Category: National

  • CBSE का बड़ा निर्णय… 12वीं के रिजल्ट के बाद नहीं होगा Mark Verification… अब पूरी तरह डिजिटल जांची जाएंगी कॉपियां

    CBSE का बड़ा निर्णय… 12वीं के रिजल्ट के बाद नहीं होगा Mark Verification… अब पूरी तरह डिजिटल जांची जाएंगी कॉपियां


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) (Central Board of Secondary Education (CBSE) ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 (12th Board Exam 2026) को लेकर अहम निर्णय लिया है। इस बार 12वीं के परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद छात्रों को अंक सत्यापन (मार्क वेरिफिकेशन) (Mark Verification) की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। बोर्ड ने तय किया है कि 2026 से 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरी तरह डिजिटल प्रणाली ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ के जरिए किया जाएगा।

    दरअसल, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) इस बार 12वीं के छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ के साथ पूरी तरह डिजिटल तरीके से कराने जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इसके बाद अंकों के सत्यापन की जरूरत नहीं रहेगी। शुक्रवार को सीबीएसई अधिकारियों ने संबद्ध स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के लिए आयोजित एक कार्यशाला में यह जानकारी दी। परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने बताया कि 2026 में 12वीं की परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में ऑन स्क्रीन मार्किंग की जाएगी। डिजिटल मूल्यांकन की इस प्रक्रिया के बाद अंकों की गिनती में किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रह जाएगी। ऐसे में छात्रों के लिए परिणाम घोषित होने के बाद अंकों के सत्यापन की जरूरत नहीं रह जाएगी।


    10वीं का मूल्यांकन मैनुअल ही होगा

    परीक्षा नियंत्रक भारद्वाज ने बताया कि बोर्ड इस बार सिर्फ 12वीं की परीक्षा के लिए यह सुविधा लागू कर रहा है। इस बार होने वाली दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में कॉपियों का मूल्यांकन ‘मैनुअल’ यानी शिक्षकों के द्वारा ही किया जाएगा।


    इसलिए कराया जाता था अंक सत्यापन

    पुरानी व्यवस्था में कई बार मानवीय भूलों के चलते अंक जुड़ने से रह जाते थे। परिणाम के बाद छात्र अंक सत्यापन को आवेदन करते थे, जिसके बाद कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन होता था।


    क्या होती है ऑन स्क्रीन मार्किंग

    ऑन स्क्रीन मार्किंग डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है। इसमें उत्तर पुस्तिका को हाथों से चेक नहीं किया जाता। शिक्षक स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका को कंप्यूटर पर चेक करेंगे। छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं पहले स्कैन की जाती हैं। इसके बाद ये कॉपियां सुरक्षित ऑनलाइन सिस्टम पर अपलोड होती हैं और शिक्षक कंप्यूटर पर उन्हें देखकर अंक देते हैं। इस सिस्टम में सॉफ्टवेयर खुद ही कुल अंक जोड़ देता है, जिससे टोटलिंग की गलती की संभावना खत्म हो जाती है। अभी तक कई बार हाथ से जोड़ने में गलती हो जाती थी, जिससे छात्रों को बाद में वेरिफिकेशन के लिए आवेदन करना पड़ता था।


    शिक्षक अब अपने स्कूल से ही जांच सकेंगे कॉपियां

    इस नए सिस्टम की एक खास बात यह है कि शिक्षकों को अब कॉपी जांचने के लिए किसी मूल्यांकन केंद्र पर जाने की जरूरत नहीं होगी। वे अपने ही स्कूल में बैठकर, नियमित काम करते हुए कॉपियों का मूल्यांकन कर सकेंगे। इससे समय और यात्रा खर्च दोनों की बचत होगी और ज्यादा शिक्षक इस प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।


    17 फरवरी से शुरू हो रही है परीक्षा

    सीबीएसई की 12वीं और दसवीं की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू हो रही हैं। बोर्ड से भारत और दुनिया के 26 देशों में 31,000 से अधिक स्कूल संबद्ध हैं।

