकरण दिए जाने की बात सामने आई थी।

    सड़क चौड़ीकरण के विरोध में जनहित पार्टी ने क्षेत्र में ‘न्याय रैली’ भी निकाली थी। पार्टी ने आरोप लगाया था कि प्रभावित लोगों को पर्याप्त समय और उचित राहत नहीं दी गई। दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं ने भी प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए थे तथा राहत और मुआवजे की मांग की थी।

    फिलहाल छावनी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण को लेकर समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। नए पोस्टरों के सामने आने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है और स्थानीय स्तर पर इसकी राजनीतिक एवं सामाजिक गूंज लगातार बनी हुई है।

  • इंदौर में बेकाबू नगर निगम टैंकर का कहर: कई वाहनों को मारी टक्कर, 4 घायल; गुस्साई भीड़ ने की तोड़फोड़

    इंदौर में बेकाबू नगर निगम टैंकर का कहर: कई वाहनों को मारी टक्कर, 4 घायल; गुस्साई भीड़ ने की तोड़फोड़


    मध्‍य प्रदेश । इंदौर के पटेल ब्रिज पर गुरुवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब नगर निगम का एक पानी का टैंकर अचानक अनियंत्रित होकर सड़क पर दौड़ने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टैंकर को अपनी ओर तेजी से आता देख सड़क पर मौजूद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और कई लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। हादसे में चार लोगों के घायल होने की सूचना है, जबकि कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार टैंकर के ब्रेक फेल होने की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि टैंकर अचानक नियंत्रण से बाहर हो गया और आगे बढ़ते हुए सड़क पर चल रहे कई वाहनों को टक्कर मारता चला गया। टक्कर की आवाज और घटनास्थल पर मची अफरा-तफरी के कारण आसपास मौजूद लोग भी घबरा गए। कुछ ही पलों में इलाके में भारी भीड़ जमा हो गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि स्थिति को गंभीर होते देख चालक ने टैंकर को फुटपाथ की ओर मोड़ने का प्रयास किया। इसके बाद टैंकर फुटपाथ पर चढ़ गया और वहां लगी रेलिंग को नुकसान पहुंचाते हुए रुक गया। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि चालक टैंकर को फुटपाथ की ओर नहीं मोड़ता तो हादसा और भी बड़ा हो सकता था तथा अधिक संख्या में वाहन और लोग इसकी चपेट में आ सकते थे।

    घटना में तीन से चार कारों और दो मोटरसाइकिलों को नुकसान पहुंचा है। कई वाहनों के अगले हिस्से और बॉडी को गंभीर क्षति पहुंची है। टैंकर में सवार एक व्यक्ति के भी घायल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि राहत की बात यह रही कि अब तक किसी गंभीर जनहानि की सूचना नहीं मिली है। घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

    हादसे के बाद स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी देखने को मिली। प्रत्यक्षदर्शियों और आसपास मौजूद लोगों का आरोप है कि वाहन की तकनीकी स्थिति की समय पर जांच नहीं की गई, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई। आक्रोशित लोगों ने टैंकर में तोड़फोड़ भी की। कुछ समय के लिए क्षेत्र में यातायात प्रभावित रहा और लंबा जाम लग गया।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और यातायात को सामान्य बनाने के प्रयास शुरू किए। अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। चालक के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है, क्योंकि घटना के बाद उसके मौके से चले जाने की बात सामने आई है।

    पुलिस के अनुसार मामले की जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं नगर निगम की ओर से भी वाहन की तकनीकी स्थिति और हादसे के कारणों की समीक्षा किए जाने की संभावना है।

  • मध्य प्रदेश में प्री-मानसून का असर तेज: 34 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 6 जिलों में ओलावृष्टि की चेतावनी

    मध्य प्रदेश में प्री-मानसून का असर तेज: 34 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 6 जिलों में ओलावृष्टि की चेतावनी


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक से पहले प्री-मानसून गतिविधियां लगातार मजबूत होती जा रही हैं। प्रदेश के कई हिस्सों में बीते कुछ दिनों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है और तेज हवाओं, गरज-चमक के साथ बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग ने गुरुवार को ग्वालियर, जबलपुर सहित 34 जिलों में तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई है। साथ ही कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि की चेतावनी भी जारी की गई है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश के ऊपर सक्रिय ट्रफ लाइन और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम के कारण वातावरण में पर्याप्त नमी पहुंच रही है, जिससे प्री-मानसून गतिविधियां तेज बनी हुई हैं। यही वजह है कि कई जिलों में दिनभर गर्मी रहने के बावजूद शाम होते-होते मौसम अचानक बदल रहा है और बारिश के साथ तेज हवाएं चल रही हैं।

