Category: Religious Astrology

  • साल का पहला चंद्रग्रहण मंगलवार को… जानिए ग्रहण और सूतक काल की टाइमिंग

    साल का पहला चंद्रग्रहण मंगलवार को… जानिए ग्रहण और सूतक काल की टाइमिंग


    नई दिल्ली।
    कल 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2026) लगने जा रहा है. यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. खास बात यह है कि यह चंद्र ग्रहण भारत (India) में दिखाई देगा, इसलिए यहां सूतक काल (Sutak Period) मान्य होगा और धार्मिक नियमों का पालन किया जाएगा. मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ नहीं किया जाता. ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों की सफाई कर गंगाजल का छिड़काव किया जाता है और फिर नियमित पूजा-अर्चना शुरू होती है।

    ज्योतिष के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लग रहा है. इसका प्रभाव खासतौर पर कुछ राशियों पर अधिक देखने को मिल सकता है।

    चंद्र ग्रहण 2026 सूतक काल टाइमिंग (Chandra Grahan 2026 Sutak kaal Timing)
    यह चंद्र ग्रहण भारत के पूर्वी हिस्सों में ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, जबकि अन्य क्षेत्रों में आंशिक रूप से नजर आ सकता है. भारत के अलावा यह ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी दिखाई देगा.


    चंद्र ग्रहण का प्रभाव

    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस चंद्र ग्रहण का असर सबसे पहले मन और भावनाओं पर पड़ेगा. इस दौरान व्यक्ति को मानसिक अस्थिरता, चिंता या निर्णय लेने में भ्रम महसूस हो सकता है. इसलिए इस समय शांत रहना और बड़े फैसलों से बचना बेहतर माना जाता है. तो आइए पंडित प्रवीण मिश्र के द्वारा जानते हैं कि चंद्रग्रहण किन राशियों के लिए अशुभ रहेगा।


    कर्क राशि (Cancer)

    कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा होते हैं, इसलिए इस राशि के जातकों पर ग्रहण का प्रभाव अधिक महसूस हो सकता है. आर्थिक मामलों, निवेश और प्रॉपर्टी से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचें. परिवार, खासकर माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें और वाणी में संयम बनाए रखें.
    उपाय: भगवान शिव को जल अर्पित करें और ”ऊं नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें.


    सिंह राशि (Leo)

    यह ग्रहण सिंह राशि में ही लग रहा है, इसलिए इस राशि के लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. आने वाले 15 दिनों तक बड़े फैसले टालें, खर्चों पर नियंत्रण रखें और रिश्तों में संतुलन बनाए रखें.
    उपाय: ग्रहण के बाद स्नान करें, दान करें और भगवान शिव का अभिषेक करें.


    कन्या राशि (Virgo)

    कन्या राशि वालों के लिए यह ग्रहण खर्च और मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है. अनावश्यक खर्च से बचें और नकारात्मक सोच से दूरी बनाए रखें. करियर से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी न करें.
    उपाय: भगवान शिव की पूजा करें, बेलपत्र अर्पित करें और नियमित मंत्र जाप करें.

  • इस सप्ताह का राशिफल: 1 मार्च – 7 मार्च 2026, मौका और सतर्कता दोनों साथ

    साप्ताहिक राशिफल 1 मार्च से 7 मार्च 2026
    यह सप्ताह मिश्रित परिणाम लेकर आया है। आर्थिक और करियर के मामलों में कुछ जातकों के लिए सफलता के योग हैं, जबकि स्वास्थ्य और पारिवारिक संबंधों में सतर्कता जरूरी है। धैर्य और समझदारी से उठाए गए कदम लाभकारी रहेंगे।

    मेष (Aries)
    स्वास्थ्य में गिरावट संभव है, सतर्क रहें। आर्थिक दृष्टि से लाभ के योग हैं और व्यापार या नौकरी में सफलता मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में नई साझेदारियों और अवसरों के संकेत हैं। लव लाइफ में संवाद पर ध्यान दें, मतभेद को बिगड़ने न दें।

    वृषभ (Taurus)
    स्वास्थ्य में गिरावट और मानसिक तनाव संभव है। आर्थिक उतार-चढ़ाव रहेंगे, खर्चों पर नियंत्रण जरूरी है। कार्य में बदलाव और अधिक परिश्रम आवश्यक है। लव लाइफ में मतभेद हो सकते हैं, समझदारी से समाधान करें।

    मिथुन (Gemini)
    स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। आर्थिक लाभ और प्रॉपर्टी या शेयर निवेश में फायदा हो सकता है। करियर में नई जिम्मेदारियां और पदोन्नति के योग हैं। लव लाइफ में पार्टनर का सहयोग मिलेगा, यात्रा और सरप्राइज की संभावना है।