  • लिव-इन रिश्ते में दहेज उत्पीड़न का दावा…SC ने सरकार से मांगी कानूनी स्पष्टता

    लिव-इन रिश्ते में दहेज उत्पीड़न का दावा…SC ने सरकार से मांगी कानूनी स्पष्टता


    नई दिल्ली।
    क्या एक विवाहित व्यक्ति जो अपनी पत्नी के जीवित रहते हुए किसी अन्य महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) में है, उस महिला द्वारा दहेज प्रताड़ना (IPC की धारा 498A) का मामला दर्ज कराया जा सकता है? यह एक ऐसा सवाल है जिस पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court.) ने अब गंभीर कानूनी विचार करने का निर्णय लिया है। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A (अब भारतीय न्याय संहिता) स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करती है कि केवल एक पत्नी ही अपने पति या उसके रिश्तेदारों के खिलाफ दहेज या क्रूरता की शिकायत दर्ज करा सकती है।

    चूंकि हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत कानूनी रूप से एक व्यक्ति एक ही समय में दो महिलाओं का पति नहीं हो सकता है। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि क्या लिव-इन पार्टनर को कानूनन पत्नी का दर्जा दिया जा सकता है?

    सर्वोच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन के सिंह की पीठ ने एक डॉक्टर लोकेश बी.एच. द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की। लोकेश ने फरवरी 2000 में नवीना से शादी की थी। आरोप है कि उन्होंने 2010 में तीर्थ नामक महिला से भी शादी की, जो कानूनी रूप से अवैध है। तीर्थ ने 2016 में लोकेश पर दहेज की मांग को लेकर उसे जलाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। बाद में उसने घरेलू हिंसा का मामला भी दर्ज कराया।

    लोकेश ने तर्क दिया कि तीर्थ के साथ उनका कोई कानूनी वैवाहिक संबंध नहीं है। उन्होंने इस आशय की घोषणा के लिए बेंगलुरु की एक पारिवारिक अदालत में मुकदमा भी दायर किया है, जो लंबित है। इसके अलावा लोकेश के नियोक्ता ने प्रमाणित किया है कि कथित घटना के दिन लोकेश अस्पताल में ड्यूटी पर थे।

    कर्नाटक उच्च न्यायालय ने लोकेश की याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रही कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।

    सर्वोच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को इस मामले में सहयोग करने के लिए कहा है। इसके अलावा, अदालत ने मामले की जटिलता को देखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता नीना नरिमन को ‘एमिकस क्यूरी’ (अदालत का मित्र) नियुक्त किया है, जो इस कानूनी मुद्दे पर निष्पक्ष राय प्रदान करेंगी।

    याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील संजय नुली ने तर्क दिया कि उच्च न्यायालय ने धारा 498A की व्याख्या करने में गलती की है। उनका तर्क है कि कानून की शब्दावली स्पष्ट रूप से पति और पत्नी का उल्लेख करती है। इसे एक लिव-इन रिलेशनशिप पर लागू नहीं किया जा सकता है। विशेषकर तब जब पुरुष पहले से ही विवाहित हो।

    यदि सुप्रीम कोर्ट लिव-इन पार्टनर को इस धारा के तहत पत्नी मानता है, तो यह वैवाहिक कानूनों की पारंपरिक व्याख्या में एक बड़ा बदलाव होगा।

  • PM मोदी ने बताया – प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम 'सेवा तीर्थ क्यों रखा…. क्या है इसके पीछे का गहरा संदेश?

    PM मोदी ने बताया – प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम 'सेवा तीर्थ क्यों रखा…. क्या है इसके पीछे का गहरा संदेश?


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने शुक्रवार को नए ऑफिस का उद्धाटन किया। इसके बाद उन्होंने संबोधन भी दिया। इस दौरान पीएम मोदी ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय (Prime Minister Office) का नाम सेवा तीर्थ (Seva Teerth) क्यों रखा गया। इसके साथ ही उन्होंने इसके पीछे के दर्शन और संकल्प के बारे में भी बताया। पीएम मोदी ने कहाकि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। सेवा की भावना ही भारत की आत्मा है। नाम बदलने के पीछे स्वतंत्र भारत की पहचान है। उन्होंने आगे कहाकि सेवा की भावना ही भारत की पहचान है। पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद साउथ ब्लॉक, नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतों से देश के लिए अनेक निर्णय, नीतियां बनी लेकिन यह भी सच है कि ये इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतीक के तौर पर बनाई गई थी। इन इमारतों को बनाने का मकसद भारत को गुलामी की जंजीरों में जकड़े रखना था।


    मिलेगा नया आत्मविश्वास

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि आज जब भारत रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है, आज जब भारत अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की नई गाथा लिख रहा है, आज जब भारत नए-नए ट्रेड समझौते कर संभावनाओं के नए दरवाजे खुल रहे हैं। जब देश संतृप्ति के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है तो सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवनों में आप सबके काम की नई गति और आपका नया आत्मविश्वास देश के लक्ष्यों को प्राप्त करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा।


