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  • हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: आयुष चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया पर लगी रोक

    हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: आयुष चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया पर लगी रोक


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने आयुष चिकित्सा अधिकारियों (आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी) की भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश 31 दिसंबर 2025 को जारी विज्ञापनों के तहत चल रही भर्ती प्रक्रिया पर लागू होगा, जिससे फिलहाल सभी आगे की कार्रवाई रोक दी गई है।

    मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने यह फैसला तीन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने राज्य सरकार और मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 23 जून 2026 तय की गई है।

    विवाद का मुख्य मुद्दा 50 प्रतिशत आरक्षण से जुड़ा है, जो उन संविदा आयुष चिकित्सा अधिकारियों को देने का प्रावधान है जिन्होंने पांच साल की सेवा पूरी कर ली है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि समान पद पर कार्यरत होने के बावजूद उन्हें इस लाभ से वंचित किया जा रहा है।

    सरकार की 11 मार्च 2025 की अधिसूचना में यह प्रावधान किया गया था कि ऐसे संविदा चिकित्सक, जो निर्धारित सेवा अवधि पूरी कर चुके हैं, उन्हें नियमित भर्ती में आरक्षण का लाभ मिलेगा, बशर्ते वे समकक्ष पद पर कार्यरत हों।

    याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि वे उसी पद पर काम कर रहे हैं, जिसके लिए भर्ती निकाली गई है, और केवल वेतनमान के आधार पर भेदभाव उचित नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार पहले ही कुछ मामलों में संविदा चिकित्सकों के वेतनमान को नियमित स्तर पर लाने की प्रक्रिया स्वीकार कर चुकी है।

    हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश से प्रदेश भर के हजारों संविदा आयुष चिकित्सकों को फिलहाल राहत मिली है, जबकि भर्ती प्रक्रिया अनिश्चितकाल के लिए रुक गई है। अब सरकार के जवाब के बाद ही इस मामले में आगे की दिशा तय होगी।

  • पेट्रोल-डीजल के दामों में बड़ा उछाल, देशभर में बढ़ी महंगाई की मार..

    पेट्रोल-डीजल के दामों में बड़ा उछाल, देशभर में बढ़ी महंगाई की मार..


    नई दिल्ली । देश में एक बार फिर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में जारी नई दरों के अनुसार पेट्रोल और डीजल के दामों में उल्लेखनीय इजाफा दर्ज किया गया है, जिससे परिवहन से लेकर दैनिक जीवन तक महंगाई का असर महसूस किया जा रहा है। बढ़ती कीमतों ने न केवल उपभोक्ताओं पर आर्थिक दबाव बढ़ाया है, बल्कि बाजार में अन्य वस्तुओं की लागत पर भी असर डालना शुरू कर दिया है।

    राजधानी दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में पेट्रोल और डीजल के नए रेट लागू हो गए हैं, जिसके बाद पेट्रोल की कीमत में प्रति लीटर 3.14 रुपये और डीजल की कीमत में 3.11 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल और डीजल के दाम नए स्तर पर पहुंच गए हैं, जिससे रोजमर्रा की आवाजाही और परिवहन लागत में सीधा असर देखने को मिल रहा है।

    इसके साथ ही सीएनजी की कीमतों में भी वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे सार्वजनिक परिवहन और निजी वाहनों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति में अस्थिरता और उसकी बढ़ती कीमतों को माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल के दाम लंबे समय से ऊंचे बने हुए हैं, जिसका सीधा प्रभाव भारतीय बाजार पर पड़ रहा है।

    तेल कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा था, जिसके चलते कीमतों में संशोधन आवश्यक हो गया। विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतें लगातार उच्च स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे ईंधन के उत्पादन और वितरण की लागत में वृद्धि हो रही है। इसका प्रभाव अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है।

    सरकारी स्तर पर भी इस स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी मुद्रास्फीति को और बढ़ा सकती है। पहले से ही बढ़ती महंगाई से जूझ रही जनता के लिए यह एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित हो सकता है। परिवहन लागत बढ़ने से सब्जियों, अनाज और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

