Category: Religious Astrology

  • वास्तु शास्त्र के इन नियमों का रखें ध्यान, घर की दिशा से लेकर मुख्य द्वार तक जानिए सुख शांति और खुशहाली के खास उपाय

    वास्तु शास्त्र के इन नियमों का रखें ध्यान, घर की दिशा से लेकर मुख्य द्वार तक जानिए सुख शांति और खुशहाली के खास उपाय


    नई दिल्ली। भारतीय परंपरा में वास्तु शास्त्र को घर और आसपास के वातावरण को व्यवस्थित रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। मान्यता है कि घर की बनावट दिशा और वस्तुओं की सही व्यवस्था से वातावरण में संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है। बहुत से लोग नया घर बनवाते समय या पुराने घर में बदलाव करते समय वास्तु के नियमों का ध्यान रखते हैं। वास्तु से जुड़े कुछ आसान सुझाव घर को साफ सुथरा व्यवस्थित और आरामदायक बनाने में भी उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि वास्तु संबंधी मान्यताओं को वैज्ञानिक रूप से सिद्ध परिणाम नहीं समझना चाहिए।
    वास्तु के अनुसार घर का मुख्य द्वार महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी रास्ते से परिवार के सदस्य और मेहमान घर में प्रवेश करते हैं। इसलिए मुख्य द्वार को साफ रखना चाहिए और उसके आसपास अनावश्यक सामान जमा नहीं होने देना चाहिए। दरवाजे के सामने कूड़ा या टूटे हुए सामान का ढेर रखने से बचना चाहिए। पर्याप्त रोशनी और हवा आने की व्यवस्था घर के वातावरण को बेहतर बना सकती है। दरवाजे और उसके आसपास की जगह व्यवस्थित रहने से घर का प्रवेश हिस्सा आकर्षक दिखाई देता है।
    घर में पूजा स्थल को लेकर भी वास्तु शास्त्र में कई मान्यताएं प्रचलित हैं। परंपरा के अनुसार पूजा घर को शांत और साफ जगह पर बनाना अच्छा माना जाता है। पूजा स्थल पर नियमित सफाई करें और वहां अनावश्यक वस्तुएं जमा न होने दें। दीपक जलाते समय आग से सुरक्षा का ध्यान रखें और उसे ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें। पूजा के लिए ऐसा स्थान चुनें जहां परिवार के सदस्य शांति से बैठकर प्रार्थना कर सकें।
    वास्तु से जुड़े सुझावों में रसोई की व्यवस्था को भी महत्व दिया जाता है। रसोई में साफ सफाई बनाए रखना और खाद्य सामग्री को सही तरीके से रखना जरूरी है। गैस चूल्हे और बिजली के उपकरणों के आसपास अनावश्यक सामान नहीं रखना चाहिए। पानी और आग से जुड़े उपकरणों का सुरक्षित उपयोग करना चाहिए। रसोई में पर्याप्त रोशनी और हवा की व्यवस्था रहने से खाना बनाने का काम सुविधाजनक बनता है। भोजन बनाने और खाने की जगह को साफ रखना स्वास्थ्य के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
    घर के बेडरूम में आरामदायक वातावरण बनाए रखना भी जरूरी है। बिस्तर के आसपास कपड़े और दूसरे सामान बिखरे नहीं रहने चाहिए। कमरे में जरूरत के अनुसार रोशनी और हवा आने की व्यवस्था होनी चाहिए। टूटे हुए फर्नीचर और अनुपयोगी सामान को लंबे समय तक जमा रखने के बजाय उनकी मरम्मत करें या जरूरत न होने पर हटा दें। हल्के और सुकून देने वाले रंगों का इस्तेमाल कमरे को आरामदायक बना सकता है। सोने की जगह पर शोर और तेज रोशनी कम रखने से बेहतर नींद लेने में मदद मिल सकती है।
    वास्तु की मान्यताओं में घर में पौधे रखने को भी सकारात्मक वातावरण से जोड़ा जाता है। पौधे लगाने से पहले यह देखना चाहिए कि उन्हें पर्याप्त रोशनी और पानी मिल सके। सूखे या खराब पौधों की देखभाल करें और घर में ऐसे पौधे लगाएं जिनका रखरखाव आसानी से किया जा सके। घर में प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा आने के रास्ते खुले रखना भी उपयोगी है।
    वास्तु टिप्स अपनाते समय सबसे जरूरी बात यह है कि घर की व्यवस्था परिवार की जरूरतों और सुरक्षा के अनुरूप होनी चाहिए। केवल वास्तु दोष के डर से बड़े बदलाव या अनावश्यक खर्च करने की जरूरत नहीं है। साफ सफाई व्यवस्थित सामान पर्याप्त रोशनी सुरक्षित बिजली व्यवस्था और परिवार के सदस्यों के बीच अच्छा व्यवहार घर के माहौल को बेहतर बनाने में वास्तविक भूमिका निभाते हैं। वास्तु को सांस्कृतिक और पारंपरिक मान्यता के रूप में देखते हुए ऐसे उपाय चुनें जो व्यावहारिक हों और रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाएं।
  • नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की होती है पूजा, जानिए पूजन विधि, प्रिय भोग, मंत्र और व्रत का धार्मिक महत्व

    नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की होती है पूजा, जानिए पूजन विधि, प्रिय भोग, मंत्र और व्रत का धार्मिक महत्व


    नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी तपस्या संयम और साधना की प्रतीक हैं। उनकी पूजा करने से भक्तों को धैर्य आत्मविश्वास और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है। नवरात्रि के इस दिन श्रद्धालु विधि विधान से माता की पूजा करते हैं और जीवन में सुख शांति तथा सफलता की कामना करते हैं। वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर से हुआ है। इस क्रम में नवरात्रि का दूसरा दिन 12 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
    मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत शांत और तेजस्वी माना जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी कारण उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। माता के एक हाथ में जप की माला और दूसरे हाथ में कमंडल सुशोभित रहता है। उनका यह स्वरूप साधना दृढ़ संकल्प और आत्मसंयम का संदेश देता है। मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की आराधना करने से भक्तों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और मुश्किल समय में धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।
    नवरात्रि के दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर मां दुर्गा और मां ब्रह्मचारिणी का स्मरण करें। माता के सामने दीपक जलाएं और पुष्प अक्षत चंदन तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धा के साथ मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करें और उनके मंत्र का जाप करें। पूजा के दौरान मन को शांत रखते हुए माता से परिवार की सुख समृद्धि और जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने की प्रार्थना करें। इसके बाद आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
    मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए यह मंत्र विशेष रूप से प्रचलित है।
    मंत्र:
    ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः।
    मान्यता के अनुसार इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से मन को एकाग्र करने और साधना के प्रति समर्पण बढ़ाने में मदद मिलती है। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार मंत्र जाप कर सकते हैं। पूजा के दौरान माता के स्वरूप का ध्यान करना और अच्छे विचारों को अपनाने का संकल्प लेना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
    नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर और मिश्री का भोग लगाने की परंपरा प्रचलित है। कुछ भक्त माता को फल और दूध से बनी मिठाइयां भी अर्पित करते हैं। भोग लगाते समय स्वच्छता और श्रद्धा का ध्यान रखना चाहिए। इसके बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में बांटा जा सकता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी स्वास्थ्य स्थिति और परंपरा के अनुसार फलाहार करते हैं। व्रत के दौरान शरीर को पर्याप्त पानी देना और जरूरत के अनुसार पौष्टिक आहार लेना भी जरूरी है।
    धार्मिक मान्यताओं में मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या और त्याग की देवी माना जाता है। उनकी पूजा भक्तों को यह संदेश देती है कि जीवन में सफलता पाने के लिए धैर्य अनुशासन और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन श्रद्धालु पूजा पाठ के साथ जरूरतमंदों की सहायता करने और अपने व्यवहार में विनम्रता बनाए रखने का संकल्प भी ले सकते हैं।
    इस प्रकार नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना के साथ आत्मसंयम और दृढ़ इच्छाशक्ति को अपनाने का अवसर है। भक्त श्रद्धा से माता की पूजा कर सकारात्मक जीवन की कामना करते हैं। ध्यान रखें कि पूजा की विधि और भोग की परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों तथा परिवारों में भिन्न हो सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा स्वच्छता और सच्चे मन से माता का स्मरण करना।

  • 12 अक्टूबर का राशिफल, सोमवार को इन राशियों की चमकेगी किस्मत, करियर में तरक्की और धन लाभ के बनेंगे योग

    12 अक्टूबर का राशिफल, सोमवार को इन राशियों की चमकेगी किस्मत, करियर में तरक्की और धन लाभ के बनेंगे योग


