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  • महज 15 साल की उम्र में कप्तानी का मौका ईशान किशन के चोटिल होते ही वैभव सूर्यवंशी बने ईस्ट जोन के कार्यवाहक कप्तान

    महज 15 साल की उम्र में कप्तानी का मौका ईशान किशन के चोटिल होते ही वैभव सूर्यवंशी बने ईस्ट जोन के कार्यवाहक कप्तान


    नई दिल्ली। दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल मुकाबले में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के लिए रविवार का दिन बेहद खास रहा। ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन के बीच खेले जा रहे मुकाबले में सूर्यवंशी को पहली बार सीनियर फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कप्तानी की जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला। ईस्ट जोन के नियमित कप्तान ईशान किशन चोटिल होने के कारण मैदान से बाहर चले गए जिसके बाद टीम के उपकप्तान वैभव सूर्यवंशी ने कुछ समय के लिए कार्यवाहक कप्तान की भूमिका निभाई। इतनी कम उम्र में सीनियर क्रिकेट में कप्तानी की जिम्मेदारी मिलना सूर्यवंशी के लगातार बढ़ते कद को दर्शाता है।

    दरअसल सेंट्रल जोन की बल्लेबाजी के दौरान विकेटकीपिंग कर रहे ईशान किशन के दाहिने अंगूठे में चोट लग गई। चोट के कारण उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा। इसके बाद विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी कुमार कुशाग्र ने संभाली जबकि ईस्ट जोन के उपकप्तान वैभव सूर्यवंशी को टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी दी गई। यह सूर्यवंशी का सीनियर फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कप्तानी का पहला अनुभव रहा। इससे पहले वह अपनी बल्लेबाजी और कभी कभी गेंदबाजी को लेकर सुर्खियां बटोर चुके हैं।

    दलीप ट्रॉफी में सूर्यवंशी का प्रदर्शन पहले से ही चर्चा में रहा है। नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में उनके बल्ले से केवल आठ रन निकले थे लेकिन गेंदबाजी में उन्होंने शानदार योगदान दिया। उन्होंने महज 11 रन देकर दो विकेट हासिल किए थे। इस प्रदर्शन ने यह भी दिखाया कि सूर्यवंशी केवल बल्लेबाजी तक सीमित नहीं हैं बल्कि जरूरत पड़ने पर गेंद से भी टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।

    सूर्यवंशी ने खुद अपनी गेंदबाजी को लेकर दिलचस्प बात साझा की थी। उनका कहना था कि बल्लेबाजों को अक्सर गेंदबाजी करने में मजा आता है और गेंदबाजों को बल्लेबाजी करने में। ईस्ट जोन के पिछले मुकाबले में जब विरोधी टीम के विकेट नहीं गिर रहे थे तब उन्हें दो तीन ओवर गेंदबाजी करने के लिए कहा गया था। सूर्यवंशी ने खुद को विकेट लेने वाला खिलाड़ी बताते हुए मजाकिया अंदाज में कहा था कि ईशान किशन को शायद पता नहीं था कि वह विकेट लेने वाले खिलाड़ी हैं।

    ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन के सेमीफाइनल में टॉस जीतकर ईस्ट जोन ने रजत पाटीदार की कप्तानी वाली सेंट्रल जोन टीम को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया। सेंट्रल जोन की टीम में सारांश जैन की भी वापसी हुई है। सारांश ने इसी महीने श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में भारत के लिए टेस्ट डेब्यू किया था।

    पहले दिन के शुरुआती सत्र में ईस्ट जोन के गेंदबाजों ने सेंट्रल जोन पर दबाव बनाए रखा। 32 ओवर के बाद सेंट्रल जोन का स्कोर 81 रन पर तीन विकेट था। अभिजीत के सरकार और मुकेश कुमार ने शानदार गेंदबाजी करते हुए विकेट हासिल किए। अभिजीत ने पहले घंटे में अमन मोखाडे और कुणाल चंदेला को पवेलियन भेजा जबकि भारतीय तेज गेंदबाज मुकेश कुमार ने दूसरे घंटे के अंत में कप्तान रजत पाटीदार को 12 रन के निजी स्कोर पर क्लीन बोल्ड कर दिया।

    वैभव सूर्यवंशी के लिए यह जिम्मेदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह बेहद कम उम्र में लगातार बड़े मंच पर अपनी पहचान बना रहे हैं। आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से चर्चा में आए सूर्यवंशी अब कप्तानी और गेंदबाजी जैसे पहलुओं में भी अनुभव हासिल कर रहे हैं। ईशान किशन की चोट से पैदा हुई स्थिति ने उन्हें अचानक नेतृत्व की भूमिका में ला खड़ा किया लेकिन यह मौका उनके क्रिकेटिंग सफर में एक अहम पड़ाव साबित हो सकता है। आने वाले समय में उनके खेल के साथ नेतृत्व क्षमता पर भी सभी की नजर रहेगी।

  • 60 विकेट लेकर जम्मू-कश्मीर को बनाया रणजी चैंपियन अब इंग्लैंड में आजमाएंगे किस्मत! आकिब नबी पर टीम इंडिया की नजर

    60 विकेट लेकर जम्मू-कश्मीर को बनाया रणजी चैंपियन अब इंग्लैंड में आजमाएंगे किस्मत! आकिब नबी पर टीम इंडिया की नजर


    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी के लिए भारतीय क्रिकेट में एक और बड़ा मौका दस्तक दे रहा है। रणजी ट्रॉफी के पिछले सीजन में अपनी घातक गेंदबाजी से तहलका मचाने वाले नबी अब इंग्लैंड की काउंटी चैंपियनशिप में सरे की टीम के लिए खेलते नजर आ सकते हैं। उन्हें मौजूदा डिवीजन वन सीजन के कुछ मुकाबलों के लिए सरे के साथ जोड़े जाने की संभावना है। माना जा रहा है कि वह 2 सितंबर से द ओवल में यॉर्कशायर के खिलाफ होने वाले मुकाबले के लिए उपलब्ध हो सकते हैं। इसके बाद ससेक्स और ग्लैमॉर्गन के खिलाफ होने वाले मुकाबलों में भी उनके खेलने की संभावना जताई जा रही है।

    आकिब नबी ने रणजी ट्रॉफी के पिछले सीजन में अपनी गेंदबाजी से जबरदस्त प्रभाव छोड़ा था। उन्होंने महज 12.56 की औसत से 60 विकेट हासिल किए और टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। उनकी शानदार गेंदबाजी के दम पर जम्मू-कश्मीर ने पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया। घरेलू क्रिकेट में इस प्रदर्शन के बाद नबी को भारतीय टीम के भविष्य के तेज गेंदबाजों में एक महत्वपूर्ण नाम माना जा रहा है।

