Category: National

  • आयुष्मान कार्ड: साल भर मुफ्त इलाज की सच्चाई और 5 लाख रुपये की सीमा

    आयुष्मान कार्ड: साल भर मुफ्त इलाज की सच्चाई और 5 लाख रुपये की सीमा


    भारत / सरकार ने आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ देने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं, जिनमें आयुष्मान भारत योजना सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। इसे दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में गिना जाता है।

    क्या सच में साल भर मुफ्त इलाज मिलता है?

    आयुष्मान कार्ड मिलने के बाद अक्सर लाभार्थियों के मन में यही सवाल उठता है कि क्या वे पूरे साल अस्पताल में मुफ्त इलाज करवा सकते हैं। असल में, योजना तकनीकी रूप से साल में असीमित भर्ती की सुविधा देती है, लेकिन 5 लाख रुपये की वार्षिक सीमा तक ही कैशलेस इलाज संभव है।

    5 लाख की वार्षिक सीमा का मतलब

    यह राशि पूरा परिवार के लिए होती है, न कि प्रति व्यक्ति।

    उदाहरण: यदि परिवार में 6 सदस्य हैं, तो 5 लाख रुपये किसी एक सदस्य के इलाज या सभी के इलाज में साझा किए जा सकते हैं।

    वार्षिक सीमा पूरी होने के बाद का खर्च मरीज को खुद वहन करना होगा।

    किस इलाज में मिलता है लाभ?

    योजना मुख्य रूप से गंभीर बीमारियों और अस्पताल में भर्ती इलाज के लिए है।

    OPD, ब्लड टेस्ट, एक्स-रे या मामूली दवाइयाँ योजना में शामिल नहीं।

    गंभीर इलाज जैसे:

    हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट

    प्रोस्टेट कैंसर

    किडनी ट्रांसप्लांट

    कोरोनरी एंजियोप्लास्टी

    न्यूरो सर्जरी

    सभी प्रक्रियाएं कैशलेस होती हैं और मरीज भारी बिल से राहत पाता है।

    घर बैठे बनाएं अपना आयुष्मान कार्ड

    पहले कार्ड बनवाने के लिए कई सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी हो गई है।

    Ayushman App डाउनलोड करें और अपने स्मार्टफोन से कार्ड बनवाएं।

    लॉगिन के लिए मोबाइल नंबर और आधार का उपयोग होता है।

    राज्य और जिले का चयन कर परिवार की पात्रता (Eligibility) चेक की जा सकती है।

    यदि किसी सदस्य का नाम लिस्ट में है लेकिन कार्ड जनरेट नहीं हुआ है, तो ‘Authenticate’ विकल्प से e-KYC पूरी की जा सकती है।

    वेरिफिकेशन के एक हफ्ते के भीतर कार्ड डाउनलोड किया जा सकता है।

    आयुष्मान कार्ड गंभीर बीमारियों के लिए साल में कैशलेस इलाज प्रदान करता है, लेकिन यह सुविधा 5 लाख रुपये की वार्षिक सीमा तक ही है और पूरे परिवार के लिए साझा होती है।

  • गोवा नाइट क्लब अग्निकांड: फरार लूथरा ब्रदर्स को पकड़ने इंटरपोल से ब्लू कॉर्नर नोटिस की तैयारी

    गोवा नाइट क्लब अग्निकांड: फरार लूथरा ब्रदर्स को पकड़ने इंटरपोल से ब्लू कॉर्नर नोटिस की तैयारी


    गोवा/ के एक नाइट क्लब में हुए भीषण अग्निकांड के बाद फरार क्लब मालिक सौरव और गौरव लूथरा की तलाश तेज हो गई है। हादसे में 25 लोगों की मौत हो गई थी और कई अभी भी इलाजरत हैं। जांच एजेंसियां दोनों भाइयों के खिलाफ इंटरपोल के जरिए ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर रही हैं। जानकारी के अनुसार, आग लगने के कुछ ही घंटे बाद लूथरा ब्रदर्स थाईलैंड के फुकेट भाग गए।

    फुकेट के लिए उड़ान:
    सूत्रों के अनुसार, 7 दिसंबर की सुबह 5:30 बजे इंडिगो की फ्लाइट 6ई-1073 से मुंबई होते हुए दोनों भाई फुकेट के लिए रवाना हुए। घटना के तुरंत बाद गोवा पुलिस ने उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया था।

    दिल्ली में घर बंद:
    गोवा पुलिस की टीमें दिल्ली में जीटीबी नगर स्थित उनके आवास पर पहुंचीं। वहां ताला लगा मिला और घर में कोई मौजूद नहीं था। पुलिस को शक है कि फरारी की योजना पहले से बनाई गई थी।

    तीसरे पार्टनर अजय गुप्ता की तलाश:
    जांच में यह सामने आया कि नाइट क्लब के संचालन में अजय गुप्ता नाम का तीसरा पार्टनर भी शामिल था। पुलिस अब उसकी भूमिका की जांच कर रही है और उसकी तलाश तेज कर दी गई है।

