Category: Religious Astrology

  • समुद्र की लहरों से प्राकृतिक जलाभिषेक का अद्भुत केंद्र गंगेश्वर महादेव, पांडवों ने स्थापित किए थे पांच अलग-अलग शिवलिंग

    समुद्र की लहरों से प्राकृतिक जलाभिषेक का अद्भुत केंद्र गंगेश्वर महादेव, पांडवों ने स्थापित किए थे पांच अलग-अलग शिवलिंग

    नई दिल्ली । केन्द्र शासित प्रदेश दीव के फुदम गांव के समीप अरब सागर के तट पर स्थित गंगेश्वर महादेव मंदिर प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का एक अद्भुत संगम है। दीव शहर से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी विशेषताओं के कारण दुनियाभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

    इस पवित्र स्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव के पांच शिवलिंग एक साथ स्थापित हैं। धार्मिक परंपराओं और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में वनवास के दौरान पांडव इस क्षेत्र में आए थे। उन्होंने भगवान शिव की कठिन तपस्या की और पांच अलग-अलग आकारों के शिवलिंगों की स्थापना की। मान्यता है कि युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव ने अपने-अपने कद और स्वभाव के अनुसार इन शिवलिंगों का निर्माण किया था।

    गंगेश्वर महादेव मंदिर की एक और अद्वितीय विशेषता इसका भौगोलिक स्थान और प्राकृतिक जलाभिषेक की प्रक्रिया है। जब समुद्र में उच्च ज्वार आता है, तब अरब सागर की उत्तुंग लहरें प्राकृतिक चट्टानों के बीच से बहती हुई सीधे मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचती हैं। ये लहरें पांचों शिवलिंगों का स्पर्श कर उनका प्राकृतिक अभिषेक करती हैं और फिर वापस समुद्र में समा जाती हैं।

    ज्वार और भाटा के चक्र के साथ मंदिर का दृश्य बदलता रहता है। भाटा के दौरान जब समुद्र का जलस्तर नीचे चला जाता है, तब पांचों शिवलिंग पूर्णतः स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगते हैं। इस दौरान श्रद्धालु आसानी से पूजा-अर्चना कर सकते हैं। मंदिर का यह प्राकृतिक चक्र श्रद्धालुओं के लिए एक अत्यंत आध्यात्मिक और दर्शनीय अनुभव प्रदान करता है।

    सावन के पवित्र महीने और महाशिवरात्रि जैसे प्रमुख पर्वों पर यहां देश के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्तजन भगवान शिव को जलाभिषेक, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। लहरों की गर्जना और हर-हर महादेव के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।

    भारत में समुद्र तटीय धार्मिक स्थलों का अपना विशेष महत्व रहा है, और मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालु इस स्थान की प्राकृतिक भव्यता से अभिभूत हो जाते हैं। गंगेश्वर महादेव केवल एक पूजा स्थल नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के नियमों और धार्मिक श्रद्धा के अनोखे तालमेल को भी प्रदर्शित करता है।

    दीव आने वाले पर्यटकों के लिए समुद्र की विशालता, तटीय चट्टानों की बनावट और समुद्र जल से स्वतः अभिषेक होने वाले यह पवित्र शिवलिंग एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करते हैं। प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों द्वारा श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ज्वार के समय विशेष सतर्कता बरती जाती है।

  • सावन के अंतिम सोमवार पर नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग, 17 अगस्त को इस शुभ मुहूर्त में होगी पूजा

    सावन के अंतिम सोमवार पर नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग, 17 अगस्त को इस शुभ मुहूर्त में होगी पूजा

    नई दिल्ली : सनातन परंपरा में सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का विशेष महत्व माना गया है। इस वर्ष नाग पंचमी का पावन पर्व 17 अगस्त को बेहद शुभ संयोग में मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि का प्रारंभ 16 अगस्त की शाम से हो रहा है, लेकिन शास्त्रों में उदयातिथि की मान्यता के कारण यह पर्व 17 अगस्त को ही देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा।

    धार्मिक विद्वानों के अनुसार इस बार नाग पंचमी पर सावन सोमवार का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नाग देवता भगवान शिव के अत्यंत प्रिय हैं और उनके गले का आभूषण हैं। यही कारण है कि इस दिन शिवजी के साथ-साथ नाग देव की उपासना करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और साधक को भय से मुक्ति मिलती है।

    इस साल पूजन के लिए सुबह का समय अत्यंत फलदायी बताया गया है। 17 अगस्त की सुबह 5 बजकर 51 मिनट से 8 बजकर 29 मिनट तक पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त रहेगा। इस अवधि में श्रद्धालु शिव मंदिरों में जाकर शिवलिंग पर स्थापित नाग देव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

