Category: National

  • दिल्ली में नाबालिग अपराध बढ़ा, नई पीढ़ी क्यों भटक रही है? खेल-खेल से अपराध तक का रास्ता

    दिल्ली में नाबालिग अपराध बढ़ा, नई पीढ़ी क्यों भटक रही है? खेल-खेल से अपराध तक का रास्ता


    नई दिल्ली । दिल्ली में नाबालिगों द्वारा किए जा रहे अपराध अब गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं। खासकर झुग्गी बस्तियों में रहने वाले 12 से 17 वर्ष के किशोर जघन्य वारदातों में अधिक शामिल पाए जा रहे हैं। चोरी लूट हिंसा और नशे से जुड़े अपराधों में नाबालिगों की बढ़ती संलिप्तता कानूनव्यवस्था के लिए चुनौती बन रही है। पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद अपराध का ग्राफ कम नहीं हो रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नाबालिग अपराध केवल व्यक्तिगत प्रवृत्ति नहीं बल्कि सामाजिक और पारिवारिक उपेक्षा का नतीजा है। दिल्ली में करीब 75% जुवेनाइल अपराध झुग्गी-झोपड़ी और पुनर्वास कॉलोनियों से आते हैं जबकि 22% निम्न मध्यम वर्ग और केवल 3% मध्यम वर्गीय परिवारों से जुड़े हैं।

    प्रमुख कारणों में शामिल हैं

    परिवारिक अस्थिरता और निगरानी की कमी: गरीब परिवारों में माता-पिता की व्यस्तता या घरेलू हिंसा के कारण बच्चों पर ध्यान नहीं दिया जाता।शिक्षा से दूरी: स्कूल छोड़ने और पढ़ाई में रुचि कम होने से किशोर गलत संगत की ओर जाते हैं। गलत संगत और गैंग संस्कृति: स्थानीय गैंग के प्रभाव में जल्दी पैसा और दबदबा पाने की चाह में अपराध की राह अपनाई जाती है। नशे और डिजिटल प्रभाव: नशे की उपलब्धता और हिंसक कंटेंट किशोरों के व्यवहार को प्रभावित करते हैं। सामाजिक उपेक्षा: खेल कौशल विकास और काउंसलिंग की कमी बच्चों की ऊर्जा गलत दिशा में ले जाती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़े केवल अपराध नहीं बल्कि सामाजिक ढांचे की कहानी हैं जहां बचपन धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।दिल्ली में लगातार नाबालिग अपराधों ने समाज और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। कम उम्र में अपराध की ओर झुकाव केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक संकट का संकेत है। बार-बार अपराध में शामिल किशोरों के लिए पुनर्वास और सुधार चुनौतीपूर्ण बनता जा रहा है।

    प्रमुख प्रवृत्तियां जो सामने आईं

    छोटी उम्र में गंभीर अपराधों में संलिप्तता जैसे लूट चाकूबाजी हत्या का प्रयास। गैंग का प्रभाव और बार-बार अपराध करना। नशे की लत और उससे जुड़े अपराध। जुवेनाइल कानून के कारण सख्त सजा का डर कम होना। मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता सुझाव देते हैं कि समाधान केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं आएगा। इसके लिए परिवार स्कूल समुदाय और सरकार को मिलकर शिक्षा कौशल विकास और पुनर्वास पर काम करना होगा तभी किशोर अपराध की प्रवृत्ति को रोका जा सकता है।

  • निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर विवादित टिप्पणी पर सफाई दी, कहा- ‘जब मैं संसद में खड़ा होता हूं तो कांग्रेस का पसीना छूट जाता है’

    निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर विवादित टिप्पणी पर सफाई दी, कहा- ‘जब मैं संसद में खड़ा होता हूं तो कांग्रेस का पसीना छूट जाता है’


    नई दिल्ली । हाल ही में बजट सत्र के दौरान झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के भाषण ने राजनीतिक माहौल गरम कर दिया। विवादित किताबों और टिप्पणियों के कारण उनकी ओर से उठाए गए आरोपों ने विपक्षी दल कांग्रेस में हड़कंप मचा दिया। इंडिया टीवी के कार्यक्रम आप की अदालत में दुबे ने खुलकर अपने बयान की सफाई दी। दुबे ने कहा जब मैं संसद में खड़ा होता हूं तो कांग्रेस का पसीना छूट जाता है। प्रियंका गांधी कहीं भी होंगी तो सुनने आ जाएंगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें किसी से डर नहीं है क्योंकि उनके साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं।

