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  • समर स्किन केयर: जड़ी-बूटियों से चमकता चेहरा और दाग-धब्बों से राहत

    समर स्किन केयर: जड़ी-बूटियों से चमकता चेहरा और दाग-धब्बों से राहत


    नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम आते ही त्वचा से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। तेज धूप, पसीना और धूल-मिट्टी के कारण चेहरा बेजान नजर आने लगता है। ऐसे में त्वचा की देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है। आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ी-बूटियां बताई गई हैं, जिनका इस्तेमाल करके आप बिना किसी केमिकल के अपने चेहरे को निखार सकते हैं और दाग-धब्बों से छुटकारा पा सकते हैं।

    नीम: पिंपल्स और एक्ने का दुश्मन

    आयुर्वेद में नीम को बेहद गुणकारी माना जाता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। गर्मियों में अगर पिंपल्स या एक्ने की समस्या हो रही है, तो नीम के पत्तों को पीसकर मुल्तानी मिट्टी के साथ मिलाकर फेस पैक के रूप में लगाया जा सकता है। इससे त्वचा साफ होती है और निखार बढ़ता है।

    मंजिष्ठा: स्किन टोन को बनाए संतुलित

    मंजिष्ठा को आयुर्वेद में रक्त शुद्ध करने वाली जड़ी-बूटी माना जाता है। यह त्वचा की रंगत को सुधारने में मदद करती है। मंजिष्ठा का सेवन करने के साथ-साथ इसका फेस पैक बनाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे स्किन टोन में निखार आता है।

    हल्दी: दाग-धब्बों से छुटकारा

    हर घर में मौजूद हल्दी त्वचा के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो दाग-धब्बों को कम करने में मदद करते हैं। मुल्तानी मिट्टी और चंदन के साथ चुटकी भर हल्दी मिलाकर फेस पैक लगाने से त्वचा को ठंडक मिलती है और ग्लो बढ़ता है।

    चंदन: ठंडक और पोषण का खजाना

    गर्मियों में चंदन का इस्तेमाल बेहद फायदेमंद होता है। इसमें शीतलता के गुण होते हैं, जो त्वचा को ठंडक देने के साथ-साथ उसे पोषण भी देते हैं। यह धूप के कारण होने वाले नुकसान को कम करता है और त्वचा को तरोताजा बनाए रखता है।

    मुलेठी: टैनिंग और डार्क स्पॉट से राहत

    मुलेठी का इस्तेमाल सिर्फ खांसी-जुकाम के लिए ही नहीं, बल्कि त्वचा के लिए भी किया जाता है।
    इसके लेप से डार्क स्पॉट और टैनिंग कम होती है, जिससे चेहरा साफ और चमकदार नजर आता है।

    नियमित इस्तेमाल से मिलेगा बेहतर रिजल्ट

    इन सभी जड़ी-बूटियों का नियमित और सही तरीके से इस्तेमाल करने पर त्वचा से जुड़ी समस्याओं में काफी हद तक राहत मिल सकती है। हालांकि, किसी भी नई चीज को इस्तेमाल करने से पहले स्किन टेस्ट जरूर करें, ताकि किसी तरह की एलर्जी से बचा जा सके।

    गर्मियों में नीम, मंजिष्ठा, हल्दी, चंदन और मुलेठी जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां त्वचा को निखारने, दाग-धब्बे कम करने और नैचुरल ग्लो पाने में बेहद असरदार साबित होती हैं।

  • विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026: स्वस्थ जीवन के लिए जागरूकता और इस बार की खास थीम

    विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026: स्वस्थ जीवन के लिए जागरूकता और इस बार की खास थीम

    नई दिल्ली। हर साल 7 अप्रैल को दुनिया भर में विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026 मनाया जाता है। यह दिन न सिर्फ स्वास्थ्य के महत्व को समझाने का अवसर है, बल्कि लोगों को एकजुट होकर बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रेरित भी करता है। साल 2026 में इस दिवस की थीम है -“स्वास्थ्य के लिए एकजुट, विज्ञान के साथ खड़े रहें”, जो आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत को दर्शाती है।

    1948 से शुरू हुई जागरूकता की परंपरा

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की स्थापना 7 अप्रैल 1948 को हुई थी, और इसी के उपलक्ष्य में हर साल यह दिन मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर में स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होती है और लोगों को जागरूक किया जाता है कि वे अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें।

