Category: Madhya Pradesh

  • लंबित भर्तियों की प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश, स्वास्थ्य सेवाओं में मानव संसाधन को बढ़ावा

    लंबित भर्तियों की प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश, स्वास्थ्य सेवाओं में मानव संसाधन को बढ़ावा


    भोपाल । भोपाल में उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि लंबित भर्तियों की प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण किया जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वास्थ्य संस्थानों में मानव संसाधन की कमी को जल्द से जल्द दूर करना अत्यंत आवश्यक है। बैठक में उप मुख्यमंत्री ने विभागीय भर्ती प्रक्रियाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की और भर्ती में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी को रोकने के लिए सभी संबंधित विभागों से समन्वय बनाए रखने को कहा।

    उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कर्मचारी चयन बोर्ड ईएसबी और मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग पीएससी के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी प्रशासनिक और तकनीकी औपचारिकताओं को समय पर पूरा किया जाना चाहिए ताकि भर्ती प्रक्रिया में रुकावट न आए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भर्ती की प्रक्रिया में किसी प्रकार की ढील या विलंब स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

    बैठक में विशेष रूप से अस्पताल सहायक के रिक्त पदों की भर्ती पर ध्यान केंद्रित किया गया। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अस्पताल सहायक के पदों के प्रस्ताव को शीघ्र ही कर्मचारी चयन बोर्ड को भेजा जाए। उन्होंने कहा कि अस्पताल सहायक स्वास्थ्य संस्थानों के सुचारू संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इन पदों की पूर्ति में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार्य नहीं है।

    इसके साथ ही, उप मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग टीचरों की नियुक्ति प्रक्रिया की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए। श्री शुक्ल ने स्पष्ट किया कि प्रशिक्षित और योग्य नर्सिंग स्टाफ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण योगदान देता है और इसकी भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकती है।

    उप मुख्यमंत्री ने प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक और अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए योजनाबद्ध और चरणबद्ध कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले उपकरण स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता और मरीजों की सुविधा में सुधार लाने में सहायक होंगे।

    बैठक में आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री धनराजू एस और अपर संचालक श्री मनोज कुमार सरियाम उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता बनी रहे। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य विभाग में मानव संसाधन की कमी दूर करने के लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जाएं और भर्ती प्रक्रिया में बाधा डालने वाले किसी भी अड़चन को शीघ्र हल किया जाए।

    उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल के निर्देशों के बाद यह स्पष्ट हो गया कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी और सुधार लाने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। लंबित भर्तियों को शीघ्र पूर्ण करने और स्वास्थ्य विभाग में मानव संसाधन की कमी को दूर करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इस समीक्षा बैठक ने प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने और मरीजों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में एक नया संदेश दिया है।

  • एजुकेशन लोन रिजेक्शन: मध्य प्रदेश के मेधावी छात्रों का भविष्य अधर में

    एजुकेशन लोन रिजेक्शन: मध्य प्रदेश के मेधावी छात्रों का भविष्य अधर में


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश से शिक्षा के क्षेत्र में चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। प्रदेश के मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता देने के दावों के बावजूद शिक्षा ऋण एजुकेशन लोन के लिए आवेदन करने वाले लगभग आधे छात्र खाली हाथ रहे। लोकसभा में प्रस्तुत ताजा आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 22,728 छात्रों ने लोन के लिए आवेदन किया, लेकिन केवल 12,547 को ही लोन मिल सका। यानी करीब 45 प्रतिशत छात्रों के आवेदन रिजेक्ट हुए या लंबित रहे।

    विशेष रूप से 8,065 छात्रों ने अपना आवेदन वापस ले लिया, जो जटिल प्रक्रिया, देरी या बैंक की शर्तों के कारण उम्मीद छोड़ देने का संकेत देता है। इसके अलावा, 1,032 आवेदन सीधे रिजेक्ट हो गए और 1,084 आवेदन अब भी लंबित हैं, जिससे छात्र और उनके परिवार अनिश्चितता में फंसे हुए हैं।

    आंकड़ों के अनुसार कम आय वर्ग के परिवारों के छात्रों को सबसे ज्यादा लाभ मिला है। 4.5 लाख रुपये तक की आय वाले परिवारों के 9,505 छात्रों को लोन स्वीकृत किया गया। 4.5 लाख से 8 लाख की आय वाले 1,118 छात्रों और 8 लाख से अधिक आय वाले 1,924 छात्रों को ही लोन मिला। यह दर्शाता है कि उच्च आय वर्ग के लिए बैंक अपेक्षाकृत कम लोन देते हैं।