    धार्मिक ग्रंथों और भविष्य पुराण में नाग पंचमी के महत्व का विस्तार से वर्णन मिलता है। मान्यता है कि इस तिथि पर नाग लोक में विशेष उत्सव मनाया जाता है, इसलिए पृथ्वी लोक पर भी नाग देव की पूजा का विधान है। महाभारतकालीन राजा जनमेजय के नाग यज्ञ और आस्तिक मुनि द्वारा नागों की रक्षा की कथा भी इस पर्व से गहराई से जुड़ी हुई है, जो जीवों के प्रति दया और संरक्षण का संदेश देती है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष या राहु-केतु से जुड़े कष्ट होते हैं, उनके लिए इस दिन पूजा-पाठ और दान करना विशेष लाभप्रद माना जाता है। उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में, जिनमें मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्य शामिल हैं, घर के मुख्य द्वार पर गोबर से नाग देव की आकृति बनाकर पूजन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना भी आवश्यक है। कई स्थानों पर जीवित सर्पों को दूध पिलाने का प्रयास किया जाता है, जो वैज्ञानिक रूप से अनुचित है। इसलिए श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे किसी जीव को कष्ट दिए बिना केवल मंदिर में स्थापित प्रतिमा या चित्र की ही शास्त्रीय विधि से पूजा करें।

  • Aaj Ka Rashifal 16 August 2026: धन लाभ से करियर तक चमकेगा भाग्य, कुछ राशियों को रहना होगा सावधान

    Aaj Ka Rashifal 16 August 2026: धन लाभ से करियर तक चमकेगा भाग्य, कुछ राशियों को रहना होगा सावधान


    नई दिल्ली 16 अगस्त 2026 रविवार का दिन ग्रहों की स्थिति के लिहाज से कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार आज चंद्रमा कन्या राशि में रहने से कामकाज में व्यावहारिक सोच और बारीकियों पर ध्यान देने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। वहीं अलग-अलग ग्रहों की स्थिति का असर करियर धन परिवार प्रेम और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों पर देखने को मिल सकता है। कुछ राशियों के लिए आज रुके हुए काम आगे बढ़ने और आर्थिक अवसर मिलने के संकेत हैं जबकि कुछ लोगों को जल्दबाजी में फैसला लेने से बचने की सलाह दी जा रही है।

    मेष राशि वालों के लिए आज मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। पुराने काम में सफलता मिल सकती है और परिवार तथा मित्रों का सहयोग मनोबल बढ़ाएगा। हालांकि दांपत्य जीवन में छोटी बात को बड़ा बनाने से बचना बेहतर रहेगा। आर्थिक मामलों में सोच समझकर निर्णय लें और अनावश्यक खर्च से बचें।

    वृषभ राशि के जातकों के लिए दिन रचनात्मकता और पारिवारिक सामंजस्य लेकर आ सकता है। कला और रचनात्मक काम से जुड़े लोगों को लाभ मिलने के संकेत हैं लेकिन धन से जुड़े फैसलों में सावधानी रखना जरूरी होगा। किसी बड़े निवेश में जल्दबाजी न करें। परिवार के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा।

    मिथुन राशि वालों के लिए आर्थिक मामलों में अच्छे अवसर बन सकते हैं। कार्यक्षेत्र में नई दिशा मिलने और किसी पुराने प्रयास का लाभ मिलने की संभावना है। कारोबार करने वालों को संपर्कों से फायदा हो सकता है। हालांकि खर्च और निवेश के मामले में संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। संवाद करते समय शब्दों का चयन सोच समझकर करें।

    कर्क राशि के लिए आज धन कमाने के नए अवसर सामने आ सकते हैं। परिवार में प्रेम और सामंजस्य बढ़ेगा। कामकाज में मेहनत का लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि भावनाओं में बहकर कोई बड़ा फैसला लेने से बचें। नौकरीपेशा लोगों को जिम्मेदारियों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    सिंह राशि वालों के लिए आज आत्ममंथन का दिन हो सकता है। पुरानी बातों को पीछे छोड़कर भविष्य की योजनाओं पर ध्यान देना लाभकारी रहेगा। नौकरी और कारोबार में काम को व्यवस्थित तरीके से पूरा करें। किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

    कन्या राशि वालों के लिए चंद्रमा की स्थिति कौशल और दक्षता को मजबूत करने वाली मानी जा रही है। हाथ के हुनर और रचनात्मक काम से तुरंत लाभ मिल सकता है। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि काम के दबाव के बीच आराम और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी होगा।

    तुला राशि के जातकों के लिए करियर के लिहाज से दिन अच्छा रह सकता है। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने से प्रतिष्ठा बढ़ सकती है। रुके हुए काम को गति मिलने के संकेत हैं। कारोबारियों को भी नए संपर्कों से लाभ हो सकता है लेकिन लापरवाही से बचना होगा।

