Category: Religious Astrology

  • कुंभ राशि में 4 ग्रहों की महायुति, इन राशि वालों के लिए शुरू होगा स्वर्णिम समय, मिलेगा बड़ा लाभ

    कुंभ राशि में 4 ग्रहों की महायुति, इन राशि वालों के लिए शुरू होगा स्वर्णिम समय, मिलेगा बड़ा लाभ


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का राशि परिवर्तन हमेशा जीवन में बड़े बदलाव और अवसर लेकर आता है। मार्च 2026 में कुंभ राशि में बन रही चतुर्ग्रही योग इस समय की सबसे खास घटना है। इस योग के प्रभाव से चार भाग्यशाली राशियों मेष, वृषभ, तुला और कुंभ के लिए करियर और आर्थिक मामलों में महत्वपूर्ण सफलता के दरवाजे खुलने वाले हैं।

    चतुर्ग्रही योग का समय और प्रभाव

    ज्योतिषियों के अनुसार, 16 मार्च 2026 की शाम 6 बजकर 15 मिनट से कुंभ राशि में राहु, मंगल, बुध और चंद्रमा के मिलन से यह शक्तिशाली चतुर्ग्रही योग बना। यह योग 18 मार्च 2026 की देर रात 11 बजकर 35 मिनट तक पूर्ण प्रभावी रहेगा। इसके बाद चंद्रमा के मीन राशि में जाने के बाद यह योग समाप्त हो जाएगा। हालांकि, कुंभ राशि में राहु, मंगल और बुध का त्रिग्रही योग सक्रिय रहेगा। करीब ढाई दिन तक बने इस योग से इन चार राशियों के लिए करियर में उन्नति, धन लाभ और भाग्य के शुभ परिणाम आने की संभावना है।

    राशियों पर प्रभाव

    मेष राशि
    मेष राशि वालों के स्वामी मंगल इस योग में शामिल हैं। इस समय उन्हें करियर में नए अवसर मिल सकते हैं। नई नौकरी या पदोन्नति के मौके बढ़ेंगे। पहले की गई मेहनत का फल मिलेगा। घर में सुख-शांति आएगी और निवेश के लिए समय अनुकूल रहेगा।

    वृषभ राशि
    वृषभ राशि के जातकों के लिए यह योग बड़ी तरक्की और आर्थिक सुधार का संकेत देता है। काम को मान्यता मिलेगी, बैंक बैलेंस बढ़ेगा और रुके हुए काम तेजी से पूरे होंगे। स्वास्थ्य समस्याएं कम होंगी और किस्मत का साथ मिलेगा।

    तुला राशि
    तुला राशि के लोगों को शिक्षा, करियर और धन के मामले में शुभ फल मिल सकते हैं। विद्यार्थियों को सफलता मिलेगी, करियर में प्रमोशन की संभावना रहेगी। लव लाइफ में खुशहाली आएगी और सिंगल जातकों को सच्चा प्यार मिलने के योग हैं।

    कुंभ राशि
    यह योग कुंभ राशि में बन रहा है, इसलिए इस राशि वालों के लिए विशेष लाभकारी है। अचानक धन लाभ हो सकता है। ऑफिस में काम की सराहना होगी। नए स्रोत से आय बढ़ेगी और कर्ज चुकाने में आसानी होगी। परिवार के साथ समय अच्छा बीतेगा और घर में खुशहाली रहेगी।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य ज्योतिष स्रोतों पर आधारित है और केवल जागरूक करने के उद्देश्य से दी गई है।

  • गुड़ी पड़वा 2026: 19 मार्च को मनाया जाएगा हिंदू नववर्ष, जानिए गुड़ी स्थापना और तेल स्नान का महत्व

    गुड़ी पड़वा 2026: 19 मार्च को मनाया जाएगा हिंदू नववर्ष, जानिए गुड़ी स्थापना और तेल स्नान का महत्व


    नई दिल्ली । हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गुड़ी पड़वा का पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 19 मार्च को मनाया जाएगा। इसी दिन से हिंदू नववर्ष नवसंवत्सर 2083 की शुरुआत मानी जाती है और चैत्र नवरात्रि का भी आरंभ होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी तिथि पर सृष्टि की रचना भगवान Brahma ने की थी इसलिए इसे नए साल की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है। महाराष्ट्र में इस पर्व को विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है जहां इसे गुड़ी पड़वा कहा जाता है। वहीं कर्नाटक में इसे युगादी और आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना में उगादी के नाम से जाना जाता है।

