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  • SCO मंच से पीएम मोदी का बड़ा विजन: सिक्योरिटी, कनेक्टिविटी और अपॉर्च्युनिटी पर दिया जोर, आतंकवाद पर भी कड़ा संदेश

    SCO मंच से पीएम मोदी का बड़ा विजन: सिक्योरिटी, कनेक्टिविटी और अपॉर्च्युनिटी पर दिया जोर, आतंकवाद पर भी कड़ा संदेश


    नई दिल्ली । बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का स्पष्ट और व्यापक विजन दुनिया के सामने रखा। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में पीएम मोदी ने आतंकवाद वैश्विक सुरक्षा संवाद कूटनीति कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंधों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत की सोच रखी। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में एससीओ ने संवाद और सहयोग की मजबूत नींव तैयार की है और अब आने वाले 25 वर्षों में इस सहयोग को ठोस परिणामों में बदलने का समय आ गया है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ को लेकर भारत की सोच के तीन प्रमुख स्तंभों सिक्योरिटी कनेक्टिविटी और अपॉर्च्युनिटी को फिर से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अब इन विचारों को केवल विजन तक सीमित रखने के बजाय वास्तविक परिणामों में बदलना होगा और इसके लिए सबसे पहली जरूरत शांति और सुरक्षा की है। पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ बेहद कड़ा संदेश देते हुए कहा कि केवल आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई या जवाबी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है बल्कि आतंकवाद के पूरे तंत्र को समाप्त करना जरूरी है। आतंकवाद की फंडिंग भर्ती कट्टरपंथ और आतंकियों को मिलने वाले सुरक्षित ठिकानों को खत्म किए बिना इस चुनौती का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि इस मुद्दे पर किसी तरह के दोहरे रवैये की कोई जगह नहीं होनी चाहिए और सभी देशों को एकजुट होकर कार्रवाई करनी होगी।

    प्रधानमंत्री ने नशीले पदार्थों की तस्करी को भी क्षेत्रीय सुरक्षा और युवा पीढ़ी के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि ड्रग ट्रैफिकिंग केवल अपराध नहीं बल्कि समाज और भविष्य के लिए बड़ा संकट है। सुरक्षा संबंधी खतरे संगठित अपराध सूचना सुरक्षा और नार्कोटिक्स जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए एससीओ के तहत बनाए जा रहे केंद्रों को उन्होंने सकारात्मक कदम बताया।

    वैश्विक संघर्षों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने शांति के लिए संवाद और कूटनीति को सबसे प्रभावी रास्ता बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट ने साबित किया है कि किसी एक क्षेत्र में होने वाला संघर्ष केवल उसी इलाके तक सीमित नहीं रहता बल्कि उसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन पर पड़ता है। इसका सबसे अधिक नुकसान ग्लोबल साउथ के देशों को उठाना पड़ता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध और तनाव का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही खोजा जाना चाहिए।

    पीएम मोदी ने साझा विकास और कनेक्टिविटी की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि भारत उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ते हैं व्यापार को आसान बनाते हैं और विकास के नए अवसर पैदा करते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी कनेक्टिविटी पहल में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने इसे एससीओ चार्टर की मूल भावना से भी जोड़ा।

    प्रधानमंत्री ने एससीओ की सबसे बड़ी पूंजी सदस्य देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों को बताया। उनके अनुसार महान सभ्यताओं संस्कृतियों और विचारों का यह संगठन तभी मजबूत होगा जब इसका लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंचे। उन्होंने युवाओं के लिए नए अवसर खोलने उद्यमियों के लिए नए बाजार तैयार करने किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने और नागरिकों का जीवन बेहतर बनाने को सफलता की वास्तविक कसौटी बताया। पीएम मोदी ने सहयोग को केवल सरकारों तक सीमित न रखकर लोगों द्वारा संचालित बनाने की जरूरत बताई। स्टार्टअप फोरम यंग ऑथर्स कॉन्क्लेव और यंग साइंटिस्ट्स फोरम जैसे भारतीय प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने एससीओ के भविष्य को युवा शक्ति संवाद और जनसंपर्क से जोड़ने का संदेश दिया। बिश्केक के मंच से भारत ने साफ कर दिया कि आने वाले वर्षों में उसकी प्राथमिकता सुरक्षित शांतिपूर्ण और अधिक सहयोगपूर्ण विश्व व्यवस्था बनाने की होगी।

  • जी-20 मंच पर भारत की मजबूत आर्थिक कूटनीति: अमेरिका के साथ ग्रोथ एजेंडे पर सहमति, कई देशों ने बढ़ाई आर्थिक साझेदारी में रुचि

    जी-20 मंच पर भारत की मजबूत आर्थिक कूटनीति: अमेरिका के साथ ग्रोथ एजेंडे पर सहमति, कई देशों ने बढ़ाई आर्थिक साझेदारी में रुचि


