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  • ओडिशा में बड़ा विमान हादसा टला: राउरकेला के पास इंडिया वन एयरलाइंस की क्रैश लैंडिंग, मौत के मुँह से बाहर आए 6 लोग

    ओडिशा में बड़ा विमान हादसा टला: राउरकेला के पास इंडिया वन एयरलाइंस की क्रैश लैंडिंग, मौत के मुँह से बाहर आए 6 लोग




    राउरकेला।
    ओडिशा के राउरकेला के पास शनिवार दोपहर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब इंडिया वन एयर (India One Air) का एक निजी विमान तकनीकी खराबी के चलते क्रैश लैंडिंग का शिकार हो गया। भुवनेश्वर से राउरकेला जा रहा यह विमान जाल्दा इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हुआ, लेकिन राहत की बात यह रही कि पायलट की समझदारी और त्वरित फैसले के चलते विमान में सवार सभी 6 लोग मौत के मुंह से बाहर निकल आए।

    जानकारी के मुताबिक, यह विमान Cessna 208 Grand Caravan था, जो एक सिंगल-इंजन टर्बोप्रॉप विमान है और क्षेत्रीय हवाई सेवाओं में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। उड़ान के दौरान जब विमान राउरकेला एयरपोर्ट से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर था, तभी उसमें अचानक तकनीकी खराबी आ गई।

    विमान असंतुलित होने लगा, जिसके बाद पायलट ने स्थिति को भांपते हुए आपातकालीन लैंडिंग का फैसला लिया। हालांकि रनवे तक पहुंच पाना संभव नहीं हो सका और जाल्दा के पास विमान की क्रैश लैंडिंग हो गई।

    जमीन से टकराने पर विमान को भारी नुकसान पहुंचा, लेकिन सौभाग्य से उसमें आग नहीं लगी। यही वजह रही कि एक बड़ा विस्फोट और जान-माल की भारी क्षति टल गई। विमान में कुल 4 यात्री और 2 क्रू मेंबर सवार थे। हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीण सबसे पहले मौके पर पहुंचे और यात्रियों को मलबे से बाहर निकालने में मदद की। प्रशासन और राहत टीमें भी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं। सभी घायलों को प्राथमिक उपचार दिया गया है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

    घटना की पुष्टि करते हुए भुवनेश्वर स्थित बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के अधिकारियों ने बताया कि यह एक गंभीर तकनीकी आपात स्थिति थी, लेकिन पायलट की सूझबूझ ने बड़ा हादसा होने से रोक लिया। वहीं, ओडिशा सरकार भी तुरंत हरकत में आई।

    राज्य के वाणिज्य और परिवहन मंत्री ने कहा कि यह किसी चमत्कार से कम नहीं है कि इस हादसे में कोई जान नहीं गई। सभी यात्रियों को हर संभव मदद दी जा रही है।

    इस घटना की सूचना नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को दे दी गई है। DGCA और राज्य परिवहन विभाग की संयुक्त टीम मामले की जांच करेगी। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि तकनीकी खराबी की असली वजह क्या थी, क्या विमान की मेंटेनेंस प्रक्रिया में कोई चूक हुई थी, और क्या उड़ान से पहले सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था।

    इंडिया वन एयर ओडिशा के कई शहरों को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण निजी विमान सेवा है। ऐसे में यह हादसा क्षेत्रीय हवाई सेवाओं की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं यह याद दिलाती हैं कि छोटे विमानों की नियमित और सख्त तकनीकी जांच कितनी जरूरी है।

    फिलहाल, दुर्घटनाग्रस्त विमान को घटनास्थल से हटाने की तैयारी की जा रही है और आसपास के इलाके को सुरक्षित कर दिया गया है। DGCA की रिपोर्ट के बाद ही साफ हो पाएगा कि आसमान में ऐसा क्या हुआ, जिसने इस विमान को इमरजेंसी लैंडिंग के लिए मजबूर कर दिया। लेकिन इतना तय है कि इस हादसे में 6 जिंदगियों का बच जाना पायलट की बहादुरी और किस्मत दोनों का ही नतीजा है।बकौल मंत्री, राज्य सरकार ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को स्थिति से तुरंत अवगत कराया है। उन्होंने बताया कि भुवनेश्वर एयरपोर्ट के डायरेक्टर भी जल्द ही दुर्घटनास्थल का दौरा करेंगे। एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार यह फ्लाइट इंडिया वन एयर द्वारा राउरकेला और भुवनेश्वर के बीच नियमित रूप से चलाई जाने वाली प्राइवेट सेवा थी।
  • पुणे राजनीति में हलचल: सुप्रिया सुले–अजित पवार एक मंच पर, निकाय चुनाव का मेनिफेस्टो जारी

    पुणे राजनीति में हलचल: सुप्रिया सुले–अजित पवार एक मंच पर, निकाय चुनाव का मेनिफेस्टो जारी

    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार को एक ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जिसने सबका ध्यान खींच लिया। वर्षों बाद एनसीपी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले और उपमुख्यमंत्री अजित पवार एक ही मंच पर साथ नजर आए। मौका था पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निकाय चुनावों के लिए एनसीपी (एसपी) और एनसीपी द्वारा संयुक्त मेनिफेस्टो जारी करने का। राजनीतिक गलियारों में इसे स्थानीय स्तर पर एक नई रणनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

