Category: Madhya Pradesh

  • खंडवा को केंद्र सरकार से मिली 4 सड़कें: PMGSY के तहत 14 करोड़ की परियोजना को मंजूरी

    खंडवा को केंद्र सरकार से मिली 4 सड़कें: PMGSY के तहत 14 करोड़ की परियोजना को मंजूरी


    खंडवा। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी विकास सौगात दी है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत खंडवा जिले की चार महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं पर कुल 13.74 करोड़ रुपये का खर्च किया जाएगा, जिसके तहत 14.44 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया जाएगा।

    इस स्वीकृति के बाद लंबे समय से लंबित ग्रामीण इलाकों की सड़क सुविधा से जुड़ी मांगों को राहत मिलने की उम्मीद है। नई सड़कों के बनने से न सिर्फ गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और आवागमन व्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।

    ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार
    इन सड़कों के निर्माण से किसानों को अपनी फसल मंडियों तक पहुंचाने में आसानी होगी, वहीं विद्यार्थियों, मरीजों और व्यापारियों के लिए भी आवागमन सुगम हो जाएगा। बरसात के मौसम में जिन इलाकों में संपर्क टूट जाता था, वहां अब स्थायी सड़क सुविधा से राहत मिलेगी। केंद्र सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करना है, ताकि विकास का लाभ सीधे गांवों तक पहुंच सके।

    केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी मंजूरी
    इन परियोजनाओं को केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा मंजूरी प्रदान की गई है। खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने बताया कि स्वीकृति पत्र उन्हें सौंपा गया है और यह निर्णय क्षेत्र की वर्षों पुरानी जरूरतों को पूरा करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से ग्रामीण भारत में कनेक्टिविटी को मजबूत करने का काम तेजी से किया जा रहा है और खंडवा जिले को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

    कौन-कौन से मार्ग बनेंगे
    स्वीकृत परियोजनाओं में कुल चार सड़क मार्ग शामिल हैं:
    बरमलाय से कुकडाल मार्ग – 7.64 किमी, लागत 7.18 करोड़ रुपये
    बरमलाय से सुकलतालाई-4 मार्ग – 3.20 किमी, लागत 3.13 करोड़ रुपये
    लहाड़पुर से पारवाड़ी मार्ग – 2.24 किमी, लागत 2.06 करोड़ रुपये
    मालूद रोड से खेड़ी रैयत मार्ग – 1.36 किमी, लागत 1.35 करोड़ रुपये
    इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने पर ग्रामीण क्षेत्रों की आवाजाही व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

    ग्रामीणों में खुशी का माहौल
    सड़क निर्माण की स्वीकृति के बाद ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से खराब और कच्चे रास्तों के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन अब स्थायी सड़क बनने से उनकी समस्याएं काफी हद तक खत्म हो जाएंगी।

  • खरगोन में 1.05 लाख हेक्टेयर में कपास की बोवनी: सरकारी खरीदी से बढ़ा रकबा, प्रदेश में सबसे बड़ा लक्ष्य

    खरगोन में 1.05 लाख हेक्टेयर में कपास की बोवनी: सरकारी खरीदी से बढ़ा रकबा, प्रदेश में सबसे बड़ा लक्ष्य


    खरगोन। जिले में कपास की खेती इस बार तेज रफ्तार पकड़ती नजर आ रही है। प्री-मानसून गतिविधियों और अनुकूल मौसम के चलते अब तक 1.05 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई पूरी हो चुकी है, जो कुल निर्धारित लक्ष्य का लगभग 51 प्रतिशत है। नर्मदा क्षेत्र के कसरावद, महेश्वर और बड़वाह इलाकों में सबसे अधिक बुवाई दर्ज की गई है, जहां किसान तेजी से खेतों में काम कर रहे हैं। मध्य प्रदेश में कपास उत्पादन के प्रमुख जिलों में शामिल खरगोन इस बार भी अग्रणी बना हुआ है। इस वर्ष जिले के लिए 2.09 लाख हेक्टेयर (209800 हेक्टेयर) का बुवाई लक्ष्य तय किया गया है, जो पिछले वर्ष के लगभग समान है। हालांकि, पिछले साल हुई अच्छी सरकारी खरीदी के कारण इस बार कपास के रकबे में हल्की बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

