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  • अमेरिका ने बताई भारत को रूस से तेल खरीदने की छूट देने की वजह, कही ये बात

    अमेरिका ने बताई भारत को रूस से तेल खरीदने की छूट देने की वजह, कही ये बात


    नई दिल्ली।
    भारत (India) से समुद्री मार्ग में पहले से मौजूद रूसी कच्चे तेल (Russian Crude Oil) को खरीदकर उसे भारतीय रिफाइनरियों (Indian Refineries) की ओर मोड़ने का अनुरोध करने के बाद अब अमेरिका (America) की तरफ से भारत को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। अमेरिका ने बताया है कि आखिर उन्होंने भारत को यह रूसी तेल खरीदने की यह तथाकथित ‘छूट’ क्यों दी है। बुधवार को वाइट हाउस (White House) ने एक बयान में कहा है कि भारत को इसकी ‘इजाजत’ इसीलिए दी गई क्योंकि भारत के लोग अच्छे हैं। इस दौरान यह भी दावा किया गया कि भारत ने पूर्व में रूसी तेल ना खरीदने की उनकी शर्तों को माना है, इसीलिए अमेरिका ने भारत को यह विशेष ‘छूट’ दी।

    वाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि यह फैसला इसलिए किया गया क्योंकि भारत में हमारे साथी अच्छे लोग रहे हैं। लेविट ने कहा, “हम इस फैसले पर इसलिए पहुंचे क्योंकि भारत में हमारे साथी अच्छे साथी रहे हैं और उन्होंने पहले ही रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया था, जिस पर रोक लगी है। इसलिए, जब हम ईरानियों की वजह से दुनिया में तेल सप्लाई में इस अस्थायी कमी को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं, तो हमने भारत को रूसी तेल लेने की इजाजत दी है।”


    अमेरिका ने की थी घोषणा

    उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका ने इस फैसले को इसलिए मंजूरी दी क्योंकि भारत आने वाला यह रूसी तेल पहले से ही समुद्र मार्ग में था और रूस को इससे कोई खास वित्तीय फायदा नहीं होगा।” बता दें कि इससे पहले अमरीका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने पिछले सप्ताह घोषणा की थी पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति आसान बनाने के मकसद से भारत को उन पोत पर लदे रूसी तेल की खरीद की ‘अनुमति” दी गई है, जो पहले से समुद्री मार्गों पर हैं। इस फैसले को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और US ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने मंजूरी दी है।


    क्या बोले थे अमेरिकी वित्त मंत्री

    स्कॉट बेसेंट ने एक इंटरव्यू में भारत को अमेरिका का अच्छा साझेदार बताया था। उन्होंने कहा था, ”दुनिया में तेल की पर्याप्त आपूर्ति है। वित्त मंत्रालय ने भारत में हमारे सहयोगियों को उस रूसी तेल की खरीद शुरू करने की कल सहमति दे दी जो पहले से समुद्र में है। भारतीयों ने बहुत अच्छा सहयोग दिया है। हमने उनसे कहा था कि वे प्रतिबंधित रूसी तेल की खरीद बंद कर दें। उन्होंने ऐसा किया। वे इसकी जगह अमेरिकी तेल लेने वाले थे लेकिन दुनिया भर में तेल की अस्थायी कमी को दूर करने के लिए हमने उन्हें रूसी तेल स्वीकार करने की अनुमति दे दी है। हम रूसी तेल के अन्य प्रकारों से भी प्रतिबंध हटा सकते हैं।”


    अमेरिका ने लगाया था जुर्माना

    इससे पहले अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल खरीद कर यूक्रेन युद्ध की फंडिंग करने का आरोप लगाते हुए कई महीनों तक मोटा जुर्माना वसूला था। अमेरिका ने भारत पर पहले 25 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ के अलावा 25 फीसदी जुर्माना लगा दिया था, जिसके बाद अमेरिका भारत से आयातित उत्पादों पर 50 फीसदी टैरिफ वसूल रहा था। हालांकि अमेरिका के साथ हुई हालिया ट्रेड डील और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के टैरिफ को असंवैधानिक करार दिए जाने के बाद अब इस टैरिफ को हटा दिया गया है।


    भारत ने स्पष्ट किया है अपना रुख

    वहीं भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। भारत ने कहा है कि ऊर्जा बाजार के उतार-चढ़ाव वाले माहौल में, नई दिल्ली अपनी 1.4 बिलियन की आबादी को प्राथमिकता देना जारी रखेगा।” बता दें कि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है।

  • केन्द्र की नई पहल, संसद से लेकर विधानसभाओं में महिलाओं को जल्द 33% आरक्षण देने की तैयारी

    केन्द्र की नई पहल, संसद से लेकर विधानसभाओं में महिलाओं को जल्द 33% आरक्षण देने की तैयारी


