Category: Religious Astrology

  • होली से पहले 8 दिन उग्र ग्रहों का प्रभाव, जानें किन राशियों को बरतनी होगी सावधानी

    होली से पहले 8 दिन उग्र ग्रहों का प्रभाव, जानें किन राशियों को बरतनी होगी सावधानी


    नई दिल्ली:होलाष्टक 2026 की शुरुआत सोमवार से हो गई है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार होली से पूर्व आने वाले ये आठ दिन विशेष ज्योतिषीय महत्व रखते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में नवग्रहों की स्थिति उग्र रहती है, जिसके कारण विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्यों को स्थगित करने की परंपरा रही है।

    इस वर्ष राहु और मंगल की युति से बन रहा अंगारक योग होलाष्टक के प्रभाव को और संवेदनशील बना रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार अष्टमी से पूर्णिमा तक अलग-अलग तिथियों में चंद्रमा, सूर्य, शनि, गुरु, बुध, शुक्र, मंगल और राहु क्रमशः प्रतिकूल प्रभाव में माने जाते हैं। यही कारण है कि इस समय को संयम, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक साधना का काल कहा गया है।

    इन 5 राशियों पर विशेष प्रभाव
    ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष मिथुन, कर्क, सिंह, कुंभ और मीन राशि के जातकों पर होलाष्टक का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक देखा जा सकता है।

    मिथुन राशि के लिए आर्थिक अस्थिरता और मानसिक भ्रम की स्थिति बन सकती है। निवेश और बड़े वित्तीय निर्णयों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    कर्क राशि के जातकों को वाहन चलाते समय सतर्क रहने की जरूरत बताई गई है। स्वास्थ्य और पारिवारिक मामलों में भी धैर्य रखने की सलाह है।

    सिंह राशि वालों के लिए पारिवारिक संबंधों में तनाव की संभावना जताई गई है, विशेषकर पिता या वरिष्ठ सदस्यों से मतभेद हो सकते हैं।

    कुंभ राशि में राहु और मंगल की युति से बना अंगारक योग करियर और निजी जीवन में दबाव की स्थिति ला सकता है। कार्यस्थल पर विवाद से बचने और संयमित व्यवहार रखने की सलाह दी गई है।

    मीन राशि के जातकों को निर्णय लेने में असमंजस और मानसिक अस्थिरता का अनुभव हो सकता है। इस दौरान जल्दबाजी में कोई बड़ा कदम न उठाने की सलाह दी गई है।

    शुभ कार्यों पर पारंपरिक विराम
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के दौरान शुभ और मांगलिक कार्यों को टालना चाहिए। हालांकि दैनिक पूजा, जप, दान और साधना को सकारात्मक माना गया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह अवधि आत्ममंथन और आध्यात्मिक उन्नति का समय है। शिव स्तुति, सूर्य उपासना, हनुमान चालीसा का पाठ और जरूरतमंदों को दान-पुण्य करना इस समय शुभ फलदायी माना जाता है।

    आध्यात्मिक संदेश
    होलाष्टक को केवल अशुभ समय के रूप में देखने के बजाय इसे आत्मचिंतन और आत्मसंयम के अवसर के रूप में भी देखा जाता है। संयमित जीवन, सकारात्मक सोच और धैर्य के साथ यह अवधि भी शुभ परिणाम दे सकती है।

  • बुधवार 25 फरवरी: रोहिणी नक्षत्र और विष्कुम्भ योग में करें ये असरदार उपाय, दूर होगा तनाव और सुधरेगी सेहत

    बुधवार 25 फरवरी: रोहिणी नक्षत्र और विष्कुम्भ योग में करें ये असरदार उपाय, दूर होगा तनाव और सुधरेगी सेहत


    नई दिल्ली । बुधवार 25 फरवरी को रोहिणी नक्षत्र और विष्कुम्भ योग का संयोग रहेगा जो आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद कर सकता है। इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से न केवल आपके मानसिक तनाव में कमी आएगी बल्कि सेहत परिवार व्यवसाय और जीवनसाथी संबंधों में भी सुधार देखने को मिलेगा। यदि आपको भूलने की आदत है और आप चीज़ें रखकर भूल जाते हैं तो आज शाम को चंद्रदेव को प्रणाम करें और चांदी का चंद्रमा धारण करें।
    यह उपाय आपकी याददाश्त को तेज करने में सहायक होगा। स्वास्थ्य के लिए भी यह दिन विशेष है। एक सुंदर और स्वस्थ जीवन के लिए जामुन का पेड़ लगाना चाहिए और उसकी जड़ों में पानी डालना चाहिए। यदि आज पेड़ लगाना संभव न हो तो संकल्प लेकर भविष्य में इसे जरूर करें। माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता हो तो शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल में दूध मिलाकर अर्पित करें। इससे माता का स्वास्थ्य जल्द ही सुधरेगा। वहीं यदि जीवनसाथी के मन में किसी बात को लेकर तनाव या शक की स्थिति बनी रहती है तो उनके हाथों से मोती का दान कराना लाभकारी होगा।

