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  • तुर्कमान गेट बवाल में सपा सांसद का नाम उछला, मोहिबुल्लाह नदवी बोले– हिंसा नहीं, शांति के लिए गया था

    तुर्कमान गेट बवाल में सपा सांसद का नाम उछला, मोहिबुल्लाह नदवी बोले– हिंसा नहीं, शांति के लिए गया था


    नई दिल्ली। बीतीरात दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में हुए बवाल मामले में समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का नाम आया है। पुलिस उनसे पत्थरबाजी के इस मामले में पूछताछ करेगी। मोहिबुल्लाह नदवी कहा कि मेरी जानकारी में हाईकोर्ट का ऐसा कोई ऑर्डर नहीं है, जिसमें अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया हो। अभी बात ही चल रही थी कि कितना मस्जिद का एरिया है और कितना अतिक्रमण हुआ है। या अतिक्रमण नहीं भी हुआ है।
    इसी दरमियान रात में मुझे खबर मिली कि मस्जिद को घेर लिया गया है।

    बवाल वाली जगह क्यों पहुंचे थे सपा सांसद?
    सपा सांसद ने आगे कहा, ‘इससे पहले महरौली में एक मस्जिद रातोंरात गायब कर दी गई थी। उसके लिए मैंने संसद में भी आवाज उठाई थी। तुर्कमान गेट वाली खबर मैंने सुनी तो सोचा कि लोग कहीं बेकाबू ना हो जाएं, इसलिए मैं मौके पर पहुंचा था। मैं जब वहां गया तो लोगों से अपील की कि अपने-अपने घरों में जाएं। एक वीडियो भी हैं, जिसमें मैं लोगों से शांत रहने के लिए कह रहा हूं।’

    फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास पत्थरबाजी क्यों?
    गौरतलब है कि मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात दिल्ली पुलिस और MCD की टीम, तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास हुए अवैध निर्माण को तोड़ने पहुंची थी।

    तभी मौके पर उन्मादियों की भीड़ पहुंच गई और उन्होंने पत्थरबाजी शुरू कर दी।

    दिल्ली पुलिस ने 5 लोगों पर की FIR
    पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है। अबतक 5 लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के जरिए दंगाइयों की पहचान करने में जुटी है। शुरुआती जांच में पता चला है कि जब इलाके में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही थी, उस वक्त अफवाह फैला दी गई कि मस्जिद को तोड़ा जा रहा है।

    यही बोलकर लोगों को जमा किया गया और फिर बवाल हो गया।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। वहीं, सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का कहना है कि उन्होंने कोई कानून नहीं तोड़ा और न ही किसी को हिंसा के लिए उकसाया। उनका दावा है कि वे सिर्फ शांति बनाए रखने और हालात को काबू में रखने के उद्देश्य से वहां पहुंचे थे। इस मामले में आगे की कार्रवाई जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी।

  • तुर्कमान गेट ऐतिहासिक दरवाजा संघर्षों का गवाह और विवादों का केंद्र

    तुर्कमान गेट ऐतिहासिक दरवाजा संघर्षों का गवाह और विवादों का केंद्र


    नई दिल्ली । दिल्ली का तुर्कमान गेट हाल ही में फिर सुर्खियों में है। 6 और 7 जनवरी 2025 की रात को यहां हुए हिंसक संघर्ष ने एक बार फिर इस इलाके को चर्चा का केंद्र बना दिया। घटना उस समय घटी जब दिल्ली पुलिस और MCD की टीम ने अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास बुलडोजर चलाया। इसके खिलाफ स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू किया और स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। इस घटना ने तुर्कमान गेट के इतिहास सामाजिक संघर्षों और राजनीतिक विवादों के पुराने अध्यायों को फिर से जीवित कर दिया है।

    तुर्कमान गेट का ऐतिहासिक महत्व

    तुर्कमान गेट जिसे 17वीं शताब्दी में मुग़ल सम्राट शाहजहाँ के शासनकाल में बनाया गया था पुरानी दिल्ली का एक प्रमुख दरवाजा था। इसे शाहजहां बाद पुरानी दिल्ली के प्रमुख दरवाजों में से एक माना जाता है। यह दरवाजा प्रसिद्ध सूफी संत शाह तुर्कमान की दरगाह के पास स्थित होने के कारण इस दरवाजे का नाम तुर्कमान गेट पड़ा। शाह तुर्कमान की याद में हर साल उर्स का आयोजन भी किया जाता है जिससे इस इलाके की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान बनी रहती है।इसकी वास्तुकला में तीन मेहराबी प्रवेश द्वार और दो मंजिला बुर्ज शामिल हैं जो मुग़ल काल की शानदार निर्माण शैली का प्रतीक हैं। तुर्कमान गेट की संरचना और इतिहास इसे दिल्ली के अहम ऐतिहासिक धरोहरों में से एक बनाती है।