    पुरानी इमारतों पर क्या बोले

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतें जहां ब्रिटिश हुकूमत की सोच को लागू करने के लिए बनी थीं। वहीं, आज मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसे नए परिसर भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बने हैं। यहां से जो फैसले होंगे वह किसी महाराजा की सोच को नहीं 140 करोड़ देशवासियों की सोच को आगे बढ़ाने का आधार बनेंगे। प्रधानमंत्री ने आगे कहाकि इस बदलाव के बीच निश्चित तौर पर पुराने भवन में बिताए गए वर्षों की स्मृतियां हमारे साथ रहेंगी। अलग-अलग समय पर वहां से कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए, वहां से देश को नई दिशा मिली है। वह परिसर, वह इमारत भारत के इतिहास का अमर हिस्सा है इसलिए हमने उस भवन को देश के लिए समर्पित म्यूजियम बनाने का फैसला किया है।


    हमने तय किया कि…

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि 2014 में देश ने तय किया कि गुलामी की मानसिकता अब और नहीं चलेगी। हमने गुलामी की इस मानसिकता को बदलने का अभियान शुरू किया, हमने वीरों के नाम नेशनल वॉर मेमोरियल बनाया। हमने पुलिस की वीरता को सम्मान देने के लिए पुलिस स्मारक बनाया। रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग रखा गया। यह सिर्फ नाम बदलना नहीं था, यह सत्ता के मिजाज़ को सेवा की भावना में बदलने का पवित्र प्रयास था।

  • एयर इंडिया की एयरबस ने बिना अनुमति भरी उड़ान, DGCA ने ठोका एक करोड़ का जुर्माना

    एयर इंडिया की एयरबस ने बिना अनुमति भरी उड़ान, DGCA ने ठोका एक करोड़ का जुर्माना


    नई दिल्ली।
    एयर इंडिया (Air India) पर डीजीसीए (DGCA) ने एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। जानकारी के मुताबिक एयर इंडिया (Air India) की एयरबस (Airbus) ने बिना जरूरी परमिशन के उड़ान भरी। ऐसा एक या दो नहीं, बल्कि आठ बार हुआ। डीजीसीए ने इसको बहुत गंभीर किस्म का उल्लंघन माना है। साथ ही लापरवाही के लिए टॉप लेवल मैनेजमेंट को जिम्मेदार ठहराया है। डीजीसीए ने जुर्माना लगाते हुए अपने आदेश में लिखा है कि एयरबस ए320 विमान ने कई सेक्टर्स में उड़ान भरी। इसमें नई दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद की कनेक्टिंग फ्लाइट्स भी शामिल हैं।

    ऐसा पिछले साल 24 से 25 नवंबर के बीच हुआ। इन उड़ानों के लिए एयर इंडिया ने अनिवार्य एयरवर्दीनेस रिव्यू सर्टिफिकेट (ARC) नहीं लिया था। एआरसी एक बेहद अहम सर्टिफिकेट है जो सालाना तौर पर डीजीसीए द्वारा जारी किया जाता है। इसके लिए विमान को सभी जरूरी सुरक्षा मानकों को पूरा करना होता है। बिना एआरसी के उड़ान भरना उड़ान के सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।


    डीजीसीए ने माना बेहद गंभीर

    डीजीसीए ने एयर इंडिया के इस उल्लंघन को बेहद गंभीर माना है। एक खबर के मुताबिक इसे एयरलाइन की कैजुअल अप्रोच बताया गया है। जानकारी के मुताबिक डीजीसीए ने कहाकि इस तरह के उल्लंघन को लेकर हम बहुत कड़ी कार्रवाई करते हैं। इसलिए जितनी ज्यादा संभव हो सकती थी, उतनी पेनाल्टी लगाई गई है। जब किसी संस्था पर जुर्माना लगाया जाता है तो जिम्मेदार मैनेजर को नोटिस दी जाती है। डीजीसीए ने शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय की है, और एयर इंडिया के सीईओ कैम्पबेल विल्सन को इस चूक के लिए जिम्मेदार ठहराया है।


