Category: National

  • ISI की बड़ी साजिश का खुलासा, भारत में दहशत फैलाने की थी योजना, जानिए जांच में क्‍या हुए खुलासे

    ISI की बड़ी साजिश का खुलासा, भारत में दहशत फैलाने की थी योजना, जानिए जांच में क्‍या हुए खुलासे


    नई दिल्ली।
    पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है, जिसमें भारत में बड़े पैमाने पर दहशत फैलाने की योजना बनाई गई थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आतंकी मॉड्यूल को दिल्ली सहित देश के किसी एक स्थान पर 100 से अधिक राउंड गोलियां चलाने का निर्देश दिया गया था, ताकि भय का माहौल पैदा किया जा सके।

    जांच में हुए ये खुलासे
    जांच में सामने आया है कि अवैध हथियारों की सप्लाई करने वाला मुख्य आरोपी शाहबाज अंसारी बांग्लादेश में बैठकर पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। उसका पारिवारिक बैकग्राउंड भी हथियार तस्करी से जुड़ा रहा है। इस मॉड्यूल के जरिए आईएसआई का उद्देश्य भारत में अशांति और डर फैलाना था।

    वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस नेटवर्क को धार्मिक आयोजनों, त्योहारों और बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों को निशाना बनाने का टारगेट दिया गया था। अपराध शाखा के एक अधिकारी ने बताया कि शाहबाज का भाई दुबई में आईएसआई अधिकारियों के संपर्क में आया, जिसके बाद इस नेटवर्क की कड़ियां मजबूत हुईं। पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के निर्देश पर भारत में हथियार भेजे जा रहे थे।

    डीसीपी संजीव कुमार यादव के अनुसार, आरोपी इमरान और कामरान इस अवैध हथियार सप्लाई मॉड्यूल के सक्रिय सदस्य थे और शाहबाज अंसारी के निर्देश पर काम कर रहे थे। दोनों नेपाल जाकर हथियारों की खेप लाते थे, जिन्हें सीमा पार गुप्त रास्तों से भारत में पहुंचाया जाता था। पुलिस से बचने के लिए हथियारों को अलग-अलग हिस्सों में तोड़कर लाया जाता था और फिर सुरक्षित ट्रांजिट पॉइंट्स के जरिए सप्लाई किया जाता था।

    दूध डेयरी की आड़ में अवैध हथियारों का कारोबार
    जांच में यह भी सामने आया कि इमरान, जो उत्तर प्रदेश के सिकंदराबाद का रहने वाला है, अपने भाई के साथ दूध डेयरी की आड़ में अवैध हथियारों के कारोबार को अंजाम दे रहा था। वहीं कामरान, जो बुलंदशहर में चूड़ी की दुकान पर काम करता था, इस नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। दोनों ही आरोपी शाहबाज अंसारी के करीबी रिश्तेदार हैं और उसके निर्देशों का पालन करते थे।

    नेटवर्क की अहम कड़ी था शाहबाज अंसारी
    पुलिस के अनुसार, फरार शाहबाज अंसारी इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी था, जो विदेश में बैठे आकाओं और भारत-नेपाल-पाकिस्तान में काम कर रहे गुर्गों के बीच समन्वय स्थापित करता था। हथियारों की तस्करी का रूट भी बेहद सुनियोजित था—पहले पाकिस्तान से खरीद, फिर थाईलैंड के रास्ते नेपाल भेजना और अंत में भारत में अवैध रूप से पहुंचाना।

  • भारत के टेक्सटाइल सेक्टर तेजी से कर रहा विस्तार… 14 साल में 3 गुना बढ़ा कपड़ा मार्केट

    भारत के टेक्सटाइल सेक्टर तेजी से कर रहा विस्तार… 14 साल में 3 गुना बढ़ा कपड़ा मार्केट


