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  • LPG संकट के बीच एक और राहत की खबर… भारत के नौंवे जहाज ने भी पार किया होर्मुज

    LPG संकट के बीच एक और राहत की खबर… भारत के नौंवे जहाज ने भी पार किया होर्मुज


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में एलपीजी (LPG) की कमी के बीच बड़ी राहत की खबर है। ईरान युद्ध के बीच होर्मुज (Hormuz) से भारत के 9वें टैंकर को निकले की इजाजत मिल गई है। ‘ग्रीन आशा’ नाम का भारतीय झंडे वाला यह पोत बड़ी मात्रा में एलपीजी लेकर भारत आ रहा है। इससे पहले 3 अप्रैल को ‘ग्रीन सांवी’ को होर्मुज से निकलने की इजाजत मिली थी। इससे 46 हजार टन एलपीजी भारत पहुंच रही है। इससे कहा जा सकता है कि जल्द ही भारत में एलपीजी की किल्लत दूर होने वाली है।


    एक और एलपीजी टैंकर कर रहा इंतजार

    रिपोर्ट के मुताबिक भारत का एक और पोत ‘जग विक्रम’ अभी परमीशन का इंतजार कर रहा है। ये भी टैंकर होर्मुज से पहले ही रुककर इजाजत का इंतजार करते हैं। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इन्हें पास कराया जाता है। कच्चे तेल और एलपीजी वाले पोतों को प्राथमिकता दी जाती है। ईरान ने स्पष्ट कह दिया है कि भारत के टैंकरों को होर्मुज से निकलने की इजाजत दी जाएगी। इसके अलावा अमेरिका और इजरायल का साथ देने वाले देशों के लिए होर्मुज बंद माना जाए।

    इससे पहले BW TYR टैंकर मुंबई पहुंचा है। शिपिंग महानिदेशालय की रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज के पास अभी 16 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। इनमें से पांच शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के हैं। ओमान की खाड़ी , अदन की खाड़ी और लाल सागर में भी कुछ भारतीय जहाज मौजूद हैं।


    खाड़ी में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक

    खाड़ी इलाकों में भारतीय नाविकों की संख्या भी काफी ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस क्षेत्र में भारत के कम से कम 20 हजार 500 नाविक हैं। इनमें से 504 नाविक ही भारतीय शिप पर हैं। 3 अप्रैल को अलग-अलग शिपिंग कंपनियों द्वारा 1130 नाविकों को सुरक्षित निकाला गया है। भारत ईरान की सरकार के साथ कूटनीतिक वार्ता भी कर रहा है। ईरान का भी रुख भारत के प्रति बेहद नरम है।

    डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को होर्मुज खोलने के लिए चेतावनी दे रहे हैं। ट्रंप ने कहा है कि तेहरान में एक ‘भीषण हमले’ में ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों को ‘खत्म’ कर दिया गया है। उन्होने कहा कि अगर ईरान अब भी नहीं मानता है तो ऐसे अभियान चलते रहेंगे। उन्होंने कहा, “याद रखें जब मैंने ईरान को समझौता करने या होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए दस दिन का समय दिया था। अब समय खत्म हो रहा है-48 घंटे बचे हैं, इसके बाद उन पर चौतरफा आफत बरसेगी।”

  • ईरान संकट के बीच MSME को री-फाइनेंस का प्रस्ताव… CII ने पेश किया 20 सूत्रीय एजेंडा

    ईरान संकट के बीच MSME को री-फाइनेंस का प्रस्ताव… CII ने पेश किया 20 सूत्रीय एजेंडा


