Blog

  • ईरान पर हमला क्यों था जरूरी? इजरायली पीएम बोले– खतरा बढ़ने से पहले लिया एक्शन

    ईरान पर हमला क्यों था जरूरी? इजरायली पीएम बोले– खतरा बढ़ने से पहले लिया एक्शन


    नई दिल्ली। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य कार्रवाई को “जरूरी और समयबद्ध” बताते हुए कहा कि अगर अभी कदम नहीं उठाया जाता, तो भविष्य में कार्रवाई करना लगभग असंभव हो जाता। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि ईरान जानबूझकर आम नागरिकों को निशाना बना रहा है, जबकि इजरायल और अमेरिका “आतंकियों” पर फोकस कर रहे हैं।

    बैलिस्टिक मिसाइलों पर तीखी टिप्पणी
    नेतन्याहू ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों को बेहद खतरनाक बताते हुए कहा कि ऐसी मिसाइल “टीएनटी से भरी बस की तरह होती है, जो मैक 8 की रफ्तार से आकर गिरती है।”

    उन्होंने दावा किया कि हालिया हमलों में नौ लोगों की जान गई और कहा:
    “यही तेहरान और हमारे बीच फर्क है। तेहरान के सामूहिक हत्यारे नागरिकों को निशाना बनाते हैं, जबकि इजरायल और अमेरिका आतंकियों को निशाना बनाते हैं।”

    “परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम रोकना जरूरी था”
    नेतन्याहू के मुताबिक, इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर पहले भी प्रहार किया था, लेकिन तेहरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को आगे बढ़ाना जारी रखा। उनका दावा है कि ईरान नए भूमिगत ठिकाने बना रहा था, जिससे उसका परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम भविष्य की सैन्य कार्रवाई से सुरक्षित हो सकता था।

    उन्होंने कहा,
    “अगर हम अभी कार्रवाई नहीं करते, तो भविष्य में ईरान को रोकना संभव नहीं होता। वह अमेरिका को निशाना बना सकता था, ब्लैकमेल कर सकता था और हमें व अन्य देशों को धमका सकता था।”

    ट्रंप की सराहना
    नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाई के लिए “पक्के इरादों वाले राष्ट्रपति” की जरूरत थी। उन्होंने कहा, हमारा गठबंधन आज बेहद मजबूत है। हमें अभी कार्रवाई करनी थी और हमने की।”

    बढ़ता क्षेत्रीय तनाव
    ईरान पर हमले और उसके बाद जवाबी कार्रवाइयों के चलते पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। इजरायल का कहना है कि यह कदम आत्मरक्षा और वैश्विक सुरक्षा के लिए जरूरी था, जबकि तेहरान इसे आक्रामक और गैरकानूनी कार्रवाई बता रहा है।

  • EPFO ने पेंशन, बीमा और ट्रस्टों के लिए एमनेस्टी स्कीम की मंजूरी दी, PF ब्याज दर जारी

    EPFO ने पेंशन, बीमा और ट्रस्टों के लिए एमनेस्टी स्कीम की मंजूरी दी, PF ब्याज दर जारी


    नई दिल्ली :रिटायरमेंट फंड के संचालन वाली संस्था EPFO ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भविष्य निधि (EPF) पर ब्याज दर 8.25 प्रतिशत तय की है। यह लगातार तीसरे साल ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं है। सोमवार को केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में हुई सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए।

    सबसे प्रमुख घोषणा ट्रस्टों के लिए छह महीने की ‘माफी योजना’ (एमनेस्टी स्कीम) है। यह उन ट्रस्टों पर लागू होगी जो अब तक EPF कानून के दायरे में नहीं आए हैं। योजना का उद्देश्य कंपनियों और ट्रस्टों को नियमों में लाना और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पहले से नियमों के अनुसार लाभ दे रहे ट्रस्टों का जुर्माना और ब्याज माफ कर दिया जाएगा।

    बैठक में नई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को भी मंजूरी मिली। ‘सोशल सिक्योरिटी कोड 2020’ के तहत EPF, EPS 2026 और EDLI 2026 योजनाओं को लागू किया जाएगा। इन नई योजनाओं से पीएफ, पेंशन और बीमा लाभ देने के लिए एक मजबूत कानूनी आधार मिलेगा और पुराने नियमों से नए नियमों में संक्रमण आसान होगा।