    सरकार ने कम आय वर्ग के छात्रों के लिए विशेष योजना भी बनाई है। केंद्रीय क्षेत्र ब्याज सब्सिडी योजना CSIS के तहत 4.5 लाख तक की आय वाले छात्रों को 100 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जाती है। वहीं, नई पीएम विद्यालक्ष्मी योजना के अंतर्गत 8 लाख रुपये तक की आय वाले मेधावी छात्रों को 10 लाख रुपये तक के ऋण पर 3 प्रतिशत ब्याज छूट मिलती है।

    बैंकों द्वारा आवेदन रिजेक्ट करने के पीछे कई कारण हैं। इसमें मुख्य कारण हैं छात्र के अभिभावक का खराब क्रेडिट स्कोर, कॉलेज या पाठ्यक्रम का QHEI मानक में न होना, आय प्रमाण पत्र या KYC दस्तावेजों में खामियां। हालांकि अब 7.5 लाख तक के लोन के लिए गारंटी जरूरी नहीं है, बैंक अक्सर सुरक्षा की मांग करते हैं।

    विश्लेषण से पता चलता है कि गरीब और कम आय वर्ग पर इसका सबसे अधिक असर पड़ता है। देश भर में सबसे ज्यादा लोन आवेदन इसी वर्ग से आते हैं, लेकिन बैंक की कड़ी शर्तें और तकनीकी कमियां उनके लिए चुनौती बन जाती हैं।

    लोकसभा में चर्चा के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि बैंक छोटे लोन देने में हिचकते हैं क्योंकि इनमें जोखिम और रिकवरी की चुनौती अधिक होती है। छात्रों के लिए यह स्थिति उनकी उच्च शिक्षा और करियर योजना के लिए गंभीर बाधा बन रही है।

  • जबलपुर हाईकोर्ट का सख्त रुख: VC नियुक्ति पर जवाब न देने पर नोटिस और जुर्माना

    जबलपुर हाईकोर्ट का सख्त रुख: VC नियुक्ति पर जवाब न देने पर नोटिस और जुर्माना


    जबलपुर । जबलपुर से बड़ी खबर सामने आई है जहां रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में कुलगुरु की नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस विशाल धगट की बेंच ने जवाब पेश न किए जाने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने संबंधित पक्ष पर 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और जवाब प्रस्तुत करने की अंतिम मोहलत दी है।

    बताया जा रहा है कि कोर्ट ने अप्रैल 2025 में नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इसके बावजूद कई महीने बीत जाने के बाद भी कोई संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। मामला NSUI के जबलपुर जिला अध्यक्ष सचिन रजक द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में कुलगुरु की नियुक्ति को चुनौती दी गई है और आरोप लगाया गया है कि इस नियुक्ति प्रक्रिया में UGC के नियमों की अनदेखी की गई।

    नियमों के अनुसार कुलगुरु पद के लिए पीएचडी के बाद कम से कम 10 वर्षों का शैक्षणिक अनुभव होना अनिवार्य है। याचिकाकर्ता का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में इस अनिवार्यता की पालना नहीं की गई जिससे नियुक्ति विवादास्पद बन गई है।

    हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में समय पर जवाब न देने से न्याय प्रक्रिया बाधित होती है। इसी वजह से कोर्ट ने संबंधित पक्ष को जुर्माना लगाया और 6 अप्रैल को अगली सुनवाई तय की है। इस सुनवाई में कुलगुरु नियुक्ति प्रक्रिया और नियमों के उल्लंघन के आरोपों पर विस्तार से विचार होगा।

    इस कार्रवाई से यह संदेश भी दिया गया है कि कोर्ट किसी भी पक्ष की लापरवाही या जवाब न देने की स्थिति को बर्दाश्त नहीं करेगा। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को भी चेतावनी मिल गई है कि नियमानुसार और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए।

    इसी बीच जबलपुर और विश्वविद्यालय प्रशासन में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि इससे शैक्षणिक और प्रशासनिक अनुशासन पर सवाल उठ रहे हैं। कोर्ट की सख्ती अब पूरे विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए एक संकेत के रूप में देखी जा रही है कि नियमों का पालन करना और जवाबदेही तय समय पर देना अनिवार्य है।

