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  • हरियाणा में डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें

    हरियाणा में डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें


    हरियाणा। में सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर बुधवार (10 दिसंबर) से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। सरकार की ओर से डॉक्टरों पर ESMA (Essential Services Maintenance Act) लागू किया गया है, साथ ही No Work No Pay का नियम भी लगाया गया, लेकिन डॉक्टर अपनी मांगें मनवाने के लिए हड़ताल जारी रखेंगे।

    इस वजह से सरकारी अस्पतालों में मरीज दवा लेने और इलाज कराने के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं और कई जगहों पर मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    डॉक्टरों की मुख्य मांगें

    हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राजेश ख्यालिया ने कहा कि सरकार ने पिछले साल लिखित रूप में कहा था कि सरकारी डॉक्टरों की पदोन्नति के लिए Assured Career Progression (ACP) लागू किया जाएगा, लेकिन अब तक यह लागू नहीं हुआ है।
    डॉ. ख्यालिया ने कहा कि सरकार ने हाल ही में 200 SMO (Senior Medical Officer) भर्ती के लिए प्रक्रिया शुरू की है, जिसमें 160 पद सीधे भरे जाएंगे। उनका कहना है कि यह मौजूदा सरकारी डॉक्टरों के साथ अन्याय है, क्योंकि इन पदों पर उनकी पदोन्नति होनी चाहिए थी।

    खाली पदों की समस्या

    राज्य में लगभग 600 मेडिकल ऑफिसर्स के पद खाली हैं। डॉक्टरों का कहना है कि पहले इन पदों को भरा जाना चाहिए, न कि हड़ताल करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

    भूख हड़ताल का ऐलान

    डॉ. ख्यालिया ने बताया कि स्वास्थ्य निदेशालय पंचकूला में तीन डॉक्टरों ने हड़ताल के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू कर दी है।

    सरकार की प्रतिक्रिया

    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने डॉक्टरों की कुछ मांगें मान ली हैं और शेष पर बातचीत जारी है। इसके बावजूद डॉक्टर अपनी हड़ताल जारी रखेंगे।

    इस हड़ताल के चलते हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी असर पड़ रहा है और मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

  • राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह की दूसरी सालगिरह 31 दिसंबर को चंपत राय ने दी जानकारी

    राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह की दूसरी सालगिरह 31 दिसंबर को चंपत राय ने दी जानकारी


    अयोध्या । अयोध्या स्थित राम मंदिर के उद्घाटन और राम लला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह की दूसरी सालगिरह इस बार 22 जनवरी 2026 को नहीं मनाई जाएगी। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय ने यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि हिंदू कैलेंडर के अनुसारराम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह की दूसरी वर्षगांठ इस बार 31 दिसंबर 2025 को होगीक्योंकि प्रतिष्ठा द्वादशी इसी दिन पड़ेगी।

    राम मंदिर ट्रस्ट के अनुसारप्राण प्रतिष्ठा की इस वर्षगांठ को प्रतिष्ठा द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी और विभिन्न सांस्कृतिक तथा सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में राम मंदिर के उद्घाटन और प्राण प्रतिष्ठा समारोह से जुड़े महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं को दर्शाया जाएगाताकि इस अवसर की महिमा और महत्व को और अधिक बढ़ाया जा सके।

    राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह की पहली सालगिरह 2024 में आयोजित की गई थीजब मंदिर के गर्भगृह में राम लला की भव्य मूर्ति स्थापित की गई थी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीउत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत सहित कई प्रमुख व्यक्तित्वों ने शिरकत की थी। यह आयोजन भारतीय समाज के लिए एक ऐतिहासिक क्षण थाक्योंकि वर्षों बाद राम लला की पूजा अर्चना अयोध्या में उनके जन्म स्थान पर शुरू हो सकी थी।

    राम मंदिर का निर्माण श्रीराम के प्रति भारतीय जनता की आस्था और विश्वास का प्रतीक है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैबल्कि भारतीय संस्कृतिसभ्यता और एकता का भी प्रतीक बन चुका है। राम मंदिर का उद्घाटन और प्राण प्रतिष्ठा समारोह एक ऐतिहासिक घटना थीजिससे न केवल हिंदू समाज बल्कि समग्र भारत के लोग जुड़े हुए हैं।

    31 दिसंबर को होने वाले इस विशेष आयोजन में न केवल धार्मिक अनुष्ठान होंगेबल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी योजना बनाई गई हैजिनमें रामकथाभजन कीर्तननृत्य एवं संगीत के कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं। इसके अतिरिक्तविभिन्न सामाजिक गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगीजो राम मंदिर की महिमा को और अधिक बढ़ावा देंगी। इस दिन अयोध्या में विशेष रौनक देखने को मिलेगी और यह आयोजन वहां के नागरिकों और श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव होगा।

