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  • अगले हफ्ते शेयर बाजार में IPO की बारिश, 4 कंपनियां खोलेंगी पब्लिक इश्यू, निवेशकों के लिए बड़ा मौका

    अगले हफ्ते शेयर बाजार में IPO की बारिश, 4 कंपनियां खोलेंगी पब्लिक इश्यू, निवेशकों के लिए बड़ा मौका

    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए अगला हफ्ता बेहद अहम रहने वाला है। 9 मार्च से शुरू होने वाले सप्ताह में देश में चार नए आईपीओ खुलने जा रहे हैं। इनमें से तीन पब्लिक इश्यू मेनबोर्ड सेगमेंट से जुड़े हैं जबकि एक आईपीओ एसएमई सेगमेंट का है। इसके अलावा पहले से खुले दो आईपीओ में भी निवेश का मौका मिलेगा। ऐसे में निवेशकों के पास अलग अलग सेक्टर की कंपनियों में पैसा लगाने का अच्छा अवसर रहेगा।

    आने वाले सप्ताह में जिन कंपनियों के आईपीओ खुलने वाले हैं उनमें राजपूताना स्टेनलेस, इनोविजन, एप्सिस एरोकॉम और राजमार्ग इंफ्रा इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट शामिल हैं। इन कंपनियों के जरिए बाजार से हजारों करोड़ रुपये जुटाने की योजना है।

    सबसे पहले राजपूताना स्टेनलेस का आईपीओ 9 मार्च को खुलेगा और 11 मार्च को बंद होगा। यह लगभग 254.98 करोड़ रुपये का इश्यू है। कंपनी ने इसके लिए 116 से 122 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है और एक लॉट में 110 शेयर होंगे। इस कंपनी के शेयर 16 मार्च को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होने की संभावना है।

    इसके बाद इनोविजन का आईपीओ 10 मार्च को खुलेगा और 12 मार्च को बंद होगा। कंपनी का लक्ष्य लगभग 322.84 करोड़ रुपये जुटाना है। इसके लिए 521 से 548 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है और एक लॉट में 27 शेयर शामिल होंगे। कंपनी के शेयर 17 मार्च को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध हो सकते हैं।

    तीसरा आईपीओ एप्सिस एरोकॉम का है जो 11 मार्च को खुलेगा और 13 मार्च को बंद होगा। यह एसएमई सेगमेंट का इश्यू है और कंपनी करीब 35.77 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इसके लिए 104 से 110 रुपये प्रति शेयर का प्राइस तय किया गया है और लॉट साइज 1200 शेयर का है। इस कंपनी के शेयर 18 मार्च को एनएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होने की संभावना है।

    इसके अलावा राजमार्ग इंफ्रा इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट का बड़ा आईपीओ भी 11 मार्च को खुलेगा और 13 मार्च को बंद होगा। करीब 6000 करोड़ रुपये के इस इश्यू के लिए कंपनी ने 99 से 100 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। इस कंपनी के शेयर 24 मार्च को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होने की उम्मीद है।

    इन नए आईपीओ के अलावा दो ऐसे आईपीओ भी हैं जो पहले से खुले हुए हैं और जिनमें निवेशक अब भी पैसा लगा सकते हैं। एल्फिन एग्रो इंडिया का आईपीओ 5 मार्च को खुला था और 9 मार्च को बंद होगा। कंपनी करीब 25.03 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है और इसका प्राइस 47 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। एक लॉट में 3000 शेयर हैं और कंपनी के शेयर 12 मार्च को बीएसई एसएमई पर लिस्ट होने की संभावना है।

    वहीं श्रीनिबासा प्रधान कंस्ट्रक्शन्स का आईपीओ 6 मार्च को खुला था और 10 मार्च को बंद होगा। करीब 20.32 करोड़ रुपये के इस इश्यू को अभी तक लगभग 9 प्रतिशत सब्सक्रिप्शन मिला है। इसके लिए 91 से 98 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड रखा गया है और लॉट साइज 1200 शेयर है। कंपनी के शेयर 13 मार्च को एनएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर डेब्यू कर सकते हैं।

