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  • पुतिन की भारत यात्रा राष्ट्रपति भवन पहुंचे पीएम मोदी पुतिन का होगा औपचारिक स्वागत

    पुतिन की भारत यात्रा राष्ट्रपति भवन पहुंचे पीएम मोदी पुतिन का होगा औपचारिक स्वागत


    नई दिल्ली । रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 4 दिसंबर 2025 को दो दिवसीय भारत यात्रा शुरू की। यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही है और चार साल बाद उनकी भारत यात्रा है। इस दौरान भारत और रूस के बीच रणनीतिक और रक्षा सहयोग को बढ़ाने व्यापारिक रिश्तों को प्रगाढ़ करने और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

    भारत-रूस साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ

    पुतिन की यात्रा भारत और रूस के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर हो रही है। यह साझेदारी अक्टूबर 2000 में शुरू हुई थी और दिसंबर 2010 में इसे स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया गया। इस दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा लगातार बढ़ा है, खासकर रक्षा ऊर्जा और व्यापारिक संबंधों में।

    यात्रा का मुख्य उद्देश्य

    पुतिन की इस यात्रा में प्रमुख रूप से रक्षा सहयोग, व्यापारिक रिश्तों और बाहरी दबावों से दोनों देशों को बचाने पर ध्यान दिया जाएगा। भारत और रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में पुराने संबंध रहे हैं, और दोनों देशों के बीच यह सहयोग और मजबूत हो सकता है। साथ ही, भारत में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच साझेदारी पर विचार हो सकता है।

    शिखर सम्मेलन और RT इंडिया चैनल का शुभारंभ

    5 दिसंबर को पुतिन का औपचारिक स्वागत होगा जिसके बाद 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करेंगे जिनमें रक्षा ऊर्जा व्यापार और सामरिक साझेदारी से संबंधित मुद्दे शामिल होंगे। सम्मेलन के बाद पुतिन रूस के प्रसारक रूसी टेलीविजन के नए भारतीय चैनल का शुभारंभ करेंगे। यह चैनल भारत में रूसी मीडिया की पहुंच को बढ़ाने में मदद करेगा और भारत-रूस के संबंधों को और मजबूत बनाएगा।

    राजकीय भोज और भविष्य की दिशा

    यात्रा के अंतिम दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पुतिन के सम्मान में एक राजकीय भोज आयोजित करेंगी। यह भोज भारत-रूस संबंधों की गहरी साझेदारी और मित्रता का प्रतीक होगा। जाएगा। भारत और रूस के रिश्ते खासकर रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण रहे हैं और यह यात्रा इन रिश्तों को एक नए दौर में प्रवेश दिला सकती है।

    भारत-रूस का सामरिक महत्व

    भारत और रूस के बीच सामरिक रिश्ते बहुत मजबूत रहे हैं, विशेषकर रक्षा क्षेत्र में। रूस ने हमेशा भारत को उन्नत रक्षा प्रणाली प्रदान की है, जिसमें विमान, मिसाइलें और अन्य तकनीकी सहयोग शामिल है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा विज्ञान तकनीकी और शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ा है।  यह यात्रा भारत और रूस के रिश्तों में एक नई दिशा का संकेत देती है, जिसमें दोनों देशों के साझा हितों के साथ-साथ वैश्विक राजनीति में सामरिक समन्वय भी बढ़ेगा। पुतिन की यात्रा विशेष रूप से रक्षा और व्यापार के क्षेत्रों में भारत-रूस साझेदारी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

  • गुरुग्राम में भाजपा पार्षद की बेटी ने शादी से एक दिन पहले दर्ज कराई शिकायत, पुलिस ने सुरक्षित निकाला

    गुरुग्राम में भाजपा पार्षद की बेटी ने शादी से एक दिन पहले दर्ज कराई शिकायत, पुलिस ने सुरक्षित निकाला


    नई दिल्ली । गुरुग्राम में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें भाजपा पार्षद नरेश कटारिया की बेटी ने अपनी शादी से ठीक एक दिन पहले अपने माता-पिता के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। लड़की का आरोप है कि उसके माता-पिता उसकी मर्जी के खिलाफ शादी कराने पर अड़े हुए थे और उसे घर में बंधक बनाकर रखने की कोशिश कर रहे थे।

    सूत्रों के अनुसार, लड़की ने पुलिस को बताया कि उसके माता-पिता ने उसके मोबाइल फोन छीन लिए थे और उसे कमरे में बंद कर दिया था। इसके बावजूद उसने लैपटॉप का इस्तेमाल कर प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, पुलिस आयुक्त गुरुग्राम, जिला उपायुक्त, महिला आयोग और सेक्टर-9ए पुलिस स्टेशन को ईमेल के माध्यम से अपनी शिकायत भेजी।

