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  • साउथ सिनेमा में बढ़ा उत्साह, दशकों बाद साथ दिखेंगे रजनीकांत-कमल हासन, तृषा भी बन सकती हैं हिस्सा

    साउथ सिनेमा में बढ़ा उत्साह, दशकों बाद साथ दिखेंगे रजनीकांत-कमल हासन, तृषा भी बन सकती हैं हिस्सा


    नई दिल्ली । तमिल सिनेमा में इन दिनों एक ऐसी फिल्म को लेकर जबरदस्त चर्चा हो रही है, जिसने फैंस की उत्सुकता को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। वजह सिर्फ एक बड़ी स्टारकास्ट नहीं, बल्कि दो दिग्गज सुपरस्टार्स का लंबे समय बाद एक साथ आना है। अब इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आई है, जिसने फिल्म को लेकर उत्साह को और बढ़ा दिया है। चर्चा है कि लोकप्रिय अभिनेत्री तृषा कृष्णन भी इस मेगा प्रोजेक्ट का हिस्सा बन सकती हैं।

    फिल्म को लेकर पहले ही दर्शकों के बीच जबरदस्त माहौल बना हुआ है, क्योंकि इसमें रजनीकांत और कमल हासन जैसे दिग्गज कलाकार एक साथ नजर आने वाले हैं। दोनों सितारों ने अपने करियर में अलग-अलग कई ऐतिहासिक फिल्में दी हैं, लेकिन लंबे समय बाद एक ही स्क्रीन पर उनकी वापसी को लेकर फैंस बेहद उत्साहित हैं। अब अगर तृषा कृष्णन भी इस फिल्म से जुड़ती हैं, तो यह प्रोजेक्ट और भी भव्य बन सकता है।

    इंडस्ट्री में यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि फिल्म के लिए अभिनेत्री से बातचीत जारी है। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी तरह की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि निर्माता इस फिल्म को तमिल सिनेमा की सबसे बड़ी मल्टीस्टारर फिल्मों में शामिल करने की तैयारी में हैं।

    फिल्म के निर्देशक इस प्रोजेक्ट को बेहद बड़े स्तर पर तैयार करने में जुटे हुए हैं। कहानी, लोकेशन, तकनीकी टीम और कलाकारों के चयन पर तेजी से काम चल रहा है। बताया जा रहा है कि फिल्म का विजुअल स्केल और प्रस्तुति दर्शकों को एक बिल्कुल अलग सिनेमाई अनुभव देने वाली है।

    इस फिल्म को लेकर सोशल मीडिया और फिल्म जगत में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की भी है कि आखिर मुख्य भूमिका किस सुपरस्टार की होगी। दोनों दिग्गज कलाकारों की लोकप्रियता इतनी बड़ी है कि फैंस लगातार इस बात को लेकर अपनी राय दे रहे हैं। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि फिल्म की असली ताकत इसकी स्टारकास्ट नहीं, बल्कि इन कलाकारों का एक साथ आना है, जो इसे खास बना रहा है।

    तृषा कृष्णन का नाम सामने आने के बाद फिल्म के प्रति दर्शकों की दिलचस्पी और बढ़ गई है। अभिनेत्री पहले भी कई बड़े सितारों के साथ सफल फिल्में दे चुकी हैं और उनकी मौजूदगी इस प्रोजेक्ट में एक नया आकर्षण जोड़ सकती है। फैंस अब आधिकारिक घोषणा का इंतजार कर रहे हैं, ताकि यह साफ हो सके कि वह इस फिल्म का हिस्सा बनेंगी या नहीं।

    फिल्म की शूटिंग को लेकर भी तैयारियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इसकी शूटिंग शुरू हो सकती है और इसके लिए बड़े स्तर पर सेट तथा तकनीकी व्यवस्थाएं तैयार की जा रही हैं।

  • शेयर बाजार में तबाही का तूफान, दो दिन में निवेशकों के ₹15 लाख करोड़ साफ, सेंसेक्स 1500 अंक टूटा

    शेयर बाजार में तबाही का तूफान, दो दिन में निवेशकों के ₹15 लाख करोड़ साफ, सेंसेक्स 1500 अंक टूटा