    1976 में पहली बार चला बुलडोजर

    तुर्कमान गेट का नाम पहली बार बड़े पैमाने पर 13 अप्रैल 1976 को चर्चा में आया जब संजय गांधी के नेतृत्व में आपातकाल के दौरान दिल्ली में झुग्गी हटाओ अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत तुर्कमान गेट क्षेत्र में झुग्गियां हटाई गईं जिसके बाद इलाके में असंतोष और गुस्सा फैल गया। शुरूआत में यह विरोध सीमित था लेकिन जब 19 अप्रैल 1976 को फिर से बुलडोजर चलने लगे तो स्थिति बेकाबू हो गई। जामा मस्जिद चांदनी चौक और तुर्कमान गेट जैसे इलाकों में जबरदस्त विरोध हुआ। इस विरोध ने हिंसक रूप ले लिया और पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। यही वह समय था जब तुर्कमान गेट इलाके में संघर्ष ने व्यापक रूप ले लिया।

    तुर्कमान गेट और औरंगजेब

    एक सवाल जो अक्सर उठता है वह है तुर्कमान गेट और औरंगजेब के बीच संबंध। हालांकि तुर्कमान गेट का निर्माण शाहजहां के शासनकाल में हुआ था और औरंगजेब शाहजहां का पुत्र था लेकिन इसका कोई सीधा ऐतिहासिक संबंध औरंगजेब से नहीं है। यह भ्रम अक्सर सोशल मीडिया और अधूरी जानकारी के कारण फैलता है जबकि तुर्कमान गेट की वास्तुकला और इतिहास सीधे तौर पर शाहजहां के समय से जुड़ी हुई है।

    2025 में फिर हुआ विवाद

    करीब 50 साल बाद तुर्कमान गेट फिर से चर्चा का विषय बना और इसका कारण था फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास का अतिक्रमण। सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण और कब्जे ने इस ऐतिहासिक स्थल को फिर से विवादों में घेर लिया। दिल्ली हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि इस इलाके से अवैध कब्जे हटाए जाएं। इसके बाद 6 जनवरी 2025 को एक बार फिर से बुलडोजर तुर्कमान गेट के आसपास के क्षेत्र में चले जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय लोगों ने भारी विरोध शुरू कर दिया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा और पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया। तुर्कमान गेट का इतिहास सिर्फ एक दरवाजे का नहीं है बल्कि यह दिल्ली के सामाजिक राजनीतिक और प्रशासनिक संघर्षों का गवाह रहा है आपातकाल से लेकर आज तक इस स्थल ने कई आंदोलन और संघर्ष देखे हैं। 1976 में हुए झुग्गी हटाओ अभियान से लेकर आज तक तुर्कमान गेट एक बार फिर से यह दर्शाता है कि यह क्षेत्र न सिर्फ ऐतिहासिक महत्व रखता है बल्कि आज भी विवादों और संघर्षों का केंद्र है।

  • Nestle Baby Food: नेस्ले के इस प्रोडक्ट में मिला खतरनाक टॉक्सिन, बच्चों में उल्टी और पेट दर्द का खतरा, ऐसे करें चेक

    Nestle Baby Food: नेस्ले के इस प्रोडक्ट में मिला खतरनाक टॉक्सिन, बच्चों में उल्टी और पेट दर्द का खतरा, ऐसे करें चेक

    Nestle Recall: नेस्ले दुनियाभर में कई प्रोडक्ट्स बेचती है, यह काफी फेमस है. कंपनी ने अपने एक प्रोडक्ट में टॉक्सिन होने की आशंका के चलते वापस मंगाया है. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं.
    फूड और बेवरेज सेक्टर की दिग्गज कंपनी नेस्ले ने मंगलवार को अपने कुछ प्रमुख बेबी न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स को वापस मंगाने का ऐलान किया. कंपनी ने बताया कि इन प्रोडक्ट्स में एक ऐसे टॉक्सिन के होने की आशंका है, जिससे बच्चों में उल्टी और मतली जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.

    जिन प्रोडक्ट्स को रिकॉल किया गया है, उसमें SMA, BEBA और NAN ब्रांड के इन्फैंट और फॉलो-ऑन फॉर्मूला शामिल हैं. ये प्रोडेक्ट मुख्य रूप से यूरोप में बेचे जाते हैं, हालांकि BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, नेस्ले अधिकारियों ने इसे दुनियाभर में जहां भी बेचा जाता है, वहां से वापस मंगाया है.