    नई दिल्ली। 12 अक्टूबर 2026 का राशिफल: सोमवार का दिन धार्मिक आस्था और नई शुरुआत के लिहाज से खास माना जाता है। नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दुर्गा की आराधना के साथ भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व है। आज का दिन कुछ राशियों के लिए कामकाज में आगे बढ़ने और रिश्तों में मधुरता लाने का अवसर दे सकता है। वहीं कुछ राशि के जातकों को आर्थिक फैसले लेते समय सावधानी रखने और जल्दबाजी से बचने की जरूरत होगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहों की स्थिति व्यक्ति के मनोभावों और निर्णय लेने की प्रवृत्ति को प्रभावित कर सकती है। आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी 12 राशियों के लिए सोमवार का दिन कैसा रह सकता है।
    मेष राशि के जातकों के लिए सोमवार कामकाज में सक्रियता बनाए रखने का दिन हो सकता है। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है और पुराने काम पूरे करने का अवसर मिलेगा। आर्थिक मामलों में किसी के साथ लेनदेन करते समय शर्तों को अच्छी तरह समझें। परिवार में बातचीत के दौरान संयम रखें और गुस्से में कोई निर्णय न लें।
    वृषभ राशि वालों को कार्यक्षेत्र में सहयोग मिलने की संभावना है। कारोबार से जुड़े लोगों को नए विचारों पर काम करने का मौका मिल सकता है। धन के मामले में बजट बनाकर चलना फायदेमंद रहेगा। प्रेम संबंधों में अपनी बात स्पष्ट रूप से रखें और दूसरों की भावनाओं को भी समझने का प्रयास करें।
    मिथुन राशि के जातकों के लिए दिन नई योजनाएं बनाने और अधूरे काम पूरे करने का हो सकता है। नौकरी में सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाए रखें। किसी जरूरी काम में सलाह लेने से फायदा मिल सकता है। अनावश्यक खर्च से बचें और अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित रखने का प्रयास करें।
    कर्क राशि वालों के लिए परिवार और निजी संबंध महत्वपूर्ण रह सकते हैं। घर में किसी विषय को लेकर चर्चा हो सकती है। कार्यक्षेत्र में रचनात्मक विचारों से लाभ मिलने की संभावना है। भावनाओं में बहकर कोई बड़ा फैसला लेने से बचें और स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त आराम को महत्व दें।
    सिंह राशि के जातकों को अपने काम और परिवार के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा। नौकरी में किसी काम को पूरा करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। कारोबार में सोच समझकर आगे बढ़ें। परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रह सकता है।
    कन्या राशि वालों के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करना लाभकारी रहेगा। नौकरी में आपकी कार्यशैली पर ध्यान दिया जा सकता है। आर्थिक मामलों में बचत पर जोर दें और किसी भी निवेश से पहले पूरी जानकारी जुटाएं। स्वास्थ्य के लिहाज से खानपान और आराम का ध्यान रखें।
    तुला राशि के जातकों के लिए बातचीत और साझेदारी से जुड़े मामले महत्वपूर्ण रह सकते हैं। कारोबार में नए संपर्क बनाने का अवसर मिल सकता है। हालांकि पैसों या किसी पुराने समझौते को लेकर असहमति होने पर जल्दबाजी न करें। रिश्तों में स्पष्टता और धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा।
    वृश्चिक राशि वालों को आर्थिक और व्यक्तिगत मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए। किसी पुराने मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। नौकरी में अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाएं और गोपनीय जानकारी साझा करने से बचें। परिवार के साथ बातचीत करते समय शब्दों का चयन सोच समझकर करें।
    धनु राशि के जातकों के लिए सोमवार नई योजनाओं पर विचार करने का अवसर दे सकता है। पढ़ाई और करियर से जुड़े लोगों को अपनी तैयारी पर ध्यान देना चाहिए। किसी यात्रा की योजना बन सकती है। आर्थिक मामलों में अपनी क्षमता के अनुसार खर्च करें और अधूरे कामों को प्राथमिकता दें।
    मकर राशि वालों को कामकाज में धैर्य और अनुशासन बनाए रखने की जरूरत होगी। किसी महत्वपूर्ण काम में देरी होने पर परेशान होने के बजाय समाधान खोजें। परिवार की जिम्मेदारियों पर ध्यान दें। धन से जुड़े फैसले लेने से पहले भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना बेहतर रहेगा।
    कुंभ राशि के जातकों के लिए नए लोगों से संपर्क और विचारों का आदान प्रदान उपयोगी हो सकता है। नौकरी या कारोबार में किसी योजना पर चर्चा आगे बढ़ सकती है। हालांकि किसी की बात पर तुरंत भरोसा करने के बजाय तथ्यों की जांच करें। मानसिक शांति के लिए कुछ समय अपने लिए निकालें।
    मीन राशि वालों के लिए दिन जिम्मेदारियों को व्यवस्थित करने और खुद पर ध्यान देने का हो सकता है। कार्यक्षेत्र में धैर्य से काम लें और जरूरी निर्णय सोच समझकर करें। परिवार के साथ समय बिताने से भावनात्मक सहारा मिल सकता है। स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नींद और संतुलित दिनचर्या बनाए रखें।
    कुल मिलाकर 12 अक्टूबर का दिन सभी राशियों के लिए धैर्य समझदारी और संतुलन के साथ आगे बढ़ने का संदेश देता है। सोमवार को भगवान शिव और मां दुर्गा की आराधना कर सकारात्मक सोच के साथ दिन की शुरुआत कर सकते हैं। ध्यान रखें कि राशिफल सामान्य ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इसे निश्चित भविष्यवाणी के बजाय सामान्य मार्गदर्शन के रूप में लें और धन स्वास्थ्य तथा करियर से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले व्यावहारिक जानकारी के आधार पर करें।
  • मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा से खुलेगा सुख समृद्धि का मार्ग, जानिए नवरात्रि के पहले दिन क्या करें और किन बातों का रखें ध्यान

    मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा से खुलेगा सुख समृद्धि का मार्ग, जानिए नवरात्रि के पहले दिन क्या करें और किन बातों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली । शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की उपासना और शक्ति की आराधना का विशेष अवसर माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के नौ स्वरूपों की विधि विधान से पूजा की जाती है। इस पावन पर्व के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और उन्हें मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप माना जाता है। नवरात्रि की शुरुआत में भक्त मां शैलपुत्री से सुख शांति साहस और समृद्धि की कामना करते हैं। मंदिरों और घरों में पूजा की तैयारियां की जाती हैं और घटस्थापना के साथ देवी उपासना का शुभारंभ होता है। मान्यता है कि श्रद्धा और सच्चे मन से मां शैलपुत्री की पूजा करने से भक्तों को मानसिक शक्ति और सकारात्मकता प्राप्त होती है।
    मां शैलपुत्री का स्वरूप अत्यंत दिव्य और कल्याणकारी माना जाता है। धार्मिक चित्रों में उन्हें वृषभ यानी बैल पर विराजमान दिखाया जाता है। उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल का फूल होता है। मां शैलपुत्री को प्रकृति और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार वे पूर्व जन्म में राजा दक्ष की पुत्री सती थीं और भगवान शिव से उनका विवाह हुआ था। अगले जन्म में उन्होंने हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और शैलपुत्री कहलायीं। इसी कारण नवरात्रि के पहले दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व बताया जाता है। भक्त मां के इस स्वरूप की आराधना करके जीवन में स्थिरता और दृढ़ संकल्प की कामना करते हैं।
    नवरात्रि के पहले दिन पूजा की शुरुआत सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने से की जाती है। इसके बाद पूजा स्थल की साफ सफाई करके चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाया जाता है और मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। परंपरा के अनुसार सबसे पहले शुभ मुहूर्त में घटस्थापना की जाती है। इसके लिए मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं और विधि के अनुसार जल से भरा कलश स्थापित किया जाता है। इसके बाद दीपक जलाकर मां शैलपुत्री का ध्यान किया जाता है। उन्हें फूल अक्षत चंदन धूप दीप और फल अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान मां शैलपुत्री के मंत्र का जाप किया जा सकता है। उनका प्रचलित मंत्र है ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः। भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार आरती करके पूजा संपन्न करते हैं।
    मां शैलपुत्री की पूजा में सफेद रंग का विशेष महत्व बताया जाता है। कई धार्मिक परंपराओं में उन्हें सफेद फूल और सफेद रंग से जुड़ी पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। भोग में शुद्ध घी अर्पित करने की मान्यता भी प्रचलित है। श्रद्धालु पूजा के समय परिवार की सुख समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं। हालांकि पूजा सामग्री और भोग की परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं। घटस्थापना का शुभ समय भी स्थान और पंचांग के अनुसार अलग होता है इसलिए पूजा से पहले स्थानीय पंचांग में मुहूर्त की पुष्टि करना उचित है।
    नवरात्रि के पहले दिन कई भक्त उपवास भी रखते हैं। कुछ लोग पूरे नौ दिनों तक व्रत करते हैं जबकि कुछ पहले और अंतिम दिन उपवास रखते हैं। व्रत के दौरान फलाहार और सात्विक भोजन का सेवन किया जाता है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर अपनी क्षमता के अनुसार भोजन करना चाहिए और लंबे समय तक भूखे रहने से बचना चाहिए। मां शैलपुत्री की आराधना के साथ नवरात्रि का शुभारंभ भक्तों को श्रद्धा अनुशासन और सकारात्मक सोच का संदेश देता है। नौ दिनों तक चलने वाली यह उपासना मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों के प्रति भक्ति प्रकट करने का अवसर है।
  • कुंडली में सूर्य को मजबूत करने के लिए रविवार को करें ये उपाय, सूर्य देव की कृपा से मिलेगा मान सम्मान और तरक्की, जानिए पूजा के जरूरी नियम