    वृश्चिक राशि वालों की नेतृत्व क्षमता आज मजबूत हो सकती है। सामाजिक स्तर पर मान सम्मान मिलने के संकेत हैं और किसी महत्वपूर्ण काम के पूरा होने से आत्मविश्वास बढ़ेगा। व्यापार में लाभ मिल सकता है लेकिन निवेश के मामलों में सावधानी रखना जरूरी है।

    धनु राशि के लिए दिन उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला हो सकता है। करियर में प्रभावशाली प्रदर्शन का अवसर मिलेगा और परिवार में सहयोग बना रहेगा। कोई रुका हुआ काम आगे बढ़ सकता है। हालांकि स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें।

    मकर राशि वालों के लिए आर्थिक और व्यावसायिक मामलों में सकारात्मक संकेत हैं। मेहनत का परिणाम मिल सकता है और अपेक्षा से बेहतर आर्थिक लाभ की संभावना बन सकती है। फिर भी किसी भी निर्णय से पहले दूसरे पक्ष की सलाह पर विचार करना उपयोगी रहेगा।

    कुंभ राशि के जातकों को आज नए अवसर मिल सकते हैं। कामकाज में तरक्की और आर्थिक लाभ के संकेत हैं। पुराने संपर्कों से फायदा हो सकता है। परिवार के साथ तालमेल बनाए रखना जरूरी होगा और किसी विवाद को बढ़ाने से बचें।

    मीन राशि वालों के लिए साझेदारी और सहयोग का दिन है। जीवनसाथी या किसी करीबी व्यक्ति का पूरा साथ मिल सकता है। करियर में नए अवसर सामने आ सकते हैं और पढ़ाई तथा रचनात्मक काम में भी अच्छी ऊर्जा बनी रहेगी। हालांकि पैसों के मामले में सावधानी बरतना बेहतर होगा।

    ज्योतिषीय राशिफल आस्था और पारंपरिक ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित होता है। इसे निश्चित भविष्यवाणी के बजाय सामान्य मार्गदर्शन के रूप में लेना बेहतर है।

  • 22 अगस्त से बदलेगा ग्रहों का खेल! सिंह राशि में सूर्य-बुध की युति, 3 राशियों को करियर और धन में लाभ के संकेत

    22 अगस्त से बदलेगा ग्रहों का खेल! सिंह राशि में सूर्य-बुध की युति, 3 राशियों को करियर और धन में लाभ के संकेत


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और बुध की युति को बुधादित्य योग से जोड़ा जाता है। सूर्य को आत्मविश्वास नेतृत्व मान सम्मान और प्रशासनिक क्षमता का कारक माना जाता है जबकि बुध बुद्धि तर्क संवाद व्यापार और गणना से संबंधित ग्रह माने जाते हैं। ऐसे में जब दोनों ग्रह एक ही राशि में आते हैं तो ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसका असर व्यक्ति की निर्णय क्षमता करियर और आर्थिक मामलों पर दिखाई दे सकता है। अगस्त 2026 में बुध के सिंह राशि में प्रवेश के साथ सूर्य और बुध की युति बनने की बात कही जा रही है। उपलब्ध ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार बुध 22 अगस्त को सिंह राशि में प्रवेश करेगा।

    सिंह राशि सूर्य की अपनी राशि मानी जाती है। इसलिए सूर्य के सिंह में मौजूद रहने के दौरान बुध का यहां आना ज्योतिषीय दृष्टि से खास संयोग माना जा रहा है। हालांकि किसी व्यक्ति की कुंडली में इस योग का वास्तविक फल केवल राशि देखकर तय नहीं किया जा सकता। लग्न भाव ग्रहों की स्थिति दशा और अन्य ग्रहों के प्रभाव को भी देखा जाता है। इसलिए नीचे बताए गए परिणाम सामान्य ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

    मेष राशि के जातकों के लिए सिंह राशि पंचम भाव से संबंधित मानी जाती है। पंचम भाव को शिक्षा बुद्धि रचनात्मकता संतान और प्रतियोगिता से जोड़ा जाता है। ऐसे में बुधादित्य योग के दौरान विद्यार्थियों को पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर एकाग्रता का अनुभव हो सकता है। नौकरी करने वाले लोगों के लिए नई जिम्मेदारियां या करियर में आगे बढ़ने के अवसर बन सकते हैं। व्यापार से जुड़े जातकों को नई योजनाओं पर काम करने और अपने संपर्कों का लाभ उठाने का मौका मिल सकता है। हालांकि निवेश के मामले में केवल ज्योतिषीय अनुमान के आधार पर जोखिम लेने से बचना चाहिए।

    सिंह राशि वालों के लिए यह युति सबसे खास मानी जा रही है क्योंकि सूर्य और बुध का संयोग उनकी ही राशि में बनने वाला है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इससे आत्मविश्वास संचार क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत हो सकती है। नौकरीपेशा लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिल सकते हैं और कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होने की संभावना बन सकती है। व्यापारियों के लिए नए संपर्क और कारोबारी बातचीत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। सामाजिक स्तर पर भी मान सम्मान बढ़ने के संकेत बताए जा रहे हैं।

