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  • वाराणसी में विकास परियोजनाओं का बड़ा ऐलान, पीएम दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

    वाराणसी में विकास परियोजनाओं का बड़ा ऐलान, पीएम दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

    नई दिल्ली। वाराणसी इन दिनों एक बड़े प्रशासनिक और विकासात्मक आयोजन की तैयारियों का केंद्र बना हुआ है, जहां प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दो दिवसीय दौरे को लेकर पूरे शहर में गतिविधियां तेज हो गई हैं। यह दौरा न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि इसमें शामिल विकास परियोजनाओं के कारण स्थानीय स्तर पर भी बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।

    दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया जाएगा, जिनका कुल मूल्य हजारों करोड़ रुपये बताया जा रहा है। इन परियोजनाओं में सड़क, पुल, शहरी ढांचे और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े कई बड़े कार्य शामिल हैं, जिनका उद्देश्य शहर की कनेक्टिविटी और जीवन स्तर को बेहतर बनाना है।

    स्थानीय प्रशासन ने बताया है कि इस पूरे दौरे को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। विभिन्न विभाग लगातार कार्यों की निगरानी कर रहे हैं ताकि किसी भी स्तर पर कोई कमी न रह जाए। शहर के प्रमुख मार्गों और आयोजन स्थलों पर विशेष व्यवस्था की जा रही है, जिससे कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो सके।

    इस दौरे का एक प्रमुख आकर्षण जनभागीदारी भी होगा, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति की संभावना जताई जा रही है। विशेष रूप से महिला सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए अलग से कार्यक्रम तैयार किए गए हैं, जिससे सामाजिक समावेशन को भी मजबूती मिलेगी।

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। आयोजन स्थल और आसपास के क्षेत्रों को कड़ी निगरानी में रखा जा रहा है। आधुनिक तकनीक से लैस निगरानी प्रणाली के साथ-साथ सुरक्षा बलों की तैनाती बड़े स्तर पर की गई है, ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

    भीड़ प्रबंधन और यातायात नियंत्रण के लिए पूरे क्षेत्र को विभिन्न सेक्टरों में बांटा गया है। मार्गों पर बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है और प्रवेश-निकास बिंदुओं को नियंत्रित तरीके से संचालित किया जाएगा। इससे कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था की संभावना को कम किया जा सकेगा।

    महिला सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है, जिसके तहत सुरक्षा व्यवस्था में महिला कर्मियों की बड़ी भागीदारी सुनिश्चित की गई है। आयोजन स्थल के अंदरूनी हिस्सों की जिम्मेदारी विशेष रूप से महिला सुरक्षा बल को सौंपी गई है, जबकि बाहरी सुरक्षा की निगरानी अन्य बलों द्वारा की जाएगी।

    इसके साथ ही आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेष सुरक्षा टीमें भी तैनात की गई हैं, जो हर परिस्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन का मानना है कि यह दौरा शहर के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा और आने वाले समय में इन परियोजनाओं का प्रभाव आम जनता के जीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

  • ऑफिस मार्केट में तेजी का नया दौर, भारत में लीजिंग गतिविधियों ने बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

    ऑफिस मार्केट में तेजी का नया दौर, भारत में लीजिंग गतिविधियों ने बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

    नई दिल्ली। भारत का कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर 2026 की पहली तिमाही में एक मजबूत और रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन के साथ सामने आया है। देशभर में ऑफिस स्पेस की मांग लगातार बढ़ती हुई दिखाई दी और यह आंकड़ा 21.5 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच गया, जो अब तक के हालिया वर्षों में सबसे ऊंचे स्तरों में से एक माना जा रहा है।

    इस तेज वृद्धि के पीछे मुख्य कारण ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस ऑपरेटर्स की बढ़ती भागीदारी रही है। अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अब भारत को केवल सपोर्ट सेंटर के तौर पर नहीं देख रही हैं, बल्कि इसे अपने इनोवेशन, रिसर्च और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट का महत्वपूर्ण केंद्र बना रही हैं।

    ऑफिस लीजिंग में हुई इस बढ़ोतरी से यह साफ संकेत मिलता है कि भारत वैश्विक कंपनियों के लिए एक पसंदीदा निवेश और ऑपरेशन डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। जीसीसी की भूमिका इस बदलाव में सबसे अहम रही है, जिन्होंने अपने विस्तार को तेज गति से आगे बढ़ाया है और कुल लीजिंग गतिविधियों में बड़ी हिस्सेदारी हासिल की है।

