Category: Madhya Pradesh

  • इंदौर जिला न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला: गर्भस्थ शिशु को भी आश्रित मानते हुए मुआवजे का आदेश

    इंदौर जिला न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला: गर्भस्थ शिशु को भी आश्रित मानते हुए मुआवजे का आदेश

    इंदौर । इंदौर जिला न्यायालय ने सड़क दुर्घटना से संबंधित एक प्रकरण में अत्यंत संवेदनशील, मानवीय एवं दूरदर्शी निर्णय पारित करते हुए न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया है। न्यायालय ने आरक्षक की मृत्यु के उपरांत मुआवजा निर्धारण करते समय उसकी पत्नी के गर्भ में पल रहे अजन्मे शिशु को भी मृतक का आश्रित मानते हुए मुआवजा प्रदान करने का आदेश दिया है।

    यह मामला सीहोर जिले के जवरा थाना क्षेत्र में घटित एक भीषण सड़क दुर्घटना से संबंधित है। जानकारी के अनुसार आरक्षक सतीश, पिता कैलाश रुडेलें, जो उस समय झाबुआ जिले में पदस्थ थे, कार से यात्रा कर रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार एवं लापरवाही से चल रहे एक ट्रक ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। दुर्घटना की गंभीरता इतनी अधिक थी कि आरक्षक सतीश सहित एक अन्य व्यक्ति की मौके पर ही मृत्यु हो गई।

    दुर्घटना के समय मृतक की पत्नी रेखा सात माह की गर्भवती थीं। पति की असमय मृत्यु के बाद परिवार पर गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट उत्पन्न हो गया। इसके पश्चात पीड़ित परिवार की ओर से न्यायालय में मुआवजा प्राप्त करने हेतु दावा याचिका प्रस्तुत की् की गई।

    सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस तथ्य को अत्यंत गंभीरता से लिया कि मृतक की पत्नी गर्भवती थी और गर्भ में पल रहा शिशु भी मृतक पर पूर्ण रूप से आश्रित माना जाना चाहिए। इस आधार पर न्यायालय ने गर्भस्थ शिशु को भी आश्रितों की श्रेणी में सम्मिलित करते हुए मुआवजे का निर्धारण किया।

    अधिवक्ता श्री राजेश खंडेलवाल के अनुसार, न्यायालय ने मृतक की पत्नी, दो नाबालिग बच्चों, माता, गर्भस्थ शिशु तथा साथ रहने वाले छोटे भाई को आश्रित मानते हुए कुल 50 लाख 88 हजार रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया है। इसके अतिरिक्त 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज जोड़ने पर यह राशि लगभग 60 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

    कानूनी विशेषज्ञों ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह फैसला गर्भस्थ शिशु के अधिकारों को न्यायिक मान्यता देने की दिशा में एक सशक्त कदम है। यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा। वहीं पीड़ित परिवार ने न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय उनके जीवन को पुनः स्थिरता देने में सहायक सिद्ध होगा। यह फैसला न केवल न्याय की भावना को सुदृढ़ करता है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ित परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में स्थापित हुआ है।

  • 350 करोड़ का मास्टरप्लान: इंदौर को मिलने जा रहा है नया एलिवेटेड कॉरिडोर 15 फरवरी से रखी जाएगी नींव जानिए क्या है पूरा रूट मैप

    350 करोड़ का मास्टरप्लान: इंदौर को मिलने जा रहा है नया एलिवेटेड कॉरिडोर 15 फरवरी से रखी जाएगी नींव जानिए क्या है पूरा रूट मैप


    नई दिल्ली। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की ‘लाइफलाइन’ कहे जाने वाले एबी रोड पर रोजाना सफर करने वाले लाखों वाहन चालकों के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। शहर के सबसे व्यस्ततम इलाकों में शुमार पलासिया, गीता भवन और नवलखा जैसे क्षेत्रों में लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम और लंबे सिग्नलों से अब जल्द ही मुक्ति मिलने वाली है। इंदौर के बुनियादी ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव की पटकथा लिखी जा चुकी है, जिसके तहत LIG चौराहे से लेकर नवलखा तक लगभग 7 किलोमीटर लंबा एक भव्य एलिवेटेड कॉरिडोर आकार लेने जा रहा है। करीब 350 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही शहर की रफ्तार को एक नई दिशा मिलेगी।