    इंग्लैंड का संभावित काउंटी कार्यकाल नबी के लिए सिर्फ विदेशी क्रिकेट खेलने का मौका नहीं होगा बल्कि भारतीय टीम के नजरिए से भी इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टीम मैनेजमेंट और राष्ट्रीय चयनकर्ता न्यूजीलैंड के आगामी टेस्ट दौरे को ध्यान में रखते हुए नबी को तेज गेंदबाजों के अनुकूल परिस्थितियों में खेलने का अनुभव दिलाना चाहते हैं। इंग्लैंड में रेड कूकाबुरा गेंद से गेंदबाजी करते हुए नबी की स्विंग और परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठाने की क्षमता को परखा जा सकता है। न्यूजीलैंड में टेस्ट क्रिकेट के दौरान भी तेज गेंदबाजों को अनुकूल परिस्थितियां मिलने की उम्मीद रहती है ऐसे में यह अनुभव उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

    नबी श्रीलंका के खिलाफ भारत की हालिया टेस्ट सीरीज का भी हिस्सा रहे थे। भारत ने यह सीरीज 1-0 से अपने नाम की लेकिन नबी को प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली थी। अब इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट खेलने का मौका उन्हें विदेशी परिस्थितियों में खुद को साबित करने का अवसर देगा। खास बात यह है कि इंग्लैंड में कई भारतीय खिलाड़ी पहले से काउंटी क्रिकेट में सक्रिय हैं जिससे नबी को वहां के माहौल और परिस्थितियों को समझने में भी मदद मिल सकती है।

    इंग्लैंड में भारतीय खिलाड़ियों की मौजूदगी की बात करें तो बाएं हाथ के स्पिनर मानव सुथार वार्विकशायर के साथ फिर जुड़ने वाले हैं। कुलदीप यादव भी यॉर्कशायर के लिए काउंटी क्रिकेट खेलने लौटेंगे। सरे की टीम में भारतीय लेग स्पिनर राहुल चाहर और अनकैप्ड बल्लेबाजी ऑलराउंडर महिपाल लोमरोर भी शामिल हैं। ऐसे में नबी को विदेशी परिस्थितियों में भारतीय खिलाड़ियों के साथ खेलने और अनुभव साझा करने का मौका मिल सकता है।

    काउंटी चैंपियनशिप में अपना संभावित कार्यकाल पूरा करने के बाद नबी के इंडिया ए टीम से जुड़ने की उम्मीद है। 22 सितंबर से पुडुचेरी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले दो रेड बॉल मुकाबलों में उनके खेलने की संभावना है। इसके बाद जम्मू-कश्मीर की टीम के साथ उनके जुड़ने को लेकर भी स्थिति पर नजर रहेगी क्योंकि 1 से 5 अक्टूबर तक श्रीनगर में रेस्ट ऑफ इंडिया के खिलाफ ईरानी कप मुकाबला होना है।

    इस बीच भारतीय तेज गेंदबाजी के अनुभवी चेहरे मोहम्मद शमी और मुकेश कुमार के भी काउंटी चैंपियनशिप के बाद के चरणों में खेलने की संभावना जताई गई है। दोनों फिलहाल दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में ईस्ट जोन की ओर से खेल रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में भारतीय तेज गेंदबाजों के लिए विदेशी परिस्थितियों में खुद को परखने के कई अहम मौके सामने आ सकते हैं। आकिब नबी के लिए सरे का संभावित काउंटी कार्यकाल इसी दिशा में उनके करियर का बड़ा पड़ाव साबित हो सकता है।

  • 154.5 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से मचाई सनसनी 4 विश्व कप खेले 315 विकेट झटके ऐसी रही मैसूर एक्सप्रेस की क्रिकेट यात्रा

    154.5 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से मचाई सनसनी 4 विश्व कप खेले 315 विकेट झटके ऐसी रही मैसूर एक्सप्रेस की क्रिकेट यात्रा


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में जब तेज गेंदबाजों की बात होती है तो जवागल श्रीनाथ का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। मैसूर एक्सप्रेस के नाम से मशहूर श्रीनाथ ने अपनी गति स्विंग और गेंद को अलग अलग अंदाज में इस्तेमाल करने की क्षमता से लंबे समय तक बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें खड़ी कीं। 31 अगस्त 1969 को कर्नाटक के मैसूर में जन्मे दाएं हाथ के तेज गेंदबाज श्रीनाथ ने उस दौर में भारतीय तेज गेंदबाजी को नई पहचान दी जब टीम में तेज गति के गेंदबाजों की संख्या सीमित हुआ करती थी। कपिल देव के बाद श्रीनाथ भारतीय तेज गेंदबाजी का सबसे प्रमुख चेहरा बने और कपिल के संन्यास के बाद उन्होंने भारतीय आक्रमण की जिम्मेदारी संभाली।

    श्रीनाथ ने 1991 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा। शुरुआती दौर में उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी तेज गति थी लेकिन करियर के दौरान उन्होंने अपनी गेंदबाजी में स्विंग और धीमी गेंद जैसे हथियार भी जोड़े। 1997 में चोट ने उनके करियर को बड़ा झटका दिया और उन्हें लगभग पूरा साल क्रिकेट से बाहर रहना पड़ा। उस समय उनकी वापसी को लेकर सवाल उठने लगे थे लेकिन श्रीनाथ ने हार नहीं मानी। वापसी के बाद उन्होंने अपनी गेंदबाजी में बदलाव किया और 1998 उनके करियर के सबसे शानदार वर्षों में शामिल हो गया। चोट के बाद उनकी गति कुछ प्रभावित हुई लेकिन विकेट लेने की क्षमता और गेंदबाजी की समझ और मजबूत होती गई।

    1999 वनडे विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ श्रीनाथ ने 154.5 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंककर अपनी गति का जबरदस्त प्रदर्शन किया। लंबे समय तक यह वनडे क्रिकेट में किसी भारतीय गेंदबाज द्वारा फेंकी गई सबसे तेज गेंद का रिकॉर्ड रहा। बाद में 2023 में उमरान मलिक ने श्रीलंका के खिलाफ 156 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद डालकर यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इसके बावजूद श्रीनाथ की तेज गेंदबाजी भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक खास मुकाम रखती है।