    एयर इंडिया ने क्या कहा

    डीजीसीए के आदेश का जवाब देते हुए, एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने एक बयान में कहाकि एयर इंडिया ने 2025 में स्वेच्छा से रिपोर्ट किए गए एक घटना से संबंधित डीजीसीए आदेश की प्राप्ति को स्वीकार किया है। सभी पहचाने गए गैप्स को तब से संतोषजनक रूप से संबोधित किया गया है, साथ ही प्राधिकरण के साथ साझा किया गया है। एयर इंडिया अपने संचालन की निष्पक्षता और सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता में अडिग है।

  • पीयूष गोयल बोले… US डील किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित… राहुल गांधी ने झूठी कहानी गढ़ी

    पीयूष गोयल बोले… US डील किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित… राहुल गांधी ने झूठी कहानी गढ़ी


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के आरोपों को पूरी तरह झूठी कहानी करार देते हुए पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने एक बार फिर सुनियोजित तरीके से पूरी तरह बनावटी और झूठी कहानी गढ़ी है। भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते में किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के इशारों पर किसानों को गुमराह कर रहे हैं और उनका दावा बेबुनियाद है।

    गोयल ने कहा कि राहुल गांधी कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं के इशारों पर चल रहे हैं, जो किसान नेता होने का ढोंग कर रहे हैं, जबकि यह पूरी तरह से बनावटी और बेबुनियादी बातचीत है। अब मैं राहुल गांधी के झूठे दावों की सच्चाई सामने लाता हूं और उन्हें और उनके मित्रों को बेनकाब करता हूं, जो हमारे भोले-भाले, मेहनती अन्नदाताओं को गुमराह कर रहे हैं। मंत्री ने आगे कहा, मोदी सरकार ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Agreement) में किसानों की हितों की पूरी तरह सुरक्षा की है। जब मैं कहता हूं कि पूरी सुरक्षा की गई है, तो मैं इसे रिकॉर्ड पर और पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं।

    उन्होंने कहा, हमने सभी किसानों के हितों की रक्षा की है और यह एक ऐसा समझौता है जो हमारे किसानों, मछुआरों, मेहनती युवाओं, एमएसएमई, स्टार्टअप्स को लाभ पहुंचाएगा। राहुल गांधी, आज आप एक नाटकबाज और झूठे, बेबुनियाद आरोपों और मनगढ़ंत कहानियों को लगातार फैलाने वाले के रूप में पूरी तरह बेनकाब हुए हैं।


    राहुल गांधी ने क्या कहा था?

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने भारत के किसानों के साथ धोखा किया है। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता किसानों की आजीविका के लिए सीधा खतरा है।

    रायबरेली सांसद ने पर लिखा, नरेंद्र सरेंडर मोदी ने भारत के किसानों को धोखा दिया है और किसानों ने इसे समझ लिया है। यह केवल एक व्यापार समझौता नहीं है। यह हमारे अन्नदाताओं की आजीविका पर सीधा हमला है। कांग्रेस नेता ने कहा कि संसद में किसानों के संगठनों के प्रतिनिधियों से हुई बैठक में यह चिंता स्पष्ट रूप से दिखाई दी। उन्होंने लिखा, आज संसद में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में उनकी चिंताएं स्पष्ट रूप से सामने आईं। महंगाई, बढ़ती लागत और एमएसपी की अनिश्चितता से जूझ रहे किसान अब विदेशी फसलों का सामना करने के लिए तैयार नहीं हैं, जो बड़ी सब्सिडी और यांत्रिक ताकत के साथ आती हैं।

  • नई दिल्ली के कृषि भवन परिसर से हट सकती है 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद, वक्फ बोर्ड में चिंता की लहर

    नई दिल्ली के कृषि भवन परिसर से हट सकती है 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद, वक्फ बोर्ड में चिंता की लहर


    नई दिल्ली। केंद्रीय सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत नई दिल्ली के कृषि भवन परिसर में मौजूद 100 साल पुरानी ‘कदीमी मस्जिद’ के भविष्य को लेकर संशय बढ़ गया है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज किए जाने और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) द्वारा हाल ही में जारी टेंडर के बाद मस्जिद को हटाए जाने की आशंका उठ रही है। इससे पहले केंद्र सरकार ने मस्जिद की सुरक्षा का भरोसा दिया था।

    अदालत में पिछली स्थिति
    2024 में दिल्ली हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि बोर्ड पुनः तब कोर्ट आ सकता है जब उसे सेंट्रल विस्टा परियोजना में अपनी संपत्ति पर खतरा महसूस हो। याचिका में कृषि भवन परिसर की मस्जिद सहित छह धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की मांग की गई थी। 1 दिसंबर 2021 की सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया था कि सरकार इन स्थलों के साथ कोई बदलाव नहीं कर रही है।