    नई दिल्ली।
    संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण (33 Percent Reservation Women) देने को लेकर केंद्र सरकार (Central Government) नई पहल की तैयारी में है। लंबे समय से चर्चा में रहे महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार अब ऐसा रास्ता तलाश रही है, जिससे इसका लाभ वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले ही लागू किया जा सके। इसके लिए कानून में संशोधन किया जा सकता है।

    वर्ष 2023 में संसद द्वारा पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (‘Women’s Empowerment Act’) के तहत महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। लेकिन इस कानून के अनुसार आरक्षण तभी लागू होना था जब अगली जनगणना पूरी हो जाए और उसके बाद नई परिसीमन प्रक्रिया लागू की जाए। चूंकि जनगणना और परिसीमन दोनों प्रक्रियाओं में काफी समय लग सकता है, इसलिए आशंका जताई जा रही थी कि महिलाओं को आरक्षण का वास्तविक लाभ मिलने में कई वर्ष लग सकते हैं।


    अनौपचारिक बातचीत शुरू

    सूत्रों का कहना है कि इस विषय पर विपक्षी दलों के साथ अनौपचारिक बातचीत भी शुरू कर दी गई है। सरकार का प्रयास है कि संसद में आवश्यक समर्थन जुटाकर महिला आरक्षण को जल्द लागू करने का रास्ता साफ किया जाए। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यदि इस मुद्दे पर व्यापक सहमति बनती है, तो मौजूदा संसद सत्र में ही संविधान संशोधन विधेयक लाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


    वरिष्ठजनों को रेल किराये में छूट दें, संसद में मांग

    संसदीय समिति ने एक बार फिर वरिष्ठ नागरिकों को रेल किराये में छूट देने की पुरजोर वकालत की है। समिति ने रेलवे के पहले से सभी यात्रियों को छूट देने से होने वाले घाटे के तर्क को दरकिनार करते हुए कहा कि उक्त मद की धनराशि को रेलवे विज्ञापन अथवा अन्य तरीके से पूरा कर सकता है।

    विदित हो कि वरिष्ठ नागरिक सहित अन्य रेल किराये में छूट से रेलवे को सालाना 2,000 करोड़ से अधिक राजस्व का नुकसान होता है। रेलवे संबंधी स्थायी समिति मंगलवार को संसद में पेश अपनी आठवीं रिपोर्ट में भारतीय रेलवे के सामाजिक दायित्व और वित्तीय अनुशासन के बीच तालमेल बिठाने की सलाह दी है। सांसद डा. सीएम रमेश की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए रियायत को फिर से शुरू किया जाता है, तो रेलवे पर सालाना लगभग 2,000 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।

    समिति ने मंत्रालय को सुझाव दिया है कि इसे केवल स्लीपर और थर्ड एसी (एसी-3) जैसी श्रेणियों तक सीमित रखकर इस बोझ को कम किया जा सकता है, ताकि जरूरतमंद बुजुर्गों को लाभ मिले और रेलवे की आर्थिक स्थिति भी न बिगड़े। वरिष्ठ नागरिक को रियायत देना केवल एक वित्तीय मुद्दा नहीं, बल्कि एक सामाजिक कर्तव्य है। इसलिए मंत्रालय को मानवीय आधार पर रियायतें बहाल करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

  • भारत की आर्थिक वृद्धि पर हो सकता है ईरान-युद्ध का असर… ICRA ने बढ़ाई टेंशन

    भारत की आर्थिक वृद्धि पर हो सकता है ईरान-युद्ध का असर… ICRA ने बढ़ाई टेंशन


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया (West Asia) में अगर संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो भारत की आर्थिक वृद्धि (Economic Growth) की संभावनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी इक्रा (Rating agency ICRA) ने एक रिपोर्ट में यह कहा। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि लगभग 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह वित्त वर्ष 2025-26 के अनुमान 7.6 प्रतिशत से थोड़ा कम है। हालांकि, पश्चिम एशिया में लंबे समय तक जारी तनाव से कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मुद्रास्फीति के दबाव के कारण वृद्धि प्रभावित हो सकती है।


    वैश्विक स्तर पर तनाव

    बता दें कि इजराइल-अमेरिका के ईरान पर हमले के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के समुद्री मार्गों में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। यह एक अहम वैश्विक ऊर्जा गलियारा है। इससे आपूर्ति प्रभावित होने और माल ढुलाई लागत में वृद्धि को लेकर चिंता बढ़ी है। पश्चिम एशिया भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार बना हुआ है। भारत के निर्यात में इसकी लगभग 14 प्रतिशत और आयात में लगभग 21 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ऐसे में, यदि तनाव और बढ़ता है तो व्यापार के साथ ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होगी।