    कंपनी ने क्या कहा?

    कंपनी की तरफ से Reuters को बताया गया कि एक बड़े सप्लायर से मिले एक इंग्रीडिएंट में क्वालिटी से जुड़ी समस्या सामने आने के बाद यह फैसला लिया गया. इसके बाद नेस्ले ने अपने सभी प्रभावित इन्फैंट न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होने वाले एराकिडोनिक एसिड ऑयल और उससे जुड़े ऑयल मिक्स की जांच शुरू की.

    नेस्ले ने साफ किया है कि अब तक किसी भी रिकॉल किए गए प्रोडक्ट से जुड़ी बीमारी या लक्षण की पुष्टि नहीं हुई है. कंपनी ने यह भी बताया कि दिसंबर में सीमित स्तर पर शुरू हुआ यह रिकॉल अब बड़े स्तर पर किया जा रहा है. ऑस्ट्रिया के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस रिकॉल से नेस्ले की 10 से ज्यादा फैक्ट्रियों में बने 800 से अधिक प्रोडक्ट्स प्रभावित हुए हैं. इसे कंपनी के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा प्रोडक्ट रिकॉल बताया जा रहा है.

    प्रभावित बैच की पहचान कैसे करें?

    नेस्ले ने अलग-अलग देशों में बिकने वाले उन बैच नंबरों की सूची जारी की है, जिनका सेवन नहीं किया जाना चाहिए. कंपनी ने कहा है कि वह सप्लाई में होने वाली किसी भी रुकावट को कम करने के लिए काम कर रही है.

    ग्राहकों को सलाह दी गई है कि पाउडर फॉर्मूला के लिए डिब्बे या पैक के नीचे लिखे कोड को देखें, जबकि रेडी-टू-फीड फॉर्मूला के लिए बाहरी बॉक्स और कंटेनर के साइड या ऊपर दिए गए कोड की जांच करें.

    क्यों किया गया रिकॉल?

    नेस्ले ने ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, नॉर्वे, स्विट्ज़रलैंड और ब्रिटेन में इन प्रोडक्ट्स को रिकॉल किया है. वजह बताई गई है सेर्यूलाइड नामक टॉक्सिन की संभावित मौजूदगी, जोबैसिलस सेरेस बैक्टीरिया के कुछ स्ट्रेन से बनता है.

    ब्रिटेन की फूड स्टेंडर्ड एजेंसी के अनुसार, यह टॉक्सिन पकाने, उबालने या दूध तैयार करने की प्रक्रिया में नष्ट नहीं होता. अगर इसका सेवन हो जाए, तो जल्दी ही उल्टी, मतली और पेट में ऐंठन जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं. वहीं, नॉर्वे की फूड सेफ्टी एजेंसी ने कहा है कि इससे कोई तुरंत गंभीर स्वास्थ्य जोखिम नहीं है.

  • ‘टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल’ से बदली पर्यटन की दिशा, नई पीढ़ी के यात्रियों को लुभाने की बड़ी पहल

    ‘टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल’ से बदली पर्यटन की दिशा, नई पीढ़ी के यात्रियों को लुभाने की बड़ी पहल


    नई दिल्ली ।अरुणाचल प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाया है। पर्यटन विभाग ने अपना नया ब्रांड अभियान टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल लॉन्च किया है, जो अरुणाचल को पारंपरिक पहाड़ों और मठों की छवि से आगे ले जाकर अनुभव, संस्कृति और आत्मीयता की भारत की अंतिम खोज सीमा के रूप में प्रस्तुत करता है। इस अभियान का शुभारंभ नई दिल्ली स्थित अरुणाचल हाउस में पर्यटन, शिक्षा, आरडब्ल्यूडी, पुस्तकालय एवं संसदीय कार्य मंत्री पासांग दोरजी सोना ने किया।

    यह नया अभियान अरुणाचल की ब्रांड पहचान बियॉन्ड मिथ्स एंड माउंटेन्स के तहत तैयार किया गया है, जिसमें यात्रियों को केवल प्राकृतिक सुंदरता देखने के बजाय यहां की जीवनशैली, जनजातीय परंपराओं और स्थानीय लोगों से जुड़ने का आमंत्रण दिया गया है। सरकार का मानना है कि आज की नई पीढ़ी का यात्री केवल डेस्टिनेशन नहीं, बल्कि अर्थपूर्ण और प्रामाणिक अनुभव चाहता है, और अरुणाचल इस अपेक्षा पर पूरी तरह खरा उतरता है।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री पासांग दोरजी सोना ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश हजारों वर्षों पुरानी विरासत, विविध जनजातीय संस्कृतियों, बौद्ध परंपराओं और अद्वितीय जैव-विविधता का जीवंत संगम है। उन्होंने कहा कि राज्य में साहसिक पर्यटन, आध्यात्मिक यात्राएं, वन्यजीवन, प्रकृति भ्रमण और सांस्कृतिक उत्सवों की असीम संभावनाएं हैं। मंत्री ने कहा, अरुणाचल की यात्रा केवल स्थलों तक सीमित नहीं रहती, यह एक ऐसा मानवीय अनुभव बन जाती है जो जीवनभर याद रहता है।

    पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कोविड महामारी के बाद अरुणाचल प्रदेश में पर्यटन ने उल्लेखनीय उछाल देखा है। वर्ष 2023 और 2024 में राज्य में हर साल 10 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे, जो महामारी-पूर्व स्तर से कहीं अधिक है। अधिकारियों का मानना है कि बेहतर सड़क और हवाई कनेक्टिविटी, आक्रामक ब्रांडिंग और अनुभव-आधारित पर्यटन मॉडल इस बढ़ोतरी के प्रमुख कारण हैं।नई पर्यटन नीति के तहत राज्य सरकार कनेक्टिविटी सुधारने, पर्यटक सुविधाओं के विस्तार और आवासीय क्षमता में लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि पर काम कर रही है। साथ ही फार्म टूरिज्म, इको-टूरिज्म, जनजातीय पर्यटन, साहसिक पर्यटन, आध्यात्मिक पर्यटन और सीमावर्ती पर्यटन को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे स्थानीय समुदायों को भी सीधा लाभ मिल सके।

    टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल अभियान में गंतव्यों को कहानी-आधारित अनुभवों के रूप में पेश किया गया है। तवांग को आध्यात्मिक विरासत और हिमालयी सौंदर्य के प्रतीक के रूप में, जीरो को स्वदेशी संस्कृति की धड़कन के रूप में, अनिनी को झीलों और झरनों की धरती के रूप में, नामसाई को आध्यात्मिकता और नदी संस्कृति के संगम के रूप में, डोंग को भारत में प्रथम सूर्योदय के स्थल के रूप में और मेचुका को रोमांच व शांति के अद्भुत मेल के तौर पर प्रस्तुत किया गया है। अभियान की फिल्मों और प्रिंट विजुअल्स में स्थानीय लोग, वास्तविक क्षण और प्राकृतिक दृश्य केंद्र में हैं, जो अरुणाचल की प्रामाणिक छवि को उभारते हैं।मंत्री सोना ने बताया कि पिछले वर्ष राज्य ने अपना लोगो और ब्रांड आइडेंटिटी बदली थी और यह अभियान उसी दिशा में एक निर्णायक कदम है। सरकार को उम्मीद है कि यह पहल अरुणाचल को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार में भी मजबूती से स्थापित करेगी।

  • 'अब जाति नहीं मेरिट जरूरी', जनरल कैटेगरी के आरक्षण पर SC का बड़ा फैसला; किस पर पड़ेगा असर?

    'अब जाति नहीं मेरिट जरूरी', जनरल कैटेगरी के आरक्षण पर SC का बड़ा फैसला; किस पर पड़ेगा असर?


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाया है, जिसका सीधा असर सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया और जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों पर पड़ता है। कोर्ट ने साफ किया है कि जनरल या ओपन कैटेगरी किसी जाति के लिए नहीं, बल्कि मेरिट के लिए होती है।

    अगर कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार बिना किसी छूट के जनरल कट-ऑफ से ज्यादा नंबर लाता है, तो उसे जनरल कैटेगरी की सीट पर ही माना जाएगा।

    सुप्रीम कोर्ट ने क्या साफ किया?

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ओपन या जनरल कैटेगरी सभी के लिए खुली होती है, चाहे वह किसी भी जाति या वर्ग का हो। अगर SC, OBC, MBC या EWS का उम्मीदवार बिना किसी रियायत के जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों से बेहतर प्रदर्शन करता है तो उसे जनरल लिस्ट में शामिल किया जाएगा, न कि उसकी आरक्षित कैटेगरी में बांधा जाएगा।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि कई बार भर्ती में देखा गया है कि आरक्षित वर्ग का कट-ऑफ जनरल से ज्यादा चला जाता है। ऐसी स्थिति में अगर आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार जनरल कट-ऑफ पार कर लेता है, तो उसे बाहर करना गलत है।

    ‘जनरल कैटेगरी किसी की निजी नहीं’

