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  • आम आदमी पार्टी के ड्रीम प्रोजेक्ट 95 और मोहल्ला क्लीनिकल होंगे बंद, डॉक्टर और कर्मचारियों पर संकट

    आम आदमी पार्टी के ड्रीम प्रोजेक्ट 95 और मोहल्ला क्लीनिकल होंगे बंद, डॉक्टर और कर्मचारियों पर संकट


    नई दिल्ली । दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले मोहल्ला क्लीनिक इन दिनों अभूतपूर्व संकट से गुजर रहे हैं। आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा शुरू किया गया यह ड्रीम प्रोजेक्ट अब लगातार विवादों और कठिनाइयों में फंसता दिखाई दे रहा है। ताज़ा जानकारी के अनुसार राजधानी में लगभग 95 और मोहल्ला क्लीनिक बंद होने वाले हैं जिसके लिए सरकार की ओर से आधिकारिक नोटिस भी जारी कर दिया गया है। इससे इन क्लीनिकों में काम कर रहे डॉक्टरों फार्मासिस्टों और अन्य कर्मचारियों के सामने रोजगार का गहरा संकट खड़ा हो गया है।

    500 में से कई क्लीनिक पहले ही हो चुके हैं बंद

    दिल्ली में करीब 500 मोहल्ला क्लीनिक संचालित किए जा रहे थे, जो प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते रहे हैं। यहां लोगों को मुफ्त खून की जांच, किडनी फंक्शन टेस्ट लिवर फंक्शन टेस्ट, विटामिन लेवल टेस्ट डायबिटीज  कोलेस्ट्रॉल  ब्लड शुगर हीमोग्लोबिन सहित 90 से अधिक प्रकार की पैथोलॉजी जांचें उपलब्ध कराई जाती थीं। मोहल्ला क्लीनिकों में कार्यरत एक डॉक्टर के अनुसार, सरकार की नीति और बजट संबंधी बाधाओं के चलते करीब 200 मोहल्ला क्लीनिक पहले ही बंद हो चुके हैं और अब 95 और क्लीनिक बंद होने की सूची में शामिल होने जा रहे हैं।

    सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में डॉक्टर

    सरकार के इस ताज़ा निर्णय ने डॉक्टरों और कर्मचारियों में भारी चिंता पैदा कर दी है। डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में क्लीनिक बंद करने का फैसला न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करेगा बल्कि सैकड़ों कर्मचारियों की आजीविका पर भी सीधा असर डालेगा। कई डॉक्टरों ने बताया कि वे इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं। डॉक्टरों ने आपसी बैठक कर यह निर्णय लिया कि कानूनी तौर पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा और क्लीनिक बंद न हों, इसके लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा।

    121 मोहल्ला क्लीनिक बंद करने का फैसला पहले ही हो चुका था

    कुछ दिन पहले ही दिल्ली सरकार की ओर से 121 मोहल्ला क्लीनिकों को बंद करने का फैसला लिया गया था। कर्मचारियों के अनुसार इस निर्णय के परिणामस्वरूप डॉक्टर फार्मासिस्ट, लैब टेक्निशियन और अन्य स्टाफ कुल मिलाकर 600 से अधिक लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ गई हैं। लगातार नोटिस जारी होने और नई सूची सामने आने से कर्मचारियों की चिंता और बढ़ गई है।

    121 डॉक्टरों को एक साथ मिला टर्मिनेशन लेटर

    30 अक्टूबर को स्थिति और गंभीर हो गई, जब मोहल्ला क्लीनिकों में सेवाएं दे रहे 121 डॉक्टरों को अचानक नौकरी से हटाने का लेटर मिल गया। डॉक्टरों के अनुसार उन्हें दो सप्ताह का समय दिया गया है जिसके बाद उनकी सेवाएं समाप्त मानी जाएंगी। कई डॉक्टरों ने बताया कि इस तरह अचानक लिए गए निर्णय से वे मानसिक रूप से बेहद परेशान हैं और किसी भी समय नई नौकरी मिलने की उम्मीद भी कम है।

    अन्य कर्मचारियों पर भी संकट ANM और मल्टी-टास्क स्टाफ को लेटर जारी

    डॉक्टरों के अलावा बड़ी संख्या में ऑक्ज़िलरी नर्सिंग मिडवाइफ और मल्टी-टास्क स्टाफ को भी नौकरी से निकालने का नोटिस दिया गया है। सूत्रों के अनुसार कुल मिलाकर सैकड़ों कर्मचारी ऐसे हैं जो बेरोजगार होने वाले हैं। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर रही है बल्कि परिवारों की आर्थिक स्थिति को भी गहरा आघात पहुंचा रही है।

    लोगों के लिए बढ़ेगी स्वास्थ्य सेवाओं की मुश्किलें

    अगर यह निर्णय लागू होता है तो दिल्ली की आम जनता, खासकर निम्न और मध्यम वर्ग को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। मोहल्ला क्लीनिकों के बंद होने से मुफ्त जांच प्राथमिक उपचार और डॉक्टरों की सुविधाएं कम हो जाएंगी, जिसकी वजह से सरकारी अस्पतालों में भीड़ और लंबी कतारें बढ़ने की संभावना है। क्लीनिकों की शुरुआत दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों की पहुंच में लाने के लिए की गई थी। लेकिन आज वही प्रोजेक्ट राजनीतिक, आर्थिक और प्रशासनिक कारणों से कठिन दौर से गुजर रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि लड़ाई अब उनके अस्तित्व की है, और वे इसे अदालत में चुनौती देने के लिए तैयार हैं। आगे अदालत और सरकार का क्या रुख होगा, यही आने वाले समय में दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा तय करेगा।

  • अब नहीं चलेगी थानों की मनमानी: पुलिस सेवाएँ होंगी ऑनलाइन, रियल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा

    अब नहीं चलेगी थानों की मनमानी: पुलिस सेवाएँ होंगी ऑनलाइन, रियल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा


    नई दिल्ली । बिहार में नई सरकार के गठन के बाद कानून-व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार (6 दिसंबर) को पुलिस मुख्यालय में बहुप्रतीक्षित ‘सिटीजन सर्विस पोर्टल’ का शुभारंभ किया। सरकार का दावा है कि यह पोर्टल पुलिस प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ आम जनता को थानों की अनावश्यक भागदौड़ से मुक्त करेगा।

    नागरिकों को डिजिटल सुविधा, थानों के चक्कर से मुक्ति

    लॉन्चिंग के दौरान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि हर आवश्यक पुलिस सेवा घर बैठे उपलब्ध हो। कई बार छोटी-छोटी जरूरतों के लिए लोगों को थानों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जहाँ देरी, मनमर्जी और परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नया पोर्टल इस मनमानी पर रोक लगाएगा और हर प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाएगा।

    सम्राट चौधरी ने कहा,
    “अब नागरिकों को साधारण सत्यापन से लेकर शिकायत दर्ज कराने तक किसी भी काम के लिए थाने पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और जवाबदेही तय रहेगी।”

    पोर्टल की मुख्य ऑनलाइन सेवाएँ

    सिटीजन सर्विस पोर्टल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि आम लोग कुछ ही क्लिक में अपने महत्वपूर्ण कार्य पूरा कर सकें। इसकी प्रमुख सेवाएँ इस प्रकार हैं—

    पुलिस सत्यापन (Verification)
    नौकरी, किरायेदार, पासपोर्ट या अन्य आवश्यक कार्यों के लिए अब पुलिस वेरिफिकेशन का ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा।

    ई-शिकायत (Online Complaint)
    किसी भी प्रकार की शिकायत दर्ज कराने के लिए थाने जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नागरिक घर बैठे शिकायत फॉर्म भरकर सबमिट कर सकते हैं।

    खोया-पाया रिपोर्ट
    यदि कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज या सामान खो जाए, तो उसकी रिपोर्ट वेबसाइट पर सीधे दर्ज की जा सकेगी।

    FIR की डिजिटल प्रक्रिया
    दर्ज की गई ऑनलाइन शिकायत संबंधित थाना को भेजी जाएगी। प्रारंभिक जांच के बाद मामला सही पाए जाने पर FIR भी ऑनलाइन दर्ज की जाएगी, जिससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी।

    पोर्टल की सबसे बड़ी विशेषता: रियल-टाइम ट्रैकिंग

    पोर्टल का सबसे आकर्षक और उपयोगी फीचर है रियल-टाइम स्टेटस ट्रैकिंग। यानी नागरिक अपना आवेदन, शिकायत या सत्यापन किस चरण में है, यह तुरंत देख सकेंगे।
    इससे न केवल लोगों का समय बचेगा, बल्कि अफसरों पर भी कार्रवाई की पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी तय होगी।

    समय और पैसे दोनों की बचत

    पोर्टल के माध्यम से मिलने वाली डिजिटल सुविधाएँ तीन मुख्य लाभ सुनिश्चित करती हैं—

    समय की बचत: कार्यालय या थानों के शारीरिक चक्कर समाप्त।

    ऊर्जा की बचत: तनाव और परेशानी कम होगी।

    खर्च में कमी: बिना किसी एजेंट या मध्यस्थ के सीधी सेवा मिलेगी।

    सरकार का मानना है कि इन सुविधाओं से पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही व्यापक रूप से बढ़ेगी।

    सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक और मजबूत बनाने की दिशा में कदम

    सिटीजन सर्विस पोर्टल के शुभारंभ के मौके पर डीजीपी विनय कुमार, एडीजी कुंदन कृष्णन सहित पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। अधिकारियों ने कहा कि यह पहल बिहार में डिजिटल पुलिसिंग की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगी।

    गृह मंत्री सम्राट चौधरी लगातार यह स्पष्ट कर रहे हैं कि राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत और तकनीक आधारित बनाना सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस पोर्टल में और भी कई सेवाएँ जोड़ी जाएँगी, जिनमें—

    महिला सुरक्षा से जुड़ी सेवाएँ

    साइबर अपराध से संबंधित ऑनलाइन सुविधा

    ट्रैफिक उल्लंघन और चालान की डिजिटल जानकारी
    जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएँ शामिल हो सकती हैं।

    बिहार में नई उम्मीदें

    सिटीजन सर्विस पोर्टल का शुभारंभ बिहार की कानून-व्यवस्था प्रणाली में एक सकारात्मक बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
    जहाँ पहले थानों में मनमाने व्यवहार और देरी की शिकायतें आम थीं, वहीं अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रक्रिया तेज, सरल और पारदर्शी होगी।

    सरकार का विश्वास है कि इस पहल से न केवल पुलिस प्रशासन पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि बिहार में आधुनिक और जवाबदेह शासन व्यवस्था की एक नई नींव भी रखी जाएगी।

  • BSP सुप्रीमो का सरकार पर हमला: 'अच्छे दिन' केवल कागजों पर, बहुजनों को SIR के लिए एकजुट होने को कहा

    BSP सुप्रीमो का सरकार पर हमला: 'अच्छे दिन' केवल कागजों पर, बहुजनों को SIR के लिए एकजुट होने को कहा


    नई दिल्ली/लखनऊ। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने बहुजन समाज की स्थिति, सामाजिक न्याय और राजनीतिक अधिकारों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाया। उन्होंने कहा कि आज भी देश के करोड़ों बहुजन नागरिकों को वह सम्मान, समानता और अधिकार नहीं प्राप्त हुए हैं जिनकी कल्पना बाबा साहेब ने भारत का संविधान तैयार करते समय की थी।मायावती ने तीखे शब्दों में पूछा-जब बाकी क्षेत्रों में बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं तो बहुजनों के आत्मसम्मान और जीवन-सुधार से जुड़े ‘अच्छे दिन’ अब तक क्यों नहीं आए?

