Category: Religious Astrology

  • विज्ञान के लिए आज भी अनसुलझी पहेली है भगवान जगन्नाथ का धड़कता हुआ 'ब्रह्म पदार्थ', जानिए सदियों पुरानी नवकलेवर परंपरा का सत्य

    विज्ञान के लिए आज भी अनसुलझी पहेली है भगवान जगन्नाथ का धड़कता हुआ 'ब्रह्म पदार्थ', जानिए सदियों पुरानी नवकलेवर परंपरा का सत्य

    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सर्वोच्च पूजनीय और चार धामों में से एक ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर को साक्षात धरती का बैकुंठ माना गया है। प्रतिवर्ष आषाढ़ मास में आयोजित होने वाली भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथ यात्रा वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है, जो इस वर्ष 16 जुलाई से प्रारंभ होने जा रही है। इस प्राचीन मंदिर और इसकी रथ यात्रा से अनेक ऐसे अलौकिक चमत्कार जुड़े हुए हैं, जिनका तार्किक उत्तर आज के आधुनिक विज्ञान, उन्नत तकनीक और शोधकर्ताओं के पास भी उपलब्ध नहीं है। इन सभी चमत्कारों में सबसे गहन और विस्मयकारी रहस्य भगवान जगन्नाथ की काष्ठ निर्मित मूर्ति के भीतर स्थापित ‘ब्रह्म पदार्थ’ को माना जाता है, जिसमें आज भी एक जीवंत धड़कन महसूस होती है।

    धार्मिक मान्यताओं और स्थापित परंपराओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की मुख्य प्रतिमा के भीतर स्थित इस दिव्य पदार्थ को छूने अथवा इसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया इतनी संवेदनशील है कि मंदिर के मुख्य सेवादारों के मन में भी एक अनजाना भय व्याप्त हो जाता है। सदियों से चली आ रही इस रहस्यमयी प्रक्रिया को प्रत्येक 12 वर्ष की अवधि में एक बार निष्पादित किया जाता है, जिसे सनातन परंपरा में ‘नवकलेवर’ अनुष्ठान के नाम से जाना जाता है। इस विशिष्ट धार्मिक अनुष्ठान के अंतर्गत भगवान जगन्नाथ, भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्राचीन काष्ठ मूर्तियों के स्थान पर नई मूर्तियों को पूर्ण विधि-विधान के साथ गर्भगृह में स्थापित किया जाता है।

    इस गुप्त अनुष्ठान को अत्यंत गोपनीयता के साथ संपन्न करने के लिए निर्धारित रात्रि को संपूर्ण पुरी शहर की विद्युत आपूर्ति पूरी तरह से बंद कर दी जाती है। पूरे मंदिर परिसर को गहन अंधकार में डुबो दिया जाता है और सुरक्षा के कड़े प्रबंध करते हुए मंदिर के चारों ओर सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया जाता है, जिससे कोई भी बाहरी व्यक्ति इस प्रक्रिया का साक्षी न बन सके। गर्भगृह के भीतर केवल उन्हीं चुनिंदा पुजारियों को प्रवेश की अनुमति होती है, जो इस मूर्ति परिवर्तन की प्राचीन और गुप्त प्रक्रिया को संपन्न करने के लिए अधिकृत होते हैं।

    नवकलेवर अनुष्ठान को संपन्न करने वाले पुजारियों के लिए बनाए गए नियम अत्यंत कठोर और अपरिवर्तनीय हैं। गर्भगृह में प्रवेश करने से पूर्व पुजारियों की आंखों पर रेशमी कपड़े की मोटी पट्टी बांध दी जाती है और उनके हाथों में मोटे दस्ताने पहना दिए जाते हैं। धार्मिक नियमों के अनुसार, कोई भी मनुष्य इस ब्रह्म पदार्थ को न तो अपनी नंगी आंखों से प्रत्यक्ष देख सकता है और न ही बिना आवरण के स्पर्श कर सकता है। ऐसी मान्यताएं प्रचलित हैं कि यदि कोई व्यक्ति अनजाने में भी इस अलौकिक पदार्थ को देख लेता है, तो उसे गंभीर शारीरिक क्षति पहुंच सकती है।

    इस गुप्त प्रक्रिया के दौरान जब पुरानी मूर्ति के वक्षस्थल से इस ब्रह्म पदार्थ को निकालकर नई निर्मित मूर्ति में स्थापित किया जाता है, तो उस समय का अनुभव अत्यंत विस्मयकारी होता है। इस कार्य को संपन्न करने वाले मुख्य पुजारियों के संस्मरणों के अनुसार, हाथों में मोटे दस्ताने होने के पश्चात भी जब वे उस दिव्य पदार्थ को स्पर्श करते हैं, तो उसमें एक स्पष्ट स्पंदन और जीवंतता का आभास होता है। वह पदार्थ किसी जीवित पिंड की भांति गतिशील और इंसानी हृदय की तरह निरंतर धड़कता हुआ प्रतीत होता है, मानो साक्षात नारायण का हृदय वहां स्पंदित हो रहा हो।

