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  • बिजनेस को बढ़ावा देने में कारगर पीएम मुद्रा योजना, निर्मला सीतारमण ने गिनाईं खूबियां

    बिजनेस को बढ़ावा देने में कारगर पीएम मुद्रा योजना, निर्मला सीतारमण ने गिनाईं खूबियां


    नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) देश के छोटे उद्यमियों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। इस योजना के तहत बिना किसी गारंटी के लोन दिया जाता है, जिससे लाखों लोग अपने बिजनेस आइडिया को आसानी से शुरू कर पा रहे हैं।

    राज्यसभा में योजना के प्रभाव से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि पीएम मुद्रा योजना के तहत तीन तरह के लोन दिए जाते हैं – शिशु (50,000 रुपए तक), किशोर (50,001 से 5 लाख रुपए तक) और तरुण (5 लाख से 10 लाख रुपए तक)। ये तीनों कैटेगरी अलग-अलग स्तर के कारोबार के लिए हैं, जिससे छोटे और माइक्रो बिजनेस को बढ़ावा मिलता है।

    31 मार्च 2025 तक के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, शिशु कैटेगरी में 12.4 प्रतिशत, किशोर में 9.4 प्रतिशत और तरुण में 7.92 प्रतिशत लोन नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) के रूप में दर्ज हैं। बैंकों द्वारा इन लोन की वसूली के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि योजना को लंबे समय तक टिकाऊ बनाया जा सके।

    वित्त मंत्री ने तरुण प्लस कैटेगरी को लेकर भी बात की, जिसमें 20 लाख रुपए तक का बिना गारंटी लोन दिया जाता है। यह योजना खास तौर पर उन उद्यमियों के लिए है जिन्होंने पहले लिए गए तरुण लोन को समय पर चुका दिया है और अब अपने कारोबार को और बढ़ाना चाहते हैं।

    यह नई कैटेगरी केंद्रीय बजट 2024-25 के बाद शुरू की गई थी और अक्टूबर 2024 से लागू हुई है। इस पर उन्होंने कहा कि यह योजना अभी नई है, इसलिए इसके सही असर को देखने के लिए थोड़ा समय देना जरूरी है।

    2015 में शुरू हुई पीएम मुद्रा योजना के तहत अब तक 52 करोड़ से ज्यादा लोन दिए जा चुके हैं, जिनकी कुल राशि 32 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 5.5 लाख करोड़ रुपए के अतिरिक्त लोन भी स्वीकृत किए गए हैं।

    इस योजना का सबसे बड़ा फायदा महिला उद्यमियों को मिला है, क्योंकि कुल लोन में से करीब 68 प्रतिशत लोन महिलाओं को दिए गए हैं, जिससे महिला सशक्तिकरण और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला है। सरकार छोटे कारोबारियों को आसानी से लोन उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है, ताकि आत्मनिर्भर भारत और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल सके।

    वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब वित्तीय क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा हो रही है। आंकड़ों के अनुसार, एमएसएमई सेक्टर का कुल एनपीए मार्च 2025 तक करीब 3.6 प्रतिशत रहा, जो मुद्रा योजना के आंकड़ों से कम है।

  • भारत ने अमेरिका समेत कई देशों से बढ़ाया LPG आयात, सप्लाई पूरी तरह सामान्य

    भारत ने अमेरिका समेत कई देशों से बढ़ाया LPG आयात, सप्लाई पूरी तरह सामान्य

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार की ओर से मंगलवार को कहा गया कि भारत ने अमेरिका सहित कई देशों से एलपीजी को आयात करना शुरू कर दिया है। साथ ही बताया कि देश में आपूर्ति सामान्य बनी हुई है और किसी भी एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर से गैस खत्म होने की रिपोर्ट नहीं मिली है।

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की विपणन एवं तेल रिफाइनरी संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बताया कि अधिकांश एलपीजी खाड़ी देशों से आ रही है। शर्मा ने कहा, “हमारी तेल कंपनियों ने अमेरिका से एलपीजी लेना शुरू कर दिया है। सरकार एलपीजी के स्रोतों में विविधता लाने के लिए भी हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने आगे कहा, “विविधीकरण बढ़ने के कारण आज हमें अधिक कच्चा तेल मिल रहा है।

