Category: Religious Astrology

  • बुध-शनि का महासंयोग: 30 साल बाद बना 'द्विद्वादश योग', इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत..

    बुध-शनि का महासंयोग: 30 साल बाद बना 'द्विद्वादश योग', इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत..


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की युति और उनकी स्थिति को मानवीय जीवन में बड़े बदलावों का कारक माना जाता है। इसी कड़ी में शुक्रवार 6 फरवरी 2026 की शाम एक ऐसी खगोलीय घटना घटने जा रही है जो करीब तीन दशकों के लंबे अंतराल के बाद दोहराई जा रही है। द्रिक पंचांग की गणनाओं के अनुसार इस दिन बुध ग्रह कुंभ राशि में विराजमान होंगे जबकि न्याय के देवता शनि देव मीन राशि में संचरण कर रहे होंगे। इन दोनों ग्रहों की यह स्थिति ज्योतिष में ‘द्विद्वादश योग’ का निर्माण करेगी जिसे आकस्मिक धन लाभ और शत्रुओं पर विजय दिलाने वाला एक अत्यंत प्रभावशाली योग माना जाता है।

    शास्त्रों के अनुसार जब दो ग्रह एक-दूसरे से दूसरे और बारहवें भाव की दूरी पर स्थित होते हैं तो इसे द्विद्वादश योग की संज्ञा दी जाती है। इस बार का संयोग इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें बुध की तार्किक बुद्धि और शनि की अनुशासनात्मक ऊर्जा का मिलन हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योग विशेष रूप से न्याय प्रणाली प्रशासन बड़े व्यापारिक घरानों और रणनीतिक योजना बनाने वाले लोगों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

    इस दुर्लभ ग्रह दशा का सर्वाधिक सकारात्मक प्रभाव पांच विशेष राशियों पर देखने को मिलेगा। वृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि उनके लिए नौकरी और व्यापार में अचानक लाभ के द्वार खुल सकते हैं। वर्षों पुराना अटका हुआ निवेश न केवल मुनाफा देगा बल्कि विरोधियों पर आपकी बढ़त भी सुनिश्चित होगी। वहीं कर्क राशि के लोगों के लिए यह योग आर्थिक मोर्चे पर बड़ी मजबूती लेकर आ रहा है। व्यापारिक निर्णयों में सूझबूझ और नई साझेदारियां भविष्य की राह आसान करेंगी और पुराने विवादों से छुटकारा मिलेगा।

    सिंह राशि के जातकों के लिए यह करियर की उड़ान का समय है। उन्हें कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां या पदोन्नति मिल सकती है जिससे समाज में उनकी प्रतिष्ठा और आय के स्रोतों में वृद्धि होगी। कन्या राशि के जातकों की बात करें तो उनके लिए यह परिवर्तन शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई उम्मीदें लेकर आएगा। लंबे समय से रुकी हुई परियोजनाएं अब गति पकड़ेंगी और उनकी कार्यक्षमता में जबरदस्त सुधार होगा। अंत में मकर राशि के जातकों के लिए यह पेशेवर जीवन में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है जहाँ योजनाबद्ध तरीके से किए गए प्रयास उन्हें आर्थिक स्थिरता और मानसिक शांति प्रदान करेंगे। हालांकि ज्योतिषाचार्यों का यह भी कहना है कि इन शुभ प्रभावों की तीव्रता व्यक्ति की अपनी जन्म कुंडली और वर्तमान महादशा पर भी निर्भर करेगी इसलिए धैर्य और विवेक के साथ आगे बढ़ना ही श्रेयस्कर होगा।

  • गुरुवार के उपाय: विष्णु और गुरु बृहस्पति की पूजा से बढ़ाएं सुख-समृद्धि..

    गुरुवार के उपाय: विष्णु और गुरु बृहस्पति की पूजा से बढ़ाएं सुख-समृद्धि..


