Category: Religious Astrology

  • सुबह 4 से 5:30 बजे के बीच इन कामों से रहें दूर, ब्रह्म मुहूर्त को लेकर शास्त्रों में बताई गई खास मान्यताएं

    सुबह 4 से 5:30 बजे के बीच इन कामों से रहें दूर, ब्रह्म मुहूर्त को लेकर शास्त्रों में बताई गई खास मान्यताएं


    नई दिल्ली। सनातन धर्म और ज्योतिषीय मान्यताओं में ब्रह्म मुहूर्त को दिन का बेहद पवित्र और शुभ समय माना गया है। मान्यता है कि इस दौरान वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा रहती है और व्यक्ति का मन भी अपेक्षाकृत शांत रहता है। यही वजह है कि इस समय पूजा पाठ ध्यान और मंत्र जाप करने को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में दिन की शुरुआत जिस तरह के विचारों और कार्यों से होती है उसका प्रभाव पूरे दिन की मानसिक स्थिति और व्यवहार पर पड़ सकता है। हालांकि कुछ ऐसे कार्य भी बताए गए हैं जिन्हें इस समय करने से बचना चाहिए।

    आम तौर पर ब्रह्म मुहूर्त का समय सुबह करीब 4 बजे से 5:30 बजे के बीच माना जाता है। हालांकि सूर्योदय के समय में होने वाले बदलाव के कारण इसका वास्तविक समय स्थान और मौसम के अनुसार अलग हो सकता है। धार्मिक परंपराओं में इसे जागने ध्यान करने और ईश्वर का स्मरण करने के लिए उपयुक्त समय माना गया है। ऐसे में इस दौरान मन को शांत रखने और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

    ब्रह्म मुहूर्त में भोजन से बचने की मान्यता

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में उठने के तुरंत बाद भोजन करने से बचना चाहिए। इस समय को पूजा ध्यान और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए उपयुक्त माना जाता है। परंपरा के अनुसार व्यक्ति को पहले दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर ध्यान और ईश्वर स्मरण करना चाहिए। हालांकि स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतों में व्यक्तिगत परिस्थिति को प्राथमिकता देना जरूरी है।

    किसी के साथ बुरा व्यवहार न करें

    ब्रह्म मुहूर्त में किसी का अपमान करने या कटु व्यवहार करने से भी बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं में माना जाता है कि सुबह का समय मन को सकारात्मक दिशा देने का अवसर होता है। इसलिए इस दौरान क्रोध विवाद और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाकर रखना बेहतर माना जाता है। शांत मन से दिन की शुरुआत करने से व्यक्ति पूरे दिन अधिक संतुलित रहने की कोशिश कर सकता है।

    प्रणय संबंध से जुड़ी धार्मिक मान्यता

    कुछ धार्मिक मान्यताओं में ब्रह्म मुहूर्त को आध्यात्मिक साधना और ईश्वर के ध्यान के लिए समर्पित समय माना गया है। इसी कारण इस समय प्रणय संबंध बनाने से बचने की बात कही गई है। परंपरा में सलाह दी जाती है कि नींद खुलने के बाद सबसे पहले भगवान का स्मरण और अपने दिन की सकारात्मक शुरुआत पर ध्यान दिया जाए।

    हथेलियों के दर्शन के साथ मंत्र जाप

    ब्रह्म मुहूर्त में जागने के बाद हथेलियों के दर्शन करते हुए एक पारंपरिक मंत्र का जाप करने की मान्यता है। मंत्र है ओम कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती करमूले तु गोविंद प्रभाते कर दर्शनम्। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस मंत्र के माध्यम से व्यक्ति अपने दिन की शुरुआत लक्ष्मी सरस्वती और भगवान विष्णु के स्मरण से करता है। इसे शुभ और सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

    हनुमान चालीसा का पाठ भी माना जाता है शुभ

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में हनुमान चालीसा का पाठ करने से मन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिलती है। हनुमान जी को संकटमोचक और भय का नाश करने वाला माना जाता है। परंपरा में हनुमान जी की आराधना से पहले भगवान राम का नाम लेने को भी विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि राम नाम के स्मरण के साथ हनुमान जी की पूजा करने से भक्त के मन में भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

  • 12 अगस्त का राशिफल: सूर्य ग्रहण के बीच किसकी चमकेगी किस्मत और कौन रहे सावधान, पढ़ें सभी 12 राशियों का भविष्यफल

    12 अगस्त का राशिफल: सूर्य ग्रहण के बीच किसकी चमकेगी किस्मत और कौन रहे सावधान, पढ़ें सभी 12 राशियों का भविष्यफल


    नई दिल्ली। 12 अगस्त 2026 का दिन ग्रहों की स्थिति और सूर्य ग्रहण के प्रभाव के कारण कई राशियों के लिए खास रहने वाला है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार कुछ राशि के जातकों को जहां करियर कारोबार और आर्थिक मामलों में अच्छे अवसर मिल सकते हैं वहीं कुछ लोगों को जल्दबाजी फैसलों और लेनदेन में विशेष सावधानी बरतनी होगी। इस दिन अपनी बात स्पष्ट तरीके से रखने वादों को पूरा करने और करीबियों का भरोसा बनाए रखने पर विशेष जोर देना होगा। आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का दिन कैसा रहेगा और किस राशि को किन बातों का ध्यान रखना होगा।

    मेष राशि के जातकों के लिए दिन सामान्य रहने वाला है। घर परिवार में हल्की भावनात्मक असहजता बनी रह सकती है लेकिन जरूरी सुविधाओं को जुटाने पर ध्यान रहेगा। भौतिक वस्तुओं की खरीदारी के योग बन सकते हैं। पारिवारिक मामलों में स्पष्टता बनाए रखें और अनावश्यक बहस से बचें। सत्ता और प्रशासन से जुड़े कामों में गति आ सकती है। परीक्षा या महत्वपूर्ण कार्य में धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा। शुभ अंक 3 और 9 हैं।

