Category: Religious Astrology

  • Maha Shivratri पर इस बार बन रहे कई दुर्लभ संयोग… जानिए पूजा-जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त और विधि

    Maha Shivratri पर इस बार बन रहे कई दुर्लभ संयोग… जानिए पूजा-जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त और विधि


    नई दिल्ली।
    महाशिवरात्रि (Maha Shivratri) हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन पर्व (Holy Festival) है, जिसका भक्त पूरे साल इंतजार करते हैं. साल 2026 में महाशिवरात्रि (Maha Shivratri 2026) 15 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी. इस बार तिथि को लेकर कुछ लोगों के मन में भ्रम था कि व्रत 15 को रखा जाए या 16 फरवरी को, लेकिन शास्त्रों के अनुसार 15 फरवरी को ही पर्व मनाना उचित रहेगा. फाल्गुन मास (Phalguna Month) के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि इस बार 15 फरवरी शाम 5 बजकर 5 मिनट बजे से शुरू होकर 16 फरवरी शाम 5 बजकर 35 मिनट तक रहेगी. चूंकि, निशीथकाल (मध्य रात्रि) में चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की रात को ही रहेगी, इसलिए इसी दिन महाशिवरात्रि मनाना शास्त्रसम्मत है.


    महाशिवरात्रि पर पूजा का सही समय क्या है?

    अगर आप मंदिर में जलाभिषेक करने जा रहे हैं तो दिन में किसी भी समय जा सकते हैं. लेकिन यदि रुद्राभिषेक करना चाहते हैं तो रात्रि का समय सबसे उत्तम माना गया है।
    प्रथम पहर: शाम 7 बजे से 9 बजे तक
    द्वितीय पहर: रात 10 बजे से 12 बजे तक
    तृतीय पहर: रात 1 बजे से 3 बजे तक
    चतुर्थ पहर: सुबह 4 बजे से 6 बजे तक
    यदि चारों पहर संभव न हो, तो कम से कम एक पहर में रुद्राभिषेक अवश्य करें.


    महाशिवरात्रि 2026 शुभ संयोग (Maha Shivratri 2026 Shubh Sanyog)

    महाशिवरात्रि इस बार बहुत ही विशेष मानी जा रही है. दरअसल इस दिन शिव योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग, आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, शोभन योग, साध्य योग, शुक्ल योग, ध्रुव योग, व्यतिपात और वरियान योग का भी प्रभाव बना रहेगा.

    महाशिवरात्रि 2026 जलाभिषेक शुभ मुहूर्त (Maha Shivratri 2026 Jalabhishek Muhurat)
    इस बार महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए दिनभर कई शुभ मुहूर्त मिलेंग, जिनमें भक्त पूजा-अर्चना कर सकते हैं. पहला मुहूर्त सुबह 8 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. इसके बाद दूसरा मुहूर्त सुबह 9 बजकर 48 मिनट से 11 बजकर 11 मिनट तक का रहेगा.

    तीसरा मुहूर्त अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त रहेगा, जो सुबह 11 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक का रहेगा, जिसमें जल चढ़ाना अत्यंत फलदायी रहेगा. जो श्रद्धालु शाम को पूजा करना चाहते हैं, वे 6 बजकर 11 मिनट से 7 बजकर 47 मिनट के बीच अभिषेक कर सकते हैं. इन सभी मुहूर्तों में श्रद्धा और सच्चे मन से शिवलिंग पर जल अर्पित करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है.


    रुद्राभिषेक में क्या चढ़ाएं?

    भगवान शिव को जल, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, शमी पत्र, भस्म, चंदन और मौसमी फल अर्पित किए जाते हैं. कई लोग पार्थिव शिवलिंग बनाकर भी अभिषेक करते हैं. शिवलिंग पर जल चढ़ाने का विशेष महत्व है. मान्यता है कि जल हमारे भावों को धारण करता है. जब हम सच्चे मन से जल अर्पित करते हैं, तो हमारे मन की सकारात्मक ऊर्जा भी ईश्वर तक पहुंचती है और नकारात्मकता धीरे-धीरे कम होने लगती है.


    महाशिवरात्रि पर जरूर करें ये उपाय

    अगर जीवन में आर्थिक परेशानी है, आय कम है या मेहनत के अनुसार फल नहीं मिल रहा, तो महाशिवरात्रि के दिन व्रत रखें. सुबह स्नान के बाद शिव मंदिर जाकर गंगाजल से अभिषेक करें. ”ऊं नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए 11 बेलपत्र चढ़ाएं. दिन भर श्रद्धा से व्रत रखें. शाम को रुद्राभिषेक कराएं और कम से कम 11 माला ”ऊं नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें. नियमित रूप से मंत्र जाप जारी रखने से धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है.


