Category: Madhya Pradesh

  • बंजर खेत में हरा भरा कमाल: बैतूल किसान ने तरबूज से कमाए 4 लाख

    बंजर खेत में हरा भरा कमाल: बैतूल किसान ने तरबूज से कमाए 4 लाख

    बैतूल । मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के हीरापुर-2 गांव के किसान दिलीप मंडल ने बंजर और बिना सिंचाई वाली जमीन को हरा-भरा कर आर्थिक सफलता की मिसाल पेश की है। वे पिछले 5 सालों से धान की फसल निकालने के बाद यही जमीन तरबूज की खेती के लिए उपयोग कर रहे हैं। केवल चार महीने में उनकी आय 3 से 6 लाख रुपए तक पहुँच जाती है।

    दिलीप मंडल ने बताया कि इस खेत पर 10 साल पहले केवल कंटीली झाड़ियां थीं। जमीन असमान थी और बारिश के मौसम में ही सीमित फसल आती थी। धीरे-धीरे नदी में रेत कम होने पर लोग तरबूज की खेती खेतों में करने लगे। उन्होंने भी अपनी जमीन को समतल कर निजी तालाब बनाकर तरबूज और रबी की फसल शुरू की। इस समय 5 एकड़ में तरबूज की खेती चल रही है जो 15 मार्च के बाद बाजार में बिकने लगेगी।

    कुल निवेश करीब ढाई लाख रुपए है जिसमें बीज खाद और मेहनत शामिल हैं। प्रति एकड़ 10 से 25 टन तक फसल निकलती है और बाजार में कीमत 10 से 20 रुपए प्रति किलो मिलती है। इससे सालाना 3 से 6 लाख रुपए की आमदनी होती है और पिछले वर्ष शुद्ध मुनाफा 3.75 लाख रुपए रहा।

    किसान ने खेती के लिए खास तकनीक अपनाई है। सबसे पहले बीजों को अंकुरित किया जाता है। फिर 2 गुणा 3 इंच के गड्ढों में तीन बीज और 200 ग्राम गोबर की खाद डालकर बुवाई की जाती है। पौधों में 3-4 पत्तियां आने के बाद सिंचाई शुरू होती है और खेत में नमी बनाए रखना जरूरी है। इसके अलावा फसल के बीच में जैविक और रासायनिक खाद का संतुलित उपयोग किया जाता है।

    वर्तमान में 5 एकड़ में कलिया गोल्ड और करन वैरायटी के बीज लगाए गए हैं जिसकी कीमत 32 हजार रुपए प्रति किलो है। कुल मिलाकर 2 किलो बीज और ढाई लाख रुपए की लागत में किसान 3 से 6 लाख रुपए की कमाई कर रहा है।

    दिलीप मंडल की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि उचित योजना सिंचाई प्रबंधन और सही तकनीक के जरिए बंजर जमीन को भी उपजाऊ बनाया जा सकता है। उनके प्रयास से न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ी है बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।

  • प्रशासन में जवाबदेही की नई मिसाल मोहन यादव ने कलेक्टर एसपी तक को नहीं बख्शा

    प्रशासन में जवाबदेही की नई मिसाल मोहन यादव ने कलेक्टर एसपी तक को नहीं बख्शा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सख्त संदेश देते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव लगातार कड़े फैसले लेते नजर आ रहे हैं। अपने सवा दो साल के कार्यकाल में उन्होंने यह साफ कर दिया है कि लापरवाही और जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हाल ही में गुना के एसपी अंकित सोनी और सीधी के कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी को हटाने की कार्रवाई इसी सख्ती का ताजा उदाहरण है।

    13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से ही डॉ. यादव ने प्रशासन में जवाबदेही तय करने की दिशा में आक्रामक रुख अपनाया है। अब तक उनके कार्यकाल में 10 आईएएस और 8 आईपीएस अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। खास बात यह है कि इन कार्रवाइयों में कई कलेक्टर और एसपी स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं जो प्रशासनिक ढांचे में बेहद अहम माने जाते हैं।