    श्रीनाथ ने भारत की ओर से चार वनडे विश्व कप खेले। 1992 1996 1999 और 2003 में वह भारतीय टीम का हिस्सा रहे। 2003 विश्व कप से पहले उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया था लेकिन तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली ने उन्हें वापसी के लिए तैयार किया। श्रीनाथ ने भी कप्तान के भरोसे को सही साबित किया और 2003 विश्व कप में शानदार गेंदबाजी करते हुए 11 मैचों में 16 विकेट हासिल किए। इस प्रदर्शन ने भारत को फाइनल तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका निभाई।

    2002 में भी श्रीनाथ उस भारतीय टीम का हिस्सा थे जिसने श्रीलंका के साथ संयुक्त रूप से आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीता था। इसके बाद 2003 विश्व कप के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। उनके आंकड़े उनकी महानता की गवाही देते हैं। श्रीनाथ ने भारत के लिए 229 वनडे मैचों में 315 विकेट हासिल किए और वह वनडे क्रिकेट में भारत के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले तेज गेंदबाज हैं। कुल भारतीय गेंदबाजों में केवल अनिल कुंबले उनसे आगे हैं। वह 300 से ज्यादा वनडे विकेट लेने वाले भारत के एकमात्र तेज गेंदबाज भी रहे हैं।

    टेस्ट क्रिकेट में भी श्रीनाथ का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने 67 टेस्ट मैचों में 236 विकेट अपने नाम किए। करीब 12 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में उन्होंने भारतीय तेज गेंदबाजी को लगातार मजबूती दी और कई मुश्किल विदेशी दौरों पर टीम की गेंदबाजी की अगुआई की।

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद श्रीनाथ ने कमेंट्री या कोचिंग को अपना मुख्य पेशा बनाने के बजाय मैच रेफरी के रूप में नई पारी शुरू की। वह आईसीसी के प्रतिष्ठित मैच रेफरी के रूप में लंबे समय से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। क्रिकेट में उनके योगदान के लिए 1999 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। तेज गति स्विंग अनुभव और लगातार प्रदर्शन की बदौलत जवागल श्रीनाथ भारतीय क्रिकेट में उस दौर के प्रतीक बन गए जब एक अकेला तेज गेंदबाज पूरी गेंदबाजी इकाई की पहचान बन सकता था।

  • साइकिल चलाओ फिट रहो देश को मजबूत बनाओ मांडविया और गंभीर ने युवाओं को दिया फिटनेस मंत्र

    साइकिल चलाओ फिट रहो देश को मजबूत बनाओ मांडविया और गंभीर ने युवाओं को दिया फिटनेस मंत्र


    नई दिल्लीनई दिल्ली में रविवार को आयोजित फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल इवेंट में फिटनेस और खेलों को लेकर लोगों में खास उत्साह देखने को मिला। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया के साथ भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व बल्लेबाज और मौजूदा मुख्य कोच गौतम गंभीर भी शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को नियमित शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करना और फिटनेस को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाने के प्रति जागरूकता पैदा करना रहा। बड़ी संख्या में बच्चों युवाओं और अलग अलग उम्र के लोगों ने इसमें हिस्सा लिया और साइकिलिंग के साथ कई अन्य खेल गतिविधियों में भी भागीदारी की।

    केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने इस दौरान युवाओं को खास तौर पर मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन से दूरी बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि संडे ऑन साइकिल का यह 88वां संस्करण है और देशभर में अब तक 25 हजार से ज्यादा स्थानों पर इसका आयोजन किया जा चुका है। उनके मुताबिक साइकिल चलाने को लेकर देश में लोगों का उत्साह लगातार बढ़ रहा है और यह अभियान धीरे धीरे एक जुनून और पैशन का रूप ले रहा है। उन्होंने साइकिलिंग को व्यायाम का बेहतरीन माध्यम बताते हुए कहा कि इससे व्यक्ति खुद को फिट रखने के साथ पर्यावरण और यातायात से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में भी योगदान दे सकता है।

    मांडविया ने युवाओं से अपील की कि वे रोजाना कम से कम एक घंटे मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन से दूर रहने की कोशिश करें। इस समय को साइकिल चलाने या किसी अन्य खेल गतिविधि में लगाने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है। उनका संदेश खास तौर पर ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब बच्चों और युवाओं के बीच स्क्रीन टाइम तेजी से बढ़ रहा है और शारीरिक गतिविधियों के लिए समय कम होता जा रहा है।

    कार्यक्रम में गौतम गंभीर ने भी फिटनेस को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने फिट इंडिया अभियान को सरकार की एक बेहतरीन पहल बताते हुए कहा कि जिस तरह देश के लोग स्वस्थ होंगे उसी तरह देश मजबूत और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा। गंभीर ने फिटनेस को किसी एक दिन या आयोजन तक सीमित रखने के बजाय इसे व्यापक अभियान के रूप में देखने की जरूरत बताई। उन्होंने युवाओं और इस अभियान से जुड़े लोगों से अपील की कि वे फिटनेस का संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं और समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाएं।

    गंभीर ने इस बात पर जोर दिया कि स्वस्थ नागरिक किसी भी मजबूत देश की नींव होते हैं। उनके अनुसार फिटनेस को केवल खेल खेलने या व्यायाम करने तक सीमित नहीं समझना चाहिए बल्कि इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी है। नियमित खेल गतिविधियां व्यक्ति को सक्रिय रखने के साथ अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ाने में भी मदद करती हैं।

    जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में हुए इस आयोजन में ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। आयोजकों ने कार्यक्रम में शामिल प्रतिनिधियों और अतिथियों का सम्मान किया। मुख्य अतिथि गौतम गंभीर के अलावा पहलवान और अभिनेता संग्राम सिंह तथा अभिनेत्री मुधरिमा तुली भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। अतिथियों का फूल और बुके देकर स्वागत किया गया।

    साइकिलिंग के अलावा कार्यक्रम में कई अन्य खेल गतिविधियां भी आयोजित की गईं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक अलग अलग आयु वर्ग के लोगों की भागीदारी ने इसे सामूहिक फिटनेस उत्सव का रूप दिया। आयोजन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि फिट रहना केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं बल्कि स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र के निर्माण से भी जुड़ा विषय है। मांडविया और गंभीर की अपील ने युवाओं को खेल और नियमित शारीरिक गतिविधियों से जोड़ने के अभियान को नई ऊर्जा दी।

  • Womens Asia Cup : श्रीलंका की बड़ी जीत, UAE को 9 विकेट से हराया… आज भारत का थाइलैंड से मुकाबला

    Womens Asia Cup : श्रीलंका की बड़ी जीत, UAE को 9 विकेट से हराया… आज भारत का थाइलैंड से मुकाबला


