Category: National

  • ISRO ने लॉन्च किया NVS-03 सैटेलाइट, NavIC से सेना की नेविगेशन क्षमता होगी मजबूत, 1500 किलोमीटर तक बढ़ेगी पहुंच

    ISRO ने लॉन्च किया NVS-03 सैटेलाइट, NavIC से सेना की नेविगेशन क्षमता होगी मजबूत, 1500 किलोमीटर तक बढ़ेगी पहुंच


    नई दिल्ली ।भारत ने अंतरिक्ष और स्वदेशी नेविगेशन तकनीक के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर की देर रात GSLV-F18 रॉकेट के जरिए अगली पीढ़ी के नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 का सफल प्रक्षेपण किया। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से यह मिशन पूरा किया गया। इस प्रक्षेपण से भारत के स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम NavIC को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इसका लाभ नागरिक सेवाओं के साथ रक्षा और रणनीतिक गतिविधियों में भी मिल सकता है।

    NVS-03 को भारत की भौगोलिक सीमा से लगभग 1,500 किलोमीटर आगे तक फैले NavIC के कवरेज क्षेत्र में नेविगेशन सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इस प्रणाली के जरिए सशस्त्र बलों को रणनीतिक अभियानों के दौरान स्थान और दिशा से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है। इसके अलावा सड़क, हवाई और समुद्री परिवहन सहित कई नागरिक क्षेत्रों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

    ISRO के अनुसार, GSLV-F18 रॉकेट की यह 20वीं उड़ान थी। प्रक्षेपण के लगभग 18 मिनट 40 सेकंड बाद रॉकेट ने 2,232 किलोग्राम वजनी NVS-03 सैटेलाइट को निर्धारित जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित कर दिया। हालांकि, सैटेलाइट को पूरी तरह सक्रिय होने से पहले अपनी निर्धारित परिचालन कक्षा तक पहुंचने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफल प्रक्षेपण पर ISRO के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह मिशन भारत के स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम NavIC को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के समर्पण और उनकी तकनीकी क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयास देश को लगातार गौरवान्वित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के मिशन महत्वपूर्ण तकनीकों में भारत की आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाते हैं।

    NVS-03 दूसरी पीढ़ी के नेविगेशन सैटेलाइट समूह का तीसरा उपग्रह है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक शामिल है। सैटेलाइट में भारत में विकसित एटॉमिक क्लॉक के साथ आयातित एटॉमिक क्लॉक भी लगाई गई हैं। नेविगेशन प्रणाली में सटीक समय की गणना बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसी के आधार पर उपग्रहों से मिलने वाले संकेतों के जरिए किसी स्थान की स्थिति निर्धारित की जाती है।

    इस सैटेलाइट में L1 फ्रीक्वेंसी का नया सिग्नल भी शामिल किया गया है। इससे पहले NavIC में L5 और S-बैंड सिग्नल का इस्तेमाल किया जाता था। L1 सिग्नल जुड़ने से इस प्रणाली की अनुकूलता अधिक उपकरणों और नेविगेशन रिसीवर के साथ बढ़ेगी। इससे आम नागरिकों के लिए मोबाइल और अन्य नेविगेशन सेवाओं में भी इसका उपयोग आसान हो सकता है।

    NavIC का पूरा नाम Navigation with Indian Constellation है। इसे ISRO ने भारत की स्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन जरूरतों को पूरा करने के लिए विकसित किया है। अमेरिका के GPS, रूस के GLONASS, यूरोप के Galileo और चीन के BeiDou की तरह यह भी लोकेशन, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाएं उपलब्ध कराता है। इसकी दो प्रमुख सेवाएं हैं। Standard Positioning Service आम नागरिकों और व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के लिए है, जबकि Restricted Service अधिकृत रणनीतिक और रक्षा उपयोगकर्ताओं के लिए एन्क्रिप्टेड सेवा प्रदान करती है।

    भारत को अपने स्वतंत्र नेविगेशन सिस्टम की जरूरत 1999 के कारगिल युद्ध के अनुभव के बाद विशेष रूप से महसूस हुई थी। उस समय दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में सटीक लोकेशन और सैन्य गतिविधियों की जानकारी के लिए आधुनिक नेविगेशन तकनीक की आवश्यकता सामने आई। विदेशी GPS सेवाओं पर निर्भरता ने भी स्वतंत्र प्रणाली विकसित करने के रणनीतिक महत्व को उजागर किया। इसी दिशा में Indian Regional Navigation Satellite System परियोजना शुरू हुई, जिसे बाद में NavIC नाम दिया गया।

    NVS-03 का प्रक्षेपण जनवरी 2025 में NVS-02 मिशन के अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के बाद भी महत्वपूर्ण है। NVS-02 को ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया गया था, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण वह निर्धारित परिचालन कक्षा तक नहीं पहुंच सका। जांच में ऑर्बिट बढ़ाने वाले इंजन की ऑक्सीडाइजर लाइन के पायरो वाल्व तक जरूरी ड्राइव सिग्नल नहीं पहुंचने की बात सामने आई थी। इसके बाद भविष्य के मिशनों में सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाने की सिफारिशें की गई थीं।

    NVS-03 अब अपनी निर्धारित जियोसिंक्रोनस कक्षा तक पहुंचने के लिए ऑनबोर्ड प्रोपल्शन सिस्टम की मदद से ऑर्बिट मैन्यूवर करेगा। इसके बाद उपकरणों और नेविगेशन संकेतों की जांच होगी। इन प्रक्रियाओं के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद ही इसकी नियमित सेवाएं शुरू हो सकेंगी। दूसरी पीढ़ी के इस कार्यक्रम में NVS-01 और NVS-02 के बाद NVS-03 को शामिल किया गया है। आगे NVS-04 और NVS-05 के प्रक्षेपण की भी योजना है। इन उपग्रहों के जरिए भारत NavIC की क्षमता, विश्वसनीयता और सेवाओं की निरंतरता को और मजबूत करना चाहता है।