    इस धड़कते हुए ब्रह्म पदार्थ की वास्तविक संरचना और इसके मूल स्वरूप को लेकर सामाजिक और धार्मिक स्तर पर अनेक कथाएं एवं अनुसंधान प्रचलित हैं। एक प्रमुख पौराणिक मान्यता के अनुसार, यह साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का वह पवित्र हृदय है, जो महाभारत काल के बाद उनकी अंत्येष्टि के समय भी अग्नि में भस्म नहीं हुआ था और आज भी उसी अवस्था में सुरक्षित है। इसके विपरीत, कुछ विद्वान इसे कोई अत्यंत शक्तिशाली दिव्य धातु या चमत्कारिक मणि मानते हैं। कारण चाहे जो भी हो, परंतु वर्तमान वैज्ञानिक युग में भी यह धड़कता हुआ ब्रह्म पदार्थ अध्यात्म और आस्था का एक ऐसा अटूट स्तंभ बना हुआ है, जिसके रहस्य को भेद पाना आधुनिक चेतना के लिए अब तक असंभव सिद्ध हुआ है।

  • शुक्र देव कल करेंगे नक्षत्र परिवर्तन… इन चार राशि वालों के लिए खुलेंगे धन के द्वार

    शुक्र देव कल करेंगे नक्षत्र परिवर्तन… इन चार राशि वालों के लिए खुलेंगे धन के द्वार


    नई दिल्ली।
    ज्योतिष शास्त्र में सुख, समृद्धि, धन और वैभव के दाता माने जाने वाले शुक्र देव (Lord Shukra) 16 जुलाई 2026 को अपना नक्षत्र परिवर्तन (Shukra Nakshatra Gochar 2026) करने जा रहे हैं. शुक्र देव (Lord Shukra) इस दिन सिंह राशि (Leo) में रहते हुए मघा नक्षत्र (Magha Nakshatra) से निकलकर पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र (Purva Phalguni Nakshatra) में प्रवेश करेंगे।

    सबसे खास बात यह है कि पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी खुद शुक्र देव ही हैं. जब भी कोई ग्रह अपने ही स्वामित्व वाले नक्षत्र में आता है, तो उसकी शक्तियां दोगुनी हो जाती हैं और वह अत्यंत शुभ फल देता है. शुक्र का यह स्व-नक्षत्र गोचर 4 भाग्यशाली राशियों के लिए धन के द्वार खोलने वाला और तिजोरी भरने वाला साबित होगा. आइए जानते हैं उन 4 भाग्यशाली राशियों के बारे में जिन्हें इस दौरान बंपर लाभ मिलने जा रहा है।


    मेष राशि (Aries)

    मेष राशि के जातकों के लिए शुक्र का यह नक्षत्र परिवर्तन बेहद अनुकूल रहने वाला है. यदि आपका पैसा कहीं लंबे समय से अटका हुआ था, तो वह इस दौरान वापस मिल सकता है. आय के नए स्रोत बनेंगे. नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां या प्रमोशन मिल सकता है. व्यापारियों के लिए यह समय तगड़ा मुनाफा लेकर आ रहा है. मानसिक तनाव कम होगा, प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी और संतान पक्ष से शुभ समाचार मिल सकता है।


    सिंह राशि (Leo)

    शुक्र देव अभी आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं, इसलिए इस नक्षत्र परिवर्तन का सबसे बड़ा और सीधा लाभ आपको मिलेगा. यदि आप पार्टनरशिप में कोई बिजनेस कर रहे हैं, तो बड़ा आर्थिक लाभ होने की पूरी संभावना है. भौतिक सुख-सुविधाओं जैसे वाहन, आभूषण या इलेक्ट्रॉनिक्स पर खर्च करेंगे. आपके व्यक्तित्व और आकर्षण में जबरदस्त निखार आएगा. समाज और कार्यक्षेत्र में आपकी लोकप्रियता और मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी. लोग आपकी बातों और फैसलों से प्रभावित होंगे।


    तुला राशि (Libra)

    तुला राशि के स्वामी खुद शुक्र देव ही हैं, इसलिए अपने ही नक्षत्र में शुक्र का आना आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है. आर्थिक मामलों में लंबे समय से चल रही तंगी दूर होगी. आकस्मिक धन लाभ (अचानक पैसा मिलना) और निवेश से जुड़े मामलों में बड़ा मुनाफा होने के योग हैं. जो लोग नई नौकरी की तलाश में हैं या इंक्रीमेंट का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें 16 जुलाई के बाद कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है. दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी और परिवार के सहयोग से बिगड़े काम बन जाएंगे।