    बुधवार को बालाघाट, उमरिया और सौंसर सहित कई क्षेत्रों में तेज हवा के साथ बारिश दर्ज की गई। प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में मौसम का असर देखने को मिला। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले सप्ताह मानसून के और सक्रिय होने तक प्रदेश में इसी तरह का मौसम बना रह सकता है।

    गुरुवार के लिए जारी पूर्वानुमान के अनुसार ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी सहित कई जिलों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना भी व्यक्त की गई है।

    मौसम विभाग ने मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में ओलावृष्टि की आशंका जताई है। वहीं 13 जून के लिए ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र के कुछ जिलों में तेज आंधी को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में मौसम अधिक प्रभावशाली रहने की संभावना है।

    हालांकि बारिश और आंधी के बावजूद प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी का असर पूरी तरह कम नहीं हुआ है। खजुराहो लगातार दूसरे दिन प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा ग्वालियर में 43.1 डिग्री, जबलपुर में 40.5 डिग्री, भोपाल में 40.4 डिग्री, उज्जैन में 39.5 डिग्री और इंदौर में 38.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान मौसमीय परिस्थितियां मानसून की प्रगति के लिए अनुकूल संकेत हैं। यदि यही स्थिति बनी रहती है तो आने वाले दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। किसानों के लिए भी यह मौसम महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि खरीफ फसलों की तैयारी का दौर शुरू हो चुका है।

    फिलहाल नागरिकों को तेज हवाओं, बिजली गिरने और खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास सावधानी बरतने की आवश्यकता बताई गई है।

  • खाद की कालाबाजारी पर सरकार सख्त: सूचना देने पर मिलेगा ₹1000 का इनाम, हेल्पलाइन जारी

    खाद की कालाबाजारी पर सरकार सख्त: सूचना देने पर मिलेगा ₹1000 का इनाम, हेल्पलाइन जारी


    मध्‍य प्रदेश । खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के हितों की सुरक्षा और उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक नई पहल की है। खाद की कालाबाजारी, नकली उर्वरकों की बिक्री, अधिक कीमत वसूली और अवैध भंडारण जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने पूरे प्रदेश में “इन्फॉर्मर इंसेंटिव स्कीम” लागू की है। इस योजना के तहत ऐसी गतिविधियों की सटीक सूचना देने वाले व्यक्ति को जांच में शिकायत सही पाए जाने पर ₹1000 का प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

    कृषि विभाग का मानना है कि खरीफ मौसम में उर्वरकों की मांग बढ़ने के साथ ही कालाबाजारी और अनियमितताओं की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे में आम नागरिकों और किसानों की भागीदारी से निगरानी तंत्र को मजबूत किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से सरकार ने लोगों को सीधे सूचना देने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है।

    योजना के तहत किसान, आम नागरिक, व्यापारी या कोई भी व्यक्ति खाद से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी विभाग को दे सकता है। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने का आश्वासन भी दिया गया है ताकि लोग बिना किसी डर के शिकायत दर्ज करा सकें। शिकायतें मुख्यमंत्री किसान हेल्पलाइन नंबर 155253 पर दर्ज कराई जा सकती हैं। यह हेल्पलाइन कार्य दिवसों में सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक सक्रिय रहेगी।

    कृषि विभाग के अनुसार सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन द्वारा जांच कराई जाएगी। कलेक्टर के निर्देशन में गठित टीम शिकायत की सत्यता की पुष्टि करेगी। यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है और संबंधित मामले में जब्ती, कार्रवाई या दोष सिद्ध होता है, तो सूचना देने वाले व्यक्ति को ₹1000 की प्रोत्साहन राशि सीधे उसके बैंक खाते में भेजी जाएगी।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। इसके लिए आवश्यक वित्तीय प्रावधान कृषि वर्ष 2026-27 के बजट से किए जाएंगे। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस पहल से खाद वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध हो सकेंगे।

