Category: National

  • भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स स्वास्थ्य बैठक शुरू, 21 देशों के प्रतिनिधि पारंपरिक चिकित्सा और एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली पर करेंगे मंथन

    भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स स्वास्थ्य बैठक शुरू, 21 देशों के प्रतिनिधि पारंपरिक चिकित्सा और एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली पर करेंगे मंथन


    नई दिल्ली । 
    चंडीगढ़ में पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा (टीसीआईएम) पर केंद्रित चार दिवसीय ब्रिक्स बैठक का मंगलवार से शुभारंभ हो गया। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में 21 देशों के स्वास्थ्य मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता और चिकित्सा विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। बैठक का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ बेहतर तरीके से जोड़ना, अनुसंधान को बढ़ावा देना और सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना है।

    सम्मेलन के दौरान पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े वैज्ञानिक अनुसंधान, नियामकीय ढांचे, क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान-प्रदान जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा की जा रही है। भारत का प्रयास है कि सदस्य देशों के अनुभवों और विशेषज्ञता का लाभ साझा मंच पर उपलब्ध हो, जिससे पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली में अधिक प्रभावी स्थान मिल सके।

    बैठक में भाग ले रहे विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में आपसी सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। प्रतिनिधियों का मानना है कि वैज्ञानिक शोध, प्रमाण आधारित चिकित्सा और प्रभावी नियामकीय व्यवस्था के माध्यम से पारंपरिक उपचार पद्धतियों को अधिक विश्वसनीय और व्यापक बनाया जा सकता है। साथ ही इन प्रणालियों को जनस्वास्थ्य सेवाओं का पूरक बनाकर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

    सम्मेलन के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि विभिन्न देशों में पारंपरिक चिकित्सा की अपनी समृद्ध विरासत और विशिष्ट उपचार पद्धतियां मौजूद हैं। योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और अन्य पारंपरिक उपचार प्रणालियों के अनुभवों को साझा करने से सदस्य देशों को एक-दूसरे से सीखने और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों ने इस क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी आवश्यक बताया।

    भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा के लिए एक स्थायी कार्य समूह के गठन का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव पर सदस्य देशों के बीच सकारात्मक चर्चा हुई और इसे आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। माना जा रहा है कि यह कार्य समूह भविष्य में शोध, नीति निर्माण, प्रशिक्षण और सहयोग से जुड़े कार्यक्रमों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    बैठक के पहले दिन पारंपरिक चिकित्सा में क्षमता निर्माण और अनुसंधान पर विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। इस दौरान चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग, नई तकनीकों के उपयोग और स्वास्थ्य सेवाओं में पारंपरिक चिकित्सा की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

    चंडीगढ़ में आयोजित यह सम्मेलन भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सदस्य देशों के बीच अनुसंधान, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग को संस्थागत रूप दिया जाता है, तो इससे वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में पारंपरिक चिकित्सा की स्वीकार्यता और उपयोग दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। सम्मेलन के आगामी सत्रों में स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों और सहयोगी पहलों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

  • '46 वर्षों बाद: अंत नहीं आरंभ'… प्रो. डॉ. अश्विनीकुमार शुक्ल के सम्मान में सजा यादगार समारोह

    '46 वर्षों बाद: अंत नहीं आरंभ'… प्रो. डॉ. अश्विनीकुमार शुक्ल के सम्मान में सजा यादगार समारोह


    उत्तरप्रदेश । उत्तर प्रदेश के बांदा शहर में शिक्षा, साहित्य और राष्ट्रसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रोफेसर (डॉ.) अश्विनीकुमार शुक्ल की सेवानिवृत्ति पर आयोजित अभिनंदन समारोह भावनाओं, सम्मान और प्रेरणा का अनूठा संगम बन गया। तिंदवारी रोड स्थित होटल रॉयल ऑर्बिट में “46 वर्षों बाद : अंत नहीं आरंभ” शीर्षक से आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, साहित्यकारों, सैन्य अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक हस्तियों ने भाग लेकर डॉ. शुक्ल की गौरवपूर्ण सेवाओं को नमन किया।