    नई दिल्ली।
    ईरान संकट (Iran Crisis) का भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) से लेकर आम आदमी तक पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए उद्योग निकाय भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) (Industry body Confederation of Indian Industry – CII) ने रविवार को एक 20 सूत्रीय एजेंडा पेश किया। इसमें आरबीआई की ओर से सूक्ष्म, लघु एवं मझौले उद्यमों (एमएसएमई-MSME) और अन्य प्रभावित क्षेत्रों के लिए एक विशेष पुनर्वित्त (री-फाइनेंस) खिड़की स्थापित करना भी शामिल है। इससे बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को उत्पादक क्षेत्रों को उचित लागत पर कर्ज देना जारी रखने में मदद मिलेगी।

    उद्योग निकाय ने सुझाव दिया कि वित्त मंत्रालय कोविड महामारी के दौरान लागू की गई योजना की तर्ज पर एक समयबद्ध संघर्ष से जुड़ी आपातकालीन ऋण सुविधा गारंटी योजना (सीएल-ईसीएलजीएस) शुरू कर सकता है। इसकी मदद से एमएसएमई, निर्यातकों और गैस पर निर्भर क्षेत्रों को सरकारी गारंटी के जरिये कार्यशील पूंजी दी जा सकेगी।


    सीआईआई के एजेंडे में क्या-क्या?

    साथ ही, एमएसएमई के लिए तीन महीने तक ऋण स्थगन जैसे उपाय भी किए जा सकते हैं। सीआईआई ने अपने एजेंडे में कहा, बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता के दौरान प्राथमिक बाजारों में विदेशी पूंजी प्रवाह बनाए रखने के लिए वित्त मंत्रालय विदेशी निवेशकों को दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) से अस्थायी छूट दे सकता है। इसके लिए पात्र होल्डिंग अवधि को दो से बढ़ाकर तीन साल किया जा सकता है।

    यह नपातुला प्रोत्साहन स्थिरता का संकेत देगा और धैर्यवान पूंजी को प्रोत्साहित करेगा। साथ ही, किसी भी तरह की उथल-पुथल के कारण पैदा होने वाली सुरक्षित ठिकाने की ओर भागने की भावना को कम करने में भी मदद करेगा। भारतीय उद्योग परिसंघ ने कहा, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) मानदंडों पर पुनर्विचार किया जा सकता है, ताकि बैंक बाहरी व्यवधानों के दौरान क्षेत्र विशिष्ट तनाव के प्रति अधिक लचीले ढंग से प्रतिक्रिया दे सकें। अन्य सुझावों में बिजली शुल्कों में अस्थायी राहत, नकद ऋण सीमा में 20 फीसदी तक की वृद्धि और लोन प्रोसेसिंग शुल्क में छूट शामिल है। सीआईआई ने लंबित जीएसटी रिफंड और शुल्क वापसी दावों को तेजी से निपटाने का भी आग्रह किया।


    सभी भारतीय नाविक सुरक्षित

    अभी 17 भारतीय जहाज और 460 नाविक पश्चिमी फारस की खाड़ी में मौजूद हैं। इनमें सवार सभी नाविक सुरक्षित हैं। 1,479 से अधिक नाविक सुरक्षित वापस लाए गए हैं। 345 भारतीय मछुआरे ईरान से सुरक्षित लौट कर शनिवार को चेन्नई पहुंच गए। उड़ान सेवाएं धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं। 28 फरवरी से अब तक 7,02,000 से अधिक यात्री भारत लौट चुके हैं।

  • केदारनाथ के लिए इस दिन शुरू होगी हेली सेवा बुकिंग… जानिए फुल डिटेल

    केदारनाथ के लिए इस दिन शुरू होगी हेली सेवा बुकिंग… जानिए फुल डिटेल


    देहरादून।
    उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (Uttarakhand Civil Aviation Development Authority- यूकाडा) ने बताया कि केदारनाथ (Kedarnath) के लिए हेली सेवा बुकिंग ( Heli Service Booking) 10 से 12 अप्रैल के बीच शुरू होगी। यूकाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ.आशीष चौहान ने बताया कि इस बार यात्रा व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने को कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।