    राज्यों द्वारा वितरण कार्य फिर से शुरू करने के साथ ही वाणिज्यिक एलपीजी आपूर्ति भी आंशिक रूप से बहाल हो गई है। घरेलू एलपीजी की मांग पर दबाव कम करने के लिए केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग भी शुरू कर दिया गया है।

    शर्मा ने बताया कि घबराहट के कारण बढ़ी मांग में कमी आ रही है और बुकिंग में गिरावट देखी जा रही है। 13 मार्च को 89 लाख बुकिंग दर्ज की गई थीं, जो आज घटकर 70 लाख रह गई हैं।

    उन्होंने कहा कि एलपीजी रिफिल वितरण दर संघर्ष से पहले जैसी ही है और उन्होंने उपभोक्ताओं से जमाखोरी और कालाबाजारी से खरीददारी से बचने का आग्रह किया।
    मंत्रालय के अनुसार, ईंधन की उपलब्धता स्थिर बनी हुई है, रिफाइनरियां पूरी क्षमता से चल रही हैं और पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार है।

    शर्मा ने कहा, “किसी भी एलपीजी वितरक के पास ईंधन की कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को आपूर्ति सुचारू रूप से जारी है। साथ ही, डिजिटल प्लेटफॉर्मों की ओर बढ़ते रुझान से बुकिंग में सुधार हुआ है।

    इस बीच, भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर ‘नंदा देवी’ मंगलवार को गुजरात के वडीनार बंदरगाह पर पहुंचा, जो इस सप्ताह पश्चिमी तट पर पहुंचने वाला दूसरा एलपीजी वाहक बन गया। इससे एक दिन पहले ‘शिवालिक’ मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचा था।

    दोनों जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर बेहद जोखिम भरे मार्ग से गुजरने के बाद भारत को महत्वपूर्ण एलपीजी आपूर्ति पहुंचा रहे थे। होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान- अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण समुद्री यातायात बाधित है।

  • West Bengal Election 2026: क्या चौथी बार सत्ता में लौटेंगी ममता बनर्जी या BJP बदलेगी 15 साल का खेल?

    West Bengal Election 2026: क्या चौथी बार सत्ता में लौटेंगी ममता बनर्जी या BJP बदलेगी 15 साल का खेल?


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी माहौल तेज हो गया है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं और इस बार उनकी नजर लगातार चौथी जीत पर है। अगर वह इस चुनाव में जीत हासिल करती हैं, तो वह राज्य की पहली ऐसी नेता बन जाएंगी जो लगातार चार बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाएंगी।

    15 साल की सत्ता और नया चुनावी इम्तिहान
    ममता बनर्जी ने साल 2011 में 34 साल पुराने वामपंथी शासन को खत्म कर सत्ता संभाली थी। इसके बाद 2016 और 2021 में भी उनकी पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने जीत दर्ज की। अब 2026 का चुनाव उनके लिए एक बड़ा इम्तिहान माना जा रहा है, क्योंकि इतने लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद जनता के बीच असंतोष भी एक बड़ा फैक्टर बन सकता है। चुनाव आयोग के मुताबिक इस बार मतदान दो चरणों में होगा: 23 अप्रैल 29 अप्रैल जबकि नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। पिछली बार की तुलना में इस बार कम चरणों में चुनाव कराए जा रहे हैं। लगातार 15 साल से सत्ता में रहने के कारण एंटी-इनकम्बेंसी एक बड़ी चुनौती बन सकती है। लोगों के बीच कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और विकास जैसे मुद्दों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    वोटर लिस्ट विवाद
    इस चुनाव में वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। करीब 63 लाख वोटरों के नाम हटाए गए लाखों नाम अभी भी जांच में यह मुद्दा चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है। बीते कुछ सालों में TMC सरकार पर कई घोटालों के आरोप लगे हैं, जैसे शिक्षक भर्ती घोटाला, राशन (PDS) घोटाला, तस्करी से जुड़े मामले इन मुद्दों पर विपक्ष लगातार हमलावर है। राज्य में वक्फ कानून और अन्य मुद्दों को लेकर भी विवाद बढ़ा है, जिससे सामाजिक और राजनीतिक माहौल प्रभावित हुआ है।