    इस कॉरिडोर की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में राजीव गांधी चौराहे से LIG तक का जो सफर भारी ट्रैफिक के कारण 40 से 45 मिनट ले लेता है, इस कॉरिडोर के बनने के बाद वह महज 15 मिनट में सिमट जाएगा। यह न केवल लोगों के कीमती समय की बचत करेगा, बल्कि ईंधन की खपत और प्रदूषण को कम करने में भी मील का पत्थर साबित होगा। यह प्रस्तावित कॉरिडोर LIG चौराहे से शुरू होकर गिटार चौराहा, पलासिया, गीता भवन, शिवाजी वाटिका और GPO जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों के ऊपर से होते हुए सीधे नवलखा तक पहुंचेगा।

    प्रोजेक्ट के तकनीकी पहलुओं पर गौर करें तो इस पूरे रूट पर तीन विशाल रोटरी बनाई जाएंगी, जो ट्रैफिक के सुगम प्रबंधन के लिए LIG, शिवाजी वाटिका और नवलखा पर स्थित होंगी। इसके अलावा, गिटार चौराहा और व्हाइट चर्च रोड जैसे महत्वपूर्ण जंक्शनों पर कनेक्टिंग आर्म्स (रैम्प) दिए जाएंगे, ताकि आसपास की कॉलोनियों और अंदरूनी सड़कों से आने वाला ट्रैफिक भी बिना किसी बाधा के सीधे कॉरिडोर पर चढ़ सके। हालांकि, पहले इसे 6 लेन बनाने का विचार था, लेकिन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद इसे 4 लेन करने का निर्णय लिया गया है।

    दिलचस्प बात यह है कि यह प्रोजेक्ट पिछले करीब 4 सालों से फाइलों और तकनीकी उलझनों में अटका हुआ था। साल 2009 में केंद्र से हरी झंडी मिलने के बाद कई बाधाएं आईं, लेकिन अब पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग ने इसे धरातल पर उतारने की पूरी तैयारी कर ली है। वर्तमान में प्रस्तावित रूट पर मिट्टी की जांच (Soil Testing) का काम तेजी से चल रहा है और 15 फरवरी से कॉरिडोर की नींव रखने का मुख्य काम शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस विशाल निर्माण कार्य के दौरान ट्रैफिक को व्यवस्थित रखने के लिए विशेष मैनेजमेंट प्लान भी तैयार किया गया है।

    सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो अगले 2 सालों के भीतर यह कॉरिडोर बनकर तैयार हो जाएगा। इंदौर के विकास में यह एलिवेटेड रोड न केवल एक नई पहचान जोड़ेगी, बल्कि शहर के बढ़ते विस्तार और भविष्य की ट्रैफिक जरूरतों को पूरा करने में रीढ़ की हड्डी साबित होगी।

  • कलयुगी पति का खौफनाक चेहरा: कुल्हाड़ी से पत्नी की निर्मम हत्या, शव झाड़ियों में फेंककर फरार

    कलयुगी पति का खौफनाक चेहरा: कुल्हाड़ी से पत्नी की निर्मम हत्या, शव झाड़ियों में फेंककर फरार


    पन्ना । मध्यप्रदेश के पन्ना जिले से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। शाहनगर थाना अंतर्गत ग्राम खमतरा में एक कलयुगी पति ने अपनी ही पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी। इस जघन्य हत्याकांड के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है।

    घटना ग्राम खमतरा के रामपुर खजुरी हार क्षेत्र की बताई जा रही है। यहां 40 वर्षीय मीरा बाई का शव 8 फरवरी को झाड़ियों में संदिग्ध अवस्था में मिला था। सूचना मिलते ही शाहनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि महिला की हत्या धारदार हथियार से की गई है।