    इसी बीच खाद की उपलब्धता और कीमतों को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री Digvijaya Singh ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रदेश में खाद वितरण और बिक्री में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने दावा किया है कि कई जिलों से किसानों और किसान संगठनों की शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें डीएपी, एसएसपी और अन्य उर्वरकों को निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक दरों पर बेचे जाने के आरोप लगाए गए हैं।

    पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ स्थानों पर पुराने स्टॉक की खाद को नई बढ़ी हुई दरों पर बेचा जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की है कि पूरे प्रदेश में खाद वितरण व्यवस्था की विशेष जांच कराई जाए, किसानों से कथित रूप से अधिक वसूली गई राशि वापस कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

    खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता और मूल्य नियंत्रण को लेकर सरकार और प्रशासन की निगरानी अब और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। आने वाले दिनों में इस योजना के परिणाम किसानों और कृषि क्षेत्र पर सीधे प्रभाव डाल सकते हैं।

  • मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई: कांग्रेस ने तेज की कानूनी और राजनीतिक लड़ाई

    मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई: कांग्रेस ने तेज की कानूनी और राजनीतिक लड़ाई


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश की राज्यसभा चुनावी राजनीति में मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र को लेकर जारी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में पहुंच गया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की मांग पर फैसला सुरक्षित रखते हुए मामले को शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। इस बीच कांग्रेस ने कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।

    सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मामले की तत्काल सुनवाई आवश्यक है क्योंकि नामांकन वापसी की समय-सीमा बेहद निकट है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि यदि विस्तृत सुनवाई अगले दिन हो तो भी तब तक चुनाव परिणाम घोषित न किए जाएं। दूसरी ओर चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि याचिका की प्रति उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई है और मामले का अध्ययन करने के लिए समय चाहिए।

    अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले को शुक्रवार तक के लिए सूचीबद्ध कर दिया। इसके बाद कांग्रेस नेतृत्व ने दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा की जा रही है। वहीं मध्य प्रदेश कांग्रेस के विधायक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर इस पूरे प्रकरण को उठाने की तैयारी में हैं।

    राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हैं क्योंकि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद राज्यसभा चुनाव का गणित पूरी तरह बदल गया है। यदि कांग्रेस उम्मीदवार चुनावी मैदान से बाहर रहती हैं तो भाजपा के तीनों उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने की संभावना बढ़ जाएगी। भाजपा की ओर से महेश केवट के साथ-साथ अन्य दो उम्मीदवारों का निर्वाचन भी बिना मतदान के संभव हो सकता है।

    विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि आयोग ने समय रहते निर्णय नहीं लिया। उन्होंने कहा कि आयोग चाहे तो इस मामले में हस्तक्षेप कर सकता था, जैसा कि अन्य राज्यों के कुछ मामलों में किया गया था। हालांकि ये आरोप कांग्रेस की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं और इस संबंध में चुनाव आयोग की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    विवाद की जड़ 9 जून को हुई नामांकन पत्रों की जांच प्रक्रिया में है, जब रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया था। भाजपा ने आपत्ति उठाई थी कि उम्मीदवार ने अपने चुनावी हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत से जुड़े मामले की जानकारी नहीं दी। कांग्रेस का तर्क है कि संबंधित प्रकरण केवल एक निजी शिकायत और नोटिस तक सीमित है तथा इसे लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता।

    अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आयोग या अदालत कांग्रेस के पक्ष में राहत देती है तो राज्यसभा चुनाव फिर से मुकाबले की स्थिति में आ सकता है। वहीं यदि नामांकन रद्द रहने का फैसला बरकरार रहता है तो भाजपा के उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो सकता है।

    फिलहाल कानूनी प्रक्रिया जारी है और अंतिम स्थिति अदालत तथा संवैधानिक संस्थाओं के निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • भांजे पर दुष्कर्म का आरोप: महिला ने जहरीला पदार्थ खाकर की आत्महत्या की कोशिश, मामला दर्ज

    भांजे पर दुष्कर्म का आरोप: महिला ने जहरीला पदार्थ खाकर की आत्महत्या की कोशिश, मामला दर्ज


    मध्‍य प्रदेश । भोपाल के मिसरोद थाना क्षेत्र से एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां 33 वर्षीय महिला ने अपने रिश्तेदार पर दुष्कर्म का आरोप लगाया है। पुलिस के अनुसार महिला द्वारा अस्पताल में उपचार के दौरान दिए गए बयानों के आधार पर आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल आरोपी की तलाश की जा रही है और मामले की जांच जारी है।

    पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक पीड़िता ग्रामीण क्षेत्र में अपने पति के साथ रहती है। उसका पति सब्जी व्यवसाय से जुड़ा है और रोजाना कारोबार के सिलसिले में मंडी जाता है। शिकायत के अनुसार इसी दौरान आरोपी, जो परिवार का परिचित और रिश्तेदार बताया जा रहा है, कथित रूप से घर पहुंचता था। महिला ने आरोप लगाया है कि 5 जून को पति की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर आरोपी ने उसके साथ जबरदस्ती की। इसके बाद भी कथित रूप से आरोपी द्वारा उसे परेशान किया जाता रहा।

    पीड़िता ने अपने बयान में दावा किया है कि उसने घटना की जानकारी अपने पति और अन्य परिजनों को दी थी। हालांकि, उसके अनुसार मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया और आरोपी के खिलाफ कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। महिला का कहना है कि लगातार मानसिक दबाव और कथित उत्पीड़न के कारण वह बेहद परेशान हो गई थी।

    पुलिस के अनुसार 9 जून को महिला की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक उसने जहरीले पदार्थ का सेवन किया था। उपचार के दौरान महिला ने पुलिस और चिकित्सकीय अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए महिला के बयान दर्ज किए।

    अधिकारियों का कहना है कि पीड़िता के बयान और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। साथ ही अन्य साक्ष्यों और परिस्थितियों की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल आरोपी फरार बताया जा रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, महिला का उपचार जारी है और उसकी स्थिति पर चिकित्सकीय निगरानी रखी जा रही है।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की सूचना तुरंत पुलिस को दें ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही सभी तथ्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

  • विदिशा में बनेगा देश का मॉडल कृषि विज्ञान केंद्र, 14 जून को शिवराज सिंह चौहान करेंगे शिलान्यास, किसानों के लिए शुरू होगा वैज्ञानिक कृषि अभियान

    विदिशा में बनेगा देश का मॉडल कृषि विज्ञान केंद्र, 14 जून को शिवराज सिंह चौहान करेंगे शिलान्यास, किसानों के लिए शुरू होगा वैज्ञानिक कृषि अभियान

     मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। विदिशा संसदीय क्षेत्र के किसानों को समर्पित एक बड़े कार्यक्रम के तहत 14 जून को विदिशा जिले के बेरखेड़ी जट्टू में कृषि विज्ञान केंद्र की आधारशिला रखी जाएगी। इस अवसर को क्षेत्र के कृषि विकास के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, क्योंकि इसके माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने और आधुनिक कृषि तकनीकों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

    इस कार्यक्रम की घोषणा विदिशा से सांसद और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की है। उन्होंने किसानों से बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि यह दिन क्षेत्र की कृषि व्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित होगा। उनके अनुसार प्रस्तावित कृषि विज्ञान केंद्र केवल एक संस्थान नहीं होगा, बल्कि किसानों के लिए प्रशिक्षण, अनुसंधान और तकनीकी मार्गदर्शन का प्रमुख केंद्र बनेगा।

    कार्यक्रम के दौरान विदिशा, रायसेन, सीहोर और देवास जिलों के लिए तैयार किए गए वैज्ञानिक कृषि रोडमैप को लागू करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। यह रोडमैप कृषि उत्पादन बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और किसानों को मौसम तथा बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप खेती करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से कृषि क्षेत्र में उत्पादकता और लाभप्रदता दोनों में सुधार संभव है।

    इस अवसर पर ‘खेत बचाओ अभियान’ की भी शुरुआत की जाएगी। अभियान का उद्देश्य किसानों को नकली खाद, बीज और अन्य कृषि उत्पादों से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक बनाना है। किसानों को यह बताया जाएगा कि असली और नकली उत्पादों की पहचान कैसे की जाए तथा गुणवत्ता वाले कृषि संसाधनों का चयन किस प्रकार किया जाए। इससे खेती में होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    कार्यक्रम में आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन, उन्नत खेती की तकनीकों की जानकारी और विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों के मार्गदर्शन सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। किसानों को नई फसल बुआई पद्धतियों, जैविक खेती, फसल प्रबंधन, जल संरक्षण और मौसम आधारित कृषि सलाह से अवगत कराया जाएगा। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में उपयोग हो रही नई मशीनों और उपकरणों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन भी किया जाएगा, ताकि किसान उन्हें समझ सकें और अपने खेतों में उपयोग कर सकें।

    विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों और वैज्ञानिकों के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करते हैं। ऐसे केंद्रों के माध्यम से किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप समाधान, उन्नत बीजों की जानकारी, फसल रोग नियंत्रण की तकनीक तथा नवीन कृषि अनुसंधान का लाभ मिलता है। विदिशा में प्रस्तावित यह केंद्र आसपास के जिलों के किसानों के लिए भी उपयोगी संसाधन केंद्र साबित हो सकता है।

    कृषि क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों और बदलते मौसमीय परिस्थितियों के बीच वैज्ञानिक खेती की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में विदिशा में स्थापित होने वाला कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने, उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। क्षेत्र के किसानों को उम्मीद है कि इस पहल से कृषि विकास को नई गति मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्राप्त होगी।

  • भोपाल के ईरानी डेरे में पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 17 हजार का इनामी बदमाश गिरफ्तार, कई मामलों में वांटेड आरोपी दबोचे गए

    भोपाल के ईरानी डेरे में पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 17 हजार का इनामी बदमाश गिरफ्तार, कई मामलों में वांटेड आरोपी दबोचे गए


    मध्‍य प्रदेश । भोपाल में फरार अपराधियों और न्यायालय से जारी वारंट वाले आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस ने एक बार फिर सख्त कार्रवाई करते हुए निशातपुरा क्षेत्र के ईरानी डेरा अमन कॉलोनी में विशेष सर्चिंग अभियान चलाया। करीब 40 पुलिसकर्मियों की संयुक्त टीम द्वारा की गई इस कार्रवाई के दौरान दो ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार किया गया जिनकी तलाश लंबे समय से विभिन्न जिलों की पुलिस कर रही थी। पुलिस की अचानक हुई दबिश से क्षेत्र में कुछ समय के लिए हलचल और अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस कमिश्नर संजय सिंह के निर्देश पर 10 जून की शाम संचालित की गई। अभियान का मुख्य उद्देश्य फरार अपराधियों, वारंटियों और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करना था। पुलिस टीम ने इलाके में व्यापक तलाशी अभियान चलाते हुए कई लोगों से पूछताछ भी की।

    कार्रवाई के दौरान निशातपुरा थाना क्षेत्र के निगरानीशुदा बदमाश सालिग उर्फ रेहान ईरानी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक आरोपी के खिलाफ भोपाल समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में लूट, चोरी, जालसाजी, मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराधों के कुल 24 मामले दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और विभिन्न मामलों में उसकी तलाश की जा रही थी।

    पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी पर कुल 17 हजार रुपये का इनाम घोषित था। इसमें बैतूल जिले के रानीपुर थाने के एक मामले में 10 हजार रुपये, रायसेन कोतवाली क्षेत्र के प्रकरण में 5 हजार रुपये तथा भोपाल के पिपलानी थाने के मामले में 2 हजार रुपये का इनाम शामिल था। इसके अलावा आरोपी के खिलाफ न्यायालय से गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया गया था। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित रूप से पुलिस को बताया कि वह लंबे समय से ईरानी डेरे में छिपकर रह रहा था।

    अभियान के दौरान पुलिस ने रिजवान हुसैन नामक एक अन्य आरोपी को भी हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार जिला पन्ना से जुड़े एक मामले में उससे पूछताछ की जानी है। रिकॉर्ड के मुताबिक रिजवान के खिलाफ मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों में चोरी, लूट, जालसाजी और मारपीट जैसे लगभग 15 आपराधिक मामले दर्ज हैं। हालांकि इन मामलों में अंतिम न्यायिक निर्णय संबंधित अदालतों द्वारा किया जाना शेष है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान अन्य आपराधिक घटनाओं, फरार आरोपियों तथा संभावित गिरोह नेटवर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है। इसके आधार पर आगे और गिरफ्तारियां भी संभव हैं।

    पुलिस का दावा है कि ईरानी डेरा क्षेत्र में लगातार की जा रही निगरानी और विशेष अभियानों के कारण मोबाइल झपटमारी तथा संपत्ति संबंधी अपराधों में कमी देखने को मिली है। इस संयुक्त कार्रवाई में निशातपुरा, छोला मंदिर और गांधीनगर थाना पुलिस की टीमों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।