    कर्क (Cancer)
    स्वास्थ्य अच्छा है, योग और व्यायाम लाभकारी रहेंगे। आर्थिक दृष्टि से लाभ और व्यापार में वृद्धि संभव है। करियर में नए अवसर और विस्तार मिल सकते हैं। लव लाइफ और पारिवारिक तालमेल अच्छा रहेगा।

    सिंह (Leo)
    मानसिक तनाव और शारीरिक कष्ट के योग हैं। आर्थिक स्थिति सामान्य, बड़े रिस्क न लें। करियर में विरोधियों के बावजूद मेहनत जरूरी है। लव लाइफ में झगड़े से बचें और धैर्य रखें।

    कन्या (Virgo)
    स्वास्थ्य पर सतर्क रहें, बड़ी बीमारी का जोखिम है। आर्थिक लाभ कम है, व्यर्थ खर्चों पर नियंत्रण रखें। करियर में प्रतीक्षा आवश्यक, परिश्रम जारी रखें। लव लाइफ में मतभेद हो सकते हैं, व्यवहार सुधारें।

    तुला (Libra)
    स्वास्थ्य पर यात्रा और काम के दबाव से सतर्क रहें। निवेश में सोच-समझकर निर्णय लें। करियर में स्थिरता से लाभ और बड़ी सफलता संभव है। लव लाइफ में पार्टनर का सहयोग मिलेगा, समय आनंदमय रहेगा।

    वृश्चिक (Scorpio)
    स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, पुरानी बीमारियों में राहत मिलेगी। आर्थिक लाभ और निवेश में वृद्धि संभव है। कार्यक्षेत्र में प्रदर्शन और सम्मान प्राप्त होगा। लव लाइफ में पार्टनर के साथ समय व्यतीत करें और निर्णय साझा करें।

    धनु (Sagittarius)
    स्वास्थ्य अच्छा, परिवार का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। व्यापार और अन्य क्षेत्रों से लाभ संभव है। करियर में नई सफलता और अवसर मिल सकते हैं। लव लाइफ में मतभेद हैं, समझदारी से संभालें।

    मकर (Capricorn)
    मानसिक तनाव के योग हैं, सतर्क रहें। आर्थिक गिरावट संभव, खर्चों पर नियंत्रण रखें। करियर में अधिक परिश्रम की आवश्यकता है, सफलता धीरे मिलेगी। लव लाइफ में मतभेद खत्म होंगे, समय व्यतीत करें।

    कुंभ (Aquarius)
    स्वास्थ्य में सुधार और अच्छा समय। आर्थिक लाभ और बड़े निर्णय सफल होंगे। करियर में नई शुरुआत और सफलता संभव है। लव लाइफ में तालमेल अच्छा रहेगा, यात्रा और आनंद के योग हैं।

    मीन (Pisces)
    स्वास्थ्य सतर्कता मांगता है, तनाव से स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। आर्थिक चुनौतियों से सावधान रहें। करियर में समर्थन मिलेगा, सफलता संभव है। लव लाइफ में मतभेद बढ़ सकते हैं, संवाद से समाधान करें। यह सप्ताह संतुलन, समझदारी और धैर्य से कदम उठाने का है। आर्थिक और करियर के क्षेत्र में अवसर हैं, पर स्वास्थ्य और पारिवारिक संबंधों में सतर्कता जरूरी है।

  • 1 मार्च 2026 को मेष से मीन तक कैसा रहेगा दिन? पढ़ें रविवार का विस्तृत राशिफल

    1 मार्च 2026 को मेष से मीन तक कैसा रहेगा दिन? पढ़ें रविवार का विस्तृत राशिफल


    नई दिल्ली । वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 1 मार्च 2026, रविवार का दिन ग्रह-नक्षत्रों की चाल के कारण कई राशियों के लिए खास रहने वाला है। रविवार को सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य उपासना से मान-सम्मान और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का हाल।

    मेष

    कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। मेहनत रंग लाएगी। आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। प्रेम संबंधों में संवाद बनाए रखें।

    वृषभ

    काम का दबाव रहेगा, लेकिन धैर्य से संभाल लेंगे। निवेश में सावधानी रखें। रिश्तों में ईगो से बचें।

    मिथुन

    आत्मविश्वास बढ़ेगा। नई जिम्मेदारी या अवसर मिल सकता है। अतिरिक्त आय के संकेत हैं। प्रेम जीवन सुखद रहेगा।

    कर्क

    भावनाओं में बहकर निर्णय न लें। खर्चों पर नियंत्रण जरूरी है। सेहत को लेकर सतर्क रहें।

