Category: Madhya Pradesh

  • MP में सियासत से सिस्टम तक सवाल ही सवाल! मंत्री ने राहुल गांधी को दिया रांची का टिकट ऑफर, उफनती नर्मदा में विधायक का स्टंट

    MP में सियासत से सिस्टम तक सवाल ही सवाल! मंत्री ने राहुल गांधी को दिया रांची का टिकट ऑफर, उफनती नर्मदा में विधायक का स्टंट


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासन से जुड़ी घटनाएं इन दिनों कई सवाल खड़े कर रही हैं। कहीं देशभक्ति के नाम पर निकाली गई तिरंगा यात्रा में नेता और अधिकारी पैदल चलते नजर आए तो उनके पीछे खाली सरकारी और निजी वाहनों का काफिला चलता रहा। कहीं उफनती नर्मदा की लहरों के बीच भाजपा विधायक और अधिकारी बिना लाइफ जैकेट नाव में सवार दिखाई दिए। वहीं राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे से पहले मंत्री विश्वास सारंग ने उन्हें झारखंड के रांची जाने की सलाह देते हुए टिकट तक कराने का ऑफर दे दिया। इन घटनाओं ने राजनीतिक बयानबाजी से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों तक कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    रतलाम में तिरंगा यात्रा के दौरान महापौर कलेक्टर और अन्य नेता अधिकारी करीब डेढ़ किलोमीटर तक हाथों में तिरंगा लेकर पैदल चले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पेट्रोल और डीजल बचाने की अपील के बीच इस यात्रा की एक तस्वीर चर्चा का विषय बन गई। वजह थी पैदल चल रहे नेताओं और अधिकारियों के पीछे चलता खाली वाहनों का काफिला। इन गाड़ियों में ड्राइवरों के अलावा कोई सवार नहीं था। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब अधिकारी और जनप्रतिनिधि खुद पैदल यात्रा कर रहे थे तो उनके खाली वाहनों को साथ चलाने की जरूरत क्यों पड़ी। लोगों का सवाल है कि क्या इस तरह ईंधन की खपत को कम किया जा सकता था।

    महेश्वर में तिरंगा यात्रा के दौरान सुरक्षा से जुड़ा मामला और ज्यादा गंभीर नजर आया। बारिश के मौसम में नर्मदा नदी उफान पर है और नदी की धार तेज होने के बावजूद भाजपा विधायक राजकुमार मेव टीआई समेत अन्य नेता और अधिकारी नाव में सवार हो गए। तस्वीरों के मुताबिक नाव पर सवार लोगों ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब आम लोगों को नदी और जलाशयों में सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है तो जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के लिए इन नियमों का पालन कितना जरूरी है। देशभक्ति का उत्साह अपनी जगह है लेकिन उफनती नदी में सुरक्षा से समझौता किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

    इधर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सितंबर में उज्जैन आने की संभावित चर्चा के बीच मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने उन पर राजनीतिक तंज कसा है। सारंग ने राहुल गांधी को मध्य प्रदेश आने से पहले रांची जाने की सलाह दी। उनका कहना है कि राहुल गांधी दिल्ली में जेन-जी के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए लेकिन झारखंड की राजधानी रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं के खिलाफ कार्रवाई के दौरान वहां नहीं पहुंचे। इसी मुद्दे को लेकर मंत्री ने राहुल गांधी से पहले रांची जाने को कहा और यहां तक कहा कि वह उनकी दिल्ली से रांची की टिकट करा देंगे। हालांकि राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे की तारीख अभी तय नहीं हुई है। ऐसे में टिकट वाला बयान फिलहाल सियासी तंज के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    अब बात प्रशासनिक व्यवस्था की। स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले मध्य प्रदेश के लाखों शिक्षक ई-अटेंडेंस की तकनीकी परेशानी से जूझते रहे। दिनभर स्कूल में ड्यूटी करने के बाद शिक्षकों को आउट-पंच करना था लेकिन ई-अटेंडेंस पोर्टल में तकनीकी समस्या के कारण पंच नहीं हो पा रहा था। शिक्षकों की चिंता इसलिए बढ़ गई क्योंकि अटेंडेंस दर्ज नहीं होने पर वेतन कटने का डर था। नियम के मुताबिक शिक्षकों को स्कूल के 200 मीटर के दायरे में रहकर अटेंडेंस लगानी होती है। लिहाजा कई शिक्षक घंटों तक स्कूल में बैठकर पोर्टल ठीक होने का इंतजार करते रहे।

    देर शाम जब पोर्टल की समस्या दूर हुई तो विभाग की ओर से शिक्षकों को संदेश भेजकर राहत दी गई कि वे जहां हैं वहीं से अटेंडेंस लगा सकते हैं। हालांकि शिक्षकों के लिए यह समस्या नई नहीं है। प्रदेश के कई हिस्सों में नेटवर्क और तकनीकी दिक्कतों के कारण ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर लगातार परेशानी सामने आती रही है। ऐसे में सवाल सिर्फ पोर्टल के कुछ घंटों तक ठप रहने का नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था का है जिसमें तकनीकी खामी का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतने का डर बना रहता है।

    कुल मिलाकर तिरंगा यात्रा से लेकर नर्मदा की लहरों और ई-अटेंडेंस की तकनीकी दिक्कत तक मध्य प्रदेश की इन घटनाओं ने अलग-अलग मुद्दों पर बहस छेड़ दी है। कहीं ईंधन बचाने की जरूरत पर सवाल है तो कहीं सुरक्षा नियमों के पालन पर। वहीं राजनीतिक बयानबाजी ने राहुल गांधी के संभावित मध्य प्रदेश दौरे को भी सियासी रंग दे दिया है।

