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  • देश की अथर्व्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनेगा मिडिल क्लास….2036 तक कुल उपभोक्ता खर्च में होगा 93% हिस्सा

    देश की अथर्व्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनेगा मिडिल क्लास….2036 तक कुल उपभोक्ता खर्च में होगा 93% हिस्सा


    नई दिल्ली।
    भारत (India) की अर्थव्यवस्था (Economy) आने वाले सालों में किसके दम पर आगे बढ़ेगी? इसका जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने कहा है कि भारत का मिडिल क्लास (मध्यम वर्ग) ही देश की आर्थिक वृद्धि का सबसे बड़ा इंजन बनने जा रहा है। उन्होंने बताया कि 2036 तक भारत के मिडिल क्लास और उच्च-मध्यम वर्ग (Slightly Affluent Population) का देश के कुल उपभोक्ता खर्च (Consumer Spending) में 93% हिस्सा होगा, यानी अगले एक दशक में भारत की अर्थव्यवस्था को सबसे ज्यादा ताकत इसी वर्ग की बढ़ती खरीदारी और खर्च से मिलेगी।

    फ्रांस के Aix-Marseille यूनिवर्सिटी में आयोजित प्रतिष्ठित आर्थिक सम्मेलन Rencontres Économiques d’Aix-en-Provence को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह देश का मजबूत घरेलू उपभोग (Domestic Consumption) है, जिसे मिडिल क्लास लगातार आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि जब लोग ज्यादा खर्च करते हैं, तो उद्योगों का उत्पादन बढ़ता है, रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं और पूरी अर्थव्यवस्था को नई गति मिलती है।

    निर्मला सीतारमण के अनुसार, वर्तमान में भारत की लगभग 31% आबादी मिडिल क्लास में आती है। OECD (Organisation for Economic Co-operation and Development) के अनुमान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 2030 से 2035 के बीच भारत दुनिया में मिडिल क्लास आबादी के मामले में चीन को भी पीछे छोड़ सकता है। उन्होंने बताया कि साल 1995 से 2021 के बीच भारत का मिडिल क्लास औसतन 6.3% सालाना की दर से बढ़ा है और आने वाले सालों में यह रफ्तार और तेज होने की उम्मीद है।

    वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार की वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion), जनकल्याण योजनाओं और आर्थिक सुधारों ने करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालकर मिडिल क्लास तक पहुंचने में मदद की है। उनके मुताबिक, अब तक 24.8 करोड़ (248 मिलियन) लोग बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) से बाहर आए हैं। इसके अलावा डिजिटल बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और आसान लोन सिस्टम ने लोगों की आर्थिक क्षमता को मजबूत किया है। वहीं, कई वस्तुओं पर GST दरों में कमी से भी घरेलू खर्च बढ़ाने में मदद मिली है।

    निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा कि अब आर्थिक विकास केवल दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु या चेन्नई जैसे महानगरों तक सीमित नहीं है। टियर-2 और टियर-3 शहर भी तेजी से आर्थिक गतिविधियों के नए केंद्र बन रहे हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के अनुमान के अनुसार, आने वाले सालों में 500 से अधिक भारतीय शहर नए आर्थिक हब के रूप में उभर सकते हैं। इससे देशभर में रोजगार, निवेश और उपभोग के नए अवसर पैदा होंगे।

    वित्त मंत्री ने भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षमता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत का कुशल युवा वर्ग तेजी से AI तकनीक अपना रहा है और उद्योगों को भी AI आधारित समाधान उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने बताया कि देश के MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) सेक्टर का लगभग 40% निर्यात होता है और इनमें से कई कंपनियां अब AI आधारित बिजनेस मॉडल अपना रही हैं। इससे नए रोजगार और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिल रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत आज दुनिया में सबसे अधिक AI ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और डेटा सेंटर्स वाले प्रमुख देशों में शामिल हो रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण देश की बड़ी और कुशल तकनीकी कार्यबल है, जो वैश्विक कंपनियों की जरूरतों को पूरा कर रही है।

    वित्त मंत्री का मानना है कि आने वाले सालों में भारत की आर्थिक तरक्की का सबसे बड़ा आधार उसका तेजी से बढ़ता मिडिल क्लास होगा। अगर मौजूदा रफ्तार बनी रहती है, तो 2036 तक देश की लगभग 93% उपभोक्ता खरीदारी इसी वर्ग से आएगी, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभेगी।

  • केतन हत्याकांड में जांच तेज, दूसरा मोबाइल बरामद गवाहों के बयान से बढ़ीं सिया और चेतन की मुश्किलें

    केतन हत्याकांड में जांच तेज, दूसरा मोबाइल बरामद गवाहों के बयान से बढ़ीं सिया और चेतन की मुश्किलें


