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  • बिहार निवेश के मामले में आज भी पिछड़ा राज्य… निवेशकों को आकर्षित करने में सबसे पीछे

    बिहार निवेश के मामले में आज भी पिछड़ा राज्य… निवेशकों को आकर्षित करने में सबसे पीछे


    पटना।
    बिहार (Bihar) आज भी निवेश (Investment) आकर्षित करने की कसौटी पर सबसे पिछड़ा राज्य है। आधारभूत संरचना, संसाधनों की उपलब्धता, कारोबारी माहौल और जमीन आवंटन की जटिलता के मोर्चे पर राज्य आज भी पिछड़ा है। नीति आयोग (NITI Aayog) की हालिया रैकिंग रिपोर्ट (Ranking Report) में बिहार देश के बड़े 17 राज्यों में सबसे नीचे 17वें स्थान पर और 36 राज्यों में 26वें स्थान पर है। नीति आयोग द्वारा जुलाई 2026 में जारी निवेश अनुकूल सूचकांक में बिहार को देश के तीसरे श्रेणी के राज्यों में शामिल किया गया है।

    रिपोर्ट में राज्य को सौ अंकों में कुल 41.2 अंक ही प्राप्त हुए हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट में मानकों के अनुरूप राज्यों को चार श्रेणियों में बांटा गया है। तीसरी श्रेणी (40 से 45 अंक) में बिहार के साथ झारखंड, पंजाब, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, मेघालय, नागालैंड और पुदुचेरी शामिल हैं। वहीं, उच्च प्रदर्शन (50 से अधिक अंक) वाले पांच राज्यों में गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और तामिलनाडु शामिल हैं।


    प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में निचले पायदान पर

    निवेश अनुकूल सूचकांक में बताया गया है कि बिहार में वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) सिर्फ 0.16 मिलियन डॉलर रहा जबकि इसी वित्तीय वर्ष में महाराष्ट्र में 15,116 मिलियन डॉलर, दिल्ली में 6523.43 मिलियन डॉलर और कर्नाटक में 6571 मिलियन डॉलर रहा। कुल एफडीआई का 85 प्रतिशत हिस्सा महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, दिल्ली, तामिलनाडु को मिल जाता है। इसी तरह पेटेंट के मामले में भी बिहार फिसड्डी रहा। रिपोर्ट के अनुसार बिहार से वित्तीय वर्ष 2023 में कंपनियों द्वारा कुल दाखिल पेटेंट का 0.48 प्रतिशत ही दाखिल हो सका।

    जबकि देश के बड़े राज्यों का औसत पेटेंट दाखिल करने की दर 3.6 प्रतिशत रही। रिपोर्ट में राज्य में समर्पित(डेडिकेटेड) औद्योगिक पार्क, औद्योगिक आधारभूत संरचना के अलावा निवेश आकर्षित करने के लिए संरक्षा और सुरक्षा की दिशा में काम करने की सलाह दी गई है। आधारभूत संरचना, कारोबारी माहौल, संसाधन, सरकारी नीतियां, विनियामक सुगमता, वित्तीय सेहत, संस्थागत वातावरण (इंस्टीटयूशनल इन्वायरमेंट) और पर्यावरणीय लचीलापन की बात भी कही गई।


    दूरगामी रणनीति अपनानाी होगी

    अर्थशास्त्री और नालंदा विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर सुधांशु कुमार के अनुसार निवेश अनुकूल सूचकांक में बिहार की खराब स्थिति चिंता का विषय है। बड़े राज्यों में सबसे नीचे बिहार की स्थिति राज्य की गहरी संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर करती है जो पहले भी कई अध्ययनों में सामने आती रही हैं। नवाचार और एमएसएमई आधार दोनों ही पिछड़े हैं, जबकि सुरक्षा, भूमि आवंटन और रोजगार की कमी निवेशकों को रोकती है। रिपोर्ट के अनुसार प्रति व्यक्ति जीएसडीपी बड़े राज्यों के औसत से 72 फीसदी कम है। निर्णायक दृष्टि और समयबद्ध दूरगामी रणनीति अपनाकर बिहार निम्न विकास के जाल से बाहर निकल सकता है और एक सशक्त आर्थिक भविष्य की ओर बढ़ सकता है।


    क्या है निवेश अनुकूल सूचकांक

    निवेश अनुकूल सूचकांक के तहत देश के विभिन्न राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में निवेशक और व्यवसाय के लिए कितना अनुकूल माहौल है। इसका मूल्यांकन किया गया है। नीति आयोग ने देश में पहली बार राज्यों की निवेश तैयारियों का मूल्यांकन कर रिपोर्ट और रैंकिंग जुलाई 2026 में जारी की है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार देश में मजबूत निवेश पारिस्थितिकी तंत्र(इकोसिस्टम) विकसित कर देश को 2047 तक विकसित देश बनाने के उद्देश्य से इस सूचकांक को जारी किया गया है। इसमें देश के सभी 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश को विभिन्न श्रेणियों के तहत शामिल किया गया है।