    BJP की बढ़ती चुनौती
    इस बार BJP ममता बनर्जी को कड़ी टक्कर देने की तैयारी में हैृ। 2021 के मुकाबले पार्टी इस बार ज्यादा आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतरी है। चुनाव से पहले ममता सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं लक्ष्मी भंडार योजना की राशि बढ़ाई बेरोजगार युवाओं के लिए आर्थिक मदद सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) पुजारियों और मुअज्जिनों के मानदेय में बढ़ोतरी इन योजनाओं के जरिए ममता बनर्जी अलग-अलग वर्गों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही हैं।

    क्या फिर बनेगी सरकार?
    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी अब भी राज्य की सबसे मजबूत नेता हैं, लेकिन इस बार मुकाबला पहले से ज्यादा कठिन है। शहरी इलाकों में नाराजगी और भ्रष्टाचार के आरोप चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। बंगाल चुनाव 2026 सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक भविष्य की बड़ी परीक्षा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वह चौथी बार जीतकर इतिहास रचती हैं या इस बार बंगाल की सत्ता में बदलाव आता है।

  • 27 मार्च को JDU राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए होगा चुनाव, जानिए किसके नाम पर लग सकती है मुहर

    27 मार्च को JDU राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए होगा चुनाव, जानिए किसके नाम पर लग सकती है मुहर


    नई दिल्ली। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। पार्टी के भीतर इसको लेकर हलचल तेज हो गई है और सभी की नजर इस बात पर है कि अगला अध्यक्ष कौन बनेगा। पार्टी द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 22 मार्च को नामांकन दाखिल किए जाएंगे। इसके बाद 23 मार्च को नामांकन की जांच होगी और 24 मार्च को नाम वापसी की अंतिम तारीख तय की गई है। अगर एक से ज्यादा उम्मीदवार होते हैं, तो 27 मार्च को मतदान कराया जाएगा। अगर सिर्फ एक ही नामांकन आता है, तो 24 मार्च को ही नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की घोषणा कर दी जाएगी।

    नीतीश कुमार के नाम की सबसे ज्यादा चर्चा
    सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर इस पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। इससे पहले भी वह 29 दिसंबर 2023 को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए थे। हाल ही में नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों ने बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। हालांकि उन्होंने साफ कहा है कि वह बिहार से दूर नहीं जाएंगे और राज्य के लिए काम करते रहेंगे।

    कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी आई सामने
    नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर सामने आने के बाद पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिली थी। कई जगहों पर विरोध की खबरें भी सामने आई थीं। इन दिनों नीतीश कुमार के बेटे निशांत की राजनीति में एंट्री को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि उन्हें पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से हटते हैं, तो उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में बनाए रखना एक रणनीतिक फैसला हो सकता है। इससे पार्टी में संतुलन बना रहेगा। फिलहाल JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर तस्वीर जल्द साफ हो जाएगी। आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

  • छात्राओं के गर्भवती होने के मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट; सरकार पर आरोपों की बौछार

    छात्राओं के गर्भवती होने के मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट; सरकार पर आरोपों की बौछार


    रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में सोमवार को बीजापुर जिले के एक पोर्टा केबिन स्कूल हॉस्टल से जुड़ा मामला सियासी तूफान बन गया। तीन छात्राओं के गर्भवती होने के आरोपों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जो अंततः हंगामे और वॉकआउट में बदल गई।

    विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
    कांग्रेस विधायकों ने सदन में आरोप लगाया कि बीजापुर के हॉस्टल में रहने वाली तीन छात्राएं गर्भवती पाई गई हैं। इस मुद्दे पर जवाब की मांग करते हुए विक्रम मंडावी, चरण दास महंत और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार को घेरा।