    आने वाला सप्ताह आईपीओ बाजार के लिहाज से काफी व्यस्त रहने वाला है। मेनबोर्ड और एसएमई दोनों सेगमेंट में कई कंपनियां बाजार में उतर रही हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे निवेश करने से पहले कंपनियों के कारोबार, वित्तीय स्थिति और जोखिम कारकों का सावधानी से विश्लेषण करें, ताकि सही निर्णय लेकर बेहतर रिटर्न हासिल किया जा सके।

  • पूजा सामग्री का पुनः उपयोग: शास्त्र क्या कहते हैं, जानें नियम और अपवाद

    पूजा सामग्री का पुनः उपयोग: शास्त्र क्या कहते हैं, जानें नियम और अपवाद


    नई दिल्ली । पूजा-पाठ के दौरान अक्सर घरों में यह सवाल उठता है कि क्या भगवान को अर्पित की गई सामग्री को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। कई लोग फूल माला अक्षत या जल को फिर से पूजा में उपयोग कर लेते हैं। लेकिन हिंदू शास्त्र इस विषय में स्पष्ट नियम बताते हैं। पूजा की शुद्धता और पवित्रता को बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और इसी वजह से पूजा सामग्री के पुनः उपयोग को लेकर कुछ दिशानिर्देश तय किए गए हैं।

    शास्त्रों में पूजा में अर्पित सामग्री को निर्माल्य कहा गया है। इसका अर्थ है वह सामग्री जो एक बार भगवान को अर्पित की जा चुकी हो। नियम के अनुसार जो फूल माला या अक्षत भगवान को अर्पित कर दिए जाते हैं वे उनके प्रसाद का हिस्सा बन जाते हैं। इन्हें दोबारा धोकर या साफ करके पूजा में इस्तेमाल करना अशुद्ध माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से पूजा का पूरा फल प्राप्त नहीं होता और भगवान को अर्पण का महत्व भी कम हो जाता है।

    जल और दीपक के संबंध में भी शास्त्र स्पष्ट हैं। पूजा में इस्तेमाल होने वाला जल हमेशा ताजा होना चाहिए। अगर कलश में रखा जल किसी कारण अशुद्ध स्पर्श में आ जाए तो उसे फिर से पूजा में उपयोग नहीं करना चाहिए। इसी प्रकार तांबे या पीतल के बर्तनों को हर पूजा के बाद शुद्ध मिट्टी या नींबू से धोकर ही इस्तेमाल करना चाहिए। दीपक जलाते समय पुराने दीये की जली हुई बत्ती और बचा हुआ तेल हटा देना चाहिए। इससे पूजा की पवित्रता और नियमों का पालन सुनिश्चित होता है।

    हालांकि कुछ अपवाद भी हैं। गंगाजल को कभी बासी नहीं माना जाता इसलिए इसे बार-बार उपयोग किया जा सकता है। तुलसी के पत्तों को भी विशेष परिस्थितियों में धोकर दोबारा अर्पित किया जा सकता है। इसी तरह भगवान की मूर्ति शालिग्राम घंटी शंख मंत्र जाप की माला और पूजा के धातु के पात्रों को धोकर पुनः इस्तेमाल किया जा सकता है।

    कुछ सामग्री को दोबारा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि भगवान शिव को अर्पित बेलपत्र को भी बशर्ते खंडित या दागदार न हो दोबारा अर्पित किया जा सकता है। लेकिन फूल माला भोग चंदन कुमकुम धूप-दीप नारियल अक्षत या दीपक में बचा तेल दोबारा पूजा में नहीं इस्तेमाल करना चाहिए। पूजा सामग्री का सम्मान करना ही धार्मिक नियमों का पालन माना जाता है और इससे श्रद्धालु को आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    इस प्रकार पूजा सामग्री के पुनः उपयोग में शास्त्र के नियमों और अपवादों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। इससे पूजा की पवित्रता भगवान को अर्पण की श्रद्धा और धार्मिक परंपराओं की महत्ता बनी रहती है। श्रद्धालु इस नियम का पालन करके पूजा के दौरान आध्यात्मिक लाभ और मानसिक संतोष प्राप्त कर सकते हैं।

  • मिडिल ईस्ट संकट के बीच अन्ना हजारे ने भारत से वैश्विक शांति की भूमिका निभाने का आग्रह किया

    मिडिल ईस्ट संकट के बीच अन्ना हजारे ने भारत से वैश्विक शांति की भूमिका निभाने का आग्रह किया