    सरकारी खरीदी का असर, किसानों का बढ़ा रुझान
    कृषि विभाग के अनुसार पिछले वर्ष कपास की मजबूत सरकारी खरीदी ने किसानों का भरोसा बढ़ाया है, जिसका सीधा असर इस साल की बुवाई पर दिख रहा है। अनुमान है कि इस बार कपास का रकबा करीब 300 हेक्टेयर तक बढ़ सकता है। किसानों का कहना है कि बेहतर समर्थन मूल्य और खरीद व्यवस्था के चलते कपास की खेती अधिक लाभकारी साबित हो रही है, जिससे वे अन्य फसलों की तुलना में कपास को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    प्री-मानसून बारिश से मिला फायदा
    जिले में हाल ही में हुई प्री-मानसून बारिश ने खेती के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है। तापमान 38 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जो कपास की बुवाई के लिए उपयुक्त माना जाता है। मौसम में नमी और हल्की बारिश के कारण खेतों में नमी बनी हुई है, जिससे बुवाई कार्य में तेजी आई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि मौसम इसी तरह अनुकूल बना रहा तो आने वाले दिनों में बुवाई का आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है।

    नर्मदा क्षेत्र में सबसे ज्यादा बुवाई
    जिले के कसरावद, महेश्वर और बड़वाह क्षेत्रों में कपास की बुवाई सबसे अधिक दर्ज की गई है। इन क्षेत्रों में सिंचाई के बेहतर साधन उपलब्ध होने के कारण किसान समय पर बुवाई कर पा रहे हैं। सहायक संचालक कृषि प्रकाश ठाकुर ने बताया कि जिले में लू का असर कम हो गया है और यह समय कपास की बुवाई के लिए पूरी तरह अनुकूल है। उन्होंने पुष्टि की कि इस वर्ष का लक्ष्य 2.09 लाख हेक्टेयर तय किया गया है और विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    आने वाले दिनों में और बढ़ेगा रकबा
    कृषि विभाग का अनुमान है कि जैसे-जैसे मानसून करीब आएगा, वैसे-वैसे कपास की बुवाई में और तेजी आएगी। फिलहाल किसान अनुकूल मौसम का पूरा फायदा उठा रहे हैं और खेतों में गतिविधियां बढ़ गई हैं।

  • केरल हाईकोर्ट का फैसला: ‘वायरल गर्ल’ को बालिग माना, पति को एमपी में जमानत के लिए ट्रांजिट बेल

    केरल हाईकोर्ट का फैसला: ‘वायरल गर्ल’ को बालिग माना, पति को एमपी में जमानत के लिए ट्रांजिट बेल


    नई दिल्ली । केरल हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में ‘वायरल गर्ल’ को प्रथम दृष्टया बालिग मानते हुए उसके पति को एक महीने की ट्रांजिट बेल प्रदान कर दी है। इस आदेश के बाद मध्य प्रदेश पुलिस अब अगले एक महीने तक आरोपी पति को गिरफ्तार नहीं कर सकेगी। इस अवधि में उसे मध्य प्रदेश की अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करने की अनुमति दी गई है। यह मामला लगातार विवादों में घिरा हुआ है, जिसमें उम्र, शादी की वैधता और POCSO एक्ट के तहत दर्ज केस जैसे कई गंभीर पहलू शामिल हैं।

    कोर्ट ने जन्म प्रमाण पत्र और दस्तावेजों को माना आधार
    केरल हाईकोर्ट के जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने सुनवाई के दौरान कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद जन्म प्रमाण पत्र, वोटर आईडी और बैंक पासबुक जैसे दस्तावेज यह संकेत देते हैं कि युवती बालिग है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि युवती स्वयं भी अपनी उम्र बालिग होने का दावा कर रही है और उसने विवाह को लेकर शपथपत्र भी दिया है। हालांकि मध्य प्रदेश पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील दी कि जन्म प्रमाण पत्र फर्जी है और असल में युवती नाबालिग है। लेकिन कोर्ट ने फिलहाल इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

    पति को मिली राहत, गिरफ्तारी पर रोक
    अदालत ने आदेश दिया कि पति 3 जून से एक महीने के भीतर मध्य प्रदेश की सक्षम अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकता है। इस अवधि के दौरान उसे पुलिस द्वारा गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। इस फैसले को मामले में बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि मध्य प्रदेश पुलिस उस पर POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई कर रही थी।

