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  • राहुल गांधी के संसद व्यवहार पर बवाल, 204 पूर्व अधिकारियों ने लिखा ओपन लेटर

    राहुल गांधी के संसद व्यवहार पर बवाल, 204 पूर्व अधिकारियों ने लिखा ओपन लेटर


    नई दिल्ली। देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। 204 पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों और गणमान्य नागरिकों ने नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के संसद में कथित व्यवहार पर सवाल उठाते हुए एक खुला पत्र जारी किया है। इस पत्र में उनके आचरण को संसदीय परंपराओं के विपरीत बताते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और आत्ममंथन करने की मांग की गई है। हस्ताक्षरकर्ताओं में 116 सेवानिवृत्त सशस्त्र बल अधिकारी, 84 पूर्व नौकरशाह (जिनमें चार राजदूत शामिल हैं) और चार वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं, जिससे इस मुद्दे की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य ने उठाया मुद्दा

    इस खुले पत्र का समन्वय जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी S. P. Vaid ने किया है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय गरिमा से जुड़ा हुआ है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि संसद देश की सर्वोच्च विधायी संस्था है, जहां कानून बनते हैं और जनता की आवाज को मंच मिलता है। ऐसे में यहां हर जनप्रतिनिधि से उच्चतम स्तर के आचरण की अपेक्षा की जाती है।

    12 मार्च की घटना पर जताई आपत्ति

    हस्ताक्षरकर्ताओं ने 12 मार्च की एक घटना को लेकर विशेष आपत्ति जताई है। उनके अनुसार, संसद परिसर में किसी भी प्रकार के प्रदर्शन या विरोध पर रोक के बावजूद विपक्ष ने निर्देशों का उल्लंघन किया। आरोप है कि Rahul Gandhi के नेतृत्व में सांसदों ने संसद की सीढ़ियों पर बैठकर विरोध जताया और चाय-बिस्कुट लेते हुए नजर आए। पत्र में कहा गया है कि यह आचरण न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि संसदीय गरिमा के प्रति अनादर भी दर्शाता है।

    ‘लोकतंत्र का मंदिर’ है संसद

    पत्र में यह भी रेखांकित किया गया कि संसद को ‘लोकतंत्र का मंदिर’ माना जाता है, जहां गंभीर मुद्दों पर बहस और निर्णय लिए जाते हैं। ऐसे में संसद के हर हिस्से-चाहे वह सदन का कक्ष हो, गलियारा हो या सीढ़ियां-सभी स्थानों पर समान मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि इस तरह का व्यवहार संस्थागत मूल्यों को कमजोर करता है और जनता के बीच गलत संदेश भेजता है।

    ‘नाटकीय राजनीति’ का आरोप

    खुले पत्र में Rahul Gandhi पर यह आरोप भी लगाया गया है कि वे पहले भी संसद के भीतर और बाहर ‘नाटकीय’ तरीके से विरोध जताते रहे हैं, जिससे सार्वजनिक संवाद का स्तर प्रभावित होता है। हस्ताक्षरकर्ताओं का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां संसद की कार्यवाही में बाधा डालती हैं और जनता के समय व संसाधनों की बर्बादी का कारण बनती हैं।

    लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा पर जोर

    पत्र के अंत में कहा गया है कि सांसदों को अपने हर कदम के प्रतीकात्मक महत्व को समझना चाहिए। खासकर नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि वे उदाहरण प्रस्तुत करें। हस्ताक्षरकर्ताओं ने इस व्यवहार को लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने वाला बताते हुए इसे गंभीरता से लेने की अपील की है।

  • योगी आदित्यनाथ ने किया हेमवती नंदन बहुगुणा को याद, बोले- विकास को मिली नई ऊंचाइयां

    योगी आदित्यनाथ ने किया हेमवती नंदन बहुगुणा को याद, बोले- विकास को मिली नई ऊंचाइयां


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री Hemwati Nandan Bahuguna की पुण्यतिथि पर एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने कार्यक्रम में शामिल होकर उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और उनके योगदान को नमन किया। सीएम योगी ने बहुगुणा को एक लोकप्रिय जननेता, कुशल प्रशासक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बताते हुए कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

    संघर्ष और समर्पण का प्रेरणादायी जीवन

    मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने अपने संबोधन में कहा कि Hemwati Nandan Bahuguna का जीवन संघर्ष, समर्पण और जनसेवा का जीवंत उदाहरण है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने बताया कि बहुगुणा का जन्म तत्कालीन उत्तर प्रदेश (अब उत्तराखंड) के पौड़ी जनपद के एक छोटे से गांव में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा गांव में पूरी करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए Prayagraj पहुंचे, जहां वे छात्र राजनीति से जुड़े और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हो गए।