    नई दिल्ली। समाजसेवी अन्ना हजारे ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर भारत से शांति और संवाद की पहल करने का आग्रह किया। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि वर्तमान समय में दुनिया अत्यंत चिंताजनक परिस्थितियों से गुजर रही है। विभिन्न देशों के बीच बढ़ते तनाव और संघर्ष से सामान्य नागरिकों का जीवन असुरक्षित हो रहा है। विशेषकर महिलाओं, बच्चों और परिवारों पर इसका असर पीड़ादायक है।

    अन्ना हजारे ने कहा कि भारत की संस्कृति हमेशा अहिंसा और शांति की रही है। हमारे देश ने विश्व को संवाद और शांति का मार्ग दिखाने का प्रयास किया है। ऐसे समय में भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक राष्ट्र की ओर से मानवता और शांति का संदेश देना अत्यंत आवश्यक है।

    उन्होंने पत्र में लिखा, “आज दुनिया को हथियारों की नहीं, बल्कि विश्वास और संवाद की जरूरत है। युद्ध से केवल विनाश होता है, जबकि संवाद से समाधान और स्थिरता की राह निकलती है। इसलिए मेरी आपसे विनम्र प्रार्थना है कि भारत तटस्थ और जिम्मेदार भूमिका निभाते हुए वैश्विक स्तर पर शांति और संवाद को बढ़ावा दे।”

    अन्ना हजारे ने पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने कई वैश्विक मुद्दों पर सकारात्मक भूमिका निभाई है। इसलिए इस संवेदनशील समय में यदि भारत मानवता और शांति के पक्ष में आगे आता है, तो यह पूरे विश्व के लिए प्रेरणादायक होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि मानवता के हित और निरपराध नागरिकों की सुरक्षा के लिए भारत को शांति का मार्ग आगे बढ़ाना चाहिए।

    पिछले एक हफ्ते में मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है। इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमले किए, जिनमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई समेत कई उच्च सैन्य अधिकारी मारे गए। बदले में ईरान ने मिडिल ईस्ट के कई देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। यह संघर्ष अब भी जारी है और वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा कर रहा है।

    अन्ना हजारे का पत्र इस बात पर जोर देता है कि इस जटिल वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका न केवल तटस्थ बल्कि सक्रिय रूप से शांति और संवाद को बढ़ावा देने वाली होनी चाहिए। उनका मानना है कि भारत यदि इस समय जिम्मेदार पहल करता है, तो यह न केवल वैश्विक स्थिरता के लिए बल्कि मानवता के हित में भी एक प्रेरक उदाहरण बन सकता है।

  • सीएम रेखा गुप्ता का संदेश: बेटियों को अवसर और आजादी दें, समाज और परिवार भी उठाएं जिम्मेदारी

    सीएम रेखा गुप्ता का संदेश: बेटियों को अवसर और आजादी दें, समाज और परिवार भी उठाएं जिम्मेदारी

    नई दिल्ली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महिला बुद्धिजीवियों के राष्ट्रीय सम्मेलन ‘भारती-नारी से नारायणी’ को संबोधित करते हुए कहा कि महिला सशक्तीकरण सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर परिवार और समाज की जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के लिए लगातार योजनाएं चला रही है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने पैरों पर खड़ी हो सकें, लेकिन समाज को भी बेटियों को अवसर और आजादी देने की जिम्मेदारी उठानी होगी।

    सीएम रेखा गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने लाल किले से खुले में शौच बंद करने और शौचालय बनाने की बात की। इससे पहले समाज और राजनीति में इसे गंभीरता से नहीं लिया गया था। प्रधानमंत्री की पहल से लाखों शौचालय बनाए गए और महिलाओं का जीवन आसान हुआ। पहले महिलाओं को घर में अंगीठी पर लकड़ी जलानी पड़ती थी, लेकिन अब गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उनका जीवन सुरक्षित और आरामदायक हुआ।

    उन्होंने महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक अधिकार भी दिए जाने का जिक्र किया। चाहे बैंक अकाउंट खोलना हो, मुद्रा लोन लेना हो, महिलाओं के नाम घर देना हो या राजनीति में 33 प्रतिशत आरक्षण देना हो, सरकार और प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं के लिए नए रास्ते खोले हैं।

