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  • प्रधानमंत्री मोदी ने कश्मीरी पंडित समुदाय के पर्व ‘हेराथ पोश्ते’ पर दी शुभकामनाएं

    प्रधानमंत्री मोदी ने कश्मीरी पंडित समुदाय के पर्व ‘हेराथ पोश्ते’ पर दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कश्मीरी पंडित समुदाय के समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाने वाले पवित्र त्योहार हेराथ पोश्ते के अवसर पर शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सभी समुदाय के सदस्यों के जीवन में स्वास्थ्य, खुशहाली और समृद्धि की कामना की।प्रधानमंत्री मोदी ने संदेश में कहा, इस पवित्र अवसर पर, मैं सभी के जीवन में स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करता हूं। यह नए सफलता के मार्ग खोले और हर घर को खुशियों और संतोष से भर दे। उन्होंने इस त्योहार के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कश्मीरी पंडित समुदाय की समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।

    हेराथ पोश्ते का पर्व कश्मीरी पंडित समुदाय में धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यह उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों, सांस्कृतिक प्रथाओं और ऐतिहासिक परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम है। इस अवसर पर परिवार और समुदाय के लोग मिलकर पूजा-अर्चना और उत्सव आयोजित करते हैं, जिससे सामाजिक और सांस्कृतिक बंधन मजबूत होते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के संदेश ने इस पर्व के अवसर पर समुदाय में उत्साह और आनंद की भावना बढ़ा दी है। उन्होंने यह भी आशा व्यक्त की कि यह पर्व सभी के लिए खुशियों और सफलता का संदेश लेकर आए। उनके संदेश ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय समाज में सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं का सम्मान सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    हेराथ पोश्ते के अवसर पर कश्मीरी पंडित समुदाय देशभर में अपने घरों और मंदिरों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार आयोजन करता है। इस पर्व के माध्यम से युवा पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शुभकामना संदेश के माध्यम से समाज में भाईचारे और सामूहिक कल्याण की भावना को भी उजागर किया। उनके संदेश ने न केवल कश्मीरी पंडित समुदाय, बल्कि पूरे देश में सांस्कृतिक और धार्मिक सौहार्द्र की भावना को बल दिया।

  • चार दशक बाद फिर से शुरू होगी वुलर बैराज परियोजना, भारत-पाकिस्तान जल विवाद के बीच बड़ा कदम

    चार दशक बाद फिर से शुरू होगी वुलर बैराज परियोजना, भारत-पाकिस्तान जल विवाद के बीच बड़ा कदम

    नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में आई गिरावट के बीच भारत ने वुलर बैराज परियोजना को चार दशक बाद पुनः सक्रिय करने का फैसला किया है। यह परियोजना झेलम नदी के पानी का भंडारण और प्रवाह नियंत्रित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

    भारत ने लंबे समय तक मानवता के नाम पर निभाई गई सिंधु जल संधि को मानते हुए इस परियोजना को ठंडे बस्ते में रखा था। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर और इसके बाद सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद अब जम्मू-कश्मीर सरकार और केंद्र सरकार मिलकर वुलर बैराज पर काम फिर से शुरू करने जा रही हैं।

    वुलर झील की वर्तमान स्थिति
    झेलम नदी के प्रवाह के अनुसार वुलर झील का आकार बदलता रहता है। न्यूनतम आकार लगभग 20 वर्ग किलोमीटर है, जबकि अधिकतम आकार करीब 190 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच जाता है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में बताया कि उनकी सरकार केंद्र के साथ मिलकर दो बड़ी परियोजनाओं—अखनूर में चेनाब नदी से जम्मू शहर के लिए जलापूर्ति और झेलम पर तुलबुल (वुलर) परियोजना पर काम कर रही है।

    इस परियोजना के पहले एशियाई बैंक से फंडिंग ली गई थी, लेकिन सिंधु जल संधि के कारण इसे रोक दिया गया था। अब जबकि संधि निलंबित हो गई है, परियोजना पर काम फिर से शुरू होगा।

    स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका
    वुलर बैराज के निर्माण से स्थानीय लोगों की आजीविका में सुधार होने की उम्मीद है। सर्दियों में झेलम नदी के जल का प्रवाह कम हो जाता है, जिससे झील के ज्यादातर हिस्से सूख जाते हैं। बांदीपोरा से लेकर सोपोर तक स्थानीय लोग मछली पकड़ने, सिंघाड़ा और कमल ककड़ी निकालने के लिए नावों का इस्तेमाल करते रहे हैं, लेकिन झील सिकुड़ने के कारण पारंपरिक आजीविका प्रभावित हुई थी। परियोजना के पूरा होने से यह संकट कम होने की संभावना है।

    पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
    सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद पाकिस्तान ने लगातार बयान जारी किए और चेतावनी दी कि अगर पानी रोका गया तो इसे युद्ध का कदम माना जाएगा। भारत ने अपना फैसला कायम रखा है और केंद्र व राज्य सरकार मिलकर परियोजना पर जल्द ही काम शुरू करने जा रही हैं।

  • J&K में तेज हुआ आतंकवाद रोधी अभियान…जगहृ-जगह चप्पा किए आतंकियों के पोस्टर

    J&K में तेज हुआ आतंकवाद रोधी अभियान…जगहृ-जगह चप्पा किए आतंकियों के पोस्टर


    जम्मू।
    जम्मू-कश्मीर पुलिस (Jammu and Kashmir Police) ने आतंकवाद रोधी अभियान (Anti-Terrorism Operations) तेज करते हुए डोडा जिले (Doda district) में सक्रिय आतंकवादियों के बारे में सूचना देने के संबंध में कई अहम स्थानों पर पोस्टर चस्पा किए हैं। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि इनमें प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तानी कमांडर सैफुल्लाह का नाम भी शामिल है।

    हालिया मुठभेड़ और क्षेत्र में आतंकवादियों की मौजूदगी से जुड़ी खुफिया जानकारी मिलने के बाद जम्मू संभाग के ऊंचाई वाले इलाकों में सुरक्षा अभियान तेज कर दिए गए हैं। इसी क्रम में यह कदम उठाया गया है।पोस्टर डोडा के प्रवेश बिंदु पर गणपत पुल, नागरी, डेसा और ठाठरी समेत प्रमुख चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए हैं।

    अधिकारियों ने बताया कि जनसहभागिता बढ़ाने के लिए संवेदनशील इलाकों में और भी नोटिस लगाए जा रहे हैं। इस बीच, शनिवार सुबह सुरक्षा बलों ने डोडा के गांदो क्षेत्र के चिल्ली जंगल में आंतकवादियों के एक ठिकाने का भंडाफोड़ किया। वहां से खाने-पीने का सामान और कंबल बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार आसपास के जंगलों में तलाशी अभियान और तेज कर दिया गया है।

    उन्होंने कहा कि संदिग्धों की तस्वीरों और संक्षिप्त विवरण वाले पोस्टरों के जरिये आम लोगों से कोई भी विश्वसनीय सूचना को पुलिस के साथ साझा करने की अपील की गई है। साथ ही सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखने और सुरक्षा सुनिश्चित करने का आश्वासन भी दिया गया है।

    अधिकारियों ने बताया कि यह पोस्टर अभियान चेनाब घाटी क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। डोडा और पड़ोसी किश्तवाड़ जिलों में हाल के वर्षों में कई मुठभेड़ हुई हैं, क्योंकि आतंकियों ने जम्मू क्षेत्र के उन हिस्सों में फिर से गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश की है, जहां पहले आतंकवाद पर काफी हद तक काबू पा लिया गया था।

    पिछले एक महीने से डोडा, किश्तवाड़, कठुआ, उधमपुर, राजौरी और पुंछ जिलों के ऊंचाई वाले इलाकों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान जारी है। इस दौरान 10 से अधिक मुठभेड़ हुई हैं। इनमें से ज्यादातर किश्तवाड़, उधमपुर और कठुआ में हुई हैं, जिनमें जेईएम के चार पाकिस्तानी आतंकवादी ढेर हो गए और सेना का एक जवान शहीद हो गया। चार फरवरी को उधमपुर के रामनगर वन क्षेत्र और किश्तवाड़ के छत्रू इलाके में मुठभेड़ में दो आतंकवादी ढेर हो गए, जबकि 23 जनवरी को कठुआ के परेहतर इलाके में एक अन्य आतंकी मारा गया। वहीं, 18 जनवरी को छत्रू में हुई मुठभेड़ में सेना का एक ‘पैरा ट्रूपर’ शहीद हो गया।

  • पूर्वोत्तर को बड़ी सौगात… ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनेगी देश की पहली सड़क-सह-रेल सुरंग

    पूर्वोत्तर को बड़ी सौगात… ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनेगी देश की पहली सड़क-सह-रेल सुरंग


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) ने असम में ब्रह्मपुत्र नदी (Brahmaputra River) के नीचे भारत (India) की पहली सड़क-सह-रेल सुरंग (Road-Cum-Rail Tunnel) के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना गोहपुर (NH-15) से नुमालीगढ़ (NH-715) तक 33.7 किलोमीटर लंबे चार-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का हिस्सा है, जिसमें ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 15.79 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग शामिल है। कुल लागत 18,662 करोड़ रुपये है और इसे इंजीनियरिंग-प्रोक्योरमेंट-कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल पर विकसित किया जाएगा।