    नई दिल्ली । जी-20 की बैठक में भारत ने वैश्विक आर्थिक विकास और वित्तीय संतुलन को लेकर अपना स्पष्ट और मजबूत रुख पेश किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत अमेरिकी अध्यक्षता के तहत जी-20 में आर्थिक विकास वैश्विक असंतुलन को दूर करने और वित्तीय साक्षरता बढ़ाने जैसे प्रमुख मुद्दों पर अमेरिका के साथ पूरी तरह सहमत है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के साथ हुई सकारात्मक और रचनात्मक द्विपक्षीय बैठक के बाद सीतारमण ने कहा कि नई दिल्ली और वाशिंगटन वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक जैसी सोच रखते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी अध्यक्षता ने विकास को प्राथमिकता दी है और वैश्विक आर्थिक असंतुलन को गंभीर चुनौती के रूप में सामने रखा है। साथ ही वित्तीय साक्षरता को भी विशेष महत्व दिया गया है और भारत इन सभी विषयों पर खुली और निष्पक्ष चर्चा का समर्थन करता है।

    वित्त मंत्री ने कहा कि आर्थिक विकास जी-20 के वित्तीय ट्रैक का केंद्रीय विषय है और दुनिया की बदलती आर्थिक परिस्थितियों में वैश्विक असंतुलन को दूर करना भी बेहद जरूरी हो गया है। भारत चाहता है कि जी-20 के सदस्य देश उन सभी चुनौतियों पर गंभीर और व्यापक चर्चा करें जो अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं। सीतारमण ने अमेरिकी अध्यक्षता द्वारा इन मुद्दों को प्राथमिकता देने की सराहना करते हुए कहा कि भारत एशविले में चल रही चर्चाओं में सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है। उनका कहना है कि वैश्विक स्तर पर मजबूत आर्थिक सहयोग और बेहतर समन्वय के बिना आने वाली चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव नहीं होगा।

    जी-20 बैठक के दौरान सीतारमण ने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के साथ आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर अलग से बातचीत भी की। उन्होंने इस बैठक को बेहद सकारात्मक और रचनात्मक बताया। हालांकि बैठक के विस्तृत मुद्दों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई लेकिन उनके बयान से यह साफ संकेत मिला कि आर्थिक विकास को प्राथमिकता देने और वैश्विक अर्थव्यवस्था में मौजूद असंतुलन को कम करने के विषय पर भारत और अमेरिका के बीच व्यापक सहमति बनी है। यह सहमति ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब दुनिया कई आर्थिक और भू राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है।

    वित्त मंत्री ने जी-20 बैठक के दौरान पोलैंड कतर दक्षिण कोरिया और रूस के प्रतिनिधियों के साथ भी अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं। उन्होंने कहा कि सभी देशों के प्रतिनिधियों के पास भारत की आर्थिक स्थिति और विकास से जुड़े तथ्य मौजूद थे और वे भारत के साथ अपने आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए उत्सुक दिखाई दिए। कुछ देशों के साथ आगे आर्थिक और वित्तीय संवाद की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है। दक्षिण कोरिया के साथ इस साल के अंत में विशेष संवाद होगा जबकि कतर के साथ भी आर्थिक सहयोग को लेकर आगे बातचीत की जाएगी।

    भारत की मजबूत होती अर्थव्यवस्था ने भी जी-20 मंच पर देश की स्थिति को मजबूती दी है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत ने 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर्ज की है। इस दौरान मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि वित्तीय और पेशेवर सेवा क्षेत्र में 12.1 प्रतिशत का विस्तार दर्ज किया गया। सीतारमण ने इन आंकड़ों को वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की आर्थिक मजबूती का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि नई चुनौतियां सामने आने पर सरकार भारत को बेहतर और लाभकारी स्थिति में बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाती रहेगी।

    वित्त मंत्री की विदेश यात्रा की शुरुआत कनाडा से हुई जहां उन्होंने वहां के वित्त मंत्री के साथ बातचीत की। इसके बाद वह निवेश और वित्तीय एजेंसियों से चर्चा के लिए शिकागो पहुंचीं और फिर जी-20 बैठक में भाग लेने के लिए एशविले गईं। यहां कार्यक्रम पूरे होने के बाद वह न्यूयॉर्क में उन अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से मुलाकात करेंगी जो भारतीय बाजार में अपनी भागीदारी बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। जी-20 मंच पर भारत की सक्रिय भागीदारी और कई देशों के साथ बढ़ते आर्थिक संवाद से यह संकेत मिल रहा है कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।

  • ग्रोथ के आंकड़ों पर सियासत गर्म, निर्मला सीतारमण बोलीं भारत की अर्थव्यवस्था को मृत कहना करोड़ों मेहनतकश भारतीयों का अपमान

    ग्रोथ के आंकड़ों पर सियासत गर्म, निर्मला सीतारमण बोलीं भारत की अर्थव्यवस्था को मृत कहना करोड़ों मेहनतकश भारतीयों का अपमान


    नई दिल्ली । एशविले में जी-20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान पर कड़ा पलटवार किया है जिसमें उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को मृत अर्थव्यवस्था बताया था। सीतारमण ने कहा कि ऐसे बयान केवल सरकार की आलोचना नहीं हैं बल्कि उन करोड़ों भारतीय नागरिकों की मेहनत को भी कमतर आंकते हैं जिनके प्रयासों से देश लगातार आर्थिक प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब भारत मजबूत विकास दर दर्ज कर रहा है और विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन देखने को मिल रहा है तब देश की अर्थव्यवस्था को नकारात्मक रूप से पेश करना तथ्यों से अलग तस्वीर दिखाने जैसा है।