    सिंह

    नेतृत्व क्षमता उभरकर सामने आएगी। प्रमोशन के संकेत मिल सकते हैं। परिवार में खुशखबरी संभव है।

    कन्या

    जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, पर सफलता मिलेगी। आय के साथ खर्च भी बढ़ सकते हैं। दिनचर्या संतुलित रखें।

    तुला

    भागदौड़ भरा दिन रहेगा। फिजूलखर्ची से बचें। रिश्तों में स्पष्टता रखें।

    वृश्चिक

    करियर में प्रगति के अवसर मिलेंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। पुराने मतभेद सुलझ सकते हैं।

    धनु

    नई योजना पर काम शुरू हो सकता है। निवेश से पहले सलाह लें। प्रेम जीवन सकारात्मक रहेगा।

    मकर

    मेहनत का फल मिलेगा। धन लाभ के योग हैं। भावनात्मक रिश्ते मजबूत होंगे।

    कुंभ

    काम के सिलसिले में यात्रा संभव है। निवेश सोच-समझकर करें। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

    मीन

    सोच-समझकर निर्णय लें। आर्थिक स्थिति सुधरेगी। धार्मिक या सकारात्मक माहौल रहेगा।

  • Holi: होली पर दो बड़े राजयोग, ये चार राशि के जातक बनेंगे धनवान, जीवन में आएगी खुशहाली

    Holi: होली पर दो बड़े राजयोग, ये चार राशि के जातक बनेंगे धनवान, जीवन में आएगी खुशहाली


    नई दिल्ली। इस बार होली सिर्फ रंग और खुशियां ही नहीं बल्कि चुनिंदा राशियों के लिए सुनहरी किस्मत भी लेकर आ रही है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार होली के दिन कुंभ राशि में सूर्य बुध और शुक्र की दुर्लभ संगति देखने को मिलेगी। इस समय कुंभ राशि में बन रहे ‘बुधादित्य’ और ‘शुक्रादित्य’ नामक दो शक्तिशाली राजयोग होली के दिन अपने चरम पर होंगे। इन राजयोगों का प्रभाव चार राशियों के जातकों पर ऐसा पड़ेगा कि धन सफलता और सुख-समृद्धि की बौछार उनके जीवन में रंग भर देगी।

    मेष राशि

    मेष राशि के जातकों के लिए यह होली आर्थिक समृद्धि और भाग्य का समय लेकर आ रही है। कहीं फंसा हुआ पैसा अचानक वापस मिल सकता है और पुराने निवेश अब मुनाफे के रूप में सामने आएंगे। संतान की ओर से कोई गौरवशाली समाचार मिलने की संभावना है। ससुराल पक्ष से रिश्तों में मधुरता आएगी और लंबे समय से सोचे हुए प्रोजेक्ट्स अब हकीकत में बदलने का समय है।

    सिंह राशि
    सिंह राशि वालों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है। धन के नए स्रोत खुलेंगे और बैंक बैलेंस तेजी से बढ़ेगा। अगर कोई पुरानी बीमारी परेशान कर रही थी तो राहत मिलेगी। नई व्यावसायिक शुरुआत के लिए समय बेहद शुभ है साथ ही प्रॉपर्टी के लेन-देन में भी बड़ा लाभ मिल सकता है। घर का माहौल खुशहाल रहेगा और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।

    तुला राशि

    तुला राशि के जातकों पर ‘शुक्रादित्य’ और ‘बुधादित्य’ दोनों राजयोग मेहरबान रहने वाले हैं। अटके हुए सरकारी या निजी काम अब गति पकड़ेंगे और नौकरी की तलाश में थके लोग मनचाहा अवसर प्राप्त करेंगे। बिजनेस में कोई बड़ी पार्टनरशिप या डील फाइनल हो सकती है। परिवार के साथ धार्मिक या मनोरंजक यात्रा के योग भी बन रहे हैं।

    धनु राशि

    धनु राशि वालों के लिए यह होली करियर में बड़ी उपलब्धि का संकेत देती है। वर्किंग प्रोफेशनल्स को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने के प्रबल संकेत हैं। लंबे समय से चल रहा पैतृक संपत्ति का विवाद अब आपके पक्ष में सुलझ सकता है जिससे वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। मामा पक्ष से आर्थिक या मानसिक सहयोग मिलेगा और कानूनी मामलों में चल रही भागदौड़ समाप्त होगी। अंततः आपको मानसिक शांति का अनुभव होगा।

  • 16 मार्च से इन 3 राशियों की चकेगी किस्मत, मंगल-चंद्र की युति से होगी धन और सफलता की बौछार