    पानी संकट और टैंकर माफिया पर सख्त रुख

    घोषणापत्र जारी करते हुए सुप्रिया सुले ने पुणे और मुंबई में सक्रिय टैंकर माफिया का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि पानी की कमी के बीच अवैध टैंकर कारोबार आम लोगों का शोषण कर रहा है। मेनिफेस्टो में इस माफिया पर नियंत्रण और पारदर्शी जल आपूर्ति व्यवस्था लागू करने का वादा किया गया है, ताकि नागरिकों को पानी के लिए परेशान न होना पड़े।

    यातायात सुधार पर बड़ा जोर

    संयुक्त घोषणापत्र में पुणे की गंभीर ट्रैफिक समस्या को दूर करने के लिए ठोस रोडमैप रखा गया है। इसके तहत शहर में 33 मिसिंग रोड लिंक को जोड़ने का वादा किया गया है, जिससे सड़क नेटवर्क मजबूत होगा और जाम की समस्या कम होगी। इसके साथ ही सड़कों के चौड़ीकरण और ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को बेहतर बनाने की बात भी कही गई है।

    फ्री बस और मेट्रो यात्रा का वादा

    घोषणापत्र में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा ऐलान किया गया है। शहरवासियों को मुफ्त बस और मेट्रो यात्रा उपलब्ध कराने की योजना शामिल की गई है। इसका उद्देश्य निजी वाहनों पर निर्भरता घटाना, ईंधन खर्च कम करना और प्रदूषण पर नियंत्रण पाना बताया गया।

    स्वास्थ्य सुविधाएं हर नागरिक के पास

    स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी घोषणापत्र में अहम वादा किया गया है। इसके अनुसार हर नागरिक को उसके घर से दो किलोमीटर के दायरे में अस्पताल या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उपलब्ध कराया जाएगा। इससे आपात स्थिति में इलाज तक त्वरित पहुंच सुनिश्चित की जा सकेगी।

    राजनीतिक संकेत भी अहम

    सुप्रिया सुले और अजित पवार का एक मंच पर आना सिर्फ नगर निकाय चुनाव तक सीमित नहीं माना जा रहा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह तस्वीर आगामी चुनावी समीकरणों के लिए भी संकेत दे सकती है। हालांकि दोनों नेताओं ने मंच से सिर्फ स्थानीय विकास और नागरिक सुविधाओं पर ही जोर दिया।

    निष्कर्ष:
    संयुक्त मेनिफेस्टो के जरिए एनसीपी (एसपी) और एनसीपी ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के मतदाताओं को विकास, बेहतर सुविधाओं और पारदर्शी प्रशासन का भरोसा दिलाने की कोशिश की है। अब देखना होगा कि यह एकजुटता चुनावी नतीजों में कितना असर दिखा पाती है।

  • इंसानी ब्लड बैग में मिला बकरी का खून, ऐसे हुआ खुलासा

    इंसानी ब्लड बैग में मिला बकरी का खून, ऐसे हुआ खुलासा


    हैदराबाद। तेलंगाना के हैदराबाद से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां काचीगुडा इलाके में एक इंपोर्ट-एक्सपोर्ट फर्म पर रेड के दौरान कुछ ऐसा मिला है, जिसे देख अधिकारी हैरान हैं। जानकारी के मुताबिक यहां ड्रग कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन (DCA) की रेड में अधिकारियों को लगभग 1,000 लीटर जानवरों का खून मिला है। यह खून बकरियों और भेड़ों से गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा किया गया था और इंसानों का खून रखने के लिए बने ब्लड बैग में पैक किया गया था।
    Wion न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक सेंट्रल ड्रग कंट्रोल अधिकारियों ने हैदराबाद पुलिस और राज्य के ड्रग कंट्रोल अधिकारियों के साथ मिलकर गुप्त सूचना के आधार पर यह रेड की थी। इस दौरान उन्होंने इंसानों के इस्तेमाल के लिए बने ब्लड बैग में जानवरों का खून भरा हुआ देख सीनियर अधिकारी भी हैरान रह गए।
    बकरी के खून के अलावा परिसर में खून की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली कुछ अत्याधुनिक मशीनें भी मिली हैं। रेड टीम को एक ऑटोक्लेव मशीन, एक लैमिनार एयर फ्लो यूनिट, 110 भरे हुए ब्लड बैग और लगभग 60 खाली ब्लड बैग भी मिले। ड्रग कंट्रोल अधिकारियों के मुताबिक इसका इस्तेमाल गैरकानूनी क्लिनिकल ट्रायल, एक्सपेरिमेंट या लैब टेस्ट के लिए कल्चर मीडिया तैयार करने में किया जा सकता था। फर्म का मालिक फिलहाल फरार है।
  • मुस्लिम देशों ने फिर अलापा कश्मीर पर राग, 370 लागू करने की मांग