    इस साल की थीम: विज्ञान और सहयोग पर जोर

    साल 2026 की थीम “स्वास्थ्य के लिए एकजुट, विज्ञान के साथ खड़े रहें” के जरिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए विज्ञान और सहयोग दोनों जरूरी हैं। यह थीम “वन हेल्थ” सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें इंसान, जानवर और पर्यावरण के स्वास्थ्य को एक-दूसरे से जुड़ा माना गया है।

    सालभर चलेगा वैश्विक अभियान

    इस बार यह अभियान सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे साल चलेगा। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक खोजों को वास्तविक जीवन में लागू करना और उन्हें आम लोगों तक पहुंचाना है। अभियान के तहत लोगों, सरकारों, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्यकर्मियों को साथ मिलकर काम करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

    दो बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों से शुरुआत

    इस वैश्विक पहल की शुरुआत 7 अप्रैल को दो प्रमुख आयोजनों के साथ होगी। पहला कार्यक्रम फ्रांस की जी7 अध्यक्षता में आयोजित “वन हेल्थ शिखर सम्मेलन” है। दूसरा एक बड़ा वैश्विक मंच है, जिसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोगी केंद्रों से जुड़े 80 से अधिक देशों के लगभग 800 वैज्ञानिक संस्थान भाग ले रहे हैं। ये दोनों आयोजन मिलकर दुनिया का एक विशाल वैज्ञानिक नेटवर्क तैयार करेंगे।

    नई चुनौतियों से निपटने में विज्ञान की भूमिका

    आज के दौर में महामारी, जलवायु परिवर्तन और एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस जैसी चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि इन समस्याओं का समाधान केवल विज्ञान और शोध के जरिए ही संभव है। इसलिए लोगों से अपील की गई है कि वे विज्ञान पर भरोसा रखें और उसका समर्थन करें।

    सोशल मीडिया पर भी जुड़ने का आह्वान

    इस अभियान के तहत लोगों को अपनी कहानियां साझा करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है कि कैसे विज्ञान ने उनके जीवन को बेहतर बनाया। सोशल मीडिया पर #StandWithScience और #WorldHealthDay जैसे हैशटैग के जरिए वैश्विक स्तर पर चर्चा को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    एकजुटता से ही बनेगा स्वस्थ भविष्य

    इस साल का संदेश साफ है-स्वास्थ्य की रक्षा के लिए हमें एकजुट होना होगा और विज्ञान के साथ खड़ा रहना होगा। अगर दुनिया मिलकर प्रयास करे, तो एक स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य का निर्माण संभव है।

  • इंदौर-पीथमपुर उद्योगों पर युद्ध का असर, घटा उत्पादन, सरकार ने मांगी रिपोर्ट, राहत पैकेज की मांग तेज

    इंदौर-पीथमपुर उद्योगों पर युद्ध का असर, घटा उत्पादन, सरकार ने मांगी रिपोर्ट, राहत पैकेज की मांग तेज


    इंदौर। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव का असर अब मध्यप्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों पर भी साफ दिखने लगा है। इंदौर-पीथमपुर इंडस्ट्रियल बेल्ट में उत्पादन घटने और रोजगार पर असर पड़ने के मामलों को सरकार ने गंभीरता से लिया है। इसी के तहत राज्य सरकार ने उद्योग संगठनों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी जिसे अब प्रस्तुत कर दिया गया है। अधिकारियों ने उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर एमएसएमई और बड़ी इकाइयों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने की बात कही है।

    एमएसएमई पर सबसे ज्यादा मार

    पीथमपुर औद्योगिक संगठन ने अपनी रिपोर्ट में हालात को आर्थिक आपातकाल जैसे बताया है। कई छोटे और मध्यम उद्योग बंद होने की कगार पर हैं। भुगतान चक्र बिगड़ने से पूंजी संकट गहराता जा रहा है जिससे उद्योगों की कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) पर भारी दबाव पड़ रहा है। उद्योगों को कच्चे माल गैस और अन्य संसाधनों के लिए अग्रिम भुगतान करना पड़ रहा है जबकि तैयार माल का भुगतान देरी से मिल रहा है। इससे आर्थिक संतुलन बिगड़ रहा है।

    कच्चे माल की कमी लागत में बढ़ोतरी

    रिपोर्ट के अनुसार उद्योग करीब 70% कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर हैं। युद्ध के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है जिससे कीमतें बढ़ गई हैं और उत्पादन लागत में इजाफा हुआ है। पीएनजी और एलपीजी की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। एलपीजी की कमी बनी हुई है जबकि पीएनजी के दाम बढ़ गए हैं। पहले दी जा रही रियायतें भी वापस ले ली गई हैं जिससे उद्योगों की परेशानी और बढ़ गई है।