  • राहुल गांधी ने रामलीला मैदान की महारैली का रूट मैप किया साझा, व्यापारियों ने उठाई रद्द करने की मांग

    राहुल गांधी ने रामलीला मैदान की महारैली का रूट मैप किया साझा, व्यापारियों ने उठाई रद्द करने की मांग

    नई दिल्ली ।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर इंडिया गठबंधन 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में महारैली आयोजित करने जा रहा है। इस रैली से पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इसका रूट मैप साझा करते हुए लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर रैली का रास्ता बताते हुए देशभर के लोगों से दिल्ली पहुंचने का आग्रह किया।

    राहुल गांधी ने 31 अक्टूबर को रैली का नक्शा साझा करते हुए लिखा, ‘कल मिलते हैं, साथ चलते हैं।’ उनके द्वारा साझा किए गए कार्यक्रम के अनुसार, रैली का मार्ग कनॉट प्लेस से शुरू होकर मिंटो रोड जंक्शन और अजमेरी गेट होते हुए रामलीला मैदान तक पहुंचेगा। इंडिया गठबंधन की इस रैली में हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    इस आयोजन को लेकर दिल्ली में तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। शुक्रवार को हुई बारिश के कारण रामलीला मैदान में पानी भर गया था, जिससे आयोजन की तैयारियों को लेकर अतिरिक्त काम करना पड़ा। हालांकि, शनिवार को मैदान में पानी निकालने और अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का काम किया गया। आयोजकों की ओर से मैदान को रैली के लिए तैयार करने की प्रक्रिया जारी रही।

    महारैली को लेकर जहां विपक्षी गठबंधन के नेता और कार्यकर्ता जुटने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने इस आयोजन के समय पर सवाल उठाए हैं। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने राहुल गांधी से एक बार फिर रैली रद्द करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि दीपावली के प्रमुख कारोबारी समय में बड़े आयोजन और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं के कारण बाजारों में व्यापार प्रभावित हो सकता है।

    सीटीआई ने अपनी अपील में राहुल गांधी के ‘नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान’ वाले संदेश का उल्लेख किया। संगठन का कहना है कि दिल्ली के व्यापारियों की दुकानें भी ग्राहकों के साथ आपसी विश्वास, प्रेम और सहयोग के आधार पर चलती हैं। ऐसे में दीपावली के व्यस्त कारोबारी मौसम में बाजारों और दुकानों का कारोबार प्रभावित नहीं होना चाहिए।

    सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान मोहब्बत की दुकान का संदेश देते रहे हैं, लेकिन दिल्ली में रैली के आयोजन से पुरानी व्यापारिक दुकानों के सामने परेशानी खड़ी हो सकती है। उनके मुताबिक, चांदनी चौक और आसपास के बाजारों में कई दुकानें पीढ़ियों से कारोबार कर रही हैं। इन बाजारों का व्यापार केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका भी इससे जुड़ी हुई है।

    बृजेश गोयल ने कहा कि दिल्ली के चांदनी चौक की परांठे वाली दुकानें, खारी बावली के मसालों का कारोबार, सदर बाजार की चूड़ी और बिंदी की दुकानें तथा चांदनी चौक के लहंगे के बाजार की अपनी अलग पहचान है। इसी तरह दरियागंज में एसी का कारोबार, चावड़ी बाजार में सैनिटरी सामान की दुकानें और करोल बाग की मशहूर कुल्फी की दुकानें भी दिल्ली के व्यापारिक बाजारों का हिस्सा हैं।

    उन्होंने कहा कि इन दुकानों से जुड़े प्रत्येक कारोबार पर करीब 10 से 20 लोगों के परिवारों की आजीविका निर्भर करती है। ऐसे में दीपावली जैसे बड़े त्योहार के ठीक पहले व्यापारिक गतिविधियों में बाधा आने से दुकानदारों और उनसे जुड़े लोगों को नुकसान हो सकता है। व्यापारियों की चिंता है कि रैली के कारण बाजारों तक ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हुई तो त्योहार के दौरान होने वाली बिक्री पर असर पड़ सकता है।

    सीटीआई ने राहुल गांधी से अपील की है कि वे व्यापारियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए महारैली आयोजित करने के फैसले पर दोबारा विचार करें। संगठन का कहना है कि राजनीतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ उन व्यापारियों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए, जिनके लिए दीपावली का समय पूरे साल के कारोबार में महत्वपूर्ण होता है।

    फिलहाल 1 नवंबर को होने वाली महारैली को लेकर राजनीतिक तैयारियों के साथ व्यापारिक संगठनों की आपत्तियां भी सामने आ रही हैं। एक तरफ राहुल गांधी ने रैली में अधिक से अधिक लोगों के शामिल होने का आह्वान किया है, वहीं दूसरी तरफ व्यापारियों ने त्योहार के मौसम में बाजारों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। अब इस आयोजन के दौरान रैली के मार्ग और आसपास के बाजारों में कारोबार की स्थिति पर भी नजर रहेगी।

  • हरियाणा के 60 साल पूरे होने पर सोनीपत में वैश्विक विचारों का नया मंच तैयार करेगी जिंदल यूनिवर्सिटी

    हरियाणा के 60 साल पूरे होने पर सोनीपत में वैश्विक विचारों का नया मंच तैयार करेगी जिंदल यूनिवर्सिटी

    नई दिल्ली ।हरियाणा के गठन की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर राज्य में शिक्षा, नवाचार और वैश्विक विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल की घोषणा की गई है। ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी जनवरी 2027 में अपने पहले वर्ल्ड आइडियाज फोरम का आयोजन करेगी। यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 23 से 25 जनवरी 2027 तक सोनीपत स्थित विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित होगा। इसका विषय ‘वियर द वर्ल्ड आइडिया मीट’ रखा गया है, जिसका उद्देश्य दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले विचारों और दृष्टिकोणों को एक मंच पर लाना है।