    25 लोगों की मौत, कई घायलों का इलाज जारी:
    यह हादसा शनिवार देर रात पणजी से 25 किलोमीटर दूर नाइट क्लब में हुआ। आग लगने से 25 लोगों की मौत हुई, जिनमें 20 कर्मचारी और 5 पर्यटक शामिल थे। मृतकों में 4 पर्यटक दिल्ली से थे। पांच घायलों का इलाज गोवा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (GMCH) में जारी है।

    एफआईआर और इंटरपोल मदद:
    गोवा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। फरारी की पुष्टि के बाद इमिग्रेशन ब्यूरो से उनके यात्रा ब्योरे जुटाए गए। अब इंटरपोल के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई करते हुए उन्हें पकड़ने की तैयारी की जा रही है।

    अग्निकांड की गुत्थी:
    पुलिस को संदेह है कि क्लब में सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी की गई। लूथरा ब्रदर्स और उनके तीसरे पार्टनर की गिरफ्तारी के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा लापरवाही का नतीजा था या इसके पीछे कोई साजिश थी।

    यह खबर राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा नियमों और अग्नि सुरक्षा के पालन की गंभीर चेतावनी भी देती है।

  • IndiGo का बड़ा ऐलान: फ्लाइट कैंसिल होने पर मिलेगा ऑटोमेटिक रिफंड, रीशेड्यूलिंग होगी फ्री

    IndiGo का बड़ा ऐलान: फ्लाइट कैंसिल होने पर मिलेगा ऑटोमेटिक रिफंड, रीशेड्यूलिंग होगी फ्री



    नई दिल्ली ।
    देशभर में इंडिगो की उड़ानों में भारी अव्यवस्था के बीच एयरलाइन ने यात्रियों के लिए राहत का बड़ा ऐलान किया है। इंडिगो ने 5 से 15 दिसंबर तक की सभी बुकिंग्स के लिए कैंसिलेशन और रीशेड्यूलिंग को पूरी तरह मुफ्त करने की घोषणा की है। साथ ही कैंसिल हुई सभी उड़ानों का रिफंड भी ऑटोमेटिक रूप से यात्रियों को वापस किया जाएगा जिससे उन्हें अतिरिक्त प्रक्रिया की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    इंडिगो का संकट और राहत के कदम

    इंडिगो इस समय अपनी सबसे गंभीर परिचालन संकट का सामना कर रही है। कई उड़ानें कैंसिल हुईं, घंटों की देरी हुई और हजारों यात्री एयरपोर्ट पर फंसे रहे। सामान न मिलने की शिकायतें और लंबी कतारें भी आम हो गईं। इस हालात के मद्देनजर, एयरलाइन ने सार्वजनिक बयान जारी किया और यात्रियों से माफी मांगी। इंडिगो ने स्वीकार किया कि पिछले कुछ दिन दोनों  कंपनी और यात्रियों के लिए कठिन थे और इस संकट का हल एक दिन में नहीं हो सकता। कंपनी ने यह भी बताया कि 5 दिसंबर को सिस्टम और उड़ान शेड्यूल को रीसेट किया गया था, ताकि अगले दिन से सुधार शुरू किया जा सके।

    इंडिगो ने प्रभावित यात्रियों के लिए कई राहत उपायों का ऐलान किया। इसके तहत:

    ऑटोमेटिक रिफंड सभी कैंसिल की गई उड़ानों का रिफंड स्वतः उसी भुगतान माध्यम में वापस किया जाएगा जिससे टिकट बुक किया गया था। यात्रियों को इसके लिए किसी आवेदन की आवश्यकता नहीं होगी। फ्री रीशेड्यूलिंग 5 से 15 दिसंबर के बीच की सभी बुकिंग पर फ्री कैंसिलेशन और फ्री रीशेड्यूलिंग की सुविधा होगी। और स्नैक्स की व्यवस्था सीनियर सिटिजन के लिए लाउंज एक्सेस और महानगरों में होटल रूम और परिवहन की व्यवस्था शामिल है।

    यात्रियों से अपील

    इंडिगो ने यात्रियों से अपील की है कि वे एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस वेबसाइट या मोबाइल नोटिफिकेशन से चेक करें। अगर फ्लाइट कैंसिल हो, तो एयरपोर्ट न पहुंचें। एयरलाइन ने कॉल वॉल्यूम को संभालने के लिए कस्टमर केयर की क्षमता बढ़ाई है और यात्रियों को 6 एस्काई नामक AI असिस्टेंट के जरिए रिफंड स्टेटस और रीबुकिंग की जानकारी भी उपलब्ध करवाई जा रही है।

    विकट हालात और प्रभावित यात्री

    पिछले कुछ दिनों में देशभर के एयरपोर्ट्स पर हालात बेहद चुनौतीपूर्ण रहे जिससे हजारों यात्रियों की उड़ानें प्रभावित हुईं। इस अव्यवस्था के कारण कई यात्रियों की जरूरी मेडिकल अपॉइंटमेंट्स छूट गईं छात्रों की परीक्षाएं प्रभावित हुईं और बिजनेस ट्रैवलर्स को अपनी मीटिंग्स में भारी नुकसान हुआ। इसके अलावा परिवारों को छोटे बच्चों के साथ घंटों एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ा जिससे यात्री और अधिक परेशान हुए।