    टिकटों की कालाबाजारी रोकने पर जोर

    चौहान ने रविवार को बताया, हेली सेवा के टिकटों की कालाबाजारी रोकने और व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए 100% ऑनलाइन टिकटिंग की जाएगी। बुकिंग का जिम्मा इस बार भी आईआरसीटीसी के पास ही रहेगा। शुरू में टिकट लगभग 20-20 दिनों के स्लॉट (चरणबद्ध तरीके) में खोले जाएंगे। इस के बाद मौसम की स्थिति और यात्रियों की भीड़ का आकलन करते हुए आगे के चरणों की बुकिंग खोली जाएगी।


    भुगतान प्रक्रिया में सुधार

    यूकाडा व आईआरसीटीसी की हालिया बैठक में स्पष्ट किया जा चुका है कि कुल आठ रूटों पर हेली सेवाओं के लिए अलग-अलग ऑपरेटरों का चयन किया गया है। इनमें चिप्सन एविएशन, राजस एयरो स्पोर्ट्स एंड एडवेंचर, थम्बी एविएशन, पिलग्रिमेज एविएशन, यूनाइटेड हेली चार्टर्स प्राइवेट लिमिटेड,हिमालयन हेली सर्विसेज, ट्रांसभारत एविएशन और एरो एयरक्राफ्ट शामिल हैं। इनमें से तीन, चारधाम रूट पर पहली बार सेवाएं देंगी। इधर, चौहान ने निर्देश दिए हैं कि ऑपरेटरों के भुगतान में देरी न की जाए ताकि हेली सेवाओं के संचालन में कोई बाधा न आए।


    रिफंड और शिकायतों पर सख्त रुख

    पिछली बार यात्रा के दौरान कुछ मामलों में यात्रियों को हेली सेवा का रिफंड मिलने में देरी को यूकाडा ने गंभीरता से लिया है। इसके चलते यूकाडा ने इस बार क्लेम व्यवस्था को आसान बनाने का निर्णय लिया है। चौहान ने आश्वस्त किया कि ऐसे मामलों में अब से जिन ऑपरेटरों के खिलाफ शिकायतें मिलेंगी, उन्हें नोटिस जारी कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यात्रियों की सुविधा के लिए एडवाइजरी भी जारी करेंगे, जिससे उन्हें नियमों के साथ अपने अधिकारों की पूर्व जानकारी रहे।


    किराया

    यूकाडा द्वारा तय नई दरों के अनुसार इस वर्ष केदारनाथ हेली सेवा के किराए में मिश्रित बदलाव देखने को मिल रहा है। गुप्तकाशी से आने-जाने का किराया 12,154 रुपये प्रति यात्री तय किया गया है, जो पिछले साल के 12,444 रुपये के मुकाबले 290 रुपये कम है। वहीं, फाटा से किराया बढ़ाकर 9,680 रुपये कर दिया गया है, जो पिछले वर्ष के 8,842 रुपये से 838 रुपये अधिक है। दूसरी ओर, सिरसी रूट पर यात्रियों को बड़ी राहत मिली है—इस बार किराया 6,086 रुपये रखा गया है, जो पिछले साल के 8,839 रुपये से 2,753 रुपये कम है। इन सभी किरायों पर जीएसटी और आईआरसीटीसी पोर्टल का ऑनलाइन बुकिंग शुल्क अलग से देना होगा।

  • ईस्टर के मौके पर देश के शीर्ष नेताओं का संदेश, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने दी बधाई

    ईस्टर के मौके पर देश के शीर्ष नेताओं का संदेश, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने दी बधाई