    धनु राशि के जातकों के लिए सिंह राशि नवम भाव से संबंधित होती है। नवम भाव को भाग्य धर्म उच्च शिक्षा लंबी यात्राओं और गुरुजनों से जोड़ा जाता है। इसलिए इस अवधि को धनु राशि वालों के लिए नए अवसरों और रुके कामों में गति से जोड़कर देखा जा रहा है। उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे लोगों को फायदा मिल सकता है। नौकरी या कारोबार के सिलसिले में यात्रा के अवसर बन सकते हैं और नए लोगों से संपर्क भविष्य में उपयोगी साबित हो सकता है। पिता या वरिष्ठ लोगों से सहयोग मिलने की संभावना भी ज्योतिषीय मान्यताओं में बताई जाती है।

    बुधादित्य योग को लेकर धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं में कुछ उपाय भी बताए जाते हैं। सूर्य को मजबूत करने के लिए सुबह तांबे के पात्र से सूर्यदेव को जल अर्पित कर सूर्य मंत्र का जाप करने की परंपरा है। बुधवार को भगवान गणेश की पूजा करना और अपनी क्षमता के अनुसार हरी वस्तुओं का दान करना भी कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में शुभ माना जाता है। हालांकि किसी भी ग्रह दोष या व्यक्तिगत समस्या के लिए उपाय अपनाने से पहले अपनी कुंडली के अनुसार योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

    कुल मिलाकर 22 अगस्त 2026 को सिंह राशि में सूर्य और बुध की युति को ज्योतिष की नजर से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मेष सिंह और धनु राशि के जातकों के लिए इसे करियर शिक्षा व्यापार और भाग्य से जुड़े मामलों में सकारात्मक अवसरों का समय बताया जा रहा है। लेकिन इसे निश्चित भविष्यवाणी के बजाय ज्योतिषीय मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए क्योंकि किसी भी व्यक्ति के जीवन में ग्रहों का प्रभाव उसकी पूरी जन्मकुंडली के आधार पर अलग अलग हो सकता है।

  • हरियाली तीज कब है? 14 अगस्त की शाम से शुरू होगी तृतीया, 15 अगस्त को रखा जाएगा व्रत

    हरियाली तीज कब है? 14 अगस्त की शाम से शुरू होगी तृतीया, 15 अगस्त को रखा जाएगा व्रत

    नई दिल्ली। सनातन धर्म में हरियाली तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर महिलाएं पति की लंबी आयु सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने की परंपरा है। सावन में चारों ओर दिखाई देने वाली हरियाली के कारण इस पर्व को हरियाली तीज कहा जाता है। इस दिन महिलाएं हरे रंग के कपड़े पहनती हैं हरी चूड़ियां धारण करती हैं मेहंदी लगाती हैं और सोलह श्रृंगार करके झूला झूलने के साथ तीज के लोकगीत गाती हैं।

    इस बार हरियाली तीज की तारीख को लेकर 14 और 15 अगस्त के बीच कंफ्यूजन बना हुआ है। पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 14 अगस्त से शुरू हो रही है लेकिन उदया तिथि के आधार पर हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त 2026 शनिवार को रखा जाएगा। दिल्ली के लिए द्रिक पंचांग भी 15 अगस्त को ही हरियाली तीज का पर्व बता रहा है। हालांकि अलग अलग शहरों के पंचांग में तिथि शुरू होने और समाप्त होने के समय में अंतर हो सकता है।

    पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 14 अगस्त को सुबह 9 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर 15 अगस्त को सुबह 7 बजकर 58 मिनट तक रहेगी।因此 15 अगस्त को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि होने के कारण इसी दिन व्रत और पर्व मनाया जाएगा। अपने शहर के अनुसार पूजा का सटीक समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग देखना उचित रहेगा।

    हरियाली तीज के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लेती हैं। इसके बाद पूजा स्थल की साफ सफाई करके भगवान शिव माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। कुछ परंपराओं में बालू या मिट्टी से शिव पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाने का भी विधान बताया गया है। पूजा में माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है जबकि भगवान शिव को बेलपत्र फल और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाई जाती है। इसके बाद धूप दीप जलाकर आरती की जाती है और हरियाली तीज की व्रत कथा सुनी या पढ़ी जाती है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार हरियाली तीज का संबंध माता पार्वती की कठोर तपस्या से है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक तप किया था और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी वजह से विवाहित महिलाएं इस दिन शिव और पार्वती की पूजा करके अपने दांपत्य जीवन में प्रेम सुख और स्थिरता की कामना करती हैं।

    इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं अपनी परंपरा के अनुसार निर्जला या फलाहार व्रत रखती हैं। हालांकि निर्जला व्रत हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर व्रत की कठोरता से बचना और अपनी सेहत को प्राथमिकता देना उचित माना जाता है। पूजा के साथ महिलाएं सास या घर की वरिष्ठ महिलाओं को सुहाग सामग्री और उपहार देकर उनका आशीर्वाद भी ले सकती हैं।

    हरियाली तीज पर हरे रंग को विशेष महत्व दिया जाता है। हरे वस्त्र और हरी चूड़ियां पहनना इस पर्व की पारंपरिक पहचान है। इसके अलावा पौधरोपण को भी इस दिन शुभ माना जाता है। सावन और हरियाली से जुड़े इस पर्व पर एक पौधा लगाकर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया जा सकता है।

    इस तरह 14 अगस्त से तृतीया तिथि शुरू होने के बावजूद हरियाली तीज 15 अगस्त 2026 शनिवार को मनाई जाएगी। इसलिए 14 या 15 अगस्त को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। व्रत रखने वाली महिलाएं 15 अगस्त को अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती की विधि पूर्वक पूजा कर सकती हैं।

  • राहु का धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश: अप्रैल 2027 तक 3 राशियों की बदलेगी किस्मत, बन रहे लाभ के योग

    राहु का धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश: अप्रैल 2027 तक 3 राशियों की बदलेगी किस्मत, बन रहे लाभ के योग


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में राहु को मायावी और रहस्यमयी ग्रह माना जाता है। राहु ने 1 अगस्त को मंगल के स्वामित्व वाले धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश किया है और अप्रैल 2027 तक इसी नक्षत्र में संचरण करेंगे। धनिष्ठा नक्षत्र को धन, समृद्धि, संगीत और प्रसिद्धि से जोड़कर देखा जाता है।

    ज्योतिष के अनुसार, मंगल के नक्षत्र में राहु का यह लंबा प्रवास कई राशियों के जीवन में सकारात्मक और बड़े बदलाव ला सकता है। इनमें मेष, मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी माना जा रहा है।

    मेष राशि: अटकी योजनाओं को मिलेगी रफ्तार
    मेष राशि के स्वामी मंगल हैं। ऐसे में राहु का मंगल के नक्षत्र में गोचर मेष राशि वालों के लिए शुभ माना जा रहा है। कार्यक्षेत्र में साहस और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ सकती है। लंबे समय से अटकी योजनाओं को गति मिलने के साथ नया कारोबार शुरू करने के लिए भी समय अनुकूल रह सकता है। अचानक धन लाभ के योग बन सकते हैं। लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना भी है।

    मकर राशि: तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे
    धनिष्ठा नक्षत्र का संबंध मकर और कुंभ राशि से माना जाता है। मकर राशि वालों के लिए राहु का यह गोचर करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर ला सकता है। समाज और कार्यस्थल पर प्रभाव बढ़ेगा। पदोन्नति और नई जिम्मेदारियां मिलने के प्रबल योग बन सकते हैं। प्रॉपर्टी, मकान या वाहन खरीदने की इच्छा पूरी होने की संभावना है। निवेश से भी बड़ा फायदा मिलने के संकेत हैं।

    कुंभ राशि: आय के कई स्रोत बन सकते हैं
    कुंभ राशि के जातकों के लिए अप्रैल 2027 तक का समय आर्थिक मामलों में बड़ा बदलाव ला सकता है। आय के एक से अधिक स्रोत बनने के योग हैं। विदेश से जुड़े कारोबार या विदेशी कंपनियों में काम करने वाले लोगों को विशेष लाभ मिल सकता है। प्रभावशाली लोगों से संपर्क बढ़ेंगे, जो करियर में आगे बढ़ने में मददगार साबित हो सकते हैं।

    राहु के शुभ प्रभाव के लिए करें ये उपाय
    – शनिवार को किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को सरसों का तेल या काले तिल का दान करें।
    – राहु के शुभ प्रभाव को बढ़ाने के लिए भगवान काल भैरव या भगवान शिव की आराधना करें।
    – नियमित रूप से ‘ॐ रां राहवे नमः’ मंत्र का जाप करें।

  • आज का राशिफल 13 अगस्त 2026: इन राशियों के लिए बन रहा है लाभ का योग, जानें मेष से मीन तक का हाल

    आज का राशिफल 13 अगस्त 2026: इन राशियों के लिए बन रहा है लाभ का योग, जानें मेष से मीन तक का हाल


    नई दिल्ली। आज का राशिफल 13 अगस्त 2026: गुरुवार का दिन कई राशियों के लिए आर्थिक और करियर के लिहाज से महत्वपूर्ण रह सकता है। कुछ जातकों को काम में सफलता और धन लाभ के अवसर मिल सकते हैं, जबकि कुछ लोगों को खर्च और वाणी पर नियंत्रण रखने की जरूरत होगी। जानिए मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का आज का राशिफल।