    लड़की ने पुलिस को यह भी बताया कि उसने एमबीए और एमएड तक की पढ़ाई की है और पिछले 15 वर्षों से एक दोस्त के साथ प्रेम संबंध में है। उसकी शादी चार दिसंबर को तय की गई थी, लेकिन वह उस व्यक्ति से विवाह करना चाहती थी, जिससे वह लंबे समय से संबंध में है। लड़की का कहना है कि उसके माता-पिता उसकी मर्जी को नजरअंदाज कर उसे मजबूर कर रहे थे।

    सेक्टर-9ए पुलिस ने तुरंत मामले में कार्रवाई की और लड़की को देर रात उसके घर से सुरक्षित निकालकर सेफ हाउस में शिफ्ट कर दिया। पुलिस ने इस बात पर जोर दिया कि लड़की की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    भाजपा नेता नरेश कटारिया ने फिलहाल इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया है। वहीं पुलिस मामले की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई की योजना बना रही है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले परिवारिक विवाद से बढ़कर बच्चों के अधिकार और उनकी सुरक्षा का मामला बन जाते हैं। कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी मर्जी के खिलाफ शादी करने पर मजबूर किया जा रहा है, तो वह इसे पुलिस में रिपोर्ट कर सकता है और उसकी सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाए जाते हैं।

    इस घटना ने समाज में एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि पारिवारिक दबाव में लोग अपनी मर्जी के खिलाफ निर्णय लेने को मजबूर क्यों होते हैं। सामाजिक और कानूनी जानकार कहते हैं कि ऐसी परिस्थितियों में बच्चों की इच्छाओं और स्वतंत्रता का सम्मान करना जरूरी है।

    पुलिस अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि लड़की फिलहाल सुरक्षित है और उसे किसी भी तरह का खतरा नहीं है। वे परिवार के अन्य सदस्यों से पूछताछ कर रहे हैं और मामले की पूरी जांच कर रहे हैं। वहीं महिला आयोग ने भी इस मामले पर नजर बनाए रखी है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की बात कही है।

    इस घटना ने न केवल गुरुग्राम बल्कि पूरे देश में शादी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामलों पर ध्यान आकर्षित किया है। कई मानवाधिकार और महिला संगठन भी इस मामले को लेकर गंभीर हैं और उन्होंने लड़की की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उसके अधिकारों की रक्षा करने की अपील की है।

    अंततः यह मामला यह बताता है कि आज के समय में भी कई युवा अपनी पसंद और मर्जी के खिलाफ शादी के दबाव का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा, यह घटना यह भी दिखाती है कि जब युवा अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, तो कानून और पुलिस उन्हें सुरक्षा प्रदान कर सकती है।

  • बॉम्बे हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला लाउडस्पीकर का उपयोग किसी धर्म में अनिवार्य नहीं

    बॉम्बे हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला लाउडस्पीकर का उपयोग किसी धर्म में अनिवार्य नहीं


    नई दिल्ली । बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि किसी भी धर्म में लाउडस्पीकर का उपयोग अनिवार्य नहीं है। कोर्ट का यह फैसला महाराष्ट्र के गोंडिया जिले की गौसिया मस्जिद द्वारा दायर याचिका के संदर्भ में आया। मस्जिद ने लाउडस्पीकर के उपयोग को पुनः बहाल करने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। कोर्ट का मानना था कि धार्मिक पूजा के लिए लाउडस्पीकर का इस्तेमाल जरूरी नहीं है, और इसके बिना भी धार्मिक कार्य संपन्न किए जा सकते हैं।

    सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसले का संदर्भ

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का हवाला दिया। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी यह स्पष्ट किया था कि किसी भी धर्म में लाउडस्पीकर म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट या ढोल का इस्तेमाल करके शांति भंग करने का निर्देश नहीं दिया गया है। इसके बजाय, सभी धार्मिक गतिविधियां शांतिपूर्ण और बिना किसी व्यवधान के की जानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह समझना जरूरी है कि धर्म की प्रामाणिकता लाउडस्पीकर जैसे उपकरणों पर निर्भर नहीं करती।

    याचिकाकर्ता से सबूत की मांग

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता गौसिया मस्जिद से यह प्रमाणित करने के लिए सबूत मांगे थे कि नमाज पढ़ने के लिए लाउडस्पीकर का इस्तेमाल अनिवार्य है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि यह साबित नहीं हो सकता तो लाउडस्पीकर का उपयोग अनुमति देने का कोई आधार नहीं हो सकता। याचिकाकर्ता इस मामले में कोई ठोस दस्तावेज पेश करने में असफल रहा जिससे अदालत ने इसके पक्ष में निर्णय नहीं दिया। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इस तरह के मामलों में धार्मिक पूजा और ध्वनि प्रदूषण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