    टेंडर ने बढ़ाई अनिश्चितता
    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, CPWD ने 19 जनवरी 2026 को कृषि भवन और शास्त्री भवन के पुनर्विकास के लिए नया टेंडर जारी किया। हालांकि मस्जिद का नाम हटाने वाली सूची में नहीं है, लेकिन टेंडर के ड्रॉइंग्स में मस्जिद को नए प्रस्तावित भवन में उसके मौजूदा स्थान पर नहीं दिखाया गया है।

    वक्फ बोर्ड और इमाम की प्रतिक्रिया
    कदीमी मस्जिद कृषि भवन के खुले प्रांगण में स्थित है और मुख्य रूप से केंद्रीय कर्मचारियों द्वारा नमाज अदा करने के लिए प्रयोग की जाती है। यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षित स्मारक नहीं है, लेकिन 1970 के दिल्ली प्रशासन के राजपत्र में वक्फ संपत्तियों की सूची में दर्ज है।

    वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अमानतुल्ला खान ने कहा, “सरकार ने अदालत में स्पष्ट कहा था कि मस्जिदों को कोई नुकसान नहीं होगा। अगर इसे हटाने का प्रयास किया गया, तो यह उचित नहीं होगा।”

    परियोजना और लागत
    CPWD ने कृषि भवन और शास्त्री भवन के स्थान पर ‘कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट’ (CCS) की इमारतों 4 और 5 के निर्माण के लिए 19 जनवरी को टेंडर जारी किया। बोली लगाने की अंतिम तिथि 13 फरवरी है। CCS 4 और 5 परियोजनाओं की अनुमानित लागत 3,006.07 करोड़ रुपये है और इसे 24 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत पहले उपराष्ट्रपति के पूर्व आधिकारिक निवास परिसर में स्थित एक मस्जिद और एक मंदिर को हटाया जा चुका है, जिससे कदीमी मस्जिद के भविष्य को लेकर वक्फ बोर्ड की चिंता और बढ़ गई है।

  • विश्व रेडियो दिवस पर पीएम मोदी ने रेडियो को बताया भरोसेमंद साथी, ‘मन की बात’ के लिए जनता से मांगे सुझाव

    विश्व रेडियो दिवस पर पीएम मोदी ने रेडियो को बताया भरोसेमंद साथी, ‘मन की बात’ के लिए जनता से मांगे सुझाव


    नई दिल्ली।विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो को एक सशक्त और भरोसेमंद माध्यम बताते हुए इसकी अहमियत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि रेडियो ने दशकों से देश के कोने-कोने में लोगों को जोड़ने का काम किया है और आज भी यह सूचना, प्रेरणा और संवाद का एक मजबूत जरिया बना हुआ है। साथ ही उन्होंने नागरिकों से अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात के आगामी संस्करण के लिए सुझाव देने की अपील भी की।

    प्रधानमंत्री ने विश्व रेडियो दिवस के मौके पर सोशल मीडिया मंच X पर संदेश साझा करते हुए कहा कि यह दिन उस माध्यम का उत्सव मनाने का अवसर है, जिसने समय की कसौटी पर खुद को हमेशा साबित किया है। उन्होंने रेडियो को एक ऐसी “भरोसेमंद आवाज़” बताया जो दूर-दराज के गांवों से लेकर बड़े शहरों तक लोगों को एक सूत्र में बांधे रखती है। उनके अनुसार, रेडियो ने वर्षों से लोगों तक समय पर जानकारी पहुंचाने, नई प्रतिभाओं को मंच देने और रचनात्मकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    उन्होंने कहा कि रेडियो केवल एक तकनीकी माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली एक सशक्त कड़ी है। यह उन लाखों लोगों के प्रयासों का परिणाम है जो इस माध्यम से जुड़े हैं और निरंतर लोगों तक सटीक जानकारी और मनोरंजन पहुंचाते हैं। प्रधानमंत्री ने इस दिन को उन सभी लोगों के योगदान को सम्मान देने का अवसर भी बताया, जिन्होंने रेडियो को आज भी प्रासंगिक बनाए रखा है।