    इन सेंटर्स में अब पारंपरिक बैक-ऑफिस कार्यों से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट डिजाइन और इंजीनियरिंग जैसे हाई-वैल्यू काम किए जा रहे हैं। इससे भारत के टैलेंट मार्केट को भी बड़ा फायदा मिल रहा है।

    इसके साथ ही फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस की मांग भी तेजी से बढ़ी है। कंपनियां अब हाइब्रिड और रिमोट वर्क मॉडल को ध्यान में रखते हुए अधिक लचीले ऑफिस स्पेस की ओर बढ़ रही हैं, जिससे इस सेगमेंट में भी अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है।

    देश के प्रमुख शहरों में इस वृद्धि का असर साफ दिखाई दिया है। बेंगलुरु ने ऑफिस लीजिंग में सबसे आगे रहकर अपनी स्थिति मजबूत की है, जबकि मुंबई और हैदराबाद ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है। पुणे और दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों ने भी स्थिर और मजबूत योगदान दिया है।

    बेंगलुरु में जीसीसी की हिस्सेदारी विशेष रूप से काफी अधिक रही, जिससे यह शहर टेक्नोलॉजी और ग्लोबल इनोवेशन के सबसे बड़े केंद्रों में से एक बनता जा रहा है।

  • भू-राजनीतिक तनाव का असर, तेल कीमतों को लेकर नया वैश्विक अनुमान..

    भू-राजनीतिक तनाव का असर, तेल कीमतों को लेकर नया वैश्विक अनुमान..

    नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा बाजार इस समय एक महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जहां मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर गहरा प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आए नए आकलनों में यह संकेत दिया गया है कि आने वाले समय में तेल की कीमतें पहले के अनुमान से अधिक रह सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

    मध्यपूर्व लंबे समय से विश्व ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने इस क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित किया है। तनाव बढ़ने के कारण तेल उत्पादन और परिवहन दोनों पर दबाव बढ़ा है, जिससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है। इसी अनिश्चितता ने कच्चे तेल की कीमतों में संभावित वृद्धि के संकेत दिए हैं।

    नए अनुमान के अनुसार ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड दोनों की औसत कीमतों में पहले की तुलना में वृद्धि देखी जा सकती है। यह बदलाव मुख्य रूप से आपूर्ति में संभावित कमी और बाजार में बढ़ते जोखिम के कारण हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो तेल भंडार में गिरावट और तेज हो सकती है, जिससे कीमतों पर और अधिक दबाव बढ़ेगा।

    तेल बाजार में इस बदलाव का एक बड़ा कारण सप्लाई चेन में आने वाली बाधाएं भी हैं। मध्यपूर्व से होने वाली सप्लाई में कमी के कारण वैश्विक भंडार स्तर में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। यह स्थिति ऊर्जा बाजार के संतुलन को प्रभावित कर रही है और निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा रही है।

    हालांकि मांग की स्थिति में बहुत बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है, लेकिन आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा सीधे कीमतों को प्रभावित कर रही है। इसी कारण बाजार में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है और कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना लगातार बनी हुई है।

    विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भू-राजनीतिक तनाव केवल अल्पकालिक प्रभाव ही नहीं डालता, बल्कि यह दीर्घकालिक निवेश और ऊर्जा रणनीतियों को भी प्रभावित करता है। यही कारण है कि वैश्विक बाजार में सतर्कता का माहौल देखा जा रहा है।

    दूसरी ओर, यदि आने वाले समय में स्थिति में सुधार होता है और आपूर्ति व्यवस्था सामान्य होती है, तो कीमतों में स्थिरता लौटने की संभावना भी मौजूद है। लेकिन फिलहाल बाजार अनिश्चितता की स्थिति में है और हर नई घटना इसका सीधा असर ऊर्जा कीमतों पर डाल रही है।

  • भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड समझौता साइन, दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार

    भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड समझौता साइन, दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार


    नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देते हुए एक महत्वपूर्ण फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति बन गई है। इस समझौते को दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में आयात-निर्यात और निवेश के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

