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  • IPL 2027 से पहले मुंबई इंडियंस में बड़ा फेरबदल, लसिथ मलिंगा समेत तीन दिग्गज कोचों की हुई विदाई

    IPL 2027 से पहले मुंबई इंडियंस में बड़ा फेरबदल, लसिथ मलिंगा समेत तीन दिग्गज कोचों की हुई विदाई

    नई दिल्ली । इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2027 से पहले पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस ने अपने कोचिंग स्टाफ में बड़ा बदलाव किया है। फ्रेंचाइजी ने श्रीलंका के पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज लसिथ मलिंगा, पारस म्हाम्ब्रे और फील्डिंग कोच कार्ल हॉपकिंसन के साथ अपना नाता खत्म कर लिया है। इन तीनों कोचों की विदाई के साथ टीम के सपोर्ट स्टाफ में बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिल रहा है। मुंबई इंडियंस ने तीनों के योगदान और लंबे समय तक टीम के साथ उनके जुड़ाव की सराहना करते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

    इस फैसले को आईपीएल के आगामी सीजन की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुंबई इंडियंस पिछले कुछ समय से अपने कोचिंग ढांचे में बदलाव कर रही है। इससे पहले टीम ने मुख्य कोच महेला जयवर्धने की जगह वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान कीरोन पोलार्ड को यह जिम्मेदारी सौंपी थी। अब गेंदबाजी और फील्डिंग विभाग से जुड़े तीन अनुभवी कोचों के जाने से टीम के कोचिंग सेटअप में नए चेहरों के लिए रास्ता खुल गया है।

    लसिथ मलिंगा का मुंबई इंडियंस के साथ काफी पुराना और सफल रिश्ता रहा है। वह फ्रेंचाइजी के सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। खिलाड़ी के रूप में उन्होंने मुंबई की गेंदबाजी को मजबूती देने के साथ कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में अहम भूमिका निभाई थी। उनकी तेज गति, सटीक यॉर्कर और डेथ ओवरों में गेंदबाजी करने की क्षमता टीम की सबसे बड़ी ताकतों में गिनी जाती रही है। मलिंगा मुंबई इंडियंस की चार आईपीएल खिताबी जीत का हिस्सा रहे। इसके अलावा 2011 में चैंपियंस लीग टी20 का खिताब जीतने वाली टीम में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान था।

    खिलाड़ी के रूप में अपना सफर समाप्त करने के बाद मलिंगा ने मुंबई इंडियंस के साथ मेंटर और कोच की भूमिका में भी काम किया। वर्ष 2018 में वह टीम के मेंटर बने और बाद में गेंदबाजी कोच की जिम्मेदारी संभाली। उनके अनुभव का फायदा टीम के गेंदबाजों को मिलता रहा। फ्रेंचाइजी के साथ उनका जुड़ाव एक दशक से अधिक समय तक बना रहा।

    पारस म्हाम्ब्रे का भी मुंबई इंडियंस के साथ लंबा जुड़ाव रहा है। उन्होंने पहली बार 2010 से 2017 तक टीम के कोचिंग सेटअप में काम किया था। इसके बाद वर्ष 2024 में वह दोबारा फ्रेंचाइजी से जुड़े। गेंदबाजी प्रतिभाओं को निखारने और युवा खिलाड़ियों को बेहतर बनाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। भारतीय क्रिकेट में भी वह कोच के रूप में काम कर चुके हैं। उनके अनुभव और टीम की कार्यप्रणाली की समझ को मुंबई इंडियंस के लिए उपयोगी माना जाता रहा है।

    वहीं, कार्ल हॉपकिंसन आईपीएल 2025 से पहले मुंबई इंडियंस के कोचिंग स्टाफ में शामिल हुए थे। उन्हें टीम के फील्डिंग विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी। इससे पहले वह इंग्लैंड की पुरुष क्रिकेट टीम के साथ भी काम कर चुके थे। उनके पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों की फील्डिंग सुधारने का अनुभव था। मुंबई इंडियंस ने उनके पेशेवर रवैये और फील्डिंग के स्तर को बेहतर बनाने में दिए गए योगदान की सराहना की है।

    तीनों कोचों की विदाई के बाद अब मुंबई इंडियंस का ध्यान आईपीएल 2027 के लिए नई रणनीति और मजबूत कोचिंग टीम तैयार करने पर होगा। आगामी सीजन में टीम का प्रदर्शन कैसा रहता है, यह काफी हद तक नए कोचिंग ढांचे और खिलाड़ियों के तालमेल पर निर्भर करेगा।

    इसके बाद 30 अक्टूबर को मुंबई इंडियंस ने नए कोचिंग स्टाफ की भी घोषणा की। कीरोन पोलार्ड मुख्य कोच की भूमिका में बने रहेंगे। रॉबिन उथप्पा को बल्लेबाजी कोच, मिचेल मैक्लेनाघन को गेंदबाजी कोच, टी. दिलीप को फील्डिंग कोच और धवल कुलकर्णी को डेवलपमेंट बॉलिंग कोच नियुक्त किया गया है। नई टीम के साथ फ्रेंचाइजी आगामी आईपीएल सीजन में बेहतर प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही है।

  • अजमतुल्लाह उमरजई ने T20 क्रिकेट में रचा इतिहास, नंबर-6 पर उतरकर ठोका 116 रन का तूफानी शतक, फुल मेंबर टीमों में ऐसा करने वाले पहले खिलाड़ी बने

    अजमतुल्लाह उमरजई ने T20 क्रिकेट में रचा इतिहास, नंबर-6 पर उतरकर ठोका 116 रन का तूफानी शतक, फुल मेंबर टीमों में ऐसा करने वाले पहले खिलाड़ी बने


    नई दिल्ली। अफगानिस्तान के स्टार ऑलराउंडर अजमतुल्लाह उमरजई ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिसने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में शानदार बल्लेबाजी करते हुए ऐतिहासिक शतक जड़ा। उनकी तूफानी पारी की बदौलत अफगानिस्तान ने न केवल मुकाबले में दमदार वापसी की बल्कि एक नया रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। उमरजई ने नंबर छह पर बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 116 रन बनाए और अपनी टीम को ऐसी स्थिति से बाहर निकाला जहां हार लगभग तय मानी जा रही थी।

