Category: Madhya Pradesh

  • मप्र विधानसभाः अनुपूरक बजट पर तीखी बहस, कांग्रेस ने जनविरोधी और भाजपा ने बताया विकासोन्मुखी

    मप्र विधानसभाः अनुपूरक बजट पर तीखी बहस, कांग्रेस ने जनविरोधी और भाजपा ने बताया विकासोन्मुखी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन गुरुवार को उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत दूसरे अनुपूरक बजट की मांगें प्रस्तुत किए जाने के बाद सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विधानसभा अध्यक्ष ने चर्चा शुरू कराई, जिसमें भाजपा और कांग्रेस दोनों पक्षों के विधायकों ने अपनी-अपनी बात मजबूती से रखी। कांग्रेस ने जहां अनुपूरक बजट को जनविरोधी करार दिया, तो वहीं भाजपा ने इसे विकासोन्मुखी बताया। शाम साढ़े सात बजे कार्यवाही स्थगित कर इसे शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए टाल दिया गया।

    गुरुवार को सदन में दूसरे अनुपूरक बजट की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने कहा कि अनुपूरक बजट में पूंजीगत व्यय कम है जिससे रोजगार में कमी आएगी और टैक्स कलेक्शन कम होगा, इससे पता चलता है कि यह प्रदेश के हित में नहीं है। दूसरा अनुपूरक बजट 13155 करोड़ का है। सदन में पिछली बैठक में कहा गया था कि कांग्रेस विधायकों के क्षेत्र में 5 करोड़ रुपए विकास कार्य के लिए दिए जाएंगे लेकिन आज तक नहीं दिया गया। सरकार भेदभाव कर रही है। इसके पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। विधायकों के ई-ऑफिस के लिए 5-5 लाख रुपये देने की बात कही गई थी। कांग्रेस के कई विधायकों को यह सुविधा नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि किसानों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है इसलिए किसान आंदोलन करने को मजबूर हैं। खल घाट में हुए आंदोलन में 700 किसानों पर अज्ञात के नाम पर केस दर्ज कर दिया गया।

    अनुपूरक बजट पर बोलते हुए कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार पहले यह तो बताए कि जब से यह सरकार बनी है, तब से अब तक कितना कर्जा लिया। इसका क्या उपयोग हो रहा है। मध्य प्रदेश पर 4.50 लाख करोड़ से अधिक कर्ज है। हर साल जो कर्ज लिया गया है, उस पर ब्याज कितना दे रहे हैं। यह जनता को बताएं। मतदाता की जेब में पैसे डालो, वोट लेकर 5 साल राज करो… इस फार्मूले पर सरकार काम कर रही है।

    शेखावत ने कहा कि मैं बहनों के पैसे मिलने खिलाफ नहीं हूं। उनके विकास के खिलाफ भी नहीं हूं, लेकिन सबसे अहम सवाल है कि यह जो कर्ज लिया जा रहा है… चुकेगा कैसे? जनता पर जो बोझ बढ़ा रहा, वह कैसे खत्म होगा? इंदौर में 800 करोड़ रुपए बिना किसी काम के निकल गया और दिखावे के तौर पर एक इंजीनियर पर कार्रवाई हो गई। शेखावत ने इंदौर की खान नदी की शुद्धीकरण पर भी सवाल उठाए, जिसमें लगातार पैसा खर्च हो रहा, लेकिन नदी साफ नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि किसान को खाद नहीं मिल रही है। वह लाइन में लग रहा, डंडे खा रहा है।

    कांग्रेस विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने प्रदेश में खाद संकट का मामला उठाते हुए कहा कि किसानों को खाद नहीं मिलता। 24 घंटे लाइन लगने के बाद टोकन मिलता है, उसके बाद फिर खाद मिलने की तारीख दी जाती है। सरकार किसानों को खाद नहीं दे पा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास कार्यों के नाम पर भेदभाव हो रहा है। बीजेपी के विधायकों से 15 करोड़ रुपये के विकास कार्य के प्रस्ताव लिए जा रहे हैं, जबकि कांग्रेस के विधायकों को अनदेखा किया जा रहा है।