    तनाव और डिप्रेशन दूर करने का उपाय

    अगर मन में तनाव, नकारात्मकता या बेचैनी रहती है, तो महाशिवरात्रि पर गंगाजल और कच्चे दूध से अभिषेक करें. 11 बेलपत्र अर्पित करें और प्रतिदिन 108 बार ”ऊं नमः शिवाय” का जाप शुरू करें. नियमित मंत्र जाप से मन को शांति मिलती है और सकारात्मक सोच विकसित होती है.

  • Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि कब शुरू होगी, घटस्थापना मुहूर्त और 9 दिन का कैलेंडर

    Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि कब शुरू होगी, घटस्थापना मुहूर्त और 9 दिन का कैलेंडर


    नई दिल्‍ली । चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का सबसे पवित्र पर्व है, जिसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 गुरुवार से शुरू होकर 27 मार्च 2026 शुक्रवार को रामनवमी के साथ समाप्त होगी।

    चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत और समापन प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा: 19 मार्च 2026 सुबह 6:52 बजे से

    समाप्ति: 27 मार्च 2026 रामनवमी

    नवरात्रि की अवधि: 9 दिन

    घटस्थापना मुहूर्त 2026

    इस साल घटस्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त हैं:

    सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे तक

    दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक

    पहले दिन बनने वाले शुभ योग 19 मार्च 2026

    सर्वार्थ सिद्धि योग: 20 मार्च सुबह 04:05 से 06:25

    शुक्ल योग: प्रातःकाल से रात 01:17 तक

    ब्रह्म योग: शुक्ल योग के बाद

    इन योगों के कारण कलश स्थापना और पूजा का फल बढ़ जाता है।
    राहुकाल 19 मार्च 2026
    राहुकाल: दोपहर 2:00 बजे से 3:30 बजे तक
    इस समय कोई शुभ कार्य या पूजा न करें। घटस्थापना राहुकाल से पहले या बाद में करें।

    चैत्र नवरात्रि 2026 – 9 दिन का कैलेंडर

    दिन तारीख वार तिथि पूजा
    दिन 1 19 मार्च गुरुवार प्रतिपदा घटस्थापना, शैलपुत्री पूजा
    दिन 2 20 मार्च शुक्रवार द्वितीया ब्रह्मचारिणी पूजा
    दिन 3 21 मार्च शनिवार तृतीया चंद्रघंटा पूजा
    दिन 4 22 मार्च रविवार चतुर्थी कूष्मांडा पूजा
    दिन 5 23 मार्च सोमवार पंचमी स्कंदमाता पूजा
    दिन 6 24 मार्च मंगलवार षष्ठी कात्यायनी पूजा
    दिन 7 25 मार्च बुधवार सप्तमी कालरात्रि पूजा, महासप्तमी
    दिन 8 26 मार्च गुरुवार अष्टमी महागौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी
    दिन 9 27 मार्च शुक्रवार नवमी नवरात्रि पारण, रामनवमी

  • बुधवार 11 फरवरी शुभ-अशुभ समय पंचांग अनुसार सर्वार्थ सिद्धि अमृत सिद्धि योग और राहुकाल

    बुधवार 11 फरवरी शुभ-अशुभ समय पंचांग अनुसार सर्वार्थ सिद्धि अमृत सिद्धि योग और राहुकाल


    नई दिल्ली।11 फरवरी बुधवार को पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि सुबह 9 बजकर 58 मिनट तक प्रभावी रहेगी इसके बाद दशमी तिथि प्रारंभ होगी नक्षत्र अनुराधा सुबह 10 बजकर 53 मिनट तक रहेगा इसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र शुरू होगा चंद्रमा वृश्चिक राशि में संचार करेंगे

    सूर्योदय इस दिन 7 बजकर 3 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 8 मिनट पर होगा 11 फरवरी के प्रमुख योग की बात करें तो सुबह 7 बजकर 3 मिनट से 10 बजकर 53 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग दोनों एक साथ रहेंगे यह दुर्लभ संयोग अत्यंत शुभ माना जाता है इस समय नए कार्य शुरू करना पूजा हवन दान और अन्य मंगल कार्य करने से विशेष लाभ होता है

    अन्य शुभ मुहूर्तों में ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 19 मिनट से 6 बजकर 11 मिनट तक रहेगा विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 26 मिनट से 3 बजकर 11 मिनट तक रहेगा और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 6 मिनट से 6 बजकर 32 मिनट तक रहेगा अमृत काल 12 फरवरी की सुबह 3 बजकर 52 मिनट से 5 बजकर 39 मिनट तक रहेगा