  • सीएम मूवमेंट में अव्यवस्था पर डीसीपी सख्त तीन जवानों पर गिरी कार्रवाई की गाज

    सीएम मूवमेंट में अव्यवस्था पर डीसीपी सख्त तीन जवानों पर गिरी कार्रवाई की गाज


    इंदौर । इंदौर में मुख्यमंत्री के काफिले के दौरान हुई लापरवाही ने यातायात व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीआईपी मूवमेंट जैसे अत्यंत संवेदनशील समय में जहां हर सेकंड की योजना और समन्वय अहम होता है वहीं इस दौरान सामने आई अव्यवस्था ने पूरे महकमे को झकझोर दिया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए ट्रैफिक विभाग ने तत्काल प्रभाव से सख्त कार्रवाई की है जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप की स्थिति बन गई है।

    जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री के काफिले के लिए पहले से तय ट्रैफिक प्लान बनाया गया था और संबंधित पुलिसकर्मियों को उनकी जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से सौंप दी गई थीं। इसके बावजूद मौके पर यातायात को निर्धारित योजना के अनुसार नियंत्रित नहीं किया जा सका। परिणामस्वरूप कुछ समय के लिए सड़कों पर अव्यवस्था फैल गई और आम लोगों के साथ साथ काफिले की आवाजाही भी प्रभावित हुई। इस चूक को सुरक्षा और प्रशासनिक दृष्टि से बेहद गंभीर माना गया है।

    घटना सामने आते ही वरिष्ठ अधिकारियों ने तुरंत रिपोर्ट तलब की और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ड्यूटी पर तैनात तीन पुलिसकर्मियों ने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरती। उनकी इस चूक के कारण ही ट्रैफिक मैनेजमेंट बिगड़ा और स्थिति नियंत्रण से बाहर होती नजर आई। इसके बाद यातायात डीसीपी ने बिना किसी देरी के तीनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए।

    कार्रवाई के तहत संबंधित तीन पुलिसकर्मियों की 25 प्रतिशत वेतन कटौती की गई है जो अपने आप में एक सख्त और स्पष्ट संदेश माना जा रहा है। डीसीपी ने साफ तौर पर कहा है कि वीआईपी ड्यूटी में किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री का काफिला हो या कोई अन्य विशेष मूवमेंट हर स्थिति में पुलिसकर्मियों को पूरी जिम्मेदारी और सतर्कता के साथ अपनी ड्यूटी निभानी होगी।

    इस घटना के बाद पुलिस विभाग ने सभी कर्मचारियों को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि भविष्य में यदि इस तरह की कोई लापरवाही सामने आती है तो केवल वेतन कटौती तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी बल्कि इससे भी अधिक कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इस सख्त रुख का उद्देश्य स्पष्ट रूप से पुलिस बल में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

    इंदौर में हुई यह कार्रवाई अब पूरे पुलिस महकमे के लिए एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। यह संदेश दिया गया है कि जिम्मेदारी में चूक करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया है कि वीआईपी मूवमेंट जैसे मामलों में कोई भी छोटी सी लापरवाही बड़े परिणाम ला सकती है इसलिए हर स्तर पर सतर्कता और समन्वय बेहद जरूरी है।

  • RGPV भोपाल में गजब 'कांड': सब्जी में मिली मरी हुई छिपकली, सबूत मिटाने के लिए कैंटीन स्टाफ उसे ही चबा गया!

    RGPV भोपाल में गजब 'कांड': सब्जी में मिली मरी हुई छिपकली, सबूत मिटाने के लिए कैंटीन स्टाफ उसे ही चबा गया!


    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालयRGPVके कैंपस में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने छात्र सुरक्षा और कैंटीन के स्वच्छता मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए 18 मार्च की दोपहर का खाना किसी बुरे सपने जैसा साबित हुआ। गांधीनगर स्थित यूआईटीUITआरजीपीवी की कैंटीन में भोजन कर रहे छात्रों ने दावा किया कि उनकी सब्जी की थाली में एक मरी हुई छिपकली तैर रही थी। जैसे ही यह बात फैली, छात्रों ने हंगामा शुरू कर दिया और कैंटीन प्रबंधन से जवाब मांगा।

    हंगामा बढ़ता देख मौके पर मौजूद कैंटीन स्टाफ के एक कर्मचारी ने जो किया, उसने सबको हैरत में डाल दिया। आरोपों के अनुसार, जब छात्रों ने सब्जी में गिरी हुई छिपकली को सबूत के तौर पर दिखाया, तो उस कर्मचारी ने मामले को रफा-दफा करने के लिए उसे उठाया और सबके सामने चबाकर निगल गया। हद तो तब हो गई जब उसने दावा किया कि वह छिपकली नहीं, बल्कि महज ‘शिमला मिर्च’ का एक टुकड़ा था। कर्मचारी की इस हरकत ने वहां मौजूद छात्रों को सदमे में डाल दिया। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन की काफी किरकिरी हो रही है।

