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  • यूपी में पेट्रोल-डीजल महंगा होते ही नेताओं का ‘ई-रिक्शा और साइकिल मोड’, विधायक से सांसद तक दिखा अनोखा बदलाव

    यूपी में पेट्रोल-डीजल महंगा होते ही नेताओं का ‘ई-रिक्शा और साइकिल मोड’, विधायक से सांसद तक दिखा अनोखा बदलाव



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। शुक्रवार से लागू नए रेट के बाद लखनऊ में पेट्रोल 97.53 रुपए और डीजल 90.81 रुपए प्रति लीटर हो गया है। बढ़ती कीमतों के बीच नेताओं और अफसरों ने ईंधन बचाने के लिए नए तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं।

    सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बढ़ते दामों को लेकर तंज कसा है। उन्होंने X पर लिखा कि आगे बढ़ना है तो साइकिल ही बेहतर विकल्प है, और साइकिल से बेहतर कुछ नहीं हो सकता।

    वहीं दूसरी ओर, प्रधानमंत्री की ईंधन बचत की अपील का असर यूपी में साफ नजर आ रहा है। रामपुर में भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने गुरुवार को 4 ई-रिक्शा खरीदे हैं और अब वह गनर के साथ इन्हीं ई-रिक्शा से कार्यक्रमों में जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि उनके ई-रिक्शा उनके घर पर ही रहते हैं और शहर में आने-जाने के लिए उनका उपयोग किया जा रहा है।

    गोरखपुर में सांसद रवि किशन ने भी कार पूलिंग कर उदाहरण पेश किया। उन्होंने कुशीनगर सांसद विजय दुबे के साथ इलेक्ट्रिक कार में 25 किलोमीटर की दूरी तय की और खजनी पहुंचे। इस दौरान रवि किशन ने वीडियो बनाकर बताया कि पीएम मोदी की अपील के बाद ईंधन बचाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

    प्रदेश सरकार के कई मंत्री और अफसर भी इस अभियान में शामिल होते दिखे। लखनऊ में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आजाद अपनी फ्लीट छोड़कर बुलेट से सचिवालय पहुंचे। फिरोजाबाद में डीएम और उनका स्टाफ करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर ऑफिस पहुंचे। मुरादाबाद में कमिश्नर ऑन्जनेय कुमार सिंह ने साइकिल चलाकर कार्यालय पहुंचकर संदेश दिया कि ऊर्जा बचत जरूरी है।

    प्रयागराज में मेयर गणेश केसरवानी भी घर से साइकिल चलाकर नगर निगम पहुंचे और उन्होंने कहा कि ईंधन की बचत, प्राकृतिक संसाधनों का संतुलन और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना भविष्य के लिए जरूरी है।

    यूपी सरकार ने भी ऊर्जा बचत को लेकर सख्त फैसले लिए हैं। नए निर्देशों के अनुसार मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और अफसरों के काफिले में 50 प्रतिशत कटौती की जाएगी। सप्ताह में एक दिन सार्वजनिक परिवहन या मेट्रो/बस का उपयोग अनिवार्य होगा। साथ ही सरकारी बैठकें, सेमिनार और वर्कशॉप वर्चुअल आयोजित करने पर जोर दिया जाएगा।

  • चीनी बाजार में स्थिरता की उम्मीद: निर्यात प्रतिबंध से कीमतों पर नियंत्रण, व्यापारियों ने बताया उपभोक्ता हित में कदम

    चीनी बाजार में स्थिरता की उम्मीद: निर्यात प्रतिबंध से कीमतों पर नियंत्रण, व्यापारियों ने बताया उपभोक्ता हित में कदम


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता को सुनिश्चित करने और कीमतों में अस्थिरता को नियंत्रित करने के उद्देश्य से चीनी के निर्यात पर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 30 सितंबर 2026 तक चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस निर्णय को लेकर राजस्थान के श्रीगंगानगर और सीकर के चीनी व्यापारियों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और इसे उपभोक्ताओं के हित में उठाया गया कदम बताया है।

    सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखना बताया जा रहा है। हाल के समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही थी कि निर्यात बढ़ने से घरेलू आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप करते हुए यह प्रतिबंध लागू किया है, ताकि स्थानीय उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की कमी या महंगाई का सामना न करना पड़े।

    श्रीगंगानगर के व्यापारिक संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे बाजार में संतुलन बना रहेगा और कीमतों में अचानक होने वाली वृद्धि पर रोक लगेगी। व्यापारियों का मानना है कि जब उत्पादन देश के भीतर ही उपलब्ध रहेगा तो उपभोक्ताओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा। कई व्यापारिक प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि यह कदम बाजार में स्थिरता लाने में सहायक साबित होगा और आम लोगों के लिए चीनी की उपलब्धता आसान होगी।

    व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ समय से वैश्विक परिस्थितियों के कारण बाजार में अस्थिरता की स्थिति बनी हुई थी। ऐसे में सरकार का यह निर्णय घरेलू हितों को प्राथमिकता देने वाला माना जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे भविष्य में कीमतों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी पर नियंत्रण रहेगा और आपूर्ति श्रृंखला अधिक मजबूत होगी।

    सीकर के स्थानीय व्यापारियों ने भी केंद्र सरकार के इस कदम को सराहनीय बताया है। उनका कहना है कि यह फैसला पूरी तरह से उपभोक्ता हित में है और इससे घरेलू बाजार को मजबूती मिलेगी। व्यापारियों के अनुसार, पहले जो चीनी निर्यात के लिए निर्धारित की गई थी, उसका अधिकांश हिस्सा पहले ही भेजा जा चुका है, जबकि शेष मात्रा अब देश के भीतर उपलब्ध रहेगी। इससे स्थानीय बाजार में चीनी की आपूर्ति बढ़ेगी और मांग-आपूर्ति के बीच संतुलन बेहतर होगा।

    कुछ व्यापारियों ने यह भी बताया कि सरकार ने पहले चीनी निर्यात की अनुमति दी थी, जिसके तहत बड़ी मात्रा में चीनी विदेशों में भेजी गई थी। लेकिन अब बदलते हालात और घरेलू जरूरतों को देखते हुए निर्यात पर रोक लगाना आवश्यक हो गया था। उनका कहना है कि इस निर्णय से न केवल कीमतें स्थिर रहेंगी, बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी।

    कुल मिलाकर, व्यापारिक समुदाय ने सरकार के इस फैसले को सकारात्मक कदम बताते हुए उम्मीद जताई है कि इससे आने वाले समय में बाजार स्थिर रहेगा और आम लोगों पर महंगाई का दबाव कम होगा। सरकार की यह नीति घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

  • भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर और सशक्त, वैश्विक चुनौतियों का प्रभाव सीमित : गौरव वल्लभ का दावा

    भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर और सशक्त, वैश्विक चुनौतियों का प्रभाव सीमित : गौरव वल्लभ का दावा


    नई दिल्ली । देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान अर्थशास्त्री और भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह मजबूत और स्थिर बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि देश को किसी प्रकार की आर्थिक घबराहट की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि भारत ने पिछले वर्षों में मजबूत आर्थिक आधार तैयार किया है और वैश्विक झटकों को सहने की क्षमता विकसित की है।

    उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में दुनिया तीन बड़े भू-राजनीतिक संकटों का सामना कर रही है, जिनमें पश्चिम एशिया का तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-चीन के बीच व्यापारिक व कमोडिटी से जुड़े तनाव शामिल हैं। इन परिस्थितियों का असर वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ा है, लेकिन भारत अपनी नीतियों और आर्थिक संरचना के कारण इन प्रभावों को काफी हद तक संतुलित करने में सफल रहा है।

    गौरव वल्लभ ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था आज दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुकी है और पिछले एक दशक से अधिक समय में देश ने आर्थिक विकास की मजबूत यात्रा तय की है। उन्होंने दावा किया कि करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में विभिन्न सरकारी योजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और स्टार्टअप एवं स्वरोजगार के क्षेत्र में भी देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है।