    कमियां गिनाईं, सुझाव दिये

    1. बिहार में भूमि आवंटन प्रक्रिया जटिल और उलझाऊ है
    2. रोजगार के अवसर सीमित हैं।
    3. राज्य के द्वितीय और तृतीय श्रेणी वाले शहरों में वायु संपर्कता कम है
    4. बिजली की निर्बाध उपलब्धता के लिए अभी और काम करने की जरूरत है
    5. निवेश आकर्षित करने के लिए संरक्षा और सुरक्षा पर फोकस करने की जरुरत

  • राजस्थान HC विवाद…. कॉलेजियम का बड़ा फैसला…. चीफ जस्टिस के लिए की नए नाम की सिफारिश

    राजस्थान HC विवाद…. कॉलेजियम का बड़ा फैसला…. चीफ जस्टिस के लिए की नए नाम की सिफारिश


    नई दिल्ली।
    राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) के कार्यवाहक चीफ जस्टिस (Acting Chief Justice) संजीव प्रकाश शर्मा (Sanjeev Prakash Sharma) को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) ने सोमवार शाम बड़ा फैसला लिया। कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जज संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश की है। इस बीच जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा छुट्टी पर चले गए हैं। यह सिफारिश ऐसे समय हुई है जब राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ वकीलों का विरोध तेज हो गया है। इसी दिन जस्टिस शर्मा ने न्यायिक कार्य से खुद को अलग कर लिया।


    जस्टिस शर्मा के खिलाफ क्या आरोप लगे?

    सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता ने 2, 10 और 17 अगस्त को CJI सूर्यकांत को पत्र लिखे थे। इन पत्रों में उन्होंने जस्टिस शर्मा पर ‘पावर के दुरुपयोग’ का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें ऐसी कई शिकायतें मिली हैं, जिनसे कार्यवाहक चीफ जस्टिस की ईमानदारी पर सवाल उठते हैं।

    जस्टिस मेहता ने यह भी मांग की थी कि जस्टिस शर्मा को किसी दूसरे हाईकोर्ट में ट्रांसफर किया जाए और राजस्थान हाईकोर्ट में नया चीफ जस्टिस नियुक्त किया जाए। कॉलेजियम की बैठक में इन आरोपों पर भी चर्चा हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, कॉलेजियम इन आरोपों की जांच कर सकता है। शिकायत में कथित तौर पर जिन कुछ आदेशों पर सवाल उठाए गए हैं, उन्हें भी जांच के दायरे में लाया जा सकता है। हालांकि, जस्टिस शर्मा 26 सितंबर को रिटायर होने वाले हैं, इसलिए कॉलेजियम इस मामले में सावधानी से आगे बढ़ने के पक्ष में है।


    1 से 5 सितंबर तक नहीं बैठेंगे जस्टिस शर्मा

    राजस्थान हाईकोर्ट के अपडेटेड रोस्टर के मुताबिक, जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा 1 सितंबर से 5 सितंबर तक किसी बेंच में नहीं बैठेंगे। उनकी बेंच के मामलों को दूसरी बेंचों को सौंप दिया गया है। जस्टिस शर्मा को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में वकीलों का विरोध भी तेज हो गया है।

    जयपुर में कुछ वकील कार्यवाहक चीफ जस्टिस की अदालत के बाहर बैठ गए और नारेबाजी की। जोधपुर में दोनों वकील संगठनों ने रविवार तक हड़ताल का ऐलान किया। उनकी मांग है कि जस्टिस शर्मा को न्यायिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाए। वकील संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को मजबूत प्रतिनिधित्व भेजने का भी फैसला किया है।


    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने और किन नामों की सिफारिश की?

    राजस्थान हाईकोर्ट के लिए संजय कुमार अग्रवाल के अलावा कॉलेजियम ने जस्टिस पुष्पेंद्र भाटी को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है। जस्टिस भाटी राजस्थान हाईकोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज हैं। वहीं गुजरात हाईकोर्ट के जज अल्पेश यशवंत कोगजे को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई है। इन तीन सिफारिशों के बाद चीफ जस्टिस की नियुक्ति से जुड़ी कुल सात सिफारिशें सरकार के पास लंबित होंगी।