    मामले की गंभीरता और छात्रों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आया है। आरजीपीवीयूआईटीके निदेशक सुधीर भदौरिया ने रविवार को इस घटना की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि यदि जांच में कैंटीन संचालक या स्टाफ की किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    दूसरी ओर, छात्र इस जांच से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। उनका कहना है कि छात्रों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक कैंटीन को तुरंत प्रभाव से बंद कर देना चाहिए। फिलहाल, पूरा कैंपस इस ‘शिमला मिर्च बनाम छिपकली’ विवाद को लेकर चर्चा में है और विश्वविद्यालय की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

  • MP: अगले साल भोपाल में होगा राष्ट्रीय सेना दिवस समारोह का भव्य आयोजन

    MP: अगले साल भोपाल में होगा राष्ट्रीय सेना दिवस समारोह का भव्य आयोजन


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के इतिहास में 15 जनवरी 2027 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने सेना प्रमुख (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी (General Upendra Dwivedi) के साथ बैठक के बाद ऐलान किया कि 2027 का राष्ट्रीय सेना दिवस समारोह भोपाल में आयोजित किया जाएगा।

    दरअसल, सेना दिवस हर साल 15 जनवरी को मनाया जाता है. यह दिन 1949 में जनरल सर एफआरआर बुचर से सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ के तौर पर केएम करिअप्पा के पदभार संभालने की याद में मनाया जाता है।

    CM यादव ने कहा कि यह भव्य समारोह राज्य के नागरिकों को देश की समृद्ध सैन्य विरासत से परिचित कराएगा और युवाओं को सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगा।

    यादव ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेना ने हर मौके पर अदम्य साहस, वीरता और शक्ति का प्रदर्शन किया है. राज्य के नागरिकों को सेना की समृद्ध सैन्य विरासत से परिचित कराने और राज्य के युवाओं को सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से 15 जनवरी 2027 को भोपाल में एक विशेष परेड आयोजित की जाएगी.”

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल में इन सेना दिवस कार्यक्रमों में शामिल होने का अनुभव 26 जनवरी को नई दिल्ली में होने वाले गणतंत्र दिवस कार्यक्रमों जैसा ही होगा. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार इन कार्यक्रमों के लिए सेना को हर संभव सहयोग प्रदान करेगी.

    सीएम यादव ने कहा, “इस अवसर पर सेना ‘शौर्य संध्या’ का आयोजन करेगी. इसमें सेना के हथियारों, संसाधनों और उपकरणों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी, साथ ही सैन्य अभ्यासों का प्रदर्शन भी किया जाएगा. इस मौके पर रिटायर्ड सैनिकों को भी सम्मानित किया जाएगा. सभी गतिविधियां उसी भव्यता और गरिमा के साथ आयोजित की जाएंगी, जैसी 26 जनवरी को नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान देखने को मिलती हैं.”

    मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी इन समारोहों में हिस्सा लेंगे. इस कार्यक्रम का उद्देश्य जनता को सैन्य परेड से जोड़ना है, साथ ही सेना और नागरिक प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल और आपसी विश्वास को बढ़ावा देना भी है.


    1 नवंबर से ही शुरू हो जाएगा उत्सव

    15 जनवरी को होने वाले मुख्य समारोह से जुड़ी कुछ गतिविधियां 1 नवंबर से ही शुरू हो जाएंगी. 1 नवंबर को मध्य प्रदेश का स्थापना दिवस मनाया जाता है.
    मध्य प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर ‘मेरी माटी’ अभियान के तहत राज्य के विभिन्न जिलों से मिट्टी लाई जाएगी. भोपाल स्थित ‘शौर्य स्मारक’ में एक ‘संकल्प वृक्ष’ लगाया जाएगा.”


    क्यों मनाया जाता है सेना दिवस?

    बता दें कि राष्ट्रीय कार्यक्रमों को विकेंद्रीकृत करने की पहल 2023 में शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य प्रधानमंत्री मोदी के ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के विजन को मबूत करना और भारतीय सेना में देशव्यापी जनभागीदारी को प्रोत्साहित करना था, साथ ही सेना और नागरिकों के बीच संबंधों को भी मजबूत करना था.

    उन्होंने बताया कि इसके तहत, आर्मी डे 2023 में बेंगलुरु, 2024 में लखनऊ, 2025 में पुणे और 2026 में जयपुर में आयोजित किया गया.