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गुरुवार को भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की उपासना का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन ज्ञान, करियर, विवाह, धन और सामाजिक सम्मान से जुड़ा है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, जिन जातकों की कुंडली में गुरु कमजोर होता है, उनके लिए गुरुवार के उपाय विशेष रूप से लाभकारी माने जाते हैं गुरु बृहस्पति को धर्म, नीति, शिक्षा और सदाचार का कारक ग्रह माना गया है। यही कारण है कि गुरुवार को किए गए दान, पूजा और मंत्र जाप से सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

    गुरुवार के प्रमुख उपाय
    धार्मिक परंपरा के अनुसार गुरुवार की शुरुआत स्नान से करनी चाहिए। स्नान के जल में हल्दी मिलाकर स्नान करना शुभ माना गया है। इसके बाद पीले वस्त्र पहनने की परंपरा है। पूजा में भगवान विष्णु को पीले फूल, हल्दी और पीले फल अर्पित किए जाते हैं।केले के वृक्ष की पूजा भी विशेष फलदायी मानी जाती है। श्रद्धालु केले के पेड़ की जड़ में जल, हल्दी, चने की दाल और गुड़ अर्पित कर दीपक जलाते हैं। ऐसा करने से गुरु दोष शांत होता है और आर्थिक अड़चनें दूर होती हैं।

    मंत्र जाप और दान
    गुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त करने के लिए मंत्र जाप अत्यंत प्रभावकारी है। 108 बार
    ॐ बृं बृहस्पतये नमः या ॐ ऐं श्रीं बृहस्पतये नमः का जाप करना शुभ माना जाता है। दान की दृष्टि से गुरुवार को हल्दी, पीले वस्त्र, चने की दाल, गुड़ या केसर जरूरतमंदों को देना लाभकारी होता है। गाय को चने की दाल और गुड़ खिलाने से भी गुरु ग्रह मजबूत होता है।

    विशेष सावधानियां
    कुछ परंपराओं के अनुसार, गुरुवार की सुबह हल्दी और गंगाजल मिलाकर घर के मुख्य द्वार पर छिड़काव करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। वहीं इस दिन बाल कटवाने, दाढ़ी बनवाने, कपड़े धोने या हल्दी और पैसे उधार देने से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से गुरु की स्थिति कमजोर हो सकती है।धार्मिक विशेषज्ञ मानते हैं कि नियमित श्रद्धा और संयम के साथ किए गए ये उपाय मानसिक शांति और जीवन में संतुलन बनाए रखने में सहायक होते हैं।

  • बद्रीनाथ की बर्फीली घाटी में आध्यात्मिक अग्नि: -15°C तापमान और 3 फीट बर्फ के बीच 15 साधकों का अखंड तप

    बद्रीनाथ की बर्फीली घाटी में आध्यात्मिक अग्नि: -15°C तापमान और 3 फीट बर्फ के बीच 15 साधकों का अखंड तप


    नई दिल्ली । उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित बद्रीनाथ धाम इस समय सफेद बर्फ की मोटी चादर में लिपटा हुआ है। जहाँ कड़ाके की ठंड और बर्फीली हवाएं आम इंसान के हौसले पस्त कर देती हैं, वहीं भगवान बद्री विशाल की इस पावन भूमि पर आस्था का एक अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है। समुद्र तल से करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर, जहाँ तापमान शून्य से 15 डिग्री नीचे गिर चुका है और चारों ओर दो से तीन फीट बर्फ जमी है, वहां 15 साधु-संत लोक कल्याण और मोक्ष की प्राप्ति के लिए कठोर योग साधना में लीन हैं। शीतकाल के इस दौर में जब धाम के कपाट बंद होते हैं और आम जनजीवन पूरी तरह ठप हो जाता है, तब भी इन साधकों का संकल्प हिमालय की तरह अडिग बना हुआ है।

    इन तपस्वियों में स्वामी अरसानंद जी महाराज का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है, जो पिछले चार वर्षों से बिना रुके, बारहों महीने बद्रीनाथ धाम में ही निवास कर रहे हैं। भयंकर बर्फबारी और एकांत के बीच उनकी यह निरंतर साधना भक्ति की पराकाष्ठा को दर्शाती है। हालांकि, यह तपस्या केवल आध्यात्मिक इच्छाशक्ति पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का एक व्यवस्थित तंत्र भी काम कर रहा है। ज्योतिर्मठ के उप जिलाधिकारी चन्द्रशेखर वशिष्ठ के अनुसार, शीतकाल में यहाँ रुकने की अनुमति केवल कड़े नियमों और गहन जांच के बाद ही दी जाती है। प्रशासन सुनिश्चित करता है कि इन साधकों के पास पर्याप्त राशन, ईंधन और जरूरी दवाइयां मौजूद हों। साथ ही, सुरक्षा के लिहाज से धाम में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती भी रहती है।