    इस सम्मेलन में सार्वजनिक जीवन, विश्वविद्यालयों, उद्योग, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कला और नागरिक समाज से जुड़े प्रमुख लोगों के शामिल होने की योजना है। आयोजन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे और वर्तमान समय की प्रमुख चुनौतियों के समाधान पर चर्चा करेंगे। इसे वार्षिक वैश्विक सम्मेलन के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है, ताकि प्रत्येक वर्ष नए विषयों और विचारों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय संवाद को आगे बढ़ाया जा सके।

    हरियाणा का गठन 1 नवंबर 1966 को हुआ था। राज्य के 60 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह पहल उसकी विकास यात्रा को भविष्य की संभावनाओं से जोड़ने का प्रयास है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य हरियाणा को शिक्षा, शोध, रचनात्मकता और अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक संवाद के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में योगदान देना है। इसके साथ ही सोनीपत को वैश्विक स्तर पर विचारों और ज्ञान के आदान-प्रदान के प्रमुख स्थान के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है।

    विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलाधिपति एवं संरक्षक नवीन जिंदल ने कहा कि हरियाणा की छह दशक की यात्रा उसके लोगों की उद्यमशीलता, दृढ़ संकल्प और आकांक्षाओं को दर्शाती है। कृषि, उद्योग और खेल के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियां उसे शिक्षा, नवाचार और ज्ञान के वैश्विक केंद्र के रूप में आगे बढ़ने का आधार प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना के पीछे भी यही सोच थी कि हरियाणा में विश्वस्तरीय शैक्षणिक संस्थान विकसित हों और उनका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ाव मजबूत हो।

    उन्होंने बताया कि वर्ल्ड आइडियाज फोरम के माध्यम से दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख आवाजों को सोनीपत तक लाने और युवाओं को भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण विमर्श का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जाएगा।

    फोरम के पहले संस्करण में शासन व्यवस्था, आर्थिक विकास, शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, सतत विकास, संस्कृति और मानव कल्याण जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसके अलावा तकनीकी बदलावों के प्रभाव, सार्वजनिक संस्थाओं की मजबूती, रोजगार और अवसरों के विस्तार तथा आने वाली पीढ़ियों की तैयारी जैसे मुद्दे भी विचार-विमर्श का हिस्सा बनेंगे।

    कार्यक्रम में मुख्य भाषण, नेतृत्व संवाद, सार्वजनिक व्याख्यान, साहित्यिक चर्चाएं, पुस्तक विमोचन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित करने की योजना है। इसके साथ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रदर्शनी, छात्र वाद-विवाद, नीति आधारित सिमुलेशन तथा कला, संगीत, रंगमंच और डिजाइन से संबंधित प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी। आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ विद्यार्थियों और युवा प्रतिभाओं की भागीदारी पर विशेष जोर रहेगा।

    विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति प्रोफेसर सी. राज कुमार के अनुसार, इस मंच का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां लोग स्वतंत्र रूप से विचार रख सकें, एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझें और अलग-अलग विषयों के बीच संवाद स्थापित कर सकें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समाज और भविष्य से जुड़े सवालों पर सार्थक चर्चा के अवसर भी उपलब्ध कराने चाहिए।

    फोरम को दीर्घकालिक संस्थागत पहल के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसके तहत वर्ल्ड आइडियाज लेक्चर, वर्ल्ड आइडियाज अवॉर्ड, वर्ल्ड आइडियाज बुक प्राइज और ग्लोबल यंग आइडियाज फेलोशिप जैसी योजनाएं प्रस्तावित हैं। इसके अलावा इंडिया आइडियाज लेक्चर, फ्यूचर लीडर्स डायलॉग और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज राउंडटेबल के माध्यम से सार्वजनिक नेतृत्व, उच्च शिक्षा और युवा प्रतिभाओं को जोड़ने की योजना है।

    इस पहल के तहत वर्ल्ड आइडियाज डिक्लेरेशन, ग्लोबल फ्यूचर्स रिपोर्ट और वर्ल्ड आइडियाज इंडेक्स भी प्रस्तावित हैं। इनके जरिए सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं को व्यापक सार्वजनिक विमर्श और भविष्य की साझेदारियों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

    जनवरी 2027 में होने वाला पहला सम्मेलन हरियाणा की 60वीं वर्षगांठ और वर्ष 2047 तक भारत के विकास लक्ष्यों के बीच भविष्य की दिशा पर चर्चा का अवसर बनेगा। आयोजन से सोनीपत में अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक और सांस्कृतिक संपर्क बढ़ने तथा नई संस्थागत साझेदारियों के अवसर बनने की उम्मीद है।

  • पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए आप की पहली सूची जारी, 40 उम्मीदवारों को टिकट; धूरी से लड़ेंगे भगवंत मान

    पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए आप की पहली सूची जारी, 40 उम्मीदवारों को टिकट; धूरी से लड़ेंगे भगवंत मान

    नई दिल्ली । पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच आम आदमी पार्टी (आप) ने शनिवार को अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। पार्टी ने इस सूची में 40 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की है। सबसे प्रमुख नाम पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का है, जिन्हें धूरी विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा गया है। पार्टी की ओर से जारी सूची में माझा, दोआबा और मालवा क्षेत्रों की विभिन्न विधानसभा सीटों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही कई महिला उम्मीदवारों को भी टिकट दिया गया है।

    आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव पंकज कुमार गुप्ता की ओर से 31 अक्टूबर को उम्मीदवारों की सूची जारी की गई। इसमें प्रत्याशियों के नाम के साथ उनके विधानसभा क्षेत्र और निर्वाचन क्षेत्र की संख्या का भी उल्लेख किया गया है। पार्टी ने अलग-अलग क्षेत्रों में अपने उम्मीदवारों के नाम तय कर चुनावी तैयारियों की दिशा में कदम बढ़ाया है।

    माझा और दोआबा क्षेत्र में इन उम्मीदवारों को टिकट
    पार्टी की पहली सूची के अनुसार, बटाला विधानसभा सीट से अमनशेर सिंह (शेरी कलसी), अजनाला से कुलदीप सिंह धालीवाल और अमृतसर दक्षिण से डॉ. इंदरबीर सिंह निज्जर को उम्मीदवार बनाया गया है। तरनतारन सीट से हरमीत सिंह संधू और खेमकरण से सरवन सिंह धुन चुनाव लड़ेंगे।

    दोआबा क्षेत्र में नकोदर सीट से इंदरजीत कौर मान, करतारपुर से बलकार सिंह, दसूया से करमबीर सिंह घुम्मन और उर्मर से जसवीर सिंह राजा गिल को टिकट दिया गया है। होशियारपुर से ब्रह्म शंकर शर्मा जिंपा, चब्बेवाल से ईशांक कुमार चब्बेवाल, गढ़शंकर से जय किशन सिंह रौड़ी और बलाचौर से संतोष कटारिया को प्रत्याशी घोषित किया गया है।

    रूपनगर और लुधियाना की सीटों पर भी नाम तय
    रूपनगर विधानसभा सीट से दिनेश चड्ढा और एसएएस नगर से कुलवंत सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है। फतेहगढ़ साहिब से लखबीर सिंह राय, अमलोह से गुरिंदर सिंह गैरी वड़िंग और समराला से जगतार सिंह दयालपुरा चुनाव मैदान में होंगे।

    लुधियाना क्षेत्र की कई सीटों पर भी पार्टी ने प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं। लुधियाना पूर्वी से दलजीत सिंह ग्रेवाल भोला, आत्म नगर से कुलवंत सिंह सिद्धू और लुधियाना केंद्रीय से अशोक प्रशार पप्पी को टिकट दिया गया है। लुधियाना पश्चिम से संजीव अरोड़ा, लुधियाना उत्तर से चौधरी मदन लाल बग्गा और पायल से मनविंदर सिंह ग्यासपुरा को उम्मीदवार बनाया गया है।

    मालवा क्षेत्र में भी उम्मीदवारों की घोषणा
    मालवा क्षेत्र की सीटों पर निहाल सिंह वाला से मनजीत सिंह बिलासपुर, बाघा पुराना से अमृतपाल सिंह सुखानंद और मोगा से अमनदीप कौर अरोड़ा को प्रत्याशी घोषित किया गया है। धर्मकोट से देविंदर जीत सिंह लाडी ढोस, जलालाबाद से जगदीप कंबोज गोल्डी और फाजिल्का से नरिंदरपाल सिंह सावना को टिकट मिला है।

    इसके अलावा मुक्तसर से जगदीप सिंह काका बराड़, कोटकपूरा से कुलतार सिंह संधवां और जैतो से अमोलक सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है। तलवंडी साबो से बलजिंदर कौर, सरदूलगढ़ से गुरप्रीत सिंह बनावाली, भदौड़ से लभ सिंह उगोके और मेहल कलां से कुलवंत सिंह पंडोरी को चुनाव मैदान में उतारा गया है।

    धूरी से भगवंत मान, पटियाला से अजीतपाल सिंह को टिकट
    सूची में अमरगढ़ विधानसभा सीट से जसवंत सिंह गज्जन माजरा को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं धूरी से मुख्यमंत्री भगवंत मान चुनाव लड़ेंगे। पटियाला विधानसभा सीट से अजीतपाल सिंह को टिकट दिया गया है। सूची में इंदरजीत कौर मान, संतोष कटारिया, डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा और बलजिंदर कौर सहित महिला उम्मीदवारों को भी जगह दी गई है।

    इस तरह आम आदमी पार्टी ने पंजाब की 40 विधानसभा सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी से उम्मीदवार बनाए जाने के साथ पार्टी ने अपनी पहली सूची में विभिन्न क्षेत्रों और विधानसभा सीटों को प्रतिनिधित्व दिया है।

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का मॉक महाभियोग आज, 21 विपक्षी दलों के नेता होंगे शामिल

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का मॉक महाभियोग आज, 21 विपक्षी दलों के नेता होंगे शामिल


    नई दिल्ली ।
    मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन शनिवार को मॉक महाभियोग आयोजित करने जा रहा है। इस कार्यक्रम में विपक्ष के करीब 21 राजनीतिक दलों के नेता शामिल होंगे। आयोजन दोपहर 3:30 बजे राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर किया जाएगा। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं। इसी मुद्दे को लेकर गठबंधन लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है। इस कार्यक्रम को चुनाव प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष की एकजुटता दिखाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

    दरअसल, INDIA गठबंधन का मॉक महाभियोग कार्यक्रम पहले शुक्रवार को आयोजित किया जाना था, लेकिन दिल्ली में भारी बारिश के कारण इसे टालना पड़ा। अब इसे शनिवार दोपहर 3:30 बजे आयोजित करने का फैसला लिया गया है। इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और विभिन्न वामपंथी दलों के नेता हिस्सा लेंगे। राजनीतिक दलों के नेताओं के अलावा सामाजिक संगठनों, छात्र समूहों और SIR प्रक्रिया से प्रभावित लोगों के भी कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है। विपक्ष इस आयोजन के जरिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने सवालों को सार्वजनिक रूप से उठाना चाहता है।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार करेंगी। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से प्रस्ताव पेश किया जाएगा। इसके बाद अलग-अलग विपक्षी दलों के प्रतिनिधि निर्धारित समय के भीतर अपनी बात रखेंगे। आयोजन में करीब 30 नेताओं के संबोधन की संभावना जताई गई है। कार्यक्रम को संसद की कार्यवाही की तर्ज पर संचालित करने की तैयारी है। इसमें प्रस्ताव पेश करने, नेताओं के भाषण और चर्चा के लिए एक निश्चित प्रक्रिया अपनाई जाएगी। हालांकि, यह पूरी कवायद प्रतीकात्मक होगी। इसे वास्तविक संवैधानिक महाभियोग की प्रक्रिया नहीं माना जाएगा।