    राम मंदिर के इस आयोजन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट ने व्यापक तैयारियां की हैं। मंदिर के आसपास के क्षेत्र को सजाया जाएगा और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा ताकि आयोजन निर्विघ्न रूप से संपन्न हो सके।
    अयोध्या में होने वाला यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगाबल्कि यह भारतीयतासंस्कृति और सभ्यता के प्रति एक गहरी श्रद्धा का प्रतीक भी रहेगा।

  • महिला सिपाही के ब्लैकमेल नेटवर्क का खुलासा, कई दारोगा और सिपाही बने शिकार

    महिला सिपाही के ब्लैकमेल नेटवर्क का खुलासा, कई दारोगा और सिपाही बने शिकार



    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश पुलिस की एक महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा का ब्लैकमेलिंग नेटवर्क इन दिनों सुर्खियों में है जिसके कारण पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। मीनाक्षी की गतिविधियों का खुलासा कुठौंद थाना प्रभारी अरुण कुमार राय की गोली लगने से हुई मौत के बाद हुआ जिसके बाद से उसकी काली करतूतों की परत दर परत खुल रही है। जांच में यह सामने आया कि वर्ष 2022 में मीनाक्षी ने पीलीभीत जिले के पूरनपुर थाने में तैनाती के दौरान एक सिपाही को प्रेमजाल में फंसाकर उससे मोटी रकम की मांग की थी। इसके बाद यह सिलसिला बरेली और जालौन जिलों तक फैल गयाजहां उसने कई दारोगा और सिपाहियों को अपने जाल में फंसाया और उनसे पैसे की मांग की।

    प्रेमजाल और पैसों का दबाव

    मीनाक्षी की कार्यशैली बहुत ही चालाकी से भरी हुई थी। वह पहले जान-पहचान बनाने के लिए पुलिसकर्मियों से संपर्क करती फिर धीरे-धीरे निजी बातचीत और करीबी का हवाला देती थी। इसके बाद वह उन पर पैसों का दबाव बनाती थी। यह दबाव इस तरह से बनता था कि वह खुद को पीड़िता के रूप में प्रस्तुत करती थी जिसके बाद पुलिसकर्मी न चाहते हुए भी पैसों का भुगतान करने के लिए मजबूर हो जाते थे।

    चौंकाने वाली बात यह है कि मीनाक्षी ने इस पूरी प्रक्रिया में अपने परिवार के सदस्यों खासकर अपने पिता और भाई को भी शामिल किया था। मीनाक्षी के पिता और भाई उसे इस खेल में सहयोग करते थे और उसे हिम्मत भी देते थे। जेल जाने के दौरान भी मीनाक्षी के पिता ने उसे जल्द से जल्द बाहर निकालने का वादा किया था जिससे यह संकेत मिलता है कि यह पूरे परिवार का संगठित प्रयास था।

    मीनाक्षी का नेटवर्क और अन्य शिकार

    मीनाक्षी शर्मा के इस ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का दायरा काफी बड़ा था। जांच में यह सामने आया कि वह अकेली नहीं थी बल्कि उसके परिवार के लोग भी इसमें शामिल थे। उसकी सक्रियता पीलीभीत के पूरनपुर थाने तक सीमित नहीं रही बल्कि बरेली और जालौन जिलों में भी उसने कई पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया। मीनाक्षी का यह नेटवर्क न सिर्फ पुलिस महकमे के लिए शर्मिंदगी का कारण बना बल्कि यह भी बताता है कि कैसे एक सिपाही ने अपनी शक्ति का गलत उपयोग किया। उसके खिलाफ पुलिस ने जांच तेज कर दी है और अब तक कई अन्य पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ की जा रही है जो मीनाक्षी के शिकार बने थे। वहीं अधिकारियों का कहना है कि मीनाक्षी के इस पूरे गिरोह को जल्द ही पकड़ा जाएगा और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

    जांच और गिरफ्तारी

    महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा के खिलाफ पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। उसकी गिरफ्तारी के बाद इस मामले में और भी कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। मीनाक्षी के पिता और भाई का भी पुलिस ने पता लगाकर उन्हें हिरासत में लिया है। अब जांच के दौरान यह जानने की कोशिश की जा रही है कि मीनाक्षी ने किन-किन अन्य पुलिसकर्मियों को अपने जाल में फंसाया और वह किस तरह से इन रकमों को इकट्ठा करती थी।इस मामले ने पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है

    और अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या पुलिस महकमें में अन्य किसी महिला या पुरुष कर्मी की तरफ से भी ऐसी घटनाएं घटित हो रही हैं जिसे उजागर नहीं किया गया हो।उत्तर प्रदेश पुलिस के एक महिला सिपाही द्वारा किए गए इस ब्लैकमेलिंग नेटवर्क ने न केवल पुलिस महकमे को शर्मिंदा किया है बल्कि यह भी दिखाया है कि एक सिपाही अपने कद और शक्ति का गलत उपयोग कैसे कर सकता है। इस मामले की गहन जांच जारी है और पुलिस विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है। मीनाक्षी और उसके परिवार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में न घटित हों।
  • आठवें वेतन आयोग का लाभ सभी पेंशनभोगियों को मिलेगा, सरकार ने खत्म किया संदेह