    इस बीच, रुपये की कमजोरी ने भी स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट के कारण आयातित कच्चा तेल और महंगा हो गया है। इससे तेल कंपनियों की लागत और बढ़ गई है और इसका सीधा असर खुदरा कीमतों पर देखने को मिल रहा है।

    आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में और उतार-चढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति, मुद्रा विनिमय दर और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा तय करेंगे। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए स्थिति अभी और चुनौतीपूर्ण बनी रह सकती है।

  • उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला: लापरवाही से प्रसूता की मौत, अस्पताल को देना होगा मुआवजा

    उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला: लापरवाही से प्रसूता की मौत, अस्पताल को देना होगा मुआवजा


    नई दिल्ली । ग्वालियर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने एक निजी अस्पताल की गंभीर लापरवाही को साबित मानते हुए उस पर आर्थिक दंड लगाया है। मामला न्यू लाइफ लाइन हॉस्पिटल का है, जहां प्रसव के बाद एक महिला की हालत बिगड़ने पर समय पर उचित उपचार नहीं दिया गया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई।

    परिजनों के अनुसार महिला को 30 सितंबर 2023 को डिलीवरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सिजेरियन डिलीवरी के बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी और ऑक्सीजन स्तर तेजी से गिरकर 80 तक पहुंच गया। इसके बावजूद समय पर न तो उचित ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया और न ही उसे बड़े अस्पताल रेफर किया गया।

    स्थिति गंभीर होने पर मरीज को कमला राजा अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

    जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल में न तो योग्य विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद थे और न ही वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम जैसी बुनियादी सुविधाएं थीं। यहां तक कि अस्पताल का रजिस्ट्रेशन और व्यवस्थाएं भी संदिग्ध पाई गईं।

    उपभोक्ता आयोग ने इसे “सेवा में गंभीर कमी” मानते हुए अस्पताल पर कुल ₹3.12 लाख का मुआवजा लगाने का आदेश दिया है। इसमें ₹3 लाख आर्थिक क्षतिपूर्ति, ₹10 हजार मानसिक क्षति और ₹2 हजार कानूनी खर्च शामिल हैं। आदेश के अनुसार यह राशि 45 दिनों के भीतर देनी होगी, अन्यथा 6% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

    आयोग ने स्पष्ट कहा कि यदि मरीज को समय पर बेहतर अस्पताल रेफर किया जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। बिना बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं के अस्पताल चलाना मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है।

  • ट्रक से छलांग लगाते ही गई जान: होमगार्ड जवान की हाईवे पर दर्दनाक मौत

    ट्रक से छलांग लगाते ही गई जान: होमगार्ड जवान की हाईवे पर दर्दनाक मौत


    नई दिल्ली । ग्वालियर जिले के घाटीगांव क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां शिवपुरी में पदस्थ 25 वर्षीय होमगार्ड जवान धर्मेन्द्र आदिवासी की चलती पुलिस ट्रक से कूदने के बाद मौत हो गई। यह घटना आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे पर सिमरिया मोड़ के पास हुई।

    जानकारी के अनुसार, जवान अपने साथियों के साथ सरकारी कार्य के लिए राइफल जमा करने ग्वालियर आ रहा था। इसी दौरान वह पुलिस के मिनी ट्रक में सवार था। रास्ते में उसके मोबाइल पर घर से एक कॉल आया, जिसके बाद उसका व्यवहार अचानक बदल गया।

    साथी जवानों के मुताबिक, फोन पर लंबी बातचीत के बाद वह तनावग्रस्त और उत्तेजित दिखाई देने लगा। जैसे ही वाहन सिमरिया मोड़ के पास पहुंचा, उसने अचानक चिल्लाते हुए चलती गाड़ी से छलांग लगा दी। सिर के बल गिरने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

    साथियों ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया।

    पुलिस अब इस मामले की गहन जांच कर रही है और जवान के मोबाइल की कॉल डिटेल्स खंगाली जा रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिरी कॉल में क्या बातचीत हुई थी, जिससे वह मानसिक रूप से विचलित हुआ।

    फिलहाल पुलिस इसे संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत मानकर सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