    स्वतंत्रता संग्राम से राजनीति तक का सफर

    सीएम योगी ने बताया कि वर्ष 1942 के आंदोलन के दौरान छात्र नेता के रूप में Hemwati Nandan Bahuguna को गिरफ्तार भी किया गया था। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने जनप्रतिनिधि, मंत्री, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। उनके नेतृत्व में प्रदेश में कई विकास कार्यों को गति मिली और प्रशासनिक सुधारों को मजबूती मिली।

    प्रयागराज और प्रदेश के विकास में अहम भूमिका

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुगुणा जी ने Prayagraj को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके कार्य समाज के सभी वर्गों के उत्थान और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने के लिए समर्पित थे। उन्होंने प्रदेश में विकास की नई दिशा तय की और जनकल्याणकारी नीतियों के जरिए आम जनता के जीवन स्तर को सुधारने का प्रयास किया।

    सोशल मीडिया पर भी किया नमन

    इससे पहले Yogi Adityanath ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी बहुगुणा को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा कि महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और लोकप्रिय राजनेता के रूप में बहुगुणा जी का योगदान अविस्मरणीय है। देश की आजादी के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रीय चेतना को आगे बढ़ाने में उनका योगदान प्रेरणादायी रहा है।

    जनसेवा की प्रेरणा देते रहेंगे बहुगुणा

    कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि Hemwati Nandan Bahuguna का जीवन हम सभी को जनसेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण के लिए निरंतर कार्य करने की प्रेरणा देता है। उनकी स्मृतियां हमेशा समाज को सही दिशा दिखाती रहेंगी।

  • मातृत्व अधिकारों का विस्तार: सुप्रीम कोर्ट ने गोद लेने वाली महिलाओं के हक में दिया अहम फैसला

    मातृत्व अधिकारों का विस्तार: सुप्रीम कोर्ट ने गोद लेने वाली महिलाओं के हक में दिया अहम फैसला


    नई दिल्ली। देश में मातृत्व अधिकारों को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला सामने आया है। Supreme Court of India ने स्पष्ट किया है कि अब तीन महीने से अधिक उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिलाओं को भी मैटरनिटी लीव का पूरा अधिकार मिलेगा। यह फैसला उन हजारों महिलाओं के लिए राहत लेकर आया है, जो अब तक कानूनी पाबंदियों के कारण मातृत्व अवकाश से वंचित रह जाती थीं। कोर्ट ने कहा कि मातृत्व अवकाश का उद्देश्य केवल जन्म के तुरंत बाद की देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि मां और बच्चे के बीच भावनात्मक संबंध को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है।

    पुराना नियम क्यों था भेदभावपूर्ण

    पहले कानून के तहत केवल उन महिलाओं को 12 हफ्तों का मैटरनिटी लीव मिलता था, जो तीन महीने तक के बच्चे को गोद लेती थीं। लेकिन Supreme Court of India ने इस प्रावधान को भेदभावपूर्ण करार दिया। कोर्ट ने सामाजिक सुरक्षा संहिता के सेक्शन 60(4) को रद्द करते हुए कहा कि यह संविधान के Article 14 और Article 21 का उल्लंघन करता है। न्यायालय के अनुसार, किसी बच्चे की उम्र के आधार पर मां को अधिकार देना या उससे वंचित करना समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।

    मां-बच्चे के रिश्ते को दी प्राथमिकता

    अदालत ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि मातृत्व अवकाश का असली मकसद मां और बच्चे के बीच आत्मीय रिश्ता विकसित करना और बच्चे की समुचित देखभाल सुनिश्चित करना है। यह प्रक्रिया केवल नवजात शिशु तक सीमित नहीं होती, बल्कि बड़े बच्चों के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। कोर्ट ने कहा कि जो महिलाएं बड़े बच्चों को गोद लेती हैं, उन्हें भी उतना ही समय और समर्थन चाहिए, ताकि वे बच्चे को नया और सुरक्षित वातावरण दे सकें।

    पितृत्व अवकाश पर भी दिया अहम सुझाव

    इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही Supreme Court of India ने केंद्र सरकार को पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) को लेकर भी ठोस कानून बनाने की सलाह दी है। अदालत ने कहा कि बच्चों की परवरिश केवल मां की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए, बल्कि पिता की भूमिका भी उतनी ही अहम है। यदि पितृत्व अवकाश को कानूनी रूप दिया जाता है, तो इससे परिवार और समाज दोनों को लाभ मिलेगा।