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिसने निवेशकों की चिंता को काफी बढ़ा दिया है। बाजार में बिकवाली का दबाव इतना तेज रहा कि दो कारोबारी सत्रों में निवेशकों की करीब ₹15 लाख करोड़ की संपत्ति साफ हो गई। सेंसेक्स में 1500 अंकों तक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी महत्वपूर्ण स्तरों के नीचे फिसल गया।

    बाजार में यह गिरावट केवल घरेलू कारणों तक सीमित नहीं रही, बल्कि वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान विवाद ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डर का माहौल पैदा कर दिया, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।

    विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति आर्थिक दबाव बढ़ाने वाली मानी जाती है, क्योंकि इससे महंगाई, आयात बिल और चालू खाते के घाटे पर असर पड़ सकता है।

    इसके साथ ही भारतीय रुपये में भी बड़ी कमजोरी देखने को मिली। डॉलर के मुकाबले रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया, जिससे विदेशी निवेशकों की चिंता और बढ़ गई। रुपये की कमजोरी का असर विदेशी फंड्स के रिटर्न पर पड़ता है, जिसके कारण वे बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनाया। बड़े वैश्विक फंड जोखिम कम करने के लिए लगातार भारतीय इक्विटी से दूरी बना रहे हैं। इसका असर खासतौर पर बड़े शेयरों और बैंकिंग सेक्टर में देखने को मिला, जहां भारी बिकवाली दर्ज की गई।

    बाजार में गिरावट को और तेज करने में डेरिवेटिव एक्सपायरी का भी बड़ा योगदान रहा। कमजोर सेंटीमेंट के बीच ट्रेडर्स ने अपनी पोजीशन घटानी शुरू कर दी, जिससे अचानक वॉलेटिलिटी बढ़ गई और बाजार में गिरावट और गहरी हो गई।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो आईटी, रियल एस्टेट और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखी गई। निवेशकों को डर है कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती का असर टेक्नोलॉजी कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है। हालांकि कमोडिटी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में कुछ मजबूती जरूर देखने को मिली, क्योंकि ऊंचे कच्चे तेल की कीमतों का इन कंपनियों को लाभ मिल सकता है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार दबाव वाले दौर में है और निवेशकों को सावधानी के साथ कदम उठाने की जरूरत है। उनका कहना है कि ऐसे समय में घबराहट में फैसले लेने से बचना चाहिए और मजबूत कंपनियों पर लंबी अवधि के नजरिए से ध्यान देना चाहिए।

    फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर बनी हुई है। आने वाले कारोबारी सत्रों में यही तय करेगा कि बाजार में स्थिरता लौटेगी या गिरावट का दबाव और बढ़ेगा।

  • रूस-पाकिस्तान की बढ़ती दोस्ती से बढ़ी भारत की चिंता! सस्ते तेल से लेकर सैन्य सहयोग तक गहराते रिश्ते

    रूस-पाकिस्तान की बढ़ती दोस्ती से बढ़ी भारत की चिंता! सस्ते तेल से लेकर सैन्य सहयोग तक गहराते रिश्ते




    नई दिल्ली। पाकिस्तान और रूस के बीच तेजी से बढ़ती नजदीकियों ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। ऊर्जा संकट, तेल व्यापार और सैन्य सहयोग को लेकर दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं। रूस में पाकिस्तान के राजदूत Faisal Niaz Tirmizi ने संकेत दिए हैं कि पाकिस्तान एक बार फिर रूस से बड़े पैमाने पर तेल आयात बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इस बयान के बाद क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

    रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और वैश्विक ऊर्जा अस्थिरता के बीच रूसी तेल आयात बढ़ाने की योजना पर काम शुरू किया है। पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट, विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और बढ़ती महंगाई से जूझ रहा है। ऐसे में सस्ता रूसी तेल इस्लामाबाद के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