    नेहरू और इंदिरा गांधी पर विवादित टिप्पणियों के सवाल पर दुबे ने स्पष्ट किया कि उन्होंने संसद में वही पढ़ा जो प्रकाशित किताबों में था। पंडित जवाहरलाल नेहरू को अय्याश कहे जाने के आरोप पर उन्होंने कहा कि यह शब्द उन्होंने खुद नहीं जोड़ा बल्कि यह किताब में लिखा था। इसी तरह इंदिरा गांधी के बारे में अश्लील टिप्पणी के आरोप पर दुबे ने बताया कि यह एमओ मथाई की किताब का संदर्भ था जिसमें उन्होंने कुछ भी नया नहीं जोड़ा।

    राहुल गांधी को किताब न पढ़ने देने के आरोप पर दुबे ने कहा कि उन्होंने उन्हें एक्सपोज़ होने से बचाया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर राहुल गांधी बिना टोके बोलते तो वे पांच मिनट भी प्रभावी ढंग से नहीं बोल पाएंगे। उनके अनुसार राहुल गांधी संसद में सिर्फ किताब और संविधान लेकर आते हैं और वास्तविक बहस में उनका योगदान सीमित रहता है।

    दुबे के इस बयान के बाद कांग्रेस ने भी उनके खिलाफ कई आरोप लगाए लेकिन सांसद ने साफ किया कि विपक्ष उन्हें डरता है और वे केवल प्रकाशित सामग्री पढ़कर अपनी बात रखते हैं। संसद में उनके भाषण और विवादित टिप्पणियों ने राजनीतिक बहस को जोरदार मोड़ दिया है।

  • हरियाणा के छायंसा गांव में 15 दिनों में 12 मौतों से हड़कंप, स्वास्थ्य विभाग ने गांव में लगाया डेरा

    हरियाणा के छायंसा गांव में 15 दिनों में 12 मौतों से हड़कंप, स्वास्थ्य विभाग ने गांव में लगाया डेरा


    नई दिल्ली । हरियाणा के पलवल जिले के छायंसा गांव में पिछले 15 दिनों में 12 मौतों ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। मृतकों में पांच स्कूली बच्चे भी शामिल हैं। लगातार हो रही मौतों ने गांववासियों को दहशत में डाल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 15 दिन पहले तीन लोगों की तबीयत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद से मौतों का सिलसिला जारी है।

    ग्रामीणों के मुताबिक गांव में लगभग हर घर में मरीज हैं और कई की हालत गंभीर है। परिजन अस्पतालों के चक्कर काटकर भी अपने बीमार परिवारजनों को ठीक नहीं कर पा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कदम उठाते हुए गांव में टीम डेरा डाला है। विभाग की टीम लगातार लोगों की जांच कर रही है और ब्लड सैंपल जुटा रही है। अब तक 300 ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं जबकि 400 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है।

    स्वास्थ्य विभाग की डॉ. सतिंदर वशिष्ठ के मुताबिक मृतकों के मेडिकल रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट में 4 मामलों में हेपेटाइटिस B और C का पता चला जबकि 3 मामलों में मल्टीपल ऑर्गन फेलियर और लिवर इंफेक्शन मिले। दो मरीजों को इलाज के लिए पलवल सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया है।

    गांव मुस्लिम बाहुल्य है और करीब 5 हजार आबादी वाले इस गांव में पानी की सप्लाई तीन अलग-अलग स्रोतों से होती है। कुछ घरों में सरकारी पानी आता है जबकि कुछ घरों में अंडरग्राउंड टैंक बनाए गए हैं जिनमें पानी भरने के लिए टैंकर मंगाए जाते हैं। हथीन शहर से आरओ प्लांट का पानी लेने वाले भी हैं। अब तक लिए गए 107 पानी के सैंपलों में 23 फेल पाए गए हैं जिनमें बैक्टीरिया की वृद्धि और क्लोरीन की कमी देखी गई है।