    कठोर प्राकृतिक परिस्थितियों को देखते हुए इन साधुओं का विशेष मेडिकल परीक्षण भी किया जाता है। डॉ. गौतम भारद्वाज बताते हैं कि हाई एल्टीट्यूड पर रहने के लिए हृदय, फेफड़ों और हड्डियों का मजबूत होना अनिवार्य है। डॉक्टरों की टीम साधकों के ऑक्सीजन लेवल और ब्लड प्रेशर की नियमित जांच करती है। मेडिकल सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही उन्हें तहसील प्रशासन से शीतकालीन प्रवास की अनुमति प्राप्त होती है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि साधक का शरीर इस जानलेवा ठंड को सहने के लिए सक्षम है या नहीं।

    धार्मिक दृष्टिकोण से बद्रीनाथ की इस भूमि का महत्व अनंत है। पूर्व धर्माधिकारी आचार्य भुवन उनियाल बताते हैं कि यह तपोभूमि चारों युगों से अस्तित्व में है। सतयुग में ‘मुक्ति प्रदा’ और त्रेता में ‘योग सिद्धिदा’ कहलाने वाला यह क्षेत्र आज भी योग और ध्यान की प्राचीन परंपराओं को संजोए हुए है। पंडित राकेश डिमरी राकुड़ी का मानना है कि कलियुग में हरि नाम और ध्यान ही ईश्वर प्राप्ति का मार्ग है, और ये साधु इसी मार्ग पर चलते हुए शून्य से नीचे के तापमान में भी मोक्ष के द्वार पर अडिग खड़े हैं। इन बर्फीली वादियों में गूंजता मौन और साधुओं का यह अखंड ध्यान न केवल श्रद्धा का विषय है, बल्कि यह मनुष्य की असीमित मानसिक शक्ति का प्रमाण भी है।

  • Mahashivratri 2026: महादेव की विशेष कृपा, मेष, सिंह, तुला और कुंभ राशि के लिए बन रहा दुर्लभ राजयोग

    Mahashivratri 2026: महादेव की विशेष कृपा, मेष, सिंह, तुला और कुंभ राशि के लिए बन रहा दुर्लभ राजयोग


    नई दिल्ली। इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को देशभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार का संयोग विशेष माने जा रहे हैं। चंद्रमा, शनि और गुरु ग्रहों की स्थिति ऐसे बन रही है कि इसे ‘राजयोग’ कहा गया है। इस योग का सकारात्मक प्रभाव मेष, सिंह, तुला और कुंभ राशि के जातकों पर विशेष रूप से रहने की संभावना है।

    राजयोग का प्रभाव कार्यक्षेत्र, व्यवसाय, निवेश और आर्थिक मामलों में उन्नति के संकेत देता है। लंबे समय से रुके हुए कार्य गति पकड़ सकते हैं और नई संभावनाओं के द्वार खुल सकते हैं।

    राशि अनुसार संभावित लाभ
    मेष राशि: करियर में बदलाव और उन्नति का समय है। नौकरी में प्रमोशन, नई जिम्मेदारी या व्यवसाय में विस्तार संभव है। स्टार्टअप या निवेश से जुड़े फैसलों में लाभ मिलने की संभावना है।

    सिंह राशि: कार्यस्थल पर मान-सम्मान और आर्थिक मजबूती बढ़ सकती है। बड़े व्यावसायिक सौदे फाइनल होने और पैतृक संपत्ति मिलने के योग हैं।

    तुला राशि: निवेश और शेयर बाजार, प्रॉपर्टी या साझेदारी व्यवसाय में लाभ की संभावना है। करियर में रुके हुए अवसर फिर से सक्रिय हो सकते हैं।

    कुंभ राशि: आय के नए स्रोत खुल सकते हैं। रचनात्मक क्षेत्रों में पहचान और प्रशंसा मिलने के संकेत हैं। सरकारी परियोजनाओं या अटकी व्यावसायिक योजनाओं में गति आने की संभावना है।