    कॉलेजियम ने कहा- आरोपों को निष्कर्ष नहीं माना जा सकता

    जस्टिस शर्मा के खिलाफ आरोपों को लेकर CJI सूर्यकांत ने 26 अगस्त को एक बयान में कहा था कि उन्होंने और कॉलेजियम के अन्य सदस्यों ने जस्टिस संदीप मेहता की चिंताओं पर ध्यान दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी मौजूदा जज के खिलाफ लगाए गए आरोपों से स्थापित संस्थागत प्रक्रिया के तहत निपटा जाना चाहिए। संबंधित जज को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना जरूरी है और सिर्फ आरोप लगाए जाने से उन्हें निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। CJI ने यह भी कहा था कि कॉलेजियम पहले से ही बाकी हाईकोर्ट में नियमित चीफ जस्टिस की नियुक्ति की प्रक्रिया पर काम कर रहा था।


    10 महीने से कार्यवाहक चीफ जस्टिस थे शर्मा

    जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा करीब 10 महीने से राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस के तौर पर काम कर रहे थे। सितंबर 2025 में जस्टिस एस. श्रीराम के चीफ जस्टिस पद से रिटायर होने के बाद उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली थी। अब कॉलेजियम ने उनकी जगह छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जज संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है।

  • UP: वाराणसी को मिलेगी बड़ी सौगात…200 करोड़ से बनेगा प्रदेश का पहला अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल

    UP: वाराणसी को मिलेगी बड़ी सौगात…200 करोड़ से बनेगा प्रदेश का पहला अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल


    वाराणसी।
    वाराणसी (Varanasi) में प्रदेश का पहला अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल (International Cruise Terminal) बनाया जाएगा। आईडब्ल्यूएआई की ओर से निर्माण कराया जाएगा। नगर निगम सामनेघाट में 2 एकड़ जमीन उपलब्ध कराएगा। इस क्रूज टर्मिनल (Cruise Terminal) पर दुनिया भर से बड़े जहाजों और मालवाहकों का ठहराव होगा। पर्यटन के साथ जल परिवहन के जरिये हल्दिया तक की यात्रा होगी। रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। निर्माण में 200 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

    आईडब्ल्यूएआई के निदेशक संजीव कुमार ने बताया कि जल्द ही जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सामनेघाट में बनने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल में एक समय में 10,000 यात्रियों की क्षमता होगी। इमिग्रेशन काउंटर, कस्टम्स काउंटर, डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर, बैगेज स्कैनर, सुरक्षा जांच काउंटर, सीसीटीवी निगरानी, पब्लिक एड्रेस सिस्टम होगा।

    यात्रियों के लिए पैसेंजर लाउंज, बैगेज ट्रॉली, इलेक्ट्रिक बग्गी, शौचालय, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट होंगे। इसके अलावा कैफेटेरिया और ड्यूटी-फ्री शॉपिंग के लिए व्यावसायिक जगह भी होगी। वाहन पार्किंग और प्रीपेड टैक्सी की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। टर्मिनल को दिव्यांग-अनुकूल बनाया जाएगा। अभी मुख्यालय में डीपीआर तैयार की जा रही है।


    कोच्चि से 3.6 गुना बड़ा होगा क्रूज टर्मिनल

    कोच्चि के सागरिका में 2,253 वर्गमीटर क्रूज टर्मिनल बनाया गया है। कोच्चि टर्मिनल में 48 इमिग्रेशन काउंटर, 10-12 कस्टम काउंटर, बैगेज स्कैनर, लाउंज, ड्यूटी-फ्री शॉप और पार्किंग जैसी सुविधाएं हैं। इसके मुकाबले वाराणसी में सामनेघाट पर दो एकड़ यानी 8,094 वर्गमीटर में टर्मिनल का निर्माण होगा। ऐसे में वाराणसी का प्रस्तावित टर्मिनल क्षेत्रफल के लिहाज से कोच्चि से करीब 3.6 गुना बड़ा होगा।


    रोजगार और व्यापार के बढ़ेंगे अवसर

    टर्मिनल के निर्माण के बाद वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय स्तर की योजनाओं के एक बेड़े में एक और उपलब्धि जुड़ जाएगी। टर्मिनल बन जाने से देश विदेश से व्यापार बढ़ जाएगा। अभी तक जो व्यापार पानी के रास्ते नहीं हो पा रहा था वो आने वाले समय में संभव होगा। इसके साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

  • Prayagraj : स्वामी नारायण मंदिर का 3 मंजिला हिस्सा भरभराकर गड्ढे में गिरा…

    Prayagraj : स्वामी नारायण मंदिर का 3 मंजिला हिस्सा भरभराकर गड्ढे में गिरा…


    प्रयागराज।
    संगम नगरी प्रयागराज (Confluence City Prayagraj) में शुक्रवार देर रात बारिश के दौरान बड़ा हादसा हो गया. यहां स्वामी नारायण मंदिर (Swaminarayan Temple) का तीन मंजिला हिस्सा भरभराकर गड्ढे में जा गिरा. तेज आवाज के साथ हुए हादसे से आस-पास के लोग दहशत में आ गए.‌ ऐसा लगा जैसे कोई आस-पास बड़ा विस्फोट हुआ है, लेकिन जब लोग अपने घरों से बाहर निकले तो देखा कि स्वामी नारायण मंदिर का एक हिस्सा धराशाई हो चुका है।