    स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के लिए ओपीडी लगाई है और घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही है। डॉ. वशिष्ठ ने बताया कि मृतकों के परिवारजनों और आसपास के लोगों के सैंपल भी लिए गए हैं ताकि बीमारी फैलने से रोकी जा सके। ग्रामीणों की मुख्य चिंता यह है कि यह हेपेटाइटिस B और C जैसी बीमारियां जल्द नियंत्रण में आएं और मौतों का सिलसिला थमे। यह स्थिति गांववासियों और अधिकारियों दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई है और स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी और उपचार की प्रक्रिया में लगा हुआ है।

  • CBSE 12वीं बोर्ड 2026: नंबर सुधार के लिए अब सिर्फ एक सब्जेक्ट में सप्लीमेंट्री की अनुमति, मेन एग्जाम में होगा बहु सब्जेक्ट सुधार

    CBSE 12वीं बोर्ड 2026: नंबर सुधार के लिए अब सिर्फ एक सब्जेक्ट में सप्लीमेंट्री की अनुमति, मेन एग्जाम में होगा बहु सब्जेक्ट सुधार


    नई दिल्ली । केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड CBSE ने 12वीं बोर्ड एग्जाम 2026 के लिए सप्लीमेंट्री एग्जाम नियमों में बड़ा बदलाव किया है। पुराने नियमों के तहत स्टूडेंट्स बोर्ड रिजल्ट आने के दो महीने के भीतर एक से अधिक सब्जेक्ट्स में नंबर सुधार इंप्रूवमेंट के लिए सप्लीमेंट्री एग्जाम दे सकते थे। लेकिन अब सीबीएसई ने स्पष्ट कर दिया है कि 12वीं बोर्ड के स्टूडेंट्स केवल एक ही सब्जेक्ट में सप्लीमेंट्री एग्जाम दे सकेंगे।

    सीबीएसई ने यह भी बताया कि यदि किसी स्टूडेंट को एक से अधिक सब्जेक्ट्स में नंबर सुधार करवाना है तो उन्हें अगले साल आयोजित होने वाले मेन बोर्ड एग्जाम में शामिल होना होगा। इसका मतलब यह है कि बहु सब्जेक्ट सुधार का विकल्प केवल मेन एग्जाम के माध्यम से ही उपलब्ध रहेगा।

    इस बदलाव का असर स्टूडेंट्स पर साफ दिखाई देगा। पहले स्टूडेंट्स रिजल्ट आने के बाद आसानी से कई सब्जेक्ट्स में सुधार कर सकते थे लेकिन अब उन्हें सावधानीपूर्वक तैयारी करनी होगी और केवल एक विषय में ही सप्लीमेंट्री का विकल्प मिलेगा। इससे स्टूडेंट्स को अपने एग्जाम प्रदर्शन पर ध्यान देने और बेहतर तैयारी करने की आवश्यकता बढ़ जाएगी।

    सीबीएसई ने 12वीं बोर्ड 2026 के सप्लीमेंट्री एग्जाम का टेंटिव शेड्यूल भी जारी कर दिया है। बोर्ड के अनुसार सप्लीमेंट्री एग्जाम 15 जुलाई 2026 को प्रस्तावित है। मई 2026 में 12वीं बोर्ड का रिजल्ट घोषित किया जाएगा और इसके बाद सप्लीमेंट्री एग्जाम के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी। स्टूडेंट्स को इसके लिए बोर्ड द्वारा जारी सर्कुलर का पालन करना होगा।

    इस नए नियम से स्टूडेंट्स के लिए परीक्षा तैयारी की रणनीति बदल जाएगी क्योंकि उन्हें केवल एक सब्जेक्ट में सुधार के मौके का लाभ उठाना होगा। बहु सब्जेक्ट सुधार के लिए उन्हें अगले साल मेन एग्जाम की तैयारी करनी होगी। यह कदम स्टूडेंट्स में जिम्मेदारी और तैयारी के प्रति गंभीरता बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।

    केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड CBSE ने 12वीं बोर्ड एग्जाम 2026 के लिए सप्लीमेंट्री एग्जाम नियमों में बड़ा बदलाव किया है। पुराने नियमों के तहत स्टूडेंट्स बोर्ड रिजल्ट आने के दो महीने के भीतर एक से अधिक सब्जेक्ट्स में नंबर सुधार इंप्रूवमेंट के लिए सप्लीमेंट्री एग्जाम दे सकते थे। लेकिन अब सीबीएसई ने स्पष्ट कर दिया है कि 12वीं बोर्ड के स्टूडेंट्स केवल एक ही सब्जेक्ट में सप्लीमेंट्री एग्जाम दे सकेंगे।