    मुकाबले में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी अफगानिस्तान की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम ने महज पांच रन के स्कोर पर अपने चार अहम विकेट गंवा दिए। शुरुआती झटकों से टीम उबर भी नहीं पाई थी कि 38 रन के स्कोर तक उसके पांच बल्लेबाज पवेलियन लौट गए। लगातार गिरते विकेटों ने अफगानिस्तान की मुश्किलें बढ़ा दी थीं और ऐसा लग रहा था कि टीम बहुत कम स्कोर पर सिमट जाएगी। इसी नाजुक मोड़ पर अजमतुल्लाह उमरजई ने मोर्चा संभाला और जिम्बाब्वे के गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी शुरू कर दी।

    उमरजई ने अपनी पारी में पांच चौके और 12 गगनचुंबी छक्के लगाए। उन्होंने मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट खेलते हुए गेंदबाजों पर दबाव बनाया। उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता के साथ बेहतरीन नियंत्रण भी देखने को मिला। उन्होंने तेजी से रन बनाकर अफगानिस्तान के स्कोर को आगे बढ़ाया और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। उनकी 116 रनों की पारी के दम पर अफगानिस्तान ने निर्धारित 20 ओवर में छह विकेट के नुकसान पर 222 रन बनाए और जिम्बाब्वे के सामने 223 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा।

    इस ऐतिहासिक पारी के साथ उमरजई ने फुल मेंबर अंतरराष्ट्रीय टीमों के बीच टी20 क्रिकेट में नंबर छह या उससे नीचे बल्लेबाजी करते हुए सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर का रिकॉर्ड अपने नाम किया। इससे पहले यह रिकॉर्ड अफगानिस्तान के ही मोहम्मद नबी के नाम था जिन्होंने 2017 में आयरलैंड के खिलाफ 89 रन बनाए थे। उमरजई ने इस उपलब्धि को पीछे छोड़ते हुए 116 रन की शानदार पारी खेली। इस प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित किया कि वह केवल गेंदबाजी में ही नहीं बल्कि जरूरत पड़ने पर बल्लेबाजी में भी मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं।

    223 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम ने भी हार नहीं मानी। कप्तान सिकंदर रजा ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 56 गेंदों में 106 रन बनाए। उनकी पारी में पांच चौके और नौ छक्के शामिल रहे। रजा ने अकेले दम पर अफगानिस्तान के गेंदबाजों को चुनौती दी और टीम को जीत के करीब पहुंचाने की कोशिश की। हालांकि दूसरे छोर से उन्हें पर्याप्त सहयोग नहीं मिल सका। जिम्बाब्वे की टीम निर्धारित 20 ओवर में पांच विकेट खोकर 202 रन ही बना सकी।

    इस तरह अफगानिस्तान ने यह मुकाबला 19 रन से जीत लिया। उमरजई की ऐतिहासिक पारी टीम की जीत का सबसे बड़ा आधार बनी। इस जीत के साथ अफगानिस्तान ने मुकाबले के अलावा टी20 सीरीज भी अपने नाम कर ली। शुरुआती पांच विकेट जल्दी गंवाने के बाद जिस तरह उमरजई ने पारी को संभाला वह क्रिकेट प्रेमियों के लिए यादगार प्रदर्शन बन गया। उनका यह शतक अफगानिस्तान की टी20 क्रिकेट में बल्लेबाजी की ताकत और मुश्किल परिस्थितियों में वापसी करने की क्षमता का शानदार उदाहरण है।

  • Ind vs NZ: चौथा टी-20 आज ऑकलैंड में… टीम इंडिया यहां कभी नहीं हारी…. हर बार किया चेज

    Ind vs NZ: चौथा टी-20 आज ऑकलैंड में… टीम इंडिया यहां कभी नहीं हारी…. हर बार किया चेज


    ऑकलैंड।
    टीम इंड‍िया (Team India) न्यूजीलैंड (New Zealand) के ख‍िलाफ टी20 सीरीज ( T20 series) 3-0 से जीत चुकी है, अब टी20 सीरीज का कारवां ऑकलैंड (Auckland) के ईडन पार्क पहुंच चुका है.इसी ऑकलैंड के मैदान में दोनों ही टीमों के बीच चौथा टी20 (Fourth T20) होना है, लेकिन यहां भारतीय टीम ने कभी भी हार नहीं देखी है और खास बात यह है कि हर बार टीम इंड‍िया यहां की चेजमास्टर है, यानी टीम ने हर मैच चेज करते हुए जीता है।

    वहीं अगर यह कहा जाए कि न्यूजीलैंड का यह छोटा सा ग्राउंड भारत के लिए जैसे अपना घर बन गया है. तो यह बात अत‍िरेक नहीं होगी।


    ऑकलैंड में बदलेगी टीम इंडिया की प्लेइंग XI? गंभीर के सामने दो रास्ते

    यहां टीम इंडिया ने अब तक कुल तीन टी20 इंटरनेशनल खेले हैं और तीनों के तीनों जीते हैं. यहां भारतीय टीम को एक भी हार नहीं म‍िली है, टीम इंड‍िया का र‍िकॉर्ड यहां 100 प्रतिशत जीत का है. मुकाबला शुक्रवार (30 अक्टूबर) को है।


    भारत ने कब-कब खेले हैं ऑकलैंड में टी20 मैच

    1- दोनों ही टीमों के बीच इस मैदान पर पहला टी20 मैच 8 फरवरी 2019 को खेला गया. न्यूजीलैंड ने 158 रन बनाए. उस मुकाबले में ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ क्रुणाल पंड्या थे, उन्होंने 4 ओवर में 28 रन देकर 3 विकेट झटके थे. भारत ने 18.5 ओवर में 7 विकेट से जीत हासिल कर ली. भारतीय टीम के रनचेज में रोहित शर्मा ने 50 तो श‍िखर धवन ने 30 रन बनाए. वहीं ऋषभ पंत तब तीसरे नंबर पर खेलने उतरे थे और 28 गेंदों पर 40 रनों की नाबाद पारी खेली थी, महेंद्र स‍िंह धोनी भी 20 रन बनाकर नाबाद लौटे थे।