  • मध्य प्रदेश में स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव! 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में भी बरसेंगे बादल

    मध्य प्रदेश में स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव! 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में भी बरसेंगे बादल


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम बनने से शुक्रवार को जबलपुर रीवा शहडोल और सागर संभाग में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटे में प्रदेश के 12 जिलों में 4 इंच या उससे ज्यादा बारिश होने की संभावना है। वहीं भोपाल इंदौर समेत कई अन्य जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है। लगातार कुछ दिनों तक बारिश से दूरी बनी रहने के बाद गुरुवार को प्रदेश के कई हिस्सों में पानी गिरा जिससे उमस से परेशान लोगों को राहत मिली।

    मौसम विभाग के अनुसार सागर नर्मदापुरम नरसिंहपुर बालाघाट मंडला डिंडौरी अनूपपुर शहडोल कटनी मऊगंज सीधी और सिंगरौली में अगले 24 घंटे के दौरान भारी बारिश हो सकती है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर 4 इंच से अधिक पानी गिरने का अनुमान है। इसके अलावा भोपाल रायसेन सीहोर राजगढ़ विदिशा इंदौर धार अलीराजपुर बड़वानी खंडवा खरगोन उज्जैन देवास रतलाम ग्वालियर रीवा सतना छिंदवाड़ा सिवनी पन्ना दमोह छतरपुर टीकमगढ़ समेत कई जिलों में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार बंगाल की खाड़ी में 12 अगस्त की सुबह निम्न दबाव का क्षेत्र सक्रिय हुआ था जो 13 अगस्त की सुबह डिप्रेशन में बदल गया। यह सिस्टम उत्तर पश्चिम दिशा में पश्चिम बंगाल और झारखंड की ओर बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से मानसून ट्रफ के सक्रिय रहने की संभावना है। यही वजह है कि मध्य प्रदेश में आने वाले दिनों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की स्थिति भी बन सकती है।

    गुरुवार को करीब सात दिन बाद प्रदेश के कई इलाकों में बारिश हुई। इससे लंबे समय से उमस और गर्मी से परेशान लोगों को राहत मिली। हालांकि बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश अभी भी सामान्य से पीछे चल रहा है। मौसम केंद्र के मुताबिक मध्य प्रदेश में अब तक करीब 524.8 मिलीमीटर यानी 20.7 इंच बारिश दर्ज हुई है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक करीब 597 मिलीमीटर यानी 23.5 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में बारिश करीब 12 प्रतिशत कम है।

    पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी ज्यादा है। जबलपुर रीवा सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से करीब 19 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है। बालाघाट छतरपुर छिंदवाड़ा दमोह डिंडौरी जबलपुर कटनी मैहर मंडला नरसिंहपुर पन्ना रीवा सागर सतना सिवनी शहडोल सीधी सिंगरौली टीकमगढ़ और उमरिया समेत कई जिलों में सामान्य से कम पानी गिरा है। पश्चिमी हिस्से में भी कई जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। हालांकि भोपाल गुना सीहोर राजगढ़ ग्वालियर अनूपपुर भिंड बुरहानपुर देवास बड़वानी खंडवा और खरगोन में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    इस मानसून सीजन में जून के दौरान प्रदेश में बारिश करीब 14 प्रतिशत कम रही थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से स्थिति कुछ सुधरी लेकिन इसके बाद मानसून ने दो बार ब्रेक लिया। कई दिनों तक बारिश नहीं होने से आंकड़ा फिर सामान्य से नीचे चला गया। जुलाई में बारिश का कोटा पूरा होने के बावजूद जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। अब अगस्त में सक्रिय हुए सिस्टम से उम्मीद है कि प्रदेश में बारिश की कमी कुछ हद तक दूर होगी।

    राजधानी भोपाल में अगस्त महीने में भारी बारिश का इतिहास रहा है। अगस्त 2006 में करीब 35 इंच बारिश दर्ज हुई थी। 14 अगस्त 2006 को 24 घंटे में करीब 12 इंच बारिश होने का रिकॉर्ड भी रहा है। इंदौर में अगस्त महीने में सर्वाधिक करीब 28 इंच बारिश का रिकॉर्ड 1944 में दर्ज हुआ था। ग्वालियर में 24 घंटे में करीब साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड 1927 का है। जबलपुर में अगस्त 1923 में करीब 44 इंच बारिश दर्ज होने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड है। उज्जैन में भी अगस्त 2006 में करीब 35 इंच बारिश दर्ज की गई थी।

    फिलहाल मौसम का रुख देखते हुए पूर्वी मध्य प्रदेश के लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। भारी बारिश के दौरान नदी नालों और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनी पर नजर रखना और अनावश्यक रूप से जलभराव वाले रास्तों पर जाने से बचना बेहतर रहेगा।

  • MP में मानसून टूरिज्म का जबरदस्त क्रेज! मांडू में 14 से 16 अगस्त तक नो रूम, दतिया में 95% कमरे बुक

    MP में मानसून टूरिज्म का जबरदस्त क्रेज! मांडू में 14 से 16 अगस्त तक नो रूम, दतिया में 95% कमरे बुक