    वित्त मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और सरकार से सवाल पूछना उसका अधिकार और जिम्मेदारी दोनों हैं। सरकार की नीतियों की आलोचना करना भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है लेकिन राजनीतिक विरोध के दौरान देश के नागरिकों की मेहनत और आर्थिक उपलब्धियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सरकार से असहमति रखने का पूरा अधिकार है लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रगति में आम नागरिकों के योगदान को कमतर नहीं आंका जाना चाहिए।

    सीतारमण ने भारत की आर्थिक स्थिति के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2026-27 वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है। उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि फाइनेंशियल और प्रोफेशनल सर्विस सेक्टर में 12.1 प्रतिशत का विस्तार देखने को मिला है। इसके साथ ही देश का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 700 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचना भी भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है।

    वित्त मंत्री ने कहा कि ये आंकड़े केवल कागजों पर दर्ज उपलब्धियां नहीं हैं बल्कि इसके पीछे देश के करोड़ों नागरिकों की कड़ी मेहनत और उनकी महत्वाकांक्षाएं हैं। भारत के लोग अपनी व्यक्तिगत प्रगति के साथ देश को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ाने में भी योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार बाहरी चुनौतियों के बावजूद भारत का आर्थिक प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है और यह देश की क्षमता को दर्शाता है।

    राहुल गांधी की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए सीतारमण ने कांग्रेस में मौजूद अर्थशास्त्रियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पार्टी में कई ऐसे लोग हैं जो आर्थिक आंकड़ों और वास्तविक तथ्यों को समझते हैं। इसलिए मजबूत विकास दर और अन्य सकारात्मक संकेतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था को मृत कहना हैरान करने वाला है। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों में सुधार की जरूरत हो सकती है और सरकार की नीतियों पर सवाल भी उठाए जा सकते हैं लेकिन इससे देश की पूरी आर्थिक प्रगति को नकारा नहीं जा सकता।

    सीतारमण ने मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने कारोबार और निवेश को आसान बनाने के लिए 1000 से अधिक कानूनों को हटाया है और लगभग 40000 नियमों को सरल बनाया गया है। केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग तथा उद्योग और व्यापार जगत के साथ लगातार संवाद को भी आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण बताया गया।

    उन्होंने भरोसा जताया कि पहली तिमाही का मजबूत प्रदर्शन पूरे वित्तीय वर्ष के लिए सकारात्मक संकेत है। आने वाली तिमाहियों में भी भारत की विकास गति बनाए रखने की उम्मीद है। जी-20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से होने वाली बातचीत में भी भारत की आर्थिक संभावनाओं और निवेश अवसरों पर जोर दिया जा रहा है। सीतारमण के बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि आर्थिक आंकड़ों और विकास के मुद्दे पर राजनीतिक बहस के बीच देश की प्रगति को किस नजरिए से देखा जाना चाहिए।

  • ग्लोबल वार्मिंग का खतरनाक असर: समुद्र का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पर, मुंबई-कोलकाता समेत करोड़ों लोगों के भविष्य पर संकट

    ग्लोबल वार्मिंग का खतरनाक असर: समुद्र का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पर, मुंबई-कोलकाता समेत करोड़ों लोगों के भविष्य पर संकट


    नई दिल्ली । संयुक्त राष्ट्र की नई चेतावनी ने ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे को एक बार फिर दुनिया के सामने गंभीर रूप से रख दिया है। समुद्र का लगातार बढ़ता जलस्तर अब केवल छोटे द्वीपीय देशों की समस्या नहीं रह गया है बल्कि भारत समेत दुनिया के बड़े और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण शहर भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि समुद्र के बढ़ते जलस्तर का असर भारत के कोलकाता और मुंबई जैसे महानगरों पर भी पड़ सकता है जहां लाखों लोगों के जीवन और संपत्ति पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

    रिपोर्ट के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर और बर्फ की विशाल परतें तेजी से पिघल रही हैं जबकि समुद्र का पानी गर्म होने के कारण उसका फैलाव भी बढ़ रहा है। इन दोनों कारणों से समुद्र का जलस्तर लगातार ऊपर जा रहा है। वर्ष 2024 में समुद्र के जलस्तर में सालाना बढ़ोतरी करीब छह मिलीमीटर दर्ज की गई जो अब तक के सबसे ऊंचे स्तरों में से एक बताई गई है। यह आंकड़ा भले ही छोटा दिखाई दे लेकिन लंबे समय में इसका असर करोड़ों लोगों के जीवन पर पड़ सकता है।

    पैसिफिक आइलैंड्स फोरम लीडर्स की 55वीं बैठक के दौरान जारी रिपोर्ट में दक्षिण एशिया के निचले डेल्टा क्षेत्रों को विशेष रूप से संवेदनशील बताया गया है। भारत के कोलकाता और मुंबई के साथ बांग्लादेश की राजधानी ढाका जैसे बड़े शहरों में समुद्र का जलस्तर बढ़ने से बड़े पैमाने पर विस्थापन का खतरा पैदा हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक इन क्षेत्रों में 1.4 करोड़ से अधिक लोगों के घर स्थायी रूप से पानी की चपेट में आने का जोखिम है। हालांकि इस स्थिति के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं बताई गई है लेकिन चेतावनी साफ है कि यदि जलवायु परिवर्तन की रफ्तार नहीं रोकी गई तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

    संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने कहा है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर केवल तटीय क्षेत्रों की जमीन और इमारतों को प्रभावित करने वाली समस्या नहीं है। इसका सीधा असर लोगों की सेहत खाद्य सुरक्षा मानवाधिकार और सांस्कृतिक पहचान पर भी पड़ सकता है। जब किसी समुदाय को अपनी पुश्तैनी जमीन और घर छोड़ने पड़ते हैं तो वह केवल एक स्थान नहीं खोता बल्कि अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान भी खो सकता है। यही कारण है कि सरकारों को समुद्र के बढ़ते जलस्तर को अपनी विकास और शहरी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना होगा।

    रिपोर्ट में हिमालय के ग्लेशियरों को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। दक्षिण एशिया में बड़ी संख्या में ग्लेशियर होने के कारण हिमालयी क्षेत्र को तीसरा ध्रुव भी कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार अगले 15 से 20 वर्षों में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से दक्षिण एशिया में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इसके बाद पानी की उपलब्धता में कमी और सूखे जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका है जिससे खेती और खाद्य सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है।

    दुनिया भर में करीब 77 करोड़ लोग ऐसे तटीय इलाकों में रहते हैं जो समुद्र के उच्च ज्वार स्तर से पांच मीटर से भी कम ऊंचाई पर हैं। समुद्र का जलस्तर बढ़ने से इन क्षेत्रों में रहने वाली आबादी के साथ परिवहन ऊर्जा जल आपूर्ति इमारतों और भूजल संसाधनों पर भी खतरा बढ़ रहा है। अनुमान है कि दुनिया भर में करीब 1.8 ट्रिलियन डॉलर मूल्य के इंफ्रास्ट्रक्चर पर इसका जोखिम मंडरा रहा है।

    संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट दुनिया के लिए साफ संदेश है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की नहीं बल्कि वर्तमान की चुनौती बन चुका है। अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो समुद्र का बढ़ता पानी आने वाले वर्षों में महानगरों से लेकर छोटे तटीय समुदायों तक की तस्वीर बदल सकता है।

  • खाद्य तेल अब स्टैंडर्ड साइज पैक में मिलेगा…. आज से गैर-मानक पैकेट्स की बिक्री पर रोक

    खाद्य तेल अब स्टैंडर्ड साइज पैक में मिलेगा…. आज से गैर-मानक पैकेट्स की बिक्री पर रोक


    नई दिल्ली
    । उपभोक्ता मामलों के विभाग ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग नियमों (Standard Operating Rules) में बड़ा संशोधन करते हुए 1 सितंबर से खाद्य तेलों (Edible oils) के गैर-मानक पैकेट्स (Non-Standard Packets) की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अब तक कंपनियां 1 लीटर या 1 किलो के स्थान पर 800 ग्राम, 900 ग्राम या 910 ग्राम जैसे भ्रामक और गुमराह करने वाले पैक साइज बाजार में उतार रही थीं।

    कंपनियों को पुराने स्टॉक को निकालने के लिए दिया गया तीन महीने का समय 31 अगस्त को समाप्त हो चुका है। अब देश में बिकने वाले घरेलू और आयातित दोनों प्रकार के प्रमुख खाद्य तेलों पर यह नया नियम अनिवार्य रूप से लागू हो गया है।


    तय साइज में मिलेगा खाद्य तेल

    नए नियमों के अनुसार, खाद्य तेल केवल 9 तय पैमानों पर ही बेचा जा सकेगा। कमजोर आय वर्ग और सिंगल उपभोक्ताओं की जरूरत का ध्यान रखते हुए 200 मिलीलीटर या 200 ग्राम से छोटे किफायती पाउचों को मानकीकरण के दायरे से बाहर रखा गया है, साथ ही कुछ विशेष तेलों को भी इस अनिवार्यता से छूट दी गई है।

    मीडियम पैकेट व बोतलें : 1 लीटर, 2 लीटर, 3 लीटर, 4 लीटर और 5 लीटर।
    बड़े पैकेट व टिन : 15 लीटर और 20 लीटर के मानक टिन।


    पैकेजिंग बदलने से कीमतों में उछाल संभव…

    उद्योग सूत्रों के मुताबिक, पैकिंग साइज बदलने के बाद खुदरा कीमतों में तकनीकी री-एडजस्टमेंट देखने को मिल सकता है। उदाहरण के लिए, गैर-मानक 800 या 900 ग्राम वाले पैकेट हटने और पूरे 1 लीटर के मानक पैक आने पर खुदरा स्तर पर प्रति पैकेट दाम बढ़ सकते हैं।


    कीमतों की तुलना होगी आसान

    बदलाव का सीधा फायदा आम उपभोक्ता को मिलेगा। पुराने सिस्टम में जब कोई ग्राहक 1 लीटर का पैकेट समझकर 800 या 900 ग्राम का पाउच खरीदता था, तो ऊपरी तौर पर पैकेट की कीमत 10 से 15 रुपये सस्ती लगती थी, लेकिन प्रति लीटर या प्रति किलो वह असल में ज्यादा कीमत चुका रहा होता था। वजन और मात्रा के अंतर के कारण दो अलग-अलग ब्रांड के बीच सही मूल्य की तुलना मुश्किल थी। मानक आकार तय होने से पारदर्शिता आएगी।

