Category: Madhya Pradesh

  • उमंग सिंघार का बड़ा आरोप सिंगरौली में AI फोटो से फर्जी मनरेगा मजदूर भुगतान मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग

    उमंग सिंघार का बड़ा आरोप सिंगरौली में AI फोटो से फर्जी मनरेगा मजदूर भुगतान मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग


    सिंगरौली /विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सिंगरौली जिले में मनरेगा योजना के तहत चल रहे फर्जीवाड़े को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्वीट कर आरोप लगाया कि AI जनरेटेड फर्जी मजदूरों की तस्वीरें अपलोड कर उनके नाम पर भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसमें कमीशन की मांग भी शामिल है और सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है।

    सिंघार ने कहा कि सिंगरौली में 120 से अधिक मजदूरों के नाम AI द्वारा बनाई गई फर्जी तस्वीरों के माध्यम से भुगतान किया गया है। इसके बावजूद अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जी-रामजी योजना का उद्देश्य मजदूरों के सम्मान और उनकी आर्थिक सुरक्षा होना चाहिए न कि सरकारी धन की लूट का साधन। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मामले का संज्ञान लेकर उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की।

    सिंघार ने अपने ट्वीट में यह भी कहा कि भाजपा केवल नाम बदलने की राजनीति कर रही है जबकि योजनाओं के धरातलीय कार्यान्वयन में भ्रष्टाचार हो रहा है और गरीब मजदूरों के हक को मारा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामले न केवल योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं बल्कि आम नागरिकों में सरकार और प्रशासन के प्रति असंतोष बढ़ाते हैं।

    नेता प्रतिपक्ष ने इस अवसर पर चंदेरी की घटना को भी लेकर सरकार पर निशाना साधा। अशोकनगर जिले के चंदेरी में भाजपा नेता और सरपंच द्वारा एक युवक की कथित पिटाई का वीडियो साझा करते हुए उन्होंने इसे कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल बताया। सिंघार ने कहा कि सत्ता से जुड़े लोग जब कानून हाथ में ले लेते हैं तो आम नागरिक कैसे सुरक्षित रह सकता है। उन्होंने इसे सत्ता का दुरुपयोग और प्रशासन की विफलता करार दिया।

    सिंघार ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह न केवल फर्जीवाड़ों की जांच करे बल्कि कानून के उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसे मामलों को नजरअंदाज किया गया तो समाज में कानून और व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होगा और भ्रष्टाचार और गुंडाराज बढ़ेगा।

    इस पूरे मामले ने प्रदेश में भाजपा सरकार के कार्यान्वयन और प्रशासनिक नियंत्रण पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दल लगातार ऐसे मामलों को उजागर कर जनता और सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार दोषियों पर कार्रवाई करती है या इन फर्जीवाड़ों और हिंसक घटनाओं को अनदेखा करती रहती है।

  • श्रद्धा की भूल या घातक लापरवाही? भोपाल में 12वीं की छात्रा ने भभूत समझकर खाई चूहामार दवा, बोर्ड परीक्षा से पहले बुझ गया घर का चिराग

    श्रद्धा की भूल या घातक लापरवाही? भोपाल में 12वीं की छात्रा ने भभूत समझकर खाई चूहामार दवा, बोर्ड परीक्षा से पहले बुझ गया घर का चिराग

    ईटखेड़ी /राजधानी भोपाल के ईटखेड़ी इलाके से एक ऐसी खबर आई है जिसने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया है, बल्कि सुरक्षा और सावधानी को लेकर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ लांबाखेड़ा निवासी 17 वर्षीय वैष्णवी सेन, जो कि 12वीं कक्षा की छात्रा थी, एक भयावह दुर्घटना का शिकार हो गई। घर के मंदिर में जिसे वह श्रद्धावश ‘भभूत’ (पवित्र राख) समझकर खा रही थी, वह वास्तव में चूहों को मारने वाला घातक जहर था। नियति का क्रूर खेल देखिए कि जिस मंदिर में परिवार सुख-शांति की प्रार्थना करता था, वहीं अनजाने में रखी गई एक दवा ने जवान बेटी की जान ले ली।