    काम के बोझ और मानसिक तनाव से राहत पाने के लिए आज 2 मुखी रुद्राक्ष गले में धारण करें। इससे आप मानसिक रूप से स्वस्थ और तनावमुक्त रहेंगे। घर में किसी मांगलिक कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करनी हो तो शिव मंदिर जाकर अपने हाथ के बराबर लंबा सफेद सूत का धागा भेंट करें। इससे कार्यक्रम सफल होंगे और घर में सुख-शांति बनी रहेगी। यदि कार्यों की सफलता को लेकर घबराहट रहती है तो माता से आशीर्वाद स्वरूप मुट्ठी भर चावल प्राप्त कर उसे पोटली में संभालकर रखें। इससे कार्य से जुड़ी चिंता दूर होगी और आत्मविश्वास बढ़ेगा। आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए चंद्रमा की रोशनी में ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम: मंत्र का 108 बार जप करना लाभकारी रहेगा।

    घर में बहस और तनाव का माहौल दूर करने के लिए सफेद कपड़ा मंदिर में दान करें। यह उपाय परिवार में सुख-शांति बनाए रखने में मदद करेगा। व्यवसायिक प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए शाम के समय चंद्रदेव को अर्घ्य दें और सौं सोमाय नमः मंत्र का जप करें। इससे व्यवसाय में आपकी स्थिति मजबूत होगी। घर की सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए मंदिर में दूध का दान करें और घर के बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करें। इन उपायों को करने से न केवल आपका जीवन तनावमुक्त होगा बल्कि परिवारिक स्वास्थ्य और व्यवसायिक जीवन में भी सुधार आएगा। बुधवार 25 फरवरी का यह दिन इन उपायों के माध्यम से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए उत्तम अवसर है।

  • होलाष्टक आज से शुरू: विवाह और मांगलिक कार्यों का मुहूर्त निषिद्ध, होलिका दहन पर लगेगा चंद्र ग्रहण

    होलाष्टक आज से शुरू: विवाह और मांगलिक कार्यों का मुहूर्त निषिद्ध, होलिका दहन पर लगेगा चंद्र ग्रहण


    नई दिल्ली । आज 24 फरवरी से होलाष्टक शुरू हो रहा है। होली से पहले के आठ दिन यानी फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अष्टमी से होलाष्टक माना जाता है। इन आठ दिनों में विवाह, जनेऊ, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहते। ज्योतिषियों के अनुसार इस दौरान ग्रहों की स्थिति उग्र होती है, इसलिए मांगलिक कार्यों के लिए शुभ योग नहीं बनते। होलाष्टक का समापन होलिका दहन के साथ होता है।

    इस साल होलिका दहन यानी फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण भी होगा। ग्रहण के समय और सूतक में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। 3 मार्च को सुबह 6.21 बजे से ग्रहण का सूतक शुरू होगा और दोपहर 3.21 बजे से ग्रहण आरंभ होकर शाम 6.47 बजे तक रहेगा। ग्रहण के दौरान रंग-गुलाल खेलना उचित नहीं माना गया है। ज्योतिषियों की सलाह है कि इस समय मानसिक रूप से मंत्र जप, दान-पुण्य और पूजा-पाठ करना चाहिए। इसके चलते इस साल धुलंडी होली 4 मार्च को मनाने की सलाह दी जा रही है, हालांकि कुछ पंचांगों में 3 मार्च को भी होली खेलने का उल्लेख है।

    होलाष्टक की कथा

    होलाष्टक से जुड़ी कथा भक्त प्रह्लाद से संबंधित है। असुरराज हिरण्यकश्यपु ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति के कारण अनेक यातनाएं दीं। फाल्गुन कृष्ण अष्टमी से पूर्णिमा तक होलिका ने प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने की कोशिश की, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका अग्नि में भस्म हो गई। तभी से होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।