    इंडिगो का भविष्य और सुधार की दिशा

    इंडिगो ने स्पष्ट किया कि यह संकट तुरंत खत्म नहीं होगा लेकिन वे ऑपरेशन को सामान्य बनाने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं। एयरलाइन ने दावा किया कि आने वाले दिनों में उड़ानों की स्थिति धीरे-धीरे पटरी पर लौटेगी और यात्री जल्द ही सामान्य सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। इंडिगो के इस बड़े ऐलान से लाखों यात्रियों को राहत मिली है। अब इंडिगो की पूरी कोशिश है कि वह पूरी तरह से सामान्य संचालन की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए और यात्रियों का विश्वास वापस प्राप्त करे।

    इंडिगो के इस राहत पैकेज से यात्रियों को निश्चित रूप से राहत मिली है, खासकर ऑटोमेटिक रिफंड और फ्री रीशेड्यूलिंग की सुविधा से। हालांकि इंडिगो ने स्वीकार किया है कि यह संकट एक दिन में हल नहीं हो सकता और उन्हें अपनी सेवाओं को सुधारने में कुछ समय लगेगा। यात्रियों को अभी भी फ्लाइट स्टेटस चेक करते रहना होगा, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी।

  • ध्वनि प्रदूषण और नागरिक अधिकारों के चलते याचिका खारिज

    ध्वनि प्रदूषण और नागरिक अधिकारों के चलते याचिका खारिज


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र के गोंदिया जिले की मस्जिद गौसिया ने नमाज के दौरान लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति की मांग की थी, लेकिन बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने इस याचिका को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति अनिल पंसारे और न्यायमूर्ति राज वकोड़े की पीठ ने कहा कि कोई भी धर्म लाउडस्पीकर का उपयोग करके पूजा या प्रार्थना करने को अनिवार्य नहीं मानता, इसलिए इसे मौलिक अधिकार के रूप में नहीं मांगा जा सकता।

    कोर्ट ने सुप्रीम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि धर्म के पालन के लिए आवाज बढ़ाने वाले उपकरणों का उपयोग अनिवार्य नहीं है। पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में असमर्थ रहा कि लाउडस्पीकर धार्मिक अभ्यास के लिए आवश्यक है। इसलिए याचिका खारिज की जाती है।

    मामला महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में मस्जिद गौसिया द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। मस्जिद ने नमाज के लिए लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति देने का अनुरोध किया था, जिसे कोर्ट ने 1 दिसंबर को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी धर्म में यह नहीं कहा गया है कि प्रार्थना दूसरों की शांति भंग करके की जाए या केवल आवाज बढ़ाने वाले उपकरणों से ही की जा सकती है।

    सुप्रीम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए पीठ ने यह भी कहा कि अन्य नागरिकों को शांत वातावरण में रहने का अधिकार है। विशेष रूप से छोटे बच्चे, बुजुर्ग, बीमार और मानसिक तनाव से ग्रस्त लोगों को इस अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि धर्म के पालन और नागरिकों के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

    कोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण के गंभीर खतरे पर भी ध्यान दिलाया। लाउडस्पीकर और अन्य तेज आवाज वाले उपकरण लगातार फाइट और फ्लाइट जैसी स्थिति पैदा कर सकते हैं, जिससे शरीर में तनाव हार्मोन जैसे कार्टिसोल और अन्य हानिकारक रसायन बढ़ सकते हैं। इससे हृदय रोग, चिड़चिड़ापन, थकान, सिरदर्द और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

    पीठ ने कहा कि केवल धार्मिक अभ्यास के नाम पर इस तरह के उपकरणों का उपयोग समाज और स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर सकता है। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से कहा कि इस मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाई जाए और प्रभावी उपाय किए जाएँ ताकि ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके और नागरिकों के स्वास्थ्य और शांति का संरक्षण हो।

    अदालत ने यह स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार सीमित है और इसे अन्य लोगों के अधिकारों के हनन के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता ने यह साबित नहीं किया कि लाउडस्पीकर के माध्यम से प्रार्थना करना अनिवार्य है, इसलिए न्यायालय ने याचिका को खारिज किया।

    कोर्ट का यह निर्णय धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने यह रेखांकित किया कि धार्मिक अभ्यास का अर्थ यह नहीं है कि अन्य लोगों की शांति और स्वास्थ्य की अनदेखी की जाए। सभी नागरिकों का शांत वातावरण में रहने का अधिकार सर्वोच्च है और इसे सुरक्षित रखना समाज और कानून की जिम्मेदारी है।

    इस तरह, बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने मस्जिद गौसिया की याचिका खारिज करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि धार्मिक अभ्यास के नाम पर लाउडस्पीकर का प्रयोग अनिवार्य नहीं है और न ही इसे नागरिकों के अधिकारों के विपरीत किया जा सकता है। अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि इस तरह के मामलों में संतुलन बनाए रखना और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना आवश्यक है।

  • IndiGo Flight Cancellation: 6 दिसंबर को उड़ानें बहाल लेकिन पूर्ण सामान्यता में वक्त लगेगा

    IndiGo Flight Cancellation: 6 दिसंबर को उड़ानें बहाल लेकिन पूर्ण सामान्यता में वक्त लगेगा