    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून के साथ पर्यटन का रंग भी गहरा हो गया है। बारिश के बाद झरनों पहाड़ियों नदियों और ऐतिहासिक स्मारकों की खूबसूरती पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। वहीं सावन सोमवार और नागपंचमी जैसे धार्मिक आयोजनों ने उज्जैन और दूसरे धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ा दी है। पचमढ़ी मांडू महेश्वर उज्जैन दतिया नलखेड़ा और ओरछा जैसे प्रमुख पर्यटन और धार्मिक केंद्रों में वीकेंड के दौरान होटल और गेस्ट हाउस की बुकिंग तेजी से बढ़ रही है। कई जगहों पर कमरे पहले से बुक हो चुके हैं और जहां कमरे उपलब्ध हैं वहां बढ़ती मांग के कारण किराया भी सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ गया है।

    मांडू में बारिश के मौसम में ऐतिहासिक इमारतों और पहाड़ियों का नजारा बेहद आकर्षक हो जाता है। यही वजह है कि 14 से 16 अगस्त के बीच यहां होटल पूरी तरह बुक बताए जा रहे हैं। मांडू में करीब 2 सरकारी और 20 निजी होटल के अलावा 2 धर्मशालाएं हैं। यहां लगभग 800 कमरों की उपलब्धता है। सामान्य तौर पर कमरों का किराया 500 रुपए से शुरू होकर 10 हजार रुपए तक पहुंचता है। धर्मशालाओं में करीब 2 हजार रुपए तक में ठहरने की सुविधा मिल सकती है। मांडू में जहाज महल रानी रूपमती महल बाज बहादुर महल अशरफी महल और होशंग शाह का मकबरा जैसे ऐतिहासिक स्थल पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण हैं।

    उज्जैन में स्थिति और ज्यादा खास है। सावन सोमवार और नागपंचमी एक साथ पड़ने के कारण श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। शनिवार और रविवार को करीब 3 से 4 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है जबकि सावन सोमवार और नागपंचमी के दिन यह संख्या 5 से 6 लाख तक पहुंच सकती है। इसके चलते शहर के अधिकांश होटल पहले ही बुक हो चुके हैं। बचे हुए कमरों के किराए में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। सामान्य दिनों में 1500 रुपए में मिलने वाला कमरा वीकेंड पर करीब 2000 रुपए तक पहुंच गया है। महाकाल लोक के आसपास छोटे होटलों में किराया लगभग दोगुना तक बढ़ा है जबकि बड़े होटल 15 से 35 प्रतिशत तक अधिक कीमत ले रहे हैं।

    नर्मदा किनारे बसे महेश्वर में भी पर्यटकों की अच्छी भीड़ है। यहां 120 से ज्यादा होटल होम स्टे रिजॉर्ट धर्मशालाएं और पर्यटन निगम के ठहरने के विकल्प मौजूद हैं। कमरे का शुरुआती किराया करीब 1200 रुपए है लेकिन हेरिटेज और लग्जरी प्रॉपर्टीज में रॉयल रूम की कीमत 60 हजार रुपए तक पहुंच रही है। महेश्वर आने वाले पर्यटक अक्सर ओंकारेश्वर उज्जैन और मांडू का भी रुख करते हैं। अहिल्याबाई होलकर की विरासत होलकर फोर्ट और नर्मदा के घाट यहां के प्रमुख आकर्षण हैं।

    आगर मालवा के नलखेड़ा में मां बगलामुखी मंदिर के कारण हर शनिवार और रविवार श्रद्धालुओं की अच्छी भीड़ रहती है। शहर में करीब 45 होटल हैं और कमरों का किराया 500 से 4500 रुपए तक है। वीकेंड को देखते हुए यहां भी एडवांस बुकिंग शुरू हो चुकी है।

    ओरछा में राजा राम मंदिर के कारण धार्मिक पर्यटन लगातार बना रहता है। यहां करीब 15 बड़े और 50 छोटे होटल के साथ लगभग 20 होम स्टे हैं। कमरों का किराया 3 हजार से 15 हजार रुपए तक बताया जाता है। वहीं दतिया में पीतांबरा माता मंदिर के चलते श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। शहर के करीब 90 होटल और धर्मशालाओं में लगभग 95 प्रतिशत कमरे पहले ही बुक हो चुके हैं।

    खजुराहो में फिलहाल पर्यटन सीजन अपेक्षाकृत कमजोर बताया जा रहा है लेकिन वीकेंड पर यहां भी पर्यटकों की संख्या बढ़ती है। करीब 200 होटल होम स्टे और अन्य ठहरने के विकल्प मौजूद हैं। फाइव स्टार होटलों का टैरिफ 30 से 60 हजार रुपए तक जबकि थ्री स्टार होटलों में ऑफ सीजन में करीब 5 से 7 हजार और सीजन में 10 से 12 हजार रुपए तक किराया पहुंच सकता है।

    ऐसे में अगर इस वीकेंड मध्य प्रदेश के किसी पर्यटन या धार्मिक स्थल पर घूमने का प्लान है तो होटल की एडवांस बुकिंग कराना समझदारी होगी। मानसून की खूबसूरती और धार्मिक आयोजनों के कारण इस समय कई लोकप्रिय जगहों पर आखिरी समय में कमरा मिलना मुश्किल हो सकता है।

  • MP: भाजपा विधायक संजय पाठक की कंपनी के साथ डेढ़ करोड़ रपये की साइबर ठगी

    MP: भाजपा विधायक संजय पाठक की कंपनी के साथ डेढ़ करोड़ रपये की साइबर ठगी


    कटनी।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है. राज्य के सबसे अमीर विधायकों में गिने जाने वाले और कटनी जिले (Katni district) के विजयराघवगढ़ (Vijayraghavgarh) से विधायक संजय पाठक (MLA Sanjay Pathak) की कंपनी के साथ डेढ़ करोड़ रुपये की भारी-भरकम साइबर ठगी का मामला सामने आया है. शातिर साइबर ठगों ने कंपनी के सीनियर डायरेक्टर के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर अकाउंटेंट को चकमा दिया और बड़ी आसानी से पैसे ट्रांसफर करवा लिया।