    कुंडली में सूर्य को मजबूत करने के लिए रविवार को करें ये उपाय, सूर्य देव की कृपा से मिलेगा मान सम्मान और तरक्की, जानिए पूजा के जरूरी नियम


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है क्योंकि वे प्रतिदिन अपने प्रकाश से पूरी दुनिया को रोशन करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव ऊर्जा आत्मविश्वास स्वास्थ्य और मान सम्मान के कारक हैं। यही वजह है कि सनातन परंपरा में प्रतिदिन सुबह सूर्य को जल अर्पित करने और उनकी आराधना करने का विशेष महत्व बताया गया है। रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख समृद्धि और जीवन में सफलता की कामना करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और नियम के साथ सूर्य उपासना करने से मन में सकारात्मकता आती है और व्यक्ति को अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा मिलती है।
    सूर्य देव की पूजा के लिए सुबह का समय विशेष शुभ माना जाता है। सूर्योदय के आसपास स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और सूर्य की ओर मुख करके तांबे के लोटे में साफ जल भरें। परंपरा के अनुसार इसमें लाल फूल और अक्षत डाल सकते हैं। इसके बाद दोनों हाथों से लोटा उठाकर धीरे धीरे सूर्य देव को जल अर्पित करें। इस दौरान जल की धारा के बीच से सूर्य के दर्शन करते हुए मन में श्रद्धा रखें और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें। पूजा के समय सूर्य मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। ॐ सूर्याय नमः और ॐ घृणि सूर्याय नमः जैसे मंत्रों का श्रद्धापूर्वक उच्चारण किया जाता है। अर्घ्य देते समय ध्यान रखें कि पानी सड़क या किसी के आने जाने वाले रास्ते पर न गिरे और पूजा के बाद उस स्थान को साफ रखा जाए।
    धार्मिक मान्यताओं में सूर्य देव को नवग्रहों का प्रमुख स्थान प्राप्त है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मबल नेतृत्व पिता सम्मान और प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता के अनुसार कुंडली में सूर्य की अनुकूल स्थिति व्यक्ति के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता का प्रतीक मानी जाती है। इसी विश्वास के चलते कई लोग रविवार को विशेष पूजा पाठ करते हैं और सूर्य देव से जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। हालांकि ज्योतिषीय उपाय आस्था और परंपरा का विषय हैं इसलिए जीवन की समस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक प्रयास करना भी जरूरी है।
    रविवार के दिन सूर्य देव की पूजा के साथ दान पुण्य करने की परंपरा भी प्रचलित है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन कपड़े या अन्य उपयोगी वस्तुएं दान कर सकते हैं। कुछ लोग इस दिन गेहूं गुड़ और तांबे से जुड़ी वस्तुओं का दान भी करते हैं। पूजा के दौरान स्वच्छता संयम और अच्छे व्यवहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कई परिवार रविवार को सात्विक भोजन करते हैं और अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार व्रत भी रखते हैं। व्रत रखने वालों को अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए और जरूरत के अनुसार पर्याप्त पानी तथा पौष्टिक भोजन लेना चाहिए।
    सूर्य देव की उपासना का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। सुबह उठकर कुछ समय प्राकृतिक रोशनी में बिताना नियमित दिनचर्या बनाने और सक्रिय रहने की प्रेरणा भी देता है। सूर्य की रोशनी में आंखों से सीधे देखना उचित नहीं है क्योंकि इससे आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। सूर्य नमस्कार जैसे योग अभ्यास भी स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकते हैं लेकिन इन्हें अपनी क्षमता के अनुसार करना चाहिए। इस प्रकार रविवार को सूर्य देव की पूजा श्रद्धा अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ की जा सकती है। भक्त इस दिन सूर्य को अर्घ्य देकर जीवन में ऊर्जा स्वास्थ्य सुख शांति और सफलता की कामना करते हैं।