    इस आयोजन से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को वोट चोरी के आरोपों पर संसद में बहस करने की चुनौती दी है। लखनऊ में भाजपा की राज्य कार्यसमिति की बैठक के दौरान शाह ने कहा कि भाजपा इस मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार है। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव में हार के बाद अंपायर को दोष देने के बजाय मेहनत करनी चाहिए। शाह की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब विपक्ष चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और SIR को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है।

    मॉक महाभियोग के बाद INDIA गठबंधन अपनी राजनीतिक रणनीति के तहत 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली भी आयोजित करेगा। इस रैली में मुख्य रूप से वोट चोरी के आरोपों और विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया का मुद्दा उठाया जाएगा। विपक्षी दल इन मुद्दों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने की तैयारी में हैं। मॉक महाभियोग और प्रस्तावित रैली को गठबंधन के साझा अभियान के दो महत्वपूर्ण हिस्सों के तौर पर देखा जा रहा है। इसके जरिए विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखने और इस मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक समर्थन जुटाने की कोशिश करेंगे।

  • पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर, एयर इंडिया ने सऊदी अरब के तीन शहरों की उड़ानें 14 नवंबर तक रोकीं

    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर, एयर इंडिया ने सऊदी अरब के तीन शहरों की उड़ानें 14 नवंबर तक रोकीं

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालात का असर हवाई सेवाओं पर पड़ने लगा है। सऊदी अरब आने-जाने वाले यात्रियों को अब अपनी यात्रा की योजनाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने सऊदी अरब के तीन प्रमुख शहरों के लिए अपनी उड़ानें 14 नवंबर 2026 तक निलंबित कर दी हैं। इस फैसले से जेद्दा, रियाद और दम्माम के लिए हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है। वहीं, इंडिगो और अकासा एयर ने भी सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए अपनी कुछ सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं।

    एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने पहले भी इन शहरों के लिए उड़ानों पर रोक लगाई थी। उस समय रियाद और दम्माम की उड़ानें 7 नवंबर तक, जबकि जेद्दा की उड़ानें 31 अक्टूबर तक निलंबित की गई थीं। अब क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए इस अवधि को बढ़ाकर 14 नवंबर 2026 कर दिया गया है। एयरलाइंस का यह निर्णय यात्रियों और विमान संचालन की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।

    प्रभावित यात्रियों को राहत देने के लिए टिकट की तारीख बदलने और पूरा रिफंड लेने का विकल्प दिया गया है। इसके लिए कुछ शर्तें निर्धारित की गई हैं। यह सुविधा उन यात्रियों को मिलेगी जिनके टिकट 30 अक्टूबर 2026 या उससे पहले जारी हुए हैं और जिनकी यात्रा की तारीख 14 नवंबर 2026 तक निर्धारित थी। ऐसे यात्री एक बार बिना अतिरिक्त शुल्क के अपनी यात्रा की तारीख बदल सकते हैं। नई यात्रा 29 नवंबर 2026 तक पूरी करनी होगी। हालांकि, मुफ्त रीबुकिंग की सुविधा सीटों की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।

    जो यात्री अपनी यात्रा नहीं करना चाहते, वे टिकट रद्द कर पूरा रिफंड प्राप्त कर सकते हैं। एयर इंडिया के यात्री सऊदी अरब में एयरलाइन के किसी भी चालू स्टेशन से आने-जाने के लिए टिकट की वैकल्पिक व्यवस्था करा सकते हैं। वहीं, एयर इंडिया एक्सप्रेस के यात्रियों को सऊदी अरब या बहरीन में एयरलाइन के किसी भी चालू स्टेशन के लिए रीबुकिंग का विकल्प दिया गया है। प्रभावित यात्रियों की सहायता के लिए दोनों कंपनियों ने संपर्क केंद्र और शहरों में टिकट बुकिंग कार्यालयों की सुविधा उपलब्ध कराई है।

    सऊदी अरब में हाल के हमलों के बाद सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं। 21 अक्टूबर को दम्माम स्थित किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और शायबाह तेल क्षेत्र को निशाना बनाए जाने की घटना सामने आई थी। इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य घायल हुए थे। शायबाह तेल क्षेत्र में हुए हमले में भी एक भारतीय नागरिक घायल हुआ था। इन घटनाओं के बाद क्षेत्र में नागरिक और ऊर्जा से जुड़े महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है।

    उड़ानों पर रोक लगाने वाली कंपनियों में इंडिगो भी शामिल है। कंपनी ने जेद्दा, दम्माम और मदीना आने-जाने वाली अपनी उड़ानें 14 नवंबर तक रद्द की हैं। दूसरी ओर, अकासा एयर ने रियाद के लिए अपनी उड़ानों पर 30 नवंबर तक और जेद्दा के लिए 10 नवंबर तक रोक लगाने का फैसला किया है। इस तरह अलग-अलग एयरलाइंस की उड़ानों के निलंबन की अवधि अलग-अलग रखी गई है।

    प्रभावित यात्री टिकट में बदलाव या रिफंड से संबंधित जानकारी के लिए एयर इंडिया के संपर्क नंबर +91 11 69329333 और +91 11 69329999 पर संपर्क कर सकते हैं। एयर इंडिया एक्सप्रेस के यात्रियों के लिए +91 124 6935600 नंबर उपलब्ध कराया गया है।