    निर्यात पर भी पड़ा असर


    पीथमपुर से होने वाला निर्यात भी प्रभावित हुआ है। बड़ी मात्रा में तैयार माल बंदरगाहों पर फंसा हुआ है जिससे उद्योगों की पूंजी अटक गई है और वित्तीय दबाव बढ़ गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि फ्रेट लागत बढ़कर करीब 2400 डॉलर तक पहुंच गई है जो पहले की तुलना में लगभग दोगुनी है। इसके अलावा युद्ध सरचार्ज भी अतिरिक्त रूप से देना पड़ रहा है।

    सरकार से राहत की मांग तेज

    विभिन्न औद्योगिक संगठनों फार्मा प्लास्टिक ऑटो एंसिलरी और पैकेजिंग सेक्टर ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठनों ने एलपीजी और गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण और वैट घटाने की मांग उठाई है। वर्तमान में वैट 14% है जबकि अन्य राज्यों में यह करीब 5% है। इसके अलावा बिजली दरों में बढ़ोतरी रोकने और पावर टैरिफ पर सब्सिडी देने की भी मांग की गई है ताकि उत्पादन लागत कम हो सके।

    रोजगार बचाने पर जोर

    उद्योगों ने सरकार से वर्किंग कैपिटल के लिए ब्याज सहायता पूंजी समर्थन और रोजगार बनाए रखने के लिए इम्प्लॉयमेंट सब्सिडी देने की भी मांग की है जिससे उद्योग और श्रमिक दोनों को राहत मिल सके।

  • KKR की मुश्किलें बढ़ीं! एक नहीं कई समस्याएं, प्लेऑफ की राह हो सकती है कठिन

    KKR की मुश्किलें बढ़ीं! एक नहीं कई समस्याएं, प्लेऑफ की राह हो सकती है कठिन


    नई दिल्ली।तीन बार की चैंपियन कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए आईपीएल 2026 की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही है। तीन मुकाबलों के बाद भी टीम जीत का खाता नहीं खोल पाई है। ऐसे में टीम के सामने एक नहीं बल्कि कई बड़ी समस्याएं खड़ी हो गई हैं, जिनका समाधान जल्द नहीं निकला तो पूरा सीजन हाथ से निकल सकता है।

    ओपनिंग जोड़ी बनी चिंता

    केकेआर की सलामी जोड़ी इस सीजन उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही। फिन एलन तेज शुरुआत तो दिला रहे हैं, लेकिन बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे हैं। वहीं कप्तान अजिंक्य रहाणे की धीमी बल्लेबाजी टीम के लिए परेशानी बनती जा रही है। पावरप्ले में रन गति बनाए रखना टीम के लिए चुनौती बन चुका है।

    महंगे खिलाड़ी कैमरून ग्रीन फ्लॉप

    केकेआर ने ऑक्शन में कैमरून ग्रीन पर 25.20 करोड़ रुपये खर्च किए थे, लेकिन उनका प्रदर्शन अब तक निराशाजनक रहा है। ग्रीन न तो गेंदबाजी कर पा रहे हैं और न ही बल्ले से योगदान दे पा रहे हैं। तीन मैचों में उनके बल्ले से सिर्फ 24 रन निकले हैं, जिससे टीम का संतुलन बिगड़ गया है।

    मिडिल ऑर्डर में अनुभव की कमी

    केकेआर का मध्यक्रम भी कमजोर कड़ी साबित हो रहा है। अंगकृष रघुवंशी ने जरूर कुछ अच्छी पारियां खेली हैं, लेकिन उन्हें बाकी बल्लेबाजों का साथ नहीं मिला। फिनिशर की भूमिका निभाने वाले रिंकू सिंह ने 68 रन बनाए हैं, लेकिन उनका आक्रामक अंदाज अभी तक नहीं दिखा। इसके अलावा रमनदीप सिंह, अनुकूल रॉय और सुनील नरेन पर लगातार निर्भर रहना टीम के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है।

    गेंदबाजी बनी सबसे बड़ी कमजोरी

    केकेआर की तेज गेंदबाजी शुरुआत से ही सवालों के घेरे में रही है और यह चिंता अब हकीकत बन चुकी है। वैभव अरोड़ा और ब्लेसिंग मुजरबानी काफी महंगे साबित हुए हैं।
    वहीं कार्तिक त्यागी भी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। स्पिन विभाग में भी वरुण चक्रवर्ती और सुनील नरेन की खराब फॉर्म ने टीम की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