    गुना में हाल ही में सामने आए मामले में एक व्यापारी से एक करोड़ रुपये की जब्ती के बाद कथित रूप से 20 लाख रुपये लेकर छोड़ देने और उचित कार्रवाई न करने के आरोपों के चलते एसपी अंकित सोनी को हटा दिया गया। इस मामले में थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को भी निलंबित किया गया है। वहीं सीधी में कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी पर दफ्तर में नियमित रूप से उपस्थित न रहने और जनसुनवाई में लापरवाही के आरोप लगे जिसके बाद उन्हें पद से हटाया गया।

    इससे पहले भी कई बड़े मामलों में सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। इंदौर में दूषित पानी की आपूर्ति से हुई मौतों के बाद नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त पर कार्रवाई की गई। हरदा में पटाखा फैक्ट्री विस्फोट और सागर में दीवार गिरने जैसी घटनाओं में भी कलेक्टर और एसपी को हटाया गया। मऊगंज हत्याकांड और सिवनी में गोवंश हत्या के मामलों में भी प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए पद से हटाया गया।

    शाजापुर में एक कलेक्टर द्वारा ड्राइवर से अपमानजनक व्यवहार का वीडियो वायरल होने के बाद भी तत्काल कार्रवाई की गई थी। वहीं कटनी में विवादों में घिरे एसपी को भी हटाकर स्पष्ट संदेश दिया गया कि व्यक्तिगत आचरण भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना प्रशासनिक कार्य।

    इन सभी घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि सरकार अब केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि जमीनी स्तर पर जवाबदेही तय करने के लिए ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री का यह रुख प्रशासनिक मशीनरी में अनुशासन और जिम्मेदारी बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में यह एक नया प्रशासनिक ट्रेंड बनता दिख रहा है जहां लापरवाही या विवाद सामने आते ही त्वरित कार्रवाई की जा रही है। इससे एक ओर जहां अधिकारियों में सतर्कता बढ़ी है वहीं आम जनता के बीच यह संदेश भी गया है कि शासन अब गंभीर मामलों में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतेगा।

  • सेहत से खिलवाड़ नहीं होगा बर्दाश्त इंदौर में खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई कई डेयरियों पर छापा

    सेहत से खिलवाड़ नहीं होगा बर्दाश्त इंदौर में खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई कई डेयरियों पर छापा


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में मिलावटी दूध के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। लोगों की सेहत से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर अब लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने सोमवार को कनाडिया क्षेत्र में छापेमारी कर कई डेयरियों की जांच की।

    खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने कनाडिया रोड और आसपास के इलाकों में सघन अभियान चलाते हुए जोशी दूध दही भंडार ओसवाल डेरी गणेश दूध दही भंडार और पूजा डेयरी सहित कई प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने अलग अलग डेयरियों से दूध और दुग्ध उत्पादों के नमूने एकत्र किए ताकि उनकी गुणवत्ता की जांच की जा सके।

    कार्रवाई के दौरान जोशी दूध दही भंडार से 4 ओसवाल डेरी से 3 गणेश दूध दही भंडार से 3 और पूजा डेयरी से दूध व मावा के 2 नमूने लिए गए। इस तरह कुल 12 सैंपल जब्त किए गए हैं जिन्हें जांच के लिए भेजा जा रहा है। अधिकारियों ने मौके पर ही डेयरी संचालकों को साफ सफाई बनाए रखने और मिलावट से दूर रहने के सख्त निर्देश दिए।

    निरीक्षण के दौरान टीम ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद्य पदार्थों में किसी भी तरह की मिलावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आम लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने डेयरी संचालकों को चेतावनी दी कि अगर नियमों का उल्लंघन पाया गया तो कानूनी कार्रवाई तय है।

    खाद्य विभाग के अनुसार सभी नमूनों को जांच के लिए भोपाल स्थित राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे जिसमें जुर्माना से लेकर लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।

    प्रशासन का कहना है कि यह अभियान केवल एक दिन की कार्रवाई नहीं है बल्कि इसे लगातार जारी रखा जाएगा। शहर के अन्य इलाकों में भी इसी तरह की छापेमारी कर मिलावटी दूध और नकली दुग्ध उत्पाद बेचने वालों पर शिकंजा कसा जाएगा।

    कुल मिलाकर इंदौर प्रशासन का यह कदम साफ संकेत देता है कि अब खाद्य सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लोगों की सेहत से समझौता करने वालों के खिलाफ सख्ती लगातार बढ़ती रहेगी।

