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  • चावल खाने से नहीं बढ़ता पेट, एक्सपर्ट ने बताया सही तरीका, बस इन 5 आयुर्वेदिक नियमों का रखें ध्यान

    चावल खाने से नहीं बढ़ता पेट, एक्सपर्ट ने बताया सही तरीका, बस इन 5 आयुर्वेदिक नियमों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली। भारतीय भोजन में चावल का बहुत खास स्थान है। देश के अधिकांश घरों में लंच और डिनर में चावल जरूर बनाया जाता है। दाल चावल, राजमा चावल या अलग अलग तरह की करी के साथ चावल खाना लोगों को बेहद पसंद होता है। हालांकि कई लोग यह मानते हैं कि चावल खाने से पेट बाहर निकल आता है और वजन तेजी से बढ़ने लगता है। इसी डर की वजह से कई लोग अपनी डाइट से चावल को पूरी तरह हटाने का फैसला कर लेते हैं।

    लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि चावल खुद मोटापा नहीं बढ़ाता बल्कि इसे गलत तरीके से खाने या गलत किस्म के चावल चुनने से पाचन पर असर पड़ सकता है और शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा हो सकती है। इसलिए चावल खाने से पहले कुछ जरूरी आयुर्वेदिक नियमों को समझना जरूरी है।

    आयुर्वेद में चावल की उम्र को बहुत महत्व दिया गया है। आमतौर पर लोग बाजार से नया चावल खरीद कर इस्तेमाल करने लगते हैं। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार नया चावल भारी माना जाता है और इसे पचाने में शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। नया चावल कफ बढ़ा सकता है और पाचन को धीमा कर सकता है। जिन लोगों को अक्सर सुस्ती महसूस होती है या जिनका पाचन कमजोर है उन्हें नया चावल खाने से बचना चाहिए।

    इसके विपरीत एक साल पुराना चावल हल्का और सुपाच्य माना जाता है। पुराने चावल की तासीर ऐसी हो जाती है कि वह पेट पर ज्यादा बोझ नहीं डालता और शरीर को जल्दी ऊर्जा देता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि संभव हो तो एक साल पुराना चावल ही इस्तेमाल करना चाहिए।

    चावल बनाने का तरीका भी सेहत पर असर डाल सकता है। आजकल ज्यादातर लोग कुकर में चावल बनाना पसंद करते हैं क्योंकि इससे समय की बचत होती है। लेकिन आयुर्वेद में कुकर में बने चावल को उतना अच्छा नहीं माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार चावल को खुले बर्तन में ज्यादा पानी के साथ पकाना चाहिए और पकने के बाद उसका माड़ यानी अतिरिक्त पानी निकाल देना चाहिए। इससे चावल हल्का और पचने में आसान हो जाता है।

    इसके अलावा आयुर्वेद में शरीर की प्रकृति के अनुसार भी खानपान को महत्व दिया गया है। हर व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है और उसी के अनुसार चावल खाने का तरीका भी अलग हो सकता है।

    जिन लोगों की वात प्रकृति होती है उन्हें अक्सर जोड़ों में दर्द, गैस या त्वचा में रूखापन जैसी समस्याएं रहती हैं। ऐसे लोगों को चावल खाते समय उसमें थोड़ा सा घी मिलाकर खाना चाहिए। इससे पाचन बेहतर होता है और शरीर को संतुलन मिलता है।

    पित्त प्रकृति वाले लोगों को अक्सर एसिडिटी, सीने में जलन या ज्यादा गर्मी महसूस होती है। ऐसे लोगों के लिए दूध के साथ चावल या चावल की खीर खाना फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह शरीर की गर्मी को संतुलित करने में मदद करता है।

    वहीं कफ प्रकृति वाले लोगों का वजन जल्दी बढ़ने की संभावना ज्यादा होती है और उन्हें सर्दी खांसी की समस्या भी हो सकती है। ऐसे लोगों को हमेशा पुराना चावल खाना चाहिए और चावल का माड़ निकाल कर ही सेवन करना चाहिए।

    इस तरह सही प्रकार का चावल चुनकर और सही तरीके से पकाकर खाने से न केवल पाचन बेहतर रहता है बल्कि वजन बढ़ने का खतरा भी कम हो सकता है। इसलिए चावल को पूरी तरह छोड़ने के बजाय उसे सही नियमों के साथ खाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।

  • रंगपंचमी पर सबसे पहले महाकाल को चढ़ा रंग, भस्म आरती में केसर जल अर्पित, शिव परिवार को लगाया हर्बल गुलाल