    नई दिल्ली।
    भारत (India) का कपड़ा और अपैरल बाजार (Textile and Apparel Market) तेजी से विस्तार कर रहा है और इसकी झलक हाल ही में जारी रिपोर्ट में साफ दिखाई देती है। वस्त्र मंत्रालय के सर्वे के अनुसार, देश का टेक्सटाइल मार्केट (Textile market) 2024 में बढ़कर 14.95 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो 2010 में सिर्फ 4.89 लाख करोड़ रुपये था, यानी पिछले करीब 14 साल में इस सेक्टर ने शानदार ग्रोथ दिखाई है और यह हर साल औसतन 8.3% की दर से बढ़ा है। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह घरेलू मांग में लगातार इजाफा है। जैसे-जैसे लोगों की आय बढ़ रही है और लाइफस्टाइल बदल रहा है, वैसे-वैसे कपड़ों पर खर्च भी बढ़ता जा रहा है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, आज के समय में सिंथेटिक और मिक्स फाइबर वाले कपड़ों की मांग सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ी है। इनका कुल बाजार में हिस्सा 52.2% तक पहुंच गया है, जबकि कॉटन यानी सूती कपड़ों की हिस्सेदारी 41.2% है। वहीं, सिल्क और ऊन जैसे रेगुलर फाइबर की हिस्सेदारी काफी कम है। खास बात यह है कि सिंथेटिक और मिक्स फाइबर का बाजार 2010 के 1.47 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 4.47 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो उपभोक्ताओं की बदलती पसंद को दर्शाता है। लोग अब ऐसे कपड़े पसंद कर रहे हैं, जो सस्ते, टिकाऊ और मेंटेन करने में आसान हों।

    इस ग्रोथ में घरेलू उपभोक्ताओं का बहुत बड़ा योगदान है। रिपोर्ट के अनुसार, परिवारों द्वारा कपड़ों पर खर्च 2010 के 4.18 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 8.77 लाख करोड़ रुपये हो गया है, यानी कुल बाजार का बड़ा हिस्सा घरेलू खपत से ही आ रहा है। इसके अलावा प्रति व्यक्ति खर्च भी तेजी से बढ़ा है। 2010 में जहां एक व्यक्ति औसतन 2,119 रुपये कपड़ों पर खर्च करता था, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 6,066 रुपये हो गया है। यह दिखाता है कि लोग अब फैशन और ब्रांड्स पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

    एक और दिलचस्प बात यह है कि कपड़ा बाजार में महिलाओं की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल खरीद में महिलाओं का योगदान 55.5% है, जबकि मेल की हिस्सेदारी 44.5% है, यानी इस सेक्टर की ग्रोथ में महिला उपभोक्ता सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी हैं।

    भारत का टेक्सटाइल सेक्टर न सिर्फ तेजी से बढ़ रहा है, बल्कि इसमें बड़े बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं। बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ती आय और फैशन के प्रति बढ़ती जागरूकता इस ग्रोथ को आगे भी गति दे सकती है। आने वाले समय में यह सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत इंजन साबित हो सकता है।

  • CG: HC का बड़ा फैसला…. जग्गी हत्याकांड में पूर्व CM अजीत जोगी के बेटे को आजीवन कारावास

    CG: HC का बड़ा फैसला…. जग्गी हत्याकांड में पूर्व CM अजीत जोगी के बेटे को आजीवन कारावास


    बिलासपुर।
    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने साल 2003 के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी (Former Chief Minister Ajit Jogi) के बेटे अमित जोगी (Amit Jogi) दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा (Life Sentence) सुनाई है। हाईकोर्ट ने बीते गुरुवार को अमित जोगी को इस मामले में दोषी करार दिया था। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा अमित जोगी को सजा सुनाया जाना 23 सालों से चल रही कानूनी लड़ाई में एक बड़ा मोड़ है।


    सजा के साथ जुर्माना भी लगाया

    चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया। बेंच ने अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।