    भारत के लिए जोखिम हैं ये फैक्टर

    इक्रा की रिपोर्ट में कहा गया- यह संघर्ष विशेष रूप से माल ढुलाई लागत में वृद्धि, आपूर्ति में देरी और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के रूप में भारत के व्यापार प्रवाह के लिए महत्वपूर्ण जोखिम पैदा करता है। इक्रा के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि से भारत का चालू खाते का घाटा 0.30-0.40 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। साथ ही थोक और खुदरा मुद्रास्फीति भी बढ़ सकती है। ईंधन की बढ़ती लागत से उपभोग मांग कम हो सकती है और समग्र आर्थिक गतिविधि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    एजेंसी के अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे तेल की कीमतें औसतन 70 से 75 डॉलर प्रति बैरल रहती हैं तो इससे चालू खाते का घाटा सकल घरेलू उत्पाद के लगभग एक प्रतिशत के आसपास बना रह सकता है। हालांकि, यदि कीमतें बढ़कर 100-105 डॉलर प्रति बैरल हो जाती हैं, तो घाटा सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 1.9-2.2 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, जिससे वृहद आर्थिक दबाव बढ़ेगा।

    इक्रा ने कहा कि इस स्थिति का असर बाहर से भेजे जाने वाली राशि पर भी पड़ सकता है, क्योंकि भारत में आने वाले रेमिंटन्स का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आता है, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब शामिल हैं।

  • मेघायल में फिर भड़की हिंसा… पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत, आर्मी तैनात

    मेघायल में फिर भड़की हिंसा… पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत, आर्मी तैनात


    शिलॉन्ग।
    पूर्वोत्तर राज्य मेघालय (North Eastern State Meghalaya) के पश्चिम गारो पर्वतीय जिले में मंगलवार तड़के गारो पर्वतीय स्वायत्त जिला परिषद (GHDC) चुनाव नामांकन प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद और तनाव के बीच हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा की गई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई। इससे इलाके में और तनाव पसर गया। हालात को देखते हुए न सिर्फ वहां कर्फ्यू लगाया गया है बल्कि सेना को भी तैनात किया गया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

    जिले के पुलिस अधीक्षक अब्राहम टी. संगमा (Superintendent of Police Abraham T. Sangma) ने बताया कि यह घटना चिबिनांग इलाके में हुई जहां जनजातीय और गैर-जनजातीय समूहों के बीच झड़प हो गई थी। संगमा ने कहा, “मारे गए दोनों व्यक्ति चिविनांग के निवासी थे। GHDC चुनावों को लेकर जनजातीय और गैर-जनजातीय समूहों के बीच झड़प हुई थी और यह गोलीबारी तब हुई जब हम जमा भीड़ को तितर-बितर कर रहे थे।” उन्होंने कहा कि इलाके में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। तनाव को और बढ़ने से रोकने के लिए जिला प्रशासन ने मंगलवार को पूरे पश्चिम गारो पर्वतीय जिले में दिन भर के लिए कर्फ्यू लगा दिया है।


    वॉयस कॉल और एसएमएस सेवाएं प्रभावित नहीं

    एसपी ने कहा, “हमने अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग की है और वे आ रहे हैं।” यह घटना मेघालय सरकार द्वारा जिले में 10 मार्च से 48 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने के आदेश के कुछ घंटों बाद हुई है। नामांकन प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था को खतरे में डालने वाली भीड़ जुटाने, हमलों और सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं के प्रसार की खबरों के बाद यह कदम उठाया गया। हालांकि, वॉयस कॉल और एसएमएस सेवाएं प्रभावित नहीं हुई हैं।


    सेना से ‘फ्लैग मार्च’ करने का अनुरोध

    जिले के उपायुक्त विभोर अग्रवाल ने मंगलवार को पूर्वी कमान के 101 एरिया के कमांडिंग ऑफिसर को पत्र लिखकर जिले के मैदानी क्षेत्रों के गांवों में सेना से ‘फ्लैग मार्च’ करने का अनुरोध किया है। उपायुक्त ने पत्र में कहा, “सशस्त्र बलों की उपस्थिति से जनता को आश्वस्त करने, किसी भी अन्य अप्रिय घटना को रोकने और निवासियों के बीच विश्वास बहाल करने में बहुत मदद मिलेगी।” जीएचएडीसी चुनावों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया 16 मार्च तक जारी रहेगी जिसे देखते हुए नामांकन केंद्रों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।


    नामांकन के दौरान हमला

    यह अशांति तब शुरू हुई प्रदर्शनकारियों ने 10 अप्रैल को होने वाले जीएचएडीसी चुनावों के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करने सोमवार को तुरा में उपायुक्त कार्यालय पहुंचे फूलबाड़ी के पूर्व विधायक एस्तामुर मोमिन पर हमला कर दिया था। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इस चुनाव में गैर-जनजातीय लोग भाग न लें। जीएचएडीसी की कार्यकारी समिति ने 17 फरवरी को एक प्रस्ताव पारित किया था जिसके तहत उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करते समय वैध अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया गया था।