    कोर्ट ने दोहराया कि जनरल, ओपन या अनरिजर्व्ड शब्द का मतलब है- सभी के लिए खुला। यह किसी खास जाति, वर्ग या लिंग के लिए आरक्षित नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसलोंइंद्रा साहनी केस और सौरव यादव केस का हवाला देते हुए कहा, “ओपन कैटेगरी में आने की एक ही शर्त है- मेरिट। यह नहीं देखा जाएगा कि उम्मीदवार किस वर्ग से है।”

    ‘डबल फायदा’ वाला तर्क खारिज

    कोर्ट ने यह दलील भी खारिज कर दी कि ऐसे उम्मीदवारों को शामिल करने से उन्हें ‘डबल फायदा’ मिलेगा। साफ कहा गया कि अगर कोई रियायत नहीं ली गई है, तो यह कोई अतिरिक्त लाभ नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म में अपनी जाति लिख देना अपने आप में आरक्षित सीट पाने का अधिकार नहीं देता, बल्कि सिर्फ यह बताता है कि उम्मीदवार आरक्षित सूची में भी दावेदार हो सकता है।

    क्या था मामला?

    यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट की भर्ती से जुड़ा था। अगस्त 2022 में हाईकोर्ट ने 2756 पदों (जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट और क्लर्क ग्रेड-II) के लिए भर्ती निकाली थी। लिखित परीक्षा के बाद मई 2023 में जब नतीजे आए तो SC, OBC, MBC और EWS का कट-ऑफ जनरल से ज्यादा निकल गया। कुछ आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों ने जनरल कट-ऑफ पार किया, लेकिन अपनी कैटेगरी का कट-ऑफ न होने के कारण उन्हें अगले राउंड से बाहर कर दिया गया।

    हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

    इन उम्मीदवारों ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने कहा कि पहले जनरल लिस्ट सिर्फ मेरिट के आधार पर बननी चाहिए और जो उसमें आ जाएं उन्हें अलग से आरक्षित लिस्ट में नहीं रखा जा सकता। अब दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी फैसले को सही ठहराते हुए राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन की अपील खारिज कर दी।

    इस फैसले का मतलब क्या है?

    जनरल कैटेगरी किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि मेरिट की कैटेगरी है
    आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार अगर बिना छूट जनरल कट-ऑफ पार करता है, तो वह जनरल सीट पर ही जाएगा
    इससे जनरल उम्मीदवारों के अधिकार नहीं छिने, बल्कि मेरिट का नियम मजबूत हुआ है

  • इस साल मकर संक्रांति पर सूर्यदेव होंगे उत्तरायण, इन राशिवालों के लिए शुभ फलदायी

    इस साल मकर संक्रांति पर सूर्यदेव होंगे उत्तरायण, इन राशिवालों के लिए शुभ फलदायी

    उज्‍जैन। इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी दिन बुधवार को है. इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे. इसके साथ ही सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण होंगे, जिससे देवताओं का दिन प्रारंभ होगा. उत्तरायण को देवताओं का दिन का जाता है और दक्षिणायन को देवताओं का रात होता है. मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव का प्रभाव बढ़ता है. मकर संक्रांति के अवसर पर 5 राशिवालों पर सूर्य देव की कृपा होगा. सूर्य देव की कृपा होने से नौकरी, मान, सम्मान, पद आ​दि में बढ़ोत्तरी होती है, वहीं पिता का सहयोग मिलता है. सरकार, शासन, सत्ता से लाभ की स्थितियां बनती हैं.
    आइए जानते हैं कि मकर संक्रांति किन 5 राशिवालों के लिए शुभ फलदायी है?
    मकर संक्रांति का राशिफल
    मेष: मकर संक्रांति का दिन मेष राशि के लोगों के लिए शुभ फलदायी होने वाला है. इस दिन आपको कोई खुशखबरी मिल सकती है. जो लोग नौकरी ​की तलाश कर रहे हैं या जॉब बदलना चाहते हैं, उन लोगों के लिए मकर संक्रांति शुभ होगी. यह आपके जीवन में कुछ अच्छे बदलाव लेकर आ रहा है. मकर संक्रांति पर आपके धन और संपत्ति में भी वृद्धि होगी. बिजनेस करने वालों को मुनाफा होगा.
    वृषभ: मकर संक्रांति के अवसर पर वृषभ राशि के लोगों की आमदनी में बढ़ोत्तरी के संकेत हैं. आय के नए स्रोतों से आपको धन लाभ होगा या अचानक धन लाभ मिल सकता है. फंसा हुआ पैसा वापस मिलने से खुशी होगी. इस दिन निवेश से आपको मुनाफे की उम्मीद है. नौकरीपेशा लोगों को नई जॉब या पद में बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव मिल सकता है
    कर्क: मकर संक्रांति कर्क राशिवालों के धन में बढ़ोत्तरी करने वाली है. आपका बैंक बैलेंस बढ़ सकता है या आप पहले से अधिक बचत करने में सफल हो सकते हैं. सूर्य देव की कृपा से आप स्वस्थ रहेंगे और आपको रोगों से छुटकारा मिलेगा. इस दिन आप अपने काम को और बढ़ाने की सोच सकते हैं. बिजनेस करने वालों के लिए दिन शुभ रहेगा.
    सिंह: आपकी राशि के स्वामी ग्रह सूर्य हैं और मकर संक्रांति आपके लिए उन्नतिदायक होगी. नौकरीपेशा लोगों के लिए लाभ की स्थितियां बनेंगी. नई जॉब का प्रस्ताव मिल सकता है, लेकिन सोच समझकर फैसला करें. आप पर माता लक्ष्मी की कृपा रहेगी. धन का संकट नहीं होगा. आपका मनोबल मजबूत रहेगा. घर में पिता और कार्यस्थल पर वरिष्ठों का सहयोग प्राप्त होगा.
    मीन: मकर संक्रांति मीन राशिवालों के लिए भी लाभकारी है. जो लोग सरकारी नौकरी करते हैं या सरकार से जुड़े कार्य करते हैं, उनको लाभ होगा. इससे आपकी उन्नति की राह आसान होगी. आपके धन और धान्य में बढ़ोत्तरी होगी. सूर्य देव की कृपा से बेरोजगार लोगों को काम मिल सकता है. आपको अपने पिता या बड़े भाई से सुझाव लेना चाहिए.
  • विधानसभा चुनावों से पहले DMK से तकरार और TVK से इकरार? 32 पर कांग्रेस नहीं तैयार