    निचली अदालत ने जोगी को कर दिया था बरी

    हाईकोर्ट का आज का फैसला 31 मई 2007 को रायपुर की स्पेशल सीबीआई कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय को पूरी तरह पलटता है, जिसमें अमित जोगी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था, जबकि चिमन सिंह, याह्या ढेबर, अभय गोयल और फिरोज सिद्दीकी समेत अन्य 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था।


    मुख्य साजिशकर्ता को छोड़ना न्यायसंगत नहीं : हाईकोर्ट

    हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि एक ही गवाही के आधार पर कुछ आरोपियों को सजा देना और कथित मुख्य साजिशकर्ता को छोड़ देना न्यायसंगत नहीं है। हाईकोर्ट ने इसे विधिक दृष्टि से त्रुटिपूर्ण बताया।


    SC के आदेश पर दोबारा खुला था मामला

    गौरतलब है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दोबारा खोला गया था, जिसके बाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के दौरान सतीश जग्गी की ओर से वकील बीपी शर्मा ने गंभीर तर्क प्रस्तुत किए। उन्होंने अदालत को बताया कि यह हत्याकांड उस समय की राज्य सरकार के संरक्षण में रचा गया षड्यंत्र था। दलील दी गई कि जब सीबीआई ने जांच शुरू की, तब प्रभावशाली हस्तक्षेप के चलते महत्वपूर्ण सबूतों को मिटा दिया गया। ऐसे मामलों में केवल भौतिक साक्ष्यों की कमी के आधार पर आरोपियों को राहत नहीं दी जा सकती, बल्कि पूरे षड्यंत्र की कड़ियों को समझना आवश्यक है।


    क्या था मामला

    उल्लेखनीय है कि 4 जून 2003 को राष्ट्रवादी कांग्रेस (राकांपा) नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस प्रकरण में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह बाद में सरकारी गवाह बन गए थे। शेष 28 आरोपियों को सजा मिली थी, जबकि अमित जोगी को ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था। बाद में रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। शुरुआती दौर में अमित जोगी को राहत मिली, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पुनर्विचार के लिए हाईकोर्ट भेज दिया था।


    विद्याचरण शुक्ल के करीबी थे जग्गी

    कारोबारी और राजनेता रामावतार जग्गी, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। कांग्रेस से अलग होकर जब शुक्ल ने राकांपा का रुख किया, तब जग्गी भी उनके साथ जुड़े और उन्हें छत्तीसगढ़ में पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया।


    इन लोगों को ठहराया था दोषी

    जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत और विश्वनाथ राजभर को दोषी पाया गया था।

  • करियर अपडेट: एनआईटी सिलचर में इंटर्नशिप के लिए 36 पद खाली, जल्द करें आवेदन

    करियर अपडेट: एनआईटी सिलचर में इंटर्नशिप के लिए 36 पद खाली, जल्द करें आवेदन


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) सिलचर, असम में इंटर्नशिप करने के इच्छुक छात्रों के लिए आकर्षक अवसर लेकर आया है। संस्थान ने कुल 36 इंटर्न पदों के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    एनआईटी सिलचर की इंटर्नशिप में आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से बीई/बीटेक/एमटेक की डिग्री हासिल करनी होगी। इसके साथ ही, उम्मीदवारों को अन्य निर्धारित पात्रता मानदंडों को भी पूरा करना अनिवार्य है।

    आयु सीमा और आरक्षित वर्ग
    आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की अधिकतम आयु 35 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसकी गणना 30 अप्रैल 2026 के अनुसार की जाएगी। वहीं, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी।

    चयन प्रक्रिया
    इंटर्नशिप के लिए योग्य उम्मीदवारों का चयन मेरिट सूची और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के आधार पर किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को प्रति माह 10,000 रुपए स्टाइपेंड प्रदान किया जाएगा।

    ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया
    उम्मीदवार सबसे पहले एनआईटी सिलचर की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। होमपेज पर संबंधित पद के लिए सक्रिय आवेदन लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद उम्मीदवार को रजिस्ट्रेशन कर लॉगिन करना होगा। आवेदन फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारियाँ सही ढंग से भरें और आवश्यक डॉक्यूमेंट्स को उपयुक्त साइज़ में अपलोड करें। फॉर्म जमा करने से पहले सभी जानकारियों को जांचें और सबमिट करें। अंतिम चरण में एप्लीकेशन फॉर्म का प्रिंट आउट निकालकर भविष्य के लिए सुरक्षित रखें।

    कुल पद: 36 इंटर्नशिप पद
    आवेदन की शुरुआत: 1 अप्रैल 2026
    आवेदन की अंतिम तिथि: 30 अप्रैल 2026
    पात्रता: बीई/बीटेक/एमटेक की डिग्री
    आयु सीमा: अधिकतम 35 वर्ष (आरक्षित वर्ग को छूट)
    चयन प्रक्रिया: मेरिट + डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन
    स्टाइपेंड: प्रति माह 10,000 रुपए
    आवेदन मोड: केवल ऑनलाइन

    यह इंटर्नशिप छात्रों के लिए व्यावसायिक अनुभव और भविष्य के करियर में मजबूत आधार प्रदान करने का एक शानदार अवसर है। योग्य उम्मीदवारों को जल्द आवेदन करने की सलाह दी जाती है ताकि वे समय सीमा से पहले अपने दस्तावेजों के साथ आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकें।

  • सरगुजा सड़क हादसा: अंबिकापुर की ओर जा रही कार पर ट्रक ने मारी टक्कर, परिवार को भारी नुकसान

    सरगुजा सड़क हादसा: अंबिकापुर की ओर जा रही कार पर ट्रक ने मारी टक्कर, परिवार को भारी नुकसान

    सरगुजा । सरगुजा जिला छत्तीसगढ़ में सड़क हादसों का सिलसिला जारी है सोमवार सुबह गांधी नगर थाना क्षेत्र में एक भयानक दुर्घटना में ट्रक और कार की भिड़ंत हुई जिससे तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी और एक व्यक्ति घायल हो गया पुलिस सूत्रों के अनुसार यह हादसा ग्राम सकालो के पास जंगल वाले इलाके में हुआ था

    दुर्घटना के समय कार अंबिकापुर की ओर जा रही थी और ट्रक प्रतापपुर से अंबिकापुर की दिशा में आ रहा था सुबह लगभग छह बजे यह हादसा घटा मृतकों में दो लोग पिता-पुत्र थे जिनमें कईला राम (52), उनकी पत्नी मानमति (50) और पुत्र राहुल टोप्पो (25) शामिल हैं सभी मृतक ग्राम दुप्पी चौरा रजापुर जिला सरगुजा के निवासी थे

    घायल कार चालक सोनू केरकेट्टा भी इसी गांव के निवासी हैं उनका इलाज अस्पताल में जारी है पुलिस ने बताया कि दुर्घटना के कारण कार पर ट्रक ने सीधी टक्कर मारी जिससे कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गयी और तीनों लोगों की घटनास्थल पर मौत हो गयी

    स्थानीय लोग और पुलिस मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुट गए हैं उन्होंने घायल की प्राथमिक उपचार व्यवस्था कर अस्पताल भेजा और मृतकों के परिजनों को घटना की जानकारी दी पुलिस अब दुर्घटना की जांच कर रही है और ट्रक चालक की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं

    सरगुजा जिले में यह सड़क हादसा सड़क सुरक्षा की अनदेखी और तेज रफ्तार वाहनों के कारण होने वाले खतरों की याद दिलाता है प्रशासन ने लोगों से वाहन सावधानीपूर्वक चलाने की अपील की है और दुर्घटना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया है स्थानीय प्रशासन का कहना है कि सड़क पर सुरक्षा उपाय बढ़ाए जा रहे हैं ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और जनता को सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित किया जा सके

  • बीजेपी स्थापना दिवस पर खास: जब फिल्मी सितारों ने राजनीति में बढ़ाया पार्टी का कद