    सीबीएसई ने यह भी बताया कि यदि किसी स्टूडेंट को एक से अधिक सब्जेक्ट्स में नंबर सुधार करवाना है तो उन्हें अगले साल आयोजित होने वाले मेन बोर्ड एग्जाम में शामिल होना होगा। इसका मतलब यह है कि बहु सब्जेक्ट सुधार का विकल्प केवल मेन एग्जाम के माध्यम से ही उपलब्ध रहेगा।

    इस बदलाव का असर स्टूडेंट्स पर साफ दिखाई देगा। पहले स्टूडेंट्स रिजल्ट आने के बाद आसानी से कई सब्जेक्ट्स में सुधार कर सकते थे लेकिन अब उन्हें सावधानीपूर्वक तैयारी करनी होगी और केवल एक विषय में ही सप्लीमेंट्री का विकल्प मिलेगा। इससे स्टूडेंट्स को अपने एग्जाम प्रदर्शन पर ध्यान देने और बेहतर तैयारी करने की आवश्यकता बढ़ जाएगी।

    सीबीएसई ने 12वीं बोर्ड 2026 के सप्लीमेंट्री एग्जाम का टेंटिव शेड्यूल भी जारी कर दिया है। बोर्ड के अनुसार सप्लीमेंट्री एग्जाम 15 जुलाई 2026 को प्रस्तावित है। मई 2026 में 12वीं बोर्ड का रिजल्ट घोषित किया जाएगा और इसके बाद सप्लीमेंट्री एग्जाम के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी। स्टूडेंट्स को इसके लिए बोर्ड द्वारा जारी सर्कुलर का पालन करना होगा।

    इस नए नियम से स्टूडेंट्स के लिए परीक्षा तैयारी की रणनीति बदल जाएगी क्योंकि उन्हें केवल एक सब्जेक्ट में सुधार के मौके का लाभ उठाना होगा। बहु सब्जेक्ट सुधार के लिए उन्हें अगले साल मेन एग्जाम की तैयारी करनी होगी। यह कदम स्टूडेंट्स में जिम्मेदारी और तैयारी के प्रति गंभीरता बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।

  • बैंगलुरु बैंक मैनेजर ने ग्राहकों का 3 किलो सोना हड़पकर जुए में उड़ाया, पुलिस ने गिरफ्तार किया

    बैंगलुरु बैंक मैनेजर ने ग्राहकों का 3 किलो सोना हड़पकर जुए में उड़ाया, पुलिस ने गिरफ्तार किया


    बैंगलुरु । बैंगलुरु में एक चौकाने वाला बैंक फ्रॉड सामने आया है जिसमें इंडियन बैंक के 34 वर्षीय असिस्टेंट मैनेजर किरन कुमार ने ग्राहकों के करीब 3 किलो सोना हड़प लिया। यह सोना ग्राहकों के लॉकर में सुरक्षित रखा गया था और इसकी कीमत लगभग 4 करोड़ रुपये बताई जा रही है। आरोपी ने इस सोने को बेचकर प्राप्त राशि से ऑनलाइन जुआ खेला।

    पुलिस और बैंक सूत्रों के मुताबिक जब शाखा के ब्रांच मैनेजर अनुपस्थित थे तब किरन कुमार के पास लॉकर का एक्सेस था। उन्होंने लगातार छोटे-छोटे हिस्सों में सोना चुराना शुरू किया और धीरे-धीरे ग्राहकों के करीब 2.70 किलो सोने पर कब्जा कर लिया।

    यह मामला 2 जनवरी को तब उजागर हुआ जब एक ग्राहक अपने गहने निकालने बैंक गया और लॉकर में छेड़छाड़ पाई। जांच में पता चला कि बैंक के 21 लॉकरों से गहने गायब हैं जबकि तीन लॉकर पूरी तरह खाली कर दिए गए थे। इसके बाद बैंक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और बैंगलुरु पुलिस ने किरन कुमार को गिरफ्तार कर लिया।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह फ्रॉड पिछले साल तेलंगाना में एसबीआई बैंक के कैशियर द्वारा किए गए बड़े घोटाले की याद दिलाता है। उस मामले में कैशियर ने 10 महीने की योजना के तहत ग्राहकों के 14 करोड़ रुपये और 20 किलो सोना हड़प लिया था।