    आगे की राह मुश्किल

    पिछले कुछ सीजन में केकेआर की सफलता काफी हद तक वरुण-नरेन की जोड़ी पर निर्भर रही है। ऐसे में इनका खराब प्रदर्शन टीम के लिए बड़ा झटका है। अगर टीम ने जल्द ही अपनी कमजोरियों को दूर नहीं किया, तो प्लेऑफ की दौड़ में बने रहना मुश्किल हो सकता है।

    आईपीएल 2026 में केकेआर कई समस्याओं से जूझ रही है ओपनिंग, मिडिल ऑर्डर, महंगे खिलाड़ी का फ्लॉप होना और कमजोर गेंदबाजी। अगर जल्द सुधार नहीं हुआ, तो टीम का पूरा गणित बिगड़ सकता है।

  • टैक्स नहीं बढ़ेगा फिर भी तेज होगा विकास इंदौर नगर निगम के डिजिटल बजट में बड़े ऐलान

    टैक्स नहीं बढ़ेगा फिर भी तेज होगा विकास इंदौर नगर निगम के डिजिटल बजट में बड़े ऐलान


    इंदौर । मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 8455 करोड़ रुपये का महत्वाकांक्षी बजट पेश किया है जो विकास और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार का बड़ा रोडमैप माना जा रहा है। खास बात यह है कि इतने बड़े बजट के बावजूद न तो कोई नया टैक्स लगाया गया है और न ही मौजूदा करों में किसी तरह की बढ़ोतरी की गई है। निगम ने इस बजट को पूरी तरह डिजिटल स्वरूप में प्रस्तुत किया है जो पारदर्शिता और आधुनिक प्रशासन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

    नगर निगम का दावा है कि यह बजट आम जनता को राहत देने के साथ साथ शहर के तेजी से विकास को गति देगा। पिछले वित्तीय वर्ष में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक राजस्व संग्रह का हवाला देते हुए यह विश्वास जताया गया है कि नागरिकों के सहयोग से विकास कार्यों को बिना टैक्स बढ़ाए भी आगे बढ़ाया जा सकता है।

    बजट में सबसे बड़ा फोकस स्वच्छता पर रखा गया है क्योंकि इंदौर लगातार देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है। इस स्थिति को बरकरार रखने के लिए वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम को और मजबूत करने की योजना बनाई गई है। बायो सीएनजी प्लांट की क्षमता को 550 टन से बढ़ाकर 800 टन प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है वहीं 200 टन प्रतिदिन क्षमता वाला नया सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट भी स्थापित किया जाएगा। जीरो वेस्ट मॉडल की दिशा में काम करते हुए कचरे से ऊर्जा और उपयोगी उत्पाद बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।

    इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए भी बड़े स्तर पर निवेश का प्रावधान किया गया है। शहर में सड़कों ड्रेनेज और जल आपूर्ति नेटवर्क को मजबूत करने के लिए व्यापक योजनाएं तैयार की गई हैं। पिछले वर्ष 150 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया गया था और अब इस रफ्तार को और बढ़ाने की योजना है। करीब 700 किलोमीटर ड्रेनेज लाइन और 150 से 200 किलोमीटर नई पानी की पाइपलाइन बिछाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही नए पुल पुलिया और रोड कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट भी शहर के विस्तार को नई दिशा देंगे।

    डिजिटल इंदौर के विजन को आगे बढ़ाते हुए नगर निगम ने तकनीकी सुधारों पर भी जोर दिया है। 25 हजार घरों को डिजिटल पहचान देने और करीब 30 लाख दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन की योजना बनाई गई है। निगम का अपना डिजिटल पोर्टल तैयार किया जा रहा है जिससे नागरिक सेवाएं आसान पारदर्शी और तेज हो सकेंगी।

    बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए जल प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। नर्मदा परियोजना के विस्तार के साथ नई टंकियों और पाइपलाइन नेटवर्क का निर्माण किया जाएगा। वर्ष 2050 तक शहर में 1620 एमएलडी पानी की जरूरत का अनुमान लगाया गया है और उसी के अनुसार दीर्घकालीन योजना तैयार की गई है।