    नई दिल्ली।ईस्टर के पावन अवसर पर देशभर में उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। इस खास दिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और इस पर्व के आध्यात्मिक महत्व को साझा किया। नेताओं ने अपने संदेशों में शांति, प्रेम और भाईचारे की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि ईस्टर आशा, नए जीवन और सकारात्मकता का प्रतीक है। उन्होंने कामना की कि यह पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए। साथ ही उन्होंने यीशु मसीह की शिक्षाओं को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन हमें दया, करुणा और एकता का मार्ग दिखाता है। प्रधानमंत्री ने लोगों से इन मूल्यों को अपनाकर समाज में सद्भाव बढ़ाने की अपील की।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी ईस्टर की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन यीशु मसीह के पुनरुत्थान की याद दिलाता है, जो सत्य और प्रेम की जीत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें त्याग, क्षमा और करुणा जैसे मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करता है। राष्ट्रपति ने देशवासियों से शांति और भाईचारे को बढ़ावा देने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी अपने संदेश में कहा कि ईस्टर का पर्व नए आरंभ, आस्था और उम्मीद का संदेश देता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह दिन सभी के जीवन में खुशियां, शांति और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आएगा।

    क्या है ईस्टर का महत्व?

    ईसाई धर्म में ईस्टर सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है, जिसे यीशु मसीह के पुनर्जीवित होने की स्मृति में मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार, रोमन शासन द्वारा सूली पर चढ़ाए जाने के तीन दिन बाद यीशु मसीह मृतकों में से जीवित हो उठे थे। यह घटना पाप और मृत्यु पर विजय का प्रतीक मानी जाती है।

    ईस्टर ‘होली वीक’ का अंतिम और सबसे प्रमुख दिन होता है। इस सप्ताह में पाम संडे, मौंडी थर्सडे और गुड फ्राइडे जैसे महत्वपूर्ण दिन शामिल होते हैं, जो यीशु मसीह के जीवन की अहम घटनाओं को दर्शाते हैं।

    ईस्टर एग्स की परंपरा

    इस पर्व का एक खास आकर्षण ‘ईस्टर एग्स’ भी होते हैं। अंडों को नए जीवन और आशा का प्रतीक माना जाता है। परंपरागत रूप से इन्हें रंग-बिरंगे या लाल रंग में सजाया जाता है, जो त्याग और पुनर्जन्म का संकेत देते हैं।

  • बैंकिंग सेक्टर में नौकरियों का सुनहरा अवसर, 1000 पदों पर निकली भर्ती, आवेदन प्रक्रिया शुरू

    बैंकिंग सेक्टर में नौकरियों का सुनहरा अवसर, 1000 पदों पर निकली भर्ती, आवेदन प्रक्रिया शुरू

    नई दिल्ली। सरकारी बैंक में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए पंजाब एंड सिंध बैंक ने लोकल बैंक ऑफिसर के पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। यह बैंक भारत सरकार के स्वामित्व वाला संस्थान है, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

    जारी अधिसूचना के अनुसार, इस भर्ती के तहत कुल 1,000 पद भरे जाएंगे। इन पदों के लिए देश के अलग-अलग राज्यों में वैकेंसी निर्धारित की गई है। सबसे ज्यादा 200 पद उत्तर प्रदेश में हैं, जबकि गुजरात में 125 और पंजाब में 100 पदों पर भर्ती होगी। इसके अलावा छत्तीसगढ़ और ओडिशा में 80-80, तमिलनाडु में 65, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में 60-60 पद, असम में 50, तेलंगाना में 30, पश्चिम बंगाल में 30, हिमाचल प्रदेश में 20, अरुणाचल प्रदेश में 15, झारखंड और केरल में 10-10 और नागालैंड में 5 पद शामिल हैं।

    इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की आयु 18 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए। हालांकि, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट दी जाएगी।

    शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से ग्रेजुएशन करने वाले उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया दो चरणों में होगी। पहले लिखित परीक्षा और उसके बाद इंटरव्यू। अंतिम चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा।

    चयनित उम्मीदवारों को आकर्षक वेतन दिया जाएगा। इस पद पर नियुक्ति मिलने के बाद उम्मीदवारों को 48,480 रुपए से लेकर 85,920 रुपए तक का मासिक वेतन मिलेगा।