    बीजेपी स्थापना दिवस पर खास: जब फिल्मी सितारों ने राजनीति में बढ़ाया पार्टी का कद


    नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी आज अपना स्थापना दिवस मना रही है। 6 अप्रैल 1980 को स्थापित हुई इस पार्टी ने पिछले चार दशकों में देश की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई है। इस सफर में फिल्म, टीवी, संगीत और खेल जगत की कई जानी-मानी हस्तियों ने भी पार्टी से जुड़कर इसकी लोकप्रियता और जनाधार को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। इन सेलेब्रिटीज की पहुंच और प्रभाव का इस्तेमाल पार्टी ने खासकर युवाओं और अलग-अलग वर्गों तक अपनी विचारधारा पहुंचाने में किया है।

    हेमा मालिनी और सनी देओल जैसे बड़े नाम

    बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ Hema Malini ने साल 2004 में बीजेपी जॉइन की थी और वह उत्तर प्रदेश की मथुरा सीट से लगातार सांसद रही हैं। वहीं, ‘गदर’ और ‘बॉर्डर’ जैसी फिल्मों के स्टार Sunny Deol ने 2019 में राजनीति में कदम रखा और पंजाब के गुरदासपुर से सांसद बने। हालांकि, उन्होंने 2024 चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था।

    नई पीढ़ी की एंट्री: कंगना रनौत और रवि किशन

    नेशनल अवॉर्ड विजेता अभिनेत्री Kangana Ranaut ने 2024 में बीजेपी जॉइन कर हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से चुनाव जीता और सांसद बनीं। वहीं अभिनेता Ravi Kishan 2017 से पार्टी के सक्रिय सदस्य हैं और गोरखपुर से सांसद के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

    भोजपुरी और टीवी जगत से भी मजबूत समर्थन

    भोजपुरी गायक और अभिनेता Manoj Tiwari ने 2013 में बीजेपी जॉइन की और दिल्ली की नॉर्थ-ईस्ट सीट से तीन बार सांसद चुने गए। वहीं ‘रामायण’ फेम Arun Govil 2021 में पार्टी से जुड़े और 2024 में मेरठ से जीतकर संसद पहुंचे।

    टीवी इंडस्ट्री से Smriti Irani भी बीजेपी का बड़ा चेहरा रही हैं। ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ से लोकप्रियता हासिल करने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और अमेठी से सांसद व केंद्र सरकार में मंत्री भी रहीं।

    धर्मेंद्र, मिथुन और अन्य सितारों का साथ

    दिवंगत अभिनेता Dharmendra भी बीजेपी से जुड़े रहे और बीकानेर से सांसद बने। अभिनेत्री Jaya Prada ने भी 2019 में पार्टी का दामन थामा। वहीं Mithun Chakraborty 2021 में बीजेपी में शामिल हुए और पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रमुख प्रचारकों में गिने जाते हैं।

    इसके अलावा Anupam Kher, Akshay Kumar, Suniel Shetty और Paresh Rawal जैसे सितारे भले औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल न हों, लेकिन समय-समय पर समर्थन करते नजर आते हैं।

    राजनीति और ग्लैमर का मजबूत मेल

    भाजपा ने इन चर्चित चेहरों के जरिए न केवल अपनी पहुंच बढ़ाई है, बल्कि जनसंपर्क को भी मजबूत किया है। इन सितारों की लोकप्रियता ने पार्टी को आम जनता, खासकर युवाओं के बीच और अधिक प्रभावशाली बनाने में मदद की है।

  • 5 किलो ‘छोटकू’ LPG सिलेंडरों की बढ़ी बिक्री, 14 दिन में 6.6 लाख बिके; बिना पते के भी खरीदने की सुविधा

    5 किलो ‘छोटकू’ LPG सिलेंडरों की बढ़ी बिक्री, 14 दिन में 6.6 लाख बिके; बिना पते के भी खरीदने की सुविधा