    शादी की वैधता और धर्म आधारित दलीलें भी बनीं विवाद का हिस्सा
    याचिका में दंपती ने दावा किया कि यदि वे मध्य प्रदेश जाते हैं तो उन्हें अलग-अलग धर्मों के कारण संभावित खतरा हो सकता है और ‘ऑनर किलिंग’ की आशंका जताई। साथ ही उन्होंने कहा कि बिना सुरक्षा के वे यात्रा या कानूनी प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकते।

    वहीं सरकारी पक्ष ने तर्क दिया कि दोनों अलग-अलग धर्मों से हैं और मंदिर में हुई शादी की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं।

    फिल्म शूटिंग से शुरू हुई थी कहानी

    जानकारी के अनुसार, दोनों की मुलाकात केरल में एक फिल्म शूटिंग के दौरान हुई थी। धीरे-धीरे संबंध बढ़े और मार्च 2026 में दोनों ने शादी कर ली। इसके बाद मामला विवादों में तब आया जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने उम्र को लेकर आपत्ति जताई।

    POCSO केस और जांच में बढ़ा विवाद
    आयोग का दावा है कि शादी के समय युवती की उम्र 16 वर्ष थी और दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई गई। इसके बाद मध्य प्रदेश के खरगोन में पति के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। वहीं जांच में जन्म प्रमाण पत्रों में विसंगतियां सामने आने और मेडिकल रिकॉर्ड में अलग जन्मतिथि दर्ज होने के बाद मामला और जटिल हो गया।

    डायरेक्टर पर भी आरोप, अलग FIR दर्ज
    इसी प्रकरण में युवती ने फिल्म निर्देशक सनोज मिश्रा और अन्य लोगों के खिलाफ भी POCSO एक्ट के तहत FIR दर्ज कराई है। आरोप है कि शूटिंग के दौरान उसका शोषण किया गया और फिल्म में अवसर देने के नाम पर उसे प्रभावित किया गया। निर्देशक ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा और साजिश बताया है।

    यह मामला अब कानूनी, सामाजिक और दस्तावेजी विवादों के बीच उलझता जा रहा है। एक ओर कोर्ट ने फिलहाल युवती को बालिग मानते हुए पति को राहत दी है, वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियां दस्तावेजों और उम्र की सत्यता को लेकर जांच में जुटी हैं।

  • खरीफ सीजन से पहले खाद की किल्लत, किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी

    खरीफ सीजन से पहले खाद की किल्लत, किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी


    खरगोन। जिले के कसरावद और झिरन्या क्षेत्र के वनग्रामों में किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। फार्मर आईडी जनरेट न होने के कारण बड़ी संख्या में वन अधिकार पट्टाधारी किसान रासायनिक खाद से वंचित रह गए हैं। खरीफ सीजन की बुवाई से ठीक पहले खाद वितरण व्यवस्था बाधित होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।

    किसानों का कहना है कि सहकारी समितियों द्वारा अब खाद का वितरण फार्मर आईडी आधारित टोकन सिस्टम से किया जा रहा है, लेकिन वनग्रामों के अधिकांश किसानों की फार्मर आईडी अब तक नहीं बन पाई है। ऐसे में वे सिस्टम से बाहर हो गए हैं और जरूरी खाद प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं।

    वन अधिकार पट्टाधारी किसानों की बढ़ी मुश्किलें
    झिरन्या क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया कि यह क्षेत्र पूरी तरह आदिवासी बहुल ग्राम पंचायत है, जहां अधिकांश किसानों को वन अधिकार पट्टे प्राप्त हैं। वर्षों से ये किसान इन्हीं भूमि पर खेती कर अपनी आजीविका चला रहे हैं, लेकिन अब डिजिटल व्यवस्था के कारण वे खाद जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हो रहे हैं। किसानों का आरोप है कि नई व्यवस्था लागू होने से पहले उनके दस्तावेज और फार्मर आईडी अपडेट नहीं की गई, जिससे पूरा वनग्राम सिस्टम से बाहर हो गया है।

    तहसीलदार को सौंपा गया ज्ञापन, समाधान की मांग
    इस समस्या को लेकर समाजसेवी गजेंद्र पटेल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसानों ने तहसीलदार नरेंद्र मुवेल को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि वन अधिकार पट्टाधारी किसानों की फार्मर आईडी तत्काल बनाई जाए और उन्हें खाद वितरण के लिए टोकन जारी किए जाएं।किसानों ने साफ कहा कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