    आवेदन शुल्क भी निर्धारित किया गया है। सामान्य, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को 850 रुपए के साथ लागू टैक्स और पेमेंट गेटवे शुल्क देना होगा। वहीं, एससी, एसटी और पीडब्ल्यूडी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए शुल्क 100 रुपए रखा गया है, जिस पर अतिरिक्त टैक्स और चार्ज लागू होंगे।

    इच्छुक और योग्य उम्मीदवार ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 अप्रैल 2026 तय की गई है। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन फॉर्म भरने के बाद उसका प्रिंटआउट भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें।

    यह भर्ती उन युवाओं के लिए शानदार अवसर है, जो बैंकिंग सेक्टर में अपना करियर बनाना चाहते हैं।

  • केरल में सियासी हलचल तेज! अमित शाह के रोड शो से पहले बेपोर में बढ़ी हलचल

    केरल में सियासी हलचल तेज! अमित शाह के रोड शो से पहले बेपोर में बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली।केरल के बेपोर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित रोड शो से पहले सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। रविवार को होने वाले इस बड़े राजनीतिक कार्यक्रम को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं और स्थानीय स्तर पर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। सड़कें सजाई जा रही हैं, कार्यकर्ताओं की भीड़ जुट रही है और जगह-जगह स्वागत की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। ऐसे में बेपोर एक तरह से राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है।

    स्थानीय लोगों में भी इस कार्यक्रम को लेकर जबरदस्त उत्सुकता है। कई लोगों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे अमित शाह के स्वागत के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। एक स्थानीय नागरिक ने कहा कि “हमारे नेता अमित शाह यहां आ रहे हैं, यह हमारे लिए गर्व की बात है। बड़ी संख्या में लोग उनके रोड शो में शामिल होने के लिए तैयार हैं।” वहीं, कुछ भाजपा समर्थकों ने उम्मीद जताई कि अगर भारतीय जनता पार्टी को राज्य में मौका मिलता है तो विकास की रफ्तार तेज होगी और राजनीतिक बदलाव देखने को मिलेगा।

    दिनभर रहेंगे व्यस्त, कई कार्यक्रमों में लेंगे हिस्सा

    अमित शाह का कार्यक्रम केवल बेपोर तक सीमित नहीं रहेगा। रोड शो के बाद वे एर्नाकुलम के कुन्नाथुनाद क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित करेंगे, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता से संवाद करेंगे। इसके बाद शाम को तिरुवनंतपुरम के कट्टकड़ा इलाके में उनकी एक और बड़ी जनसभा प्रस्तावित है। दिन के अंत में वे थंपानूर में प्रवासी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक भी करेंगे। इस तरह उनका पूरा दिन राजनीतिक गतिविधियों और जनसंपर्क कार्यक्रमों से भरा रहेगा।

    भाजपा का चुनावी अभियान तेज

    इसी बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी केरल में चुनावी अभियान को धार देने पहुंचे हैं। उन्होंने तिरुवनंतपुरम में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्र सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में पिछले 11 वर्षों में शासन व्यवस्था और राजनीतिक संस्कृति में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकारें जनहित, जवाबदेही और विकास के मुद्दों पर काम करती हैं, जिससे अन्य दलों को भी अपनी कार्यशैली बदलनी पड़ी है।

    नड्डा ने यह भी कहा कि पहले की राजनीति में विभाजन और तुष्टीकरण का बोलबाला था, लेकिन अब विकास-केन्द्रित राजनीति का दौर है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे इस संदेश को आम जनता तक पहुंचाएं और राज्य में पार्टी को मजबूत करें।

    बदलाव की उम्मीद या सियासी रणनीति?