    यह भारत की पहली अंडरवाटर सड़क-सह-रेल सुरंग होगी, जो विश्व में अपनी तरह की दूसरी ऐसी संरचना होगी। वर्तमान में गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच की दूरी 240 किलोमीटर है, जो कालियाभम्भोरा पुल और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से होकर गुजरती है। छह घंटे लगते हैं। नई सुरंग से यह दूरी मात्र 34 किलोमीटर रह जाएगी और यात्रा समय 20-30 मिनट तक कम हो जाएगा।

    इस परियोजना के प्रमुख फायदे पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे। यह असम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और अन्य राज्यों को सीधे लाभ पहुंचाएगी। माल ढुलाई की दक्षता बढ़ेगी, रसद लागत में भारी कमी आएगी और क्षेत्रीय व्यापार को गति मिलेगी। सुरंग में एक ट्यूब में सड़क (4 लेन) और दूसरी में रेलवे की व्यवस्था होगी, जो मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देगी। इससे चार प्रमुख रेलवे स्टेशन, दो हवाई अड्डे और दो अंतर्देशीय जलमार्गों से बेहतर जुड़ाव होगा। काजीरंगा जैसे पर्यटन स्थलों, आर्थिक केंद्रों और रसद हब्स की पहुंच आसान हो जाएगी, जिससे पर्यटन, उद्योग और व्यापार में नई संभावनाएं खुलेंगी।


    एक्ट ईस्ट पॉलिसी को मजबूती

    रणनीतिक दृष्टि से यह परियोजना एक्ट ईस्ट पॉलिसी को मजबूत करेगी और सीमा क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाएगी। पूर्वोत्तर को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ने में यह मील का पत्थर साबित होगी। निर्माण से लगभग 80 लाख मानव-दिवसों का रोजगार सृजन होगा, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल देगा। सामाजिक-आर्थिक विकास को गति मिलेगी, क्योंकि प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और पर्यटन केंद्र निर्बाध रूप से जुड़ेंगे।


    पूर्वोत्तर भारत के लिए ऐतिहासिक कदम

    कुल मिलाकर, ब्रह्मपुत्र सुरंग परियोजना पूर्वोत्तर भारत के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। यह न केवल यात्रा और परिवहन को तेज व सुरक्षित बनाएगी, बल्कि क्षेत्र में औद्योगिक विकास, व्यापार वृद्धि और सामाजिक समृद्धि के नए द्वार खोलेगी। केंद्रीय सरकार की इस पहल से असम और पूरे पूर्वोत्तर का परिदृश्य बदल जाएगा, जो सबका साथ, सबका विकास के संकल्प को साकार करेगा।

  • देशभर में महाशिवरात्रि पूर्व की धूम…. जानिए पूजा-जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    देशभर में महाशिवरात्रि पूर्व की धूम…. जानिए पूजा-जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि


    नई दिल्ली।
    देश भर में आज रविवार को फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर महाशिवरात्रि का पर्व (Mahashivratri festival) धूमधाम से मनाया जा रहा है। महाशिवरात्रि में त्रयोदशी-चतुर्दशी का मेल होता है, त्रयोदशी समाप्त होकर चतुर्दशी शुरू होती है, वही समय महाशिवरात्रि का विशेष पुण्यकाल (Special Auspicious time.) माना जाता है। ज्योतिषचार्यों के अनुसार 15 फरवरी को दिन में त्रयोदशी तिथि रहेगी, लेकिन शाम 5:04 बजे चतुर्दशी तिथि आरंभ हो जाएगी। ऐसे में पूरी रात्रि में चतुर्दशी ही व्याप्त रहेगी। इसलिए महाशिवरात्रि पर्व 15 फरवरी को मनाया जा रहा है।

    इस वर्ष महाशिवरात्रि पर व्यतिपात, वरियान व अमृत नामक महा औदायिक योग व निशीथ काल भी बन रहा है। पं. शरद चंद मिश्र के अनुसार, इस दिन सूर्योदय प्रातः 6 बजकर 25 मिनट पर होगा। फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी सायं 4 बजकर 23 मिनट तक रहेगी, इसके बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होकर रात्रि भर रहेगी। उत्तराषाढ़ नक्षत्र सायं 7 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, इसके बाद श्रवण नक्षत्र प्रारंभ होगा। व्यतिपात योग दोपहर 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा, इसके पश्चात वरियान योग लगेगा। साथ ही अमृत सिद्धि योग पूरे दिन-रात्रि विद्यमान रहेगा। निशीथ काल रात्रि 11 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा, जो भगवान शिव की विशेष पूजा के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है। प. नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि इस वर्ष सर्वार्थ सिद्धि योग प्रातः 6:25 से सायं 7:26 तक रहेगा। व्यतिपात योग साधना और जप-तप के लिए विशेष फलदायी माना गया है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर में रहेगा, जिसमें पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है।