    इस समझौते के तहत भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले लगभग सभी उत्पादों को टैरिफ छूट का लाभ मिलेगा। इसका सीधा फायदा भारतीय निर्यातकों को होगा, क्योंकि उनके उत्पाद वहां के बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बन जाएंगे। दूसरी ओर, न्यूजीलैंड से भारत आने वाले अधिकतर उत्पादों पर भी टैरिफ कम किया जाएगा या समाप्त किया जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी।

    यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लंबे समय से चल रही बातचीत के बाद अंतिम रूप में पहुंचा है और इसे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने वाला अहम समझौता माना जा रहा है। इससे व्यापार की रफ्तार बढ़ने के साथ-साथ नए निवेश के अवसर भी पैदा होंगे।

    समझौते में केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि निवेश और मानव संसाधन से जुड़े प्रावधानों को भी शामिल किया गया है। इसके तहत न्यूजीलैंड आने वाले वर्षों में भारत में बड़े स्तर पर निवेश करने की योजना बना सकता है, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।

    इसके अलावा इस समझौते में छात्रों और पेशेवरों की आवाजाही को भी आसान बनाने पर जोर दिया गया है। भारतीय छात्रों को न्यूजीलैंड में पढ़ाई के दौरान काम करने और बाद में रोजगार के अवसरों तक पहुंच मिलने की सुविधा इस समझौते का अहम हिस्सा है।

    कौशल आधारित भारतीय पेशेवरों के लिए भी अस्थायी वर्क वीजा की सुविधा रखी गई है, जिससे वे निर्धारित अवधि तक न्यूजीलैंड में काम कर सकेंगे। इससे दोनों देशों के बीच स्किल एक्सचेंज और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।

    हालांकि भारत ने अपने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते में सुरक्षित रखा है, ताकि घरेलू उद्योगों पर किसी तरह का नकारात्मक असर न पड़े।

  • राज्यसभा का समीकरण बदला, राघव चड्ढा के फैसले से NDA बहुमत के और करीब पहुंचा..

    राज्यसभा का समीकरण बदला, राघव चड्ढा के फैसले से NDA बहुमत के और करीब पहुंचा..

    नई दिल्ली। राज्यसभा की राजनीति में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिसने पूरे सत्ता समीकरण को प्रभावित कर दिया है। सदन में हुए हालिया घटनाक्रम के बाद नंबर गेम पूरी तरह बदल गया है और इसका सीधा असर राजनीतिक ताकतों के संतुलन पर पड़ा है।

    इस पूरे घटनाक्रम में Raghav Chadha का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। उनके राजनीतिक कदम और उससे जुड़े बदलावों के बाद राज्यसभा में सत्ता पक्ष की स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत हो गई है। माना जा रहा है कि इससे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को सीधा फायदा मिला है।

    सूत्रों के अनुसार, कुछ सांसदों के दलगत बदलाव और विलय की प्रक्रिया के बाद सदन में सीटों का गणित बदल गया है। इस बदलाव के बाद सत्ता पक्ष की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, जबकि विपक्ष की स्थिति कमजोर हुई है।

    राज्यसभा में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यहां बहुमत का सीधा असर कानून निर्माण और बड़े विधायी फैसलों पर पड़ता है। अब बदले हुए समीकरण के बाद सत्ता पक्ष बहुमत के आंकड़े के और करीब पहुंच गया है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बदलाव आने वाले समय में संसद की कार्यवाही और महत्वपूर्ण बिलों पर असर डाल सकते हैं। खासकर उन मुद्दों पर जहां दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है, वहां अब स्थिति पहले से ज्यादा अनुकूल दिखाई दे रही है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है, जहां इसे सत्ता पक्ष की बड़ी रणनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे अपने लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति मान रहा है।

  • भारत के इस दक्षिणी राज्य में खत्म हुआ तेल का स्टॉक … 400 से ज्यादा पेट्रोल पंप बंद

    भारत के इस दक्षिणी राज्य में खत्म हुआ तेल का स्टॉक … 400 से ज्यादा पेट्रोल पंप बंद