    घटना की शुरुआत 26 जनवरी को हुई थी। जानकारी के अनुसार, वैष्णवी की मां घर में चूहों के उत्पात से परेशान थीं और उन्होंने चूहों को भगाने के उद्देश्य से पाउडरनुमा चूहामार दवा मंदिर के पास रख दी थी। इसी बीच वैष्णवी पूजा करने पहुँची और उसने अनजाने में उस पाउडर को मंदिर की भभूत समझ लिया। भक्ति और विश्वास के वशीभूत होकर उसने उस जहरीले पाउडर का सेवन कर लिया। उस समय उसे जरा भी आभास नहीं था कि यह कदम उसके जीवन का आखिरी कदम साबित होगा।

    दवा खाने के कुछ देर बाद वैष्णवी सामान्य रूप से अपनी कोचिंग चली गई, लेकिन वहां उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। घर लौटने पर जब उसे लगातार उल्टियां होने लगीं, तब परिजनों ने उससे पूछताछ की। वैष्णवी ने मासूमियत से जवाब दिया कि उसने मंदिर में रखी भभूत खाई है। यह सुनते ही मां के पैरों तले जमीन खिसक गई, क्योंकि उन्हें पता था कि वह भभूत नहीं बल्कि जहर था। आनन-फानन में उसे भानपुर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उसे घर भेज दिया गया।

    परिजनों को लगा कि खतरा टल गया है, लेकिन जहर अपना असर दिखा चुका था। कुछ दिनों बाद वैष्णवी की हालत दोबारा गंभीर होने लगी। उसे तुरंत हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद सोमवार सुबह उसने अंतिम सांस ली। वैष्णवी के पिता मनोज सेन और पूरा परिवार इस समय गहरे सदमे में है। सबसे दुखद पहलू यह है कि वैष्णवी की 10 फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने वाली थीं। वह भविष्य के सपने बुन रही थी और अपनी परीक्षाओं की तैयारी में जुटी थी, लेकिन एक छोटी सी गलतफहमी ने सब कुछ खत्म कर दिया।

    पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। एएसआई एस.के. बाजपेयी के अनुसार, शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि घर में कीटनाशक या जहरीले पदार्थों को रखते समय अत्यंत सावधानी बरतनी चाहिए, विशेषकर उन जगहों पर जहाँ भ्रम की स्थिति पैदा हो सके। वैष्णवी की मौत ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ा दी है।

  • नीमच कंट्रोल रूम में दर्दनाक आत्महत्या हेड कॉन्स्टेबल ने सुसाइड नोट में खोले सिस्टम के राज

    नीमच कंट्रोल रूम में दर्दनाक आत्महत्या हेड कॉन्स्टेबल ने सुसाइड नोट में खोले सिस्टम के राज


    नीमच  /मध्यप्रदेश के नीमच जिले से पुलिस विभाग को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है जहां एक हेड कॉन्स्टेबल ने ड्यूटी पर रहते हुए जहर खाकर आत्महत्या कर ली। यह दर्दनाक घटना रविवार आठ फरवरी की बताई जा रही है। मृतक हेड कॉन्स्टेबल ने मरने से पहले चार पेज का सुसाइड नोट लिखा है जिसमें उसने अपने ही विभाग के एक आरआई पर गंभीर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। इस घटना के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और आला अधिकारी मामले की हर पहलू से जांच की बात कह रहे हैं।

    मृतक हेड कॉन्स्टेबल होशियार सिंह उम्र पचास वर्ष नीमच पुलिस लाइन कनावटी में रहते थे। जानकारी के अनुसार वह पिछले पांच दिनों से स्वास्थ्य कारणों के चलते अवकाश पर थे और सोमवार से दोबारा ड्यूटी जॉइन करने वाले थे। इसी बीच रविवार सुबह वह पुलिस लाइन पहुंचे और शाम के समय जिला पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचे। यहीं उन्होंने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया जिससे उनकी हालत अचानक बिगड़ गई।कंट्रोल रूम में मौजूद पुलिसकर्मियों ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। सूचना मिलते ही नीमच कैंट थाना प्रभारी नीलेश अवस्थी अन्य पुलिस स्टाफ के साथ मौके पर पहुंचे और होशियार सिंह को तत्काल निजी अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि हेड कॉन्स्टेबल के पास से चार पन्नों का सुसाइड नोट बरामद हुआ है जो अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि यह सुसाइड नोट स्वयं होशियार सिंह ने लिखा था। इस पत्र में उन्होंने अपने विभाग के एक आरआई पर लगातार मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप लगाया है। पत्र में लिखा गया है कि उन्हें लंबे समय से दबाव अपमान और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा था जिससे वे पूरी तरह टूट चुके थे।