    नई दिल्ली । 6 दिसंबर को देशभर में हवाई यात्रियों के लिए राहत की खबर आई जब IndiGo ने अपनी उड़ान सेवाएं कुछ हद तक बहाल कर दीं। हालांकि, विमानन कंपनी के ऑपरेशन अभी पूरी तरह से सामान्य नहीं हुए हैं। तकनीकी संकट के कारण कई घंटों तक उथल-पुथल रही और कई उड़ानें रद्द हो गईं। इंडिगो के अनुसार उनके ऑपरेशन को पूरी तरह से सामान्य होने में कुछ और दिन लग सकते हैं और अनुमान है कि 10 से 15 दिसंबर तक शेड्यूल स्थिर हो सकेगा।

    यात्रियों को अभी भी मुश्किलों का सामना

    उड़ानें शुरू होने के बाद भी यात्रियों की समस्याएं खत्म नहीं हुईं। कई यात्री अभी भी रिफंड की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि रीबुकिंग में दिक्कतें आ रही हैं। ऐप और वेबसाइट धीमे चलने के कारण लोग अपनी टिकट अपडेट नहीं कर पा रहे हैं और उड़ानों के समय में भी लगातार बदलाव हो रहे हैं। इस वजह से यात्रियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है और एयरपोर्ट्स और स्टेशनों पर भारी भीड़ देखी जा रही है।

    दूसरी एयरलाइनों का सहयोग

    IndiGo की परेशानियों को देखते हुए अन्य एयरलाइनों ने यात्रियों को राहत देने के लिए कदम उठाए। स्पाइसजेट ने कुछ नए रूट्स पर अतिरिक्त उड़ानें शुरू कीं जबकि एयर इंडिया ने भी भीड़ भाड़ वाले मार्गों पर अपनी फ्लाइट्स की संख्या बढ़ा दी। इसके चलते कई फंसे हुए यात्रियों को वैकल्पिक उड़ान मिल सकी जिससे उनकी परेशानी कुछ हद तक कम हुई।

    रेलवे की राहत और सरकार का नियंत्रण

    हवाई सेवाओं में गड़बड़ी का सीधा असर रेलवे पर पड़ा क्योंकि लोग ट्रेन से यात्रा करने की ओर रुख कर रहे थे। इस स्थिति को संभालने के लिए भारतीय रेलवे ने कई रूट्स पर अतिरिक्त कोच और विशेष ट्रेनें चलाईं जिससे लंबी दूरी के यात्रियों को राहत मिली। यह कदम काफी प्रभावी साबित हुआ और बड़ी संख्या में यात्री अपनी यात्रा को सुगमता से पूरा कर पाए।

    सरकार ने भी हालात की गंभीरता को समझते हुए 24 घंटे काम करने वाला कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिया है। नागर विमानन मंत्रालय और DGCA नागरिक उड्डयन महानिदेशालय लगातार एयरलाइनों से अपडेट ले रहे हैं और यात्रियों के हित में सख्त निगरानी रखी जा रही है। मंत्रालय का मुख्य उद्देश्य किरायों में बढ़ोतरी को रोकना और उड़ानों की नियमितता को जल्दी से बहाल करना है ताकि यात्रियों को कोई नुकसान न हो।

    इंडिगो की फ्लाइट्स पर असर

    इंडिगो की उड़ानों पर गड़बड़ी के कारण तिरुवनंतपुरम चेन्नई और चंडीगढ़ जैसे प्रमुख एयरपोर्ट्स पर भी प्रभाव पड़ा। तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर 22 घरेलू और 4 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें तय थीं, जिनमें से छह घरेलू उड़ानें रद्द कर दी गईं। चेन्नई एयरपोर्ट पर 48 इंडिगो उड़ानें रद्द हुईं जिसमें 28 प्रस्थान और 20 आगमन शामिल थे। चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर भी 10 उड़ानें रद्द हो गईं जिससे स्थानीय यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    आगे क्या होगा

    यात्रियों के लिए अगले कुछ दिन अहम होंगे, क्योंकि उड़ानों के समय में बदलाव संभव है और कई उड़ानें सीमित संख्या में चलाई जाएँगी। रिफंड और रीबुकिंग की प्रक्रिया में भी कुछ और समय लग सकता है, क्योंकि सिस्टम धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। हालांकि एयरलाइन और सरकारी अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार होगा और यात्रियों को राहत मिलेगी।

    6 दिसंबर को इंडिगो के ऑपरेशन में आंशिक सुधार हुआ लेकिन अभी पूरी स्थिति सामान्य होने में समय लगेगा। सरकार और अन्य एयरलाइनों द्वारा उठाए गए कदमों से यात्रियों को कुछ राहत मिली है लेकिन पूरी प्रक्रिया के सामान्य होने में कुछ दिन और लग सकते हैं। ऐसे में यात्रियों को समय रहते उड़ान का शेड्यूल चेक करते रहना चाहिए और किसी भी बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए।

  • पुस्तक में सिगरेट दिखाने को नहीं माना तंबाकू उत्पाद का प्रचार

    पुस्तक में सिगरेट दिखाने को नहीं माना तंबाकू उत्पाद का प्रचार


    नई दिल्ली। सुप्रीम न्यायालय ने शुक्रवार को अरुंधति रॉय की पुस्तक ‘मदर मैरी कम्स टू मी’ के संबंध में दायर याचिका खारिज कर दी। याचिका में पुस्तक की बिक्री, वितरण और प्रदर्शन पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि पुस्तक के आवरण पर रॉय को सिगरेट पीते हुए दिखाया गया है, जो कानून का उल्लंघन है।