    आठवें वेतन आयोग का लाभ सभी पेंशनभोगियों को मिलेगा, सरकार ने खत्म किया संदेह


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने आठवें वेतन आयोग को लेकर चल रही चर्चाओं और संदेहों का अंत करते हुए स्पष्ट जवाब दिया है। सरकार ने यह साफ कर दिया है कि 69 लाख पेंशनभोगियों को भी इस आयोग के लाभ का पूरा फायदा मिलेगा, जो पहले संदेह के घेरे में थे। इसके साथ ही, सरकार ने इस मामले में स्पष्टता प्रदान करते हुए पेंशनभोगियों को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब दिया है।

    सरकार का आधिकारिक बयान

    वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 8 दिसंबर 2025 को लोकसभा में लिखित रूप में जवाब दिया कि आठवें वेतन आयोग के लाभ से लगभग 50.14 लाख केंद्रीय कर्मचारी और करीब 69 लाख पेंशनभोगी सीधे प्रभावित होंगे। पंकज चौधरी ने बताया कि आठवें केंद्रीय वेतन आयोग 8th CPC की सिफारिशें लागू होने के बाद, इसके प्रभाव में आने वालों की संख्या में काफी वृद्धि होगी। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि बजट में आवश्यक प्रावधान किए जाएंगे, क्योंकि यह एक बड़ा व्यय केंद्र सरकार के लिए होगा।

    AIDEF की आपत्ति और सरकार की प्रतिक्रिया

    इससे पहले, ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन ने आठवें वेतन आयोग के दायरे से 69 लाख पेंशनभोगियों को बाहर किए जाने के खिलाफ आपत्ति जताई थी। उन्होंने वित्त मंत्रालय को पत्र लिखकर टर्म ऑफ रेफरेंस में असंगतियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे।  का कहना था कि पेंशनभोगियों को इस आयोग से बाहर करना अनुचित होगा, क्योंकि वे पहले से ही सरकार द्वारा निर्धारित पेंशन नियमों का पालन कर रहे हैं

    और उन्हें आयोग के लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।अब सरकार ने इस आपत्ति पर स्पष्टता देते हुए कहा है कि पेंशनभोगियों को इस वेतन आयोग के लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा और यह सभी 69 लाख पेंशनभोगियों के लिए लागू होगा। यह निर्णय पेंशनभोगियों के लिए राहत का संकेत है, जिन्होंने इस मामले में लगातार सरकार से जवाब मांगा था।

    वेतन आयोग का प्रभाव

    आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण परिवर्तन लेकर आएंगी। इस आयोग की सिफारिशों के अनुसार, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की वेतन संरचना, भत्ते और अन्य सुविधाओं में वृद्धि की संभावना है। यह कदम केंद्र सरकार के लिए एक बड़ा व्यय होगा, क्योंकि इसे लागू करने के लिए बजट में खास प्रावधान किए जाएंगे। केंद्र सरकार के लिए यह निर्णय व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे लागू करने से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। लेकिन, यह कदम कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा, जो लंबे समय से वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर रहे थे।

    आगे क्या होगा

    अब जबकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेंशनभोगियों को भी आठवें वेतन आयोग का लाभ मिलेगा, यह सभी संबंधित पक्षों के लिए एक राहत की बात है। इसके बाद, केंद्र सरकार को इस फैसले को बजट में शामिल करना होगा और इसके लिए आवश्यक वित्तीय प्रावधान करना होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि बजट में किस तरह से इस फैसले को लागू करने के लिए कदम उठाए जाते हैं और यह निर्णय केंद्र सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर कितना प्रभाव डालता है।

    आठवें वेतन आयोग का लाभ अब सभी केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलेगा, जैसा कि सरकार ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है। इससे संबंधित कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच खुशी की लहर है, क्योंकि यह उनकी लंबे समय से लंबित उम्मीदों का फल है। हालांकि, इस फैसले के लागू होने के बाद केंद्र सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर इसका प्रभाव पड़ेगा, और इसे बजट में सही तरीके से प्रावधानित करना होगा।

  • वंदे मातरम् पर संसद में गरमाई बहस अमित शाह ने विपक्ष पर किए तीखे आरोप

    वंदे मातरम् पर संसद में गरमाई बहस अमित शाह ने विपक्ष पर किए तीखे आरोप

     
    नई दिल्ली । संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान वंदे मातरम् पर जारी बहस ने मंगलवार को एक नया मोड़ लिया जब गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। इस मुद्दे पर पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी और अब अमित शाह ने विपक्ष पर तीखे आरोप लगाए। वंदे मातरम् पर संसद में चल रही यह बहस 9 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकसभा में इसकी शुरुआत के बाद और भी तेज हो गई है।