    अब बैंगलुरु में हुए इस फ्रॉड की जांच जारी है। पुलिस ने कहा है कि ग्राहक अपने लॉकर की सामग्री की सुरक्षा और ट्रैकिंग के लिए सावधान रहें। अधिकारियों के अनुसार इस मामले में आरोपी से पूछताछ के बाद चोरी किए गए सोने की वापसी और अन्य संभावित अपराधियों की पहचान की जाएगी। यह घटना एक बार फिर बैंकिंग सुरक्षा और कर्मचारियों पर भरोसे के बीच खतरनाक अंतर दिखाती है और ग्राहकों के लिए चेतावनी है कि उन्हें अपनी संपत्ति की निगरानी व्यक्तिगत रूप से भी करनी चाहिए।

  • दिल्ली में हर जमीन को मिलेगा आधार नंबर, रेखा गुप्ता सरकार ने लॉन्च किया ULPIN सिस्टम

    दिल्ली में हर जमीन को मिलेगा आधार नंबर, रेखा गुप्ता सरकार ने लॉन्च किया ULPIN सिस्टम


    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में अब हर जमीन की अपनी एक विशिष्ट डिजिटल पहचान होगी। दिल्ली सरकार ने राजधानी के प्रत्येक भूखंड को 14 अंकों का यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर देने की महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है। इस कदम का उद्देश्य भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है ताकि भविष्य में जमीन से जुड़े लेन-देन स्वामित्व की पहचान और विवादों के निपटारे में आसानी हो सके।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पहल को भूमि विवाद और गड़बड़ियों के खिलाफ एक मजबूत डिजिटल हथियार बताते हुए कहा कि इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा। उन्होंने कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया अभियान को आगे बढ़ाने की दिशा में एक क्रांतिकारी प्रयास है। उनके अनुसार लंबे समय से दिल्ली में एक सुव्यवस्थित भू-प्रबंधन प्रणाली की आवश्यकता महसूस की जा रही थी जिसे अब मिशन मोड में लागू किया जा रहा है।

    यह योजना भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय और भूमि संसाधन विभाग की पहल का हिस्सा है जिसे वर्ष 2016 में तैयार किया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने इसे लागू नहीं किया लेकिन अब दिल्ली सरकार इसे प्राथमिकता के आधार पर लागू कर रही है। भू आधार के रूप में जानी जा रही इस प्रणाली को लागू करने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग की आईटी शाखा को सौंपी गई है जिसे भारतीय सर्वेक्षण विभाग का तकनीकी सहयोग मिलेगा।

    सरकार के मुताबिक प्रणाली लागू होने के बाद भूमि स्वामित्व में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और जमीन की सीमाओं को लेकर होने वाले विवादों में कमी आएगी। विभिन्न सरकारी विभागों के बीच भूमि डेटा का समन्वय भी आसान होगा। इससे धोखाधड़ी वाले लेन-देन एक ही जमीन के बहु-पंजीकरण और रिकॉर्ड में हेरफेर जैसी समस्याओं पर प्रभावी रोक लग सकेगी। आम नागरिकों के लिए सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि उन्हें जमीन की पहचान और सत्यापन के लिए कई दस्तावेजों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे बल्कि एक ही यूनिक नंबर से पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।

    इस योजना के तहत अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग से लगभग 2 टेराबाइट उच्च गुणवत्ता वाले भू-स्थानिक डेटा का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही ड्रोन के जरिए ली गई ऑर्थो-रेक्टिफाइड इमेजेज़ की मदद से जमीन की सटीक मैपिंग की जा रही है। इन आंकड़ों के आधार पर दिल्ली के ग्रामीण इलाकों समेत उन 48 गांवों के लिए सटीक तैयार किए जाएंगे जो पहले से स्वामित्व योजना में शामिल हैं। सरकार का मानना है कि यह डिजिटल पहल राजधानी में भू-प्रबंधन व्यवस्था को नई दिशा देगी और भूमि विवादों के समाधान को अधिक सरल पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएगी।

  • सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर फिर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ 7 अप्रैल से करेगी विचार

    सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर फिर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ 7 अप्रैल से करेगी विचार