    विधानसभा चुनावों से पहले DMK से तकरार और TVK से इकरार? 32 पर कांग्रेस नहीं तैयार


    चैन्‍नई।
    तमिलनाडु में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले वहां सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की अगुवाई वाली सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने सहयोगी पार्टी कांग्रेस को 234 सदस्यों वाली विधानसभा में मात्र 32 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऑफर दिया है। इससे कांग्रेस नाराज हो गई है। कांग्रेस नेता अब अन्य विकल्पों की तलाश में जुट गए हैं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि तमिलनाडु कांग्रेस के कुछ नेता शीर्ष नेतृत्व खासकर राहुल गांधी से आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके से गठबंधन की संभानवाएं तलाशने का अनुरोध करने की तैयारी में हैं।

    यह स्थिति सीएम स्टालिन के लिए टेंशन दे सकती है।

    दरअसल, कांग्रेस पार्टी ने अपने आंतरिक सर्वे के हिसाब से 40 सीटों का टारगेट सेट किया था लेकिन DMK ने उसे महज 32 सीटें ऑफर की हैं। अब ऐसी तनातनी के बाद कांग्रेस 38 सीटों तक पहुंच पाई है लेकिन स्टालिन की पार्टी टस से मस नहीं हो रही। लिहाजा, कांग्रेस ने दूसरे विकल्पों की तलाश तेज कर दी है। इसी कड़ी में कांग्रेस के कुछ नेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) से संभावित गठबंधन का मुद्दा पार्टी नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी के सामने रखने की तैयारी में हैं।
    सत्ता में हिस्सेदारी की भी मांग

    कांग्रेस सांसद माणिक्कम टैगोर ने सोमवार को साफ कहा कि पार्टी सिर्फ सीटों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि अगर गठबंधन सत्ता में आता है तो सरकार में हिस्सेदारी भी चाहती है। उनके इस बयान को पार्टी कार्यकर्ताओं के दबाव और चुनाव से पहले रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

    TVK ने कांग्रेस को बताया ‘स्वाभाविक सहयोगी’

    टैगोर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK ने कांग्रेस को अपना ‘प्राकृतिक सहयोगी’ बताया है। इससे तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज़ हो गई है। TVK के प्रवक्ता फेलिक्स जेराल्ड ने कहा कि विजय और राहुल गांधी के बीच दोस्ताना संबंध हैं और कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावना काफ़ी अधिक है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु कांग्रेस के अंदरूनी हितों के कारण बातचीत में देरी हो सकती है।