    ध्वनि प्रदूषण और स्वास्थ्य पर असर

    कोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण के मुद्दे पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उसने कहा कि लाउडस्पीकर से निकलने वाली ध्वनि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 का उल्लंघन कर सकती है और यह स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि भारत में हर नागरिक को अपनी इच्छा से सुनने का अधिकार है और किसी को बिना उनकी अनुमति के जोर से आवाज सुनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इसलिए यह जरूरी है कि हर व्यक्ति की शांति और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, लाउडस्पीकर का उपयोग नियंत्रित किया जाए।

    समाज में शांति और सम्मान की आवश्यकता

    बॉम्बे हाईकोर्ट का यह फैसला समाज में शांति और सम्मान बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। जहां एक ओर धार्मिक स्वतंत्रता को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, वहीं दूसरी ओर किसी के अधिकारों का उल्लंघन किए बिना यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि किसी की पूजा-पाठ में व्यवधान न आए। यह फैसला इस बात को भी उजागर करता है कि धार्मिक अनुष्ठानों में लाउडस्पीकर का उपयोग अनिवार्य नहीं है और किसी भी धर्म का पालन शांति और सम्मान के साथ किया जाना चाहिए। अंतत यह फैसला उन स्थानों पर लाउडस्पीकर के उपयोग को लेकर एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है जो न केवल धार्मिक स्वतंत्रता बल्कि समाज में शांति और समरसता के लिए भी एक अहम संदेश है।

  • इंडिगो का ऑपरेशनल क्रैश, 550 से ज़्यादा उड़ानें रद्द, DGCA की फटकार के बाद एयरलाइन ने यात्रियों से मांगी सार्वजनिक माफ़ी

    इंडिगो का ऑपरेशनल क्रैश, 550 से ज़्यादा उड़ानें रद्द, DGCA की फटकार के बाद एयरलाइन ने यात्रियों से मांगी सार्वजनिक माफ़ी


    नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो (IndiGo) इस समय अपने सबसे बड़े परिचालन संकट से जूझ रही है। गुरुवार को एयरलाइन ने देशभर में 550 से अधिक उड़ानें रद्द कर दीं, जिससे हजारों यात्रियों को एयरपोर्ट पर लंबी कतारों और भयानक अनिश्चितता का सामना करना पड़ा। इस गंभीर स्थिति पर नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने कड़ी फटकार लगाई है, जिसके बाद इंडिगो ने यात्रियों और हितधारकों से आधिकारिक तौर पर माफी मांगी है।

    नवंबर में 1200 से अधिक रद्द, स्टाफ की कमी मुख्य वजह
    इंडिगो, जो सामान्य दिनों में लगभग 2,300 उड़ानें संचालित करती है, नवंबर महीने से ही गहरे संकट में है।नवंबर में एयरलाइन को कुल 1,232 उड़ानें रद्द करनी पड़ी थींडीजीसीए की जांच के बाद, इंडिगो ने कबूल किया कि 1,232 रद्द उड़ानों में से 755 उड़ानें अकेले स्टाफ की कमी के कारण रद्द हुईं। इसके अलावा, एटीसी फेलियर (92), एयरपोर्ट प्रतिबंध (258), और अन्य कारणों से भी परिचालन बाधित हुआ।

    DGCA की सख्ती और ‘सेवा गुणवत्ता’ पर सवाल
    प्रदर्शन में आई इस भारी गिरावट के बाद डीजीसीए ने न केवल जांच के आदेश दिए, बल्कि एयरलाइन प्रबंधन को सेवा गुणवत्ता में सुधार के लिए कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी। डीजीसीए ने अधिक क्रू भर्ती करने, बेहतर योजना और निगरानी की सलाह दी है।

    सीईओ का ईमेल लीक: ‘हम वादा पूरा नहीं कर सके’
    बड़े पैमाने पर रद्दीकरण के कारण यात्रियों की नाराजगी सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आई। इस बीच, इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्ट ने कर्मचारियों को ईमेल भेजकर स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उनका ईमेल वायरल हो गया, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया।
    हम रोजाना 3.8 लाख यात्रियों की सेवा करते हैं और चाहते हैं कि हर ग्राहक को अच्छा अनुभव मिले। पिछले दिनों हम यह वादा पूरा नहीं कर सके और हमने सार्वजनिक रूप से इसके लिए माफी मांगी है।सीईओ ने परिचालन संकट के लिए मामूली तकनीकी खामियों, शेड्यूल बदलाव, खराब मौसम, एविएशन सिस्टम में भीड़भाड़ और नई FDTL नॉर्म्स (Flight Duty Time Limitations Norms) के प्रभाव को मुख्य कारण बताया।