    दिल्ली में श्रद्धांजलि, संदेश में गंभीरता
    मायावती ने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर बाबा साहेब को पुष्प अर्पित किए और दो मिनट का मौन रखकर उन्हें याद किया। उन्होंने कहा कि हर साल इस दिन राष्ट्र को यह सोचना चाहिए कि क्या हम अंबेडकर के सपनों का भारत बना पाए हैं? उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, तथा अंबेडकर जयंती जैसे अवसरों पर यह प्रश्न हमेशा उठेगा कि क्या सामाजिक न्याय पर आधारित वास्तविक समग्र और मानवीय अच्छे दिन कभी आएंगे? मायावती ने यह भी याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार के कार्यकाल में बहुजनों के सम्मान और सामाजिक उन्नति के लिए कई ऐसे फैसले लिए गए जो इतिहास में दर्ज हैं। उनके अनुसार जब सरकार की नीयत साफ हो और नीति स्पष्ट हो तब समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव होता है।

    मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया SIR में सक्रिय भागीदारी का आग्रह


    महापरिनिर्वाण दिवस पर दिए गए अपने संदेश में मायावती ने बहुजन समाज से आग्रह किया कि वे SIR-मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में सक्रियता दिखाएं। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज की राजनीतिक शक्ति तभी प्रभावी हो सकती है जब हर योग्य व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराए।उन्होंने चेताया कि कई बार नाम छूटने या गलत विवरण के कारण बहुजन समाज के लोगों को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का पूर्ण उपयोग करने से वंचित होना पड़ता है। इसलिए SIR प्रक्रिया में भागीदारी केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि बहुजनों की राजनीतिक सशक्तिकरण का आवश्यक हिस्सा है।

    रुपये के अवमूल्यन पर चिंता

    अपने बयान में मायावती ने देश की आर्थिक स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। खासकर रुपये के लगातार गिरते मूल्य को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार को केवल विशेषज्ञों की सलाह पर निर्भर न रहकर स्वयं हस्तक्षेप कर स्थिति को स्थिर करने के निर्णायक कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्थिक अस्थिरता का सबसे अधिक बोझ गरीबों, मजदूरों और वंचित वर्गों पर पड़ता है-और इन्हीं वर्गों की रक्षा करने का दावा सरकारें सबसे अधिक करती हैं।

    देशभर में श्रद्धांजलि समारोह
    महापरिनिर्वाण दिवस के कार्यक्रम पूरे देश में बड़े पैमाने पर आयोजित किए गए। लखनऊ के अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल पर सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे। वहीं नोएडा के दलित प्रेरणा स्थल पर बसपा कार्यकर्ताओं अनुयायियों और आम नागरिकों का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा।कार्यक्रमों में बाबा साहेब के विचारों को दोहराया गया और संविधान में दिए गए सामाजिक न्याय, समान अधिकारों और अवसरों की संवैधानिक व्यवस्था को मजबूत करने के संकल्प लिए गए।नोएडा में बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद ने भी बाबा साहेब की प्रतिमा पर फूल चढ़ाकर उन्हें याद किया और कहा कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए संगठन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

    जातिवादी राजनीति पर निशाना

    मायावती ने अपने बयान में यह भी कहा कि देश की मुख्यधारा की कई राजनीतिक पार्टियों की जातिवादी मानसिकता बहुजनों के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है। उनके अनुसार, राजनीतिक सत्ता की मास्टर चाबी बहुजनों के हाथ में न आए इसके लिए तरह-तरह के हथकंडों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के मिशन की सच्ची पूर्ति तभी होगी जब बहुजन समाज अपनी सामूहिक शक्ति को पहचानकर लोकतांत्रिक ढंग से संगठित होगा।

    एक स्पष्ट और मजबूत संदेश

    महापरिनिर्वाण दिवस पर मायावती का यह वक्तव्य केवल श्रद्धांजलि भर नहीं बल्कि बहुजन समाज को राजनीतिक रूप से जागरूक और संगठित होने का आह्वान भी है। उनका संदेश यह स्पष्ट करता है कि आने वाले समय में सामाजिक न्याय, बहुजन अधिकार, और राजनीतिक सक्रियता पर बसपा और अधिक जोर देने वाली है।

  • करीब एक महीने की फरारी के बाद JCP प्रमुख अमित बघेल गिरफ्तार; अग्रवाल और सिंधी समाज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का है गंभीर आरोप

    करीब एक महीने की फरारी के बाद JCP प्रमुख अमित बघेल गिरफ्तार; अग्रवाल और सिंधी समाज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का है गंभीर आरोप

     रायपुर /छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बीते दिनों उभरे विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलचल पैदा कर दी है। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी JCP के अध्यक्ष अमित बघेल को पुलिस ने धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। उनके खिलाफ आरोप है कि उन्होंने अग्रवाल समाज के पूजनीय महाराजा अग्रसेन और सिंधी समाज के आराध्य भगवान झूलेलाल के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं, जिससे दोनों समुदायों में नाराज़गी और वातावरण में तनाव बढ़ गया।

    गिरफ्तारी की कार्रवाई
    देवेंद्र नगर थाना अधिकारियों के अनुसार, अमित बघेल लंबे समय से पुलिस से बचने की कोशिश कर रहे थे और कई दिनों से फरार बताए जा रहे थे। शनिवार सुबह पुलिस ने उन्हें देवेंद्र नगर थाना क्षेत्र के पारस नगर चौक से गिरफ्तार किया। थाना प्रभारी जितेंद्र असैया ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने बघेल को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेजने का आदेश दिया।

    मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए अदालत ने बघेल को विशेष अनुमति दी कि वे पथरी गांव में अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल हो सकें। शुक्रवार सुबह उनकी मां का निधन होने से परिवार में शोक का माहौल था और अदालत ने इस आधार पर उन्हें सुरक्षा निगरानी में अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति प्रदान की।

    मामले की पृष्ठभूमि और दर्ज प्राथमिकी
    अमित बघेल के खिलाफ विवाद नया नहीं है। इस वर्ष अक्टूबर में रायपुर के तेलीबांधा, देवेंद्र नगर और कोतवाली थानों में तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। 26 अक्टूबर को तेलीबांधा क्षेत्र में घटी एक घटना ने इस विवाद को जन्म दिया। उस दिन छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा खंडित मिलने के बाद इलाके में तनाव फैल गया था।

    प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान बघेल ने कथित तौर पर महाराजा अग्रसेन और भगवान झूलेलाल सहित अग्रवाल और सिंधी समाज की आस्था के प्रतीकों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। पुलिस का कहना है कि इन टिप्पणियों ने दोनों समुदायों की धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई जिसके बाद उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

    प्रतिमा खंडित होने की घटना और प्रतिक्रिया
    तेलीबांधा थाना क्षेत्र के VIP चौक स्थित राम मंदिर के पास लगी छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा में हरे रंग की साड़ी धान की बाली और आशीर्वाद की मुद्रा वाला स्वरूप था। इसके टूटने की खबर फैलते ही वहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और संगठन पहुंच गए। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना तथा JCP के कार्यकर्ताओं ने इस घटना को छत्तीसगढ़ की अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान पर हमला करार दिया।

    इसी विवाद के दौरान अमित बघेल मीडिया से बातचीत में भड़काऊ बयानों में यह सवाल उठा बैठे कि राज्य में कुछ विशेष राष्ट्रीय नेताओं की प्रतिमाओं का अपमान क्यों नहीं होता। इसी क्रम में उन्होंने महाराजा अग्रसेन और भगवान झूलेलाल के संबंध में विवादित शब्दों का प्रयोग किया, जिसने बवाल खड़ा कर दिया। बाद में पुलिस ने प्रतिमा तोड़ने के आरोप में एक मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति को गिरफ्तार किया, परन्तु बघेल की टिप्पणी का असर समाज में बना रहा।

    सरकार की प्रतिक्रिया

    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बघेल की गिरफ्तारी को कानूनन जरूरी कदम बताया। उन्होंने कहा अमित बघेल ने कई धर्म और समुदायों के बारे में अनुचित टिप्पणी की थी। उनके खिलाफ पूर्व से ही प्राथमिकी दर्ज थी और आज उन्हें गिरफ्तार किया गया है। सरकार का कहना है कि ऐसी टिप्पणियां समाज में नफरत फैलाती हैं और कानून सभी के लिए समान है।

  • बीएलओ की अचानक मौत के 72 घंटे में पत्नी को मिली नौकरी, शिक्षा विभाग ने दिखाई संवेदनशीलता

    बीएलओ की अचानक मौत के 72 घंटे में पत्नी को मिली नौकरी, शिक्षा विभाग ने दिखाई संवेदनशीलता


    हाथरस ।
    उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सिकंदराराऊ क्षेत्र में एक अनूठी और संवेदनशील पहल देखी गई जब एक बीएलओ बूथ लेवल अधिकारी की अचानक हुई मौत के बाद प्रशासन ने सिर्फ 72 घंटे में उनकी पत्नी को नौकरी दे दी। यह कदम प्रशासन की तत्परता और संवेदनशीलता को दर्शाता है जिसने न केवल विधवा के परिवार की सहायता की बल्कि सरकारी सेवा में उनके जीवन को स्थिरता भी प्रदान की।

    क्या हुआ था

    सिकंदराराऊ के मोहल्ला ब्राह्मणपुरी मटकोटा निवासी कमलकांत शर्मा नावली लालपुर स्थित संविलियन विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। इसके साथ ही उन्हें एसआईआर सामाजिक आर्थिक और जातिगत जनगणना कार्य के तहत बीएलओ बूथ लेवल अधिकारी के रूप में भी तैनात किया गया था। 2 दिसंबर को जब वे अपनी ड्यूटी पर जाने के लिए घर से निकलने की तैयारी कर रहे थे, तो अचानक उन्हें चक्कर आ गया और वे गिर पड़े। उन्हें तुरंत अलीगढ़ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां इलाज के दौरान उनकी दुखद मौत हो गई।

    प्रशासन की तत्परता

    कमलकांत शर्मा की असामयिक मृत्यु के बाद उनके परिवार के सामने आर्थिक संकट आ गया। प्रशासन ने इस दुखद स्थिति को समझा और तुरंत कदम उठाए। सिर्फ 72 घंटे के भीतर, बेसिक शिक्षा विभाग ने उनकी पत्नी को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में उच्च प्राथमिक विद्यालय सिकंदराराऊ में नौकरी प्रदान की। यह नियुक्ति उनकी पत्नी को सहायक शिक्षक के तौर पर दी गई जिससे उन्हें परिवार का पालन-पोषण करने में मदद मिल सके। इस फैसले ने न केवल एक परिवार को सहारा दिया, बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया कि प्रशासनिक प्रणाली जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाती है विशेषकर ऐसी स्थितियों में जब किसी कर्मचारी के परिवार को अचानक संकट का सामना करना पड़े।

