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  • इंस्टाग्राम पर स्टार पावर: जानिए किन भारतीय एक्टर्स के हैं सबसे ज्यादा फॉलोअर्स

    इंस्टाग्राम पर स्टार पावर: जानिए किन भारतीय एक्टर्स के हैं सबसे ज्यादा फॉलोअर्स


    नई दिल्ली। आज के डिजिटल दौर में सेलेब्स और फैंस के बीच दूरी लगभग खत्म हो चुकी है। फिल्मों के अलावा इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने स्टार्स को सीधे अपने दर्शकों से जोड़ दिया है। पहले जहां फैंस अपने पसंदीदा सितारों से पत्रों और मैगजीन इंटरव्यू के जरिए जुड़ते थे, वहीं अब एक क्लिक पर उनकी जिंदगी की हर अपडेट सामने आ जाती है।

    इंस्टाग्राम पर भारत के सेलेब्स की लोकप्रियता का अंदाजा उनकी फॉलोइंग से लगाया जाता है। हाल ही में सामने आई लिस्ट के अनुसार बॉलीवुड एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर इस रेस में सबसे आगे निकल गई हैं। 93 मिलियन फॉलोअर्स के साथ श्रद्धा कपूर नंबर 1 पोजिशन पर बनी हुई हैं, जबकि वे इंस्टाग्राम पर केवल 790 अकाउंट्स को फॉलो करती हैं।

    दूसरे स्थान पर ग्लोबल आइकन बन चुकीं प्रियंका चोपड़ा हैं, जिनके करीब 92.9 मिलियन फॉलोअर्स हैं। प्रियंका न सिर्फ बॉलीवुड बल्कि हॉलीवुड में भी अपनी मजबूत पहचान बना चुकी हैं। वे इंस्टाग्राम पर 639 लोगों को फॉलो करती हैं।

    तीसरे स्थान पर आलिया भट्ट हैं, जिनकी फैन फॉलोइंग 85.5 मिलियन तक पहुंच चुकी है। आलिया इन दिनों अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स और नए प्रोजेक्ट्स को लेकर चर्चा में हैं।

    चौथे नंबर पर दीपिका पादुकोण हैं जिनके 78.8 मिलियन फॉलोअर्स हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी का ऐलान किया है और वे शाहरुख खान के साथ फिल्म ‘किंग’ में नजर आने वाली हैं।

    पांचवें स्थान पर कैटरीना कैफ हैं जिनके 78.6 मिलियन फॉलोअर्स हैं। इसके बाद छठे नंबर पर सलमान खान हैं जिनकी फैन फॉलोइंग 71.7 मिलियन है।

    सातवें स्थान पर उर्वशी रौतेला हैं जिनके 68.3 मिलियन फॉलोअर्स हैं, जबकि आठवें नंबर पर जैकलीन फर्नांडीस हैं जिनके 68.7 मिलियन फॉलोअर्स हैं।

    नौवें स्थान पर अनुष्का शर्मा हैं, जो लंबे समय से फिल्मों से दूर होने के बावजूद 67.5 मिलियन फॉलोअर्स के साथ मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।

    दसवें स्थान पर खिलाड़ी कुमार अक्षय कुमार हैं जिनके 65.3 मिलियन फॉलोअर्स हैं।

    यह लिस्ट साफ दिखाती है कि सोशल मीडिया पर स्टार पावर अब भी उतनी ही मजबूत है और फैंस अपने पसंदीदा सितारों से डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लगातार जुड़े रहना पसंद करते हैं। 

  • ट्रंप का बाइडन पर बड़ा हमला: बोले- 4 साल में अमेरिका को किया कमजोर, शी जिनपिंग की बात सही

    ट्रंप का बाइडन पर बड़ा हमला: बोले- 4 साल में अमेरिका को किया कमजोर, शी जिनपिंग की बात सही

    नई दिल्ली। अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें अमेरिका को “ढलता हुआ देश” कहा गया था। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि जिनपिंग की यह टिप्पणी “100 प्रतिशत सही” थी। उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के चार साल के कार्यकाल में अमेरिका को कई स्तर पर नुकसान झेलना पड़ा, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा।