    वृष राशि वालों के लिए सामाजिक संपर्क और संवाद के जरिए नए अवसर बन सकते हैं। लोगों के साथ बेहतर तालमेल काम को आसान बनाएगा। परिवार और निजी रिश्तों को समय देंगे। स्वजनों के साथ किसी तरह के आरोप प्रत्यारोप से बचना बेहतर रहेगा। तार्किक सोच और संतुलित व्यवहार से दिन को बेहतर बनाया जा सकता है। शुभ अंक 3 5 और 6 हैं।

    मिथुन राशि के जातक अपनी वाणी और व्यवहार से लोगों को प्रभावित करेंगे। आत्मविश्वास बढ़ेगा और परिवार में सुखद समाचार मिलने की संभावना है। घर में उत्सव जैसा माहौल बन सकता है। रिश्तेदारों और करीबियों के साथ मधुरता बढ़ेगी। निजी मामलों में सकारात्मकता बनी रहेगी। शुभ अंक 3 5 और 6 हैं।

    कर्क राशि के लिए दिन सकारात्मक रहने वाला है। नई सोच को बढ़ावा मिलेगा और महत्वपूर्ण मामलों में करीबियों का सहयोग प्राप्त होगा। विरोधियों की सक्रियता कम रहेगी। मुलाकात और बातचीत में आपका प्रभाव बना रहेगा। मान सम्मान बढ़ सकता है और घर का वातावरण सुखद रहेगा। शुभ अंक 2 3 5 और 6 हैं।

    सिंह राशि के जातकों को इस दिन विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी। आर्थिक खर्च बढ़ सकता है और जल्दबाजी में कोई फैसला नुकसान पहुंचा सकता है। निवेश से जुड़े प्रस्तावों को अच्छी तरह जांचने के बाद ही आगे बढ़ें। न्यायिक मामलों और लेनदेन में लापरवाही से बचें। विदेश से जुड़े कार्यों में रुचि बढ़ सकती है लेकिन जिद और अहंकार से दूर रहना जरूरी होगा। अपने वचन का पालन करें।

    कन्या राशि वालों के लिए करियर और कारोबार के लिहाज से दिन अच्छा रह सकता है। महत्वपूर्ण गतिविधियों में तेजी आएगी और वित्तीय अवसरों का लाभ उठाने की स्थिति बनेगी। पेशेवर लोगों से संपर्क बढ़ेगा। कार्यक्षेत्र में साख और प्रभाव मजबूत होगा। लेनदेन में पारदर्शिता रखें और कामकाजी यात्रा के योग बन सकते हैं। शुभ अंक 3 5 और 6 हैं।

    तुला राशि के जातकों को पेशेवरों और अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है। प्रशासनिक मामलों में प्रदर्शन बेहतर रहेगा। कारोबार से जुड़े प्रस्तावों को समर्थन मिलने के संकेत हैं। परीक्षा और प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। कार्यक्षेत्र में अधिक समय देने से आय में बढ़ोतरी के रास्ते खुलेंगे। शुभ अंक 3 5 और 6 हैं।

    वृश्चिक राशि के जातक धार्मिक कार्यों और आयोजनों से जुड़ सकते हैं। कारोबारी चर्चाओं में सक्रियता बढ़ेगी और पद प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में सफलता मिल सकती है। वरिष्ठों की सलाह उपयोगी साबित होगी। सरकारी मामलों में भी राहत मिलने के संकेत हैं। सूझबूझ और सामंजस्य के साथ आगे बढ़ें। शुभ अंक 3 6 और 9 हैं।

    धनु राशि वालों को इस दिन विशेष सतर्क रहना होगा। किसी भी काम में जल्दबाजी के बजाय सूझबूझ और धैर्य से आगे बढ़ें। ठगी करने वाले लोगों और संदिग्ध प्रस्तावों से दूरी बनाए रखें। परिवार का सहयोग मिलेगा। कार्य विस्तार की योजनाएं आगे बढ़ सकती हैं लेकिन किसी भी निर्णय से पहले तथ्यों की जांच जरूर करें। अपनी बात स्पष्ट रखें और वादे पूरे करें।

    मकर राशि के जातकों के लिए महत्वपूर्ण चर्चा में पहल करने का समय है। नए लोगों से संपर्क बढ़ेगा और आपसी सहयोग से काम आगे बढ़ेंगे। लाभ की स्थिति मजबूत हो सकती है। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें और वरिष्ठ लोगों का मार्गदर्शन लेते रहें। शुभ अंक 5 6 और 8 हैं।

    कुंभ राशि वालों को कार्यक्षेत्र में अनुशासन और समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा। छोटी सी लापरवाही भी काम बिगाड़ सकती है। करियर और कारोबार में अपनी कला और कौशल का बेहतर इस्तेमाल करें। पेशेवर लोगों से संबंध मजबूत होंगे। व्यवहार में विनम्रता बनाए रखना सफलता के लिए जरूरी रहेगा। शुभ अंक 2 3 5 और 8 हैं।

    मीन राशि के जातकों के जरूरी काम गति पकड़ सकते हैं। मित्रों के सहयोग से आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे और कोई शुभ सूचना मिल सकती है। प्रस्तावों को समर्थन मिलने के संकेत हैं। बजट के अनुसार आगे बढ़ना फायदेमंद रहेगा। कारोबार और व्यवस्था में सुधार आएगा। विरोधियों की सक्रियता कम होगी। स्मार्ट वर्किंग और तथ्यों पर आधारित निर्णय लेने से लाभ मिलेगा। शुभ अंक 3 6 और 9 हैं।