    अपने व्यक्तिगत अनुभव का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से उन्होंने खुद महसूस किया है कि रेडियो किस तरह लोगों की सामाजिक ताकत और सकारात्मक पहलों को सामने लाने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम ने आम नागरिकों, समाजसेवियों और नवाचार करने वाले लोगों की कहानियों को देशभर तक पहुंचाने का काम किया है, जिससे प्रेरणा और जागरूकता दोनों का विस्तार हुआ है।

    प्रधानमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि वे 22 फरवरी को प्रसारित होने वाले ‘मन की बात’ के अगले एपिसोड के लिए अपने सुझाव और विचार साझा करें। उनका मानना है कि इस कार्यक्रम की असली ताकत जनता की भागीदारी में है और लोगों के सुझाव ही इसे और अधिक प्रभावी बनाते हैं।

    गौरतलब है कि ‘मन की बात’ एक मासिक रेडियो कार्यक्रम है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री देशवासियों से सीधे संवाद करते हैं और समाज में हो रहे सकारात्मक बदलावों, जमीनी स्तर की पहलों और प्रेरणादायक कहानियों को सामने लाते हैं। इसमें स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक विकास जैसे कई विषयों पर चर्चा की जा चुकी है। साथ ही ऐसे लोगों के कार्यों को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाता है, जिन्होंने स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर बदलाव लाने में योगदान दिया है।

    हर साल 13 फरवरी को मनाया जाने वाला विश्व रेडियो दिवस इस बात की याद दिलाता है कि रेडियो आज भी संचार का एक सशक्त और सुलभ माध्यम है। खासतौर पर भारत जैसे विशाल देश में, जहां दूरदराज के इलाकों में अन्य संचार साधनों की पहुंच सीमित हो सकती है, वहां रेडियो सूचना और मनोरंजन का भरोसेमंद स्रोत बना हुआ है। यही कारण है कि बदलते समय और नई तकनीकों के बीच भी रेडियो की प्रासंगिकता आज तक बनी हुई है।

  • नागरिक देवो भव’ के मंत्र के साथ नए युग की शुरुआत, PM मोदी ने किया सेवा तीर्थ का उद्घाटन

    नागरिक देवो भव’ के मंत्र के साथ नए युग की शुरुआत, PM मोदी ने किया सेवा तीर्थ का उद्घाटन


    नई दिल्ली । प्रशासनिक ढांचे के एक नए अध्याय की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अत्याधुनिक सेवा तीर्थ परिसर का उद्घाटन किया। यह वही ऐतिहासिक क्षण था जब लगभग 80 वर्षों से सत्ता और शासन का केंद्र रहे साउथ ब्लॉक से प्रधानमंत्री कार्यालय ने औपचारिक रूप से नई इमारत में प्रवेश किया। उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री ने नागरिक देवो भव के आदर्श वाक्य को दोहराते हुए कहा कि यह परिसर सरकार की नागरिक केंद्रित सोच और आधुनिक प्रशासनिक दृष्टिकोण का प्रतीक है।

    करीब 2.26 लाख वर्ग फुट में फैला यह आधुनिक परिसर सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत दारा शिकोह रोड पर लगभग 1,189 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। सेवा तीर्थ में तीन मुख्य भवन बनाए गए हैं सेवा तीर्थ 1 में प्रधानमंत्री कार्यालय, सेवा तीर्थ 2 में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ 3 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तथा राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के कार्यालय स्थापित किए गए हैं। पहले ये सभी विभाग अलग अलग स्थानों पर संचालित होते थे, जिससे समन्वय और कार्यप्रणाली में जटिलताएँ आती थीं। अब एक ही छत के नीचे इन प्रमुख संस्थाओं के आने से प्रशासनिक फैसलों में तेजी और तालमेल की उम्मीद है।

    प्रधानमंत्री ने साउथ ब्लॉक में अंतिम कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की, जो ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रही। इसी भवन में 15 अगस्त 1947 को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में पहली कैबिनेट बैठक हुई थी। अब इस विरासत को सहेजते हुए साउथ ब्लॉक को सार्वजनिक उपयोग के लिए संग्रहालय में बदलने की योजना है, जबकि नॉर्थ ब्लॉक में युगे युगीन संग्रहालय के निर्माण की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी है।

    सेवा तीर्थ के साथ ही कर्तव्य भवन 1 और कर्तव्य भवन 2 का भी उद्घाटन किया गया, जहां वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शिक्षा, संस्कृति, विधि एवं न्याय, सूचना एवं प्रसारण, कृषि एवं किसान कल्याण, रसायन एवं उर्वरक, कॉर्पोरेट कार्य और जनजातीय कार्य जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों के कार्यालय स्थापित किए गए हैं। इससे नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया अधिक समन्वित और प्रभावी होगी।