    उन्होंने यह भी बताया कि भारत की आयात निर्भरता, विशेष रूप से कच्चे तेल और सोने जैसे क्षेत्रों में, एक चुनौती है, लेकिन सरकार इस दिशा में संतुलन बनाए रखने का प्रयास कर रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि देश के नागरिक ऊर्जा और संसाधनों की खपत में थोड़ी बचत करें तो विदेशी मुद्रा भंडार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और आर्थिक स्थिरता और मजबूत हो सकती है।

    विदेशी मुद्रा भंडार, राजकोषीय घाटा और आर्थिक विकास दर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की वित्तीय स्थिति संतोषजनक है और आने वाले समय में देश की विकास दर और भी बेहतर हो सकती है। उनके अनुसार, भारत की आर्थिक नीति का मूल उद्देश्य स्थिरता के साथ विकास को आगे बढ़ाना है, जिससे वैश्विक अस्थिरताओं का असर कम से कम हो सके।

    उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत की आपूर्ति प्रणाली मजबूत है और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद देश में आवश्यक संसाधनों की कमी नहीं हुई है। भारत की विदेश नीति और रणनीतिक संबंधों ने भी इस स्थिरता को बनाए रखने में मदद की है।

    राजनीतिक सवालों के जवाब में उन्होंने विपक्ष पर भी टिप्पणी की और कहा कि देशहित के मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर सोचने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की प्रगति सभी नागरिकों के सहयोग से ही संभव है और हर वर्ग को मिलकर देश की आर्थिक मजबूती में योगदान देना चाहिए।

    अंत में उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया कि भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में और अधिक मजबूत स्थिति में उभरेगा और विकास की गति को बनाए रखते हुए दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियों में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ करेगा।

  • असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आईटीआर फाइलिंग शुरू, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जारी की एक्सेल यूटिलिटीज

    असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आईटीआर फाइलिंग शुरू, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जारी की एक्सेल यूटिलिटीज


    नई दिल्ली । देश में टैक्सपेयर्स के लिए महत्वपूर्ण प्रक्रिया की शुरुआत हो गई है, क्योंकि असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है। इनकम टैक्स विभाग ने ई-फाइलिंग पोर्टल पर आईटीआर-1 और आईटीआर-4 फॉर्म के लिए एक्सेल आधारित यूटिलिटीज जारी कर दी हैं, जिससे करदाताओं को रिटर्न दाखिल करने में सुविधा मिलेगी। यह कदम टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को अधिक सरल, डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।

    विभाग के अनुसार, करदाता अब आईटीआर-1 और आईटीआर-4 के लिए न केवल ऑनलाइन फाइलिंग विकल्प का उपयोग कर सकते हैं, बल्कि ऑफलाइन यूटिलिटी के माध्यम से भी अपना रिटर्न तैयार कर सकते हैं। ऑफलाइन प्रक्रिया में उपयोगकर्ता डेटा भरकर JSON फाइल जनरेट कर सकते हैं, जिसे बाद में ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपलोड किया जा सकता है। इससे उन लोगों को भी राहत मिलेगी जो सीधे ऑनलाइन प्रक्रिया से सहज नहीं हैं या जिन्हें तकनीकी सहायता की आवश्यकता होती है।

    आईटीआर-1, जिसे सहज के नाम से भी जाना जाता है, मुख्य रूप से उन निवासी व्यक्तियों के लिए है जिनकी वार्षिक आय 50 लाख रुपये तक है और जिनकी आय वेतन, एक घर संपत्ति और अन्य स्रोतों से आती है। वहीं आईटीआर-4, जिसे सुगम कहा जाता है, उन व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों और कुछ छोटे व्यवसायों के लिए लागू होता है जिनकी आय 50 लाख रुपये तक होती है और जो अनुमानित कराधान योजना के अंतर्गत आते हैं।