    रंगपंचमी पर सबसे पहले महाकाल को चढ़ा रंग, भस्म आरती में केसर जल अर्पित, शिव परिवार को लगाया हर्बल गुलाल


    उज्जैन। रंगपंचमी के अवसर पर रविवार तड़के विश्व प्रसिद्ध उज्‍जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को सबसे पहले रंग अर्पित कर पर्व की शुरुआत की गई। सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुलने के बाद भस्म आरती के दौरान भगवान महाकालेश्वर का विशेष पूजन किया गया और उन्हें एक लोटा केसर युक्त जल अर्पित किया गया। इसके बाद भगवान का त्रिपुंड, मुंडमाल और रजत आभूषणों से राजा स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया।
    शिव परिवार को लगाया हर्बल रंग

    रंगपंचमी के मौके पर भस्म आरती के साथ विशेष पूजा-अर्चना की गई। पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का पूजन कर सबसे पहले भगवान महाकाल को रंग अर्पित किया। इस दौरान भगवान महाकाल के साथ माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी को भी हर्बल रंग चढ़ाया गया।

    पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर मंत्रोच्चार के साथ हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद भगवान का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। कपूर आरती के बाद भगवान के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड लगाकर विशेष श्रृंगार किया गया।

    श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान को रजत मुकुट, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित कर फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।

    सुरक्षा के चलते रंग लाने पर रोक

    दो साल पहले धुलेंडी के दिन गर्भगृह में आग लगने की घटना को देखते हुए इस बार भी मंदिर में श्रद्धालुओं, पंडे-पुजारियों को रंग लाने की अनुमति नहीं दी गई। दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को सख्त जांच के बाद ही मंदिर में प्रवेश दिया गया।

    पहले हर साल श्रद्धालु रंग-गुलाल लेकर मंदिर पहुंचते थे, जिससे पूरा माहौल ब्रज की होली जैसा दिखाई देता था। इस बार भगवान को अर्पित किया जाने वाला केसर युक्त जल भी मंदिर की कोठार शाखा से ही पुजारियों को उपलब्ध कराया गया।

    मंदिर प्रशासन ने गर्भगृह, नंदी मंडपम, गणेश मंडपम, कार्तिकेय मंडपम और पूरे मंदिर परिसर में रंग या गुलाल ले जाने, उड़ाने या लगाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया है। साथ ही किसी भी उपकरण से रंग उड़ाने की भी अनुमति नहीं दी गई है।

    शाम की आरती में भी चढ़ेगा रंग

    संध्या आरती के दौरान भगवान महाकाल को एक लोटा केसर युक्त जल और लगभग 500 ग्राम गुलाल अर्पित किया जाएगा। यह सामग्री मंदिर की कोठार शाखा द्वारा भस्म आरती और शासकीय पुजारियों को उपलब्ध कराई जाएगी।

  • Odisha: दो हादसों में 5 स्कूली छात्रों की तालाब में डूबने से मौत

    Odisha: दो हादसों में 5 स्कूली छात्रों की तालाब में डूबने से मौत


    भुवनेश्वर।
    ओडिशा (Odisha) के कोरापुट और मयूरभंज जिलों (Koraput and Mayurbhanj districts) में शनिवार को अलग-अलग घटनाओं में पांच स्कूली छात्रों (Five School Students) की डूबने से मौत हो गई। इन दुखद घटनाओं ने राज्य को झकझोर कर रख दिया है, और घटनाओं पर बीजू जनता दल (बीजद) और विपक्षी कांग्रेस ने गहरा शोक व्यक्त किया है।


    कोरापुट में तीन छात्रों की दर्दनाक मौत

    कोरापुट जिले में, कोलंब तालाब में कक्षा 10 के तीन छात्रों की डूबने से मौत हो गई। ये छात्र अपने स्कूल से निकले थे और कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाएं खत्म होने के बाद अपने माता-पिता के आने का इंतजार कर रहे थे। परीक्षा पूरी होने की खुशी में वे पानी में खेलने चले गए, जहां वे डूब गए। स्थानीय लोगों ने छात्रों को बचाने की कोशिश की और उन्हें कोरापुट के शहीद लक्ष्मण नायक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस के अनुसार, यह घटना दोपहर 3 बजे से 3:30 बजे के बीच हुई। मरने वाले छात्रों की पहचान लिंगराज खिल (16), स्वस्तिक (15) और ओम प्रकाश (16) के रूप में हुई है। मृतकों के परिवार वालों ने स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है और घटना की जांच की मांग की है।