    सूर्य ग्रहण के इस विशेष दिन सभी राशि के जातकों के लिए संयमित व्यवहार और सकारात्मक सोच बनाए रखना महत्वपूर्ण रहेगा। धार्मिक आस्था रखने वाले लोग भगवान गणेश की पूजा कर उन्हें पान और मोदक अर्पित कर सकते हैं तथा ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप कर सकते हैं। हालांकि राशिफल को सामान्य ज्योतिषीय संकेत के तौर पर ही लेना चाहिए और महत्वपूर्ण आर्थिक या व्यक्तिगत निर्णय वास्तविक परिस्थितियों और उचित सलाह के आधार पर लेने चाहिए।

  • वास्तु के ये आसान उपाय घर में ला सकते हैं सुख समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा जानें किन बातों का रखें ध्यान

    वास्तु के ये आसान उपाय घर में ला सकते हैं सुख समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा जानें किन बातों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और वहां रखी वस्तुओं का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि घर में मौजूद सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का असर परिवार के सदस्यों के जीवन पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि लोग घर बनवाने से लेकर सामान रखने तक वास्तु के नियमों का ध्यान रखते हैं। हालांकि वास्तु से जुड़े उपाय धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। फिर भी कई लोग मानसिक शांति और घर के वातावरण को बेहतर बनाए रखने के लिए इन नियमों का पालन करते हैं।

    वास्तु के अनुसार घर का मुख्य द्वार सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से एक माना जाता है। मुख्य दरवाजे के आसपास साफ सफाई रखना शुभ माना जाता है। दरवाजे के सामने कूड़ा कबाड़ या अनावश्यक सामान रखने से बचना चाहिए। मान्यता है कि साफ और व्यवस्थित प्रवेश द्वार घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाता है। सुबह के समय मुख्य द्वार और उसके आसपास की जगह को साफ रखना भी अच्छा माना जाता है।

    घर के उत्तर पूर्व यानी ईशान कोण को वास्तु में विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता के अनुसार इस दिशा को पूजा और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए उपयुक्त माना जाता है। यदि घर में पूजा स्थान बनाया जा रहा है तो उसे साफ और शांत जगह पर रखना बेहतर माना जाता है। पूजा घर के आसपास भारी सामान जमा करने से बचने की सलाह दी जाती है।

    वास्तु में रसोई की दिशा को भी महत्वपूर्ण माना गया है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार दक्षिण पूर्व दिशा को रसोई के लिए उपयुक्त माना जाता है। रसोई में साफ सफाई रखने और गैस चूल्हे के आसपास अनावश्यक सामान नहीं रखने की सलाह दी जाती है। भोजन बनाने और रखने की जगह व्यवस्थित होने से घर का वातावरण भी साफ सुथरा बना रहता है।

    सोने के कमरे को लेकर भी कई वास्तु नियम बताए जाते हैं। मान्यता है कि सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर रखना बेहतर होता है। वहीं कमरे में बहुत ज्यादा सामान रखने से बचना चाहिए। बिस्तर के आसपास अव्यवस्था रहने से मानसिक बेचैनी बढ़ सकती है। इसलिए कमरे को साफ और व्यवस्थित रखना अच्छी आदत मानी जाती है।

    घर में टूटे हुए सामान को लंबे समय तक संभालकर रखना भी वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना जाता। बंद घड़ी टूटे शीशे खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान और बेकार वस्तुओं को घर से हटाने की सलाह दी जाती है। इससे घर व्यवस्थित रहता है और अनावश्यक सामान के कारण होने वाली अव्यवस्था भी कम होती है।

    वास्तु में पौधों को भी सकारात्मक वातावरण से जोड़कर देखा जाता है। घर में हरे पौधे लगाने से वातावरण सुंदर और ताजा दिखाई देता है। हालांकि पौधों को रखने की जगह का चुनाव करते समय उनकी धूप और पानी की जरूरत का ध्यान रखना भी जरूरी है।

    घर में पर्याप्त रोशनी और हवा का आना भी बेहद जरूरी है। खिड़कियां बंद रखने और घर में अंधेरा बनाए रखने के बजाय दिन के समय प्राकृतिक रोशनी और हवा को अंदर आने देना चाहिए। इससे घर का वातावरण अधिक आरामदायक और खुशनुमा बना रह सकता है।

    कुल मिलाकर वास्तु के नियमों का मुख्य उद्देश्य घर को व्यवस्थित शांत और सकारात्मक बनाए रखना माना जाता है। साफ सफाई सही दिशा में सामान की व्यवस्था पर्याप्त रोशनी और प्राकृतिक हवा जैसी अच्छी आदतें किसी भी घर के वातावरण को बेहतर बना सकती हैं। वास्तु उपायों को अपनाते समय अपनी सुविधा और व्यावहारिक जरूरतों का भी ध्यान रखना जरूरी है।

  • हनुमान जी को चोला चढ़ाते समय न करें ये गलतियां, जानें क्या चढ़ाएं और किन बातों का रखें खास ध्यान

    हनुमान जी को चोला चढ़ाते समय न करें ये गलतियां, जानें क्या चढ़ाएं और किन बातों का रखें खास ध्यान


    नई दिल्ली । हनुमान जी को चोला चढ़ाने की परंपरा सनातन धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखती है। भक्तों की मान्यता है कि श्रद्धा और विधि विधान के साथ बजरंगबली को चोला अर्पित करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में आने वाली बाधाओं का सामना करने का आत्मबल मिलता है। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार का दिन हनुमान जी की पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इन्हीं दिनों भक्त बड़ी संख्या में मंदिरों में पहुंचकर भगवान हनुमान को सिंदूर का चोला चढ़ाते हैं।
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार को सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर हनुमान मंदिर जाना शुभ माना जाता है। पूजा से पहले भगवान का ध्यान करते हुए अपनी श्रद्धा के अनुसार संकल्प लिया जा सकता है। इसके बाद हनुमान जी की प्रतिमा की पूजा की जाती है और चोला अर्पित करने की प्रक्रिया शुरू होती है। कई मंदिरों में चोला चढ़ाने की अलग परंपरा और व्यवस्था होती है इसलिए वहां के पुजारी के निर्देश के अनुसार ही चोला चढ़ाना उचित माना जाता है।