    फैसला विजय करेंगे

    इस बीच TVK नेता निर्मल कुमार ने कहा कि गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी प्रमुख विजय ही करेंगे। उन्होंने कहा, “हमारे नेता सभी से सलाह-मशविरा कर गठबंधन को लेकर घोषणा करेंगे। चुनाव में अभी करीब दो महीने का समय है।” कुल मिलाकर, डीएमके के साथ सीट बंटवारे को लेकर असमंजस, सत्ता में हिस्सेदारी की मांग और TVK के साथ संभावित गठबंधन,इन सबने तमिलनाडु की राजनीति को चुनाव से पहले और दिलचस्प बना दिया है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कांग्रेस किस रास्ते पर आगे बढ़ती है।

  • पैसा मंदिर का और 50 में 42 मुस्लिम छात्र! मंजूरी रद्द होने के बाद MBBS कर रहे छात्रों का क्या होगा? समझिए विवाद

    पैसा मंदिर का और 50 में 42 मुस्लिम छात्र! मंजूरी रद्द होने के बाद MBBS कर रहे छात्रों का क्या होगा? समझिए विवाद

    नई दिल्ली। नेशनल मेडिकल कमीशन ने जम्मू-कश्मीर के कटरा में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को MBBS कोर्स चलाने की अनुमति को रद्द कर देन का फैसला लिया है.

    यह फैसला 2 जनवरी 2026 को हुए अचानक निरीक्षण के बाद लिया गया है. जांच में कॉलेज के शिक्षा देने की व्यवस्था, बुनियादी ढांचा, मरीजों की संख्या और क्लिनिकल सुविधाओं में कई गंभीर कमियां पाई गई हैं. मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड ने इसे न्यूनतम मानकों पर खरा नहीं पाया है. जिसके कारण से NMC अध्यक्ष की मंजूरी लेकर उस कॉलेज की अनुमति रद्द कर दी गई है.

    50 छात्रों में से 42 छात्र मुस्लिम
    ये विवाद तब उभरा जब कॉलेज में 50 छात्रों में से 42 कश्मीरी मुस्लिम छात्रों का प्रवेश हुआ था. भाजपा और कुछ हिंदू संगठन इसे लेकर नाराज हुए और सवाल उठाया कि मंदिर ट्रस्ट के फंड से चलने वाले इस कॉलेज में मुस्लिम छात्रों को प्राथमिकता क्यों मिली है. मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने कहा कि दाखिले पूरी तरह NEET और मेरिट के आधार पर हुए और धर्म के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया है. उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि कोई संस्था अल्पसंख्यक दर्जा लेना चाहती थी तो उसी समय आवेदन करना चाहिए था.

    MARB ने शिकायतों को जांचने के लिए 2 जनवरी 2026 को अचानक निरीक्षण किया. निरीक्षण में पता चला कि शिक्षण फैकल्टी में 39 फीसदी की कमी थी, ट्यूटर, डेमॉन्स्ट्रेटर और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की संख्या 65 फीसदी कम थी. मरीजों की संख्या और क्लिनिकल सेवाएं भी तय मानकों से बहुत कम थीं. OPD में 400 मरीजों की जगह केवल 182 मरीज आए, बेड ऑक्यूपेंसी 80 फीसदी की जगह 45 फीसदी रही और ICU में केवल आधे बेड भरे थे. प्रसव की संख्या हर महीने 25 थी, जबकि यह MARB के अनुसार गंभीर रूप से अपर्याप्त थी.

    हिंदू मुस्लिम नहीं, कॉलेज में थी कमी
    मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने कहा कि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहना चाहिए और उन्हें अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में समायोजित किया जाएगा. उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि शिक्षा और प्रवेश प्रक्रिया में सांप्रदायिक राजनीति की कोशिशें हुई हैं, लेकिन NMC और MARB ने साफ किया कि फैसले का आधार केवल कॉलेज की कमियां और नियमों का उल्लंघन था. छात्रों के अच्छाई के लिए उन्हें दूसरे कॉलेजों में बचे हुए सीटों पर भेजा जाएगा.

    इस पूरे विवाद से साफ संदेश गया कि मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और संचालन में नियमों का पालन अनिवार्य है. छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक या सामाजिक दबाव, या धर्म के आधार पर प्रभावित नहीं होना चाहिए. NMC और MARB का यह कदम स्वास्थ्य शिक्षा में गुणवत्ता, समानता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में जरूरी माना जा रहा है.