    गुड़ी स्थापना की परंपरा

    गुड़ी पड़वा के दिन घरों में गुड़ी स्थापित करने की परंपरा है। गुड़ी को विजय समृद्धि और नए वर्ष के स्वागत का प्रतीक माना जाता है। इसे घर के मुख्य द्वार छत या किसी ऊंचे स्थान पर लगाया जाता है ताकि वह दूर से दिखाई दे सके। गुड़ी बनाने के लिए बांस के डंडे पर सुंदर कपड़ा बांधा जाता है और उस पर आम तथा नीम की पत्तियां फूल और ऊपर उल्टा चांदी तांबे या पीतल का कलश लगाया जाता है।

    तेल स्नान का महत्व
    गुड़ी पड़वा की सुबह जल्दी उठकर सुगंधित तेल से स्नान करने की परंपरा भी प्रचलित है। माना जाता है कि इससे शरीर की अशुद्धियां दूर होती हैं रक्त संचार बेहतर होता है और व्यक्ति सकारात्मक ऊर्जा के साथ नए वर्ष की शुरुआत करता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन तेल स्नान करने से Lakshmi की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

    पारंपरिक व्यंजनों से होता है नए साल का स्वागत

    गुड़ी पड़वा के अवसर पर महाराष्ट्र में श्रीखंड पुरण पोली राइस चकली और भाकरवड़ी जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। परिवार और रिश्तेदारों के साथ इन पकवानों का आनंद लेते हुए लोग नए साल का स्वागत करते हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं।

  • Bada Mangal 2026: हनुमान भक्तों के लिए खास साल, ज्येष्ठ मास में पड़ेंगे 8 बड़ा मंगल, दोगुना पुण्य कमाने का मौका

    Bada Mangal 2026: हनुमान भक्तों के लिए खास साल, ज्येष्ठ मास में पड़ेंगे 8 बड़ा मंगल, दोगुना पुण्य कमाने का मौका


    नई दिल्ली। भगवान हनुमान के भक्तों के लिए साल 2026 बेहद खास रहने वाला है। ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले बड़ा मंगल का पर्व इस बार विशेष महत्व लेकर आ रहा है। आमतौर पर जहां चार या पांच बड़ा मंगल होते हैं, वहीं इस साल पूरे आठ बड़ा मंगल पड़ेंगे, जिससे श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना और पुण्य कमाने के अधिक अवसर मिलेंगे।

    बड़ा मंगल के दिन हनुमान जी की विशेष पूजा की जाती है। खासकर उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में यह पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, सुंदरकांड का पाठ किया जाता है और जगह-जगह भंडारों का आयोजन भी होता है। मान्यता है कि ज्येष्ठ माह के मंगलवार को बजरंगबली की पूजा करने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

    बड़ा मंगल 2026 की तारीखें

    साल 2026 में ज्येष्ठ मास के दौरान पड़ने वाले बड़ा मंगल इस प्रकार हैं-

    पहला बड़ा मंगल – 5 मई 2026

    दूसरा बड़ा मंगल – 12 मई 2026

    तीसरा बड़ा मंगल – 19 मई 2026

    चौथा बड़ा मंगल – 26 मई 2026

    पांचवां बड़ा मंगल – 2 जून 2026

    छठा बड़ा मंगल – 9 जून 2026

    सातवां बड़ा मंगल – 16 जून 2026

    आठवां बड़ा मंगल – 23 जून 2026

    क्यों पड़ रहे हैं 8 बड़ा मंगल

    इस बार आठ बड़ा मंगल पड़ने की खास वजह अधिकमास है। हिंदू पंचांग के अनुसार विक्रम संवत 2083 में 12 की बजाय 13 महीने होंगे। हर तीन साल में सौर और चंद्र कैलेंडर के बीच लगभग 33 दिनों के अंतर को संतुलित करने के लिए अधिकमास जोड़ा जाता है। अधिकमास जिस महीने में पड़ता है, वह महीना लगभग दोगुना हो जाता है। साल 2026 में अधिकमास ज्येष्ठ महीने में ही जुड़ रहा है, जिसकी वजह से यह महीना लंबा हो जाएगा।