  • Assam: बरपेटा मेडिकल कॉलेज से हटेगा फखरुद्दीन अली अहमद का नाम, हिमंता सरकार ने दी मंजूरी

    Assam: बरपेटा मेडिकल कॉलेज से हटेगा फखरुद्दीन अली अहमद का नाम, हिमंता सरकार ने दी मंजूरी


    दिसपुर।
    असम सरकार (Assam Government) ने बरपेटा (Barpeta) स्थित फखरुद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (Fakhruddin Ali Ahmed Medical College and Hospital) का नाम बदलने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) ने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने इस संस्थान का नया नाम बरपेटा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल रखने को मंजूरी दे दी है।

    मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फखरुद्दीन अली अहमद (Fakhruddin Ali Ahmed) भारत के राष्ट्रपति रह चुके हैं और वे असम से देश के पहले राष्ट्रपति थे। ऐसे में उनके सम्मान को बनाए रखते हुए राज्य सरकार ने किसी अन्य संस्थान को उनके नाम पर समर्पित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि असम मंत्रिमंडल ने तय किया है कि राज्य में एक अन्य संस्थान को फखरुद्दीन अली अहमद के नाम से जोड़ा जाएगा, ताकि उनके योगदान को उचित सम्मान दिया जा सके।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व सरमा ने मंगलवार को कहा कि असम के मुस्लिम ‘राजनीतिक रूप से’ मियां मुसलमानों के खिलाफ हैं। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय मुस्लिम समुदाय का एक तबका अब भाजपा का समर्थन कर रहा है। सरमा ने कहा कि असम के मुसलमानों ने समय-समय पर यह स्पष्ट किया है कि उनका धर्म समान हो सकता है, लेकिन वे मियां मुसलमानों से सांस्कृतिक रूप से अलग हैं। उन्होंने यहां एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कहा कि इस बार असम के मुसलमानों ने मन बना लिया है कि वे एक अलग समुदाय हैं, भले ही धर्म समान हो।

    मुख्यमंत्री से पूछा गया था कि क्या धार्मिक अल्पसंख्यक आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा का समर्थन करेंगे, इसके बाद उनका यह बयान आया है। दोनों समुदायों को उनकी मातृभाषा और मूल स्थान के आधार पर अलग करते हुए असम सीएम ने कहा कि राजनीतिक रूप से, असम के मुसलमान मियां मुसलमानों के खिलाफ हैं। कई लोग टीवी पर परिचर्चा में कहते हैं कि धर्म भले समान हो, लेकिन उनकी संस्कृति अलग-अलग हैं। बता दें कि ‘मियां’ मूल रूप से असम में बंगाली बोलने वाले मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है, और गैर-बंगाली बोलने वाले लोग उन्हें आम तौर पर बांग्लादेशी प्रवासी बताते हैं।

  • विवाद के बीच ICC का बयान, भेदभाव के आरोपों पर दी अपनी प्रतिक्रिया

    विवाद के बीच ICC का बयान, भेदभाव के आरोपों पर दी अपनी प्रतिक्रिया


    नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी International Cricket Council (आईसीसी) ने टी20 विश्व कप 2026 के बाद टीमों की वापसी में हो रही देरी को लेकर लगे भेदभाव के आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। आईसीसी ने बुधवार को स्पष्ट किया कि खिलाड़ियों और टीमों की यात्रा से जुड़े सभी फैसले सुरक्षा और उपलब्ध उड़ानों को ध्यान में रखकर लिए गए हैं। बोर्ड का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियां उसके नियंत्रण में नहीं हैं और वैश्विक हालात की वजह से यात्रा व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं।

    मिडिल ईस्ट संकट से प्रभावित हुई उड़ानें
    दरअसल इन दिनों मिडिल ईस्ट क्षेत्र में जारी तनाव और संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर बड़ा असर पड़ा है। कई देशों के एयरस्पेस बंद होने और सुरक्षा अलर्ट जारी होने के चलते कई फ्लाइट्स रद्द या डायवर्ट करनी पड़ीं। इसका सीधा असर भारत में खेले गए ICC Men’s T20 World Cup के बाद टीमों की वापसी पर पड़ा। इसी वजह से कई टीमें समय पर अपने-अपने देशों के लिए रवाना नहीं हो सकीं। खास तौर पर West Indies cricket team और South Africa national cricket team सबसे ज्यादा प्रभावित रहीं।

    वेस्टइंडीज और साउथ अफ्रीका को करना पड़ा इंतजार
    टूर्नामेंट में वेस्टइंडीज की टीम 1 मार्च को सुपर-8 चरण से बाहर हो गई थी, जबकि साउथ अफ्रीका को 4 मार्च को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद इन टीमों को अपने देश लौटने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। यात्रा में देरी के चलते खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को भारत में ही रुकना पड़ा, जिससे क्रिकेट जगत में सवाल उठने लगे कि आखिर कुछ टीमें जल्दी कैसे लौट गईं जबकि अन्य को इंतजार करना पड़ रहा है।