    दरअसल, मंदिर के पीछे निर्माण कार्य चल रहा है. बताया जा रहा है कि इसी निर्माण कार्य के चलते बगल में गड्ढा खोदा. बारिश के चलते गड्ढे में पानी भर जाता था. पिछले तीन-चार महीने से निर्माण कार्य चल रहा था, लेकिन इन दिनों बारिश के चलते निर्माण कार्य बंद था. आशंका जताई जा रही है कि गड्ढे की वजह से मंदिर में बने कमरे की नींव कमजोर हो गई थी. इससे देर रात उसी गड्ढे में मंदिर का तीन मंजिला हिस्सा भरभरा कर गिर गया. हालांकि गनीमत यह रही कि उसे वक्त वहां पर कोई मौजूद नहीं था, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई है।

    मंदिर के सुरक्षा गार्ड सूबेदार सिंह ने बताया कि यहां पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आकर रुकते थे. खास तौर पर दक्षिण भारतीय श्रद्धालु यहां पर आकर ठहरते हैं. मंदिर का जो हिस्सा गिरा है वह धर्मशाला के रूप में प्रयोग किया जाता था. स्वामी नारायण मंदिर केपी कम्युनिटी सेंटर के सामने जार्ज टाउन थाना क्षेत्र में स्थित है।

    वहीं पुलिस और प्रशासन भी इस मामले में जांच पड़ताल में जुट गया है. हादसे में कोई जनहानि न होने से प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है. हादसे के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रशासन बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

  • उत्तराखंड में 13 ग्लेशियल झीलें संवेदनशील…. नेपाल तबाही के बाद CM ने किया अलर्ट

    उत्तराखंड में 13 ग्लेशियल झीलें संवेदनशील…. नेपाल तबाही के बाद CM ने किया अलर्ट


    देहरादून।
    नेपाल (Nepal) में फ्लैश फ्लड (Flash flood) से भारी तबाही के बाद अब उत्तराखंड (Uttarakhand) में 13 ग्लेशियल झीलों (Glacial lakes) को संवेदनशील माना गया है. इन झीलों से पहाड़ी इलाकों में खतरे की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने झीलों की नियमित निगरानी करने को कहा है. साथ ही सुरक्षा के इंतजाम मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

    मुख्यमंत्री ने राज्य आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन को जरूरी कदम उठाने को कहा है. उन्होंने संवेदनशील ग्लेशियल झीलों की वैज्ञानिक तरीके से निगरानी करने के निर्देश दिए. इन इलाकों में आधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने को कहा गया है. जरूरत के हिसाब से इनकी संख्या भी बढ़ाई जाएगी।

    सीएम धामी ने संवेदनशील ग्लेशियल झीलों का व्यापक सर्वे कराने को कहा है. इन झीलों की स्थिति की नियमित जांच होगी. पानी के स्तर पर भी नजर रखी जाएगी. झीलों के आकार में होने वाले बदलाव को भी रिकॉर्ड किया जाएगा।

    इसके अलावा झीलों के आसपास के पहाड़ी इलाकों की स्थिति की भी जांच होगी. संभावित खतरे वाले क्षेत्रों की पहचान की जाएगी. इससे किसी भी आपदा की स्थिति में समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सकेगा.


    सेंसर और वार्निंग सिस्टम होंगे मजबूत

    मुख्यमंत्री ने संवेदनशील इलाकों में आधुनिक सेंसर लगाने पर जोर दिया है. पानी का स्तर मापने वाले उपकरण भी लगाए जाएंगे. संचार व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा. इन तकनीकी संसाधनों से खतरे की जानकारी समय पर मिल सकेगी.

    अधिकारियों को सुरक्षित निकासी के रास्तों की पहचान करने के निर्देश भी दिए गए हैं. स्थानीय स्तर पर चेतावनी व्यवस्था मजबूत की जाएगी. राहत और बचाव की तैयारियों को भी बेहतर किया जाएगा. आपदा की स्थिति में लोगों को जल्द सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने पर जोर रहेगा।

    नेपाल में हाल ही में आई बाढ़ के बाद उत्तराखंड में भी आपदा को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है. इसी को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से सभी जिलों के जिलाधिकारियों के साथ बैठक की गई.