    संकट से उबरने की ‘युद्धस्तर पर’ कवायद
    इंडिगो ने अब बयान जारी कर यात्रियों को आश्वस्त किया है कि वे MoCA, DGCA और एयरपोर्ट ऑपरेटरों के साथ समन्वय करके युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं ताकि परिचालन सामान्य हो सके। एयरलाइन ने कहा है कि वह डीजीसीए के निर्देशों का पालन करेगी और स्टाफ तथा प्रबंधन की कमी से जुड़ी समस्याओं को शीघ्र सुलझाएगी।इंडिगो ने यात्रियों से अपनी उड़ान की स्थिति लगातार जांचने और एयरपोर्ट पर समय से पहले पहुंचने की अपील की है।

  • वक्फ संपत्तियों को अपलोड करने का आज अंतिम दिन… अब तक आधा भी नहीं हुआ काम

    वक्फ संपत्तियों को अपलोड करने का आज अंतिम दिन… अब तक आधा भी नहीं हुआ काम


    नई दिल्ली।
    देशभर में फैली लगभग 8.8 लाख वक्फ संपत्तियों (8.8 lakh Waqf Properties) के डिजिटल रिकॉर्ड (Digital record) तैयार करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार (Central government) द्वारा 6 जून को लॉन्च किए गए ‘UMMEED’ पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। डेडलाइन से एक दिन पहले भी सबसे अधिक वक्फ संपत्तियों वाले राज्यों- उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और तमिलनाडु में सिर्फ 10 से 35 फीसदी संपत्तियां ही पोर्टल पर दर्ज हो पाई हैं।

    इसके मुकाबले पंजाब ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है, जहां लगभग 80% वक्फ संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड अपलोड किए जा चुके हैं। हालांकि, पंजाब में वक्फ संपत्तियों की बजाय वक्फ एस्टेट्स पंजीकृत किए जा रहे हैं। यानी एक एस्टेट में कई संपत्तियां शामिल हो सकती हैं इसलिए प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान रही।


    राज्यवार स्थिति और चुनौतियां

    उत्तर प्रदेश- सर्वाधिक वक्फ संपत्तियां, अपलोड केवल 35%
    देश में सबसे अधिक वक्फ संपत्तियां उत्तर प्रदेश में हैं- कुल 1.4 लाख।
    सुन्नी वक्फ बोर्ड: 1.26 लाख में से 36% (45,574) संपत्तियां अपलोड
    शिया वक्फ बोर्ड: 15,386 में से 18.9% (2,909) संपत्तियां अपलोड

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों का कहना है कि कई संपत्तियां सदियों पुरानी हैं, जिनके मूल दस्तावेज अनुपलब्ध हैं। एक अधिकारी ने कहा कि 20वीं सदी की शुरुआत में दर्ज किए गए वक्फ के कागज आखिर कहां से मिलेंगे? राजस्व रिकॉर्ड में यह वक्फ के रूप में दर्ज हैं, लेकिन पोर्टल दाखिल खारिज या रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज मांग रहा है। बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारूकी ने भी स्वीकार किया कि डेडलाइन से पहले पंजीकरण पूरा करना संभव नहीं है। बता दें कि बिहार UP के अलावा एकमात्र ऐसा राज्य है जहां सुन्नी और शिया बोर्ड अलग-अलग हैं, बाकी सभी राज्यों में एक ही वक्फ बोर्ड है।


    पश्चिम बंगाल- 12% पंजीकरण, तकनीकी और भाषाई दिक्कतें

    पश्चिम बंगाल की कुल 80480 वक्फ संपत्तियों में से सिर्फ 10000 यानी 12 फीसदी ही पंजीकृत हैं।
    मुख्य कारण:
    ग्रामीण क्षेत्रों में मुतवल्ली तकनीकी जानकारी से वंचित हैं।
    पोर्टल केवल अंग्रेजी में है, जबकि अधिकांश मुतवल्ली अंग्रेजी नहीं जानते।
    भूमि माप इकाइयों में अंतर है। एक बीघा बंगाल में अलग, बिहार-UP में अलग।
    TMC सरकार ने कई महीनों तक वक्फ संशोधन अधिनियम लागू करने से इनकार किया था, बाद में प्रशासन ने अपलोडिंग शुरू कराई।