  • एमपी में मौसम ने ली करवट, उत्तर में छाए बादल, तापमान में गिरावट, 26-29 मार्च को सक्रिय होंगे दो नए सिस्टम

    एमपी में मौसम ने ली करवट, उत्तर में छाए बादल, तापमान में गिरावट, 26-29 मार्च को सक्रिय होंगे दो नए सिस्टम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मौसम लगातार करवट बदल रहा है। सोमवार को प्रदेश के उत्तरी हिस्सों उज्जैन, सागर और ग्वालियर-चंबल संभाग में साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण बादल छाए रहे, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई। ग्वालियर में दिन का पारा 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया, जबकि बाकी क्षेत्रों में गर्मी का असर बना रहा।

    26-29 मार्च के बीच फिर बदलेगा मौसम

    मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को गर्मी का असर रहेगा, लेकिन 26 और 27 मार्च को प्रदेश में आंधी और बारिश का दौर शुरू हो सकता है। 26 मार्च को उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो रहा है, जिसका असर ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग में दो दिन तक दिखाई देगा। इसके बाद 29 मार्च को एक और सिस्टम एक्टिव होने की संभावना है, जिससे अप्रैल की शुरुआत भी आंधी-बारिश के साथ हो सकती है।

    बारिश थमी, अब बढ़ने लगी गर्मी
    पिछले दिनों प्रदेश में लगातार चार दिन तक आंधी, बारिश और ओलावृष्टि हुई। इसके थमते ही तापमान में तेजी आने लगी है। सोमवार को रायसेन सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

    इन जिलों में दर्ज हुआ ज्यादा तापमान

    नर्मदापुरम में 37.4 डिग्री, रतलाम में 36.4 डिग्री, गुना और खरगोन में 36.2 डिग्री, खजुराहो में 36 डिग्री, नरसिंहपुर में 35.4 डिग्री, धार में 35.3 डिग्री, खंडवा में 35.1 डिग्री और उमरिया में 35 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    बड़े शहरों का हाल

    पांच प्रमुख शहरों में उज्जैन सबसे गर्म रहा, जहां पारा 35 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में 34.4 डिग्री, इंदौर में 34.9 डिग्री, जबलपुर में 34.2 डिग्री और ग्वालियर में 29.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। बता दें कि हाल ही में सक्रिय मजबूत सिस्टम के कारण प्रदेश के 45 जिलों में आंधी-बारिश हुई, जिनमें 17 जिलों में ओले भी गिरे। तेज आंधी से केला, पपीता और गेहूं की फसलों को नुकसान पहुंचा है। धार और खरगोन समेत कई जिलों में ज्यादा असर देखने को मिला।

  • मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया

    मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया


    भोपाल।
    केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोमवार देर शाम मध्य प्रदेश के प्रवास के दौरान भोपाल में मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसी राम सिलावट और विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी उपस्थित थे।

    केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने सोशल मीडिया एक्स पर उक्त जानकारी साझा करते हुए आज मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ आत्मीय एवं सार्थक भेंट हुई। उनके नेतृत्व में मध्य प्रदेश विकास, सुशासन और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित कर रहा है। इस अवसर पर राज्य के समावेशी विकास, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा प्रदेश की प्रगति को और गति देने से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत एवं सकारात्मक चर्चा हुई।

    सिंधिया ने कहा कि मध्य प्रदेश में ‘स्टेट एआई मिशन’ की शुरुआत, सुशासन को अधिक सशक्त, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने की एक दूरदर्शी पहल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ विज़न को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में यह मिशन कृषि, स्वास्थ्य, पोषण एवं आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में बेहतर निर्णय क्षमता और जनकल्याण को नई गति देगा।


    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवार के निवास पहुंचकर व्यक्त की शोक संवेदना

    इससे पहले केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निवास पहुंचे और उनकी सुपुत्री सुरभि खंडेलवाल के असामयिक निधन होने अपनी गहरी शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने खंडेलवाल से भेंट कर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा कि ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।