    सूत्रों के अनुसार विभागीय स्तर पर यह भी सामने आया है कि होशियार सिंह को पूर्व में एक बार सेवा से पृथक किया जा चुका था। इसके अलावा उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान चार बार विभागीय सजा भी दी गई थी। बताया जा रहा है कि अधिकतर सजाएं बिना सूचना लंबे समय तक अनुपस्थित रहने और अन्य अनुशासनात्मक कारणों से जुड़ी थीं। पुलिस अब इस पहलू की भी गंभीरता से जांच कर रही है कि क्या इन्हीं कारणों से उन पर अतिरिक्त दबाव बनाया जा रहा था।

    नीमच के पुलिस अधीक्षक अंकित जायसवाल ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि जहर खाने से हालत बिगड़ने पर प्रधान आरक्षक को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों सहित पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच कराई जाएगी।इस घटना ने एक बार फिर पुलिस विभाग के भीतर कार्यरत कर्मचारियों के मानसिक दबाव और आंतरिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें जांच पर टिकी हैं कि सच्चाई क्या सामने आती है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।

  • MP हाईकोर्ट का कड़ा प्रहार: निजी बाइक और कारों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर लगी रोक ओला-उबर और रैपिडो की बढ़ी मुश्किलें

    MP हाईकोर्ट का कड़ा प्रहार: निजी बाइक और कारों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर लगी रोक ओला-उबर और रैपिडो की बढ़ी मुश्किलें


    इंदौर : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने परिवहन नियमों और सुरक्षा मानकों को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाया है, जिसका असर पूरे प्रदेश की यातायात व्यवस्था और हजारों युवाओं की कमाई पर पड़ना तय है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में आदेश जारी किया है कि निजी दो पहिया बाइक और चार पहिया कार वाहनों का पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में व्यावसायिक उपयोग पूरी तरह से गैरकानूनी है। हाईकोर्ट का यह फैसला उन एग्रीगेटर कंपनियों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है जो निजी वाहनों के जरिए टैक्सी सेवाएं संचालित कर रही हैं।

    अदालत ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान पाया कि ओला, उबर और रैपिडो जैसी नामी कंपनियां नियमों को ताक पर रखकर निजी नंबर प्लेट वाली गाड़ियों को कमर्शियल वाहनों की तरह इस्तेमाल कर रही हैं। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि ये वाहन बिना किसी वैध कमर्शियल लाइसेंस और अनिवार्य परमिट के यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह ले जा रहे हैं। कानून की नजर में यह न केवल मोटर व्हीकल एक्ट का खुला उल्लंघन है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से भी एक गंभीर जोखिम है। कमर्शियल परमिट न होने की स्थिति में दुर्घटना के समय यात्रियों को बीमा और अन्य कानूनी सुरक्षा मिलने में भी बड़ी बाधा आती है।

    हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और परिवहन विभाग को इस मामले में कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिया है कि कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट ने मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 66 का हवाला देते हुए याद दिलाया कि बिना वैध परमिट के किसी भी निजी वाहन का व्यावसायिक उपयोग दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। प्रशासन को आदेश दिया गया है कि वे सड़कों पर अवैध रूप से चल रही ऐसी बाइक-टैक्सी सेवाओं पर तत्काल लगाम लगाएं और उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई करें।

    गौरतलब है कि इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जैसे महानगरों में रैपिडो और ओला जैसी सेवाओं का जाल काफी फैल चुका है। बड़ी संख्या में कॉलेज जाने वाले छात्र और नौकरीपेशा युवा अपनी निजी बाइक के जरिए पार्ट-टाइम काम करके कमाई कर रहे हैं। कम खर्च और ट्रैफिक से बचने के लिए आम जनता भी इन सेवाओं को काफी पसंद करती रही है। लेकिन हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद, निजी वाहनों के जरिए यह “पार्ट-टाइम” कमाई अब कानूनी दायरे में अवैध मानी जाएगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस आदेश के बाद अब परिवहन विभाग को उन निजी वाहन मालिकों के खिलाफ अभियान चलाना होगा जो ऐप के जरिए सवारियां ढो रहे हैं। अब यदि किसी को टैक्सी सेवा देनी है, तो उसे अनिवार्य रूप से अपने वाहन का कमर्शियल रजिस्ट्रेशन (पीली नंबर प्लेट) कराना होगा और विधिवत परमिट प्राप्त करना होगा। यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा और पंजीकृत कमर्शियल टैक्सी चालकों के हितों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