    हनुमान जी को चोला चढ़ाने में सिंदूर और चमेली के तेल का विशेष महत्व बताया जाता है। मान्यता है कि सिंदूर को चमेली के तेल में मिलाकर भगवान को अर्पित करने से भक्त की श्रद्धा पूर्ण होती है। इसके साथ लाल फूल अर्पित किए जा सकते हैं और भगवान को गुड़ तथा चने का भोग लगाने की परंपरा भी कई जगह प्रचलित है। पूजा के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ और राम नाम का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है।

    चोला चढ़ाने से पहले प्रतिमा की साफ सफाई और पूजा की तैयारी श्रद्धा के साथ की जाती है। चोला अर्पित करते समय मन में सकारात्मक विचार रखने और भगवान का ध्यान करने की परंपरा है। भक्त अपनी मनोकामना भगवान के सामने रखते हैं और उनसे परिवार की सुख शांति तथा जीवन में आने वाली परेशानियों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।

    शनिवार को भी हनुमान जी को चोला चढ़ाने की विशेष मान्यता है। शनि संबंधी परेशानियों से राहत पाने के लिए कई भक्त शनिवार को हनुमान जी की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान हनुमान अपने भक्तों को भय और संकट से बचाने वाले माने जाते हैं। हालांकि चोला चढ़ाने की मान्यताएं अलग अलग क्षेत्रों और मंदिरों में अलग हो सकती हैं इसलिए स्थानीय परंपरा का सम्मान करना जरूरी है।

    हनुमान जी को चोला चढ़ाते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा सामग्री साफ और शुद्ध होनी चाहिए। चोला चढ़ाने से पहले प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी पदार्थ का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मंदिर में यदि चोला चढ़ाने के लिए विशेष नियम निर्धारित हैं तो उनका पालन करना चाहिए। कई मंदिरों में भक्त स्वयं प्रतिमा पर चोला नहीं चढ़ाते बल्कि पुजारी के माध्यम से यह सेवा कराई जाती है।

    धार्मिक दृष्टि से हनुमान जी की पूजा केवल बाहरी श्रृंगार तक सीमित नहीं मानी जाती। भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा के साथ सेवा दया संयम और अच्छे आचरण को भी महत्वपूर्ण माना गया है। मंगलवार या शनिवार को चोला चढ़ाने के साथ जरूरतमंदों की सहायता करना और सकारात्मक व्यवहार बनाए रखना भी पुण्यदायी माना जाता है।

    कुल मिलाकर मंगलवार और शनिवार दोनों ही दिन हनुमान जी को चोला चढ़ाने के लिए विशेष माने जाते हैं। श्रद्धा और स्वच्छता के साथ पूजा करना तथा मंदिर की परंपराओं का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण है। ये धार्मिक मान्यताएं आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं इसलिए इन्हें उसी रूप में समझना चाहिए।

  • मंगलवार को ऐसे करें हनुमान जी की पूजा, संकट होंगे दूर और पूरी होंगी मनोकामनाएं; जानें आसान उपाय

    मंगलवार को ऐसे करें हनुमान जी की पूजा, संकट होंगे दूर और पूरी होंगी मनोकामनाएं; जानें आसान उपाय


    नई दिल्ली । मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि विधान से बजरंगबली की पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायता मिलती है। हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है और भक्त मानते हैं कि सच्ची श्रद्धा से उनका स्मरण करने वाले व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी साहस मिलता है। मंगलवार के दिन हनुमान मंदिर में दर्शन करने और पूजा पाठ करने की विशेष परंपरा है।

    हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा स्थान की सफाई करें और भगवान हनुमान की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। पूजा के दौरान मन को शांत रखते हुए बजरंगबली का ध्यान करना चाहिए। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार हनुमान चालीसा का पाठ कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि हनुमान चालीसा के नियमित पाठ से मन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ता है।

    मंगलवार को हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है। भक्त लाल फूल और लाल वस्त्र भी अर्पित कर सकते हैं। कई स्थानों पर बजरंगबली को गुड़ और चने का भोग लगाने की परंपरा है। पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री हमेशा श्रद्धा और स्वच्छता के साथ अर्पित करनी चाहिए। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और जरूरतमंद लोगों में बांटना शुभ माना जाता है।

    मंगलवार के दिन हनुमान जी के मंत्रों का जाप करना भी विशेष फलदायी माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार हनुमान मंत्र या राम नाम का जाप कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं में भगवान हनुमान को भगवान श्रीराम का परम भक्त बताया गया है इसलिए राम नाम का स्मरण भी हनुमान भक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पूजा के दौरान क्रोध और नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए तथा मन में सेवा और सद्भाव की भावना बनाए रखनी चाहिए।

    मंगलवार को कुछ लोग व्रत भी रखते हैं। व्रत रखने वाले व्यक्ति अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या सात्विक भोजन कर सकते हैं। किसी भी व्रत में शरीर की जरूरतों का ध्यान रखना जरूरी है। धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

    हनुमान जी की पूजा केवल पूजा सामग्री तक सीमित नहीं मानी जाती। जरूरतमंदों की मदद करना बुजुर्गों का सम्मान करना पशु पक्षियों के प्रति दया रखना और दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करना भी सकारात्मक जीवनशैली का हिस्सा है। मंगलवार के दिन सेवा और दान करने की परंपरा भी कई भक्तों में देखने को मिलती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार के दिन नशे और गलत आदतों से दूर रहना चाहिए। किसी का अपमान करने झूठ बोलने या क्रोध में किसी को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए। माना जाता है कि सच्ची भक्ति वही है जिसमें पूजा के साथ आचरण में भी सकारात्मक बदलाव दिखाई दे।

