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  • ओपी राजभर ने सपा पर लगाए गंभीर आरोप, दलितों के उत्पीड़न और आपराधिक मामलों को लेकर अखिलेश यादव को दी नसीहत

    ओपी राजभर ने सपा पर लगाए गंभीर आरोप, दलितों के उत्पीड़न और आपराधिक मामलों को लेकर अखिलेश यादव को दी नसीहत

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओपी राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए उनकी पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि दलितों, पिछड़ों और गरीबों के साथ होने वाली घटनाओं को लेकर समाजवादी पार्टी को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। राजभर के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है।

    ओपी राजभर ने सार्वजनिक रूप से अखिलेश यादव से सवाल करते हुए कहा कि क्या उनकी पार्टी के लोगों को गरीबों, पिछड़ों और दलितों को परेशान करने में आनंद आता है। उनका दावा था कि प्रदेश में जब भी हत्या, मारपीट, जमीन विवाद, चोरी या अन्य आपराधिक घटनाओं की जांच होती है तो कई मामलों में समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों के नाम सामने आने की बात कही जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोगों के खिलाफ पार्टी स्तर पर सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, जिससे गलत संदेश जाता है।

    राजभर ने आजमगढ़ जिले का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी के एक सांसद पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि संबंधित सांसद और उनके परिजनों पर जमीन कब्जाने तथा स्थानीय लोगों को धमकाने जैसे आरोप लगे हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो पार्टी नेतृत्व को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए और ऐसे मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कथित तौर पर गरीब और दलित परिवारों की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की गई है।

    अपने बयान में राजभर ने एक दलित महिला की जमीन से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला की भूमि पर कब्जा करने के लिए दबाव बनाया गया और कथित रूप से धमकी तथा दुर्व्यवहार की घटनाएं हुईं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि विवादित जमीन के चारों ओर बिजली का करंट प्रवाहित करने वाले तार लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष की ओर से भी इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    राजभर ने समाजवादी पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि विपक्ष को भविष्य में प्रभावी भूमिका निभानी है तो उसे अपने संगठन के भीतर अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने अखिलेश यादव को सलाह देते हुए कहा कि यदि पार्टी ऐसे विवादों पर समय रहते नियंत्रण नहीं करती है तो उसे राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में एक मजबूत और जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।

    उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों के बीच इस तरह के बयान राजनीतिक माहौल को और गर्माने वाले माने जा रहे हैं। एक ओर सत्ता पक्ष विपक्ष पर कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय के मुद्दों को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं विपक्ष भी सरकार की नीतियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर लगातार हमलावर है। ऐसे में आने वाले दिनों में इन आरोपों और उनके जवाब को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना बनी हुई है। फिलहाल ओपी राजभर के बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है, जबकि आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच और संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • CJP प्रदर्शन के बाद तेज हुई राजनीतिक हलचल, घायल छात्रों से मिलने अस्पताल पहुंचे जेपी नड्डा, राहुल गांधी ने भी जाना हाल

    CJP प्रदर्शन के बाद तेज हुई राजनीतिक हलचल, घायल छात्रों से मिलने अस्पताल पहुंचे जेपी नड्डा, राहुल गांधी ने भी जाना हाल


    नई दिल्ली ।
    CJP के संसद मार्च के दौरान हुई झड़प और पुलिस कार्रवाई के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों से मिलने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा मंगलवार को दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती छात्रों का हालचाल जाना और उनके उपचार में लगे चिकित्सकों से भी बातचीत की। इससे पहले प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी मांगों पर चर्चा की जा चुकी थी। इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी अस्पताल पहुंचकर घायल छात्रों से मुलाकात की और उनका हाल जाना।

    संसद मार्च के दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे थे। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया। इस दौरान लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की घटनाएं सामने आईं, जिसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हुए। पुलिस के अनुसार झड़प के दौरान कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं। घटनास्थल के आसपास कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ की भी सूचना मिली, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई।

    घटना के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। कांग्रेस ने प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि युवाओं की मांगों को सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार से जवाब मांगा और कहा कि ऐसे मामलों पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।

    दूसरी ओर सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से बातचीत की पहल की गई है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी मांगों को सुना था। इसके बाद अस्पताल पहुंचकर घायल छात्रों से मुलाकात को सरकार की ओर से संवाद और स्थिति की समीक्षा के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि विपक्ष का कहना है कि यह कदम घटना के बाद उठाया गया, जबकि शुरुआत में सरकार की प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं थी।

    इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी परीक्षा से जुड़े विवादों और अनियमितताओं के मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा जताया है। सरकार का कहना है कि युवाओं के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं विपक्ष लगातार इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद मार्च के बाद उत्पन्न स्थिति ने एक बार फिर छात्र आंदोलनों, लोकतांत्रिक विरोध और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। सरकार और विपक्ष दोनों इस मुद्दे पर अपने-अपने पक्ष को मजबूती से रख रहे हैं, जबकि घायल प्रदर्शनकारियों के उपचार और पूरे घटनाक्रम की जांच भी जारी है। आने वाले दिनों में इस विषय पर संसद और राजनीतिक मंचों पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।

  • प्रदर्शन में शामिल फहाद अहमद को पुलिस ने हिरासत में लिया, स्वरा भास्कर का तीखा बयान, लोकतंत्र और शांतिपूर्ण विरोध को लेकर उठे सवा

    प्रदर्शन में शामिल फहाद अहमद को पुलिस ने हिरासत में लिया, स्वरा भास्कर का तीखा बयान, लोकतंत्र और शांतिपूर्ण विरोध को लेकर उठे सवा


    नई दिल्ली ।
    राष्ट्रीय राजधानी में छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों की गूंज मुंबई तक पहुंची, जहां प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक कार्यकर्ता फहाद अहमद को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पुलिस और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के साथ की गई कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है और इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

    बताया गया कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों और परीक्षा प्रणाली को लेकर आयोजित प्रदर्शन में कई लोग शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने अनुमति से संबंधित नियमों का हवाला देते हुए कार्रवाई की और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इन्हीं में राजनीतिक कार्यकर्ता फहाद अहमद भी शामिल थे। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद घटनास्थल से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किए जाने लगे, जिनमें पुलिस प्रदर्शनकारियों को अपने साथ ले जाती दिखाई दे रही है।

    स्वरा भास्कर ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि फहाद अहमद और अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर माहिम पुलिस थाने में रखा गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताते हुए लिखा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं कही जा सकती। अपने संदेश में उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से एकजुट रहने की भी अपील की।

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में फहाद अहमद पुलिसकर्मियों से हिरासत में लिए जाने का कारण पूछते हुए दिखाई दे रहे हैं। एक अन्य वीडियो में उन्हें पुलिस वाहन के भीतर बैठकर घटनास्थल की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए देखा जा सकता है। इन वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई को लेकर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कुछ लोगों ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया, जबकि कई अन्य ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार से जोड़कर सवाल उठाए।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनकारियों के साथ हुई कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। वहीं प्रशासन की ओर से यह कहा गया कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।

    लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने का मुद्दा लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। ऐसे मामलों में प्रशासन का दायित्व सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है, जबकि प्रदर्शनकारी अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत अपनी बात रखने का दावा करते हैं। यही कारण है कि इस तरह की घटनाएं अक्सर राजनीतिक बहस का केंद्र बन जाती हैं।

    फिलहाल फहाद अहमद को हिरासत में लिए जाने और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और विभिन्न पक्षों के बयानों के बीच इस मामले ने राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श को नया आयाम दिया है। आने वाले दिनों में प्रशासन की आगे की कार्रवाई और इस विषय पर विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर बनी रहेगी।

  • केतन अग्रवाल हत्याकांड में जांच का बड़ा खुलासा, पहले दुर्घटना दिखाकर अपाहिज बनाने की थी साजिश; बाद में हत्या की योजना का आरोप

    केतन अग्रवाल हत्याकांड में जांच का बड़ा खुलासा, पहले दुर्घटना दिखाकर अपाहिज बनाने की थी साजिश; बाद में हत्या की योजना का आरोप

    नई दिल्ली । पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में पुलिस को कई महत्वपूर्ण सुराग मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, मामले में गिरफ्तार आरोपियों की कथित साजिश शुरुआत से हत्या की नहीं थी। पुलिस का दावा है कि पहले ऐसी योजना बनाई गई थी, जिसमें केतन अग्रवाल को एक सुनियोजित दुर्घटना के माध्यम से स्थायी रूप से गंभीर रूप से घायल या दिव्यांग बनाया जाए, ताकि उनकी प्रस्तावित शादी और विदेश यात्रा स्वाभाविक रूप से रद्द हो सके। बाद में कथित रूप से इस योजना को बदलकर हत्या की साजिश तैयार की गई।

    पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर ऐसे तरीके की तलाश में थे जिससे पूरी घटना एक सामान्य दुर्घटना प्रतीत हो और किसी पर संदेह न जाए। इसी उद्देश्य से सड़क हादसे, लूटपाट जैसी परिस्थितियां पैदा करने और गंभीर चोट पहुंचाने जैसे विकल्पों पर विचार किए जाने का दावा किया गया है। जांचकर्ताओं का मानना है कि इस योजना का उद्देश्य पीड़ित को लंबे समय तक सामान्य जीवन जीने में असमर्थ बनाना था।

    जांच में यह भी सामने आया है कि बाद के चरण में आरोपियों ने कथित तौर पर हत्या की योजना पर काम शुरू किया। पुलिस के अनुसार, घटना को दुर्घटना का रूप देने के लिए विभिन्न स्थानों का निरीक्षण किया गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि कई संभावित स्थानों का जायजा लेने के बाद अंततः एक स्थान को वारदात के लिए चुना गया। पुलिस इस संबंध में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, लोकेशन डेटा और अन्य तकनीकी प्रमाणों की भी जांच कर रही है।

    जांच अधिकारियों का दावा है कि आरोपियों की गतिविधियों और आपसी बातचीत से जुड़े कई डिजिटल साक्ष्य भी उनके हाथ लगे हैं। इनमें कथित इंटरनेट सर्च, मोबाइल फोन से प्राप्त जानकारी और अन्य तकनीकी रिकॉर्ड शामिल हैं। पुलिस इन सभी पहलुओं की फोरेंसिक जांच करा रही है ताकि घटनाक्रम की पूरी श्रृंखला स्पष्ट की जा सके और अदालत में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकें।

    पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान यह भी पता चला है कि घटना से पहले कई बार संबंधित स्थानों पर जाकर परिस्थितियों का आकलन किया गया था। आरोप है कि संभावित योजना को सफल बनाने के लिए कथित तौर पर कई बार रेकी की गई और अलग-अलग परिस्थितियों का परीक्षण किया गया। हालांकि इन सभी दावों की पुष्टि अभी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

    इस मामले ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है और पीड़ित परिवार लगातार निष्पक्ष एवं त्वरित जांच की मांग कर रहा है। परिवार का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच होनी चाहिए और दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा मिलनी चाहिए। वहीं पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े प्रत्येक पहलू की वैज्ञानिक और कानूनी तरीके से जांच की जा रही है।

    फिलहाल जांच एजेंसियां सभी उपलब्ध साक्ष्यों, फोरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और अन्य तकनीकी जानकारियों का विश्लेषण कर रही हैं। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की अंतिम तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी और उसी आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

  • उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा ऐलान, ग्रेजुएट छात्राओं के लिए स्कूटी योजना; 400 करोड़ का बजट स्वीकृत

    उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा ऐलान, ग्रेजुएट छात्राओं के लिए स्कूटी योजना; 400 करोड़ का बजट स्वीकृत


    उत्तरप्रदेश । उत्तर प्रदेश सरकार ने छात्राओं के सशक्तिकरण और प्रदेश के बुनियादी ढांचे को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना सहित कुल 18 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इस योजना के तहत प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में ग्रेजुएशन करने वाली मेधावी छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। इसके अलावा सरकार ने दो नए एक्सप्रेस-वे के निर्माण, इलेक्ट्रिक बसों की खरीद और कई विकास परियोजनाओं को भी मंजूरी प्रदान की।

    उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि इस योजना के लिए 400 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया गया है। योजना का लाभ उन छात्राओं को मिलेगा जिनके परिवार की वार्षिक आय 10 लाख रुपए तक है। हालांकि दिव्यांग छात्राओं, शहीद परिवारों की बेटियों और निराश्रित परिवारों की छात्राओं के लिए आय सीमा लागू नहीं होगी।

    योजना के तहत प्रत्येक विश्वविद्यालय और कॉलेज की टॉप 5 प्रतिशत छात्राओं को पेट्रोल स्कूटी दी जाएगी। सरकार स्कूटी के साथ उसका रजिस्ट्रेशन, बीमा, हेलमेट, आवश्यक एक्सेसरीज और 4 लीटर पेट्रोल भी उपलब्ध कराएगी। हालांकि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की जिम्मेदारी छात्राओं की होगी।