    कर्नाटक- 10% पंजीकरण, सर्वर बार-बार क्रैश

    65242 वक्फ संपत्तियों में से सिर्फ 6000 अपलोड हुई हैं।
    अधिकारियों के अनुसार: पोर्टल अक्सर क्रैश हो जाता है। एक संपत्ति को अपलोड करने में 10-15 मिनट लगते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को कुछ करना चाहिए।
    पंजाब- 80% पंजीकरण, अलग मॉडल की वजह से रफ्तार
    कुल 25,000 वक्फ एस्टेट्स में से 20,000 पंजीकृत।
    कारण:
    यहां मुतवल्ली नहीं- सभी संपत्तियां बोर्ड सीधे प्रबंधन करता है।
    संपत्ति नहीं, सिर्फ एस्टेट्स अपलोड की जा रहीं, जो आसान है।


    तमिलनाडु – 10% पंजीकरण, दस्तावेज अस्पष्ट

    66092 संपत्तियों में से लगभग 6,000 अपलोड की गई हैं। TN वक्फ बोर्ड चेयरमैन नवास कानी ने कहा: अधिकांश मुतवल्ली को तकनीकी सहयोग नहीं मिला। कई संपत्तियों के दस्तावेज अस्पष्ट या अधूरे हैं। सरकार द्वारा भूमि सर्वे पूरा किए बिना सटीक रिकॉर्ड तैयार करना कठिन है।


    केंद्र सरकार की स्थिति और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

    वक्फ़ संशोधन अधिनियम के तहत पंजीकरण की अवधि कानून में निश्चित है, इसलिए केंद्र ने समय सीमा बढ़ाने से इनकार किया है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा- मैं एक्ट बदले बिना तारीख नहीं बदल सकता। विशेष परिस्थितियों में वक्फ ट्रिब्यूनल ही समय बढ़ा सकते हैं।


    सांसदों और संगठनों की मांग

    सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि UP की 70% संपत्तियां पंजीकृत नहीं… सर्वर डाउन है… ऐसा लगता है जैसे धार्मिक अधिकार समाप्त हो गए हों। वहीं कांग्रेस MP इमरान मसूद ने कहा कि तकनीकी समस्याओं के कारण मुसलमान चिंतित हैं।


    सुप्रीम कोर्ट का रुख

    SC ने समय सीमा बढ़ाने से इनकार किया है। इसने कहा कि वक्फ ट्रिब्यूनल में जाएं, वही राहत दे सकते हैं। अब डेडलाइन पूरी न कर पाने की स्थिति में बोर्ड और मुतवल्ली राज्य के वक्फ ट्रिब्यूनल में जाकर कारण बता सकते हैं। यह बोर्ड विस्तार दे सकते हैं। लेकिन बोर्डों की चिंता है। उनका मानना है कि हजारों आवेदन आने पर ट्रिब्यूनल कैसे संभालेंगे?

  • आरबीआई आज करेगा Monetary Policy का ऐलान, जानिए EMI कम होगी या नहीं!

    आरबीआई आज करेगा Monetary Policy का ऐलान, जानिए EMI कम होगी या नहीं!


    मुम्बई।
    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) (Reserve Bank of India -RBI) शुक्रवार को द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा (Bi-Monthly Monetary Policy Review) में लिए गए निर्णयों की घोषणा करेगा। विशेषज्ञों ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत कटौती किए जाने की उम्मीद जताई है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि तीसरी बार रेपो रेट को स्थिर रखा जा सकता है।

    गवर्नर संजय मल्होत्रा (Governor Sanjay Malhotra)​शुक्रवार सुबह मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन-दिवसीय बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा करेंगे। अगली द्विमासिक मौद्रिक नीति पर एमपीसी की बैठक बुधवार को शुरू हुई थी। यह बैठक घटती मुद्रास्फीति, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की तेज वृद्धि, डॉलर के मुकाबले रुपये के 90 के पार जाने और मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों की पृष्ठभूमि में हो रही है।

    खुदरा मुद्रास्फीति में गिरावट के बीच आरबीआई ने फरवरी से रेपो रेट में तीन किस्तों में कुल एक प्रतिशत की कटौती की है। हालांकि, पिछली दो बार से रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है।

    कई विशेषज्ञों का कहना है कि वृद्धि दर मजबूत बनी हुई है, लेकिन खुदरा मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय गिरावट ने प्रमुख अल्पकालिक ऋण दर में कटौती की अतिरिक्त गुंजाइश पैदा कर दी है। आरबीआई गवर्नर ने भी पिछले महीने कहा था कि नीतिगत ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश है।


    कोई बदलाव नहीं होने की संभावना

    हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​है कि आरबीआई ब्याज दर में यथास्थिति कायम रख सकता है क्योंकि आर्थिक वृद्धि में तेजी आई है जो राजकोषीय समेकन, लक्षित सार्वजनिक निवेश और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर में कटौती जैसे विभिन्न सुधारों से बनी हुई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुख्य मुद्रास्फीति सरकार द्वारा निर्धारित दो प्रतिशत के निचले स्तर से नीचे बनी हुई है। इसके अलावा भारतीय अर्थव्यवस्था ने दूसरी तिमाही में अपेक्षा से बेहतर 8.2 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर्ज की है।