    पुलिस जांच आगे बढ़ी तो चौंकाने वाला सच सामने आया। मृतका की हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि उसके पति निर्भय सिंह राठौर ने ही की थी। आरोपी ने आपसी विवाद के चलते कुल्हाड़ी से पत्नी पर ताबड़तोड़ वार किए, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपी ने साक्ष्य मिटाने के इरादे से शव को झाड़ियों में फेंक दिया और फरार हो गया।

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वंदना सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी पति निर्भय सिंह राठौर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रारंभिक तौर पर हत्या का कारण आपसी कलह बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं से मामले की गहन जांच कर रही है।

    इस निर्मम हत्या की खबर सामने आने के बाद से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी का व्यवहार पहले भी अक्सर आक्रामक रहता था, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि वह इस हद तक चला जाएगा। पुलिस का कहना है कि आरोपी से पूछताछ जारी है और जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। यह घटना एक बार फिर घरेलू हिंसा और रिश्तों में बढ़ती असहिष्णुता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

  • ग्वालियर में रेबीज का कहर 6 साल के मासूम समेत तीन की मौत अधूरा इलाज और बढ़ते आवारा कुत्ते चिंता का सबब

    ग्वालियर में रेबीज का कहर 6 साल के मासूम समेत तीन की मौत अधूरा इलाज और बढ़ते आवारा कुत्ते चिंता का सबब


    ग्वालियर: में रेबीज का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है फरवरी 2026 के शुरुआती दिनों में ही छह साल के मासूम समेत तीन लोगों की मौत हो चुकी है। इन मौतों का कारण अधूरा इलाज गलत मेडिकल सलाह और आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को बताया जा रहा है। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि समय पर पूरा वैक्सीनेशन लेने से रेबीज जैसी घातक बीमारी को रोका जा सकता है।

    दतिया जिले के हंस प्रजापति का मामला सबसे दुखद है। छह वर्षीय हंस को कुत्ते ने काटा था। कमला राजा शासकीय अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन के तीन डोज लगाए जा चुके थे। डॉक्टरों ने चौथा डोज अस्पताल में ही कराने की सलाह दी थी। परिजन बच्चे को घर ले गए और कुछ ही समय बाद उसकी हालत बिगड़ गई। स्कूल से लौटने के बाद उसके मुंह से लार बहने लगी, जो रेबीज का गंभीर लक्षण है। इसके बाद मासूम की मौत हो गई।

    पहली मौत 4 फरवरी को दर्ज की गई। ग्वालियर के बगिया इलाके के 48 वर्षीय किरण लालवानी को जनवरी में आवारा कुत्ते ने काटा था। परिजनों के अनुसार स्थानीय क्लीनिक में डॉक्टर ने केवल टिटनेस का इंजेक्शन लगाया और एंटी-रेबीज वैक्सीन देने से मना कर दिया। लगभग एक महीने बाद किरण में रेबीज के क्लासिक लक्षण सामने आए। न्यू जेएएच में भर्ती कराने के दौरान उनकी मौत हो गई। इस मामले में डॉक्टर के खिलाफ लापरवाही का केस भी दर्ज किया गया।

    दूसरी मौत टीकमगढ़ जिले की 65 वर्षीय महिला की हुई, जिसे सियार ने काटा था। समय पर एंटी-रेबीज इलाज न मिलने के कारण संक्रमण तेजी से फैला। गंभीर हालत में महिला को ग्वालियर रेफर किया गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं और रेफरल सिस्टम की कमजोरी को उजागर किया।

    हालिया तीन मौतों ने ग्वालियर में डॉग बाइट मामलों की गंभीरता को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहर में हर साल हजारों डॉग बाइट केस सामने आते हैं लेकिन स्ट्रीट डॉग कंट्रोल, स्टरलाइजेशन और जन-जागरूकता की रफ्तार धीमी है। रेबीज एक बार फैलने के बाद 100 प्रतिशत घातक है लेकिन समय पर पूरा वैक्सीनेशन लेने से इसे रोका जा सकता है। विशेषज्ञों ने आम जनता को कुत्ते या किसी भी संदिग्ध जानवर के काटने के बाद घाव को साबुन और पानी से तुरंत धोने अस्पताल पहुंचने और एंटी-रेबीज वैक्सीन का पूरा कोर्स लेने की सलाह दी है। बच्चों को अकेले बाहर न छोड़ने और लापरवाही न करने की चेतावनी भी दी गई है।

    मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों और प्रशासन की उदासीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डॉक्टरों और विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सिस्टम और समाज दोनों नहीं सतर्क हुए तो रेबीज और ज्यादा जानें ले सकता है। लोगों में जागरूकता और समय पर इलाज की समझ ही इस जानलेवा बीमारी से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।

  • ट्रेन में मारपीट मामले में सीटीआई निलंबित, अलग घटना में रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर पर चाकू से हमला

    ट्रेन में मारपीट मामले में सीटीआई निलंबित, अलग घटना में रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर पर चाकू से हमला


    जबलपुर । मध्यप्रदेश में रेलवे व्यवस्था से जुड़े दो गंभीर घटनाक्रम सामने आए हैं। पहली घटना ट्रेन में खानपान की गुणवत्ता को लेकर हुए विवाद से संबंधित है जिसमें जांच के बाद सीटीआई को निलंबित कर दिया गया है। वहीं दूसरी घटना में रेलवे के एक सीनियर सेक्शन इंजीनियर पर सार्वजनिक स्थान पर चाकू से हमला किए जाने का मामला दर्ज किया गया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार बांद्रा पटना एक्सप्रेस के एम-2 कोच में खानपान की सामग्री की गुणवत्ता को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था। यह घटना नरसिंहपुर रेलवे स्टेशन के समीप की बताई जा रही है। ड्यूटी पर तैनात सीटीआई भगवान सिंह ठाकुर ने पेंट्री कार में उपलब्ध कराए जा रहे भोजन की गुणवत्ता पर आपत्ति दर्ज की थी। इस दौरान पेंट्री कार मैनेजर अंशु सिंह के साथ विवाद बढ़ गया जो बाद में मारपीट में तब्दील हो गया।

    घटना की शिकायत के बाद जबलपुर जीआरपी द्वारा मामला पंजीबद्ध कर जांच प्रारंभ की गई। जांच में डिप्टी सीटीआई भगवान सिंह ठाकुर को दोषी पाया गया जिसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। वहीं पेंट्री कार संचालक मैनेजर अंशु सिंह पर भी नियमानुसार कार्रवाई करते हुए 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा और मर्यादित आचरण से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

    इधर एक अन्य घटना में रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर पर दिनदहाड़े चाकू से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। यह घटना बाजार क्षेत्र स्थित विधा मार्केट में हुई जहां अज्ञात आरोपी ने शराब पीने के लिए पैसे नहीं देने पर अधिकारी पर चाकू से हमला कर दिया। पूरी वारदात वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

    हमले में घायल सीनियर सेक्शन इंजीनियर को उपचार के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी की तलाश की जा रही है। अपर पुलिस अधीक्षक श्री सूर्यकांत शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

  • विजय शाह विवाद सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा बोले मंत्री पद से हाथ धोना पड़ेगा

    विजय शाह विवाद सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा बोले मंत्री पद से हाथ धोना पड़ेगा


    मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उनका विवादित बयान कर्नल सोफिया कुरैशी पर 2025 में दिया गया था और अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। आज सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अहम सुनवाई हो रही है। यह विवाद ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शाह द्वारा कथित आपत्तिजनक बयान देने से शुरू हुआ था। आरोप है कि यह बयान सेना अधिकारी की गरिमा को ठेस पहुंचाने और सांप्रदायिक घृणा फैलाने वाला था।

    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पहले FIR दर्ज करने का आदेश दिया था जिसे शाह ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने SIT गठित की और अगस्त 2025 में जांच पूरी हुई। जनवरी 2026 में कोर्ट ने सरकार को दो हफ्ते में अभियोजन मंजूरी पर फैसला लेने को कहा था लेकिन अब तक मंजूरी लंबित है। कोर्ट ने पहले ही शाह की माफी को देर से देने के कारण खारिज कर दिया था और कहा कि अब मामले में राहत मिलना मुश्किल है।