  • झांसी में भीषण गर्मी का कहर: पारा 44°C पार, अगले हफ्ते 47°C तक पहुंचने की आशंका

    झांसी में भीषण गर्मी का कहर: पारा 44°C पार, अगले हफ्ते 47°C तक पहुंचने की आशंका



    नई दिल्ली। झांसी में एक बार फिर भीषण गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। शहर में तापमान लगातार बढ़ते हुए 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिससे दिन के समय सड़कों पर सन्नाटा जैसा माहौल देखने को मिल रहा है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

    मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में गर्मी और ज्यादा बढ़ सकती है। शुक्रवार से लू चलने की संभावना जताई गई है, जिससे तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है। वहीं अगले सप्ताह स्थिति और गंभीर हो सकती है, जब अधिकतम तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है।

    कृषि विज्ञान केंद्र भरारी के मौसम वैज्ञानिक डॉ. आदित्य कुमार सिंह के अनुसार, दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं का असर और बढ़ेगा। दोपहर 1 से 3 बजे के बीच सड़कों पर आवाजाही काफी कम देखी जा रही है, क्योंकि तेज धूप में बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।

    बृहस्पतिवार को झांसी में अधिकतम तापमान 44.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान भी 27.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल राहत के आसार नहीं हैं और आने वाले दिनों में लोगों को भीषण गर्मी और लू का सामना करना पड़ेगा।

  • ग्वालियर में बढ़े पेट्रोल-डीजल रेट: लोगों की जेब पर भारी पड़ा असर

    ग्वालियर में बढ़े पेट्रोल-डीजल रेट: लोगों की जेब पर भारी पड़ा असर


    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर अब ग्वालियर में भी साफ दिखाई दे रहा है। तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है, जिसके बाद शहर में पेट्रोल ₹109.74 प्रति लीटर और डीजल ₹94.93 प्रति लीटर तक पहुंच गया है।

    एक दिन पहले तक पेट्रोल ₹106.45 और डीजल ₹91.83 प्रति लीटर बिक रहा था। अचानक हुई इस बढ़ोतरी से आम लोगों के बजट पर सीधा असर पड़ा है। खासकर दैनिक यात्रियों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।

    पेट्रोल पंपों पर इसका असर भी देखने को मिला है। पहले जहां लंबी कतारें लगती थीं, अब वहां भीड़ काफी कम हो गई है। पेट्रोल पंप कर्मचारियों के अनुसार बिक्री में लगभग 40 से 50 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है।

    ग्राहकों का कहना है कि बढ़ती कीमतों के कारण अब वाहन का उपयोग सोच-समझकर करना पड़ेगा। कुछ लोग इलेक्ट्रिक वाहनों को बेहतर विकल्प मान रहे हैं, जबकि कई लोगों ने महंगाई को सीधे आम जनता पर बोझ बताया है।

    विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने से यह बढ़ोतरी हुई है। युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के चलते तेल की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं, जिसका असर भारत के ईंधन बाजार पर भी पड़ रहा है।

    ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भी इसका असर दिखने लगा है और आने वाले समय में किराए और वस्तुओं की कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।

  • इंदौर में रिश्तों को लेकर बढ़े विवाद, पंचायत में सामने आए अहम सामाजिक मुद्दे

    इंदौर में रिश्तों को लेकर बढ़े विवाद, पंचायत में सामने आए अहम सामाजिक मुद्दे


    नई दिल्ली । इंदौर में सिंधी समाज द्वारा शुरू की गई मध्यस्थता पहल लगातार चर्चा में है। समाज की पंचायत ने अब तक 800 से अधिक पारिवारिक और वैवाहिक विवादों को सुलझाया है, जिनमें कई मामले तलाक तक पहुंचने की कगार पर थे। लेकिन बातचीत, काउंसलिंग और आपसी समझ के जरिए कई परिवारों को टूटने से बचा लिया गया।

    एक मामले में एक महिला अपने वैवाहिक जीवन से बेहद असंतुष्ट थी और तलाक चाहती थी। विवाद बढ़ने पर मामला समाज की पंचायत तक पहुंचा, जहां दोनों पक्षों को सुना गया और मेडिकल व काउंसलिंग सहायता भी ली गई। इसके बाद दोनों को साथ रहने के लिए तैयार किया गया।