    मुस्लिम देशों ने फिर अलापा कश्मीर पर राग, 370 लागू करने की मांग


    नई दिल्‍ली। मुस्लिम देशों के सबसे बड़े संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन यानी OIC ने जम्मू-कश्मीर का नाम लेकर एक बार फिर अपनी हदें पार की हैं। OIC ने अपने हालिया बयान में कश्मीर में जनमत की मांग करते हुए कहा है कि वह कश्मीर के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकारों का समर्थन करता है। इस दौरान OIC ने कश्मीर में धारा 370 को वापस लागू करने की मांग भी कर दी। बता दें कि भारत कई बार यह स्पष्ट कर चुका है कि संगठन को भारत के आंतरिक मामलों में बोलना का कोई कानूनी अधिकार नहीं है और ना ही OIC द्वारा इस तरह की बयानबाजी को स्वीकार किया जाएगा।
    ओआईसी (इस्लामी सहयोग संगठन) 57 देशों का एक अंतरसरकारी संगठन है जो मुस्लिम जगत की सामूहिक आवाज होने का दावा करता है। OIC ने 8 जनवरी 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने बयान को साझा किया है। इसके साथ लिखा गया है कि OIC, 5 जनवरी 1949 के यूनाइटेड नेशंस के प्रस्ताव की सालगिरह पर एक स्वतंत्र और निष्पक्ष रेफरेंडम के जरिए, जम्मू और कश्मीर के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को समर्थन देता है।

    OIC के बयान में कश्मीर में जनमत संग्रह की मांग करते हुए कहा गया, “जनरल सेक्रेटेरिएट 5 जनवरी 1949 को भारत और पाकिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र आयोग द्वारा अपनाए गए प्रस्ताव को याद दिलाता है, जिसमें जम्मू और कश्मीर के लोगों को संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह के माध्यम से आत्मनिर्णय के अधिकार की पुष्टि की गई थी। इसमें आगे कहा गया, “जनरल सेक्रेटेरिएट जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ अपनी पूरी एकजुटता दिखाता है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जम्मू-कश्मीर के राज्य के रूप में मान्यता का सम्मान करने और 5 अगस्त 2019 और उसके बाद उठाए गए सभी एकतरफा कदमों को वापस लेने की अपील करता है।

    …”

    बयान में संयुक्त राष्ट्र से भी एक अपील की गई है। इसमें कहा गया, “जनरल सेक्रेटेरिएट ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, खासकर संयुक्त राष्ट्र की जिम्मेदारी पर भरोसा जताया है कि वह जम्मू-कश्मीर से जुड़े प्रस्तावों को लागू करे और UNSC के संबंधित प्रस्तावों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर विवाद का हल निकाले।”

  • बीच सड़क पर फटी पानी की ज्‍वालामुखी, कॉलेज और हॉस्टल परिसर जलमग्न

    बीच सड़क पर फटी पानी की ज्‍वालामुखी, कॉलेज और हॉस्टल परिसर जलमग्न

    मैहर। मध्‍य प्रदेश के मैहर जिले के अमरपाटन में बुधवार को विकास के दावों की पोल एक बार फिर खुल गई। यहां करोड़ों की लागत से बिछाई गई बाणसागर परियोजना की पाइपलाइन अचानक बीच सड़क पर फूट गई। पानी का दबाव (प्रेशर) इतना जबरदस्त था कि सड़क पर फव्वारा फूट पड़ा और देखते ही देखते मुख्य मार्ग ने नदी का रूप ले लिया है।मामला अमरपाटन महाविद्यालय के पास का है।
    पाइपलाइन फटने से न केवल लाखों लीटर पानी बर्बाद हुआ, बल्कि पानी के तेज बहाव से पक्की सड़क करीब 4 इंच नीचे धंस गई है जिससे बड़ा हादसा होने से टला है।
    कॉलेज और हॉस्टल परिसर जलमग्न
    पाइपलाइन फूटते ही पानी की तेज धार ने आसपास के इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। पानी का बहाव पास ही स्थित शासकीय छात्रावास और महाविद्यालय परिसर की ओर मुड़ गया, जिससे वहां घुटनों तक पानी भर गया। अचानक हुए जलभराव से छात्रों और स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया। सड़क पर पानी भरने से आवागमन पूरी तरह ठप हो गया और राहगीरों को घंटों तक परेशान होना पड़ा।
    L&T कंपनी के काम पर उठे सवाल
    मौके पर पहुंचीं एसडीएम डॉ. आरती सिंह ने बताया कि यह पाइपलाइन जल निगम की ओर से L&T कंपनी द्वारा बिछाई गई थी। इतनी अहम परियोजना में पाइपलाइन का इस तरह फूटना कंपनी की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है। पानी के अंडरग्राउंड प्रेशर ने सड़क की नींव हिला दी, जिससे डामर की सड़क धंस गई। PWD को सड़क मरम्मत की सूचना दे दी गई है।
    जेसीबी बुलाकर संभाले हालात
    घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम डॉ. आरती सिंह, तहसीलदार रामदेव साकेत और थाना प्रभारी विजय सिंह परस्ते दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने तत्काल जेसीबी मशीन मंगवाई और पानी की निकासी का काम शुरू करवाया। एसडीएम ने बताया कि संबंधित कंपनी को फटकार लगाते हुए तुरंत मरम्मत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जलापूर्ति और यातायात बहाल हो सके।
  • मप्र में अब सरकारी बंगलों में नहीं चलेगा कब्जा: कई को बंगला खाली करने का नोटिस