    खरीफ सीजन की बुवाई पर संकट
    किसानों ने बताया कि खरीफ सीजन की बुवाई का समय बेहद नजदीक है और इस समय खाद का उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। बारिश शुरू होने के साथ ही खेती का कार्य तेज हो जाता है, लेकिन खाद न मिलने से पूरी कृषि तैयारी प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि अगर समय पर खाद नहीं मिला तो फसल उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।

    प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद
    ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस तकनीकी और दस्तावेजी समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान निकाला जाए। साथ ही वनग्राम के सभी पात्र किसानों को सिस्टम में शामिल कर उन्हें खाद वितरण की सुविधा सुनिश्चित की जाए। फिलहाल क्षेत्र में नाराजगी का माहौल है और किसान प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

  • बस स्टैंड और मंदिर मार्ग पर शराब दुकान-ढाबा हटाने की मांग तेज: ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

    बस स्टैंड और मंदिर मार्ग पर शराब दुकान-ढाबा हटाने की मांग तेज: ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन


    शाजापुर। जिले की ग्राम पंचायत मोहन बड़ोदिया में बस स्टैंड परिसर और प्रसिद्ध गुसाईजी की बैठक मंदिर जाने वाले मार्ग पर संचालित शराब दुकान और नॉनवेज ढाबे को हटाने की मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। बुधवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एकजुट होकर कलेक्टर के नाम ग्राम पंचायत, थाना और तहसील कार्यालय में ज्ञापन सौंपा और तत्काल कार्रवाई की मांग की।

    ग्रामीणों का कहना है कि बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थान और मंदिर जाने वाले मुख्य मार्ग पर शराब दुकान का संचालन क्षेत्र के सामाजिक माहौल को प्रभावित कर रहा है। लोगों का आरोप है कि इससे न केवल आम नागरिकों को असुविधा हो रही है, बल्कि धार्मिक वातावरण भी बाधित हो रहा है।

    स्कूल, पंचायत और मंदिर के पास दुकान से बढ़ी चिंत
    ग्रामीणों ने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि जिस स्थान पर शराब दुकान संचालित हो रही है, उसके आसपास ग्राम पंचायत भवन, स्कूल, बस स्टैंड, रिहायशी कॉलोनी और डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थित है। इसके अलावा यह मार्ग गुसाईजी की बैठक मंदिर तक पहुंचने का प्रमुख रास्ता भी है, जहां नियमित रूप से धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग से महिलाओं और श्रद्धालुओं का लगातार आना-जाना रहता है, ऐसे में शराब दुकान और ढाबे की मौजूदगी से असुरक्षा का माहौल बनता है।

    टीनशेड में बैठकर शराब सेवन का आरोप
    ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शराब ठेके के पास टीनशेड लगाकर बैठने की व्यवस्था की गई है, जहां दिनभर शराब पीने वालों का जमावड़ा लगा रहता है। इससे क्षेत्र में गाली-गलौज, विवाद और अराजकता की स्थिति बनी रहती है, जिससे आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से गांव की शांति और सामाजिक माहौल पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

    प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच के निर्देश
    मामले को गंभीरता से लेते हुए तहसीलदार ने नॉनवेज ढाबे के संचालन स्थल की जांच कर ग्राम पंचायत को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीकर गंदगी फैलाने और कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं आबकारी विभाग की सदस्य मीनाक्षी सिंह ने दो दिनों के भीतर स्थल निरीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

    ग्रामीणों की उम्मीद: जल्द हटे अवैध गतिविधियां
    ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द इस मामले में ठोस कदम उठाएगा और बस स्टैंड तथा मंदिर मार्ग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को विवाद और अव्यवस्था से मुक्त कराया जाएगा। फिलहाल पूरे क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

  • वाटर पार्क में दर्दनाक हादसा: गोता लगाते समय युवक गंभीर रूप से घायल, इंदौर रेफर