    धनु राशि (Sagittarius)

    धनु राशि के जातकों के लिए भी शुक्र का यह गोचर भाग्य के सितारे बुलंद करने वाला है. आपके जो काम पिछले कई महीनों से लटके हुए थे, वे अब तेजी से पूरे होने लगेंगे. भाग्य का पूरा साथ मिलेगा. नौकरीपेशा लोगों को अपनी मेहनत का शानदार फल मिलेगा. वहीं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को इस अवधि में बड़ी सफलता मिल सकती है. काम के सिलसिले में की गई यात्राएं आपके लिए आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद साबित होंगी।

  • सावन में बदलेगा गुरु बृहस्पति का नक्षत्र, 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जाने क्‍या होगा बदलाव?

    सावन में बदलेगा गुरु बृहस्पति का नक्षत्र, 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जाने क्‍या होगा बदलाव?


    नई दिल्ली। सावन माह के दौरान ग्रहों के गुरु माने जाने वाले बृहस्पति एक महत्वपूर्ण नक्षत्र परिवर्तन करने जा रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यह बदलाव कई राशियों के लिए शुभ परिणाम लेकर आ सकता है। द्रिक पंचांग के मुताबिक, देवगुरु बृहस्पति 18 जून को पुष्य नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं और 18 अगस्त तक वहीं रहेंगे। इसके बाद 19 अगस्त 2026 को वे बुध के स्वामित्व वाले अश्लेषा नक्षत्र में गोचर करेंगे।

    ज्योतिष शास्त्र में गुरु का नक्षत्र परिवर्तन विशेष महत्व रखता है। माना जा रहा है कि गुरु के इस गोचर से कुछ राशियों के जातकों को करियर, आर्थिक स्थिति, वैवाहिक जीवन और सामाजिक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।

    कर्क राशि: सुख-शांति और विवाह के प्रबल योग
    कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय शुभ रहने की संभावना है। मानसिक तनाव और पारिवारिक विवादों में कमी आ सकती है। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा और जिन लोगों के विवाह में बाधाएं आ रही थीं, उनके लिए विवाह के अच्छे अवसर बन सकते हैं।

    धनु राशि: आर्थिक लाभ के संकेत
    धनु राशि के लोगों को इस अवधि में धन संबंधी मामलों में राहत मिलने के योग हैं। रुका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना है। नौकरी और कारोबार में नए अवसर मिल सकते हैं। भूमि, भवन या अन्य संपत्ति में निवेश के लिए भी समय अनुकूल माना जा रहा है।

    कन्या राशि: करियर में मिलेगी नई ऊंचाई
    कन्या राशि के जातकों के लिए आमदनी के नए स्रोत खुल सकते हैं। लंबे समय से अधूरे पड़े कार्य पूरे होने की संभावना है। कार्यस्थल पर प्रदर्शन बेहतर रहेगा, जिससे पदोन्नति और वेतन वृद्धि के अवसर बन सकते हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग भी मिल सकता है।

    वृश्चिक राशि: भाग्य देगा साथ
    वृश्चिक राशि वालों के लिए यह समय रुके हुए कार्यों को गति देने वाला माना जा रहा है। लंबे समय से अटके काम पूरे हो सकते हैं। धार्मिक या मांगलिक यात्रा के योग बन सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को भी सफलता मिलने के संकेत हैं।

    मकर राशि: व्यापार में बढ़ेगा लाभ
    मकर राशि के व्यापारियों को साझेदारी वाले कार्यों में अच्छा लाभ मिलने की संभावना है। नए व्यावसायिक संबंध बन सकते हैं और कारोबार में तेजी आ सकती है। वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ेगी तथा जीवनसाथी के साथ संबंध मजबूत होंगे। इससे सामाजिक प्रतिष्ठा में भी वृद्धि हो सकती है।

    गुरु की कृपा पाने के लिए बताए गए उपाय
    केसर या हल्दी का तिलक: प्रतिदिन स्नान के बाद माथे और नाभि पर केसर या हल्दी का तिलक लगाने से ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार गुरु ग्रह मजबूत होते हैं और मान-सम्मान में वृद्धि होती है।

    विष्णु सहस्रनाम का पाठ: गुरुवार के दिन या नियमित रूप से विष्णु सहस्रनाम का पाठ अथवा श्रवण करना शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे आर्थिक परेशानियां कम होती हैं और समृद्धि के मार्ग खुलते हैं।