    मप्र में अब सरकारी बंगलों में नहीं चलेगा कब्जा: कई को बंगला खाली करने का नोटिस


    भोपाल। मध्यप्रदेश में कई पूर्व मंत्री और अधिकारी सरकारी आवास खाली करने को तैयार नहीं हैं। इसे देखते हुए संपदा संचालनालय ने अब सख्ती शुरू कर दी है। सरकार ने साफ कर दिया है कि नियम सबके लिए बराबर हैं, चाहे वे अपनी ही पार्टी के बड़े नेता क्यों न हों। बिना पात्रता के सरकारी बंगलों का आनंद ले रहे पूर्व मंत्रियों, पूर्व सांसदों और आईएएस अधिकारियों को अब ‘बेदखली’ का डर सताने लगा है।
    अब सरकार ने पात्रता खत्म होने के बावजूद सरकारी बंगलों में जमे पूर्व मंत्रियों और आईएएस अफसरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के परिवार को 13 जनवरी तक बंगला खाली करने का आखिरी अल्टीमेटम दिया गया है, अन्यथा बलपूर्वक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही 4 आईएएस और कई पूर्व मंत्रियों को भी नोटिस जारी कर भारी जुर्माने की चेतावनी दी गई है।

    सरकारी बंगलों से कब्जा हटाने के लिए एक्शन
    राजधानी भोपाल के पॉश इलाकों में स्थित सरकारी बंगलों पर अवैध रूप से काबिज रसूखदारों के खिलाफ मोहन सरकार ने मोर्चा खोल दिया है। 2023 के विधानसभा चुनाव में हारने वाले पूर्व मंत्रियों और कार्यकाल पूरा कर चुके पूर्व सांसदों ने अभी तक अपने सरकारी आवास नहीं छोड़े हैं। अब सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय समय पर बंगले खाली नहीं हुए, तो पुलिस बल का प्रयोग कर सामान बाहर कर दिया जाएगा।

    प्रभात झा के परिवार को 13 जनवरी तक का अल्टीमेटम
    बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के परिवार को 74 बंगले स्थित बी-टाइप आवास खाली करने के लिए 13 जनवरी तक का समय दिया गया है।

    नोटिस में साफ कहा गया है कि इस तारीख के बाद प्रशासन ‘बल प्रयोग’ करेगा। हालांकि, उनके बेटे तुशमुल झा का कहना है कि वे खुद ही बंगला खाली करने की प्रक्रिया में हैं और यह एक सहज प्रक्रिया है।

    पूर्व मंत्री रामपाल सिंह को नोटिस
    इधर, पूर्व मंत्री रामपाल सिंह 2023 में चुनाव हार गए थे, लेकिन 2 साल बाद भी उन्होंने लिंक रोड-1 स्थित अपना सरकारी बंगला (C-15) खाली नहीं किया है। इस मामले में उनका कहना है कि उन्होंने सरकार से थोड़ा समय और मांगा है।

    पद नहीं फिर भी सरकारी आवास पर डेरा
    मध्यप्रदेश में नेताओं की कुर्सी तो चली गई, लेकिन नेता सरकारी बंगलों का मोह नहीं त्याग पा रहे हैं। पूर्व राजस्व मंत्री रामपाल सिंह, पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा और पूर्व सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया जैसे दिग्गज नेता 2023 का विधानसभा चुनाव हार चुके हैं, लेकिन करीब दो साल बीत जाने के बाद भी इन्होंने सरकारी बंगलों पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। यही हाल पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया का है, जो वर्तमान में विधायक भी नहीं हैं, फिर भी मंत्री रहते आवंटित हुए आवास में रह रही हैं। भोपाल की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की स्थिति भी अलग नहीं है; संसद की सदस्यता खत्म होने के बाद भी उन्होंने सरकारी बंगला खाली नहीं किया है।

    सरकार सख्त, कब्जेदारों को नोटिस
    संपदा संचालनालय के मुताबिक, कार्रवाई की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के परिवार को 6 जनवरी को ही नोटिस थमाया जा चुका है, वहीं रामपाल सिंह को भी पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है।

    मोहन सरकार ने अब कड़ा रुख अख्तियार करते हुए साफ कर दिया है कि पात्रता खत्म होने के बाद सरकारी आवास पर किसी भी तरह का ‘अवैध कब्जा’ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियम स्पष्ट हैं—पद गया, तो बंगला भी छोड़ना होगा।

    30 गुना तक किराया वसूलने को मंजूरी
    विधि विभाग ने सख्त नियम लागू करते हुए भारी-भरकम किराए की वसूली को मंजूरी दे दी है। नियमों के मुताबिक, पात्रता खत्म होने के शुरुआती तीन महीनों तक तो सामान्य किराया लगेगा, लेकिन इसके बाद भी बंगला खाली नहीं हुआ तो अगले तीन महीनों के लिए 10 गुना किराया वसूला जाएगा। जब छह महीने बाद भी कब्जा बरकरार रहा, ऐसी स्थिति में रसूखदारों को 30 गुना ज्यादा हर्जाना भरना होगा। सरकार के मकसद साफ है—या तो समय से बंगला खाली कर दें, वरना लाखों के जुर्माने के लिए तैयार रहें।