    बैठक में आपदा से निपटने की तैयारियों की समीक्षा हुई. जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में संभावित खतरे वाले इलाकों की नियमित निगरानी करने को कहा गया. किसी भी तरह की असामान्य गतिविधि दिखने पर तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी देने के निर्देश दिए गए।


    चार झीलों का सर्वे पूरा

    राज्य आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखंड में कुल 13 ग्लेशियल झीलों को संवेदनशील चिन्हित किया गया है. इनमें से चार झीलों का सर्वे पहले ही पूरा किया जा चुका है।

    बाकी संवेदनशील झीलों का भी चरणबद्ध तरीके से सर्वे कराया जाएगा. इन झीलों की वैज्ञानिक जांच की जाएगी. चमोली जिले की सरस्वती ताल और उत्तरकाशी जिले की केदारताल के सर्वे के लिए जल्द विशेषज्ञों की टीम भेजी जाएगी।

    संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को संभावित खतरे के बारे में जानकारी दी जाएगी. उन्हें आपदा के समय बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी बताया जाएगा. लोगों को सुरक्षित स्थान और निकासी के रास्तों की जानकारी दी जाएगी।

    सरकार का जोर आपदा से पहले तैयारी मजबूत करने पर है. नियमित निगरानी और समय पर चेतावनी से बड़े खतरे को कम करने की कोशिश की जा रही है. संवेदनशील ग्लेशियल झीलों पर नजर रखने के साथ राहत और बचाव व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।

  • Jharkhand: धनबाद में फिर धंसी जमीन…. 13 घरों को नुकसान, रहवासियों ने भागकर बचाई जान

    Jharkhand: धनबाद में फिर धंसी जमीन…. 13 घरों को नुकसान, रहवासियों ने भागकर बचाई जान


    धनबाद।
    झारखंड (Jharkhand) के धनबाद (Dhanbad) में जमीन धंसने (Land subsidence) की एक और घटना सामने आई है। बस्ताकोला क्षेत्र (Bastakola area) अंतर्गत बंद झरिया आरएसपी कॉलेज के समीप स्थित कामिनी कल्याण बस्ती में शनिवार की दोपहर जोरदार आवाज के साथ जमीन धंस गई। इससे करीब एक दर्जन घरों में दरार पड़ गई। घटना से पूरी बस्ती में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। इस घटना के बाद लोग अपने घरों से निकलकर जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।

    भू-धंसान इतना भीषण था कि कई घरों की भूमिगत पाइपलाइन टूट गई, जिससे बस्ती में जलापूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। माइंस रेस्क्यू की पूरी तकनीकी टीम ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। घटना से आक्रोशित लोगों ने झरिया-धनबाद मुख्य मार्ग पर आकर जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान लोगों ने सड़क के बीचोंबीच खड़े होकर आवागमन पूरी तरह ठप कर दिया। इससे मुख्य मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

    मेयर संजीव सिंह सबसे पहले पहुंचे। उन्होंने बीसीसीएल अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर युद्धस्तर पर राहत कार्य शुरू करने के लिए कहा। इसके बाद बस्ताकोला जीएम एसके गायकवाड़ और राजापुर परियोजना पदाधिकारी एम कुंडू पहुंचे। अधिकारियों ने प्रभावित स्थल का निरीक्षण कर पीड़ितों के साथ वार्ता की। मौके पर सिंदरी डीएसपी प्रकाश चंद महतो दलबल के साथ मौजूद थे। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर और उचित कार्रवाई का भरोसा देकर किसी तरह शांत कराया।


    मेयर संजीव के समझाने पर शांत हुए प्रभावित

    मेयर संजीव सिंह ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। कहा कि सभी प्रभावितों को सुरक्षित जगहों पर बसाया जाएगा। तत्काल राहत के तौर पर मेयर ने बेघर हुए आशीष रवानी, निरंजन रवानी, बेबी देवी और विश्वजीत दे के परिवार को रात गुजारने के लिए बस्ताकोला रेस्क्यू स्कूल स्थित जीएम ऑफिस में रहने की व्यवस्था कराई।

  • गांधी नहीं, भगत सिंह के रास्ते पर आंदोलन… आज हेमंत सोरेन-राहुल गांधी के पुतले जलाएंगे छात्र

    गांधी नहीं, भगत सिंह के रास्ते पर आंदोलन… आज हेमंत सोरेन-राहुल गांधी के पुतले जलाएंगे छात्र


    रांची।
    झारखंड (Jharkhand) में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं (JPSC and JSSC examinations) में कथित अनियमितता के खिलाफ पिछले 21 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन को अब और तेज करने की तैयारी है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने आज सरकार पर छात्रों की मांगों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए पहली बार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Chief Minister Hemant Soren) के इस्तीफे की मांग की है। मंच ने आंदोलन के अगले चरण के कार्यक्रमों का भी ऐलान किया है। आज छात्रों ने एक बड़ा ऐलान किया है। आइए जानते हैं छात्रों ने क्या-क्या कहा है।


    ‘गांधी नहीं, भगत सिंह के रास्ते पर’