    नई दिल्ली। पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। पुलिस का दावा है कि अब उसके पास ऐसे अहम सबूत मौजूद हैं जो इस मामले को और मजबूत बना रहे हैं। जांच के दौरान दूसरा मोबाइल फोन बरामद किया गया है जबकि कुछ महत्वपूर्ण गवाह भी सामने आए हैं। इन नए साक्ष्यों के बाद पुलिस का कहना है कि यह साबित करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं कि केतन अग्रवाल की मौत हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या थी। मामले में मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं।

    पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने बताया कि जांच कई स्तरों पर आगे बढ़ रही है। बरामद किए गए दूसरे मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि दोनों आरोपियों के बीच हुई बातचीत और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा सके। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि केतन अग्रवाल ने सिया गोयल को कितनी आर्थिक मदद दी थी और दोनों के बीच पैसों का लेनदेन किस स्तर तक हुआ था। इस संबंध में कई लोगों से पूछताछ की जा रही है और डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।

    इसी बीच पुणे की अदालत ने दोनों आरोपियों सिया गोयल और चेतन चौधरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद दोनों को अदालत में पेश किया गया था। अभियोजन पक्ष ने तीन दिन की अतिरिक्त पुलिस रिमांड की मांग करते हुए दलील दी कि आरोपियों के मोबाइल फोन से कोड भाषा में हुई बातचीत मिली है जिसका पूरा अर्थ समझने और साजिश के अन्य पहलुओं का खुलासा करने के लिए आगे पूछताछ जरूरी है। हालांकि अदालत ने यह मांग खारिज करते हुए दोनों को 16 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

    पुलिस का आरोप है कि 18 जून को पुणे जिले के लोहागढ़ किले में केतन अग्रवाल को खाई में धक्का देकर उसकी हत्या की गई थी। शुरुआत में इस घटना को दुर्घटना बताया गया था लेकिन जांच के दौरान मिले परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और आरोपियों के बदलते बयानों ने हत्या की आशंका को मजबूत कर दिया। इसी आधार पर पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है।

    जांच एजेंसियों ने लोहागढ़ किले और आसपास के सभी महत्वपूर्ण स्थानों का दोबारा निरीक्षण किया। घटनास्थल का विस्तृत पंचनामा तैयार किया गया और मुख्य आरोपी सिया गोयल को भी उन स्थानों पर ले जाकर घटनाक्रम की पुष्टि करने का प्रयास किया गया। पुलिस ने घटना वाले दिन पहने गए सिया के कपड़ों को भी जब्त कर लिया है जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। इसके अलावा उन स्थानों की भी जांच की गई जहां सिया और चेतन के एक साथ जाने की जानकारी सामने आई है। जांच अधिकारियों को संदेह है कि दोनों ने हत्या की योजना पहले से बनाई थी और संभव है कि अलग अलग स्थानों पर उसका पूर्वाभ्यास भी किया गया हो।

    पुलिस ने सिया गोयल के लोनावला स्थित घर की भी तलाशी ली है जहां से कुछ अहम जानकारियां मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। जांच एजेंसियां दोनों आरोपियों का लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की तैयारी भी कर रही हैं क्योंकि पूछताछ के दौरान उनके बयानों में कई विरोधाभास सामने आए हैं। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह परीक्षण कराया जाएगा। पुलिस का कहना है कि गवाहों के बयान डिजिटल साक्ष्य फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य तकनीकी प्रमाणों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां तेजी से जुड़ रही हैं और जांच अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है।

  • पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ की जयपुर में हुई एंजियोप्लास्टी…. ब्लड ग्रुप को लेकर बड़ी चूक

    पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ की जयपुर में हुई एंजियोप्लास्टी…. ब्लड ग्रुप को लेकर बड़ी चूक


    जयपुर।
    पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Former Vice President Jagdeep Dhankhar) शुक्रवार को स्वास्थ्य जांच (Health Check-up) के लिए जयपुर पहुंचे, जहां निजी अस्पताल में उनकी सफल एंजियोप्लास्टी (Angioplasty) की गई। लेकिन इस पूरे मेडिकल प्रोटोकॉल के बीच एक ऐसी चूक सामने आई, जिसने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। धनखड़ के लिए रिजर्व रखे जाने वाले ब्लड ग्रुप को लेकर जयपुर CMHO कार्यालय से बड़ी गलती हो गई। राहत की बात यह रही कि समय रहते यह त्रुटि पकड़ में आ गई और संशोधित पत्र जारी कर स्थिति संभाल ली गई।


    ब्लड ग्रुप की गलती से मचा हड़कंप

    पूर्व उपराष्ट्रपति के जयपुर दौरे को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से विशेष मेडिकल प्रोटोकॉल लागू किया गया था। उनके निजी सचिव की ओर से भेजे गए आधिकारिक प्रोटोकॉल लेटर में स्पष्ट रूप से A पॉजिटिव ब्लड ग्रुप रिजर्व रखने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन जयपुर CMHO कार्यालय ने SMS अस्पताल प्रशासन को जो पत्र भेजा, उसमें गलती से O नेगेटिव ब्लड ग्रुप रिजर्व रखने का उल्लेख कर दिया।