    महाशिवरात्रि का महत्त्व : पौराणिक कथाओं के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि में भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था। प्रलय की वेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं। इसलिए इसे महाशिवरात्रि या कालरात्रि भी कहा गया है। पौराणिक व्याख्यानों के अनुसार इसे शिव विवाह महोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। महाशिवरात्रि को वर्षभर में पड़ने वाली सिद्ध रात्रियों में से एक माना गया है।

    मुहूर्त
    ● चतुर्दशी तिथि उपस्थित : 15 फरवरी शाम 5:04 से 16 फरवरी शाम 5:34 बजे
    ● शिवरात्रि का विशष पुण्यकाल : 15 की शाम 5:04 से आरम्भ
    ● जलाभिषेक का समय : 15 को प्रातःकाल से आरम्भ
    ● विशेष पुण्यकाल : शाम 5:04 के बाद विशेष पुण्यकाल का अभिषेक होगा

    शिव पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त-
    निशिता काल पूजा समय – 12:37 ए एम से 01:32 ए एम, फरवरी 16
    अवधि – 55 मिनट
    शिवरात्रि पारण समय – 16 फरवरी को 07:57 ए एम से 01:04 पी एम तक।
    रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – 06:11 पी एम से 09:38 पी एम
    रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – 09:38 पी एम से 01:04 ए एम, फरवरी 16
    रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – 01:04 ए एम से 04:31 ए एम, फरवरी 16
    रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 04:31 ए एम से 07:57 ए एम, फरवरी 16

    महाशिवरात्रि की पूजा विधि (घर और मंदिर में कैसे करें पूजा)-
    महाशिवरात्रि की पूजा विधि: घर में कैसे करें पूजा- महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। घर में पूजा करने से पहले पूजा की जगह अच्छे से साफ कर लें। शिवलिंग को भी पानी से धोकर साफ जगह पर रखें। सबसे पहले शिवलिंग पर साफ जल से अभिषेक करें। इसके बाद दूध, दही, घी और शहद से एक-एक करके अभिषेक किया जा सकता है। अभिषेक करते समय मन में “ॐ नमः शिवाय” का जप करते रहें। अगर सब चीजें उपलब्ध न हों तो सिर्फ जल और दूध से भी पूजा पूरी मानी जाती है। अभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र जरूर चढ़ाएं। साथ में धतूरा, आक के फूल और सफेद फूल चढ़ा सकते हैं। फूल चढ़ाते समय मन में अपनी इच्छा रखें और शिवजी को याद करें। इसके बाद धूप-दीप जलाएं और थोड़ी देर शांत बैठकर शिव मंत्रों का जप करें। मन की बात भगवान शिव से कहें। शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ भी कर सकते हैं। जो लोग रात में जागकर पूजा कर पाते हैं, वे घर पर ही सरल तरीके से रुद्राभिषेक कर सकते हैं।

    घर में शिवलिंग रखने की सही बात-
    घर में बहुत बड़ा शिवलिंग रखने की परंपरा नहीं है। आमतौर पर मिट्टी, पत्थर, पीतल या चांदी का छोटा शिवलिंग घर के लिए ठीक माना जाता है। शिवलिंग के साथ गणेश जी, माता पार्वती और नंदी की छोटी मूर्ति रखकर पूजा करना अच्छा माना जाता है।

    महाशिवरात्रि की पूजा विधि: मंदिर में कैसे करें पूजा-
    अगर मंदिर जाकर पूजा कर रहे हैं तो सुबह स्नान करके साफ कपड़ों में मंदिर जाएं। मंदिर में शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। कई जगहों पर दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक की व्यवस्था होती है, वहां श्रद्धा से अभिषेक करें। “ॐ नमः शिवाय” का मन ही मन जप करते रहें।शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद फूल चढ़ाएं। पुजारी जी के बताए नियमों का पालन करें। धूप-दीप दिखाकर भगवान शिव का ध्यान करें। अगर संभव हो तो रात में मंदिर जाकर रुद्राभिषेक या विशेष पूजा में शामिल हों। मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात की पूजा का खास फल मिलता है।