    होलाष्टक में किए जाने वाले शुभ कार्य

    ध्यान, जप और पूजा का विशेष महत्व। शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करें, बिल्वपत्र चढ़ाएं और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें। हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें। भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा करें, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें दान-पुण्य, हवन, अभिषेक, ध्यान और तीर्थ यात्रा करना शुभ फलदायी माना गया है। इस प्रकार होलाष्टक का समय आध्यात्मिक उन्नति और भक्ति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है, जबकि मांगलिक कार्यों के लिए यह निषिद्ध अवधि है। होलिका दहन पर चंद्र ग्रहण के कारण इस वर्ष रंगों की होली 4 मार्च को खेलने की सलाह दी जा रही है।

  • अंक ज्योतिष भविष्यफल: आज स्थिरता और भावनात्मक संतुलन पर रहेगा जोर

    अंक ज्योतिष भविष्यफल: आज स्थिरता और भावनात्मक संतुलन पर रहेगा जोर


    नई दिल्ली:24 फरवरी 2026 का अंक ज्योतिष जीवन में स्थिरता, जिम्मेदारी और भावनात्मक संतुलन को प्राथमिकता देने का संकेत देता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार आज का मूलांक 6 है, जो प्रेम, परिवार, सामंजस्य और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है। वहीं भाग्यांक 9 त्याग, पूर्णता और पुराने बोझ से मुक्ति की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है।

    इन दोनों अंकों का संयोजन यह दर्शाता है कि आज का दिन जल्दबाजी से बचकर धैर्य और विवेक के साथ निर्णय लेने के लिए अनुकूल है। कार्यक्षेत्र और पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाए रखना आवश्यक रहेगा। भावनात्मक रूप से परिपक्व फैसले भविष्य में स्थायी और सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं।

    मूलांक के अनुसार आज का प्रभाव
    मूलांक 1
    नेतृत्व क्षमता का उपयोग करें, लेकिन सामूहिक कार्यशैली अपनाएं। टीम के साथ तालमेल बनाकर चलना लाभकारी रहेगा।

    मूलांक 2
    संवाद और समझदारी से समस्याओं का समाधान संभव है। रिश्तों में नरमी और धैर्य से सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।

    मूलांक 3
    रचनात्मक योजनाओं की शुरुआत के लिए समय अनुकूल है। नई सोच और आत्मविश्वास आपको आगे बढ़ाएंगे।

    मूलांक 4
    प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में स्थिरता रखें। सोच-समझकर लिए गए निर्णय भविष्य में लाभ देंगे।

    मूलांक 5
    निवेश और आर्थिक मामलों में सावधानी बरतें। जल्दबाजी से नुकसान हो सकता है, इसलिए योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ें।

    मूलांक 6
    सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि के संकेत हैं। परिवार और कार्यक्षेत्र में संतुलन बनाकर चलें।

    मूलांक 7
    शोध, अध्ययन और आत्ममंथन के लिए दिन अनुकूल है। मानसिक स्पष्टता पाने के लिए ध्यान या एकांत समय लाभकारी रहेगा।

    मूलांक 8
    आर्थिक और कानूनी मामलों में सतर्कता रखें। धैर्य और अनुशासन से कार्य करें।

    मूलांक 9
    अधूरे कार्य पूरे करने और पुराने विवाद समाप्त करने का अवसर मिल सकता है। सकारात्मक पहल से संबंध सुधरेंगे।

    दिन का संदेश
    विशेषज्ञों का मानना है कि आज की ऊर्जा लोगों को अपने व्यक्तिगत और सामाजिक दायित्वों के प्रति अधिक सजग बनाएगी। परिवार में संवाद और समझदारी से रिश्ते मजबूत हो सकते हैं।

    मानसिक शांति बनाए रखने के लिए ध्यान, संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या अपनाने की सलाह दी गई है। आज का दिन दिल और दिमाग दोनों के संतुलन से आगे बढ़ने का संकेत देता है।

  • मंगल दोष के प्रभाव कम करने के उपाय: मंगलवार को हनुमान उपासना और दान का विशेष महत्व

    मंगल दोष के प्रभाव कम करने के उपाय: मंगलवार को हनुमान उपासना और दान का विशेष महत्व


    नई दिल्ली।वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को पराक्रम, ऊर्जा, साहस और भूमि का कारक माना गया है। यदि कुंडली में मंगल की स्थिति प्रतिकूल हो, तो इसे मंगल दोष या कुज दोष कहा जाता है। धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार मंगलवार का दिन मंगल ग्रह की शांति और अनुकूलता के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन हनुमान उपासना, व्रत, दान और संयमित जीवनशैली को प्रभावी उपाय माना गया है।