    बंद पड़े खातों (इनऑपरेटिव) को लेकर भी बोर्ड ने पायलट प्रोजेक्ट की मंजूरी दी। इसके तहत जिन खातों में 1,000 रुपये या उससे कम की राशि पड़ी है, उनका ऑटो-सेटलमेंट शुरू होगा। यह सुविधा सफल होने के बाद बड़ी रकम वाले खातों पर भी लागू की जाएगी।

    निवेश और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बोर्ड ने नई SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य EPFO निवेश की निगरानी और प्रबंधन को और मजबूत करना है।

    इन घोषणाओं से EPFO का वित्तीय ढांचा और अधिक मजबूत होगा, खाताधारकों को स्थिर और बेहतर रिटर्न मिलेगा और कंपनियों/ट्रस्टों को कानून के दायरे में लाने में मदद मिलेगी।

  • जबलपुर मेडिकल कॉलेज में बायोमेडिकल कचरे में भीषण आग, डीन ने लापरवाही की जांच के निर्देश दिए

    जबलपुर मेडिकल कॉलेज में बायोमेडिकल कचरे में भीषण आग, डीन ने लापरवाही की जांच के निर्देश दिए


    नई दिल्ली। जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के बाहर सोमवार रात को बायोमेडिकल कचरे के ढेर में अचानक आग लग गई। अस्पताल के पिछले हिस्से में सड़क किनारे जमा कचरे से उठी लपटें देखते ही देखते फैल गईं, जिससे परिसर में हड़कंप मच गया। सूचना पाते ही दमकल की टीम मौके पर पहुंची और कई घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।

    सौभाग्य रहा कि आग और धुआं अस्पताल की मुख्य इमारतों तक नहीं पहुँचा, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग लगते समय शीशियों के टूटने और पटाखों जैसी आवाजों से अंदाजा लगाया जा रहा था कि सामान्य कचरे के साथ बायोमेडिकल वेस्ट भी वहां मिला हुआ था।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बायोमेडिकल वेस्ट को अलग रंग के बैग (पीला, लाल, सफेद, नीला) में संग्रहित करना और अधिकृत एजेंसी के माध्यम से ही नष्ट करना जरूरी है। खुले में पड़ा संक्रमित कचरा संक्रमण फैलाने का बड़ा खतरा बन सकता है, खासकर अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में जहां रोजाना हजारों मरीज और परिजन आते हैं।

    डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने आग को गंभीर मामले के रूप में लिया और सभी संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों की लापरवाही से कचरा खुले में पड़ा रहा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मेडिकल अधीक्षक को कहा गया कि भविष्य में बायोमेडिकल कचरे का निपटान नियमों के अनुसार ही सुनिश्चित किया जाए।

    आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, आग लगने के समय किसी मरीज या कर्मचारी को चोट नहीं आई। डीन ने मामले की पूरी जांच के निर्देश देते हुए बताया कि अस्पताल परिसर में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    इस घटना ने प्रशासन और अस्पताल अधिकारियों की सतर्कता की चुनौती सामने ला दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया गया होता, तो यह न केवल संपत्ति के नुकसान बल्कि स्वास्थ्य जोखिम के लिए भी गंभीर साबित हो सकता था।

    मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कहा कि भविष्य में सभी बायोमेडिकल कचरे का समय पर निपटान और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी और नियमित ऑडिट की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

  • 18 दिन का क्रूड, 21 दिन का पेट्रोल-डीजल, 12 दिन की गैस भारत पर पड़ सकता है गंभीर संकट..

    18 दिन का क्रूड, 21 दिन का पेट्रोल-डीजल, 12 दिन की गैस भारत पर पड़ सकता है गंभीर संकट..