    16 मार्च से इन 3 राशियों की चकेगी किस्मत, मंगल-चंद्र की युति से होगी धन और सफलता की बौछार


    नई दिल्ली। 16 मार्च 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से भाग्य बदलने वाला साबित हो सकता है। द्रिक पंचांग के अनुसार इस दिन ग्रहों के सेनापति मंगल और मन के कारक चंद्रमा मिलकर महालक्ष्मी राजयोग बना रहे हैं जिसे धन ऐश्वर्य और सामाजिक प्रतिष्ठा के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस राजयोग का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा लेकिन खासतौर पर तीन राशियों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में अप्रत्याशित सुधार देखने को मिलेगा।

    महालक्ष्मी राजयोग क्या है?

    जब कुंडली में मंगल और चंद्रमा एक दूसरे के केंद्र या त्रिकोण भाव में होते हैं या एक दूसरे पर शुभ दृष्टि डालते हैं तो महालक्ष्मी राजयोग बनता है। मंगल साहस ऊर्जा और संपत्ति का प्रतीक है जबकि चंद्रमा मन शीतलता और धन का कारक। इन दोनों ग्रहों की युति से जातक को केवल आर्थिक लाभ नहीं मिलता बल्कि समाज में पद प्रतिष्ठा और मान सम्मान भी बढ़ता है।

    वृषभ राशि के लिए अवसर

    वृषभ राशि के जातकों के लिए यह राजयोग किसी वरदान से कम नहीं है। पुराने निवेशों से अब बड़े लाभ मिलने की संभावना है वहीं नौकरीपेशा लोग बॉस से तारीफ और बढ़ी हुई सैलरी की खुशखबरी पा सकते हैं। अधूरे काम पूरे होंगे और यदि इच्छा हो तो नई प्रॉपर्टी या गाड़ी खरीदने का मन बन सकता है।

    कर्क राशि का सुनहरा समय

    कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय मेहनत का मीठा फल देने वाला है। करियर में उन्नति और व्यवसाय में बड़ी डील मिलने के योग हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और परिवारिक तनाव कम होगा। रुके प्रोजेक्ट्स फिर से पटरी पर लौट आएंगे और दोस्तों का सहयोग मिलेगा।

    वृश्चिक राशि को मिलेगा गोल्डन पीरियड
    वृश्चिक राशि के लिए यह समय प्रोफेशनल लाइफ में ‘गोल्डन पीरियड’ जैसा रहेगा। समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी लोग आपकी सलाह मानेंगे और कानूनी या पुराने विवादों में लाभ मिलने की संभावना है। व्यापार बढ़ाने के लिए कर्ज आसानी से मिल जाएगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगेगी।
    इस महालक्ष्मी राजयोग का पूरा लाभ उठाने के लिए 16 मार्च को लक्ष्मी जी के सामने घी का दीपक जलाना और “ॐ महालक्ष्म्यै नमः” का जाप करना शुभ माना गया है।
  • होली पर चंद्र ग्रहण का साया, सूतक काल ने बदला होलिका दहन का समय, जानें पूजा का सही मुहूर्त

    होली पर चंद्र ग्रहण का साया, सूतक काल ने बदला होलिका दहन का समय, जानें पूजा का सही मुहूर्त


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में होलिका दहन का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, लेकिन इस साल 3 मार्च 2026 को होलिका दहन पर भद्रा और चंद्र ग्रहण का एक साथ होना चिंता का विषय बना हुआ है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भद्रा काल और ग्रहण का सूतक काल दोनों ही समय किसी भी मांगलिक या शुभ कार्य के लिए वर्जित माने जाते हैं।

    ऐसे में भक्तों के मन में यह सवाल है कि दोष से बचने के लिए होलिका कब जलाई जाए। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 3 मार्च को शाम 05:07 बजे समाप्त हो जाएगी, लेकिन शास्त्रों के नियम और ग्रहण की शुद्धि के अनुसार ही दहन का समय तय करना उचित रहेगा।

    सूतक काल और चंद्र ग्रहण का प्रभाव

    भारतीय के समय के अनुसार, 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण का प्रभाव शाम 06:26 बजे चंद्रोदय के साथ ही दिखने लगेगा और यह शाम 06:46 बजे समाप्त होगा। हालांकि, ग्रहण की विभिन्न अवस्थाएं दोपहर 02:16 बजे से ही शुरू हो जाएंगी, लेकिन सूतक काल का विशेष महत्व होता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूतक काल सुबह 09:39 बजे से ही प्रारंभ हो जाएगा, जो शाम 06:46 बजे ग्रहण की समाप्ति तक रहेगा। सूतक काल के दौरान किसी भी प्रकार की पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान की मनाही होती है, इसलिए होलिका दहन की रस्में शाम 06:46 बजे के बाद ही की जानी चाहिए।