    अशुभ समय का ध्यान रखना भी आवश्यक है योग व्याघात 12 फरवरी की देर रात 2 बजकर 30 मिनट तक रहेगा वर्ज्य शाम 5 बजकर 8 मिनट से 6 बजकर 55 मिनट तक रहेगा और गंड मूल सुबह 10 बजकर 53 मिनट से अगले दिन सुबह तक प्रभावी रहेगा पंचांग अनुसार अशुभ काल से दूर रहना और महत्वपूर्ण कार्यों को शुभ समय में करना ही उत्तम माना गया है

    राहुकाल 11 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 36 मिनट से 1 बजकर 59 मिनट तक रहेगा इस समय कोई भी शुभ कार्य करना निष्फल होता है और बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है अन्य अशुभ समय में यमगंड सुबह 8 बजकर 26 मिनट से 9 बजकर 49 मिनट तक गुलिक काल सुबह 11 बजकर 12 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक और दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा बुधवार का दिन विघ्न विनाशन गणेश और बुध ग्रह को समर्पित है इस दिन गणपति और बुध ग्रह की विधि विधान से पूजन करने से बाधाओं का नाश होता है और जीवन में सुख शांति और समृद्धि का संचार होता है बुध ग्रह भी शांत होने के कारण कार्यों में सफलता मिलती है

    इस प्रकार 11 फरवरी का दिन पंचांग अनुसार अत्यंत शुभ योगों वाला और कुछ विशेष समयों में सावधानी रखने वाला दिन है सुबह के सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग से नए कार्य शुरू करने के लिए सर्वोत्तम समय मिलता है राहुकाल और अन्य अशुभ समय में सावधानी बरतकर किसी भी प्रकार की बाधा से बचा जा सकता है गणेश और बुध ग्रह की पूजा विधिपूर्वक करने से दिन भर की सफलता सुनिश्चित की जा सकती है

  • सनातन परंपरा का महापर्व विजया एकादशी: इन 10 उपायों से घर में बरसेगा लक्ष्मी-नारायण का आशीर्वाद

    सनातन परंपरा का महापर्व विजया एकादशी: इन 10 उपायों से घर में बरसेगा लक्ष्मी-नारायण का आशीर्वाद


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में फाल्गुन माह के कृष्णपक्ष में पड़ने वाली एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है. सनातन परंपरा में विजया एकादशी की पूजा और व्रत को विधि-विधान से करने पर बड़े से बड़ा संकट दूर और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. इस व्रत के पुण्य प्रताप से भगवान राम ने भी त्रेतायुग में लंका के राजा रावण पर विजय प्राप्त की थी. सुख, सौभाग्य, सफलता और विजय का आशीर्वाद दिलाने वाली विजया एकादशी 13 फरवरी 2026 को रखा जाएगा. आइए विजया एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु की सरल सनातनी विधि से की जाने वाली पूजा के उन 10 अचूक उपायों के बारे में विस्तार से जानते हैं, जिसे करते ही सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

    1. विजया एकादशी के दिन गंगा नदी अथवा किसी पवित्र जल तीर्थ पर स्नान करने का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. यदि आप इस दिन किसी कारण से गंगा तट पर न जा पाएं तो पुण्य की प्राप्ति के लिए घर में ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें.

    2. हिंदू धर्म में व्रत एवं पूजा के दिन स्नान के साथ दान का भी बहत ज्यादा महत्व माना गया है, इसलिए इस दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार दान जरूर करें. विजया एकादशी के दिन किसी मंदिर के पुजारी या फिर किसी जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें.

    3. यदि आपके जीवन में इन दिनों आर्थिक संकट बना हुआ है या फिर आप किसी कार्य विशेष में सफलता पाना चाहते हैं तो आपको विजया एकादशी वाले दिन भगवान विष्णु की पूजा में विशेष रूप से एक पीले कपड़े में हल्दी की दो गांठें अर्पित करना चाहिए. पूजा के बाद उसे अपने कार्यस्थल या बैग में रख लें.

    4. हिंदू मान्यता के अनुसार विजया एकादशी के दिन विष्णु भगवान का दक्षिणावर्ती शंख से जलाभिषेक करने से उनका विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है. यदि संभव हो तो शंख से केसर मिले दूध या फिर पंचामृत से श्री हरि का अभिषेक करें.

    5. हिंदू धर्म में किसी भी मनोकामना को पूरा करने के लिए मंत्र जप को उत्तम उपाय माना गया है. ऐसे में विजया एकादशी व्रत वाले दिन साधक को भगवान श्री विष्णु के मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ का तुलसी की माला से अधिक से अधिक जप करना चाहिए.