    पूरी घटना बुधवार 12 अगस्त दोपहर करीब 2 बजे की है. विधायक संजय पाठक की कंपनी के सीनियर अकाउंटेंट शैलेश तिवारी के पास एक मैसेज आया. यह मैसेज कंपनी के ही एक सीनियर डायरेक्टर के मोबाइल नंबर से आया था, जिस पर उनकी फोटो भी लगी हुई थी. मैसेज में अकाउंटेंट को तुरंत किसी दूसरे बैंक खाते में डेढ़ करोड़ रुपये ट्रांसफर करने को कहा गया।

    चूंकि मैसेज सीधे सीनियर डायरेक्टर के नंबर और उनकी प्रोफाइल फोटो के साथ आया था, इसलिए अकाउंटेंट को किसी भी तरह का कोई शक नहीं हुआ. बिना देर किए अकाउंटेंट ने कंपनी के खाते से पैसे ट्रांसफर कर दिए. दो बार में ट्रांजेक्शन किए गए, जिसमें एक बार 1 करोड़ 16 लाख और दूसरी बार करीब 33 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए. इस तरह कुल मिलाकर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये ठगों के खाते में चले गए।


    फ्लाइट से उतरते ही विधायक को मिली जानकारी

    दिलचस्प बात यह है कि जिस समय यह फ्रॉड हो रहा था, विधायक संजय पाठक फ्लाइट से यात्रा कर रहे थे. जैसे ही वह प्लेन से उतरे, उन्हें इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिली। मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक संजय पाठक ने तुरंत कटनी के पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा को पूरी घटना की जानकारी दी. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की. पुलिस ने कुछ राशि को होल्ड कराने के निर्देश दिए. कंपनी के अकाउंटेंट की शिकायत पर रंगनाथ नगर थाने में साइबर ठगी का मामला दर्ज कर लिया गया है।


    ‘बॉस स्कैम’ का शिकार हुई कंपनी

    कटनी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) कमल मौर्य ने इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि यह एक टिपिकल साइबर फ्रॉड है, जिसे ‘बॉस स्कैम’ कहा जाता है. इसमें ठग बड़े अधिकारियों की नकली प्रोफाइल बनाकर कर्मचारियों को झांसे में लेते हैं।

    एएसपी ने बताया कि साइबर ठगों ने मात्र दो-तीन घंटे के अंदर ही पूरी रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर साफ कर दिया. ठगी गई रकम को करीब 200 अलग-अलग जगहों पर डिस्ट्रीब्यूट किया गया, जिसे एटीएम और चेक के माध्यम से निकाला जा रहा है।

    पुलिस और साइबर सेल की टीम ने तुरंत ऐक्शन लेते हुए ठगों के खातों से अब तक करीब 23 लाख रुपये की राशि को होल्ड (फ्रीज) करवा लिया है. फिलहाल, साइबर सेल की टीम तकनीकी जांच में जुटी हुई है और ठगों के पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

  • MP Board : कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं का टाइम-टेबल जारी….

    MP Board : कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं का टाइम-टेबल जारी….


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के लाखों छात्रों का यह इंतजार अब खत्म हो गया है। मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (Madhya Pradesh Board of Secondary Education- MPBSE) ने साल 2027 की हाईस्कूल (High School) यानी कक्षा 10वीं और हायर सेकेंडरी (Higher Secondary) यानी कक्षा 12वीं की मुख्य परीक्षाओं का पूरा टाइम टेबल (Main Examinations – Full Timetable) जारी कर दिया है। इसके साथ साथ बोर्ड ने जून में होने वाली सप्लीमेंट्री यानी दूसरी परीक्षा का शेड्यूल भी सामने रख दिया है, ताकि छात्र समय रहते अपनी तैयारी का खाका खींच सकें। बोर्ड की तरफ से जारी जानकारी के मुताबिक कक्षा 12वीं की मुख्य परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू होकर 19 मार्च 2027 तक चलेंगी। वहीं कक्षा 10वीं के छात्रों की परीक्षाएं 24 फरवरी से शुरू होंगी और 18 मार्च 2027 को खत्म होंगी।


    परीक्षा के दिन कैसा रहेगा शेड्यूल?

    दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक एक ही पाली में आयोजित होंगी। लेकिन असली मशक्कत परीक्षा शुरू होने से पहले ही शुरू हो जाती है। छात्रों को सेंटर पर सुबह 8 बजे तक पहुंचना अनिवार्य होगा, जबकि 8:30 बजे तक अपनी तय सीट पर बैठना होगा। जो छात्र 8:45 बजे के बाद पहुंचेंगे, उन्हें अंदर घुसने ही नहीं दिया जाएगा, यानी देरी की कोई गुंजाइश नहीं। प्रश्न पत्र सुबह 8:45 बजे बांटा जाएगा और उत्तर पुस्तिका 8:55 बजे दी जाएगी, जिसके बाद ठीक 9 बजे से परीक्षा शुरू हो जाएगी।