    मामला सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग में हलचल मच गई। अधिकारियों ने तत्काल पत्र में सुधार कराया और संशोधित निर्देश SMS अस्पताल को भेजे गए। यदि यह गलती समय रहते नहीं पकड़ी जाती तो गंभीर स्थिति पैदा हो सकती थी।


    CMHO बोले- टाइपिंग मिस्टेक थी

    जयपुर CMHO डॉ. रवि शेखावत ने इस पूरे मामले को टाइपिंग की त्रुटि बताया। उन्होंने कहा कि O नेगेटिव ब्लड ग्रुप पूर्व उपराष्ट्रपति की पत्नी का है, जो गलती से धनखड़ के नाम के सामने दर्ज हो गया। जैसे ही यह त्रुटि सामने आई, तुरंत उसे ठीक कर नया पत्र जारी कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल में किसी तरह की चिकित्सा प्रक्रिया प्रभावित नहीं हुई।


    एयरपोर्ट से सीधे अस्पताल पहुंचे धनखड़

    पूर्व उपराष्ट्रपति शुक्रवार सुबह जयपुर एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से सीधे जवाहर सर्किल स्थित निजी अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में उन्हें प्रारंभिक जांच के लिए भर्ती किया गया, जहां विभिन्न कार्डियक और रूटीन मेडिकल टेस्ट किए गए। चिकित्सकों की सलाह के बाद दोपहर में उनकी एंजियोग्राफी की गई और इसके बाद एंजियोप्लास्टी का निर्णय लिया गया।

    सूत्रों के अनुसार, धनखड़ के हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज मिलने के बाद दो स्टेंट लगाए गए। पूरा कार्डियक प्रोसीजर वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. समीन के. शर्मा की निगरानी में संपन्न हुआ। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक उनकी स्थिति स्थिर है और चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज जारी है।


    राजनीतिक नेताओं ने भी जाना हालचाल

    पूर्व उपराष्ट्रपति के अस्पताल में भर्ती होने की सूचना मिलते ही राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने अस्पताल पहुंचकर धनखड़ से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। नेताओं ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।


    पहले भी हो चुका है कार्डियक उपचार

    यह पहला मौका नहीं है जब जगदीप धनखड़ को हृदय संबंधी उपचार कराना पड़ा हो। इससे पहले मार्च 2025 में भी उन्हें हृदय संबंधी समस्या के चलते नई दिल्ली स्थित AIIMS में भर्ती कराया गया था, जहां उनका कार्डियक प्रोसीजर किया गया था। वहीं 12 जनवरी 2025 को अचानक तबीयत बिगड़ने और बेहोशी की शिकायत के बाद भी उन्हें AIIMS में भर्ती कर MRI सहित कई महत्वपूर्ण जांचें कराई गई थीं। चिकित्सकों की सलाह पर वे नियमित कार्डियक फॉलो-अप कराते रहे हैं।


    5 जुलाई को दिल्ली लौटेंगे

    मेडिकल प्रक्रिया के बाद धनखड़ फिलहाल चिकित्सकों की निगरानी में जयपुर में ही रहेंगे। उनके कार्यक्रम के अनुसार वे 3 और 4 जुलाई को जयपुर में रुकेंगे। इस दौरान उनका ठहराव लोकभवन में प्रस्तावित है। स्वास्थ्य में सुधार होने पर वे 5 जुलाई की सुबह करीब 8 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगे।


    एक गलती जिसने खड़े कर दिए बड़े सवाल

    पूर्व उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति के मेडिकल प्रोटोकॉल में ब्लड ग्रुप जैसी बुनियादी जानकारी का गलत दर्ज होना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि अधिकारियों ने इसे महज टाइपिंग मिस्टेक बताया और समय रहते सुधार भी कर लिया, लेकिन इस घटना ने यह जरूर दिखा दिया कि वीवीआईपी प्रोटोकॉल में छोटी सी लापरवाही भी बड़े जोखिम का कारण बन सकती है। फिलहाल राहत की बात यह है कि धनखड़ की एंजियोप्लास्टी सफल रही है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर सियासत तेज, अखिलेश यादव ने AI वीडियो शेयर कर BJP पर साधा निशाना

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर सियासत तेज, अखिलेश यादव ने AI वीडियो शेयर कर BJP पर साधा निशाना


    नई दिल्‍ली । अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है. इस बार उन्होंने सोशल मीडिया पर भगवान श्रीराम का 4 मिनट 40 सेकेंड का AI वीडियो शेयर किया और सवाल किया, “क्या फिर चले गए वनवास?” इस वीडियो के जरिए मंदिर में हुई चोरी और उससे जुड़े घटनाक्रम को प्रतीकात्मक अंदाज में दिखाया गया है.

    अखिलेश यादव ने जो वीडियो शेयर किया है, वह सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि एक सिनेमैटिक प्रस्तुति है. इसकी शुरुआत सूनी और शांत अयोध्या से होती है. इसके बाद मंदिर के अंदर भगवान श्रीराम की AI से बनाई गई आकृति दिखाई देती है. पूरे वीडियो में माहौल गंभीर रखा गया है, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि मंदिर में हुई घटना से अयोध्या का वातावरण बदल गया है.