    सरकार की बेरुखी को देखते हुए प्रदर्शन कर रहे छात्र रवींद्र पासवान ने कहा कि अब आंदोलन गांधी के रास्ते पर नहीं, बल्कि भगत सिंह के रास्ते पर आगे बढ़ेगा। वहीं, मंच के पीयूष कुमार ने सरकार पर छात्रों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार उन्हें ‘कीड़ा-मकोड़ा’ समझ रही है। उन्होंने कहा कि अब छात्र ‘दिशोम गुरु’ के रास्ते पर चलकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।


    आज राहुल गांधी और हेमंत सोरेन का पुतला दहन का प्लान

    मंच के अनुसार, 16 अगस्त को पूरे झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया जाएगा जबकि 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रति भी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि सरकार में उनकी बात नहीं सुनी जा रही है, तो उन्हें राज्य सरकार से समर्थन वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ खड़े रहने की बात कहकर उन्हें भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए।


    10 अगस्त को छात्रों पर पुलिस ने बरसाई थीं लाठियां

    बता दें कि जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितता के खिलाफ छात्रों का आंदोलन पिछले 21 दिनों से जारी है। 10 अगस्त को राज्य भर से बड़ी संख्या में छात्र रांची पहुंचे थे और विधानसभा घेराव का प्रयास किया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था। पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था। कार्रवाई में कई छात्रों के घायल होने की बात सामने आई थी। इसके बाद से छात्रों में सरकार के प्रति नाराजगी और बढ़ गई है।

    सदर अस्पताल में 5 दिनों से भर्ती देवेंद्र नाथ महतो की भूख हड़ताल 14वें दिन भी जारी रही. उन्होंने अस्पताल के अपने बेड को छोड़कर कॉरिडोर की जमीन पर लेटकर धरना जारी रखा। देवेंद्र नाथ महतो ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में तिरंगा फहराने और इसके बाद प्रस्तावित तिरंगा यात्रा में शामिल होने के लिए सदर अस्पताल से बाहर निकलने का प्रयास किया था।


    धक्का- मुक्की हुई

    इस संबंध में देवेंद्र नाथ महतो ने पहले ही जिला प्रशासन को पत्र देकर अपनी इच्छा से अवगत कराया था.इसके साथ ही, पुलिसकर्मियों की ओर से उनके साथ जाकर वापस अस्पताल लाने की बात भी कही गई थी. सुबह करीब 8 बजे देवेंद्र नाथ महतो सदर अस्पताल से निकलने लगे. लेकिन उन्हें बार-बार लगभग 10-10 मिनट के अंतराल में रोक दिया गया और काफी देर तक बाहर जाने नहीं दिया गया. इस दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की भी हुई।

    करीब 9 से 10 बजे के बीच मौके पर भारी पुलिस बल की मौजूदगी में स्थिति और गंभीर हो गई. देवेंद्र नाथ महतो के अनुसार, उनके साथ धक्का-मुक्की की गई, जिससे उन्हें चोट भी आई. उनके साथ मौजूद साथियों के साथ भी कथित रूप से बल प्रयोग किया गया और कुछ साथियों को उठाकर पटके जाने की बात कही गई. घटना के बाद देवेंद्र नाथ महतो अस्पताल के अपने कमरे के गेट के बाहर बैठ गए और अपना अनशन जारी रखा।


    विधानसभा से जवाब मांगा जाएगा- जयराम महतो

    इसके बाद देवेंद्र नाथ महतो की बातचीत विधायक टाइगर जयराम महतो से हुई. बातचीत के दौरान जयराम महतो ने स्वतंत्रता दिवस के दिन हुई इस घटना को गंभीर और निंदनीय बताया. विधायक टाइगर जयराम महतो ने कहा कि इस पूरे मामले को विधानसभा के माध्यम से उठाया जाएगा और सरकार से जवाब मांगा जाएगा. इसके बाद करीब 2 से 4 बजे के बीच पुलिसकर्मी अस्पताल परिसर से हट गए, जिसके बाद मीडिया प्रतिनिधियों को अस्पताल के अंदर आने का अवसर मिला और उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।

  • कर्रेगुट्टा पर आजादी के बाद पहली बार लहराया तिरंगा… नक्सलवाद के अंत से बस्तर के 90 गांवों में नई सुबह

    कर्रेगुट्टा पर आजादी के बाद पहली बार लहराया तिरंगा… नक्सलवाद के अंत से बस्तर के 90 गांवों में नई सुबह


    सुकमा।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों (Karregutta hills) पर आजादी (Independence) के बाद पहली बार तिरंगा (First Time Tricolour) लहराया गया है. यह पहाड़ी कभी नक्सलियों का सबसे मजबूत गढ़ मानी जाती थी. सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और बीजापुर जिलों के करीब 90 गांवों में भी 80 साल में पहली बार तिरंगा फहराया गया. छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप बाइक से करीगुट्टा पहुंचे और वहां झंडा फहराया. यह पूरा कार्यक्रम बस्तर तिरंगा यात्रा के तहत हुआ, जो तीन दिन तक चली।