    अमित शाह का बयान

    अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम् पर चर्चा की आवश्यकता तब भी थी जब यह रचना रची गई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह चर्चा आजादी के आंदोलन के दौरान भी जरूरी थी और आज भी यह जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब भारत 2047 में एक विकसित राष्ट्र बनेगा तब भी वंदे मातरम् पर चर्चा जारी रहेगी। शाह ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बात करते हुए कहा कि यह रचना विदेशी आक्रमणों और सांस्कृतिक चुनौतियों के प्रतिकार के रूप में सामने आई थी।

    गृह मंत्री अमित शाह ने आगे कहा कि वंदे मातरम् को लेकर भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के समय इसका एक बड़ा महत्व था। यह न केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बन चुका था बल्कि यह भारतीय संस्कृति और स्वाभिमान का भी प्रतीक था। उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज वंदे मातरम् को लेकर विवाद उठाना और इसके महत्व को कम करने की कोशिश करना भारतीयता और भारतीय संस्कृति को कमजोर करने जैसा है।

    नेहरू और इंदिरा गांधी पर बयान

    अमित शाह ने इस मुद्दे पर एक और ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए कहा नेहरू ने वंदे मातरम् के टुकड़े किए थे और इंदिरा गांधी ने इसके विरोध में खड़ा कर दिया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं ने हमेशा इस पर विवाद उठाया जबकि वंदे मातरम् ने भारतीय जनमानस को एकजुट किया और यह हर भारतीय का राष्ट्रीय गीत बन गया।

    शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वंदे मातरम् के खिलाफ राजनीति करना भारतीय संस्कृति और भारतीयता के खिलाफ है। उनका यह भी कहना था कि अगर कांग्रेस के नेताओं के विचार इस गीत के खिलाफ थे तो यह पार्टी की सोच का संकेत है कि वह भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद को प्राथमिकता नहीं देती।

    विपक्ष पर अमित शाह के आरोप

    अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जो लोग वंदे मातरम् के खिलाफ बोलते हैं वे दरअसल भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद का अपमान कर रहे हैं। उनका कहना था कि यह गीत हर भारतीय के दिल में गूंजता है और यह केवल एक गीत नहीं बल्कि भारत की स्वतंत्रता एकता और अखंडता का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस गीत का विरोध कर राजनीति कर रहे हैं और अपनी वोट बैंक की राजनीति के लिए इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।

    राजनीतिक हलचल और संसद में गहमागहमी

    वंदे मातरम् पर संसद में चली यह बहस अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है। यह मामला केवल एक गीत का नहीं बल्कि भारतीयता संस्कृति और राष्ट्रवाद से जुड़ा हुआ है। अमित शाह के बयान ने विपक्ष को चुप्प रहने की चुनौती दी है वहीं विपक्ष ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं भी दी हैं। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि वंदे मातरम् को लेकर किसी भी तरह की राजनीति नहीं की जानी चाहिए। उनका मानना है कि यह गीत सभी भारतीयों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है और इसे किसी विशेष पार्टी या विचारधारा से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।

    वंदे मातरम् पर यह बहस अब केवल एक गीत तक सीमित नहीं रही बल्कि यह भारतीय संस्कृति राष्ट्रीय एकता और राजनीति से जुड़ा हुआ मुद्दा बन गया है। जहां एक ओर अमित शाह और उनकी पार्टी इस मुद्दे को भारतीयता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं वहीं विपक्ष इसे राजनीति से जोड़ते हुए इसे विवादित बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर भी चर्चा का विषय बना रहेगा और इस पर अधिक राजनीतिक बयानबाजी की संभावना है।

  • जान से मारने की धमकियों से घिरे विधायक हुमायूं कबीर, सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट जाने की तैयारी

    जान से मारने की धमकियों से घिरे विधायक हुमायूं कबीर, सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट जाने की तैयारी


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले विधायक हुमायूं कबीर को लगातार मिल रही धमकियों ने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कबीर ने बताया कि 6 दिसंबर को शिलान्यास के बाद से उन्हें राज्य के बाहर से फोन कर जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं।

    सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि तत्काल उपाय के तौर पर वह मंगलवार से अपने लिए आठ निजी सुरक्षाकर्मी तैनात करेंगे। उन्होंने राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए मेल भेजा है। कबीर ने कहा कि अगर उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

    एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “पिछले सात दिनों से लगातार धमकी आ रही है। कहा जा रहा है कि बाबरी मस्जिद की नींव रखने से पहले ही मुझे मार दिया जाएगा। मैं डरा नहीं हूं, अल्लाह पर पूरा भरोसा है, लेकिन सावधानी के लिए सुरक्षा ज़रूरी है।”