    2- इस मैदान पर दोनों ही टीमों के बीच दूसरा टी20 24 जनवरी 2020 को हुआ. मेजबान टीम 203 तक पहुंची. भारत ने 19 ओवर में 204 रन बनाकर 6 विकेट से 6 गेंद शेष रहते हुए जीत दर्ज की. तब उस जीत के स्टार ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ श्रेयस अय्यर थे, जो इस समय मौजूदा टीम के कप्तान हैं. ऐसे में यह मैदान उनके लिए यादगार है।

    3- ईडन पार्क की धरती पर दोनों ही देशों के बीच तीसरा टी20 26 जनवरी 2020 को हुआ. न्यूजीलैंड 132 पर सिमट गई. भारत ने 17.3 ओवर में 7 विकेट से मैच अपने नाम कर लिया. ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ केएल राहुल ने उस मुकाबले में 50 गेंदों पर 57 रनों की पारी खेली थी. वहीं श्रेयस अय्यर ने तब भी इस मैदान पर 33 गेंदों पर 44 रन बनाए थे।

    यानी कुल म‍िलाकर भारतीय टीम ने यहां तीनों मैच दूसरी पारी में हैं और चेज करते हुए जीते हैं.अब शुक्रवार (30 अक्टूबर) को यहीं चौथा टी20 है. सीरीज में पहले तीन मैच जीतकर टीम इंडिया 3-0 की बढ़त बना चुकी है।

    श्रेयस अय्यर की कप्तानी में टीम फॉर्म में है. अब ईडन पार्क पहले का र‍िकॉर्ड न्यूजीलैंड टीम के लिए डरावना रहा है, ऐसे में उस पर एक्स्ट्रा प्रेशर वाला रहेगा. सवाल यह है कि पहले तीन मैचों में हार का सिलसिला कीवी टीम तोड़ पाएगी या नहीं, क्योंकि इतिहास साफ कहता है ईडन पार्क पर टीम इंडिया का राज चलता है।

  • टीम इंडिया के सामने अजीब उलझन….. जगह तीन और दावेदार चार….

    टीम इंडिया के सामने अजीब उलझन….. जगह तीन और दावेदार चार….


    नई दिल्ली।
    टीम इंडिया (Team India) के सामने अजीब उलझन है. जो बल्लेबाज (Batsman) रन बना रहे हैं, उन्हें बाहर बैठाना आसान नहीं और ईशान किशन (Ishan Kishan) की वापसी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. ऐसे में सवाल सिर्फ प्लेइंग-11 का नहीं, बल्लेबाजी क्रम और रोटेशन पॉलिसी का भी है।

    टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 में ऐसा तूफान मचाया कि विरोधी गेंदबाजों को संभलने का मौका तक नहीं मिला. अभिषेक शर्मा (Abhishek Sharma) ने 38 गेंदों में 113 रन ठोक दिए, वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) ने ओपनिंग में उतरकर अपने तेवर दिखाए और भारत ने 199 रनों का लक्ष्य महज 13.2 ओवरों में हासिल कर लिया. इस धमाकेदार जीत के साथ भारत ने पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त भी बना लीय़

    लेकिन इस जीत के बीच टीम इंडिया के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा हो गया है, जिसका जवाब ढूंढना आसान नहीं होगा. अभिषेक शर्मा का बल्ला आग उगल रहा है, वैभव सूर्यवंशी ने ओपनिंग में अपना दावा मजबूत किया है और संजू सैमसन (Sanju Samson) भी पहले से रन बनाकर आ रहे हैं. अब ईशान किशन फिट होकर टीम में वापसी करते हैं तो आखिर किसका पत्ता कटेगा?


    शतक जड़ने वाले को बाहर बैठाएंगे या तूफानी ओपनर को?

    ईशान किशन की वापसी का इंतजार खत्म होते ही भारतीय टीम के सामने चयन की पहेली खड़ी हो सकती है. एक तरफ अभिषेक हैं, जो अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से मैच का रुख पलटने की ताकत रखते हैं. दूसरी तरफ वैभव हैं, जिन्हें ओपनिंग में उतारने का फैसला तीसरे टी20 में देखने को मिला. वहीं संजू सैमसन भी इस समीकरण के अहम खिलाड़ी हैं.

    अभिषेक को बाहर बैठाने का फैसला उनके हालिया प्रदर्शन के सामने मुश्किल होगा. वैभव को हटाने का मतलब होगा एक ऐसे युवा बल्लेबाज को उसकी पसंदीदा पोजिशन पर लगातार मौके देने की योजना पर सवाल उठना. संजू को बाहर करना भी आसान विकल्प नहीं है, खासकर तब जब वह अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए रन बना रहे हों.

    और ईशान को वापस लाने का सवाल भी उतना ही अहम है. जब कोई खिलाड़ी फिट होकर उपलब्ध होता है, तो टीम मैनेजमेंट को उसके चयन और बाकी खिलाड़ियों की भूमिकाओं पर फैसला करना ही पड़ता है. ऐसे में असली चुनौती सिर्फ किसी एक नाम को चुनना नहीं, बल्कि ऐसा संयोजन तैयार करना है जिसमें खिलाड़ियों की खूबियों का सही इस्तेमाल हो सके.


    वैभव ओपनिंग करेंगे तो संजू का क्या होगा?

    तीसरे टी20 में ईशान की गैरमौजूदगी के बीच वैभव सूर्यवंशी को ओपनिंग का मौका मिला. इससे बल्लेबाजी क्रम को लेकर एक नई चर्चा शुरू हो गई. वैभव की सबसे बड़ी ताकत पारी की शुरुआत में गेंदबाजों पर हमला करना है. उन्हें तीसरे नंबर पर उतारने के प्रयोग पर पहले भी सवाल उठे हैं.