    पीली वस्तुओं का दान: गुरुवार को चने की दाल, केले, पीले वस्त्र या साबुत हल्दी का दान करने से गुरु ग्रह की कृपा प्राप्त होती है तथा घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

  • सावन 2026 में इन चार पवित्र पौधों की पूजा से प्रसन्न होंगे भोलेनाथ दूर होंगी जीवन की बाधाएं

    सावन 2026 में इन चार पवित्र पौधों की पूजा से प्रसन्न होंगे भोलेनाथ दूर होंगी जीवन की बाधाएं


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सावन माह को भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने में भक्त भोलेनाथ की पूजा अर्चना जलाभिषेक व्रत और विभिन्न धार्मिक उपायों के माध्यम से उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सावन में की गई सच्ची श्रद्धा से पूजा भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करती है और भक्तों के जीवन में चल रही अनेक परेशानियों का अंत होता है। इसी क्रम में कुछ विशेष पौधों की पूजा का भी उल्लेख मिलता है जिन्हें शिव प्रिय माना गया है।

    मान्यता है कि सावन में इन पौधों की पूजा करने से घर में सुख शांति समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही जीवन में आ रही बाधाएं धीरे धीरे दूर होने लगती हैं। आइए जानते हैं वे चार पवित्र पौधे कौन से हैं जिनकी पूजा सावन में विशेष फलदायी मानी जाती है।

    बेलपत्र का पौधा

    बेलपत्र भगवान शिव को सबसे प्रिय अर्पणों में से एक माना जाता है। सावन माह में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के साथ यदि बेलपत्र के पौधे की भी पूजा की जाए तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार बेलपत्र में ब्रह्मा विष्णु और महेश तीनों देवताओं का प्रतीकात्मक वास माना गया है। इसकी पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में आध्यात्मिक वातावरण मजबूत होता है।

    शमी का पौधा

    शमी का पौधा भी सावन में विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इसकी पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और घर का वास्तु दोष कम होता है। कई लोग इसे घर के मुख्य द्वार की बाईं ओर लगाने की सलाह देते हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार शमी की पूजा से शनि से जुड़े कष्टों में भी राहत मिल सकती है और परिवार पर शिव कृपा बनी रहती है।

    आक यानी मदार का पौधा

    आक या मदार का पौधा भगवान शिव से विशेष रूप से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है कि इस पौधे में शिव तत्व का वास होता है। सावन में इसकी पूजा करने से घर में सुख समृद्धि और शांति बनी रहती है। विशेष रूप से यदि यह पौधा घर के पूर्व या उत्तर दिशा में लगा हो तो उसकी पूजा को अधिक शुभ माना जाता है।

    तुलसी का पौधा

    तुलसी को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और पूजनीय पौधा माना गया है। यह देवी लक्ष्मी का प्रतीक मानी जाती है। सावन में तुलसी की पूजा करने से घर में धन सुख और समृद्धि का आगमन होता है। धार्मिक विश्वास है कि जहां तुलसी का वास होता है वहां सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार में शांति का वातावरण बना रहता है।

    सावन में पौधों की पूजा का महत्व

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में इन पौधों की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जीवन में आ रही बाधाएं कम होने लगती हैं। हालांकि यह सभी बातें धार्मिक विश्वासों पर आधारित हैं और इन्हें आस्था के रूप में ही ग्रहण किया जाना चाहिए।

  • मंगलवार को इन आसान वास्तु उपायों से दूर करें घर के दोष, हनुमान जी की कृपा से खुलेंगे सुख समृद्धि के द्वार

    मंगलवार को इन आसान वास्तु उपायों से दूर करें घर के दोष, हनुमान जी की कृपा से खुलेंगे सुख समृद्धि के द्वार


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा साहस आत्मविश्वास और सफलता प्राप्त होती है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार मंगलवार को किए गए कुछ विशेष उपाय घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने और वास्तु दोष को कम करने में मदद करते हैं। यदि लंबे समय से घर में आर्थिक परेशानियां पारिवारिक तनाव या कार्यों में बार बार रुकावट आ रही हो तो मंगलवार के दिन कुछ आसान उपाय शुभ फल दे सकते हैं।

    मंगलवार की सुबह स्नान के बाद सबसे पहले घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। स्वच्छ वातावरण सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। इसके बाद भगवान हनुमान की प्रतिमा या चित्र के सामने घी का दीपक जलाकर सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें। हनुमान चालीसा बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करने से मानसिक शक्ति बढ़ती है और नकारात्मक प्रभाव कम होने लगते हैं।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के दक्षिण दिशा का संबंध मंगल ग्रह और ऊर्जा से माना जाता है। मंगलवार के दिन इस दिशा को साफ सुथरा रखना चाहिए। यहां किसी भी प्रकार का कचरा टूटा सामान या बेकार वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए। इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और परिवार में सुख शांति बढ़ती है।