    मंगल ग्रह को अनुकूल बनाने के धार्मिक उपाय
    ज्योतिषीय मान्यता है कि मंगलवार को श्रद्धा और नियमपूर्वक हनुमान चालीसा का पाठ करने से भय, बाधा और मानसिक अशांति में कमी आती है। प्रातः स्नान कर स्वच्छ लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें और भगवान हनुमान की पूजा करें। दीप प्रज्वलित कर सिंदूर, चोला तथा गुड़-चना का भोग अर्पित करना मंगल ग्रह के शुभ फल को बढ़ाने वाला माना गया है।

    मंगलवार का व्रत भी विशेष फलदायी बताया गया है। इस दिन सात्विक आहार ग्रहण करें और यथासंभव नमक का त्याग करें। दिनभर संयम, धैर्य और सेवा भाव बनाए रखना धार्मिक दृष्टि से मंगल शांति का साधन माना जाता है।

    दान और सेवा का महत्व
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान और सेवा मंगल कृपा प्राप्ति का श्रेष्ठ मार्ग है। जरूरतमंदों को लाल मसूर की दाल, गुड़, शहद या लाल वस्त्र दान करना पुण्यदायी माना गया है।

    गौ सेवा भी मंगल शांति के उपायों में शामिल है। विशेषकर मंगलवार को गौमाता को गुड़ और रोटी खिलाना शुभ माना जाता है। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन आने की मान्यता है।

    तांबा और मंत्र जाप
    ज्योतिष परंपरा में तांबा मंगल ग्रह की धातु मानी जाती है। इसलिए तांबे के पात्र का उपयोग करना या तांबे का कड़ा अथवा चेन धारण करना पारंपरिक उपायों में शामिल है।

    इसके साथ ‘ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः’ या ‘ॐ अंग अंगारकाय नमः’ मंत्र का नियमित जप मंगल ग्रह की शांति और कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना गया है। नियमित जप से मानसिक दृढ़ता और आत्मविश्वास में वृद्धि होने की भी मान्यता है।

    मंगल दोष शांति के विशेष उपाय
    यदि कुंडली में मंगल दोष अधिक प्रबल हो, तो विवाह से पूर्व विशेष पूजा-अनुष्ठान कराने की परंपरा है। योग्य आचार्य के मार्गदर्शन में मंगल शांति अनुष्ठान, पीपल पूजन या मंगल यंत्र की स्थापना कर पूजा की जाती है।

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करना भी मंगल के संतुलन का प्रतीक माना गया है। हालांकि, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले अनुभवी ज्योतिषाचार्य से परामर्श करना उचित माना जाता है।

    आध्यात्मिक संदेश
    धार्मिक दृष्टि से ग्रहों की शांति केवल अनुष्ठानों से नहीं, बल्कि आचरण से भी जुड़ी मानी जाती है। संयमित जीवन, सेवा भाव, परिवार के प्रति सद्भाव और ईश्वर स्मरण जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं। श्रद्धा, नियम और सत्कर्म ही मंगल की कृपा का सच्चा आधार माने गए हैं।

  • चंद्र ग्रहण की वजह से होली को तिथि को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति, नोट कर लें होलिका दहन और रंग खेलने की सही डेट

    चंद्र ग्रहण की वजह से होली को तिथि को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति, नोट कर लें होलिका दहन और रंग खेलने की सही डेट


    नई दिल्ली । Holi 2026: इस बार रंगों की होली और होलिका दहन को लेकर कंफ्यूजन देखने को मिल रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण। वाराणसी के प्रसिद्ध हृषिकेश पंचांग और जाने माने ज्योतिषाचार्य पं. नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार इस ग्रहण ने होली की गणित को थोड़ा पेचीदा बना दिया है। अगर आप भी इसी उलझन में हैं कि होलिका दहन कब होगा सूतक कब लगेगा और रंग कब खेला जाएगा तो जानिए यहां सबकुछ।

    2 मार्च: भद्रा पुच्छ में ही होगा होलिका दहन

    वैदिक पंचांग के अनुसार 2 मार्च 2026 सोमवार को चतुर्दशी तिथि शाम 5:18 बजे तक रहेगी उसके तुरंत बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। शास्त्रों का नियम है कि होलिका दहन हमेशा पूर्णिमा तिथि में ही किया जाता है लेकिन इस बार पूर्णिमा के साथ ही भद्रा का आगमन भी हो रहा है।