    पूर्व कानून मंत्री और कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने सुनवाई से पहले बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि विजय शाह को अब मंत्री पद से हाथ धोना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि शाह ने चार बार माफी मांगी लेकिन कोर्ट अब राहत नहीं देगी। पीसी शर्मा ने इस मामले को केवल राजनीतिक नहीं बल्कि महिलाओं की गरिमा और सेना अधिकारी के सम्मान का मुद्दा बताया। उनका कहना था कि सरकार के मंत्री द्वारा दिया गया बयान महिलाओं और सेना के सम्मान के खिलाफ था और इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।

    सिंह ने कहा कि कांग्रेस इसे महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा का मुद्दा बनाकर जनता तक पहुंचाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार योजनाओं के नाम पर केवल राजनीतिक दावे कर रही है लेकिन वास्तविकता में अपने मंत्री को बचा रही है। कांग्रेस नेता इसे लाडली बहना जैसी योजनाओं की पोल खोलने का अवसर मान रहे हैं।

    SIT रिपोर्ट में धारा 196 BNS के तहत केस मजबूत पाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चाहे सरकार मंजूरी दे या न दे, केस आगे बढ़ेगा। CJI की बेंच ने सरकार से त्वरित फैसला लेने को कहा है। इससे भाजपा सरकार पर दबाव बढ़ गया है। यदि अभियोजन मंजूरी मिलती है तो शाह पर मुकदमा चलेगा और यह उनके राजनीतिक करियर को प्रभावित करेगा। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में उनके प्रभाव को देखते हुए BJP सतर्क है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट की सख्ती से सरकार को अब निर्णय लेना अनिवार्य होगा।

    राजनीतिक स्तर पर यह मामला विपक्ष को अवसर प्रदान कर रहा है। कांग्रेस इसे चुनावी मुद्दा बना सकती है और महिला सम्मान तथा सेना की गरिमा का संदेश जनता तक पहुंचा सकती है। वहीं भाजपा के लिए यह चुनौती बनी हुई है कि वह मंत्री को बचाने की कोशिश में राजनीतिक दबाव और न्यायिक प्रक्रिया में संतुलन बनाए।आज की सुनवाई इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इसका नतीजा न केवल विजय शाह के राजनीतिक भविष्य पर प्रभाव डालेगा बल्कि मध्य प्रदेश में महिला सुरक्षा, सेना सम्मान और राजनीतिक नैतिकता को लेकर बहस को भी नया मोड़ देगा।

  • जबलपुर सर्राफा बाजार का विश्लेषण: 40 हजार की कीमत फिर भी कम डिमांड, क्या 9 कैरेट सोना सिर्फ एक दिखावा है?

    जबलपुर सर्राफा बाजार का विश्लेषण: 40 हजार की कीमत फिर भी कम डिमांड, क्या 9 कैरेट सोना सिर्फ एक दिखावा है?


    जबलपुर/ भारतीय समाज में सोना खरीदना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक सुरक्षित निवेश माना जाता है। यही कारण है कि जब भी सोने की बात आती है, तो शुद्धता प्योरिटी सबसे बड़ा पैमाना होती है। हाल के दिनों में बाजार में 9 कैरेट गोल्ड ज्वेलरी एक सस्ते विकल्प के रूप में उभरी है, लेकिन जबलपुर सहित देश के अन्य सर्राफा बाजारों में इसकी चमक फीकी पड़ती दिख रही है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए करीब 40 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम की आकर्षक कीमत होने के बावजूद, लोग इसे शादी-ब्याह और निवेश जैसे महत्वपूर्ण मौकों पर अपनाने से कतरा रहे हैं।

    जबलपुर के अनुभवी सर्राफा व्यापारी अजीत जैन के अनुसार, 9 कैरेट सोने की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी संरचना में छिपी है। तकनीकी रूप से देखें तो 9 कैरेट गोल्ड का अर्थ है कि उस आभूषण में मात्र 37.5 प्रतिशत शुद्ध सोना है, जबकि शेष 62.5 प्रतिशत हिस्सा मिश्र धातु अलॉय का होता है। हालांकि, यह सोना भी अब BIS-हॉलमार्क के अंतर्गत आता है और सरकारी मानकों पर खरा उतरता है, लेकिन सोने की मात्रा इतनी कम होने के कारण यह पारंपरिक सोने 22K या 24K जैसा अनुभव नहीं दे पाता।

