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  • महाराष्ट्र में भी लागू होगा UCC…. ड्राफ्ट तैयार करने के सरकार बनाएगी कमेटी

    महाराष्ट्र में भी लागू होगा UCC…. ड्राफ्ट तैयार करने के सरकार बनाएगी कमेटी


    मुंबई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) में यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code- UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार एक अहम कदम उठाने जा रही है. जानकारी के मुताबिक कानून का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए जल्द ही एक कमेटी का गठन किया जाएगा.

    अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि महाराष्ट्र सरकार (Government of Maharashtra) यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए कानून का ड्राफ्ट तैयार करने हेतु दो हफ्ते के भीतर एक कमेटी बना सकती है. उन्होंने जानकारी दी कि कमेटी के गठन और इसके काम करने के दायरे को अभी फाइनल किया जाना बाकी है।

    जानकारी के मुताबिक एक अधिकारी ने जानकारी दी कि यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए कानून का ड्राफ्ट तैयार करने वाली कमेटी बनाने का प्रोसेस चल रहा है और अगले दो हफ्तों के भीतर इसका गठन कर दिया जाएगा।

    बता दें कि पिछले हफ्ते ही गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने विधानसभा में जानकारी दी थी कि महाराष्ट्र में यूसीसी लागू किया जाएगा और इस कानून का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अगुवाई में कमेटी बनाई जाएगी.

    यूनिफॉर्म सिविल कोड एक संवैधानिक निर्देश है, जिसका मकसद सभी नागरिकों के लिए शादी, तलाक, विरासत और एडॉप्शन जैसे मामलों में एक समान कानून लागू करना है. कानून की नजर में सब एक समान होते हैं. शादी, तलाक, एडॉप्शन, उत्तराधिकार, विरासत लेकिन सबसे बढ़कर लैंगिक समानता वो कारण है, जिस वजह से यूनिफार्म सिविल कोड की जरूरत महसूस की जाती रही है।

    यूसीसी का मतलब है कि शादी, तलाक, बच्चा गोद लेने और संपत्ति के बंटवारे जैसे मामलों में सभी नागरिकों पर एक समान कानून लागू हो, चाहे उनका धर्म या जाति कुछ भी हो. जिस राज्य में समान नागरिक संहिता लागू होगी, वहां इन मामलों में सभी धर्मों के लोगों के लिए एक ही कानूनी व्यवस्था लागू होगी।

  • मूसलाधार बारिश से यूपी बेहाल, अंडरपास डूबे, स्कूटी बही, 75 जिलों में बारिश का अलर्ट

    मूसलाधार बारिश से यूपी बेहाल, अंडरपास डूबे, स्कूटी बही, 75 जिलों में बारिश का अलर्ट


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है और शुक्रवार को प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। मथुरा में महज आधे घंटे की मूसलाधार बारिश ने सड़कों को नदी में बदल दिया, जबकि कानपुर में देर रात हुई भारी बारिश के कारण जलभराव, दीवार गिरने और इमारतों को नुकसान जैसी घटनाएं सामने आईं। मौसम विभाग ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी करते हुए 11 जिलों में भारी वर्षा, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं की चेतावनी दी है।

    मथुरा में दोपहर करीब एक बजे हुई तेज बारिश के बाद शहर के कई इलाके जलमग्न हो गए। रेलवे अंडरपास में गर्दन तक पानी भर गया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। कई वाहन पानी में फंस गए और सड़क पर तेज बहाव के कारण एक स्कूटी बह गई। दुकानों के बाहर रखा सामान भी पानी के तेज बहाव में बहता नजर आया। कई लोग अपनी बाइक पकड़कर सड़क किनारे सुरक्षित स्थान तलाशते दिखाई दिए।

    कानपुर में गुरुवार देर रात से शुक्रवार तड़के तक लगातार हुई बारिश ने शहर की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज परिसर में पानी भर गया, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पार्किंग में खड़ी कई कारें और बाइकें आधी पानी में डूब गईं। ऑर्डिनेंस फैक्ट्री परिसर की करीब 100 फीट लंबी दीवार भरभराकर गिर गई, जबकि एक अपार्टमेंट के बेसमेंट की दीवार धंसकने के बाद सुरक्षा के लिहाज से पूरी इमारत खाली करानी पड़ी।