    भद्रा का समय और दहन का मुहूर्त

    होलिका दहन के लिए भद्रा का विचार करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि भद्रा मुख में किया गया दहन अशुभ फल दे सकता है। इस वर्ष 3 मार्च को भद्रा देर रात यानी 4 मार्च की सुबह 01:25 बजे से शुरू होगी। इसलिए शाम के समय भद्रा का कोई दोष नहीं रहेगा।

    होलिका दहन का सबसे सटीक और शुभ मुहूर्त शाम 06:47 बजे (ग्रहण समाप्ति) के बाद से लेकर रात 08:50 बजे तक रहेगा। यह वह समय है जब आप बिना किसी भय या दोष के होलिका दहन कर सकते हैं। ग्रहण के तुरंत बाद किया गया यह दहन नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने की प्रबल संभावना रखता है।

    दोष से मुक्ति के सरल नियम

    भद्रा और सूतक के दोष से बचने के लिए सहजता के साथ कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। ग्रहण काल के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का निरंतर मानसिक जाप करते रहें, जिससे वातावरण की नकारात्मकता का आप पर प्रभाव न पड़े। शाम को ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें और फिर शुद्ध मुहूर्त में होलिका पूजन करें।

    होलिका की अग्नि में अनाज और नारियल अर्पित करना घर में सुख-शांति लाता है। माना जाता है कि इन नियमों का पालन करने से किसी भी प्रकार के ग्रहों की उग्रता शांत होती है और घर के संचालन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।

  • जानिए आज शनिवार का राशिफल

    जानिए आज शनिवार का राशिफल


    आज आपके जीवन में क्या-क्या परिवर्तन हो सकता है, आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल।


    मेष राशि :- निकटस्थ व्यक्ति का सहयोग काम को गति दिला देगा। व्यर्थ प्रपंच में समय नहीं गंवाकर अपने काम पर ध्यान दीजिए। अच्छे कार्य के लिए रास्ते बना लेंगे। पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। व्यापार व व्यवसाय में स्थिति उत्तम रहेगी। जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। शुभांक-1-3-5

    वृष राशि :- अपने हित के काम सुबह-सबेरे निपटा लें। यात्रा शुभ रहेगी। अपने काम पर पैनी नजर रखिए। विरोधी नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा। अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। आर्थिक हित के काम को साधने में मदद मिल जाएगी। शुभांक-2-4-6

    मिथुन राशि :- अपने काम को प्राथमिकता से करें। बुरी संगति से बचें। आशानुकूल कार्य होने में संदेह है। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। लेन-देन में अस्पष्टता ठीक नहीं। निर्मूल शंकाओं के कारण मनस्ताप भी पैदा हो सकते है। भय तथा शत्रुहानि की आशंका रहेगी। पारिवारिक परेशानी बढ़ेगी। हाथ-पैरों में पीड़ा हो सकती है। शुभांक-4-7-9

    कर्क राशि :- दूसरों के कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप न करें। कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। अच्छे कार्य के लिए रास्ते बना लेंगे। अपने हित के काम सुबह-सबेरे ही निपटा लें। रुपए पैसों की सुविधा मिल पाएगी। कामकाज सीमित तौर पर ही बन पाएंगे। शुभांक-2-4-5

    सिंह राशि :- चिंतनीय वातावरण से मुक्ति मिलेगी। मान-सम्मान में वृद्घि होगी। यात्रा प्रवास का सार्थक परिणाम मिलेगा। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। नवीन जिम्मेदारी बढऩे के आसार रहेंगे। यात्रा शुभ रहेगी। सुविधाओं में बाधा आएगी। शुभांक-4-5-6

    कन्या राशि :- निष्ठा से किया गया कार्य पराक्रम व आत्मविश्वास बढ़ाने वाला होगा। संतोषजनक सफलता मिलेगी। मेहमानों का आगमन होगा। पैतृक सम्पत्ति से लाभ। नैतिक दायरे में रहें। पुरानी गलती का पश्चाताप होगा। विद्यार्थियों को लाभ। वाहन चालन में सावधानी बरतें। आय के अच्छे योग बनेंगे। शुभांक-2-4-7

    तुला राशि :- परिवारजन का सहयोग व समन्वय काम को बनाना आसान करेगा। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। शैक्षणिक कार्य आसानी से पूरे होते रहेंगे। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। बुरी संगति से बचें। ज्ञानार्जन का वातावरण बनेगा। शुभांक-5-6-9