    केरल के उच्च न्यायालय द्वारा जनहित याचिका खारिज होने के बाद याचिकाकर्ता राजसिम्हन ने उच्चतम न्यायालय में अपील की थी। इस मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने की। पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि पुस्तक में किसी प्रकार का सिगरेट या तंबाकू उत्पाद का प्रचार नहीं किया गया है और न ही लेखक ने ऐसा करने की कोशिश की है।

    प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि रॉय एक प्रसिद्ध लेखिका हैं और उन्होंने पुस्तक में कोई ऐसा संदेश नहीं दिया है जो तंबाकू उत्पादों के प्रचार के रूप में देखा जा सके। उन्होंने कहा कि पुस्तक में चेतावनी भी दी गई है और इसे केवल पाठकों के लिए प्रकाशित किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शहर में किसी प्रकार की किताब की होर्डिंग नहीं लगाई गई है और यह मामला केवल पुस्तक के पाठक वर्ग तक सीमित है।

    पीठ ने यह भी कहा कि लेखक और प्रकाशक ने तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 की धारा पांच का उल्लंघन नहीं किया है। इस धारा के तहत सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन, प्रचार और प्रायोजन पर प्रतिबंध है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “हमें उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता।”

    याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि पुस्तक में सिगरेट के रूप में दिखाए गए चित्र के साथ पर्याप्त चेतावनी नहीं है और डिस्क्लेमर भी बहुत छोटा है। उन्होंने कहा कि स्पष्ट नहीं है कि यह सामान्य बीड़ी है या किसी अन्य प्रकार का तंबाकू उत्पाद।

    प्रधान न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि पुस्तक, लेखक या प्रकाशक का किसी भी प्रकार के तंबाकू उत्पादों के प्रचार से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पाठक लेखक के विचारों से असहमत हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इस आधार पर मुकदमा दायर किया जाए।

    अदालत ने यह स्पष्ट किया कि पुस्तक केवल लेखक के अनुभव और संस्मरण पर आधारित है और इसमें किसी प्रकार का विज्ञापन या प्रचार शामिल नहीं है। पुस्तक में दिखाई गई तस्वीरें लेखक के निजी अनुभव को दर्शाती हैं, न कि किसी उत्पाद के प्रचार के लिए बनाई गई हैं।

    इस मामले में उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने यह मान्यता दी कि लेखक और प्रकाशक ने किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि पुस्तक पाठकों तक अपनी कहानियों और विचारों के माध्यम से पहुँचना चाहती है, न कि किसी तंबाकू उत्पाद के प्रचार के लिए।

    अदालत का यह निर्णय लेखक की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कला की स्वतंत्रता के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी को लेखक के विचार पसंद नहीं आते, तो उसके खिलाफ कानून द्वारा सीधे कार्रवाई नहीं की जा सकती।

    इस प्रकार, सुप्रीम न्यायालय ने अरुंधति रॉय की पुस्तक पर किसी भी प्रकार के प्रतिबंध को नकारते हुए याचिका खारिज कर दी। अदालत ने यह संदेश भी दिया कि पुस्तक, लेखक और प्रकाशक की जिम्मेदारी केवल पाठकों तक साहित्यिक सामग्री पहुँचाने तक सीमित है, और इसमें किसी तंबाकू उत्पाद के प्रचार का कोई तत्व नहीं है।

  • दिल्ली कोर्ट में अर्जी दायर, 1978 के वोटर केस पर सोनिया गांधी पर कार्रवाई की मांग

    दिल्ली कोर्ट में अर्जी दायर, 1978 के वोटर केस पर सोनिया गांधी पर कार्रवाई की मांग


    नई दिल्‍ली । कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी के खिलाफ वोट चोरी का मुकदमा दर्ज कराने के लिए एक शख्स ने दिल्ली के राउज़ एवेन्यू कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अपनी अर्जी में उस शख्स ने मजिस्ट्रेट कोर्टके उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश देने से साफ तौर पर मना कर दिया गया था। अर्जी में आरोप लगाया गया है कि भारतीय नागरिकता लेने से तीन साल पहले ही सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में जोड़ दिया गया था।

    यह केस शुक्रवार को राउज़ एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज (PC Act) विशाल गोगने के सामने आया। जज ने इसे 9 दिसंबर को विचार के लिए लिस्ट करने का आदेश दिया है। यह क्रिमिनल रिवीजन अर्जी विकास त्रिपाठी नाम के एक व्यक्ति ने फाइल की है। त्रिपाठी ने अपनी अर्जी में एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACMM) वैभव चौरसिया के 11 सितंबर के आदेश को चुनौती दी है।

    1983 में भारत की नागरिक बनी थीं सोनिया
    त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली चुनाव क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल किया गया था, जबकि वह अप्रैल 1983 में भारत की नागरिक बनी थीं। अर्जी में त्रिपाठी ने अन्य विवरण देते हुए आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी का नाम सबसे पहले 1980 में मतदाता सूची में शामिल किया गया था, फिर 1982 में उसे हटा लिया गया था। इसके बाद 1983 में फिर से उनका नाम मतदाता सूची में शामिल किया गया, जब वह आधिकारिक तौर पर भारत की नागरिक बन गईं।