    कुल मिलाकर मंगलवार का दिन हनुमान भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन स्वच्छता श्रद्धा संयम और सकारात्मक सोच के साथ बजरंगबली की पूजा करने से मन को शांति और आत्मबल मिलने की अनुभूति हो सकती है। हालांकि पूजा के नियम और मान्यताएं अलग अलग परंपराओं में भिन्न हो सकती हैं इसलिए इन्हें धार्मिक आस्था और परंपरा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

  • 11 अगस्त का राशिफल: किसी को धन लाभ तो किसी को करियर में नई जिम्मेदारी, जानें सभी 12 राशियों का भविष्यफल

    11 अगस्त का राशिफल: किसी को धन लाभ तो किसी को करियर में नई जिम्मेदारी, जानें सभी 12 राशियों का भविष्यफल


    नई दिल्ली । 11 अगस्त 2026 का दिन कई राशियों के लिए नई उम्मीद और सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। ग्रहों की स्थिति के प्रभाव से कुछ जातकों को नौकरी और कारोबार में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं तो कुछ लोगों को आर्थिक मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत होगी। आज जल्दबाजी में लिया गया फैसला नुकसान का कारण बन सकता है इसलिए किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले परिस्थितियों को अच्छी तरह समझना आपके लिए बेहतर रहेगा। कार्यक्षेत्र से लेकर परिवार और आर्थिक स्थिति तक आज कई राशियों के लिए दिन महत्वपूर्ण रहने वाला है।

    मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन मेहनत और आत्मविश्वास से भरपूर रहने वाला है। कार्यक्षेत्र में आपकी सक्रियता अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कर सकती है। लंबे समय से अटका हुआ कोई काम आज पूरा होने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। आत्मविश्वास के साथ काम करने पर सफलता मिलने की संभावना है।

    वृषभ राशि वालों के लिए आर्थिक दृष्टि से दिन अच्छा रह सकता है। रुका हुआ पैसा वापस मिलने के संकेत हैं। कारोबार से जुड़े लोगों को कोई नया और लाभकारी अवसर मिल सकता है। हालांकि पैसों से जुड़े फैसले सोच समझकर लेना बेहतर रहेगा।

    मिथुन राशि के जातकों का दिन व्यस्तता से भरा रह सकता है। काम का दबाव बढ़ सकता है लेकिन आपकी समझदारी और बेहतर योजना के कारण कई परेशानियां आसानी से दूर हो सकती हैं। एक साथ कई जिम्मेदारियां मिलने पर प्राथमिकता तय करके काम करना लाभकारी रहेगा।

    कर्क राशि वालों के लिए परिवार का सहयोग आज बड़ी ताकत बनेगा। घर में सुखद और सकारात्मक माहौल बना रह सकता है। नौकरी करने वाले लोगों को अपनी मेहनत का अच्छा परिणाम मिलने की उम्मीद है। परिवार के किसी सदस्य से महत्वपूर्ण सहयोग भी मिल सकता है।

    सिंह राशि के लिए आज का दिन करियर के लिहाज से खास रह सकता है। नई जिम्मेदारी मिलने के साथ पद और प्रतिष्ठा में वृद्धि के संकेत हैं। आपकी नेतृत्व क्षमता की सराहना हो सकती है और कार्यक्षेत्र में आपकी स्थिति मजबूत हो सकती है।

    कन्या राशि के जातकों को आज अपने खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। बिना सोचे समझे खरीदारी करने से बजट बिगड़ सकता है। जरूरी खर्च और गैरजरूरी खर्च के बीच अंतर करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

    तुला राशि वालों को रिश्तों और काम के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा। किसी करीबी व्यक्ति से मिली सलाह आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है। बातचीत के जरिए पुराने मतभेद दूर करने का अवसर भी मिल सकता है।

    वृश्चिक राशि के जातकों को अपनी मेहनत का पूरा लाभ मिलने की उम्मीद है। व्यापार से जुड़े लोगों के सामने नई डील या कमाई का अवसर आ सकता है। किसी पुराने प्रयास का सकारात्मक परिणाम भी सामने आ सकता है।

    धनु राशि वालों के लिए यात्रा या किसी नए काम की शुरुआत के योग बन रहे हैं। नई योजना पर काम शुरू करने से पहले अनुभवी व्यक्ति की सलाह लेना आपके लिए लाभकारी रहेगा। जल्दबाजी से बचना जरूरी होगा।

    मकर राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिलेगा। अधिकारियों और सहकर्मियों के साथ संबंध बेहतर हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं और मेहनत का अच्छा परिणाम मिल सकता है।

    कुंभ राशि वालों के लिए दिन मिलाजुला रहने वाला है। पुरानी चिंता कम हो सकती है लेकिन किसी जरूरी काम को पूरा करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। धैर्य बनाए रखना आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण रहेगा।

    मीन राशि के जातकों के लिए दिन सकारात्मक रहने वाला है। धन लाभ के साथ परिवार में खुशियां आने के संकेत हैं। लंबे समय से अटका हुआ कोई काम पूरा हो सकता है और मानसिक संतुष्टि भी मिल सकती है।

    कुल मिलाकर 11 अगस्त का दिन कई राशियों के लिए अवसरों और सकारात्मक बदलाव का संकेत दे रहा है। किसी को करियर में तरक्की मिल सकती है तो किसी के लिए धन लाभ के रास्ते खुल सकते हैं। हालांकि राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित होता है इसलिए किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय में अपनी व्यक्तिगत परिस्थितियों को जरूर ध्यान में रखें।

  • सावन शिवरात्रि के अगले दिन लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, रात 9:04 बजे शुरू होगा अद्भुत खगोलीय नजारा

    सावन शिवरात्रि के अगले दिन लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, रात 9:04 बजे शुरू होगा अद्भुत खगोलीय नजारा