    बाइडन सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल
    ट्रंप ने आरोप लगाया कि बाइडन प्रशासन की नीतियों ने देश को कमजोर किया। उन्होंने खुली सीमा नीति, बढ़े हुए टैक्स, DEI नीतियां, महिलाओं के खेलों में पुरुष खिलाड़ियों की भागीदारी, खराब व्यापार समझौते और बढ़ते अपराध को अमेरिका की गिरती स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया। ट्रंप के मुताबिक, इन फैसलों का असर देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था दोनों पर पड़ा।

    ट्रंप बोले- मेरे नेतृत्व में तेजी से बदली स्थिति
    अपने पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि उनके नेतृत्व में अमेरिका ने पिछले 16 महीनों में तेजी से सुधार किया है। उन्होंने कहा कि शेयर बाजार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है, रोजगार के अवसर बढ़े हैं और विदेशी निवेश में भी लगातार इजाफा हुआ है। ट्रंप ने यह भी कहा कि शी जिनपिंग ने इन उपलब्धियों के लिए उन्हें बधाई दी है।

    अमेरिका फिर बना मजबूत देश
    ट्रंप ने कहा कि अब अमेरिका आर्थिक और सैन्य दोनों स्तरों पर पहले से ज्यादा मजबूत हो चुका है। उन्होंने वेनेजुएला और ईरान से जुड़े सैन्य कदमों का जिक्र करते हुए अमेरिकी सेना को दुनिया की सबसे ताकतवर सेना बताया। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले तक अमेरिका कमजोर स्थिति में था, लेकिन अब देश दोबारा वैश्विक ताकत के रूप में उभर रहा है। साथ ही ट्रंप ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में अमेरिका और चीन के संबंध और बेहतर हो सकते हैं।

  • बेहद खास है 16 मई की अमावस्या, शनि जयंती के साथ बन रहा दुर्लभ संयोग, इन गलतियों से बचें

    बेहद खास है 16 मई की अमावस्या, शनि जयंती के साथ बन रहा दुर्लभ संयोग, इन गलतियों से बचें

    नई दिल्ली। सनातन धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष महत्व प्राप्त है और ज्येष्ठ मास की अमावस्या को और भी महत्वपूर्ण माना जाता है। साल 2026 में ज्येष्ठ अमावस्या 16 मई को पड़ रही है, जो कई धार्मिक संयोगों के कारण खास मानी जा रही है। इसी दिन शनि जयंती भी मनाई जाएगी और यह वर्ष की पहली शनि अमावस्या भी होगी।

    द्रिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई 2026 को सुबह 05:11 बजे शुरू होगी और 17 मई 2026 को रात 01:30 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर अमावस्या का स्नान और दान 16 मई, शनिवार को ही किया जाएगा।

    शनि जयंती और ज्येष्ठ अमावस्या का संयोग
    इस दिन शनि जयंती, वट सावित्री व्रत और ज्येष्ठ अमावस्या का एक साथ संयोग बन रहा है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा-पाठ से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

    इन कार्यों से बचने की सलाह
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन कुछ कार्यों से परहेज करना चाहिए, अन्यथा जीवन में नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं।

    बाल और नाखून काटने से बचें
    मान्यता है कि अमावस्या के दिन बाल और नाखून काटना शुभ नहीं माना जाता। विशेषकर शनिवार को शनि जयंती होने के कारण यह नियम और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

    बुजुर्गों का सम्मान जरूरी
    इस दिन पितरों का स्मरण और तर्पण किया जाता है। ऐसे में बुजुर्गों का सम्मान करना आवश्यक माना गया है। उनका अपमान या अनादर करने से पारिवारिक अशांति बढ़ सकती है।

    तामसिक भोजन से परहेज
    अमावस्या के दिन सात्विक आहार लेने और तामसिक भोजन से बचने की सलाह दी जाती है। साथ ही स्वच्छता बनाए रखना और सुबह जल्दी स्नान करना भी शुभ माना जाता है।

    सुनसान जगहों से दूरी
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन नकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय मानी जाती है। इसलिए श्मशान घाट या सुनसान स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी जाती है।