    आरबीआई पर जिम्मेदारी

    सरकार ने आरबीआई को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि खुदरा मुद्रास्फीति दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर बनी रहे। आरबीआई के पहली छमाही के अपेक्षा से बेहतर आंकड़ों को देखते हुए अपने जीडीपी वृद्धि अनुमान को संशोधित करके बढ़ाने की भी उम्मीद है। भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी अनुमान को अक्टूबर में 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया था।

  • देशभर में अगले साल तक पूरी तरह बंद हो जाएंगे टोल बूथ, नए व्यवस्था होगी शुरू

    देशभर में अगले साल तक पूरी तरह बंद हो जाएंगे टोल बूथ, नए व्यवस्था होगी शुरू


    नई दिल्ली।
    देशभर में टोल टैक्स सिस्टम (Country Toll Tax System ) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने गुरुवार को कहा कि एक वर्ष में वर्तमान टोल टैक्स कलेक्शन सिस्टम (बैरियर) (Toll Tax Collection System (Barrier)) को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। टोल टैक्स को इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली से चुकाया जाएगा।

    लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान गडकरी ने बताया कि करीब दस स्थानों पर इस नई व्यवस्था को लागू किया जा चुका है। अगले एक वर्ष के अंदर इसे पूरे देश के नेशनल हाईवे नेटवर्क पर लागू कर दिया जाएगा। इससे टोल बूथ पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में करीब 10 लाख करोड़ की 4500 राजमार्ग परियोजनाएं चल रही है। बड़ी मात्रा में हाईवे निर्माण के साथ डिजिटल टोल सिस्टम लागू होने से देश में सड़क यातायात और परिवहन की रफ्तार और तेज हो जाएगी।

    टोल सिस्टम पूरी तरह से डिजिटल होगा : सरकार
    भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (एनईटीसी) तकनीक विकसित की है। इसका मकसद टोल सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल बनाना है। इसमें आरईआईडी यानी की रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइस वाहन की विंडस्क्रीन पर लगाया जाता है। यह हाईवे टोल प्लाजा पर वाहन गुजरने के दौरान बिना रुके चालक से जुड़े बैंक खाते से टोल राशि अपने आप काट देता है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को लोकसभा में दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर कहा सरकार वैकल्पिक ईंधन को प्राथमिकता दे रही है। गडकरी ने हाईड्रोजन को भविष्य का ईंधन भी करार दिया।

    सरकार ने गुरुवार को बताया कि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों के कैशलेस उपचार की योजना के तहत किए गए कुल 6,833 अनुरोधों में से अब तक सिर्फ 5,480 पीड़ित ही पात्र पाए गए हैं। गडकरी ने कहा, सड़क दुर्घटना के पीड़ितों के कैशलेस उपचार की योजना, 2025 के तहत हर दुर्घटना के मामले में पीड़ित का 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार किया जाएगा।

  • पुतिन ने उठाए अमेरिका नीतियों पर सवाल… बोले- वह खुद हमसे फ्यूल खरीदता है, तो भारत क्यों नहीं…

    पुतिन ने उठाए अमेरिका नीतियों पर सवाल… बोले- वह खुद हमसे फ्यूल खरीदता है, तो भारत क्यों नहीं…


    नई दिल्ली।
    भारत दौरे (India Visit) पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने अमेरिका (America) की नीतियों पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा है कि अगर रूसी ईंधन (Russian fuel) अमेरिका (America) खरीद सकता है, तो भारत क्यों नहीं। उनका यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिका की तरफ से भारत को रूसी तेल की खरीद को लेकर निशाना बनाया जा रहा है। इसके चलते भारत पर भारी टैरिफ भी लगाया गया है।

    पुतिन ने कहा, ‘अमेरिका अपने न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए हमसे न्यूक्लियर फ्यूल खरीदना जारी रखता है। वह भी तो ईंधन है। एनर्जी है। यह न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए यूरेनियम है, जो अमेरिका में काम कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘अगर अमेरिका के पास हमसे फ्यूल खरीदने का अधिकार है, तो भारत को इस अधिकार से वंचित क्यों रखा जाना चाहिए। यह बहुत ही बारीकी से अध्ययन करने वाला मुद्दा है। हम राष्ट्रपति ट्रंप के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करने और बहस करने के लिए तैयार हैं।’