    व्यापारियों का कहना है कि 9 कैरेट गोल्ड के रंग और चमक को लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें आ रही हैं। इसमें मिश्र धातु की मात्रा अधिक होने के कारण कुछ समय बाद इसका पीलापन हल्का पड़ने लगता है और यह दिखने में असली सोने जैसा नहीं लगता। यदि इसे ठीक से मेंटेन न किया जाए, तो यह काला भी पड़ सकता है। यही वजह है कि ग्राहक इसे खरीदने के बाद पछतावे से बचने के लिए अभी भी 22 या 18 कैरेट के आभूषणों पर ही भरोसा जता रहे हैं।

    निवेश के दृष्टिकोण से भी 9 कैरेट गोल्ड एक ‘फेल’ सौदा साबित हो रहा है। जब कोई व्यक्ति सोना खरीदता है, तो उसकी उम्मीद होती है कि भविष्य में उसे उस पर अच्छा रिटर्न मिलेगा। लेकिन 9 कैरेट सोने में शुद्ध सोने की मात्रा कम होने की वजह से री-सेल वैल्यू दोबारा बेचने पर मिलने वाली कीमत काफी कम होती है। लोग पूछते जरूर हैं, लेकिन जब उन्हें पता चलता है कि इसमें 60 फीसदी से ज्यादा अन्य धातुएं हैं, तो वे निवेश के लिए वापस 24 या 22 कैरेट की ओर मुड़ जाते हैं।

    वर्तमान में 9 कैरेट गोल्ड की मांग केवल बड़े शहरों में कुछ फैशनेबल और ‘डेली वियर’ ज्वेलरी तक सीमित है। शादियों और त्योहारों के सीजन में, जहाँ प्रतिष्ठा और शुद्धता का महत्व होता है, वहाँ यह सस्ता सोना अपनी जगह बनाने में नाकाम रहा है। अंततः, भारतीय ग्राहकों के लिए सोना आज भी वही है जो बरसों तक अपनी चमक और कीमत दोनों बरकरार रख सके।

  • स्वागत के नाम पर अव्यवस्था: भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष के आगमन से शहडोल की यातायात व्यवस्था चरमराई

    स्वागत के नाम पर अव्यवस्था: भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष के आगमन से शहडोल की यातायात व्यवस्था चरमराई


    शहडोल । संभागीय मुख्यालय शहडोल में भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्री श्याम टेलर के नगर आगमन के दौरान किए गए स्वागत इंतजामों ने शहर की यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर दिया। स्वागत के नाम पर शहर के प्रमुख चौराहों और मार्गों पर भारी मशीनें खड़ी किए जाने से आमजन को असुविधा का सामना करना पड़ा और कई स्थानों पर जाम की स्थिति निर्मित हो गई।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत की तैयारियों के तहत शहर के विभिन्न हिस्सों में चार से छह जेसीबी मशीनों को सड़कों पर खड़ा किया गया था। इन मशीनों को फूलों एवं गुब्बारों से सजाया गया था तथा युवा मोर्चा के पदाधिकारी इन पर सवार होकर स्वागत की तैयारी करते देखे गए। भारी मशीनों के कारण मार्ग संकरे हो गए, जिससे यातायात का प्रवाह बाधित हुआ और देखते ही देखते प्रमुख सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

    इस अव्यवस्था का सबसे अधिक असर जिले की प्रमुख शैक्षणिक संस्था रघुराज स्कूल के सामने देखने को मिला। स्कूल समय के दौरान सड़क पर जाम की स्थिति बनी रही, जिससे विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों को आवागमन में कठिनाई हुई। जाम में फंसे वाहनों में एंबुलेंस भी शामिल थीं, जिससे आपातकालीन सेवाओं की सुचारुता पर भी सवाल खड़े हो गए।

    स्थानीय नागरिकों ने बताया कि स्वागत की इस व्यवस्था में आम जनता की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी गई। दिनभर लोग जाम में फंसे रहे और दैनिक कार्यों के लिए निकलने वालों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। कई स्थानों पर यातायात पुलिस द्वारा स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया, लेकिन सड़कों पर खड़ी भारी मशीनों के कारण यातायात को पूरी तरह सुचारू करना संभव नहीं हो सका।