    कुछ जाली कागजात जमा किए होंगे?
    त्रिपाठी के वकीलों ने आरोप लगाया है कि 1980 में मतदाता सूची में उनका नाम शामिल होने का मतलब है कि तब उन्होंने कुछ जाली कागजात जमा किए थे। वकीलों के मुताबिक यह एक ऐसा केस है जो दिखाता है कि एक संज्ञेय अपराध किया गया है। इससे पहले सितंबर में जज चौरसिया ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि कोर्ट ऐसी जांच नहीं कर सकता क्योंकि इससे संवैधानिक अधिकारियों को सौंपे गए क्षेत्रों में गलत तरीके से उल्लंघन होगा और यह भारत के संविधान के आर्टिकल 329 का उल्लंघन होगा।

  • सरकार का 2030 लक्ष्य: सड़क दुर्घटनाओं में मौतें और चोटें 50% तक घटाना

    सरकार का 2030 लक्ष्य: सड़क दुर्घटनाओं में मौतें और चोटें 50% तक घटाना

    नई दिल्ली। भारत में सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या 2024 में 2.3 प्रतिशत बढ़कर 1.77 लाख से अधिक हो गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश में प्रतिदिन औसतन 485 लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा रहे हैं। यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

    गडकरी ने कहा कि फरवरी 2020 में सड़क सुरक्षा पर आयोजित तीसरे वैश्विक मंत्री स्तरीय सम्मेलन में ‘स्टॉकहोम घोषणापत्र’ अपनाया गया था। इसके तहत 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और चोटों को 50 प्रतिशत तक कम करने का वैश्विक लक्ष्य तय किया गया है।

    मंत्री ने बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 2024 में देश में सभी प्रकार की सड़कों पर दुर्घटनाओं में मरने वालों की कुल संख्या 1,77,177 थी। इसमें ईडीएआर पोर्टल से प्राप्त पश्चिम बंगाल का डेटा भी शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि 2023 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस द्वारा कुल 4,80,583 सड़क हादसों की रिपोर्ट दर्ज की गई थी, जिसमें 1,72,890 लोगों की मौत हुई और 4,62,825 लोग घायल हुए।

    सड़क दुर्घटनाओं में भारत की स्थिति वैश्विक स्तर पर चिंताजनक बनी हुई है। ‘वर्ल्ड रोड स्टेटिस्टिक्स 2024’ के अनुसार, चीन में प्रति लाख आबादी सड़क दुर्घटनाओं में मौत की दर 4.3 है, अमेरिका में यह 12.76 है, जबकि भारत में यह आंकड़ा 11.89 है। यानी भारत का दर अमेरिका के बराबर करीब है और चीन से कई गुना अधिक।

    सड़क सुरक्षा सुधार के लिए सरकार ने 4-‘ई’ रणनीति अपनाई है। इसका आधार चार स्तंभ हैं: एजुकेशन (शिक्षा), इंजीनियरिंग (सड़क और वाहन दोनों की गुणवत्ता), एनफोर्समेंट (कानून का प्रवर्तन) और इमरजेंसी केयर (आपातकालीन उपचार)। इस बहुआयामी रणनीति के तहत सड़क सुरक्षा के लिए कई पहलें की गई हैं।

    शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने awareness कार्यक्रम और सड़क सुरक्षा पर जागरूकता अभियान चलाए हैं, ताकि लोग यातायात नियमों का पालन करें और सुरक्षित ड्राइविंग अपनाएं। इंजीनियरिंग के तहत सड़कों और वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए नए मानक तय किए गए हैं। एनफोर्समेंट के क्षेत्र में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है, और इमरजेंसी केयर के तहत दुर्घटना के तुरंत बाद प्राथमिक उपचार और अस्पताल तक पहुँचाने की व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

    मंत्री ने बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस विभागों के सहयोग से सड़क सुरक्षा को लेकर निगरानी और आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है। इससे यह पहचानने में मदद मिलती है कि किन सड़कों और क्षेत्रों में सबसे अधिक हादसे हो रहे हैं और उन्हें सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

    सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार की यह पहल समय की मांग है, क्योंकि बढ़ती आबादी और वाहन संख्या के कारण सड़क हादसों में लगातार वृद्धि हो रही है। 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में मौतों और चोटों को आधा करने का लक्ष्य एक महत्वाकांक्षी कदम है। इसके सफल होने के लिए जनता, सरकार और सड़क उपयोगकर्ताओं को मिलकर काम करना होगा।

    गडकरी ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल कानून या प्रशासन का विषय नहीं है, बल्कि यह समाज की जिम्मेदारी भी है। सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित वाहन और सुरक्षित ड्राइविंग की संस्कृति ही सड़क दुर्घटनाओं की दर को घटा सकती है। सरकार ने इसके लिए व्यापक कार्यक्रम और योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें स्मार्ट रोड प्रोजेक्ट, हाईवे पर CCTV निगरानी, ट्रैफिक नियमों के कड़े प्रवर्तन और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं का विस्तार शामिल है।