    महाशिवरात्रि पर करें इन मंत्रों का जप-
    महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की कृपा पाने के लिए कुछ आसान और असरदार मंत्रों का जप किया जा सकता है। सबसे पहले “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें। यह शिव जी का सबसे सरल और शक्तिशाली मंत्र माना जाता है। इस पावन दिन महामृत्युंजय मंत्र का जप भी किया जाता है–
    ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
    उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

    शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं और क्या नहीं- महाशिवरात्रि या रोज की पूजा में शिवलिंग पर चढ़ाने के लिए जल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक किया जाता है और इसके बाद बेलपत्र जरूर अर्पित करें, क्योंकि यह शिवजी को सबसे प्रिय माना जाता है। साथ में सफेद फूल, आक और धतूरा भी चढ़ाए जाते हैं। धूप-दीप जलाकर सादे मन से पूजा करें। वहीं शिवलिंग पर केतकी का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए, क्योंकि मान्यता के अनुसार यह शिव पूजा में वर्जित माना गया है। तुलसी के पत्ते भी शिवलिंग पर नहीं चढ़ाए जाते, इन्हें विष्णु पूजा के लिए रखा जाता है। लाल रंग के तेज खुशबू वाले फूल, टूटे या मुरझाए फूल, बासी फूल और चढ़ाया हुआ प्रसाद दोबारा शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए।

  • ISRO का निसार उपग्रह करेगा किसानों की बड़ी मदद… मिलेगी मिट्टी की नमी की सटीक जानकारी

    ISRO का निसार उपग्रह करेगा किसानों की बड़ी मदद… मिलेगी मिट्टी की नमी की सटीक जानकारी


    नई दिल्ली।
    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organization- ISRO) ने निसार (NISAR) उपग्रह के बारे में अहम जानकारी साझा की है। यह उपग्रह भारत (India) और अमेरिका (NASA) का संयुक्त प्रोजेक्ट है, जो एस-बैंड और एल-बैंड रडार की मदद से पृथ्वी की सतह की निगरानी करता है। निसार का मुख्य उद्देश्य मिट्टी में नमी का सटीक और नियमित आकलन करना है। इसरो के अनुसार, यह उपग्रह हर 12 दिनों में भारत के पूरे भू-भाग का उच्च रिजॉल्यूशन (100 मीटर) डेटा प्रदान करेगा। इससे किसानों, वैज्ञानिकों और सरकार को मिट्टी की नमी की लगभग वास्तविक समय की जानकारी मिल सकेगी।

    मिट्टी में नमी की जानकारी कृषि के लिए बहुत उपयोगी है। यह फसलों की सेहत, सिंचाई की कितनी जरूरत है, सूखे का खतरा कितना है और जल प्रबंधन जैसे मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत में अलग-अलग इलाकों जैसे सिंचित मैदान, वर्षा पर निर्भर खेत, अर्ध-शुष्क क्षेत्र और ज्यादा बारिश वाले इलाकों में मिट्टी की नमी अलग-अलग होती है। निसार का डेटा इन सभी क्षेत्रों में एकसमान और भरोसेमंद अनुमान देगा। इसरो ने एक भौतिकी-आधारित एल्गोरिदम विकसित किया है, जो इस डेटा को और अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाता है।


    NISAR के पास क्या है टारगेट

    निसार हर 12 दिनों में दो बार (दो अलग-अलग दिशाओं से) अवलोकन करेगा, जिससे मिट्टी की नमी में होने वाले बदलावों की निगरानी आसान हो जाएगी। इससे किसान सिंचाई की बेहतर योजना बना सकेंगे, सूखे से पहले तैयारी कर सकेंगे, मौसम आधारित कृषि सलाह ले सकेंगे और पानी के संसाधनों का सही प्रबंधन कर सकेंगे। यह डेटा जिलों, कृषि समुदायों और योजनाकारों के लिए बहुत मददगार साबित होगा।


    किस तरह की मिलेगी मदद

    इसरो ने बताया कि 100 मीटर रिजॉल्यूशन वाला यह लेवल-4 मिट्टी नमी डेटा राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र में तैयार किया जाएगा। फिर इसे भूनिधि पोर्टल के जरिए पूरे देश के किसानों, शोधकर्ताओं, सरकारी विभागों और गैर-सरकारी संगठनों को आसानी से उपलब्ध कराया जाएगा। इस तरह निसार उपग्रह भारत की कृषि और जल संसाधन प्रबंधन को मजबूत बनाने में बड़ा योगदान देगा। इस तरह इसरो लगातार बड़े-बड़े कारनामे कर रहा है।