    स्वास्थ्य खेल और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए भी कई अहम घोषणाएं की गई हैं। हर वार्ड में संजीवनी क्लीनिक और पॉली क्लीनिक स्थापित किए जाएंगे वहीं स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स खेल मैदान सार्वजनिक शौचालय पार्क और ग्रीन फॉरेस्ट डेवलपमेंट पर भी काम किया जाएगा ताकि नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर मिल सके।

    कुल मिलाकर इंदौर नगर निगम का यह बजट विकास स्वच्छता डिजिटल सिस्टम और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने का संतुलित प्रयास है। बिना टैक्स बढ़ाए इतने बड़े स्तर पर योजनाओं का ऐलान निश्चित रूप से सराहनीय है लेकिन अब सबसे अहम सवाल यही है कि इन योजनाओं को जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है क्योंकि असली सफलता क्रियान्वयन में ही छिपी होती है।

  • मध्य पूर्व संघर्ष के तेज होने की चिंताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में खुला, सेंसेक्स 300 अंक टूटा

    मध्य पूर्व संघर्ष के तेज होने की चिंताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में खुला, सेंसेक्स 300 अंक टूटा


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान युद्ध के तेज होने की चिंताओं के बीच सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भी भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला। इसके पहले सोमवार को भी बाजार लाल रंग में खुला था।

    इस दौरान, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 372.49 अंक या 0.50 प्रतिशत गिरकर 73,734.36 पर खुला, तो वहीं निफ्टी 50 129.55 अंक या 0.56 प्रतिशत गिरकर 22,838.70 पर खुला। इसके अलावा, बैंक निफ्टी 350.40 अंक या 0.67 प्रतिशत गिरकर 52,258.70 पर खुला।

    (सुबह 9:28 बजे के करीब) सेंसेक्स 0.43 प्रतिशत यानी 315.64 अंक गिरकर 73,791.21 पर ट्रेड कर रहा था, तो वहीं निफ्टी50 0.38 प्रतिशत या 87.40 अंक गिरकर 22,880.85 पर कारोबार कर रहा था।

    व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.47 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.23 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

    वहीं सेक्टरवार देखें तो निफ्टी आईटी में 0.93 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी में 0.15 प्रतिशत की उछाल देखने को मिली। जबकि निफ्टी ऑटो में 1.33 प्रतिशत, निफ्टी बैंक में 0.82 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.61 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    निफ्टी 50 में हिंडाल्को, विप्रो, टेक महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, एचसीएल टेक, ओएनजीसी, आईटीसी और टीसीएस में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली, जबकि इसके विपरीत मैक्स हेल्थ, इंडिगो, एमएंडएम, इटरनल, आयशर मोटर, एक्सिस बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर सबसे ज्यादा गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजार इस समय बेहद सतर्क हैं, क्योंकि एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक समयसीमा नजदीक आ रही है। निवेशकों की नजर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दिए गए अल्टीमेटम पर टिकी हुई है, जिसकी समयसीमा भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 6:30 बजे (अमेरिकी समयानुसार रात 8:00 बजे) है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा नहीं खोलता, तो सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।

    कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी है और डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जिसकी मुख्य वजह यह है कि ट्रंप ने अपने अल्टीमेटम को दोहराते हुए ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों पर हमले की चेतावनी दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई गुजरती है, 28 फरवरी से जारी संघर्ष के कारण बाधित है, जिससे इस साल अब तक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है।

    वहीं, ईरान ने अमेरिका समर्थित 45 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसे पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये जैसे देशों ने समर्थन दिया था। ईरान का कहना है कि वह स्थायी शांति, प्रतिबंधों में राहत और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई चाहता है।

    एक मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, तकनीकी रूप से निफ्टी के लिए निकट अवधि का रेजिस्टेंस 23,465 पर है, जबकि सपोर्ट लेवल 22,800 और 22,540 पर देखा जा रहा है।

  • एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के रिकॉर्ड बिक्री के चलते पहली तिमाही के परिचालन लाभ में 33 प्रतिशत की हुई बढ़ोतरी

    एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के रिकॉर्ड बिक्री के चलते पहली तिमाही के परिचालन लाभ में 33 प्रतिशत की हुई बढ़ोतरी


    नई दिल्ली।दक्षिण कोरिया की दिग्गज कंपनी एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। मजबूत बिक्री और खासतौर पर होम अप्लायंस बिजनेस की दमदार ग्रोथ के चलते कंपनी का परिचालन लाभ (ऑपरेटिंग प्रॉफिट) साल-दर-साल 33 प्रतिशत बढ़ गया है।