    कामकाजी महिलाओं के लिए क्यों अहम है फैसला

    यह निर्णय खासतौर पर उन कामकाजी महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है, जो किसी कारणवश नवजात के बजाय बड़े बच्चे को गोद लेती हैं। अब उन्हें मातृत्व अवकाश के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकेगा। इससे गोद लेने की प्रक्रिया को भी प्रोत्साहन मिलेगा और अधिक बच्चे बेहतर पारिवारिक माहौल पा सकेंगे।

    सामाजिक बदलाव की दिशा में कदम

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक सोच में बदलाव का संकेत भी है। इससे गोद लेने की प्रक्रिया को नया आयाम मिलेगा और समाज में समानता तथा संवेदनशीलता को बढ़ावा मिलेगा।

  • दृष्टिबाधितों के लिए पहल: विजेंद्र गुप्ता का ‘ऑडिबल सिग्नल’ लगाने का आग्रह

    दृष्टिबाधितों के लिए पहल: विजेंद्र गुप्ता का ‘ऑडिबल सिग्नल’ लगाने का आग्रह


    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सड़क सुरक्षा और समावेशी शहरी ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम पहल सामने आई है। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष Vijender Gupta ने उपराज्यपाल Taranjit Singh Sandhu को पत्र लिखकर ट्रैफिक सिग्नलों पर ‘ऑडिबल सिग्नल’ (ध्वनि आधारित संकेत) लगाने की मांग की है। यह पहल खासतौर पर दृष्टिबाधित, वरिष्ठ नागरिकों और अन्य संवेदनशील पैदल यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर की गई है। गुप्ता ने अपने पत्र में बताया कि वर्तमान ट्रैफिक सिस्टम केवल दृश्य संकेतों पर आधारित है, जो बड़ी आबादी के लिए पर्याप्त नहीं है।

    60 लाख लोगों को राहत देने की कोशिश

    Vijender Gupta ने एम्स के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली में करीब 60 लाख लोग किसी न किसी दृष्टि समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें से 12 से 18 लाख लोग गंभीर ‘लो विजन’ की स्थिति में हैं। ऐसे में सड़क पार करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। उन्होंने कहा कि सुलभ और सुरक्षित क्रॉसिंग सुविधाओं के अभाव में दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है, जिससे उनकी स्वतंत्र आवाजाही भी सीमित हो जाती है।

    क्या हैं ‘ऑडिबल ट्रैफिक सिग्नल’

    ऑडिबल सिग्नल ऐसे ट्रैफिक लाइट सिस्टम होते हैं, जिनमें हरी बत्ती होने पर बीप या विशेष ध्वनि सुनाई देती है। यह ध्वनि पैदल यात्रियों को संकेत देती है कि सड़क पार करना सुरक्षित है। कुछ देशों में इसमें अलग-अलग प्रकार की ध्वनियां या ‘मेलोडिक टोन’ भी होती हैं, जो दिशा और समय का संकेत देती हैं। यह तकनीक खासकर दृष्टिबाधित लोगों के लिए बेहद उपयोगी मानी जाती है।

    दुनिया के कई देशों में सफल प्रयोग

    Vijender Gupta ने अपने पत्र में अंतरराष्ट्रीय उदाहरण देते हुए बताया कि Japan, United Kingdom, United States, Singapore, France और Australia जैसे देशों में इस तकनीक को सफलतापूर्वक अपनाया गया है। खासतौर पर जापान में ‘पक्षियों की आवाज’ जैसी मधुर ध्वनियों का उपयोग किया जाता है, जिससे पैदल यात्रियों को सहज रूप से संकेत समझ में आता है।

    स्मार्ट सिटी की ओर बड़ा कदम

    विधानसभा अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि यह केवल तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। यदि दिल्ली के प्रमुख चौराहों पर ऑडिबल सिग्नल लगाए जाते हैं, तो इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आ सकती है और शहर को एक सच्चे मायनों में ‘समावेशी स्मार्ट सिटी’ बनाया जा सकता है। उन्होंने उपराज्यपाल से इस प्रस्ताव को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने का आग्रह किया है।

    क्यों जरूरी है यह पहल

    दिल्ली जैसे व्यस्त महानगर में हर दिन लाखों लोग सड़कों का उपयोग करते हैं। ऐसे में दृष्टिबाधित और बुजुर्ग नागरिकों के लिए सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। ऑडिबल सिग्नल न केवल उनकी सुरक्षा बढ़ाएंगे, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी भी बनाएंगे।