    इस पर विधायक सीता शरण शर्मा ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। प्रस्ताव दिए जाते हैं, उसके परीक्षण होते हैं, उसके आधार पर राशि जारी होती है। इस पर राजेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि कांग्रेस के विधायकों के साथ भी ऐसा क्यों नहीं होता है कि उनसे भी प्रस्ताव लेकर विकास कार्य करने का मौका दिया जाए। विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने विधायकों के वेतन बढ़ाने का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने 1 लाख 60 हजार रुपये वेतन बढ़ाने की तैयारी की थी, लेकिन इससे भी रोक दिया गया है। अभी 1 लाख 10 हजार रुपये मिल रहा है। वेतन नहीं भी बढ़ेगा तो भी कांग्रेस विधायक काम करते रहेंगे।

    राजेंद्र कुमार सिंह ने अमरपाटन की 6 पंचायतों को रीवा जिले में शामिल करने का विरोध किया और कहा कि मैहर में बन रहे कलेक्ट्रेट भवन को मैहर से दूर कटनी रोड पर बनाया जा रहा है, जबकि इसे मैहर और अमरपाटन के बीच बनाया जाना चाहिए। विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने मार्कंडेय घाट पर एक ब्रिज बनाने की मांग की।

    कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने अनुपूरक बजट पर कहा कि वैसे तो अल्पसंख्यकों के लिए अल्पसंख्यक विभाग में बजट का प्रावधान नहीं है, लेकिन अब हमें भी इसकी आदत हो गई है। जो भी व्यवस्था रहेगी, उसके हिसाब से चलते रहेंगे, लेकिन सरकर को इस ओर ध्यान देना चाहिए, ताकि विकास कार्य कराए जा सकें। उन्होंने कहा कि भोपाल शहर में विकास के काम में तेजी लाना चाहिए।

    कांग्रेस विधायक फुंदेलाल मार्को ने छात्रावास में बच्चों को महुआ खिलाए जाने का विरोध करते हुए कहा– यह बच्चे अपने घर पर भी महुआ खा रहे थे और जब यहां छात्रावास में पहुंचे हैं तो वहां भी चने के साथ महुआ खिलाया जा रहा है। धीरे-धीरे महुआ पीने की आदत डाल दी जाएगी। वे सरकार से मांग करते हैं कि बच्चों के मन में यह भावना खत्म करें कि आदिवासी हैं और उन्हें महुआ पीना पड़ेगा, महुआ ही खाना पड़ेगा। उन्होंने संभागों के लिए नियुक्त किए गए अपर मुख्य सचिवों के साथ विधायकों के संवाद पर भी जोर दिया।

    मार्को ने देश भर में 3000 से अधिक रजिस्टर्ड बूचड़खाने बंद करने की मांग करते हुए कहा कि अगर आप इसे बंद नहीं कर सकते हैं तो दिखावा मत कीजिए। मार्को ने कहा कि जहां गोमाता का वध किया जाता है। ऐसे बूचड़खाने को बंद करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजना चाहिए। यह तय है कि इसका सारे देश में विरोध होगा। सरकार अगर गंभीर है तो दिखावा न करें।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बजट में किसानों, युवाओं और एमएसएमई सेक्टर के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं है। धान और मक्का के लिए एसएसपी और समर्थन मूल्य का उल्लेख नहीं होना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की जेब की चोरी कर रही है और किसानों की समस्याओं से मुंह मोड़ रही है।

    अनुपूरक बजट का बचाव करते हुए भाजपा विधायक ओमप्रकाश सखलेचा ने कहा कि सरकार का फोकस लाड़ली बहना, आवास, किसान, सिंचाई और उद्योगों पर है। उन्होंने बताया कि रोजगार के लिए 2 लाख 27 करोड़ से अधिक का प्रावधान किया गया है तथा भावांतर के लिए 500 करोड़ रखे गए हैं।

    होशंगाबाद से भाजपा विधायक डॉ. सीताशरण शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार ने जो वादे किए, वे पूरे किए हैं। कर्जा कोई नया मुद्दा नहीं है, लेकिन हमारी सरकार ने कर्ज लेकर विकास भी किया है। सदन में दोनों पक्षों की तीखी बहस के बीच अनुपूरक बजट पर चर्चा शुक्रवार को भी जारी रहेगी। सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए द्वितीय अनुपूरक बजट 13,476 करोड़ रुपये का पेश किया है।

  • मप्र की समृद्ध वन संपदा में चीता मुकुटमणि और कोहिनूर के समान : मोहन यादव

    मप्र की समृद्ध वन संपदा में चीता मुकुटमणि और कोहिनूर के समान : मोहन यादव


    – मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर कूनो के जंगल में छोड़े 3 चीते