    इंग्लैंड की तुरंत वापसी से उठा विवाद
    विवाद तब बढ़ गया जब England cricket team सेमीफाइनल में भारत से हारने के तुरंत बाद 5 मार्च को स्वदेश लौट गई। इसके बाद इंग्लैंड के पूर्व कप्तान Michael Vaughan समेत कई क्रिकेट विश्लेषकों ने आईसीसी पर इंग्लैंड को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। कुछ विशेषज्ञों का मानना था कि अगर इंग्लैंड की टीम तुरंत लौट सकती है, तो अन्य टीमों के साथ ऐसा क्यों नहीं हुआ। इस सवाल के बाद सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में बहस तेज हो गई।

    आईसीसी ने आरोपों को किया खारिज
    इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए International Cricket Council ने साफ कहा कि अलग-अलग टीमों के लिए बनाई गई यात्रा व्यवस्थाओं का आपस में कोई संबंध नहीं है।

    आईसीसी के मुताबिक हर टीम के लिए यात्रा योजना उनके देश के रूट, उपलब्ध फ्लाइट्स, सुरक्षा स्थिति और उस समय की परिस्थितियों के आधार पर बनाई गई थी। इसलिए किसी भी टीम को विशेष प्राथमिकता देने का सवाल ही नहीं उठता।

    सुरक्षा को दी गई सर्वोच्च प्राथमिकता
    आईसीसी ने अपने बयान में कहा कि वह खिलाड़ियों, कोचों, सपोर्ट स्टाफ और उनके परिवारों की जल्द घर लौटने की इच्छा को पूरी तरह समझता है। हालांकि खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संकट की वजह से कई एयरस्पेस बंद हो गए थे और मिसाइल अलर्ट जारी किए गए थे। इस कारण कई कमर्शियल और चार्टर फ्लाइट्स को रद्द या पुनर्निर्धारित करना पड़ा। कई उड़ानों को लंबा रास्ता तय करना पड़ा, जिससे यात्रा व्यवस्थाएं पहले से कहीं अधिक जटिल और समय लेने वाली हो गईं।

    उपलब्ध विकल्पों के आधार पर भेजी जा रहीं टीमें
    आईसीसी ने अंत में कहा कि खिलाड़ियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी वजह से उपलब्ध विकल्पों और सुरक्षित रूट्स के आधार पर ही टीमों को उनके देशों के लिए रवाना किया जा रहा है। बोर्ड ने यह भी दोहराया कि मौजूदा हालात असाधारण हैं और ये परिस्थितियां पूरी तरह उसके नियंत्रण से बाहर हैं। ऐसे में सभी टीमों को सुरक्षित तरीके से घर पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

  • चैंपियंस लीग में एटलेटिको मैड्रिड का दम, टोटेनहम को हराकर दर्ज की बड़ी जीत

    चैंपियंस लीग में एटलेटिको मैड्रिड का दम, टोटेनहम को हराकर दर्ज की बड़ी जीत


    नई दिल्ली। यूरोप की सबसे प्रतिष्ठित फुटबॉल प्रतियोगिता UEFA Champions League में स्पेन के दिग्गज क्लब Atlético Madrid ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड के क्लब Tottenham Hotspur को 5-2 से हराकर अंतिम-16 के पहले लेग में बड़ी बढ़त हासिल कर ली। मैड्रिड के Metropolitano Stadium में खेले गए इस मुकाबले में एटलेटिको ने आक्रामक खेल दिखाते हुए मैच के शुरुआती मिनटों से ही टोटेनहम पर दबाव बना दिया और क्वार्टर फाइनल की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया।

    शुरुआती मिनटों में एटलेटिको का तूफानी हमला
    मैच की शुरुआत से ही एटलेटिको मैड्रिड ने आक्रामक रणनीति अपनाई। छठे मिनट में टोटेनहम के 22 वर्षीय गोलकीपर Antonín Kinský की एक बड़ी गलती टीम पर भारी पड़ गई। पीछे से गेंद क्लियर करने की कोशिश में वह फिसल गए और इसका फायदा उठाते हुए Marcos Llorente ने आसान गोल दागकर एटलेटिको को बढ़त दिला दी। इसके बाद टोटेनहम की डिफेंसिव लाइन लगातार दबाव में दिखी। 14वें मिनट में डिफेंडर Micky van de Ven की गलती से एटलेटिको के स्टार स्ट्राइकर Antoine Griezmann को मौका मिला और उन्होंने गोल कर स्कोर 2-0 कर दिया।