    रेखा गुप्ता ने दिल्ली सरकार की नई योजना ‘लखपति बिटिया योजना’ का भी उल्लेख किया। इस योजना के तहत बेटी की शिक्षा को ग्रेजुएशन तक पूरा करने पर उसके खाते में जन्म से लेकर हर पड़ाव पर पैसा जमा किया जाएगा, जिससे लगभग सवा लाख रुपये तक की राशि बेटी को मिल सकेगी और वह आत्मनिर्भर बन सके। पहले यह योजना केवल दसवीं तक ही सीमित थी।

    सीएम ने समाजसेवा और महिलाओं की मदद के लिए काम करने वाले संगठनों, जैसे सेविका समिति का समर्थन करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने माता-पिता से कहा कि अपनी बेटियों को हर अवसर और निर्णय लेने की आजादी दें। जो मौके आपको नहीं मिले, वह अपनी बेटी को जरूर दें। जब हर मां अपनी बेटी के लिए रास्ता बनाएगी, तो समाज भी अपने आप ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला सशक्तीकरण केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर नहीं है। परिवार, समाज और संगठन मिलकर ही महिलाओं को वास्तविक अवसर और आजादी दे सकते हैं। तभी कोई महिला अपनी क्षमता और सोच के अनुसार किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती है।

    सीएम रेखा गुप्ता का यह संदेश महिलाओं के अधिकारों और समाज की भूमिका को उजागर करता है और हर स्तर पर महिला सशक्तीकरण की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

  • Kharmas 2026 : एक माह तक मांगलिक कार्यों पर ब्रेक, जानें पवित्र स्नान और वर्जित कार्य

    Kharmas 2026 : एक माह तक मांगलिक कार्यों पर ब्रेक, जानें पवित्र स्नान और वर्जित कार्य


    नई दिल्ली । साल का दूसरा खरमास 2026 बस कुछ ही दिनों में शुरू होने वाला है। ज्योतिष गणना के अनुसार जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं उसी समय को खरमास कहा जाता है। इस वर्ष वैदिक पंचांग के अनुसार सूर्य 14 मार्च को मीन राशि में गोचर करेंगे जिससे साल का दूसरा खरमास प्रारंभ होगा। पहले खरमास की अवधि 16 दिसंबर से 14 जनवरी तक रही थी।

    हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस वर्ष खरमास की अवधि चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि से लेकर वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि तक होगी। इस समय के दौरान धार्मिक और मांगलिक कार्यों पर ब्रेक लगाया जाता है। इस अवधि को विशेष ध्यान और संयम का समय माना जाता है।

    धार्मिक मान्यता है कि खरमास में पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ होता है। ऐसा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है। इस दौरान नदी में दीपदान करना भी शुभ फलदायी माना जाता है। इसलिए श्रद्धालु इस समय साधना और आत्मशुद्धि पर अधिक ध्यान देते हैं।

    खरमास में कई मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। इस दौरान विवाह करना शुभ नहीं माना जाता। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि यदि इस समय विवाह किया जाए तो दांपत्य जीवन में परेशानियां और भावनात्मक दूरी बढ़ सकती है। इसके अलावा गृह प्रवेश नया घर बनवाना और अन्य शुभ कार्य भी नहीं किए जाते।

    नए कार्यों की शुरुआत से भी बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस समय कोई नया व्यवसाय या निवेश शुरू करने से आर्थिक हानि और कार्यों में सफलता नहीं मिलती। इसी प्रकार मुंडन संस्कार नामकरण और अन्य मांगलिक कार्य भी इस अवधि में नहीं किए जाते। इस समय को संयम साधना जप-तप और आत्मचिंतन का समय माना जाता है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार खरमास के दौरान धार्मिक नियमों का पालन करना व्यक्ति के लिए लाभकारी होता है। इस समय अपने कर्तव्यों और साधना पर ध्यान देना मानसिक शांति बनाए रखना और पवित्र नदियों में स्नान करना आर्थिक और मानसिक उन्नति के लिए शुभ माना गया है।

    श्रद्धालु इस अवधि में उपवास दान और धर्म-कर्म के कार्यों में अधिक ध्यान देते हैं। इसका उद्देश्य जीवन में संयम बनाए रखना और अपने कर्मों को शुद्ध करना है। खरमास के बाद ही मांगलिक कार्य और नए काम की शुरुआत को शुभ माना जाता है।