    यात्रियों को सलाह दी गई है कि हवाई अड्डे के लिए रवाना होने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति जरूर जांच लें। टिकट बदलने या रद्द कराने से पहले संबंधित एयरलाइन की निर्धारित शर्तों और उपलब्ध विकल्पों की जानकारी लेना भी जरूरी है। पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात के बीच उड़ानों के संचालन में आगे भी बदलाव हो सकते हैं।

  • कपड़ा उद्योग को दिवाली का बड़ा तोहफा, सरकार ने 31 दिसंबर तक बढ़ाई कपास आयात शुल्क छूट की अवधि

    कपड़ा उद्योग को दिवाली का बड़ा तोहफा, सरकार ने 31 दिसंबर तक बढ़ाई कपास आयात शुल्क छूट की अवधि

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने दिवाली से पहले देश के कपड़ा और परिधान उद्योग को बड़ी राहत दी है। वित्त मंत्रालय ने कच्चे कपास के आयात पर सीमा शुल्क से मिलने वाली छूट की अवधि दो महीने बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 तक कर दी है। इससे पहले यह छूट 31 अक्टूबर 2026 तक लागू थी। सरकार के इस फैसले से कपड़ा मिलों, धागा निर्माताओं और रेडीमेड गारमेंट बनाने वाली इकाइयों को सस्ती दरों पर कच्चा माल उपलब्ध हो सकेगा। इसके साथ ही घरेलू कपड़ा उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

    कपास आयात पर सामान्य रूप से 11 प्रतिशत की दर से कस्टम ड्यूटी लगती है। सरकार ने पहले इस शुल्क को 31 अक्टूबर तक हटाने का फैसला किया था। अब समय-सीमा समाप्त होने से पहले वित्त मंत्रालय ने 30 अक्टूबर को अधिसूचना जारी कर छूट को 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया। इस निर्णय का प्रमुख उद्देश्य कपड़ा उद्योग को कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है, ताकि उत्पादन गतिविधियों पर असर न पड़े।

    कपास कपड़ा उद्योग का प्रमुख कच्चा माल है। इसके दाम बढ़ने पर धागे, कपड़े और तैयार परिधानों की उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है। ऐसे में आयात शुल्क से छूट मिलने पर विदेशी बाजारों से कपास मंगाना अपेक्षाकृत सस्ता होगा। इससे कताई मिलों और गारमेंट निर्माताओं को अपनी लागत नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। खासतौर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को इस फैसले से राहत मिलने की उम्मीद है। ये इकाइयां कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण वित्तीय दबाव का सामना कर रही थीं।

    आयात शुल्क में छूट बढ़ाने के पीछे घरेलू बाजार में कपास की सीमित उपलब्धता भी एक प्रमुख वजह मानी जा रही है। सामान्य तौर पर अक्टूबर से कृषि मंडियों में नई कपास की आवक बढ़ने लगती है, लेकिन इस साल आवक उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। पैदावार में संभावित कमी और बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद में किसानों द्वारा फसल रोककर रखने के कारण मंडियों में कपास की दैनिक आवक करीब 70 हजार से 80 हजार गांठों तक सीमित रही। एक गांठ का वजन 170 किलोग्राम बताया गया है।

    उद्योग से जुड़े अनुमानों के मुताबिक, कपास की घरेलू आपूर्ति और खपत के बीच अंतर बना हुआ था। ऐसे में उत्पादन इकाइयों की जरूरत पूरी करने के लिए आयातित कपास पर निर्भरता बढ़ाना जरूरी हो गया था। सरकार के इस फैसले से मिलों को कच्चे माल की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। साथ ही उत्पादन प्रक्रिया में रुकावट आने की आशंका भी कम होगी।

    भारतीय कपड़ा उद्योग को वैश्विक बाजार में बांग्लादेश, वियतनाम और कंबोडिया जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। इन देशों में कच्चे माल की लागत और शुल्क व्यवस्था अपेक्षाकृत अनुकूल होने के कारण उनके उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध हो पाते हैं। भारत में कपास के शुल्क-मुक्त आयात की सुविधा जारी रहने से घरेलू निर्माताओं को उत्पादन लागत पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। इससे भारतीय निर्यातक समय पर विदेशी ऑर्डर पूरे कर सकेंगे और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर परिधान उपलब्ध करा सकेंगे।

    हालांकि, सरकार ने उद्योग को राहत देने के साथ घरेलू कपास किसानों के हितों का संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया है। उम्मीद है कि दिवाली के बाद कृषि मंडियों में नई फसल की आवक बढ़ेगी और कपड़ा मिलों की घरेलू खरीद भी जारी रहेगी। सरकार आयातित और घरेलू कपास की कीमतों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए बाजार की स्थिति पर नजर रखेगी।

    कुल मिलाकर, कपास आयात शुल्क में छूट को 31 दिसंबर तक बढ़ाने का फैसला कपड़ा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे कच्चे माल की उपलब्धता, उत्पादन लागत और निर्यात प्रतिस्पर्धा से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में मदद मिल सकती है।

  • ‘सड़क पर संसद’ कार्यक्रम को लेकर भाजपा का इंडिया गठबंधन पर हमला, गुरु प्रकाश ने बताया लोकतंत्र का मजाक

    ‘सड़क पर संसद’ कार्यक्रम को लेकर भाजपा का इंडिया गठबंधन पर हमला, गुरु प्रकाश ने बताया लोकतंत्र का मजाक