    लेकिन वैभव को ओपनिंग में खिलाने का मतलब यह भी है कि टीम को बाकी बल्लेबाजों के क्रम पर विचार करना होगा. न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 में संजू सैमसन तीसरे नंबर पर उतरे. अब अगर वैभव को ओपनिंग में बनाए रखने की योजना है, तो संजू को अपनी भूमिका के हिसाब से ढलना पड़ सकता है.

    यहीं से सवाल और पेचीदा हो जाता है. क्या संजू को वैभव के लिए अपनी पसंदीदा पोजिशन छोड़नी होगी? क्या अभिषेक और वैभव की जोड़ी को बनाए रखने के लिए टीम मैनेजमेंट बाकी बल्लेबाजी क्रम में बदलाव करेगा? और ईशान की वापसी के बाद क्या संजू के लिए प्लेइंग-11 में जगह बनाना और मुश्किल हो जाएगा?

    इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल भारतीय टीम की रोटेशन पॉलिसी को लेकर है. अगस्त से दिसंबर के बीच भारत के कार्यक्रम में अफगानिस्तान के खिलाफ 3, वेस्टइंडीज के खिलाफ 5, न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 और श्रीलंका के खिलाफ 3 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले शामिल हैं. यानी कुल 16 मैचों के इस कार्यक्रम में खिलाड़ियों को अलग-अलग संयोजनों में आजमाने का अवसर था।

    ऐसे में एक विकल्प यह हो सकता था कि टीम मैनेजमेंट पहले से तय करता कि किस खिलाड़ी को कितने मैचों में मौका देना है, किसे आराम दिया जाएगा और किसकी भूमिका क्या होगी. अगर खिलाड़ियों को पहले ही स्पष्ट कर दिया जाता कि उन्हें चार या पांच मैचों के बाद आराम मिल सकता है, तो किसी खिलाड़ी को बाहर बैठाने का फैसला केवल उसके प्रदर्शन से जोड़कर नहीं देखा जाता।

  • भारत से लगातार तीन हार के बाद न्यूजीलैंड को बड़ा झटका, चोट के कारण टी20 सीरीज से बाहर हुए लॉकी फर्ग्यूसन

    भारत से लगातार तीन हार के बाद न्यूजीलैंड को बड़ा झटका, चोट के कारण टी20 सीरीज से बाहर हुए लॉकी फर्ग्यूसन

    नई दिल्ली ।भारत के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में लगातार तीन मुकाबले गंवाने के बाद न्यूजीलैंड की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। टीम के तेज गेंदबाज लॉकी फर्ग्यूसन चोट के कारण सीरीज के बाकी मुकाबलों में नहीं खेल पाएंगे। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने 29 अक्टूबर को इसकी पुष्टि की। फर्ग्यूसन को दूसरे टी20 मुकाबले के दौरान दाएं पैर की पिंडली में दर्द हुआ था। जांच के बाद उनकी मांसपेशियों में मामूली खिंचाव का पता चला है।

    फर्ग्यूसन की चोट ऐसे समय में सामने आई है, जब न्यूजीलैंड की टीम सीरीज में वापसी की कोशिश कर रही है। भारत शुरुआती तीनों मुकाबले जीतकर सीरीज अपने नाम कर चुका है। ऐसे में मेजबान टीम के सामने अगले मैचों में अपना प्रदर्शन सुधारने की चुनौती है। दूसरी ओर, भारतीय टीम की नजर जीत का सिलसिला जारी रखने और सीरीज में क्लीन स्वीप की दिशा में आगे बढ़ने पर होगी।

    फर्ग्यूसन को पूरी तरह ठीक होने में करीब एक सप्ताह या उससे अधिक समय लग सकता है। ऐसे में उनका मुख्य लक्ष्य आगामी वनडे सीरीज से पहले फिटनेस हासिल करना है। उनकी अनुपस्थिति को देखते हुए न्यूजीलैंड ने तेज गेंदबाज मैट फिशर को टीम में शामिल किया है। फिशर अब सीरीज के बाकी दो टी20 मुकाबलों के लिए उपलब्ध रहेंगे।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच चौथा टी20 मुकाबला शुक्रवार, 30 अक्टूबर को ऑकलैंड के ईडन पार्क में खेला जाएगा। लगातार तीन हार के बाद न्यूजीलैंड के लिए यह मैच अपनी रणनीति और प्रदर्शन में सुधार करने का अवसर होगा। वहीं, भारतीय टीम जीत की लय बरकरार रखते हुए सीरीज के अंतिम चरण में भी अपना दबदबा कायम रखना चाहेगी।

    न्यूजीलैंड को तेज गेंदबाज मैट हेनरी की चोट को लेकर भी सतर्क रहना होगा। दूसरे टी20 मुकाबले के दौरान हेनरी की दाएं पैर की जांघ की मांसपेशी में चोट लगी थी। उनके ठीक होने में एक से दो सप्ताह लगने का अनुमान है। हालांकि, पहले से निर्धारित कार्यभार प्रबंधन योजना के तहत वह टी20 सीरीज के बाकी मुकाबलों में खेलने वाले नहीं थे। टीम को उम्मीद है कि हेनरी वनडे सीरीज तक फिट होकर उपलब्ध हो सकते हैं।

    मुख्य कोच रॉब वाल्टर ने दोनों तेज गेंदबाजों के चोटिल होने पर निराशा जताई। उन्होंने बताया कि फर्ग्यूसन ईडन पार्क में घरेलू दर्शकों के सामने खेलने को लेकर काफी उत्साहित थे। चोट के कारण अब उनका ध्यान वनडे सीरीज के लिए समय पर फिट होने पर केंद्रित रहेगा।

    इस बीच, तेज गेंदबाज काइल जेमिसन कार्यभार प्रबंधन के तहत वेलिंगटन में रुकेंगे। वह 31 अक्टूबर को फोर्ड ट्रॉफी में कैंटरबरी की ओर से खेल सकते हैं। इसके बाद दो नवंबर को न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय टीम से जुड़ने की योजना है। टीम प्रबंधन वनडे सीरीज से पहले अपने प्रमुख तेज गेंदबाजों की फिटनेस पर नजर बनाए हुए है।