    पंचायत से जुड़े सदस्यों के अनुसार, अब तक सामने आए कुल मामलों में लगभग 48% विवाद वैवाहिक जीवन से जुड़े हैं। इनमें एक बड़ा हिस्सा निजी और दाम्पत्य जीवन में असंतुष्टि से जुड़ा पाया गया है। इसके अलावा संपत्ति, आर्थिक और पारिवारिक विवाद भी बड़ी संख्या में सामने आए हैं।

    विशेषज्ञों और समाज के डॉक्टरों की मदद से कई मामलों में काउंसलिंग भी कराई जाती है, ताकि समस्याओं को चिकित्सकीय और मानसिक दृष्टिकोण से भी समझा जा सके। पंचायत का दावा है कि हर मामला अलग होता है और उसका समाधान भी व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार किया जाता है।

    इसके अलावा समाज ने विवाह योग्य युवाओं का एक सर्वे भी किया है, जिसमें 22 से 29 और 30 से 40 वर्ष के आयु वर्ग में अविवाहित युवक-युवतियों का आंकड़ा भी सामने आया है। यह डेटा सामाजिक बदलाव और विवाह संबंधी प्रवृत्तियों को भी दर्शाता है।

    इस पहल को समाज में परिवारों को जोड़कर रखने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जो आधुनिक समय में बदलते रिश्तों की जटिलताओं को समझने की दिशा में एक उदाहरण बन रही है।

  • झांसी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: ADM वरुण कुमार पांडेय बने विधि विश्वविद्यालय के कुलसचिव, गौरव शुक्ला को मिला JDA सचिव का जिम्मा

    झांसी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: ADM वरुण कुमार पांडेय बने विधि विश्वविद्यालय के कुलसचिव, गौरव शुक्ला को मिला JDA सचिव का जिम्मा


    नई दिल्ली। झांसी में प्रशासनिक फेरबदल के तहत पीसीएस अधिकारी वरुण कुमार पांडेय का तबादला कर उन्हें प्रयागराज स्थित डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का नया कुलसचिव नियुक्त किया गया है। वर्तमान में वह झांसी में एडीएम वित्त एवं राजस्व के पद पर तैनात थे।

    वरुण कुमार पांडेय अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण मामलों को लेकर चर्चा में रहे। सिटी मजिस्ट्रेट रहते हुए उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई थी, खासकर महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के नवजात शिशु वार्ड में हुए भीषण अग्निकांड के दौरान उनकी संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता की काफी सराहना हुई थी। उस हादसे के दौरान एक मां अपने बच्चे को ढूंढते हुए उनके पास पहुंची थी, जहां उन्होंने न सिर्फ महिला को संभाला बल्कि अधिकारियों की मदद से बच्चे को सुरक्षित ढूंढकर मां से मिलवाया था, जिसे लोगों ने उनकी मानवीय कार्यशैली का उदाहरण माना।

    इसी बीच शासन ने एक और बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए सुल्तानपुर में एडीएम प्रशासन के पद पर तैनात गौरव शुक्ला को झांसी विकास प्राधिकरण (JDA) का नया सचिव नियुक्त किया है। वह जल्द ही अपना कार्यभार ग्रहण करेंगे।

    इस तबादले को प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे दोनों जिलों में नई कार्यशैली और गति आने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • भोजशाला मामले पर हाईकोर्ट का फैसला आज, इंदौर-धार में हाई अलर्ट

    भोजशाला मामले पर हाईकोर्ट का फैसला आज, इंदौर-धार में हाई अलर्ट


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के बहुचर्चित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर आज हाईकोर्ट की इंदौर बेंच का अहम फैसला आ सकता है। वर्षों से चल रहे इस संवेदनशील मामले में कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रखा था, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दिया गया है।

    फैसले को देखते हुए इंदौर और धार जिले में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। खास बात यह है कि आज शुक्रवार का दिन है और इसी दिन भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज अदा की जाती है, जिससे स्थिति की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। प्रशासन ने दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों से दूर रहने की अपील की है।