  • मध्य प्रदेश बहुत जल्द लॉन्च करेगा अपना स्टेट एआई मिशन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मध्य प्रदेश बहुत जल्द लॉन्च करेगा अपना स्टेट एआई मिशन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात् आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आज के दौर का सर्वाधिक संभावनाशील सेक्टर है। शासन-प्रशासन व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेही बढ़ाने के लिए सरकार भी आगे बढ़ रही है। अब इस दिशा में एआई की मदद ली जाएगी। हम बहुत जल्द मध्य प्रदेश का अपना ‘स्टेट एआई मिशन’ लॉन्च करने जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह एक लक्ष्य केंद्रित मिशन होगा। इस मिशन से शासन प्रणाली में कसावट और सुप्रबंधन लाने के प्रयास किए जाएंगे।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में सुशासन के जरिए नागरिक सेवाओं और सुविधाओं को और भी सिविक-फ्रेंडली बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए नई-नई तकनीकों से जुड़कर प्रदेश में नवाचारों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सुशासन एवं विकास को नई गति देने और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से इस मिशन को प्रारंभ किया जा रहा है। स्टेट एआई मिशन में कृषि, स्वास्थ्य, पोषण एवं आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संभावित जोखिमों की पूर्व पहचान संभव हो सकेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मिशन को चरणबद्ध रूप से लागू किया जाएगा। वित्त वर्ष 2026-27 में एआई तकनीक के लिए ढांचागत विकास किया जाएगा। वर्तमान एआई पहलों को एकीकृत कर आधारभूत तैयारी सुदृढ़ की जाएगी। वित्त वर्ष 2027-28 में सफल यूज़ केसेस को विभिन्न विभागों में व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा तथा वित्त वर्ष 2028-29 से एआई को शासन की स्थायी संस्थागत क्षमता के रूप में विकसित किया जाएगा।


    जयपुर में मिले 5,055 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बताया कि बीते शनिवार को जयपुर प्रवास के दौरान वहां निवेशकों से वन-टू-वन मीटिंग की। इस दौरान निवेशकों ने मध्य प्रदेश के प्रति अगाध स्नेह और अपनत्व जताया। विभिन्न औद्योगिक समूहों, इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, फूड-प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी तथा स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े प्रतिनिधियों सहित 400 से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी रही। सीआईआई राजस्थान के अध्यक्ष एवं न्यूरोइक्विलिब्रियम के एमडी रजनीश भंडारी ने स्वागत भाषण में मध्य प्रदेश की नीतियों एवं उसके क्रियान्वयन की तारीफ की। प्रमुख उद्योगपतियों मनीष गुप्ता (चेयरमैन, इनसोलेशन एनर्जी), महावीर प्रताप शर्मा (चेयरमैन, राजस्थान एंजेल्स) और केएल जैन (अध्यक्ष, राजस्थान चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री) ने भी अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस इन्टरैक्टिव सेशन में बेहद सकारात्मक संवाद के बाद सरकार को वहां के निवेशकों से 5,055 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनसे लगभग 3,530 रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जयपुर में मिले निवेश प्रस्ताव के यह आंकड़े बताते हैं कि देश-विदेश के निवेशकों के बीच मध्य प्रदेश की साख और हमारी औद्योगिक नीतियों के प्रति विश्वास कितनी तेजी से बढ़ रहा है।


    139 दिन लगातार चलेगा तीसरा जल गंगा संवर्धन अभियान

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण को राष्ट्रीय अभियान के रूप में चलाया जा रहा है। मध्यप्र देश में तीसरा जल गंगा संवर्धन अभियान गत 19 मार्च से प्रारंभ हो चुका है। बीते दो अभियानों को अच्छा प्रतिसाद मिला। इस दौरान प्रदेश में नये कुंए, बावड़ियों, अमृत सरोवरों, तालाबों के साथ-साथ पुरानी जल संरचनाओं के पुनर्भरण और सूखी नदियों के पुनर्जीवन के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किये गये। बीते साल खंडवा जिले में जल संचयन के लिए अभूतपूर्व काम हुआ।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तीसरे अभियान में करीब 2500 करोड़ रुपये से प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों, नगरीय निकायों और पंचायत स्तर पर जल संवर्धन और संचयन कार्य किए जाएंगे। बीते सालों की तरह इस वर्ष भी जल संरक्षण के लिए विभिन्न कार्य किये जायेंगे। साथ-साथ नदियों, तालाबों, बावडियों और कुओं का जीर्णोद्धार भी मिशन मोड में किया जायेगा। नदियों के उद्गम क्षेत्रों में हरित विकास के लिये गंगोत्री हरित योजना में कार्य किये जायेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि हमारे जल गंगा संवर्धन अभियान को केंद्र सरकार से भी सराहना और समर्थन मिला है। जल बचाने के लिए देशभर में चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों में मध्यप्रदेश का जल गंगा संवर्धन अभियान अव्वल श्रेणी में आया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहले वर्ष 2024 में करीब 30 दिन, दूसरे वर्ष 2025 में 120 दिन यह अभियान चलाया। मौजूदा साल में गुड़ी पड़वा से गंगा दशहरा तक कुल 139 दिन तक लगातार यह अभियान चलाया जाएगा।