    नई दिल्ली ।बिहार में इंडिया गठबंधन के प्रस्तावित ‘सड़क पर संसद’ कार्यक्रम और रैली को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने विपक्षी गठबंधन के इस आयोजन पर सवाल उठाते हुए इसे निराधार और तर्कहीन आंदोलन बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लोकतंत्र के नाम पर ऐसा कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जिसका कोई औचित्य नहीं है। वहीं, जनता दल यूनाइटेड के एमएलसी नीरज कुमार ने भी विपक्षी गठबंधन की एकजुटता और उसकी राजनीतिक भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।

    गुरु प्रकाश ने कहा कि इंडिया गठबंधन का प्रस्तावित ‘सड़क पर संसद’ कार्यक्रम कोई मॉक पार्लियामेंट नहीं है, बल्कि लोकतंत्र का मजाक है। उनके मुताबिक, विपक्ष झूठ और निराधार दावों के आधार पर आंदोलन खड़ा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कई बार अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है और संविधान पीठ भी संबंधित विषय को संवैधानिक बता चुकी है। ऐसे में इस मुद्दे पर आंदोलन करने का कोई तर्कसंगत आधार नहीं बनता।

    भाजपा प्रवक्ता ने विपक्षी गठबंधन के भीतर आपसी तालमेल की कमी का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन में न तो समन्वय दिखाई देता है और न ही सहयोग की भावना है। उनके अनुसार, प्रस्तावित रैली राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन की हठधर्मिता का परिणाम है। उन्होंने विपक्ष की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि गठबंधन के नेताओं के बीच एकराय का अभाव नजर आता है।

    रैली की प्रस्तावित तारीख एक नवंबर को लेकर भी गुरु प्रकाश ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह तारीख सिख समुदाय के इतिहास से जुड़ी संवेदनशील घटनाओं की याद दिलाती है। उनके मुताबिक, वर्ष 1984 में दिल्ली में सिख समुदाय की महिलाओं और अन्य लोगों के साथ हुई घटनाओं को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी ऐतिहासिक संवेदनशीलता के बावजूद इसी दिन कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर देना विपक्ष की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।

    इंडिया गठबंधन की रैली को यूट्यूबर ध्रुव राठी का समर्थन मिलने के सवाल पर भी गुरु प्रकाश ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ध्रुव राठी, नेहा बोरा और अन्य लोगों की विचारधारा को लेकर सवाल उठाए। गुरु प्रकाश ने कहा कि जनता को यह समझना चाहिए कि इन लोगों की वैचारिक पृष्ठभूमि क्या है। उन्होंने नेहा बोरा के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि वह विपक्षी गठबंधन की रैली के मंच पर दिखाई देती हैं, तो इससे गठबंधन की संवैधानिक प्रतिबद्धता पर सवाल उठेंगे।

    गुरु प्रकाश ने शरजील इमाम का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वह भारतीय संविधान को फासीवादी दस्तावेज बताते रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के समर्थन को लेकर इंडिया गठबंधन को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। भाजपा प्रवक्ता के अनुसार, बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान के प्रति विपक्षी गठबंधन की निष्ठा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    दूसरी ओर, जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने भी इंडिया गठबंधन की राजनीतिक सक्रियता पर सवाल उठाए। उन्होंने पश्चिम बंगाल के हालिया चुनावों का उल्लेख करते हुए पूछा कि वहां विपक्षी गठबंधन की एकजुटता कहां दिखाई दी। उन्होंने कहा कि गठबंधन की वास्तविक राजनीतिक स्थिति उसके अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन और आपसी तालमेल से स्पष्ट होती है।

    नीरज कुमार ने संसद के स्थान पर मॉक पार्लियामेंट आयोजित करने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जनता अपने प्रतिनिधियों को संसद में बैठकर काम करने के लिए चुनती है। ऐसे में विपक्ष को संसद के बाहर समानांतर आयोजन करने के बजाय अपनी मांगों को सदन में उठाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री विपक्ष की सहमति से संसद का विशेष सत्र बुलाने की बात कह रहे हैं। ऐसे में विपक्ष को स्पष्ट करना चाहिए कि उसकी वास्तविक मांग क्या है।

    नीरज कुमार ने आरोप लगाया कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाकर देश में राजनीतिक अराजकता का माहौल तैयार करना चाहता है। इस दौरान उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के योगदान को भी याद किया। उन्होंने बताया कि जेडीयू के कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ की ओर से सरदार पटेल के सम्मान में प्रतियोगिता आयोजित की गई है। उन्होंने देशी रियासतों के एकीकरण, प्रशासनिक ढांचे के निर्माण और सामाजिक सद्भाव स्थापित करने में पटेल की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

  • निरीक्षण के दौरान अचानक लड़खड़ाकर गिरे CM धामी, सड़क पर फिसलने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

    निरीक्षण के दौरान अचानक लड़खड़ाकर गिरे CM धामी, सड़क पर फिसलने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल


    नई दिल्ली। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हल्द्वानी में निर्माणाधीन अमृतपुर बाईपास का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस दौरान उनके साथ अचानक ऐसा वाकया हुआ जिसने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींच लिया। सड़क का जायजा लेते समय मुख्यमंत्री धामी का संतुलन बिगड़ गया और वह लड़खड़ाकर नीचे गिर पड़े। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में मुख्यमंत्री को कच्ची और पथरीली सड़क पर चलते हुए देखा जा सकता है। इसी दौरान उनका पैर फिसला और वह जमीन पर गिर गए। यह घटना 25 अक्टूबर को निरीक्षण के दौरान हुई बताई जा रही है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

    जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री धामी अमृतपुर बाईपास परियोजना के निर्माण कार्य की प्रगति देखने पहुंचे थे। सड़क का कुछ हिस्सा अभी निर्माणाधीन है और वहां जमीन ऊबड़-खाबड़ होने के साथ पत्थर भी बिखरे हुए थे। इसी रास्ते पर चलते समय मुख्यमंत्री अचानक लड़खड़ा गए। घटना कैमरे में कैद हो गई और अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री धामी ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को बाईपास निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन सीजन और सप्ताहांत के दौरान इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है और लोगों को जाम की समस्या से जूझना पड़ता है। अमृतपुर बाईपास तैयार होने से आम नागरिकों और पर्यटकों को इस परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना के लिए धनराशि की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। निर्माण कार्य के लिए आवश्यक धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है। इसलिए काम में किसी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए और इसे निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने और नियमित निगरानी करने को भी कहा।