    वृश्चिक राशि :- संतान पक्ष से थोड़ी ङ्क्षचता रहेगी। अपनों का सहयोग प्राप्त होगा। शिक्षा में आशानुकूल कार्य होने में संदेह है। व्यापार व व्यवसाय में स्थिति उत्तम रहेगी। नौकरी में पदोन्नति की संभावना है। मित्रों से सावधान रहें तो ज्यादा उत्तम है। शारीरिक सुख के लिए व्यसनों का त्याग करें। शुभांक-3-6-8

    धनु राशि :- शत्रुभय, चिंता, संतान को कष्ट, अपव्यय के कारण बनेंगे। व्यवसाय में प्रतिद्वंद्वी परेशान कर सकते हैं। समय व्ययकारी सिद्घ होगा। वैचारिक उत्तेजना पर नियत्रंण रखें। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। अपनी परिसंपत्ति को संभालकर रखें। शुभांक-3-5-7

    मकर राशि :- मित्रों की उपेक्षा करना ठीक नहीं रहेगा। व्यापार में वृद्घि व उत्तम लाभ मिलेगा। नौकरी क्षेत्र में कुछ उलझनें रहेंगी। यश-प्रतिष्ठा में वृद्घि व शिक्षा में परेशानी आ सकती है। व्यापार में वृद्घि होगी। नौकरी में सहयोगियों का सहयोग प्राप्त होगा। मेहमानों का आगमन होगा। शुभांक-4-6-8

    कुम्भ राशि :- महत्त्वपूर्ण निर्णय के लिए दूरदर्शिता से काम लें। कोष में कमी व व्यय की अधिकता से परेशान होंगे। किसी से वाद-विवाद अथवा कहासुनी होने का भय रहेगा। जल्दबाजी में कोई भूल संभव है। कार्य भार बढ़ेगा। जरा-सी लापरवाही आपको परेशानी में डाल सकती है। सलाह उपयोगी सिद्घ होगी। शुभांक-2-6-9
  • होली की आग से दूर रहें ये महिलाएं: साल 2026 का चंद्र ग्रहण और होलिका दहन, भूलकर भी न करें ये गलतियां!

    होली की आग से दूर रहें ये महिलाएं: साल 2026 का चंद्र ग्रहण और होलिका दहन, भूलकर भी न करें ये गलतियां!


    नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति में होली का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। फाल्गुन पूर्णिमा की रात को जब होलिका का दहन किया जाता है, तो इसके साथ ही नकारात्मक शक्तियों के अंत और नई ऊर्जा के आगमन की कामना की जाती है। हालांकि, साल 2026 का होलिका दहन बेहद खास और संवेदनशील है, क्योंकि इसी दिन चंद्र ग्रहण का संयोग भी बन रहा है। इस खगोलीय घटना के कारण इंटरनेट पर 2 मार्च और 3 मार्च की तारीखों को लेकर खासी बहस छिड़ी हुई है। लेकिन तिथियों के इस भ्रम के बीच एक बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर किन लोगों के लिए जलती हुई होली को देखना वर्जित है?

    अक्सर लोग जानते हैं कि नई दुल्हन को शादी के बाद पहली होली नहीं देखनी चाहिए, लेकिन शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार कुछ अन्य महिलाओं और बच्चों के लिए भी होलिका दहन की अग्नि के दर्शन शुभ नहीं माने जाते।

    सबसे पहले बात करें गर्भवती महिलाओं की, तो उन्हें होलिका दहन से पूरी तरह दूर रहने की सलाह दी जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, यह अग्नि भक्त प्रहलाद को जलाने के लिए जलाई गई थी, जो एक नकारात्मक भाव का प्रतीक है। ज्योतिषीय और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोणों से, अग्नि का तीव्र ताप और उससे निकलने वाला धुआं गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु के मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। ऐसी महिलाओं को होलिका की परिक्रमा करने से भी बचना चाहिए।

    इसी तरह, नवजात शिशुओं को भी होलिका दहन के स्थान पर नहीं ले जाना चाहिए। माना जाता है कि पूर्णिमा की इस रात को नकारात्मक शक्तियां अत्यंत प्रबल होती हैं, जिससे छोटे बच्चों को “बुरी नजर” लगने का खतरा रहता है। उनकी कोमल सेहत के लिए धुआं और शोर भी हानिकारक हो सकता है।