    नई दिल्ली :पश्चिम एशिया में बढ़ता युद्ध ईरान और इजरायल/अमेरिका टकराव भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। ईरान ने आधिकारिक रूप से होर्मुज की खाड़ी बंद करने की चेतावनी दी है। अगर यह संघर्ष लंबे समय तक चलता है तो भारत को तेल, गैस और पेट्रोल-डीजल की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

    इंडस्ट्री और सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत के पास केवल 17-18 दिन की डिमांड के बराबर क्रूड स्टॉक है। वहीं पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति 20-21 दिन के लिए पर्याप्त है जबकि एलएनजी केवल 10-12 दिन का भंडार बचा है। भारत अपनी एलएनजी की करीब 90 फीसदी आपूर्ति खाड़ी देशों से करता है।

    आपात स्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार ने कई उपायों पर काम शुरू कर दिया है। इनमें पेट्रोल और डीजल का एक्सपोर्ट रोकना, रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाना और एलपीजी की राशनिंग शामिल है। इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल ने कुछ चुनिंदा रिफाइनरीज में एलपीजी उत्पादन बढ़ाने की योजना बनाई है।

    पश्चिम एशिया संकट के चलते वैश्विक तेल और गैस कीमतों में उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड करीब 10 फीसदी बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया जबकि यूरोप में गैस वायदा की कीमत 40 फीसदी से अधिक उछली। सऊदी अरब की रास तानुरा रिफाइनरी और कतर के एनएनजी प्लांट पर हमलों के कारण उत्पादन अस्थायी रूप से बंद हो गया। होर्मुज की खाड़ी में टैंकरों की आवाजाही भी प्रभावित हुई।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईरान ज्यादा समय तक खाड़ी बंद रखता है तो भारत को तत्काल कदम उठाने होंगे। सबसे पहले पेट्रोल और डीजल का एक्सपोर्ट रोका जा सकता है। इसके अलावा एलपीजी की खपत सीमित करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। भारत ने हाल के महीनों में रूस से तेल की खरीद कम की है, लेकिन अगर वैश्विक सप्लाई संकट बढ़ता है तो रूस से आयात बढ़ाया जा सकता है।

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत की आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए इंडस्ट्री और पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार आपूर्ति और डिमांड की समीक्षा कर रहे हैं। हालाँकि कुछ एनालिस्ट मानते हैं कि ईरान ज्यादा समय तक खाड़ी को बंद नहीं रख पाएगा और स्थिति जल्दी सामान्य हो सकती है।

    अगर संकट लंबा खिंचता है, तो भारत की रणनीति में बड़ा बदलाव होगा। पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एक्सपोर्ट रोके जाएंगे, घरेलू उत्पादन बढ़ाया जाएगा और रूस से तेल की सप्लाई तेज़ी से बढ़ाई जाएगी। यह संकट यह भी दर्शाता है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा वैश्विक राजनीतिक घटनाओं से कितनी प्रभावित होती है और देश को आपात योजना हमेशा तैयार रखनी होगी।

  • कृषि कैबिनेट बैठक में दूरी दिखी, विजयवर्गीय इंदौर में त्रिपुरा सीएम से मिले, प्रहलाद भोपाल में रहे

    कृषि कैबिनेट बैठक में दूरी दिखी, विजयवर्गीय इंदौर में त्रिपुरा सीएम से मिले, प्रहलाद भोपाल में रहे


    नई दिल्ली। बड़वानी में आयोजित मध्य प्रदेश की कृषि कैबिनेट बैठक में मंत्रियों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल बैठक में शामिल नहीं हुए। इस दौरान प्रहलाद पटेल दिनभर भोपाल में मौजूद रहे, जबकि कैलाश विजयवर्गीय आलीराजपुर के भगोरिया मेले में भाग लेने के बाद इंदौर में पहुंचे और वहां त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा से मुलाकात की।

    सोमवार को बड़वानी में कैबिनेट बैठक आयोजित की गई, लेकिन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शारीरिक रूप से बैठक में हिस्सा नहीं लिया। वे सुबह आलीराजपुर में भगोरिया उत्सव में मौजूद रहे, जहां उन्होंने नागर सिंह चौहान और सांसद अनीता चौहान के साथ आदिवासी परंपराओं का सम्मान किया। दोपहर में इंदौर पहुंचे विजयवर्गीय ने त्रिपुरा के सीएम माणिक साहा से मुलाकात की और रात को इंदौर के फाग उत्सव में भाग लिया।