    इस तरह खरमास 2026 के दौरान धार्मिक नियमों और परंपराओं का पालन करना विशेष महत्व रखता है। यह समय अपने मन शरीर और कर्मों की शुद्धि का होता है जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन बना रहता है।

  • भोपाल में मासूमियत शर्मसार: 8 साल की बच्ची को टॉफी का लालच देकर पड़ोसी ने किया रेप, भीड़ ने रंगे हाथ दबोचा

    भोपाल में मासूमियत शर्मसार: 8 साल की बच्ची को टॉफी का लालच देकर पड़ोसी ने किया रेप, भीड़ ने रंगे हाथ दबोचा



    भोपाल।  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के ईंटखेड़ी इलाके में इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। यहाँ एक 41 वर्षीय अधेड़ ने पड़ोसी होने का भरोसा तोड़ते हुए 8 साल की मासूम छात्रा को अपनी हवस का शिकार बनाया। 
    वारदात: टॉफी का लालच और हैवानियत
    घटना शुक्रवार दोपहर की है, जब दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली मासूम अपने घर के बाहर खेल रही थी। तभी पड़ोस में रहने वाले धर्मेंद्र (41) की नीयत बिगड़ गई। उसने मासूम को टॉफी दिलाने का झांसा दिया और फुसलाकर अपने घर के भीतर ले गया। घर का दरवाजा बंद कर आरोपी ने बच्ची के साथ दरिंदगी शुरू कर दी।

    चीख ने खोली पोल: ग्रामीणों ने किया घेराव
    दरिंदगी के दौरान जब मासूम की चीखें घर से बाहर सुनाई दीं, तो आसपास के लोग अनहोनी की आशंका में तुरंत मौके पर पहुँचे। लोगों ने जब घर के भीतर का नजारा देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।

    रंगे हाथ गिरफ्तारी: गुस्साए ग्रामीणों ने आरोपी धर्मेंद्र को रंगे हाथ दबोच लिया।

    जनता का इंसाफ: पुलिस के पहुँचने से पहले आक्रोशित भीड़ ने आरोपी की जमकर धुनाई कर दी। सूचना मिलते ही ईंटखेड़ी पुलिस मौके पर पहुँची और लहूलुहान हालत में आरोपी को हिरासत में लिया।

    पुलिस की कार्रवाई: मेडिकल में हुई पुष्टि
    पुलिस ने तत्काल मासूम को मेडिकल जांच के लिए भेजा, जहाँ डॉक्टरों ने रेप की पुष्टि की है।

    सख्त धाराएं: पुलिस ने आरोपी के खिलाफ IPC (BNS) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत संगीन मामला दर्ज किया है।

    कोर्ट में पेशी: शुक्रवार दोपहर को ही आरोपी धर्मेंद्र को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया है।

    अपडेट: नाबालिग छात्रा केस में आरोपी माज खान का चौंकाने वाला खुलासा
    इधर, भोपाल के एक अन्य हाई-प्रोफाइल रेप केस (11वीं की छात्रा) में गिरफ्तार आरोपी माज खान ने पुलिस की पूछताछ में सनसनीखेज खुलासे किए हैं। माज ने कबूल किया है कि मुख्य आरोपी ओसाफ अली खान ने ‘थार’ गाड़ी के अंदर नाबालिग से रेप किया था।

    माज ने बताया कि यह सब एक सोची-समझी प्लानिंग का हिस्सा था। जब ओसाफ कार के अंदर था, तब माज बाहर खड़ा होकर कार के शीशे से अंदर झांक रहा था और उसने अपने मोबाइल से पूरी घटना का वीडियो शूट किया। पुलिस अब इस मामले में डिजिटल साक्ष्यों को और मजबूती से जुटा रही है।

  • राम रहीम बरी, हाईकोर्ट ने किया खुलासा: 3 अन्य की उम्रकैद बरकरार, सबूतों के अभाव में मिली राहत

    राम रहीम बरी, हाईकोर्ट ने किया खुलासा: 3 अन्य की उम्रकैद बरकरार, सबूतों के अभाव में मिली राहत