    नई दिल्ली । देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर केरल स्थित भगवान अयप्पा के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े बहुचर्चित मामले पर सुनवाई शुरू करने जा रही है। सितंबर 2018 के ऐतिहासिक फैसले के खिलाफ दायर कई समीक्षा और पुनर्विचार याचिकाओं पर अब नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ 7 अप्रैल से सुनवाई करेगी। यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता समानता के अधिकार और परंपराओं की संवैधानिक वैधता जैसे अहम सवालों से जुड़ा हुआ है।

    बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार नौ जजों की पीठ धार्मिक अधिकारों और स्वतंत्रता से जुड़े सात महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों की जांच करेगी। इन सवालों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि क्या सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए या परंपरागत प्रतिबंध को बरकरार रखा जाए।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने सोमवार को सभी पक्षों को 14 मार्च तक अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सुनवाई की विस्तृत समय-सारिणी भी तय कर दी है। कोर्ट के अनुसार नौ न्यायाधीशों की पीठ 7 अप्रैल को सुबह 10:30 बजे से कार्यवाही शुरू करेगी। पुनर्विचार याचिकाकर्ताओं को 7 से 9 अप्रैल तक सुना जाएगा जबकि पुनर्विचार के विरोधियों को 14 से 16 अप्रैल तक अपनी दलीलें रखने का अवसर मिलेगा। 21 अप्रैल को प्रतिवाद सुना जाएगा और 22 अप्रैल तक एमिकस क्यूरी द्वारा अंतिम और समापन दलीलें पेश की जाएंगी।

    गौरतलब है कि सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 4:1 के बहुमत से सबरीमाला में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी। उस फैसले में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ बहुमत में थे जबकि पीठ की एकमात्र महिला न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा ने असहमति जताई थी। उन्होंने अपने मत में कहा था कि धार्मिक परंपराओं में न्यायिक हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए।

    2018 के फैसले के बाद केरल में व्यापक विरोध-प्रदर्शन हुए थे और दर्जनों पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई थीं। नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मामले को बड़ी पीठ के समक्ष विचारार्थ रखने का निर्णय लिया था लेकिन अंतिम निर्णय नहीं दिया गया था।

    अब नौ जजों की संविधान पीठ इस जटिल संवैधानिक विवाद पर व्यापक सुनवाई कर कानूनी प्रश्नों का निर्धारण करेगी। देशभर की निगाहें इस सुनवाई पर टिकी हैं क्योंकि इसका असर न केवल सबरीमाला मंदिर की परंपराओं पर पड़ेगा बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और लैंगिक समानता से जुड़े अन्य मामलों पर भी दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

  • : ईसीआई के वार्षिक खेल सप्ताह 2026 की शुरुआत, ‘लोकतंत्र के लिए दौड़ो’ के साथ खेल और चुनावी मूल्यों का संगम

    : ईसीआई के वार्षिक खेल सप्ताह 2026 की शुरुआत, ‘लोकतंत्र के लिए दौड़ो’ के साथ खेल और चुनावी मूल्यों का संगम


    नई दिल्ली । निर्वाचन आयोग ईसीआई ने सोमवार को दिल्ली स्थित राष्ट्रमंडल खेल परिसर में अपने वार्षिक खेल सप्ताह 2026 का उत्साहपूर्ण शुभारंभ किया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए की और सुबह औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर खेल सप्ताह का उद्घाटन किया। आयोजन स्थल पर उत्साह और ऊर्जा का माहौल देखने को मिला, जहां आयोग के अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

    अपने संबोधन में मुख्य चुनाव आयुक्त ने खेल और चुनाव प्रक्रिया के बीच गहरे संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता, निष्पक्षता, तटस्थता और नियमों के प्रति सम्मान जैसे मूल्य खेल जगत की पहचान हैं और यही सिद्धांत भारतीय चुनाव प्रणाली की आधारशिला भी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिस प्रकार खेल में नियमों का पालन और खेलभावना सर्वोपरि होती है, उसी प्रकार चुनावों में आचार संहिता, समान अवसर और निष्पक्ष संचालन अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे पूरे उत्साह, अनुशासन और सकारात्मक भावना के साथ सप्ताह भर चलने वाले आयोजनों में भाग लें।