    डॉ. शुक्ल के सुपुत्र इंजीनियर आशुतोष शुक्ल द्वारा आयोजित इस समारोह में उनके जीवन के विभिन्न आयामों को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि सेवानिवृत्ति किसी कर्मयोगी के जीवन का अंत नहीं, बल्कि नए अध्याय की शुरुआत होती है। शिक्षा, साहित्य और सामाजिक सरोकारों के प्रति डॉ. शुक्ल का समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के पूर्व कला संकायाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. कौशलनाथ उपाध्याय और पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. रंजना उपाध्याय रहे। प्रोफेसर उपाध्याय ने अपने संबोधन में डॉ. शुक्ल की साहित्यिक प्रतिभा, भाषा पर असाधारण पकड़, संपादन कौशल और शिक्षण शैली की सराहना करते हुए उन्हें एक आदर्श शिक्षक, अनुशासित व्यक्तित्व और संवेदनशील साहित्यकार बताया।

    समारोह की अध्यक्षता बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. जगन्नाथ पाठक ने की। उन्होंने कहा कि डॉ. शुक्ल ने अपने ज्ञान, अनुभव और सामाजिक दृष्टि से शिक्षा जगत को समृद्ध किया है। महाराष्ट्र के अमलनेर से आए प्रोफेसर डॉ. सुरेश माहेश्वरी ने उनके साथ बिताए साहित्यिक और शैक्षणिक अनुभव साझा करते हुए उनके रचनात्मक व्यक्तित्व की सराहना की।

    कार्यक्रम का सबसे भावुक और आकर्षक क्षण वह रहा जब डॉ. शुक्ल के 46 वर्षों के जीवन और कार्यों पर आधारित लगभग 20 मिनट की डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की गई। उनके अभिन्न मित्र और सेवानिवृत्त इंजीनियर अरुणकुमार तिवारी द्वारा तैयार इस वृत्तचित्र में भारतीय वायुसेना से लेकर उच्च शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र तक की उनकी प्रेरणादायक यात्रा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। डॉक्यूमेंट्री के दौरान कई अतिथि भावुक भी नजर आए।

    समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और साहित्यकार मधुसूदन दीक्षित द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। मंच संचालन अरुणकुमार तिवारी और मनोज कुमार ‘मृदुल’ ने प्रभावी ढंग से किया। वक्ताओं ने बताया कि डॉ. अश्विनीकुमार शुक्ल ने मात्र 17 वर्ष की आयु में भारतीय वायुसेना में शामिल होकर राष्ट्रसेवा का दायित्व निभाया। लगभग 17 वर्ष 7 माह तक सैन्य सेवा देने के बाद उन्होंने शिक्षा और साहित्य को अपना जीवन समर्पित कर दिया और हजारों विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने का कार्य किया।

    समारोह में भारतीय वायुसेना के उनके पूर्व साथी, शिक्षाविद, अधिवक्ता, प्रशासनिक अधिकारी, साहित्यकार और विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। अंत में आयोजक इंजीनियर आशुतोष शुक्ल और आकांक्षा दीक्षित ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। प्रीतिभोज के साथ संपन्न हुआ यह समारोह केवल एक विदाई कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसे कर्मयोगी के सम्मान का उत्सव बन गया, जिसने अपने 46 वर्षों के सफर से समाज, शिक्षा और साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

  • 14.2 किलो और 19 किलो LPG सिलेंडर की ताजा कीमतें जारी, घरेलू गैस के दाम स्थिर, कमर्शियल रेट भी जानिए

    14.2 किलो और 19 किलो LPG सिलेंडर की ताजा कीमतें जारी, घरेलू गैस के दाम स्थिर, कमर्शियल रेट भी जानिए

    नई दिल्ली । देशभर में रसोई गैस का उपयोग करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए 21 जुलाई को राहत की खबर है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं किया गया है। तेल विपणन कंपनियों की ओर से इस महीने की शुरुआत में जो दरें तय की गई थीं, वही आज भी लागू हैं। ऐसे में घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर की बुकिंग पहले की निर्धारित कीमत पर ही करानी होगी। एलपीजी की कीमतें पेट्रोल और डीजल की तरह प्रतिदिन नहीं बदलतीं, बल्कि सामान्य तौर पर प्रत्येक महीने की पहली तारीख को उनकी समीक्षा की जाती है।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपये बनी हुई है। मुंबई में इसकी कीमत 941.50 रुपये, कोलकाता में 968 रुपये और चेन्नई में 957.50 रुपये है। इसके अलावा चंडीगढ़ में घरेलू सिलेंडर 951.50 रुपये, देहरादून में 961 रुपये, हैदराबाद में 934 रुपये, भुवनेश्वर में 968 रुपये और तिरुवनंतपुरम में 951 रुपये की दर से उपलब्ध है। अलग-अलग राज्यों में कर और स्थानीय शुल्क के कारण कीमतों में कुछ अंतर देखने को मिलता है।