  • रविवार को करें घर की इन जगहों में जरूरी बदलाव, वास्तु के अनुसार बढ़ेगी सकारात्मकता और दूर होगा नकारात्मक माहौल, जानिए सुख समृद्धि के खास टिप्स

    रविवार को करें घर की इन जगहों में जरूरी बदलाव, वास्तु के अनुसार बढ़ेगी सकारात्मकता और दूर होगा नकारात्मक माहौल, जानिए सुख समृद्धि के खास टिप्स


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित माना जाता है। इस दिन सूर्य उपासना के साथ घर की साफ सफाई और सकारात्मक वातावरण बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। वास्तु शास्त्र में घर की दिशाओं और वस्तुओं की व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में स्वच्छता और संतुलित व्यवस्था होने से सुख शांति का माहौल बनता है। यही वजह है कि कई लोग रविवार को घर की विशेष सफाई करते हैं और पूजा स्थल से लेकर मुख्य द्वार तक हर जगह को व्यवस्थित रखते हैं। यदि आप भी घर में सकारात्मकता और खुशहाली चाहते हैं तो रविवार के दिन कुछ आसान वास्तु टिप्स अपना सकते हैं। हालांकि वास्तु से जुड़े उपाय पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं और इन्हें जीवन की हर परेशानी का निश्चित समाधान नहीं मानना चाहिए।
    वास्तु मान्यताओं में घर के मुख्य द्वार को खास महत्व दिया जाता है क्योंकि यही घर में प्रवेश का प्रमुख स्थान होता है। रविवार को मुख्य द्वार और उसके आसपास की अच्छी तरह सफाई करें। दरवाजे के सामने कचरा टूटे गमले या अनुपयोगी सामान जमा न होने दें। प्रवेश द्वार पर पर्याप्त रोशनी रखें और यह सुनिश्चित करें कि दरवाजा आसानी से खुल सके। धार्मिक आस्था रखने वाले लोग मुख्य द्वार पर स्वस्तिक या अन्य शुभ चिह्न बना सकते हैं। मान्यता है कि साफ और व्यवस्थित प्रवेश द्वार शुभता का प्रतीक होता है। व्यावहारिक रूप से भी इससे घर का वातावरण आकर्षक और सुविधाजनक बनता है।
    रविवार को सूर्य देव की पूजा करना भी विशेष फलदायी माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनकर उगते सूर्य को जल अर्पित करें। इस दौरान सूर्य देव का स्मरण करते हुए परिवार की सुख शांति और समृद्धि की कामना की जा सकती है। घर में पूजा का स्थान साफ रखें और वहां बिखरी हुई पूजन सामग्री को व्यवस्थित करें। दीपक या अगरबत्ती जलाते समय आग से जुड़ी सावधानियां जरूर बरतें। वास्तु की कुछ मान्यताओं में उत्तर पूर्व दिशा को पूजा और ध्यान के लिए उपयुक्त बताया जाता है लेकिन घर में पहले से बने पूजा स्थल को केवल दिशा के कारण बदलना जरूरी नहीं है। ऐसा स्थान चुनना बेहतर है जहां शांति और स्वच्छता बनी रहे।
    रसोई घर की ऐसी जगह है जहां साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। रविवार को रसोई के डिब्बों अलमारियों और काम करने वाले स्थान की सफाई करें। खराब हो चुके खाद्य पदार्थों को हटा दें और खाने पीने की वस्तुओं को सही तरीके से रखें। गैस चूल्हे के आसपास अनावश्यक सामान जमा न होने दें। वास्तु की पारंपरिक मान्यताओं में दक्षिण पूर्व दिशा को अग्नि तत्व से जोड़ा जाता है। हालांकि रसोई की दिशा बदलने से ज्यादा जरूरी है कि वहां पर्याप्त हवा और रोशनी हो तथा खाना बनाते समय सुरक्षा बनी रहे। इसी तरह घर के शयनकक्ष में बिस्तर और अलमारी के आसपास अनावश्यक सामान हटाने से जगह व्यवस्थित रहती है और आराम करने में सुविधा होती है।
    वास्तु टिप्स के अनुसार घर के कोनों में लंबे समय तक बेकार सामान जमा रखना उचित नहीं माना जाता। रविवार को ऐसे सामान की पहचान करें जिसकी अब जरूरत नहीं है और उसे व्यवस्थित तरीके से हटा दें। खिड़कियों को साफ रखें ताकि प्राकृतिक रोशनी घर में आ सके। यदि घर में पौधे लगाए हैं तो उनकी देखभाल करें और सूखी पत्तियों को हटा दें। घर में पानी का रिसाव हो रहा हो तो उसे ठीक करवाएं क्योंकि इससे दीवारों और फर्श को नुकसान हो सकता है। ये छोटे कदम घर को साफ सुरक्षित और रहने के लिहाज से अधिक आरामदायक बना सकते हैं।
    रविवार को वास्तु के उपाय अपनाते समय अपनी सुविधा और बजट का ध्यान रखना भी जरूरी है। केवल किसी दिशा या मान्यता के आधार पर महंगे बदलाव कराने की जरूरत नहीं है। घर में सुख शांति बनाए रखने के लिए परिवार के सदस्यों के बीच अच्छा व्यवहार स्वच्छता और व्यवस्थित दिनचर्या भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सूर्य देव की पूजा और घर की सफाई को श्रद्धा के साथ अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। इस तरह रविवार का दिन आध्यात्मिक जुड़ाव के साथ घर को बेहतर और सकारात्मक बनाने का अवसर बन सकता है।
  • मां दुर्गा की भक्ति में डूबेगा देश, नौ दिनों तक होगी शक्ति की उपासना, घटस्थापना से कन्या पूजन तक जानिए नवरात्रि की पूरी परंपरा