    यदि घर में लगातार आर्थिक संकट बना रहता है तो मंगलवार को लाल रंग का छोटा ध्वज हनुमान मंदिर में चढ़ाना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही गरीब और जरूरतमंद लोगों को लाल वस्त्र मसूर की दाल गुड़ या लाल फल का दान करने से मंगल ग्रह मजबूत होता है और शुभ परिणाम मिलने लगते हैं।

    घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर स्वस्तिक या शुभ चिन्ह बनाना भी मंगलवार को अत्यंत लाभकारी माना गया है। इससे नकारात्मक शक्तियां घर में प्रवेश नहीं करतीं और परिवार के सदस्यों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। पूजा घर में नियमित रूप से दीपक जलाने और धूप करने से वातावरण शुद्ध बना रहता है।

    मंगलवार को बंदरों और गाय को भोजन कराना भी अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। ऐसा करने से भगवान हनुमान की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं धीरे धीरे समाप्त होने लगती हैं। यदि संभव हो तो इस दिन लाल चंदन या लाल फूल भी भगवान को अर्पित करें।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार मंगलवार के दिन क्रोध विवाद और कटु वचन से बचना चाहिए क्योंकि यह दिन ऊर्जा और साहस का प्रतीक है। सकारात्मक सोच और सेवा भाव के साथ किए गए कार्य कई गुना अधिक शुभ फल प्रदान करते हैं। यदि इन उपायों को नियमित रूप से अपनाया जाए तो घर का वातावरण शांत सुखद और समृद्ध बन सकता है तथा परिवार में खुशहाली का संचार होता है।

  • Vastu Tips: घर में दीपक जलाते समय रखें इन बातों का ध्यान, बढ़ेगी सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि

    Vastu Tips: घर में दीपक जलाते समय रखें इन बातों का ध्यान, बढ़ेगी सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि


    नई दिल्ली । सनातन परंपरा में दीपक को केवल पूजा का हिस्सा नहीं माना गया है, बल्कि यह घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक भी है। Vastu Tips के अनुसार यदि सही स्थान पर दीपक जलाया जाए तो घर का वातावरण शांत और पवित्र बना रहता है। सबसे पहले पूजा घर में भगवान के सामने दीपक अवश्य जलाना चाहिए। इसके अलावा घर के मुख्य द्वार पर शाम के समय दीपक रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और शुभता का प्रवेश माना जाता है। यदि घर में तुलसी का पौधा है तो उसके पास भी संध्या के समय दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। कई लोग रसोई में भी भोजन बनने से पहले छोटा दीपक जलाते हैं, जिससे अन्न और लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है।

    Vastu Tips: दीपक जलाने की सही दिशा क्या होनी चाहिए
    वास्तु शास्त्र में दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। Vastu Tips के अनुसार दीपक को हमेशा इस प्रकार रखना चाहिए कि उसकी लौ पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहे। यह दिशा ज्ञान, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है। यदि पूजा के समय भगवान की प्रतिमा पूर्व दिशा में स्थापित है तो दीपक भगवान के सामने इस प्रकार रखें कि लौ पूर्व की ओर रहे। दक्षिण दिशा में बिना विशेष धार्मिक कारण के दीपक जलाने से बचना चाहिए। साथ ही दीपक को कभी भी ऐसी जगह न रखें जहां हवा के कारण वह बार-बार बुझता रहे, क्योंकि इसे शुभ नहीं माना जाता।

    Vastu Tips: घी और तेल के दीपक में क्या है अंतर
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घी और तेल दोनों के दीपक का अपना अलग महत्व है। Vastu Tips के अनुसार भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान कृष्ण की पूजा में शुद्ध देसी घी का दीपक जलाना अधिक शुभ माना जाता है। घी का दीपक घर में सात्विक ऊर्जा और मानसिक शांति का वातावरण बनाता है। वहीं सरसों या तिल के तेल का दीपक भगवान शनि, हनुमान जी और देवी-देवताओं की विशेष आराधना में जलाया जाता है। तेल का दीपक नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और बाधाओं को कम करने का प्रतीक माना जाता है। आवश्यकता और पूजा के उद्देश्य के अनुसार दीपक का चुनाव करना अधिक उचित माना जाता है।