    मेष राशि
    आज का दिन आपके लिए उत्साह और नई उम्मीद लेकर आ सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिल सकता है। किसी पुराने संपर्क से लाभ मिलने की संभावना है। आर्थिक स्थिति सामान्य से बेहतर रहेगी, लेकिन अनावश्यक खर्च से बचें। परिवार में किसी सदस्य के साथ चल रहा मतभेद बातचीत से दूर हो सकता है।

    वृषभ राशि
    आज आपको अपने काम में धैर्य बनाए रखना होगा। जल्दबाजी में लिया गया फैसला नुकसान पहुंचा सकता है। व्यापार करने वालों को कोई अच्छा अवसर मिल सकता है। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा और मन प्रसन्न रहेगा।

    मिथुन राशि
    आज आपकी वाणी और समझदारी आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। व्यापार में किसी नई योजना पर काम शुरू करने का मौका मिलेगा। धन से जुड़ा कोई रुका हुआ काम पूरा हो सकता है। हालांकि किसी पर आंख बंद करके भरोसा करने से बचें।

    कर्क राशि
    कर्क राशि वालों के लिए आज का दिन मिला-जुला रह सकता है। काम का दबाव थोड़ा अधिक रहेगा लेकिन आप अपनी मेहनत से स्थिति संभाल लेंगे। परिवार में किसी सदस्य की मदद करनी पड़ सकती है। आर्थिक मामलों में सावधानी रखें। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें और पर्याप्त आराम करें।

    सिंह राशि
    आज आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिभा की तारीफ हो सकती है। किसी महत्वपूर्ण काम में सफलता मिलने के संकेत हैं। धन लाभ के नए रास्ते खुल सकते हैं। निवेश से जुड़े फैसले सोच-समझकर लें। दांपत्य जीवन में प्रेम और सहयोग बढ़ेगा।

    कन्या राशि
    आज का दिन आपके लिए योजनाओं को पूरा करने का है। अधूरे काम पूरे होने से राहत मिलेगी। नौकरी में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी की चर्चा हो सकती है। कारोबार में लाभ मिलने की संभावना है। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। किसी पुराने मित्र से मुलाकात मन को खुश कर सकती है।

    तुला राशि
    आज आपको अपनी प्राथमिकताएं तय करके आगे बढ़ना चाहिए। काम में व्यस्तता रहेगी लेकिन इसका लाभ भी मिलेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। किसी पुराने निवेश से फायदा मिलने की संभावना है। प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी। विवादित मामलों से दूरी बनाए रखना बेहतर रहेगा।

    वृश्चिक राशि
    वृश्चिक राशि वालों के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण हो सकता है। कार्यक्षेत्र में कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। आपकी मेहनत अधिकारियों की नजर में आएगी। धन संबंधी मामलों में लाभ के योग हैं। परिवार के किसी सदस्य से अच्छी खबर मिल सकती है। क्रोध पर नियंत्रण रखना आपके लिए जरूरी होगा।

    धनु राशि
    आज आपको भाग्य का साथ मिल सकता है। लंबे समय से अटका कोई काम पूरा होने की संभावना है। नौकरी और कारोबार में नए अवसर सामने आएंगे। धार्मिक या आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ सकती है। यात्रा का योग बन सकता है। आर्थिक मामलों में दिन अच्छा रहेगा।

    मकर राश
    आज कामकाज में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। शुरुआत में कुछ अड़चनें आएंगी लेकिन धैर्य से स्थिति आपके पक्ष में हो सकती है। खर्च बढ़ने की संभावना है इसलिए बजट बनाकर चलें। परिवार के साथ किसी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा हो सकती है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।

    कुंभ राशि
    कुंभ राशि वालों के लिए आज का दिन लाभकारी रह सकता है। नौकरी में नई जिम्मेदारी या अवसर मिल सकता है। कारोबारियों को कोई अच्छा सौदा मिलने की संभावना है। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। दोस्तों के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा। किसी भी महत्वपूर्ण फैसले में जल्दबाजी न करें।

    मीन राशि
    आज आपका मन रचनात्मक कार्यों में लगेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना हो सकती है। धन लाभ के अवसर मिलेंगे लेकिन साथ ही खर्च भी बढ़ सकता है। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा। प्रेम संबंधों में मजबूती आएगी। विद्यार्थियों के लिए दिन अच्छा रहने वाला है और पढ़ाई में मन लगेगा।

  • उज्जैन में महाकाल का भांग-चंदन और रजत आभूषणों से हुआ शृंगार, राजा स्वरूप में सजे

    उज्जैन में महाकाल का भांग-चंदन और रजत आभूषणों से हुआ शृंगार, राजा स्वरूप में सजे

    उज्जैन । श्रावण मास की अमावस्या यानी हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर आज तड़के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल की भस्म आरती विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और दिव्य शृंगार के साथ संपन्न हुई।