    धामी ने सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रोड कटिंग और निर्माण से जुड़े कार्यों में आम लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों पहलुओं पर गंभीरता से काम करने के लिए कहा गया है।

    अमृतपुर बाईपास परियोजना कुमाऊं क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य कैंची धाम की ओर जाने वाले मार्ग पर यातायात का दबाव कम करना है। पिछले कुछ वर्षों में बाबा नीम करौली के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही नैनीताल और रानीखेत के अलावा कौसानी पिथौरागढ़ अल्मोड़ा और बागेश्वर जैसे पर्यटन स्थलों पर भी बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन का बढ़ना अच्छी बात है और इससे राज्य को लाभ मिलता है। लेकिन पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना भी जरूरी है। सरकार का प्रयास है कि स्थानीय नागरिकों को सुगम आवागमन मिले और बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी जाम की समस्या का सामना न करना पड़े।

    फिलहाल मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान गिरने का वीडियो चर्चा में है। वहीं अमृतपुर बाईपास परियोजना को समय पर पूरा करने और निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देशों के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर है कि यह काम कब तक पूरा होता है और इससे क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को कितनी राहत मिलती है।

  • भाजपा में पद या पैसों का खेल? भाजयुमो अध्यक्ष पद की कथित डील का चैट वायरल, नेताओं ने बताया साजिश

    भाजपा में पद या पैसों का खेल? भाजयुमो अध्यक्ष पद की कथित डील का चैट वायरल, नेताओं ने बताया साजिश

    कानपुर । कानपुर में भारतीय जनता पार्टी के युवा संगठन भारतीय जनता युवा मोर्चा के उत्तर जिलाध्यक्ष पद को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित व्हाट्सऐप चैट ने पार्टी के भीतर हलचल बढ़ा दी है। इस चैट में भाजयुमो अध्यक्ष पद के लिए पैसों के लेनदेन की बात कही गई है। वायरल संदेश में सात लाख रुपये में डील फाइनल होने का दावा किया गया है। साथ ही लिस्ट तैयार करने और कुर्सी संभालने जैसी बातें भी लिखी गई हैं। चैट सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि इस वायरल चैट की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

    दरअसल कानपुर में भाजपा के क्षेत्रीय आईटी सेल के पदाधिकारियों की सूची को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा था। यह मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि भाजयुमो उत्तर जिलाध्यक्ष पद को लेकर कथित सौदेबाजी का मामला सामने आ गया। सोशल मीडिया पर वायरल चैट में भाजपा उत्तर जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित का नाम लेते हुए गंभीर आरोप लगाए गए हैं। संदेशों में दावा किया गया है कि युवा मोर्चा के अध्यक्ष पद के लिए 10 से 15 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। इसके बाद एक अन्य संदेश में सात लाख रुपये में सौदा तय होने की बात लिखी गई है। चैट में यह भी कहा गया है कि अब लिस्ट तैयार की जाए और कुर्सी संभालने के लिए तैयार रहा जाए।

    इस कथित बातचीत के वायरल होने के बाद संगठन की कार्यप्रणाली और पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस मामले पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। हालांकि केवल वायरल चैट के आधार पर किसी आरोप को सही नहीं माना जा सकता। इसकी वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    मामले पर भाजपा उत्तर जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने वायरल चैट को फर्जी बताते हुए कहा कि भाजपा उत्तर जिला संगठन लगातार मजबूत हो रहा है और इससे विपक्ष के कुछ लोग जलन महसूस कर रहे हैं। उनके मुताबिक संगठन की छवि खराब करने के उद्देश्य से इस तरह की कूटरचित व्हाट्सऐप चैट वायरल की गई है। भाजपा के मीडिया प्रभारी अनुराग शर्मा ने भी इसे विपक्षियों की साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि पार्टी की छवि धूमिल करने के लिए फर्जी चैट प्रसारित कराई गई है। मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    इस विवाद की पृष्ठभूमि में भाजपा की क्षेत्रीय आईटी सेल में नियुक्तियों को लेकर उठा मामला भी जुड़ा हुआ है। 24 अक्टूबर को प्रदेश कार्यालय की ओर से क्षेत्रीय टीम में सुरेंद्र विश्वकर्मा को आईटी सेल का संयोजक और अभिषेक पांडेय को सहसंयोजक बनाए जाने का पत्र जारी हुआ था। इसके बाद कुछ पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि पहले से तय नामों को दरकिनार कर नई नियुक्तियां की गई हैं। एक अन्य पत्र के हवाले से यह दावा किया गया कि सुरेंद्र विश्वकर्मा की जगह मयंक भट्ट को संयोजक बनाया गया और अभिषेक पांडेय को टीम से हटा दिया गया।

    वहीं क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकिशोर साहू ने इस विवाद को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी ओर से किसी बदलाव का पत्र जारी नहीं किया है। उनका कहना है कि जिन्हें पद दिए जाने की बात कही जा रही है वे पहले से ही किसी न किसी जिम्मेदारी पर हैं।

    फिलहाल कानपुर भाजपा में आईटी सेल की नियुक्तियों और भाजयुमो अध्यक्ष पद को लेकर उठे विवाद ने संगठन के भीतर की खींचतान को चर्चा में ला दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि वायरल चैट की जांच में क्या सामने आता है और पार्टी इस पूरे मामले में आगे क्या कदम उठाती है।