    मात्रा के साथ वजन लिखना अनिवार्य
    एक और तकनीकी पेंच को सरकार ने सुलझा दिया है। यदि पैकेट पर मात्रा लीटर या मिलीलीटर में है, तो उसके समानांतर उसका सटीक समतुल्य वजन (ग्राम या किलोग्राम में) भी स्पष्ट रूप से लिखना होगा। इससे घनत्व के नाम पर घटतौली खत्म होगी। ग्राहक को पता होगा कि वह कितना वजन खरीद रहा है।

  • कठुआ में पाकिस्तानी नंबर वाली रिंग पहने कबूतर मिला, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    कठुआ में पाकिस्तानी नंबर वाली रिंग पहने कबूतर मिला, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट


    कठुआ।
    जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास एक कबूतर मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। हीरानगर के चन्न खत्रियां इलाके में मिले इस कबूतर के पैर में एक रिंग बंधी थी, जिस पर पाकिस्तानी टेलीकॉम कोड वाला मोबाइल नंबर दर्ज था। पुलिस ने कबूतर को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

    घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में निगरानी भी बढ़ा दी गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कबूतर पाकिस्तान की ओर से किसी संदिग्ध गतिविधि के तहत आया था या फिर यह किसी व्यक्ति का पालतू पक्षी है, जो रास्ता भटककर भारतीय सीमा में पहुंच गया।

    खेत में मिला कबूतर, पैर की रिंग ने बढ़ाया शक

    पुलिस के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे एक स्थानीय ग्रामीण अपने खेत में गया था। इसी दौरान उसकी नजर खेत में बैठे कबूतर पर पड़ी। शक होने पर ग्रामीण ने कबूतर को पकड़ लिया।

    कबूतर के पैर में बंधी रिंग पर 03001717652 मोबाइल नंबर लिखा हुआ था। नंबर पर पाकिस्तानी टेलीकॉम कोड होने की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीण ने तुरंत स्थानीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को सूचना दी।

    इसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और कबूतर को अपने कब्जे में ले लिया।

    जासूसी के लिए भेजा गया या भटककर आया?

    कबूतर मिलने के बाद जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उसके पैर में पाकिस्तानी मोबाइल नंबर वाली रिंग क्यों बंधी थी।

    अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या कबूतर को सीमा पार से किसी तरह की जासूसी या संदिग्ध गतिविधि के लिए इस्तेमाल किया गया है। साथ ही यह संभावना भी जांची जा रही है कि कबूतर किसी व्यक्ति का पालतू हो और उड़ते हुए भटककर भारतीय क्षेत्र में आ गया हो।

    फिलहाल रिंग पर दर्ज मोबाइल नंबर समेत अन्य तथ्यों की तकनीकी जांच की जा रही है।

    पुलिस ने कहा- अभी तक कुछ संदिग्ध नहीं मिला

    हीरानगर थाना प्रभारी विक्रम शर्मा के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में अभी तक ऐसा कुछ सामने नहीं आया है, जिससे कबूतर के किसी संदिग्ध गतिविधि में शामिल होने की पुष्टि हो। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियां मामले को गंभीरता से लेते हुए हर पहलू की जांच कर रही हैं।

    अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक कबूतर मिलने की वजह से सुरक्षा व्यवस्था को भी सतर्क रखा गया है।

    2020 में भी पकड़ा गया था पाकिस्तानी कबूतर

    कठुआ इलाके में इस तरह का मामला पहली बार सामने नहीं आया है। मई 2020 में भी अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास मनियारी गांव में एक कबूतर पकड़ा गया था।

    उस समय पाकिस्तान के एक व्यक्ति ने वीडियो जारी कर दावा किया था कि उसने ईद के मौके पर कबूतर उड़ाया था और वह भटककर भारतीय क्षेत्र में पहुंच गया। जांच के बाद उस कबूतर को छोड़ दिया गया था।

    जांच के बाद ही साफ होगी पूरी कहानी

    फिलहाल कठुआ में मिले कबूतर को लेकर सुरक्षा एजेंसियां रिंग पर लिखे मोबाइल नंबर और उसके भारत पहुंचने की परिस्थितियों की पड़ताल कर रही हैं। अभी तक जासूसी या किसी आतंकी गतिविधि से इसका संबंध साबित नहीं हुआ है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह महज भटका हुआ पालतू पक्षी था या इसके पीछे कोई और वजह थी।

  • BJP युवा चेहरों पर दांव खेलने की तैयारी में…. 60 साल से कम उम्र के होंगे भावी सरकारों के मुखिया… !

    BJP युवा चेहरों पर दांव खेलने की तैयारी में…. 60 साल से कम उम्र के होंगे भावी सरकारों के मुखिया… !