    महाशिवरात्रि के उपाय और पूजा
    ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से राजयोग का प्रभाव और मजबूत हो सकता है। इसके लिए उपाय इस प्रकार हैं:

    शिवलिंग का अभिषेक: गन्ने के रस या शहद से।

    स्तोत्र पाठ: शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना गया है।रात्रि जागरण: रातभर भक्ति और ध्यान करना फलदायी है।इन उपायों से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव और नए अवसर भी खुल सकते हैं।

  • आज का पंचांग: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर गणेश उपासना का विशेष योग…

    आज का पंचांग: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर गणेश उपासना का विशेष योग…


    नई दिल्ली।आज गुरुवार 5 फरवरी 2026, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी तिथि है। यह दिन भगवान गणेश की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत और रात्रि में चंद्र दर्शन से बुद्धि, विवेक और जीवन की बाधाओं से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आज का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह गुरुवार है, जो देवगुरु बृहस्पति को समर्पित होता है। गुरु के प्रभाव से आज ज्ञान, शिक्षा, सलाह और सम्मान से जुड़े कार्यों में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना रहती है।

    तिथि, योग और करण:
    पंचांग के अनुसार, आज कृष्ण चतुर्थी तिथि रात्रि 12:22 बजे (6 फरवरी) तक रहेगी। सुकर्मा योग रात्रि 12:04 बजे तक प्रभावी रहेगा। करण की बात करें तो दोपहर 12:10 बजे तक बव करण और इसके बाद बालव करण रहेगा।

    सूर्य-चंद्र की स्थिति:
    सूर्योदय प्रातः 7:07 बजे और सूर्यास्त सायं 6:03 बजे होगा। चंद्रोदय रात 9:35 बजे तथा चंद्रास्त सुबह 9:05 बजे होगा। व्रती चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत का पारण करेंगे।

    नक्षत्र और ग्रह स्थिति:
    आज चंद्रमा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे, जो रात्रि 10:57 बजे तक रहेगा। यह नक्षत्र दान, सेवा और सामाजिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। ग्रहों की स्थिति के अनुसार सूर्य, मंगल और शुक्र मकर राशि में हैं, जबकि चंद्रमा कन्या राशि में स्थित है। गुरु मिथुन, शनि मीन राशि में गोचर कर रहे हैं।

    शुभ और अशुभ समय:
    आज अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:13 से 12:57 बजे तक रहेगा, जो संपत्ति, निवेश और प्रशासनिक कार्यों के लिए अनुकूल है। वहीं राहुकाल दोपहर 1:57 से 3:19 बजे तक रहेगा, इस दौरान शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।

    द्विजप्रिय संकष्टी का धार्मिक महत्व:
    इस दिन भगवान गणेश को दूर्वा, लाल पुष्प, सिंदूर और मोदक अर्पित करने का विधान है। यह व्रत पारिवारिक बाधाओं को दूर करता है और जीवन में स्थिरता लाता है। ब्राह्मण सेवा और दान का आज विशेष महत्व है।यह पंचांग धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत निर्णय हेतु विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।

  • शनि की राशि में साल का पहला सूर्य ग्रहण: 17 फरवरी को मचेगी खगोलीय हलचल; इन 3 राशियों पर टूटेगा मुसीबतों का पहाड़!

    शनि की राशि में साल का पहला सूर्य ग्रहण: 17 फरवरी को मचेगी खगोलीय हलचल; इन 3 राशियों पर टूटेगा मुसीबतों का पहाड़!