    मयूरभंज में दो बालिकाओं की डूबने से मौत

    मयूरभंज जिले में एक अन्य घटना में, कप्तपाड़ा पुलिस स्टेशन क्षेत्र के नछीपुर गांव के पास एक तालाब में नहाते समय दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली दो बालिकाओं की डूबने से मौत हो गई। सात वर्षीय सुभाषसंध्या नायक और आठ वर्षीय राजलक्ष्मी संखुआल, स्कूल से लौटने के बाद तालाब में नहाने गई थीं। जब परिवार वालों को घटना का पता चला, तो वे तुरंत तालाब की ओर भागे और दोनों बालिकाओं को बाहर निकाला। उन्हें कप्तपाड़ा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।


    राजनीतिक पार्टियों ने दी प्रतिक्रिया

    इन घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए, बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने ट्वीट कर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, ‘कोरापुट नवोदय विद्यालय के तीन छात्रों के तालाब में डूबने से हुई मौत की खबर दिल दहला देने वाली है। मैं दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं। मैं शोक संतप्त परिवारों और प्रियजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं, क्योंकि वे इस दुखद समय का सामना कर रहे हैं।’

    ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने भी सोशल मीडिया पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा, ‘कोरापुट के कोलंब जलाशय में डूबने से नवोदय विद्यालय के तीन छात्रों की दुखद मृत्यु से मैं बहुत आहत हूं। मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं। ईश्वर उन्हें इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति प्रदान करे।’

  • Women's Day: महिलाओं के सम्मान का दिन…. हाउसमेकर हो कामकाजी, जानें अपने ये 5 अधिकार

    Women's Day: महिलाओं के सम्मान का दिन…. हाउसमेकर हो कामकाजी, जानें अपने ये 5 अधिकार


    नई दिल्ली।
    हर साल की तरह आज भी 8 मार्च को पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) मनाया जा रहा है। ये दिन हर महिला को सम्मान (Women Respect) देने के लिए होता है, भले ही वो हाउसमेकर (Housemaker) हो, या फिर कामकाजी महिला (Working Woman) हों।

    महिला दिवस केवल उत्सव और सम्मान का दिन नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा और सशक्तिकरण के महत्व को समझने का अवसर भी है। सही जानकारी और जागरूकता ही महिलाओं को अपने जीवन में स्वतंत्र निर्णय लेने, समान अवसर पाने और समाज में सम्मान सुनिश्चित करने में मदद करती है।

    आज हम आपको पांच ऐसे अहम अधिकारों के बारे में बताएंगे, जिनका हर महिला को पता होना चाहिए। ये अधिकार न केवल उन्हें सशक्त बनाते हैं, बल्कि घर और समाज में उनकी सुरक्षा और सम्मान भी सुनिश्चित करते हैं। महिला दिवस पर इन अधिकारों को जानना और अपनाना हर महिला के लिए एक जरूरी कदम है।


    1. शिक्षा का अधिकार

    भारतीय संविधान की अनुच्छेद 15(1) और 15(3) महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को रोकते हैं और शिक्षा के समान अवसर सुनिश्चित करते हैं। ऐसे में कोई भी परिवार ये नहीं कह सकता कि वो सिर्फ अपने घर के लड़कों को पढ़ने भेजेगा, और लड़कियों को नहींं।


    2. स्वास्थ्य का अधिकार

    भारतीय कानून के तहत महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं मिलना अनिवार्य है। मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 सुरक्षित प्रसव और मातृत्व अवकाश सुनिश्चित करता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति और प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा को कानूनी मान्यता दी गई है।


    3. समान वेतन और रोजगार का अधिकार

    भारतीय संविधान का अनुच्छेद 39(a) और 39(d) समान वेतन और काम के समान अवसर सुनिश्चित करता है। इसके अलावा भेदभाव उन्मूलन अधिनियम 1976 के तहत पुरुष और महिला कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन देना अनिवार्य है।


    4. सुरक्षा का अधिकार

    भारतीय संविधान की अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देती है। इसके अलावा महिला सुरक्षा कानून जैसे घरेलू हिंसा अधिनियम 2005, शोषण रोकथाम अधिनियम और धारा 498A महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।