    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों के अनुरूप श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीतों के पुनर्स्थापन को नई दिशा मिली है। आज अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस के अवसर पर मादा चीता ‘वीरा’ के साथ उसके दो शावक खुले वन में विचरण के लिए छोड़े गए हैं।

    राज्य में चीतों की संख्या अब 32 हो गई है। इसमें गांधीसागर अभयारण्य के तीन चीते भी शामिल हैं। कूनो नेशनल पार्क चीतों के पुनर्वास से अब अंतरराष्ट्रीय स्तर का केंद्र बन चुका है। कूनो में हमारी धरती पर ही जन्मे तीसरे पीढ़ी के चीते विचरण कर रहे हैं। कूनो में जन्मी मादा चीता ‘मुखी’ के पांच शावक स्वस्थ हैं, यह सुखद समाचार है। कूनो के चीते अब श्योपुर से मुरैना और राजस्थान की धरती तक दौड़ लगा रहे हैं। राज्य की समृद्ध वन संपदा में चीता मुकुटमणि और कोहिनूर के समान है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर तीन चीतों को स्वछंद विचरण के लिए बाड़े से अभयारण्य (खुले जंगल) में छोड़ा। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की भूमि पर सभी जीव सुरक्षित होंगे, राज्य सरकार इसके लिये प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उन्नत रेडियो ट्रेकिंग प्रणाली और समर्पित टीमों के माध्यम से सतत् निगरानी की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चीता दिवस के अवसर पर कूनो राष्ट्रीय उद्यान के वर्ष-2026 के कैलेण्डर और ‘फील्ड मैन्युअल फॉर क्लिनिकल मैनेजमेंट ऑफ फ्री-रेंजिंग चीताज़ इन कूनो नेशनल पार्क’ बुक का विमोचन किया। साथ ही कूनो राष्ट्रीय उद्यान में ‘नव-निर्मित सोवेनियर शॉप’ का लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान के पारोंद में आयोजित कार्यक्रम में चीता दिवस पर सभी प्रदेशवासियों को बधाई दी। चीता प्रोजेक्ट की सफलता के लिए उन्होंने वन विभाग के अमले को धन्यवाद भी दिया।

    चीतों का तेजी से परिवार बढ़ रहा है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश टाइगर, लेपर्ड और चीता स्टेट है। हमारे जंगल बहुत से वन्यजीवों के आश्रय स्थल हैं। ऐसे में विश्व में पहली बार चीतों का पुनर्स्थापन मध्य प्रदेश में हुआ, इसके लिए वन विभाग के मंत्री और अधिकारी बधाई के पात्र हैं। श्योपुर, कूनो में चीतों के पुनर्स्थापन से पर्यटन में पांच गुना वृद्धि हो चुकी है। चीतों का परिवार जिस तेज गति से बढ़ रहा है, उसी हिसाब से भविष्य में कूनो नेशनल पार्क से विस्थापित लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं।

    मनुष्य और चीते का संबंध वसुधैब कुटुम्बकम का सबसे सुंदर उदाहरण

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि चंबल अंचल के स्वच्छ वातावरण में हमारे नागरिक भी चीतों के साथ जीना सीख गए हैं और चीतों से प्रेम भी कर रहे हैं। प्रदेशवासियों में वन्यजीवों एवं प्रकृति के साथ भाईचारे से जुड़ने का स्वभाव है। यह वसुधैब कुटुम्बकम का सबसे सुंदर उदाहरण है। उन्होंने मध्य प्रदेश की धरती पर चीता परियोजना के क्रियान्वयन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चीता पर्यटन से कूनो राष्ट्रीय उद्यान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री ने ग्राम अहेरा में ग्रामीण महिलायों से संवाद भी किया। उन्होंने कहा कि हम अपनी बहनों का पूरा ध्यान रखेंगे। मुख्यमंत्री का स्नेह पाकर बहनों ने उन्हें आशीर्वाद दिया।

    अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में श्योपुर जिले प्रभारी और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, वन राज्यमंत्री दिलीप सिंह अहिरवार, पूर्व वन मंत्री रामनिवास रावत, सहरिया विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष तुरसनपाल बरिया, उपाध्यक्ष सीताराम आदिवासी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, चंबल कमिश्नर सुरेश कुमार, श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा, शिवपुरी कलेक्टर रवीन्द्र चौधरी, जनप्रतिनिधि सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में होगा राष्ट्रीय बालरंग समारोह का समापन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में होगा राष्ट्रीय बालरंग समारोह का समापन

    भोपाल ! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में भोपाल के इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय परिसर, श्यामला हिल्स में शुक्रवार 5 दिसम्बर को शाम 4 बजे राष्ट्रीय बालरंग समारोह का समापन होगा। समापन समारोह में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह भी मौजूद रहेंगे।

    राष्ट्रीय बालरंग समारोह का शुभारंभ शुक्रवार 5 दिसम्बर को मानव संग्रहालय में प्रात: 10:30 बजे होगा। आयोजन में 14 राज्य आंध्रप्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखण्ड, कर्नाटक, पंजाब, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश एवं 5 केन्द्र शासित प्रदेश पुडुचेरी, दिल्ली, जम्मू कश्मीर, चण्डीगढ़ एवं लक्षदीप के शालेय विद्यार्थियों के लोक नृत्य दल अपने राज्यों की प्रस्तुति देंगे।

    राष्ट्रीय एकता पर केन्द्रित है बालरंग

    भारत विभिन्न संस्कृतियों का देश है। राष्ट्रीय बालरंग समारोह में विभिन्न प्रांतों के छात्र-छात्राएँ शामिल होकर अपने कला-कौशल के उत्कृष्ट प्रदर्शन से अपने प्रदेश की वैभवशाली लोक संस्कृति को प्रस्तुत करते हैं। विभिन्न प्रांतों के बच्चों के बीच संस्कृति का आदान-प्रदान होने से राष्ट्रीय एकता और सद्भाव की भावना मजबूत होती है। राष्ट्रीय बालरंग प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त दल को पुरस्कार स्वरूप एक लाख 11 हजार रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त दल को 75 हजार एवं तृतीय स्थान प्राप्त दल को 51 हजार रुपये की राशि प्रदान की जायेगी। इसके अलावा चयनित 2 दलों को 21-21 हजार रुपये के सांत्वना पुरस्कार भी दिये जायेंगे।

  • श्योपुर: मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने खुले जंगल में छोड़े तीन चीते

    श्योपुर: मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने खुले जंगल में छोड़े तीन चीते

    श्योपुर। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस 4 दिसंबर के उपलक्ष्य में कूनो नेशनल पार्क पहुंचकर तीनों चीतों को खुले जंगल ने रिलीज किया। उन्होंने मादा चीता वीरा सहित उनके 9 माह के दो शावकों को जंगल में विचरण हेतु छोड़ा। श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में आयोजित चीता रिलीज कार्यक्रम के दौरान मुख्य सचिव अनुराग जैन, श्योपुर जिले के प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला, वन विभाग के राज्य मंत्री नागर सिंह चौहान, पूर्व वन मंत्री रामनिवास रावत, सहरिया विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं केबिनेट मंत्री दर्जा तुरसनपाल बरिया, उपाध्याय राज्य मंत्री दर्जा सीताराम आदिवासी, अपर मुख्य सचिव वन विभाग अशोक वर्णवाल, कमिश्नर सुरेश कुमार, कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा, पुलिस अधीक्षक सुधीर अग्रवाल, शिवपुरी कलेक्टर रविन्द्र चौधरी, पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौड़, भाजपा जिला अध्यक्ष शशांक भूषण, पूर्व विधायक दुर्गालाल विजय,बृजराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य महावीर सिंह सिसौदिया, कैलाश नारायण गुप्ता, भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष सुरेन्द्र जाट, सुजीत गर्ग, सीसीएफ उत्तम कुमार, डीएफओ कूनो आर थिरुकुराल, सामान्य केएस रंधा आदि अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कूनो नेशनल पार्क के पारोंद क्षेत्र में बनाए गए चीता रिलीज प्वाइंट से तीन चीतों को खुले जंगल में छोड़ा गया, इसके साथ ही अब खुले जंगल में चीतों की संख्या 19 हो गई है।
    उल्लेखनीय हैं कि मध्यप्रदेश में 32 चीते है, मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या 29 है, इसमें दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 8 चीतों सहित भारतीय भूमि कूनो नेशनल पार्क में जन्मे 21 शावक चीते शालिम हैं।
    पर्यटन के क्षेत्र में इंटरनेशनल स्तर पर पहचान बना रहा कूनो: सीएम
    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने चीता रिलीज कार्यक्रम के उपरांत कहा कि श्योपुर जिले का कूनो नेशनल पार्क पर्यटन के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पहचाना बना रहा है, आज का दिन एतिहासिक दिन है, चीता दिवस पर सभी को बधाई देते हुए कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प से भारत में चीतों की पुनर्जीवन की परियोजना सफल रही है, चीता प्रोजेक्ट के लिए हम उनके आभारी है, जो इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए मध्यप्रदेश की धरती को चूना, आज कूनो में 29 और गांधी सागर में 03 चीते है।
    कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट के चलते रोजगार की नई संभावनाए उत्पन हुई है, चीता प्रोजेक्ट की सफलता के लिए उन्होंने वन विभाग के अमले को धन्यवाद भी दिया।
    चीता कैलेंडर का विमोचन
    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस अवसर पर कूनो नेशनल पार्क के चीता कैलेंडर का विमोचन किया, इसके साथ ही शोविनियर शॉप का लोकार्पण भी किया गया। इसके अलावा क्लीनिकल मैनेजमेंट ऑफ फ्री राइजिंग चीता इन कूनो नेशनल पार्क किताब का विमोचन भी किया गया। कूनो नेशनल पार्क के कैलेंडर के सभी पृष्ठों पर विभिन्न चीतों की तस्वीरों का प्रकाशन किया गया है।
  • इंदौर सरकारी डॉक्टरों द्वारा मरीजों को निजी अस्पताल भेजने की मामले में कार्रवाई, एक निलंबित, एक का वेतन काटा