    नई दिल्ली। साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या के दिन लगने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसारयह ग्रहण शनि की स्वामित्व वाली राशि कुंभ में लगेगा। शनि और सूर्य के बीच शत्रुता का भाव होने के कारणशनि की राशि में सूर्य का पीड़ित होना कई जातकों के लिए मानसिकआर्थिक और शारीरिक कष्ट का कारण बन सकता है।

    ग्रहण का समय और दृश्यता
    भारतीय समयानुसारयह ग्रहण शाम 5:31 बजे शुरू होगा और रात 7:57 बजे समाप्त होगा। हालांकियह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगाजिसके कारण यहाँ सूतक काल के नियम प्रभावी नहीं होंगे। लेकिन ज्योतिषीय गणना के अनुसारभले ही ग्रहण दिखाई न देइसका ग्रहों के गोचर पर प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है।

    इन 3 राशियों को रहना होगा सावधान

    कुंभ राशि चूंकि ग्रहण इसी राशि में लग रहा हैइसलिए सबसे अधिक प्रभाव कुंभ जातकों पर ही पड़ेगा।सावधानी: मानसिक तनाव बढ़ सकता है और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां घेर सकती हैं। बनते हुए काम बिगड़ सकते हैंइसलिए किसी भी बड़े निवेश या निर्णय से अभी बचें। सिंह राशि सूर्य सिंह राशि का स्वामी है। अपने स्वामी ग्रह का शत्रु राशि कुंभ में ग्रहण ग्रस्त होना सिंह राशि वालों के लिए शुभ नहीं है।

    सावधानी: वैवाहिक जीवन में तनाव और साझेदारी के कामों में नुकसान हो सकता है। कार्यक्षेत्र में गुप्त शत्रु आपको नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर सकते हैं। वाणी पर नियंत्रण रखें। वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह ग्रहण पारिवारिक सुख में कमी ला सकता है। सावधानी: माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता हो सकती है। संपत्ति या वाहन से जुड़े विवादों में फंसने के योग बन रहे हैं। आर्थिक लेन-देन में सावधानी बरतेंअन्यथा धन हानि निश्चित है।

    उपाय: कैसे बचें अशुभ प्रभाव से?

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसारग्रहण के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए ग्रहण काल के दौरान और बाद में ये कार्य करने चाहिए: दान: ग्रहण के बाद काले तिलगुड़ या सात अनाज का दान करें। जाप: ‘ओम सूर्याय नम: और शनि मंत्र ‘ओम शं शनैश्चराय नम:का जाप करें। शुद्धिकरण: ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर घर में गंगाजल का छिड़काव करें।

  • शुक्र के उदय के बाद फरवरी से शुरू होंगी मांगलिक शादियाँ..

    शुक्र के उदय के बाद फरवरी से शुरू होंगी मांगलिक शादियाँ..


    नई दिल्ली । जनवरी का महीना बीतते-बीतते विवाह की तैयारियों के लिए उत्साहित परिवारों के लिए निराशाजनक रहा क्योंकि शास्त्र सम्मत नियमों के अनुसार, शुक्र तारे के अस्त होने पर कोई भी मांगलिक कार्य शुरू नहीं किया जा सकता। ज्योतिष के जानकार बताते हैं कि 12 दिसंबर 2025 को अस्त हुआ शुक्र तारा अब उदय हो चुका है और इसके चार दिन बाद यानी उसके ‘युवाकाल’ में प्रवेश करते ही मांगलिक कार्य शुरू किए जा सकते हैं।

    शुक्र ग्रह का उदय होने और युवाकाल में प्रवेश करने से विवाह मुहूर्त स्वाभाविक रूप से शुभ हो जाते हैं। इसी कारण जनवरी का महीना विवाह के लिए अनुपयुक्त रहा, लेकिन फरवरी के आगमन के साथ परिवारों ने अब अपनी तैयारियाँ तेज कर दी हैं। शादी-ब्याह के लिए 2026 में कुल 12 रिकॉर्ड मुहूर्त उपलब्ध होंगे, जो हर परिवार की योजना को आसान बना देंगे।

    ज्योतिष के अनुसार, ये मुहूर्त केवल विवाह के लिए ही नहीं बल्कि अन्य मांगलिक कार्य जैसे संतान पूजा, गृह प्रवेश और नामकरण संस्कार के लिए भी शुभ माने जाते हैं। परिवार अब बैंड-बाजा, बारात, मेहमानों की सूची और रस्मों की तैयारी में जुट सकते हैं। इस साल विवाह मुहूर्त आने से सभी आयोजन शुभ और मंगलमय होंगे।