    वाटर पार्क में दर्दनाक हादसा: गोता लगाते समय युवक गंभीर रूप से घायल, इंदौर रेफर



    शाजापुर। गर्मी से राहत पाने के लिए वाटर पार्क में मस्ती करने पहुंचे एक युवक के साथ बुधवार को दर्दनाक हादसा हो गया। जिले के पनवाड़ी गांव स्थित ड्रीम फन वैली वाटर पार्क में नहाते समय गोता लगाते हुए युवक का सिर किसी कठोर सतह से जोरदार टकरा गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश हो गया और पानी में डूबने की स्थिति में पहुंच गया। समय रहते मौजूद दोस्तों और वाटर पार्क कर्मचारियों ने उसे बाहर निकाला और तत्काल अस्पताल पहुंचाया।

    घटना बुधवार दोपहर करीब 2 बजे की बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पूल में अन्य लोगों के साथ मस्ती कर रहा युवक अचानक गहरे हिस्से में गोता लगाने लगा। इसी दौरान उसका सिर किसी सख्त हिस्से या तल से टकरा गया, जिससे उसे गंभीर चोट आई और वह पानी में ही अचेत हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत हरकत में आते हुए उसे बाहर निकाला और प्राथमिक सहायता देने की कोशिश की।

    राजगढ़ का युवक, दोस्तों के साथ आया था घूमने
    घायल युवक की पहचान राजगढ़ जिले के भेसवा माताजी निवासी सुनील के रूप में हुई है। सुनील अपने दो दोस्तों के साथ गर्मी से राहत पाने और मनोरंजन के लिए वाटर पार्क पहुंचा था। बताया जा रहा है कि सभी लोग सामान्य रूप से पूल में मस्ती कर रहे थे, लेकिन कुछ ही पलों में यह खुशी का माहौल दर्दनाक हादसे में बदल गया। दोस्तों के अनुसार, सुनील ने जैसे ही गोता लगाया, वैसे ही उसका सिर किसी कठोर सतह से टकराया और वह तुरंत नीचे की ओर डूबने लगा। इस दौरान कुछ सेकंड की देरी भी उसकी जान पर भारी पड़ सकती थी, लेकिन सतर्कता के चलते उसे समय पर बचा लिया गया।

    शाजापुर जिला अस्पताल से इंदौर रेफर
    घटना के बाद घायल युवक को तत्काल शाजापुर जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार दिया। डॉक्टरों के अनुसार, सिर में गहरी चोट लगने और बेहोशी की स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए उसे इंदौर रेफर कर दिया गया।

    फिलहाल युवक का इलाज इंदौर के अस्पताल में जारी है और उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है। परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है, जिसके बाद परिवार में चिंता का माहौल है।

    प्रशासनिक जांच की संभावना
    इस हादसे के बाद वाटर पार्क की सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, घटना कैसे हुई और क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था, इसको लेकर संबंधित स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है। हालांकि अभी तक किसी आधिकारिक जांच की पुष्टि नहीं हुई है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्मी के मौसम में वाटर पार्क में भीड़ बढ़ जाती है, ऐसे में सुरक्षा इंतजामों को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

  • संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, शाजापुर जिला अस्पताल की सेवाएं प्रभावित

    संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, शाजापुर जिला अस्पताल की सेवाएं प्रभावित


    मध्यप्रदेश । शाजापुर जिला अस्पताल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रही। कर्मचारियों ने नियमित कार्यों का बहिष्कार करते हुए अस्पताल परिसर में धरना प्रदर्शन किया, जिससे जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर देखने को मिला।

    हड़ताल के कारण खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हो गई हैं। मरीजों को इलाज और नियमित स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    टीकाकरण, पंजीयन और दवाइयों पर असर
    कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से एएनसी पंजीयन, टीकाकरण, जन्म प्रमाण पत्र जारी करने और ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्य प्रभावित हो गए हैं। इसके अलावा एनसीडी, टीबी, हाइपरटेंशन और डायबिटीज जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को नियमित दवाइयां मिलने में भी कठिनाई हो रही है। सीएम हेल्पलाइन से जुड़े मामलों के निराकरण का काम भी बाधित बताया जा रहा है, जिससे आम लोगों की समस्याएं और बढ़ गई हैं।

    आठ सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन
    संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने बताया कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इनमें नियमितीकरण, एनपीएस और स्वास्थ्य बीमा का लाभ, 10 प्रतिशत वार्षिक वेतनवृद्धि, महंगाई भत्ता, समान कार्य के लिए समान वेतन और नियमित कर्मचारियों के समान अवकाश जैसी कुल आठ प्रमुख मांगें शामिल हैं। संघ के अनुसार, पहले चरण में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया गया था, जिसके बाद 2 जून से ऑनलाइन कार्यों के बहिष्कार के साथ अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की गई।