  • राजधानी भोपाल में पानी और गोमांस का विस्फोट कांग्रेस का ISBT निगम कार्यालय घेराव रावण रूपी पुतला दहन

    राजधानी भोपाल में पानी और गोमांस का विस्फोट कांग्रेस का ISBT निगम कार्यालय घेराव रावण रूपी पुतला दहन


    भोपाल में बीते एक महीने से गोमांस मिलने और गंदे पानी की सप्लाई को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच सोमवार 9 फरवरी को कांग्रेस ने बड़ा आंदोलन छेड़ दिया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ISBT स्थित नगर निगम कार्यालय का घेराव कर नगर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस नेता रविंद्र साहू झूमरवाला ने किया। इस दौरान महापौर मालती राय और एमआईसी सदस्यों को राजधानी की अव्यवस्था का जिम्मेदार ठहराते हुए रावण रूपी पुतला दहन किया गया।

    प्रदर्शन के दौरान माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। कांग्रेस कार्यकर्ता निगम कार्यालय में प्रवेश करने की कोशिश करते नजर आए जिस पर पुलिस से धक्का मुक्की भी हुई। कार्यकर्ताओं के हाथों में महापौर का 11 सिर वाला बड़ा कटआउट था। इसमें एक सिर महापौर का जबकि शेष दस सिर उन अफसरों और जनप्रतिनिधियों के बताए गए जिन्हें कांग्रेस ने गोमांस और दूषित पानी के संकट का जिम्मेदार बताया।

    कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भोपाल में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। शहर के कई इलाकों में पानी की सप्लाई में सीवेज मिल रहा है जिससे आम नागरिकों की सेहत खतरे में है। उन्होंने कहा कि जिस तरह इंदौर में दूषित पानी पीने से 33 लोगों की मौत हो चुकी है उसी तरह भोपाल में भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। कई इलाकों में सीवेज और पानी की लाइनें साथ साथ बिछी हैं और लीकेज के कारण गंदा पानी सीधे घरों तक पहुंच रहा है।

    कांग्रेस का कहना है कि वार्ड कार्यालयों में होने वाली जल सुनवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। लोगों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। कुछ मामलों में तो नाले के पानी को भी पीने योग्य बताकर जनता को गुमराह किया गया। हाल ही में एक मीडिया जांच में वार्ड कर्मचारी द्वारा नाली के पानी को पीने योग्य बताने का मामला सामने आने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

    गोमांस मामले को लेकर भी कांग्रेस ने नगर निगम और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस नेता रविंद्र साहू ने कहा कि स्लॉटर हाउस में गोमांस मिलने के मामले में केवल छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया गया है जबकि असली जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि स्लॉटर हाउस से जुड़ा प्रस्ताव खुद एमआईसी की बैठक में पारित हुआ था फिर भी महापौर और एमआईसी सदस्यों को बचाया जा रहा है।

    गोमांस मामले की शुरुआत 24 दिसंबर 2025 को हुई जब जहांगीराबाद थाना प्रभारी मान सिंह चौधरी ने एफआईआर दर्ज की। इसमें 17 दिसंबर को कंटेनर नंबर यूपी 15 जेटी 4286 में मांस मिलने का जिक्र किया गया। 18 दिसंबर को वेटनरी अस्पताल जहांगीराबाद में 265 क्विंटल मांस के सैंपल लिए गए जबकि शेष मांस कंटेनर चालक को सुपुर्द कर दिया गया। बाद में मथुरा की फोरेंसिक लैब जांच में मांस के गोवंशीय होने की पुष्टि हुई।

    इस खुलासे के बाद हिंदूवादी संगठनों ने अरेरा हिल्स थाने के सामने प्रदर्शन किया और पुलिस ने जिंसी स्थित आधुनिक स्लॉटर हाउस में दस्तावेज जब्त किए। कांग्रेस का कहना है कि यह पूरा मामला प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक संरक्षण का नतीजा है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