    नई दिल्ली । साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगने जा रहा है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा और खगोलीय दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह सूर्य ग्रहण सावन शिवरात्रि के ठीक अगले दिन पड़ेगा। इसके साथ ही इसी दिन श्रावण मास की हरियाली अमावस्या भी रहेगी। ऐसे में धार्मिक और खगोलीय दोनों नजरिए से 12 अगस्त की तारीख महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि भारत में रहने वाले लोगों को इस ग्रहण का प्रत्यक्ष नजारा देखने को नहीं मिलेगा क्योंकि ग्रहण के समय भारत में रात होगी।

    भारतीय समय के अनुसार सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और इसका समापन 13 अगस्त की देर रात 1 बजकर 27 मिनट पर होगा। ग्रहण अपने चरम यानी पीक पर रात करीब 11 बजकर 17 मिनट पर पहुंचेगा। चूंकि उस समय भारत के अधिकांश हिस्सों में रात होगी इसलिए यहां से सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। खगोलीय गणना के अनुसार पूर्ण सूर्य ग्रहण का मुख्य नजारा उत्तरी गोलार्ध के कई क्षेत्रों में देखने को मिलेगा। ग्रीनलैंड आइसलैंड स्पेन रूस और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण का प्रभाव देखा जा सकेगा। इसके अलावा यूरोप के अधिकांश हिस्सों उत्तरी अमेरिका के कुछ क्षेत्रों और अफ्रीका के उत्तर पश्चिमी भागों में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में नजर आएगा।

    अब सवाल यह है कि जब भारत में सूर्य ग्रहण दिखाई ही नहीं देगा तो क्या यहां सूतक काल भी माना जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण से करीब 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू होता है लेकिन यह नियम सामान्य तौर पर उन्हीं स्थानों पर लागू माना जाता है जहां ग्रहण दिखाई देता है। चूंकि 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसका मतलब यह है कि मंदिरों के कपाट बंद करने या धार्मिक और मांगलिक कार्य रोकने जैसी परंपराएं यहां लागू नहीं होंगी और सामान्य पूजा पाठ किया जा सकेगा।

    ज्योतिषीय नजरिए से भी इस सूर्य ग्रहण को महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार ग्रहण के समय ग्रहों की विशेष स्थिति का प्रभाव अलग अलग राशियों पर पड़ सकता है। ज्योतिषियों के मुताबिक सिंह कुंभ मेष और मकर राशि के जातकों को वाणी निवेश और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। वहीं मिथुन तुला और धनु राशि के लिए यह समय करियर और आर्थिक मामलों में सकारात्मक बदलाव के संकेत देने वाला माना जा रहा है। हालांकि ज्योतिषीय प्रभाव धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित होते हैं और इन्हें वैज्ञानिक भविष्यवाणी नहीं माना जाता।

    ग्रहण के दौरान धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का मानसिक जाप करना शुभ माना जाता है। हरियाली अमावस्या के संयोग को देखते हुए जरूरतमंद लोगों को अन्न वस्त्र तिल या धन का दान करने की परंपरा भी बताई गई है। इसके अलावा इस अवसर पर पौधारोपण करना भी शुभ माना जाता है। इस तरह 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण खगोलीय घटना होने के साथ धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय चर्चाओं के कारण भी लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बना रहेगा।

  • हजार कमल लेकर पहुंचे थे विष्णु जी, शिव ने छिपा दिया एक फूल तो चढ़ा दिया अपना कमलनयन, फिर मिला दिव्य वरदान

    हजार कमल लेकर पहुंचे थे विष्णु जी, शिव ने छिपा दिया एक फूल तो चढ़ा दिया अपना कमलनयन, फिर मिला दिव्य वरदान



    नई दिल्ली । सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दौरान महादेव की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। सावन के सोमवार पर श्रद्धालु शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और भगवान शिव से सुख शांति समृद्धि तथा मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। शिव पुराण में भगवान शिव से जुड़ी ऐसी अनेक कथाओं का वर्णन मिलता है जिनमें उनकी करुणा के साथ साथ भक्तों की परीक्षा लेने वाली लीलाओं का भी उल्लेख है। ऐसी ही एक कथा भगवान विष्णु से जुड़ी है जिसमें भगवान शिव ने उनकी भक्ति की कठिन परीक्षा ली और अंत में प्रसन्न होकर उन्हें दिव्य सुदर्शन चक्र प्रदान किया।

    पौराणिक कथा के अनुसार एक समय दानवों और दैत्यों का अत्याचार बहुत बढ़ गया था। उनके बढ़ते प्रभाव से देवता चिंतित हो गए और उन्होंने भगवान विष्णु से सहायता की प्रार्थना की। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने भगवान शिव को प्रसन्न करने का संकल्प लिया। इसके बाद उन्होंने कैलाश पर्वत पर पहुंचकर महादेव की विधि विधान से आराधना शुरू की। भगवान विष्णु ने शिव की स्तुति करते हुए उनके एक हजार नामों का स्मरण किया और प्रत्येक नाम के साथ भगवान शिव को एक कमल पुष्प अर्पित करने का संकल्प लिया।

    कथा के अनुसार भगवान विष्णु की भक्ति और उनके संकल्प की परीक्षा लेने के लिए भगवान शिव ने एक लीला रची। उन्होंने भगवान विष्णु द्वारा पूजा के लिए लाए गए एक हजार कमल पुष्पों में से एक कमल को छिपा दिया। भगवान विष्णु को इसकी जानकारी नहीं थी। जब पूजा के दौरान उन्होंने कमल गिनने शुरू किए तो एक पुष्प कम मिला। उन्होंने काफी खोज की लेकिन वह कमल कहीं नहीं मिला।