    इंदौर सरकारी डॉक्टरों द्वारा मरीजों को निजी अस्पताल भेजने की मामले में कार्रवाई, एक निलंबित, एक का वेतन काटा

    इंदौर । इंदौर के एमवायएच अस्पताल में एक बार फिर शासकीय डॉक्टरों की लापरवाही और निजी अस्पतालों को मरीज भेजने का मामला सामने आया है। इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और लापरवाही को उजागर किया है जहां सरकारी अस्पतालों से लाखों रुपये की सैलरी लेने वाले डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय निजी अस्पतालों से रिश्वत लेने में व्यस्त रहते हैं।

    हाल ही में एक मरीज, जो रतलाम से न्यूरोसर्जरी विभाग में इलाज के लिए एमवायएच अस्पताल आया था, का इलाज करने के बजाय उसे निजी अस्पताल भेजने का मामला सामने आया। रात के समय ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने मरीज को इलाज के लिए भेजने के बजाय उसे जमीन पर लिटा दिया और कहा कि उसका आयुष्मान कार्ड है, इसलिए उसे इंडेक्स अस्पताल में भेजा जाए। यह सारी प्रक्रिया मरीज द्वारा लिखित शिकायत करने के बाद उजागर हुई, जिसमें यह बात सामने आई कि एमसीएच के एक विद्यार्थी ने मरीज को निजी अस्पताल भेजने का निर्णय लिया था, और इसके बदले उसे निजी अस्पताल से रकम मिलती थी। इस मामले की जांच के बाद डॉक्टर का 15 दिन का वेतन काटा गया है।

    इतना ही नहीं एमवाय अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही की यह घटना अकेली नहीं है। अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण मरीजों को इमरजेंसी इलाज देने में भी परेशानी होती है। हाल ही में सिमरोल सड़क हादसे के बाद घायलों को इलाज के लिए एमवाय अस्पताल भेजा गया था, लेकिन इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में कोई ड्यूटी डॉक्टर मौजूद नहीं था। कलेक्टर के अस्पताल पहुंचने पर यह लापरवाही सामने आई। दो घंटे बाद जब महिला सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर आईं, तो उन्होंने बताया कि वह घर पर आराम कर रही थीं। इस लापरवाही के लिए डीन ने महिला डॉक्टर को बर्खास्त कर दिया।