    शिक्षा मंत्री का जवाब, लेकिन विवाद बरकरार
    राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिन तीन छात्राओं की बात की जा रही है, उनमें से दो हॉस्टल में रहती ही नहीं हैं, जबकि एक छात्रा दिवाली की छुट्टियों के बाद से वापस नहीं लौटी है।

    हालांकि मंत्री के इस जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ और कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

    ‘मामला दबाने की कोशिश’ का आरोप
    ‘शून्य काल’ के दौरान विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार इस गंभीर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि जैसे ही छात्राओं के गर्भवती होने की बात सामने आई, उन्हें घर भेज दिया गया और अब प्रशासन यह कहकर मामले को कमजोर करने में जुटा है कि वे हॉस्टल में रह ही नहीं रही थीं।

    विपक्ष ने यह भी कहा कि मामला आदिवासी क्षेत्र से जुड़ा है, इसलिए इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है।

    आरोपियों को बचाने का आरोप
    विपक्षी विधायकों का आरोप है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचाया जा रहा है। इसी कारण सदन में इस विषय पर विस्तृत चर्चा की अनुमति भी नहीं दी जा रही।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने जताई चिंता
    पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि आवासीय स्कूल से जुड़ी ऐसी खबर बेहद चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि तीन में से दो छात्राएं नाबालिग हैं और मामले की पूरी जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • लोकसभा में टकराव खत्म करने पर सहमति: 8 विपक्षी सांसदों का निलंबन हो सकता है रद्द

    लोकसभा में टकराव खत्म करने पर सहमति: 8 विपक्षी सांसदों का निलंबन हो सकता है रद्द


    नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के बीच सियासी गतिरोध खत्म होने के संकेत मिले हैं। लोकसभा के आठ निलंबित विपक्षी सांसदों का निलंबन मंगलवार को वापस लिया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति बन गई है।
    सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति
    बताया जा रहा है कि ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की बैठक बुलाई, जिसमें निलंबन खत्म करने पर सकारात्मक चर्चा हुई। बैठक में यह भी तय हुआ कि भविष्य में सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए सभी दल जिम्मेदारी से व्यवहार करेंगे।

    सदन के आचरण को लेकर भी तय हुए नियम
    दोनों पक्षों के बीच इस बात पर भी सहमति बनी कि—

    कोई भी सदस्य नारेबाजी करते हुए दूसरे पक्ष की सीटों तक नहीं जाएगा

    सदन में कागज फाड़कर नहीं फेंके जाएंगे

    अधिकारियों की मेजों पर चढ़ने जैसी घटनाएं नहीं होंगी

    कांग्रेस ने उठाया था मुद्दा
    सोमवार को कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए स्पीकर से निलंबन रद्द करने की मांग की थी।

    विपक्षी दल पिछले सप्ताह से ही इस फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे थे।

    क्यों हुआ था निलंबन?
    बजट सत्र के पहले चरण में 3 फरवरी को सदन में हंगामे के दौरान आसन की ओर कागज फेंकने और अवमानना के आरोप में आठ सांसदों को शेष सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था।

    इन सांसदों में मणिकम टैगोर, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, प्रशांत पडोले, किरण कुमार रेड्डी और एस. वेंकटेशन शामिल हैं।

    धरने पर बैठे थे सांसद
    निलंबन के बाद से ये सभी सांसद संसद परिसर के मकर द्वार पर धरना दे रहे थे और कार्रवाई को वापस लेने की मांग कर रहे थे।

    अगर मंगलवार को औपचारिक घोषणा होती है, तो इससे संसद के कामकाज में जारी गतिरोध खत्म होने और बजट सत्र के सुचारु संचालन की राह साफ हो सकती है।

  • बारामती में रिश्तों की राजनीति ,सुप्रिया सुले ने भाभी सुनेत्रा पवार को दिया वॉकओवर

    बारामती में रिश्तों की राजनीति ,सुप्रिया सुले ने भाभी सुनेत्रा पवार को दिया वॉकओवर