    वहीं, मंत्री प्रहलाद पटेल भोपाल में रहे और वहां बीजेपी किसान मोर्चा के नए प्रदेश महामंत्री कप्तान सिंह यादव से मिले। इस दौरान कप्तान सिंह ने पटेल से आशीर्वाद लिया और फोटो सोशल मीडिया पर साझा की। प्रहलाद पटेल ने दमोह की जरारूधाम गौ अभ्यारण्य के कोषाध्यक्ष सुशील गुप्ता से भी मुलाकात की और शाम को विदिशा के लिए रवाना हुए।

    शनिवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल ने अलग-अलग मुलाकातें की थीं। माना जा रहा है कि विधानसभा बजट सत्र के दौरान विजयवर्गीय के बयानों से मंत्री और मुख्यमंत्री के बीच अंदरूनी खींचतान चल रही है।

    सोमवार को आलीराजपुर भगोरिया मेले में विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कैलाश विजयवर्गीय के बीच वाक विवाद भी देखने को मिला। सिंघार ने “औकात” वाले बयान को लेकर विजयवर्गीय से सवाल किए, जबकि विजयवर्गीय ने कहा कि वे राजनीति करने नहीं, बल्कि भगोरिया उत्सव और आदिवासी समाज को सम्मान देने आए हैं। उन्होंने दावा किया कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से हर आदिवासी परिवार को सालाना 30–50 हजार रुपए का लाभ मिल रहा है।

    इससे स्पष्ट है कि कृषि कैबिनेट की बैठक के दौरान मंत्री दोनों अलग-अलग कार्यों और स्थानों में व्यस्त रहे, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से दूरी का संदेश गया। वहीं, भगोरिया मेले और त्रिपुरा सीएम से मुलाकात से विजयवर्गीय की सक्रियता और संपर्क भी दिखा।

  • ग्वालियर में चंद्र ग्रहण: मंदिर बंद, सुबह 6:20 से शाम 6:46 तक सूतक काल, दर्शन और पूजा वर्जित

    ग्वालियर में चंद्र ग्रहण: मंदिर बंद, सुबह 6:20 से शाम 6:46 तक सूतक काल, दर्शन और पूजा वर्जित


    ग्वालियर। ग्वालियर में पहला खग्रास चंद्र ग्रहण 2026: मंदिर बंद, दर्शन वर्जित, सूतक काल जारी
    ग्वालियर में 3 मार्च 2026 को साल का पहला खग्रास चंद्र ग्रहण देखने को मिलेगा। ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:46 बजे समाप्त होगा। ग्रहण के प्रभाव से जुड़े सूतक काल की शुरुआत सुबह 6:20 बजे से हो चुकी है, जिसके दौरान धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा, आरती और मूर्तियों का स्पर्श वर्जित माना गया है। इस अवधि में मंदिरों के पट बंद रहेंगे और श्रद्धालु केवल घर पर या सुरक्षित स्थानों से मंत्र जाप कर सकते हैं।

    ग्वालियर के प्रमुख मंदिरों जैसे राम मंदिर फालका बाजार, अचलेश्वर मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, सनातन धर्म मंदिर, गुरुद्वारा महादेव और संकट मोचन हनुमान मंदिर में सुबह की आरती के बाद पट बंद कर दिए गए। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में होगा और लगभग 28 मिनट तक दिखाई देगा। इस दौरान गर्भवती महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और रोगी विशेष सावधानी बरतें और नुकीली या धारदार वस्तुओं का प्रयोग न करें।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण के दौरान खाना बनाना और भोजन करना वर्जित होता है क्योंकि इस समय भोजन के दूषित होने की संभावना मानी जाती है। लोग पहले से बना भोजन तुलसी के पत्तों के साथ सुरक्षित रखते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में विधिपूर्वक शुद्धिकरण किया जाएगा। गंगाजल से साफ-सफाई के बाद आरती और भोग का आयोजन किया जाएगा। इस समय स्नान, दान और मंत्र जाप करने का विशेष महत्व है।

    वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। खग्रास स्थिति में चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाता है, जिससे वह लालिमा लिए दिखाई देता है। इस समय सूर्य की किरणें पृथ्वी द्वारा रोकी जाती हैं और चंद्रमा के सतह पर केवल पृथ्वी की छाया पड़ती है।