    IAS अफसरों पर भी गिरी गाज
    प्रशासन ने सुधीर कोचर, अदिति गर्ग, रत्नाकर झा और निधि सिंह समेत 4 आईएएस और 3 अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी बेदखली का नोटिस थमाया है।

    विधायक रह रहे मंत्रियों वाले बंगलों में
    सांची विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी, भूपेंद्र सिंह, गोपाल भार्गव और मीना सिंह जैसे विधायक पात्रता से ऊपर की श्रेणी (B और C टाइप) के बंगलों में रह रहे हैं।

  • आशिया से अंशिका को बनी मुस्लिम युवती, मोनू से मंदिर में रचाई शादी

    आशिया से अंशिका को बनी मुस्लिम युवती, मोनू से मंदिर में रचाई शादी

    बरेली। उत्‍तरप्रदेश के बरेली जिले में प्यार की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जहां आशिया खान नाम की एक युवती अपने प्यार को पाने के लिए अंशिका बन गई। पूरा मामला कस्बा मीरगंज का बताया जा रहा है। मीरगंज की रहने वाले आशिया खान ने अपने प्रेमी मोनू के साथ बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम में जाकर हिंदू रीति-रिवाज से शादी कर ली। आशिया खान ने अपना नाम परिवर्तित करने के साथ ही धर्म भी परिवर्तित कर लिया है।
    आशिया ने हमेशा के लिए इस्लाम धर्म को छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया है। इसके लिए बाकायदा आशिया का शुद्धिकरण भी कराया गया।

    मेले में हुई थी दोनों की मुलाकात
    दरअसल, आशिया से अंशिका बनी युवती ने बताया कि उसकी मुलाकात मेले में मोनू से हुई और फिर दोनों ने मोबाइल नंबर एक्सचेंज किया। दोनों के बीच बात होती रही और फिर बातचीत होते-होते दोनों के बीच प्यार हो गया।

    अब दोनों ने शादी भी रचा ली है। दोनों ने कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम में जाकर हिंदू रीति रिवाज के अनुसार शादी कर ली। युवती ने बताया कि वह पिछले 4 सालो से सनातन धर्म को मानती थी और मंदिर भी जाती थी। मोनू से मुलाकात के बाद से ही वह हिंदू धर्म के रीति रिवाजों को मानने लगी थी।
    सहमति से शादी करने का लिया फैसला

    युवती ने बताया वह कुल मिलाकर 6 भाई-बहन हैं, जिसमें चार भाई और दो बहनें हैं। उसने कहा कि मैं मोनू के साथ अपनी मर्जी से शादी करना चाहती हूं। किसी ने कोई डराया-धमकाया नहीं है। मेरी इनसे मुलाकात भोजीपुरा के एक मेले में हुई थी।

    भोजीपुरा क्षेत्र में हमारी एक बहन रहती हैं, उनके घर पर आना जाना था। वहीं पर मेला घूमने गए थे। पहली ही नजर में प्यार हो गया और एक-दूसरे का नंबर हम लोगों ने ले लिया था। फिर बात होने लगी फिर धीरे-धीरे मुलाकात हुई और प्यार हो गया। फिर हम दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया।
    हिंदू रीति-रिवाज से कराई गई शादी

    बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम में दोनों की हिंदू रीति-रिवाज के साथ शादी संपन्न कराई गई। यहां आश्रम के पंडित ने पहले लड़की का शुद्धिकरण कराया। उसे गंगाजल व गौमूत्र पान के साथ गायत्री मंत्र का जाप कराया। इसके बाद हिंदू रीति-रिवाज से दोनों की मंदिर में शादी संपन्न कराई गई। दोनों का कहना है कि वह आपसी सहमति से शादी रचा रह हैं।

  • पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाएं…. कई राज्यों में दिन में भी कांप रहे लोग.. यहां पारा 0 से नीचे

    पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाएं…. कई राज्यों में दिन में भी कांप रहे लोग.. यहां पारा 0 से नीचे


    नई दिल्ली।
    हिमालयी राज्यों (Himalayan states) से आ रही बर्फीली हवाओं (Icy winds) ने मैदानी राज्यों को सर्द बनाया हुआ है। जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir), हिमाचल, उत्तराखंड में अधिकतर स्थानों पर तापमान शून्य से नीचे (Temperature below zero) बना हुआ है। वहीं, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा समेत सभी मैदानी राज्य शीतलहर से कांप रहे हैं। कुछ राज्यों में शुक्रवार को हल्की बारिश भी हुई। इसके बाद गलन वाली ठंड का अहसास हुआ।

    इस बीच मौसम विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि अगले 5-7 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत और बिहार में और अगले 2-3 दिनों के दौरान मध्य भारत, पूवोत्तर भारत और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के अलग-अलग हिस्सों में सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने की बहुत संभावना है। इसके अलावा, अगले 2-3 दिनों के दौरान राजस्थान, पंजाब, हररयाणा, चंडीगढ़, बिहार और मध्य प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में शीतलहर की स्थिति रहने की संभावना है।