    प्रदेश के अन्य जिलों में भी बारिश का असर देखने को मिला। झांसी में आकाशीय बिजली गिरने से एक किसान की मौत हो गई। उन्नाव में नालियां जाम होने के कारण बरसाती पानी लोगों के घरों में घुस गया। जालौन में तेज आंधी के साथ बारिश हुई, जिससे कई स्थानों पर जनजीवन प्रभावित रहा।

    मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को प्रदेश के सभी जिलों में बारिश की संभावना है। 11 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इसके साथ ही आकाशीय बिजली गिरने, ओलावृष्टि और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी आशंका जताई गई है। लोगों को खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

    लखनऊ स्थित मौसम केंद्र के वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार मानसून अब पूरे प्रदेश में सक्रिय हो चुका है और अगले एक सप्ताह तक रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। लगातार बारिश के कारण तापमान में करीब 8 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि पूरे मानसून सीजन में प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना भी जताई गई है।

    आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे में उत्तर प्रदेश में औसतन 8.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 54 प्रतिशत अधिक है। इस अवधि में संभल में सबसे ज्यादा 46.3 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा मिर्जापुर, आजमगढ़, बदायूं, मुरादाबाद, वाराणसी, हरदोई, बिजनौर, एटा और लखीमपुर-खीरी में भी अच्छी बारिश दर्ज हुई। वहीं 1 जून से 2 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक सामान्य से लगभग 45 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जिससे आने वाले दिनों की वर्षा कृषि और जल संसाधनों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • एटा में कंटेनर का कहर: रोडवेज बस में पीछे से टक्कर, बाहर खड़े 5 यात्रियों की मौत, 12 घायल

    एटा में कंटेनर का कहर: रोडवेज बस में पीछे से टक्कर, बाहर खड़े 5 यात्रियों की मौत, 12 घायल


    लखनऊ । उत्तर प्रदेश के एटा जिले में गुरुवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे में पांच यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 12 लोग घायल हो गए। हादसा बागवाला थाना क्षेत्र में उस समय हुआ, जब खराब हुई रोडवेज बस सड़क किनारे खड़ी थी और कई यात्री गर्मी के कारण बस से उतरकर बाहर खड़े थे। तभी पीछे से तेज रफ्तार कंटेनर आया और यात्रियों को कुचलते हुए बस में टक्कर मार दी।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, करीब 40 यात्रियों से भरी रोडवेज बस एटा से दिल्ली जा रही थी। रास्ते में बस खराब होने पर चालक उसे सड़क किनारे खड़ा कर आवश्यक पार्ट्स लेने चला गया। इसी दौरान कई यात्री बस से उतरकर बाहर खड़े थे। अचानक तेज रफ्तार कंटेनर ने नियंत्रण खो दिया और बाहर खड़े लोगों को रौंदते हुए बस के पिछले हिस्से में टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कंटेनर सड़क पार दूसरी ओर जा पहुंचा और कई शव सड़क पर बिखर गए।

    हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों और पुलिस ने तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को वीरांगना अवंतीबाई मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने पांच लोगों को मृत घोषित कर दिया।

    घायल यात्री अंसार ने बताया कि बस खराब होने के कारण चालक मरम्मत के लिए गया था। अधिक गर्मी होने के कारण कई यात्री नीचे उतर आए थे, जबकि महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बस के भीतर ही बैठे रहे। इसी वजह से वे इस हादसे की चपेट में आने से बच गए।

    घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी अरविंद सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. इलामारन मौके पर पहुंचे। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त बस और कंटेनर को हटवाकर करीब एक घंटे बाद यातायात बहाल कराया।

    हादसे में बुलंदशहर निवासी सतेंद्र शर्मा (38), फर्रुखाबाद के राजेश (34), सुखराम (30), शैलेश (29) और आशीष सक्सेना (22) की मौत हो गई। मृतकों में अधिकांश लोग दिल्ली में नौकरी या कारोबार करते थे और काम पर लौट रहे थे या परीक्षा देने जा रहे थे।

  • TET परीक्षा का दूसरा दिन: महिला अभ्यर्थियों की सख्त जांच, 15 फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए

    TET परीक्षा का दूसरा दिन: महिला अभ्यर्थियों की सख्त जांच, 15 फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए


    लखनऊ । UP-TET 2026 के दूसरे दिन शुक्रवार को प्रदेशभर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच परीक्षा आयोजित की गई। सुबह 7:15 बजे से अभ्यर्थियों की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें एडमिट कार्ड की जांच, बायोमेट्रिक सत्यापन और रेटिना स्कैन के बाद ही परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिया गया। पहली पाली सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2:30 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित की जा रही है।

    परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा इतनी सख्त रही कि महिला अभ्यर्थियों के हेयरपिन, क्लचर, चूड़ियां और अन्य धातु के आभूषण उतरवाए गए। कई केंद्रों पर जूड़े खुलवाकर जांच की गई, जबकि पुरुष अभ्यर्थियों की बेल्ट उतरवाकर और जूतों की जांच के बाद ही प्रवेश मिला। ललितपुर में एक नवविवाहिता महिला घूंघट में परीक्षा देने पहुंची। पूछताछ में उसने बताया कि वह अपने जेठ के साथ आई है, इसलिए घूंघट कर रखा है। वहीं लखनऊ में एक महिला सिपाही ने समय पर परीक्षा केंद्र न पहुंच पाने वाली अभ्यर्थी को अपनी स्कूटी से परीक्षा केंद्र तक पहुंचाकर मानवता की मिसाल पेश की।

    इस बीच बस्ती जिले से दुखद खबर सामने आई। टीईटी परीक्षा ड्यूटी पर जा रहे 51 वर्षीय हेड कॉन्स्टेबल राजेंद्र यादव की शुक्रवार सुबह सड़क हादसे में मौत हो गई। बताया गया कि ड्यूटी के लिए बाइक से जा रहे हेड कॉन्स्टेबल को तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी। हादसे में कार सवार एक ही परिवार के तीन लोग भी गंभीर रूप से घायल हो गए।

    महाराष्ट्र में हाल ही में हुए टीईटी पेपर लीक मामले के बाद उत्तर प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी कर दी गई है। पहली बार शिक्षा चयन आयोग एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम के माध्यम से परीक्षा की लाइव निगरानी कर रहा है। प्रदेशभर के 60 जिलों में 955 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां खुफिया एजेंसियां भी सतर्क हैं।

    पहले दिन आयोजित परीक्षा में फर्जीवाड़े की कई कोशिशें भी सामने आईं। दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे 15 सॉल्वर गिरफ्तार किए गए। पहले दिन दोनों पालियों में 8 लाख 7 हजार 636 पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 6 लाख 84 हजार 614 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी, जिससे उपस्थिति 84.76 प्रतिशत रही।

    प्रदेश में चार दिनों तक चलने वाली इस परीक्षा में कुल 19.94 लाख अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। इनमें 17.67 लाख उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, जबकि 2.27 लाख अभ्यर्थी अन्य राज्यों से परीक्षा देने पहुंचे हैं। इनमें बड़ी संख्या में सेवारत शिक्षक भी शामिल हैं।

    उधर बदायूं में भाजपा नेता के स्वागत के दौरान लगे जाम के कारण कई परीक्षार्थियों की परीक्षा छूट गई। इसे लेकर विपक्ष ने सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। समाजवादी पार्टी सांसद आदित्य यादव ने प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए दोबारा परीक्षा कराने की मांग करते हुए इसे युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय बताया।

  • Tamil Nadu: CM विजय ने पूर्व सरकार के फैसले को पलटा… हिंदू मंदिरों के पैसे से बनने वाले 46 प्रोजेक्ट्स रद्द

    Tamil Nadu: CM विजय ने पूर्व सरकार के फैसले को पलटा… हिंदू मंदिरों के पैसे से बनने वाले 46 प्रोजेक्ट्स रद्द


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री ‘थलापति’ विजय (Chief Minister ‘Thalapathy’ Vijay) ने पूर्व की डीएमके (DMK) सरकार के फैसले को पलटते हुए एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। सीएम विजय (CM Vijay) ने हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग के तहत 245.85 करोड़ रुपये की लागत वाले 46 प्रोजेक्ट्स की प्रशासनिक मंजूरी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है।

    फिल्म स्टार ‘थलापति’ सी. जोसेफ विजय ने जब राजनीति में एंट्री की थी तो लोगों ने शुरुआत में उनके प्रभाव पर शक जताया था और उन्हें सिर्फ ‘किंगमेकर’ माना था। लेकिन 4 मई 2026 को आए विधानसभा चुनाव के नतीजों ने छह दशक बाद मुख्य द्रविड़ पार्टियों को सत्ता से बाहर कर दिया और जनता ने इस अभिनेता के नेतृत्व वाली पार्टी को चुना।