    नई दिल्ली। पंचकूला की स्पेशल CBI कोर्ट द्वारा 7 साल पहले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में सुनाई गई उम्रकैद की सजा अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद राम रहीम के लिए खत्म हो गई है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने राम रहीम को बरी कर दिया, हालांकि तीन अन्य आरोपियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की उम्रकैद बरकरार रखी गई है।

    राम रहीम के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि हत्या में इस्तेमाल हुई गोलियों पर कोई स्पष्ट निशान नहीं हैं और सबूतों में छेड़छाड़ की संभावना है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि 2002 की घटना को अब 23 साल बीत चुके हैं, जिससे फोरेंसिक जांच पर भी असर पड़ा है। हाईकोर्ट ने कहा कि राम रहीम के साजिशकर्ता होने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

    रामचंद्र छत्रपति हरियाणा के सिरसा जिले के रहने वाले थे। वर्ष 2000 में उन्होंने अपना अखबार शुरू किया था और डेरे के साध्वियों के साथ कथित यौन शोषण की चिट्ठी प्रकाशित की थी। इसके बाद उन्हें लगातार धमकियां मिलीं। 19 अक्टूबर 2002 की रात को छत्रपति की पांच गोलियों से हत्या कर दी गई थी।

    राम रहीम के खिलाफ साध्वियों के यौन शोषण मामले में पहले ही 10 साल की सजा हो चुकी है, इसलिए उन्हें अभी जेल में ही रहना होगा। रामचंद्र के परिवार ने हाईकोर्ट के फैसले पर निराशा जताई और सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का एलान किया है।

    हाईकोर्ट के अनुसार, कुलदीप, निर्मल और कृष्ण लाल के खिलाफ सबूत और गवाहों के बयान उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से स्थापित करते हैं, इसलिए उनकी उम्रकैद बरकरार रखी गई।

    राम रहीम इससे पहले डेरा मैनेजर रणजीत हत्याकांड में भी हाईकोर्ट से बरी हो चुके हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को सजा नहीं दी जा सकती।

    मुख्य बिंदु:

    राम रहीम बरी, तीन अन्य आरोपियों की उम्रकैद बरकरार।

    हाईकोर्ट ने कहा, पर्याप्त सबूत नहीं।

    फोरेंसिक जांच और गोलियों पर निशान स्पष्ट नहीं।

    रामचंद्र छत्रपति की हत्या 2002 में हुई, पांच गोलियां मारकर।

    साध्वियों के यौन शोषण मामले में राम रहीम की सजा जारी।

    परिवार सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगा।

  • संगीत की साधना: बचपन से शुरू हुआ सफर और फिल्मी दुनिया में नाम का अनोखा रहस्य

    संगीत की साधना: बचपन से शुरू हुआ सफर और फिल्मी दुनिया में नाम का अनोखा रहस्य


    नई दिल्ली। भारतीय संगीत जगत में ऐसे कलाकार कम ही होते हैं जिनकी साधना और मेहनत जीवनभर चमकती रहती है। साधना सरगम भी ऐसे ही संगीत की साधक हैं, जिनकी आवाज ने फिल्म और शास्त्रीय संगीत में खास जगह बनाई। उनके नाम और संगीत सफर से जुड़े कई मजेदार किस्से कम ही लोग जानते हैं।

    प्लेबैक सिंगर साधना सरगम का असली नाम साधना घाणेकर है। उन्होंने अपने नाम के पीछे की कहानी बताते हुए कहा कि माता-पिता ने उन्हें साधना इसलिए नाम दिया ताकि जीवन भर संगीत की साधना याद रहे। जब वे शिमला प्रोग्राम के लिए कल्याणजी-आनंदजी के पास गईं, तो उन्होंने सुझाव दिया कि नाम में सरगम जोड़ दें। साधना ने तुरंत हां कर दी और तब से उनका नाम साधना सरगम फिल्मी दुनिया में मशहूर हो गया।

    साधना ने अपने शुरुआती संगीत सफर के बारे में बताया कि चार साल की उम्र से उन्होंने गाना शुरू कर दिया था। घर में शास्त्रीय संगीत का माहौल था क्योंकि उनकी मां नीला घाणेकर संगीत सिखाती थीं। शुरुआत में उनका सपना केवल शास्त्रीय गायिका बनने का था। उन्हें सेंट्रल गवर्नमेंट स्कॉलरशिप मिली और पंडित जसराज के पास शास्त्रीय शिक्षा का अवसर मिला। लेकिन बाद में प्लेबैक सिंगिंग की ओर उनका रुझान बढ़ा। साधना ने बताया कि तीन मिनट में गाने की परफेक्शन पाने की चुनौती उतनी ही कठिन है जितनी तीन घंटे का शास्त्रीय गायन।