    नए कार्यों की शुरुआत न करें
    इस दिन नए कार्य शुरू करना या बड़ी खरीदारी करना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि इससे कार्यों में बाधा या असफलता आ सकती है।

    धार्मिक महत्व और मान्यताएं
    ज्येष्ठ अमावस्या को पितरों को समर्पित तिथि माना जाता है। इस दिन दान-पुण्य, स्नान और पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि सही तरीके से किए गए धार्मिक कार्य जीवन में सुख-समृद्धि और शांति लाते हैं।

  • भारत के समर्थन में आया बांग्लादेश, जमात-ए-इस्लामी के मुसलमानों पर हमले के आरोपों को किया खारिज

    भारत के समर्थन में आया बांग्लादेश, जमात-ए-इस्लामी के मुसलमानों पर हमले के आरोपों को किया खारिज

    नई दिल्ली। भारत में मुसलमानों पर कथित हमलों को लेकर उठे विवाद पर बांग्लादेश ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए ऐसे आरोपों को खारिज कर दिया है। ढाका की ओर से कहा गया है कि उसे भारत में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ किसी तरह के उत्पीड़न की कोई आधिकारिक या कूटनीतिक सूचना नहीं मिली है।

    पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव के बाद भारत और पड़ोसी देशों के रिश्तों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच कुछ संगठनों ने भारत में मुसलमानों पर अत्याचार के आरोप लगाए थे। हालांकि बांग्लादेश सरकार ने इन दावों को आधारहीन बताया है।

    जमात-ए-इस्लामी के आरोपों को किया खारिज
    बांग्लादेश ने जमात-ए-इस्लामी और उससे जुड़े संगठनों के आरोपों को सिरे से नकार दिया है। ढाका प्रशासन का कहना है कि ऐसे दावे किसी प्रमाण या आधिकारिक रिपोर्ट पर आधारित नहीं हैं और इनमें कई बार सोशल मीडिया पर प्रसारित पुरानी या भ्रामक वीडियो का इस्तेमाल किया जाता है।

    गृह मंत्री का बयान
    बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि सरकार के पास भारत में मुसलमानों के खिलाफ किसी भी तरह के उत्पीड़न की कोई पुष्टि नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत या आंकड़े मौजूद नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश के राजनयिक मिशन और विदेश मंत्रालय लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की आधिकारिक शिकायत सामने नहीं आई है।

    भारत-बांग्लादेश संबंधों पर रुख
    बांग्लादेश सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह बिना किसी आधार के अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को प्रभावित नहीं करना चाहती। ढाका ने भारत के साथ स्थिर और शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखने की इच्छा जताई है। इसके साथ ही सीमा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की संभावना का भी संकेत दिया गया है, हालांकि कहा गया है कि इस पर अभी तक भारत सरकार की ओर से कोई औपचारिक जानकारी नहीं मिली है।

  • विदेश दौरे से लौटते ही पीएम मोदी करेंगे बड़ी बैठक, पेट्रोल-डीजल और सोने के बाद अब अगले कदम की तैयारी

    विदेश दौरे से लौटते ही पीएम मोदी करेंगे बड़ी बैठक, पेट्रोल-डीजल और सोने के बाद अब अगले कदम की तैयारी

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों को नई गति देने की तैयारी तेज हो गई है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी 21 मई को मंत्रिपरिषद की एक अहम बैठक करने जा रहे हैं। यह बैठक उनके 15 से 20 मई 2026 तक प्रस्तावित विदेश दौरे के तुरंत बाद होगी। प्रधानमंत्री इस दौरान यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा पर रहेंगे।

    सुधारों की गति बढ़ाने पर जोर
    सरकारी सूत्रों के अनुसार इस बैठक का मुख्य उद्देश्य “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” और “ईज ऑफ लिविंग” को और सरल बनाना है। इसके लिए नियमों और प्रक्रियाओं को आसान करने और अनुपालन बोझ को कम करने पर विशेष चर्चा होगी। बैठक में उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), कृषि, वाणिज्य, स्वास्थ्य, ऊर्जा, पर्यावरण, श्रम, सड़क परिवहन और परमाणु ऊर्जा सहित करीब एक दर्जन मंत्रालयों के सचिव प्रेजेंटेशन दे सकते हैं।