    दुबई।
    विमेंस एशिया कप 2026 (Womens Asia Cup 2026) का आगाज हो गया है। इस बार टूर्नामेंट की मेजबानी यूएई (UAE) कर रहा है। अभी तक खेले गए दो मुकाबलों में थाइलैंड (Thailand) और श्रीलंका (Sri Lanka) ने जीत दर्ज की है। थाइलैंड ने अपने पहले मुकाबले में हॉन्ग-कॉन्ग को हराया था, जबकि श्रीलंका ने मेजबान यूएई को 9 विकेट से धूल चटाई। यह श्रीलंका विमेंस टीम (Sri Lanka Women’s Team) की टी20 क्रिकेट में सबसे बड़ी जीत है। यूएई के खिलाफ उन्होंने मुकाबले महज 7.5 ओवर में ही खत्म कर दिया। उन्हें जीत के लिए 80 रनों का मामूली टारगेट मिला था, जिसे कप्तान चमारी अट्टापट्टू की 48 रनों की तूफानी पारी के दम पर उन्होंने आसानी से हासिल कर लिया। आज हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली टीम इंडिया अपने अभियान का आगाज थाइलैंड के खिलाफ करने जा रही है। भारत इस टूर्नामेंट में बतौर फेवरेट उतरेगी।

    बता दें, विमेंस एशिया कप में इस बार कुल 8 टीमें हिस्सा ले रहीं हैं, जिन्हें 4-4 के दो ग्रुप में बांटा गया है।
    ग्रुप-ए- भारत, पाकिस्तान, थाइलैंड और हॉन्ग-कॉन्ग जैसी टीमें हैं।
    ग्रुप-बी- श्रीलंका, बांग्लादेश, यूएई और इंडोशनेशिया है।

    ग्रुप स्टेज में टॉप-2 में रहने वाली टीमों को सेमीफाइनल का टिकट मिलेगा। सेमीफाइनल 10 और 11 सितंबर को दुबई में खेले जाएंगे, जबकि खिताबी मुकाबला इसी मैदान पर 13 सितंबर को आयोजित होगा।

    वुमेंस एशिया कप का 10वां एडिशन है। पिछली बार इस टूर्नामेंट को श्रीलंका ने अपने घर पर जीता था। फाइनल में उन्होंने 7 बार की चैंपियन टीम इंडिया को हराया था। भारत इस टूर्नामेंट में जरूरत उनसे बदला लेना चाहेगा।

    ग्रुप-ए का पहला मैच थाइलैंड और हॉन्ग-कॉन्ग के बीच खेला गया था। इस मैच में पहले बैटिंग करते हुए थाइलैंड की टीम ने 120 रन बोर्ड पर लगाए थे, जिसके जवाब में हॉन्ग-कॉन्ग की विमेंस टीम 114 रन बना पाई थी। थाइलैंड ने यह मैच 6 रनों के अंतर से जीता। आज हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली टीम इंडिया थाइलैंड के खिलाफ अपने अभियान का आगाज करेगी। भारत-पाकिस्तान बहुप्रतीक्षित मैच 5 सितंबर को खेला जाएगा।

    श्रीलंका ने यूएई के खिलाफ गेंदों के मामले में अपनी सबसे बड़ी जीत दर्ज करते हुए विमेंस एशिया कप का आगाज किया। श्रीलंका ने अपना पहला मैच 73 गेंदें शेष रहते जीता। यूएई ने पहले बैटिंग करते 79 रन ही बोर्ड पर लगाए, उनकी पूरी टीम 19.5 ओवर में सिमट गई। श्रीलंका ने इस टारगेट को 7.5 ओवर में 1 विकेट के नुकसान पर आसानी से चेज कर लिया। चमीरा अट्टापट्टू ने 48 रनों की तूफानी पारी खेली।

  • गोल्डन बॉय की राह में चोट बनी रोड़ा! नीरज चोपड़ा एशियन गेम्स से बाहर, भारत की गोल्ड की उम्मीदों को लगा झटका

    गोल्डन बॉय की राह में चोट बनी रोड़ा! नीरज चोपड़ा एशियन गेम्स से बाहर, भारत की गोल्ड की उम्मीदों को लगा झटका


    नई दिल्ली । भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर और दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा को लेकर खेल जगत से बेहद निराश करने वाली खबर सामने आई है। नीरज चोपड़ा चोट के कारण 2026 के बाकी बचे सीजन से बाहर हो गए हैं। इसका सीधा असर सितंबर में जापान के आइची नागोया में होने वाले एशियन गेम्स पर भी पड़ा है जहां नीरज अपने जैवलिन थ्रो के खिताब का बचाव करने उतरने वाले थे। नीरज की गैरमौजूदगी भारत के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है क्योंकि वह देश के सबसे मजबूत पदक दावेदारों में शामिल थे और एशियन गेम्स में उनसे एक बार फिर शानदार प्रदर्शन की उम्मीद थी।

    नीरज ने खुद सोशल मीडिया के जरिए अपनी चोट की जानकारी फैन्स के साथ साझा की है। उन्होंने बताया कि लुसाने डायमंड लीग में 88.05 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो करने के बाद वह शानदार लय महसूस कर रहे थे। लंबे समय से जिस मोमेंटम की उन्हें तलाश थी वह उन्हें वापस मिलता नजर आ रहा था लेकिन इसी दौरान ट्रेनिंग में उनके टखने के लिगामेंट में टियर हो गया। चोट के बाद उन्होंने अपनी मेडिकल टीम और डॉक्टरों के साथ विस्तार से चर्चा की और इसके बाद इस सीजन के बाकी मुकाबलों से दूर रहने का फैसला किया।

    नीरज के लिए यह फैसला आसान नहीं रहा होगा क्योंकि चोट ऐसे समय पर आई जब उनका प्रदर्शन धीरे धीरे बेहतर होता दिखाई दे रहा था। ग्लासगो में हुए मुकाबले में उन्होंने पोडियम फिनिश हासिल किया था लेकिन श्रीलंका के रुमेश पथिरागे ने 89.75 मीटर का शानदार थ्रो करते हुए उनसे गोल्ड मेडल छीन लिया था। इसके बाद लुसाने डायमंड लीग में भी नीरज ने हिस्सा लिया और 88.05 मीटर का थ्रो उनके लिए सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। वह क्वालिफिकेशन की रेस में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे लेकिन चोट ने उनके पूरे सीजन पर ब्रेक लगा दिया।