    विजयवाड़ा।
    ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच छिड़ी जंग की वजह से दुनियाभर में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर संशय की स्थिति पैदा हो गई है। इसका असर अब भारत (India) में भी दिखने लगा है। दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश (Southern State Andhra Pradesh) के कई पेट्रोल पंपों (Petrol pumps) पर पेट्रोल और डीजल का स्टॉक खत्म हो जाने की खबर फैलने और लोगों की भारी भीड़ उमड़ने के बाद, रविवार को अलग-अलग जिलों में 400 से ज्यादा पंप बंद कर दिए गए हैं। वहीं इन पेट्रोल पंपों पर स्टॉक खत्म होने की सूचना दी जाने के बाद लोगों ने दूसरे पंपों पर धावा बोल दिया, जहां लंबी लाइनें देखी जा रही हैं।

    आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक राज्य में 4,510 पेट्रोल पंप हैं, जिनमें से 421 पंपों पर पेट्रोल और डीजल का स्टॉक खत्म हो गया। वहीं अधिकांश पेट्रोल पंप दोपहिया वाहनों को सिर्फ 2 लीटर और कारों को 10 लीटर पेट्रोल ही बेच रहे हैं। आंध्र प्रदेश पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपाल कृष्ण ने बताया कि कई पेट्रोल पंपों पर डीजल की भारी कमी है। उन्होंने कहा कि औसतन वे 7000 लीटर से अधिक डीजल बेचते हैं, लेकिन अब घबराहट में हो रही खरीदारी के कारण 14,000 लीटर से अधिक डीजल बिक रहा है।


    कई जगहों पर कमी की खबरें

    पेट्रोल और डीजल की कमी ने विजयवाड़ा, गुंटूर, राजमुंद्री, कुरनूल और नेल्लोर सहित कई शहरों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। कई जगह पर पेट्रोल पंप कर्मचारियों द्वारा स्टॉक खत्म होने के बोर्ड लगाने पर वाहन चालकों और पेट्रोल पंप कर्मचारियों के बीच तीखी बहस हुई। प्रसिद्ध पहाड़ी तीर्थ तिरुमाला में भी परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई। यहां दो पेट्रोल पंपों पर स्टॉक खत्म हो गया था। पेट्रोल भरवाने के लिए लाइन में खड़े कुछ लोगों ने मीडिया को बताया कि वे अपनी बाइकों में पेट्रोल भरवाने के लिए कई घंटे से इंतजार कर रहे हैं।


    क्यों बंद करने पड़े पंप?

    सूत्रों ने बताया कि वीकेंड पर, सोशल मीडिया पर कई ऐसी पोस्ट्स वायरल होने लगीं जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान अमेरिका युद्ध अभी और बढ़ने वाला है और ईंधन की कमी हो जाएगी। इसके कारण लोग घबराकर खरीदारी करने लगे। अधिकारियों ने बताया कि कई जगहों पर हजारों लोग पेट्रोल पंपों के बाहर खड़े हो गए और जरूरत से ज्यादा ईंधन खरीदने लगे जिसकी वजह से कमी हो गई। मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने भी एक बयान में बताया कि रविवार दोपहर तक जो ज्यादातर आउटलेट्स बंद हुए, वे स्टॉक खत्म होने के कारण नहीं, बल्कि पैनिक में की जा रही खरीदारी को रोकने के लिए बंद किए गए थे।


    CM ने मांगी रिपोर्ट

    इस बीच, मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू (Chief Minister Chandrababu Naidu.) ने एक्शन लिया है। उन्होंने जिला कलेक्टरों को तेल की कमी की समस्या से निपटने के लिए तुरंत एक कार्य योजना लागू करने और समस्या के समाधान के लिए विभिन्न विभागों द्वारा उठाए गए कदमों पर सोमवार शाम तक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने स्थिति का जायजा लेने के लिए मुख्य सचिव जी साई प्रसाद और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ टेलीकॉन्फ्रेंस भी की। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि शनिवार को डीलरों को 10,345 किलो लीटर पेट्रोल और 14,156 किलो लीटर डीजल की आपूर्ति की गई, लेकिन घबराहट में खरीदारी के कारण कई आउटलेट्स पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

    होर्मुज में नाकेबंदी
    गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका के बीच 28 फरवरी को शुरू हुई जंग के बाद से ही दुनिया के सबसे प्रमुख जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही प्रभावी रूप से बंद हो गई है। जंग खत्म होने से वैश्विक तेल व्यापार का 20 फीसदी हिस्सा यहां से होकर गुजरता था। यह इसीलिए अहम है क्योंकि भारत भी अपनी जरूरतों का 85 फीसदी से अधिक हिस्सा आयात करता है और इनमें से ज्यादातर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर ही भारत पहुंचता है। अब इस रास्ते के बंद होने के बाद ऊर्जा संकट बढ़ सकता है। हालांकि केंद्र सरकार ने कहा है कि भारत अपने आयात विकल्पों को बढ़ा रहा है और देश में ईंधन की कोई कमी फिलहाल नहीं है।

  • पश्चिम बंगाल में गरजे मोदी, घुसपैठियों को दी चेतावनी…… बोले- दूसरे फेज से पहले देश छोड़ दो वरना….