    शिक्षा विभाग का योगदान

    बेसिक शिक्षा विभाग ने इस संवेदनशील मामले में त्वरित कार्रवाई की। उन्होंने कमलकांत शर्मा की पत्नी को सरकारी सेवा में नियुक्त किया, जिससे उन्हें सरकारी नौकरी का लाभ मिला और परिवार को एक स्थिर आय का स्रोत प्राप्त हुआ। यह कदम निश्चित रूप से अन्य अधिकारियों के लिए एक आदर्श बन सकता है, जो अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इस तरह के संवेदनशील मामलों में तत्परता से काम करने की प्रेरणा देता है।

    भविष्य में और क्या किया जा सकता है

    इस मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि सरकारी विभागों को ऐसे मामलों में और अधिक संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए। जहां एक तरफ परिवार को सरकारी नौकरी देने का कदम सराहनीय है वहीं दूसरी तरफ अन्य प्रशासनिक सहायता, जैसे वित्तीय मदद और शिक्षा की व्यवस्था, भी उन्हें दी जा सकती है ताकि परिवार को पूरी तरह से सशक्त किया जा सके। यह कदम एक मिसाल पेश करता है कि किस तरह से सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उनके परिवार को समर्थन देने के लिए प्रशासन को जल्दी और संवेदनशीलता से कदम उठाना चाहिए।

    सिकंदराराऊ में बीएलओ कमलकांत शर्मा की असामयिक मौत के बाद प्रशासन द्वारा उनकी पत्नी को 72 घंटे के भीतर नौकरी देने का कदम निश्चित ही सराहनीय है। यह प्रशासन की संवेदनशीलता और तत्परता का परिचायक है। सरकारी विभागों द्वारा इस तरह की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि मुश्किल समय में प्रशासन अपने कर्मचारियों के परिवारों के साथ खड़ा होता है।

  • छत्तीसगढ़ में आरआई प्रमोशन परीक्षा घोटाला: पति-पत्नी ने मिलकर दी परीक्षा, फेल पटवारी को पास किया गया

    छत्तीसगढ़ में आरआई प्रमोशन परीक्षा घोटाला: पति-पत्नी ने मिलकर दी परीक्षा, फेल पटवारी को पास किया गया


    रायपुर ।
    छत्तीसगढ़ में राजस्व निरीक्षक आरआई प्रमोशन परीक्षा में हुए बड़े घोटाले ने राज्य प्रशासन और पुलिस को हिलाकर रख दिया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ईओडब्ल्यू की जांच में यह सामने आया है कि प्रमोशन परीक्षा में व्यापक हेराफेरी की गई थी जिसमें 18 से ज्यादा लोग शामिल थे। इस मामले की जांच के तहत 19 नवंबर को सात जिलों में 19 ठिकानों पर दबिश दी गई और कई अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए गए। इन सबूतों के आधार पर ईओडब्ल्यू ने अपराध दर्ज कर लिया है और अब जांच तेज कर दी गई है।
    जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताए
    ईओडब्ल्यू की जांच में यह सामने आया है कि राजस्व निरीक्षक प्रमोशन परीक्षा में गंभीर अनियमितताएं की गईं। इसमें कुछ ऐसे मामले भी पाए गए हैं जहां पति-पत्नी और भाई-भाई को एक ही परीक्षा केंद्र पर पास-पास बैठाकर नकल करने का मौका दिया गया। ऐसा करने से यह संदेह पैदा हुआ कि यह घोटाला किसी बड़े नेटवर्क द्वारा संचालित किया जा रहा था जिसमें कई लोग शामिल थे।

    एक और चौंकाने वाला मामला तब सामने आया जब एक फेल हुए पटवारी को बाद में परीक्षा में पास दिखा दिया गया। इस घोटाले में पटवारियों को अनुचित तरीके से राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति दिलवाने का मामला सामने आया है जिससे यह साफ हो गया कि परीक्षा में नियमों का उल्लंघन कर परिणामों में हेराफेरी की गई थी।

    आरोपितों की गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई

    इस घोटाले के आरोप में 10 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। इनमें से दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। बाकी आठ आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस जल्द ही कदम उठाने वाली है। ईओडब्ल्यू ने इस घोटाले में संलिप्त 18 से ज्यादा लोगों की पहचान की है और माना जा रहा है कि जांच के दौरान और भी बड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

    घोटाले में पति-पत्नी की संलिप्तता

    एक मामले में पति-पत्नी ने साथ बैठकर परीक्षा दी जिससे नकल करने में सुविधा हो। इस तरह की अनियमितताओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि परीक्षा और उसके परिणामों को प्रभावित करने के लिए बड़ी साजिश रची गई थी। इस मामले में आरोपितों ने प्रमोशन परीक्षा के पूरे प्रक्रिया को धोखाधड़ी से प्रभावित किया और निर्दोष उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचाया।

    बडी कार्रवाई की संभावना

    आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ईओडब्ल्यू की जांच अभी जारी है और इस मामले में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। इसके अलावा, ईओडब्ल्यू द्वारा पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के बाद और भी जानकारी मिल सकती है जिससे घोटाले के पीछे की सच्चाई और सामने आ सकती है। छत्तीसगढ़ में इस बड़े घोटाले ने राज्य सरकार के सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब जनता और प्रशासन दोनों को यह देखने का इंतजार है कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों को सजा दी जाती है या नहीं।

    राजस्व निरीक्षक प्रमोशन परीक्षा घोटाले ने यह साबित कर दिया है कि कुछ लोग सरकारी पदों पर पहुंचने के लिए गलत रास्ते अपनाने से नहीं चूकते। अब यह देखना होगा कि ईओडब्ल्यू इस मामले में कितनी बड़ी कार्रवाई करती है और घोटाले में शामिल सभी लोगों को सजा मिलती है। ऐसे घोटाले न केवल प्रशासन की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि जनता के विश्वास को भी हिला देते हैं।