  • इकोनॉमी को मिला सहारा, भारतीय परिवारों की बचत 21.7% तक पहुंची: पंकज चौधरी

    इकोनॉमी को मिला सहारा, भारतीय परिवारों की बचत 21.7% तक पहुंची: पंकज चौधरी


    नई दिल्ली।देश की अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय परिवारों की बचत में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री Pankaj Chaudhary ने राज्यसभा में बताया कि नई जीडीपी सीरीज (बेस ईयर 2022-23) के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में घरेलू बचत बढ़कर जीडीपी के 21.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि वित्त वर्ष 2022-23 में यह 20 प्रतिशत थी। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि देश के परिवार आर्थिक रूप से अधिक मजबूत हो रहे हैं और भविष्य के लिए बेहतर वित्तीय योजना बना रहे हैं।

    अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनी घरेलू बचत

    मंत्री ने कहा कि घरेलू परिवारों की बचत देश में निवेश के लिए सबसे बड़ा स्रोत होती है। यही बचत आगे चलकर विभिन्न सेक्टरों में निवेश को बढ़ावा देती है, जिससे आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार लगातार ऐसी नीतियां लागू कर रही है, जिनसे लोगों की आय बढ़े और बचत की क्षमता मजबूत हो। इसमें व्यापार करने में आसानी, कौशल विकास, रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने जैसे कदम शामिल हैं। इन पहलों से मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को भी सीधा लाभ मिल रहा है।

    टैक्स छूट और जीएसटी सुधार से बढ़ेगी आमदनी

    सरकार द्वारा हाल में उठाए गए कुछ अहम फैसलों का भी इस वृद्धि में बड़ा योगदान माना जा रहा है। Pankaj Chaudhary ने बताया कि 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर आयकर छूट और जीएसटी दरों के युक्तिकरण से लोगों की डिस्पोजेबल इनकम बढ़ेगी। इसका सीधा असर उपभोग, बचत और निवेश पर पड़ेगा। साथ ही इससे लोगों की कर्ज पर निर्भरता भी कम होगी, जो अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।

    महंगाई पर भी राहत, खाद्य कीमतों में गिरावट

    सरकार ने महंगाई के मोर्चे पर भी राहत की बात कही है। मंत्री के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में खाद्य और ईंधन क्षेत्र में महंगाई नहीं रही। खासतौर पर खुदरा खाद्य कीमतों में अप्रैल से जनवरी के बीच औसतन -0.98 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 7.3 प्रतिशत थी। वहीं थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के अनुसार ईंधन मुद्रास्फीति भी (-)3.16 प्रतिशत रही। यह गिरावट वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में कमी का असर भी दर्शाती है।

    वैश्विक हालात का असर और आगे की चुनौती

    हालांकि सरकार ने यह भी माना कि वैश्विक परिस्थितियां अभी भी चुनौती बनी हुई हैं। खासतौर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इससे आने वाले समय में महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। खाद्य महंगाई भी मानसून, मौसम, आपूर्ति श्रृंखला और कृषि लागत जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है, जिससे इसमें उतार-चढ़ाव बना रहता है।

    क्या कहते हैं संकेत

    कुल मिलाकर, भारतीय परिवारों की बढ़ती बचत देश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। यह न केवल निवेश को मजबूती देती है, बल्कि आर्थिक स्थिरता को भी बढ़ाती है। अगर सरकार की नीतियां इसी तरह प्रभावी रहीं, तो आने वाले वर्षों में बचत और निवेश दोनों में और तेजी देखने को मिल सकती है।

  • दिल्ली में अहम बैठक: एकनाथ शिंदे और नरेंद्र मोदी के बीच कई मुद्दों पर मंथन

    दिल्ली में अहम बैठक: एकनाथ शिंदे और नरेंद्र मोदी के बीच कई मुद्दों पर मंथन


    नई दिल्ली। शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने ईरान-इजरायल युद्ध, घरेलू हालात और महाराष्ट्र के अलग-अलग मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की। इस दौरान शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे, नरेश म्हस्के, मिलिंद देवड़ा, धैर्यशील माने, श्रीरंग बारणे और रवींद्र वायकर मौजूद रहे।

    एकनाथ शिंदे ने भरोसा दिलाया कि युद्ध जैसे हालात में ‘एनडीए’ की सहयोगी के तौर पर शिवसेना, पीएम के स्टैंड का सपोर्ट करती है और हम देश के साथ हैं। इस मीटिंग के बाद डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने मीडिया से बातचीत की।

    डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर खाड़ी देशों में युद्ध जैसे हालात के दौरान भारत में झूठा प्रोपेगेंडा फैलाकर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोग हेडलाइन बनाने के लिए पाकिस्तान की बात करते हैं। बालासाहेब के लिए देश पहले था और राजनीति बाद में। आज हम बालासाहेब के विचारों के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

    उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि युद्ध के कारण कुवैत, दुबई, मस्कट में फंसे महाराष्ट्र के नागरिकों को मुंबई और पुणे सुरक्षित वापस लाया गया। उन्होंने कोविड के बाद से खाड़ी देशों के साथ बने अच्छे रिश्तों की वजह से होर्मुज स्ट्रेट से दो जहाजों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के साथ राज्य में विकास के कामों और अलग-अलग मुद्दों पर बातचीत हुई।

    उन्होंने आगे कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष युद्ध जैसे हालात का इस्तेमाल राजनीति के लिए कर रहा है। कांग्रेस और शिवसेना-यूबीटी देश में गैस की कमी की अफवाह फैला रहे हैं। इससे ब्लैक मार्केट करने वालों को मौका मिल रहा है। राजनीति के लिए और भी मुद्दे हैं, लेकिन जब युद्ध जैसे हालात में देश के साथ रहने की उम्मीद है, तब विपक्ष राजनीति कर रहा है। विपक्ष ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी ऐसी ही राजनीति की थी, जिसका पाकिस्तान में भी ध्यान रखा गया था। कुछ लोग हेडलाइन बनाने के लिए पाकिस्तान में बोलते हैं।

    डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने शिवसेना एमपी को देश में गैस की कमी के मुद्दे पर कड़ा स्टैंड लेने और सदन में विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे झूठे प्रोपेगेंडा को नाकाम करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में कहीं भी गैस सिलेंडर की कमी नहीं है। सरकार ब्लैक मार्केट करने वालों को रोकने के लिए पूरी मेहनत से काम कर रही है।

  • बंगाल चुनाव: टीएमसी ने सभी सीटों पर उतारे उम्मीदवार, भवानीपुर से मैदान में सीएम ममता बनर्जी

    बंगाल चुनाव: टीएमसी ने सभी सीटों पर उतारे उम्मीदवार, भवानीपुर से मैदान में सीएम ममता बनर्जी


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी भवानीपुर से विधानसभा चुनाव लड़ेंगी। ममता बनर्जी ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान विधानसभा चुनाव के लिए सभी 294 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी कर दी। टीएमसी द्वारा जारी इस लिस्ट में ममता बनर्जी समेत पश्चिम बंगाल के कई दिग्गज टीएमसी नेताओं के नाम शामिल हैं, जिन्हें उम्मीदवार बनाया गया है।

    बता दें कि सीएम ममता बनर्जी भवानीपुर विधानसभा सीट से भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरेंगी। वहीं, हाल ही में टीएमसी में शामिल हुए पवित्र कर को नंदीग्राम से टिकट दिया गया है, जहां उनका भी मुकाबला सुवेंदु अधिकारी से होगा। भाजपा ने सुवेंदु अधिकारी को नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों विधानसभा सीटों से टिकट दिया है।

    इसके साथ ही सुजापुर सीट से सबीना यास्मीन, जंगीपुर सीट से जाकिर हुसैन, सागरदिघी सीट से बायरन बिस्वास, दिनहाटा सीट से उदयन गुहा चुनाव लड़ेंगे। वहीं, सिलीगुड़ी सीट से गौतम देव चुनाव मैदान में उतरे हैं। खगराम सीट से आशीष मारजीत चुनाव लड़ेंगे। करीमपुर सीट से सोहम चक्रवर्ती चुनाव लड़ेंगे। कंडी सीट से अपूर्व सरकार चुनाव लड़ेंगे। सिताई सीट से संगीता रॉय बसुनिया चुनाव लड़ेंगी। कृष्णानगर उत्तर सीट से अभिनव भट्टाचार्य चुनाव लड़ेंगे। नवद्वीप सीट से पुण्डरीकाक्ष साहा चुनाव लड़ेंगे।

    वहीं, हरिन्घाटा सीट से राजीव विश्वास चुनाव लड़ेंगे। स्वरूपनगर सीट से बीना मंडल चुनाव लड़ेंगी। राजगंज सीट से सपना बर्मन चुनाव लड़ेंगी। हबरा सीट से ज्योतिप्रिया मल्लिक चुनाव लड़ेंगे। कृष्णानगर नगर दक्षिण सीट से उज्जवल विश्वास चुनाव लड़ेंगे। राणाघाट दक्षिण सीट से सौगत कुमार बर्मन चुनाव लड़ेंगे। कल्याणी सीट से अतींद्रनाथ मंडल चुनाव लड़ेंगे।

    इससे पहले, सोमवार को भाजपा ने 144 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी, जिसमें सुवेंदु अधिकारी समेत कई दिग्गज नेताओं के नाम शामिल थे। वहीं, वाम दल ने भी अपनी लिस्ट जारी की थी।

    बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे, पहले चरण के लिए 23 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को मतदान होगा। वहीं, वोटों की गिनती 4 मई को होगी।

  • ओडिशाः केंद्रपाड़ा के कुशुनुपुर को ‘स्मार्ट विलेज’ के रूप में चुना गया, वैज्ञानिक नवाचार से बदलेगी तस्वीर

    ओडिशाः केंद्रपाड़ा के कुशुनुपुर को ‘स्मार्ट विलेज’ के रूप में चुना गया, वैज्ञानिक नवाचार से बदलेगी तस्वीर


    नई दिल्ली।  ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रपाड़ा जिले के राजनगर ब्लॉक में स्थित तटीय गांव कुशुनुपुर को वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की राष्ट्रीय पहल के तहत ‘स्मार्ट विलेज’ के रूप में चुना गया है। इस घोषणा से गांववासियों में उत्साह का माहौल है, क्योंकि यह पूर्वी भारत का एकमात्र गांव है जिसे इस कार्यक्रम के तहत चुना गया है।

    इस पहल के तहत देशभर के छह गांवों को “आदर्श गांवों” के रूप में चुना गया है, जिनका उद्देश्य वैज्ञानिक नवाचार, उन्नत कृषि, ग्रामीण सशक्तिकरण, बेहतर पोषण और प्रौद्योगिकी-आधारित नेतृत्व को बढ़ावा देना है। यह परियोजना “विकसित भारत 2047” के विजन के अनुरूप है।

    भारत में अभी तक गुजरात का भाड़ा, लेह-लद्दाख का चुमाथांग, असम का जोहरत, मध्य प्रदेश का जनकपुर, राजस्थान का सवाईपुरा और ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले का कुशुनुपुर चयनित हुआ है।

    भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त निकाय, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) इस कार्यक्रम का नेतृत्व कर रही है। “प्रयोगशाला से भूमि तक” दृष्टिकोण पर आधारित सीएसआईआर इन गांवों में आजीविका और बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए वैज्ञानिक नवाचारों को लागू करेगी।

    देश के विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में स्थित इन गांवों की पहचान 2025 में की गई थी और ये “जीवित प्रयोगशालाओं” के रूप में कार्य करेंगे, जहां वैज्ञानिक समाधानों का परीक्षण और कार्यान्वयन किया जाएगा। वैज्ञानिकों की एक टीम ने ग्रामीणों के साथ उनके जीवनशैली, चुनौतियों और स्थानीय संसाधनों को समझने के लिए पहले ही बातचीत शुरू कर दी है।

    एक स्थानीय स्वयंसेवी संगठन, नेचर्स क्लब, क्षेत्र अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों की सहायता कर रहा है। नेचर्स क्लब की सचिव मधुस्मिता पति ने कहा कि देशभर में सीएसआईआर प्रयोगशालाओं में विकसित वैज्ञानिक नवाचारों को कुशुनुपुर में लागू किया जाएगा। यदि सफल होते हैं, तो इन मॉडलों को अन्य क्षेत्रों में भी दोहराया जाएगा।

    तीन वर्षीय कार्यक्रम कई विकासात्मक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिनमें चक्रवात और भूकंप प्रतिरोधी भवनों और आश्रयों का निर्माण, सुरक्षित पेयजल आपूर्ति, उन्नत और टिकाऊ कृषि तकनीकें, बिजली रहित शीत भंडारण प्रणाली, कृषि अपशिष्ट से जैविक खाद उत्पादन, युवाओं और महिलाओं के लिए कौशल विकास, विद्यालयों में स्मार्ट कक्षाएं और स्वास्थ्य सेवाओं में टेलीमेडिसिन सुविधाएं शामिल हैं। इस पहल से जिले में बेरोजगारी और मजदूरों के मौसमी पलायन जैसी समस्याओं का समाधान होने की भी उम्मीद है।

    2011 की जनगणना के अनुसार, केंद्रपाड़ा जिले में 1,592 राजस्व ग्राम हैं। राजनगर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले कुशुनुपुर गांव को इस परियोजना के लिए औपचारिक रूप से चुना गया है और स्मार्ट विलेज पहल की आधारशिला एक कार्यक्रम के दौरान रखी गई, जिसमें केंद्रपाड़ा कलेक्टर रघुराम आर. अय्यर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस गांव में 135 परिवार हैं, जिनकी आबादी पुरुषों, महिलाओं और बच्चों सहित लगभग 738 हैं।