    पश्चिम बंगाल में गरजे मोदी, घुसपैठियों को दी चेतावनी…… बोले- दूसरे फेज से पहले देश छोड़ दो वरना….


    कोलकाता।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने रविवार को पश्चिम बंगाल (West Bengal) के दूसरे चरण के मतदान से पहले घुसपैठियों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि मैं घुसपैठियों को चेतावनी देता हूं कि वे बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से पहले देश को छोड़ दें, वरना परिणाम आने के बाद उन्हें बाहर निकाल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बंगाल चुनाव के पहले चरण में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) का अहंकार चकनाचूर हो गया, दूसरे चरण में भाजपा की जीत सुनिश्चित होगी।

    पीएम मोदी ने चुनावी रैली में कहा, ”तृणमूल कांग्रेस के शासन में छोटे से छोटा नेता और गुंडे भी खुद को सरकार समझते हैं। भाजपा को वोट दीजिए, मैं आपको तृणमूल कांग्रेस के ‘महा जंगलराज’ से मुक्ति दिलाऊंगा। तृणमूल कांग्रेस की ‘निर्मम सरकार’ बंगाल की महिलाओं पर अत्याचार करने वाले गुंडों के साथ खड़ी है। अब यह कहने का समय आ गया है कि इसे और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”संदेशखलि के पीड़ित एवं आर जी कर अस्पताल की पीड़िता की मां को चुनाव में टिकट देने के फैसले में बंगाल की महिलाओं के प्रति भाजपा की प्रतिबद्धता झलकती है। बंगाल की नई भाजपा सरकार महिलाओं के साथ बलात्कार और उन्हें प्रताड़ित करने वाले बदमाशों को चार मई के बाद न्याय के कठघरे में लाएगी।” वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि मैं मतुआ नामशुद्र समुदाय के सदस्यों के समक्ष यह प्रतिज्ञा करता हूं कि उन्हें सीएए के माध्यम से नागरिकता प्राप्त होगी।

    इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार राज्य सचिवालय से नहीं बल्कि पार्टी द्वारा संरक्षित गुंडों और अपराधियों द्वारा चलाई जा रही है। चुनाव प्रचार समाप्त होने से एक दिन पहले, हुगली जिले के आरामबाग में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि सरकार चलाने के लिए टीएमसी की ”असामाजिक तत्वों पर निर्भरता” के कारण अक्सर कलकत्ता उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा है। मोदी ने कहा, ”टीएमसी की ‘निर्मम सरकार’ नबान्न (राज्य सचिवालय) से नहीं चलती। इसे गुंडे और अपराधी चलाते हैं, और सरकार को पटरी पर लाने के लिए उच्च न्यायालय और देश की शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ी है।”

    उन्होंने वादा किया कि राज्य में भाजपा सरकार बनने पर पहली कैबिनेट बैठक में केंद्र की प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना ‘आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ के कार्यान्वयन को मंजूरी दी जाएगी। ममता बनर्जी प्रशासन की विश्वसनीयता ”पूरी तरह से खत्म” होने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री ने दावा किया कि केवल भाजपा ही ऐसी सरकार बना सकती है जो राज्य के लोगों को न्याय और सुरक्षा प्रदान करेगी। राज्य के आलू किसानों की ”दुर्दशा” के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि टीएमसी सरकार से जुड़ा ‘सिंडिकेट राज’ उपज को कम दाम पर खरीदकर कहीं और ऊंचे दाम पर बेचता है। पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि टीएमसी के शासनकाल में राज्य भर में महिलाओं के खिलाफ हिंसक अपराध अपने चरम पर पहुंच गए। उन्होंने सत्ताधारी पार्टी पर ”अपराधियों को संरक्षण देने” का आरोप लगाया, जिसके चलते अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं।