    12वीं की डेटशीट पर एक नजर
    कक्षा 12वीं की परीक्षा की शुरुआत जैव प्रौद्योगिकी, गायन वादन और तबला पखावज जैसे विषयों से होगी। इसके बाद 23 फरवरी को हिंदी, 26 फरवरी को अंग्रेजी और 16 मार्च को गणित की परीक्षा होगी। भौतिकी और अर्थशास्त्र सहित कई विषयों का पेपर 4 मार्च को है, जबकि रसायन विज्ञान, इतिहास और बिजनेस स्टडीज जैसे विषय 13 मार्च को रखे गए हैं। जीव विज्ञान 8 मार्च को और राजनीति विज्ञान 11 मार्च को होगा। परीक्षा का समापन 19 मार्च को भूगोल सहित अन्य विषयों के साथ होगा।

    12वीं की परीक्षाओं का पूरा शेड्यूल

    17 फरवरी – जैव प्रौद्योगिकी, गायन वादन, तबला पखावज
    18 फरवरी – उर्दू, मराठी
    20 फरवरी – संस्कृत
    22 फरवरी – एनएसक्यूएफ विषय, शारीरिक शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
    23 फरवरी – हिंदी
    24 फरवरी – ड्राइंग एंड डिजाइनिंग
    25 फरवरी – मनोविज्ञान
    26 फरवरी – अंग्रेजी
    1 मार्च – इंफॉर्मेटिक प्रैक्टिस
    3 मार्च – समाजशास्त्र
    4 मार्च – भौतिकी, अर्थशास्त्र सहित अन्य विषय
    8 मार्च – जीव विज्ञान
    11 मार्च – राजनीति विज्ञान
    13 मार्च – रसायन विज्ञान, इतिहास, बिजनेस स्टडीज सहित अन्य विषय
    16 मार्च – गणित
    17 मार्च – कृषि, गृह विज्ञान, अकाउंटेंसी
    19 मार्च – भूगोल सहित अन्य विषय


    10वीं की डेटशीट में क्या खास?

    कक्षा 10वीं की परीक्षा 24 फरवरी को मराठी, गुजराती, पंजाबी, सिंधी, पेंटिंग और कंप्यूटर जैसे विषयों से शुरू होगी। इसके बाद 2 मार्च को हिंदी, 5 मार्च को गणित (स्टैंडर्ड और बेसिक दोनों), 9 मार्च को अंग्रेजी और 12 मार्च को संस्कृत की परीक्षा होगी। विज्ञान का पेपर 15 मार्च को और सामाजिक विज्ञान का पेपर 18 मार्च को होगा, जो 10वीं की परीक्षा का आखिरी दिन भी है।


    10वीं की परीक्षाओं का पूरा शेड्यूल

    24 फरवरी- मराठी, गुजराती, पंजाबी, सिंधी, पेंटिंग, गायन वादन, तबला पखावज, कंप्यूटर
    25 फरवरी- एनएसक्यूएफ विषय, एआई
    27 फरवरी- उर्दू
    2 मार्च – हिंदी
    5 मार्च – गणित स्टैंडर्ड और बेसिक
    9 मार्च – अंग्रेजी
    12 मार्च – संस्कृत
    15 मार्च – विज्ञान
    18 मार्च – सामाजिक विज्ञान


    दूसरी यानी सप्लीमेंट्री परीक्षा कब?

    जो छात्र किसी कारणवश मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं हो पाते या बेहतर स्कोर की उम्मीद रखते हैं, उनके लिए बोर्ड ने जून 2027 में दूसरे मौके का भी इंतजाम किया है। कक्षा 12वीं की सप्लीमेंट्री परीक्षा 11 जून से 30 जून 2027 तक होगी, जबकि कक्षा 10वीं की परीक्षा 15 जून से 30 जून 2027 के बीच आयोजित की जाएगी।


    प्रैक्टिकल एग्जाम का क्या शेड्यूल है?

    नियमित छात्रों के प्रैक्टिकल एग्जाम उन्हीं के स्कूल में होंगे, जबकि निजी छात्रों को इसके लिए तय किए गए अलग केंद्रों पर जाना होगा। मुख्य परीक्षा से जुड़े प्रैक्टिकल 1 फरवरी से 19 मार्च 2027 के बीच होंगे, वहीं जून की सप्लीमेंट्री परीक्षा के प्रैक्टिकल 11 जून से 30 जून 2027 तक चलेंगे। सटीक तारीख और समय जानने के लिए छात्रों को अपने स्कूल प्राचार्य या केंद्र अधीक्षक से संपर्क करना चाहिए।

    छात्रों के लिए जरूरी निर्देश
    बोर्ड ने साफ कर दिया है कि परीक्षा के दौरान अगर किसी दिन स्थानीय या सार्वजनिक अवकाश घोषित हो जाता है, तब भी परीक्षा की तारीख नहीं बदली जाएगी और तय टाइम टेबल के मुताबिक ही एग्जाम होगा। हालांकि जरूरत पड़ने पर बोर्ड परीक्षा की तारीख या समय में बदलाव कर सकता है, और ऐसी स्थिति में छात्रों को उचित माध्यमों से सूचित किया जाएगा। दिव्यांग छात्रों के लिए भी नियमानुसार विशेष सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। सलाह यही है कि छात्र अभी से टाइम टेबल को सामने रखकर पढ़ाई का शेड्यूल बना लें, ताकि आखिरी वक्त की भागदौड़ से बचा जा सके।

  • MP के पूर्वी हिस्से में आज तेज बारिश के आसार, जबलपुर-रीवा, शहडोल-सागर संभाग में अलर्ट