    भद्रा का लंबा साया 2 मार्च की शाम 5:18 बजे से लेकर पूरी रात और अगले दिन 3 मार्च की भोर सुबह 4:56 बजे तक भद्रा का वास रहेगा। शास्त्रों में भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना गया है क्योंकि इससे राज्य और व्यक्ति पर अशुभ प्रभाव पड़ते हैं।

    शुभ मुहूर्त का चयन ऐसी स्थिति में जब पूरी रात भद्रा हो तो शास्त्रों में भद्रा पुच्छ भद्रा का पूंछ वाला भाग में कार्य करने का विधान है। पं. नरेंद्र उपाध्याय जी के अनुसार इस साल दहन का सबसे शुभ समय यह रहेगा

    शुभ मुहूर्त: रात 12:50 बजे से रात 02:02 बजे तक अवधि: 1 घंटा 12 मिनट

    इसी समय में दहन करना शास्त्रीय दृष्टि से सबसे उत्तम और कल्याणकारी है। 3 मार्च: होली पर चंद्र ग्रहण का पहरा 3 मार्च मंगलवार को पूर्णिमा तिथि के दिन ही साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा इसलिए इसका धार्मिक प्रभाव सूतक भी पूरे देश में मान्य होगा। ग्रहण की टाइमिंग भारतीय समय के अनुसार यह ग्रहण दोपहर लगभग 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक रहेगा। इस ग्रहण के दौरान ब्लड मून का नजारा भी देखने को मिल सकता है।

    सूतक काल और नियम चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। इसका मतलब यह है कि 3 मार्च को सुबह 06:20 बजे से ही सूतक लग जाएगा। सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे। इस दौरान पूजा पाठ मूर्ति स्पर्श और खाना पीना वर्जित होता है। सूतक और ग्रहण के साये में होली का डंडा या रंग गुलाल खेलना अशुभ माना जाता है इसलिए 3 मार्च को रंग वाली होली नहीं मनाई जाएगी।

    4 मार्च: रंगों की होली धुलेंडी का असली उत्सव 3 मार्च की शाम को ग्रहण खत्म होने के बाद शुद्धिकरण और स्नान किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 4 मार्च 2026 बुधवार को सूर्योदय के समय चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि रहेगी। शास्त्रीय मर्यादा के अनुसार ग्रहण और सूतक से मुक्त होने के बाद इसी दिन पूरे देश में धूम धाम से धुलेंडी और रंगों का त्योहार मनाया जाएगा।

    होली 2026: पूरा कैलेंडर

    2 मार्च सोमवार होलिका दहन रात 12:50 बजे से 02:02 बजे तक

    3 मार्च मंगलवार चंद्र ग्रहण दोपहर 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक

    3 मार्च मंगलवार सूतक काल सुबह 06:20 बजे से शुरू

    4 मार्च बुधवार रंग वाली होली सुबह से धुलेंडी का असली दिन

    ग्रहण के दौरान सावधानियां और उपाय

    तुलसी का प्रयोग सूतक लगने से पहले 3 मार्च सुबह दूध दही और पके हुए खाने में तुलसी के पत्ते जरूर डाल दें। गर्भवती महिलाएं ग्रहण के समय बाहर न निकलें और न ही किसी नुकीली चीज़ सुई कैंची का इस्तेमाल करें। स्नान और दान ग्रहण खत्म होने के बाद 3 मार्च शाम 7 बजे के बाद स्नान करें और सफेद वस्त्र चावल या चीनी का दान करें। इससे ग्रहण का अशुभ प्रभाव कम होता है। मंत्र जाप ग्रहण के दौरान ॐ नमः शिवाय का जाप करना होली पर कई गुना फलदायी होता है।

  • 24 फरवरी 2026 पंचांग: अभिजीत और अमृत काल में करें शुभ कार्य, जानें ग्रह-नक्षत्र की स्थिति

    24 फरवरी 2026 पंचांग: अभिजीत और अमृत काल में करें शुभ कार्य, जानें ग्रह-नक्षत्र की स्थिति


    नई दिल्ली।24 फरवरी 2026, मंगलवार का दिन विशेष खगोलीय संयोगों के कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि प्रातः 7:01 बजे तक प्रभावी रहेगी, इसके बाद अष्टमी तिथि आरंभ हो जाएगी। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार आज का दिन सामाजिक प्रतिष्ठा, प्रशासनिक कार्यों और व्यक्तिगत निर्णयों के लिहाज से प्रभावशाली रह सकता है।