    जन-केंद्रित सुधारों की समीक्षा
    बैठक में उन सुधारों की समीक्षा भी की जाएगी जो एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल में विभिन्न मंत्रालयों द्वारा नीतियों और नियमों में लागू किए गए हैं। फोकस इस बात पर रहेगा कि इन सुधारों से आम जनता और कारोबारियों को कितना लाभ मिला है। अधिकारियों के मुताबिक, बैठक का केंद्र “सरलीकरण और डीरेगुलेशन” यानी नियमों को आसान बनाना होगा।

    ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को मिलेगी रफ्तार
    पिछली मंत्रिपरिषद बैठक 4 जून 2025 को हुई थी, जिसमें प्रधानमंत्री ने सरकार को “रिफॉर्म एक्सप्रेस” की तरह आगे बढ़ने का संदेश दिया था। हालांकि, पश्चिम एशिया संकट के कारण कई नीतिगत प्राथमिकताएं प्रभावित हुईं और सरकार को आपात प्रबंधन पर ध्यान देना पड़ा। अब उम्मीद की जा रही है कि यह बैठक सुधार एजेंडे को फिर से गति देगी।

    कोविड जैसी तेज सुधार नीति की जरूरत पर जोर
    विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक संकट के बीच भी सुधारों की प्रक्रिया को जारी रखना जरूरी है। उनका कहना है कि जिस तरह कोविड काल के दौरान तेज फैसलों से कई बड़े सुधार लागू किए गए थे, उसी तरह अब भी इसी गति को बनाए रखने की जरूरत है। इस बैठक में नीति आयोग से जुड़े उच्च स्तरीय समूहों द्वारा सुझाए गए सुधारों पर भी चर्चा होने की संभावना है, ताकि आने वाले समय में नीतिगत फैसलों को और प्रभावी बनाया जा सके।

  • एमपी में पड़ रही भीषण गर्मी, 40 जिलों में हीट वेव, 5 जिलों में तेज लू की चेतावनी, शाजापुर-नौगांव सबसे गर्म

    एमपी में पड़ रही भीषण गर्मी, 40 जिलों में हीट वेव, 5 जिलों में तेज लू की चेतावनी, शाजापुर-नौगांव सबसे गर्म

    भोपाल। मध्य प्रदेश में गर्मी लगातार विकराल रूप लेती जा रही है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से के कुछ इलाकों को छोड़ दें तो अधिकांश जिले इस समय हीट वेव की चपेट में हैं। अगले चार दिनों तक भीषण गर्मी पड़ने की चेतावनी जारी की है। शुक्रवार को करीब 40 जिलों में गर्म हवाएं चलने का अनुमान है, जबकि इंदौर, उज्जैन, रतलाम, धार और देवास में 15 से 17 मई के बीच तेज लू चलने का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    मौसम विभाग के अनुसार दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक गर्मी का असर सबसे अधिक रहेगा। लोगों को सलाह दी गई है कि बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। गुरुवार को भी प्रदेश में भीषण गर्मी का असर देखने को मिला। शाजापुर और छतरपुर के नौगांव में अधिकतम तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा। इसके अलावा खरगोन में 44.6 डिग्री, खंडवा और रतलाम में 44.5 डिग्री, खजुराहो में 44.3 डिग्री तथा रायसेन और दमोह में 44 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    प्रदेश के बड़े शहरों में उज्जैन सबसे गर्म रहा, जहां पारा 44 डिग्री तक पहुंच गया। भोपाल में 43.4 डिग्री, जबलपुर में 43.3 डिग्री, इंदौर में 43 डिग्री और ग्वालियर में 41.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इंदौर, उज्जैन, रतलाम, देवास और धार में दिन के साथ रातें भी गर्म रहने वाली हैं। मौसम विभाग ने इन जिलों में “वॉर्म नाइट” की चेतावनी भी जारी की है, जिससे रात के तापमान में भी राहत मिलने की संभावना कम है।