    इनकम टैक्स विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में सात अलग-अलग प्रकार के आईटीआर फॉर्म उपलब्ध हैं, जिन्हें करदाता अपनी आय के प्रकार और श्रेणी के अनुसार चुन सकते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य अलग-अलग आय वर्गों के लिए टैक्स फाइलिंग को अधिक व्यवस्थित और आसान बनाना है, ताकि हर वर्ग का करदाता बिना किसी जटिलता के अपना रिटर्न दाखिल कर सके।

    इससे पहले केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आईटीआर फॉर्म में कुछ महत्वपूर्ण संशोधन भी किए थे। इन संशोधनों में पूंजीगत लाभ की विस्तृत रिपोर्टिंग, शेयर बायबैक से होने वाले नुकसान की जानकारी और कुछ विशेष व्यापारिक लेन-देन से जुड़े नए प्रकटीकरण नियम शामिल किए गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य कर प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और गलत रिपोर्टिंग को कम करना बताया गया है।

    सरकार लगातार टैक्स सिस्टम को डिजिटल और सरल बनाने पर जोर दे रही है, जिससे करदाता बिना किसी कठिनाई के समय पर अपना रिटर्न दाखिल कर सकें। ई-फाइलिंग सिस्टम के विस्तार और नई यूटिलिटीज के आने से उम्मीद है कि इस वर्ष टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया पहले से अधिक सुचारु और तेज होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर रिटर्न फाइलिंग न केवल करदाताओं के लिए आवश्यक है, बल्कि इससे देश की वित्तीय व्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। नॉन-ऑडिट करदाताओं के लिए अंतिम तिथि 31 जुलाई तय की गई है, ऐसे में टैक्सपेयर्स को सलाह दी जा रही है कि वे समय रहते अपने दस्तावेज तैयार कर फाइलिंग प्रक्रिया पूरी कर लें।

  • उन्नाव रेप केस: कुलदीप सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, हाईकोर्ट का सजा निलंबन आदेश रद्द, जेल में रहना तय

    उन्नाव रेप केस: कुलदीप सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, हाईकोर्ट का सजा निलंबन आदेश रद्द, जेल में रहना तय


    नई दिल्ली। उन्नाव रेप केस में दोषी करार दिए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सेंगर की सजा को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया था। इस फैसले के बाद अब उनकी सजा बरकरार रहेगी और उन्हें जेल में ही रहना होगा।

    सुप्रीम कोर्ट में यह मामला CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने आया, जहां मामले से जुड़े कई कानूनी पहलुओं पर विस्तार से सुनवाई हुई। अदालत ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट द्वारा सजा निलंबन का आदेश सही नहीं था, इसलिए उसे निरस्त किया जाता है।

    सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि इस मामले में CBI की अपील अभी दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है। वहीं वरिष्ठ वकील एन. हरिहरन ने दलील दी कि पीड़िता नाबालिग नहीं थी और AIIMS बोर्ड की रिपोर्ट भी आरोपी के पक्ष में संकेत देती है, लेकिन इसके बावजूद सजा जारी है।

    इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वर्तमान में मुख्य मुद्दा सजा निलंबन से जुड़ा है, जबकि मामले में कई गंभीर कानूनी बिंदु हैं जिन पर विस्तार से विचार आवश्यक है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मेरिट (मामले की गहराई) पर कोई अंतिम राय नहीं दी है।

    सुनवाई के दौरान यह भी चर्चा हुई कि क्या विधायक को POCSO कानून के तहत ‘पब्लिक सर्वेंट’ माना जा सकता है। जस्टिस बागची ने कहा कि यह मामला बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा है, इसलिए कानून की व्याख्या अत्यंत सावधानी से होनी चाहिए।

    सुप्रीम कोर्ट ने अंत में हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह मुख्य अपील पर जल्द से जल्द सुनवाई करे। यदि जल्दी सुनवाई संभव न हो, तो सजा निलंबन की अर्जी पर नया निर्णय लिया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि हाईकोर्ट इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना स्वतंत्र रूप से निर्णय ले।