    6. हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु की पूजा में पीले रंग का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. ऐसे में विजया एकादशी के दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु की पूजा में पीले रंग के पुष्प, पीले फल और पीले रंग की मिठाई अर्पित करें.

    7. विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु से सुख-सौभाग्य का आशीर्वाद पाने के लिए उन्हें पीला चंदन या ​केसर का तिलक अर्पित करके उसे प्रसाद स्वरूप अपने माथे पर लगाएं. इसी प्रकार श्री हरि को पीले रंग का धागा अर्पित करके अपने दाहिने हाथ में बाधें.

    8. हिंदू धर्म में तुलसी जी को विष्णुप्रिया कहा गया है. ऐसे में आपकी विजया एकादशी की पूजा और व्रत तब तक अधूरा है जब तक आप श्री हरि की पूजा में तुलसी दल नहीं चढ़ाते हैं.  हादेव को मनाना है तो महाशिवरात्रि पर राशि के अनुसार ही करें ज्योर्तिलिंग का दर्शन और पूजन

    9. यदि आप चाहते हैं कि आपको श्री हरि संग माता लक्ष्मी का भी आशीर्वाद मिले तो आपको विजया एकादशी वाले दिन तुलसी माता को जल देने के बाद शुद्ध देशी घी का दीया जलाना चाहिए और उनकी परिक्रमा करनी चाहिए.

    10. विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करते समय न सिर्फ एकादशी व्रत की कथा सुनें या फिर पढ़ें बल्कि इसके साथ श्री विष्णु सहस्त्रनाम, नारायण कवच या फिर श्रीमद्भागवत कथा का पाठ भी जरूर करें.

  • 300 साल बाद महाशिवरात्रि पर दुर्लभ ज्योतिष संयोग: 15 फरवरी को भगवान शिव से आपकी हर मनोकामना हो सकती है पूरी

    300 साल बाद महाशिवरात्रि पर दुर्लभ ज्योतिष संयोग: 15 फरवरी को भगवान शिव से आपकी हर मनोकामना हो सकती है पूरी


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र पर्व महाशिवरात्रि इस बार 15 फरवरी, 2026 को मनाया जाएगा। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन तथा शिव के भक्ति, साधना और उपवास से जुड़े अनगिनत धार्मिक महत्वों से संपन्न है। इस वर्ष महाशिवरात्रि को ज्योतिषीय दृष्टि से भी एक दुर्लभ और शक्तिशाली संयोग के साथ जोड़ा जा रहा है, जिसे करीब 300 साल बाद बन रहा शुभ योग माना जा रहा है।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन कई प्रमुख ग्रहों की चाल में बदलाव देखने को मिलेगा, जिसमें सूर्य, बुध और शुक्र के संयोग जैसे दुर्लभ ग्रह-योग शामिल हैं, जो जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालने वाले बताए जा रहे हैं। इसी के साथ चंद्रमा का मकर राशि में गोचर, बुध का शतभिषा से पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश और मंगल का श्रवण से धनिष्ठा नक्षत्र में जाना भी इसी दिन विशेष शुभ माना जा रहा है।

    आधिकारिक पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि तिथि 15 फरवरी को शाम 05:04 बजे से आरंभ होकर 16 फरवरी को शाम 05:34 बजे तक रहेगी, और इस दिन भक्त शिवलिंग पर विधिवत पूजा, रुद्राभिषेक और निशीथ-काल में जागरण कर भोलेनाथ का आह्वान करते हैं। इस रात को शिव के तत्त्वों का प्रभाप्रवाह बढ़ा हुआ माना जाता है, जिससे शिवभक्ति, ध्यान और मंत्र जाप का विशेष फल प्राप्त होता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र का संयोग भी विशेष रूप से शुभ माना जाता है, क्योंकि यह नक्षत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इसका प्रभाव साधक के जीवन में दिव्य ऊर्जा को प्रेरित कर सकता है। इस संयोग को सर्वार्थ सिद्धि योग भी कहा जा रहा है, जिसमें साधना, पूजा, व्रत और दान-पुण्य का असर असाधारण फल प्रदान कर सकता है।

    शास्त्रों और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक, दूध-दही-गंगा जल का समर्पण, बेलपत्र-धतूरा चढ़ाना, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और ध्यान करने से भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है। इससे कष्टों का निवारण, मनोकामना की सिद्धि, मानसिक शांति, जीवन में सकारात्मक बदलाव और समृद्धि की संभावनाओं में वृद्धि होती है।