    वीडियो के अगले हिस्से में मंदिर का वो कोना दिखता है जहां चोरी हुई. विजुअल्स में एक बड़ा दानपात्र और आसपास का सामान नजर आता है. गाना आगे बढ़ने पर अयोध्या के लोग और साधु-संत हाथ जोड़े खड़े दिखाई देते हैं, और प्रभु राम नगरी की सीमा की तरफ बढ़ते हैं. कुल मिलाकर अखिलेश यादव ने इस पूरे वीडियो और भजन के माध्यम से धर्म के नाम पर सरकार को आड़े हाथों लिया है.

    बता दें कि अबतक इस पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की टीमों ने अनुकल्प मिश्रा समेत सभी सात आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी की. करीब डेढ़ से ढाई घंटे चली इस कार्रवाई में अलमारियों और बक्सों का कोना-कोना छाना गया. जांच में सामने आया है कि आरोपी अनुकल्प मिश्रा ने अपने घर पर सात दिनों की भव्य रामकथा का आयोजन कराया था, जिस पर 50 लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए थे. इस आयोजन के एक वीडियो में चंपत राय भी मौजूद दिख रहे हैं.

    यह पूरा मामला 5 जून 2026 को तब सामने आया था, जब राम मंदिर परिसर में रूटीन चेकिंग के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने कुछ कर्मचारियों की जेब से नकदी बरामद की. इसके बाद 7 जून को जब यह बात पब्लिक हुई, तो अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर इस गबन का मुद्दा उठाकर जांच की मांग की. विपक्ष के दबाव और लोगों के गुस्से को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जून 2026 को इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया.

    फिलहाल मामले की जांच तेज है. प्रशासन लगातार सभी आरोपियों की अवैध संपत्तियों और सबूतों को जुटाने में लगा है, ताकि इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके.

  • पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर फैली अफवाहों को सरकार ने बताया गलत, 10 बिंदुओं में दी सफाई

    पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर फैली अफवाहों को सरकार ने बताया गलत, 10 बिंदुओं में दी सफाई


    नई दिल्ली। पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल (E20) मिश्रण को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रहे दावों पर सरकार ने विस्तृत सफाई दी है। कई पोस्टों में इंजन खराब होने, माइलेज घटने और बीमा रद्द होने जैसे दावे किए जा रहे थे, जिन्हें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पूरी तरह भ्रामक बताया है।

    मंत्रालय के अनुसार, E20 कार्यक्रम वैज्ञानिक शोध और कई देशों के लंबे अनुभव पर आधारित है। सरकार ने कहा कि वाहन मालिकों को किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह ईंधन मानकों के अनुरूप सुरक्षित है।

    सरकार ने 10 बिंदुओं में दी स्पष्ट जानकारी
    सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही गलतफहमियों का जवाब देते हुए कई अहम तथ्य सामने रखे:-

    – एक लीटर एथेनॉल उत्पादन में 10,000 लीटर पानी लगने का दावा गलत है। सरकार के अनुसार, उत्पादन प्रक्रिया में केवल 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी की आवश्यकता होती है और कई प्लांट जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक से काम करते हैं।

    – E20 कोई नया प्रयोग नहीं है, बल्कि इसका उपयोग अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, जापान, थाईलैंड और कई यूरोपीय देशों में लंबे समय से किया जा रहा है।
    – इंजन खराब होने का दावा गलत है। ARAI और अन्य संस्थाओं के अध्ययन में E20 से इंजन पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया है, हालांकि पुराने वाहनों में कुछ रबर पार्ट्स बदलने की आवश्यकता हो सकती है।
    – परीक्षणों में केवल मामूली माइलेज बदलाव देखा गया है, जिससे वाहन की सामान्य कार्यक्षमता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता।
    – E20 के लिए डिजाइन या स्वीकृत वाहनों की वारंटी और बीमा पर कोई असर नहीं पड़ता।
    – फ्यूल ग्रेड एथेनॉल में चीनी नहीं होती और इसमें डिनैचुरेंट मिलाए जाते हैं, जिससे पेट्रोल की गंध हावी रहती है। इसलिए चींटियों या मधुमक्खियों के आकर्षित होने का दावा गलत है।
    – अदालत में E20 कार्यक्रम की वैधता पर नहीं, बल्कि एथेनॉल खरीद अनुबंधों से जुड़े मामलों पर सुनवाई हो रही थी।
    – आधुनिक वाहनों और पेट्रोल पंपों की संरचना ऐसी है कि फ्यूल टैंक में पानी जाने की संभावना न्यूनतम रहती है।
    – सोशल मीडिया पर वायरल ‘रस मिलाने’ वाला वीडियो फर्जी बताया गया है। मंत्रालय के अनुसार एथेनॉल औद्योगिक मानकों के तहत ही तैयार होता है।
    – सरकार का दावा है कि एथेनॉल मिश्रण से अब तक 1.9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बची है, किसानों को 1.6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की आय मिली है, कच्चे तेल के आयात में 310 लाख मीट्रिक टन की कमी आई है और प्रदूषण में भी गिरावट दर्ज की गई है।
  • भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की ताकत होगी कई गुना मजबूत, रक्षा अधिग्रहण परिषद ने आधुनिक हथियारों और निगरानी प्रणालियों की खरीद को दी हरी झंडी

    भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की ताकत होगी कई गुना मजबूत, रक्षा अधिग्रहण परिषद ने आधुनिक हथियारों और निगरानी प्रणालियों की खरीद को दी हरी झंडी

    नई दिल्ली। भारतीय सशस्त्र बलों की आधुनिक युद्ध क्षमता को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए रक्षा अधिग्रहण परिषद ने लगभग 52 हजार करोड़ रुपये की रक्षा खरीद परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की है। इन परियोजनाओं के तहत सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए अत्याधुनिक हथियार प्रणालियां, ड्रोन, मिसाइलें और निगरानी उपकरण शामिल किए जाएंगे। इस निर्णय का उद्देश्य बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप तीनों सेनाओं की परिचालन क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाना है।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई परिषद की बैठक में भारतीय सेना के लिए कई महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों को स्वीकृति दी गई। इनमें ‘आकाश तरंग’ एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल, वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम, टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम तथा जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन प्रणाली प्रमुख हैं। इन सभी प्रणालियों का उद्देश्य आधुनिक युद्ध में उभरती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करना है।

    रक्षा मंत्रालय के अनुसार ‘आकाश तरंग’ प्रणाली विशेष रूप से दुश्मन के ड्रोन हमलों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वहीं मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल पैदल सेना को दुश्मन के आधुनिक टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के विरुद्ध अधिक प्रभावी बनाएगी। मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल मध्यम दूरी तक विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करेगी, जबकि वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम कम दूरी के हवाई लक्ष्यों को तेजी से निष्क्रिय करने में सक्षम होगा।

    टैंकों के लिए स्वीकृत एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम उनकी सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करेगा। यह प्रणाली युद्धक्षेत्र में आने वाले मिसाइल और रॉकेट जैसे खतरों का समय रहते पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने में सहायक होगी। इसके साथ ही जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और सटीक लक्ष्यभेदन अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इन प्रणालियों से सेना की मारक क्षमता और परिचालन दक्षता दोनों में वृद्धि होने की उम्मीद है।

    भारतीय नौसेना के लिए भी कई उन्नत परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें मल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन, नेवल शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम तथा इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के लिए लैंड बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी की स्थापना शामिल है। इन परियोजनाओं से समुद्री निगरानी, नौसैनिक अभियानों और आधुनिक युद्धपोतों की तकनीकी क्षमता को मजबूती मिलेगी। अत्याधुनिक सेंसर से लैस अनमैन्ड एरियल सिस्टम समुद्री क्षेत्र में निगरानी और स्थितिजन्य जागरूकता को और अधिक प्रभावी बनाएगा।

    वायुसेना के लिए फिक्स्ड-विंग आधारित हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट प्रणाली को भी मंजूरी दी गई है। यह अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म लंबे समय तक ऊंचाई पर रहकर खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी, टोही, दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग जैसे मिशनों को अंजाम देने में सक्षम होगा। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों और रणनीतिक इलाकों में वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ेगी।

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के लागू होने के बाद भारतीय सशस्त्र बलों की संयुक्त युद्ध क्षमता, निगरानी तंत्र, वायु एवं समुद्री सुरक्षा तथा आधुनिक तकनीकी तैयारी में उल्लेखनीय सुधार होगा। बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल और नई सैन्य चुनौतियों को देखते हुए यह निर्णय भारत की रक्षा तैयारियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • 8 जुलाई को काशी से शिक्षकों को बड़ी सौगात देंगे मुख्यमंत्री योगी, 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा' योजना का होगा शुभारंभ, लाखों परिवारों को मिलेगा स्वास्थ्य सुरक्षा कवच

    8 जुलाई को काशी से शिक्षकों को बड़ी सौगात देंगे मुख्यमंत्री योगी, 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा' योजना का होगा शुभारंभ, लाखों परिवारों को मिलेगा स्वास्थ्य सुरक्षा कवच

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षकों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 8 जुलाई को वाराणसी दौरे के दौरान ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा’ योजना का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इस योजना के माध्यम से बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के पात्र शिक्षकों तथा उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य सरकार का उद्देश्य शिक्षकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और गंभीर बीमारियों के उपचार में आने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।