    उनकी पहली रिकॉर्डिंग महज पांच साल की उम्र में वसंत देसाई के साथ हुई थी। मराठी कविता पर आधारित गीत में उन्होंने अपनी गुड़िया साथ रखी थी। फिल्म ‘गुड्डी’ के गाने “हमको मन की शक्ति देना” के जरिए उन्होंने कल्याणजी-आनंदजी को प्रभावित किया और अपना पहला मौका पाया।

    साधना सरगम ने अपने प्रेरणा स्रोतों का भी जिक्र किया। उन्होंने लता मंगेशकर, आशा भोसले, किशोर कुमार, मुकेश और मोहम्मद रफी का नाम लिया। उनका कहना है कि इन कलाकारों की आवाज सुनकर लगता है कि संगीत कितनी ऊंचाई छू सकता है। लता जी ने उन्हें सिखाया कि सुर सही जगह पर लगना ही असली एक्सप्रेशन है।

    मराठी परिवार से होने के बावजूद उन्होंने हिंदी-उर्दू उच्चारण पर ध्यान दिया। मौलवी सैय्यद अहमद सैय्यद से उर्दू पढ़-लिखी, जिससे फिल्म ‘कलिंगा’ में दिलीप कुमार के सामने गाने का आत्मविश्वास मिला।

    साधना सरगम का लक्ष्य हमेशा साफ रहा है: संगीत के जरिए लोगों को सुकून देना। वह कहती हैं कि अच्छा इंसान बनना अच्छे सिंगर बनने से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। आज भी वे रोज रियाज करती हैं और संगीत की साधना को कभी कम नहीं होने देतीं। उनकी यह लगन और मेहनत उन्हें भारतीय संगीत जगत की खास पहचान देती है।

  • अमेरिका-ईरान-इज़रायल टकराव आठवें दिन में, मिसाइल और ड्रोन हमलों से क्षेत्रीय तनाव बढ़ा

    अमेरिका-ईरान-इज़रायल टकराव आठवें दिन में, मिसाइल और ड्रोन हमलों से क्षेत्रीय तनाव बढ़ा


    नई दिल्ली । अमेरिका इज़रायल और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और यह संघर्ष अब आठवें दिन में प्रवेश कर चुका है। इसी दौरान इज़रायल ने हमलों का नया दौर शुरू किया जबकि तेहरान के एक प्रमुख वाणिज्यिक हवाई अड्डे पर विस्फोटों की खबरें सामने आईं।

    यह टकराव 28 फरवरी को तेहरान में हुए एक हमले से शुरू हुआ था। शुरुआती दौर में यह केवल हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाइयों तक सीमित था लेकिन अब खाड़ी क्षेत्र में ड्रोन हमलों सहित व्यापक संघर्ष का रूप ले चुका है। यह संकट धीरे धीरे और व्यापक रूप ले रहा है जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता पर असर पड़ रहा है।

    अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संकट पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ तब तक कोई समझौता नहीं होगा जब तक वह बिना शर्त आत्मसमर्पण नहीं करता। इसके अलावा उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे आत्मसमर्पण के बाद ईरान को नया नेतृत्व चुनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए जो उनके प्रशासन के लिए स्वीकार्य हो।

    कुवैत की सेना ने बताया कि उसने अपने वायु रक्षा तंत्र के माध्यम से कई संभावित खतरों को रोक दिया। शनिवार सुबह से शुरू हुई हमलों की कई लहरों में 12 ईरानी ड्रोन और 14 बैलिस्टिक या क्रूज़ मिसाइलों को मार गिराया गया। इन हमलों से कई हिस्सों में विस्फोटों की आवाज़ें सुनी गईं लेकिन अधिकारियों के अनुसार केवल मामूली संपत्ति को नुकसान हुआ जो मिसाइलों के मलबे गिरने से हुआ।