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की सियासत में बारामती उपचुनाव ने एक अलग ही मिसाल पेश की है जहां राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच पारिवारिक रिश्तों को प्राथमिकता देते हुए सुप्रिया सुले ने बड़ा फैसला लिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरदचंद्र पवार की कार्यकारी अध्यक्ष सुले ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी आगामी बारामती विधानसभा उपचुनाव में अपनी ही भाभी सुनेत्रा पवार के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगी। इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है क्योंकि आमतौर पर ऐसे चुनावों में कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है।

    निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार पुणे जिले के बारामती और अहिल्यानगर के राहुरी विधानसभा क्षेत्रों में 23 अप्रैल को उपचुनाव होने हैं। बारामती सीट पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के कारण खाली हुई है जबकि राहुरी सीट भाजपा विधायक शिवाजी कर्डिले के निधन के चलते रिक्त हुई। बारामती से सुनेत्रा पवार के चुनाव लड़ने की पूरी संभावना जताई जा रही है जिससे यह सीट पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनी हुई थी लेकिन अब मुकाबला एकतरफा होने की संभावना बढ़ गई है।

    दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सुले ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी बारामती उपचुनाव नहीं लड़ेगी और वह अपनी वहिनी के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेंगी। इस बयान के साथ उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राजनीति से ऊपर परिवार को रखा जाना चाहिए। हालांकि राहुरी सीट को लेकर महा विकास आघाडी के सहयोगी दलों के बीच अभी चर्चा जारी है और जल्द ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

    इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कहा है कि बारामती और राहुरी उपचुनाव को निर्विरोध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि चुनावी मुकाबला होता है तो भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह तैयार है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राजनीतिक स्तर पर सहमति बनाने की कोशिशें जारी हैं लेकिन स्थिति पूरी तरह एकमत नहीं है।

    गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सुप्रिया सुले ने बारामती सीट पर सुनेत्रा पवार को हराकर अपनी पकड़ बरकरार रखी थी। उस समय सुनेत्रा पवार पहली बार चुनाव मैदान में उतरी थीं। बाद में उन्हें राज्यसभा भेजा गया। इसी वर्ष 28 जनवरी को बारामती के पास एक विमान दुर्घटना में अजित पवार और अन्य लोगों की मौत के बाद राजनीतिक हालात तेजी से बदले और सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ पार्टी की कमान भी सौंपी गई।

    सुले ने इस दौरान अजित पवार की मौत से जुड़े विमान हादसे की पारदर्शी जांच की मांग भी दोहराई है। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच एलपीजी संकट पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होनी चाहिए और सरकार को इसे नजरअंदाज करने के बजाय ठोस कार्ययोजना बनानी चाहिए क्योंकि इसका असर आम जनता से लेकर उद्योग जगत तक पर पड़ रहा है। कुल मिलाकर बारामती उपचुनाव में सुप्रिया सुले का यह फैसला न सिर्फ राजनीतिक रणनीति को दर्शाता है बल्कि यह भी दिखाता है कि भारतीय राजनीति में कभी-कभी रिश्ते भी चुनावी गणित पर भारी पड़ जाते हैं।

  • चैत्र नवरात्रि: वैष्णो देवी यात्रा में उमड़ेगी भीड़…श्राइन बोर्ड ने कसी कमर, ID के बिना No एंट्री

    चैत्र नवरात्रि: वैष्णो देवी यात्रा में उमड़ेगी भीड़…श्राइन बोर्ड ने कसी कमर, ID के बिना No एंट्री


    कटड़ा।
    आगामी 19 मार्च से शुरू होने जा रहे चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri) के दौरान वैष्णो देवी (Vaishno Devi ) आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (Shri Mata Vaishno Devi Shrine Board) ने कमर कस ली है। उपराज्यपाल के निर्देशों के बाद सीईओ सचिन कुमार वैश्य की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन की समीक्षा की गई।