    3 से 5 अप्रैल तक बनारस में होगा सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन

    मुख्यमंत्री ने मंत्रीगण को बताया कि आगामी 3 से 5 अप्रैल 2026 तक भगवान काशी विश्वनाथ की नगरी वाराणसी (बनारस) में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन किया जायेगा। यह वीर विक्रमादित्य के महात्म्य के दिनों-दिन बढ़ता प्रभाव है।


    उज्जैन में नैवेद्य लोक का लोकार्पण

    मुख्यमंत्री ने मंत्रीगण को बताया कि उन्होंने हाल ही में उज्जैन में नैवेद्य लोक का लोकार्पण किया है। यह मालवांचल के व्यंजनों को एक प्लेटफार्म देने का प्रयोगात्मक प्रयास है। इसे इंदौर की छप्पन दुकानों की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। यहां कुल 108 दुकानें हैं, जो विभिन्न मालवी व्यंजनों का रसास्वादन कराती हैं।


    अंतरराष्ट्रीय खुशहाली दिवस

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बीते सप्ताह आनंद विभाग के अधीन राज्य आनंद संस्थान द्वारा भोपाल में अंतरराष्ट्रीय खुशहाली दिवस मनाया गया। वे स्वयं इस आयोजन में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि यह आयोजन हमारे मनुष्यगत मनोभावों को अभिव्यक्त करने मनोरंजक का माध्यम बना। सरकार सबके जीवन में खुशहाली लाने के लिए ही तो काम कर रही है। इस प्रकार के आयोजनों से हमारी कार्यक्षमता और कार्यदक्षता सहित जीवन में खुशहाली भी बढ़ती है।

  • मप्र में 13 दिन से ठप पड़ी कमर्शियल सिलेंडर सप्लाई ठप…. आज से होगी शुरू, आदेश जारी

    मप्र में 13 दिन से ठप पड़ी कमर्शियल सिलेंडर सप्लाई ठप…. आज से होगी शुरू, आदेश जारी


    भोपाल।
    पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के चलते मध्य प्रदेश में पिछले 13 दिन से कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई बंद पड़ी हुई है। मंगलवार से इसकी सप्लाई शुरू हो सकती है। दरअसल, सोमवार देर रात राज्य सरकार ने होटल-रेस्टोरेंट समेत ढाबों और स्ट्रीट फूड वेंडर्स को एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई के आदेश जारी कर दिए हैं।

    आदेश के मुताबिक होटल, रेस्टोरेंट और कैर्ट्स को नौ प्रतिशत कमर्शियल एलपीजी सप्लाई दी जाएगी, जबकि ढाबा और स्ट्रीट फूड वेंडर्स को सात प्रतिशत गैस मिलेगी। इसके अलावा कैटर्स और अन्य उद्योगों को भी सिलेंडर देने के निर्देश दिए गए हैं।

    कमर्शियल गैस की सप्लाई 13 दिन तक ठप रहने से प्रदेश के 50 हजार से ज्यादा होटल-रेस्टोरेंट प्रभावित रहे। कई होटल बंद होने की कगार पर पहुंच गए थे, तो कई जगह मेन्यू बदलना पड़ा। हालात ऐसे बन गए कि डीजल भट्टी और इंडक्शन के जरिए काम चलाना पड़ा, जिसमें छोटे ढाबे और स्ट्रीट फूड वेंडर्स सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।

    बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन में 10 प्रतिशत कमर्शियल सिलेंडर देने का प्रावधान है, लेकिन सप्लाई के स्पष्ट आदेश नहीं मिलने से प्रदेश में गैस की किल्लत हो गई। इसी कारण होटल-रेस्टोरेंट कारोबार पर संकट गहरा गया।

    गैस संकट को लेकर एक दिन पहले यानी रविवार को होटल और रेस्टोरेंट संगठनों ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव रश्मि शमी से मुलाकात कर गैस की निर्बाध सप्लाई बहाल करने की मांग की थी। इसके बाद सरकार ने आदेश जारी किए। भोपाल होटल एवं रेस्टोरेंट संघ के अध्यक्ष तेजकुलपाल सिंह पाली ने कहा कि कमर्शियल गैस आपूर्ति पर पाबंदी के कारण होटल व्यवसाय ठप होने की कगार पर पहुंच गया था। अब इस फैसले से राहत मिलेगी।