    शादी की तैयारियों में जुटे परिवारों के लिए यह समय खास महत्व रखता है क्योंकि मांगलिक कार्यों का शुभ समय परिवारों को आर्थिक और सामाजिक लाभ भी दिला सकता है। इसलिए ज्योतिष सलाहकार यह कहते हैं कि फरवरी से शादियों का सिलसिला पूरी तरह से शुरू हो जाएगा और सभी रस्में बिना किसी बाधा के संपन्न होंगी।

    इस वर्ष कुल 12 विवाह मुहूर्त आए हैं, जिन्हें देखकर कई परिवारों ने अपनी शादी-ब्याह की तिथियों का चयन कर लिया है। मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त आने से परिवारों की खुशी दोगुनी हो गई है। अब बैंड-बाजा, बारात और रंग-बिरंगी रस्मों के लिए हर कोई उत्साहित है और यह फरवरी से पूरे जोश के साथ शुरू होगा।

  • गुरुवार का राशिफल

    मेष राशि :- शैक्षणिक कार्य आसानी से पूरे होते रहेंगे। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। परिश्रम प्रयास से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। बुरी संगति से बचें। नौकरी में सावधानीपूर्वक कार्य करें। अपनों का सहयोग प्राप्त होगा। अर्थपक्ष मजबूत रहेगा। शुभांक-3-5-7

    वृष राशि :- अपने अधीनस्थ लोगों से कम सहयोग मिलेगा। बाहरी सहयोग की अपेक्षा रहेगी। सलाह उपयोगी सिद्घ होगी। विपरीत परीस्थितियों में भी हानि नहीं होगी। आवेश में आना आपके हित में नहीं होगा इसलिए व्यवहार व वाणी पर नियत्रंण रखें। पठन-पाठन में स्थिति कमजोर रहेगी। शुभांक-5-6-9

    मिथुन राशि :- व्यापार व नौकरी में स्थिति अच्छी रहेगी। आलस्य का त्याग करें। कार्यसिद्घि होने में देर नहीं लगेगी। आर्थिक लाभ उत्तम रहेगा। शैक्षणिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। परिवार में किसी मांगलिक कार्य पर वार्ता होगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। लेन-देन में अस्पष्टता ठीक नहीं। स्त्री-संतान पक्ष का सहयोग मिलेगा। शुभांक-2-6-8

    कर्क राशि :- समय पक्ष का बना रहेगा। कारोबारी काम में प्रगति बनती रहेगी। लेन-देन में आ रही बाधा दूर करने का प्रयास होंगे। धार्मिक कार्य में समय और धन व्यय होगा। अपना काम दूसरों के सहयोग से पूरा होगा। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। पुराने मित्र से मिलन होगा। शुभांक-4-6-7

    सिंह राशि :- पैतृक सम्पत्ति से लाभ। मेहमानों का आगमन होगा। राजकीय कार्यों से लाभ। पुरानी गलती का पश्चाताप होगा। विद्यार्थियों को लाभ। दाम्पत्य जीवन सुखद रहेगा। परिवारजनों का सहयोग व समन्वय काम को बनाना आसान करेगा। कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। शुभांक-3-5-8

    कन्या राशि :- जीवनसाथी अथवा यार-दोस्तों के साथ साझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। एकाकी वृत्ति त्यागें। हित के काम में आ रही बाधा मध्याह्न पश्चात् दूर हो जाएगी। अपने काम आसानी से बनते चले जाएंगे। साथ ही आगे के लिए रास्ता भी बन जाएगा। कार्य सफल होंगे। शुभांक-2-5-7

    तुला राशि :- प्रसन्नता के साथ सभी जरूरी कार्य बनते नजर आएंगे। मनोरथ सिद्घि का योग है। सभा-गोष्ठियों में सम्मान मिलेगा। प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए कुछ सामाजिक कार्य संपन्न होंगे। कई प्रकार के हर्ष उल्लास के बीच आनन्ददायक दिन रहेगा। आमोद-प्रमोद का दिन होगा और व्यावसायिक प्रगति भी होगी। शुभांक-6-8-9

    वृश्चिक राशि :- स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार की अपेक्षा रहेगी। ज्ञान-विज्ञान की वृद्घि होगी और सज्जनों का साथ भी रहेगा। कुछ कार्य भी सिद्घ होंगे। व्यर्थ की दौड़़-भाग से यदि बचा जाए तो अच्छा है। प्रियजनों से समागम का अवसर मिलेगा। आय के अच्छे योग बनेगें। संतान की उन्नति के योग हैं। शुभांक-5-6-8