    ग्रहों की स्थिति और नक्षत्र प्रभाव
    आज सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र और राहु का कुंभ राशि में संयोग बना हुआ है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह ग्रह स्थिति सामूहिक प्रयासों, सार्वजनिक जीवन और सरकारी गतिविधियों में सक्रियता बढ़ाने वाली मानी जाती है।

    वहीं चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित रहेगा और कृत्तिका नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। कृत्तिका नक्षत्र को ऊर्जा, स्पष्ट सोच और साहस का प्रतीक माना जाता है। पंचांग विशेषज्ञों का मानना है कि यह नक्षत्र अधूरे कार्यों को पूरा करने और नई योजनाओं को गति देने के लिए अनुकूल समय प्रदान करता है।

    योग और शुभ मुहूर्त
    दिन की शुरुआत इन्द्र योग से होगी, जो प्रातः 7:24 बजे तक प्रभावी रहेगा। इन्द्र योग को मान-सम्मान और सफलता प्रदान करने वाला योग माना जाता है। इसके पश्चात वैधृति योग प्रारंभ होगा। इस योग में धैर्य, संतुलन और सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है।

    आज का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:12 बजे से 12:57 बजे तक रहेगा। इस अवधि को विशेष रूप से शुभ कार्यों, सरकारी प्रक्रियाओं और महत्वपूर्ण शुरुआत के लिए अनुकूल माना गया है।

    इसके अतिरिक्त अमृत काल दोपहर 12:51 बजे से 2:22 बजे तक रहेगा। यह समय नए कार्य आरंभ करने, अनुबंध करने और सकारात्मक निर्णय लेने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

    राहुकाल और सावधानियां
    पंचांग के अनुसार राहुकाल सायं 3:26 बजे से 4:52 बजे तक रहेगा। इस दौरान निवेश, विवाद या बड़े निर्णय लेने से बचने की सलाह दी जाती है।

    यमगण्ड और गुलिकाल के समय भी पारंपरिक रूप से सावधानी बरतने की परंपरा रही है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार इन समयों का पालन केवल धार्मिक मान्यता नहीं, बल्कि मानसिक अनुशासन और समय प्रबंधन का भी एक हिस्सा है।

    सूर्योदय और चंद्रमा से जुड़ी जानकारी
    आज सूर्योदय प्रातः 6:51 बजे और सूर्यास्त सायं 6:18 बजे होगा। चंद्रोदय 10:58 बजे और चंद्रास्त अगले दिन 1:40 बजे निर्धारित है। यह जानकारी विशेष रूप से व्रत, पूजन और दैनिक धार्मिक अनुष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    पंचांग का व्यापक महत्व
    ज्योतिष विश्लेषकों का कहना है कि पंचांग केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न अंग है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर समय का सदुपयोग, निर्णय की दिशा और कार्यों की योजना बनाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।

  • हस्तरेखा विज्ञान में सूर्य पर्वत का महत्व: करियर और व्यक्तिगत विकास के संकेत..

    हस्तरेखा विज्ञान में सूर्य पर्वत का महत्व: करियर और व्यक्तिगत विकास के संकेत..


    नई दिल्ली। हस्तरेखा विज्ञान में सूर्य पर्वत को केवल हथेली की एक विशेष आकृति नहीं बल्कि जीवन के मार्गदर्शन का संकेतक माना जाता है। यह पर्वत अनामिका उंगली के आधार और हृदय रेखा के ऊपरी हिस्से में स्थित होता है और जातक के करियर, आर्थिक स्थिति और समाज में सम्मान का संकेत देता है। यदि सूर्य पर्वत पूर्ण और सुविकसित हो, तो यह व्यक्ति के जीवन में उच्च पद, प्रतिष्ठा और धन की प्राप्ति का संकेत देता है। वहीं, इसका अभाव या कमजोर स्थिति जीवन में सतर्क रहने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का संदेश देती है।

    सूर्य पर्वत मुख्य रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जो करियर में ऊँचाई प्राप्त करना चाहते हैं या समाज में मान्यता पाना चाहते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि यह पर्वत गुलाबी रंग और उभार वाला हो, तो जातक स्वभाव से हंसमुख, उदार और मेहनती होता है। ऐसे लोग व्यापार, कला, संगीत और रचनात्मक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। सूर्य पर्वत जन्म से ही अस्तित्व में होता है, लेकिन जीवन के अनुभव, शिक्षा और स्वभाव के अनुसार यह अधिक या कम विकसित हो सकता है।