    न्यूजीलैंड की टीम में कप्तान मिचेल सेंटनर के अलावा फिन एलन, माइकल ब्रेसवेल, मार्क चैपमैन, जोश क्लार्कसन, डेवोन कॉन्वे, जैकब डफी, मैट फिशर, जकारी फाउलकेस, बेवोन जैकब्स, एडम मिल्ने, डेरिल मिचेल, ग्लेन फिलिप्स, टिम सीफर्ट, नाथन स्मिथ और ब्लेयर टिकनर शामिल हैं।

  • WPL मिनी ऑक्शन में आज खिलाड़ियों पर बरसेगा पैसा, यूपी वॉरियर्स के पास ₹3.75 करोड़; जानें लाइव कहां देखें

    WPL मिनी ऑक्शन में आज खिलाड़ियों पर बरसेगा पैसा, यूपी वॉरियर्स के पास ₹3.75 करोड़; जानें लाइव कहां देखें


    नई दिल्ली। महिला प्रीमियर लीग यानी WPL 2027 के लिए खिलाड़ियों की मिनी नीलामी आज 28 अक्टूबर को कोच्चि में आयोजित होने जा रही है। इस नीलामी में पांचों फ्रेंचाइजी अपनी टीमों में खाली जगह भरने के लिए खिलाड़ियों पर बोली लगाएंगी। कुल 150 खिलाड़ियों ने नीलामी के लिए पंजीकरण कराया है। इनमें 28 विदेशी खिलाड़ी और एसोसिएट देशों के छह खिलाड़ी भी शामिल हैं। नीलामी में भारतीय और विदेशी क्रिकेटरों के लिए टीमों के बीच मुकाबला देखने को मिल सकता है। ऐसे में क्रिकेट प्रशंसकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कौन सी टीम किन खिलाड़ियों को अपने साथ जोड़ती है।

    शाम 5:30 बजे से शुरू होगी नीलामी

    WPL 2027 की मिनी नीलामी भारतीय समयानुसार शाम 5:30 बजे से शुरू होगी। इसका आयोजन कोच्चि में किया जाएगा। दर्शक नीलामी का सीधा प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर देख सकेंगे। वहीं ऑनलाइन देखने वाले दर्शकों के लिए जियोस्टार एप पर भी प्रसारण उपलब्ध रहेगा। इस नीलामी में सभी पांच टीमों को मिलाकर कुल 27 खाली स्लॉट भरने हैं। इनमें विदेशी खिलाड़ियों के लिए सात जगह शामिल हैं। टीमों के पास कुल 8.15 करोड़ रुपये का बजट बचा हुआ है।

    यूपी वॉरियर्स के पास सबसे बड़ा बजट

    नीलामी में यूपी वॉरियर्स सबसे मजबूत आर्थिक स्थिति के साथ उतर रही है। टीम के पास खर्च करने के लिए 3.75 करोड़ रुपये बचे हैं और उसे कुल आठ खिलाड़ियों की जगह भरनी है। इनमें तीन विदेशी खिलाड़ियों के स्लॉट शामिल हैं। टीम ने पहले ही मेग लैनिंग फोबे लिचफील्ड सोफी एक्लेस्टोन और दीप्ति शर्मा जैसे खिलाड़ियों को अपने साथ बनाए रखा है। अब उसकी कोशिश बाकी जगहों के लिए उपयोगी खिलाड़ियों को चुनने की होगी।

    मुंबई इंडियंस के सामने सीमित बजट की चुनौती

    दो बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस के पास सबसे कम रकम बची है। टीम के पर्स में 90 लाख रुपये हैं और उसे छह खिलाड़ियों के स्लॉट भरने हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उसके पास विदेशी खिलाड़ियों के लिए कोई स्लॉट शेष नहीं है। ऐसे में मुंबई को सीमित बजट में भारतीय खिलाड़ियों का चयन करना होगा। टीम के पास पहले से हरमनप्रीत कौर नैट साइवर-ब्रंट हेली मैथ्यूज और अमेलिया केर जैसे प्रमुख खिलाड़ी हैं।

    गुजरात दिल्ली और बेंगलुरु की स्थिति

    गुजरात जायंट्स के पास 1.25 करोड़ रुपये शेष हैं और उसे तीन खिलाड़ियों का चयन करना है। इनमें एक विदेशी खिलाड़ी की जगह शामिल है। टीम ने एश्ले गार्डनर बेथ मूनी और सोफी डिवाइन जैसे खिलाड़ियों को बरकरार रखा है।

    दिल्ली कैपिटल्स के पास 1.10 करोड़ रुपये हैं और उसे पांच स्लॉट भरने हैं। इनमें एक विदेशी खिलाड़ी की जगह शामिल है। टीम के पास जेमिमा रोड्रिग्स शेफाली वर्मा और एनाबेल सदरलैंड जैसे खिलाड़ी हैं।

    रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के पास 1.15 करोड़ रुपये बचे हैं। टीम को पांच खिलाड़ियों की जरूरत है जिनमें दो विदेशी खिलाड़ी शामिल हो सकते हैं। स्मृति मंधाना ऋचा घोष और एलिस पेरी जैसी खिलाड़ियों के साथ टीम अपनी बाकी जगहों को मजबूत करने की कोशिश करेगी।

    किन खिलाड़ियों पर रहेगी नजर

    नीलामी में स्नेह राणा डिएंड्रा डॉटिन चमारी अथापट्टू सोफिया डंकले सोफी मोलिन्यूक्स और जेस जोनासन जैसे नामों पर नजर रहेगी। खिलाड़ियों का चयन करते समय टीमें अपने बजट के साथ जरूरत और संतुलन का भी ध्यान रखेंगी। WPL में प्रत्येक टीम में अधिकतम 18 खिलाड़ी हो सकते हैं जिनमें छह विदेशी खिलाड़ी शामिल किए जा सकते हैं। अब नीलामी के दौरान यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सी फ्रेंचाइजी अपने उपलब्ध बजट का बेहतर इस्तेमाल करती है और किन खिलाड़ियों को बड़ी बोली मिलती है।