    उन्होंने यह भी कहा कि 16 दिसंबर को वह बेंगलुरु जाएंगे और इसके बाद नोएडा की यात्रा करेंगे, इसलिए यात्रा के दौरान सुरक्षा की जरूरत और अधिक बढ़ जाती है।

    तृणमूल कांग्रेस द्वारा निलंबित किए जा चुके कबीर ने राज्य पुलिस पर भरोसा न होने की बात भी कही। उनका कहना है कि चूंकि सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी बाबरी मस्जिद के लिए फंडिंग को लेकर बीजेपी पर आरोप लगा रही है, इसलिए उन्हें सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संदेह है।

    कबीर ने स्पष्ट किया कि वह जल्द ही पर्याप्त सुरक्षा की मांग के लिए उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं।

  • सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता: एक करोड़ के इनामी रामधेर समेत 12 माओवादी समर्पित

    सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता: एक करोड़ के इनामी रामधेर समेत 12 माओवादी समर्पित


    राजनांदगांव । छत्तीसगढ़ महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के एमएमसी जोन में सक्रिय माओवादियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। माओवादी संगठन के एक बड़े सदस्य रामधेर ने आखिरकार सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके साथ ही उनके 11 साथियों ने भी हथियार डाल दिए जिससे एमएमसी जोन में माओवादी गतिविधियों को खत्म करने की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। इस आत्मसमर्पण को सुरक्षा एजेंसियां माओवादी मुक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम मान रही हैं।
    रामधेर जो कि माओवादी संगठन के केंद्रीय समिति सीसी का सदस्य था लंबे समय से सुरक्षाबलों के रडार पर था। वह छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव बालाघाट और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में माओवादी गतिविधियों को संचालित कर रहा था। इस समर्पण के साथ ही इस इलाके में माओवादी विरोधी अभियान को एक बड़ी जीत मिल रही है। रामधेर और उसके साथियों ने खैरागढ़ इलाके के बकरकट्टा थाने में सोमवार तड़के आत्मसमर्पण किया।
    पिछले कुछ दिनों से रामधेर और उसके साथियों के सुरक्षा एजेंसियों से संपर्क में रहने की खबरें आ रही थीं। इसके बाद रविवार को बालाघाट में भोरमदेव कमेटी के 10 माओवादियों के समर्पण के एक दिन बाद रामधेर ने भी अपनी गिरफ्तारी का ऐलान किया। इस आत्मसमर्पण के साथ ही एमएमसी जोन में माओवादी गतिविधियों की समाप्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस मौके पर राजनांदगांव पहुंचकर इस महत्वपूर्ण घटना को ऐतिहासिक करार दिया और कहा कि यह राज्य की सुरक्षा और शांति के लिए एक अहम कदम है। मुख्यमंत्री ने समर्पण करने वाले माओवादियों के फैसले को सराहा और यह भी कहा कि यह समर्पण उनके लिए एक नया जीवन शुरू करने का अवसर है।
    सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक रामधेर और उसके साथी लंबे समय से माओवादी संगठन में अहम भूमिका निभा रहे थे और उनके खिलाफ कई गंभीर आरोप थे। रामधेर पर एक करोड़ रुपये का इनाम भी रखा गया था। वह अपनी मास्टरमाइंड योजनाओं और हमलों के लिए जाना जाता था लेकिन अब उसके आत्मसमर्पण से सुरक्षा बलों को एक बड़ी राहत मिली है।
    राजनांदगांव पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि माओवादी नेता रामधेर के समर्पण के बाद एमएमसी जोन को पूरी तरह से माओवादी मुक्त माना जा सकता है। यह राज्य सरकार और सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी सफलता है क्योंकि इस इलाके में माओवादियों के प्रभाव को समाप्त करने के लिए कई सालों से लगातार प्रयास किए जा रहे थे।
    इस समर्पण के बाद सुरक्षा बलों के अधिकारियों का मानना है कि अब एमएमसी जोन में माओवादियों की कोई बड़ी उपस्थिति नहीं होगी जिससे क्षेत्र की सुरक्षा और विकास में तेजी आएगी। माओवादियों के खिलाफ जारी अभियान अब न सिर्फ माओवादियों के समर्थन को समाप्त करेगा बल्कि स्थानीय जनता में सुरक्षा का विश्वास भी बढ़ाएगा।
    माओवादी संगठन के खिलाफ सुरक्षाबलों की लगातार मुहिम और सरकार की पहलें अब धीरे-धीरे रंग लाने लगी हैं। रामधेर जैसे बड़े माओवादी नेताओं का समर्पण यह सिद्ध करता है कि माओवादी आंदोलन का प्रभाव अब धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। इस समर्पण के बाद सुरक्षा बलों का कहना है कि आगे भी इसी तरह के समर्पण होते रहेंगे जिससे न केवल एमएमसी जोन बल्कि पूरे राज्य में माओवादी गतिविधियों पर काबू पाया जा सकेगा। राज्य सरकार और सुरक्षा बलों के साथ-साथ स्थानीय जनता भी इस आत्मसमर्पण को सकारात्मक रूप से देख रही है क्योंकि इससे इलाके में शांति और विकास की संभावनाएं बढ़ी हैं।