    एटलेटिको ने 22 मिनट में ही बना दी 4-0 की बढ़त
    टोटेनहम की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। गोलकीपर किंस्की की एक और गलती का फायदा Julián Álvarez ने उठाया और टीम के लिए तीसरा गोल दाग दिया। लगातार हो रही गलतियों के बाद टोटेनहम के कोच Igor Tudor ने 17वें मिनट में किंस्की को बाहर कर Guglielmo Vicario को मैदान में उतारा। हालांकि इससे भी एटलेटिको का दबाव कम नहीं हुआ। 22वें मिनट में ग्रीजमैन की फ्री-किक पर रिबाउंड मिलने के बाद Robin Le Normand ने हेडर के जरिए गोल कर स्कोर 4-0 कर दिया।

    टोटेनहम की वापसी की कोशिश
    चार गोल से पिछड़ने के बाद टोटेनहम ने वापसी की कोशिश की। 26वें मिनट में Pedro Porro ने शानदार गोल कर टीम के लिए पहला गोल किया। इसके बाद दूसरे हाफ में टोटेनहम ने कुछ बेहतर खेल दिखाया। हालांकि एटलेटिको के गोलकीपर Jan Oblak ने 55वें मिनट में Richarlison के प्रयास को शानदार तरीके से रोक दिया। बावजूद इसके टोटेनहम ने संघर्ष जारी रखा।

    ग्रीजमैन और अल्वारेज ने फिर दिलाई बढ़त
    मैच के अंतिम चरण में Antoine Griezmann ने बेहतरीन पास देकर Julián Álvarez को गोल का मौका दिया। अल्वारेज ने टोटेनहम की डिफेंस को चकमा देते हुए गोल कर एटलेटिको की बढ़त 5-1 कर दी। इसके बाद टोटेनहम के स्ट्राइकर Dominic Solanke ने एक गोल कर स्कोर 5-2 कर दिया, लेकिन तब तक मैच एटलेटिको के हाथ में जा चुका था।

    कोच ट्यूडर ने पहले ही दिया था संकेत
    मैच से पहले टोटेनहम के कोच Igor Tudor ने कहा था कि उनकी प्राथमिकता Premier League में टीम की स्थिति सुधारने पर है, न कि यूरोपीय प्रतियोगिता में आगे बढ़ने पर। हालांकि मैदान पर उनकी टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और 22 मिनट के भीतर ही 4-0 से पिछड़ गई।

    क्वार्टर फाइनल की ओर मजबूत कदम
    इस जीत के साथ Atlético Madrid ने चैंपियंस लीग के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा दिया है। अब दूसरे लेग में टोटेनहम के सामने वापसी की बड़ी चुनौती होगी, जबकि एटलेटिको अपनी इस बढ़त को बरकरार रखने की कोशिश करेगा।

  • तीसरे वनडे में 200 रन से बड़ी जीत, न्यूजीलैंड महिलाओं ने जिम्बाब्वे का किया सूपड़ा साफ

    तीसरे वनडे में 200 रन से बड़ी जीत, न्यूजीलैंड महिलाओं ने जिम्बाब्वे का किया सूपड़ा साफ


    नई दिल्ली। न्यूज़ीलैंड महिला क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज 3-0 से अपने नाम कर ली। सीरीज के तीसरे और आखिरी मुकाबले में न्यूज़ीलैंड ने जिम्बाब्वे को 200 रन के बड़े अंतर से हराया। यूनिवर्सिटी ओवल मैदान पर खेले गए इस मैच में कप्तान Amelia Kerr ने बल्ले और गेंद दोनों से कमाल का प्रदर्शन किया और टीम को दमदार जीत दिलाई।

    टॉस जीतकर न्यूजीलैंड ने चुनी बल्लेबाजी
    मैच में न्यूज़ीलैंड की कप्तान Amelia Kerr ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। टीम की शुरुआत अच्छी रही और केर ने ओपनिंग करते हुए Emma McLeod के साथ पहले विकेट के लिए 54 रन की साझेदारी की। हालांकि मैक्लियोड ज्यादा देर टिक नहीं सकीं और 29 गेंदों पर 16 रन बनाकर आउट हो गईं। इसके बाद कप्तान केर ने पारी को संभालते हुए Izzy Sharp के साथ दूसरे विकेट के लिए 42 रन जोड़े। धीरे-धीरे न्यूजीलैंड की बल्लेबाजी मजबूत होती गई और टीम ने मध्य ओवरों में तेजी से रन बनाए।

    अमेलिया केर की कप्तानी पारी
    न्यूज़ीलैंड की कप्तान Amelia Kerr ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 106 गेंदों में 80 रन बनाए। अपनी इस बेहतरीन पारी में उन्होंने 10 चौके लगाए। तीसरे विकेट के लिए केर और Maddy Green के बीच 60 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी हुई।