    आंदोलन और तेज करने की चेतावनी
    संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो 8 जून को भोपाल में मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें जायज हैं और लंबे समय से लंबित होने के कारण अब आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

    प्रशासन पर बढ़ा दबाव
    हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने से प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अब सभी की नजरें सरकार और कर्मचारी संघ के बीच होने वाली आगे की बातचीत पर टिकी हैं।

  • अंजुमन स्कूल-अस्पताल के पास शराब दुकान खुलने पर विवाद: ओबीसी महासभा ने जताया विरोध, SP को सौंपा ज्ञापन

    अंजुमन स्कूल-अस्पताल के पास शराब दुकान खुलने पर विवाद: ओबीसी महासभा ने जताया विरोध, SP को सौंपा ज्ञापन


    कटनी । कटनी शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत फूल मंडी के सामने संचालित एक शराब दुकान को लेकर विवाद गहरा गया है। स्थानीय संगठन ओबीसी महासभा ने इस दुकान को नियमों के विरुद्ध बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है और मंगलवार को पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा।

    महासभा का आरोप है कि जिस स्थान पर यह शराब दुकान खोली गई है, वह संवेदनशील और भीड़भाड़ वाला क्षेत्र है, जहां शैक्षणिक और स्वास्थ्य संस्थान स्थित हैं। संगठन का कहना है कि इस तरह के स्थान पर शराब दुकान का संचालन सामाजिक माहौल को प्रभावित कर सकता है और यह नियमों के अनुरूप नहीं है।

    स्कूल और अस्पताल के बीच दुकान, उठे सवाल
    ओबीसी महासभा के जिलाध्यक्ष रामरतन नामदेव ने बताया कि दुकान के ठीक पास अंजुमन स्कूल स्थित है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अध्ययन के लिए आते हैं। इसके अलावा मुख्य शासकीय जिला अस्पताल भी नजदीक ही है, जहां दिन-रात मरीजों, महिलाओं और बच्चों का आना-जाना लगा रहता है। संगठन का कहना है कि ऐसे क्षेत्र में शराब दुकान खोलना न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि इससे स्थानीय माहौल पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    भीड़भाड़ वाले इलाके का मुद्दा
    महासभा ने यह भी बताया कि आसपास शहर की प्रमुख चौपाटी स्थित है, जहां परिवार देर शाम तक आते हैं। साथ ही यह क्षेत्र रेलवे स्टेशन जाने वाले मुख्य मार्ग पर भी आता है, जहां यात्रियों की लगातार आवाजाही रहती है। संगठन ने इस पूरे मामले में आबकारी विभाग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना उचित जमीनी जांच के अनुमति देना गंभीर लापरवाही है।

    सुरक्षा और सामाजिक माहौल पर चिंता
    ओबीसी महासभा ने ज्ञापन में महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पहले भी इस क्षेत्र में कई आपत्तिजनक घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि इस शराब दुकान को तुरंत हटाया जाए या किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाए, ताकि क्षेत्र का शैक्षणिक और सामाजिक माहौल सुरक्षित रह सके।

  • कटनी में स्कूटी से 7 पेटी अवैध शराब जब्त, दो तस्कर गिरफ्तार कर भेजे गए जेल

    कटनी में स्कूटी से 7 पेटी अवैध शराब जब्त, दो तस्कर गिरफ्तार कर भेजे गए जेल


    कटनी । कटनी जिले में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एनकेजे थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो तस्करों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके पास से कुल 63 लीटर देशी प्लेन और मसाला शराब बरामद की है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 30 हजार रुपये बताई जा रही है। तस्करी में इस्तेमाल की जा रही स्कूटी को भी जब्त कर लिया गया है।

    यह कार्रवाई उस समय हुई जब पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि दो युवक स्कूटी पर भारी मात्रा में अवैध शराब लेकर झलवारा से हिरवारा की ओर जा रहे हैं। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी उपनिरीक्षक रूपेन्द्र राजपूत के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई और बताए गए रूट पर घेराबंदी की गई।