  • तेलंगाना में डोनल्ड ट्रंप के नाम पर सड़क का नामकरण वैश्विक ध्यान आकर्षित करने की रणनीति

    तेलंगाना में डोनल्ड ट्रंप के नाम पर सड़क का नामकरण वैश्विक ध्यान आकर्षित करने की रणनीति


    नई दिल्‍ली।तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हाल ही में हैदराबाद में एक प्रमुख सड़क का नाम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर रखने का प्रस्ताव किया है। इस फैसले के पीछे राज्य सरकार की मंशा है कि वह आगामी तेलंगाना राइजिंग ग्लोबल समिटसे पहले अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित कर सके। यह समिट तेलंगाना के लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच साबित हो सकता है जहाँ राज्य की अर्थव्यवस्था और विकास की संभावनाओं को दुनिया के सामने रखा जाएगा।

    गौरतलब है कि तेलंगाना सरकार का यह कदम एक वैश्विक पहचान हासिल करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हैदराबाद शहर में स्थित अमेरिकी दूतावास के पास से गुजरने वाली एक प्रमुख सड़क को डोनल्ड ट्रंप एवेन्यूके नाम से जाना जाएगा। इस निर्णय को लेकर अधिकारियों का कहना है कि यह कदम किसी सिटिंग अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम पर विदेश में सड़क का नाम रखने का पहला उदाहरण हो सकता है जो इस फैसले को और भी ऐतिहासिक बना देता है।

    यह नामकरण न केवल डोनाल्ड ट्रंप की वैश्विक पहचान को सम्मानित करने का प्रयास है बल्कि तेलंगाना सरकार का उद्देश्य राज्य की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी और व्यापारिक महत्व को भी बढ़ाना है। तेलंगाना का यह कदम उस समय आया है जब राज्य अपने वैश्विक व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है। ट्रंप के नाम पर सड़क का नामकरण एक प्रतीकात्मक कदम हो सकता है जो अमेरिकी और भारतीय दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों को दर्शाता है।

    ग्लोबल नामों का सम्मान

    तेलंगाना सरकार के इस प्रस्ताव का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि यह केवल राजनीतिक हस्तियों तक सीमित नहीं है। सरकार उन प्रमुख वैश्विक बिजनेस और टेक्नोलॉजी लीडर्स को भी सम्मान देने का इरादा रखती है जिन्होंने हैदराबाद को एक प्रमुख टेक हब बनाने में योगदान दिया। इसके तहत कुछ अन्य महत्वपूर्ण सड़कें भी प्रस्तावित की गई हैं जिनका नामकरण प्रमुख वैश्विक कंपनियों और उद्योगपतियों के सम्मान में किया जाएगा।

    इस संदर्भ में एक और महत्वपूर्ण सड़क का नाम गूगल स्ट्रीटरखने की योजना बनाई जा रही है क्योंकि हैदराबाद में गूगल की एक बड़ी टेक्नोलॉजी शाखा स्थित है। इसी तरह माइक्रोसॉफ्ट रोडऔर विप्रो जंक्शनजैसे नामों पर भी विचार चल रहा है। इन नामों का उद्देश्य उन प्रमुख वैश्विक कंपनियों को सम्मान देना है जिन्होंने शहर को एक वैश्विक तकनीकी केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    तेलंगाना का विकास और ग्लोबल पहचान

    तेलंगाना सरकार का मानना है कि इस प्रकार के नामकरण राज्य के आर्थिक और तकनीकी विकास की दिशा में एक और कदम होगा। इस योजना के माध्यम से तेलंगाना सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह न केवल अपने राज्य के भीतर बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक महत्त्वपूर्ण और प्रभावशाली उपस्थिति बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    इसके अतिरिक्त तेलंगाना सरकार ने रवीरियाला में नेहरू आउटर रिंग रोड को प्रस्तावित फ्यूचर सिटी से जोड़ने वाली 100 मीटर चौड़ी ग्रीनफील्ड रेडियल रोड का नाम रतन टाटा रोडरखने का भी निर्णय लिया है। रतन टाटा जो टाटा समूह के प्रमुख रहे हैं को इस सम्मानित नामकरण से श्रद्धांजलि दी जाएगी। वहीं रवीरियाला इंटरचेंजका नाम पहले ही टाटा इंटरचेंजरखा जा चुका है जो यह दर्शाता है कि राज्य सरकार उद्योगपतियों और बिजनेस लीडर्स को भी सम्मान देने का भरसक प्रयास कर रही है।