  • गुढ़ इंडस्ट्रियल एरिया के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता, 16 करोड़ की जल प्रदाय योजना जल्द पूरी करने के निर्देश

    गुढ़ इंडस्ट्रियल एरिया के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता, 16 करोड़ की जल प्रदाय योजना जल्द पूरी करने के निर्देश


    भोपाल । उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में रीवा जिले के गुढ़ स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की और इस क्षेत्र के औद्योगिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के महत्व पर जोर दिया। बैठक में उन्होंने नगर परिषद गुढ़ और औद्योगिक क्षेत्र गुढ़ में चल रही महत्वाकांक्षी जल प्रदाय योजना को शीघ्र क्रियान्वित करने के निर्देश दिए। यह परियोजना 16 करोड़ की लागत से बनाई जा रही है, लेकिन अब तक केवल 7 करोड़ का कार्य ही पूरा हो सका है। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कहा कि इस योजना को जल्द पूरा किया जाए ताकि नगर परिषद को 5 एमएलडी और औद्योगिक क्षेत्र को 5 एमएलडी जल उपलब्ध हो सके। प्रोजेक्ट के पूरा होने से गुढ़ क्षेत्र की जल प्रदाय व्यवस्था मजबूत होगी और औद्योगिक क्षेत्र के विकास को भी बल मिलेगा।

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी औद्योगिक क्षेत्र के समुचित विकास के लिए बिजली, पानी, सड़क और ड्रेनेज जैसी मूलभूत सेवाओं का सुदृढ़ होना अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गुढ़ इंडस्ट्रियल एरिया के विकास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और बिजली, सड़क, जल एवं अन्य आवश्यक सेवाओं के विस्तार के लिए तत्काल और प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। साथ ही उन्होंने उच्च अधिकारियों को नियमित समीक्षा करने और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त न करने का निर्देश दिया।

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि गुढ़ इंडस्ट्रियल एरिया का समग्र विकास न केवल रीवा जिले की औद्योगिक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उद्योगों की स्थापना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के रोजगार बढ़ेंगे, जिससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से काम करने का निर्देश भी दिया, ताकि विकास कार्यों में तेजी आए और समय पर लक्ष्य हासिल हो सके।

    बैठक में मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक श्री चंद्रमौली शुक्ला सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री ने इस क्षेत्र के विकास को लेकर स्पष्ट संदेश दिया कि गुढ़ इंडस्ट्रियल एरिया में कार्यों की गति बढ़ानी होगी और योजनाओं को समय पर पूर्ण करना अनिवार्य है।

  • उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने फायर सेफ्टी को प्राथमिकता देते हुए मेडिकल कॉलेज के मरम्मत कार्य जल्द पूर्ण करने के दिए निर्देश

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने फायर सेफ्टी को प्राथमिकता देते हुए मेडिकल कॉलेज के मरम्मत कार्य जल्द पूर्ण करने के दिए निर्देश


    भोपाल । उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक कर विभागीय योजनाओं, निर्माण कार्यों और मानव संसाधन से जुड़ी प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के कार्यों में समयबद्धता और गुणवत्ता दोनों का ध्यान रखना आवश्यक है, ताकि जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। इसी कड़ी में उन्होंने श्याम शाह मेडिकल कॉलेज, रीवा में फायर सेफ्टी से संबंधित लंबित मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही कॉलेज में आवश्यक नवीन कार्यों की स्वीकृति के लिए सभी औपचारिकताएं समयबद्ध तरीके से पूरी करने को कहा, ताकि कोई भी सुरक्षा संबंधी चूक न रहे और कॉलेज में सेवाओं का सुचारू संचालन हो सके।

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों में फायर सेफ्टी एक संवेदनशील विषय है और इसे किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। उन्होंने निर्देश दिए कि फायर सेफ्टी से जुड़े सभी मुद्दों की सूची तैयार कर, मरम्मत और नवीनीकरण कार्य जल्द से जल्द शुरू किए जाएं। साथ ही, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता और कार्य की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।

    इसके अलावा उन्होंने 16 जिला चिकित्सालयों और क्रिटिकल केयर हेल्थ ब्लॉकों के लिए आवश्यक पदों की स्वीकृति संबंधी प्रस्ताव को प्राथमिकता से तैयार करने और समस्त औपचारिकताएं पूर्ण कर कैबिनेट अनुमोदन हेतु प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इस संबंध में उन्होंने कहा कि मानव संसाधन की कमी से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है, इसलिए समय रहते पदों की स्वीकृति और भर्ती प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाना चाहिए।