    कैबिनेट बैठक में प्रदेश के सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए दो बड़े एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई। पहला 333 किलोमीटर लंबा विंध्य एक्सप्रेस-वे प्रयागराज से सोनभद्र तक बनेगा। इसकी अनुमानित लागत 26,315 करोड़ रुपए होगी। यह एक्सप्रेस-वे प्रयागराज, मिर्जापुर, भदोही, वाराणसी, चंदौली और सोनभद्र को जोड़ते हुए बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमाओं तक बेहतर संपर्क उपलब्ध कराएगा। इसके बनने से प्रयागराज से सोनभद्र की यात्रा लगभग साढ़े छह घंटे से घटकर करीब सवा तीन घंटे रह जाएगी।

    दूसरी परियोजना 117 किलोमीटर लंबा विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेस-वे है, जिसकी लागत करीब 9,039 करोड़ रुपए होगी। यह पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को विंध्य एक्सप्रेस-वे से जोड़ेगा और पूर्वी उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई मजबूती देगा।

    कैबिनेट ने परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए 220 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद को भी मंजूरी दी है, जिस पर लगभग 400 करोड़ रुपए खर्च होंगे। वहीं वाराणसी में छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के लिए नए छात्रावासों के निर्माण, सहकारी ग्राम विकास बैंक को वित्तीय सहायता, महिला कल्याण विभाग की सेवा नियमावली में बदलाव और अन्य प्रशासनिक प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई।

    सरकार ने यह भी घोषणा की कि उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 3 से 6 अगस्त तक आयोजित होगा। इसी सत्र में संभल दंगों की जांच रिपोर्ट सदन में रखी जाएगी और अनुपूरक बजट भी पेश किया जाएगा।

    सरकार का कहना है कि इन फैसलों से शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, परिवहन और आधारभूत ढांचे के विकास को नई गति मिलेगी। वहीं विपक्ष इन योजनाओं के क्रियान्वयन और बजटीय प्रबंधन पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है।

  • यूपी में बारिश का कहर, सड़कों पर दिखे मगरमच्छ; घरों में घुसा पानी, 66 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    यूपी में बारिश का कहर, सड़कों पर दिखे मगरमच्छ; घरों में घुसा पानी, 66 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    उत्तरप्रदेश । उत्तर प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और लगातार हो रही बारिश ने कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। मंगलवार सुबह से लखनऊ, कानपुर, बाराबंकी, प्रयागराज, वाराणसी समेत करीब 20 शहरों में रुक-रुककर तेज बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश की संभावना जताई है, जबकि 66 जिलों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। लगातार हो रही बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं और नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।

    सबसे चिंताजनक स्थिति लखीमपुर खीरी में देखने को मिली, जहां शारदा नदी का पानी गांवों में घुस गया। बाढ़ के साथ मगरमच्छ भी आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच गए। खेतों, सड़कों और गांवों में मगरमच्छों के दिखाई देने से लोगों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है और प्रशासन प्रभावित इलाकों पर लगातार नजर बनाए हुए है।

    प्रयागराज में बीते 24 घंटों के दौरान हुई मूसलाधार बारिश ने शहर की रफ्तार थाम दी। कई सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं और अंडरपास में करीब दो फीट तक पानी भर जाने से यातायात रोकना पड़ा। जलभराव के कारण लंबा ट्रैफिक जाम लगा और लोगों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ी। वहीं कौशांबी में घरों के भीतर पानी भर जाने से सोफा, कुर्सियां और अन्य घरेलू सामान पानी में तैरते नजर आए। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा।

    वाराणसी और प्रयागराज में गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों की कई सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं। काशी में करीब 50 छोटे मंदिरों तक नदी का पानी पहुंच गया है। उन्नाव और फिरोजाबाद के सरकारी अस्पतालों में भी घुटनों तक पानी भर गया, जिससे मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शामली में नहर टूटने से करीब 10 फीट सड़क धंस गई, जिससे यातायात प्रभावित हुआ।

    खराब मौसम को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम भी उठाए हैं। पीलीभीत और बहराइच में सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम और सक्रिय मानसूनी ट्रफ के कारण प्रदेश में 24 जुलाई तक भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद भी कई इलाकों में अगले तीन से चार दिनों तक भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी।