    दरअसल, पाकिस्तान ने पहली बार रूस से सस्ते तेल खरीदने की पहल तत्कालीन प्रधानमंत्री Imran Khan के कार्यकाल में की थी। इमरान खान की मॉस्को यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर बातचीत तेज हुई थी। इसके बाद अप्रैल 2023 में पाकिस्तान ने रूस को रियायती दरों पर कच्चे तेल का पहला आधिकारिक ऑर्डर दिया। जून 2023 में रूसी कच्चे तेल की पहली खेप कराची बंदरगाह पहुंची थी, जिसमें करीब 45 हजार मीट्रिक टन यूराल क्रूड शामिल था। खास बात यह रही कि पाकिस्तान ने इस तेल का भुगतान अमेरिकी डॉलर की बजाय चीनी युआन में किया था।

    हालांकि बाद में पाकिस्तान ने रूसी तेल आयात धीमा कर दिया था। इसकी बड़ी वजह रूसी क्रूड का भारी होना और खाड़ी देशों की तुलना में ट्रांसपोर्ट लागत ज्यादा होना बताया गया। लेकिन अब वैश्विक ऊर्जा संकट और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान फिर से रूस की ओर झुकता दिखाई दे रहा है।

    सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि रक्षा और सैन्य सहयोग में भी रूस और पाकिस्तान के संबंध मजबूत हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच नियमित सैन्य अभ्यास और सुरक्षा सहयोग पहले से जारी हैं। यही कारण है कि रूस-पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियों को भारत के लिए रणनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि रूस पारंपरिक रूप से भारत का करीबी सहयोगी रहा है, लेकिन बदलती वैश्विक राजनीति में मॉस्को अब दक्षिण एशिया में अपने विकल्प भी मजबूत करना चाहता है। वहीं पाकिस्तान अपनी कमजोर अर्थव्यवस्था और ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए रूस के साथ रिश्ते गहरे करने में जुटा है।

    हालांकि भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी अब भी बेहद मजबूत मानी जाती है, लेकिन पाकिस्तान और रूस के बढ़ते संपर्कों ने क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा जरूर तेज कर दी है।

  • ट्रंप का बड़ा यू-टर्न! जिस अधिकारी को हटाया था, उसी को फिर सौंपी अमेरिका की आपदा सुरक्षा की कमान

    ट्रंप का बड़ा यू-टर्न! जिस अधिकारी को हटाया था, उसी को फिर सौंपी अमेरिका की आपदा सुरक्षा की कमान



    नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रम्प  ने एक बार फिर बड़ा राजनीतिक दांव चलते हुए पूर्व नेवी सील अधिकारी कैमरन हैमिल्टन को संघीय आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी यानी फ़ेमा की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है। खास बात यह है कि यही कैमरन हैमिल्टन एक साल पहले एजेंसी के अस्थायी प्रमुख पद से हटा दिए गए थे। अब उनकी वापसी ने अमेरिकी राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

    व्हाइट हाउस की ओर से सोमवार को हैमिल्टन के नामांकन की घोषणा की गई। अगर अमेरिकी सीनेट उनकी नियुक्ति को मंजूरी देती है, तो वे आपातकालीन प्रबंधन और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया मामलों में ट्रंप प्रशासन के सबसे अहम सलाहकारों में शामिल होंगे। उन्हें होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के साथ मिलकर अमेरिका की आपदा प्रबंधन रणनीति को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

    कैमरन हैमिल्टन पूर्व नेवी सील अधिकारी रह चुके हैं और सुरक्षा मामलों में उनका लंबा अनुभव माना जाता है। हालांकि पिछले साल उन्हें फ़ेमा के कार्यवाहक प्रमुख पद से हटा दिया गया था। उस समय उन्होंने एजेंसी के अस्तित्व और उसकी जरूरत का खुलकर समर्थन किया था, जबकि ट्रंप प्रशासन लगातार फ़ेमा को कमजोर करने या खत्म करने जैसे संकेत दे रहा था। यही वजह थी कि उनके हटाए जाने को लेकर उस समय काफी विवाद भी हुआ था।