    व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतें भी फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में इसका दाम 2930 रुपये है, जबकि मुंबई में यह 2885.50 रुपये में उपलब्ध है। कोलकाता में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 3082 रुपये और चेन्नई में 3106 रुपये निर्धारित है। चंडीगढ़ में इसकी कीमत 2954.50 रुपये, देहरादून में 2983.50 रुपये, हैदराबाद में 2052.50 रुपये, भुवनेश्वर में 3115 रुपये और तिरुवनंतपुरम में 2970.50 रुपये बनी हुई है। इन दरों का असर होटल, रेस्तरां, कैटरिंग और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की परिचालन लागत पर पड़ता है।

    घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर का उपयोग अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किया जाता है। 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू सिलेंडर मुख्य रूप से घरों में भोजन पकाने के लिए इस्तेमाल होता है, जबकि 19 किलोग्राम का कमर्शियल सिलेंडर होटल, रेस्तरां, ढाबों और अन्य व्यावसायिक संस्थानों में अधिक मात्रा में गैस की आवश्यकता को पूरा करता है। दोनों श्रेणियों की कीमतें अलग-अलग निर्धारित की जाती हैं और इनमें बदलाव बाजार की परिस्थितियों तथा अंतरराष्ट्रीय एलपीजी कीमतों के आधार पर किया जाता है।

    इस महीने की शुरुआत में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में संशोधन किया गया था, जबकि घरेलू सिलेंडर के दाम यथावत रखे गए थे। इससे घरेलू उपभोक्ताओं को किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना नहीं करना पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू गैस की कीमतों में स्थिरता से आम परिवारों के मासिक बजट पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जबकि व्यावसायिक क्षेत्र की लागत पर कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों का सीधा असर दिखाई देता है।

    अब उपभोक्ताओं की निगाहें अगले मूल्य संशोधन पर टिकी हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव होता है, तो आगामी महीने की शुरुआत में नई दरें घोषित की जा सकती हैं। फिलहाल 21 जुलाई को देशभर में घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर निर्धारित मौजूदा कीमतों पर ही उपलब्ध हैं और उपभोक्ताओं को किसी अतिरिक्त बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

  • कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का जन्मदिन आज, सत्ता और विपक्ष के नेताओं ने दी बधाई; दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का जन्मदिन आज, सत्ता और विपक्ष के नेताओं ने दी बधाई; दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना

    नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे आज अपना 84वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सत्ता और विपक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सफल सार्वजनिक जीवन की कामना की। विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से आए शुभकामना संदेशों ने लोकतांत्रिक परंपराओं और राजनीतिक शिष्टाचार की एक सकारात्मक तस्वीर भी प्रस्तुत की।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की बधाई देते हुए कहा कि वह उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं और ईश्वर से उनके दीर्घायु तथा उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हैं। प्रधानमंत्री के संदेश के बाद विभिन्न दलों के नेताओं ने भी अपने-अपने संदेशों के माध्यम से उन्हें जन्मदिन की बधाई दी।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, प्रसन्न और मंगलमय जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनका अनुभव लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की।

    कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। पार्टी नेताओं ने उनके लंबे राजनीतिक जीवन, संगठनात्मक अनुभव और सामाजिक न्याय, संविधान तथा जनसेवा के प्रति समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों और जनहित के मुद्दों को मजबूती से आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है।

    उत्तर प्रदेश कांग्रेस सहित पार्टी की विभिन्न प्रदेश इकाइयों ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके नेतृत्व को कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणादायक बताया। शुभकामना संदेशों में उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और संगठन को मजबूत बनाने में निभाई गई भूमिका का उल्लेख किया गया। साथ ही उनके स्वस्थ, सक्रिय और यशस्वी जीवन की कामना भी की गई।