    5. संपत्ति और आर्थिक स्वतंत्रता का अधिकार

    भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 2005 के तहत बेटियों को पिता की संपत्ति में बराबर हिस्सा मिलता है। इसके अलावा अनुच्छेद 15 और 19 महिलाओं को आर्थिक निर्णय और व्यापार करने का अधिकार भी सुनिश्चित करते हैं। महिलाएं अपने बैंक खाता और निवेश पर स्वतंत्र निर्णय ले सकती हैं।

  • इंदौर में आज पारंपरिक गेर में मिसाइलों से उड़ेगा रंग, टेसू के फूलों से बने गुलाल से सजेगा राजवाड़ा

    इंदौर में आज पारंपरिक गेर में मिसाइलों से उड़ेगा रंग, टेसू के फूलों से बने गुलाल से सजेगा राजवाड़ा


    इंदौर।
    मालवा की सांस्कृतिक राजधानी इंदौर में आज रविवार को रंगों का सबसे बड़ा और भव्य उत्सव देखने को मिलेगा। पारंपरिक गेर के साथ पूरा पश्चिम क्षेत्र रंगों से सराबोर हो जाएगा। लाखों लोग इस अनूठे रंगोत्सव में शामिल होकर गुलाल और रंगों की बौछारों का आनंद लेंगे।

    गेर के साथ ही शहर में फागयात्रा भी निकलेगी, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल होंगी। आयोजकों ने इस भव्य आयोजन के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। कार्यक्रम के दौरान हजारों किलो गुलाल उड़ाया जाएगा, जिससे शहर का माहौल पूरी तरह रंगमय हो जाएगा।

    70 साल पुरानी परंपरा

    यह परंपरागत गेर राजवाड़ा से निकाली जाती है और इसका इतिहास करीब सात दशक पुराना है। शुरुआत में बड़े कड़ावों में रंग भरकर लोगों को भिगोने की परंपरा थी। समय के साथ यह आयोजन बैलगाड़ियों और ट्रैक्टरों से होते हुए डीजे और आधुनिक तकनीक तक पहुंच गया। अब गेर में रंग बरसाने के लिए विशेष मिसाइल तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे रंग और पानी करीब 200 फीट तक हवा में उछाला जाएगा।

    लाखों लोग बनेंगे रंगोत्सव के साक्षी

    पिछले तीन वर्षों से गेर में शामिल होने वाले लोगों की संख्या 5 लाख से अधिक रही है। यही वजह है कि यह आयोजन देश के सबसे बड़े रंगोत्सवों में गिना जाने लगा है। इस बार भी लाखों लीटर पानी और हजारों किलो गुलाल उड़ाने की तैयारी की गई है। राजवाड़ा और आसपास के 5 से 6 किलोमीटर क्षेत्र में रंग, गुलाल और पानी की बौछारें देखने को मिलेंगी।

    टेसू के फूलों से बने गुलाल से बनेगा तिरंगा

    इस आयोजन की खास बात यह है कि करीब 8 हजार किलो टेसू के फूलों से तैयार गुलाल का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे राजवाड़ा पर तिरंगा बनाया जाएगा, जो उत्सव का विशेष आकर्षण होगा।

    ढोल-ताशे, झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

    गेर में बैंड, ढोल-ताशे, आकर्षक झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी देखने को मिलेंगी। गेर और फागयात्रा अपने-अपने तय मार्गों से निकलकर शहरवासियों को रंगों के इस महासागर में डुबो देंगी।

  • मुख्यमंत्री आज रंगपंचमी पर उज्जैन में श्री कृष्ण-सुदामा रंग उत्सव में होंगे शामिल

    मुख्यमंत्री आज रंगपंचमी पर उज्जैन में श्री कृष्ण-सुदामा रंग उत्सव में होंगे शामिल


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज रविवार को रंग पंचमी के अवसर पर उज्जैन में आयोजित श्री कृष्ण-सुदामा रंग उत्सव कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. यादव सुबह 09 बजे श्री कृष्ण सुदामा रंग उत्सव गेर (चल समारोह) में सिंधी कॉलोनी से सम्मिलित होकर टॉवर चौराहे तक जाएंगे। टॉवर चौराहे पर मुख्य कार्यक्रम आयोजित होंगे। इन सभी कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री सम्मिलित होंगे। रंग उत्सव कार्यक्रम में सामाजिक संस्थाओं द्वारा स्वागत द्वार, मंच लगाकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत किया जाएगा। इस अवसर पर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्र से आने वाली मंडली, झांकियां, फाग उत्सव करने वाले संस्थाओं के द्वारा विशेष आयोजन भी किए जाएंगे। लाइव झांकियां भी इस कार्यक्रम में सम्मिलित होगी।