    मौसम विभाग के मुताबिक, 10 और 11 तारीख को हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हररयाणा, चंडीगढ़, ओडिशा, उत्तरी कर्नाटक में; 10 तारीख को उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार में और 11-14 जनवरी के दौरान राजस्थान में शीत लहर की स्थिति रहने की बहुत अधिक संभावना है।

    मौसम विभाग का कहना है कि अगले 7 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत और पूर्वी भारत में न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव होने की संभावना नहीं है। वहीं, अगले 24 घंटों के दौरान मध्य भारत और महाराष्ट्र में न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव की संभावना नहीं है। हालांकि इसके बाद अगले 4 दिनों में धीरे-धीरे 2-3°C की बढ़ोतरी दिखेगी।


    हरियाणा के कई इलाकों में बारिश
    शुक्रवार को हरियाणा में गुरुग्राम और फरीदाबाद के अलावा पानीपत, भिवानी और झज्जर में हल्की बारिश हुई। कई स्थानों पर न्यूनतम तापमान में पांच डिग्री तक गिर गया। शनिवार को भी 17 जिलों में शीतलहर चलने की चेतावनी जारी की गई है। उधर, राजस्थान के अनेक इलाकों में शीतलहर का दौर जारी है और बीते चौबीस घंटे में कई जगह हल्की बारिश दर्ज की गई।

    मौसम विभाग के अनुसार, 24 घंटों के दौरान राज्य में कहीं कहीं हल्की बारिश दर्ज की गयी। साथ ही राज्य के कुछ भागों में घना से अति घना कोहरा, शीत लहर व अति शीत दिन दर्ज किये गए। सर्वाधिक बारिश झुंझुनू में 5.0 मिलीमीटर हुई। इस दौरान अधिकतम तापमान जवाई बांध (पाली) में 24.4 डिग्री जबकि न्यूनतम तापमान जैसलमेर में 4.6 डिग्री दर्ज किया गया। राज्य में आगामी एक सप्ताह मौसम शुष्क रहने तथा आगामी 1-2 दिन राज्य के कुछ भागों में सुबह के समय अति घना कोहरा छाए रहने की संभावना है।


    चंडीगढ़ में 13 जनवरी तक स्कूल बंद
    चंडीगढ़ में लगातार बढ़ती ठंड और प्रतिकूल मौसम को देखते हुए शिक्षा विभाग ने सर्दी की छुट्टियां 13 जनवरी तक बढ़ा दी हैं। आदेश के अनुसार पहली से आठवीं कक्षा तक के छात्रों के साथ नॉन-बोर्ड 9वीं और 11वीं की पढ़ाई ‘फिजिकल मोड’ में नहीं होगी


    बंगाल की खाड़ी में गहरा दबाव
    दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना गहरा दबाव उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर लगातार बढ़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार यह मौसम प्रणाली पिछले छह घंटों के दौरान लगभग 10 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से आगे बढ़ी है। यह मौसम प्रणाली आगे भी उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ती रहेगी। शनिवारदोपहर इसके त्रिंकोमाली और जाफना के बीच उत्तरी श्रीलंका तट को पार करने की प्रबल संभावना है।


    हरियाणा और पंजाब के कई इलाकों में भयंकर सर्दी
    हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्सों में शुक्रवार को तापमान पांच डिग्री सेल्सियस से नीचे गिर गया। मौसम विभाग ने बताया कि सिरसा, नारनौल, करनाल, भिवानी, हिसार और रोहतक में तापमान छह डिग्री से कम रहा। अंबाला में न्यूनतम तापमान 6.4 डिग्री और फरीदाबाद में 6.8 डिग्री रहा। पंजाब में बठिंडा, गुरदासपुर, अमृतसर, लुधियाना, फरीदकोट, पटियाला में न्यूनतम तापमान सात से चार डिग्री तक रहा। दोनों राज्यों की राजधानी चंडीगढ़ में न्यूनतम तापमान 6.1 डिग्री सेल्सियस रहा।

    कश्मीर: भीषण ठंड का प्रकोप जारी
    कश्मीर में तापमान हिमांक बिंदु से कई डिग्री नीचे गिरने के कारण श्रीनगर में इस मौसम की सबसे ठंडी रात दर्ज की गई, जिससे शुक्रवार को स्थानीय डल झील के कुछ हिस्से जम गए। न्यूनतम तापमान श्रीनगर में -6, पहलगाम में -7.6, गुलमर्ग में -7.2, सोनमर्ग में -5.4, काजीगुंड में -6.2, कोकेरनाग में -3.2 और कुपवाड़ा में -5.8 डिग्री रहा। 21 जनवरी तक मौसम शुष्क रहने के साथ आसमान में बादल छाए रहने की संभावना जताई है।