    क करीब 6.6 लाख छोटे सिलेंडर बाजार में बेचे जा चुके हैं, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।

    बिना पते के भी मिलेंगे छोटे सिलेंडर

    सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम घरेलू सिलेंडर से अलग, पांच किलोग्राम के छोटे सिलेंडर (एफटीएल) बाजार मूल्य पर उपलब्ध हैं। इन्हें लेने के लिए उपभोक्ताओं को पते का प्रमाण देना आवश्यक नहीं है। मंत्रालय ने बताया कि 4 अप्रैल को ही 90 हजार से अधिक छोटे सिलेंडरों की बिक्री दर्ज की गई।

    घरेलू सिलेंडरों की आपूर्ति सामान्य

    मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है। एक ही दिन में 51 लाख से अधिक घरेलू सिलेंडर वितरित किए गए, जबकि कुल मांग का लगभग 95 प्रतिशत ऑनलाइन बुकिंग के जरिए पूरा किया गया।

    कालाबाजारी पर सख्ती

    जमाखोरी और अवैध बिक्री रोकने के लिए कार्रवाई भी तेज की गई है। मार्च से अब तक

    50,000 से अधिक सिलेंडर जब्त
    1,400 से ज्यादा कारण बताओ नोटिस जारी
    36 डीलरशिप निलंबित
    कॉमर्शियल गैस और नेचुरल गैस की स्थिति

    कॉमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति को संकट से पहले के स्तर के लगभग 70 प्रतिशत तक रखा गया है, जबकि छोटे सिलेंडरों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है। सरकार ने बताया कि घरेलू उपयोग और परिवहन के लिए नेचुरल गैस की आपूर्ति सामान्य है। उर्वरक संयंत्रों के लिए गैस आपूर्ति 6 अप्रैल से औसत खपत के करीब 90 प्रतिशत तक बढ़ाई जाएगी, जिसे आने वाले एलएनजी कार्गो का समर्थन मिलेगा।

    घबराकर खरीदारी न करने की अपील

    मंत्रालय ने कहा कि सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त ईंधन उपलब्ध है। लोगों से अपील की गई है कि अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
    छोटे सिलेंडरों की बढ़ती उपलब्धता से अस्थायी जरूरत वाले उपभोक्ताओं और कम खपत वाले परिवारों को खास राहत मिल सकती है।

  • सरमा की पत्नी के पास तीन पासपोर्ट, कांग्रेस के आरोपों पर बिफरे असम के सीएम

    सरमा की पत्नी के पास तीन पासपोर्ट, कांग्रेस के आरोपों पर बिफरे असम के सीएम

    गुआहाटी। असम में रविवार को तगड़ा सियासी विवाद शुरू हो गया। इसकी शुरुआत हुई कांग्रेस के आरोपों के साथ। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं। वहीं, सरमा ने पलटवार किया है।

    असम में रविवार को तगड़ा सियासी विवाद शुरू हो गया। इसकी शुरुआत हुई कांग्रेस के आरोपों के साथ। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं। इसके अलावा उनके नाम विदेश में संपत्ति होने की बात भी कही गई। इसके कुछ ही देर बाद असम के मुख्यमंत्री सरमा ने पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस के सभी आरोपों को नकारते हुए इन्हें राजनीति से प्रेरित बताया।

    कांग्रेस की बेचैनी और घबराहट
    सरमा ने एक्स पर लिखा कि पवन खेड़ा की आज की प्रेस कांफ्रेंस, कांग्रेस के अंदर की बेचैनी और घबराहट को दिखाती है। असम इस चुनाव में एक ऐतिहासिक जनमत देने जा रहा है। ऐसे में इस तरह के बेबुनियाद आरोप और हमले, उनकी डूबती जमीन दिखाते हैं। खेड़ा के आरोपों को दुर्भावनापूर्ण, फैब्रिकेटेड और राजनीति से प्रेरित बताते हुए सरमा ने कहाकि वह और उनकी पत्नी 48 घंटे के भीतर उनके खिलाफ आपराधिक और मानहानि के मुकदमे दायर करेंगे। खेड़ा को अपनी बातों की जिम्मेदारी लेने होगी।