    ग्वालियर में इस ग्रहण को लेकर प्रशासन और मंदिर समिति ने भी श्रद्धालुओं को सतर्क किया है। लोगों से कहा गया है कि वे ग्रहण काल में मंदिरों में जाने से बचें और घर पर रहकर सुरक्षित पूजा-अर्चना करें। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि ग्रहण के दौरान संयम और सावधानी बनाए रखने से नकारात्मक प्रभाव कम होता है।

    इस प्रकार, ग्वालियर में 12 घंटे तक चलने वाला सूतक काल और खग्रास चंद्र ग्रहण श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण है। ग्रहण के बाद शुद्धिकरण, दान, मंत्र जाप और स्नान के माध्यम से पुण्य और सकारात्मक ऊर्जा अर्जित करने की परंपरा है।

  • बाजार की गिरावट में छिपा है कमाई का मौका? एक्सपर्ट्स ने बताया क्यों नहीं घबराना चाहिए और क्या हो अगली रणनीति

    बाजार की गिरावट में छिपा है कमाई का मौका? एक्सपर्ट्स ने बताया क्यों नहीं घबराना चाहिए और क्या हो अगली रणनीति


    नई दिल्ली :भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला कुछ समय काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला। पिछले मात्र दो सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी में 2.5 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की करीब 11 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति पलक झपकते ही साफ हो गई। सोमवार को सेंसेक्स जहाँ 1,000 अंकों से ज्यादा टूटा, वहीं निफ्टी में भी 300 अंकों की बड़ी गिरावट आई। बाजार में घबराहट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ‘इंडिया विक्स’ (India VIX) इंडेक्स 25 फीसदी से ज्यादा उछलकर 17.13 पर पहुंच गया, जो निकट भविष्य में तेज उतार-चढ़ाव का स्पष्ट संकेत है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि शॉर्ट टर्म में गिरावट की आशंका बनी हुई है, लेकिन भारत की बुनियादी स्थिति यानी ‘मैक्रो स्टोरी’ अभी भी बहुत मजबूत है। आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर की तन्वी कंचन और पीएल कैपिटल के विक्रम कसाट जैसे जानकारों का कहना है कि जनवरी में 1.71 लाख करोड़ रुपये का शानदार जीएसटी कलेक्शन और सरकारी बैंकों के मजबूत तिमाही नतीजे इस बात के सबूत हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था सही दिशा में है। श्रीराम वेल्थ के नवल कगलवाला के अनुसार, पश्चिम एशिया का संकट भारत के लिए एक अवसर भी बन सकता है। जब वैश्विक बाजार असुरक्षित महसूस करते हैं, तो भारत जैसे मजबूत घरेलू मांग वाले देश ‘सेफ हेवन’ बनकर उभरते हैं। पिछले शुक्रवार के आंकड़े बताते हैं कि जहाँ विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 12,293 करोड़ रुपये की बड़ी खरीदारी करके बाजार को सहारा देने की कोशिश की।

    मौजूदा हालातों में एक्सपर्ट्स निवेशकों को संयम और अनुशासन बरतने की सलाह दे रहे हैं। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यह घबराहट में आकर अपनी होल्डिंग्स बेचने का समय नहीं है। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करें, कर्ज लेकर निवेश (लेवरेज पोजीशन) करने से बचें और अपने रिस्क मैनेजमेंट पर ध्यान केंद्रित करें। एसआईपी SIP के माध्यम से निवेश करने वालों के लिए यह संदेश है कि वे अपना निवेश जारी रखें, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से ऐसी ही गिरावटें लंबी अवधि में संपत्ति निर्माण Wealth Creation का आधार बनती हैं। रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजित मिश्रा ने भी निवेशकों को सावधानी बरतने और फिलहाल अपनी पोजीशन को हल्का रखने की सलाह दी है।

  • मध्य प्रदेश में नया आदेश: मंत्री खुद लिखेंगे अपने स्टाफ की गोपनीय वार्षिक रिपोर्ट, सिर्फ 7 दिन में जमा करना अनिवार्य

    मध्य प्रदेश में नया आदेश: मंत्री खुद लिखेंगे अपने स्टाफ की गोपनीय वार्षिक रिपोर्ट, सिर्फ 7 दिन में जमा करना अनिवार्य


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने मंत्रालयीन कर्मचारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (सीआर) को लेकर अहम निर्देश जारी किए हैं। अब मंत्री स्थापना में पदस्थ कर्मचारियों की सीआर सीधे संबंधित मंत्री द्वारा लिखी जाएगी, जिससे उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन सीधे जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा हो सके।