  • केंद्र सरकार का बड़ा प्रशासनिक बदलाव: साउथ ब्लॉक में अंतिम कैबिनेट बैठक के साथ नए युग की शुरुआत

    केंद्र सरकार का बड़ा प्रशासनिक बदलाव: साउथ ब्लॉक में अंतिम कैबिनेट बैठक के साथ नए युग की शुरुआत


    नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवनों में स्थानांतरण के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि साउथ ब्लॉक में केंद्रीय मंत्रिमंडल की अंतिम बैठक संपन्न हुई और यह क्षण केवल भवन परिवर्तन का नहीं बल्कि इतिहास और भविष्य के संगम का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह परिसर गुलामी से आजादी और स्वतंत्र भारत की नीतिगत यात्रा का साक्षी रहा है।

    मंत्री ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से नए प्रधानमंत्री कार्यालय को सेवा तीर्थ के रूप में राष्ट्र को समर्पित किया गया है। ब्रिटिश काल में निर्मित नॉर्थ और साउथ ब्लॉक लंबे समय तक देश के प्रशासनिक संचालन के केंद्र रहे। स्वतंत्रता के बाद भी इन्हीं भवनों से शासन व्यवस्था संचालित होती रही और प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से कार्य करता रहा।

    अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस परिसर ने देश के 16 प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों को देखा है। इसकी सीढ़ियों पर जवाहरलाल नेहरू से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री तक के कदम पड़े हैं। यहां संविधान की भावना और जनता के जनादेश से प्रेरित होकर अनेक बड़े फैसले लिए गए। भारत की सफलताओं का उत्सव भी यहीं मनाया गया और चुनौतियों से निपटने की रणनीतियां भी यहीं बनीं।

    उन्होंने कहा कि साउथ ब्लॉक ने विभाजन की त्रासदी युद्धकालीन परिस्थितियां आपातकाल की चुनौतियां और शांति काल की नीतिगत चर्चाएं देखीं। टाइपराइटर के दौर से डिजिटल गवर्नेंस तक की प्रशासनिक यात्रा का साक्षी यही भवन रहा। अधिकारियों की कई पीढ़ियों ने यहां बैठकर ऐसे निर्णय लिए जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद की अनिश्चितता से देश को स्थिरता और विकास की राह पर अग्रसर किया।

    बीते एक दशक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह परिसर अनेक ऐतिहासिक फैसलों का केंद्र बना। स्वच्छ भारत अभियान डिजिटल इंडिया और जीएसटी जैसे सुधारों को यहीं से दिशा मिली। अनुच्छेद 370 से जुड़े निर्णय और तीन तलाक के विरुद्ध कानून जैसे कदमों ने सामाजिक परिवर्तन का संदेश दिया। सुरक्षा नीति के संदर्भ में सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसे निर्णयों ने वैश्विक मंच पर भारत की दृढ़ता को प्रदर्शित किया।

    मंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए एक आधुनिक तकनीकी और पर्यावरण अनुकूल कार्यक्षेत्र की आवश्यकता थी। सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन उसी सोच का परिणाम हैं जहां सेवाभाव और उत्पादकता को केंद्र में रखा गया है। उन्होंने बताया कि साउथ ब्लॉक के उद्घाटन के लगभग 95 वर्ष बाद अब सरकार इन भवनों को खाली कर नए परिसरों में स्थानांतरित हो गई है जो गुलामी के अतीत से आत्मविश्वासी भविष्य की ओर बढ़ने का प्रतीक है।

    साथ ही मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय का हिस्सा बनाया जाएगा ताकि देश की प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत नई पीढ़ियों को प्रेरित करती रहे। यह कदम प्रशासनिक परिवर्तन के साथ साथ सांस्कृतिक पुनर्स्मरण का भी संदेश देता है।

  • राजस्थान विधानसभा में 'अमर्यादित' आचरण: कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा पर अभद्र इशारे का आरोप, स्पीकर ने दिए वीडियो जांच के आदेश!

    राजस्थान विधानसभा में 'अमर्यादित' आचरण: कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा पर अभद्र इशारे का आरोप, स्पीकर ने दिए वीडियो जांच के आदेश!