    छत्तीसगढ़ : 28 दिन में ठंड से तीन की मौत
    छत्तीसगढ़ में हिमालय क्षेत्र से आ रही सर्द हवाओं के असर से कड़ाके की ठंड पड़ रही है। मौसम विभाग ने अगले दो दिन तक 18 जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी किया गया है। गुरुवार रात कोरबा जिले के सरई सिंगार निवासी 55 वर्षीय हरप्रसाद भैना की ठंड लगने से मौत हो गई। उनका शव कसईपाली स्थित यात्री प्रतीक्षालय में मिला। पिछले 28 दिनों के भीतर राज्य में ठंड से तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।


    लद्दाख कड़ाके की ठंड की गिरफ्त में
    केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख इन दिनों शीत लहर के साथ कड़ाके की ठंड की गिरफ्त में है। न्यूनतम तापमान द्रास में -24.6, लेह में -14.4, कारगिल में -13.2, पदुम में -20.3, न्योमा में -21.6 डिग्री रहा। विभाग के अनुसार 10 जनवरी तक न्यूनतम तापमान में काफी गिरावट आने का अनुमान है।

  • केवल दिल्ली ही नही, वायु प्रदूषण की चपेट में देश के 40 फीसदी शहर, देखें टॉप-10 की लिस्ट

    केवल दिल्ली ही नही, वायु प्रदूषण की चपेट में देश के 40 फीसदी शहर, देखें टॉप-10 की लिस्ट


    नई दिल्ली।
    सिर्फ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (National Capital Delhi) ही नहीं बल्कि देश (India) के लगभग 44% शहर लंबे समय से वायु प्रदूषण (44% Cities Affected Air Pollution) की चपेट में हैं, जो इस बात का संकेत है कि यह समस्या अल्पकालिक घटनाओं के बजाय उत्सर्जन स्रोतों से लगातार जारी उत्सर्जन का नतीजा है। ऊर्जा एवं स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (CREA)की हालिया विश्लेषण रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गयी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय से वायु प्रदूषण का सामना कर रहे लगभग 44 फीसदी शहरों में से महज चार प्रतिशत राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के दायरे में आते हैं।

    CREA ने उपग्रह डेटा की मदद से भारत के 4,041 शहरों में पीएम 2.5 कणों के स्तर का आकलन किया है। इसकी रिपोर्ट के मुताबिक, “इन 4,041 शहरों में से कम से कम 1,787 शहरों (करीब 44%) में पीएम2.5 कणों का स्तर हाल के पांच वर्षों (2019, 2021, 2022, 2023 और 2024) में हर साल राष्ट्रीय वार्षिक मानक से अधिक दर्ज किया गया, जिनमें कोविड-19 से प्रभावित वर्ष 2020 शामिल नहीं है। इसका मतलब है कि लगभग 44 फीसदी भारतीय शहर लंबे समय से वायु प्रदूषण का सामना कर रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि यह समस्या अल्पकालिक घटनाओं के बजाय उत्सर्जन स्रोतों से लगातार जारी उत्सर्जन का नतीजा है।”

    सर्वाधिक दस प्रदूषित शहर कौन-कौन?
    रिपोर्ट में वर्ष 2025 में पीएम2.5 कणों के स्तर के आकलन के आधार पर बायर्नीहाट (असम), दिल्ली और गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) को भारत के तीन सर्वाधिक प्रदूषित शहर करार दिया गया, जहां वार्षिक सांद्रता क्रमशः 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर³, 96 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और 93 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में नोएडा चौथे, गुरुग्राम पांचवें, ग्रेटर नोएडा छठे, भिवाड़ी सातवें, हाजीपुर आठवें, मुजफ्फरनगर नौवें और हापुड़ दसवें स्थान पर है।


    NCAP के अंतर्गत केवल 130 शहर

    रिपोर्ट में कहा गया है, “इसके बावजूद वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए भारत की प्रमुख एनसीएपी योजना के दायरे में लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे महज चार फीसदी शहर आते हैं। एनसीएपी के अंतर्गत केवल 130 शहरों को शामिल किया गया है और इनमें से केवल 67 शहर ही उन 1,787 शहरों में शामिल हैं, जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से निर्धारित राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (एनएएक्यूएस) पर खरा उतरने में लगातार कई वर्षों से विफल साबित हो रहे हैं।”


    मानकों का उल्लंघन करने वाले शहरों में सर्वाधिक UP में

    रिपोर्ट में कहा गया है कि एनएएक्यूएस के मानकों का लगातार उल्लंघन करने वाले शहरों में सर्वाधिक 416 शहर उत्तर प्रदेश के हैं। इसमें कहा गया है कि राजस्थान के 158, गुजरात के 152, मध्यप्रदेश के 143, पंजाब के 136, बिहार के 136 और पश्चिम बंगाल के 124 शहर एनएएक्यूएस के मानकों पर खरा उतरने में विफल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एनसीएपी में शामिल 130 शहरों में से 28 में अभी भी व्यापक वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (सीएएएक्यूएमएस) मौजूद नहीं हैं, जबकि सीएएएक्यूएमएस से लैस 102 शहरों में से 100 शहरों में पीएम10 का स्तर 80 फीसदी या उससे अधिक दर्ज किया गया है।