    नई दिल्ली।
    भाजपा (BJP) नेतृत्व देश की नई पीढ़ी (New Generation) खासकर युवाओं की आकांक्षाओं को प्राथमिकता पर रखते हुए अपनी आगे बनने वाली सरकारों (Governments) का नेतृत्व युवाओं (Youth) को सौंपे जाने की तैयारी में है। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि उसकी भावी सरकारों के मुखिया साठ साल से कम उम्र के होंगे।

    हालांकि, सरकार में वरिष्ठ नेताओं को भी शामिल किया जाएगा। अगले साल भाजपा को सात राज्यों के चुनाव में जाना है, जिनमें पांच राज्यों में अभी उसके मुख्यमंत्री है। वहां पर यह बदलाव साफ दिखाई देगा। भाजपा के देशभर में अभी 17 मुख्यमंत्री हैं। इनमें पांच की ही उम्र साठ साल से अधिक है। सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू हैं, जिनकी उम्र 47 वर्ष है। सबसे ज्यादा उम्र के त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा (73 वर्ष) हैं। छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय, गुजरात के भूपेंद्र पटेल, मणिपुर के वाय खेमचंद सिंह साठ साल के ज्यादा के हैं।

    भाजपा नेतृत्व ने संगठन में नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान सौंपकर साफ कर दिया था, कि अब वह नई पीढ़ी को आगे लाने जा रही है। जेन जी के आंदोलन के बने माहौल में भाजपा अब अपने इस फैसले को राज्यों में भी लागू करेगी। हालांकि, राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए कुछ अपवाद रखे जा सकते हैं।


    गुजरात में हर्ष सांघवी नया चेहरा

    भाजपा की इस कवायद में आने वाले चुनाव वाले राज्यों में गुजरात में पार्टी के उप मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी भावी नेता के रूप में उभर रहे हैं। मणिपुर की स्थिति अलग है। वहां पर अलग तरह से फैसला लिया जाएगा। हिमाचल प्रदेश और पंजाब जहां भाजपा की सरकारें नहीं हैं, वहां पार्टी अघोषित रूप से युवा चेहरे को सामने रखेगी।


    पीएमम मोदी के जन्मदिन पर सेवा संकल्प अभियान
    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक “सेवा संकल्प अभियान” के तहत पूरे उत्तर प्रदेश में सेवा और जनकल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित करेगी। प्रदेश भाजपा मुख्यालय से सोमवार को जारी बयान में यह जानकारी दी गई।

    मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को समर्पित इस अभियान का उद्देश्य उनके सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना है।

    अभियान को लेकर प्रदेश स्तरीय कार्यशाला सोमवार को यहां इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित की गई। कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री द्वय केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक तथा प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह शामिल हुए।

  • हिमालय में बार-बार क्यों आती है तबाही? बाढ़, भूस्खलन और भूकंप का कनेक्शन समझिए

    हिमालय में बार-बार क्यों आती है तबाही? बाढ़, भूस्खलन और भूकंप का कनेक्शन समझिए


    काठमांडू।
    नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। खूबसूरत पहाड़ों और घाटियों के लिए पहचाना जाने वाला हिमालय दरअसल प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है। यहां बाढ़, भूस्खलन, बादल फटना, भूकंप और ग्लेशियर से जुड़ी घटनाएं समय-समय पर बड़े संकट में बदल जाती हैं।

    लेकिन आखिर हिमालय से सटे इलाकों में आपदाओं का खतरा इतना ज्यादा क्यों है? इसके पीछे भूगर्भीय बनावट, पहाड़ों की ढलान, भारी बारिश और तेजी से बदलती जलवायु जैसे कई कारण एक साथ काम करते हैं।

    भारतीय और यूरेशियन प्लेटों की टक्कर है बड़ी वजह

    हिमालय दुनिया की सबसे युवा प्रमुख पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। इसका निर्माण भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार टक्कर से हुआ है। खास बात यह है कि दोनों प्लेटों की गति आज भी जारी है।

    इन प्लेटों की लगातार हलचल पृथ्वी के भीतर भूगर्भीय तनाव पैदा करती है। इसी कारण हिमालयी क्षेत्र तकनीकी रूप से बेहद सक्रिय है और यहां भूकंप का खतरा लगातार बना रहता है।

    हिमालय से जुड़े भारत के कई हिस्से भी उच्च भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्रों में आते हैं, खासकर भूकंपीय क्षेत्र IV और V में शामिल इलाके।

    पहाड़ों की युवा संरचना क्यों बढ़ाती है खतरा?

    हिमालय की अपेक्षाकृत युवा भूगर्भीय संरचना का एक परिणाम यह भी है कि यहां कई जगह मिट्टी, चट्टान और तलछट अपेक्षाकृत अस्थिर हैं। तेज बारिश होने पर यही सामग्री ढलानों से नीचे खिसकने लगती है।

    इससे भूस्खलन की घटनाएं होती हैं। जब बड़ी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और मलबा अचानक नीचे आता है तो सड़कें, पुल और बस्तियां इसकी चपेट में आ सकती हैं।

    खड़ी ढलानें पानी को बना देती हैं खतरनाक

    हिमालय का भूभाग बेहद खड़ा है। यहां गहरी घाटियां और तीखी ढलानें हैं। भारी बारिश के दौरान पानी पहाड़ों पर ज्यादा देर ठहरने के बजाय तेजी से नीचे की ओर बहता है और संकरी नदी घाटियों में पहुंच जाता है।

    तेज बहाव अपने साथ चट्टान, मिट्टी, पेड़ और दूसरे मलबे को भी बहाकर ले जा सकता है। यही प्रक्रिया अचानक आने वाली बाढ़ को और ज्यादा विनाशकारी बना देती है।

    संकरी घाटियों में पानी का वेग बहुत तेजी से बढ़ सकता है। इसका सीधा असर नदी किनारे बने घरों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे पर पड़ता है।

    जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई मुश्किल

    हिमालय की प्राकृतिक संवेदनशीलता के ऊपर अब जलवायु परिवर्तन का अतिरिक्त दबाव भी पड़ रहा है। हिमालय को कई बार ‘तीसरा ध्रुव’ कहा जाता है क्योंकि ध्रुवीय क्षेत्रों के बाहर यहां बड़ी मात्रा में बर्फ और ग्लेशियर मौजूद हैं।

    बढ़ते तापमान के कारण कई ग्लेशियर पीछे हट रहे हैं। इसके साथ ही जमी हुई जमीन और पहाड़ी ढलानों की स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है।

    ग्लेशियर की झील फटी तो तबाही और तेज

    ग्लेशियरों के पिघलने से उनके आसपास बनी झीलों का आकार बढ़ सकता है। इन झीलों को रोकने वाली प्राकृतिक बर्फ, चट्टान या मलबे की दीवार अगर पानी के दबाव, भूस्खलन या किसी अन्य वजह से टूट जाए तो अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर बह सकता है।

    इसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहा जाता है।

    ऐसी बाढ़ कुछ ही समय में निचली घाटियों में बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकती है। खासकर उन इलाकों में खतरा ज्यादा होता है जहां बस्तियां और बुनियादी ढांचा नदियों के बेहद करीब बना हुआ है।

    बादल फटने से कुछ मिनटों में बदल सकते हैं हालात

    हिमालयी इलाकों में बादल फटना भी अचानक बड़ी आपदा का कारण बन सकता है। इसमें बेहद कम समय में एक छोटे क्षेत्र में बहुत ज्यादा बारिश होती है।

    पहाड़ी इलाकों में इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। अचानक हुई मूसलाधार बारिश एक साथ भूस्खलन, मलबा प्रवाह और फ्लैश फ्लड जैसी घटनाओं को जन्म दे सकती है।

    नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है और अतिरिक्त पानी का भार पहले से कमजोर पहाड़ी ढलानों को अस्थिर कर सकता है।

    हिमालय में आपदाएं अलग-अलग नहीं, एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं

    हिमालयी क्षेत्रों की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यहां एक प्राकृतिक घटना दूसरी आपदा को जन्म दे सकती है। भारी बारिश से ढलान कमजोर होता है, भूस्खलन नदी का रास्ता रोक सकता है और बाद में जमा पानी अचानक निकलकर बाढ़ ला सकता है। वहीं ग्लेशियरों के पिघलने से बनी झीलों के टूटने पर भी निचले इलाकों में अचानक जलप्रलय आ सकता है।

    यानी हिमालय में भूगर्भीय सक्रियता, खड़ी ढलान, अस्थिर चट्टानें, भारी बारिश, ग्लेशियरों में बदलाव और जलवायु परिवर्तन मिलकर आपदा का जोखिम बढ़ाते हैं।

    इसीलिए नेपाल, भारत, भूटान और हिमालय से जुड़े दूसरे क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन, शुरुआती चेतावनी प्रणाली, नदी घाटियों में सुरक्षित निर्माण और संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

  • सोनिया गांधी की किताब पर पेंगुइन का खुलासा: बोला- कोई बाहरी दबाव नहीं, एक मुद्दे पर नहीं बनी सहमति

    सोनिया गांधी की किताब पर पेंगुइन का खुलासा: बोला- कोई बाहरी दबाव नहीं, एक मुद्दे पर नहीं बनी सहमति


    नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ को भारत में प्रकाशित नहीं करने के फैसले पर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने सफाई दी है। प्रकाशक ने कहा कि किताब न छापने के पीछे किसी तरह का बाहरी दबाव नहीं था, बल्कि संपादकीय चर्चा के दौरान एक खास मुद्दे पर लेखक की टीम और प्रकाशक के बीच सहमति नहीं बन सकी।

    पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) के मुताबिक, पांडुलिपि पर सामान्य संपादकीय प्रक्रिया के तहत चर्चा हुई थी। कई मुद्दों पर लेखक की टीम ने बदलाव स्वीकार किए, जबकि कुछ मामलों में प्रकाशक ने लेखक के रुख को मान लिया। हालांकि, एक विशेष मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद सोनिया गांधी की टीम ने प्रकाशन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया।

    10 नवंबर को दुनियाभर में आएगी किताब

    सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ का दुनियाभर में प्रकाशन 10 नवंबर को प्रस्तावित है। अमेरिका स्थित प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नॉफ, जो पेंगुइन रैंडम हाउस का ही एक प्रकाशन संस्थान है, ने इसके वैश्विक प्रकाशन की घोषणा की है। विवाद भारत में इसके प्रकाशन को लेकर सामने आया है।

    कांग्रेस ने उठाए थे दबाव को लेकर सवाल

    पेंगुइन के फैसले के बाद कांग्रेस के कई नेताओं ने सरकार के दबाव और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए थे। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया था कि पेंगुइन इंडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस और मोदी सरकार के दौरान चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र पर किए गए कब्जे से जुड़े अंश हटाने का दबाव था।

    हालांकि, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने इन अटकलों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। प्रकाशक का कहना है कि किताब प्रकाशित नहीं करने का फैसला किसी बाहरी हस्तक्षेप की वजह से नहीं लिया गया।

    पेंगुइन ने क्या कहा?