    60 दिन तक चलेगा ज्येष्ठ मास

    इस साल ज्येष्ठ मास की शुरुआत 2 मई 2026 से होगी। वहीं अधिकमास 17 मई 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 तक रहेगा। इस कारण ज्येष्ठ मास लगभग 60 दिन तक, यानी 29 जून 2026 तक चलेगा। लंबे ज्येष्ठ महीने के कारण इस दौरान कुल आठ मंगलवार पड़ेंगे और सभी को बड़ा मंगल के रूप में मनाया जाएगा। इस तरह भक्तों को अन्य वर्षों की तुलना में बजरंगबली की आराधना के अधिक अवसर मिलेंगे और मान्यता के अनुसार दोगुना पुण्य प्राप्त हो सकता है।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य स्रोतों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना है।

  • आज सोम प्रदोष व्रत: भगवान शिव के अभिषेक का शुभ मुहूर्त शाम 6:29 से 8:53 बजे तक

    आज सोम प्रदोष व्रत: भगवान शिव के अभिषेक का शुभ मुहूर्त शाम 6:29 से 8:53 बजे तक

    नई दिल्ली । 16 मार्च को सोम प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जब प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ता है तो इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है और इसका महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आने की मान्यता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। पंचांग के अनुसार आज प्रदोष काल में पूजा और अभिषेक का शुभ समय शाम 6:29 बजे से रात 8:53 बजे तक रहेगा। इस दौरान विधि-विधान से अभिषेक करने से भक्तों को विशेष आशीर्वाद मिलने की मान्यता है।

    अभिषेक करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी माना गया है। शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय उसका चिकना भाग ऊपर की ओर रखना चाहिए। भगवान शिव को कुमकुम और हल्दी अर्पित नहीं की जाती। पूजा के दौरान मन को शांत रखकर श्रद्धा और सकारात्मक भाव से भगवान शिव का स्मरण करना चाहिए।

    परंपरा के अनुसार इस दिन व्रत रखकर शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद और जल से अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को दीर्घायु, आरोग्य, धन-धान्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है।

  • नवरात्रि 2026: बिना गैस के बनाए ये 5 हेल्दी फलाहारी डिश, एनर्जी बनी रहेगी पूरे व्रत में

    नवरात्रि 2026: बिना गैस के बनाए ये 5 हेल्दी फलाहारी डिश, एनर्जी बनी रहेगी पूरे व्रत में


    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि 2026 की तैयारियां अब से शुरू हो गई हैं। नवरात्रि के नौ दिन व्रत रखने वाले लोगों के लिए हेल्दी और हल्का भोजन जरूरी होता है, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहे। एलपीजी गैस की महंगाई और संकट को देखते हुए बिना गैस के बनने वाली फलाहारी डिशेज इस बार खास मददगार साबित होंगी।

    बिना गैस के 5 फालाहारी डिश:

    फ्रूट योगर्ट बाउल

    सामग्री: दही, केला, सेब, पपीता या अनार, शहद, ड्राई फ्रूट्स (बादाम, काजू)

    विधि: दही में कटे फल, शहद और ड्राई फ्रूट्स डालकर मिक्स करें। प्रोटीन, फाइबर और एनर्जी से भरपूर।

    मखाना ड्राई फ्रूट मिक्स

    सामग्री: भुना मखाना, बादाम, काजू, किशमिश, सेंधा नमक

    विधि: सभी चीजों को एक डिब्बे में मिलाकर रखें। भूख लगे तो खाएं, लंबे समय तक ऊर्जा देती है।

    केला-पीनट एनर्जी बाउल

    सामग्री: 1–2 केले, मूंगफली या पीनट बटर, शहद, चिया सीड्स

    विधि: केले काटकर पीनट बटर, शहद और चिया सीड्स डालें। तुरंत एनर्जी देने वाला फलाहार।

    कच्चा फलाहारी सलाद

    सामग्री: खीरा, टमाटर, उबला आलू, मूंगफली, सेंधा नमक, नींबू

    विधि: सबको काटकर बाउल में मिलाएं, ऊपर से नींबू और नमक डालें। हल्का और ताजगी भरा।

    मिल्क ड्राई फ्रूट शेक

    सामग्री: ठंडा दूध, खजूर या किशमिश, बादाम, केला

    विधि: मिक्सर में सबको ब्लेंड करें। दिनभर की थकान दूर करने में मदद करता है।

    ये रेसिपी जल्दी बनती हैं, हेल्दी हैं और पूरे व्रत में शरीर में ऊर्जा बनाए रखती हैं।