    10 मई को विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन उनके प्रशासनिक अनुभव और कार्यकाल पूरा करने को लेकर संदेह बना हुआ था। हालांकि, पद संभालने के एक महीने से अधिक समय बाद, उनके कदमों से यह साबित हो रहा है कि वे सुशासन के जरिए जनता को सही संदेश दे रहे हैं।

    सोमवार को जिला कलेक्टरों और पुलिस प्रमुखों को निर्देश देते हुए विजय ने बिना किसी राजनीतिक दखल के अपराधियों पर सख्त कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि सबसे प्रभावशाली अपराधियों को भी त्वरित और निष्पक्ष न्याय का सामना करना पड़े। इसके अलावा, उन्होंने घोषणा की कि तमिलनाडु की सभी सार्वजनिक परिवहन बसें वातानुकूलित (AC) होंगी।


    सीएम के रूप में पहले दिन से ही असरदार फैसले

    सत्ता संभालने के कुछ ही घंटों के भीतर विजय ने 200 यूनिट मुफ्त बिजली का ऐलान किया, जिससे राज्य के लगभग 2.4 करोड़ घरेलू बिजली कनेक्शन धारकों को फायदा होगा। नशीले पदार्थों की तस्करी और उपयोग को रोकने के लिए हर जिले में ‘एंटी-ड्रग टास्क फोर्स’ का गठन किया गया, जिसकी निगरानी सीएम खुद करेंगे। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए ‘सिंगप्पेन (शेरनी) स्पेशल टास्क फोर्स’ बनाई गई।

    48 घंटों के भीतर, राज्य भर में धार्मिक स्थलों, शिक्षण संस्थानों और बस स्टैंडों के 500 मीटर के दायरे में चल रही 717 ‘तस्माक’ शराब की दुकानों को दो सप्ताह के भीतर बंद करने का आदेश दिया गया।


    कॉर्पोरेट CEO जैसी कार्यशैली और समय की पाबंदी

    सीएम विजय हर सुबह एकदम सही समय पर सचिवालय पहुंचते हैं। पारंपरिक सफेद वेष्टि की बजाय वे काले रंग का शानदार सूट और सफेद शर्ट पहनते हैं, जो उन्हें एक आधुनिक प्रशासक के रूप में पेश करता है। वे सोमवार से शुक्रवार तक अपनी डेस्क पर लगभग सात घंटे बिताते हैं और वरिष्ठ नौकरशाहों से भी समय की पाबंदी की सख्त उम्मीद रखते हैं। काम के दौरान राजनीतिक बैठकों की बजाय वे घर से अपना लंच लाना और शांति से खाना पसंद करते हैं।


    नीति आयोग द्वारा प्रशंसा और केंद्र से तालमेल

    नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने 2035 तक तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था को 1.5 ट्रिलियन डॉलर बनाने के विजय के विजन की तारीफ की है, जिसे राज्य को वैश्विक निवेश और तकनीकी डेस्टिनेशन बनाने के कदम के रूप में देखा जा रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर विजय ने मेकेदातु बांध परियोजना के खिलाफ कानूनी कदम उठाने, श्रीलंकाई नौसेना द्वारा पकड़े गए मछुआरों की रिहाई और रक्षा निर्माण एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रोजेक्ट्स के लिए सहयोग की मांग की।


    भ्रष्टाचार विरोधी कदम और जन कल्याण

    विजय ने हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग के 46 प्रोजेक्ट्स के लिए दी गई प्रशासनिक मंजूरी रद्द कर दी। इन प्रोजेक्ट्स की कुल कीमत 245.85 करोड़ रुपये थी और इनमें शादी-ब्याह के हॉल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स शामिल थे, जिन्हें पिछली DMK सरकार के समय मंजूरी मिली थी। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि इस कदम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि मंदिर के संसाधनों का इस्तेमाल कमर्शियल कामों के बजाय मंदिर से जुड़ी गतिविधियों में किया जाए। सरकार ने यह भी घोषणा की है कि रद्द किए गए प्रोजेक्ट्स से बचे फंड का इस्तेमाल मंदिरों और श्रद्धालुओं के लिए नई योजनाएं शुरू करने में किया जाएगा।