    सोमवार को बैठक में निर्णय लिया गया कि यात्रा मार्ग पर आरएफआईडी कार्ड प्रणाली का सख्ती से पालन किया जाएगा। केवल वैध कार्ड धारकों को ही भवन की ओर जाने की अनुमति मिलेगी। प्रमुख चौकियों पर अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती होगी ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। रियासी पुलिस, सीआरपीएफ और सेना के समन्वय से मजबूत सुरक्षा ग्रिड तैयार किया गया है, जिसमें त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) भी शामिल होगा।

    इस बार तीर्थस्थल की सजावट में प्राकृतिक सामग्रियों के उपयोग पर जोर दिया गया है ताकि आग के खतरे को कम किया जा सके। अग्निशमन विभाग को पूरे ट्रैक का फायर ऑडिट करने और रणनीतिक स्थानों पर दमकल वाहनों की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।


    भीड़ प्रबंधन पर वैकल्पिक व्यवस्था

    अधिक भीड़ होने की स्थिति में श्रद्धालुओं को वैकल्पिक मार्गों पर भेजा जाएगा। शहर में यातायात सुचारू रखने के लिए अवैध रूप से पार्क किए गए वाहनों को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र के माध्यम से आधुनिक वायरलेस उपकरणों द्वारा पूरे मार्ग की रियल टाइम निगरानी की जाएगी।


    सेवा प्रदाताओं का होगा सत्यापन

    श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए यात्रा मार्ग पर चलने वाले पिठू,पालकी और पोनीवालों का सत्यापन किया जाएगा। फर्जीवाड़े को रोकने के लिए दस्तावेजों की नियमित जांच होगी, ताकि केवल अधिकृत व्यक्ति ही सेवा दे सकें। सीईओ ने कहा कि हमारा लक्ष्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित और आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करना है। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं ताकि नवरात्र के दौरान यात्रा निर्बाध रूप से चले।


    देसी-विदेशी फूलों से महकेगा भवन, स्वर्ग सा दिखेगा नजारा

    आगामी 19 मार्च से शुरू होने वाले पावन चैत्र नवरात्रके लिए विश्व प्रसिद्ध श्री माता वैष्णो देवी भवन को अलौकिक रूप दिया जा रहा है। श्राइन बोर्ड के मार्गदर्शन में पूरे भवन परिसर, प्राचीन गुफा और अटका स्थल की सजावट का काम युद्धस्तर पर जारी है। इस बार की सजावट में करीब 30 से 40 ट्रक देसी-विदेशी फूलों और 4 से 5 ट्रक फलों का उपयोग किया जा रहा है, जिसे 300 से अधिक विशेष कारीगर अंतिम रूप दे रहे हैं। इस बार की सजावट केवल फूलों तक सीमित नहीं है। यात्रियों के लिए भव्य पंडाल और झांकियां सजाई जा रही हैं, जिनमें शिव परिवार, राम दरबार, मां वैष्णो देवी के नौ रूप और विष्णु-लक्ष्मी के पंडाल शामिल हैं। अयोध्या के रामलला के दर्शन की झलक भी आकर्षित करेगी। माता की स्वर्ण जड़ित प्राचीन गुफा और अटका स्थल को विशेष रोशनी और सुगंधित पुष्पों से सजाया जा रहा है।

    नवरात्र के दौरान यज्ञशाला में विशाल शतचंडी महायज्ञ का आयोजन होगा। पद्मश्री डॉ. विश्वमूर्ति शास्त्री के सानिध्य में 51 पंडित मंत्रोच्चारण के साथ हवन करेंगे। ऐसा ही धार्मिक अनुष्ठान अर्धकुंवारी मंदिर प्रांगण में भी आयोजित किया जाएगा।

    सुरक्षा के लिए पांच जोन और कंट्रोल सेंटर से निगरानी
    सुरक्षा की दृष्टि से कटड़ा से लेकर भवन तक इलाके को पांच जोन (कटड़ा, बाणगंगा, अर्धकुंवारी, ताराकोट-सांझीछत और भवन) में बांटा गया है। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बलों और पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है। इंटीग्रेटेड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से पूरी यात्रा मार्ग पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। श्राइन बोर्ड के सभी भोजनालयों में श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलाहार की व्यवस्था रहेगी।