    बस्तर में नक्सलवाद खत्म होने के बाद लोगों के मन से डर और भ्रम दूर करने के लिए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा तीन दिन की तिरंगा यात्रा पर निकले थे. यात्रा का आखिरी दिन बीजापुर से शुरू हुआ और आवापल्ली, गलगम, उसूर, नम्बी, ताड़पाला होते हुए कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर खत्म हुआ. मंत्री द्वय ने तीन दिनों में नारायणपुर, कोंडागांव, सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर, इन पांच जिलों में करीब 600 किलोमीटर की दूरी बाइक से तय की।

    कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर जवानों से मिलकर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और मंत्री केदार कश्यप ने शहीदों की याद में पेड़ लगाए. इसके बाद स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर झंडा फहराया गया. इस मौके पर विजय शर्मा ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि वे नक्सलियों के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले गढ़ में जवानों के साथ खड़े होकर झंडा फहरा रहे हैं. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के 141 पुलिस जवानों को विशिष्ट सेवा और सराहनीय सेवा पदक देकर सम्मानित किया है।

    वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे बिना किसी डर के इस पहाड़ी पर आ पाएंगे, लेकिन आज यह मुमकिन हुआ है. सांसद महेश कश्यप ने इसे ऐतिहासिक पल बताते हुए कहा कि आजादी के 79 साल बाद पहली बार इन इलाकों में तिरंगा पूरे सम्मान के साथ लहरा रहा है. यात्रा के दौरान मंत्रियों और सांसद ने रास्ते में पड़ने वाले सभी गांवों में शहीदों की याद में पौधे लगाए और शहीदों की मिट्टी एकत्र की. उन्होंने शहीदों के परिजनों और ग्रामीणों से भी मुलाकात की।

    यात्रा के दूसरे दिन देर रात मंत्री टेकलगुडेम पहुंचे थे, जो कभी नक्सल प्रभावित इलाका था. यहां तक कि कुख्यात नक्सली हिड़मा के गांव पूवर्ती से भी लोग स्वागत के लिए पहुंचे थे. भारी बारिश के बावजूद सिलगेर, ताड़मेटला, तर्रेम और जगरगुंडा के ग्रामीण देर शाम तक मंत्रियों के स्वागत के लिए मौजूद रहे. इस मौके पर विधायक चैतराम अटामी और पूर्व विधायक महेश गागड़ा भी मौजूद रहे।

  • राम मंदिर की व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव…. पालक के तौर पर नियुक्त भैयाजी जोशी भी दायित्व से मुक्त

    राम मंदिर की व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव…. पालक के तौर पर नियुक्त भैयाजी जोशी भी दायित्व से मुक्त


    अयोध्या।
    अयोध्या (Ayodhya) के राम मंदिर (Ram Mandir) में दान चोरी की घटना के बाद से मची उथल-पुथल थम नहीं रही है। चंपतराय (Champat Rai), डॉ. अनिल मिश्र (Dr. Anil Mishra) और गोपाल राव (Gopal Rao) के हटने के बाद अब संगठन संरक्षक के तौर पर राम मंदिर के पालक नियुक्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय पदाधिकारी भैयाजी जोशी (Bhaiyaji Joshi) भी दायित्व से मुक्त कर दिए गए हैं। सूत्रों की मानें तो पालक की जिम्मेदारी के लिए दूसरे बड़े और कद्दावर चेहरे की तलाश शुरू हो चुकी है। इसमें दिल्ली के वरिष्ठ प्रचारक का नाम सबसे ऊपर चल रहा है।

    संघ का शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे पर अंतर्द्वंद्व में फंसा है। इस विषय पर संघ का थिंक टैंक दो खेमों में बंट गया है। एक खेमा राम मंदिर मामलों से संघ को दूर रखने का हिमायती है तो दूसरा वकालत कर रहा है कि मंदिर पर संगठन का अंकुश जरूरी है। इसके पीछे दोनों खेमों के अपने-अपने तर्क हैं। इस कारण पालक का नाम घोषित करने में देरी हो रही है।


    ट्रस्ट की बैठकों में हमेशा शामिल होते रहे

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन और जमीन खरीद फरोख्त को लेकर हुए विवाद के बाद संघ नेतृत्व ने सर कार्यवाह पद से स्वास्थ्य कारणों से सेवामुक्त हुए भैयाजी जोशी को राम मंदिर का पालक नियुक्त कर उनका केंद्र लखनऊ तय किया था। इसके कारण वह प्रायः ट्रस्ट की बैठकों में शामिल होते थे।