    620 अम्मा कैंटीनों को आधुनिक बनाने, बर्तन बदलने और साफ-सफाई में सुधार के निर्देश दिए गए हैं। गरीब कर्जदारों के लिए सहकारी बैंक ऋण माफी के पहले चरण की घोषणा की गई और जल जीवन मिशन के रुके हुए प्रोजेक्ट्स को फिर से शुरू किया गया। कृषि क्षेत्र के समर्थन के लिए धान की खेती को बढ़ावा देने हेतु 134.83 करोड़ रुपये का पैकेज घोषित किया गया। तमिलनाडु के वित्त पर एक श्वेत पत्र जारी कर राज्य के कर्ज के बोझ को उजागर किया गया और राजकोषीय पारदर्शिता का वादा किया गया।

  • उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म.. CM धामी ने की राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत

    उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म.. CM धामी ने की राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में बुधवार से मदरसा बोर्ड खत्म (Madrasa Board Abolished) हो गया। अब इसकी जगह राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (State Minority Education Authority) ने ले ली है। इसके तहत मुस्लिम समेत सभी 5 अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षण संस्थान आएंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम में राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व को अपनी ज्ञानधारा से सिंचित करने वाले उत्तराखंड की यह जिम्मेदारी है कि वह शिक्षा एवं संस्कार के मामले में एक आदर्श स्थापित करे।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सरकार ने समाज के सभी वर्गों को अच्छी, संस्कार युक्त और आधुनिक शिक्षा देने के लिए पहली जुलाई से उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके साथ मदरसा बोर्ड को भंग कर दिया गया है। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल उत्तराखंड ही नहीं वरन पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी के रूप में ‘वन नेशन वन लॉ’ की तरह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के रूप में ‘वन नेशन वन एजुकेशन’ की शुरुआत भी उतराखंड से हो रही है। उत्तराखंड सरकार का संकल्प है कि राज्य में हर वर्ग, क्षेत्र और समुदाय के बच्चे को अच्छे संस्कार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।


    सपनों को मिलेगी नई उड़ान

    सीएम धामी ने कहा कि जब एक बच्चे को अच्छी शिक्षा मिलती है तो वह न केवल अपने भविष्य को बेहतर बनाता है वरन अपने परिवार, समाज और देश को बेहतर बनाने में अपना अमूल्य योगदान देता है। आज हम मात्र एक संस्था की शुरूआत नहीं कर रहे हैं वरन ऐसे भविष्य की मजबूत नींव रख रहे हैं जिसके जरिए राज्य के हर बच्चे के सपनों को एक नई उड़ान मिलेगी।


    आस्था और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाना है मकसद

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ किया कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना किसी भी समुदाय की धार्मिक पहचान, परंपरा या अधिकारों को प्रभावित करने के लिए नहीं वरन समाज के सभी वर्गों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए की गई है। हमारा मकसद आस्था और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाना है। हम चाहते हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय का हर बच्चा अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा रहे और विज्ञान, गणित, कम्प्यूटर, भाषा, और आधुनिक तकनीकों में भी दक्ष बने।


    आएगा सकारात्मक बदलाव

    सीएम धामी ने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल मान्यता देने वाली संस्था नहीं वरन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शी व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन का मजबूत माध्यम बनेगा। सीएम धामी ने उम्मीद जताई कि प्राधिकरण आने वाले समय में हजारों बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा। यह गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाएगा।

  • UP: अयोध्या में बड़ा हादसा…. एक ही परिवार की 5 महिलाएं सरयू में डूबीं

    UP: अयोध्या में बड़ा हादसा…. एक ही परिवार की 5 महिलाएं सरयू में डूबीं


    अयोध्या।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के अयोध्या जिले (Ayodhya district) में मंगलवार को सरयू नदी (Saryu River) में स्नान के दौरान बड़ा हादसा हो गया। रौनाही थाना क्षेत्र के सनाहा गांव के पास एक ही परिवार की दो महिलाओं और तीन किशोरियों समेत पांच लोग नदी में डूब गए। स्थानीय गोताखोरों और ग्रामीणों की मदद से तीन लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। देर शाम तक दो किशोरियों की तलाश जारी रही।

    जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब दो बजे एक ही परिवार की दो महिलाएं और तीन किशोरियां सरयू नदी के किनारे घूमने गई थीं। गांव से करीब एक किलोमीटर दूर पहुंचने के बाद मीरापुर रुदौली निवासी मेराज की 35 साल पत्नी शाहीन नदी में नहाने उतरीं। इसी दौरान वह गहरे पानी में चली गईं और डूबने लगीं। उन्हें बचाने के लिए 16 साल नाजिया, 15 साल रशीदा, 18 वर्षीय मरियम और 40 वर्षीय सजरूल निशा भी नदी में उतर गईं, लेकिन तेज बहाव की चपेट में आने से सभी डूब गईं।

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग, गोताखोर और प्रशासन मौके पर पहुंच गया। करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद सजरूल निशा, शाहीन और मरियम को नदी से बाहर निकाला गया। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। सीओ सदर अरविंद सोनकर ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि देर शाम तक नाजिया और रशीदा की तलाश के लिए राहत एवं बचाव अभियान जारी रहा।

  • 25 हजार आबादी के भरोसे सिर्फ एक फार्मासिस्ट! महोबा के ग्योंडी गांव में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

    25 हजार आबादी के भरोसे सिर्फ एक फार्मासिस्ट! महोबा के ग्योंडी गांव में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा


    महोबा  महोबा जिले के कबरई विकासखंड के सबसे बड़े गांव ग्योंडी में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली अब ग्रामीणों के सब्र की सीमा पार कर चुकी है। करीब 25 हजार की आबादी वाले इस गांव का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र वर्षों से डॉक्टरों और जरूरी स्वास्थ्य कर्मियों की कमी से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी केवल एक फार्मासिस्ट के भरोसे चल रही है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को न तो नियमित चिकित्सक मिलते हैं और न ही स्टाफ नर्स लैब टेक्नीशियन जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है।

    स्वास्थ्य सुविधाओं की इसी बदहाली के विरोध में बुंदेलखंड नव निर्माण सेना के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि ग्योंडी गांव ही नहीं बल्कि आसपास के कई गांवों के लोग भी इसी सरकारी अस्पताल पर निर्भर हैं लेकिन पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था नहीं होने से लोगों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है जबकि गंभीर मरीजों की जान भी खतरे में पड़ जाती है।

    ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में लंबे समय से डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं और प्रशासन इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चौबीस घंटे आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है। आवश्यक दवाइयों की कमी जांच सुविधाओं का अभाव और साफ सफाई बिजली तथा पेयजल जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं भी संतोषजनक नहीं हैं। ऐसे में सरकारी अस्पताल होने के बावजूद मरीजों को अपेक्षित उपचार नहीं मिल पा रहा है।

    बुंदेलखंड नव निर्माण सेना ने प्रशासन के सामने पांच सूत्रीय मांगें रखीं। संगठन ने अस्पताल के सभी रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्तियां करने नियमित डॉक्टरों और स्टाफ नर्स की तैनाती सुनिश्चित करने चौबीस घंटे आपातकालीन चिकित्सा सेवा शुरू करने आवश्यक दवाइयों और जांच सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने तथा अस्पताल में साफ सफाई बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने की मांग की है।

    संगठन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर जिले में चक्का जाम और बड़े स्तर पर प्रदर्शन भी किया जाएगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधा से लोगों को वंचित रखना गंभीर लापरवाही है और इसे अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    जिलाधिकारी ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उनकी जायज मांगों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है। प्रशासन का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर अस्पताल में आवश्यक संसाधनों और स्टाफ की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जाएगा। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं क्योंकि लंबे समय से चली आ रही इस समस्या के समाधान का इंतजार हजारों लोगों को है।

  • मंदिर में संत की हत्या से भड़का गुस्सा महोबा में नामदेव समाज ने दोषियों की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की उठाई मांग

    मंदिर में संत की हत्या से भड़का गुस्सा महोबा में नामदेव समाज ने दोषियों की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की उठाई मांग


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में मंदिर के पुजारी और संत सच्चिदानंद महाराज की हत्या के बाद नामदेव समाज में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। घटना के विरोध में अखंड भारतीय नामदेव महासभा के कार्यकर्ताओं ने महोबा में विरोध प्रदर्शन करते हुए अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा और दोषियों के खिलाफ त्वरित तथा कठोर कार्रवाई की मांग की। संगठन ने कहा कि इस जघन्य वारदात ने पूरे समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।