    अब उनकी वापसी ऐसे वक्त में हो रही है जब अमेरिका में प्राकृतिक आपदाओं, तूफानों और आपात स्थितियों से निपटने को लेकर संघीय एजेंसियों की भूमिका पर बहस तेज है। ट्रंप पहले भी फ़ेमा की कार्यप्रणाली की आलोचना कर चुके हैं और कई मौकों पर यह संकेत दे चुके हैं कि राज्यों को आपदा प्रबंधन में ज्यादा जिम्मेदारी उठानी चाहिए।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हैमिल्टन की दोबारा नियुक्ति ट्रंप प्रशासन की नई रणनीति का हिस्सा हो सकती है। एक तरफ ट्रंप फ़ेमा में बड़े बदलाव की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने ऐसे व्यक्ति को चुना है जो एजेंसी की कार्यप्रणाली को अंदर से समझता है और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में मजबूत अनुभव रखता है।

    अमेरिका में अब सबकी नजर सीनेट की मंजूरी पर टिकी है। अगर नामांकन को हरी झंडी मिलती है तो कैमरन हैमिल्टन की वापसी अमेरिकी आपदा प्रबंधन व्यवस्था में बड़े बदलावों का संकेत मानी जा सकती है।

  • पंजाब से अमेरिका पहुंचे परिवार के बेटे ने रचा इतिहास, 176 छात्रों का पूरा एजुकेशन लोन चुकाकर बने मिसाल

    पंजाब से अमेरिका पहुंचे परिवार के बेटे ने रचा इतिहास, 176 छात्रों का पूरा एजुकेशन लोन चुकाकर बने मिसाल



    नई दिल्ली। अमेरिका में भारतीय मूल के समाजसेवी अनिल कोचर इन दिनों चर्चा में हैं। उन्होंने नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी के विल्सन कॉलेज ऑफ टेक्सटाइल्स के 176 छात्रों का अंतिम वर्ष का पूरा एजुकेशन लोन चुकाने की घोषणा कर सबको चौंका दिया। यह ऐलान ग्रेजुएशन समारोह के दौरान किया गया, जहां छात्र अपने भविष्य को लेकर उत्साहित थे, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा आर्थिक बोझ उसी मंच से खत्म होने वाला है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, यह घोषणा यूनिवर्सिटी के रेनॉल्ड्स कोलिजियम में आयोजित दीक्षांत समारोह के दौरान हुई। समारोह में मुख्य वक्ता के तौर पर पहुंचे अनिल कोचर ने कहा कि यह फैसला उनके दिवंगत पिता प्रकाश चंद कोचर को सम्मान देने के लिए लिया गया है। उनके पिता कई दशक पहले पंजाब से अमेरिका आए थे और कठिन संघर्ष के बाद परिवार को नई पहचान दिलाई थी।

    अनिल कोचर ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा किसी भी युवा के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत होती है, लेकिन बढ़ते एजुकेशन लोन कई छात्रों के सपनों पर भारी पड़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि छात्र अपने करियर की शुरुआत कर्ज के दबाव से नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आजादी के साथ करें।

    समारोह में मौजूद छात्रों और उनके परिवारों के लिए यह पल बेहद भावुक बन गया। कई छात्र खुशी से रो पड़े, क्योंकि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी पढ़ाई का बड़ा कर्ज अचानक खत्म हो जाएगा। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भी इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए अनिल कोचर की जमकर सराहना की।

    बताया जा रहा है कि अनिल कोचर लंबे समय से शिक्षा और समाजसेवा से जुड़े कार्यों में सक्रिय हैं। वे मानते हैं कि समाज को वापस लौटाना हर सफल व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उनकी यह पहल अब अमेरिका ही नहीं, बल्कि भारतीय समुदाय में भी प्रेरणा की मिसाल बन गई है।

  • विकास की रफ्तार का मंत्र: MSME सेक्टर को मजबूत ट्रेड स्किल से जोड़ने की जरूरत..

    विकास की रफ्तार का मंत्र: MSME सेक्टर को मजबूत ट्रेड स्किल से जोड़ने की जरूरत..