    Vastu Tips: घर में दीपक जलाने का सही तरीका
    दीपक जलाते समय केवल उसे प्रज्वलित करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक है। Vastu Tips के अनुसार दीपक हमेशा साफ और पवित्र स्थान पर रखें। दीपक में रुई की नई बत्ती का प्रयोग करें और उसे श्रद्धा के साथ जलाएं। कोशिश करें कि दीपक अपने आप न बुझे और उसमें पर्याप्त मात्रा में घी या तेल हो। पूजा समाप्त होने के बाद दीपक को फूंक मारकर बुझाने की बजाय उसे स्वयं शांत होने दें या किसी फूल की सहायता से धीरे से बुझाएं। साथ ही जले हुए दीपक को इधर-उधर रखने की बजाय सम्मानपूर्वक निर्धारित स्थान पर रखें। इन सरल नियमों का पालन करने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और मन को भी शांति का अनुभव होता है।
  • मंगलवार के दिन इन नियमों से करें हनुमान जी की पूजा मिलेगा साहस सफलता और हर बाधा से छुटकारा

    मंगलवार के दिन इन नियमों से करें हनुमान जी की पूजा मिलेगा साहस सफलता और हर बाधा से छुटकारा


    नई दिल्ली ।
    सनातन धर्म में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक बजरंगबली की पूजा करने से भय संकट रोग और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव समाप्त होता है। यह दिन मंगल ग्रह को भी समर्पित माना जाता है इसलिए जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष होता है या जीवन में बार बार बाधाएं आती हैं उन्हें मंगलवार का व्रत और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी की कृपा से आत्मविश्वास बढ़ता है शत्रुओं पर विजय मिलती है और हर कठिन परिस्थिति का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।

    मंगलवार की पूजा के लिए प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को साफ करके भगवान हनुमान की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद दीपक जलाएं और सिंदूर चमेली का तेल लाल फूल तथा गुड़ चना अर्पित करें। हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अत्यंत प्रिय माना जाता है इसलिए इनका विशेष महत्व बताया गया है। पूजा के दौरान श्रीराम का स्मरण करते हुए हनुमान चालीसा बजरंग बाण सुंदरकांड या हनुमान अष्टक का पाठ करना शुभ माना जाता है।

    यदि संभव हो तो मंगलवार का व्रत रखें और दिनभर सात्विक भोजन ग्रहण करें। कई श्रद्धालु इस दिन केवल फलाहार करते हैं जबकि कुछ लोग एक समय भोजन का नियम निभाते हैं। पूजा के बाद गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराना लाल वस्त्र दान करना या बंदरों को गुड़ चना खिलाना भी अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इससे भगवान हनुमान शीघ्र प्रसन्न होते हैं और जीवन की परेशानियां धीरे धीरे समाप्त होने लगती हैं।

    धार्मिक मान्यता है कि मंगलवार के दिन क्रोध झूठ और अपशब्दों से दूर रहना चाहिए। किसी का अपमान करने या विवाद में पड़ने से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता। इस दिन मांस मदिरा और तामसिक भोजन से भी परहेज करना चाहिए। घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने के लिए राम नाम का जाप और सुंदरकांड का पाठ विशेष लाभ देता है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों को नौकरी व्यापार विवाह या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है उन्हें नियमित रूप से मंगलवार की पूजा करनी चाहिए। मंगल ग्रह की शुभता बढ़ाने के लिए लाल मसूर तांबा गुड़ या लाल वस्त्र का दान भी शुभ माना जाता है। यह उपाय जीवन में आने वाली बाधाओं को कम करने और सफलता के नए मार्ग खोलने में सहायक माने जाते हैं।

    श्रद्धा विश्वास और नियमपूर्वक की गई मंगलवार की पूजा केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा का भी स्रोत मानी जाती है। भगवान हनुमान की कृपा से व्यक्ति में साहस धैर्य और आत्मविश्वास का संचार होता है जिससे वह जीवन की हर चुनौती का सामना मजबूती से कर पाता है। इसलिए मंगलवार का दिन भक्ति सेवा और सद्कर्म के साथ बिताना अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना गया है।

  • हनुमान जी को शीघ्र प्रसन्न करने के आसान उपाय मंगलवार की पूजा से मिलेगा साहस सुख और समृद्धि का आशीर्वाद

    हनुमान जी को शीघ्र प्रसन्न करने के आसान उपाय मंगलवार की पूजा से मिलेगा साहस सुख और समृद्धि का आशीर्वाद


    नई दिल्ली । सनातन परंपरा में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ बजरंगबली की पूजा करने से भय संकट और नकारात्मकता दूर होती है तथा व्यक्ति को साहस आत्मविश्वास और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हनुमान जी को भगवान श्रीराम का परम भक्त माना जाता है इसलिए उनकी आराधना में भक्ति समर्पण और सेवा का विशेष महत्व बताया गया है।

    मंगलवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर या मंदिर में भगवान हनुमान की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं। उन्हें सिंदूर चमेली का तेल लाल फूल और गुड़ चने का भोग अर्पित करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि यह उनकी प्रिय वस्तुओं में शामिल है। पूजा के दौरान श्रीराम का स्मरण अवश्य करें क्योंकि बिना श्रीराम के नाम के हनुमान आराधना अधूरी मानी जाती है।

    हनुमान चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करना सबसे प्रभावी उपायों में माना जाता है। इसके साथ बजरंग बाण सुंदरकांड या हनुमान अष्टक का पाठ भी किया जा सकता है। माना जाता है कि इन स्तुतियों का नियमित पाठ मानसिक तनाव कम करने आत्मबल बढ़ाने और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है। जो लोग किसी विशेष समस्या से परेशान हैं वे लगातार 11 या 21 मंगलवार तक नियमपूर्वक पूजा और पाठ कर सकते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार के दिन व्रत रखने का भी विशेष महत्व है। इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करना क्रोध से दूर रहना और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना शुभ माना जाता है। बंदरों को केला गुड़ या चना खिलाना तथा गरीबों को भोजन और वस्त्र दान करना भी पुण्यदायी माना जाता है। सेवा और दान का भाव हनुमान जी को प्रसन्न करने का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है।

    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में मंगल ग्रह कमजोर हो या जीवन में बार बार बाधाएं आ रही हों उनके लिए मंगलवार की पूजा लाभकारी मानी जाती है। हनुमान जी की आराधना से आत्मविश्वास बढ़ता है और नकारात्मक सोच पर नियंत्रण पाने में मानसिक मजबूती मिलती है। हालांकि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक विश्वास है और इन्हें उसी दृष्टि से देखा जाना चाहिए।

    पूजा के साथ जीवन में सत्य ईमानदारी अनुशासन और सेवा का भाव अपनाना भी उतना ही आवश्यक माना गया है। केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि अच्छे कर्म और सकारात्मक व्यवहार भी हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का माध्यम बताए गए हैं। यदि व्यक्ति नियमित रूप से भगवान का स्मरण करते हुए अपने कर्तव्यों का पालन करे और दूसरों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहे तो उसका जीवन अधिक संतुलित और सुखमय बन सकता है। श्रद्धा विश्वास और सदाचार के साथ की गई आराधना ही सच्चे अर्थों में भगवान हनुमान को प्रसन्न करने का सबसे श्रेष्ठ उपाय मानी जाती है।

  • आज का राशिफल 14 जुलाई 2026 आषाढ़ अमावस्या पर किस राशि को मिलेगा भाग्य का साथ और किसे बरतनी होगी सावधानी

    आज का राशिफल 14 जुलाई 2026 आषाढ़ अमावस्या पर किस राशि को मिलेगा भाग्य का साथ और किसे बरतनी होगी सावधानी


    नई दिल्ली । आषाढ़ अमावस्या का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन पितरों का स्मरण दान पुण्य और पूजा पाठ का विशेष महत्व रहता है। ग्रहों की स्थिति भी कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव के संकेत दे रही है। कुछ लोगों को आर्थिक लाभ और करियर में सफलता मिलने की संभावना है तो कुछ को धैर्य और संयम के साथ आगे बढ़ने की जरूरत होगी। आइए जानते हैं 14 जुलाई 2026 का सभी राशियों का विस्तृत राशिफल।

    मेष राशि के लिए दिन नई योजनाओं पर काम शुरू करने के लिए अनुकूल रहेगा। नौकरी में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं और परिवार का सहयोग मिलेगा। वृषभ राशि के जातकों को धन संबंधी मामलों में सतर्क रहने की आवश्यकता है। अनावश्यक खर्च से बचें और सोच समझकर निवेश करें। मिथुन राशि वालों को रुके हुए कार्य पूरे होने से राहत मिलेगी। किसी पुराने मित्र से मुलाकात लाभदायक साबित हो सकती है।

    कर्क राशि के लिए पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा और घर में धार्मिक कार्यक्रम के योग बन सकते हैं। सिंह राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में सम्मान मिलने की संभावना है। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और नई जिम्मेदारियां भविष्य के लिए लाभदायक साबित होंगी। कन्या राशि वालों के लिए दिन मिश्रित रहेगा। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें और तनाव से दूर रहने का प्रयास करें।

    तुला राशि के लोगों को व्यापार और नौकरी दोनों में अच्छे अवसर मिल सकते हैं। आय के नए स्रोत बनने की संभावना है। वृश्चिक राशि के जातकों को किसी महत्वपूर्ण निर्णय में जल्दबाजी से बचना चाहिए। पारिवारिक सलाह आपके लिए लाभदायक साबित होगी। धनु राशि वालों को यात्रा के योग बन रहे हैं। शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े लोगों को अच्छी खबर मिल सकती है।