    केरल में पारंपरिक रूप से मजबूत राजनीतिक दलों के बीच भाजपा अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में अमित शाह और जेपी नड्डा के दौरे को पार्टी की रणनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है। बेपोर में उमड़ा उत्साह यह संकेत जरूर देता है कि भाजपा राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

  • समुद्री जीवन की लाइफलाइन ‘कोरल रीफ’ पर संकट, समझिए कोरल ब्लीचिंग का असर

    समुद्री जीवन की लाइफलाइन ‘कोरल रीफ’ पर संकट, समझिए कोरल ब्लीचिंग का असर


    नई दिल्ली।समुद्र की गहराइयों में मौजूद कोरल रीफ यानी मूंगा चट्टानें प्रकृति की सबसे अद्भुत और जीवंत संरचनाओं में गिनी जाती हैं। इन्हें ‘समुद्र का वर्षावन’ भी कहा जाता है, क्योंकि ये बेहद कम क्षेत्र में फैली होने के बावजूद समुद्री जैव-विविधता का बड़ा आधार हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, दुनिया के महासागरों के सिर्फ 1 प्रतिशत हिस्से में मौजूद ये रीफ करीब 25 प्रतिशत समुद्री जीवों को आश्रय, भोजन और सुरक्षा प्रदान करती हैं। छोटे-छोटे जीवों यानी पॉलिप्स द्वारा हजारों साल में बनने वाली ये संरचनाएं समुद्र की पारिस्थितिकी को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।

    कोरल रीफ केवल जैव-विविधता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। ये चट्टानें समुद्री तूफानों और चक्रवातों की तीव्रता को कम कर तटों को क्षरण से बचाती हैं। इसके अलावा, मत्स्य पालन, पर्यटन और शोध गतिविधियों के जरिए ये वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देती हैं। ऑस्ट्रेलिया में स्थित ग्रेट बैरियर रीफ दुनिया की सबसे बड़ी कोरल रीफ है, जो हजारों समुद्री प्रजातियों का घर है और लाखों लोगों की आजीविका का आधार बनी हुई है।

    क्या है कोरल और रीफ में अंतर?

    वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो ‘रीफ’ समुद्र तल से ऊपर उठी किसी भी संरचना को कहा जाता है, जबकि ‘कोरल’ सूक्ष्म जीव होते हैं जो कैल्शियम कार्बोनेट का ढांचा बनाते हैं। इन कोरल के समूह को ‘कोरल कॉलोनी’ कहा जाता है और जब ये बड़े पैमाने पर संरचना बनाते हैं, तो उसे कोरल रीफ कहा जाता है। कोरल मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—कठोर और कोमल। कठोर कोरल ही रीफ का मजबूत ढांचा तैयार करते हैं।

    क्यों खतरनाक है ‘कोरल ब्लीचिंग’?

    आज इन खूबसूरत संरचनाओं पर सबसे बड़ा खतरा कोरल ब्लीचिंग का मंडरा रहा है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें समुद्र का तापमान बढ़ने पर कोरल अपने अंदर मौजूद ‘जूक्सैन्थेली’ नामक शैवाल को बाहर निकाल देते हैं। यही शैवाल कोरल को रंग और पोषण देता है। इसके निकलने से कोरल का रंग सफेद हो जाता है और वह कमजोर पड़ जाता है। यदि तापमान लंबे समय तक अधिक बना रहे, तो कोरल की मृत्यु भी हो सकती है।

    हाल के वर्षों में यह समस्या तेजी से बढ़ी है। 2023 से 2025 के बीच हुई वैश्विक ब्लीचिंग घटना ने दुनिया के लगभग 84 प्रतिशत कोरल रीफ को प्रभावित किया, जो अब तक की सबसे गंभीर स्थिति मानी जा रही है। इसके अलावा प्रदूषण, समुद्री गाद और जलवायु परिवर्तन भी इस संकट को और गहरा कर रहे हैं।

    क्यों जरूरी है संरक्षण?