    मां दुर्गा की भक्ति में डूबेगा देश, नौ दिनों तक होगी शक्ति की उपासना, घटस्थापना से कन्या पूजन तक जानिए नवरात्रि की पूरी परंपरा


    नई दिल्ली । देशभर में शारदीय नवरात्रि के आगमन के साथ ही मां दुर्गा की भक्ति और आराधना का विशेष पर्व शुरू हो रहा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन उत्सव को लेकर भक्तों में उत्साह और श्रद्धा का माहौल है। घरों से लेकर मंदिरों तक पूजा की तैयारियां की जा रही हैं और देवी के स्वागत के लिए पूजा स्थल सजाए जा रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करने पर सुख समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का समापन 19 अक्टूबर को होगा जबकि 20 अक्टूबर को विजयादशमी और दशहरा मनाया जाएगा। इन नौ दिनों में भक्त पूजा पाठ व्रत और सेवा के माध्यम से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करेंगे।
    नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व माना जाता है। इसे कलश स्थापना भी कहा जाता है और इसी के साथ देवी उपासना की शुरुआत होती है। घटस्थापना से पहले घर के पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ सफाई करनी चाहिए। इसके बाद चौकी पर लाल या स्वच्छ कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा अथवा तस्वीर स्थापित की जाती है। परंपरा के अनुसार मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं और निर्धारित विधि से कलश की स्थापना की जाती है। कलश को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद दीपक जलाकर मां दुर्गा का ध्यान किया जाता है और उन्हें फूल अक्षत फल तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त स्थान और पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है इसलिए पूजा से पहले स्थानीय पंचांग में दिए गए समय की पुष्टि करना उचित है।
    नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी तीसरे दिन मां चंद्रघंटा चौथे दिन मां कूष्मांडा पांचवें दिन मां स्कंदमाता छठे दिन मां कात्यायनी और सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना होती है। आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। भक्त अपनी पारिवारिक परंपराओं और श्रद्धा के अनुसार नौ दिनों तक व्रत रखते हैं। कुछ श्रद्धालु पूरे नौ दिन उपवास करते हैं जबकि कुछ पहले और अंतिम दिन व्रत रखकर देवी की उपासना करते हैं। व्रत के दौरान फलाहार और सात्विक भोजन को प्राथमिकता दी जाती है।
    धार्मिक मान्यताओं के साथ नवरात्रि का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। देश के अलग-अलग हिस्सों में यह पर्व अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं दुर्गा पूजा के भव्य पंडाल सजाए जाते हैं तो कहीं गरबा और डांडिया के आयोजन भक्तों को आकर्षित करते हैं। मंदिरों में विशेष आरती भजन और कीर्तन होते हैं। अष्टमी और नवमी के अवसर पर कई परिवार कन्या पूजन करते हैं और छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर भोजन कराते हैं। जरूरतमंदों की सहायता और दान पुण्य को भी इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
    नवरात्रि के दौरान पूजा स्थल की स्वच्छता बनाए रखना श्रद्धापूर्वक पूजा करना और अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखना जरूरी है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर लंबे समय तक भूखे रहने से बचना चाहिए और जरूरत के अनुसार पौष्टिक आहार लेना चाहिए। नवरात्रि केवल उपवास और धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं बल्कि आत्मसंयम सकारात्मकता और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश भी देता है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा से परिवार की खुशहाली सुख शांति और जीवन में सफलता की कामना करते हैं। विजयादशमी के साथ इस पर्व का समापन होगा और श्रद्धालु धर्म की विजय तथा अधर्म के अंत का संदेश लेकर आगे बढ़ेंगे।

  • आज का राशिफल 11 अक्टूबर 2026, किसी को करियर में मिलेगी नई राह तो किसी को धन के मामले में बरतनी होगी सावधानी, पढ़ें अपना दैनिक भविष्यफल

    आज का राशिफल 11 अक्टूबर 2026, किसी को करियर में मिलेगी नई राह तो किसी को धन के मामले में बरतनी होगी सावधानी, पढ़ें अपना दैनिक भविष्यफल