    गांववासियों ने आशा व्यक्त की कि यह परियोजना पेयजल की कमी, सिंचाई की कमी, सीमित कृषि उत्पादकता, युवाओं में बेरोजगारी और अपर्याप्त विद्यालय संरचना जैसी लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान करेगी। गांव निवासी प्रभात राउत ने कहा कि समुदाय मुफ्त लाभ नहीं चाहता, बल्कि रोजगार के अवसर और स्थानीय स्तर पर उत्पादित वस्तुओं के विपणन में सहायता चाहता है।

    सीएसआईआर की ओडिशा प्रयोगशाला, आईआईएमटी भुवनेश्वर के निदेशक रामानुज नारायण ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य विज्ञान को सीधे ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि कुशुनुपुर गांव को इसकी क्षमता और अनूठी भौगोलिक परिस्थितियों, जैसे कि जंगलों, नदियों और समुद्र से निकटता के कारण चुना गया है। वैज्ञानिक पिछले दो महीनों से नियमित रूप से गांव का दौरा कर स्थानीय समस्याओं का अध्ययन कर रहे हैं और वैज्ञानिक समाधान तलाश रहे हैं। नारायण ने इस बात पर जोर दिया कि एक “स्मार्ट गांव” का अर्थ केवल डिजिटल प्रौद्योगिकियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों और महिलाओं में ज्ञान, कौशल और बेहतर शिक्षा का विकास करना भी है।

    बाल रक्षा भारत (सेव द चिल्ड्रन) के सीईओ शांतनु चक्रवर्ती ने कहा कि संगठन इस कार्यक्रम को लागू करने में सीएसआईआर और सीबीआरआई के साथ विशेष रूप से आपदा प्रबंधन, नवाचार और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में सहयोग करेगा।

    केंद्रपाड़ा के कलेक्टर रघुराम आर. अय्यर ने बताया कि सीएसआईआर के पास कृषि से लेकर आजीविका तक विभिन्न क्षेत्रों को कवर करने वाली 16 विशेष प्रयोगशालाएं हैं। वैज्ञानिकों ने गांव का सर्वेक्षण कर लिया है और किसानों और निवासियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम अगले सप्ताह से शुरू होंगे। उन्होंने आगे कहा कि इस पहल से अपशिष्ट पुनर्चक्रण, प्लास्टिक मुक्त ग्राम अभियान, जागरूकता कार्यक्रम और वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। स्मार्ट विलेज परियोजना से कुशुनुपुर में जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है और यह देश के अन्य हिस्सों में ग्रामीण विकास के लिए एक आदर्श के रूप में कार्य करेगी।

  • पलामू में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, आयुष्मान भारत योजना से मुफ्त इलाज जारी

    पलामू में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, आयुष्मान भारत योजना से मुफ्त इलाज जारी


    नई दिल्ली। झारखंड के पलामू में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को सालाना 5 लाख रुपए तक का मुफ्त और कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।

    मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि इस योजना ने उनकी सबसे बड़ी चिंता, इलाज के खर्च को खत्म कर दिया है, जिससे कम समय में अच्छा इलाज मिल रहा है और पैसे की परेशानी भी खत्म हो रही है।

    मरीज के परिजन शकीर आलम ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि उनकी पत्नी की डिलीवरी के बाद नवजात की तबीयत अचानक खराब हो गई थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद संक्रमण की समस्या बताई और तुरंत इलाज शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर आयुष्मान योजना नहीं होती, तो इतना महंगा इलाज कराना उनके लिए संभव नहीं था। इस योजना के कारण उन्हें 70 से 80 प्रतिशत तक आर्थिक राहत मिली है और अभी तक उन्हें कोई खर्च नहीं उठाना पड़ा है। उन्होंने अस्पताल के स्टाफ के व्यवहार की भी सराहना की और कहा कि गरीबों के लिए यह योजना बेहद उपयोगी है।

    इसी तरह एक अन्य लाभार्थी के परिजन धनंजय विश्वकर्मा ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि उनके बेटे का इलाज भी इसी योजना के तहत चल रहा है। पहले इलाज के लिए पैसे की चिंता सबसे बड़ी समस्या होती थी, लेकिन अब सरकार की इस पहल से गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिली है।

    अस्पताल के कर्मचारी रवि कुमार ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि आयुष्मान भारत योजना ने गरीब मरीजों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। पहले जहां इलाज के अभाव में कई लोग परेशान रहते थे, वहीं अब उन्हें समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना वास्तव में समाज के कमजोर वर्ग के लिए एक मजबूत सहारा बनकर उभरी है।