    बताया गया कि बांदा जिले के तिंदवारा गांव स्थित त्रिदेव शनि मंदिर में रहने वाले 68 वर्षीय संत बाल ब्रह्मचारी सच्चिदानंद महाराज मंदिर की छत पर विश्राम कर रहे थे। इसी दौरान देर रात कुछ अज्ञात हमलावर वहां पहुंचे और लाठी डंडों तथा धारदार हथियार से उन पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल संत को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया लेकिन इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया।

    घटना ऐसे समय हुई जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुंदेलखंड के दौरे पर थे। ऐसे में कानून व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। नामदेव समाज के लोगों का कहना है कि प्रदेश में संत और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस तरह की घटना बेहद चिंताजनक है।

    महोबा में अखंड भारतीय नामदेव महासभा के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष अखिलेन्द्र नामदेव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समाज के लोग एकत्र हुए। उन्होंने राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित पांच सूत्रीय ज्ञापन अपर जिलाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की घटना को अंजाम देने की हिम्मत न कर सके।

    संगठन ने यह भी मांग उठाई कि यदि आरोपी दोषी पाए जाते हैं तो उनके अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि घटना के कई दिन बाद भी पुलिस हत्या के पीछे की असली वजह का खुलासा नहीं कर सकी है और अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होना जांच की धीमी रफ्तार को दर्शाता है।

    प्रदर्शन के दौरान समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि मंदिर जैसे पवित्र स्थल में एक संत की हत्या केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं बल्कि समाज की आस्था पर भी चोट है। उन्होंने सरकार से निष्पक्ष और तेज जांच कर दोषियों को जल्द सजा दिलाने की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामले पर अयोध्या में घमासान कांग्रेस का विरोध और प्रशासन की सख्त कार्रवाई

    राम मंदिर चढ़ावा मामले पर अयोध्या में घमासान कांग्रेस का विरोध और प्रशासन की सख्त कार्रवाई


    अयोध्या । अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर जोरदार विरोध दर्ज कराया है और प्रदेश नेतृत्व के साथ कई सांसद और वरिष्ठ नेता अयोध्या पहुंचने की कोशिश में जुटे रहे। इसी बीच प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को देर रात एक होटल में नजरबंद कर दिया और बाद में उन्हें कृषि विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में स्थानांतरित किया गया। इसके साथ ही कई अन्य कांग्रेस नेताओं को भी उनके आवास या ठहरने के स्थान पर ही रोक दिया गया जिससे राजनीतिक तनाव और बढ़ गया।

    कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल राम जन्मभूमि मंदिर जाकर कथित चढ़ावा प्रबंधन और चोरी के आरोपों की जांच और विरोध दर्ज कराना चाहता था। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। टेढ़ी बाजार क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का मुक्की की स्थिति भी देखने को मिली। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। कुछ नेताओं को बस में बैठाकर हटाया गया जिससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी और बढ़ गई।

    कांग्रेस सांसदों और नेताओं का कहना है कि उन्हें किसी प्रकार का लिखित आदेश नहीं दिया गया है और बिना आधिकारिक सूचना के इस तरह हाउस अरेस्ट करना लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है। उनका आरोप है कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है और धार्मिक मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। वहीं प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ नियंत्रण के लिए यह कदम आवश्यक था।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े चढ़ावा प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है और कई आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों से पूछताछ भी हुई है और जांच एजेंसियां पूरे मामले की तह तक जाने का दावा कर रही हैं।

    उधर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि कांग्रेस इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से उछाल रही है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत करने की कोशिश की जा रही है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि वह केवल पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है और इसमें कोई राजनीतिक मंशा नहीं है।
    उधर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि कांग्रेस इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से उछाल रही है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत करने की कोशिश की जा रही है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि वह केवल पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है और इसमें कोई राजनीतिक मंशा नहीं है।

    अयोध्या में बढ़ते तनाव को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल तैनात है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की कानून व्यवस्था को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    इस पूरे मामले ने प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना जताई जा रही है।

    शॉर्ट डिस्क्रिप्शन
    अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर कांग्रेस नेताओं का विरोध प्रदर्शन तेज हुआ, कई नेता हाउस अरेस्ट किए गए, पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तनाव बढ़ा

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    Ayodhya Protest, Ram Mandir Issue, Congress Politics, Uttar Pradesh News, SIT Investigation