  • DIY होम डेकोर ट्रिक: 20 लीटर की पुरानी पानी की केन से बनाएं मिनी पॉन्ड, फ्री में मिलेगा गार्डन जैसा लुक

    DIY होम डेकोर ट्रिक: 20 लीटर की पुरानी पानी की केन से बनाएं मिनी पॉन्ड, फ्री में मिलेगा गार्डन जैसा लुक

    नई दिल्ली।आजकल लोग अपने घर और गार्डन को सजाने के लिए महंगे डेकोरेशन आइटम खरीदते हैं लेकिन कई बार घर में मौजूद बेकार सामान से भी बेहद खूबसूरत सजावट की जा सकती है। अगर आप भी घर को नेचुरल और यूनिक लुक देना चाहते हैं तो एक साधारण 20 लीटर की पानी की केन से शानदार मिनी पॉन्ड बनाया जा सकता है। यह एक आसान और क्रिएटिव DIY आइडिया है जो कम मेहनत में आपके घर की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा सकता है।

    सोशल मीडिया पर इन दिनों ऐसे कई DIY आइडिया वायरल हो रहे हैं जिनमें बेकार सामान को इस्तेमाल कर नई चीजें बनाई जा रही हैं। इसी तरह एक वीडियो में दिखाया गया है कि किस तरह साधारण वाटर केन को एक खूबसूरत प्लांटेड मिनी पॉन्ड में बदला जा सकता है। अगर आप गार्डनिंग के शौकीन हैं तो यह आइडिया आपके लिए बेहद काम का साबित हो सकता है।

    मिनी पॉन्ड बनाने के लिए सबसे पहले एक खाली 20 लीटर की पानी की केन लें और उसे अच्छी तरह साफ कर लें। केन जितनी साफ होगी अंदर का दृश्य उतना ही साफ और आकर्षक दिखाई देगा। इसके बाद केन के निचले हिस्से को सावधानी से काट लें ताकि वह खुला टैंक जैसा दिखने लगे।

    इसके बाद केन के ढक्कन में एक छोटा सा छेद करें और उसमें एक प्लास्टिक की टोटी फिट कर दें। यह टोटी बाद में पानी निकालने और सफाई करने के काम आएगी। जब टोटी फिट हो जाए तो ढक्कन को केन में अच्छी तरह बंद कर दें।

    मिनी पॉन्ड बनाते समय सबसे बड़ी समस्या पानी के रिसाव की हो सकती है। इसलिए ढक्कन को बंद करने से पहले उस पर टेफ्लॉन टेप अच्छी तरह लपेट दें ताकि पानी बाहर न निकले। इसके अलावा सुरक्षा के लिए ढक्कन और टोटी वाली जगह को एम सील से भी सील कर सकते हैं। इससे पानी का रिसाव पूरी तरह रुक जाता है।

    इसके बाद केन को उल्टा करके सेट करें और उसमें पानी भर दें। अब इसमें छोटे-छोटे जलीय पौधे लगाए जा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर रोटाला रोटुंडिफोलिया ग्रीन नाम का पौधा छोटे प्लास्टिक कंटेनर में एक्वेरियम सॉइल के साथ लगाया जा सकता है। इसके अलावा एनुबियास जैसे पौधे भी इसमें लगाए जा सकते हैं। एनुबियास की खासियत यह है कि इसे मिट्टी की जरूरत नहीं होती और यह पत्थर या लकड़ी के सहारे भी आसानी से बढ़ जाता है।

    अगर आप चाहें तो इस मिनी पॉन्ड में छोटी मछलियां और झींगे भी रख सकते हैं। लेकिन चूंकि इसमें कोई फिल्टर नहीं लगाया जाता इसलिए बहुत ज्यादा जीव नहीं रखने चाहिए। इसमें एम्बर टेट्रा जैसी छोटी मछलियां और कुछ झींगे रखना बेहतर माना जाता है ताकि पानी ज्यादा गंदा न हो और बायोलोड कम बना रहे।

    पौधों को सही तरीके से बढ़ने के लिए रोशनी भी जरूरी होती है। इसके लिए एक साधारण एक्वेरियम एलईडी लाइट का इस्तेमाल किया जा सकता है जिसे रोजाना लगभग सात घंटे तक जलाया जा सकता है। इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और मिनी पॉन्ड देखने में भी बेहद खूबसूरत लगता है।

    पानी की सफाई के लिए केन में लगी टोटी काफी मददगार होती है। जब भी पानी बदलना हो तो नीचे लगे टैप को खोलकर आसानी से पानी निकाला जा सकता है और नया पानी डाला जा सकता है।