  • एमपी में 26 मार्च से फिर करवट बदलेगा मौसम, बारिश-आंधी का अलर्ट, पहले बढ़ेगी तेज गर्मी

    एमपी में 26 मार्च से फिर करवट बदलेगा मौसम, बारिश-आंधी का अलर्ट, पहले बढ़ेगी तेज गर्मी

    भोपाल। मध्य प्रदेश में मार्च के अंतिम सप्ताह में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। मौसम विभाग भोपाल के अनुसार, 26 मार्च से प्रदेश में बारिश का नया दौर शुरू होगा। इस सिस्टम का असर खासतौर पर पूर्वी मध्य प्रदेश जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के 20 से अधिक जिलों में देखने को मिलेगा।

    हालांकि, इससे पहले प्रदेशवासियों को अगले तीन दिनों तक तेज गर्मी का सामना करना पड़ेगा। दिन के तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, 26 मार्च से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा, जिसका असर मध्य प्रदेश के मौसम पर भी पड़ेगा। फिलहाल दक्षिण-पश्चिम राजस्थान और उससे लगे पाकिस्तान क्षेत्र में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम बना हुआ है, लेकिन इसका प्रभाव प्रदेश में नहीं दिखेगा।

    बारिश थमी तो बढ़ी गर्मी

    18 से 21 मार्च के बीच प्रदेश में बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी रहा, जो सप्ताहांत में थम गया। इसके बाद तापमान में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई। रविवार को अधिकांश शहरों में पारा 32 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। प्रमुख शहरों में उज्जैन में 34 डिग्री, इंदौर में 33.3 डिग्री, भोपाल में 33 डिग्री, ग्वालियर में 31.8 डिग्री और जबलपुर में 31.3 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।

    वहीं, नर्मदापुरम प्रदेश का सबसे गर्म स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 37.7 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा रायसेन में 37.6 डिग्री, रतलाम में 37.2 डिग्री, खरगोन और नरसिंहपुर में 36 डिग्री तथा गुना में 33 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। लगभग सभी शहरों में दिन के तापमान में बढ़ोतरी देखी गई।

    4 दिन में 45 जिलों में असर, फसलों को नुकसान

    पिछले चार दिनों में सक्रिय मजबूत मौसम प्रणाली के चलते प्रदेश के 45 जिलों में आंधी और बारिश हुई, जबकि 17 जिलों में ओलावृष्टि भी दर्ज की गई। तेज हवाओं और ओलों के कारण केला, पपीता और गेहूं जैसी फसलों को नुकसान पहुंचा है। धार और खरगोन समेत कई जिलों में इसका प्रभाव अधिक रहा।

    अप्रैल-मई में पड़ेगी भीषण गर्मी

    मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि इस साल अप्रैल और मई में गर्मी अपने चरम पर होगी। ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है। वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में भी तेज गर्मी पड़ने की संभावना है।

  • MP: भिंड जिले में अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए BJP MLA, जानें क्यां है मामला?

    MP: भिंड जिले में अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए BJP MLA, जानें क्यां है मामला?


    भिंड।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के भिंड जिले (Bhind District) के लहार विधायक अम्बरीश शर्मा (MLA Ambrish Sharma) ने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन (Demonstration) शुरू किया। उन्होंने कहा कि वे पिछले 35 साल से जनता की लड़ाई लड़ रहे हैं और अब भी तीन प्रमुख मुद्दों को लेकर जनता के साथ मैदान में उतरे हैं। विधायक ने पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह (Dr. Govind Singh) के परिवार के नाम से बनी कोठी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कथित रूप से सरकारी रास्ते पर बनी है, जो दलित और पिछड़ी बस्ती का रास्ता है। उन्होंने बताया कि इस रास्ते को लेकर अनुसूचित जाति के लोग पिछले 595 दिनों से आंदोलनरत हैं, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

    विधायक ने प्रशासन से मांग की कि यदि नापतौल सही है तो लिखित में जानकारी दी जाए, नहीं रास्ता तत्काल खुलवाया जाए। दूसरे मुद्दे पर विधायक ने बिजली कंपनी की उप महाप्रबंधक के व्यवहार को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अधिकारी जनता के साथ अभद्र व्यवहार कर रही हैं और लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।


    ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी की मुलाकात

    उन्होंन बताया कि इस मामले को लेकर वे ऊर्जा मंत्री और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी मुलाकात कर चुके हैं। तीसरे मुद्दे के रूप में विधायक ने लहार क्षेत्र में रेत खदानों के बंद होने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर खदानों को तीन हिस्सों में बांटा गया, लेकिन लहार क्षेत्र की खदानें अब तक शुरू नहीं हो सकीं। इसका असर यह है कि पास के मेहगांव क्षेत्र में 5 हजार रुपए में मिलने वाली रेत लहार में 11 हजार रुपए में बिक रही है।

    समाजसेवी बाबूलाल टैंगोर ने बताया कि दलित बस्ती मझतौरा मोहल्ले के सरकारी रास्ते को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है।उनका कहना है कि सरकारी नापतौल में यह स्पष्ट हो चुका है कि रास्ता अवरुद्ध है। इसके बावजूद प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा।उन्होंने बताया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और एसडीएम कोर्ट तक से निर्णय हो चुके हैं, लेकिन जमीन पर अमल नहीं हो रहा।उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक रास्ता नहीं खुलता, आंदोलन जारी रहेगा।

  • मप्रः आईएएस विकास मिश्रा बने सीधी के नए कलेक्टर, हितिका वसाल गुना एसपी की कमान

    मप्रः आईएएस विकास मिश्रा बने सीधी के नए कलेक्टर, हितिका वसाल गुना एसपी की कमान


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में प्रशासनिक सख्ती के बीच सरकार ने सीधी और गुना जिलों में बड़े स्तर पर बदलाव किए हैं। सीधी में नए कलेक्टर के रूप में वर्ष 2013 बैच के आईएएस अधिकारी विकास मिश्रा की पदस्थापना की गई है, जबकि गुना जिले की पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी आईपीएस अधिकारी हितिका वसाल को सौंपी गई है।

    रविवार देर शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सख्त रुख के बाद यह बदलाव किया गया है। दरअसल, मुख्यमंत्री रविवार को मिर्जापुर से सीधे सीधी जिला मुख्यालय पहुंचे थे। यहां स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान उन्हें कई शिकायतें मिलीं। जिसके बाद उन्होंने ये एक्शन लिया।

    मुख्यमंत्री ने सीधी जिले में अचानक पहुंचकर स्थानीय नागरिकों से सीधा संवाद कर प्रशासनिक व्यवस्था और योजनाओं के मैदानी क्रियान्वयन की स्थिति की जानकारी ली थी। उन्होंने जनसंवाद के दौरान आमजन और जनप्रतिनिधियों द्वारा विभिन्न मुद्दों पर की गई शिकायतों और जिला प्रशासन एवं विभिन्न विभागों की कार्य प्रणाली पर विस्तार से समीक्षा एवं फीडबैक लिया था।

    इसी दौरान मुख्यमंत्री ने प्राप्त शिकायतों के दृष्टिगत सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी को तत्काल प्रभाव से हटाने और जिला सहकारी बैंक के महाप्रबधंक पीएस धनवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिये थे। साथ ही गुना जिले में तलाशी के दौरान मिली नगद राशि में हेरफेर के मामले में पुलिस अधीक्षक गुना अंकित सोनी की भूमिका को यथोचित न मानते हुए पुलिस अधीक्षक पद से हटाने के निर्देश भी दिये थे।

    मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद राज्य शासन ने बड़ा प्रशासनिक एक्शन लेते हुए गुना हवालाकांड के बाद एसपी अंकित सोनी को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। उन्हें पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक बनाया गया है। इंदौर में 15वीं बटालियन की कमांडेंट हितिका वसल को उनकी जगह गुना का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। 2017 बैच की आईपीएस अधिकारी हितिका वसाल को अब गुना जिले की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    वहीं, सीधी में जनप्रतिनिधियों से मिली शिकायतों के बाद सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी को भी हटाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग में ओएसडी और सह आयुक्त बनाया गया है। उनकी जगह 2013 बैच के विकास मिश्रा को नया कलेक्टर बनाया है। विकास मिश्रा इससे पहले मुख्यमंत्री सचिवालय में अपर सचिव के साथ आयुक्त आर्थिक एवं सांख्यिकी का दायित्व संभाल रहे थे। अब उन्हें सीधी जिले की कमान सौंपी गई है।