    एशियन गेम्स 2026 का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान के आइची नागोया में होना है। नीरज के बाहर होने का सबसे बड़ा झटका यह है कि वह जैवलिन थ्रो में अपने पिछले खिताब का बचाव नहीं कर पाएंगे। उनके नाम की मौजूदगी ही भारत के लिए पदक की बड़ी उम्मीद मानी जाती थी। ऐसे में उनकी अनुपस्थिति से भारतीय एथलेटिक्स टीम पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

    हालांकि नीरज ने इस मुश्किल वक्त में भी सकारात्मक रवैया दिखाया है। उनका कहना है कि चोट और मुश्किलें खेल के सफर का हिस्सा हैं और फिलहाल उनका पूरा ध्यान रिकवरी पर है। वह पूरी तरह फिट होकर पहले से ज्यादा मजबूती के साथ मैदान पर वापसी करना चाहते हैं। अब नीरज की गैरमौजूदगी में भारत की उम्मीदें रोहित यादव पर टिक गई हैं। रोहित ने हाल ही में भुवनेश्वर में 87.68 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए जीत दर्ज की थी। नीरज के बाहर होने के बाद रोहित एशियन गेम्स में भारत के प्रमुख जैवलिन पदक दावेदार के रूप में नजर आएंगे।

  • एक खिलाड़ी को खास ट्रीटमेंट क्यों? अश्विन ने पंत के रवैये पर उठाए सवाल, ‘जेनरेशन के खिलाड़ी’ का टैग भी नकारा

    एक खिलाड़ी को खास ट्रीटमेंट क्यों? अश्विन ने पंत के रवैये पर उठाए सवाल, ‘जेनरेशन के खिलाड़ी’ का टैग भी नकारा


    नई दिल्ली। पूर्व भारतीय ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत के हालिया प्रदर्शन और उनकी शॉट सिलेक्शन को लेकर सवाल उठाए हैं। अश्विन के मुताबिक पंत ने अभी तक उन उम्मीदों को पूरी तरह पूरा नहीं किया है, जो उनसे की जाती हैं। श्रीलंका के खिलाफ हालिया दो टेस्ट की सीरीज में पंत ने 168 रन बनाए, जिसमें दो अर्धशतक शामिल रहे। हालांकि, उनके आक्रामक अंदाज और कुछ शॉट्स के चयन को लेकर बहस जारी है।

    ‘पंत से मेरी उम्मीदें अभी तक पूरी नहीं हुईं’

    अपने यूट्यूब चैनल ‘एश की बात’ पर अश्विन ने कहा कि पंत से उनकी उम्मीदें अब तक पूरी नहीं हुई हैं। उनका कहना है कि टेस्ट क्रिकेट में किसी बल्लेबाज के स्वाभाविक अंदाज को ही हर परिस्थिति में सही नहीं माना जा सकता। खिलाड़ी को यह भी देखना चाहिए कि उस वक्त टीम की जरूरत क्या है।

    अश्विन ने कहा, ‘ऋषभ पंत से मेरी उम्मीदें अब तक पूरी नहीं हुई हैं। जब खेल आपके हाथ में हो, तब ये कहना कि ऋषभ इसी तरह खेलता है सही नहीं है। सवाल यह है कि उस समय आपकी टीम को क्या चाहिए।’

    एक गलती पूरे टेस्ट का रुख बदल सकती है

    अश्विन ने पंत के आक्रामक क्रिकेट के समर्थन में दिए जाने वाले तर्कों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि टेस्ट मैच जीतने के लिए पूरी टीम के 11 खिलाड़ियों का योगदान जरूरी होता है, लेकिन एक गलत फैसला हार की वजह बन सकता है।

    उन्होंने सिडनी और ब्रिस्बेन में पंत की पारियों की तारीफ की, लेकिन साथ ही वॉशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर जैसे खिलाड़ियों के योगदान को भी अहम बताया।

    अश्विन के मुताबिक, ‘एक टेस्ट मैच बनाने और आखिरी सेशन में जीतने के लिए 11 क्रिकेटरों की जरूरत होती है, लेकिन टेस्ट हारने के लिए सिर्फ एक पल की मूर्खतापूर्ण गलती काफी होती है।’

    सहवाग-गिलक्रिस्ट से तुलना भी मंजूर नहीं

    अश्विन ने पंत की तुलना वीरेंद्र सहवाग और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट से किए जाने पर भी असहमति जताई। उन्होंने कहा कि दोनों खिलाड़ी बेहद आक्रामक क्रिकेट खेलते थे, लेकिन मैच की परिस्थितियों को पूरी तरह नजरअंदाज करके जोखिम नहीं लेते थे।

    उनका कहना है कि टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज को यह समझना जरूरी है कि कब आक्रमण करना है और कब स्थिति के मुताबिक संयम बरतना है। अश्विन ने साफ किया कि वह पंत को बतौर खिलाड़ी पसंद करते हैं, लेकिन परिस्थितियों के हिसाब से फैसले लेने की क्षमता में अभी सुधार की जरूरत है।

    ‘किसी एक खिलाड़ी को विशेष ट्रीटमेंट मत दीजिए’

    अश्विन ने पंत को ‘एक पीढ़ी में आने वाला खिलाड़ी’ बताकर उन्हें अतिरिक्त समर्थन देने की दलील को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि अगर पंत जैसे खिलाड़ी को विशेष समर्थन दिया जाता है तो यशस्वी जायसवाल जैसे युवा खिलाड़ियों को भी वैसा ही भरोसा मिलना चाहिए।

    उन्होंने कहा, ‘किसी एक खिलाड़ी को विशेष ट्रीटमेंट मत दीजिए। अगर एक पीढ़ी में आने वाले खिलाड़ी को इतना समर्थन देना है, तो यह समर्थन सभी को मिलना चाहिए। यशस्वी जायसवाल भी ऐसा ही खिलाड़ी है।’

    50 से ज्यादा टेस्ट खेल चुके हैं, अब जिम्मेदारी जरूरी

    अश्विन ने पंत के अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि अब उन्हें युवा या अनुभवहीन खिलाड़ी नहीं माना जा सकता। वह 50 से ज्यादा टेस्ट खेल चुके हैं और इसलिए उनसे जिम्मेदारी के साथ खेलने की उम्मीद की जाती है।

    अश्विन ने कहा, ‘ऋषभ अनुभवी हैं। वह 50 टेस्ट खेल चुके हैं। अब उन्हें जिम्मेदारी लेनी होगी। एक पीढ़ी में आने वाला खिलाड़ी वाली दलील मत दीजिए। उनकी निर्णय लेने की क्षमता की वजह से ही वह बाकी दो फॉर्मेट नहीं खेल रहे हैं।’