    धनु राशि :- आशा और उत्साह के कारण सक्रियता बढ़ेगी। आगे बढऩे के अवसर लाभकारी सिद्घ होंगे। कोई प्रिय वस्तु या नवीन वस्त्राभूषण प्राप्त होंगे। सभाओं में मान-सम्मान बढ़ेगा। धार्मिक आस्थाएं फलीभूत होंगी। माता पक्ष से विशेष लाभ। पुराने मित्र से मिलन होगा। आत्मङ्क्षचतन करें। शुभांक-4-6-8

    मकर राशि :- लेन-देन में आ रही बाधा को दूर करने के प्रयास सफल होंगे। धार्मिक कार्य में समय और धन व्यय होगा। कारोबारी काम में बाधा बनी रहेगी। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। व्यापार में स्थिति नरम रहेगी। शुभ कार्यों की प्रवृत्ति बनेगी और शुभ समाचार भी मिलेंगे। संतोष रखने से सफलता मिलेगी। शुभांक-3-6-9

    कुंभ राशि :- पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। जोखिम से दूर रहना ही बुद्घिमानी होगी। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। महत्वपूर्ण कार्य को समय पर बना लें तो अच्छा ही होगा। आशा और उत्साह के कारण सक्रियता बढ़ेगी। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। मित्र से मिलन होगा। शुभांक-1-5-8

    मीन राशि :- धर्म-कर्म के प्रति रुचि जागृत होगी। लाभ में आशातीत वृद्घि तय हैं मगर नकारात्मक रुख न अपनाएं। किसी पुराने संकल्प को पुरा कर लेने का दिन हैं। ”आगे-आगे गौरख जागे” वाली कहावत चरितार्थ होगी। निष्ठा से किया गया कार्य पराक्रम व आत्मविश्वास बढ़ाने वाला होगा। इच्छित कार्य सफल होंगें। शुभांक-1-6-9
  • आज का पंचांग: 4 फरवरी 2026 गणेश पूजा और बुधवार व्रत का संयोग..

    आज का पंचांग: 4 फरवरी 2026 गणेश पूजा और बुधवार व्रत का संयोग..


    नई दिल्ली।आज बुधवार, 4 फरवरी 2026 को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। पंचांग के अनुसार यह दिन भगवान गणेश की उपासना और बुधवार व्रत के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार का दिन बुद्धि, विवेक और बाधा निवारण के प्रतीक गणेश जी को समर्पित माना जाता है। साथ ही यह दिन बुध ग्रह से भी जुड़ा हुआ है, जिसे वाणी, व्यापार, शिक्षा और तर्कशक्ति का कारक ग्रह कहा गया है। इस कारण आज का दिन पूजा-पाठ के साथ-साथ जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए भी शुभ माना जाता है।

    फाल्गुन मास का पहला बुधवार होने के कारण आज का व्रत और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन विधि-विधान से गणेश पूजन करने से बुध ग्रह की स्थिति सुदृढ़ होती है। इसका असर करियर, शिक्षा और व्यापार में स्थिरता के रूप में देखने को मिलता है। विद्यार्थी नौकरीपेशा और कारोबारी वर्ग आज के दिन पूजा और संकल्प को विशेष महत्व देते हैं।

    आज तृतीया तिथि रात 12:09 बजे तक प्रभावी रहेगी उसके बाद चतुर्थी तिथि प्रारंभ होगी। दिन में पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र रात 10:12 बजे तक प्रभावी रहेगा, इसके बाद उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र प्रभाव में आएगा। आज अतिगण्ड योग बना हुआ है, जो 5 फरवरी की रात 1:05 बजे तक रहेगा, इसके पश्चात सुकर्मा योग का आरंभ होगा। चंद्रमा सिंह राशि में स्थित रहेगा और बाद में कन्या राशि में प्रवेश करेगा।सूर्योदय आज सुबह 7:08 बजे और सूर्यास्त शाम 6:03 बजे होगा। चंद्रोदय रात 8:37 बजे और चंद्रास्त सुबह 8:36 बजे है। ये समय व्रत, पूजा और दान कार्य के लिए शुभ माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:23 से 6:15 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2:24 से 3:08 बजे तक और अमृत काल 3:48 से 5:24 बजे तक रहेगा। शाम को गोधूलि मुहूर्त 6:00 से 6:26 बजे तक प्रभावी रहेगा।