    सरकारी आंकड़े और वैश्विक तुलना यह दर्शाते हैं कि भारत को सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में और भी कदम उठाने की आवश्यकता है। जनता की भागीदारी और सरकारी प्रयासों के समन्वय से ही सड़क हादसों में मौत और चोटों को कम किया जा सकता है।

  • 40,000 पैकेट बिरयानी की तैयारी, मस्जिद कार्यक्रम को लेकर इलाक़े में उत्साह

    40,000 पैकेट बिरयानी की तैयारी, मस्जिद कार्यक्रम को लेकर इलाक़े में उत्साह


    बहरामपुर । TMC के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) ने पश्चिम बंगाल (West Bengal) के मुर्शिदाबाद जिले में ‘बाबरी जैसी मस्जिद’ (Babri Mosque) बनाने का ऐलान कर बड़ा बखेड़ा खड़ा कर दिया है। शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने भी मस्जिद के निर्माण में हस्तक्षेप करने के इनकार कर दिया है। इसके बाद अब शिलान्यास समारोह को भव्य बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। समारोह स्थल को एक विशाल कार्यस्थल में बदल दिया गया है जहां शनिवार को बाबरी जैसी मस्जिद का शिलान्यास होगा। जानकारी के मुताबिक समारोह में सऊदी अरब के मौलवियों के आने की संभावना है। वहीं यहां हजारों लोगों के लिए भोजन तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों ने समारोह से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

    इससे पहले TMC ने हुमायूं कबीर को पार्टी से निकाल दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिना नाम लिए इस तरह के आयोजनों के खिलाफ चेतावनी भी जारी की है। हालांकि कबीर राजनीतिक घटनाक्रम और प्रशासनिक दबाव से बेपरवाह दिखे। कबीर ने पत्रकारों से कहा है कि शनिवार को मोरादघी के पास 25 बीघा जमीन पर लगभग तीन लाख लोग इकट्ठा होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि कई राज्यों के धार्मिक नेताओं ने अपनी उपस्थिति की पुष्टि की है। कबीर ने बटुआ, “सऊदी अरब से दो काजी सुबह कोलकाता हवाई अड्डे से एक विशेष काफिले में पहुंचेंगे।”

    60-70 लाख रुपए खानपान में खर्च
    राज्य के एकमात्र उत्तर-दक्षिण मुख्य राजमार्ग एनएच-12 के किनारे स्थित विशाल आयोजन स्थल पर जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। भीड़ के लिए शाही बिरयानी बनाने के लिए मुर्शिदाबाद की सात खानपान एजेंसियों को अनुबंध दिया गया है। विधायक के एक करीबी सहयोगी ने बताया कि मेहमानों के लिए लगभग 40,000 पैकेट और स्थानीय लोगों के लिए 20,000 पैकेट बनाए जा रहे हैं, जिससे सिर्फ भोजन का खर्च 30 लाख रुपए से अधिक हो जाएगा। उन्होंने कहा, “आयोजन स्थल का बजट लगभग 60-70 लाख रुपए होगा।”

    मंच पर 400 मेहमानों के बैठने की व्यवस्था
    धान के खेतों के ऊपर बना मुख्य मंच इस विशाल आयोजन का सबसे स्पष्ट प्रतीक बन गया है। करीबी सहयोगी ने बताया कि 150 फुट लंबा और 80 फुट चौड़ा यह मंच लगभग 400 मेहमानों के बैठने की क्षमता के साथ 10 लाख रुपए की अनुमानित लागत से बनाया जा रहा है। आयोजकों ने बताया कि लगभग 3,000 स्वयंसेवक भीड़ को नियंत्रित करने, मार्गों को नियंत्रित करने और NH-12 पर अवरोधों को रोकने के लिए तैनात किए गए हैं। इनमें से 2,000 ने शुक्रवार सुबह से ही काम शुरू कर दिया था।

    कुरान की आयतों के साथ शुरू होगा समारोह
    कबीर ने कहा कि समारोह पूर्वाह्न 10 बजे कुरान की आयतों के साथ शुरू होगा, जिसके बाद दोपहर में आधारशिला समारोह होगा। उन्होंने कहा, “औपचारिकताएं दो घंटे पहले शुरू हो जाएंगी। पुलिस के निर्देशानुसार शाम चार बजे तक मैदान खाली कर दिया जाएगा।”

    3000 पुलिसकर्मी तैनात
    इस बीच शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जिला पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था और NH-12 पर निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए हुमायूं कबीर की टीम के साथ कई दौर की चर्चा की। जिला पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बेलडांगा और रानीनगर थाना क्षेत्र में लगभग 3,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाएगा।

  • IndiGo का सिस्टम फेल होने से देश में हवाई यात्रा संकट… एयरपोर्ट पर स्टेशनों जैसा नजारा

    IndiGo का सिस्टम फेल होने से देश में हवाई यात्रा संकट… एयरपोर्ट पर स्टेशनों जैसा नजारा