    हालांकि, अश्विन ने यह भी कहा कि अगर पंत को उनकी गलतियों के बारे में सही तरीके से बताया जाए और वह अपनी निर्णय लेने की क्षमता पर काम करें, तो वह भविष्य में भारत के लिए तीनों फॉर्मेट में खेलने वाले खिलाड़ी बन सकते हैं।

    प्रतिभा पर नहीं, फैसलों पर सवाल

    अश्विन ने स्पष्ट किया कि पंत की प्रतिभा पर उन्हें कोई संदेह नहीं है। उनकी आपत्ति मुख्य रूप से टेस्ट क्रिकेट में जोखिम लेने के तरीके और समय को लेकर है। पंत को अपने स्वाभाविक आक्रामक अंदाज और टीम की जरूरत के बीच बेहतर तालमेल बैठाना होगा।

    अश्विन ने कहा, ‘मुझे ऋषभ पंत खिलाड़ी के तौर पर बहुत पसंद हैं।’ साथ ही उन्होंने जोर दिया कि बेहतर निर्णय लेने की क्षमता ही पंत को टेस्ट क्रिकेट में और प्रभावी बना सकती है।

  • महिला टी20 एशिया कप का भव्य आगाज आज दुबई में…. Ind vs Pak मैच 5 सितंबर को

    महिला टी20 एशिया कप का भव्य आगाज आज दुबई में…. Ind vs Pak मैच 5 सितंबर को


    दुबई।
    महिला टी20 एशिया कप 2026 (Women’s T20 Asia Cup 2026) का आगाज आज से यूएई (UAE) के दुबई (Dubai) में होने जा रहा है। इस बार टूर्नामेंट (Tournament) में आठ टीमें हिस्सा ले रही हैं। भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश के अलावा इंडोनेशिया, हांगकांग चीन, थाईलैंड और मेजबान यूएई भी खिताब के लिए मैदान में पूरी ताकत झोंकेंगे। टूर्नामेंट का फाइनल 13 सितंबर को खेला जाएगा। भारत को प्रतियोगिता का प्रबल दावेदार माना जा रहा है, जबकि मौजूदा चैंपियन श्रीलंका की टीम भी शानदार फॉर्म के साथ टूर्नामेंट में पहुंची है। पाकिस्तान और बांग्लादेश उलटफेर करने की क्षमता रखते हैं।


    28 अगस्त से 13 सितंबर तक चलेगा टूर्नामेंट

    महिला टी20 एशिया कप में कुल 15 मुकाबले खेले जाएंगे। इनमें 12 लीग मैच, दो सेमीफाइनल और एक फाइनल शामिल है। ग्रुप चरण के मुकाबले 28 अगस्त से आठ सितंबर तक होंगे और इस दौरान हर दिन एक मैच खेला जाएगा। इसके बाद पहला सेमीफाइनल 10 सितंबर और दूसरा सेमीफाइनल 11 सितंबर को होगा। खिताबी मुकाबला 13 सितंबर को खेला जाएगा। टूर्नामेंट के सभी मुकाबले दुबई में आयोजित किए जाएंगे।


    भारत-पाकिस्तान एक ही ग्रुप में

    आठ टीमों को दो ग्रुप में बांटा गया है।
    ग्रुप ए: भारत, पाकिस्तान, हांगकांग चीन और थाईलैंड
    ग्रुप बी: बांग्लादेश, श्रीलंका, यूएई और इंडोनेशिया

    ग्रुप चरण में प्रत्येक टीम अपने ग्रुप की बाकी तीन टीमों से एक-एक मुकाबला खेलेगी। दोनों ग्रुप की शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी। यह दूसरी बार है जब महिला एशिया कप के टी20 प्रारूप में आठ टीमें हिस्सा ले रही हैं। 2022 में टूर्नामेंट में सात टीमें थीं, जबकि 2024 में एक और टीम के जुड़ने के बाद संख्या आठ हुई थी।


    चार एसोसिएट टीमों ने ऐसे बनाई जगह

    इंडोनेशिया, हांगकांग चीन, थाईलैंड और यूएई ने 2026 महिला प्रीमियर कप के जरिए एशिया कप में जगह बनाई है। 18 टीमों वाले प्रीमियर कप में इन चारों टीमों ने अपने-अपने ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया और फिर क्वार्टर फाइनल जीतकर एशिया कप के लिए क्वालिफाई किया। इंडोनेशिया के लिए यह महिला एशिया कप में पहली उपस्थिति होगी। वहीं हांगकांग की टीम 2012 के बाद पहली बार इस टूर्नामेंट में वापसी कर रही है।


    भारत का दबदबा, श्रीलंका मौजूदा चैंपियन

    महिला टी20 एशिया कप में भारत का अब तक दबदबा रहा है। टी20 प्रारूप में खेले गए पांच संस्करणों में भारत ने तीन बार खिताब जीता है। हालांकि, दो मौकों पर उसे फाइनल में हार का सामना करना पड़ा। 2018 में बांग्लादेश ने भारत को हराकर खिताब जीता था, जबकि 2024 में श्रीलंका ने भारत को मात देकर पहली बार ट्रॉफी अपने नाम की थी। अब भारत की नजरें खिताब वापस हासिल करने पर होंगी।


    पांच सितंबर को भारत-पाकिस्तान महामुकाबला

    टूर्नामेंट के सबसे बहुप्रतीक्षित मुकाबलों में भारत और पाकिस्तान की भिड़ंत शामिल है। दोनों टीमें पांच सितंबर को आमने-सामने होंगी। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत का पाकिस्तान पर दबदबा रहा है। दोनों के बीच खेले गए 17 मुकाबलों में भारत ने 14 में जीत दर्ज की है। हालांकि, टी20 क्रिकेट में एक खराब दिन भी समीकरण बदल सकता है।

    भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने भी टूर्नामेंट से पहले साफ किया कि उनकी टीम किसी एक प्रतिद्वंद्वी पर विशेष ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि टीम का लक्ष्य किसी विशेष टीम को लेकर सोचने के बजाय अच्छा क्रिकेट खेलना है। हरमनप्रीत के मुताबिक पिछले दो-तीन वर्षों में एशियाई टीमों के स्तर में काफी सुधार हुआ है और इस वजह से प्रतियोगिता चुनौतीपूर्ण रहने वाली है।