    विशेष रूप से यह माना जाता है कि महाशिवरात्रि पर जो साधक श्रद्धा, भक्ति और संतुलित साधना के साथ पूजा-अर्चना करता है, उसे भगवान शिव की आशीर्वाद से आध्यात्मिक उन्नति, कठिनाइयों से मुक्ति तथा जीवन की हर मनोकामना की पूर्ति के मार्ग खुलते दिखाई देते हैं। यह दिन केवल धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, कर्म-निवृति और शिव-तत्त्व से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है।

  • चंद्रमा का वृश्चिक गोचर बढ़ाएगा मानसिक दबाव जानिए किन राशियों पर पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव

    चंद्रमा का वृश्चिक गोचर बढ़ाएगा मानसिक दबाव जानिए किन राशियों पर पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव


    नई दिल्ली :ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन और भावनाओं का सबसे बड़ा कारक माना गया है। चंद्रमा की स्थिति व्यक्ति की मानसिक अवस्था से लेकर सेहत और निर्णय क्षमता तक को प्रभावित करती है। यही कारण है कि चंद्रमा के गोचर को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। चंद्रमा सबसे तेज गति से चलने वाले ग्रह हैं और लगभग ढाई दिन में एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश कर जाते हैं। इस बार चंद्रमा का गोचर कुछ राशियों के लिए चिंता और चुनौतियां लेकर आ रहा है।

    ज्योतिषियों के अनुसार वर्तमान समय में चंद्रमा तुला राशि में विराजमान हैं और 10 फरवरी को देर रात 1 बजकर 11 मिनट पर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। वृश्चिक राशि चंद्रमा की नीच राशि मानी जाती है। नीच अवस्था में चंद्रमा का प्रभाव मन को अस्थिर कर सकता है। इससे तनाव बढ़ता है और व्यक्ति छोटी छोटी बातों को लेकर भी मानसिक दबाव महसूस करता है। ऐसे में कुछ राशि वालों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

    मेष राशि के जातकों के लिए यह गोचर मानसिक तनाव को बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। बीती बातों को लेकर विवाद उत्पन्न हो सकता है। मन अशांत रहेगा और स्वयं को थका हुआ महसूस कर सकते हैं। इस समय किसी भी प्रकार का निवेश करने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह लेना आवश्यक होगा। पारिवारिक या कार्यस्थल से जुड़ी किसी बात पर बहस की स्थिति बन सकती है। प्रेम संबंधों में भी संयम बरतने की आवश्यकता रहेगी। धैर्य और समझदारी से काम लेना इस समय सबसे जरूरी होगा।

    मिथुन राशि वालों के लिए चंद्रमा का यह गोचर कुछ उलझनें लेकर आ सकता है। किसी नए रिश्ते में जल्दबाजी करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे मतभेद बढ़ सकते हैं। नौकरी परिवर्तन या यात्रा को लेकर मन में असमंजस बना रह सकता है। स्वास्थ्य के लिहाज से मौसमी बीमारियां परेशान कर सकती हैं इसलिए खानपान और दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी होगा। कला और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को किसी बात को लेकर मानसिक दबाव महसूस हो सकता है।

    धनु राशि के जातकों को इस समय सेहत के प्रति विशेष सतर्कता बरतनी होगी। थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है जिससे रोजमर्रा के कार्य प्रभावित हो सकते हैं। मनचाहे परिणाम पाने के लिए अपेक्षा से अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना जरूरी होगा और अहंकार से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। मानसिक बेचैनी और अनावश्यक चिंताएं परेशान कर सकती हैं। किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले सोच विचार करना लाभकारी रहेगा।

    ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि चंद्रमा का यह गोचर स्थायी प्रभाव नहीं डालेगा लेकिन इन कुछ दिनों में मानसिक संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। ध्यान योग और सकारात्मक सोच से इस प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सही निर्णय और संयम से इन चुनौतियों को अवसर में बदला जा सकता है।

  • विजया एकादशी 2026: तुलसी के विशेष उपाय से दूर होंगी दरिद्रता, घर में आएगी मां लक्ष्मी की कृपा

    विजया एकादशी 2026: तुलसी के विशेष उपाय से दूर होंगी दरिद्रता, घर में आएगी मां लक्ष्मी की कृपा


    नई दिल्ली ।  हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह की विजया एकादशी 13 फरवरी, 2026 को मनाई जाएगी, जो कृष्ण पक्ष की ग्यारस तिथि पर पड़ती है। विजया शब्द का अर्थ ही विजय है और इस पावन दिन का महत्व प्राचीन धर्मग्रंथों में भी वर्णित है। कहा जाता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने लंका-यात्रा से पूर्व उसी एकादशी का व्रत रखकर विजय प्राप्त की थी, इसी से इस दिन का नाम विजया एकादशी पड़ा।