    लगातार हो रही बारिश और आकाशीय बिजली की घटनाओं ने भी जनहानि बढ़ाई है। पिछले तीन दिनों में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बारिश और बिजली गिरने की घटनाओं में 10 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। राहत एवं बचाव दल भी संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात कर दिए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।

  • नेट जीरो लक्ष्य की ओर गुजरात की बड़ी छलांग, एक साल में 49.79 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में रिकॉर्ड कमी दर्ज

    नेट जीरो लक्ष्य की ओर गुजरात की बड़ी छलांग, एक साल में 49.79 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में रिकॉर्ड कमी दर्ज

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2070 तक भारत को ‘नेट जीरो’ बनाने के लक्ष्य की दिशा में गुजरात ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य ने 49.79 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन को वातावरण में जाने से रोकने का रिकॉर्ड बनाया है। यह किसी एक वर्ष में राज्य द्वारा दर्ज की गई अब तक की सबसे बड़ी कार्बन कटौती मानी जा रही है। इस उपलब्धि के पीछे सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के तेजी से विस्तार को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    राज्य सरकार के अनुसार इसी अवधि में गुजरात ने 67,655 मिलियन यूनिट ग्रीन बिजली का उत्पादन भी दर्ज किया, जो स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में राज्य की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। ऊर्जा क्षेत्र में लगातार किए गए निवेश, नई नीतियों और नवीकरणीय परियोजनाओं के विस्तार से पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम हुई है। इसका सीधा प्रभाव कार्बन उत्सर्जन में कमी के रूप में सामने आया है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिली है।

    पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो गुजरात कुल 179 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन को वातावरण में जाने से रोकने में सफल रहा है। राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 442 मिलियन टन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित होती है। ऐसे में पांच वर्षों के दौरान कुल वार्षिक उत्सर्जन के लगभग 40 प्रतिशत के बराबर कार्बन कटौती दर्ज होना राज्य की हरित विकास रणनीति की प्रभावशीलता को दर्शाता है। इससे यह संकेत मिलता है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने के प्रयास लगातार मजबूत हुए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का व्यापक उपयोग कोयला तथा अन्य जीवाश्म ईंधनों की खपत को कम करता है। इससे न केवल कार्बन उत्सर्जन घटता है, बल्कि वायु प्रदूषण में भी कमी आती है। स्वच्छ ऊर्जा का बढ़ता उपयोग जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार कार्बन उत्सर्जन का प्रभाव केवल जलवायु तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा संबंध लोगों के स्वास्थ्य, कृषि, मौसम और प्राकृतिक संसाधनों से भी होता है। अत्यधिक कार्बन उत्सर्जन के कारण ग्लोबल वार्मिंग, असामान्य तापमान, अनियमित वर्षा, बाढ़ और सूखे जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। वहीं स्वच्छ ऊर्जा के अधिक उपयोग से वायु गुणवत्ता में सुधार आता है और पर्यावरणीय जोखिमों को कम करने में मदद मिलती है।

    राज्य सरकार ने ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत पहल भी लागू की हैं। ‘इंटीग्रेटेड आरई पॉलिसी 2026’, ‘ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी’ और ‘गुजरात पंप स्टोरेज पॉलिसी’ जैसी योजनाओं ने नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को नई गति दी है। इसके साथ ही ऊर्जा विभाग की निगरानी में विभिन्न सरकारी संस्थानों के समन्वित प्रयासों से राज्य के बिजली उत्पादन में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।

    गुजरात ने वर्ष 2030 तक 100 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। माना जा रहा है कि यह रोडमैप न केवल राज्य की ऊर्जा जरूरतों को स्वच्छ स्रोतों से पूरा करने में मदद करेगा, बल्कि भारत के वैश्विक जलवायु लक्ष्यों और सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। राज्य की यह उपलब्धि देश में हरित विकास के एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभरकर सामने आई है।

  • अंधेरे से उजाले तक का सफर, शोभा सिंह पुरवा में रोड लाइट लगने पर लोगों ने जताई खुशी

    अंधेरे से उजाले तक का सफर, शोभा सिंह पुरवा में रोड लाइट लगने पर लोगों ने जताई खुशी