    उप मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों में फर्नीचर और अन्य आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों के साथ-साथ उपकरणों और संसाधनों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है, ताकि कॉलेजों का संचालन शुरू होते ही मरीजों और छात्रों को सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए और कहा कि किसी भी तरह की देरी स्वास्थ्य सेवा के विस्तार में बाधा बन सकती है।

    बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव, आयुक्त श्री धनराजु एस सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि सभी योजनाओं और निर्माण कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा होती रहे और समय-समय पर आवश्यक सुधार किए जाएं, ताकि विभागीय लक्ष्य समय पर हासिल हो सकें।

  • कर्नल सोफिया कुरैशी टिप्पणी मामले में सुप्रीम कोर्ट में मंत्री विजय शाह की आज अहम सुनवाई

    कर्नल सोफिया कुरैशी टिप्पणी मामले में सुप्रीम कोर्ट में मंत्री विजय शाह की आज अहम सुनवाई

    भोपाल। मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह द्वारा भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई विवादित टिप्पणी से जुड़ा मामला आज सोमवार उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के लिए पेश होगा। इस संवेदनशील प्रकरण पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि अदालत के समक्ष आज राज्य सरकार को अपना स्पष्ट रुख रखना है कि वह मंत्री के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देती है या नहीं।


    उल्‍लेखनीय है कि पूरा विवाद मई 2025 में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दिए गए मंत्री विजय शाह के बयान से शुरू हुआ था। कार्यक्रम में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर ऐसी टिप्पणी कर दी, जिसे कई लोगों ने अपमानजनक और सांप्रदायिक करार दिया। बयान के सामने आते ही देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई और विभिन्न सामाजिक संगठनों व राजनीतिक दलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।


    मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया और राज्य पुलिस को मंत्री विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद से यह मामला लगातार न्यायिक प्रक्रिया में बना हुआ है और अब उच्चतम न्यायालय तक पहुंच चुका है। इस दौरान यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा का केंद्र बना रहा।


    19 जनवरी 2026 को हुई पिछली सुनवाई में उच्चतम न्यायालय ने मध्य प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर यह निर्णय लेने के निर्देश दिए थे कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति दी जाए या नहीं। अदालत ने सरकार से स्पष्ट रुख अपनाते हुए अपना जवाब प्रस्तुत करने को कहा था। आज राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करना है। आज का दिन मंत्री विजय शाह के राजनीतिक भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा।

  • भोपाल में गौमांस और दूषित पानी के मुद्दे पर कांग्रेस करेगी निगम के आईएसबीटी स्थित कार्यालय का घेराव

    भोपाल में गौमांस और दूषित पानी के मुद्दे पर कांग्रेस करेगी निगम के आईएसबीटी स्थित कार्यालय का घेराव


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गौमांस बरामदगी और दूषित पानी की सप्लाई को लेकर आज साेमवार काे सियासी और सामाजिक तनाव बढ़ने वाला है। पिछले एक महीने से सुर्खियों में बने इन दोनों गंभीर मुद्दों पर कांग्रेस आज भोपाल नगर निगम के आईएसबीटी स्थित मुख्य कार्यालय का घेराव करेगी। प्रदर्शन के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के पुतले दहन के साथ जोरदार नारेबाजी की जाएगी।


    यह प्रदर्शन कांग्रेस नेता रविंद्र साहू झूमरवाला के नेतृत्व में किया जाएगा। कांग्रेस का आरोप है कि नगर निगम और भाजपा सरकार की लापरवाही के कारण शहरवासियों की सेहत और आस्था दोनों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हो चुकी है और भोपाल में भी हालात चिंताजनक हैं। कई इलाकों में सीवेज और पानी की लाइनें एक-दूसरे के बेहद करीब हैं, जिससे नलों में गंदा पानी आ रहा है। इसके बावजूद वार्ड कार्यालयों में जल सुनवाई सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है। कांग्रेस ने मांग की है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो, महापौर और निगम अधिकारियों की भूमिका की जांच कराई जाए और शहरवासियों को साफ पानी उपलब्ध कराया जाए। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।