    एक दिलचस्प सामाजिक मान्यता सास-बहू के रिश्ते को लेकर भी है। कई क्षेत्रों में यह माना जाता है कि सास और बहू को कभी भी एक साथ खड़े होकर होलिका दहन नहीं देखना चाहिए। ऐसा करने से उनके आपसी रिश्तों में खटास आ सकती है और घर में कलह का वातावरण बन सकता है। परिवार की सुख-शांति के लिए दोनों का एक साथ वहां मौजूद होना वर्जित बताया गया है।

    इसके अलावा, इकलौती संतान की मां को भी होलिका दहन देखने से परहेज करना चाहिए। इसके पीछे का तर्क भक्त प्रहलाद से जुड़ा है, जो अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। अंत में, ऐसी लड़कियां जिनकी शादी तय हो चुकी है और कुछ ही महीनों में उनका विवाह होने वाला है, उन्हें भी जलती हुई होली देखने से बचना चाहिए। चूंकि वे जीवन के एक नए और मांगलिक पड़ाव में कदम रखने जा रही हैं, इसलिए उन्हें इस “दहन” की प्रक्रिया से दूर रहकर केवल सकारात्मक उत्सवों में ही भाग लेना चाहिए।

  • शनि अस्त 2026: साढ़ेसाती झेल रहे जातकों के लिए वरदान साबित होगा यह गोचर, जानें किन राशियों को मिलेगा राजसुख!

    शनि अस्त 2026: साढ़ेसाती झेल रहे जातकों के लिए वरदान साबित होगा यह गोचर, जानें किन राशियों को मिलेगा राजसुख!


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना जाता है। शनि की चाल में आने वाला हर छोटा बदलाव भी सभी 12 राशियों के जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। वर्ष 2026 में एक ऐसी ही महत्वपूर्ण खगोलीय घटना होने जा रही हैजो कई जातकों के लिए राहत की खबर लेकर आएगी। द्रिक पंचांग के अनुसार13 मार्च 2026 की शाम 7 बजकर 14 मिनट पर शनि देव मीन राशि में अस्त होने जा रहे हैं। सामान्यतः किसी ग्रह का अस्त होना उसके प्रभाव को कम करता हैलेकिन शनि के मामले में यहअस्त होना उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैजो लंबे समय से शनि की टेढ़ी नजर या साढ़ेसाती का कष्ट झेल रहे थे।

    जैसे ही सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करेंगेशनि का तेज कम होने लगेगाजिससे उनके क्रूर या अशुभ फलों में भारी कमी आएगी। यह समय विशेष रूप से उन तीन राशियों के लिएमहा-भाग्योदय का मार्ग प्रशस्त करेगाजिन्हें शनि अब तक कड़ी परीक्षा में डाल रहे थे। इनमें मेषवृश्चिक और कुंभ राशि शामिल हैं। ज्योतिषियों का मानना है कि शनि का यह अस्त काल 13 मार्च से शुरू होकर 22 अप्रैल 2026 तक रहेगाऔर इन 40 दिनों में इन राशियों के करियर और आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

    मेष राशि के जातकों की बात करें तो उन पर वर्तमान में शनि की साढ़ेसाती का प्रथम चरण चल रहा है। शनि का अस्त होना इनके लिए किसी बड़ी मानसिक और आर्थिक राहत जैसा होगा। अब तक जो काम अटके हुए थे या जिन प्रयासों का फल नहीं मिल रहा थावहां से सफलता मिलनी शुरू होगी। फिजूलखर्ची पर लगाम लगेगी और संचय की गई पूंजी में वृद्धि होगी। यदि आप लंबे समय से किसी विदेशी स्रोत से धन लाभ की प्रतीक्षा कर रहे थेतो वह इच्छा अब पूर्ण हो सकती है। साथ हीनौकरीपेशा जातकों को नए और बेहतर अवसर प्राप्त होंगेजिससे करियर की गाड़ी पटरी पर लौट आएगी।

    वहींवृश्चिक राशि के लिए शनि का अस्त होना आत्मविश्वास के नए द्वार खोलेगा। इस अवधि में आपके भीतर एक नई ऊर्जा का संचार होगाजो आपको साहसी निर्णय लेने के लिए प्रेरित करेगा। रुके हुए कार्यों में गति आएगी और व्यापारिक क्षेत्र में आप कोई बड़ी डील फाइनल कर सकते हैं। जो लोग नौकरी में प्रमोशन या वेतन वृद्धि की उम्मीद लगाए बैठे थेउनके लिए यह समय बेहद अनुकूल रहने वाला है। हालांकिइस दौरान संतान पक्ष को लेकर थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती हैलेकिन कुल मिलाकर यह समय आपके वैभव और सम्मान में वृद्धि करने वाला साबित होगा।