    रूसी राष्ट्रपति ने रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के मद्देनजर भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करने के बारे में पूछे गए प्रश्न के जवाब में कहा, ‘इस वर्ष के पहले नौ महीनों के दौरान कुल व्यापार कारोबार में कुछ गिरावट आई है। यह बस एक मामूली समायोजन है। कुल मिलाकर, हमारा व्यापार कारोबार लगभग पहले के स्तर पर ही बना हुआ है।’


    भारत की प्रगति से डरे देश
    पुतिन ने कहा कि कुछ वैश्विक ताकतें दुनिया के बाजारों में भारत की बढ़ती ताकत से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि रूसी तेल की खरीद को लेकर पश्चिम की चिंताएं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ फैसला भारत के बढ़ते आर्थित प्रभाव के बारे में चिंता दिखाता है। उन्होंने कहा कि दो देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी की बुनियाद लंबी है। उन्होंने कहा, ‘भारत के साथ हमारे ऊर्जा सहयोग पर मौजूदा हालात, राजनीति या यूक्रेन में हो रही घटनाओं का कोई असर नहीं पड़ा है।’ रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिका के आक्रामक रुख पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, ‘कुछ बाहरी दबावों के बावजूद, न तो मैंने और न ही प्रधानमंत्री मोदी ने कभी भी, किसी के खिलाफ काम करने के लिए हमारी साझेदारी का इस्तेमाल नहीं किया।’


    ट्रंप पर क्या बोले
    उन्होंने कहा, ‘अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अपना एजेंडा है, अपने लक्ष्य हैं, जबकि हमारा ध्यान अपने ऊपर है – किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि हमारा लक्ष्य अपने-अपने हितों, भारत और रूस के हितों की रक्षा करना है।’ रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-अमेरिका संबंध पिछले दो दशकों में शायद सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं और अमेरिका ने भारतीय सामान पर भारी 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है, जिसमें रूस से कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत कर भी शामिल है।

  • दिल्ली उच्च न्यायालय में वरिष्ठ वकील के टेप लगाकर आने पर न्यायाधीश नाराज़, अगली सुनवाई जनवरी 2026 तक टली

    दिल्ली उच्च न्यायालय में वरिष्ठ वकील के टेप लगाकर आने पर न्यायाधीश नाराज़, अगली सुनवाई जनवरी 2026 तक टली


    दिल्ली। उच्च न्यायालय में एक अनोखी घटना सामने आई, जब एक वरिष्ठ वकील सुनवाई के दौरान अपने मुँह पर लाल रंग की टेप लगाकर अदालत कक्ष में पहुँचे। इस असामान्य घटना को देखकर न्यायाधीशों ने कड़ी नाराज़गी जताई और मामले की अगली सुनवाई को जनवरी 2026 तक के लिए टाल दिया। वकील का कहना था कि वह अपने साथ हुई पिछली सुनवाई की घटना के विरोध में ऐसा कर रहे थे, जहाँ उन्हें बीच में ही बोलने से रोक दिया गया था।

    यह घटना 1 दिसंबर की है। अदालत उस समय अवमानना से जुड़े एक मामले और उससे संबंधित एक याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसे नंद किशोर नामक व्यक्ति ने दायर किया था। लगभग 25 वर्ष से अधिक समय तक कानूनी सेवा में रहे अधिवक्ता आर. के. सैनी टेप लगाकर अदालत में उपस्थित हुए। उन्हें इस रूप में देखकर न्यायाधीशों को पहले तो यह लगा कि शायद उन्हें किसी प्रकार की चोट लगी है, जिसके कारण उन्होंने यह कदम उठाया है।

    सुनवाई कर रही पीठ में न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव सांब्रे और न्यायमूर्ति अनीश दयाल शामिल थे। दोनों न्यायाधीशों ने सैनी से टेप लगाने का कारण पूछा। इस पर सैनी ने कहा कि यह उनका प्रतीकात्मक विरोध है। उन्होंने बताया कि पिछली सुनवाई के दौरान उन्हें अपनी दलीलें पूरी करने का अवसर नहीं दिया गया था और उन्हें बीच में ही रोक दिया गया था। इसी कारण वह अपने विरोध को दर्ज कराने के लिए इस तरह उपस्थित हुए हैं।

    वकील का यह जवाब सुनकर अदालत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट लिखा कि सैनी का यह आचरण अत्यंत अनुचित है और एक अनुभवी वकील से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि पिछली सुनवाई में उन्हें इसलिए रोका गया था क्योंकि उनकी दलीलें बहुत लंबी और दोहराव वाली थीं, और न्यायालय को दूसरे पक्ष की बात भी सुननी थी। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत का उद्देश्य किसी भी पक्ष को चुप कराना नहीं था, बल्कि सुनवाई को संतुलित और न्यायसंगत बनाए रखना था।