    भोपाल, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, गुना, सागर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, शाजापुर, सीहोर, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नीमच, छतरपुर, टीकमगढ़, सतना, रीवा, सीधी और सिंगरौली समेत कई जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है। वहीं जबलपुर, कटनी, उमरिया, शहडोल, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा और बैतूल जैसे जिलों में तेज गर्मी का असर बना रहेगा, हालांकि यहां फिलहाल लू का अलर्ट जारी नहीं किया गया है।
    भोपाल, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, गुना, सागर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, शाजापुर, सीहोर, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नीमच, छतरपुर, टीकमगढ़, सतना, रीवा, सीधी और सिंगरौली समेत कई जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है। वहीं जबलपुर, कटनी, उमरिया, शहडोल, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा और बैतूल जैसे जिलों में तेज गर्मी का असर बना रहेगा, हालांकि यहां फिलहाल लू का अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

    प्रदेश में मई की शुरुआत से मौसम लगातार बदलता रहा है। 30 अप्रैल से शुरू हुआ आंधी-बारिश का दौर 10 मई तक जारी रहा। पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवात और ट्रफ सिस्टम के असर से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश हुई। 11 मई को मौसम साफ हुआ, लेकिन 12 से 14 मई के बीच फिर कई इलाकों में आंधी और बारिश देखने को मिली। इस तरह मई के 14 दिनों में से 12 दिन प्रदेश में कहीं न कहीं बारिश, आंधी या ओलावृष्टि का असर रहा। हालांकि शुक्रवार के लिए बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

  • सावधान! माइक्रोवेव में कुछ फूड्स को गर्म करना बन सकता है जहर जैसा असर

    सावधान! माइक्रोवेव में कुछ फूड्स को गर्म करना बन सकता है जहर जैसा असर


    नई दिल्ली। आज के समय में माइक्रोवेव ओवन हर घर की रसोई का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह जल्दी खाना गर्म करना हो या रात का बचा हुआ भोजन दोबारा तैयार करना हो, माइक्रोवेव ने जिंदगी को काफी आसान बना दिया है। लेकिन सुविधा के साथ-साथ इसका गलत इस्तेमाल सेहत के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकता है। कई लोग बिना सोचे-समझे हर तरह का खाना माइक्रोवेव में गर्म कर लेते हैं, जबकि कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं जिन्हें दोबारा गर्म करना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार Microwave oven में कुछ चीजें गर्म करने से न सिर्फ उनका स्वाद और पोषण खराब होता है, बल्कि वे शरीर के लिए हानिकारक भी बन सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि माइक्रोवेव का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाए।

    उबले अंडे को माइक्रोवेव में गर्म करना हो सकता है खतरनाक
    ठंडे उबले अंडे को दोबारा माइक्रोवेव में गर्म करना नुकसानदायक हो सकता है। अंडे के अंदर तेजी से भाप बनने के कारण वह फट भी सकता है। इससे न सिर्फ खाना खराब होता है, बल्कि चोट लगने का खतरा भी रहता है। इसलिए अंडे को हल्की आंच पर धीरे-धीरे गर्म करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।

    बचा हुआ चावल बन सकता है सेहत के लिए जोखिम
    चावल को बार-बार गर्म करना भी सुरक्षित नहीं माना जाता। लंबे समय तक बाहर रखा चावल बैक्टीरिया पैदा कर सकता है, और माइक्रोवेव हर हिस्से को समान रूप से गर्म नहीं कर पाता। ऐसे में कुछ हानिकारक बैक्टीरिया जीवित रह सकते हैं, जो पेट की समस्याएं पैदा कर सकते हैं।

    हरी पत्तेदार सब्जियां बार-बार गर्म न करें
    पालक, मेथी और अन्य हरी सब्जियों को बार-बार माइक्रोवेव में गर्म करने से उनमें मौजूद नाइट्रेट्स बदल सकते हैं, जो शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इसके अलावा इनका स्वाद और पोषण भी कम हो जाता है।

    मिर्च और तीखी चीजों से रहें सावधान
    हरी और लाल मिर्च को माइक्रोवेव में गर्म करने से बचना चाहिए। इसमें मौजूद कैप्साइसिन हवा में फैल सकता है, जिससे आंखों और गले में जलन हो सकती है। कई बार माइक्रोवेव खोलते ही तेज तीखी गैस जैसा असर महसूस होता है।