  • खरमास 2026: आज से शुरू, एक माह तक रहेंगे इन बातों का ध्यान

    खरमास 2026: आज से शुरू, एक माह तक रहेंगे इन बातों का ध्यान


    नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव किसी राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे संक्रांति कहा जाता है। विशेष रूप से जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास या मलमास लगता है। हिंदू धर्म में इस समय को सामान्यतः शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता, लेकिन पूजा पाठ, दान और जप तप के लिए इसे विशेष लाभकारी माना गया है।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष खरमास 15 मार्च 2026 से शुरू हो चुका है और सूर्य के 13 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश करने पर यह समाप्त होगा। इस दिन को मेष संक्रांति कहा जाएगा। इसके बाद फिर से मांगलिक कार्य शुरू किए जा सकते हैं और 20 अप्रैल से विवाह के शुभ मुहूर्त उपलब्ध होंगे।

    त्रिग्रही योग का प्रभाव
    मीन राशि में पहले से विराजमान शुक्र और शनि के साथ सूर्य के प्रवेश से त्रिग्रही योग बनता है। इसका सकारात्मक प्रभाव मिथुन, तुला, वृषभ, कर्क, कन्या और मीन राशि के जातकों पर आर्थिक लाभ, मान सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि के रूप में देखा जा सकता है।

    मांगलिक कार्य वर्जित

    खरमास के दौरान ग्रहों की शुभ दृष्टि का प्रभाव कम होने के कारण विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन और अन्य मांगलिक कार्य टालने की परंपरा है। साथ ही नए व्यापार की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।

    खरमास में क्या ना करें

    भगवान, गुरु, माता पिता, गाय और स्त्री की निंदा न करें।

    जरूरतमंद को खाली हाथ लौटाना अशुभ माना गया है।

    नए वाहन या घर खरीदने से परहेज करें।

    विवाद और झगड़ों से दूर रहें।

    खरमास में क्या करें

    दान पुण्य, पूजा और धार्मिक कार्य करें। 

    रामायण, गीता और सत्यनारायण कथा का पाठ लाभकारी है।सूर्य देव, भगवान शिव और विष्णु की पूजा से घर परिवार में सुख शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

  • चैत्र अमावस्या 18 मार्च, फिर 15 दिन महोत्सवों की भरमार, नवरात्र से हनुमान जयंती तक उत्सवों का दौर

    चैत्र अमावस्या 18 मार्च, फिर 15 दिन महोत्सवों की भरमार, नवरात्र से हनुमान जयंती तक उत्सवों का दौर



    नई दिल्ली। हिंदू नववर्ष की शुरुआत करीब है। हर साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नए विक्रम संवत की शुरुआत होती है। इस साल 18 मार्च को चैत्र अमावस्या है और इसके अगले दिन, 19 मार्च 2026 से विक्रम संवत 2083 का नया वर्ष प्रारंभ होगा, जिसे रौद्र संवत्सर के नाम से जाना जाएगा।

    गुड़ी पड़वा और चैत्र नवरात्र

    19 मार्च से हिंदू नववर्ष का स्वागत गुड़ी पड़वा पर्व के रूप में महाराष्ट्र में किया जाएगा, जबकि कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में इसे युगादी के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन से मां दुर्गा की आराधना का 9 दिवसीय पर्व, चैत्र नवरात्र, भी शुरू होगा। नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना का आयोजन किया जाएगा।

    मार्च में प्रमुख व्रत-त्योहार

    20 मार्च 2026 (शुक्रवार): सिंधी समुदाय का प्रमुख पर्व झूलेलाल जयंती।

    21 मार्च 2026 (शनिवार): मत्स्य जयंती, गौरी पूजा और राजस्थान में धूमधाम से मनाया जाने वाला गणगौर पर्व।

    26 मार्च 2026 (गुरुवार): चैत्र नवरात्र की अष्टमी तिथि, हवन और कन्या पूजन का आयोजन।

    27 मार्च 2026 (शुक्रवार): रामनवमी का पर्व और नवरात्र का समापन, ज्वारों का विसर्जन भी इसी दिन।

    29 मार्च 2026 (रविवार): कामदा एकादशी व्रत।

    31 मार्च 2026 (मंगलवार): जैन धर्मावलंबियों का महापर्व महावीर जयंती।

    2 अप्रैल 2026 (गुरुवार): हनुमान जयंती और चैत्र पूर्णिमा व्रत। इस दिन चैत्र मास का समापन भी होगा।