    सूर्य पर्वत के आकार और स्थिति का अध्ययन जीवन में करियर और आर्थिक निर्णय लेने में भी सहायक है। यदि पर्वत अत्यधिक विकसित है, तो यह कभी-कभी अहंकार या खर्चीले स्वभाव की ओर इशारा कर सकता है। वहीं, कमजोर सूर्य पर्वत आत्मविश्वास में कमी, सम्मान की कमी और आर्थिक चुनौतियों का संकेत देता है। इसके झुकाव से भी जातक के व्यक्तित्व और सफलता की दिशा का अनुमान लगाया जा सकता है। बुध की ओर झुके सूर्य पर्वत वाले व्यक्ति आमतौर पर व्यापार में कुशल और धन संचय करने में सक्षम होते हैं, जबकि शनि की ओर झुके पर्वत वाले लोग अधिकांतप्रिय होते हैं और उन्हें आर्थिक संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है।

    पहचान के लिए अनामिका उंगली के नीचे के हिस्से और हृदय रेखा के ऊपर के क्षेत्र को देखें। पूर्ण विकसित पर्वत गुलाबी, उभार वाला और स्पष्ट दिखता है। यदि यह सपाट, फीका या कमजोर प्रतीत होता है, तो इसे जीवन में चुनौतियों और सतर्क रहने की चेतावनी के रूप में समझा जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सूर्य पर्वत का अध्ययन केवल भविष्य जानने के लिए नहीं, बल्कि करियर योजना, आर्थिक प्रबंधन और व्यक्तिगत विकास के मार्गदर्शन के लिए भी किया जा सकता है। सुविकसित सूर्य पर्वत वाले जातक सामाजिक गतिविधियों और टीम वर्क में सफल रहते हैं। कमजोर सूर्य पर्वत वाले जातकों को आत्मविश्वास बढ़ाने, नेतृत्व कौशल विकसित करने और आर्थिक निर्णयों में सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

    हस्तरेखा विज्ञान में सूर्य पर्वत का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इसे देखकर व्यक्ति अपने करियर में नई रणनीतियां अपना सकता है, धन प्रबंधन के उपाय कर सकता है और जीवन में सफलता और सम्मान के अवसरों को पहचान सकता है। यही कारण है कि सूर्य पर्वत का अध्ययन हर उम्र के लिए उपयोगी और मार्गदर्शक माना जाता है।

  • सोमवार के अचूक शिव उपाय, सुख शांति और मनोकामना पूर्ति का सरल आध्यात्मिक मार्ग..

    सोमवार के अचूक शिव उपाय, सुख शांति और मनोकामना पूर्ति का सरल आध्यात्मिक मार्ग..


    नई दिल्ली। सोमवार का दिन देवों के देव शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विधि विधान से की गई पूजा जीवन में सुख शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। नियमित रूप से सोमवार व्रत और शिव साधना करने से मानसिक तनाव कम होता है और बाधाएं दूर होने लगती हैं।

    सुबह स्नान के बाद मंदिर जाकर या घर में स्थापित शिवलिंग पर जल, दूध और गंगाजल से अभिषेक करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। शिवलिंग पर बेलपत्र और धतूरा अर्पित करने से सुख समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होती है। मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया अभिषेक शिव कृपा को शीघ्र आकर्षित करता है।

    धन और आर्थिक स्थिरता की कामना रखने वाले श्रद्धालु सोमवार की शाम शिवलिंग के समीप देसी घी का दीपक जलाएं। शहद मिश्रित जल से अभिषेक करना भी आर्थिक कष्टों को दूर करने वाला प्रभावी उपाय माना जाता है। यह साधना घर में समृद्धि और सकारात्मक वातावरण को बढ़ाने में सहायक मानी गई है।

    मनोकामना पूर्ति के लिए लगातार पांच सोमवार तक नियमपूर्वक जल, दुर्वा और बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा है। बेलपत्र पर शहद लगाकर अर्पण करने से इच्छित कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है। यह साधना धैर्य और अनुशासन के साथ की जाए तो अधिक फलदायी मानी जाती है।

    यदि कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो तो दूध, चावल, सफेद वस्त्र या भोजन का दान करना शुभ बताया गया है। ज्योतिषीय दृष्टि से चंद्रमा मन और भावनाओं का कारक है। ऐसे में यह दान मानसिक संतुलन और भावनात्मक स्थिरता प्रदान करने में सहायक माना जाता है।

    मानसिक शांति और बाधा निवारण के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप विशेष प्रभावी माना गया है।
    जप मंत्र
    ॐ नमः शिवाय
    ॐ नमो भगवते रुद्राय