    नई दिल्ली । भारत की आर्थिक दिशा और भविष्य की विकास रणनीति को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश सामने आया है, जिसमें देश के सूक्ष्म उद्यमों को विकास की रीढ़ बताया गया है। मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि भारत की दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि सूक्ष्म और लघु उद्यमों को किस हद तक सक्षम, प्रशिक्षित और प्रतिस्पर्धी बनाया जाता है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में केवल बड़े उद्योग ही नहीं, बल्कि छोटे स्तर के उद्यम भी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। दुनिया भर में कई छोटे उद्यम तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और भारत को भी इसी दिशा में अपने सूक्ष्म उद्यमों को तैयार करना होगा।

    उनके अनुसार, देश की अर्थव्यवस्था की असली ताकत जमीनी स्तर पर काम करने वाले छोटे उद्यमों में छिपी है। ये उद्यम न केवल रोजगार पैदा करते हैं, बल्कि उत्पादन और सेवा क्षेत्र को भी मजबूत आधार देते हैं। यदि इन्हें सही प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग मिले, तो ये देश की विकास दर को नई ऊंचाई तक ले जा सकते हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि केवल उद्यमियों को ही नहीं, बल्कि उनके कर्मचारियों को भी लगातार अपने कौशल में सुधार करना चाहिए। चाहे वह अकाउंटिंग हो, मानव संसाधन प्रबंधन हो या इन्वेंट्री से जुड़ा काम, हर क्षेत्र में दक्षता बढ़ाने की जरूरत है। इससे न केवल कार्यक्षमता में सुधार होगा बल्कि व्यवसायों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।

    इस विचार को उद्योग जगत के अन्य विशेषज्ञों ने भी महत्वपूर्ण बताया है। उनका मानना है कि भारत की आर्थिक संरचना में सूक्ष्म और लघु उद्यम एक मजबूत आधार की तरह हैं, जो न केवल ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था को जोड़ते हैं बल्कि सामाजिक स्थिरता में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था केवल उत्पादन पर नहीं बल्कि कौशल, नवाचार और तकनीक के सही उपयोग पर निर्भर करेगी। यदि छोटे उद्यमों को सही दिशा दी जाए, तो वे बड़े उद्योगों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो सकते हैं और देश की आर्थिक मजबूती को बढ़ा सकते हैं।

    सरकार की ओर से भी हाल के समय में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जिनमें वित्तीय सहायता और ऋण गारंटी जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसका उद्देश्य छोटे उद्यमों को आर्थिक जोखिम से सुरक्षित रखते हुए उन्हें विस्तार का अवसर देना है।

    कुल मिलाकर यह स्पष्ट है कि भारत की विकास यात्रा में सूक्ष्म उद्यमों की भूमिका आने वाले वर्षों में और भी महत्वपूर्ण होने वाली है। यदि इन उद्यमों को सही प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और वित्तीय समर्थन मिलता है, तो यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत और स्थायी विकास की दिशा में ले जा सकता है।

  • आईआरसीटीसी में 49 पदों पर भर्ती का बड़ा अवसर, हॉस्पिटैलिटी मॉनिटर के लिए वॉक-इन इंटरव्यू घोषित

    आईआरसीटीसी में 49 पदों पर भर्ती का बड़ा अवसर, हॉस्पिटैलिटी मॉनिटर के लिए वॉक-इन इंटरव्यू घोषित


    नई दिल्ली । सरकारी क्षेत्र में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। भारतीय रेलवे से जुड़ी संस्था Indian Railway Catering and Tourism Corporation ने हॉस्पिटैलिटी मॉनिटर के पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। यह भर्ती पूर्वी क्षेत्र के अंतर्गत की जा रही है, जिसमें कुल 49 रिक्त पद शामिल हैं।

    इस भर्ती की खास बात यह है कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह वॉक-इन इंटरव्यू के माध्यम से की जाएगी। यानी उम्मीदवारों को किसी लिखित परीक्षा से नहीं गुजरना होगा। चयन के लिए अभ्यर्थियों का इंटरव्यू, दस्तावेज़ सत्यापन और मेडिकल फिटनेस के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा।

    चयनित उम्मीदवारों को हर महीने ₹30,000 का निर्धारित वेतन दिया जाएगा। इसके अलावा उन्हें नियमानुसार अन्य भत्तों और सुविधाओं का लाभ भी मिलेगा। यह अवसर विशेष रूप से उन युवाओं के लिए उपयोगी माना जा रहा है, जो होटल मैनेजमेंट और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं।