    धार्मिक मान्यता है कि विजया एकादशी का व्रत कर लेने से जीवन में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं, मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आंतरिक विजय प्राप्त होती है। भक्त सुबह स्नान, भगवान विष्णु की पूजा और व्रत कथा सुनकर दिनभर साधना में लीन रहते हैं। पारण व्रत समाप्ति 14 फरवरी को द्वादशी तिथि में निर्धारित शुभ समय में किया जाता है, जो विशेष मान्यता रखता है।

    इस पावन दिन तुलसी के साथ किए गए उपायों को भी बेहद शुभ माना जाता है। तुलसी का पौधा भगवान विष्णु का प्रिय माना जाता है और पूजा में उसकी महिमा वर्णित है। धार्मिक परंपरा के अनुसार विजया एकादशी के दिन तुलसी के पास दीपक जलाना, फल-भोग अर्पित करना और परिक्रमा करना विशेष फलदायी होता है। तुलसी के पास घी का दीपक प्रज्वलित करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा मिटती है और सुख-शांति तथा धन-समृद्धि में वृद्धि होती है।

    भक्त भगवान विष्णु को भोग में फल और मिठाई अर्पित करते हैं और उसमें तुलसी के कुछ पत्थर भी शामिल करते हैं। ऐसा करने से भगवान विष्णु के साक्षात आशीर्वाद की प्राप्ति होती है, जिससे जीवन में विजय-आत्मबल और बाधा-उन्मूलन की मान्यता जुड़ी हुई है।

    पौराणिक आस्था के अनुसार विजया एकादशी के दिन तुलसी की पूजा के समय तुलसी के 7 या 11 बार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है। इस दौरान तुलसी के मंत्रों का जप और अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करना चाहिए। ऐसा करने से कहा जाता है कि मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और इच्छित फल मिलने में सहायता मिलती है।

    विजया एकादशी का व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्म-शुद्धि, भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा के आराधना का एक अवसर भी है। भक्त इस दिन भगवान विष्णु और तुलसी की पूजा कर अपने जीवन में धन, समृद्धि, भय मोचन और मानसिक स्थिरता प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
    धार्मिक परंपरा में यह भी कहा जाता है कि तुलसी को जल न देना चाहिए क्योंकि एकादशी के दिन तुलसी स्वयम् निर्जला व्रत करती हैं, इसलिए तुलसी को जल देना वर्जित माना जाता है। पूजा के दौरान तुलसी को छूना भी वर्जित बताया जाता है, और आसपास की जगह को स्वच्छ रखना अत्यंत आवश्यक होता है ताकि पवित्रता बनी रहे और व्रत के शुभ फल प्राप्त हों

  • धर्म कर्म: फाल्गुन अमावस्या पर पितरों के लिए करें यह पवित्र कर्म, पितृ दोष से मिलेगी मुक्ति

    धर्म कर्म: फाल्गुन अमावस्या पर पितरों के लिए करें यह पवित्र कर्म, पितृ दोष से मिलेगी मुक्ति


    नई दिल्ली। फाल्गुन मास की अमावस्या हिंदू धर्म में पितरों की शांति और पितृ दोष से मुक्ति के लिए एक अत्यंत शुभ और पुण्यदायी दिन माना जाता है। इस वर्ष यह तिथि 16 फरवरी, 2026 की शाम 05:34 बजे से प्रारंभ होकर 17 फरवरी, 2026 की सायं 05:30 बजे तक रहेगी, इसलिए साल 2026 में फाल्गुन अमावस्या 17 फरवरी, मंगलवार को मनाई जाएगी।

    धार्मिक मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा अर्चना, तर्पण पिंडदान और दान पुण्य कर्म से पितृ दोष होने पर भी मुक्ति प्राप्त होती है और पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। यह अवसर आत्मिक शुद्धि, मृत्यु के बाद के कर्जों का निवारण तथा परिवार में सुख शांति, समृद्धि और संतुलन लाने के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

    सबसे पहले पवित्र स्नान करना शुभफलदायी होता है। ब्रह्म मुहूर्त या सुबह जल्दी उठकर आप पवित्र नदी जैसे गंगा में स्नान करें। यदि नदी का स्नान संभव न हो, तो घर पर गंगाजल में तिल, कुश और काले तिल मिलाकर स्नान करना भी पुण्यदायी माना जाता है। स्नान के बाद अपने पूर्वजों को पितृ तर्पण और पिंडदान करना चाहिए, जिसमें जल, तिल, अन्न और शुद्ध मन से प्रार्थना शामिल हो।