    समाजवादी पार्टी ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके स्वस्थ, प्रसन्न और दीर्घायु जीवन की प्रार्थना की। विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से आए इन संदेशों को लोकतांत्रिक परंपरा और राजनीतिक सौहार्द का प्रतीक माना जा रहा है, जहां वैचारिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत सम्मान और शुभकामनाओं का आदान-प्रदान जारी रहता है।

    मल्लिकार्जुन खरगे भारतीय राजनीति के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वर्तमान में वह कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ-साथ राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभा रहे हैं। संसदीय राजनीति, संगठन और प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल किया जाता है।

    उनके जन्मदिन के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सेवा और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रमों का भी आयोजन किया। कई स्थानों पर रक्तदान शिविर, पौधारोपण, जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री वितरण और अन्य सामाजिक गतिविधियां आयोजित की गईं। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने संगठन को और मजबूत बनाने तथा जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

  • जंतर-मंतर से संसद मार्च के बाद गरमाई राजनीति, महुआ मोइत्रा ने धर्मेंद्र प्रधान पर साधा निशाना, NEET विवाद पर विपक्ष ने तेज किए सवाल

    जंतर-मंतर से संसद मार्च के बाद गरमाई राजनीति, महुआ मोइत्रा ने धर्मेंद्र प्रधान पर साधा निशाना, NEET विवाद पर विपक्ष ने तेज किए सवाल

    नई दिल्ली । NEET पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में जारी राजनीतिक और छात्र आंदोलनों के बीच तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और जवाबदेही के मुद्दे को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार को घेर रहा है। इसी क्रम में महुआ मोइत्रा की सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी ने इस विवाद को नई राजनीतिक धार दे दी है। उनके बयान के बाद शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।

    जंतर-मंतर से संसद तक निकाले गए विरोध मार्च के बाद छात्रों और विपक्षी दलों का कहना है कि परीक्षा से जुड़े विवादों ने लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदर्शनकारी लगातार मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या जिम्मेदारी तय होती है तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी इसी क्रम में प्रमुख मुद्दा बनकर सामने आई है।

    इसी विवाद के बीच महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को निशाने पर लेते हुए तीखी टिप्पणी की। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा कि शायद शिक्षा मंत्री को इस्तीफा लिखना नहीं आता क्योंकि उन्हें केवल दया याचिका लिखना सिखाया गया है। उनकी इस टिप्पणी के सामने आते ही राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। विपक्षी दलों के कई नेताओं ने भी परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।

    विपक्ष का आरोप है कि NEET पेपर लीक विवाद केवल परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ी का मामला नहीं है, बल्कि यह देश की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली पर भरोसे से भी जुड़ा हुआ विषय है। उनका कहना है कि लाखों छात्रों ने कठिन मेहनत के साथ परीक्षा की तैयारी की थी और यदि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं तो इसका सीधा असर युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर पड़ता है। इसी कारण संसद से लेकर सड़कों तक इस मुद्दे को लगातार उठाया जा रहा है।

    दूसरी ओर केंद्र सरकार का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। सरकार का दावा है कि परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी तथा सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

    इस बीच मानसून सत्र में भी NEET पेपर लीक का मुद्दा प्रमुख राजनीतिक विषय बना हुआ है। विपक्ष सरकार से विस्तृत जवाब और जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सरकार जांच प्रक्रिया और कानूनी कार्रवाई का हवाला दे रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना बनी हुई है। वहीं परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों छात्र इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और पारदर्शी जांच के साथ ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था की अपेक्षा कर रहे हैं।

  • दिल्ली में CJP प्रदर्शन के बाद बढ़ा राजनीतिक टकराव, कपिल सिब्बल का केंद्र पर तीखा हमला, पुलिस कार्रवाई और नड्डा के बयान पर उठाए सवाल

    दिल्ली में CJP प्रदर्शन के बाद बढ़ा राजनीतिक टकराव, कपिल सिब्बल का केंद्र पर तीखा हमला, पुलिस कार्रवाई और नड्डा के बयान पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प और उसके बाद की राजनीतिक प्रतिक्रिया ने राष्ट्रीय राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रदर्शन के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता और सांसद कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की टिप्पणी को अहंकारपूर्ण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के सामने रखी गई मांगों की लंबे समय तक अनदेखी की गई और संवाद के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपनाया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है।

    कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह दावा करना कि पहली बार प्रदर्शनकारियों की ओर से बातचीत का प्रस्ताव आया, वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता। उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे लोगों की मांगें पहले से सार्वजनिक थीं और सरकार को उनकी पूरी जानकारी थी। उनके अनुसार यदि समय रहते सकारात्मक बातचीत की पहल की जाती तो हालात इस स्तर तक नहीं पहुंचते। उन्होंने सरकार पर संवेदनशील मुद्दों पर देर से प्रतिक्रिया देने और प्रदर्शनकारियों के साथ कठोर रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

    सिब्बल ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी आंदोलन का समाधान संवाद और विश्वास के जरिए निकाला जाना चाहिए। उनका मानना है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों की बात समय पर सुनी जाती तो टकराव की स्थिति से बचा जा सकता था। उन्होंने सरकार से लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप व्यवहार करने और जनभावनाओं का सम्मान करने की अपील भी की।

    इस बीच कांग्रेस ने भी पूरे घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। कांग्रेस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, उससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा प्रभावित हुई है। पार्टी ने कहा कि युवाओं और आंदोलनकारियों के प्रति कठोर कार्रवाई किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित संकेत नहीं मानी जा सकती।

    प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि घटनास्थल पर कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी थी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार उपलब्ध साक्ष्यों, वीडियो फुटेज और अन्य जानकारियों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन भी सौंपा। इस मुलाकात के बाद सरकार की ओर से संवाद की पहल की बात कही गई, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि यह पहल काफी देर से हुई और इससे पहले हालात अनावश्यक रूप से बिगड़ चुके थे। इसी मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी लगातार जारी है।

    पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि लोकतांत्रिक आंदोलनों से जुड़े मामलों में सरकार और प्रशासन की भूमिका कैसी होनी चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में समय पर संवाद, पारदर्शिता और संयमित प्रशासनिक कार्रवाई से विवादों को बढ़ने से रोका जा सकता है। फिलहाल इस मामले में पुलिस जांच जारी है, जबकि राजनीतिक स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला थमने के संकेत नहीं दिख रहे हैं।

  • संसद मार्च पर बवाल के बीच सरकार की सक्रियता तेज, आरएमएल अस्पताल पहुंचे जेपी नड्डा, लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष ने घेरा

    संसद मार्च पर बवाल के बीच सरकार की सक्रियता तेज, आरएमएल अस्पताल पहुंचे जेपी नड्डा, लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष ने घेरा

    नई दिल्ली । संसद मार्च के दौरान हुई झड़प और उसके बाद उपजे राजनीतिक विवाद के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति पर सक्रियता बढ़ा दी है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राजधानी स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचकर उन प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों का हालचाल जाना, जो प्रदर्शन के दौरान घायल हुए थे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती लोगों से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और उपचार कर रहे चिकित्सकों से भी पूरे घटनाक्रम तथा इलाज की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। इस मुलाकात को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब संसद मार्च को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है।

    संसद की ओर निकाले गए मार्च के दौरान बड़ी संख्या में युवा राजधानी की सड़कों पर पहुंचे थे। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज तथा आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए, वहीं ड्यूटी पर तैनात कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं। झड़प के दौरान कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे राजधानी के प्रमुख इलाकों में कुछ समय के लिए सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।

    घटनाक्रम के बाद सरकार की ओर से लगातार संवाद स्थापित करने की कोशिशें भी देखने को मिलीं। जेपी नड्डा ने अस्पताल पहुंचने से पहले संगठन के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी मांगों और शिकायतों को भी सुना था। इसके बाद घायलों से सीधे मिलना सरकार की ओर से संवेदनशीलता दिखाने की पहल माना जा रहा है। अस्पताल में उन्होंने चिकित्सकों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सभी घायलों को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं और उनके उपचार में किसी प्रकार की कमी न रहे।

    इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष ने प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि इस विषय पर संसद में चर्चा होनी चाहिए थी और सरकार को पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उनका आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर बल प्रयोग उचित नहीं था और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज दबाने का प्रयास किया गया। विपक्ष ने यह भी कहा कि यदि संसद में ऐसे मुद्दों पर चर्चा नहीं होगी तो लोकतांत्रिक विमर्श कमजोर होगा।

    वहीं सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भीड़ को नियंत्रित करना आवश्यक था ताकि किसी बड़े नुकसान से बचा जा सके। प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़े प्रभाव की भी समीक्षा की जा रही है। राजधानी में सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम का आकलन कर रही हैं और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक कदमों पर भी विचार किया जा रहा है।

    संसद मार्च के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक बहस का भी प्रमुख विषय बन चुका है। एक ओर सरकार घायलों के उपचार और संवाद के जरिए स्थिति सामान्य करने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे को संसद और जनता के बीच उठाकर जवाबदेही की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

  • मल्लिकार्जुन खरगे के जन्मदिन पर राजनीतिक दलों ने जताया सम्मान, प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेताओं ने की दीर्घायु व उत्तम स्वास्थ्य की कामना

    मल्लिकार्जुन खरगे के जन्मदिन पर राजनीतिक दलों ने जताया सम्मान, प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेताओं ने की दीर्घायु व उत्तम स्वास्थ्य की कामना


    नई दिल्ली । 
    कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के 84वें जन्मदिन पर देशभर से उन्हें शुभकामनाएं मिलीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु जीवन की कामना की। राजनीतिक मतभेदों से इतर कई नेताओं ने सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे अनुभव और योगदान का उल्लेख करते हुए उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि ईश्वर उन्हें स्वस्थ और लंबा जीवन प्रदान करें। प्रधानमंत्री का यह संदेश सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना और अनेक लोगों ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं का सकारात्मक उदाहरण बताया।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उनके सुखद, स्वस्थ और मंगलमय जीवन की कामना करते हुए सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान की सराहना की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें बधाई देते हुए स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएं व्यक्त कीं।

    कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के जन्मदिन पर विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें शुभकामनाएं दीं। पार्टी नेताओं ने उनके लंबे राजनीतिक जीवन, संगठनात्मक अनुभव और सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा जनसेवा के प्रति उनके समर्पण को याद किया। कई नेताओं ने कहा कि उनके नेतृत्व में पार्टी लगातार जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने का प्रयास कर रही है।

    उत्तर प्रदेश कांग्रेस सहित विभिन्न प्रदेश इकाइयों ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। पार्टी की ओर से जारी संदेशों में उन्हें अनुभवी नेता, कुशल संगठनकर्ता और करोड़ों कार्यकर्ताओं के प्रेरणास्रोत के रूप में बताया गया। साथ ही उनके स्वस्थ और सक्रिय जीवन की कामना भी की गई।

    सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। समाजवादी पार्टी ने भी अपने शुभकामना संदेश में मल्लिकार्जुन खरगे के स्वस्थ, प्रसन्न और दीर्घायु जीवन की कामना की। विभिन्न दलों के नेताओं की ओर से आए इन संदेशों ने राजनीतिक शिष्टाचार और लोकतांत्रिक परंपराओं को भी रेखांकित किया।

    मल्लिकार्जुन खरगे भारतीय राजनीति के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने लंबे समय तक राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं। संगठन और संसदीय राजनीति दोनों में उनका अनुभव व्यापक माना जाता है। वर्तमान में वह कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ-साथ राज्यसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका भी निभा रहे हैं।

    उनके जन्मदिन के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी कार्यक्रम आयोजित किए। कई स्थानों पर सामाजिक सेवा गतिविधियां, पौधारोपण, रक्तदान शिविर और जरूरतमंदों की सहायता जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके नेतृत्व में संगठन को और मजबूत बनाने का संकल्प भी दोहराया।

  • J&K में भयंकर बाढ़ से बिगड़े हालात …. लाल चौक समेत कई इलाके हुए जलमग्न

    J&K में भयंकर बाढ़ से बिगड़े हालात …. लाल चौक समेत कई इलाके हुए जलमग्न


    श्रीनगर।
    जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में सोमवार सुबह हुई भारी बारिश के बाद हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। श्रीनगर (Srinagar) के मुख्य और ऐतिहासिक लाल चौक (Historic Lal Chowk) समेत कई इलाके पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग लापता हैं। खराब मौसम और बाढ़ के खतरे को देखते हुए श्री अमरनाथ यात्रा को भी अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। इस बीच केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला दिल्ली में बताए जा रहे हैं।