    तेलंगाना राज्य का यह कदम न केवल अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने की एक रणनीति है बल्कि यह राज्य की आर्थिक और तकनीकी संभावनाओं को वैश्विक मंच पर प्रमोट करने का एक नया तरीका भी है। डोनल्ड ट्रंप गूगल माइक्रोसॉफ्ट और विप्रो जैसे वैश्विक नामों को सड़कें समर्पित करना तेलंगाना की महत्वाकांक्षाओं को प्रदर्शित करता है और राज्य को एक वैश्विक कारोबारी केंद्र के रूप में प्रस्तुत करता है। इस कदम के माध्यम से तेलंगाना यह दिखाना चाहता है कि वह सिर्फ एक उभरते हुए राज्य से कहीं अधिक है बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी और समृद्ध राज्य बनने की ओर अग्रसर है।

  • इंडिगो का संकट जारीदिल्ली IGI एयरपोर्ट पर 134 को फिर परेशानीउड़ानें रद्द यात्रियों

    इंडिगो का संकट जारीदिल्ली IGI एयरपोर्ट पर 134 को फिर परेशानीउड़ानें रद्द यात्रियों


    नई दिल्‍ली ।
    दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे IGI Airport पर सोमवार को भी यात्रियों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा क्योंकि इंडिगो एयरलाइंस का संकट थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है। सोमवार को इंडिगो ने कुल 134 उड़ानें रद्द कर दीं जिनमें से 75 प्रस्थान करने वाली और 59 आगमन वाली उड़ानें शामिल हैं। इन रद्द उड़ानों की वजह से यात्रियों के लिए यात्रा की योजना में अनिश्चितता बढ़ गई है और हवाई अड्डे पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

    इंडिगो एयरलाइंस का संकट

    इंडिगो एयरलाइंस के लिए ये कठिन समय चल रहा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से फ्लाइट्स में लगातार रद्दीकरण हो रहे हैं। यात्रियों को इससे भारी असुविधा हो रही है क्योंकि उन्हें रद्द हुई उड़ानों के कारण घंटों इंतजार करना पड़ रहा है और नए शेड्यूल के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एयरलाइन ने इन रद्द उड़ानों की वजह का खुलासा नहीं किया है लेकिन यात्री इसे टेक्निकल या अन्य ऑपरेशनल समस्याओं से जोड़ कर देख रहे हैं।

    इस बीच दिल्ली एयरपोर्ट ने यात्रियों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है जिसमें बताया गया है कि इंडिगो की उड़ानों में देरी जारी रह सकती है। एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे हवाई अड्डे पर जाने से पहले अपनी उड़ान का लेटेस्ट स्टेटस एयरलाइन से चेक कर लें। यह सलाह विशेष रूप से उन यात्रियों के लिए है जिनकी फ्लाइट्स देरी से चल रही हैं या पहले ही रद्द हो चुकी हैं।

    यात्रियों के लिए सलाह और कदम

    दिल्ली एयरपोर्ट की एडवाइजरी में यात्रियों से अपील की गई है कि वे फ्लाइट की स्थिति के बारे में पहले से जानकारी प्राप्त करें ताकि वे अनावश्यक समय हवाई अड्डे पर न बर्बाद करें। एयरपोर्ट प्रशासन ने यह भी सुझाव दिया है कि जिन यात्रियों की उड़ानें रद्द हो चुकी हैं वे एयरलाइन के काउंटर पर जाकर अपने लिए वैकल्पिक उड़ान की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

    इसके अलावा एयरलाइन ने यात्रियों को अपनी उड़ान के रद्द होने की स्थिति में पूरी जानकारी और सहायता देने का वादा किया है। हालांकि रद्द हुई उड़ानों के कारण प्रभावित यात्रियों के लिए एयरलाइन की तरफ से कोई स्पष्ट समाधान सामने नहीं आया है जिससे यात्रियों में निराशा का माहौल है।

    इंडिगो के लिए एक चुनौतीपूर्ण समय

    इंडिगो एयरलाइंस के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। पहले ही काफी बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा और बढ़ती मांग के बीच उड़ान रद्दीकरण और देरी की घटनाएं एयरलाइन की प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि इंडिगो एयरलाइंस इस स्थिति से निपटने के लिए कदम उठा रही है और यात्रियों को सुविधा प्रदान करने के लिए अपने संसाधनों को समायोजित करने की कोशिश कर रही है।

    इंडिगो एयरलाइंस के प्रवक्ता ने इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एयरलाइन पूरी तरह से स्थिति को सुधारने के लिए प्रयासरत है और यात्रियों को बेहतर सेवाएं देने के लिए निरंतर काम कर रही है। उन्होंने यात्रियों से सहयोग की अपील की और कहा कि एयरलाइन जितनी जल्दी हो सके उड़ानों के संचालन में सुधार लाने का प्रयास करेगी।