    धार शहर में करीब 1200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को 12 लेयर में बांटा गया है, जिसमें रिजर्व पुलिस फोर्स और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को भी शामिल किया गया है। पुलिस कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी की जा रही है और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात है।

    भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में कलेक्टर और एसपी ने खुद सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया है। सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की भड़काऊ पोस्ट या अफवाह को फैलने से रोका जा सके।

    यह विवाद 2022 में दायर याचिकाओं के बाद और अधिक चर्चा में आया था, जिसमें भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर अदालत में मांगें रखी गई थीं। हिंदू पक्ष ने इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर बताते हुए नियमित पूजा का अधिकार मांगा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे लंबे समय से उपयोग में रही मस्जिद बताता है।

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भी इस मामले में 98 दिन का वैज्ञानिक सर्वे किया था, जिसकी रिपोर्ट को लेकर दोनों पक्षों में अलग-अलग दावे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले कुछ व्यवस्थाओं को लेकर अनुमति दी थी, जिसके बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया।

    फिलहाल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था सर्वोपरि है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सभी सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह तैयार हैं।

  • अशोक खरात केस में ED की सख्ती, NCP नेता रूपाली चाकणकर से ट्रस्ट कनेक्शन पर गहन पूछताछ

    अशोक खरात केस में ED की सख्ती, NCP नेता रूपाली चाकणकर से ट्रस्ट कनेक्शन पर गहन पूछताछ


    नई दिल्ली । मनी लॉन्ड्रिंग और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने NCP नेता रूपाली चाकणकर से लंबी पूछताछ की। यह पूछताछ लगभग आठ घंटे तक चली, जिसमें जांच एजेंसी ने मुख्य रूप से अशोक खरात से जुड़े एक ट्रस्ट और उससे संबंधित वित्तीय गतिविधियों पर विस्तृत सवाल किए। मामला सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि इसमें कई लोगों के नाम और बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन के आरोप जुड़े हुए हैं।

    सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी ने नाशिक जिले में स्थित एक संस्थान ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, उसमें उनकी भूमिका और वित्तीय निर्णयों में उनकी भागीदारी को लेकर सवाल किए। एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि ट्रस्ट के संचालन में किस स्तर पर कौन-कौन शामिल था और धन के प्रवाह की दिशा क्या रही। इस दौरान ट्रस्ट को मिले दान और उसके उपयोग से जुड़े पहलुओं पर भी विस्तार से पूछताछ की गई।

    रूपाली चाकणकर से यह भी पूछा गया कि उनका ट्रस्ट से जुड़ाव किस परिस्थिति में हुआ और क्या उनकी कोई वित्तीय या प्रशासनिक जिम्मेदारी थी। पूछताछ में यह भी जानने का प्रयास किया गया कि क्या ट्रस्ट से जुड़े किसी भी प्रकार के निर्णयों में उनकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका रही है। जांच एजेंसी ने कुछ संदिग्ध लेनदेन और बैंकिंग गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए और उनके स्पष्टीकरण दर्ज किए।

    सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान चाकणकर ने कई आरोपों से इनकार किया और कहा कि उनका ट्रस्ट के वित्तीय संचालन में कोई प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें कई वित्तीय गतिविधियों की जानकारी नहीं थी और उनका संबंध केवल नाममात्र का था। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लेनदेन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनमें उनकी कोई भूमिका नहीं रही है।

    जांच एजेंसी ने उनके परिवार से जुड़े कुछ वित्तीय मामलों और व्यापारिक गतिविधियों की भी जानकारी मांगी। विशेष रूप से रियल एस्टेट और बैंकिंग से जुड़े कुछ लेनदेन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसके अलावा परिजनों से जुड़े खातों और वित्तीय प्रवाह की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

    पूछताछ के बाद रूपाली चाकणकर ने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रही हैं और भविष्य में भी करती रहेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे कई आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और उन्हें गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन और संस्थागत भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों को भी निराधार बताया।

    इस पूरे मामले में जांच एजेंसी अब प्राप्त बयानों और दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जरूरत पड़ने पर आगे भी पूछताछ की जा सकती है। मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले समय में इससे जुड़े कई और पहलुओं की जांच होने की संभावना है।