    प्रोसेस्ड मीट भी हो सकता है नुकसानदायक
    सॉसेज, सलामी और अन्य प्रोसेस्ड मीट को माइक्रोवेव में गर्म करने पर इनके फैट और प्रिजर्वेटिव्स बदल सकते हैं, जिससे हानिकारक तत्व बन सकते हैं। साथ ही इनकी बनावट भी खराब हो जाती है।

    माइक्रोवेव का इस्तेमाल कैसे करें सुरक्षित
    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि Microwave oven का उपयोग करते समय माइक्रोवेव-सेफ बर्तन ही इस्तेमाल करें। खाना हमेशा ढककर गर्म करें ताकि तापमान समान रूप से फैल सके। बहुत लंबे समय तक खाना गर्म करने से बचें क्योंकि इससे पोषण भी कम हो सकता है।

    इसके अलावा माइक्रोवेव की नियमित सफाई भी जरूरी है, क्योंकि अंदर गिरने वाले खाने के कण बैक्टीरिया पैदा कर सकते हैं। सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो माइक्रोवेव सुरक्षित और बेहद उपयोगी उपकरण है, लेकिन लापरवाही इसे स्वास्थ्य के लिए जोखिमभरा बना सकती है।

  • स्क्रीन टाइम की आदत बिगाड़ रही नींद का पैटर्न, शरीर और दिमाग दोनों पर पड़ रहा असर..

    स्क्रीन टाइम की आदत बिगाड़ रही नींद का पैटर्न, शरीर और दिमाग दोनों पर पड़ रहा असर..

    नई दिल्ली ।आज की डिजिटल जीवनशैली में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी हमारे रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। काम से लेकर मनोरंजन तक लगभग हर गतिविधि स्क्रीन पर ही निर्भर हो गई है। लेकिन इसी आदत का एक गंभीर असर अब लोगों की नींद और स्वास्थ्य पर साफ दिखाई देने लगा है। लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम शरीर के प्राकृतिक नींद चक्र को प्रभावित कर रहा है, जिससे स्लीप साइकिल बिगड़ती जा रही है।

    दिनभर काम के दौरान कंप्यूटर और मोबाइल की स्क्रीन पर समय बिताने के बाद भी कई लोग रात में भी फोन का इस्तेमाल जारी रखते हैं। सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, वीडियो देखना या देर रात तक चैटिंग करना अब एक सामान्य आदत बन चुकी है। धीरे-धीरे यह पैटर्न शरीर और दिमाग दोनों को थका देता है, लेकिन व्यक्ति को इसका एहसास तब होता है जब नींद प्रभावित होने लगती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी दिमाग को यह संकेत देती है कि अभी दिन का समय है। इससे शरीर का प्राकृतिक नींद तंत्र बाधित होता है। आमतौर पर शरीर रात के समय मेलाटोनिन नामक हार्मोन बनाता है, जो नींद लाने में मदद करता है। लेकिन जब व्यक्ति सोने से पहले लंबे समय तक स्क्रीन देखता है, तो इस हार्मोन का निर्माण प्रभावित होता है।

    इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को समय पर नींद नहीं आती और वह बिस्तर पर लंबे समय तक करवटें बदलता रहता है। लगातार ऐसा होने पर नींद की गुणवत्ता खराब हो जाती है और शरीर को पूरा आराम नहीं मिल पाता। इसका असर अगले दिन थकान, सिर भारी रहना, आंखों में जलन और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याओं के रूप में सामने आता है।

    खराब स्लीप साइकिल का प्रभाव केवल थकान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह धीरे-धीरे शरीर की कार्यक्षमता को भी प्रभावित करता है। नींद पूरी न होने से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता घटती है, काम में मन नहीं लगता और मानसिक थकान बढ़ जाती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर मानसिक स्वास्थ्य और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।

    आजकल कई लोग सुबह उठने में परेशानी महसूस करते हैं और दिनभर सुस्ती बनी रहती है। इसका एक बड़ा कारण अनियमित नींद और देर रात तक स्क्रीन का उपयोग है। डॉक्टरों के अनुसार, यह स्थिति धीरे-धीरे शरीर की प्राकृतिक लय को बिगाड़ देती है, जिसे ठीक होने में समय लग सकता है।