    ऑपरेटिंग प्रॉफिट में जबरदस्त उछाल

    कंपनी की नियामक फाइलिंग के अनुसार, पहली तिमाही में ऑपरेटिंग प्रॉफिट 1.25 ट्रिलियन वॉन से बढ़कर 1.67 ट्रिलियन वॉन (करीब 1.1 अरब डॉलर) हो गया। यह बढ़ोतरी ऐसे समय आई है, जब पिछली तिमाही में कंपनी को नुकसान उठाना पड़ा था।

    बिक्री ने बनाया नया रिकॉर्ड

    एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स की कुल बिक्री 4.4 प्रतिशत बढ़कर 23.73 ट्रिलियन वॉन तक पहुंच गई, जो पहली तिमाही के लिए अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) के आंकड़े जारी नहीं किए हैं। फाइनल अर्निंग रिपोर्ट इस महीने के अंत में जारी की जाएगी।

    पिछली तिमाही से शानदार वापसी

    गौरतलब है कि पिछली (चौथी) तिमाही में कंपनी को 109 बिलियन वॉन का ऑपरेटिंग नुकसान हुआ था। इसकी वजह कमजोर मांग और रिस्ट्रक्चरिंग से जुड़े एकमुश्त खर्च थे।

    लेकिन नई तिमाही में कंपनी ने शानदार वापसी करते हुए न सिर्फ नुकसान की भरपाई की, बल्कि मजबूत मुनाफा भी दर्ज किया।

    होम अप्लायंस बिजनेस बना ग्रोथ का इंजन

    कंपनी के मुताबिक, उसके होम अप्लायंस सॉल्यूशन डिवीजन ने इस ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई। सब्सक्रिप्शन मॉडल को मजबूत करने और प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर फोकस ने बिक्री को बढ़ावा दिया।

    इसके अलावा, मीडिया और एंटरटेनमेंट बिजनेस भी पिछली तिमाही के नुकसान से उबरकर मुनाफे में लौट आया है, जिसमें लागत कटौती का बड़ा योगदान रहा।

    व्हीकल और अन्य सेगमेंट का प्रदर्शन

    व्हीकल सॉल्यूशन बिजनेस में भी साल-दर-साल मुनाफे में सुधार देखने को मिला। दक्षिण कोरियाई मुद्रा वॉन के कमजोर होने से इस सेगमेंट को फायदा मिला, क्योंकि इसके ज्यादातर ग्राहक विदेशों में हैं। हालांकि, इको सॉल्यूशन बिजनेस में बाजार की अनिश्चितताओं के चलते बिक्री और मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई।

    AI और भविष्य की रणनीति पर फोकस

    एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने बताया कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर से जुड़ी मांग को पूरा करने पर ध्यान देगी। इसके साथ ही, कंपनी भविष्य के ग्रोथ इंजन के रूप में होम रोबोट और स्मार्ट उपकरणों पर निवेश बढ़ाने की योजना बना रही है।

    वैश्विक चुनौतियों से निपटने की तैयारी

    कंपनी ने कहा कि मध्य पूर्व में तनाव, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और कच्चे माल व लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इनसे निपटने के लिए कंपनी लागत में कटौती और लचीली रणनीति अपनाएगी, ताकि आने वाले समय में ग्रोथ को बनाए रखा जा सके।

    एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने रिकॉर्ड बिक्री के दम पर पहली तिमाही में 33% मुनाफा बढ़ाया। होम अप्लायंस बिजनेस इसकी सबसे बड़ी ताकत रहा, जबकि कंपनी भविष्य में AI और नए टेक्नोलॉजी सेगमेंट पर फोकस बढ़ा रही है।

  • जब हर तरफ आग ही आग थी सीधी में कार्यकर्ता की हिम्मत से सुरक्षित निकले मासूम बड़ा खतरा टला

    जब हर तरफ आग ही आग थी सीधी में कार्यकर्ता की हिम्मत से सुरक्षित निकले मासूम बड़ा खतरा टला


    सीधी । मध्य प्रदेश के सीधी जिले में मंगलवार का दिन उस समय दहशत में बदल गया जब रामपुर नैकिन क्षेत्र के शिकारगंज स्थित एक आंगनवाड़ी केंद्र के पास अचानक भीषण आग भड़क उठी और देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरा परिसर लपटों से घिर गया और हर तरफ धुआं और अफरा तफरी का माहौल बन गया लेकिन इसी बीच एक महिला की सूझबूझ और साहस ने सात मासूम बच्चों की जिंदगी बचा ली।