    इस तरह घर में पड़ी एक साधारण और बेकार पानी की केन को इस्तेमाल कर आप बेहद खूबसूरत मिनी पॉन्ड बना सकते हैं। यह न केवल घर की सजावट को खास बनाता है बल्कि गार्डनिंग के शौकीनों के लिए भी एक शानदार और किफायती आइडिया साबित होता है।

  • Women’s Day Special: पैरों की थकान से राहत दिलाएगा टोगा योगा, 5 मिनट की ये एक्सरसाइज देगी शरीर और दिमाग को एनर्जी

    Women’s Day Special: पैरों की थकान से राहत दिलाएगा टोगा योगा, 5 मिनट की ये एक्सरसाइज देगी शरीर और दिमाग को एनर्जी


    नई दिल्ली। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में महिलाएं एक साथ कई जिम्मेदारियां निभाती हैं। घर संभालना, ऑफिस का काम करना और परिवार की देखभाल करना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। ऐसे में अक्सर महिलाएं अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। दिनभर खड़े रहना, ज्यादा चलना या लंबे समय तक बैठकर काम करना पैरों में दर्द, सूजन और थकान का कारण बन सकता है।

    इन्हीं समस्याओं से राहत दिलाने के लिए एक बेहद आसान और असरदार एक्सरसाइज है टोगा योगा। यह एक सरल फुट एक्सरसाइज है जो पैरों की उंगलियों और तलवों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करती है। टोगा शब्द Toe यानी पैर की उंगलियों और Yoga यानी योग से मिलकर बना है। इसे करने के लिए किसी विशेष उपकरण या ज्यादा समय की जरूरत नहीं होती। दिन में सिर्फ पांच मिनट इस एक्सरसाइज को करने से शरीर और दिमाग दोनों को नई ऊर्जा मिल सकती है।

    टोगा योगा में पैरों की उंगलियों को अलग अलग तरीके से हिलाया और स्ट्रेच किया जाता है। देखने में यह एक्सरसाइज बहुत आसान लगती है लेकिन इसके फायदे काफी प्रभावी होते हैं। हमारे पैरों में कई छोटी छोटी मांसपेशियां होती हैं जो शरीर के संतुलन, चलने फिरने और खड़े रहने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। टोगा योगा इन मांसपेशियों को सक्रिय और मजबूत बनाने में मदद करता है।

    इस एक्सरसाइज का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। जब पैरों की मसल्स मजबूत होती हैं तो लंबे समय तक खड़े रहने या चलने के दौरान थकान कम महसूस होती है। खासतौर पर उन महिलाओं के लिए यह एक्सरसाइज काफी फायदेमंद हो सकती है जिन्हें काम के दौरान लंबे समय तक खड़ा रहना पड़ता है।

    टोगा योगा करने से पैरों में ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है। जब पैरों की उंगलियों को हिलाया और स्ट्रेच किया जाता है तो रक्त प्रवाह में सुधार होता है जिससे सूजन और भारीपन की समस्या कम हो सकती है। बेहतर ब्लड सर्कुलेशन पूरे शरीर में ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करता है।

    यह एक्सरसाइज मानसिक तनाव और थकान को कम करने में भी सहायक मानी जाती है। जब हम ध्यानपूर्वक पैरों की मांसपेशियों को स्ट्रेच करते हैं तो शरीर में रिलैक्सेशन का एहसास होता है। इससे दिनभर की थकान कम होती है और मन भी शांत महसूस करता है।

    टोगा योगा करने के लिए कुछ आसान एक्सरसाइज अपनाई जा सकती हैं। इसमें टो स्प्रेड एक्सरसाइज के तहत पैरों की सभी उंगलियों को फैलाकर कुछ सेकंड तक उसी स्थिति में रखा जाता है। बिग टो लिफ्ट में पैर की बाकी उंगलियों को जमीन पर रखते हुए केवल अंगूठे को ऊपर उठाने की कोशिश की जाती है। टो कर्ल एक्सरसाइज में पैरों की उंगलियों को अंदर की ओर मोड़कर फिर सीधा किया जाता है। टो टैपिंग में उंगलियों को धीरे धीरे जमीन पर टैप किया जाता है। वहीं तौलिया ग्रिप एक्सरसाइज में जमीन पर रखे छोटे तौलिये को पैरों की उंगलियों से पकड़कर अपनी ओर खींचा जाता है।