  • मप्रः अब भोपाल में पर्यटकों को मिलेगा कश्मीर की डल झील जैसा अनुभव

    मप्रः अब भोपाल में पर्यटकों को मिलेगा कश्मीर की डल झील जैसा अनुभव


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया 20 नवीन शिकारा नाव सेवा का शुभारंभ

    भोपाल। मध्‍य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राजा भोज की नगरी भोपाल में लगभग एक हजार साल पहले बने बड़े तालाब में ‘शिकारा नाव’ सेवा का शुभारंभ ऐतिहासिक अवसर है। इन नवीन 20 शिकारों के माध्यम से पर्यटकों को कश्मीर की प्रसिद्ध डल झील का आनंद, झीलों की नगरी भोपाल में ही मिल जाएगा।

    यह बात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को भोपाल के बोट क्लब पर ‘शिकारा नाव’ सेवा को झंडी दिखाने के बाद कही। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, हरियाणा के विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक एवं अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल विशेष रूप से उपस्थित थे।

    मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिकारों में पर्यटकों के लिए खान-पान एवं आरामदायक बैठक व्यवस्था की गई है। ये शिकारे प्रदेश के जल-पर्यटन (वॉटर टूरिज्म) को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलवाएंगे। प्रदेशवासी पर्यटन सेवा का लाभ उठाने के लिए आगे आएं। एम.पी. टूरिज्म, वॉटर स्पोर्ट्स गतिविधियों को भी आगे बढ़ा रहा है। शिकारा सेवा का आनंद उठाते हुए पर्यटक स्वदेशी उत्पादों की खरीद भी कर पाएंगे। उन्हाेंने कहा कि मध्यप्रदेश ने वन्य जीवों के पुनर्वास में भी इतिहास रचा है। आज अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर कूनो में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में वन्य जीव पर्यटन को लेकर आपार संभावनाएं विद्यमान हैं। नर्मदा वैली सहित प्रदेश की बड़ी-बड़ी जल परियानाओं के माध्यम से पर्यटकों को आकर्षित करने वाली गतिविधियां को बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। पिछले एक साल में उज्जैन आने वाले पर्यटकों की संख्या 7 करोड़ के पार पहुंच गई।

    शिकारे की सैर का लिया आनंद

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिकारों को झंडा दिखाने के बाद बड़े तालाब में शिकारे की सैर का आनंद लिया और उपलब्ध सुविधाओं की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और गणमान्य नागरिकों ने शिकारा बोट रेस्टोरेंट से चाय, पोहा, समोसे एवं फलों का जायका लिया। साथ ही फ्लोटिंग बोट मार्केट से मुख्यमंत्री ने प्रदेश की पारम्परिक कला बाघ और बटिक वस्त्रों, जैविक उत्पादों आदि की खरीदारी भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोट क्लब पर मौजूद छात्र-छात्राओं के साथ सेल्फी ली और अथितियों के साथ टेलीस्कोप से सूर्य के दर्शन किए। टेलीस्कोप की बोट क्लब पर व्यवस्था वैज्ञानिक पर्यटन को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से आंचलिक विज्ञान केंद्र भोपाल द्वारा की गई थी।

    विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि राजधानी की इतनी बड़ी झील में शिकारा सेवा की शुरुआत बहुत आकर्षक है। इससे प्रदेश में पर्यटन के अवसर बढ़ेंगे, पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे।

    देश के दिल भोपाल का विशेष दर्जा है : हरियाणा वि.स. अध्यक्ष हरविंदर

    शिकारा सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में हरियाणा के विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि भोपाल सभी भारतवासियों के दिल के करीब है, यह शहर देशभर में अलग दर्जा हासिल किए हुए है। बड़े तालाब में शिकारे चलते देखने का दृश्य अविस्मरणीय है। वरिष्ठ विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेशवासियों को कश्मीर की डल झील जैसा अनुभव भोपाल में होगा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव, डल झील के शिकारों के माध्यम से कश्मीर को मध्यप्रदेश ले आएं हैं। मध्यप्रदेश टूरिज्म की यह पहल सराहनीय है।

    उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर शिकारों का संचालन किया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए सभी 20 शिकारों का निर्माण प्रदूषण रहित आधुनिक तकनीक से किया गया है। इनका निर्माण ‘फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीयूरिथेन’ और उच्च गुणवत्ता वाली नॉन-रिएक्टिव सामग्री से हुआ है, जो जल के साथ किसी भी प्रकार की रासायनिक क्रिया नहीं करती। इससे बड़े तालाब की पारिस्थितिकी और जल की शुद्धता पूर्णतः सुरक्षित रहेगी। ये शिकारे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था द्वारा निर्मित किए गए हैं, जिनके द्वारा निर्मित शिकारे केरल, बंगाल और असम में भी पर्यटकों द्वारा अत्यंत पसंद किए जा रहे हैं। भोपाल का बोट क्लब इन आकर्षक शिकारों के साथ पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। शिकारों पर नौकायन का आनंद लेने के साथ पर्यटक बर्ड वाचिंग, हैंडीक्रॉफ्ट प्रोडक्ट, स्थानीय व्यंजन, आर्गेनिक वेजिटेबल्स और फ्रूट्स आदि भी खरीद सकेंगे।

    इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, महापौर भोपाल श्रीमती मालती राय, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, जिलाध्यक्ष रवींद्र यति सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में पर्यटन प्रेमी उपस्थित थे।

  • मप्रः नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत तीन नेताओं को मानहानी मामले में कोर्ट का नोटिस

    मप्रः नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत तीन नेताओं को मानहानी मामले में कोर्ट का नोटिस