    संबोधन के बाद ज्ञानेश कुमार ने लोकतंत्र के लिए दौड़ो थीम के अंतर्गत 100 मीटर महिला दौड़ को हरी झंडी दिखाई। इस प्रतीकात्मक शुरुआत के साथ खेल सप्ताह का विधिवत आगाज हुआ। इस वर्ष के वार्षिक खेल सप्ताह का विषय मैदान में सद्भाव, लोकतंत्र में शक्ति रखा गया है, जो खेलों के माध्यम से टीम भावना, सहयोग और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के साथ साथ लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का संदेश देता है।

    निर्वाचन आयोग के रिक्रिएशन क्लब की ओर से आयोजित इस खेल सप्ताह में कुल 383 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें 72 महिला प्रतिभागी शामिल हैं। आयोजन का उद्देश्य न केवल कर्मचारियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करना है, बल्कि आपसी समन्वय और संगठनात्मक एकता को भी मजबूत करना है।

    खेल सप्ताह के दौरान 7 विभिन्न खेलों की 43 श्रेणियों में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इनमें शतरंज, कैरम, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, क्रिकेट, फुटबॉल और एथलेटिक्स ट्रैक स्पर्धाएं शामिल हैं। एथलेटिक्स में विभिन्न आयु वर्गों के पुरुषों और महिलाओं के लिए 100, 200, 400 और 800 मीटर दौड़ प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। इन विविध स्पर्धाओं के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी खेल प्रतिभा दिखाने और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

    ईसीआई का यह वार्षिक खेल सप्ताह न केवल खेल कौशल को बढ़ावा देने का मंच है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों और संगठनात्मक एकजुटता को सुदृढ़ करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। खेल और लोकतंत्र के साझा आदर्शों को एक साथ प्रस्तुत करता यह आयोजन पूरे सप्ताह उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रहने की उम्मीद है।

  • मुंबई में मोदी मैक्रों शिखर वार्ता: रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी, ‘नवाचार वर्ष 2026’ का होगा शुभारंभ

    मुंबई में मोदी मैक्रों शिखर वार्ता: रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी, ‘नवाचार वर्ष 2026’ का होगा शुभारंभ


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 फरवरी 2026 को मुंबई के दौरे पर रहेंगे जहां वे फ्रांस गणराज्य के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। राष्ट्रपति मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक भारत की औपचारिक यात्रा पर रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा भारत फ्रांस संबंधों के लिए विशेष महत्व रखती है और इसे रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। यह राष्ट्रपति मैक्रों का भारत का चौथा और मुंबई का पहला दौरा होगा जिससे इस मुलाकात की प्रतीकात्मक और कूटनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।

    मुंबई प्रवास के दौरान लगभग दोपहर 3:15 बजे दोनों नेता लोक भवन में द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगे। इन बैठकों में भारत फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न आयामों की व्यापक समीक्षा की जाएगी। रक्षा समुद्री सुरक्षा अंतरिक्ष परमाणु ऊर्जा जलवायु परिवर्तन शिक्षा प्रौद्योगिकी और इंडो पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहेंगे। दोनों नेता साझेदारी को नए और उभरते क्षेत्रों विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता साइबर सुरक्षा हरित ऊर्जा और डिजिटल नवाचार तक विस्तारित करने की संभावनाओं पर भी विचार करेंगे। साथ ही वे क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण साझा करेंगे जिनमें बदलता भू राजनीतिक परिदृश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने जैसे विषय शामिल रह सकते हैं।

    राष्ट्रपति मैक्रों अपनी यात्रा के दौरान भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में भी हिस्सा लेंगे जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार और समावेशी उपयोग पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण मंच है। इस संदर्भ में दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग और अनुसंधान साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाने पर बल दिए जाने की संभावना है।

    शाम लगभग 5:15 बजे प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों संयुक्त रूप से भारत फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर दोनों देश व्यवसायिक नेताओं स्टार्ट अप प्रतिनिधियों वैज्ञानिकों शोधकर्ताओं और नवोन्मेषकों के एक विशेष सम्मेलन को संबोधित करेंगे। नवाचार वर्ष का उद्देश्य उभरती प्रौद्योगिकियों स्टार्ट अप पारिस्थितिकी तंत्र अनुसंधान एवं विकास तथा युवा उद्यमिता के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को नई गति देना है। इससे दोनों देशों के उद्योग जगत और अकादमिक संस्थानों के बीच साझेदारी को सशक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त होगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह शिखर वार्ता न केवल पारंपरिक रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करेगी बल्कि भविष्य की प्रौद्योगिकियों और सतत विकास के क्षेत्रों में भी साझा दृष्टि को आगे बढ़ाएगी। मुंबई में होने वाली यह उच्चस्तरीय मुलाकात भारत फ्रांस संबंधों को नई ऊर्जा देने और वैश्विक मंच पर दोनों देशों की साझी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम पड़ाव साबित हो सकती है।