    इसमें कहा गया है, “पीएम10 उत्सर्जन पर लगाम लगाने के मोर्चे पर प्रगति मिली-जुली रही है। 23 शहरों ने पीएम10 के स्तर में कमी का संशोधित 40 फीसदी लक्ष्य हासिल कर लिया है, 28 शहरों में 21-40 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, 26 शहरों में 1-20 प्रतिशत का मामूली सुधार हुआ है, जबकि 23 शहरों में कार्यक्रम की शुरुआत के बाद से पीएम10 के स्तर में वास्तव में वृद्धि हुई है।”


    पीएम10 कणों के मामले में दिल्ली शीर्ष पर

    रिपोर्ट में कहा गया है, “पीएम10 कणों के मामले में दिल्ली शीर्ष पर है, जहां वार्षिक औसत स्तर 197 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया है, जो राष्ट्रीय मानक से तीन गुना है। गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा इस मामले में दूसरे और तीसरे पायदान पर हैं, जहां पीएम10 कणों का वार्षिक औसत स्तर क्रमश: 190 और 188 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा है।” इसमें कहा गया है कि सबसे ज्यादा पीएम10 सांद्रता वाले शीर्ष 50 शहरों में राजस्थान के सर्वाधिक 18 शहर शामिल हैं, जिसके बाद उत्तर प्रदेश (10), मध्यप्रदेश (5), बिहार (4) और ओडिशा (4) का स्थान आता है।


    पीएम2.5 के स्तर में कमी लाने को प्राथमिकता
    सीआरईए के भारत विश्लेषक मनोज कुमार के मुताबिक, लक्षित और विज्ञान-आधारित सुधारों के जरिये देश में वायु गुणवत्ता प्रबंधन को मजबूत करना ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता हो सकता है। उन्होंने कहा, “इसका मतलब यह है कि पीएम10 की तुलना में पीएम2.5 और इसकी पूर्ववर्ती गैसों (सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड) के स्तर में कमी लाने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, एनसीएपी के तहत मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले शहरों की सूची को संशोधित किया जाना चाहिए, उद्योगों एवं बिजली संयंत्रों के लिए सख्त उत्सर्जन मानक निर्धारित किए जाने चाहिए, स्रोत विभाजन अध्ययनों के आधार पर धन आवंटित किया जाना चाहिए तथा क्षेत्रीय स्तर पर वायु प्रदूषण से निपटने के लिए वायुक्षेत्र-आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।”


    सड़क पर धूल प्रबंधन पर सबसे ज्यादा 68 फीसदी राशि खर्च
    रिपोर्ट में कहा गया है कि एनसीएपी की शुरुआत से लेकर अब तक इस कार्यक्रम और 15वें वित्त आयोग के अनुदान के तहत 13,415 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं, जिनमें से 9,929 करोड़ रुपये (74 फीसदी) का इस्तेमाल किया जा चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, सड़क पर धूल प्रबंधन पर सबसे ज्यादा 68 फीसदी राशि खर्च की गई है। इसमें कहा गया है कि परिवहन प्रबंधन पर 14 प्रतिशत, अपशिष्ट एवं जैव ईंधन के इस्तेमाल पर रोक लगाने पर 12 प्रतिशत, उद्योगों, घरेलू ईंधन उपयोग, जन जागरूकता अभियान संबंधी उपायों पर एक-एक प्रतिशत से कम और क्षमता निर्माण एवं निगरानी पर तीन प्रतिशत राशि खर्च की गई है।

  • संसद का Budget सत्र 28 जनवरी से होगा शुरू,  बजट Day पर सस्पेंस बरकरार

    संसद का Budget सत्र 28 जनवरी से होगा शुरू, बजट Day पर सस्पेंस बरकरार

    नई दिल्ली। बजट सत्र (Budget Session) के शुरू किए जाने की तारीख को लेकर सस्पेंस खत्म हो गया है। सरकार द्वारा मंजूर किए गए एक प्रस्ताव के अनुसार संसद का बजट सत्र (Parliament’s Budget session) 28 जनवरी से 2 अप्रैल, 2026 तक दो चरणों में होगा। सत्र का पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा, जिसके बाद अवकाश होगा। संसद के दूसरे चरण की शुरुआत 9 मार्च को होगी और 2 अप्रैल को समापन होगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी है।


    बजट-डे पर सस्पेंस बरकरार

    हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि आम बजट एक फरवरी को ही पेश किया जाएगा या नहीं लेकिन मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि इसी तारीख को बजट पेश होगा। दरअसल, देश का आम बजट आगामी एक फरवरी को ही पेश किया जाता रहा है लेकिन इस बार इस तारीख को रविवार है। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि रविवार के दिन बजट पेश किया जाएगा या नहीं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के सोशल मीडिया पोस्ट में भी जिक्र नहीं है।

    बजट सत्र के दौरान पहले दिन दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति का अभिभाषण होता है और उसके बाद आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों की परंपरा के अनुसार, इसके अगले दिन एक फरवरी को बजट पेश किया जाता है। पहले चरण में राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर और बजट पर चर्चा होती है। इसके बाद अवकाश के दौरान संसद की समितियां बजट पर मंत्रालय-वार विस्तृत चर्चा करती हैं। दूसरे चरण में वित्त विधेयक और अनुदान मांगों पर चर्चा होती है और उन्हें पारित किया जाता है।