    पवन खेड़ा ने क्या कहा था
    इससे पहले दिन में पवन खेड़ा ने कुछ कागजात दिखाए और दावा किया कि उन्हें विदेश से हासिल किया गया है।

    खेड़ा ने कहाकि असम के मुख्यमंत्री पवन खेड़ा की पत्नी रिनिकी के पास यूएई, इजिप्ट और एंटीगुआ व बरबूडा के पासपोर्ट हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रिनिकी के पास दुबई में प्रॉपटी्र हैं। इसके अलावा अमेरिका के व्योमिंग में एक रजिस्टर्ड कंपनी है, जिसका बजट 34.67 बिलियन डॉलर है। साथ ही होटल इंडस्ट्री में एंट्री की भी योजना हैं।

    कानून के पालन पर सवाल
    खेड़ा ने आगे मुख्यमंत्री की भारतीय कानूनों के पालन पर सवाल उठाया। उन्होंने कहाकि यह सारी संपत्तियां, सरमा के चुनावी हलफनामे में दर्ज नहीं थीं। साथ ही यह भी पूछा कि क्या भारत में दोहरी नागरिकता की इजाजत है।

    कांग्रेस प्रवक्ता ने आगामी चुनाव के लिए हिमंता सरमा को अयोग्य घोषित करने और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि अघोषित अंतर्राष्ट्रीय संपत्तियां भ्रष्टाचार को दिखाती हैं। साथ ही यह भी आशंका है कि अगर चुनावी नतीजे इनके अनुकूल नहीं हुए तो यह लोग विदेश जा सकते हैं। खेड़ा ने मामले में केंद्रीय मंत्री अमित शाह से जांच करने और एसआईटी का गठन करने की मांग उठाई।
  • तमिलनाडु चुनाव में ब्राह्मण उम्मीदवारों की कमी, बड़ी पार्टियों की रणनीति ने खड़े किए सवाल

    तमिलनाडु चुनाव में ब्राह्मण उम्मीदवारों की कमी, बड़ी पार्टियों की रणनीति ने खड़े किए सवाल


    चेन्नई। तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों की उम्मीदवार सूची में एक खास रुझान देखने को मिल रहा है—ब्राह्मण समुदाय के उम्मीदवार लगभग गायब हैं। राज्य की आबादी में करीब 3 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले इस समुदाय को टिकट देने से प्रमुख पार्टियां इस बार बचती नजर आईं, जिसे विश्लेषक नई चुनावी रणनीति से जोड़ रहे हैं।
    प्रमुख दलों ने नहीं दिए टिकट

    करीब 35 वर्षों में पहली बार अन्नाद्रमुक ने विधानसभा चुनाव में एक भी ब्राह्मण उम्मीदवार नहीं उतारा। दिवंगत नेता जे. जयललिता के निधन के बाद पार्टी ने पिछले एक दशक में केवल एक ब्राह्मण उम्मीदवार को मौका दिया था। 2021 में पूर्व डीजीपी आर. नटराज को टिकट दिया गया था।

    इसी तरह भारतीय जनता पार्टी ने भी 27 सीटों में से किसी पर ब्राह्मण उम्मीदवार नहीं उतारा।

    द्रमुक और कांग्रेस ने भी इस समुदाय को प्रतिनिधित्व नहीं दिया।

    छोटे दलों ने दिए सीमित टिकट

    हालांकि तमिलगा वेत्रि कझगम (अभिनेता विजय की पार्टी) ने दो ब्राह्मण उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि नाम तमिलर कच्ची ने छह उम्मीदवार मैदान में उतारे। इन दलों ने मायिलापुर और श्रीरंगम जैसे क्षेत्रों को चुना, जहां ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत अधिक मानी जाती है।