    अस्पताल में भर्ती मरीजों की कमी के पीछे भी इन डॉक्टरों की लापरवाही और निजी अस्पतालों के साथ सांठगांठ मुख्य कारण मानी जा रही है। एमवायएच अस्पताल के हड्डी रोग विभाग, पेट रोग विभाग, मेडिसिन विभाग और न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉक्टर भी मरीजों को निजी अस्पताल भेजने के इस गिरोह में शामिल हैं। इन गिरोहों के संरक्षण में ही ड्यूटी डॉक्टर और जूनियर डॉक्टर यह कृत्य कर रहे हैं। इसके अलावा एंबुलेंस संचालक स्टाफ और आउटसोर्स कंपनियों के कर्मचारी भी इन गतिविधियों में शामिल हैं। इस कारण से सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या घटती जा रही है, और निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

    एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए कहा कि मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस घटना में एक डॉक्टर का 15 दिन का वेतन काटा गया है, और ड्यूटी पर अनुपस्थित रहने वाली सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर को बर्खास्त किया गया है।

    यह घटना इंदौर के सरकारी अस्पतालों में व्याप्त भ्रष्टाचार और लापरवाही की गंभीर समस्या को उजागर करती है। मरीजों की जान से खेलने वाले इन डॉक्टरों और उनके गिरोह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि जनता को उचित इलाज मिल सके और सरकारी अस्पतालों में विश्वास पुनः बहाल हो।

  • भिंड में पासपोर्ट सेवा कार्यालय की सफलता: ग्वालियर और मुरैना के नागरिकों का बढ़ता रुझान

    भिंड में पासपोर्ट सेवा कार्यालय की सफलता: ग्वालियर और मुरैना के नागरिकों का बढ़ता रुझान

    भिंड । मध्य प्रदेश भिंड शहर के हनुमान बजरिया स्थित बड़े डाकघर परिसर में 19 अप्रैल 2025 को पासपोर्ट सेवा कार्यालय की शुरुआत हुई थी और पिछले सात महीनों में इस कार्यालय ने अपनी पहचान मजबूत की है। हालांकि भिंड जिले के लोग पासपोर्ट बनवाने के लिए अपेक्षाकृत कम पहुंच रहे हैं वहीं ग्वालियर और मुरैना जिलों से लोग अधिक संख्या में आवेदन कर रहे हैं।

    भिंड में पासपोर्ट आवेदन की स्थिति

    पासपोर्ट सेवा कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, अब तक लगभग 15,000 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं जिनमें से 10,000 पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं। इसका मतलब है कि रोजाना औसतन 30 से 40 लोग इस कार्यालय में पासपोर्ट के लिए आवेदन करने पहुंचते हैं। यह आंकड़ा यह दर्शाता है कि इस सेवा का रुझान धीरे-धीरे बढ़ रहा है।

    ग्वालियर और मुरैना से अधिक आवेदन

    पासपोर्ट कार्यालय के इंचार्ज अभिषेक छत्रसाल के अनुसार, ग्वालियर में पहले से ही एक पासपोर्ट सेवा केंद्र था, लेकिन भिंड के कार्यालय के शुरू होने के बाद वहां दस्तावेज़ी जांच और अन्य प्रक्रियाओं को सरल और तेज किया गया है। इसके कारण, ग्वालियर और मुरैना के लोग अब भिंड कार्यालय को प्राथमिकता दे रहे हैं। खासकर ग्वालियर के लोग, जो लंबी वेटिंग टाइम से बचने के लिए यहां आवेदन कर रहे हैं। मुरैना के लोग भी भिंड से कम दूरी पर होने के कारण यहां आते हैं, जिससे इस कार्यालय में आवेदन की संख्या में इज़ाफा हुआ है।

    भिंड जिले में आवेदन की कमी का कारण

    शुरुआत में यह उम्मीद की जा रही थी कि भिंड के लोग भारी संख्या में पासपोर्ट के लिए आवेदन करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसका प्रमुख कारण ग्रामीण इलाकों में पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया को लेकर जागरूकता की कमी बताई जा रही है। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में भिंड जिले में भी लोग पासपोर्ट के लिए जागरूक होने लगे हैं, खासकर विदेशों में रोजगार और स्कॉलरशिप के अवसरों की जानकारी मिलने के बाद। अब ज्यादा से ज्यादा लोग पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन कर रहे हैं।