    उत्तरप्रदेश । चित्रकूट धाम कर्वी नगर पालिका परिषद के वार्ड संख्या 21 स्थित शास्त्री नगर की अनुसूचित जाति बस्ती शोभा सिंह पुरवा में विकास कार्यों की रफ्तार लगातार तेज होती जा रही है। लंबे समय तक मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझने वाली इस बस्ती में अब विकास की नई तस्वीर दिखाई देने लगी है। हाल ही में सड़क किनारे रोड लाइटें लगाए जाने के बाद पूरा इलाका रोशनी से जगमगा उठा है। इससे न केवल वर्षों पुरानी अंधेरे की समस्या दूर हुई है, बल्कि स्थानीय लोगों में सुरक्षा और सुविधा का एहसास भी बढ़ा है। बस्तीवासियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे अपने क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक बदलाव बताया है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले रात होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता था। इससे आवागमन में परेशानी होती थी और महिलाओं, बुजुर्गों तथा बच्चों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब रोड लाइटें लगने के बाद रात के समय भी गलियां रोशन रहती हैं, जिससे लोगों की आवाजाही आसान और सुरक्षित हो गई है। नागरिकों का कहना है कि लंबे समय बाद उनकी बस्ती को ऐसी सुविधा मिली है, जिसका इंतजार वर्षों से किया जा रहा था।

    वार्ड के सभासद शंकर प्रसाद यादव ने बताया कि क्षेत्र के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से कई जनहितकारी कार्य कराए जा रहे हैं। सबसे पहले जलभराव की समस्या से राहत दिलाने के लिए नाले का निर्माण कराया गया। इसके बाद पूरे क्षेत्र में विद्युतीकरण का कार्य पूरा कराया गया और अब रोड लाइटें लगाकर लोगों को बेहतर रोशनी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने बताया कि लगभग 15 दिन पहले क्षेत्र में नई पेयजल पाइपलाइन भी बिछाई गई, जिससे लोगों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा मिलने लगी है।

    सभासद ने कहा कि उनका प्रयास केवल आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि पात्र परिवारों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाना भी है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाओं से पात्र लोगों को जोड़ने का कार्य लगातार किया जा रहा है ताकि जरूरतमंद परिवारों का जीवन स्तर बेहतर हो सके।

    मोहल्ले के बुजुर्गों और स्थानीय नागरिकों ने बताया कि आजादी के बाद पहली बार उनकी बस्ती में इतने व्यापक स्तर पर विकास कार्य देखने को मिल रहे हैं। पहले जलभराव, अंधेरा और पेयजल जैसी मूलभूत समस्याएं लोगों के लिए बड़ी चुनौती थीं, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। सड़क पर लगी नई रोड लाइटों ने पूरे इलाके की तस्वीर बदल दी है और लोगों में विश्वास जगा है कि आने वाले समय में अन्य विकास कार्य भी पूरे होंगे।

    क्षेत्रवासियों ने नगर पालिका परिषद और जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि विकास का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। उनका कहना है कि यदि इसी तरह आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होता रहा तो शोभा सिंह पुरवा जल्द ही शहर के विकसित मोहल्लों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा।

  • बांदा में सामुदायिक भवन और मंदिर परिसर का होगा कायाकल्प, करोड़ों की परियोजनाएं शुरू

    बांदा में सामुदायिक भवन और मंदिर परिसर का होगा कायाकल्प, करोड़ों की परियोजनाएं शुरू


    उत्तरप्रदेश । बांदा जिले में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और धार्मिक एवं सामाजिक स्थलों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया। रविवार को सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी और नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष श्रीमती मालती गुप्ता बासू ने विभिन्न जनहितकारी योजनाओं का भूमि पूजन एवं शिलान्यास कर क्षेत्रवासियों को विकास की नई सौगात दी। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी, वहीं धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी नया आयाम मिलेगा।

    कार्यक्रम की शुरुआत विकासखंड महुआ की ग्राम पंचायत अनथुवा से हुई, जहां लगभग 41 लाख रुपये की लागत से बनने वाले आधुनिक सामुदायिक भवन (बारात घर) का विधिवत भूमि पूजन किया गया। यह भवन ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनेगा। अब ग्रामीणों को शादी-विवाह, बैठक, सामाजिक कार्यक्रम और अन्य सामुदायिक आयोजनों के लिए बेहतर व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी, जिससे उन्हें निजी संसाधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