    मकर राशि के लिए आर्थिक मामलों में स्थिरता बनी रहेगी। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा और पुराने विवाद सुलझ सकते हैं। कुंभ राशि के जातकों के लिए यह दिन विशेष रूप से शुभ रहने वाला है। आर्थिक लाभ के प्रबल योग बन रहे हैं। लंबे समय से रुका हुआ धन वापस मिल सकता है या किसी नए निवेश से फायदा मिलने की संभावना है। व्यापारियों के लिए भी दिन लाभदायक रहेगा और करियर में नई संभावनाएं सामने आएंगी।

    मीन राशि के जातकों को अपने कार्यों में धैर्य रखने की जरूरत होगी। किसी भी निर्णय से पहले अनुभवी लोगों की सलाह लेना बेहतर रहेगा। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी और मानसिक शांति का अनुभव होगा।

    आषाढ़ अमावस्या के अवसर पर जरूरतमंद लोगों को अन्न वस्त्र और दक्षिणा का दान करना शुभ माना गया है। पितरों का स्मरण और भगवान शिव तथा भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। दिनभर सकारात्मक सोच बनाए रखें और किसी भी कार्य में जल्दबाजी करने से बचें। ग्रहों की अनुकूल स्थिति का पूरा लाभ लेने के लिए संयम और परिश्रम दोनों आवश्यक रहेंगे।

  • देशभर में कल मनाई जाएगी आषाढ़ अमावस्या…. जानें स्नान-दान और पूजन का मुहूर्त

    देशभर में कल मनाई जाएगी आषाढ़ अमावस्या…. जानें स्नान-दान और पूजन का मुहूर्त


    नई दिल्ली।
    हिंदू धर्म में आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या (Ashadh Amavasya 2026) तिथि का विशेष महत्व है. इस वर्ष आषाढ़ अमावस्या (Ashadh Amavasya 2026) पर मंगलवार का संयोग होने के कारण इसे भौमवती अमावस्या (Bhaumvati Amavasya) भी कहा जा रहा है, जो इसके महत्व को दोगुना कर देता है. इस बार आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई को मनाई जाएगी. पितरों के तर्पण, कालसर्प दोष निवारण, मंगल दोष की शांति और दान-पुण्य के लिए यह दिन बेहद उत्तम माना गया है।


    आषाढ़ अमावस्या तिथि (Ashadh Amavasya Date)

    द्रिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या की तिथि 13 जुलाई को शाम 6 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 14 जुलाई को दोपहर 3 बजकर 14 मिनट पर होगा। इस दिन स्नान व दान का मुहूर्त सुबह 4 बजकर 30 मिनट से शुरू होगा और सुबह 5 बजकर 32 मिनट तक रहेगा।


    आषाढ़ अमावस्या पूजन विधि (Ashadh Amavasya Pujan Vidhi)

    सुबह सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी, जलाशय या गंगाजल मिले हुए पानी से स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें. फिर, तांबे के पात्र में पानी, गंगाजल, काले तिल, दूध और कुशा लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का तर्पण करें. इसके बाद घर के मंदिर में दीपक जलाएं. भौमवती अमावस्या होने के कारण इस दिन हनुमान जी और मंगल देव की विशेष पूजा करें. हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करना शुभ रहेगा. पितरों के निमित्त घर में सात्विक भोजन बनाएं. अग्नि में गाय के कंडे (उपले) पर घी, गुड़ और भोजन का भोग लगाएं. भोजन का कुछ हिस्सा गाय, कौए, कुत्ते, चींटियों और ब्राह्मण के लिए निकालें. मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या पर पितर कौए या अन्य रूपों में आकर अन्न ग्रहण करते हैं।


    इस दिन क्या दान करें?

    अमावस्या तिथि पर किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है. इस दिन अन्न और जल जैसे गेहूं, चावल, सत्तू, या मौसमी फल. काले तिल, छाता, चप्पल या सूती वस्त्र जैसे चीजें दान की जा सकती हैं।

    आषाढ़ अमावस्या का महत्व
    – पितृ दोष से मुक्तिः-
    जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके लिए आषाढ़ अमावस्या पर पिंड दान, तर्पण और अन्नदान करना अमोघ उपाय माना गया है. इससे अतृप्त पितर प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं.

    – ग्रह दोष शांति :- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अमावस्या के स्वामी शनि देव हैं. इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है. साथ ही, मंगलवार का संयोग होने से राहू-केतु और मंगल के अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है.