    श्रीलंका और बांग्लादेश की टक्कर भी अहम

    छह सितंबर को मौजूदा चैंपियन श्रीलंका और बांग्लादेश के बीच मुकाबला होगा। इस मैच पर भी नजरें रहेंगी। टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में श्रीलंका का बांग्लादेश के खिलाफ रिकॉर्ड मजबूत है। दोनों टीमों के बीच 16 मुकाबलों में श्रीलंका ने 13 मैच जीते हैं। श्रीलंका इस साल शानदार फॉर्म में है। उसने 13 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 10 जीत हासिल की हैं। टीम ने वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज 2-1 से जीती, बांग्लादेश को 3-0 से हराया और पाकिस्तान के खिलाफ भी 2-1 से सीरीज अपने नाम की।


    भारत पसंदीदा, लेकिन हालिया फॉर्म चिंता का विषय

    भारत को टूर्नामेंट का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है, हालांकि उसकी हालिया टी20 फॉर्म बहुत प्रभावशाली नहीं रही है। भारत ने इस साल खेले 16 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में नौ मैच गंवाए हैं। इसके बावजूद टीम की गहराई और बड़े टूर्नामेंटों का अनुभव उसे बाकी टीमों से आगे रखता है। भारतीय टीम की नजरें खास तौर पर हालिया निराशाजनक टी20 विश्व कप अभियान से सबक लेकर बेहतर प्रदर्शन करने पर होंगी। हरमनप्रीत ने कहा कि पिछली प्रतियोगिताओं में मिले अनुभव टीम के लिए उपयोगी साबित होंगे और खिलाड़ी यहां अपना सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खेलने की कोशिश करेंगे।


    बांग्लादेश के प्रदर्शन में निरंतरता की कमी

    बांग्लादेश ने इस साल टी20 क्रिकेट में मिश्रित प्रदर्शन किया है। टीम ने टी20 विश्व कप क्वालिफायर में अपने सभी सात मुकाबले जीते थे, लेकिन उसके बाद खेले गए 12 मैचों में उसे आठ में हार मिली। ऐसे में बांग्लादेश के लिए ग्रुप बी में श्रीलंका के साथ मुकाबला बड़ी चुनौती होगा। टीम को सेमीफाइनल में जगह बनाने के लिए निरंतर प्रदर्शन करना होगा।


    क्या भारत ट्रॉफी वापस हासिल करेगा?

    महिला टी20 एशिया कप 2026 में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत 2024 में गंवाया खिताब वापस हासिल कर पाएगा। कागज पर भारत सबसे मजबूत टीमों में है, लेकिन इस साल उसकी टी20 फॉर्म चिंता पैदा करती है। दूसरी ओर श्रीलंका मौजूदा चैंपियन होने के साथ इस साल बेहतर फॉर्म में है। पाकिस्तान और बांग्लादेश के पास भी बड़े मुकाबलों में उलटफेर करने की क्षमता है, जबकि चार एसोसिएट टीमों के प्रदर्शन पर भी नजर रहेगी। टूर्नामेंट का प्रारूप ऐसा है कि ग्रुप चरण में एक भी चूक भारी पड़ सकती है। इसलिए 28 अगस्त से शुरू होने वाली इस प्रतियोगिता में सिर्फ बड़े नाम ही नहीं, बल्कि युवा और उभरती हुई प्रतिभाएं भी खिताब की दौड़ का रुख तय कर सकती हैं।

  • दक्षिण अफ्रीका के टेस्ट योद्धा का आखिरी सलाम! डीन एल्गर ने किया संन्यास का ऐलान, परिवार को दी पहली प्राथमिकता

    दक्षिण अफ्रीका के टेस्ट योद्धा का आखिरी सलाम! डीन एल्गर ने किया संन्यास का ऐलान, परिवार को दी पहली प्राथमिकता


    नई दिल्ली। साउथ अफ्रीका के दिग्गज क्रिकेटर और पूर्व कप्तान डीन एल्गर ने प्रोफेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। करीब डेढ़ दशक तक क्रिकेट के मैदान पर अपनी जुझारू बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले एल्गर 2026 काउंटी चैम्पियनशिप सीजन के समाप्त होने के बाद क्रिकेट के सभी प्रारूपों से विदाई ले लेंगे। 39 वर्षीय इस अनुभवी बल्लेबाज ने अपने फैसले के पीछे परिवार को प्राथमिकता देने की बात कही है। उनका मानना है कि अब क्रिकेट के लंबे सफर को विराम देने और जिंदगी के अगले अध्याय की ओर बढ़ने का सही समय आ गया है। एल्गर ने दक्षिण अफ्रीका के लिए टेस्ट क्रिकेट में जो योगदान दिया उसे वहां की क्रिकेट विरासत में लंबे समय तक याद किया जाएगा।

    डीन एल्गर की पहचान एक ऐसे टेस्ट बल्लेबाज के रूप में रही जिसने मुश्किल परिस्थितियों में डटकर मुकाबला किया। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के लिए 86 टेस्ट मुकाबले खेले और 35.92 की औसत से 5347 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 14 शतक और 23 अर्धशतक निकले। उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 199 रन रहा जो उन्होंने 2017 में बांग्लादेश के खिलाफ बनाया था। एल्गर की बल्लेबाजी में आक्रामकता से ज्यादा धैर्य और लंबी पारी खेलने की क्षमता नजर आती थी। वह नई गेंद के सामने घंटों टिककर बल्लेबाजी करने और विपक्षी गेंदबाजों को थकाने के लिए जाने जाते थे। यही वजह रही कि उन्हें दक्षिण अफ्रीका के सबसे भरोसेमंद टेस्ट ओपनरों में गिना गया।

    टेस्ट क्रिकेट के अलावा एल्गर ने दक्षिण अफ्रीका के लिए 8 वनडे मुकाबले भी खेले जिसमें उनके नाम 104 रन दर्ज हैं। उन्होंने 2012 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था और करीब 12 वर्षों तक दक्षिण अफ्रीकी टेस्ट टीम के अहम सदस्य बने रहे। 2024 की शुरुआत में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। भारत के खिलाफ केपटाउन में खेला गया टेस्ट उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला बना। इस मैच में चोटिल टेम्बा बावुमा की गैरमौजूदगी में उन्हें दक्षिण अफ्रीका की कप्तानी भी करनी पड़ी थी। संयोग देखिए कि अपने विदाई टेस्ट को उन्होंने यादगार भी बना दिया। एल्गर ने शानदार 185 रनों की पारी खेली और दक्षिण अफ्रीका को मुकाबले में मजबूत स्थिति तक पहुंचाया। मेजबान टीम ने वह मुकाबला पारी से जीता और सीरीज 1-1 से बराबर करने में कामयाब रही।