    इसके बाद जनप्रतिनिधियों ने नगर पालिका परिषद क्षेत्र के मोहल्ला खुटला स्थित कालका देवी मंदिर परिसर के समग्र विकास कार्य का शिलान्यास किया। लगभग 1.72 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस परियोजना के तहत मंदिर परिसर का व्यापक कायाकल्प किया जाएगा। योजना में तालाब का सुंदरीकरण, आकर्षक कला मंच का निर्माण, आधुनिक शौचालय, श्रद्धालुओं के लिए गेस्ट हाउस तथा भव्य मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण शामिल है। इस परियोजना के पूरा होने से मंदिर परिसर न केवल अधिक सुंदर और व्यवस्थित बनेगा, बल्कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

    इस अवसर पर सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य शहर और गांव दोनों क्षेत्रों में समान रूप से विकास कार्यों को गति देना है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों का संरक्षण और विकास, ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक सुविधाओं का विस्तार तथा नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी परियोजनाएं गुणवत्ता और निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी कराई जाएंगी ताकि आम जनता को जल्द से जल्द इनका लाभ मिल सके।

    नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष श्रीमती मालती गुप्ता बासू ने कहा कि नगर के धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों का विकास नगर पालिका की प्राथमिक योजनाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से शहर की सुंदरता बढ़ेगी, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने सभी नागरिकों से विकास कार्यों में सहयोग करने और सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण का भी आह्वान किया।

    भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, नगर पालिका के सभासदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों की मौजूदगी रही। लोगों ने इन परियोजनाओं का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि इनके पूरा होने से क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी और बांदा में आधारभूत सुविधाओं के साथ-साथ धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों का भी विस्तार होगा।

  • जंतर-मंतर घटना पर सियासत तेज, राहुल गांधी समेत विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन, छात्रों के मुद्दे पर सरकार से जवाब और बहस की मांग

    जंतर-मंतर घटना पर सियासत तेज, राहुल गांधी समेत विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन, छात्रों के मुद्दे पर सरकार से जवाब और बहस की मांग

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की घटना को लेकर मंगलवार को राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के कई सांसदों ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकालकर घटना का विरोध दर्ज कराया। विपक्षी नेताओं ने छात्रों के साथ हुई कार्रवाई पर सरकार से जवाब मांगा और संसद में इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग दोहराई। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों के अधिकारों, परीक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।

    राहुल गांधी ने मार्च की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से साझा करते हुए कहा कि छात्रों के साथ हुई कथित बर्बरता पर सरकार जवाब देने से बच रही है। उनका आरोप था कि सरकार इस मामले में न तो अपनी जिम्मेदारी स्वीकार कर रही है और न ही संसद में इस विषय पर चर्चा कराने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए और इस मामले को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकालने से पहले राहुल गांधी ने विपक्षी सांसदों के साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने छात्रों पर हुई कार्रवाई और परीक्षा से जुड़े मामलों पर संसद में विस्तृत चर्चा कराने की मांग रखी। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की समस्याओं और उनके भविष्य से जुड़े प्रश्नों पर संसद में खुलकर विचार होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं के भविष्य पर भी संसद में चर्चा नहीं होगी तो लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर सवाल उठेंगे।

    राहुल गांधी ने यह भी कहा कि अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल उठाने वाले छात्रों के साथ बल प्रयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष इस मुद्दे को संसद और जनता दोनों के बीच लगातार उठाता रहेगा। साथ ही उन्होंने घायल छात्रों से अस्पताल जाकर मुलाकात करने की भी बात कही और उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने की इच्छा जताई।

    इस घटनाक्रम पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्रों की मांगों और उनके अधिकारों के समर्थन में खड़ी है। उनके अनुसार लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों पर बल प्रयोग उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने सरकार से पूरे मामले में जवाब देने और घटना की जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

    छात्रों पर कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की रणनीति अपनाए हुए है। विपक्ष का कहना है कि शिक्षा, भर्ती परीक्षाओं और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दे राष्ट्रीय महत्व के विषय हैं, इसलिए इन पर संसद में व्यापक चर्चा होनी चाहिए। दूसरी ओर इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है तथा आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

    फिलहाल छात्रों के विरोध प्रदर्शन और उस पर हुई कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय बताते हुए सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है। वहीं इस मामले पर आगे संसद की कार्यवाही और राजनीतिक दलों के रुख पर सभी की नजर बनी हुई है।