    इस पूरे घटनाक्रम को लेकर शहर में चर्चाओं का दौर जारी है और लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या सार्वजनिक मार्गों का इस प्रकार उपयोग करना उचित है। नागरिकों का कहना है कि राजनीतिक या संगठनात्मक आयोजनों के दौरान यातायात व्यवस्था और आपात सेवाओं को ध्यान में रखा जाना आवश्यक है, ताकि आमजन को असुविधा न हो।

    मामले में शहडोल यातायात प्रभारी श्री संजय जायसवाल ने कहा कि वे वर्तमान में एक विभागीय बैठक में हैं, लेकिन यदि इस प्रकार से शहर में जाम की स्थिति बनी है तो इसकी जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

  • मध्य प्रदेश में भाजपा नेताओं की गुंडागर्दी सीधी में महिला पिटाई अशोकनगर में युवक पर हमला कानून व्यवस्था पर सवाल

    मध्य प्रदेश में भाजपा नेताओं की गुंडागर्दी सीधी में महिला पिटाई अशोकनगर में युवक पर हमला कानून व्यवस्था पर सवाल


    मध्य प्रदेश में दो अलग अलग घटनाओं ने राज्य में कानून व्यवस्था और महिलाओं और युवाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीधी जिले के बहरी बाजार में स्थानीय भाजपा नेता और यूट्यूबर संतोष पाठक ने एक महिला को दुकान विवाद के कारण बेरहमी से पीटा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें पाठक महिला के बाल खींचते हुए उसे जमीन पर गिराकर लाठी से मारते नजर आए। पीड़िता का कहना है कि संतोष पाठक ने पहले उसकी दुकान हटवाई और अपनी जगह पर व्यापार शुरू कर दिया था। विवाद पुराना था लेकिन रविवार को आमने सामने होने पर हिंसा भड़क उठी। पुलिस ने महिला की शिकायत पर आईपीसी की धारा 323 294 और 506 के तहत मामला दर्ज किया है।

    इसी तरह अशोकनगर जिले के चंदेरी क्षेत्र के बड़ेरा गांव में भाजपा नेता और सरपंच बली सिंह लोधी ने 34 वर्षीय युवक बृजकिशोर यादव को जमीन पर पटककर लात और थप्पड़ मारे। वीडियो में लोधी युवक को लगातार पीटते दिख रहे हैं। युवक का कहना है कि वह चौराहे पर बैठा था तभी सरपंच ने गालियां दी और विरोध करने पर हमला कर दिया। घटना एक ढाबे के पास हुई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया लेकिन गिरफ्तारी में देरी पर सवाल उठ रहे हैं।

    दोनों घटनाओं ने मध्य प्रदेश में महिलाओं और युवाओं की सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है। सीधी की पीड़िता हेमा सिंह स्टॉल चलाती हैं और उनकी आजीविका खतरे में है। संतोष पाठक ने सफाई देते हुए कहा कि महिला ने पहले उन पर चप्पल से हमला किया था लेकिन वायरल वीडियो में हमला असंतुलित लगता है। अशोकनगर में बृजकिशोर यादव ने मेडिकल जांच कराई और चोटों की रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी। लोधी की राजनीतिक हैसियत के कारण स्थानीय लोग डर का माहौल बता रहे हैं।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इन घटनाओं को जोड़कर लाडली बहना और बेटी बचाओ योजनाओं को खोखला बताया। उन्होंने तुरंत गिरफ्तारी की मांग की। एनसीआरबी के आंकड़े दिखाते हैं कि एमपी में महिला अपराधों में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। समाजसेवी संगठन निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं ताकि राजनीतिक दबाव न पड़े। विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण इलाकों में छोटे विवाद अक्सर हिंसक रूप ले लेते हैं और कानून की पहुंच सीमित होती है।