    जयपुर। राजस्थान विधानसभा की गरिमा शुक्रवार को उस समय तार-तार होती दिखी, जब शून्यकाल के दौरान सदन का माहौल अचानक गरमा गया। आरोप है कि कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा ने सदन की कार्यवाही के दौरान कुछ ऐसे ‘अभद्र इशारे’ किए, जो लोकतांत्रिक संस्थान की मर्यादा के बिल्कुल विपरीत थे। भाजपा विधायकों ने इस मुद्दे को लेकर सदन में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया और संबंधित विधायक के खिलाफ निलंबन जैसी सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।

    कैसे शुरू हुआ विवाद?
    मामले की जड़ें गुरुवार की घटना से जुड़ी बताई जा रही हैं, लेकिन शुक्रवार को जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, भाजपा के वरिष्ठ विधायक श्रीचंद कृपलानी ने इस मुद्दे को पूरी प्रखरता के साथ उठाया। कृपलानी ने सीधे तौर पर रोहित बोहरा पर उंगली उठाते हुए कहा कि सदन की मर्यादा को ठेस पहुँचाने वाला ऐसा व्यवहार किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग की कि विधायक को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और उन पर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सदन की प्रतिष्ठा सर्वोपरि है और पद की गरिमा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।

    स्पीकर वासुदेव देवनानी का सख्त रुख
    मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि एक विधायक लाखों मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करता है और उसे बड़ी संख्या में लोग देखते हैं, इसलिए उसका आचरण आदर्श होना चाहिए। देवनानी ने आश्वासन दिया कि, “पूरे घटनाक्रम की वीडियो फुटेज देखी जाएगी। यदि वीडियो में विधायक का आचरण सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं पाया गया, तो नियमानुसार कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

    कांग्रेस का बचाव: ‘मुद्दे को तूल न दें’

    वहीं, कांग्रेस विधायक दल के सचेतक रफीक खान ने भाजपा के आरोपों का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि रोहित बोहरा अपनी सीट पर बैठे हुए थे और मामले को राजनीतिक द्वेष के चलते अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है। खान ने पुरानी परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि पहले भी ऐसे विवादों को आपसी संवाद और बैठकों से सुलझाया जाता रहा है, इसलिए इस पर ‘मीडिया ट्रायल’ के बजाय संयम बरतना चाहिए।

    अब जांच पर टिकी निगाहें
    फिलहाल राजस्थान की सियासत में पारा चढ़ा हुआ है। अब सारा दारोमदार विधानसभा अध्यक्ष की जांच पर है। वीडियो समीक्षा के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि रोहित बोहरा पर लगे आरोप कितने सटीक हैं। क्या विधायक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी या कांग्रेस इसे केवल राजनीतिक हमला करार देकर बचाव कर पाएगी, यह आने वाले वक्त में साफ हो जाएगा।

  • योगी का सपा पर तंज: मंत्री को नहीं पता था बिस्मिल और बिस्मिल्लाह खां का अंतर, अधिकारी भी नहीं पहचानते थे अपना चेहरा!

    योगी का सपा पर तंज: मंत्री को नहीं पता था बिस्मिल और बिस्मिल्लाह खां का अंतर, अधिकारी भी नहीं पहचानते थे अपना चेहरा!


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने पुराने ‘तेवर’ में नजर आए। विपक्ष पर प्रहार करते हुए सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी के शासनकाल के दौरान शिक्षा विभाग की प्रशासनिक अव्यवस्था और मंत्रियों की गंभीरता पर बड़े सवाल खड़े किए। मुख्यमंत्री ने एक बेहद चौंकाने वाला किस्सा साझा किया जिसमें सपा सरकार के एक पूर्व माध्यमिक शिक्षा मंत्री की ऐतिहासिक और सामान्य ज्ञान की कमी उजागर हुई।

    बिस्मिल और बिस्मिल्लाह खां में भ्रम

    मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि स्वतंत्रता सेनानी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के शहादत दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में सपा सरकार के शिक्षा मंत्री को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया था। जब उन्हें बताया गया कि आज पंडित राम प्रसाद बिस्मिल का शहीदी दिवस है तो मंत्री जी बुरी तरह भ्रमित हो गए। उन्होंने क्रांतिकारी बिस्मिल को भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां समझ लिया।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा मंत्री जी कहने लगे कि बिस्मिल्लाह खां को तो हाल ही में अवॉर्ड मिला है उन्हें फांसी कैसे दी जा सकती है? जब वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने उन्हें टोकते हुए बताया कि बात पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की हो रही है तो मंत्री जी ने अपनी गलती सुधारने के बजाय उस व्यक्ति को ही ‘भारतीय जनता पार्टी का समर्थक’ करार दे दिया। सीएम ने तंज कसते हुए कहा कि जिस सरकार के शिक्षा मंत्री को इन दो महान विभूतियों का अंतर न पता हो वहां अंधेर नगरी चौपट राजा वाली स्थिति थी। ऐसे में अगर बच्चे नकल नहीं करते तो क्या करते?