  • चार साल बाद टीम इंडिया में लौटे भुवनेश्वर कुमार का फीका प्रदर्शन, तीन मैचों में 139 रन लुटाए और मिला सिर्फ एक विकेट

    चार साल बाद टीम इंडिया में लौटे भुवनेश्वर कुमार का फीका प्रदर्शन, तीन मैचों में 139 रन लुटाए और मिला सिर्फ एक विकेट


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में चार साल बाद वापसी अब तक उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही है। न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली जा रही पांच मैचों की टी20 सीरीज में मेरठ के 36 वर्षीय गेंदबाज को शुरुआती तीन मुकाबलों में अपनी पुरानी लय हासिल करने के लिए संघर्ष करना पड़ा है। अपनी स्विंग गेंदबाजी के दम पर दुनिया के बड़े बल्लेबाजों को परेशान करने वाले भुवनेश्वर इस बार रन रोकने और विकेट निकालने में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सके। तीन मैचों में उन्होंने कुल 12 ओवर गेंदबाजी करते हुए 139 रन खर्च किए और उनके खाते में केवल एक विकेट आया। ऐसे प्रदर्शन के बाद अब अगले मुकाबलों में उनकी गेंदबाजी पर सभी की निगाहें रहेंगी।

    न्यूजीलैंड के खिलाफ मौजूदा सीरीज में भारतीय टीम का प्रदर्शन शानदार रहा है। बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाकर विरोधी टीम पर दबाव बनाया है और गेंदबाजों ने भी कई मौकों पर अच्छा प्रदर्शन किया है। हालांकि भुवनेश्वर कुमार के लिए शुरुआती मुकाबले चुनौतीपूर्ण साबित हुए। पहले मैच में उन्होंने चार ओवर में 49 रन दिए जबकि दूसरे मुकाबले में उनके खाते से 50 रन खर्च हुए। तीसरे टी20 में भी उन्होंने चार ओवर में 40 रन दिए। हालांकि पिछले दो मैचों की तुलना में उनके प्रदर्शन में कुछ सुधार दिखाई दिया लेकिन उन्हें कोई विकेट नहीं मिल सका। तीन मैचों में उनकी इकोनॉमी 11.58 रन प्रति ओवर रही है जो टी20 क्रिकेट के लिहाज से काफी महंगी मानी जाती है।

    भुवनेश्वर कुमार को भारतीय क्रिकेट में उनकी शानदार स्विंग गेंदबाजी और शुरुआती ओवरों में विकेट निकालने की क्षमता के लिए जाना जाता है। नई गेंद से दोनों तरफ स्विंग कराने की उनकी कला ने उन्हें लंबे समय तक टीम इंडिया का अहम गेंदबाज बनाए रखा। लेकिन लंबे अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। मैच की परिस्थितियों के अनुसार गेंदबाजी करना और दबाव के बीच सही लाइन और लेंथ बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में भुवनेश्वर को भी अपनी पुरानी लय पाने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है।

    टीम प्रबंधन को अनुभव पर भरोसा

    शुरुआती तीन मुकाबलों में महंगे साबित होने के बावजूद टीम प्रबंधन और मुख्य कोच ने भुवनेश्वर कुमार के अनुभव पर भरोसा जताया है। टीम का मानना है कि लंबे समय बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के कारण खिलाड़ी को लय में लौटने में समय लग सकता है। मेरठ के गांधी बाग में क्रिकेट कोच तनकीब अहमद ने भी माना कि लंबे अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलने पर खिलाड़ी के ऊपर दबाव रहता है। हर खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करना चाहता है और भुवनेश्वर भी आने वाले मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। कोच अतरह अली के मुताबिक भी वापसी के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव रहता है और खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करता है।

    अगले मुकाबलों में लय हासिल करने की चुनौती

    अब सीरीज के अगले मैच भुवनेश्वर कुमार के लिए काफी अहम होंगे। उन्हें अपनी गेंदबाजी में सटीकता लाने के साथ विकेट निकालने की क्षमता भी दिखानी होगी। शुरुआती ओवरों में रन रोकना और बल्लेबाजों को गलतियां करने के लिए मजबूर करना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। यदि वह अपनी स्विंग और अनुभव का सही इस्तेमाल कर पाए तो टीम इंडिया के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। फिलहाल उनके प्रदर्शन पर सवाल जरूर उठ रहे हैं लेकिन सीरीज के बाकी मुकाबलों में वापसी करने का अवसर उनके पास है। अब देखना होगा कि अनुभवी भुवी अपने प्रदर्शन में कितना सुधार कर पाते हैं और टीम प्रबंधन के भरोसे पर किस तरह खरे उतरते हैं।

  • अभिषेक शर्मा के बल्ले से निकला रनों का तूफान, न्यूजीलैंड को रौंदने के बाद युवराज सिंह को लेकर कही दिलचस्प बात

    अभिषेक शर्मा के बल्ले से निकला रनों का तूफान, न्यूजीलैंड को रौंदने के बाद युवराज सिंह को लेकर कही दिलचस्प बात


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के युवा सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में ऐसी विस्फोटक पारी खेली कि विरोधी टीम के गेंदबाजों के पास कोई जवाब नहीं बचा। अभिषेक ने महज 35 गेंदों में शतक पूरा किया और 38 गेंदों पर 113 रन बनाकर भारतीय टीम को शानदार जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। भारत ने इस मुकाबले में न्यूजीलैंड को छह विकेट से हराकर पांच मैचों की टी20 सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। हालांकि इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद अभिषेक की चर्चा उनकी बल्लेबाजी के साथ साथ अपने मेंटर युवराज सिंह को दिए गए मजेदार जवाब को लेकर भी हो रही है।