  • मध्य प्रदेश में एलपीजी का संकट, 12 दिन से होटल-रेस्टोरेंट को नहीं मिले सिलेंडर

    मध्य प्रदेश में एलपीजी का संकट, 12 दिन से होटल-रेस्टोरेंट को नहीं मिले सिलेंडर


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में एलपीजी का संकट बना हुआ है। कमर्शियल गैस सिलेंडरों की किल्लत ने होटल और रेस्टोरेंट उद्योग की कमर तोड़ दी है। लगातार 12 दिन से होटल और रेस्टोरेंट को कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई नहीं हुई है।

    इसे लेकर रविवार को नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया मध्य प्रदेश चैप्टर और फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने प्रदेश की खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव रश्मि शमी से मुलाकात की। मुख्य सचिव शमी ने छुट्टी के दिन होटल संचालकों से बात और ऑयल कंपनियों के साथ बैठक भी की।

    दरअसल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध के कारण देश में गैस आपूर्ति बाधित हुई है। केंद्र सरकार द्वारा शुरुआत में आपूर्ति बंद करने के बाद इसे 20 प्रतिशत तक बहाल करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर यह राहत अब तक व्यवसायियों तक नहीं पहुंच सकी है। इस कारण प्रदेश के 50 हजार से ज्यादा होटल और रेस्टोरेंट पर संकट के बादल छाए हुए हैं। वे बंद होने की कगार पर है।

    होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए मध्य प्रदेश होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी ने खाद्य आपूर्ति सचिव रश्मि अरुण शमी से बातचीत की। प्रदेश भर के होटल संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि केंद्र के 20 प्रतिशत आपूर्ति के आदेश के बावजूद राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर वितरण व्यवस्था ठप पड़ी है।

    सूरी ने कहा कि हमने सरकार के सामने अपनी मांगे रखी हैं और हमें उम्मीद है कि जल्द से जल्द हमें मदद मिलेगी। होटल और रेस्टोरेंट एसोसिशन से लाखों लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है। सभी के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। सुमित सूरी के अनुसार संगठन की प्रमुख मांग है कि वर्तमान 20 प्रतिशत की सीमा को बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाए, ताकि व्यवसायों का संचालन सुचारू रूप से हो सके। इसके अलावा उन्होंने एक नया प्रस्ताव भी रखा है कि सभी संस्थानों के लिए आपूर्ति का एक समान नियम नहीं होना चाहिए। होटलों की श्रेणी और उनकी मांग के आधार पर गैस का कोटा निर्धारित किया जाना चाहिए। बड़े संस्थानों को उनकी खपत के अनुसार अधिक और छोटे संस्थानों को उनके अनुपात में गैस उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साथ ही पीएनजी सप्लाई को भी मांग के अनुरूप बढ़ाने की मांग रखी गई है।

    इधर, भोपाल होटल एवं रेस्तरां संघ के अध्यक्ष तेजकुलपाल सिंह पाली ने बताया कि कमर्शियल गैस आपूर्ति पर सख्त पाबंदी के कारण होटल व्यवसाय ठप होने की कगार पर है, जिसके समाधान को लेकर अपर मुख्य सचिव से चर्चा कर गैस की निर्बाध आपूर्ति बहाल करने की मांग की और ज्ञापन सौंपा गया है।

    पाली ने बताया कि भोपाल के होटल, रेस्तरा, ढाबों, खान-पान सेवा आदि रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर के अभाव में संचालन व्यवस्था में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि भोपाल के पंजीकृत होटलों और रेस्तरांओं को उनकी वास्तविक परिचालन आवश्यकताओं के आधार पर वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों का एक सीमित कोटा आवंटित किया जाए। प्रत्येक प्रतिष्ठान को आवश्यक रसोई संचालन बनाए रखने और खाद्य सेवाओं में व्यवधान से बचने के लिए वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर प्रदाय किए जाए। भोपाल में 2 हजार होटल और रेस्टोरेंट है। जहां हालात गंभीर हो गए हैं।

    नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन के प्रतिनिधि अभिषेक बाहेती ने बताया कि कमर्शियल गैस नहीं मिलने की बात से मुश्किलें बढ़ गई हैं। गैस के अभाव में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों पर बड़ा संकट खड़ा हुआ है। इसे दूर करने की मांग की गई है।

  • मप्र के उज्जैन में सिंहस्थ से पहले दो धड़ों में बंटे अखाड़े, अध्यक्ष पद को लेकर विवाद

    मप्र के उज्जैन में सिंहस्थ से पहले दो धड़ों में बंटे अखाड़े, अध्यक्ष पद को लेकर विवाद


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश के उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 (महाकुंभ) से पहले अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर विवाद सामने आया है। इस पद पर दो दावे किए जा रहे हैं। 13 अखाड़े दो गुट में बंटे नजर आ रहे हैं। एक धड़ा निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी को अध्यक्ष मानता है, जबकि दूसरा महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रविंद्र पुरी को अध्यक्ष बता रहा है। एक जैसा नाम होने से असमंसज की स्थिति बनी है।

    दरअसल, उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ आयोजित होने वाला है। सिंहस्थ को लेकर जहां एक और सरकार और प्रशासन बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है। निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी पिछले छह महीनों से अध्यक्ष के रूप में उज्जैन आते-जाते रहे हैं। इस दौरान प्रशासन ने उन्हें शिप्रा नदी प्रोजेक्ट सहित मेले की तैयारियों की जानकारी भी दी, लेकिन अब साधु संतों में दो फाड़ दिखाई दे रही है। देश के 13 अखाड़े में से आठ अखाड़ों का समर्थन महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पूरी महाराज को मिला है।

    रविवार को उज्जैन में मंगलनाथ मार्ग स्थित निर्वाणी अणि अखाड़ा में संतों का समागम हुआ। इसमें बड़ी संख्या में संत मौजूद रहे। संतों के इस समागम में 13 में से आठ अखाड़ों के साधु संत शामिल हुए। खास बात यह रही कि यहां हरिद्वार से पहली बार आए महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव संत रविंद्र पुरी महाराज स्वागत सम्मान हुआ। ढोल-नगाड़ों के बीच संतों में उत्साह नजर आया। कार्यक्रम में महंत सत्यानंद महाराज (बड़ा उदासीन), महंत मंगलदास जी (नया अखाड़ा), महंत विनीत गिरी (महानिर्वाणी), महंत रामेश्वर दास, भगवान दास और दिग्विजय दास सहित विभिन्न अखाड़ों के संत-महंत शामिल हुए।

    कार्यक्रम के बाद रविंद्र पुरी महाराज ने मीडिया से कहा कि वे खुद वर्तमान में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष हैं। उनके साथ में निर्मोही अणि अखाड़े के राजेंद्र दास सचिव हैं। उन्हें लिखित और चयनित दोनों रूपों में 13 में से आठ अखाड़े का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद चार संप्रदाय से मिलकर बनी है। इसमें संन्यासी, उदासीन, वैष्णव और निर्मल शामिल है। इन चारों संप्रदाय के अखाड़े उनके नेतृत्व वाली अखाड़ा परिषद में शामिल हैं। इसीलिए वे खुद अखाड़ा परिषद के चुने गए अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 मे सिंहस्थ महाकुंभ आयोजित होने वाला है। सिंहस्थ को लेकर सरकार और प्रशासन बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है। सिंहस्थ कुंभ के आयोजन को लेकर हमारी समय समय पर अधिकारियों से सूक्ष्म चर्चा होती रहती है। हम लगातार अधिकारियों के संपर्क में रहेंगे।


    इन अखाड़ों का समर्थन बताया

    देश के 13 अखाड़े में से 8 अखाड़ों का समर्थन महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पूरी महाराज को मिला है। इन अखाड़ों में 1- महानिर्वाणी अखाड़ा, 2- अटल अखाड़ा, 3-निर्मल अखाड़ा, 4- नया उदासी अखाड़ा, 5- बड़ा उदासीन अखाड़ा, 6-निर्वाणी अणि अखाड़ा, 7- दिगंबर अणि अखाड़ा और 8-निर्मोही अणि अखाड़ा शामिल है। इस प्रकार बहुमत के आधार पर अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पुरी महाराज ही होंगे।