    इस पद के लिए शैक्षणिक योग्यता भी स्पष्ट रूप से तय की गई है। उम्मीदवारों के पास होटल मैनेजमेंट, हॉस्पिटैलिटी या संबंधित क्षेत्र में मान्यता प्राप्त संस्थान से डिग्री होना आवश्यक है। इसमें बीएससी इन होटल एडमिनिस्ट्रेशन, होटल मैनेजमेंट, फूड प्रोडक्शन, या पर्यटन एवं आतिथ्य प्रबंधन से संबंधित डिग्री शामिल है। इसके अलावा कुछ समकक्ष प्रबंधन कोर्स करने वाले उम्मीदवार भी आवेदन के पात्र हैं।

    आयु सीमा के अनुसार उम्मीदवार की अधिकतम आयु 27 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना एक निश्चित तिथि के आधार पर की जाएगी। हालांकि, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी।

    वॉक-इन इंटरव्यू का आयोजन कोलकाता में किया जाएगा, जहां निर्धारित तिथियों पर उम्मीदवारों को स्वयं उपस्थित होना होगा। यह इंटरव्यू तीन अलग-अलग दिनों में आयोजित किया जाएगा ताकि सभी अभ्यर्थियों को पर्याप्त अवसर मिल सके। इंटरव्यू का समय सुबह 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक निर्धारित किया गया है।

    उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे इंटरव्यू के दिन सभी आवश्यक दस्तावेज साथ लेकर आएं। इनमें आवेदन पत्र की प्रिंट कॉपी, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, पहचान पत्र, अनुभव प्रमाण पत्र (यदि हो) और हाल की पासपोर्ट साइज फोटो शामिल हैं। दस्तावेजों के बिना उम्मीदवारों को प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा।

    आवेदन प्रक्रिया भी सरल रखी गई है। उम्मीदवारों को आधिकारिक अधिसूचना से आवेदन पत्र डाउनलोड करना होगा, उसे सावधानीपूर्वक भरना होगा और इंटरव्यू के समय अपने साथ लेकर जाना होगा। किसी भी प्रकार की गलत जानकारी या अधूरे दस्तावेज चयन प्रक्रिया में बाधा बन सकते हैं।

    यह भर्ती उन युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है, जो रेलवे से जुड़े प्रतिष्ठित संगठन में काम करने का सपना देखते हैं। हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में अनुभव प्राप्त करने के साथ-साथ यह नौकरी करियर में आगे बढ़ने का एक मजबूत आधार भी प्रदान कर सकती है।

  • यूपी में बड़ा खुलासा: सोशल मीडिया और विदेशी नेटवर्क के जरिए युवाओं के ब्रेनवॉश का खतरनाक मॉडल सामने आया

    यूपी में बड़ा खुलासा: सोशल मीडिया और विदेशी नेटवर्क के जरिए युवाओं के ब्रेनवॉश का खतरनाक मॉडल सामने आया



    नई दिल्ली। यूपी में पिछले कुछ वर्षों में एटीएस और पुलिस की जांचों के दौरान एक ऐसा गंभीर और जटिल पैटर्न सामने आया है, जिसमें सोशल मीडिया, हनीट्रैप, आर्थिक लालच और विदेशी फंडिंग के जरिए युवाओं को पहले प्रभावित किया गया और फिर कथित रूप से उन्हें अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा नेटवर्क एक संगठित तरीके से काम करता है, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके ब्रेनवॉश और संपर्क स्थापित किए जाते हैं।

    रिपोर्ट्स और जांचों के मुताबिक कुछ मामलों में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क में ऐसे युवाओं को शामिल किया गया जिनकी पहचान बदलकर या फर्जी नामों के जरिए उन्हें आगे इस्तेमाल किया गया। एटीएस की कार्रवाई में कुछ ऐसे मॉड्यूल पकड़े गए हैं जिनमें धर्मांतरण से जुड़े मामलों के साथ-साथ संदिग्ध विदेशी संपर्क और फंडिंग के संकेत मिले हैं।

    वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश में एक बड़ा मामला सामने आया था, जिसमें उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहांगीर आलम कासमी की गिरफ्तारी हुई थी। आरोप था कि ये लोग विदेशी फंडिंग के जरिए ट्रस्ट और संस्थानों के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को विभिन्न प्रलोभन देकर कथित रूप से धर्मांतरण गतिविधियों में शामिल कर रहे थे। इसी तरह मौलाना कलीम सिद्दीकी का नाम भी एक अलग मामले में सामने आया था, जिसमें जांच एजेंसियों ने अवैध नेटवर्क से जुड़े आरोप लगाए थे।

    हाल के वर्षों में बलरामपुर और आगरा जैसे जिलों में भी इसी तरह के अलग-अलग मामले सामने आए हैं, जहां सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए संपर्क बनाकर लोगों को प्रभावित करने और कट्टरपंथी सामग्री तक पहुंचाने की बात जांच में सामने आई है। कुछ मामलों में विदेश से फंडिंग और संपर्क के संकेत भी जांच एजेंसियों द्वारा बताए गए हैं, हालांकि हर केस की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।

    जांच एजेंसियों के अनुसार ऐसे नेटवर्क आमतौर पर तीन चरणों में काम करते हैं—पहला भावनात्मक या डिजिटल संपर्क, दूसरा आर्थिक या सामाजिक प्रलोभन, और तीसरा विचारधारा आधारित प्रभाव। इसके लिए टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और अन्य मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।

    एटीएस का कहना है कि यह एक गंभीर सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है, जिसकी जांच लगातार जारी है और कई मामलों में गिरफ्तारियां और पूछताछ की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, हर मामले में निष्कर्ष अदालत और विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

  • सालभर की मेहनत पर संकट, पेपर लीक विवाद ने नीट परीक्षा को घेरा, लाखों छात्रों में निराशा और आक्रोश

    सालभर की मेहनत पर संकट, पेपर लीक विवाद ने नीट परीक्षा को घेरा, लाखों छात्रों में निराशा और आक्रोश


    नई दिल्ली। एक सपना, जिसे सालभर मेहनत और उम्मीदों के साथ बुना गया था, अचानक अनिश्चितता की परछाई में बदल गया। देशभर के लाखों छात्र जो एक ही लक्ष्य के लिए दिन-रात तैयारी कर रहे थे, उनके लिए परीक्षा का यह दौर जीवन का सबसे अहम पड़ाव माना जाता है। लेकिन इस बार कहानी कुछ अलग दिशा में चली गई, जहां मेहनत के साथ उम्मीदों पर भी सवाल खड़े हो गए।

    परीक्षा के बाद सामने आई गड़बड़ियों और अनियमितताओं ने पूरे माहौल को बदल दिया। जैसे-जैसे जानकारी सामने आती गई, यह साफ होने लगा कि मामला केवल कुछ गलतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी गहराई कहीं अधिक है। इसी वजह से परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया, जिसने छात्रों के बीच निराशा की लहर पैदा कर दी।

    लाखों छात्रों के लिए यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं थी, बल्कि उनके भविष्य की दिशा तय करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कदम था। कई महीनों, बल्कि कई सालों की मेहनत इस एक परीक्षा से जुड़ी होती है। ऐसे में अचानक लिया गया यह निर्णय उनके लिए भावनात्मक और मानसिक दोनों स्तर पर बड़ा झटका बन गया।

    छात्रों का गुस्सा अब केवल परीक्षा रद्द होने तक सीमित नहीं है। वे यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी, जहां इतनी महत्वपूर्ण परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठे। उनके अनुसार, जब मेहनत करने वाले उम्मीदवारों के साथ ही अन्याय हो रहा हो, तो पूरी व्यवस्था की समीक्षा जरूरी हो जाती है।

    इस पूरे मामले ने शिक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों का मानना है कि परीक्षा प्रक्रिया में अगर समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं। यही कारण है कि अब वे मजबूत निगरानी व्यवस्था और सख्त नियमों की मांग कर रहे हैं।