    मैच के बाद बातचीत के दौरान अभिषेक से युवराज सिंह की उस टिप्पणी के बारे में पूछा गया जिसमें उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि अभिषेक अभी तक 12 गेंदों में अर्धशतक बनाने का कमाल नहीं कर पाए हैं। इस पर अभिषेक ने हंसते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि उस समय युवराज कौन सा क्रिकेट खेल रहे थे लेकिन 12 गेंदों में 50 रन बनाना बिल्कुल आसान काम नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई बल्लेबाज केवल मैदान पर उतरकर इतनी कम गेंदों में अर्धशतक नहीं बना सकता। इसके लिए परिस्थितियों का साथ और असाधारण प्रदर्शन दोनों जरूरी होते हैं। अभिषेक का यह जवाब सुनकर क्रिकेट प्रशंसकों को उनके और युवराज के बीच गुरु शिष्य के रिश्ते की मजेदार झलक देखने को मिली।

    अभिषेक ने अपनी शानदार पारी के दौरान 11 छक्के और नौ चौके लगाए। उन्होंने केवल 15 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया था और इसके बाद भी उनकी आक्रामक बल्लेबाजी जारी रही। दूसरी ओर युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने भी न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर जमकर हमला बोला। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए महज 7.1 ओवर में 133 रन जोड़ दिए। वैभव ने 19 गेंदों पर 45 रन बनाए और उनकी तेज शुरुआत ने भारतीय टीम के लिए लक्ष्य का पीछा बेहद आसान कर दिया।

    अभिषेक ने बताया कि इस मुकाबले से पहले उन्होंने पिच और मैदान की परिस्थितियों को समझने पर खास ध्यान दिया था। फील्डिंग के दौरान उन्होंने पिच पर अतिरिक्त उछाल को महसूस किया और इसके बाद वैभव के साथ मिलकर पावरप्ले में आक्रामक बल्लेबाजी करने की रणनीति बनाई। उन्होंने कहा कि दोनों का उद्देश्य व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाना नहीं बल्कि टीम को जीत दिलाने के लिए तेजी से रन बनाना था। अभिषेक ने अपनी सफलता का श्रेय कोचिंग स्टाफ और अभ्यास सत्रों को भी दिया। उनके मुताबिक मैच से पहले साइडआर्म गेंदों पर अभ्यास करने से उन्हें तेज गेंदों के खिलाफ बेहतर तैयारी करने में मदद मिली।

    मुकाबले में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए डेरिल मिचेल की नाबाद 89 रन की पारी की बदौलत 20 ओवर में तीन विकेट पर 198 रन बनाए थे। फिन एलन ने 40 रन और बेवन जैकब्स ने नाबाद 39 रन का योगदान दिया। भारतीय टीम ने जवाब में आक्रामक शुरुआत की और शुरुआती ओवरों में ही मैच पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। भारत ने 13.2 ओवर में चार विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया और 40 गेंद शेष रहते मुकाबला अपने नाम कर लिया।

    इस जीत के साथ भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड में लगातार तीसरी टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज जीतने का सिलसिला भी बरकरार रखा। अभिषेक का तूफानी शतक और वैभव के साथ उनकी साझेदारी इस मुकाबले की सबसे बड़ी खासियत रही। वहीं युवराज सिंह की टिप्पणी पर उनका मजेदार जवाब भी चर्चा का विषय बन गया। मैदान पर बल्ले से धमाल मचाने वाले अभिषेक ने यह साफ कर दिया कि उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं बल्कि टीम इंडिया की जीत है।

  • अभिषेक शर्मा का बल्ला बना आग का गोला, 11 छक्कों से मचाई तबाही, भारत ने रिकॉर्डतोड़ जीत के साथ सीरीज पर जमाया कब्जा

    अभिषेक शर्मा का बल्ला बना आग का गोला, 11 छक्कों से मचाई तबाही, भारत ने रिकॉर्डतोड़ जीत के साथ सीरीज पर जमाया कब्जा


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए छह विकेट से शानदार जीत दर्ज की। इस जीत के साथ टीम इंडिया ने पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। मुकाबले के सबसे बड़े हीरो अभिषेक शर्मा रहे जिन्होंने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से न्यूजीलैंड के गेंदबाजों को पूरी तरह बेबस कर दिया। भारत ने 199 रन के लक्ष्य को महज 13.2 ओवर में चार विकेट खोकर हासिल कर लिया। भारतीय बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और मैदान के चारों ओर चौकों और छक्कों की बरसात करते हुए मुकाबले को एकतरफा बना दिया।

    न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 20 ओवर में तीन विकेट के नुकसान पर 198 रन बनाए। टीम की ओर से डेरिल मिचेल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 88 रन की पारी खेली और भारतीय गेंदबाजों के सामने चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। हालांकि न्यूजीलैंड की टीम को उम्मीद रही होगी कि उसके गेंदबाज इस स्कोर का बचाव कर सकेंगे लेकिन भारतीय सलामी बल्लेबाजों ने मैदान पर उतरते ही मैच की तस्वीर बदल दी। लक्ष्य का पीछा करने आए अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी ने पहले ओवर से ही आक्रामक रुख अपनाया और न्यूजीलैंड के गेंदबाजी आक्रमण पर दबाव बना दिया।

    अभिषेक शर्मा ने केवल 38 गेंदों में 113 रन की विस्फोटक पारी खेली। उनकी इस शानदार पारी में नौ चौके और 11 छक्के शामिल रहे। उन्होंने जिस अंदाज में गेंदबाजों पर हमला बोला उससे न्यूजीलैंड की टीम को वापसी का मौका ही नहीं मिला। अभिषेक ने मैदान के चारों ओर बड़े शॉट लगाए और रन गति को लगातार ऊंचा बनाए रखा। दूसरे छोर पर वैभव सूर्यवंशी ने भी उनका बेहतरीन साथ दिया। वैभव ने महज 19 गेंदों में 45 रन बनाए जिसमें चार चौके और चार छक्के शामिल थे। दोनों बल्लेबाजों के बीच पहले विकेट के लिए 133 रन की तेज साझेदारी हुई जिसने भारतीय जीत की मजबूत नींव रख दी।