    यह योजना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की तर्ज पर संचालित की जाएगी। इसके तहत पात्र लाभार्थी देशभर में सूचीबद्ध अस्पतालों में बिना नकद भुगतान के उपचार प्राप्त कर सकेंगे। योजना के अंतर्गत मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं और उपचार संबंधी लाभ आयुष्मान भारत योजना के अनुरूप होंगे, जिससे शिक्षकों और उनके परिवारों को व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध हो सकेगी।

    योजना के प्रभावी और पारदर्शी संचालन के लिए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है। पात्र लाभार्थियों का पंजीकरण, सत्यापन और अनुमोदन ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए विशेष डेटा संग्रह पोर्टल विकसित किया गया है, जहां शिक्षक अपना विवरण दर्ज कर रहे हैं। डिजिटल प्रणाली अपनाने का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है, ताकि पात्र लाभार्थियों को बिना अनावश्यक विलंब के योजना का लाभ मिल सके।

    बेसिक शिक्षा विभाग के लिए तैयार किए गए पोर्टल पर अब तक लाखों लाभार्थी अपना विवरण दर्ज करा चुके हैं। आवेदन के बाद संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा जानकारी का सत्यापन किया जाएगा, जबकि अंतिम स्वीकृति जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के स्तर पर दी जाएगी। अनुमोदन के पश्चात लाभार्थियों का विवरण राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली से एकीकृत किया जाएगा, जिसके बाद आधार आधारित ई-केवाईसी पूरी कर डिजिटल कार्ड डाउनलोड किया जा सकेगा।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए भी ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस श्रेणी के शिक्षकों के आवेदन का सत्यापन संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य करेंगे और अंतिम अनुमोदन जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा प्रदान किया जाएगा। इसके बाद लाभार्थियों का डेटा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की प्रणाली से जोड़ा जाएगा। सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शिक्षक डिजिटल कार्ड प्राप्त कर योजना के तहत कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।

    राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से शिक्षकों और उनके परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान आर्थिक राहत मिलेगी। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच अधिक आसान और प्रभावी बनेगी। डिजिटल व्यवस्था के कारण आवेदन से लेकर लाभ प्राप्त करने तक की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुविधाजनक होगी।

    सरकार इस योजना का दायरा आगे और बढ़ाने की तैयारी भी कर रही है। आगामी चरण में उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों और कर्मचारियों को भी योजना से जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए अलग ऑनलाइन डेटा संग्रह पोर्टल विकसित किया जाएगा, जिससे विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं कर्मचारी भी इस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का लाभ प्राप्त कर सकें। इस विस्तार के बाद राज्य में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े बड़ी संख्या में कार्मिकों को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य पूरा किया जाएगा।

  • विश्व धरोहर तक्षशिला पर मंडराया संकट, संरक्षण के नाम पर आधुनिक निर्माण से पाकिस्तान को यूनेस्को की सख्त फटकार

    विश्व धरोहर तक्षशिला पर मंडराया संकट, संरक्षण के नाम पर आधुनिक निर्माण से पाकिस्तान को यूनेस्को की सख्त फटकार

    नई दिल्ली । विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण को लेकर पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवालों के घेरे में आ गया है। प्राचीन तक्षशिला में संरक्षण कार्यों के दौरान आधुनिक निर्माण सामग्री और तकनीकों के उपयोग पर संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक संस्था यूनेस्को ने गंभीर आपत्ति जताई है। संस्था ने स्पष्ट किया है कि यदि विवादित निर्माण कार्यों को तत्काल नहीं रोका गया और पहले किए गए बदलावों को वापस नहीं लिया गया, तो तक्षशिला को विश्व धरोहर सूची से हटाने तक की कार्रवाई की जा सकती है।

    तक्षशिला भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे महत्वपूर्ण प्राचीन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में गिनी जाती है। यह स्थल वैदिक, बौद्ध और प्राचीन भारतीय सभ्यता के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां विभिन्न कालखंडों के नगरों, मठों, धार्मिक स्थलों और पुरातात्विक अवशेषों का विशाल समूह मौजूद है, जो सदियों पुराने शहरी विकास और सांस्कृतिक इतिहास की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है।

    यूनेस्को की आपत्ति उन संरक्षण कार्यों को लेकर है जिनमें ऐतिहासिक संरचनाओं की मरम्मत के दौरान आधुनिक सीमेंट, नई चिनाई और अतिरिक्त निर्माण का उपयोग किया गया। संस्था का मानना है कि इस प्रकार के हस्तक्षेप से स्मारकों की मौलिकता और ऐतिहासिक स्वरूप प्रभावित होता है। अंतरराष्ट्रीय संरक्षण मानकों के अनुसार किसी भी विश्व धरोहर स्थल पर मरम्मत या संरक्षण का कार्य मूल निर्माण शैली और पारंपरिक तकनीकों के अनुरूप होना चाहिए।