    ऑनलाइन बुकिंग फुल, चार लाख भक्तों की उम्मीद

    नवरात्र के लिए उत्साह ऐसा है कि हेलीकॉप्टर, बैटरी कार, रोपवे और भवन पर रुकने की ऑनलाइन बुकिंग अभी से फुल हो चुकी है। श्राइन बोर्ड को इस बार तीन से चार लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। दिव्यांग और बुजुर्ग यात्रियों के लिए निहारीका परिसर में विशेष सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं। सीईओ सचिन कुमार वैश्य ने बताया कि श्राइन बोर्ड श्रद्धालुओं की सेवा के लिए पूरी तरह तत्पर है। भक्त बिना किसी परेशानी के मां के दरबार आएं, सभी उचित इंतजाम सुनिश्चित किए गए हैं।

  • देश में फिर बदला मौसम…. कई राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि से गिरा पारा, आज भी अलर्ट…

    देश में फिर बदला मौसम…. कई राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि से गिरा पारा, आज भी अलर्ट…


    नई दिल्ली ।
    उत्तर-पश्चिम भारत (North-West India.) में मौसम ने एक बार फिर करवट की है। हिमालयी क्षेत्रों में ऊंची चोटियों पर हिमपात और घाटियों व आसपास के मैदानी इलाकों में गरज के साथ बारिश (Rain), तेज हवाएं चलने और कुछ जगहों पर ओलावृष्टि (Hailstorm) होने से तापमान में कुछ गिरावट दर्ज की गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र और उससे सटे आसपास के मैदानी इलाकों में एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय (Western Disturbance Active) हो रहा है, जिसके चलते 18 से 20 मार्च के दौरान इन इलाकों में बारिश और तूफानी हवाओं के साथ कहीं-कहीं ओले गिरने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के सोमवार सुबह 8:30 बजे तक आंकड़ों के अनुसार, बीते 24 घंटों में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, पूर्वोत्तर के राज्यों और झारखंड में छिटपुट स्थानों पर ओलावृष्टि हुई।

    उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम और मेघालय में छिटपुट स्थानों पर भारी वर्षा (7-20 सेमी) दर्ज की गई है। अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम में छिटपुट स्थानों पर भारी वर्षा (7-11 सेमी) हुई। बंगाल के कोलकाता और मालद में कुछ जगहों पर 50-65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं भी चलीं।


    जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी में फंसे 235 लोग निकाले

    जम्मू-कश्मीर में किश्तवाड़ के सिंथन टॉप पर रविवार रात भारी बर्फबारी में फंसे 235 लोगों और 38 गाड़ियों को सेना ने सुरक्षित निकाला लिया है। व्हाइट नाइट कोर के जवानों ने लोगों को गर्म खाना, पीने का पानी और रहने की जगह भी दी। वहीं, डांगदुरु में भूस्खलन के बाद से लापता व्यक्ति का सुराग सोमवार को भी नहीं लग पाया है। बचाव कार्य जारी है।


    उत्तराखंड में ठंड ने फिर दी दस्तक

    उत्तराखंड के सीमांत जनपदों में मौसम ने एक बार फिर करवट बदली है। रविवार रात ऊंची चोटियों पर जहां भारी हिमपात हुआ वहीं निचले इलाकों में बादलों के गरजने के साथ हुई झमाझम बारिश ने ठिठुरन बढ़ा दी है। मुनस्यारी के खलिया टॉप, पंचाचूली, हंसलिंग, नाग्निधुरा और छिपलाकेदार की पहाड़ियों ने बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली है।


    लाहौल से 10 हजार पर्यटक निकाले

    हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। मनाली-लेह मार्ग पर 1,500 वाहनों में फंसे 10 हजार सैलानी और स्थानीय लोग रोहतांग टनल होकर सुरक्षित निकाल लिए गए हैं। रविवार को रातभर कड़ाके की ठंड के बीच लोगों को गाड़ियों में ही रहना पड़ा।