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोरल रीफ खत्म होते हैं, तो इसका असर सिर्फ समुद्री जीवन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तटीय आबादी, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। इसलिए इनका संरक्षण बेहद जरूरी है। समुद्र के इस ‘जीवंत खजाने’ को बचाने के लिए जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण, प्रदूषण कम करना और सतत विकास के उपाय अपनाना समय की मांग है।

  • मंदिर में चक्कर लगाने का विज्ञान! क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा के पीछे छिपा रहस्य

    मंदिर में चक्कर लगाने का विज्ञान! क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा के पीछे छिपा रहस्य


    नई दिल्ली।मंदिरों में घड़ी की सुई की दिशा में यानी क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा (परिक्रमा) करने की परंपरा सदियों पुरानी है। यह सिर्फ एक धार्मिक रिवाज नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। माना जाता है कि मंदिर का गर्भगृह एक शक्तिशाली ऊर्जा केंद्र होता है, जहां से सकारात्मक ऊर्जा निरंतर प्रवाहित होती रहती है।

    आध्यात्मिक कारण: ऊर्जा से जुड़ने का माध्यम

    हिंदू धर्म में प्रदक्षिणा का अर्थ होता है-ईश्वर को अपने जीवन का केंद्र मानकर उनके चारों ओर घूमना। क्लॉकवाइज दिशा में चलने से देवता हमेशा आपकी दाईं ओर रहते हैं, जिसे शुभ और पवित्र माना गया है।

    इससे मन में श्रद्धा, शांति और सकारात्मकता का संचार होता है। मान्यता है कि इस प्रक्रिया से व्यक्ति की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और वह आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनता है।

    वैज्ञानिक कारण: ऊर्जा प्रवाह के साथ तालमेल

    क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा के पीछे एक वैज्ञानिक सोच भी जुड़ी है। Sadhguru Jaggi Vasudev के अनुसार, उत्तरी गोलार्ध में ऊर्जा का प्रवाह घड़ी की दिशा में होता है।

    इसी कारण मंदिरों में उसी दिशा में परिक्रमा करने से शरीर उस ऊर्जा के साथ तालमेल बैठाता है। इससे मानसिक शांति, शारीरिक स्फूर्ति और बेहतर एकाग्रता प्राप्त होती है।

    यह भी कहा जाता है कि इस दिशा में चलने से शरीर ब्रह्मांडीय ऊर्जा को अधिक प्रभावी तरीके से अवशोषित कर पाता है।

    गीले कपड़ों में प्रदक्षिणा का महत्व

    धर्मशास्त्रों में बताया गया है कि गीले कपड़ों में परिक्रमा करने से ऊर्जा ग्रहण करने की क्षमता बढ़ जाती है। पुराने समय में मंदिरों के पास कुंड या कुएं होते थे, जहां स्नान कर भक्त गीले वस्त्रों में ही प्रदक्षिणा करते थे।

    गीलापन शरीर को ऊर्जा के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है।

    अलग-अलग देवताओं की परिक्रमा संख्या

    शास्त्रों में विभिन्न देवताओं के लिए प्रदक्षिणा की संख्या भी निर्धारित है-

    भगवान गणेश: 3 बार
    भगवान विष्णु: 4 बार
    मां दुर्गा: 1 बार
    भगवान शिव: आधी परिक्रमा (जलधारी तक)
    यह नियम ऊर्जा संतुलन और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर बनाए गए हैं।

    मंदिर में क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा करना केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक ऐसा अभ्यास है जो शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करता है। यह हमें प्राकृतिक ऊर्जा के साथ जोड़कर मानसिक शांति और सकारात्मकता प्रदान करता है।

  • बेंगलुरु में एनएच 44 का डिजाइन खराब, रखरखाव पर भी नहीं दिया जाता ध्यान: किरण मजूमदार-शॉ

    बेंगलुरु में एनएच 44 का डिजाइन खराब, रखरखाव पर भी नहीं दिया जाता ध्यान: किरण मजूमदार-शॉ