    आवेदन प्रक्रिया में सुधार और गति

    पिछले कुछ महीनों में पासपोर्ट सेवा कार्यालय में सुधार किए गए हैं, जिनके परिणामस्वरूप आवेदन प्रक्रिया और तेज हो गई है। इंचार्ज छत्रसाल के अनुसार, स्टाफ की संख्या और काउंटर बढ़ाए गए हैं, जिससे अब आवेदकों को वेरिफिकेशन के लिए ज्यादा समय नहीं लग रहा है। पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को भी डिजिटल किया गया है, जिससे आवेदन की स्वीकृति और पासपोर्ट की डिलीवरी तेज हो गई है।

    मुख्य कारण विदेश जाने के लिए आवेदन

    ग्वालियर और मुरैना जिलों से आने वाले अधिकांश आवेदन विदेश रोजगार, स्टडी वीजा और परिवार पुनर्मिलन एफआर श्रेणी के हैं। इन जिलों के लोग विदेश में काम करने पढ़ाई करने या परिवार के साथ पुनर्मिलन के लिए पासपोर्ट बनवाने की इच्छाएं रखते हैं। वहीं भिंड जिले से आने वाले लोग टूरिस्ट वीजा स्टूडेंट वीजा और जॉब वीजा श्रेणी में अधिक आवेदन कर रहे हैं।

    भिंड में पासपोर्ट सेवा कार्यालय ने न केवल अपनी पहचान बनाई है, बल्कि यह ग्वालियर और मुरैना के लोगों के लिए एक सुविधाजनक विकल्प बन चुका है। पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया में सुधार जागरूकता बढ़ने और दस्तावेज़ी जांच के सरल होने के कारण आवेदन की संख्या में इज़ाफा हुआ है। हालांकि, भिंड जिले के लोग अभी भी अपेक्षाकृत कम आवेदन कर रहे हैं लेकिन आने वाले समय में इस ट्रेंड में बदलाव देखने को मिल सकता है।

  • इंदौरः मुख्यमंत्री ने किया आश्रय स्थल का औचक निरीक्षण, वितरित किए कंबल

    इंदौरः मुख्यमंत्री ने किया आश्रय स्थल का औचक निरीक्षण, वितरित किए कंबल


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर प्रवास के दौरान सोमवार देर रात 10:30 बजे दयालबाग स्थित आश्रय स्थल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने वहां अस्थायी रूप रह रहे लोगों से बातचीत की और आश्रय स्थल पर उपलब्ध सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी आश्रयग्राहियों को कंबल वितरित किए, जिससे ठंड के मौसम में उन्हें राहत मिल सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने झाबुआ व दाहोद से परीक्षा देने आए विद्यार्थी कमल, दाहोद के संकेत एवं संजय तथा इंदौर में पानी टंकी की चौकीदारी कर रहे चुन्नी लाल सहित अन्य श्रमिकों से उनके यहां आने के कारण, कार्य-स्थिति और आश्रय स्थल पर मिल रही सुविधाओं के बारे में चर्चा की। उन्होंने आश्रय स्थल में ठहरे लोगों की दिनचर्या, समस्याओं और उनकी जरूरतों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। इस दौरान परिक्रमावासी अनिल से भी मुख्यमंत्री ने संवाद किया, जिन्होंने बताया कि वे धार्मिक परिक्रमा पूरी कर वापस लौटे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उनसे चर्चा करते हुए कहा कि आपकी सेवा व दर्शन कर हम भी धन्य हो गए है। इस दौरान विधायक गोलू शुक्ला, सुमित मिश्रा, गौरव रणदीवे सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं इंदौर सम्भागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव व अन्य अधिकारीगण मौजूद थे।


    मुख्यमंत्री ने काल भैरव धाम में किए दर्शन

    आश्रय स्थल निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव पास ही स्थित श्री काल भैरव धाम पहुंचे, जहाँ उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली और जनकल्याण की कामना की।

  • सहकारिता विभाग मध्य प्रदेश मिशन कर्मयोगी में निभा रहा देश में अग्रणी भूमिका

    सहकारिता विभाग मध्य प्रदेश मिशन कर्मयोगी में निभा रहा देश में अग्रणी भूमिका


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सोमवार को मंत्रालय में मिशन कर्मयोगी कार्यक्रम के एचआर विशेषज्ञ डॉ. आर. बाला सुब्रमण्यम (बालू) तथा सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में विभाग में मिशन कर्मयोगी के प्रभावी क्रियान्वयन और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। मंत्री सारंग ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी पहल मिशन कर्मयोगी के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में मध्य प्रदेश का सहकारिता विभाग अग्रणी भूमिका निभा रहा है। मिशन कर्मयोगी से विभागीय कार्यप्रणाली में दक्षता, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने में भारत सरकार की यह महत्वाकांक्षी पहल मील का पत्थर साबित होगी।