    महिलाएं अक्सर अपने परिवार और काम की जिम्मेदारियों के बीच खुद को समय नहीं दे पातीं। लेकिन दिन में सिर्फ कुछ मिनट का यह छोटा सा प्रयास सेहत के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है। टोगा योगा एक ऐसी आसान और प्रभावी एक्सरसाइज है जिसे रोजाना अपनाकर पैरों की मजबूती, बेहतर ब्लड सर्कुलेशन और मानसिक राहत हासिल की जा सकती है।

  • Women’s Day Special: साइलेंट बोन लॉस से बचना है तो अपनाएं ये 6 हेल्थ टिप्स, 30 के बाद महिलाओं के लिए बेहद जरूरी

    Women’s Day Special: साइलेंट बोन लॉस से बचना है तो अपनाएं ये 6 हेल्थ टिप्स, 30 के बाद महिलाओं के लिए बेहद जरूरी


    नई दिल्ली। हर साल 8 मार्च को दुनिया भर में विमेंस डे मनाया जाता है। यह दिन केवल महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए ही नहीं बल्कि उनकी सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए भी खास माना जाता है। अक्सर महिलाएं परिवार और काम की जिम्मेदारियों में इतनी व्यस्त हो जाती हैं कि अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। खासतौर पर 30 की उम्र के बाद शरीर में कई ऐसे बदलाव शुरू हो जाते हैं जिनका असर हड्डियों की मजबूती पर भी पड़ता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कई महिलाओं में 30 साल की उम्र के बाद बोन डेंसिटी धीरे धीरे कम होने लगती है। हड्डियों के कमजोर होने की इस प्रक्रिया को मेडिकल भाषा में ऑस्टियोपोरोसिस या साइलेंट बोन लॉस कहा जाता है। इसे साइलेंट बीमारी इसलिए कहा जाता है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण साफ दिखाई नहीं देते। जब तक इसका पता चलता है तब तक कई बार हड्डियां काफी कमजोर हो चुकी होती हैं और मामूली चोट में भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक महिलाओं में हड्डियों के कमजोर होने का सबसे बड़ा कारण शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का कम होना है। यह हार्मोन हड्डियों को मजबूत रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जैसे जैसे उम्र बढ़ती है और खासकर मेनोपॉज के दौरान इसका स्तर तेजी से घटने लगता है। इसके अलावा कैल्शियम और विटामिन D की कमी भी हड्डियों को कमजोर बना सकती है।

    आज की लाइफस्टाइल भी इस समस्या को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। लंबे समय तक बैठकर काम करना, एक्सरसाइज न करना और शारीरिक गतिविधियों की कमी हड्डियों को कमजोर कर सकती है। वहीं धूम्रपान और अधिक शराब का सेवन भी शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को प्रभावित करता है जिससे हड्डियों की ताकत धीरे धीरे कम होने लगती है।

    कुछ मामलों में पारिवारिक इतिहास भी इस समस्या का कारण बन सकता है। अगर परिवार में किसी को पहले से ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या रही है तो महिलाओं में इसका खतरा ज्यादा हो सकता है। इसके अलावा बहुत कम वजन वाली महिलाओं में भी हड्डियों के कमजोर होने की संभावना अधिक रहती है।

    साइलेंट बोन लॉस का खतरा इसलिए भी ज्यादा माना जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण आसानी से समझ नहीं आते। कई बार हल्की चोट में भी हड्डी टूट जाना, कमर या पीठ में लगातार दर्द रहना, शरीर का झुकना या उम्र के साथ लंबाई का धीरे धीरे कम होना इसके संकेत हो सकते हैं। इसलिए विशेषज्ञ समय समय पर बोन डेंसिटी टेस्ट कराने की सलाह देते हैं ताकि हड्डियों की स्थिति का सही पता चल सके।

    हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए सही खानपान और स्वस्थ जीवनशैली बेहद जरूरी है। कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर आहार जैसे दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, बादाम, अखरोट और मछली का सेवन हड्डियों के लिए फायदेमंद माना जाता है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह से सप्लीमेंट भी लिए जा सकते हैं।

    इसके अलावा नियमित व्यायाम भी हड्डियों की मजबूती के लिए बहुत जरूरी है। रोजाना वॉकिंग, योग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और हल्की एक्सरसाइज करने से हड्डियां मजबूत रहती हैं और शरीर भी एक्टिव बना रहता है।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि कैफीन और शराब का अधिक सेवन करने से बचना चाहिए और धूम्रपान से दूरी बनाकर रखना चाहिए। साथ ही मानसिक तनाव को कम करने के लिए योग और मेडिटेशन जैसी आदतें अपनाना भी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है।