    जबलपुर।
    विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट डीपी सूत्रकार की एमपी-एमएलए कोर्ट ने मध्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, कांग्रेस विधायक अजय सिंह राहुल और लखन घनघोरिया को नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई नेशनल हेल्थ मिशन के जिला प्रोग्राम (डीपीएम) विजय पांडे द्वारा दायर मानहानि केस के बाद हुई है। कोर्ट ने तीनों नेताओं को 16 जनवरी को पेश होने के आदेश दिए हैं।

    दरअसल, कांग्रेस नेताओं ने नेशनल हेल्थ मिशन के जिला प्रोग्राम मैनेजर विजय पांडे पर फर्जी अंकसूची के सहारे नौकरी पाने का आरोप लगाया था। अगस्त 2025 में इस मुद्दे पर न केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई, बल्कि विधानसभा में भी हंगामा कर कांग्रेस विधायकों ने वॉक आउट किया था। विधानसभा में हंगामे के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक सलोनी सिडाना ने उन्हें पद से हटा दिया था।

    हालांकि. विभागीय जांच में पांडे पर लगाए गए आरोप झूठे पाए गए। मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल ने भी अंकसूची को सही बताया और किसी तरह की गड़बड़ी न मिलने की पुष्टि की। इसके बाद पांडे ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था। इसके बाद विभागीय जांच और एमपी शिक्षा बोर्ड की जांच रिपोर्ट में उनकी अंकसूची सही पाई गई। रिपोर्ट के अनुसार विपक्ष के आरोप तथ्यहीन थे और गलत जानकारी के आधार पर सरकार को घेरने की कोशिश की गई थी। कोर्ट के नोटिस के बाद अब सभी तीन नेताओं को 16 जनवरी को एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश होकर अपना पक्ष रखना होगा।

    इस मामले में कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने गुरुवार को कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना हमारा काम है। किसी विभाग में अगर अराजकता की स्थिति बन रही है तो उसे उठाना हमारा काम है, जनता से हमें शिकायत मिली तो हमने उसका विरोध किया अब कोई अगर मानहानि करता है तो कोर्ट के समक्ष जाकर देखेंगे।

  • पूनम के भीतर किसी और की आवाज आत्मा आने’ और अजीब हरकतों पर परिवार ने बताए डरावने किस्से

    पूनम के भीतर किसी और की आवाज आत्मा आने’ और अजीब हरकतों पर परिवार ने बताए डरावने किस्से


    हरियाणा । हरियाणा के पानीपत जिले के भावड़ गांव में एक खौ़फनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है जहां एक साधारण और शांत बहू पूनम ने चार मासूमों की हत्या की। इस दिल दहला देने वाले मामले ने न केवल उसकी परिवारिक छवि को ध्वस्त किया बल्कि यह सवाल भी खड़ा किया कि क्या वह मानसिक रूप से अस्वस्थ थी या फिर उसकी यह हिंसक प्रवृत्ति कुछ और ही थी।

    पूनम जो 2023 से पहले तक एक सामान्य महिला मानी जाती थी, के व्यवहार में अचानक बदलाव आया था। उसके परिवार के सदस्य बताते हैं कि कभी-कभी पूनम का चेहरा और आचरण बिल्कुल बदल जाता था, और वह गुस्से में कहती सबका नाश कर दूंगी जैसे उसके अंदर कोई और बोल रहा हो। उसकी इस अजीब हरकत को देखकर परिवार को लगता था कि शायद वह मानसिक असंतुलन का शिकार हो रही है। हालांकि उस समय किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

    पूनम की मानसिक स्थिति के बारे में उसके परिवार के लोग अब खुलकर बयान दे रहे हैं। पूनम ने अपनी जेठानी की छह साल की बेटी विधि को जानबूझकर गर्म चाय गिराकर घायल कर दिया था और जब इस बारे में पूछताछ की गई तो उसने कहा ये बड़ी होकर बहुत खूबसूरत हो जाती इसलिए इसका चेहरा जला दिया। इसके बाद वह अपनी हरकतों को छिपाने की बजाय एक सामान्य व्यक्तित्व दिखाती थी जिससे परिवार और आसपास के लोग उसे कभी भी शक की निगाह से नहीं देख पाए।

    पूनम की पढ़ाई भी काफी अच्छी थी, उसने एमए पॉलिटिकल साइंस और B.Ed किया था। लेकिन उसकी बाहरी छवि के विपरीत वह अंदर से हिंसक और अस्वस्थ मानसिकता की हो गई थी। 2023 में उसने अपनी ननद की 11 साल की बेटी इशिका को पानी में डुबोकर मार डाला, और उसके बाद अपने बेटे शुभम को भी उसी तरह डुबोकर हत्या कर दी। पूनम ने इसे हादसा बताकर सबको गुमराह किया लेकिन किसी को यह अंदाजा नहीं था कि एक मां अपने ही बच्चे की जान ले सकती है।

    इसके बाद 2025 में पूनम ने अपनी मायके गई भतीजी जिया और फिर जेठानी की बेटी विधि की हत्या की। जिया को पूनम ने पानी से भरे टब में दबाकर मार डाला और विधि की हत्या भी उसी तरीके से की। पुलिस ने जब घटना की जांच शुरू की, तो कई चीजें संदिग्ध लगीं। विशेष रूप से, यह तथ्य कि हर बार हत्या के समय पूनम ही आसपास थी और उसकी हरकतें बहुत अजीब थीं।

    पुलिस की पूछताछ में पूनम ने कबूल किया कि उसे सुंदर बच्चों से जलन होती थी, और वह उन्हें मारकर शांति महसूस करती थी। उसने यह भी कहा कि किसी और की आत्मा उसके शरीर में सवार हो जाती थी, जिससे वह यह घिनौनी हत्या करने पर मजबूर हो जाती थी। पूनम ने पुलिस को बताया कि उसने चार हत्याएं कीं इशिका ननद की बेटी शुभम अपना बेटा जिया मायके की भतीजी और विधि जेठानी की बेटी।