    हालांकि, कुछ आसान बदलाव अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन से दूरी बनाना सबसे प्रभावी कदम माना जाता है। इसके अलावा रात के समय हल्की रोशनी में रहना, अनावश्यक स्क्रॉलिंग से बचना और नींद के लिए शांत माहौल तैयार करना मददगार हो सकता है।

    दिनभर स्क्रीन पर काम करने वाले लोगों को बीच-बीच में आंखों को आराम देना भी जरूरी है, ताकि आंखों और दिमाग पर दबाव कम हो सके। सोने से पहले किताब पढ़ना, हल्का संगीत सुनना या परिवार के साथ समय बिताना भी नींद को बेहतर बनाने में मदद करता है।

    कुल मिलाकर, बेहतर स्वास्थ्य के लिए अच्छी नींद बेहद जरूरी है और अच्छी नींद के लिए स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण रखना आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण जरूरत बन गई है। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके स्लीप साइकिल को सुधारा जा सकता है और शरीर को फिर से प्राकृतिक ऊर्जा और संतुलन दिया जा सकता है।

  • पहाड़ों में वेकेशन प्लान? जानिए मनाली और दार्जिलिंग में कौन देगा बेस्ट एक्सपीरियंस

    पहाड़ों में वेकेशन प्लान? जानिए मनाली और दार्जिलिंग में कौन देगा बेस्ट एक्सपीरियंस


    नई दिल्ली। गर्मी का मौसम शुरू होते ही लोग ठंडी और सुकून भरी जगहों की तलाश में निकल पड़ते हैं। भारत में वैसे तो कई खूबसूरत हिल स्टेशन हैं, लेकिन Manali और Darjeeling सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले समर डेस्टिनेशन माने जाते हैं। दोनों ही जगहें अपनी अलग खूबसूरती, मौसम और अनुभव के लिए मशहूर हैं। ऐसे में अक्सर लोग इस बात को लेकर कंफ्यूज रहते हैं कि गर्मियों में घूमने के लिए कौन-सी जगह ज्यादा बेहतर रहेगी। अगर आप भी इसी सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं, तो यहां जानिए मनाली और दार्जिलिंग में क्या है खास।

    Manali एडवेंचर और बर्फ का मजा
    हिमाचल प्रदेश में स्थित Manali गर्मियों में घूमने के लिए सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में से एक है। मई-जून के दौरान यहां का तापमान लगभग 10 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। ठंडी हवाएं और पहाड़ों पर जमी बर्फ लोगों को खूब आकर्षित करती है।

    मनाली खासतौर पर उन लोगों के लिए बेस्ट माना जाता है जिन्हें एडवेंचर पसंद है। यहां पैराग्लाइडिंग, ट्रेकिंग, रिवर राफ्टिंग और स्नो एक्टिविटीज का शानदार अनुभव मिलता है। Solang Valley, Rohtang Pass, Atal Tunnel और Hadimba Devi Temple यहां की सबसे मशहूर जगहों में शामिल हैं। अगर बजट की बात करें, तो दिल्ली से 3-4 दिन की मनाली ट्रिप करीब 5 हजार से 8 हजार रुपये में आराम से पूरी हो सकती है। बस या वोल्वो से यहां पहुंचना भी काफी आसान है।

    Darjeeling  शांति और प्राकृतिक सुंदरता का संग
    अगर आप भीड़भाड़ और एडवेंचर से ज्यादा शांत माहौल और खूबसूरत नजारों का आनंद लेना चाहते हैं, तो Darjeeling आपके लिए परफेक्ट जगह हो सकती है। पश्चिम बंगाल का यह हिल स्टेशन अपनी चाय बागानों, बादलों से ढकी पहाड़ियों और कंचनजंगा के शानदार दृश्यों के लिए दुनियाभर में मशहूर है। गर्मियों में यहां का तापमान 12 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है, जो काफी आरामदायक महसूस होता है। Tiger Hill, Batasia Loop और Darjeeling Himalayan Railway यानी टॉय ट्रेन यहां के सबसे बड़े आकर्षण हैं।