    बुधवार तड़के करीब 2ः30 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। मंदिर के पट खुलने के बाद सबसे पहले वीरभद्र जी को प्रणाम कर स्वस्तिवाचन किया गया। उनकी आज्ञा प्राप्त करने के बाद चांदी का द्वार खोला गया और गर्भगृह में भगवान महाकाल सहित अन्य देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद पुजारियों ने भगवान का  उतारकर विधि-विधान से पूजन-अभिषेक की प्रक्रिया शुरू की।

    भगवान महाकाल का पहले पवित्र जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का अभिषेक और पूजन किया गया। अभिषेक के पश्चात बाबा महाकाल का भांग, चंदन और विभिन्न आभूषणों से आकर्षक  किया गया। भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल राजा स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते नजर आए। भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला तथा सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। पुष्पों और आभूषणों से सजे बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

    भस्म अर्पण की परंपरा के तहत प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित कर मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। इसके बाद कपूर आरती हुई। ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर विधि-विधान के साथ भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती की इस परंपरा के बाद बाबा महाकाल के साकार स्वरूप के दर्शन श्रद्धालुओं को हुए। भस्म आरती के दौरान नंदी हॉल में नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कहकर बाबा महाकाल से मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना की।


    महाकाल मंदिर की परंपरा के अनुसार, महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को महाकाल की दैनिक पूजा परंपरा में विशेष महत्व प्राप्त है। भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति का अद्भुत दृश्य दिखाई दिया। बाबा महाकाल के दर्शन होते ही श्रद्धालु ‘जय श्री महाकाल’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे लगाने लगे। जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य राजा स्वरूप के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

  • हरियाली अमावस्या पर इन 4 चीजों का दान दिला सकता है विशेष पुण्य, शिव जी शनि देव और पितरों की कृपा पाने का माना जाता है शुभ अवसर

    हरियाली अमावस्या पर इन 4 चीजों का दान दिला सकता है विशेष पुण्य, शिव जी शनि देव और पितरों की कृपा पाने का माना जाता है शुभ अवसर


    नई दिल्ली। सावन मास में पड़ने वाली हरियाली अमावस्या को धार्मिक मान्यताओं में विशेष महत्व दिया जाता है। यह तिथि भगवान शिव की उपासना, पितरों के स्मरण और दान पुण्य के लिए शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को कुछ विशेष वस्तुओं का दान करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही शनि देव और पितरों का आशीर्वाद मिलने की भी धार्मिक मान्यता है। साल 2026 में हरियाली अमावस्या 12 अगस्त को पड़ रही है। इस अवसर पर भक्त स्नान के बाद भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं और पूर्वजों की स्मृति में तर्पण तथा दान जैसे धार्मिक कार्य कर सकते हैं।

    धार्मिक परंपराओं के अनुसार हरियाली अमावस्या के दिन सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद श्रद्धा भाव से भगवान शिव की पूजा और स्मरण किया जाता है। पूर्वजों की शांति और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए तर्पण आदि कर्म भी किए जाते हैं। इसके बाद जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा है। मान्यता है कि सच्चे मन और बिना किसी दिखावे के किया गया दान अधिक पुण्यदायी होता है।

    इस दिन छतरी का दान करना शुभ माना जाता है। सावन का मौसम वर्षा से जुड़ा होता है इसलिए जरूरतमंद व्यक्ति को छतरी देना सेवा का भी एक सुंदर माध्यम हो सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जूते या चप्पल का दान भी किया जा सकता है। कहा जाता है कि ऐसे दान से पितरों की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है और जीवन में आने वाली बाधाओं से राहत की कामना की जाती है।

    हरियाली अमावस्या पर दूध या दही का दान करने की भी परंपरा बताई गई है। दूध भगवान शिव की पूजा से भी जुड़ा हुआ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार किसी जरूरतमंद को दूध, दही, चावल, आटा या चीनी जैसी उपयोगी खाद्य सामग्री का दान कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस तरह के दान से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है और घर में सुख शांति तथा सकारात्मकता बनी रहती है।

    काली उड़द की दाल का दान भी इस दिन विशेष माना जाता है। ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं में काले रंग की कुछ वस्तुओं का संबंध शनि देव से जोड़ा जाता है। इसलिए हरियाली अमावस्या पर काली उड़द का दान करने को शनि की कृपा प्राप्त करने से भी जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि जीवन में लगातार आ रही बाधाओं और कार्यों में बनते बिगड़ते हालात के बीच श्रद्धा से किया गया दान मन को सकारात्मक भाव देता है।

    काले तिल का दान भी अमावस्या तिथि पर महत्वपूर्ण माना जाता है। पूर्वजों के नाम से काले तिल का दान करने और तर्पण में तिल के उपयोग की धार्मिक परंपरा रही है। मान्यता है कि इससे पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त होती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। हालांकि दान करते समय मात्रा से अधिक भावना को महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए। अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी जरूरतमंद व्यक्ति को उपयोगी वस्तु देना सबसे बड़ा उद्देश्य होना चाहिए।