    महिलाओं के लिए जरूरी है कि वे अपनी सेहत को प्राथमिकता दें और समय समय पर हेल्थ चेकअप कराएं। सही डाइट, एक्टिव लाइफस्टाइल और नियमित जांच की मदद से हड्डियों को लंबे समय तक मजबूत और स्वस्थ रखा जा सकता है।

  • आज रंग पंचमी पर लगाएं लड्डू गोपाल को ये प्रिय भोग, घर में बनी रहेगी सुख, समृद्धि और खुशहाली

    आज रंग पंचमी पर लगाएं लड्डू गोपाल को ये प्रिय भोग, घर में बनी रहेगी सुख, समृद्धि और खुशहाली


    नई दिल्ली । रंग पंचमी का त्योहार भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और उनकी लीलाओं से जुड़ा हुआ माना जाता है। होली के पांच दिन बाद आने वाला यह पर्व भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है और इस दिन कई घरों और मंदिरों में लड्डू गोपाल का श्रृंगार और पूजा होती है। माना जाता है कि जिस घर में लड्डू गोपाल की सेवा होती है वहां हमेशा सुख समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है।

    भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल को बच्चे की तरह ही समझा जाता है। उनकी देखभाल और पूजा भी उसी तरह की जाती है जैसे घर के छोटे बच्चों की। त्योहारों के समय उनके लिए विशेष मिठाइयाँ और व्यंजन बनाना एक परंपरा रही है। रंग पंचमी पर भी भक्त लड्डू गोपाल का श्रृंगार करते हैं और उन्हें स्वादिष्ट भोग अर्पित करते हैं।

    इस दिन लड्डू गोपाल को भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है। सबसे प्रिय माना जाने वाला भोग गुजिया है। होली के समय बनने वाली यह मिठाई भगवान को बहुत प्रिय मानी जाती है। कई घरों और मंदिरों में रंग पंचमी पर सबसे पहले गुजिया लड्डू गोपाल को अर्पित की जाती है। माना जाता है कि इससे भगवान प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। गुजिया के अलावा चंद्रकला और अन्य पारंपरिक मिठाइयाँ भी भोग में लगाई जाती हैं।

    भगवान श्रीकृष्ण को दही बहुत प्रिय है इसलिए इस दिन लड्डू गोपाल को दही या मीठी दही का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। अगर घर में दही से कोई व्यंजन उपलब्ध हो तो उसे भी अर्पित किया जा सकता है। केवल दही और चीनी मिलाकर भोग लगाना भी भगवान को प्रिय होता है और इससे परिवार में प्रेम और आपसी सद्भाव बना रहता है।

    जलेबी और मालपुए का भोग भी इस दिन लगाना विशेष लाभकारी माना जाता है। कई मंदिरों में रंग पंचमी पर जलेबी और मालपुए का भोग विशेष रूप से लगाया जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और भगवान की कृपा से घर में खुशहाली आती है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान को भोग लगाने में सबसे महत्वपूर्ण तत्व श्रद्धा और भक्ति है। अगर भक्त सच्चे मन से भोग अर्पित करता है तो भगवान प्रसन्न होते हैं। इसलिए रंग पंचमी पर लड्डू गोपाल की सेवा करते समय प्रेम और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। भोग लगाने के बाद भगवान की आरती करना और प्रसाद को परिवार में बाँटना भी शुभ माना जाता है।

    रंग पंचमी का त्योहार ब्रज क्षेत्र की परंपराओं से जुड़ा है जहां इस दिन रंगों और गुलाल के साथ भगवान कृष्ण की पूजा होती है। मंदिरों में भजन-कीर्तन और उत्सव का आयोजन किया जाता है। यह पर्व प्रेम भक्ति और आनंद का प्रतीक है और भक्त इस दिन भगवान श्रीकृष्ण से सुख समृद्धि और शांति की कामना करते हैं।

    घर में लड्डू गोपाल की पूजा सुबह स्नान के बाद करें। सबसे पहले उनका श्रृंगार करें उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और फूलों से सजाएं। इसके बाद मिठाइयाँ और दही का भोग लगाएं भगवान की आरती करें और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करें। छोटे बच्चों को पूजा में शामिल करना भी शुभ माना जाता है क्योंकि इससे उनमें भगवान के प्रति श्रद्धा और भक्ति बढ़ती है।