    अशुभ समय में राहुकाल दोपहर 12:35 से 1:57 बजे, भद्रा दोपहर 12:19 बजे से रात 12:09 बजे तक (5 फरवरी) रहेगा। इसके अतिरिक्त यमगण्ड, गुलिक काल और दुर्मुहूर्त भी दिन में पड़ रहे हैं। उत्तर दिशा में दिशाशूल होने के कारण आज इस दिशा में यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।

    गणेश पूजा करने के लिए सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। लाल पुष्प, मोदक या लड्डू का भोग लगाएं और “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। हरी वस्तुओं का दान करना, कटु वाणी से बचना और व्रत के नियमों का पालन करना शुभ माना गया है।आज का यह दिन बुद्धि, व्यापार और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। सरल उपाय और विधि-विधान से गणेश पूजन करने से जीवन में बाधाएं दूर होती हैं और बुध ग्रह का सकारात्मक प्रभाव मिलता है।

  • बुधवार के उपाय: गणेश पूजा और बुध ग्रह की पूजा से बढ़ाएं बुद्धि, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति

    बुधवार के उपाय: गणेश पूजा और बुध ग्रह की पूजा से बढ़ाएं बुद्धि, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति


    नई दिल्ली।बुधवार को भगवान गणेश और बुध ग्रह की पूजा विशेष महत्व रखती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए उपाय व्यक्ति की बुद्धि, वाणी, निर्णय क्षमता और आर्थिक स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। गणेश पूजा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, जबकि बुध ग्रह की शांति से मानसिक स्थिरता और व्यावसायिक समझ मजबूत होती है। इसे ध्यान में रखते हुए बुधवार को पूजा, व्रत, दान और सेवा से जुड़े उपायों को जीवन में अपनाना शुभ माना जाता है।

    धार्मिक ग्रंथों में बुधवार को प्रथम पूज्य भगवान गणेश का दिन माना गया है। बुध ग्रह से जुड़े उपाय बुद्धि, तर्क, व्यापार और संवाद में सुधार लाते हैं। इस दिन गणेश जी को 21 दूर्वा अर्पित करना, गुड़, मोदक या लड्डू का भोग लगाना और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है। मंत्र जाप के दौरान एकाग्रता और मानसिक संतुलन बनाए रखने की विशेष सलाह दी जाती है।

    धार्मिक मान्यताओं में बुधवार को गाय की सेवा का भी महत्व बताया गया है। हरा चारा, पालक या घास देने से बुध ग्रह से जुड़े दोष कम होते हैं। हरी मूंग की दाल, हरे वस्त्र या हरी वस्तुओं का दान जरूरतमंदों को करने से सामाजिक संतुलन और पुण्य की प्राप्ति होती है।बुधवार को हरे रंग को शुभ माना जाता है। हरे वस्त्र पहनने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और बुध ग्रह का अनुकूल प्रभाव मिलता है। इसके विपरीत काले रंग के कपड़े पहनने से बचने की सलाह दी जाती है। इस दिन उधार लेने या देने से भी परहेज करने की परंपरा है, ताकि आर्थिक अस्थिरता से बचा जा सके।

    पारिवारिक और स्वास्थ्य से जुड़े उपायों में बहन या बेटी को हरी वस्तु या पढ़ाई की सामग्री भेंट करने से शिक्षा और करियर में उन्नति के योग बनते हैं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से राहत के लिए गणेश जी को धूप और हरा फल अर्पित करना, गौशाला में हरा चारा दान करना शुभ माना जाता है।इन सरल उपायों को अपनाकर बुधवार को गणेश और बुध ग्रह की पूजा से मानसिक संतुलन, व्यावसायिक सफलता और पारिवारिक सुख-समृद्धि सुनिश्चित की जा सकती है। धार्मिक आस्था और सही समय पर उपाय करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की संभावना बढ़ जाती है।