    हाईटेक सुविधाओं से सुसज्जित यह परिसर डिजिटल आर्काइव्स, हाई स्पीड इंटरनेट, पेपरलेस वर्क कल्चर और अत्याधुनिक कॉन्फ्रेंस रूम से लैस है। स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम, व्यापक निगरानी नेटवर्क और उन्नत आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र सुरक्षा को अभेद्य बनाते हैं। पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह परिसर 4 स्टार GRIHA मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसमें ऊर्जा दक्ष प्रणालियाँ, जल संरक्षण उपाय और प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन शामिल हैं।

    विजय चौक के समीप स्थित यह नया प्रशासनिक केंद्र न केवल प्रधानमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के आवागमन को सुगम बनाएगा, बल्कि आम नागरिकों को ट्रैफिक जाम से भी राहत दिलाने में सहायक होगा। सेवा तीर्थ केवल एक भवन नहीं, बल्कि आधुनिक, पारदर्शी और उत्तरदायी शासन व्यवस्था का प्रतीक बनकर उभरा है जहाँ परंपरा को सम्मान देते हुए भविष्य की ओर सशक्त कदम बढ़ाए गए हैं।

  • सेवा तीर्थ से चलेगा देश का शासन: PM मोदी ने नए PMO का किया उद्घाटन, साउथ ब्लॉक में 78 साल बाद आखिरी कैबिनेट बैठक

    सेवा तीर्थ से चलेगा देश का शासन: PM मोदी ने नए PMO का किया उद्घाटन, साउथ ब्लॉक में 78 साल बाद आखिरी कैबिनेट बैठक



    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में बने अत्याधुनिक प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन किया। करीब 78 वर्षों तक रायसीना हिल स्थित साउथ ब्लॉक से संचालित होने के बाद अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) नए कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट हो गया है। पुराने दफ्तर में शुक्रवार शाम 4 बजे केंद्रीय कैबिनेट की विशेष बैठक आयोजित की जाएगी, जिसे इस ऐतिहासिक इमारत में आखिरी कैबिनेट बैठक माना जा रहा है।

    उद्घाटन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने ‘सेवा तीर्थ’ की पट्टिका का अनावरण किया। भवन पर देवनागरी लिपि में ‘सेवा तीर्थ’ और उसके नीचे ‘नागरिक देवो भव’ अंकित है, जो शासन की नागरिक-केंद्रित सोच को दर्शाता है। उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने नए कार्यालय में महिलाओं, युवाओं, किसानों और कमजोर वर्गों से जुड़े कई अहम प्रस्तावों की फाइलों पर हस्ताक्षर किए।

    इन फैसलों में पीएम राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों को ₹1.5 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा, ‘लखपति दीदी’ योजना का लक्ष्य 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ करना, कृषि अवसंरचना कोष की राशि 1 लाख करोड़ से बढ़ाकर 2 लाख करोड़ करना और 10,000 करोड़ के कोष के साथ स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंजूरी देना शामिल है। सरकार का दावा है कि इन कदमों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी।

    नई दिल्ली के दारा शिकोह रोड स्थित एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव में बना ‘सेवा तीर्थ’ परिसर लगभग 2.26 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में फैला है और इसे करीब 1189 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। पहले इस परियोजना का नाम ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ था, जिसे दिसंबर 2025 में बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया गया। परिसर में तीन इमारतें हैंसेवा तीर्थ-1 में PMO, सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ-3 में नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सचिवालय (NSCS) तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का कार्यालय स्थित है।

    यह पूरा कॉम्प्लेक्स केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा है। इसी परियोजना के तहत नया संसद भवन और कर्तव्य पथ का निर्माण किया गया है। कर्तव्य भवन-1 और 2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि सहित कई प्रमुख मंत्रालयों को स्थान दिया गया है। भवनों को 4-स्टार GRIHA ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है, जिनमें नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, वेस्ट मैनेजमेंट और स्मार्ट सुरक्षा प्रणालियां शामिल हैं।

    सरकार का कहना है कि पहले कई मंत्रालय अलग-अलग पुराने भवनों में फैले हुए थे, जिससे तालमेल की कमी, देरी और रखरखाव पर अधिक खर्च जैसी समस्याएं सामने आती थीं। नए एकीकृत परिसर से प्रशासनिक कार्यों में तेजी, समन्वय और पारदर्शिता बढ़ेगी।