    MP के पूर्वी हिस्से में आज तेज बारिश के आसार, जबलपुर-रीवा, शहडोल-सागर संभाग में अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम सक्रिय हो गया है। शुक्रवार को जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, सागर, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल, कटनी, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में अगले 24 घंटे के दौरान 4 इंच या इससे ज्यादा बारिश हो सकती है।

    वहीं भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, मैहर, उमरिया, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है।

    बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम, MP में बढ़ी बारिश
    मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में 12 अगस्त की सुबह लो प्रेशर एरिया यानी निम्न दबाव क्षेत्र बना था। यह 13 अगस्त की सुबह डिप्रेशन में बदल गया। फिलहाल यह सिस्टम उत्तर-पश्चिम दिशा में पश्चिम बंगाल और झारखंड की ओर बढ़ रहा है।

    इसके प्रभाव से मानसून ट्रफ सक्रिय रहेगी। इससे मध्य प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। खासकर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।

    MP में अब तक 20.7 इंच बारिश
    मौसम केंद्र के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक 524.8 मिमी यानी 20.7 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। यह सामान्य बारिश 23.5 इंच यानी 597 मिमी से 2.8 इंच कम है। इस तरह प्रदेश में अब तक कुल मिलाकर 12% कम बारिश हुई है। पूर्वी हिस्से में सामान्य से 20% और पश्चिमी हिस्से में 5% कम बारिश दर्ज की गई है।

    पूर्वी MP के कई जिलों में 53% तक कम बारिश
    जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में अब तक 19% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में सामान्य से 5% से 53% तक कम पानी गिरा है।

    वहीं पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में औसत से 3% से 47% तक कम बारिश हुई है।

    इन 12 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के 12 जिलों में अब तक औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इनमें भोपाल, गुना, सीहोर, राजगढ़, ग्वालियर, अनूपपुर, भिंड, बुरहानपुर, देवास, बड़वानी, खंडवा और खरगोन शामिल हैं।

  • उज्जैन सिंहस्थ की तैयारियों में तेजी के संकेत, भाजपा नेता जगदीश अग्रवाल को मेला प्राधिकरण की अध्यक्षता की जिम्मेदारी मिली

    उज्जैन सिंहस्थ की तैयारियों में तेजी के संकेत, भाजपा नेता जगदीश अग्रवाल को मेला प्राधिकरण की अध्यक्षता की जिम्मेदारी मिली

    मध्य प्रदेश: के उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों को लेकर राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण नियुक्ति की है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और उज्जैन विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल को सिंहस्थ मेला प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। शासन की ओर से देर शाम नियुक्ति संबंधी आदेश जारी किया गया।

    जगदीश अग्रवाल लंबे समय से उज्जैन की राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। वह भारतीय जनता पार्टी के पूर्व नगर अध्यक्ष के साथ प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य भी रह चुके हैं। इसके अलावा वह उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक और विकास संबंधी कार्यों से उनके जुड़ाव को देखते हुए सिंहस्थ से संबंधित जिम्मेदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    सिंहस्थ 2028 उज्जैन के लिए बड़े धार्मिक और प्रशासनिक आयोजनों में शामिल है। इस आयोजन में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में मेला क्षेत्र का विकास, यातायात व्यवस्था, मूलभूत सुविधाएं, सुरक्षा, स्वच्छता और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को समय रहते तैयार करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होगी।

    अब तक सिंहस्थ की पूर्व तैयारियों और प्रशासनिक समन्वय से जुड़े कामों की कमान संभागायुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह तथा स्थानीय प्रशासन के स्तर पर चल रही थी। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, निर्माण कार्यों की प्रगति और प्रस्तावित योजनाओं को लेकर लगातार बैठकें की जा रही हैं।

    मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद सिंहस्थ से जुड़े कार्यों में शासन और प्रशासन के बीच समन्वय को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। अध्यक्ष के स्तर पर मेला आयोजन से संबंधित विभिन्न विषयों को लेकर विभागों और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होगी।

    सिंहस्थ की तैयारियों में उज्जैन शहर के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जाता है। श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के लिए सड़क, परिवहन और पार्किंग व्यवस्था के साथ पेयजल, बिजली, स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करना भी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

    जगदीश अग्रवाल को उज्जैन विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष के रूप में शहर के विकास से जुड़े विषयों का अनुभव रहा है। इसी वजह से सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन में उनकी भूमिका को स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि आगामी तैयारियों में विभिन्न विभागों और प्रशासनिक एजेंसियों के साथ सामूहिक समन्वय सबसे अहम रहेगा।

    सिंहस्थ 2028 को लेकर राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की ओर से कई स्तरों पर तैयारियां पहले से जारी हैं। मेला क्षेत्र के विकास से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधा तक विभिन्न प्रस्तावों पर काम किया जा रहा है। आने वाले समय में इन योजनाओं के क्रियान्वयन और समयसीमा तय करने की प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है।

    अध्यक्ष की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर आधारभूत व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है। मेला प्राधिकरण के स्तर पर होने वाले निर्णयों और विभागीय समन्वय से आगामी महीनों में तैयारियों की गति और स्वरूप स्पष्ट होगा।

    उज्जैन में होने वाला सिंहस्थ धार्मिक आस्था के साथ शहर की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और बुनियादी ढांचे के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर होता है। इसलिए आयोजन की तैयारियों में प्रशासनिक व्यवस्था के साथ स्थायी विकास कार्यों पर भी ध्यान देना जरूरी होगा। जगदीश अग्रवाल की नियुक्ति के बाद अब सिंहस्थ 2028 की तैयारियों से जुड़े कामों को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