    मंत्री को नहीं पहचानते थे अधिकारी

    मुख्यमंत्री ने एक और संस्मरण सुनाया जब वह गोरखपुर के सांसद थे। उन्होंने बताया कि एक बार रेलवे स्टेशन पर कुछ अधिकारियों के बीच सपा सरकार के शिक्षा मंत्री भी मौजूद थे लेकिन कोई अधिकारी उनके सम्मान में खड़ा तक नहीं हुआ। जब योगी ने एक अधिकारी से पूछा कि क्या वे मंत्री के साथ आए हैं तो अधिकारी ने उल्टा सवाल किया- कौन से मंत्री? बाद में खुद मंत्री ने स्वीकार किया कि वे पिछले छह महीने से दफ्तर ही नहीं गए इसलिए अधिकारी उन्हें पहचानते ही नहीं।

    कानून से ऊपर कोई नहीं

    कानून-व्यवस्था और धार्मिक मर्यादा पर बात करते हुए सीएम योगी ने प्रयागराज कुंभ का जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता। आदि जगद्गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पीठों और वेदों की एक गरिमा है जिसका पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और नियमों का उल्लंघन किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
  • भारतीय पासपोर्ट 10 पायदान ऊपर, पर ईरान और बोलिविया ने बंद कर दी वीजा फ्री एंट्री

    भारतीय पासपोर्ट 10 पायदान ऊपर, पर ईरान और बोलिविया ने बंद कर दी वीजा फ्री एंट्री

    नई दिल्ली । भारतीय पासपोर्ट की वैश्विक रैंकिंग में सुधार हुआ है, लेकिन इसके साथ ही दो देशों ने भारतीयों के लिए वीजा फ्री एंट्री बंद कर दी है। हेनले एंड पार्टनर्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अब भारतीय पासपोर्ट वैश्विक सूची में 75वें स्थान पर पहुंच गया है। 2025 में यह रैंक 85वीं थी, और साल की शुरुआत में 80वीं थी। हालांकि भारत की रैंकिंग में सुधार आया है, लेकिन वीजा फ्री सुविधा वाले देशों की संख्या घटकर 56 रह गई है। 2025 में भारतीय पासपोर्ट धारक 57 देशों में बिना वीजा या वीजा ऑन अराइवल यात्रा कर सकते थे।

    वीजा फ्री सुविधा बंद करने वाले देश
    ईरान ने नवंबर 2025 में भारतीय सामान्य पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा फ्री सुविधा निलंबित कर दी। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस कदम के पीछे वहां हुई अपहरण और फिरौती की घटनाएं थीं। इसी तरह, बोलिविया ने भी भारतीयों के लिए वीजा ऑन अराइवल सुविधा बंद कर दी। इसके बजाय इस देश ने ई-वीजा प्रणाली लागू की, जिसके तहत भारतीयों को ऑनलाइन आवेदन करना जरूरी हो गया। फिलहाल, गाम्बिया ने फरवरी 2026 में भारतीयों के लिए वीजा ऑन अराइवल सुविधा शुरू की है, जिससे यह संख्या 56 देशों तक पहुंची।

    रैंकिंग में सुधार का कारण
    हालांकि दो देशों की वीजा सुविधा घटने से भारत की पहुंच घट गई, फिर भी हेनले इंडेक्स के रिलेटिव सिस्टम के कारण रैंकिंग में सुधार देखा गया। हेनले इंडेक्स में देशों की रैंकिंग अन्य देशों के मुकाबले निर्धारित होती है। अगर अन्य देशों ने अपनी पहुंच खोई है, तो भारत की रैंकिंग में सुधार दिखाई देता है। इस बार भारत 75वीं रैंक पर है, जो अल्जीरिया और नाइजर के साथ साझा की जा रही है।

    पासपोर्ट रैंकिंग कैसे तय होती है
    हेनले इंडेक्स 199 देशों के पासपोर्ट को विभिन्न आधारों पर रैंक करता है। इसमें देखा जाता है कि किसी देश के पासपोर्ट धारक कितने देशों में वीजा फ्री एंट्री या वीजा ऑन अराइवल का लाभ ले सकते हैं। इसके अलावा बॉर्डर पर जारी विजिटर परमिट और बेसिक इलेक्ट्रॉनिक ट्रेवल ऑथराइजेशन (ETA) के अंक भी जोड़े जाते हैं। अगर किसी देश में प्रवेश के लिए पहले से वीजा या ई-वीजा जरूरी हो, तो उस पर अंक नहीं मिलते।