    भगवान विष्णु को कमलनयन भी कहा जाता है। जब उन्हें लगा कि उनकी पूजा एक कमल के अभाव में अधूरी रह जाएगी तो उन्होंने अपनी भक्ति को पूरा करने के लिए अद्भुत त्याग का निर्णय लिया। उन्होंने अपने एक नेत्र को कमल के समान मानकर उसे भगवान शिव को अर्पित करने का संकल्प किया। जैसे ही भगवान विष्णु अपना नेत्र अर्पित करने के लिए आगे बढ़े उसी समय भगवान शिव उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर प्रकट हो गए।

    भगवान शिव ने भगवान विष्णु को रोक दिया और उनकी आंख को पहले जैसा कर दिया। महादेव ने विष्णु जी की अटूट भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान मांगने के लिए कहा। तब भगवान विष्णु ने किसी व्यक्तिगत सुख की मांग नहीं की बल्कि दानवों और दैत्यों के अत्याचार से सृष्टि की रक्षा करने के लिए एक ऐसे दिव्य और अजेय अस्त्र की इच्छा जताई जिससे अधर्म का नाश किया जा सके।

    भगवान शिव ने उनकी इच्छा पूरी करते हुए उन्हें दिव्य सुदर्शन चक्र प्रदान किया। यही सुदर्शन चक्र आगे चलकर भगवान विष्णु के प्रमुख अस्त्रों में शामिल हुआ। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने इसी दिव्य अस्त्र की शक्ति से दैत्यों का संहार किया और सृष्टि की रक्षा की। इस तरह भगवान शिव और भगवान विष्णु के बीच भक्ति तथा आशीर्वाद का यह प्रसंग हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व रखता है।

    सावन में इस कथा का स्मरण भक्तों को भक्ति के साथ समर्पण और निस्वार्थ भाव का संदेश भी देता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होते हैं। सावन के दौरान श्रद्धालु जलाभिषेक रुद्राभिषेक बेलपत्र अर्पित करने और शिव मंत्रों का जाप करने जैसी धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं। मान्यता के अनुसार सच्चे मन से की गई शिव आराधना से मन को शांति मिलती है और भक्त के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हालांकि इन धार्मिक मान्यताओं को आस्था और पौराणिक परंपरा के संदर्भ में ही देखा जाता है।

    भगवान शिव और भगवान विष्णु की यह कथा इस बात का प्रतीक मानी जाती है कि सच्ची भक्ति में केवल पूजा की विधि नहीं बल्कि श्रद्धा त्याग और समर्पण का भाव भी महत्वपूर्ण होता है। सावन के पावन महीने में इस कथा का स्मरण भक्तों को अपनी आस्था को और मजबूत करने तथा जीवन में सत्य धर्म और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

  • कहीं पाताल में समा जाता है जल तो कहीं बिजली गिरते ही टूट जाता है शिवलिंग, जानें महादेव के 5 रहस्यमयी धाम

    कहीं पाताल में समा जाता है जल तो कहीं बिजली गिरते ही टूट जाता है शिवलिंग, जानें महादेव के 5 रहस्यमयी धाम


    नई दिल्ली । सावन का दूसरा सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस पावन अवसर पर देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। श्रद्धालु भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। भारत में भगवान शिव को समर्पित हजारों मंदिर हैं लेकिन इनमें कुछ ऐसे धाम भी हैं जो अपनी अनोखी प्राकृतिक परिस्थितियों और उनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन मंदिरों के बारे में ऐसी कई कथाएं प्रचलित हैं जिन्हें सुनकर श्रद्धालु भी आश्चर्यचकित रह जाते हैं। आइए जानते हैं भगवान शिव के ऐसे ही पांच अनोखे धामों के बारे में।

    गुजरात के कैंबे तट पर अरब सागर के बीच स्थित स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर सबसे अनोखे शिव मंदिरों में गिना जाता है। इस मंदिर की खासियत यह है कि ज्वार आने पर समुद्र का पानी शिवलिंग को पूरी तरह ढक लेता है और मंदिर कुछ समय के लिए दिखाई देना बंद हो जाता है। ज्वार उतरने के बाद मंदिर फिर नजर आने लगता है। इसी वजह से श्रद्धालु यहां समुद्र के ज्वार भाटे के समय को ध्यान में रखकर दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार तारकासुर के वध के बाद भगवान कार्तिकेय ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी।

    गुजरात के भावनगर जिले में स्थित निष्कलंक महादेव मंदिर भी समुद्र के बीच अपनी अनोखी पहचान रखता है। कोलियाक तट से करीब तीन किलोमीटर अंदर स्थित यह मंदिर ज्वार आने पर पानी में डूब जाता है और केवल मंदिर का ध्वज दिखाई देता है। समुद्र का पानी उतरने के बाद श्रद्धालु पैदल चलकर यहां पहुंचते हैं। मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने यहां भगवान शिव की आराधना की थी। इसी धार्मिक विश्वास के कारण यह स्थान भक्तों के बीच विशेष महत्व रखता है।

    राजस्थान के धौलपुर में चंबल के बीहड़ों के बीच स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर भी अपने रहस्यमय स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है। यहां शिवलिंग के रंग बदलने को लेकर मान्यता प्रचलित है। कहा जाता है कि सुबह इसका रंग लाल दिखाई देता है जबकि दोपहर में केसरिया और शाम के समय काला नजर आता है। इसके अलावा शिवलिंग की गहराई को लेकर भी कई तरह की मान्यताएं हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर आस्था और रहस्य का अनोखा संगम है।

    छत्तीसगढ़ में स्थित लक्ष्मेश्वर महादेव मंदिर भी अपनी विशेष मान्यताओं के कारण प्रसिद्ध है। यहां मौजूद शिवलिंग को लक्ष्यलिंग कहा जाता है और इसमें हजारों छोटे छिद्र होने की बात कही जाती है। मान्यता है कि इनमें से एक छिद्र पाताल तक जाता है और उसमें चढ़ाया गया जल दिखाई नहीं देता। वहीं एक अन्य स्थान पर पानी हमेशा भरा रहने की मान्यता है जिसे अक्षय कुंड कहा जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार इस स्थान का संबंध भगवान राम और लक्ष्मण से भी जोड़ा जाता है।

    हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में ऊंचे पहाड़ पर स्थित बिजली महादेव मंदिर भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि करीब 12 वर्ष के अंतराल पर यहां शिवलिंग पर आकाशीय बिजली गिरती है जिससे शिवलिंग खंडित हो जाता है। इसके बाद मंदिर के पुजारी मक्खन की सहायता से शिवलिंग के टुकड़ों को जोड़ते हैं और कुछ समय बाद वह दोबारा अपने पुराने स्वरूप में आ जाता है। इसी मान्यता ने इस मंदिर को देशभर में अलग पहचान दी है।
    हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में ऊंचे पहाड़ पर स्थित बिजली महादेव मंदिर भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि करीब 12 वर्ष के अंतराल पर यहां शिवलिंग पर आकाशीय बिजली गिरती है जिससे शिवलिंग खंडित हो जाता है। इसके बाद मंदिर के पुजारी मक्खन की सहायता से शिवलिंग के टुकड़ों को जोड़ते हैं और कुछ समय बाद वह दोबारा अपने पुराने स्वरूप में आ जाता है। इसी मान्यता ने इस मंदिर को देशभर में अलग पहचान दी है।

    भगवान शिव के इन पांचों धामों की खासियत सिर्फ इनके धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है। समुद्र के ज्वार से मंदिर का डूबना हो या प्राकृतिक घटनाओं से जुड़ी मान्यताएं इन स्थानों का वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव देता है। हालांकि इनसे जुड़े चमत्कारों और मान्यताओं को धार्मिक विश्वास के रूप में देखा जाना चाहिए। सावन के पवित्र महीने में इन धामों की चर्चा और भी बढ़ जाती है और देशभर से श्रद्धालु महादेव के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।

  • सावन के दूसरे सोमवार पर फलाहार में बनाएं कुरकुरी कुट्टू की पकौड़ी, आसान है इसकी रेसिपी

    सावन के दूसरे सोमवार पर फलाहार में बनाएं कुरकुरी कुट्टू की पकौड़ी, आसान है इसकी रेसिपी


    नई दिल्ली । 
    सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान आने वाले सोमवार को श्रद्धालु व्रत रखते हैं और पूरे दिन फलाहार करते हुए भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। इस साल सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को पड़ रहा है। ऐसे में व्रत रखने वाले लोगों के सामने अक्सर यह सवाल रहता है कि फलाहार में ऐसा क्या बनाया जाए जो स्वादिष्ट होने के साथ आसानी से तैयार भी हो जाए।

    व्रत के दौरान कुट्टू का आटा कई घरों में इस्तेमाल किया जाता है। इससे पूरी, चीला, पराठा और पकौड़ी जैसे कई व्यंजन बनाए जा सकते हैं। अगर सोमवार के व्रत में कुछ अलग और स्वादिष्ट खाने का मन है, तो कुट्टू के आटे से बनने वाली आलू की पकौड़ी एक अच्छा विकल्प हो सकती है।

    कुट्टू की पकौड़ी बनाने के लिए मुख्य रूप से कुट्टू का आटा और आलू की जरूरत होती है। इसके साथ स्वाद के लिए सेंधा नमक, हरी मिर्च, अदरक, धनिया और काली मिर्च का इस्तेमाल किया जा सकता है। व्रत के दौरान सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का ही प्रयोग किया जाता है।

    इस रेसिपी के लिए करीब एक कटोरी कुट्टू का आटा लिया जा सकता है। इसके साथ छह आलू, एक हरी मिर्च, एक चम्मच अदरक, धनिया, काली मिर्च और सेंधा नमक की जरूरत होगी। सामग्री की मात्रा स्वाद और जरूरत के अनुसार कम या ज्यादा की जा सकती है।

    सबसे पहले आलू को उबालकर ठंडा कर लें और फिर उन्हें अच्छी तरह मैश कर लें। इसके बाद इसमें बारीक कटी हरी मिर्च, अदरक, धनिया, काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाएं। सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाने के बाद इसमें कुट्टू का आटा डालकर मिश्रण तैयार किया जा सकता है।

    कुट्टू का आटा मिलाते समय मिश्रण की स्थिरता का ध्यान रखना जरूरी है। इसे इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि पकौड़ी आसानी से आकार ले सके। जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी डालकर मिश्रण को तैयार किया जा सकता है। इसके बाद तैयार मिश्रण से छोटे-छोटे हिस्से लेकर पकौड़ी का आकार दिया जा सकता है।

    अब एक कड़ाही में तेल गर्म करें। तेल पर्याप्त गर्म होने के बाद तैयार पकौड़ियों को सावधानी से डालें और उन्हें मध्यम आंच पर सुनहरा और कुरकुरा होने तक पकाएं। पकौड़ियों को बीच-बीच में पलटते रहें, ताकि वे सभी तरफ से अच्छी तरह पक जाएं।

    तैयार होने के बाद पकौड़ियों को कड़ाही से निकालकर कुछ देर के लिए अतिरिक्त तेल निकलने दें। इसके बाद इन्हें व्रत में खाई जाने वाली चटनी या दही के साथ परोसा जा सकता है। अगर आप व्रत के दौरान तेल कम इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो पकौड़ी तैयार करने की अपनी पसंदीदा कम तेल वाली विधि भी अपना सकते हैं।

    कुट्टू की पकौड़ी सावन सोमवार के फलाहार में स्वाद में बदलाव लाने का आसान तरीका है। आलू और कुट्टू के आटे से तैयार यह व्यंजन कम सामग्री में बनाया जा सकता है और परिवार के अन्य सदस्य भी इसे पसंद कर सकते हैं। हालांकि व्रत में भोजन को लेकर अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार ही सामग्री का इस्तेमाल करना उचित है।