  • सावन में आगर-मालवा बना शिवमय, विशाल कलश यात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, वर्चुअली जुड़े मुख्यमंत्री मोहन यादव

    सावन में आगर-मालवा बना शिवमय, विशाल कलश यात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, वर्चुअली जुड़े मुख्यमंत्री मोहन यादव

    मध्य प्रदेश :  के आगर-मालवा में सावन माह के अवसर पर आयोजित विशाल कलश यात्रा में आस्था और श्रद्धा का बड़ा जनसमागम देखने को मिला। विधायक मधु गेहलोत के आह्वान पर आयोजित इस यात्रा में हजारों महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर हिस्सा लिया। यात्रा के दौरान हर-हर महादेव और जय भोलेनाथ के जयघोष से शहर का वातावरण भक्तिमय हो गया।

    विशाल कलश यात्रा की शुरुआत पुरानी कृषि उपज मंडी परिसर से हुई। यात्रा रवाना होने से पहले यहां धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद महिलाओं और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या के साथ यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों की ओर रवाना हुई। सावन के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं की बड़ी भागीदारी मुख्य आकर्षण रही।

    यात्रा के दौरान आगर-मालवा के प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई दीं। कई स्थानों पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत किया। पूरे मार्ग में भक्ति गीतों और धार्मिक जयघोषों से वातावरण शिवमय बना रहा। बड़ी संख्या में महिलाओं के सिर पर सजे कलशों ने यात्रा की भव्यता को और बढ़ाया।

    इस धार्मिक आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी भोपाल से वर्चुअल माध्यम से जुड़े। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उन्होंने कार्यक्रम में शामिल महिलाओं और श्रद्धालुओं को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने सावन के दौरान आयोजित इस धार्मिक आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने धार्मिक आयोजनों को सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का माध्यम बताते हुए कार्यक्रम से जुड़े श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। वर्चुअल संबोधन के दौरान उन्होंने महिलाओं की बड़ी भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की ऑनलाइन मौजूदगी से आयोजन को अतिरिक्त महत्व मिला।

    कलश यात्रा शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर बाबा बैजनाथ महादेव मंदिर पहुंची। मंदिर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक किया और पूजा-अर्चना की। इस दौरान प्रदेश और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की गई।

    बाबा बैजनाथ महादेव मंदिर परिसर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। सावन के धार्मिक माहौल में भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए लोगों में उत्साह दिखाई दिया। यात्रा के दौरान धार्मिक अनुशासन और सामूहिक भागीदारी के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया।

    आयोजन में जनप्रतिनिधियों के साथ सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े लोगों की भी सहभागिता रही। महिलाओं और युवतियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने कलश यात्रा को व्यापक स्वरूप दिया। स्थानीय स्तर पर आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लेकर सामूहिक आस्था का प्रदर्शन किया।

    सावन के दौरान निकाली गई इस विशाल कलश यात्रा ने आगर-मालवा में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को एक साथ जोड़ा। यात्रा के माध्यम से श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। वहीं बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने आयोजन को विशेष स्वरूप दिया।

    कार्यक्रम के दौरान शहर में धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा। पुरानी कृषि उपज मंडी से बाबा बैजनाथ महादेव मंदिर तक निकली यात्रा में श्रद्धालुओं की सहभागिता और जयघोष लगातार सुनाई देते रहे। आयोजन ने सावन की धार्मिक परंपराओं के साथ सामाजिक सहभागिता और सामूहिक एकता का संदेश भी प्रस्तुत किया।

  • अहिल्याबाई होल्कर स्मृति समारोह में बोले मोहन यादव, पाल-गड़रिया समाज के लिए जल्द गठित होगा नया बोर्ड

    अहिल्याबाई होल्कर स्मृति समारोह में बोले मोहन यादव, पाल-गड़रिया समाज के लिए जल्द गठित होगा नया बोर्ड

    मध्य प्रदेश। के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर स्मृति समारोह में पाल-गड़रिया समाज को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार जल्द ही पाल-गड़रिया समाज के लिए बोर्ड का गठन करेगी। उन्होंने कहा कि इस बोर्ड के माध्यम से समाज से जुड़े लोगों को बेहतर प्रतिनिधित्व देने और उनके कल्याण से संबंधित कार्यों को गति देने का प्रयास किया जाएगा।

    समारोह का आयोजन पुण्य श्लोका लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 231वीं पुण्यतिथि के अवसर पर किया गया। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की और लोकमाता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में देवी अहिल्याबाई होल्कर के जीवन, उनके प्रशासनिक योगदान और समाज के प्रति उनकी सेवा भावना को याद किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देवी अहिल्याबाई होल्कर को सुशासन की प्रतिमूर्ति बताते हुए कहा कि उनका शासनकाल न्याय, सेवा और जनकल्याण के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि मालवा की इस महान शासिका के योगदान से मध्य प्रदेश के साथ पूरा देश गौरवान्वित होता है। उनके प्रशासन में जनहित को प्राथमिकता मिली और उन्होंने शासन व्यवस्था में कई ऐसे उदाहरण स्थापित किए, जो आज भी प्रेरणा देते हैं।

    डॉ. यादव ने कहा कि देवी अहिल्याबाई का जीवन सेवा, सुशासन, न्याय, त्याग, महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार भी लोकमाता के आदर्शों से प्रेरणा लेकर विकास और जनकल्याण के कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है।