    रणनीति के पीछे क्या वजह?
    विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय तक ब्राह्मण मतदाता अन्नाद्रमुक के साथ रहे, लेकिन हाल के वर्षों में उनका झुकाव भाजपा की ओर बढ़ा है। इसी कारण अन्नाद्रमुक को ब्राह्मण उम्मीदवार उतारने में चुनावी लाभ नहीं दिख रहा। राजनीतिक टिप्पणीकार रवींद्रन दुरईसामी के अनुसार, पहले एम.जी. रामचंद्रन और जयललिता ब्राह्मण उम्मीदवारों को नियमित तौर पर मौका देते थे।

    वहीं विश्लेषक अरुण कुमार का कहना है कि जयललिता के निधन के बाद ब्राह्मण मतदाता भाजपा की ओर गए, जिससे अन्य दलों ने इस वर्ग पर कम ध्यान देना शुरू कर दिया।

    अलग-अलग दलों की अलग रणनीति
    TVK ब्राह्मण उम्मीदवार देकर खुद को गैर-ब्राह्मण राजनीति तक सीमित नहीं दिखाना चाहती
    DMK की राजनीति पारंपरिक रूप से गैर-ब्राह्मण सशक्तिकरण पर केंद्रित रही है
    NTK प्रमुख सीमन पहचान आधारित राजनीति पर जोर देते रहे हैं
    कुल मिलाकर, चुनावी समीकरणों और सामाजिक समीकरणों के बदलते रुझान के कारण तमिलनाडु की राजनीति में ब्राह्मण प्रतिनिधित्व घटता नजर आ रहा है, जिसे विश्लेषक राज्य की बदलती राजनीतिक दिशा का संकेत मान रहे हैं।
  • दिल्ली-मुंबई में धमाका करने की साजिश फेल, जैश-ए-मोहम्मद और आईएस से जुड़े दो संदिग्ध गिरफ्तार

    दिल्ली-मुंबई में धमाका करने की साजिश फेल, जैश-ए-मोहम्मद और आईएस से जुड़े दो संदिग्ध गिरफ्तार

    नई दिल्ली। दिल्ली और मुंबई में खिलौना बम से धमाका करने की साजिश रच रहे दो आतंकियों को पुलिस ने महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और मुंबई एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में मोसाब अहमद और मोहम्मद हमाद कालरा को कल्याण और कुर्ला से पकड़ा गया। दोनों आरोपी आईएस और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े थे और पाकिस्तानी आतंक संगठन के हैंडलर के संपर्क में थे।

    स्पेशल सेल और एटीएस की संयुक्त कार्रवाई
    सूत्रों के अनुसार, रविवार को मुंबई एटीएस और दिल्ली स्पेशल सेल ने मिलकर इन दोनों को हिरासत में लिया। इनके कब्जे से मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए। जांच में सामने आया कि दोनों “मिशन खिलाफत” और “सोल्जर ऑफ प्रॉफेट” जैसे आतंक समूहों से जुड़े हुए थे और पाकिस्तान में जैश कमांडर के संपर्क में थे।

    खिलौना बम बनाने की योजना
    जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों आतंकियों ने इंटरनेट के जरिए खिलौना बम बनाने की तकनीक सीखी थी और दिल्ली-मुंबई में धमाके करने की फिराक में थे। मुंबई एटीएस ने इससे पहले आईएस से जुड़े अन्य आतंकियों को गिरफ्तार किया था, जिनसे पूछताछ में इन दोनों की जानकारी मिली।

    युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का प्रयास
    पुलिस के मुताबिक, मोसाब अहमद और मोहम्मद हमाद कालरा भारत में कट्टरपंथी युवाओं को भर्ती कर रहे थे। उनका मकसद आईएस का एजेंडा भारत में फैलाना और युवाओं को भड़काऊ सामग्री के माध्यम से कट्टरपंथी बनाना था। हथियार और प्रशिक्षण पाकिस्तान और अफगानिस्तान से उपलब्ध कराए जा रहे थे।