  • कांग्रेस विधायक का विवादित बयान, कहा- ट्रंप पर गोली चलनी ही थी, भारत में भी जनता का मूड ऐसा है

    कांग्रेस विधायक का विवादित बयान, कहा- ट्रंप पर गोली चलनी ही थी, भारत में भी जनता का मूड ऐसा है


    नई दिल्‍ली । अमेरिका में वाइट हाउस संवाददाताओं (WHCA) के वार्षिक रात्रिभोज कार्यक्रम में गोलीबारी की चर्चाएं दुनियाभर में हैं। इधर, भारत में कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने विवादित बयान दे दिया है। उनका कहना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर गोलियां चलनी ही थीं। साथ ही कहा है कि भारत में भी लोगों की यही भावना है। हमले में ट्रंप सुरक्षित हैं।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वडेट्टीवार ने कहा, ‘ट्रंप दुनिया में दबदबना बनाना चाहते थे और दूसरे देशों को अस्थिर करना चाहते थे। जैसी करनी वैसी भरनी…। चूंकि चीजें ऐसी नहीं हुईं, जैसी उन्होंने उम्मीद की थी तो ये होना ही था।’ उन्होंने कहा कि भारत में भी जनता का मूड कुछ अलग नहीं है। हालांकि, उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा, ‘चूंकि यहां लोग बाहर नहीं आ रहे हैं, तो भ्रम बना हुआ है कि सब ठीक है। लेकिन लोगों की भावना वैसी ही है कि भारत को तबाह किया जा रहा है।’

    कांग्रेस विधायक ने घटना की निंदा की। उन्होंने कहा, ‘इतने उच्च पद पर बैठे व्यक्ति के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए था, लेकिन जनता की प्रतिक्रिया आमतौर पर दिखाती है कि नेतृत्व कैसा है।’

    वाइट हाउस में गोलीबारी
    यह घटना शनिवार रात करीब 8:34 बजे की है, जब मेहमानों को रात्रिभोज परोसा जा रहा था। उस समय राष्ट्रपति ट्रंप, एसोसिएशन की अध्यक्ष वेइजिया जियांग और ‘मेंटलिस्ट’ ओज पर्लमैन के साथ बातचीत करते नजर आ रहे थे। पर्लमैन वॉशिंगटन हिल्टन में आयोजित इस मुख्य कार्यक्रम में अपना शो पेश करने वाले थे। खुफिया सेवा के अधिकारियों और अन्य सुरक्षाकर्मियों ने राष्ट्रपति, प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप, उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और द्वितीय महिला उषा वेंस को सुरक्षा घेरा बना कक्ष से बाहर ले गए।

    कुछ घंटों बाद, ट्रंप ने वाइट हाउस में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया और घोषणा की कि सुरक्षाकर्मियों ने कैलिफोर्निया के एक व्यक्ति को पकड़ लिया है। ट्रंप ने रविवार को कहा कि रात्रिभोज में हथियारों के साथ घुसने की कोशिश करने वाला आरोपी प्रशासन के अधिकारियों को निशाना बनाना चाहता था और उसके परिवार ने पहले ही कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समक्ष इसे लेकर चिंता जताई थी।

    हमलावर की हुई पहचान
    अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध की पहचान कैलिफोर्निया निवासी 31 वर्षीय कोल टॉमस एलन के रूप में हुई है और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे सोमवार को अमेरिका के न्याय विभाग की ओर से आपराधिक आरोपों का सामना करना पड़ सकता है। न्याय विभाग के कार्यवाहक प्रमुख टोड ब्लैंच ने बताया कि आरोपी ट्रेन से कैलिफोर्निया से वाशिंगटन आया था और कार्यक्रम से कुछ दिन पहले ही उस होटल में ठहरा था, जहां यह समारोह आयोजित किया गया था।

  • यूपी : मुरादाबाद में चेतावनी वाले पोस्टरों से बढ़ा विवाद: ‘हिंदू सोसाइटी’ की अपील ने छेड़ी नई बहस

    यूपी : मुरादाबाद में चेतावनी वाले पोस्टरों से बढ़ा विवाद: ‘हिंदू सोसाइटी’ की अपील ने छेड़ी नई बहस


    मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के लाजपत नगर स्थित श्रीराम सोसाइटी में घरों के बाहर लगाए गए ‘हिंदू सनातनी सोसाइटी’ लिखे पोस्टर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन पोस्टरों की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद शहर में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। साथ ही, दो साल पहले शिव मंदिर वाली गली में लगे पलायन संबंधी पोस्टरों की घटना भी एक बार फिर लोगों को याद आ रही है।

    इस पूरे विवाद की वजह सोसाइटी में कुछ मकानों की खरीद-फरोख्त बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, कुछ लोग अपने घर बेचना चाहते हैं और इन मकानों को खरीदने के लिए एक विशेष समुदाय के खरीदारों ने अधिक कीमत की पेशकश की है, जबकि अन्य खरीदार कम दाम दे रहे हैं। इसी स्थिति को लेकर सोसाइटी के कुछ निवासियों में यह आशंका पैदा हुई है कि नए समुदाय के आने से इलाके की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना बदल सकती है।

    विरोध का यह तरीका शनिवार को कुछ घरों से शुरू हुआ, जो रविवार तक बढ़कर 25 से ज्यादा घरों तक पहुंच गया। भगवान राम की तस्वीर वाले इन पोस्टरों में लिखा है कि यह क्षेत्र “पूर्णतः हिंदू सनातनी सोसाइटी” है और अन्य पक्ष के लोग यहां मकान न लें।

    मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी सतर्क हो गया है। एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने कटघर थाना पुलिस को मौके पर भेजकर लोगों से बातचीत करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, पुलिस का कहना है कि अब तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है।

    कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, पोस्टरों में सीधे किसी धर्म का नाम नहीं लिया गया है और ‘दूसरे पक्ष’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह मामला कानूनी दृष्टि से जटिल हो जाता है। फिलहाल, क्षेत्र में माहौल संवेदनशील जरूर है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है और पुलिस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

  • अमित शाह का बड़ा ऐलान: सत्ता में आते ही खत्म करेंगे टीएमसी का सिंडिकेट सिस्टम

    अमित शाह का बड़ा ऐलान: सत्ता में आते ही खत्म करेंगे टीएमसी का सिंडिकेट सिस्टम

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली, जब एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य की मौजूदा सरकार और सत्ताधारी दल पर गंभीर आरोप लगाए। अपने संबोधन में उन्होंने दावा किया कि राज्य में जनता अब बदलाव चाहती है और मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ माहौल बनता जा रहा है।

    अमित शाह ने अपने भाषण में कहा कि पहले चरण के मतदान के बाद राजनीतिक स्थिति तेजी से बदल रही है और विपक्ष को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। उनके अनुसार कई क्षेत्रों में जनता ने मौजूदा सरकार के खिलाफ मतदान किया है, जो आने वाले समय में बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की जनता अब एक नई दिशा और नई सरकार चाहती है।

    अपने संबोधन के दौरान उन्होंने विशेष रूप से टीएमसी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य में एक प्रकार की सिंडिकेट व्यवस्था सक्रिय है, जो प्रशासन और विकास कार्यों को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में भाजपा को सत्ता मिलती है, तो इस तरह की व्यवस्थाओं को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा और पारदर्शी शासन स्थापित किया जाएगा।

    अमित शाह ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी सत्ता में आने पर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कड़े कदम उठाएगी। उनके अनुसार राज्य में कानून व्यवस्था को बेहतर बनाना और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पाना प्राथमिकता होगी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद राज्य में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    अपने भाषण में उन्होंने महिलाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार बनने पर महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी और युवाओं के लिए रोजगार से जुड़ी योजनाएं लागू की जाएंगी, जिससे राज्य में आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सके।

    किसानों की स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र को लेकर भी गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है और बाजार व्यवस्था में असंतुलन की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नई सरकार बनने पर किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी और उनकी आय बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

    इसके अलावा उन्होंने राज्य में अधूरे विकास कार्यों का भी उल्लेख किया और कहा कि कई परियोजनाएं लंबे समय से पूरी नहीं हो पाई हैं। उन्होंने वादा किया कि यदि भाजपा को अवसर मिलता है, तो इन लंबित परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जाएगा ताकि जनता को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

    पूरे भाषण में अमित शाह ने मौजूदा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि राज्य में एक नए प्रशासनिक मॉडल की जरूरत है, जो पारदर्शिता, विकास और सुशासन पर आधारित हो। उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है और आने वाले चुनावी माहौल को और अधिक गरमा दिया है।