    पाल-गड़रिया समाज के बोर्ड की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार समाज के लोगों के कल्याण और उनकी आवश्यकताओं को लेकर गंभीर है। उन्होंने पाल-गड़रिया समाज को गोपाल कृष्ण के वंशजों से जोड़ते हुए कहा कि सरकार उनके हितों के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। बोर्ड के गठन से समाज से जुड़े विषयों को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाने और कल्याणकारी गतिविधियों को व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ के मूलमंत्र के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाओं और कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया जा रहा है। पाल-गड़रिया समाज के लिए प्रस्तावित बोर्ड को भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने पशुपालन और दूध उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार का प्रयास है कि पशुपालन से जुड़े परिवारों की आय में वृद्धि हो और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिले।

    उन्होंने कहा कि दूध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालन को प्रोत्साहित करने से ग्रामीण परिवारों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर विकसित किए जा सकते हैं। इसके लिए सरकार विभिन्न स्तरों पर आवश्यक प्रोत्साहन और सुविधाओं को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है।

    समारोह के दौरान लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के आदर्शों को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प भी लिया गया। मुख्यमंत्री की पाल-गड़रिया समाज के बोर्ड के गठन की घोषणा के बाद अब इसके गठन की प्रक्रिया और स्वरूप को लेकर आगे की जानकारी सामने आने की उम्मीद है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य समाज से जुड़े कल्याणकारी कार्यों को संस्थागत रूप से आगे बढ़ाना और प्रतिनिधित्व को मजबूत करना है।

  • दिल्ली में नितिन नवीन से मिले हेमंत खंडेलवाल, मध्य प्रदेश भाजपा संगठन और आगामी रणनीति पर हुई विस्तृत चर्चा

    दिल्ली में नितिन नवीन से मिले हेमंत खंडेलवाल, मध्य प्रदेश भाजपा संगठन और आगामी रणनीति पर हुई विस्तृत चर्चा

    नई दिल्ली / मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने गुरुवार को दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई इस बैठक में मध्य प्रदेश भाजपा संगठन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। मुलाकात को संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें प्रदेश में पार्टी की मौजूदा गतिविधियों और आगे की कार्ययोजना से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

    हेमंत खंडेलवाल और नितिन नवीन के बीच हुई मुलाकात को औपचारिक रूप से सौजन्य भेंट बताया गया है। हालांकि, बैठक के दौरान प्रदेश संगठन की गतिविधियों, पार्टी के आगामी कार्यक्रमों और संगठन को अधिक प्रभावी बनाने से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने प्रदेश में भाजपा के संगठनात्मक कामकाज और भविष्य की प्राथमिकताओं पर विचार साझा किए।

    मध्य प्रदेश में भाजपा संगठन लगातार अपनी गतिविधियों को विस्तार देने पर जोर दे रहा है। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष की राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ हुई बैठक को संगठन के अगले चरण की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में प्रदेश में चल रहे संगठनात्मक कार्यक्रमों की स्थिति और पार्टी कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।

    बैठक के दौरान प्रदेश संगठन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाने और पार्टी की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की दिशा में चल रहे प्रयासों की जानकारी राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ साझा की गई।

    मध्य प्रदेश भाजपा के सामने संगठनात्मक गतिविधियों को लगातार सक्रिय बनाए रखने के साथ आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की तैयारी भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में राष्ट्रीय नेतृत्व और प्रदेश संगठन के बीच बेहतर समन्वय पार्टी की रणनीति को प्रभावी तरीके से लागू करने में मददगार हो सकता है। बैठक में इसी समन्वय और संगठनात्मक दिशा से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

    मुलाकात के दौरान आगामी रणनीति को लेकर भी मंथन किया गया। प्रदेश में पार्टी की आगे की गतिविधियों, संगठनात्मक कार्यक्रमों और भविष्य में होने वाले अभियानों को लेकर दोनों नेताओं ने विचारों का आदान-प्रदान किया। हालांकि, बैठक के बाद किसी विशेष अभियान या कार्यक्रम को लेकर विस्तृत घोषणा सामने नहीं आई है।

    प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल संगठन को मजबूत करने और पार्टी की गतिविधियों को गति देने पर लगातार जोर दे रहे हैं। राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ उनकी बैठक से प्रदेश संगठन की प्राथमिकताओं को राष्ट्रीय स्तर पर साझा करने का अवसर भी मिला। इसके साथ ही प्रदेश में संगठन के स्तर पर आगे की कार्ययोजना को लेकर मार्गदर्शन और समन्वय की संभावना बनी है।

    भाजपा के लिए प्रदेश संगठन की मजबूती का सीधा संबंध कार्यकर्ताओं की सक्रियता और बूथ स्तर तक पार्टी की गतिविधियों से है। इसलिए संगठनात्मक बैठकों में स्थानीय स्तर की गतिविधियों, कार्यकर्ताओं की भागीदारी और आगामी कार्यक्रमों की तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

    दिल्ली में हुई इस मुलाकात के बाद मध्य प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर आगे की दिशा पर नजर रहेगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच हुई चर्चा से यह संकेत मिला है कि प्रदेश संगठन की गतिविधियों और आगामी रणनीति को लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ नियमित समन्वय जारी है।

    बैठक का मुख्य फोकस संगठन को मजबूत करने, आगामी गतिविधियों की तैयारी और प्रदेश में पार्टी की कार्ययोजना को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने पर रहा। आने वाले समय में इन चर्चाओं के आधार पर संगठनात्मक स्तर पर नई गतिविधियां और कार्यक्रम सामने आ सकते हैं।