  • PM मोदी ने US ट्रेड डील को बताया अहम… पूर्ववर्ती UPA सरकार पर जमकर साधा निशाना

    PM मोदी ने US ट्रेड डील को बताया अहम… पूर्ववर्ती UPA सरकार पर जमकर साधा निशाना


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार (UPA Government) पर निशाना साधा। उन्होंने कहाकि यूपीए सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन के कारण भारत व्यापार वार्ताओं (India Trade Negotiations) में मजबूती से अपना पक्ष नहीं रख सका। इस वजह से एक भी बातचीत निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी।‘एक इंटरव्यू में मोदी ने कहाकि भारत ने ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ (ईयू) और अमेरिका के साथ जो व्यापार समझौते किए हैं, उनसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए, खास तौर पर श्रम-प्रधान क्षेत्रों में, इन देशों में लगभग शून्य शुल्क या अन्य देशों की तुलना में काफी कम शुल्क पर वस्तुओं के निर्यात के रास्ते खुल गए हैं।

    प्रधानमंत्री कहाकि इन व्यापार समझौतों पर भले ही हाल ही में मुहर लगी हो, लेकिन ये अधिक प्रतिस्पर्धी घरेलू उद्योग, आत्मविश्वास से भरपूर दृष्टिकोण और खुले विचारों का नतीजा हैं। ये आज की दुनिया में पाए जाने वाले दुर्लभ गुण हैं। हाल के वर्षों में भारत की ओर से किए गए व्यापार समझौतों की बात करने से पहले यह याद करना अहम है कि हम एक दशक पहले कहां खड़े थे। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने अपने शासनकाल में कछ व्यापार समझौते करने की कोशिश की, लेकिन यह यात्रा अनिश्चितता और अस्थिरता से भरी रही।

    मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए कहाकि मुख्यतः उनके आर्थिक कुप्रबंधन के कारण भारत मजबूती के साथ अपना पक्ष नहीं रख सका। उन्होंने बातचीत को निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए अनुकूल माहौल नहीं बनाया। बातचीत शुरू होती और फिर ठप पड़ जाती। अंत में लंबी बातचीत के बावजूद कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल पाता था।

    उन्होंने कहा कि लेकिन सत्ता में आने के बाद हमने नीति-आधारित शासन के जरिये आर्थिक पुनरुत्थान का नेतृत्व किया, हमारे आर्थिक ढांचे को मजबूत किया और एक नियम-आधारित प्रणाली का निर्माण किया। जब हमने राजनीतिक स्थिरता, नीतिगत पूर्वानुमान और सुधार-केंद्रित दृष्टिकोण सुनिश्चित किया, तो दुनिया भारत में निवेश करने के लिए इच्छुक हो गई।

    मोदी ने कहा कि उनकी सरकार की ओर से किए गए सुधारों से भारत के विनिर्माण और सेवा जैसे दोनों क्षेत्रों को मदद हासिल हुई तथा एमएसएमई के बीच उत्पादकता एवं प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिला। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास से भरपूर, प्रतिस्पर्धी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत के उभार के कारण कई देशों को नई दिल्ली के साथ व्यापार समझौते पर आगे बढ़ने में फायदा दिखा।

    मोदी ने लिखित साक्षात्कार में कहाकि पूर्व की सरकार के रुख और हमारे दृष्टिकोण में मौजूद अंतर को समझने के लिए यूरोपीय संघ के साथ हुए व्यापार समझौते पर गौर करें। पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में भी इस पर चर्चा और बातचीत हुई थी। लेकिन अंततः हमारी सरकार में दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी समझौते पर मुहर लगी। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उनकी सरकार ने मुक्त व्यापार समझौतों का एक रणनीतिक और उद्देश्यपूर्ण नेटवर्क बनाया है।