    स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की खुली पोल
    अनुच्छेद 370 हटने के बाद पर्यटकों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरे लाल चौक और घंटाघर की बाढ़ वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। जलभराव के बाद श्रीनगर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट सवालों के घेरे में आ गया है।

    ड्रेनेज सिस्टम के फेल होने पर आम लोग और इंटरनेट यूजर्स प्रशासन को घेर रहे हैं। श्रीनगर नगर निगम (SMC) का कहना है कि करीब दो घंटे तक हुई भारी बारिश के कारण ड्रेनेज सिस्टम ओवरफ्लो हो गया। जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने के लिए पंप लगाए गए हैं। SMC का यह भी दावा है कि अप्रैल 2017 में शुरू हुए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत मंजूर सभी काम पूरे हो चुके हैं।

    कंजर्वेशन आर्किटेक्ट हाकिम समीर हमदानी ने इस प्रोजेक्ट को ‘आत्माविहीन और फोटोशॉप’ बताते हुए कहा कि बारिश के पानी को प्रबंधित करने और ग्राउंडवॉटर को रिचार्ज करने के लिए शहर में कोई एकीकृत और उचित सिस्टम मौजूद नहीं है।


    सीएम उमर अब्दुल्ला ने दिए ऑडिट के आदेश

    जलभराव की स्थिति पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि थोड़ी सी बारिश से लाल चौक समेत शहर का बड़ा हिस्सा डूब गया, जो स्पष्ट रूप से ड्रेनेज सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। सीएम ने कहा कि सरकार यह जानना चाहती है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर अब तक वास्तव में क्या हासिल किया गया है। कैबिनेट ने स्मार्ट सिटी पहल के तहत दिए गए ठेकों और प्रोजेक्ट्स के क्रियान्वयन पर चिंता जताते हुए इसकी विफलता की जांच के लिए बाहरी ऑडिट के आदेश दे दिए हैं। गौरतलब है कि पिछले साल लोकसभा में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने बताया था कि श्रीनगर में 3,634 करोड़ रुपये की लागत से 161 स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पूरे किए जाने थे।


    अमरनाथ यात्रा निलंबित, 23 जुलाई तक स्कूल बंद

    19 जुलाई से श्री अमरनाथ यात्रा को बालटाल और पहलगाम, दोनों मार्गों से अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। हालात को देखते हुए सरकार ने राज्य भर में स्कूलों की छुट्टियां 23 जुलाई तक के लिए बढ़ा दी हैं।


    अगले तीन दिन कैसा रहेगा मौसम?

    IMD के निदेशक मुख्तार अहमद ने चेतावनी दी है कि कश्मीर में अगले तीन दिनों तक व्यापक बारिश का दौर जारी रहेगा। इस दौरान भूस्खलन और अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का भारी खतरा है। लोगों से अपील की गई है कि वे सतर्क रहें और पहाड़ी ढलानों, नदियों व नालों के पास बिल्कुल न जाएं।


    राहत-बचाव कार्य तेज, एलजी ने की समीक्षा

    उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा ने सबसे अधिक प्रभावित राजौरी और पुंछ समेत अन्य जिलों में हालात की समीक्षा की है। डोडा में दो लोगों की जान जाने पर एलजी ने गहरा दुख जताया है। NDRF, SDRF, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना की टीमें तैनात कर दी गई हैं और संवेदनशील इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। पुंछ, राजौरी, रियासी और उधमपुर में प्रमुख सड़कों को आवाजाही के लिए फिर से खोल दिया गया है। कई इलाकों में पानी की आपूर्ति बहाल करने का काम युद्धस्तर पर जारी है। फील्ड टीमों को घरों और सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान का तत्काल आकलन करने का निर्देश दिया गया है।


    दिल्ली में नेशनल कॉन्फ्रेंस का प्रदर्शन

    जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दर्जे को लेकर जारी सियासी टकराव के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, मंत्रियों, विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शन किया और केंद्र शासित प्रदेश के लिए राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग की।

    संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन आयोजित यह प्रदर्शन हालांकि कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संसद मार्च के कारण सुर्खियों में पीछे रह गया। उमर अब्दुल्ला सुबह जम्मू से दिल्ली पहुंचे थे, लेकिन कॉजपा के प्रदर्शन के मद्देनजर भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण वह जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल तक नहीं पहुंच सके।

    नेकां के लगभग 100 प्रदर्शनकारी हाथों में ”अपना वादा पूरा करो” और ”पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करो” लिखी तख्तियां लिए हुए थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाल करने में देरी को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए। बाद में मुख्यमंत्री कॉन्स्टिट्यूशन क्लब पहुंचने का प्रयास कर रहे थे, जहां जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य के दर्जे की मांग को लेकर एक संगोष्ठी आयोजित की जानी थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया।

    ”रिस्टोर स्टेटहुड” लिखी जैकेट पहने उमर अशोक रोड पर सड़क किनारे बैठ गए। इस दौरान कॉजपा के प्रदर्शन में शामिल कुछ युवा भी उनके साथ बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने ”मोदी का वादा, क्यों रहा आधा?” जैसे नारे भी लगाए। पुलिस ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के पास बढ़ती भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े, जबकि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और उनके समर्थक धरने पर बैठे हुए थे।

    बाद में पत्रकारों से बातचीत में उमर ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा, ”यहां बाकी लोगों के साथ हमें भी आंसू गैस का निशाना बनाया गया। यह बेहद शर्मनाक है।” उमर ने कहा, ”हम अपने करीब 100 समर्थकों के साथ दिल्ली आए थे ताकि केंद्र से जल्द राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर सकें, लेकिन यहां भी हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई। लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है।” उन्होंने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से न्याय की मांग को लेकर आए युवाओं पर भी आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।

  • Ayodhya : राम मंदिर ट्रस्ट अब हर माह वेबसाइट पर अपलोड करेगा ऑडिट रिपोर्ट, चढ़ावा चोरी के बाद बदली कार्यप्रणाली..

    Ayodhya : राम मंदिर ट्रस्ट अब हर माह वेबसाइट पर अपलोड करेगा ऑडिट रिपोर्ट, चढ़ावा चोरी के बाद बदली कार्यप्रणाली..


    अयोध्या।
    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) ने चढ़ावा चोरी प्रकरण (Offering Theft Incident) के बाद अपनी कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। अब ट्रस्ट प्रत्येक माह की ऑडिट रिपोर्ट अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करेगा, ताकि देश-विदेश के करोड़ों रामभक्त मंदिर की आय-व्यय और ट्रस्ट की गतिविधियों की जानकारी सीधे देख सकें। इसके साथ ही वेबसाइट पर ट्रस्ट के प्रशासनिक निर्णयों, निर्माण कार्यों और अन्य प्रमुख गतिविधियों का भी नियमित अपडेट किया जाएगा।

    अब तक ट्रस्ट की वित्तीय ऑडिट वर्ष में केवल एक बार वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद तैयार की जाती थी। यह रिपोर्ट ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्टियों के समक्ष प्रस्तुत की जाती थी, लेकिन आम श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध नहीं होती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद हर महीने की आय, व्यय, दान, खर्च और वित्तीय स्थिति का विवरण वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाएगा। इससे ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

    सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय हाल ही में सामने आए चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद लिया गया है। ट्रस्ट चाहता है कि श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो तथा मंदिर के संचालन और वित्तीय व्यवस्था को लेकर किसी प्रकार की शंका की स्थिति न बने। इसी उद्देश्य से वेबसाइट को सूचना का प्रमुख माध्यम बनाया जा रहा है।

    नई व्यवस्था के तहत वेबसाइट पर केवल ऑडिट रिपोर्ट ही नहीं, बल्कि ट्रस्ट की प्रमुख बैठकों, प्रशासनिक फैसलों, निर्माण कार्यों की प्रगति, नई सुविधाओं, धार्मिक आयोजनों और अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की जानकारी भी नियमित रूप से अपडेट की जाएगी। इससे देश-विदेश में बैठे श्रद्धालु भी ट्रस्ट की कार्यप्रणाली से सीधे जुड़ सकेंगे।