    अंत मेंकुंभ राशि के जातकों के लिए यह गोचर अत्यंत महत्वपूर्ण हैक्योंकि उन पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम और तीसरा चरण चल रहा है। शनि के अस्त होते ही आपके कंधों से भारी बोझ उतरता हुआ महसूस होगा। आय के नए स्रोत बनेंगे और किसी पुरानी संपत्ति के क्रय-विक्रय से आपको मोटा मुनाफा होने के योग हैं। कार्यक्षेत्र में आपके प्रदर्शन की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। बस एक बात का विशेष ध्यान रखें कि अपनीवाणी पर संयम रखेंक्योंकि छोटी सी बहस बड़े विवाद का रूप ले सकती है। 13 मार्च से 22 अप्रैल के बीच का यह समय इन राशियों के लिएगोल्डन पीरियड की तरह हैजहां संयम और सही योजना के साथ ये जातकों अपने जीवन की दिशा बदल सकते हैं।

  • उत्तराखंड का रहस्यमयी धर्मेश्वर महादेव मंदिर जहां मृत्यु के बाद लगती है यमराज की अदालत

    उत्तराखंड का रहस्यमयी धर्मेश्वर महादेव मंदिर जहां मृत्यु के बाद लगती है यमराज की अदालत


    नई दिल्ली। भारतीय परंपराओं में यह मान्यता प्रचलित है कि मृत्यु के बाद हर मनुष्य को अपने कर्मों का हिसाब देना होता है। जीवन में किए गए अच्छे और बुरे कर्म ही उसके अगले जन्म और भाग्य का निर्धारण करते हैं। लेकिन उत्तराखंड में एक ऐसा प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर मौजूद है जिसके बारे में कहा जाता है कि मृत्यु के बाद यहीं यमराज की अदालत लगती है और मनुष्य के कर्मों का लेखा जोखा किया जाता है।

    हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड स्थित Dharmeshwar Mahadev Temple की जो चौरासी मंदिर परिसर के भीतर स्थित है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह स्थान केवल एक शिव मंदिर नहीं बल्कि कर्मों के अंतिम निर्णय का प्रतीक स्थल माना जाता है। यहां गर्भगृह में मटके के आकार का शिवलिंग स्थापित है जिसे भगवान शिव का धर्मराज स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि यही रूप मृत्यु के बाद जीवात्मा के कर्मों का निर्णय करता है।

    कहा जाता है कि जो व्यक्ति जीवनकाल में इस मंदिर के दर्शन नहीं करता उसे मृत्यु के बाद यहां आकर भगवान धर्मेश्वर महादेव का सामना करना पड़ता है। इसीलिए कई श्रद्धालु मानते हैं कि जीते जी यहां दर्शन करने से कर्मों के बोझ से मुक्ति मिल सकती है। विशेष रूप से भाई दूज के अवसर पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है। बहनें अपने भाइयों की लंबी आयु और सुख समृद्धि की कामना के लिए विशेष पूजा अर्चना करती हैं।

    स्थानीय कथाओं के अनुसार भगवान शिव यहां साक्षात यमराज के रूप में विराजित हैं और उनके साथ चित्रगुप्त भी उपस्थित रहते हैं जो मनुष्यों के कर्मों का लेखा जोखा तैयार करते हैं। मंदिर के पीछे एक स्थान चित्रगुप्त को समर्पित माना जाता है जहां एक काली शिला और पत्थर पर बनी लकीरें दिखाई देती हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यही प्रतीकात्मक व्यवस्था यह तय करती है कि आत्मा को स्वर्ग प्राप्त होगा या नर्क।

    मंदिर से कुछ दूरी पर ढाई पौड़ी नामक एक स्थान भी स्थित है। मान्यता है कि जिन लोगों की अकाल मृत्यु होती है उन्हें अपने शेष जीवन काल का समय यहीं व्यतीत करना पड़ता है। इसलिए धर्मेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन करने वाले भक्त इन तीनों स्थलों के दर्शन को पूर्ण तीर्थ माना करते हैं।

    मंदिर के इतिहास को लेकर भी अनेक कथाएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि इसी स्थान पर महाराज कृष्ण गिरि ने कठोर साधना की थी और इसे एक पवित्र तीर्थस्थल के रूप में स्थापित किया। समय के साथ यह स्थान आस्था और रहस्य का केंद्र बन गया।

    धर्मेश्वर महादेव मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि कर्म और न्याय की उस अवधारणा का प्रतीक है जो भारतीय संस्कृति की गहराई में रची बसी है। यहां आने वाले श्रद्धालु जीवन के कर्मों पर चिंतन करते हैं और सद्कर्म की प्रेरणा लेकर लौटते हैं