    नई दिल्ली । 11 अक्टूबर 2026 का दिन रविवार है और धार्मिक मान्यताओं में रविवार सूर्यदेव को समर्पित माना जाता है। आज का दिन कई राशियों के लिए नई योजनाएं बनाने और अधूरे काम पूरे करने का अवसर लेकर आ सकता है। वहीं कुछ राशि के जातकों को आर्थिक मामलों में सतर्क रहने और रिश्तों में धैर्य बनाए रखने की जरूरत होगी। नौकरी व्यापार परिवार प्रेम और स्वास्थ्य के लिहाज से दिन कैसा रह सकता है आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का दैनिक राशिफल। ये ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित सामान्य संकेत हैं।
    मेष राशि के जातकों के लिए दिन उत्साह से भरा रह सकता है। कामकाज में नई जिम्मेदारी मिल सकती है और पुराने प्रयासों का लाभ मिलने की उम्मीद रहेगी। परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा। आर्थिक फैसले जल्दबाजी में न लें।
    वृषभ राशि वालों को रिश्तों में तालमेल बनाए रखने की जरूरत होगी। जीवनसाथी या करीबी व्यक्ति के साथ किसी विषय पर मतभेद हो सकता है। धैर्य से बात करने पर स्थिति संभल सकती है। खर्चों पर नियंत्रण रखें और जरूरी कामों को प्राथमिकता दें।
    मिथुन राशि के जातकों के लिए बातचीत और संपर्क लाभकारी हो सकते हैं। किसी पुराने मित्र से बात होने या उपयोगी जानकारी मिलने की संभावना है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को प्रयास जारी रखने चाहिए। एक साथ कई काम हाथ में लेने से बचें।
    कर्क राशि वालों का ध्यान परिवार और घरेलू मामलों पर रह सकता है। घर से जुड़ा कोई फैसला लेने की जरूरत पड़ सकती है। भावनाओं में बहकर प्रतिक्रिया देने के बजाय सोच समझकर बात करें। सेहत के लिए आराम और नियमित दिनचर्या जरूरी रहेगी।
    सिंह राशि के जातकों में आत्मविश्वास बना रह सकता है। अपने विचार सामने रखने और रचनात्मक कामों में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। हालांकि परिवार में किसी बात पर बहस से बचें। दूसरों की राय सुनने से भी फायदा हो सकता है।
    कन्या राशि वालों के लिए आर्थिक योजना बनाने का दिन रह सकता है। आय और खर्च का हिसाब व्यवस्थित करने से भविष्य की चिंताएं कम हो सकती हैं। कामकाज में छोटी गलतियों से बचने के लिए जरूरी दस्तावेज ध्यान से जांचें। रिश्तेदारों से बातचीत में संयम रखें।
    तुला राशि के जातकों को अपनी जरूरतों और दूसरों की अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाना होगा। निजी जीवन में कोई महत्वपूर्ण बातचीत हो सकती है। कामकाज में सहयोग मिलने की संभावना है। धन से जुड़े मामलों में स्पष्टता रखें और बिना जांचे किसी पर भरोसा न करें।
    वृश्चिक राशि वालों को धैर्य के साथ आगे बढ़ने की सलाह है। किसी पुरानी बात को लेकर मन में उलझन रह सकती है। जरूरी निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करें। अनावश्यक विवाद से दूर रहना बेहतर रहेगा।
    धनु राशि के जातकों के लिए मित्रों और सामाजिक संपर्कों से लाभकारी जानकारी मिल सकती है। भविष्य की योजनाओं पर काम शुरू करने का विचार बन सकता है। हालांकि किसी भी योजना को अमल में लाने से पहले समय और बजट का आकलन करें।
    मकर राशि वालों का ध्यान करियर और जिम्मेदारियों पर रह सकता है। किसी काम को पूरा करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना पड़ सकता है। वरिष्ठों या अनुभवी लोगों की सलाह उपयोगी हो सकती है। परिवार के लिए भी समय निकालें।
    कुंभ राशि के जातकों के लिए नई जानकारी हासिल करने और कुछ अलग सीखने का अवसर बन सकता है। यात्रा या भविष्य की योजना पर चर्चा हो सकती है। किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से बातचीत करते समय अपनी बात स्पष्ट रखें और जल्दबाजी में वादा न करें।
    मीन राशि वालों को भावनात्मक और आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखने की जरूरत होगी। परिवार के किसी सदस्य की सलाह उपयोगी साबित हो सकती है। खर्च करते समय जरूरत और इच्छा के बीच अंतर समझें। नियमित दिनचर्या और पर्याप्त आराम पर ध्यान दें।
    कुल मिलाकर 11 अक्टूबर का दिन धैर्य समझदारी और संतुलित व्यवहार के साथ आगे बढ़ने का संदेश देता है। रविवार को सूर्यदेव की पूजा करना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करना धार्मिक आस्था से जुड़ा उपाय माना जाता है। किसी भी बड़े आर्थिक या व्यक्तिगत निर्णय में केवल राशिफल के आधार पर निर्भर रहने के बजाय वास्तविक परिस्थितियों और सही जानकारी को महत्व देना चाहिए।
  • आज का राशिफल 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को इन राशियों की चमकेगी किस्मत, जानिए मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का हाल

    आज का राशिफल 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को इन राशियों की चमकेगी किस्मत, जानिए मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का हाल


    नई दिल्ली। 10 अक्टूबर 2026 शनिवार का दिन है और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शनिवार का संबंध शनि देव से माना जाता है। इस दिन कई लोग पूजा पाठ और दान के माध्यम से शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। दैनिक राशिफल के जरिए लोग अपने दिन की संभावित परिस्थितियों को समझने की कोशिश करते हैं। आज का दिन किसी के लिए कामकाज में नई जिम्मेदारियां लेकर आ सकता है तो किसी को आर्थिक मामलों में सोच समझकर निर्णय लेने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि राशिफल सामान्य ज्योतिषीय संकेत हैं और इन्हें निश्चित भविष्यवाणी के बजाय मार्गदर्शन के रूप में देखना चाहिए।

    मेष राशि के जातकों को आज अपने काम पर ध्यान केंद्रित रखने की जरूरत होगी। जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचें और महत्वपूर्ण मामलों में अनुभवी लोगों की सलाह लें। वृषभ राशि वालों के लिए आर्थिक योजना बनाने का दिन हो सकता है। परिवार के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा। मिथुन राशि के जातकों को बातचीत में संयम रखने की सलाह दी जाती है। कार्यस्थल पर अपनी बात स्पष्ट रखें और अधूरे काम पूरे करने की कोशिश करें।

    कर्क राशि के लोगों को पारिवारिक मामलों में धैर्य बनाए रखना चाहिए। किसी पुराने विषय पर चर्चा हो सकती है। सिंह राशि के जातकों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सकता है। नौकरी और व्यवसाय से जुड़े मामलों में मेहनत जारी रखें। कन्या राशि वालों के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करना लाभकारी हो सकता है। खर्चों पर नजर रखें और जरूरी कामों को प्राथमिकता दें।