    नई दिल्ली। फार्मा कंपनी बायोकॉन लिमिटेड की एग्जीक्यूटिव चेयरमैन किरण मजूमदार-शॉ ने रविवार को एनएच 44 की डिजाइन और रखरखाव को लेकर सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई और कहा कि कई बार शिकायत करने के बाद भी इस मुद्दे का समाधान नहीं किया जा रहा है।

    एनएच 44, बेंगलुरु को होसुर से जोड़ने वाला प्रमुख आईटी कॉरिडोर है।

    उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा, “पूरे देश में एनएचएआई अपने सड़क बुनियादी ढांचे की प्रशंसा करता है, फिर भी देश का प्रमुख आईटी कॉरिडोर एनएच44 (पूर्व में एनएच7) यानी होसुर रोड इतनी घटिया ढंग से डिजाइन किया गया और इसका रखरखाव खराब क्यों है?”

    उन्होंने पोस्ट में आगे लिखा, “ये देखने में बेहद खराब है – डिवाइडर और बैरिकेड्स की हालत बिल्कुल भी ठीक नहीं है और फुटपाथ पर डामर नहीं बिछा है।”

    आगे उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को टैग करते हुए लिखा कि सालों से कई शिकायतें करने के बावजूद, यहां कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

    इसके साथ ही उन्होंने एनएचएआई को टैग करते हुए लिखा, “क्या यही वह रिकॉर्ड है जिसे एनएचएआई गौरवशाली मानता है?”

    इस पहले भी, देश की प्रमुख महिला उद्योगपति में शामिल शॉ ने पिछले साल देश में, विशेषकर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों में, कचरे की बढ़ती समस्या पर गंभीर चिंता जताई थी।

    पिछले साल अक्टूबर में एक एक्स पोस्ट में, उन्होंने इन शहरों की नगरपालिकाओं और राज्य सरकारों की इस मुद्दे के प्रति घोर अज्ञानता और लापरवाही की कड़ी आलोचना की थी। यह समस्या हाल ही में चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है और नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गई है।

    भारत की सबसे धनी महिलाओं में शामिल शॉ पहली पीढ़ी की कारोबारी है और उन्होंने 1978 में बायोफार्मास्युटिकल फर्म बायोकॉन की स्थापना की थी। फोर्ब्स के मुताबिक, उनकी नेटवर्थ करीब 3.2 अरब डॉलर है।

  • नीतीश कुमार 12 अप्रैल को मुख्‍यमंत्री पद से दे सकते हैं इस्तीफा, 14 को नई सरकार बनने की संभावना

    नीतीश कुमार 12 अप्रैल को मुख्‍यमंत्री पद से दे सकते हैं इस्तीफा, 14 को नई सरकार बनने की संभावना


    नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में MLC पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद बिहार में नए मुख्यमंत्री की खोज शुरू हो गई है। बीजेपी की ओर से नए सीएम के लिए सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, नित्यानंद राय और दिलीप जायसवाल के नाम चर्चा में हैं। जेडीयू से निशांत कुमार और विजय चौधरी के नाम सामने आ रहे हैं।

    मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार 12 अप्रैल को CM पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसके बाद 14 अप्रैल तक नए मुख्यमंत्री की शपथ समारोह होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    राजनीतिक गतिविधियां और दिल्ली यात्रा

    सियासी हलचल के बीच बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार अगले सप्ताह 9 अप्रैल को दिल्ली जाएंगे और राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं। इसके बाद वे पटना लौटकर राज्यपाल रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन से मिलकर अपना इस्तीफा सौंपेंगे।

    सुरक्षा और आवास में बदलाव

    मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा जारी रहेगी। गृह विभाग की विशेष शाखा ने आदेश में कहा है कि उन्हें बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट-2000 के तहत सुरक्षा प्रदान की जाएगी। सीएम पद छोड़ने के बाद नीतीश कुमार को वर्तमान में 1 अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास छोड़कर 7 सर्कुलर रोड स्थित बंगले में रहने के लिए जाना होगा।