    आने वाले समय में नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक की ऐतिहासिक इमारतों को ‘युगे-युगेन भारत नेशनल म्यूजियम’ में बदलने की योजना है, जहां भारत की सभ्यता और विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। इस बदलाव के साथ केंद्र सरकार का प्रशासनिक ढांचा एक नए और आधुनिक दौर में प्रवेश कर गया है।

  • भारतीय सेना आयोजित करेगी इंटरनेशनल मिलिट्री एडवेंचर चैलेंज कप 2026, 8 देशों की टीमें लेंगी भाग

    भारतीय सेना आयोजित करेगी इंटरनेशनल मिलिट्री एडवेंचर चैलेंज कप 2026, 8 देशों की टीमें लेंगी भाग


    नई दिल्ली: भारतीय सेना पहली बार इंटरनेशनल मिलिट्री एडवेंचर चैलेंज कप IMACC2026 का आयोजन करने जा रही है। यह प्रतियोगिता 18 से 23 फरवरी तक पूर्वी हिमालय की तलहटी में आयोजित होगी। इस एक सप्ताह के आयोजन में भारत और मित्र देशों की सैन्य टीमें साहसिक और सहनशक्ति से जुड़ी कठिन प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेंगी।

    प्रतियोगिता में सात मित्र देशों-भूटान, ब्राजील, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, नेपाल, श्रीलंका और सऊदी अरब-की सैन्य टीमें शामिल होंगी। इनके साथ भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना, भारतीय तटरक्षक बल और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस ITBPकी टीमें भी हिस्सा लेंगी। आयोजन में शामिल गतिविधियां सैनिकों की शारीरिक फिटनेस, मानसिक दृढ़ता, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और दबाव में निर्णय लेने की योग्यता की परीक्षा लेंगी। यह गतिविधियां कठिन पहाड़ी और फील्ड इलाके में आयोजित होंगी, जिससे वास्तविक सैन्य अभियानों जैसी परिस्थितियों का अनुभव होगा।

    अंतरराष्ट्रीय सैन्य खेल लंबे समय से दुनिया भर की सेनाओं के बीच विश्वास और सहयोग बढ़ाने का माध्यम रहे हैं। ये प्रतियोगिताएं इंटरनेशनल मिलिट्री स्पोर्ट्स काउंसिल CISMके “खेल के माध्यम से मित्रता” के सिद्धांत के तहत आयोजित होती हैं। भारत इस परंपरा में लंबे समय से सक्रिय भागीदार रहा है। वर्ष 2007 में भारत ने चौथे CISM मिलिट्री वर्ल्ड गेम्स की भी मेजबानी की थी।

    IMACC इस परंपरा में एक नया और अभिनव कदम है। पारंपरिक स्टेडियम खेलों के विपरीत, यह प्रतियोगिता साहसिक गतिविधियों, सहनशक्ति और फील्ड कौशल पर केंद्रित है। यह आधुनिक सैन्य प्रशिक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और सैनिकों में उच्च स्तरीय क्षमता, रणनीतिक सोच और आपसी भरोसा विकसित करने में मदद करेगी।

    प्रतियोगिता के दौरान भाग लेने वाले सैनिक कठिन पहाड़ी मार्ग, बाधा दौड़, जलवायु-संबंधी चुनौतियों और टीम आधारित मिशन में अपनी दक्षता का प्रदर्शन करेंगे। आयोजक अधिकारी बताते हैं कि यह आयोजन सिर्फ प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं है बल्कि रक्षा सहयोग, आपसी सम्मान और सैनिकों के बीच भाईचारे को बढ़ावा देने का अवसर भी प्रदान करेगा।

    मुख्य समन्वयक अधिकारियों ने कहा कि IMACC 2026 भारतीय सेना के लिए मित्र देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और खेल के माध्यम से विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देने का एक शानदार अवसर है। इस आयोजन के माध्यम से भारत न केवल आधुनिक सैन्य कौशल का प्रदर्शन करेगा, बल्कि एशिया और विश्व स्तर पर सैन्य प्रशिक्षण और सहयोग में अपनी भूमिका को भी और सुदृढ़ करेगा।

    इस पहले IMACC आयोजन की मेजबानी कर भारतीय सेना ने अपने सैन्य संबंधों को मजबूत करते हुए खेल के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मित्रता और सामूहिक साहसिक कौशल के महत्व को उजागर किया है।