  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बोले-जहां-जहां भी गजनी का नाम आता है, उसे हटा देना चाहिए

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बोले-जहां-जहां भी गजनी का नाम आता है, उसे हटा देना चाहिए


    नरसिंहपुर। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने सोमनाथ मंदिर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी है। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत में जहां-जहां भी गजनी का नाम आता है, उसे हटा देना चाहिए।
    अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, ‘प्रधानमंत्री जी ने जो ट्वीट पोस्ट किया है, वह हजार वर्ष पहले की घटना के बारे में है, जिसमें सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण होने का दर्द व्यक्त किया गया है। एक व्यक्ति था महमूद गजनवी, जो अपनी सेना के छोटे-से दल के साथ आया और मंदिर को क्षति पहुंचाई। वहां पूजा करने वाले पुजारियों को उसने नुकसान पहुंचाया, भक्तों को चोट पहुंचाई। उसने यह सोचकर नुकसान पहुंचाने की कोशिश की कि अगर मंदिर और मूर्तियां नष्ट कर दी जाएं तो सोमनाथ नष्ट हो जाएगा।’
    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे कहा कि यह प्रयास हजार वर्ष पहले किया गया था। उन्होंने कहा, ‘पीएम मोदी की ओर से पोस्ट किया गया ट्वीट यह संदेश देना चाहता है कि तुम मंदिर तोड़ सकते हो, मूर्तियां तोड़ सकते हो, लेकिन सोमनाथ को नष्ट नहीं कर सकते। हजार वर्ष बीत गए, सोमनाथ आज भी खड़ा है। इसलिए भविष्य में जो लोग ऐसे प्रयास करेंगे, उन्हें फिर कोशिश नहीं करनी चाहिए। अगर यही कहना चाहते हैं तो यह स्वागतयोग्य कदम है।’ उन्होंने कहा कि जहां तक गजनी का सवाल है, उसने निश्चित रूप से अच्छा काम नहीं किया। इसलिए भारत में जहां-जहां भी गजनी का नाम आता है, उसे हटा देना चाहिए।
    11 जनवरी को सोमनाथ जाएंगे पीएम मोदी

    पीएम मोदी विदेशी आक्रमणकारियों के बार-बार हमलों के बाद पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर का 11 जनवरी को दौरा करेंगे।

    उन्होंने सोमनाथ मंदिर की सराहना करते हुए सोमवार को कहा कि गुजरात स्थित यह मंदिर भारतीय सभ्यता की अदम्य भावना का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के 1,000 साल पूरा होने पर ब्लॉग पोस्ट में कहा, ‘हमारी सभ्यता की अदम्य भावना का सोमनाथ से बेहतर कोई उदाहरण नहीं हो सकता। यह मंदिर बाधाओं एवं संघर्षों पर विजय प्राप्त करते हुए गौरव के साथ खड़ा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सोमनाथ की गाथा भारत माता की उन अनगिनत संतानों के अटूट साहस की कहानी है जिन्होंने हमारी संस्कृति और सभ्यता की रक्षा की। यही भावना आज राष्ट्र में भी दिखाई दे रही है जो सदियों के आक्रमणों और औपनिवेशिक लूट से उबरकर वैश्विक विकास के सबसे चमकते केंद्रों में से एक बनकर उभरा है।’
  • युवक के साथ बेरहमी से मारपीट कर प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डाला

    युवक के साथ बेरहमी से मारपीट कर प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डाला


    समस्तीपुर । बिहार के एक थाने में युवक के साथ हैवानियत की हदें पार करने का आरोप लगा है। समस्तीपुर जिले के ताजपुर थाना कस्टडी में एक युवक के साथ बेरहमी से मारपीट और अमानवीय व्यवहार किए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। जख्मी युवक मनीष कुमार की हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उसे ताजपुर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से बेहतर इलाज के लिए समस्तीपुर सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया।
    मनीष भेरोखड़ा गांव निवासी संजय पोद्दार का पुत्र है। पीड़ित मनीष ने बताया कि वह ताजपुर बाजार स्थित सोनी ज्वेलर्स में काम करता था। कुछ दिन पूर्व दुकान में हुई चोरी के बाद संदेह के आधार पर दुकानदार ने उसे बुलाकर बंधक बनाया, पिटाई की और पुलिस के हवाले कर दिया।

    मनीष का आरोप है कि पुलिस ने उसे चार दिनों तक हिरासत में रखकर शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उसने दावा किया कि कस्टडी में उसकी बेरहमी से पिटाई की गई, यहां तक कि एक पुलिसकर्मी ने उसके शरीर के संवेदनशील हिस्से में सुई चुभोई और प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डाल दिया।

    पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उसकी पत्नी के साथ मारपीट कर पूरे परिवार को धमकाया।

    चार जनवरी को निजी मुचलके पर रिहा होने के बाद उसकी तबीयत और बिगड़ गई। पिता संजय पोद्दार ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। इधर, थानाध्यक्ष शंकर शरण दास ने आरोपों से इनकार किया है। वहीं, एसपी अरविंद प्रताप सिंह ने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर जांच के लिए एसडीपीओ-1 के नेतृत्व में टीम गठित की गई है।