    हालांकि दार्जिलिंग की यात्रा मनाली के मुकाबले थोड़ी महंगी पड़ सकती है। यहां पहुंचने के लिए पहले न्यू जलपाईगुड़ी जाना पड़ता है और फिर टैक्सी से पहाड़ों तक सफर करना होता है। 3-4 दिन की ट्रिप में लगभग 8 हजार से 15 हजार रुपये तक का खर्च आ सकता है।

    आखिर कौन-सी जगह है बेस्ट
    अगर आप कम बजट में एडवेंचर, बर्फ और रोमांच का मजा लेना चाहते हैं, तो Manali आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। वहीं अगर आप शांत माहौल, प्राकृतिक सुंदरता और रिलैक्सिंग ट्रिप चाहते हैं, तो Darjeeling का अनुभव आपको जरूर पसंद आएगा।

    दोनों ही जगहें अपने-अपने अंदाज में बेहद खास हैं। अब यह आपकी पसंद पर निर्भर करता है कि आप रोमांच से भरी छुट्टियां बिताना चाहते हैं या बादलों और चाय बागानों के बीच सुकून तलाशना चाहते हैं।

  • मां गंगा के अवतरण दिवस पर उमड़ेगी आस्था: गंगा दशहरा 25 मई को, स्नान-दान का मिलेगा फल..

    मां गंगा के अवतरण दिवस पर उमड़ेगी आस्था: गंगा दशहरा 25 मई को, स्नान-दान का मिलेगा फल..

    नई दिल्ली ।  देशभर में आस्था का माहौल उस समय विशेष रूप से गहराने लगता है जब गंगा दशहरा जैसे पवित्र पर्व की तिथि नजदीक आती है। वर्ष 2026 में यह महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर 25 मई को मनाया जाएगा। इस दिन को केवल एक पर्व के रूप में नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शुद्धि और आत्मिक उन्नति के अवसर के रूप में देखा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, जिससे यह तिथि हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है।

    इस दिन की शुरुआत श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, जब वे ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मा और मन को शुद्ध करने की प्रक्रिया मानी जाती है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन किया गया स्नान व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता को दूर करता है और उसे पुण्य की ओर अग्रसर करता है।

    पंचांग के अनुसार इस वर्ष गंगा दशहरा की दशमी तिथि 25 मई की सुबह से प्रारंभ होकर अगले दिन तक प्रभाव में रहेगी, लेकिन उदयातिथि के अनुसार पर्व 25 मई को ही मनाया जाएगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त और अभिजीत मुहूर्त को स्नान, पूजा और दान के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। श्रद्धालु इन समयों में धार्मिक क्रियाओं को विशेष महत्व देते हैं ताकि अधिकतम आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया जा सके।

    गंगा दशहरा का एक महत्वपूर्ण पहलू दान की परंपरा भी है। इस दिन अन्न, वस्त्र, धन और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। परंपरा के अनुसार जरूरतमंदों को सहायता देना और ब्राह्मणों को सम्मानपूर्वक दान देना विशेष फलदायी होता है। साथ ही पशु-पक्षियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था करना भी इस दिन की धार्मिक भावना का हिस्सा माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां गंगा केवल एक नदी नहीं बल्कि जीवनदायिनी शक्ति का प्रतीक हैं। पौराणिक कथा के अनुसार राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए कठोर तप किया था, जिसके परिणामस्वरूप गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुईं। इस कथा के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि दृढ़ संकल्प और आस्था के बल पर असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

    आज के समय में गंगा दशहरा का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और जल शुद्धता का भी संदेश देता है। यह पर्व हमें यह याद दिलाता है कि जल स्रोतों की रक्षा करना और प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।

    कुल मिलाकर गंगा दशहरा 2026 श्रद्धा, शुद्धता और सामाजिक सहयोग का प्रतीक पर्व है, जो लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ने के साथ-साथ सेवा और दान की भावना को भी मजबूत करता है। 25 मई का यह दिन उन सभी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखेगा जो गंगा स्नान और पूजा के माध्यम से अपने जीवन में शांति, समृद्धि और सकारात्मकता की कामना करते हैं।