  • विश्व में उभर सकते हैं युद्ध, आपदाएं और नई बीमारियां: ज्योतिषाचार्य पं. गौतम ने रुद्र बीसी के शेष वर्षों को लेकर दी चेतावनी

    विश्व में उभर सकते हैं युद्ध, आपदाएं और नई बीमारियां: ज्योतिषाचार्य पं. गौतम ने रुद्र बीसी के शेष वर्षों को लेकर दी चेतावनी


    नई दिल्ली। ज्योतिषाचार्य पं. गौतम ने रुद्र बीसी के शेष वर्षों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उनके अनुसार, आगामी वर्षों में विश्व स्तर पर कई संकट और अप्रत्याशित घटनाएं घटित हो सकती हैं। पं. गौतम का कहना है कि युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं और नई बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहेगा, और इसे केवल भविष्यवाणी के रूप में ही नहीं, बल्कि सतर्क रहने के लिए एक संकेत के तौर पर देखा जाना चाहिए।

    विशेष रूप से भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में भूकंप जैसी घटनाओं की आशंका जताई गई है। इसके अलावा, मौसम संबंधी आपदाओं, महामारी और असामान्य प्राकृतिक घटनाओं की संभावना भी बनी रहेगी। ज्योतिषाचार्य ने जोर देकर कहा कि इस चेतावनी का उद्देश्य भय फैलाना नहीं है, बल्कि समाज को संभावित परिस्थितियों के प्रति सचेत करना है।

    पं. गौतम ने सभी लोगों से अपील की है कि वे व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर तैयार रहें। उन्होंने बताया कि यदि सही समय पर सतर्कता और तैयारी रखी जाए, तो इन संभावित आपदाओं का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • नवरात्रि मेले में श्रद्धालुओं को बड़ी राहत: मैहर स्टेशन पर 14 जोड़ी ट्रेनों का अस्थायी ठहराव

    नवरात्रि मेले में श्रद्धालुओं को बड़ी राहत: मैहर स्टेशन पर 14 जोड़ी ट्रेनों का अस्थायी ठहराव



    नई  दिल्ली। नवरात्रि मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल माता शारदा मंदिर मैहर में दर्शन के लिए आने वाले भक्तों की संख्या को देखते हुए मैहर रेलवे स्टेशन पर कई लंबी दूरी की ट्रेनों को अस्थायी ठहराव दिया जाएगा।

    रेल प्रशासन के अनुसार भारतीय रेलवे ने भोपाल मंडल से गुजरने वाली 14 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों को मैहर स्टेशन पर 5 मिनट का अस्थायी ठहराव देने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था 19 मार्च 2026 से 1 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगी।

    नवरात्रि के दौरान देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मैहर पहुंचते हैं। ऐसे में यात्रियों को सीधे मैहर पहुंचने में सुविधा मिले, इसके लिए विभिन्न राज्यों से आने-जाने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों को अस्थायी हाल्ट दिया गया है। इससे खासतौर पर उत्तर भारत, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत से आने वाले भक्तों को काफी राहत मिलेगी।

    इन ट्रेनों का मैहर स्टेशन पर होगा अस्थायी ठहराव
    लोकमान्य तिलक टर्मिनस–गोरखपुर एक्सप्रेस