    सीधी में बहरी बाजार विवाद महीनों पुराना था। प्रशासन को शिकायतें मिलीं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई जिससे हिंसा भड़की। अशोकनगर में लोधी की सरपंची के कारण गांव में दबदबा है और युवक की पिटाई से महिलाएं और युवा असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। दोनों जगहों पर वीडियो वायरल होने से आक्रोश फैला और सोशल मीडिया पर #JusticeForMPVictims ट्रेंड कर रहा है।

    पुलिस ने दोनों मामलों में चोट अपशब्द और धमकी की धाराओं में FIR दर्ज की है। दोनों पीड़ितों ने मेडिकल जांच कराई लेकिन गिरफ्तारी में देरी के कारण राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लग रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वीडियो मजबूत सबूत हैं लेकिन जांच में देरी न्याय को कमजोर करती है। कांग्रेस ने इसे चुनावी मुद्दा बनाया है और पटवारी ने कहा कि भाजपा सरकार में महिलाएं असुरक्षित हैं। भाजपा ने इसे व्यक्तिगत विवाद बताया। यह मामला राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते हिंसक विवादों पर गंभीर प्रश्न उठाता है।

  • मौतों के बाद भी लापरवाह सिस्टम: IDA दफ्तर में परोसा जा रहा दो साल पुराना एक्सपायरी पानी

    मौतों के बाद भी लापरवाह सिस्टम: IDA दफ्तर में परोसा जा रहा दो साल पुराना एक्सपायरी पानी


    इंदौर । भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला अभी लोगों की स्मृति से मिटा भी नहीं था कि शहर के एक प्रमुख सरकारी कार्यालय से चौंकाने वाली लापरवाही सामने आ गई है। शहर के विकास की जिम्मेदारी संभालने वाला इंदौर विकास प्राधिकरण IDA स्वयं स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी करता पाया गया है। IDA कार्यालय में आगंतुकों आम नागरिकों और बैठकों में शामिल लोगों को एक्सपायरी आरओ पानी परोसे जाने का मामला उजागर हुआ है।

    जानकारी के अनुसार IDA कार्यालय में रखी पानी की बोतलों पर पैकेजिंग तिथि 23 नवंबर 2024 अंकित है। बोतलों पर स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि यह पानी निर्माण तिथि से 90 दिनों तक ही उपयोग योग्य है। इस आधार पर पानी फरवरी 2025 के बाद पीने योग्य नहीं था लेकिन हैरानी की बात यह है कि वर्ष 2026 में भी यही बोतलें कार्यालय में रखी गई हैं और उपयोग में लाई जा रही हैं।

    इस पूरे मामले में सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया है कि IDA के अधिकारी स्वयं इस पानी को पीने से परहेज करते हैं। विभाग के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अधिकारी घर से अपना निजी पानी लेकर आते हैं जबकि यह एक्सपायरी बोतलबंद पानी मीटिंग आगंतुकों और वीआईपी के लिए रखा जाता है। आवश्यकता पड़ने पर एजेंट को फोन कर पेटियां मंगवा ली जाती हैं लेकिन उनकी गुणवत्ता या वैधता की कोई जांच नहीं की जाती।

    सरकारी कार्यालय में हर वर्ष बोतलबंद पानी की खरीद पर बड़ी राशि खर्च की जाती है इसके बावजूद न तो स्टॉक की नियमित जांच की जा रही है और न ही एक्सपायरी डेट पर कोई निगरानी है। यह स्थिति न केवल वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करती है बल्कि सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एक्सपायरी पानी का सेवन फूड पॉइजनिंग पेट संक्रमण और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। ऐसे में यदि यह पानी किसी बुजुर्ग बीमार व्यक्ति या बच्चे को परोसा जाए तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

    भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद प्रशासन ने जांच और सुधार के दावे किए थे लेकिन IDA कार्यालय की यह स्थिति दर्शाती है कि सिस्टम ने उन घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया। सरकारी दफ्तरों में आज भी बुनियादी स्वास्थ्य सुरक्षा तक सुनिश्चित नहीं की जा सकी है।

    अब यह सवाल उठना लाजमी है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी पानी सप्लाई करने वाले ठेकेदार के खिलाफ क्या कदम उठाए जाएंगे और क्या पूरे स्टॉक की जांच कर दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।