    इस आदेश के अनुसार 31 मार्च 2026 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए सीआर रिपोर्ट सिर्फ एक हफ्ते में तैयार कर जमा करनी होगी। यह रिपोर्ट 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 की अवधि को कवर करेगी।

    सीआर तैयार करने वाले कर्मचारी और प्रक्रिया:

    सहायक अनुभाग अधिकारी: रिपोर्ट अनुभाग अधिकारी लिखेंगे, अवर सचिव और उप सचिव जांच करेंगे, अपर सचिव अंतिम मंजूरी देंगे।

    सहायक ग्रेड-1: अनुभाग अधिकारी लिखेंगे, अवर सचिव और उप सचिव जांच करेंगे, अपर सचिव मंजूरी देंगे।

    सहायक ग्रेड-2, ग्रेड-3 और स्टेनोटायपिस्ट: अनुभाग अधिकारी लिखेंगे, अवर सचिव जांच करेंगे, उप सचिव फाइनल करेंगे।

    निज सहायक: जिन अधिकारी के साथ पदस्थ हैं, वही उनकी सीआर लिखेंगे और फाइनल मंजूरी देंगे।

    मंत्री स्थापना में पदस्थ कर्मचारी: संबंधित मंत्री खुद रिपोर्ट लिखेंगे और फाइनल मंजूरी भी देंगे।

    लक्ष्य और महत्व:
    इस नए आदेश का मकसद सीआर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और मंत्रालयीन कर्मचारियों के प्रदर्शन और कार्यकुशलता का सीधे मूल्यांकन करना है। यह कदम मंत्री स्तर पर निगरानी बढ़ाने और कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

  • तिहाड़ में मैं हर पल मौत मांगती थी': एक्ट्रेस संदीपा विर्क का छलका दर्द, जेल की गंदी दीवारों के पीछे बिताए वो 4 भयानक महीने

    तिहाड़ में मैं हर पल मौत मांगती थी': एक्ट्रेस संदीपा विर्क का छलका दर्द, जेल की गंदी दीवारों के पीछे बिताए वो 4 भयानक महीने


    नई दिल्ली :ग्लेमर की चकाचौंध और लाखों फॉलोअर्स की लोकप्रियता के पीछे कभी-कभी ऐसे काले अध्याय छिपे होते हैं, जो किसी की भी रूह कंपा दें। ‘हनी ट्रैप स्क्वाड’ और साउथ की बड़ी फिल्मों में नजर आ चुकीं एक्ट्रेस, इन्फ्लुएंसर और कॉस्मेटिक एक्सपर्ट संदीपा विर्क ने हाल ही में अपने जीवन के सबसे अंधकारमय समय का खुलासा किया है। पिछले साल अगस्त में प्रवर्तन निदेशालय ईडी द्वारा 6 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार होने के बाद, संदीपा को देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली ‘तिहाड़ जेल’ में चार महीने बिताने पड़े। सिमरन जोत मक्कर के साथ एक भावुक बातचीत में संदीपा ने जेल के उन दिनों को याद किया, जहाँ वे मानसिक और शारीरिक रूप से इस कदर टूट गई थीं कि खुद के लिए मौत की दुआ मांगने लगी थीं।

    संदीपा ने भरे गले से बताया कि तिहाड़ जेल का अनुभव किसी नरक से कम नहीं था। उन्होंने जेल के अमानवीय हालातों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां के वॉशरूम इस कदर गंदे थे कि उन्हें देखकर ही उनकी हिम्मत जवाब दे जाती थी। कैदियों को जमीन पर सोना पड़ता था और खाने की गुणवत्ता बेहद खराब थी। संदीपा के अनुसार, वहां बिताए वक्त ने उनके स्वास्थ्य पर इतना बुरा असर डाला कि वे बिना किसी सहारे के खड़ी होने में भी असमर्थ हो गई थीं। उन्होंने बताया कि जेल में कुछ महिला पुलिसकर्मी तो दयालु थीं, लेकिन कुछ का व्यवहार कैदियों के प्रति बेहद क्रूर था। संदीपा ने कहा, “मैं भगवान से पूछती थी कि मैंने ऐसा क्या किया है जो मुझे ये दिन देखने पड़ रहे हैं, तिहाड़ ऐसी जगह है जहाँ मैं अपने दुश्मनों को भी कभी न भेजूं।”