    गोरखपुर–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस

    लोकमान्य तिलक टर्मिनस–छपरा एक्सप्रेस

    छपरा–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस

    चेन्नई–छपरा एक्सप्रेस

    छपरा–चेन्नई एक्सप्रेस

    वलसाड–मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस

    मुजफ्फरपुर–वलसाड एक्सप्रेस

    कोल्हापुर–धनबाद एक्सप्रेस

    धनबाद–कोल्हापुर एक्सप्रेस

    एलएलटी–रक्सौल एक्सप्रेस

    रक्सौल–एलएलटी एक्सप्रेस

    पुणे–गोरखपुर एक्सप्रेस

    गोरखपुर–पुणे एक्सप्रेस

    पूर्णा–पटना एक्सप्रेस

    पटना–पूर्णा एक्सप्रेस

    लोकमान्य तिलक टर्मिनस–अयोध्या कैंट एक्सप्रेस

    अयोध्या कैंट–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस

    लोकमान्य तिलक टर्मिनस–रांची एक्सप्रेस

    रांची–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस

    बांद्रा टर्मिनस–पटना एक्सप्रेस

    पटना–बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस

    पुणे–बनारस एक्सप्रेस

    बनारस–पुणे एक्सप्रेस

    लोकमान्य तिलक टर्मिनस–गुवाहाटी एक्सप्रेस

    गुवाहाटी–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस

    सूरत–छपरा एक्सप्रेस

    छपरा–सूरत एक्सप्रेस

    रेलवे का कहना है कि नवरात्रि मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए यह अस्थायी व्यवस्था की गई है, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सके और यात्रा सुगम हो।

    दो लाइन का सारांश
    नवरात्रि मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मैहर रेलवे स्टेशन पर 19 मार्च से 1 अप्रैल 2026 तक 14 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों को 5 मिनट का अस्थायी ठहराव दिया जाएगा। इससे माता शारदा मंदिर दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को सीधी रेल सुविधा मिलेगी।

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  • चैत्र नवरात्रि 2026: 19 मार्च से शुरू होंगे व्रत, जानें घटस्थापना मुहूर्त, पूजा विधि और नौ दिनों का पूरा कैलेंडर

    चैत्र नवरात्रि 2026: 19 मार्च से शुरू होंगे व्रत, जानें घटस्थापना मुहूर्त, पूजा विधि और नौ दिनों का पूरा कैलेंडर


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का पर्व अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व रखता है। इस दौरान भक्त पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना करते हैं और व्रत रखकर सुख शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च गुरुवार से होगी और इसका समापन 26 मार्च को होगा। इसी दिन महानवमी के साथ साथ राम नवमी का पावन पर्व भी मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी मानी जाती है।

    नवरात्रि के पहले दिन घरों और मंदिरों में घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है जिसे देवी पूजा का प्रारंभ माना जाता है। वर्ष 2026 में घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह लगभग 6:23 बजे से 7:32 बजे तक रहेगा। इसके अलावा यदि किसी कारणवश इस समय स्थापना न हो सके तो अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक भी घटस्थापना की जा सकती है। इस समय विधि विधान से कलश स्थापना करके मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है और नौ दिनों तक नियमित पूजा की जाती है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि जिस वार से शुरू होती है उसी आधार पर माता दुर्गा के आगमन का वाहन तय होता है। वर्ष 2026 में नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है इसलिए मान्यता है कि माता दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा। हाथी को समृद्धि अच्छी वर्षा और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। विशेष बात यह है कि इस बार अष्टमी और नवमी तिथि का संयोग भी एक ही दिन पड़ रहा है। 26 मार्च को अष्टमी और नवमी का संयुक्त पूजन कन्या पूजन और हवन किया जाएगा। इसी दिन राम नवमी का पर्व भी मनाया जाएगा जिससे यह दिन और भी अधिक शुभ माना जा रहा है।

    नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी तीसरे दिन मां चंद्रघंटा चौथे दिन मां कूष्मांडा पांचवें दिन मां स्कंदमाता छठे दिन मां कात्यायनी सातवें दिन मां कालरात्रि आठवें दिन मां महागौरी और नवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। भक्त इन दिनों में अलग अलग भोग अर्पित करते हैं और मां से सुख समृद्धि की कामना करते हैं।

    नवरात्रि के अंतिम दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार छोटी कन्याओं में देवी का स्वरूप माना जाता है। इस दिन कन्याओं को भोजन कराया जाता है उन्हें उपहार और दक्षिणा दी जाती है तथा हवन भी किया जाता है।

    पूजा विधि के अनुसार घटस्थापना से पहले घर और पूजा स्थान की साफ सफाई की जाती है। मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं कलश में जल सुपारी और सिक्का रखा जाता है तथा ऊपर आम के पत्ते और नारियल स्थापित किया जाता है। इसके बाद दीप जलाकर मां दुर्गा का ध्यान किया जाता है और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है।

    नवरात्रि के दौरान भक्तों को सात्विक भोजन करना चाहिए रोज सुबह शाम मां दुर्गा की आरती करनी चाहिए और दान पुण्य करना चाहिए। वहीं मांस मदिरा का सेवन झूठ बोलना और क्रोध करने से बचने की सलाह दी जाती है। श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया नवरात्रि पर्व जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है।