    इंडिगो का संकट दिल्ली एयरपोर्ट पर यात्रियों के लिए लगातार परेशानी का कारण बना हुआ है। यात्रियों को इस कठिन समय में हवाई अड्डे पर असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है और एयरलाइन की उड़ान रद्दीकरण और देरी ने यात्रियों के लिए यात्रा को मुश्किल बना दिया है। हालांकि दिल्ली एयरपोर्ट और एयरलाइन दोनों की तरफ से यात्रियों को सही मार्गदर्शन देने की कोशिश की जा रही है लेकिन फिलहाल समस्या का समाधान होने में समय लग सकता है। इस संकट से निपटने के लिए एयरलाइन को अपनी ऑपरेशनल प्रणाली में सुधार लाने की आवश्यकता महसूस हो रही है ताकि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचा जा सके।

  • कैंसिल फ्लाइट्स से प्रभावित यात्रियों को मिलेगा रिफंड, सरकार ने इंडिगो पर सख्त कदम उठाए

    कैंसिल फ्लाइट्स से प्रभावित यात्रियों को मिलेगा रिफंड, सरकार ने इंडिगो पर सख्त कदम उठाए


    नई दिल्‍ली । 6 दिसंबर को केंद्र सरकार ने इंडिगो एयरलाइंस पर सख्ती करते हुए फ्लाइट कैंसिल होने के कारण प्रभावित यात्रियों को टिकट का रिफंड देने का निर्देश दिया। इसके अलावा, सरकार ने यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि फ्लाइट कैंसिल होने से छूटे हुए सभी सामान को अगले 48 घंटों में यात्रियों तक पहुंचा दिया जाए। विमानन मंत्रालय ने इंडिगो को कहा कि 7 दिसंबर तक रिफंड प्रक्रिया पूरी कर ली जाए, ताकि यात्रियों को कोई असुविधा न हो।

    रिफंड की प्रक्रिया और 7 दिसंबर की डेडलाइन

    मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि इंडिगो को अपनी रद्द उड़ानों के लिए टिकट रिफंड की प्रक्रिया शाम तक यानी 7 दिसंबर तक पूरी करनी होगी। इसके साथ ही विमानन मंत्रालय ने इंडिगो को एक विशेष सहायता और रिफंड सुविधा केंद्र बनाने का भी आदेश दिया ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो। इसके अलावा यह भी निर्देशित किया गया कि एयरलाइन यह सुनिश्चित करे कि फ्लाइट के रद्द होने के कारण यात्रियों का छूटे हुआ सामान अगले 48 घंटों के भीतर उन तक पहुंच जाए।

    पायलट ड्यूटी नियमों का असर

    इंडिगो की फ्लाइट्स में रुकावट का मुख्य कारण केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए पायलट ड्यूटी नियम हैं। ये नियम 1 जुलाई 2025 से प्रभावी हुए थे, जिसके तहत पायलटों को हफ्ते में 36 घंटे के बजाय 48 घंटे का आराम दिया जाना अनिवार्य कर दिया गया। इसके अतिरिक्त, नवंबर 2023 में DGCA ने पायलटों और क्रू मेंबर्स के लिए लगातार नाइट शिफ्ट पर पाबंदी भी लगा दी। इसके कारण एयरलाइनों में पायलटों की उपलब्धता में 15-20% की कमी आई जिससे फ्लाइट्स की संख्या कम हो गई और कई उड़ानें रद्द हो गईं।

    इंडिगो की उड़ान रद्दीकरण और देरी

    5 और 6 दिसंबर को इंडिगो की 1,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द हुईं। इसके अलावा, देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु पर 400 से अधिक उड़ानें रद्द हो गईं। इन घटनाओं के चलते यात्रियों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ा और सरकार ने एयरलाइन को आदेश दिया कि रिफंड प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी या गैर-अनुपालन पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

    सरकार की तैयारी और सख्त कदम

    सरकार इस मामले को लेकर बेहद सख्त नजर आ रही है और इंडिगो पर भारी जुर्माना लगाने की तैयारी कर रही है। मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है और लगातार मीटिंग्स कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस पूरे मामले की जानकारी दी गई है।

    आगे की स्थिति

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक इंडिगो के परिचालन में पूरी तरह से स्थिरता नहीं आती तब तक स्वचालित रिफंड प्रक्रिया जारी रहेगी। मंत्रालय ने एयरलाइन से कहा कि वह सुनिश्चित करे कि यात्रियों के सामान का जल्द से जल्द पता लगाया जाए और उन्हें वापस किया जाए। इस बीच यात्रियों को भी सलाह दी गई है कि वे एयरलाइन की रिफंड प्रक्रिया का पालन करें और अपनी यात्रा से संबंधित किसी भी समस्या के लिए सहायता केंद्र से संपर्क करें।

    इन घटनाओं से स्पष्ट है कि सरकार की निगरानी और नियमों के पालन के बिना यात्रियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है लेकिन अब इंडिगो पर दबाव बढ़ने के बाद उम्मीद की जा रही है कि एयरलाइन जल्द ही अपनी सेवाओं को फिर से सामान्य बनाएगी।