    भारतीय पारी की शुरुआत भी रिकॉर्डतोड़ रही। न्यूजीलैंड की ओर से पहला ओवर डालने आए जैकब डफी के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों ने 26 रन बटोरे। इसमें अतिरिक्त रन भी शामिल थे। इसके बाद भारतीय टीम ने केवल 2.2 ओवर में 50 रन पूरे कर लिए। शुरुआती छह ओवर में भारत ने बिना विकेट गंवाए 118 रन बनाकर मुकाबले पर पूरी तरह पकड़ बना ली। इस दौरान भारतीय बल्लेबाजों की आक्रामकता ने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों को रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया।

    अभिषेक के आउट होने के बाद भी भारतीय टीम की रन गति पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। वैभव सूर्यवंशी के आउट होने के बाद संजू सैमसन ने 18 रन बनाए जबकि कप्तान श्रेयस अय्यर पांच रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बावजूद भारतीय बल्लेबाजों ने लक्ष्य का पीछा तेजी से जारी रखा और 13.2 ओवर में ही जीत हासिल कर ली।

    इस जीत के साथ भारत ने सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त बनाकर अपना दबदबा साबित किया। अभिषेक शर्मा का तूफानी शतक और वैभव सूर्यवंशी की आक्रामक बल्लेबाजी मुकाबले की सबसे बड़ी खासियत रही। भारतीय टीम ने जिस अंदाज में 199 रन का लक्ष्य हासिल किया उससे उसकी बल्लेबाजी की ताकत साफ नजर आई। अब टीम इंडिया की नजर सीरीज के बाकी मुकाबलों में भी इसी लय को बरकरार रखने पर होगी।

  • हैरी केन ने रचा फुटबॉल इतिहास, एम्बाप्पे और यामल को पछाड़कर पहली बार जीता बैलन डी’ओर का खिताब

    हैरी केन ने रचा फुटबॉल इतिहास, एम्बाप्पे और यामल को पछाड़कर पहली बार जीता बैलन डी’ओर का खिताब

    नई दिल्ली। इंग्लैंड फुटबॉल टीम के कप्तान हैरी केन को 2026 के बैलन डी’ओर पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की खबर ने फुटबॉल जगत में हलचल पैदा कर दी है। खबर के मुताबिक केन ने फ्रांस के स्टार खिलाड़ी काइलियन एम्बाप्पे और स्पेन के युवा फुटबॉलर लामिन यामल को पीछे छोड़कर यह प्रतिष्ठित सम्मान अपने नाम किया है। यदि इसकी आधिकारिक पुष्टि होती है तो यह केन के करियर की सबसे बड़ी व्यक्तिगत उपलब्धियों में से एक होगी। गोल करने की शानदार क्षमता मैदान पर सूझबूझ और लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर उन्होंने दुनिया के शीर्ष फुटबॉल खिलाड़ियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई है।

    लंदन के पैलेडियम थिएटर में आयोजित समारोह में केन को इस सम्मान से नवाजे जाने का दावा किया गया है। अपने नाम की घोषणा के बाद उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए साथी खिलाड़ियों और उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने उनके करियर में योगदान दिया। केन ने कहा कि वह इस सम्मान को पाकर अपनी भावनाएं शब्दों में व्यक्त नहीं कर पा रहे हैं और लंदन में यह उपलब्धि हासिल करना उनके लिए इसे और भी खास बनाता है। अपने देश में इतना बड़ा पुरस्कार हासिल करना किसी भी खिलाड़ी के लिए गौरवपूर्ण क्षण हो सकता है।

    हैरी केन का करियर लंबे समय से निरंतरता और मेहनत का उदाहरण रहा है। क्लब स्तर पर वह जर्मनी के दिग्गज क्लब बायर्न म्यूनिख के लिए खेलते हैं जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंग्लैंड की कप्तानी करते हैं। उनकी पहचान एक ऐसे स्ट्राइकर के रूप में है जो गोल करने के साथ अपने साथियों के लिए मौके भी तैयार कर सकता है। खेल को समझने की क्षमता सटीक पास और दबाव की स्थिति में सही निर्णय लेने का कौशल उन्हें दूसरे खिलाड़ियों से अलग बनाता है।

    खबर में दावा किया गया है कि केन ने पिछले सीजन में शानदार प्रदर्शन करते हुए यूरोपियन गोल्डन बूट जीता और बायर्न म्यूनिख को बुंडेसलीगा का खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इंग्लैंड की टीम को विश्व कप के सेमीफाइनल तक पहुंचाने में भी उनके योगदान का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में उनके गोलों की संख्या 125 मैचों में 91 बताई गई है। क्लब और देश के लिए लगातार गोल करने की उनकी क्षमता ने उन्हें दुनिया के सबसे प्रभावशाली स्ट्राइकरों की कतार में खड़ा किया है।

    अगस्त 2025 से क्लब और देश के लिए 89 गोल करने का दावा भी उनके शानदार प्रदर्शन को रेखांकित करता है। बायर्न म्यूनिख ने उन्हें तीन साल पहले लगभग 100 मिलियन यूरो की शुरुआती फीस पर टीम में शामिल किया था। उस समय उनकी उम्र 30 वर्ष थी और यह सौदा क्लब की सामान्य भर्ती रणनीति से अलग माना गया था। हालांकि केन ने अपने खेल से साबित किया कि अनुभव और फिटनेस के साथ एक खिलाड़ी लंबे समय तक उच्च स्तर पर प्रदर्शन कर सकता है।

    बैलन डी’ओर फुटबॉल के सबसे प्रतिष्ठित व्यक्तिगत पुरस्कारों में गिना जाता है। इसे जीतना किसी खिलाड़ी के लिए उसके पूरे करियर की बड़ी उपलब्धि माना जाता है। हालांकि इस खबर में दिए गए परिणामों और आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। यदि केन की जीत की पुष्टि होती है तो यह उनके करियर में एक ऐतिहासिक पड़ाव होगा और इंग्लैंड के फुटबॉल इतिहास में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज किया जाएगा।