    उधर इज़रायल डिफेंस फोर्सेज आईडीएफ ने उत्तरी इज़रायल के निवासियों को सूचित किया कि हालिया ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण से उनका क्षेत्र सीधे खतरे में नहीं है इसलिए बम शेल्टर से बाहर निकल सकते हैं। चेतावनी सायरन भी नहीं बजे।

    हालांकि इसके बाद आईडीएफ ने तेल अवीव मध्य इज़रायल और वेस्ट बैंक के निवासियों के लिए नया अलर्ट जारी किया। इज़रायली सेना ने ईरान की ओर से एक और मिसाइल प्रक्षेपण का पता लगाया जिससे पहले से अस्थिर क्षेत्रीय टकराव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार इस संघर्ष के बढ़ने से खाड़ी क्षेत्र और मध्य पूर्व की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। तेल आपूर्ति व्यापार मार्ग और नागरिक सुरक्षा पर इसका सीधा प्रभाव पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब अमेरिका इज़रायल और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों और किसी संभावित समझौते पर टिकी हैं।

    क्षेत्रीय देशों ने भी सुरक्षा सतर्कता बढ़ा दी है। कुवैत ने अपने वायु रक्षा तंत्र को सक्रिय रखा है और इज़रायल लगातार मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों की निगरानी कर रहा है। इस बीच आम नागरिकों में भय और अनिश्चितता भी बढ़ रही है क्योंकि किसी भी समय टकराव की सीमा पार करने का खतरा बना हुआ है।

  • इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार दबाव में, सेंसेक्स और निफ्टी फिसले 3 प्रतिशत

    इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार दबाव में, सेंसेक्स और निफ्टी फिसले 3 प्रतिशत


    नई दिल्ली। इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली के चलते सेंसेक्स और निफ्टी लगभग 3 प्रतिशत तक गिर गए। सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 81,287.19 से फिसलकर 78,918.90 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 25,178.65 से गिरकर 24,450.45 पर बंद हुआ।

    एफआईआई की लगातार बिकवाली इस सप्ताह बाजार पर दबाव डालती रही। निवेशकों ने भारतीय बाजार से 23,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी की। वैश्विक जोखिम और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के कारण विदेशी निवेशक सतर्क नजर आए। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) और लगातार आ रहे एसआईपी फंड ने बाजार में गिरावट को कुछ हद तक रोकने में मदद की।

    मध्य पूर्व में तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। ब्रेंट क्रूड 86 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जिससे ऊर्जा संबंधित सेक्टर और समग्र बाजार पर दबाव बढ़ा। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी लगभग 3 प्रतिशत नीचे बंद हुए।

    सेक्टरवार नजर डालें तो बीएसई रियल्टी इंडेक्स में 4.9 प्रतिशत, बीएसई ऑयल एंड गैस 4.8 प्रतिशत, बीएसई बैंकएक्स 4.6 प्रतिशत, बीएसई ऑटो 3.9 प्रतिशत और बीएसई कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 3.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि बीएसई कैपिटल गुड्स में 0.2 प्रतिशत की मामूली बढ़त हुई और डिफेंस सेक्टर के शेयरों में लगभग 3 प्रतिशत की तेजी देखी गई, क्योंकि वैश्विक तनाव के बीच निवेशकों ने रक्षा कंपनियों में रुचि दिखाई।

    वेंचुरा सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड विनीत बोलिंजकर के अनुसार, इस सप्ताह भारतीय बाजार में वैश्विक जोखिम और घरेलू मजबूती के बीच खींचतान देखने को मिली। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती ऊर्जा कीमतों के कारण एफआईआई लगातार बिकवाली कर रहे हैं। हालांकि, घरेलू निवेशकों की भागीदारी और एसआईपी के जरिए लगातार फंड आना बाजार को सहारा दे रहा है।

    विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी50 इंडेक्स 24,450 के आसपास अपने 200-दिन के मूविंग एवरेज के करीब पहुंच गया है। यह दर्शाता है कि फिलहाल बाजार अस्थिर है लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है। इस दौरान इंडिया वीआईएक्स इंडेक्स में 11 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जो निवेशकों की जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को दर्शाती है।

    इस तरह इस सप्ताह वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और एफआईआई की बिकवाली ने बाजार पर दबाव डाला, जबकि घरेलू निवेशकों और एसआईपी फंड की भागीदारी ने स्थिति को संतुलित रखा।