    जब टीम का स्कोर 156 रन था, तभी केर का विकेट गिरा। लेकिन इसके बाद भी न्यूजीलैंड की रन गति कम नहीं हुई और बल्लेबाजों ने आक्रामक अंदाज में खेल जारी रखा।

    ग्रीन और हालिडे की तूफानी साझेदारी
    पारी के मध्य में Maddy Green और Georgia Plimmer Halliday (हालिडे) ने चौथे विकेट के लिए 110 रन की शानदार साझेदारी कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। हालिडे ने 40 गेंदों में 40 रन बनाए, जिसमें 3 चौके और 1 छक्का शामिल था।

    वहीं ग्रीन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए शतक के करीब पहुंचकर भी 94 रन पर आउट हो गईं। उन्होंने 73 गेंदों की पारी में 12 चौके लगाए। उनकी इस पारी ने टीम का स्कोर 300 के पार पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

    अंत में Jess Kerr ने 13 रन और विकेटकीपर Izzy Gaze ने नाबाद 18 रन बनाकर टीम का स्कोर 6 विकेट पर 303 रन तक पहुंचा दिया।

    जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी पूरी तरह फ्लॉप
    304 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी Zimbabwe women’s national cricket team की शुरुआत बेहद खराब रही। न्यूजीलैंड के गेंदबाजों के सामने जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी पूरी तरह बिखर गई। पूरी टीम 27.1 ओवर में केवल 103 रन पर सिमट गई। जिम्बाब्वे के लिए Loreen Tshuma ने सबसे ज्यादा 34 रन बनाए, लेकिन अन्य बल्लेबाज टिक नहीं सके।

    गेंदबाजी में भी अमेलिया केर का कमाल
    गेंदबाजी में भी कप्तान Amelia Kerr ने कमाल कर दिया। उन्होंने सिर्फ 3.1 ओवर में 22 रन देकर 5 विकेट झटके और जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इसके अलावा Rosemary Mair को 2 विकेट मिले, जबकि Jess Kerr, Bree Illing और Nensi Patel ने 1-1 विकेट लिया।

    अमेलिया केर बनीं मैच और सीरीज की स्टार
    शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए Amelia Kerr को प्लेयर ऑफ द मैच और प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया। उनकी कप्तानी और प्रदर्शन की बदौलत न्यूजीलैंड ने यह सीरीज 3-0 से क्लीन स्वीप कर ली।

    इस जीत के साथ न्यूजीलैंड महिला टीम ने एक बार फिर दिखा दिया कि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मजबूत और संतुलित टीम है, जो बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में दमदार प्रदर्शन करने की क्षमता रखती है।

  • सलमान खान के पिता सलीम खान की तबीयत में सुधार, जल्द मिल सकती है अस्पताल से छुट्टी

    सलमान खान के पिता सलीम खान की तबीयत में सुधार, जल्द मिल सकती है अस्पताल से छुट्टी


    नई दिल्ली। दिग्गज राइटर सलीम खान के फैंस और उनके परिवार के लिए राहत भरी खबर आई है। करीब तीन हफ्तों से मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती रहे 88 वर्षीय सलीम खान को इस हफ्ते अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है। डॉक्टरों की निगरानी में उनकी सेहत में लगातार सुधार हो रहा है और माना जा रहा है कि अगले 3 से 4 दिनों में वह अपने घर लौट आएंगे। सलीम खान की तबीयत बिगड़ने के बाद पूरे बॉलीवुड में फिक्र की लहर सी दौड़ गई थी, लेकिन सलमान खान के पिता सलीम खान की सेहत में वक्त के साथ सुधार आया और अब खबर है कि वह जल्द ही डिस्चार्ज कर दिए जाएंगे।

    दिमाग में क्लॉट की वजह से हुए थे भर्ती
    बॉलीवुड हंगामा की एक रिपोर्ट के मुताबिक सलीम खान के दिमाग में एक ‘ब्रेन क्लॉट’ डिटेक्ट हुआ था, जिसके बाद उन्हें डॉक्टरी सलाह पर अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्हें 17 फरवरी की सुबह उनके फैमिली फिजीशियन की सलाह पर लीलावती अस्पताल ले जाया गया था। अगले ही दिन यानी 18 फरवरी को न्यूरोसर्जन ने उनकी एक खास मेडिकल प्रोसीजर की, जिसे ‘डिजिटल सबट्रैक्शन एंजियोग्राफी’ कहा जाता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह सफल रही और इसके बाद उनकी हालत स्थिर बनी रही।