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदाई के बाद भी एल्गर का बल्ला रुका नहीं। उन्होंने इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट को अपनी दूसरी पारी के तौर पर चुना। टेस्ट क्रिकेट के सीमित होते शेड्यूल को देखते हुए उन्होंने एसेक्स का रुख किया जहां उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिली। वह टीम में दिग्गज एलेस्टेयर कुक की जगह भरने पहुंचे थे। 2024 में एसेक्स से जुड़ते ही एल्गर ने शानदार प्रदर्शन किया और काउंटी चैम्पियनशिप में 1000 से ज्यादा रन बनाकर अपनी उपयोगिता साबित की। उन्हें क्लब का बैटर ऑफ द ईयर भी चुना गया। टी20 ब्लास्ट में भी उन्होंने 300 से ज्यादा रन बनाए। इससे पहले वह समरसेट और सरे के लिए भी काउंटी क्रिकेट खेल चुके थे।

    अब 2026 सीजन उनके प्रोफेशनल क्रिकेट करियर का अंतिम अध्याय होगा। परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने की इच्छा के साथ एल्गर ने मैदान से विदाई का फैसला किया है। उनके करियर को सिर्फ आंकड़ों से नहीं बल्कि उस जज्बे से भी याद किया जाएगा जिसके साथ उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में कठिन परिस्थितियों का सामना किया। दक्षिण अफ्रीका को एक भरोसेमंद ओपनर और अनुभवी नेतृत्व देने वाले एल्गर अब जल्द ही क्रिकेट को अलविदा कहेंगे। उनका आखिरी सीजन उनके शानदार और संघर्षपूर्ण क्रिकेट सफर को एक भावुक विदाई देने का मौका होगा।

  • विकेट लेने के बजाय बार-बार नो-बॉल! जडेजा ने बनाया ऐसा रिकॉर्ड जिसे कोई गेंदबाज नहीं चाहेगा

    विकेट लेने के बजाय बार-बार नो-बॉल! जडेजा ने बनाया ऐसा रिकॉर्ड जिसे कोई गेंदबाज नहीं चाहेगा


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेले जा रहे टेस्ट मुकाबले में टीम इंडिया ने पहली पारी के आधार पर बड़ी बढ़त हासिल की लेकिन इसी बीच भारतीय ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा के नाम ऐसा अनचाहा रिकॉर्ड दर्ज हो गया है जिसे शायद ही कोई गेंदबाज अपने नाम देखना चाहेगा। टेस्ट क्रिकेट में जडेजा की नो-बॉल फेंकने की समस्या एक बार फिर सामने आई और आंकड़ों के मुताबिक साल 2021 से अब तक वह टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा नो-बॉल फेंकने वाले स्पिन गेंदबाज बन गए हैं। जडेजा के नाम इस अवधि में कुल 88 नो-बॉल दर्ज हो चुकी हैं और इस मामले में वह बाकी स्पिनर्स से काफी आगे हैं।

    कोलंबो टेस्ट में भी भारतीय स्पिन गेंदबाजों की ओर से नो-बॉल की समस्या देखने को मिली। मुकाबले में भारतीय स्पिनर्स अब तक कुल 10 नो-बॉल फेंक चुके थे। टेस्ट क्रिकेट में स्पिन गेंदबाजों द्वारा नो-बॉल करना वैसे भी टीम के लिए महंगा साबित हो सकता है क्योंकि इससे बल्लेबाज को अतिरिक्त मौका मिलने के साथ विपक्षी टीम को अतिरिक्त रन भी मिलते हैं। जडेजा जैसे अनुभवी गेंदबाज से ऐसी गलती बार-बार होना टीम के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

    साल 2021 से अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो रवींद्र जडेजा 88 नो-बॉल के साथ इस अनचाही सूची में सबसे ऊपर हैं। पाकिस्तान के स्पिनर नोमान अली 40 नो-बॉल के साथ दूसरे स्थान पर हैं। यानी जडेजा और दूसरे नंबर के गेंदबाज के बीच भी बड़ा अंतर है। श्रीलंका के लसिथ एम्बुलडेनिया 33 नो-बॉल के साथ तीसरे नंबर पर हैं। इंग्लैंड के जैक लीच ने इस दौरान 19 नो-बॉल फेंकी हैं। वहीं वेस्टइंडीज के जोमेल वारिकन और अफगानिस्तान के जहीर खान के नाम 17-17 नो-बॉल दर्ज हैं।

    जडेजा के लिए यह आंकड़ा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह भारतीय टेस्ट टीम के सबसे अनुभवी और भरोसेमंद ऑलराउंडर्स में शामिल हैं। गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी और फील्डिंग में भी उनकी भूमिका बेहद अहम रहती है। ऐसे में नो-बॉल की बार बार होने वाली गलती विपक्षी टीम के खिलाफ भारत की स्थिति को प्रभावित कर सकती है। खासकर टेस्ट क्रिकेट में जब एक विकेट के लिए लंबे समय तक मेहनत करनी पड़ती है तब नो-बॉल पर मिला अतिरिक्त मौका मैच का रुख बदल सकता है।

    अगर कोलंबो टेस्ट की बात करें तो भारत ने पहली पारी में 503 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था। इसके जवाब में श्रीलंका की पहली पारी 290 रन पर समाप्त हो गई और भारत को 213 रन की बड़ी बढ़त मिली। इसके बाद कप्तान शुभमन गिल ने श्रीलंका को फॉलोऑन देने का फैसला किया। दूसरी पारी में श्रीलंका की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने शुरुआती विकेट जल्दी गंवा दिए।

    हालांकि इसके बाद पासिंदु सूर्यबंदारा और धनंजय डी सिल्वा ने पारी को संभाल लिया। चौथे दिन बारिश के कारण खेल जल्दी समाप्त होने तक श्रीलंका ने दूसरी पारी में 6 विकेट पर 229 रन बना लिए थे और टीम ने भारत के खिलाफ 16 रन की बढ़त हासिल कर ली थी। ऐसे में भारतीय गेंदबाजों के लिए आखिरी विकेट हासिल करना बेहद जरूरी हो गया था। इस दौरान जडेजा की नो-बॉल भी चर्चा का बड़ा कारण बनी।

    जडेजा भले ही इस रिकॉर्ड को कभी याद नहीं रखना चाहेंगे लेकिन आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में नो-बॉल उनकी गेंदबाजी की एक बड़ी कमजोरी बन गई है। अब भारतीय टीम को उम्मीद होगी कि आगे के मुकाबलों में वह इस गलती पर नियंत्रण पाएंगे और अपनी शानदार गेंदबाजी से टीम को ज्यादा से ज्यादा सफलता दिलाएंगे।