    इधर निरंजनी अखाड़े से जुड़े रविंद्र पूरी महाराज ने कहा कि कुम्भ आ रहा है, ऐसे कई संत अपने आप को अध्यक्ष बताएंगे। सर्वसम्मति से मुझे अध्यक्ष बनाया गया था। जब मैंने इस्तीफा दिया नहीं तो महानिर्वाणी वाले रविंद्र पूरी कैसे अध्यक्ष बन सकते है।

  • चैत्र नवरात्रि पर शिवसिटी में निकली एक किलोमीटर लंबी भव्य चुनरी यात्रा, विशाल भंडारे का भी आयोजन

    चैत्र नवरात्रि पर शिवसिटी में निकली एक किलोमीटर लंबी भव्य चुनरी यात्रा, विशाल भंडारे का भी आयोजन

    भोपाल। राजधानी भोपाल के अरहेड़ी रोड स्थित शिवसिटी कॉलोनी में रविवार को चैत्र नवरात्रि के अवसर पर खेड़ापति हनुमान मंदिर से भव्य चुनरी यात्रा निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक उल्लास का माहौल बना रहा।

    जानकारी के अनुसार, अयोध्या नगर से लगे अरहेड़ी रोड की शिवसिटी कॉलोनी से शुरू हुई करीब एक किलोमीटर लंबी इस यात्रा में श्रद्धालु डीजे, ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के साथ आगे बढ़ते रहे। दो दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम के तहत भगवान शनिदेव की स्थापना भी की गई। इसके बाद चुनरी यात्रा निकाली गई और श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।

    इस आयोजन में शिवसिटी के साथ ही शिवालय कॉलोनी और शिवधाम कॉलोनी के नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भक्तिमय वातावरण में संपन्न कार्यक्रम के दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और धार्मिक उत्सव का आनंद लिया।

  • दतिया में नवरात्र में बड़ी माता का दिव्य श्रृंगार: फूल-आभूषणों से सजा मंदिर, श्रद्धालुओं की भीड़

    दतिया में नवरात्र में बड़ी माता का दिव्य श्रृंगार: फूल-आभूषणों से सजा मंदिर, श्रद्धालुओं की भीड़


    दतिया । दतिया में स्थित श्री विजय काली पीठ बड़ी माता मंदिर इन दिनों अपने आकर्षक दिव्य श्रृंगार के लिए भक्तों का ध्यान खींच रहा है। चैत्र नवरात्र के अवसर पर माता को फूलों आभूषणों और सुंदर वस्त्रों से सजा कर उनके दरबार में दर्शनार्थियों का स्वागत किया जा रहा है। भक्त इस दृश्य को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं और पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का माहौल बना रहता है।

    मंदिर परिसर में नवरात्र के दौरान मेले का आयोजन भी किया गया है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर पूजा अर्चना कर रहे हैं। मंदिर प्रशासन ने भक्तों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की भी व्यवस्था की है। बड़ी माता को दतिया शहर की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है और हर साल नवरात्र में उनके दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती है।

    इतिहास के अनुसार दतिया रियासत के राजा विजय बहादुर ने 1839 से 1857 के बीच इस मंदिर की स्थापना कराई थी। मान्यता है कि राजा ने अपनी त्वचा रोग से मुक्ति पाने के लिए देवी की स्थापना कराई थी। लोकविश्वास है कि चेचक जैसी बीमारियों में देवी को जल अर्पित कर पीड़ित को पिलाने से लाभ मिलता है।

    बुंदेला राजाओं का बनारस से संबंध रहा है और वे देवी उपासक थे। शहर में मांगलिक कार्यों की शुरुआत आज भी बड़ी माता के पूजन से होती है। नवरात्र के दौरान नवमी और दशमी पर यहां जवारे चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है। यह मेला न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

    भक्तों का कहना है कि माता का दिव्य श्रृंगार और मंदिर का वातावरण उन्हें आध्यात्मिक ऊर्जा और मानसिक शांति प्रदान करता है। बड़े माता के दर्शन और विशेष पूजा अर्चना के कारण नवरात्र के अवसर पर मंदिर में भक्तों की उपस्थिति हर साल बढ़ती ही जा रही है।