    नई दिल्ली।
    हमारा प्यारा भारत (India) इस समय पर हवाई यात्रा संकट (Air Travel Crisis) का सामना कर रहा है। तेज रफ्तार ट्रेनों के जरिए और भी कम समय में यात्रा करने का सपना देखने वाला आम आदमी (Common man) इस समय इंडिगो (IndiGo Airline) के ठप्प होने से परेशान है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडियो (IndiGo Airline) ने पिछले कुछ समय में 1 हजार से ज्यादा उड़ानों को रद्द कर दिया है, जिसकी वजह से देश भर के एयरपोर्ट्स रेलवे स्टेशन की तरह नजर आने लगे हैं। चारों तरफ अफरा-तफरी मची हुई है और लोग अपने गंतव्य तक जाने के लिए परेशान नजर आ रहे हैं।

    अंतर्देशीय उड़ानों का सबसे बड़ा नेटवर्क चलाने वाली इंडिगो एयरलाइन के इस संकट के पीछे कोई एक कारण नहीं है। इसके पीछे एक के बाद एक आए कई बदलाव शामिल हैं। तो आइए जानते हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि हजारों की संख्या में लोग एयरपोर्ट पर ही फंसते नजर आए।


    कैसे बढ़ा संकट?

    इंडिगो एयरलाइन शुरुआत से ही फ्लाइट्स के लेट होने की समस्या का सामना कर रही थी। शुरुआत ने एयरलाइन ने इसके पीछे छोटी तकनीकी खराबियां, सर्दियों के लिए फ्लाइट की नई टाइमिंग, एयरपोर्ट पर भीड़ और मौसम को जिम्मेदार बताया था। हालांकि, इसको एयरलाइन को असली झटका तब लगा जब सरकार की तरफ से फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नामक नए नियम लागू कर दिए गए, जिनका मकसद पायलटों को थकान से बचाना था।


    सरकार ने जारी किए नए नियम

    पहले से ही स्टाफ की कमी के साथ ज्यादा उड़ानों का संचालन कर रही इंडिगो के लिए यह नियम एक बड़ी परेशानी बनकर आए। हालांकि, सरकार ने यह कदम पायलट और एयरलाइन की भलाई के लिए ही उठाया था। लेकिन पहले से ही फंसी हुई इंडिगो के लिए यह नियम झेल पाना आसान नहीं था। इन नियमों की वजह से बड़ी संख्या में पायलट अनिवार्य आराम पर चले गए, जिससे स्टाफ की भारी कमी हो गई। इसकी वजह से कई फ्लाइट्स कैंसिल करनी पड़ी।


    एयरबस 320 की चेतावनी

    फ्लाइट्स की छोटी तकनीकी खराबियों, सरकार के नए नियमों से परेशानी का सामना कर रही इंडिगो एयरलाइन के लिए असली खतरा तब सामने आया जब एयरबस 320 की चेतावनी के बाद देर रात उड़ाने प्रभावित होना शुरू हुईं। रात के 12 बजे के बाद नए नियम लागू हो गए, इसकी वजह से बहुत सारी फ्लाइट्स कैंसिल करने का सिलसिला शुरू हो गया।


    इंडिगो का बड़ा आकार

    भारत में सबसे ज्यादा उड़ानों का परिचालन करने वाली इंडिगो के लिए उसका बड़ा आकार ही संकट का कारण बन गया है। हालांकि, एयरपोर्ट पर यात्रियों की भीड़ और लगातार रद्द होती उड़ानों के बीच सरकार ने नए नियमों में कुछ राहत दी है। डीजीसीए ने शुक्रवार को नया आदेश जारी करके एक महत्वपूर्ण नियम वापस ले लिया। इसके मुताबिक अब पायलट्स की सप्ताहिक आराम को छुट्टी में नहीं बदला जा सकता है। सरकार द्वारा हटाए गए इस नियम से एयरलाइन को पायलट रोटेट करने में आसानी होगी, जिससे कुछ दबाव कम होने की उम्मीद है।

    इंडिगो भले ही इस नियम के हटने के बाद स्थिरता की उम्मीद कर रही हो, लेकिन पायलट संघ इससे नाराज नजर आता है। पायलट संघों का आरोप है कि इंडिगो के मैनेजमेंट ने समय रहते इन नियमों और परेशानियों के लिए तैयारी नहीं की। संघ के मुताबिक इंडिगो के मैनेजमेंट को इस बात की जानकारी थी कि सरकार ऐसे नियम लागू करने वाली है। इसके लिए नई भर्ती की जानी चाहिए थी, लेकिन एयरलाइ्ंस ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने पहले से ही कम स्टाफ को और कम कर दिया, जिससे समस्या बिगड़ गई।

    कई विशेषज्ञों का कहना है कि इंडिगो ने इस संकट को बढ़ावा देकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की है। इससे सरकार द्वारा लागू किए गए नियमों में ढिलाई ली जा सके। हालांकि, पायलट संघ ने इसे पायलट और हवाई यात्रियों की सुरक्षा के संकट से जोड़ा है।

    कारण चाहे कुछ भी हो, लेकिन परेशानी आम आदमी को ही हो रही है। देश भर के एयरपोर्ट्स पर इस समय भारी भीड़ मची हुई है। हर दिन एयरलाइन की तरफ से सैकड़ों फ्लाइट्स को कैंसिल किया जा रहा है, जिसकी वजह से एयरपोर्ट पर स्टेशन जैसे हालात बने हुए हैं। सरकार का मानना है कि 10 फरवरी 2026 तक पूरी तरह से स्थिरता लाई जा सकती है।