    पूनम के परिवार में लोग अब भी यह मानने के लिए तैयार नहीं हैं कि उनके बीच की शांत और समझदार बहू इतनी निर्दयी हो सकती थी। उसकी सास का कहना है कि उन्होंने हमेशा उसे बेटी की तरह प्यार किया था और अब वह खुद को दोषी महसूस कर रही हैं कि उन्होंने उसके मानसिक असंतुलन को समय रहते नहीं पहचाना। गांव के लोग भी बताते हैं कि पूनम के चेहरे पर अक्सर एक अजीब सा बदलाव आ जाता था जैसे किसी और की आत्मा उस पर सवार हो जाती थी।

    पुलिस ने पूनम की मानसिक स्थिति का मेडिकल परीक्षण कराने की योजना बनाई है लेकिन उसकी बाद हत्या के बाद का शांत और सामान्य व्यवहार एक खतरनाक मानसिक बीमारी या सायकोसिस जैसी स्थिति का संकेत देता है। इस मामले में अभी भी कई सवाल उठते हैं और जांच जारी है ताकि यह पता चल सके कि पूनम के अपराध के पीछे का असली कारण क्या था।

  • मध्य प्रदेश में दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का हुआ विस्तार

    मध्य प्रदेश में दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का हुआ विस्तार


    – मुख्यमंत्री ने की जल संसाधन विभाग की समीक्षा, कहा- प्रदेश की सिंचाई क्षमता 100 लाख हैक्टयर तक बढ़ाएंगे

    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में गत दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित हुई है। प्रदेश की सिंचाई क्षमता में वर्ष 2026 तक 8.44 लाख हैक्टयर की वृद्धि होगी। प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र 100 लाख हैक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य लेकर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल का प्रयोग कर की जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को विधानसभा समिति कक्ष में जल संसाधन विभाग और नर्मदा घाटी विकास विभाग की गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने पार्वती-काली-सिंध और चम्बल अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना, केन-बेतवा अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना की स्वीकृति और केंद्र सरकार के सहयोग को राज्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए राज्य में भी विभिन्न नदियों को जोड़ने के लिए नदी जोड़ो परियोजना के क्रियान्वयन के निर्देश दिए।

    बैठक में जल संसाधन विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि इस दिशा में राज्य में अध्ययन और सर्वेक्षण का कार्य किया गया है। राज्य में नदी जोड़ो परियोजना अंतर्गत उज्जैन जिले में कान्ह-गंभीर, मंदसौर, नीमच और उज्जैन में कालीसिंध-चंबल, सतना जिले में केन और मंदाकिनी, सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिले में शक्कर पेंच और दूधी तामिया, रायसेन जिले में जामनेर नेवन और नेवन-बीना नदियों का सर्वेक्षण किया गया है। इस सभी के क्रियान्वयन से कुल 5 लाख 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा सकेगी। इनकी अनुमानित लागत 9870 करोड़ रुपए होगी। सात जिलों के हजारों किसान इन योजनाओं से लाभान्वित होंगे।

    राज्य की नदियों में बाढ़, जल प्रबंधन, जल के समुचित उपयोग नदी कछारों में पर्याप्त जल की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने के उद्देश्य से राज्य की नदियों को आपस में जोड़ने के लिए तकनीकी दल का गठन 13 नवम्बर 2024 को किया गया था।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल की झील की प्राचीन तकनीक का अध्ययन कर इस तर्ज पर कम लागत में सुरक्षित जलाशय एवं बांध निर्माण की अवधारणा पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने भोपाल के इस मॉडल का प्रदर्शन करने के निर्देश भी विभाग को दिए। मुख्यमंत्री को जानकारी दी गई कि राज्य में जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा सिंचाई सुविधाओं के विस्तार का कार्य निरंतर किया जा रहा है।

    बैठक में बताया गया कि सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना उज्जैन जिसकी लागत 614.53 करोड़ रुपए है। इसकी भौतिक प्रगति 48 प्रतिशत है। इसी तरह कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना उज्जैन की लागत 919.94 करोड़ है। इस परियोजना की भौतिक प्रगति 42 प्रतिशत है। सिंहस्थ: 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाट निर्माण एवं संबद्ध कार्य किए जा रहे हैं, जिनकी लागत 778.91 करोड़ है। बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, मुख्य सचिव अनुराग जैन और संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    प्रमुख बिन्दु

    – प्रदेश में गत दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित।
    – प्रदेश की सिंचाई क्षमता में वर्ष 2026 तक 8.44 लाख हैक्टयर की वृद्धि होगी।
    – प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र 100 लाख हैक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य।
    – प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल का प्रयोग कर की जाएगी।
    – राज्य में भी विभिन्न नदियों को जोड़ने के लिए नदी जोड़ो परियोजना के क्रियान्वयन के निर्देश।
    – राज्य में नदी जोड़ो परियोजना अंतर्गत उज्जैन जिले में कान्ह-गंभीर, मंदसौर, नीमच और उज्जैन में कालीसिंध-चंबल, सतना जिले में केन और मंदाकिनी, सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिले में शक्कर पेंच और दूधी तामिया, रायसेन जिले में जामनेर नेवन और नेवन-बीना नदियों का सर्वेक्षण किया गया।
    – सभी के क्रियान्वयन से कुल 5 लाख 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा सकेगी।
    – इनकी अनुमानित लागत 9870 करोड़ रुपये होगी।
    – सात जिलों के हजारों किसान इन योजनाओं से लाभान्वित होंगे।
    – सिंहस्थ: 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाट निर्माण एवं संबद्ध कार्य किए जा रहे हैं, जिनकी लागत 778.91 करोड़ है।