    घटना सुबह करीब 11 बजे की है जब आंगनवाड़ी केंद्र में सात छोटे बच्चे मौजूद थे और उनकी देखरेख कर रही थीं कार्यकर्ता उर्मिला द्विवेदी। अचानक पास के क्षेत्र से आग उठती नजर आई जो तेजी से फैलते हुए केंद्र के आसपास पहुंचने लगी। हालात की गंभीरता को समझते हुए उर्मिला द्विवेदी ने बिना किसी घबराहट के तुरंत निर्णय लिया और एक एक कर सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना शुरू किया। उन्होंने न केवल बच्चों को आग से दूर पहुंचाया बल्कि उन्हें उनके घरों तक सुरक्षित पहुंचाकर राहत की सांस ली।

    कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और आंगनवाड़ी भवन के तीनों ओर ऊंची लपटें उठने लगीं। आग की भयावहता इतनी ज्यादा थी कि आसपास के लोग भी सहम गए लेकिन जैसे ही घटना की जानकारी फैली ग्रामीण मौके पर पहुंचने लगे और अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश करने लगे। हालांकि आग लगातार फैलती जा रही थी और उस पर काबू पाना आसान नहीं था।

    स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब आग पास के जंगल की ओर बढ़ने लगी जिससे बड़े क्षेत्र में नुकसान की आशंका पैदा हो गई। तत्काल फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई लेकिन टीम को मौके तक पहुंचने में कुछ समय लगा। करीब आधे घंटे बाद दमकल दल घटनास्थल पर पहुंचा और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। इसके साथ ही डायल 112 और 108 की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं और राहत व बचाव कार्य में जुट गईं।

    ग्रामीणों और प्रशासन की टीम ने मिलकर लगातार प्रयास किए लेकिन आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि डेढ़ घंटे से ज्यादा समय तक लपटें शांत नहीं हुईं। कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार आग पर काबू पाया जा सका और स्थिति नियंत्रण में आई।

    रामपुर नैकिन थाना प्रभारी सुधांशु तिवारी ने बताया कि सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और अन्य आवश्यक सेवाओं को तुरंत मौके पर भेजा गया था और प्राथमिकता के आधार पर बचाव कार्य शुरू किया गया। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है जो कि सबसे बड़ी राहत की बात है।

    यह पूरी घटना एक बड़ी चेतावनी भी है कि संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कितनी जरूरी है लेकिन साथ ही यह भी साबित करती है कि मुश्किल हालात में सही समय पर लिया गया निर्णय कितनी बड़ी त्रासदी को टाल सकता है। उर्मिला द्विवेदी की सतर्कता और साहस ने आज सात परिवारों को एक बड़ी विपत्ति से बचा लिया।

  • मध्य पूर्व तनाव और ट्रंप की चेतावनी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल

    मध्य पूर्व तनाव और ट्रंप की चेतावनी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बीच वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल तेज हो गई है। मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई, जिससे बाजार में अस्थिरता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक घटनाक्रम तेल की कीमतों की दिशा तय करेंगे।

    ब्रेंट और WTI क्रूड में जोरदार उछाल

    वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड वायदा 1.69% यानी 1.86 डॉलर की बढ़त के साथ 111.63 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं WTI क्रूड में 3% से ज्यादा यानी 4.15 डॉलर की तेजी आई और यह 116.56 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।यह तेजी दिन के शुरुआती कारोबार में ही देखने को मिली, जिससे साफ है कि निवेशकों में तनाव को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।

    कुछ ही दिनों में 60% से ज्यादा चढ़ा तेल

    मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने के बाद से तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 27 फरवरी को 72.48 डॉलर से बढ़कर 9 मार्च को 119.50 डॉलर तक पहुंच गया, यानी करीब 60% की तेजी। साल 2026 में अब तक तेल की कीमतों में लगभग 90% तक उछाल देखा जा चुका है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

    ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी चिंता

    तेल की कीमतों में यह तेजी उस समय आई, जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया।ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए समयसीमा तय करते हुए चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो “तेहरान पर बड़ा हमला” किया जा सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि ईरान को “एक रात में खत्म किया जा सकता है।”

    होर्मुज स्ट्रेट: तेल सप्लाई की लाइफलाइन

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट्स में से एक है। यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20% गुजरता है। 28 फरवरी से चल रहे संघर्ष के कारण इस रूट पर असर पड़ा है, जिससे सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है और कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है।