    इन मंत्रों का नियमित जप आत्मविश्वास बढ़ाता है और भय तथा नकारात्मकता को दूर करता है। शिव चालीसा का पाठ भी आध्यात्मिक ऊर्जा को मजबूत करने में सहायक माना जाता है।

    सोमवार की पूजा में सफेद वस्त्र धारण करना शुभ माना गया है। दूध, दही और चावल जैसी सफेद वस्तुओं का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। पूजा के समय शुद्धता, संयम और शांत मन बनाए रखना आवश्यक है।

    ध्यान रखें कि शिव पूजा में तुलसी, हल्दी और केतकी के फूल अर्पित नहीं किए जाते। साथ ही क्रोध, असत्य और अपवित्रता से बचना चाहिए। नियमित श्रद्धा और सरलता से की गई शिव उपासना जीवन में संतुलन, धैर्य और सकारात्मक परिणामों का मार्ग प्रशस्त करती है।

  • 23 फरवरी 2026 का पंचांग, फाल्गुन षष्ठी पर ब्रह्म योग का शुभ संयोग, अनुशासन और साधना का संदेश

    23 फरवरी 2026 का पंचांग, फाल्गुन षष्ठी पर ब्रह्म योग का शुभ संयोग, अनुशासन और साधना का संदेश


    नई दिल्ली। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर सोमवार 23 फरवरी 2026 का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व लेकर आया है। वैदिक पंचांग के अनुसार प्रातःकाल ब्रह्म योग का प्रभाव रहा, जिसे शुभ कर्म, जप, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। प्रातः लगभग 9 बजे तक षष्ठी तिथि रही और इसके पश्चात सप्तमी तिथि का आरंभ हुआ। धर्माचार्यों के अनुसार यह समय आत्मसंयम, दृढ़ संकल्प और धर्मपालन के लिए अनुकूल माना गया है।

    पंचांग गणना के अनुसार चंद्रमा मेष राशि में भरणी नक्षत्र पर स्थित हैं। यमराज को भरणी नक्षत्र का अधिष्ठाता माना जाता है। इस कारण यह दिन जीवन में अनुशासन, कर्तव्य पालन और आचरण की शुद्धता का संदेश देता है। धार्मिक परंपराओं में भरणी नक्षत्र को कर्मफल की स्मृति और आत्मनियंत्रण से जोड़ा गया है। विद्वानों का मत है कि आज लिया गया सकारात्मक संकल्प दीर्घकालिक फल प्रदान कर सकता है और व्यक्ति को नैतिक दृढ़ता की दिशा में अग्रसर करता है।

    ज्योतिषीय दृष्टि से आज ग्रहों की स्थिति भी विशेष मानी जा रही है। कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र और राहु का संयोग विचार शक्ति और निर्णय क्षमता को प्रभावित करने वाला योग बना रहा है। इसे सामाजिक समन्वय, नई योजनाओं और बौद्धिक सक्रियता के लिए प्रेरक माना गया है। वहीं मकर राशि में स्थित मंगल को कर्मबल और साहस का कारक बताया गया है। यह स्थिति कठिन कार्यों को पूरा करने की ऊर्जा प्रदान करती है और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता बढ़ाती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज मांगलिक कार्य, पूजन, जप और दान शुभ मुहूर्त में करना हितकारी रहेगा। राहुकाल के दौरान महत्वपूर्ण कार्यों से परहेज करने की परंपरा का पालन करने की सलाह दी गई है। श्रद्धालु मंदिरों में विशेष आराधना, दीपदान और प्रार्थना कर रहे हैं। कई स्थानों पर फाल्गुन मास के उपलक्ष्य में सामूहिक पाठ, भजन और अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे हैं।

    धर्मशास्त्रों के जानकारों का कहना है कि फाल्गुन मास आंतरिक शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का काल माना जाता है। इस अवधि में संयमित जीवन, सेवा भावना और सत्कर्म को विशेष पुण्यदायी बताया गया है। आज का दिन व्यक्ति को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने और जीवन में संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

    आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो ब्रह्म योग और भरणी नक्षत्र का यह संयोग साधना, आत्मचिंतन और सकारात्मक संकल्पों के लिए उपयुक्त समय माना गया है। पंचांग की यह जानकारी न केवल धार्मिक आस्था रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि दैनिक जीवन में शुभ-अशुभ समय के चयन के लिए भी मार्गदर्शक मानी जाती है।