    घरेलू उपभोक्ताओं को भी सिलेंडर समय पर उपलब्ध कराने के दिये निर्देश

    खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की अपर मुख्य सचिव रश्मि अरूण शमी ने सोमवार को सिलेंडर की वितरण व्यवस्था सुचारू बनाए रखने तथा घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर समय पर उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिये हैं।

    उन्होंने कहा कि शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थानों को आवश्यकता की 100 प्रतिशत गैस की आपूर्ति की जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन के लिए विशेष छूट के निर्देश भी जारी किये हैं। इसके अतिरिक्त राज्यो को 10 प्रतिशत अधिक आवंटन की पेशकश की है जो पीएनजी प्रणाली की ओर बदलाव का समर्थन करने वाले सुधारो से जुड़ा है। मंत्रालय द्वारा पीएनजी गैस के आवेदन तथा शुरूआत के बीच के समय को कम करने के निर्देश भी दिये हैं।

    अपर मुख्य सचिव शमी ने बताया कि ऑइल कंपनियो के प्रतिनिधि के अनुसार पूर्व मे जहां 84 प्रतिशत उपभोक्ता ऑनलाइन बुकिंग करवा रहे थे, वह संख्या बढकर 90 प्रतिशत से अधिक हो गयी है। कंपनियो ने मोबाइल एप, एसएमएस, व्हाट्सएप तथा आईवीआरएस कॉल द्वारा गैस बुकिंग की सुविधा प्रदान की है। उपभोक्ता बुकिंग के लिए इन डिजिटल माध्यम का प्रयोग करें तथा अनावश्यक रूप से एजेंसी पर जाने से बचे।

    उन्होंने बताया कि प्रदेश मे एलपीजी की कालाबाजारी तथा जमाखोरी के विरूद्ध लगातार कार्यवाही की जा रही है। प्रदेश मे 1844 स्थानों पर कार्यवाही कर 2717 सिलेंडर जब्त किये गए। पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, पीएनजी तथा घरेलू एलपीजी गैस की उपलब्धता के सम्बन्ध में ऑयल कंपनियों से समन्वय के लिए राज्य स्तर पर 6 सदस्यीय समिति भी गठित की गयी है, जो प्रदेश में कामर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडर की सुचारू आपूर्ति बनाए रखने के लिए निरंतर निगरानी करेगी।

    एसीएस रश्मि अरुण शमी ने औद्योगिक एवं वाणिज्यिक संस्थाओ से आग्रह किया है कि वे उपलब्धता अनुसार पीएनजीके कनेक्शन लें। उन्होंने कहा कि पीएनजी की आपूर्ति लगातार बनी हुई है और आगे भी जारी रहेगी। पेट्रोल, डीजल, घरेलू पीएनजी तथा सीएनजी की पर्याप्त उपलब्धता है और इनकी आपूर्ति भी निरंतर एवं बिना कटौती के जारी रहेगी।

    ऑयल कंपनी के स्टेट नोडल ऑफिसर अजय श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में गैस सिलेंडर का पर्याप्त स्टॉक है तथा प्रदेश के बॉटलिंग प्लांट एवं वितरकों के गोदाम में पर्याप्त सिलेण्डर उपलब्ध हैं। घरेलू उपभोक्ताओं से अपील की गयी है कि विगत अंतिम रिफिल के 25 दिन बाद पुनः बुकिंग करायें।

    प्रशासन द्वारा वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध स्टॉक का विवेकपूर्ण उपयोग करने एवं वैकल्पिक ईंधन स्रोतों को अपनाने की सलाह भी दी गयी है। जिन कामो में गैस ज्यादा खर्च होती है उनको नियंत्रित करने एवं विकल्प तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाए। प्रदेश में घरेलू गैस की पर्याप्त आपूर्ति जारी है, उपभोक्ता अनावश्यक रूप से अफवाहों से भ्रमित न हों। देश की रिफायनरी उच्च क्षमता पर कार्य कर रही हैं तथा पश्चिम एशिया के अतिरिक्त अन्य स्थानों से भी कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

    सिलेण्डर बुकिंग संबंधित शिकायत/सुझाव हेतु इन टोल फ्री नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है
    – भारत गैस हेल्पलाइन नंबर – 1800-22-4344 (टोल फ्री)
    – इंडेन गैस कस्टमर केयर नंबर- 1800-2333-555 (टोल फ्री)
    – एचपी गैस कस्टमर केयर नंबर- 1800-2333-555 (टोल फ्री)