    जानकारी के अनुसार तक्षशिला परिसर के दो प्रमुख पुरातात्विक स्थलों पर किए गए निर्माण कार्यों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता व्यक्त की गई। निरीक्षण के दौरान ऐसे बदलाव सामने आए जिनमें पुरानी दीवारों के स्थान पर नई दीवारें तैयार करना, उनकी ऊंचाई बढ़ाना तथा आधुनिक सामग्री का उपयोग शामिल बताया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के निर्माण से ऐतिहासिक संरचनाओं की प्रामाणिकता और सांस्कृतिक महत्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

    यूनेस्को ने पाकिस्तान से स्पष्ट रूप से कहा है कि संबंधित निर्माण कार्यों को तुरंत रोका जाए और जिन हिस्सों में आधुनिक हस्तक्षेप किया गया है, उनकी समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। संस्था ने यह भी संकेत दिया है कि यदि निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया तो तक्षशिला को संकटग्रस्त विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया जा सकता है। स्थिति में सुधार नहीं होने पर विश्व धरोहर का दर्जा वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि विश्व धरोहर स्थलों का संरक्षण केवल संरचनाओं को बचाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि उनके मूल स्वरूप, ऐतिहासिक संदर्भ और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक होता है। आधुनिक निर्माण सामग्री का अनियंत्रित उपयोग किसी भी प्राचीन स्मारक की ऐतिहासिक विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय संरक्षण सिद्धांत अत्यंत सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।

    तक्षशिला लंबे समय से इतिहास, पुरातत्व और सांस्कृतिक अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां स्थित अवशेष भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीन शिक्षा, व्यापार, धर्म और नगर नियोजन की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं। ऐसे में संरक्षण कार्यों में अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन केवल औपचारिक आवश्यकता नहीं, बल्कि इस वैश्विक धरोहर की ऐतिहासिक पहचान और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसके संरक्षण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है।

  • ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले ऐप पर शिकंजा, ब्लूटूथ के जरिए बैटरी कंट्रोल के दुरुपयोग के बाद सरकार ने उठाया बड़ा कदम

    ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले ऐप पर शिकंजा, ब्लूटूथ के जरिए बैटरी कंट्रोल के दुरुपयोग के बाद सरकार ने उठाया बड़ा कदम


    नई दिल्ली। ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा और डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग को लेकर सामने आए मामलों के बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ऐसे मोबाइल ऐप, जिनके जरिए ब्लूटूथ समर्थित ई-रिक्शा बैटरियों को दूर से नियंत्रित किए जाने की आशंका जताई गई थी, उन्हें प्रमुख ऐप स्टोर से हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और तकनीकी खामियों के संभावित दुरुपयोग पर रोक लगाना है।

    हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल हुए थे, जिनमें दावा किया गया कि कुछ लोग मोबाइल ऐप के माध्यम से चलते हुए ई-रिक्शा की बैटरी से कनेक्ट होकर वाहन को अचानक बंद कर दे रहे हैं। इन वीडियो ने ई-रिक्शा चालकों, बैटरी डीलरों और इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं के बीच सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी थी। कई मामलों में चालक बीच सड़क पर वाहन बंद हो जाने के कारण असहाय नजर आए और उन्हें ई-रिक्शा को धक्का देकर सुरक्षित स्थान तक ले जाना पड़ा।

    घटनाओं के सामने आने के बाद संबंधित विभागों ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया। प्रारंभिक स्तर पर तकनीकी जांच शुरू की गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि संबंधित मोबाइल ऐप वास्तव में किस प्रकार कार्य करते हैं और उनके फीचर्स का दुरुपयोग किस सीमा तक संभव है। जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि ये ऐप ब्लूटूथ तकनीक के माध्यम से सीमित दूरी के भीतर मौजूद संगत लिथियम बैटरियों से वायरलेस तरीके से जुड़ सकते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे ऐप मूल रूप से बैटरी की स्थिति पर निगरानी रखने के लिए विकसित किए जाते हैं। इनके माध्यम से बैटरी का वोल्टेज, तापमान, करंट और अन्य तकनीकी जानकारी देखी जा सकती है, जिससे बैटरी की कार्यक्षमता और रखरखाव में सुविधा मिलती है। हालांकि यदि सुरक्षा मानकों को पर्याप्त रूप से लागू नहीं किया जाए तो इसी नियंत्रण प्रणाली का गलत इस्तेमाल कर बैटरी के संचालन को प्रभावित किया जा सकता है, जिससे वाहन अचानक रुक सकता है।

    सरकार ने इसी संभावित खतरे को देखते हुए संबंधित ऐप को सार्वजनिक प्लेटफॉर्म से हटाने की प्रक्रिया शुरू कराई है। अधिकारियों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या के साथ साइबर सुरक्षा और डिजिटल नियंत्रण प्रणाली की मजबूती भी उतनी ही आवश्यक है। यदि बैटरी प्रबंधन प्रणाली में पर्याप्त सुरक्षा नहीं होगी तो भविष्य में इस प्रकार के मामलों की पुनरावृत्ति हो सकती है।

    तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों में प्रयुक्त बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत एन्क्रिप्शन, सुरक्षित प्रमाणीकरण और नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट जैसी सुविधाओं से लैस किया जाना चाहिए। इससे अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा बैटरी तक पहुंच बनाने और नियंत्रण हासिल करने की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है। निर्माता कंपनियों को भी अपने सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर सुरक्षा मानकों की समय-समय पर समीक्षा करनी होगी।

    ई-रिक्शा देश के अनेक शहरों में सार्वजनिक परिवहन का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं और लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। ऐसे में उनकी सुरक्षा से जुड़ी किसी भी तकनीकी कमजोरी को समय रहते दूर करना आवश्यक माना जा रहा है। सरकार की ताजा कार्रवाई को इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में चालकों और यात्रियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।

  • आम महोत्सव में दिखेगी स्वाद, तकनीक और निर्यात की नई तस्वीर, किसानों से लेकर बच्चों तक के लिए होंगे विशेष आकर्षण, यूपी की आम अर्थव्यवस्था बनेगी चर्चा का केंद्र

    आम महोत्सव में दिखेगी स्वाद, तकनीक और निर्यात की नई तस्वीर, किसानों से लेकर बच्चों तक के लिए होंगे विशेष आकर्षण, यूपी की आम अर्थव्यवस्था बनेगी चर्चा का केंद्र

    नई दिल्ली। आम केवल स्वाद का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की कृषि, बागवानी और निर्यात अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा भी बन चुका है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए आयोजित होने वाले आम महोत्सव में किसानों, बागवानों, कृषि विशेषज्ञों, व्यापारियों और आम प्रेमियों को एक ही मंच पर जोड़ने की तैयारी की गई है। इस आयोजन में आम की आधुनिक खेती, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, अंतरराष्ट्रीय निर्यात, बाजार प्रबंधन और नई तकनीकों पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही बच्चों के लिए आम खाने की प्रतियोगिता जैसे मनोरंजक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

    महोत्सव के दौरान कृषि विशेषज्ञ आम की बागवानी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन देंगे। इसमें पौधों के वैज्ञानिक प्रबंधन, उन्नत किस्मों का चयन, समय पर कटाई, कीट एवं रोग नियंत्रण, फलों की गुणवत्ता बनाए रखने और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त करने की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा होगी। विशेषज्ञ किसानों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने के व्यावहारिक उपाय भी बताएंगे।

    उत्तर प्रदेश देश में आम उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां की जलवायु और मिट्टी कई प्रसिद्ध किस्मों के लिए उपयुक्त है। राज्य के दशहरी, लंगड़ा, चौसा, रटौल, बॉम्बे ग्रीन और गौरजीत जैसे आम देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। विशेष रूप से मलिहाबाद का दशहरी अपनी मिठास, सुगंध और रेशारहित गूदे के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय है, जबकि वाराणसी का लंगड़ा और सहारनपुर का चौसा भी निर्यात बाजार में लगातार मांग बनाए हुए हैं।

    राज्य में आम के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक पैक हाउस, प्रसंस्करण इकाइयों और गुणवत्ता परीक्षण सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप फलों की पैकिंग और ट्रीटमेंट के कारण उत्तर प्रदेश से कई देशों में बड़ी मात्रा में आम और आम उत्पादों का निर्यात हो रहा है। भविष्य में जेवर क्षेत्र में प्रस्तावित फ्रूट टेस्टिंग एवं ट्रीटमेंट सेंटर से निर्यात प्रक्रिया को और अधिक गति मिलने की उम्मीद है। किसानों को फ्रूट बैग वितरण और पुराने बागों के पुनर्जीवन के लिए दी जा रही सब्सिडी जैसी योजनाएं भी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    आम महोत्सव में विभिन्न किस्मों की विशेषताओं को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा। दशहरी अपनी सुगंध और मिठास के लिए प्रसिद्ध है, जबकि लंगड़ा का खट्टा-मीठा स्वाद इसे अलग पहचान देता है। चौसा अपनी रसीली बनावट के कारण पसंद किया जाता है और रटौल अपनी विशिष्ट खुशबू के लिए जाना जाता है। बॉम्बे ग्रीन और गौरजीत जैसी किस्में भी अपने स्वाद और समय से पहले पकने की विशेषता के कारण किसानों और उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय हैं।

    महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण जापान की प्रसिद्ध मियाजाकी किस्म भी होगी, जिसे दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिना जाता है। पकने पर इसका रंग गहरा लाल और बैंगनी हो जाता है तथा इसका गूदा पूरी तरह रेशारहित होता है। इसमें प्राकृतिक शर्करा की मात्रा सामान्य किस्मों की तुलना में अधिक होती है, जिससे इसका स्वाद अत्यंत मीठा माना जाता है। उत्तर प्रदेश के कुछ किसानों ने भी इसकी सफल खेती शुरू कर नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और निर्यात उन्मुख खेती के माध्यम से भारत का आम उद्योग आने वाले वर्षों में वैश्विक बाजार में और अधिक मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।