    चंपत राय के लेटर बम से चिंतित था नेतृत्व

    चढ़ावा चोरी की घटना के दौरान भी मंदिर पालक का नाम चर्चा में आया, लेकिन उनका कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया। फिर भी 12 जून को लखनऊ में ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में वह शामिल रहे। इसके पहले छह जून को चढ़ावा चोरी की प्राथमिकी दर्ज कराने गए चंपतराय को रोकने में उनका हाथ होने की आशंका जताई गई मगर यह पुष्ट नहीं हो सका। अब पालक के पद से मुक्ति को उसी घटना से जोड़ा जा रहा है। खास बात यह भी है कि एफआईआर न कराने की वजह ही चंपत राय के त्यागपत्र का सबसे प्रमुख कारण थी।

    छह जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करने के ऐलान के बाद सात जुलाई को चंपतराय ने लेटर बम फोड़ा था। इस लेटर के जरिए चंपतराय ने चढ़ावा गिनती के अनुबंध से सम्बन्धित जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा किया था। उन्होंने उस पत्र में कहा था कि फिलहाल मैं मौन हूं लेकिन एसआईटी की जांच के बाद हर सवाल का उत्तर दूंगा। उन्होंने कहा कि कलंक लेकर नहीं जाऊंगा। उनके इस ऐलान से शीर्ष नेतृत्व चिंतित था कि कहीं कोई नया बखेड़ा न खड़ा हो जाए, इसीलिए उन्हें मनाने की कोशिशें हुईं। संतों को भी उनके समर्थन में कर उन्हें दिलासा दी गई।

  • PM मोदी को गाली देने वाली नाबालिग लड़की पर नहीं होगी FIR… दिल्ली पुलिस ने किया माफ

    PM मोदी को गाली देने वाली नाबालिग लड़की पर नहीं होगी FIR… दिल्ली पुलिस ने किया माफ


    नई दिल्ली।
    दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने पिछले महीने जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) (‘Cockroach Janata Party’ – CJP) के विरोध प्रदर्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को गंदी-गंदी गालियां देने की आरोपी नाबालिग लड़की पर कोई केस दर्ज नहीं करने का फैसला किया है। इस लड़की का वीडियो सोशल मीडिया में खूब तेजी से वायरल हुआ था। एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस सूत्रों ने रविवार को इस बारे में जानकारी दी।

    नोएडा पुलिस ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपशब्द कहने की आरोपी नाबालिग लड़की के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज कर दिल्ली पुलिस को भेज दी थी। एफआईआर में उसकी उम्र 25 साल बताई गई थी। हालांकि उस लड़की ने बाद में एक वीडियो में माफी मांगते हुए बताया था कि वह अभी 15 साल की है और उसने विरोध प्रदर्शन में शामिल दूसरे लोगों के बहकावे में आकर ये टिप्पणियां की थीं।


    ‘खुद से नजर भी नहीं मिला पा रही, मुझे माफ कर दीजिए’

    हाल ही में उसने एक वीडियो में कहा था, “मैं सिर्फ 15 साल की हूं। मैंने जो कुछ भी किया, वो माफी के लायक नहीं है। मैंने बहुत-सी गलत बातें कही हैं। यह मेरी पहली और आखीरी गलती है। मैं पूरे देश से माफी मांगती हूं। मुझे बहुत शर्म आ रही है। मैं खुद से नजर भी नहीं मिला पा रही हूं। प्लीज, मुझे माफ कर दीजिए।”


    पीएम मोदी ने प्रदर्शन में शामिल बच्चों को किया माफ

    प्रदर्शनकारियों पर नरमी बरतने की अपीलों के बीच इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले शुक्रवार को एक इंस्टाग्राम वीडियो मैसेज के माध्यम से कहा कि उन्होंने उन सभी भटके हुए बच्चों को माफ कर दिया है जिन्होंने उन्हें गालियां दीं और अपशब्द कहे थे।

    पीएम मोदी में कहा कि उन्हें सजा देने, अदालतों के चक्कर लगवाने और परेशान करने से हालात नहीं बदलेंगे। मैं उन्हें माफ करना चाहता हूं। मैं समाज से भी गुजारिश करता हूं कि वे मेरी बात को स्वीकार करें।


    लड़की की मां ने PM से की थी ये अपील

    प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बच्चों को माफ करने संबंधी वीडियो जारी किए जाने के बाद आरोपी नाबालिग लड़की की मां ने उनसे अपील की थी कि वे अधिकारियों को उनकी बेटी के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने का निर्देश दें। मां ने कहा कि पीएम ने देश की एक बेटी को माफ करके बड़प्पन दिखाया है, जिसने बहुत ही गंदे शब्दों का इस्तेमाल किया था। मैं हाथ जोड़कर उनका धन्यवाद करती हूं। आज उसका नया जन्म हुआ है। प्रधानमंत्री ने उसे जीवनदान दिया है। उन्होंने आगे कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुजारिश करती हूं कि कृपया उसके खिलाफ गलत नाम और उम्र के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करा दें, अब वह आपकी शरण में है।