    तर्पण करते समय दक्षिण की ओर मुख करके जल को कंठ के पास से बहाते हुए ॐ पितृभ्यो नमः जैसे मंत्र का उच्चारण किया जाता है, जिससे पूर्वजों को शांति स्वास्थ्य और मोक्ष प्राप्त होने की मान्यता प्रचलित है। पिंडदान में शुद्ध अन्न और तिल से बनाए गए पिंड को गंगा यमुना जैसे पवित्र नदी के तट पर या किसी पवित्र स्थान पर अर्पित करें। इससे पितृलोक में निवास करने वाले पूर्वजों को संतुष्टि और पुण्य की प्राप्ति होती है।

    अमावस्या तिथि में दान पुण्य का भी विशेष महत्व है। ब्राह्मणों को भोजन कराना, गरीबों को अन्न, वस्त्र, मसाले, दाल चावल आदि दान करना तथा गो दैनिक सेवा या पशु पक्षियों को पानी भोजन देना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। इससे जीवन में नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और संपन्नता आती है।

    शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और उसके चारों ओर सात परिक्रमा करना लाभकारी होता है। इससे पितरों की शांति और परिवार में सुख समृद्धि का आगमन होता है, साथ ही गृहस्थ जीवन में बाधाएँ कम होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    धार्मिक परंपरा के अनुसार अमावस्या पितरों से जुड़ी तिथि है, इसलिए इस दिन स्नान, दान पुण्य, तर्पण पिंडदान तथा मंत्र जाप करने से पितृ दोष से मुक्ति पाई जा सकती है और पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है।

  • Grah Gochar 2026: महाशिवरात्रि पर 3 ग्रहों की चाल बदलेगी, इन 7 राशियों के जीवन में आएगी समृद्धि

    Grah Gochar 2026: महाशिवरात्रि पर 3 ग्रहों की चाल बदलेगी, इन 7 राशियों के जीवन में आएगी समृद्धि


    नई दिल्ली । साल 2026 की महाशिवरात्रि इस बार केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। द्रिक पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि 15 फरवरी, रविवार को पड़ रही है और इस दिन तीन प्रमुख ग्रहों की चाल में बदलाव होगा। मंगल श्रवण नक्षत्र से निकलकर धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, चंद्रमा शनि की राशि मकर में गोचर करेगा और बुध ग्रह रात में शतभिषा नक्षत्र से पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में गोचर करेगा। खास बात यह है कि इस दिन बुध दक्षिणावर्ती से उत्तरवर्ती होंगे, जिसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना जाता है।इन ग्रहों के गोचर का असर सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन विशेष रूप से सात राशियों के लिए यह दिन बेहद फलदायी रहेगा। कहा जाता है कि इस अवसर पर शिव की विशेष कृपा इन राशियों पर रहेगी और उनके जीवन में धन, सफलता और समृद्धि के नए अवसर उत्पन्न होंगे।

    मेष राशि

    मेष राशि के जातकों के लिए यह समय नई ऊर्जा और सकारात्मक अवसर लेकर आएगा। करियर और व्यवसाय में अचानक लाभ मिलने की संभावना है। लंबे समय से रुके काम इस समय पूरे हो सकते हैं और घर में सुख-शांति का माहौल बना रहेगा। धन की स्थिति मजबूत रहेगी और आपकी मेहनत का फल जल्दी दिखाई देगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन लंबे काम और तनाव से बचने के लिए आराम जरूरी है। किसी नए निवेश या पैसे से जुड़े निर्णय सोच-समझकर लें, ताकि भविष्य में फायदे के अवसर बनें।

    मिथुन राशि
    मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय बदलाव और सफलता लेकर आएगा। नौकरी या व्यवसाय में बदलाव आपके लिए लाभकारी साबित हो सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में प्रयास सफल रहेंगे और मनोवांछित परिणाम मिलेंगे। परिवार में प्रेम और सहयोग बना रहेगा और मानसिक तनाव कम होगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा। इस समय नए कौशल सीखना या किसी प्रशिक्षण में भाग लेना भविष्य में फायदेमंद रहेगा।

    कर्क राशि

    कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय बेहद शुभ रहेगा। घरेलू मामलों में मनचाही सफलता मिलेगी और माता-पिता या बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलेगा। वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और पुराने आर्थिक तनाव दूर होंगे। यात्रा के लिए समय अनुकूल है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन समय-समय पर आराम लेना आवश्यक है। परिवार के साथ अधिक समय बिताने से मानसिक शांति बढ़ेगी।

    सिंह राशि
    सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय करियर में लाभ और समाज में मान-सम्मान बढ़ाने वाला रहेगा। पुराने निवेश या संपत्ति से लाभ मिलने की संभावना है। शिक्षा और बच्चों के मामलों में भी सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। मित्र और परिवार का सहयोग सहायक रहेगा। व्यापार या नौकरी में नए प्रस्तावों पर ध्यान दें, क्योंकि इस समय लाभ की संभावना अधिक है।