    इस फैसले के बाद कुलदीप सिंह सेंगर की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं और फिलहाल उन्हें जेल में ही रहना होगा।

  • गर्मी से हाहाकार: शाजापुर-नौगांव सबसे गर्म, MP में मौसम विभाग का अलर्ट

    गर्मी से हाहाकार: शाजापुर-नौगांव सबसे गर्म, MP में मौसम विभाग का अलर्ट


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश एक बार फिर भीषण गर्मी की चपेट में आ गया है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के लिए राज्य के करीब 40 जिलों में लू और गर्म हवाओं का अलर्ट जारी किया है। कई जिलों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे लोगों को दिन के समय सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    शाजापुर और छतरपुर के नौगांव में गुरुवार को अधिकतम तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन का सबसे अधिक तापमान रहा। इसके अलावा खरगोन, खंडवा, रतलाम, खजुराहो और अन्य जिलों में भी पारा 44 डिग्री के आसपास रहा।

    राज्य के प्रमुख शहरों की बात करें तो उज्जैन में 44 डिग्री, भोपाल में 43.4 डिग्री, जबलपुर में 43.3 डिग्री, इंदौर में 43 डिग्री और ग्वालियर में 41.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच गर्मी का असर सबसे ज्यादा रहेगा। इस दौरान लोगों को घरों से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है।

    इंदौर, उज्जैन, रतलाम, देवास और धार जैसे जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जहां तेज लू के साथ रात में भी गर्मी का असर यानी ‘वॉर्म नाइट’ देखने को मिल सकता है।

    हालांकि, पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में फिलहाल लू का असर कम है, लेकिन वहां भी तेज गर्मी बनी हुई है।

    मौसम में यह बदलाव लंबे समय से चल रहे बारिश और आंधी के दौर के बाद आया है। मई महीने के शुरुआती दिनों में लगातार बारिश के कारण तापमान सामान्य बना हुआ था, लेकिन अब अचानक मौसम ने करवट ली है और गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है।

  • सोना-चांदी बाजार में भूचाल, एक दिन में 11,700 रुपए तक टूटी कीमतें..

    सोना-चांदी बाजार में भूचाल, एक दिन में 11,700 रुपए तक टूटी कीमतें..


    नई दिल्ली । वैश्विक वित्तीय बाजारों में शुक्रवार को एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिली जब मजबूत डॉलर के दबाव ने सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज कराई। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों बाजारों में इन धातुओं पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया, जिससे निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया। विशेषज्ञों के अनुसार डॉलर इंडेक्स में आई मजबूती इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है।

    घरेलू वायदा बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी में सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली, जहां इसके जुलाई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में एक ही दिन में हजारों रुपए की कमजोरी दर्ज हुई। कारोबारी सत्र की शुरुआत से ही चांदी दबाव में रही और दिन के दौरान इसमें लगभग चार प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। कीमतों में इस गिरावट ने बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी और ट्रेडर्स के बीच मुनाफावसूली का दौर तेज हो गया।

    सोने के बाजार में भी कमजोरी का असर साफ दिखाई दिया, हालांकि चांदी की तुलना में सोने में गिरावट अपेक्षाकृत कम रही। जून 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में सोना हल्की गिरावट के साथ खुला और दिनभर सीमित दायरे में कारोबार करता रहा। शुरुआती गिरावट के बाद कुछ समय के लिए कीमतों में सुधार की कोशिश जरूर हुई, लेकिन अंततः बाजार दबाव में ही बना रहा। निवेशकों की नजर अब आने वाले वैश्विक संकेतों पर टिकी हुई है, जो सोने की दिशा तय कर सकते हैं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला, जहां सोना और चांदी दोनों में गिरावट दर्ज की गई। डॉलर इंडेक्स में लगातार मजबूती के चलते अन्य मुद्राओं में खरीदारों के लिए कीमती धातुएं महंगी हो गईं, जिससे मांग में कमी आई। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर इंडेक्स पिछले कई हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका है, जिससे सोने और चांदी पर दबाव और बढ़ गया है।