    विभाग को प्रभावी क्रियान्वयन पर मिली सराहना

    मिशन कर्मयोगी कार्यक्रम के एचआर विशेषज्ञ डॉ. आर. बाला सुब्रमण्यम (बालू) ने मध्य प्रदेश सहकारिता विभाग के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत सबसे अधिक और प्रभावी कार्य मध्य प्रदेश द्वारा किया गया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के सफल मॉड्यूल को अन्य राज्यों में भी लागू करेंगे।

    मिशन कर्मयोगी कार्यक्रम में विभागीय उपलब्धियाँ

    सहकारिता विभाग ने अपने सभी 1122 अधिकारियों और कर्मचारियों को iGOT कर्मयोगी पोर्टल पर सफलतापूर्वक ऑनबोर्ड कर लिया है। विभागीय कर्मचारियों ने 11337 से अधिक ऑनलाइन प्रशिक्षण कोर्स सफलतापूर्वक पूर्ण किए हैं, जो सीखने की संस्कृति और सतत कौशल विकास के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता दर्शाता है। इन प्रशिक्षणों से विभागीय कार्यक्षमता, सेवा वितरण और प्रशासनिक गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    भारत सरकार की महत्वाकांक्षी पहल मिशन कर्मयोगी
    मिशन कर्मयोगी राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है। इसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को आधुनिक, तकनीक-सक्षम और भविष्य उन्मुख प्रशासनिक क्षमताओं से लैस करना, शासन प्रणाली को कुशल, पारदर्शी और जन-केन्द्रित बनाना, प्रशिक्षण के माध्यम से निरंतर सीखने की संस्कृति विकसित करना है। कर्मयोगी पोर्टल इसी उद्देश्य की पूर्ति का प्रमुख माध्यम है, जिसके द्वारा कर्मचारी अपने कार्यक्षेत्र से संबंधित आवश्यक कौशल और ज्ञान को निरंतर अपडेट कर सकते हैं।

  • इंदौरः एमवाय अस्पताल की बड़ी सफलता, महिला के पेट से निकालीं 15 किलो की दो गठानें

    इंदौरः एमवाय अस्पताल की बड़ी सफलता, महिला के पेट से निकालीं 15 किलो की दो गठानें


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित महाराजा यशवंतराव (एमवाय) अस्पताल में एक ऐसी चिकित्सकीय सफलता दर्ज हुई, जिसने न केवल चिकित्सा जगत को प्रेरित किया, बल्कि मानवीय जज़्बे और डॉक्टरों की समर्पित टीमवर्क की मिसाल भी पेश की। टीम को 50 वर्षीय महिला के पेट से 15 किलो की दो गठानें निकालने में सफलता प्राप्त हुई है।

    इस संबंध में प्राप्‍त जानकारी के अनुसार खरगोन जिले के ग्राम दबिया की 50 वर्षीय मसाली बाई पिछले कई महीनों से पेट दर्द और असहजता से जूझ रही थीं। एमवाय अस्पताल के सर्जरी विभाग में जाँच करने पर पता चला कि उनके पेट में दो बड़ी गठानें हैं। यह स्थिति न केवल असामान्य थी बल्कि जीवन के लिए खतरा थी। मामला चुनौतीपूर्ण था, लेकिन विभागाध्यक्ष डॉ. अरविन्द शुक्ला और स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सोमेन भट्टाचार्जी और उनकी टीम डॉ. अविनाश गौतम, डॉ. उपेन्द्र पाण्डेय, डॉ. रामेंद्र गुर्जर और अन्य जूनियर चिकित्सकों ने अत्यंत सावधानी, कौशल और सटीक योजना के साथ सफल ऑपरेशन को अंजाम दिया और लगभग 15 किलो की दो गठानें निकाली गईं।

    मसाली बाई के पेट से दोनों बड़ी गांठों को सफलतापूर्वक निकाल दिया गया और उनकी जान बच गई। सफल ऑपरेशन के बाद सोमवार को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। यह सफलता एमवाय हॉस्पिटल की टीम की प्रतिबद्धता, विशेषज्ञता और मानवीय सेवा का एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई है।