    PRHI की प्रवक्ता पल्लवी नारायण ने पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा कि प्रकाशक इस किताब को प्रकाशित करने के लिए काफी उत्सुक था और इसके अधिकार हासिल करने के लिए काफी प्रयास किए गए थे। उन्होंने कहा कि किताब की विषय-वस्तु गोपनीय है और प्रकाशन से पहले उस पर प्रतिबंध (एम्बार्गो) है, इसलिए किसी बाहरी दबाव की बात सही नहीं है।

    प्रकाशक के मुताबिक, पांडुलिपि की समीक्षा के दौरान कई बिंदु उठाए गए और सोनिया गांधी के प्रतिनिधियों के साथ उन पर चर्चा की गई। कुछ बदलावों पर सहमति बनी, जबकि कुछ मामलों में लेखक के मूल रुख को स्वीकार किया गया।

    आखिर किस मुद्दे पर अटकी बात?

    पेंगुइन ने यह बताने से इनकार कर दिया कि आखिर वह कौन-सा मुद्दा था जिस पर सहमति नहीं बन सकी। प्रकाशक ने कहा कि वह एक समझौते से बंधा है और लेखक की गोपनीयता उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए गतिरोध के कारणों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

    पेंगुइन इंडिया ने यह भी कहा कि किसी भी पांडुलिपि का आलोचनात्मक मूल्यांकन करना, सवाल उठाना, सुझाव देना और स्वतंत्र संपादकीय निर्णय लेना प्रकाशक की जिम्मेदारी है। कंपनी के अनुसार, ‘बिलॉन्गिंग’ के मामले में भी इसी सामान्य संपादकीय प्रक्रिया का पालन किया गया।

  • दिल्ली नाबालिग गैंगरेप केस: आरोपी ड्राइवर की मां ने बेटे को बताया निर्दोष, कहा- झूठा फंसाया जा रहा

    दिल्ली नाबालिग गैंगरेप केस: आरोपी ड्राइवर की मां ने बेटे को बताया निर्दोष, कहा- झूठा फंसाया जा रहा


    नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय नाबालिग से गैंगरेप के मामले में गिरफ्तार बस चालक कुलदीप की मां ने अपने बेटे को निर्दोष बताया है। रोते हुए उन्होंने दावा किया कि उनके बेटे को साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। उन्होंने सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच की अपील करते हुए कहा कि उनका परिवार बेहद गरीब है और उनके छोटे बच्चे हैं।

    कुलदीप की मां ने कहा कि करीब दो महीने पहले उनके पति की हत्या कर दी गई थी। उन्हें शक है कि पति की हत्या में शामिल लोगों ने ही उनके बेटे को इस मामले में फंसाया है। उन्होंने सरकार से हाथ जोड़कर अपील करते हुए कहा कि उनके बेटे को निर्दोष घोषित किया जाए।

    मां बोली- ‘मेरा बच्चा पूरी तरह निर्दोष’

    कुलदीप की मां के मुताबिक, “मेरा बच्चा पूरी तरह निर्दोष है। उसे झूठा फंसाया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि उनके परिवार में बहुत छोटे बच्चे हैं और उनके पास दिल्ली जाकर अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त साधन भी नहीं हैं। उन्होंने सरकार से मामले में सच्चाई सामने लाने की मांग की है।

    चलती बस में वारदात का आरोप

    पुलिस के मुताबिक, 4 अगस्त की रात दिल्ली-एनसीआर में 16 वर्षीय नाबालिग के साथ चलती स्लीपर बस में ड्राइवर और कंडक्टर ने कथित तौर पर दुष्कर्म किया। घटना उस समय हुई जब भारी बारिश के बीच लड़की नोएडा जाने के लिए रास्ते में थी। पुलिस ने मामले में बस चालक कुलदीप और कंडक्टर संदीप को गिरफ्तार किया है।

    बस ग्रेटर नोएडा के परी चौक से पुरानी दिल्ली के कश्मीरी गेट जा रही थी। करीब 47 किलोमीटर की यात्रा के दौरान कथित तौर पर वारदात को अंजाम दिया गया। पुलिस ने बस को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।

    बारिश में परी चौक पहुंची थी नाबालिग

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, लड़की 11वीं कक्षा की छात्रा है और मैनपुरी की रहने वाली है। वह परिवार को बताए बिना नोएडा में अपने कजिन से मिलने निकली थी। भारी बारिश और अंधेरे के बीच वह रास्ता भटककर ग्रेटर नोएडा के परी चौक पहुंच गई।

    इसी दौरान वहां से गुजर रही एक खाली स्लीपर बस लड़की के इशारा करने पर रुकी। ड्राइवर और कंडक्टर ने उसे नोएडा सेक्टर-63 की तरफ जाने की बात बताकर वहां छोड़ने की पेशकश की।

    पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपी गिरफ्तार

    लड़की के बयान के आधार पर पुलिस ने आरोप लगाया है कि बस चलने के कुछ देर बाद कंडक्टर ने उसके साथ अश्लील हरकतें शुरू कीं। इसके बाद ड्राइवर और कंडक्टर ने कथित तौर पर उसके साथ दुष्कर्म किया। विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है।

    DCP नॉर्थ निहारिका भट्ट ने सोमवार को मामले की पुष्टि करते हुए दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, 29 वर्षीय आरोपी संदीप का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है।

    अब पुलिस मामले से जुड़े सभी साक्ष्यों, पीड़िता के बयान और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की जांच कर रही है। कुलदीप की मां के लगाए गए साजिश के आरोपों की भी जांच में स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।