    ईरान का सख्त रुख, सीजफायर से इनकार

    रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने सीजफायर के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और संघर्ष जारी रखने का फैसला किया है। इससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है और बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

    शेयर बाजार पर भी असर

    तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार भी दबाव में नजर आया। सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, अमेरिका का वॉल स्ट्रीट हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला।

    आगे क्या? बाजार की नजर भू-राजनीति पर

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है, तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। वहीं, किसी समझौते की स्थिति में कीमतों में राहत मिल सकती है।

    मध्य पूर्व तनाव और ट्रंप की चेतावनी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 3% से ज्यादा उछाल आया है। होर्मुज स्ट्रेट पर असर और ईरान के सख्त रुख से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है।

  • कमोडिटी मार्केट में हलचल: तनाव के बीच सोने-चांदी के दाम फिसले

    कमोडिटी मार्केट में हलचल: तनाव के बीच सोने-चांदी के दाम फिसले


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और डोनाल्ड ट्रंप के सख्त बयानों के बीच मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। आमतौर पर ऐसे हालात में निवेशक सोने को सुरक्षित विकल्प मानते हैं, लेकिन इस बार बाजार में वैसी मजबूती नजर नहीं आई।

    MCX पर गिरावट के साथ खुला सोना-चांदी

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 जून कॉन्ट्रैक्ट वाला सोना पिछले बंद भाव 1,49,981 रुपये के मुकाबले 222 रुपये गिरकर 1,49,759 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। वहीं, 5 मई कॉन्ट्रैक्ट वाली चांदी 1,379 रुपये गिरकर 2,32,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुली। शुरुआती कारोबार में दोनों धातुओं में कमजोरी देखने को मिली, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई।

    दिनभर उतार-चढ़ाव, स्थिरता नहीं

    दोपहर करीब 12:13 बजे तक सोना 175 रुपये यानी 0.12% गिरकर 1,49,806 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। दिन के दौरान यह 1,50,474 रुपये के उच्चतम स्तर तक गया, जबकि 1,49,201 रुपये तक नीचे भी आया।

    इसी तरह चांदी भी 813 रुपये यानी 0.35% गिरकर 2,32,566 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। इंट्रा-डे में चांदी ने 2,35,547 रुपये का उच्चतम और 2,31,503 रुपये का न्यूनतम स्तर छुआ।

    ‘सेफ हेवन’ डिमांड कमजोर क्यों?

    विश्लेषकों का कहना है कि आमतौर पर तनाव के समय सोने-चांदी में निवेश बढ़ता है, लेकिन इस बार “सेफ-हेवन” डिमांड उतनी मजबूत नहीं दिख रही। बाजार फिलहाल अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, जहां निवेशक स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। यही वजह है कि कीमतें एक सीमित दायरे में ऊपर-नीचे हो रही हैं।

    चांदी के लिए अहम स्तर

    एमसीएक्स पर चांदी फिलहाल 2,31,000 से 2,33,000 रुपये के दायरे में कारोबार कर रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक 2,33,000–2,34,000 रुपये का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है। अगर यह स्तर टूटता है तो कीमतों में तेजी आ सकती है, लेकिन 2,30,000 रुपये के नीचे जाने पर तेज गिरावट देखने को मिल सकती है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिला-जुला रुख

    वैश्विक बाजार में कीमती धातुएं लगभग स्थिर रहीं। COMEX पर गोल्ड 3.36 डॉलर की मामूली गिरावट के साथ 4,681.34 डॉलर पर रहा, जबकि सिल्वर 0.09 डॉलर की बढ़त के साथ 72.94 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था। स्पॉट मार्केट में सोना हल्की बढ़त के साथ 4,653 डॉलर पर पहुंचा, जबकि चांदी मामूली गिरावट के साथ 72.78 डॉलर पर रही।

    ईरान-हॉर्मुज तनाव और कच्चे तेल में उछाल

    कीमतों में यह उतार-चढ़ाव उस समय देखने को मिला, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ रहा है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। इसी बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। ब्रेंट क्रूड 1.69% बढ़कर 111.63 डॉलर पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड 3% से ज्यादा चढ़कर 116.56 डॉलर तक पहुंच गया।

    बाजार की नजर आगे क्या?

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी नीतियां ही तय करेंगी कि सोने-चांदी की दिशा क्या होगी। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और हर बड़े अपडेट पर नजर बनाए हुए हैं।