    डॉलर इंडेक्स की मजबूती को वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों की सुरक्षित निवेश रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। जब डॉलर मजबूत होता है तो अन्य मुद्राओं के मुकाबले सोने की कीमतें अपने आप दबाव में आ जाती हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कीमती धातुओं में गिरावट का रुझान देखने को मिला।

    बाजार विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल सोने की कीमतें एक सीमित दायरे में बनी रह सकती हैं। निवेशकों की नजर आने वाले आर्थिक आंकड़ों, ब्याज दरों और वैश्विक नीतिगत फैसलों पर रहेगी, जो आगे की दिशा तय करेंगे। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि मौजूदा गिरावट लंबे समय तक जारी नहीं रहेगी, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता के समय सोना अब भी एक सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है।

    चांदी में आई तेज गिरावट को औद्योगिक मांग और निवेश मांग दोनों से जोड़कर देखा जा रहा है। वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती के संकेतों ने चांदी की मांग को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। वहीं सोने में अपेक्षाकृत स्थिरता बनी रहने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

  • कानून और तकनीक का संगम: जबलपुर में CJI और जजों की अहम बैठक, सीएम-कानून मंत्री भी शामिल

    कानून और तकनीक का संगम: जबलपुर में CJI और जजों की अहम बैठक, सीएम-कानून मंत्री भी शामिल



    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश का जबलपुर शनिवार को देश की न्यायपालिका के एक महत्वपूर्ण आयोजन का केंद्र बनने जा रहा है। हाईकोर्ट द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सहित सुप्रीम कोर्ट के 9 न्यायाधीश शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में केंद्रीय कानून मंत्री और मुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगे।

    यह सेमिनार “फ्रेगमेंटेशन टू फ्यूजन: एम्पॉवरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन” विषय पर आधारित है, जिसका उद्देश्य न्याय व्यवस्था में तकनीक और डिजिटल एकीकरण को मजबूत करना है। कार्यक्रम सुबह 10:30 बजे से नेताजी सुभाषचंद्र बोस कल्चरल एंड इन्फॉर्मेशन सेंटर में आयोजित किया जाएगा।

    मुख्य अतिथि के रूप में CJI की उपस्थिति रहेगी, जबकि राज्य के मुख्यमंत्री और केंद्रीय कानून मंत्री विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के कई वरिष्ठ न्यायाधीश भी इस सेमिनार का हिस्सा बनेंगे।

    इस आयोजन में ई-कोर्ट सिस्टम, डेटा इंटीग्रेशन, यूनिफाइड डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक तकनीक के माध्यम से न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सेमिनार देश में डिजिटल न्याय प्रणाली के भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    कार्यक्रम को देखते हुए जबलपुर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।

  • शेयर बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स-निफ्टी हल्की बढ़त के साथ खुले, मिड और स्मॉलकैप पर दबाव

    शेयर बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स-निफ्टी हल्की बढ़त के साथ खुले, मिड और स्मॉलकैप पर दबाव


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत वैश्विक संकेतों के मिले-जुले रुख के बीच लगभग सपाट स्तर पर की। शुरुआती कारोबार में बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जहां प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी हल्की बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे मिश्रित संकेतों के कारण निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना हुआ है, जिससे शुरुआती गति सीमित रही।

    सुबह के शुरुआती सत्र में सेंसेक्स में हल्की मजबूती देखी गई और यह मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी भी सीमित बढ़त के साथ हरे निशान में बना रहा। हालांकि इस दौरान लार्जकैप शेयरों में स्थिरता देखने को मिली, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में दबाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में गिरावट यह संकेत देती है कि छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की रुचि थोड़ी कमजोर रही।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आईटी और ऑटो सेक्टर ने बाजार को सपोर्ट देने का काम किया। इन सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे निफ्टी को सहारा मिला। इसके अलावा सर्विसेज, एफएमसीजी, हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर भी सकारात्मक दायरे में रहे। इसके विपरीत डिफेंस, मेटल, कमोडिटीज, रियल्टी, ऑयल एंड गैस और पीएसयू बैंकिंग सेक्टर में दबाव देखने को मिला, जिससे समग्र बाजार में असंतुलित रुझान बना रहा।

    वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशिया के कई प्रमुख बाजारों में कमजोरी का रुख देखने को मिला, जबकि कुछ बाजारों में हल्की मजबूती बनी रही। अमेरिकी बाजारों ने पिछले कारोबारी सत्र में अच्छी तेजी के साथ बंद होकर सकारात्मक संकेत दिए थे, लेकिन एशियाई बाजारों की सुस्ती ने भारतीय बाजार की दिशा को सीमित रखा। इसी कारण घरेलू निवेशकों ने भी शुरुआत में सतर्क रुख अपनाया।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों में बदलाव भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत रहा। लंबे समय बाद विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय बाजार में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को कुछ सपोर्ट मिला। इसके साथ ही घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी लगातार निवेश जारी रखा, जो बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मददगार साबित हुआ।

    इसके अलावा आर्थिक मोर्चे पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर भी बाजार की धारणा पर देखा गया। ईंधन कीमतों में वृद्धि से महंगाई और लागत दबाव को लेकर चिंता बढ़ सकती है, जिसका असर आने वाले दिनों में उपभोक्ता आधारित सेक्टरों पर पड़ सकता है।

  • कानपुर में अमानवीयता की हद! चाची ने मासूम बच्चों को हीटर से जलाया, पुलिस भी देख कांप उठी

    कानपुर में अमानवीयता की हद! चाची ने मासूम बच्चों को हीटर से जलाया, पुलिस भी देख कांप उठी



    नई दिल्ली। कानपुर के महाराजपुर क्षेत्र से मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक महिला पर अपने ही चार मासूम भतीजे-भतीजियों को हीटर से जलाने और बेरहमी से पिटाई करने का गंभीर आरोप लगा है। बच्चों के शरीर पर जले और चोटों के निशान देखकर पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए।

    घटना उस वक्त सामने आई जब गुरुवार शाम करीब 5:25 बजे यूपी-112 पर एक 14 वर्षीय बच्चे ने रोते हुए कॉल कर मदद मांगी। उसने बताया कि उसकी छोटी बहन को चाची हीटर से जला रही है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत गांव पहुंची, जहां 14, 11, 9 और 4 साल के चार बच्चे मौजूद मिले।

    पुलिस के पहुंचते ही बच्चों ने अपने शरीर पर पड़े घाव दिखाए और आरोप लगाया कि उनके माता-पिता की मौत के बाद वे चाचा-चाची के साथ रह रहे हैं, लेकिन यहां उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जाता है। बच्चों ने कहा कि खाना मांगने पर बेल्ट से पिटाई की जाती है और कई बार हीटर से जलाया जाता है। पीठ, हाथ, हथेली, जांघ और सिर पर चोटों के निशान देख पुलिस भी स्तब्ध रह गई।

    स्थानीय ग्रामीणों ने भी बच्चों के आरोपों की पुष्टि की। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे अक्सर प्रताड़ना की शिकायत करते थे, लेकिन डर के कारण कोई खुलकर सामने नहीं आता था।

    वहीं, पूछताछ में चाची ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि बच्चे स्कूल नहीं जाते और उन्होंने चोरी की थी, जिसके कारण उन्हें डांटा-पीटा गया। हालांकि पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

    मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने बच्चों की स्थिति देखते हुए उन्हें भोजन और जरूरी सामान उपलब्ध कराया। अधिकारियों ने चाची को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि बच्चों के साथ किसी भी तरह की अमानवीयता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    डीसीपी पूर्वी ने बताया कि मामले की जांच जारी है और दोबारा शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल बच्चों को सुरक्षा में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।