    तुला राशि के जातकों को रिश्तों में संतुलन बनाए रखने की जरूरत होगी। किसी करीबी के साथ बातचीत से गलतफहमी दूर हो सकती है। वृश्चिक राशि के लोगों को अपने लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए। कामकाज में दबाव महसूस हो तो जल्दबाजी के बजाय शांत रहकर रास्ता निकालें। धनु राशि के जातकों के लिए सीखने और नई योजनाओं पर विचार करने का समय हो सकता है। परिवार के सदस्यों की सलाह उपयोगी साबित हो सकती है।

    मकर राशि के जातकों को आज जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाना चाहिए। कार्यक्षेत्र में अनुशासन और निरंतर प्रयास से अच्छे परिणाम पाने की संभावना बन सकती है। कुंभ राशि वालों को नए विचारों पर काम करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि किसी भी योजना को आगे बढ़ाने से पहले उसके व्यावहारिक पहलुओं को समझना जरूरी होगा। मीन राशि के जातकों को भावनाओं में बहकर फैसला लेने से बचना चाहिए। परिवार और दोस्तों के साथ बातचीत से मन हल्का हो सकता है।

    आज के दिन प्रेम और वैवाहिक जीवन में सभी राशियों के लोगों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। छोटी बातों को लेकर विवाद बढ़ाने के बजाय बातचीत से समाधान निकालना बेहतर रहेगा। अविवाहित लोगों को रिश्तों के मामले में जल्दबाजी करने से बचना चाहिए। आर्थिक मामलों में बजट बनाकर चलना और गैर जरूरी खर्चों पर नियंत्रण रखना उपयोगी हो सकता है। नौकरीपेशा लोगों को अपने काम की जिम्मेदारी निभानी चाहिए जबकि कारोबार करने वाले लोगों को किसी बड़े निवेश से पहले सभी जरूरी पहलुओं की जांच करनी चाहिए।

    स्वास्थ्य के मामले में आज नियमित दिनचर्या अपनाना फायदेमंद रहेगा। पर्याप्त नींद लें और खानपान पर ध्यान दें। काम के दबाव के बीच आराम के लिए भी समय निकालें। शनिवार के दिन शनि देव की पूजा करना जरूरतमंदों की सहायता करना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना धार्मिक आस्था से जुड़े उपाय माने जाते हैं। इन उपायों को श्रद्धा और सद्भावना के साथ किया जा सकता है। याद रखें कि सफलता के लिए सकारात्मक सोच के साथ मेहनत और सही निर्णय भी जरूरी हैं। आज का दिन अपनी प्राथमिकताएं तय करने और आने वाले समय के लिए बेहतर योजना बनाने का अवसर हो सकता है।

  • शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू, जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और विजयादशमी की तारीख

    शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू, जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और विजयादशमी की तारीख

    नई दिल्ली: मां दुर्गा की आराधना का प्रमुख पर्व शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होने जा रहा है। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना के साथ धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत होती है। इसके बाद नौ दिनों तक देवी के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना की जाती है। पर्व के अंतिम चरण में अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन की परंपरा निभाई जाती है। इसके अगले दिन विजयादशमी मनाई जाती है। वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होंगे।

    हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर 2026 को रात 9 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि 11 अक्टूबर को रात 9 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर शारदीय नवरात्र का पहला दिन 11 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इसी दिन घरों और मंदिरों में कलश स्थापना की जाएगी और मां दुर्गा की पूजा शुरू होगी। नवरात्र के दौरान श्रद्धालु अपनी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार व्रत रखते हैं। कई भक्त पूरे नौ दिन उपवास करते हैं, जबकि कुछ लोग पहले और अंतिम दिन व्रत रखकर पूजा-अर्चना करते हैं। इन दिनों देवी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

    शारदीय नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना के लिए सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालु इन समयावधियों में अपनी परंपरा के अनुसार कलश स्थापना कर सकते हैं। घटस्थापना को नवरात्र पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, क्योंकि इसी के साथ देवी आराधना और नौ दिनों के धार्मिक अनुष्ठानों का आरंभ होता है। पूजा की तैयारी करते समय श्रद्धालु पूजा स्थल की सफाई करते हैं और आवश्यक सामग्री एकत्र करते हैं। मुहूर्त में कलश स्थापित करने के बाद मां दुर्गा का ध्यान करके परिवार के लिए सुख-शांति और मंगल की प्रार्थना की जाती है।

    नवरात्र के पहले दिन पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद घर के पूजा स्थल की सफाई करके वहां चौकी स्थापित करें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर रखें। पूजा आरंभ करने से पहले भगवान गणेश का स्मरण करें और फिर विधि-विधान से घटस्थापना करें। कलश स्थापित करने के लिए उसमें साफ जल भरें। परंपरा के अनुसार, कलश में अक्षत, सुपारी और सिक्का भी रखा जा सकता है। इसके बाद कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखें और लाल कपड़े में लपेटा हुआ नारियल उसके ऊपर स्थापित करें। कलश स्थापना करते समय मां दुर्गा का ध्यान करें और घर-परिवार की सुख-शांति तथा मंगल की कामना करें।

    घटस्थापना के बाद मां दुर्गा को रोली, अक्षत, सिंदूर, फूल, माला, फल और मिठाई अर्पित करें। पूजा स्थल पर दीपक और धूप जलाएं। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार दुर्गा सप्तशती, देवी मंत्र या दुर्गा चालीसा का पाठ कर सकते हैं। पूजा के अंत में मां दुर्गा की आरती करें और प्रसाद वितरित करें। इसके बाद नौ दिनों तक देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र के अंतिम दिनों में अष्टमी या नवमी के अवसर पर कन्या पूजन करने की परंपरा भी प्रचलित है। इस दौरान कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। नौ दिनों की आराधना के बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा, जिसके साथ शारदीय नवरात्र का समापन होगा।