    तुला राशि

    तुला राशि के जातकों के लिए यह समय नए अवसर और खुशियाँ लेकर आएगा। जीवनसाथी और परिवार के साथ संबंध मजबूत होंगे। व्यापार या पेशेवर क्षेत्र में नई योजनाएं सफल होंगी। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा और मानसिक संतुलन बना रहेगा। यात्रा और शौक के लिए समय अनुकूल है। इस समय अपने लक्ष्यों को लिखकर प्राथमिकता देना लाभकारी रहेगा।

    मकर राशि

    मकर राशि के जातकों के लिए यह समय भावनात्मक और आर्थिक रूप से सशक्त रहने वाला है। पुराने विवाद सुलझ सकते हैं और परिवार में सुख-शांति का माहौल रहेगा। धन लाभ के नए अवसर सामने आएंगे और नए काम शुरू करने के लिए समय अनुकूल है। दोस्तों और सामाजिक संपर्कों में वृद्धि होगी। अपने विचारों और योजनाओं को लिखकर उनका पालन करना लाभकारी रहेगा।

    मीन राशि

    मीन राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी रहेगा। नौकरी या व्यवसाय में बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। पुराने कर्ज या परेशानियों से मुक्ति मिलेगी। शिक्षा और कौशल क्षेत्र में सफलता मिलेगी और मित्र व परिवार का सहयोग सहायक साबित होगा। वित्तीय मामलों में साफ-सफाई और रिकॉर्ड रखना भविष्य में फायदे का कारण बनेगा। इस समय अपने प्रयासों को सही दिशा में लगाने से लंबे समय के लिए लाभ सुनिश्चित होगा।

  • मंगलवार: हनुमानजी की आराधना से कठिनाइयाँ दूर, जीवन में आएगी सुख-समृद्धि

    मंगलवार: हनुमानजी की आराधना से कठिनाइयाँ दूर, जीवन में आएगी सुख-समृद्धि

    नई दिल्ली। हिंदू धार्मिक परंपरा में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की विशेष आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मंगलवार को हनुमानजी की पूजा-अर्चना करने से जीवन में बाधाएँ कम होती हैं, मानसिक शांति मिलती है और सुख-समृद्धि आती है। इस दिन किये गए विशेष उपायों से देवी-देवताओं की कृपा पाकर कठिनाइयों से भी मुक्ति मिल सकती है।

    धार्मिक आस्था के अनुसार मंगलवार को सुबह स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करने के बाद हनुमान चालीसा, बजरंगबाण या मारुति स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में आने वाली परेशानियों का नाश होता है और संकट दूर हो जाते हैं। हनुमान चालीसा की भक्ति से हनुमानजी संकटों से रक्षा करते हैं और भक्त को साहस तथा शक्ति प्रदान करते हैं।

    इस दिन श्रीराम के नाम का स्मरण तथा जाप भी अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। हनुमानजी को प्रभु राम का नाम अत्यंत प्रिय है, इसलिए मंगलवार के दिन राम नाम का उच्चारण निरंतर करने से मन और बुद्धि में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    आस्था अनुसार मंगलवार को तुलसी के पास दीपक जलाना भी शुभ फलदायी होता है। तुलसी के पास जल या दीपक प्रज्वलित करने से घर में सकारात्मक वातावरण बनता है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। तुलसी के उपाय से गृहस्थ जीवन में सुख-शांति तथा लक्ष्मीजी का आगमन भी माना जाता है।

    लाल जनेऊ अर्पण तथा विशेष विधि से पूजा करना भी मंगलमय फल देता है। मंगलवार को मंदिर में जाकर या घर में ही हनुमानजी को लाल जनेऊ अर्पित करने से कार्यों में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं और बिगड़े हुए कार्यों के सफल होने की संभावनाएँ बढ़ती हैं।

    अन्य उपायों में हनुमानजी के मंदिर में दीपक जलाना, लाल या केसरिया वस्त्र धारण कर पूजा करना और प्रसाद के रूप में गुड़-चना, मेवा-फल अर्पित करना शामिल है। इस प्रकार की भक्ति और उपायों से मनोबल उच्च रहता है तथा जीवन में आने वाली कठिनाइयाँ बलवान उपाय के रूप में कमजोर पड़ती हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगलवार को हनुमानजी की भक्ति निरंतर करने से न केवल भौतिक जीवन की समस्याओं का समाधान होता है, बल्कि मानसिक संतुलन, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त होती है। इससे घर-परिवार में समृद्धि तथा संतोषपूर्ण जीवन का अनुभव होता है, जिससे भक्त का संपूर्ण कल्याण सुनिश्चित होता है।