    अस्पताल संचालक और प्राइवेट अस्पताल एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष तिवारी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि उनके अस्पताल में वर्तमान में करीब 10 मरीज आयुष्मान योजना के तहत भर्ती हैं। योजना की प्रक्रिया काफी सरल है। मरीज के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड या आयुष्मान कार्ड होना चाहिए। इसके बाद आयुष्मान पोर्टल पर नाम की पुष्टि होते ही मरीज को भर्ती कर लिया जाता है और इलाज पूरी तरह मुफ्त किया जाता है।

    उन्होंने यह भी बताया कि इस योजना के तहत सामान्य सर्जरी, नवजात के लिए एनआईसीयू, बच्चों के लिए पीआईसीयू, इमरजेंसी सेवाएं और कई गंभीर बीमारियों का इलाज भी शामिल है। पहले जहां गरीबों को इलाज के लिए कर्ज लेना पड़ता था या संपत्ति बेचनी पड़ती थी, वहीं अब उन्हें निजी अस्पतालों में भी सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल रहा है।

  • कॉनकोर में मैनेजर बनने का सुनहरा मौका, 10 पदों पर भर्ती, 16 अप्रैल आखिरी तारीख

    कॉनकोर में मैनेजर बनने का सुनहरा मौका, 10 पदों पर भर्ती, 16 अप्रैल आखिरी तारीख


    नई दिल्ली। देश की अग्रणी लॉजिस्टिक्स और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट कंपनी Container Corporation of India Limited (कॉनकोर) में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। कंपनी ने मैनेजर कैडर के कुल 10 पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत मैनेजर (E3), डिप्टी मैनेजर (E2) और असिस्टेंट मैनेजर (E1) जैसे अहम पद शामिल हैं। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार ऑफलाइन मोड के जरिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया 16 मार्च से शुरू हो चुकी है और अंतिम तिथि 16 अप्रैल तय की गई है। ऐसे में उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें, ताकि किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके।

    योग्यता और आयु सीमा क्या है

    कॉनकोर द्वारा जारी इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से संबंधित विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके अलावा, पद के अनुसार अन्य पात्रता शर्तें भी लागू होंगी, जिन्हें उम्मीदवारों को ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए। आयु सीमा की बात करें तो अधिकतम आयु 56 वर्ष निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों की उम्र की गणना आवेदन की अंतिम तिथि यानी 16 अप्रैल 2026 के आधार पर की जाएगी। अनुभवी उम्मीदवारों के लिए यह भर्ती खास मौका साबित हो सकती है।

    चयन प्रक्रिया और सैलरी पैकेज

    इस भर्ती में उम्मीदवारों का चयन कई चरणों के आधार पर किया जाएगा। सबसे पहले उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग होगी, जिसके बाद इंटरव्यू, पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन (PPT), पिछले तीन वर्षों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (APAR) और दस्तावेज़ सत्यापन किया जाएगा। इन सभी चरणों में सफल होने वाले उम्मीदवारों को पद के अनुसार आकर्षक सैलरी दी जाएगी। चयनित अभ्यर्थियों को हर महीने 50,000 रुपये से लेकर 1,80,000 रुपये तक वेतन मिल सकता है, जो सरकारी क्षेत्र में एक बेहतरीन पैकेज माना जाता है।

    आवेदन प्रक्रिया: ऐसे करें अप्लाई

    इस भर्ती के लिए आवेदन पूरी तरह ऑफलाइन मोड में करना होगा। उम्मीदवार सबसे पहले कॉनकोर की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं और भर्ती से संबंधित नोटिफिकेशन डाउनलोड करें। इसके बाद उसमें दिए गए आवेदन फॉर्म का प्रिंट आउट निकालें। फॉर्म में मांगी गई सभी जरूरी जानकारी सही-सही भरें और आवश्यक दस्तावेज़ों की कॉपी संलग्न करें। इसके बाद आवेदन फॉर्म को एक लिफाफे में डालकर निर्धारित पते पर भेजना होगा। आवेदन भेजने का पता है-सीनियर जनरल मैनेजर (एचआर), कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, एनएसआईसी एमडीबीपी बिल्डिंग, तीसरी मंजिल, ओखला औद्योगिक एस्टेट, नई दिल्ली-110076।

    क्यों खास है यह मौका

    सरकारी क्षेत्र में उच्च पदों पर काम करने का सपना देखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह भर्ती एक बेहतरीन अवसर है। खासतौर पर वे उम्मीदवार जिनके पास अनुभव और संबंधित योग्यता है, वे इस मौके का पूरा लाभ उठा सकते हैं। अच्छी सैलरी, प्रतिष्ठित पद और करियर ग्रोथ के लिहाज से यह नौकरी बेहद आकर्षक मानी जा रही है। ऐसे में इच्छुक उम्मीदवार बिना देरी किए आवेदन कर अपनी तैयारी को अंतिम रूप दें।