    घेराबंदी कर पकड़े गए आरोपी
    पुलिस टीम ने संदिग्ध स्कूटी को आते देख रोक लिया और दोनों युवकों को मौके पर ही हिरासत में ले लिया। तलाशी के दौरान स्कूटी के आगे पैरदान और पीछे सीट पर रस्सी से बंधे कुल 7 कार्टून मिले, जिनमें अवैध देशी शराब भरी हुई थी।  दोनों आरोपी किसी भी प्रकार के वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसके बाद उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया।

    पूछताछ में सामने आई पहचान
    कड़ी पूछताछ में आरोपियों ने अपनी पहचान सतीष चौधरी (27) और विकास चौधरी (27), निवासी झर्रा टिकुरिया, कटनी के रूप में बताई। पुलिस ने दोनों के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इसके बाद 63 लीटर शराब और स्कूटी को जब्त कर लिया गया। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जिला जेल कटनी भेज दिया गया।

    अवैध शराब पर सख्ती जारी
    पुलिस अधिकारियों के अनुसार जिले में अवैध शराब के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जा रही है ताकि अवैध कारोबार पर रोक लगाई जा सके।

  • आमलाबे वॉरियर्स बनी एमपीएल-2 की चैंपियन, फ्रेंड्स इलेवन को 6 विकेट से हराकर जीता खिताब

    आमलाबे वॉरियर्स बनी एमपीएल-2 की चैंपियन, फ्रेंड्स इलेवन को 6 विकेट से हराकर जीता खिताब


    मध्यप्रदेश । राजगढ़ जिले के माचलपुर स्थित रावणबल्डी क्रिकेट ग्राउंड पर मंगलवार रात खेले गए एमपीएल-2 नाइट क्रिकेट टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला एकतरफा साबित हुआ। इस खिताबी भिड़ंत में आमलाबे वॉरियर्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फ्रेंड्स इलेवन छापीहेड़ा को 6 विकेट से हराकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली। मैच के बाद मैदान में खिलाड़ियों और समर्थकों ने जमकर जश्न मनाया। आतिशबाजी और तालियों की गूंज के बीच जीत का उत्सव देर रात तक चलता रहा। बड़ी संख्या में क्रिकेट प्रेमी इस रोमांचक फाइनल मुकाबले के गवाह बने।

    पहले ही ढह गई फ्रेंड्स इलेवन की पारी
    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी फ्रेंड्स इलेवन छापीहेड़ा की टीम शुरुआत से ही दबाव में दिखी। आमलाबे वॉरियर्स के गेंदबाजों ने सटीक लाइन और लेंथ से लगातार विकेट निकालते हुए विपक्षी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। पूरी टीम 10 ओवर में 9 विकेट खोकर सिर्फ 55 रन ही बना सकी, जो इस फाइनल मुकाबले का सबसे कमजोर प्रदर्शन साबित हुआ।

    गेंद और बल्ले दोनों से चमके आमलाबे के खिलाड़ी
    लक्ष्य का पीछा करने उतरी आमलाबे वॉरियर्स ने आक्रामक अंदाज में शुरुआत की और मैच को एकतरफा बना दिया। टीम ने मात्र 4.5 ओवर में 4 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। गेंदबाजी में जीवन आमलाबे ने बेहतरीन प्रदर्शन किया और 2 ओवर में सिर्फ 14 रन देकर 3 महत्वपूर्ण विकेट झटके। वहीं बल्लेबाजी में अभिषेक जावा ने 12 गेंदों पर नाबाद 26 रन की तेजतर्रार पारी खेलकर जीत की औपचारिकता पूरी कर दी।

    विजेताओं पर इनामों की बरसात
    समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री और जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रियव्रत सिंह मौजूद रहे। उन्होंने विजेता टीम को ट्रॉफी के साथ 51 हजार रुपए का चेक प्रदान किया, जबकि उपविजेता फ्रेंड्स इलेवन को 25,551 रुपए और ट्रॉफी दी गई। कार्यक्रम में खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए खेल भावना और अनुशासन पर जोर दिया गया। साथ ही आयोजन समिति की भी सराहना की गई।

    व्यक्तिगत प्रदर्शन को भी मिला सम्मान
    टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया। संजय पंवार को ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ और सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज चुना गया, जबकि देव यादव को सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज का पुरस्कार मिला। सभी विजेताओं को ट्रॉफी के साथ नकद पुरस्कार भी प्रदान किए गए।