    बिना सर्जरी के डॉक्टरों ने संभाला हाल
    सलीम खान के हेल्थ अपडेट के मुताबिक भर्ती होने के वक्त सलीम खान पूरी तरह होश में थे और फिट लग रहे थे। हालांकि उन्हें मामूली ‘ब्रेन हैमरेज’ हुआ था, जिसे डॉक्टरों ने बिना किसी बड़ी सर्जरी के सफलतापूर्वक टैकल कर लिया। इलाज के दौरान उन्हें कुछ वक्त के लिए आईसीयू और वेंटिलेटर पर भी रखा गया था, लेकिन उनकी हालत में तेजी से सुधार देखते हुए उन्हें वेंटिलेटर से हटा दिया गया। डॉक्टरों का कहना है कि उम्र एक बड़ा फैक्टर है, लेकिन सलीम खान की रिकवरी काफी अच्छी रही है।

    सलमान और परिवार ने ली राहत की सांस
    सलीम खान की बीमारी की खबर मिलने के बाद से ही सलमान खान और उनका पूरा परिवार काफी तनाव में था। अब अस्पताल के सूत्रों और हालिया अपडेट्स के मुताबिक सलीम खान की हालत स्थिर हैं और रिकवरी की राह पर हैं। अगर अगले कुछ दिनों तक उनकी सेहत इसी तरह सामान्य बनी रहती है, तो 3 से 4 दिनों में उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। अब फैंस को बस उस पल का इंतजार है जब सलीम खान गैलेक्सी अपार्टमेंट में अपने परिवार के साथ फिर से नजर आएंगे।

  • मधुबाला की बायोपिक पर बढ़ा सस्पेंस, यशराज फिल्म्स ने बताया अनीत पड्डा नहीं होंगी लीड

    मधुबाला की बायोपिक पर बढ़ा सस्पेंस, यशराज फिल्म्स ने बताया अनीत पड्डा नहीं होंगी लीड


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की लेजेंड्री ऐक्ट्रेस मधुबाला की बायोपिक के ऐलान के दो साल बाद भी इस फिल्म की कास्टिंग को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। हाल की कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि सैयारा फेम अनीत पड्डा का नाम मधुबाला का रोल के लिए फाइनल हो गया है और जल्द ही इसी शूटिंग शुरू होने वाली है, लेकिन यशराज फ्लिम्स ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इससे पहले कहा गया था कि कियारा आडवाणी बायोपिक में लीड ऐक्ट्रेस होंगी।

    मधुबाला की बहन भी जुड़ी हैं फिल्म से
    यशराज टैलेंट के स्पोक्सपर्सन ने इंडिया टुडे को बताया कि अनीत पड्डा को फिल्म में कास्ट किए जाने के दावे गलत और महज अटकलें हैं। लेटेस्ट अपडेट के बाद यह सवाल बना हुआ है कि मधुबाला की जिंदगी को पर्दे पर कौन निभाएगा। बायोपिक को संजय लीला भंसाली प्रोड्यूस कर रहे हैं, जबकि इसका डायरेक्शन जसमीत के रीन करेंगी। जसमीत इससे पहले आलिया भट्ट और विजय वर्मा की फिल्म डार्लिंग्स का डायरेक्शन कर चुकी हैं। इस प्रोजेक्ट से मधुबाला का परिवार भी जुड़ा हुआ है। उनकी बहन मधुर बृज भूषण इस फिल्म में को-प्रोड्यूसर हैं।

    नौ साल की उम्र में बनी थीं ऐक्ट्रेस
    मधुबाला का असली नाम मुमताज जहां बेगम देहलवी था। उनका जन्म 14 फरवरी 1933 को दिल्ली में हुआ था। बेहद कम उम्र में ही उन्होंने फिल्मों की दुनिया में कदम रख दिया था। महज नौ साल की उम्र में उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की और उनकी पहली फिल्म बसंत थी। समय के साथ मधुबाला अपनी खूबसूरती और अदाकारी के दम पर हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित ऐक्ट्रेस में शुमार हो गईं।

    किशोर कुमार से की थी शादी
    ऐक्टर दिलीप कुमार के साथ उनका अफेयर उस दौर की सबसे चर्चित प्रेम कहानियों में गिना जाता है। दोनों एक-दूसरे से गहरा प्यार करते थे, लेकिन मधुबाला के पिता को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। हालात ऐसे बने कि यह मोहब्बत मुकम्मल नहीं हो सकी। दिल टूटने के बाद मधुबाला ने मशहूर सिंगर और पहले से शादीशुदा ऐक्टर किशोर कुमार से शादी करने का फैसला किया।

    दिल की बीमारी बनी मौत की वजह
    हालांकि, मधुबाला की जिंदगी जितनी चमकदार दिखती थी उतनी ही दर्द से भरी भी थी। बचपन से ही उन्हें दिल की गंभीर बीमारी थी। उनके दिल में छेद था और उस दौर में इस बीमारी का इलाज संभव नहीं था। यही बीमारी धीरे-धीरे उनकी जिंदगी पर भारी पड़ती गई और 23 फरवरी 1969 को महज 36 साल की उम्र में यह चमकता सितारा हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कह गया।