    इस पूरे मामले में सबसे अधिक भावनात्मक क्षण वह होता था जब उनके वृद्ध माता-पिता उनसे मिलने जेल आते थे। संदीपा ने रोते हुए कहा कि उन्हें उस समय सबसे ज्यादा ग्लानि महसूस होती थी कि उनकी वजह से उनके परिवार को जेल की दहलीज लांघनी पड़ रही है। उन्होंने अपने भाई-बहन और माता-पिता के प्रति आभार व्यक्त किया जो इस कठिन दौर में उनके साथ चट्टान की तरह खड़े रहे। संदीपा का दावा है कि वे पूरी तरह निर्दोष हैं और उन्हें धोखाधड़ी के एक ऐसे मामले में फंसाया गया है जिससे उनका सीधा लेना-देना नहीं था।

    एक्ट्रेस ने यह भी साझा किया कि जेल जाने के बाद फिल्म इंडस्ट्री का असली चेहरा उनके सामने आ गया। कई करीबी दोस्तों और बड़े प्रोड्यूसर्स ने उन्हें अनफॉलो कर दिया और उनसे दूरी बना ली। बता दें कि ईडी ने संदीपा को 14 अगस्त, 2025 को गिरफ्तार किया था और करीब चार महीने हिरासत में रहने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने 27 दिसंबर, 2025 को उन्हें जमानत दी। कोर्ट ने माना कि मुकदमा लंबा चल सकता है और वे पहले ही काफी समय जेल में बिता चुकी हैं। फिलहाल संदीपा खुद को निर्दोष साबित करने की जंग लड़ रही हैं और अपने ‘कर्मा’ पर विश्वास रखते हुए जीवन की नई शुरुआत करने की कोशिश कर रही हैं।

  • RTO ई-चालान बनकर आया साइबर ठगों का जाल: युवक के खाते से उड़ाए 2.12 लाख, मोबाइल हुआ हैंग

    RTO ई-चालान बनकर आया साइबर ठगों का जाल: युवक के खाते से उड़ाए 2.12 लाख, मोबाइल हुआ हैंग


    नई दिल्ली। ग्वालियर के थाटीपुर क्षेत्र में 27 फरवरी को हुई साइबर ठगी ने लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर दिया। निजी कंपनी में कर्मचारी शशांक गुप्ता को वॉट्सऐप पर एक अनजान नंबर से ‘RTO ई-चालान कॉपी’ नाम की APK फाइल भेजी गई। शशांक ने फाइल खोलते ही मोबाइल हैंग हो गया, और कुछ ही समय बाद उनके बैंक खाते से कुल 2.12 लाख रुपए गायब हो गए।

    घटना का क्रम
    शशांक ने फाइल खोलते ही मोबाइल लगभग 7-8 मिनट तक हैंग हो गया।

    एक घंटे बाद मोबाइल पर संदेश आया कि कैश निकासी हुई-89 हजार, 60 हजार और 63 हजार रुपए ट्रांसफर।

    शशांक तुरंत बैंक पहुंचे, जहां उन्हें पता चला कि उनके खाते से रकम साइबर ठगी के माध्यम से निकाली गई।

    पहले थाने में शिकायत का समाधान नहीं हुआ, लेकिन साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद थाटीपुर थाना ने ई-जीरो FIR दर्ज की।

    पुलिस की जांच और चेतावनी
    थाटीपुर थाना पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने बताया कि ठगों ने APK फाइल में मैलवेयर इंस्टॉल किया। इसके जरिए बैंक खातों से रकम चुराई गई।
    पुलिस ने आम जनता से चेतावनी दी कि:

    वॉट्सऐप या SMS में आने वाली APK फाइल न खोलें।

    RTO चालान की जानकारी केवल सरकारी वेबसाइट या अधिकृत ऐप से ही जांचें।

    सीख और सुरक्षा
    यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि साइबर ठगी के लिए झूठे ई-चालान और फाइलें कितनी खतरनाक हो सकती हैं। सावधानी और अधिकारिक चैनल का इस्तेमाल ही सुरक्षा की कुंजी है।