    हरियाली अमावस्या का संदेश केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है बल्कि सेवा, दया और जरूरतमंदों की सहायता से भी जुड़ा है। इसलिए इस दिन शिव पूजा और पितरों के स्मरण के साथ भोजन, वस्त्र या दैनिक जरूरत की वस्तुओं का दान भी किया जा सकता है। श्रद्धा और निस्वार्थ भाव से किया गया दान मन में संतोष और सकारात्मकता का भाव पैदा करता है।

  • Surya Grahan 2026 Timing: रात 9:04 बजे से शुरू होगा सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा; जानें क्या होंगे नियम

    Surya Grahan 2026 Timing: रात 9:04 बजे से शुरू होगा सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा; जानें क्या होंगे नियम


    नई दिल्ली। साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात को लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना भारतीय समय के अनुसार रात 9 बजकर 4 मिनट से शुरू होगी और 13 अगस्त की मध्य रात्रि के बाद समाप्त होगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ग्रहण का मध्य समय रात करीब 11 बजकर 16 मिनट रहेगा और इसकी कुल अवधि लगभग 4 घंटे 24 मिनट बताई जा रही है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में भारत में रहने वाले लोगों को इसे लेकर सूतक काल और धार्मिक नियमों का पालन करने की आवश्यकता नहीं होगी।

    सूर्य ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है। जब सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी लगभग एक सीध में आ जाते हैं और चंद्रमा सूर्य तथा पृथ्वी के बीच आ जाता है तब सूर्य की रोशनी का कुछ हिस्सा पृथ्वी तक पहुंचने से रुक जाता है। इसी दौरान पृथ्वी के कुछ हिस्सों से सूर्य ग्रहण दिखाई देता है। इस बार ग्रहण दक्षिण अफ्रीका जिम्बाब्वे जाम्बिया तंजानिया मॉरीशस अंटार्कटिका तथा दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा। अर्जेंटीना और चिली के कुछ क्षेत्रों में भी इसकी दृश्यता बताई गई है।

    भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। इसका मतलब है कि मंदिरों के कपाट बंद करने भोजन को लेकर विशेष प्रतिबंध लगाने या सामान्य दिनचर्या रोकने की जरूरत नहीं होगी। गर्भवती महिलाओं के लिए भी केवल ग्रहण के नाम पर किसी विशेष तरह की पाबंदी वैज्ञानिक रूप से जरूरी नहीं मानी जाती। स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए बच्चे बुजुर्ग और मरीज अपनी जरूरत के अनुसार भोजन और पानी लेते रह सकते हैं।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस सूर्य ग्रहण को कर्क राशि और शतभिषा नक्षत्र से जोड़ा जा रहा है। ज्योतिष में सूर्य को आत्मबल नेतृत्व प्रतिष्ठा प्रशासन और ऊर्जा का कारक माना जाता है। इसलिए ग्रहण को लेकर राजनीतिक प्रशासनिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े क्षेत्रों पर प्रभाव की चर्चाएं भी की जा रही हैं। हालांकि प्राकृतिक आपदाओं राजनीतिक बदलाव या दुर्घटनाओं जैसी घटनाओं की निश्चित भविष्यवाणी केवल ग्रहण के आधार पर वैज्ञानिक रूप से नहीं की जा सकती।

    ग्रहण के दौरान धार्मिक आस्था रखने वाले लोग ध्यान मंत्र जाप और अपने इष्ट देव का स्मरण कर सकते हैं। ऊं घृणि सूर्याय नमः ऊं सूर्याय नमः या गायत्री मंत्र का जाप करने की परंपरा बताई जाती है। जरूरतमंदों को भोजन वस्त्र या आवश्यक सामग्री का दान भी धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है।

    जहां सूर्य ग्रहण दिखाई देगा वहां आंखों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना जरूरी होगा। सूर्य को बिना प्रमाणित सोलर व्यूइंग ग्लास या उचित फिल्टर के सीधे देखने से आंखों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा इसलिए यहां रहने वाले लोगों को इसे देखने के लिए किसी विशेष व्यवस्था की जरूरत नहीं होगी।

    ज्योतिषीय आकलन में कन्या तुला और कुंभ राशि के लिए ग्रहण को अपेक्षाकृत शुभ बताया जा रहा है जबकि कुछ अन्य राशियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। हालांकि किसी व्यक्ति पर ग्रहण का प्रभाव उसकी जन्म कुंडली से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए केवल राशि के आधार पर भय या चिंता करने के बजाय इसे एक खगोलीय घटना के रूप में समझना और धार्मिक मान्यताओं का पालन अपनी आस्था के अनुसार करना बेहतर है।