    न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि इस तरह का व्यवहार अदालत की गरिमा को ठेस पहुँचाता है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि एक वरिष्ठ वकील, जिनके पास 25 वर्ष से अधिक का अनुभव है, उनसे अधिक संयम और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है। न्यायालय ने यह भी चेतावनी दी कि यदि वह चाहती तो सैनी के खिलाफ कड़े आदेश जारी कर सकती थी, परंतु उसने ऐसा न करने का निर्णय लिया है। अदालत ने इस घटना को अदालत की कार्यवाही के रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्देश दिया, ताकि भविष्य में इस प्रकार के व्यवहार पर अंकुश लगाया जा सके।

    घटना के बाद अदालत ने मुख्य मामले को आगे बढ़ाने के बजाय अगली सुनवाई की तारीख 21 जनवरी 2026 निर्धारित कर दी। न्यायालय का मानना था कि इस प्रकार के हस्तक्षेप से सुनवाई के वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और मुख्य मुद्दों से ध्यान भटक जाता है।

    इस पूरे प्रकरण ने न्यायालय कक्ष में बैठे अन्य लोगों को भी आश्चर्य में डाल दिया। वकील द्वारा अपनाई गई इस शैली को कुछ लोगों ने अनुचित बताया, जबकि कुछ ने इसे अभिव्यक्ति का तरीका कहा। हालांकि, न्यायालय ने अपने स्पष्ट रुख से यह संदेश दिया कि अदालत अनुशासनहीनता को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करेगी।

    यह घटना न्यायालय की गरिमा, वकीलों के आचरण और न्यायिक प्रक्रिया में मर्यादा के महत्व को एक बार फिर उजागर करती है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी प्रकार का असंवेदनशील या अनुचित प्रदर्शन अदालत की पवित्रता को प्रभावित करता है और इसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जा सकता।

  • मप्र विधानसभा में द्वितीय अनुपूरक बजट पेश, 13476.94 करोड़ रुपये का प्रावधान

    मप्र विधानसभा में द्वितीय अनुपूरक बजट पेश, 13476.94 करोड़ रुपये का प्रावधान


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को राज्य सरकार द्वारा सदन में वित्त वर्ष 2025–26 के लिए द्वितीय अनुपूरक अनुमान पेश किया है। इस पर गुरुवार, चार दिसंबर को 3:30 घंटे चर्चा होगी। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा पेश किए गए दूसरे अनुपूरक बजट में कुल 13476 करोड़ 94 लाख रुपये का प्रावधान रखा गया है। इसमें राजस्व मद में 8,448.57 करोड़ और पूंजीगत मद में 5,028.37 करोड़ शामिल हैं। सरकार ने इस अनुपूरक बजट में ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, बुनियादी ढांचा, जल संसाधन और औद्योगिक निवेश जैसे अहम क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया है।

    दूसरे अनुपूरक बजट में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण विकास विभाग को 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान दिया गया है। पंचायत विभाग को पंद्रहवें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के अनुसार 1,633 करोड़ रुपये के अनुदान का प्रावधान किया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना 2023 के लिए राजस्व मद में 1,794 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अंतर्गत उत्पादन संस्थाओं को ऋण सहायता हेतु 2,000 करोड़ रुपये की पूंजीगत राशि का प्रावधान किया गया। इसी तरह, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को भूमि अधिग्रहण, सर्वे, डिमार्केशन और सेवा शुल्क हेतु 650 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

    नर्मदा घाटी एवं जल संसाधन परियोजनाओं में बड़ा निवेश
    नर्मदा घाटी विकास विभाग के लिए सरदार सरोवर डूब प्रभावित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण और अन्य कार्यों के लिए 600 करोड़ रुपये, बरगी नहर विस्तार योजना के लिए 200 करोड़ रुपये, इंदिरा सागर परियोजना (एमसीएडी) के लिए 94 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। जल संसाधन विभाग को भी बांध व संबंधित कार्यों के लिए 300 करोड़ रुपये तथा बहुती फिल्टर संयंत्र-2 फेज-2 के लिए 63 रुपये करोड़ आवंटित हुए हैं। किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग के अंतर्गत भावांतर/लेट रेट योजना पर 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

    शहरी विकास एवं अमृत मिशन में अमृत 2.0 मिशन के तहत अटल मिशन फॉर रीजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन के लिए 150 करोड़, मिलियन प्लस शहरों के लिए 115 करोड़, एक लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। लोक निर्माण विभाग को भूमि अधिग्रहण मुआवजे के लिए 300 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसके अलावा शिक्षा विभाग में पीएम जनमन (समग्र शिक्षा) हेतु 122 करोड़, जबकि धरती आबा जनजातीय ग्राम उन्नयन अभियान के लिए 108 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है।