    अभिभावकों के लिए भी यह स्थिति चिंता का कारण बनी हुई है। वे अपने बच्चों की मेहनत और मानसिक स्थिति को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि एक परीक्षा की अनिश्चितता पूरे करियर की दिशा को प्रभावित कर सकती है।

    अब यह मामला केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक बड़े सुधार की मांग में बदल चुका है। छात्रों की आवाज लगातार यह संकेत दे रही है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी सुरक्षा को और मजबूत करने की जरूरत है।

  • केरल की CM कुर्सी पर सस्पेंस बरकरार, वेणुगोपाल बन सकते हैं कांग्रेस का सबसे बड़ा दांव

    केरल की CM कुर्सी पर सस्पेंस बरकरार, वेणुगोपाल बन सकते हैं कांग्रेस का सबसे बड़ा दांव


    नई दिल्ली ।
    केरल की राजनीति इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहां चुनावी जीत के बाद भी मुख्यमंत्री पद को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। कांग्रेस के भीतर लंबे समय से जारी विचार-विमर्श और गुटीय संतुलन की कोशिशों के बावजूद अभी तक किसी एक नाम पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी है।

    राज्य में पार्टी की जीत के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि नेतृत्व का फैसला जल्दी हो जाएगा, लेकिन जमीनी स्तर से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक अलग-अलग राय सामने आने के कारण प्रक्रिया जटिल होती चली गई। इसी बीच सबसे ज्यादा चर्चा K. C. Venugopal के नाम को लेकर है, जिन्हें पार्टी के भीतर एक मजबूत संगठनात्मक चेहरा माना जाता है।

    वेणुगोपाल को लेकर यह चर्चा तेज है कि यदि उन्हें मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी जाती है, तो इससे पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जा रहा है जो विभिन्न गुटों के बीच संतुलन स्थापित करने की क्षमता रखते हैं और संगठन को एकजुट रख सकते हैं।

    कांग्रेस के अंदर यह भी माना जा रहा है कि केरल में नेतृत्व का फैसला केवल राज्य स्तर की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय रणनीति पर भी पड़ेगा। ऐसे में पार्टी ऐसे चेहरे की तलाश में है जो स्थानीय राजनीति और केंद्रीय नेतृत्व दोनों के बीच मजबूत कड़ी बन सके।

    केरल कांग्रेस लंबे समय से आंतरिक मतभेदों और नेतृत्व को लेकर खींचतान का सामना करती रही है। विभिन्न वरिष्ठ नेताओं के अपने-अपने समर्थक खेमे हैं, जो इस निर्णय प्रक्रिया को और जटिल बना रहे हैं। ऐसे माहौल में पार्टी के लिए किसी एक नाम पर सहमति बनाना आसान नहीं रहा है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि वेणुगोपाल को यह जिम्मेदारी दी जाती है, तो यह पार्टी के लिए एक रणनीतिक कदम साबित हो सकता है। इससे न केवल संगठनात्मक स्थिरता बढ़ेगी, बल्कि दिल्ली और राज्य नेतृत्व के बीच तालमेल भी मजबूत होगा।

    इसके साथ ही यह भी चर्चा है कि इस फैसले का असर सहयोगी दलों और राज्य की सामाजिक संरचना पर भी पड़ेगा। केरल की राजनीति में समुदाय आधारित संतुलन का हमेशा महत्वपूर्ण स्थान रहा है, और किसी भी निर्णय में इसका ध्यान रखना जरूरी माना जाता है।

    हालांकि, इस संभावित फैसले के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। अन्य दावेदारों और उनके समर्थकों की नाराजगी पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। लंबे समय से मुख्यमंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे नेता इस फैसले को आसानी से स्वीकार करेंगे या नहीं, यह एक बड़ा सवाल है।

    फिलहाल पार्टी नेतृत्व लगातार विचार-विमर्श में जुटा हुआ है और अंतिम निर्णय आने वाले समय में सामने आ सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या K. C. Venugopal वास्तव में केरल की कमान संभालेंगे या पार्टी किसी अन्य संतुलित विकल्प की ओर जाएगी।