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  • सेमीफाइनल की हैट्रिक: टी20 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ तीसरी बार उतरेगी भारतीय टीम

    सेमीफाइनल की हैट्रिक: टी20 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ तीसरी बार उतरेगी भारतीय टीम

    नई दिल्ली टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में जगह बना ली है। रविवार को खेले गए मुकाबले में India national cricket team ने West Indies cricket team को 5 विकेट से हराकर अंतिम चार का टिकट पक्का किया। इसके साथ ही टीम इंडिया छठी बार टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंची है और लगातार तीसरी बार यह उपलब्धि हासिल की है।

    सेमीफाइनल में इंग्लैंड से लगातार तीसरी टक्कर
    दिलचस्प बात यह है कि इस बार भी भारत का सामना उसी टीम से है, जिससे पिछले दो टी20 विश्व कप सेमीफाइनल में भिड़ंत हुई थी-England cricket team। इस तरह टी20 विश्व कप में लगातार तीसरी बार भारत और इंग्लैंड सेमीफाइनल में आमने-सामने होंगे। क्रिकेट इतिहास में यह एक अनोखा संयोग है, जिसने मुकाबले का रोमांच कई गुना बढ़ा दिया है।

    2022: इंग्लैंड की ऐतिहासिक जीत
    ICC Men’s T20 World Cup 2022 के सेमीफाइनल में एडिलेड में भारत और इंग्लैंड की भिड़ंत हुई थी। रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत ने 6 विकेट पर 168 रन बनाए थे। जवाब में जोस बटलर की अगुआई में इंग्लैंड ने 16 ओवर में बिना विकेट गंवाए 170 रन बनाकर 10 विकेट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। बाद में इंग्लैंड ने फाइनल में पाकिस्तान को हराकर खिताब अपने नाम किया।

    2024: भारत ने लिया बदला, बना चैंपियन
    ICC Men’s T20 World Cup 2024 के सेमीफाइनल में जॉर्जटाउन में फिर वही कहानी लिखी गई, लेकिन इस बार अंत अलग था। भारत ने 7 विकेट पर 171 रन बनाए और इंग्लैंड को 16.4 ओवर में 103 रन पर समेटकर 68 रन से जीत हासिल की। फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराकर भारत ने ट्रॉफी उठाई।

    2026: वानखेड़े में होगा महामुकाबला
    अब 2026 में यह तीसरी भिड़ंत मुंबई के Wankhede Stadium में 5 मार्च को शाम 7 बजे से खेली जाएगी। क्रिकेट प्रेमियों की नजर इस बात पर है कि क्या इतिहास खुद को दोहराएगा? पिछली दो बार सेमीफाइनल जीतने वाली टीम ही आगे चलकर चैंपियन बनी थी।

    इस बार भी मुकाबला बराबरी का दिख रहा है-एक तरफ अनुभव और आत्मविश्वास से भरी भारतीय टीम, तो दूसरी ओर बड़े मैचों की विशेषज्ञ इंग्लैंड। सेमीफाइनल का यह संग्राम सिर्फ फाइनल का टिकट नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक बढ़त की जंग भी होगा।

  • 3 मार्च का पंचांग: पूर्णिमा पर बन रहे शुभ संयोग, जानें कब करें महत्वपूर्ण काम

    3 मार्च का पंचांग: पूर्णिमा पर बन रहे शुभ संयोग, जानें कब करें महत्वपूर्ण काम

    नई दिल्ली। सनातन परंपरा में पंचांग केवल तिथि बताने का माध्यम नहीं, बल्कि दिन की दिशा तय करने वाला मार्गदर्शक माना जाता है। 3 मार्च को फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि और मंगलवार का संयोग बन रहा है। मंगलवार का दिन आदि शक्ति और श्रीराम भक्त हनुमान को समर्पित होता है, ऐसे में इस दिन पूजा-पाठ और विशेष साधना का महत्व और बढ़ जाता है।

    तिथि, नक्षत्र और योग का पूरा ब्योरा
    3 मार्च को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 44 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 22 मिनट पर होगा। पूर्णिमा तिथि शाम 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगी, लेकिन उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन पूर्णिमा का ही मान रहेगा। नक्षत्र मघा सुबह 7 बजकर 31 मिनट तक रहेगा, इसके बाद पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र शुरू होगा। सुकर्मा योग सुबह 10 बजकर 25 मिनट तक और बव करण शाम 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगा।

    विजय मुहूर्त और अमृत काल का खास महत्व
    इस दिन कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:05 से 5:55 बजे तक रहेगा, जो साधना और ध्यान के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:10 से 12:56 बजे तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2:29 से 3:16 बजे तक रहेगा। विजय मुहूर्त में नए कार्य, महत्वपूर्ण निर्णय या यात्रा प्रारंभ करना विशेष फलदायी माना जाता है।

    गोधूलि मुहूर्त शाम 6:20 से 6:44 बजे तक रहेगा। अमृत काल रात 1:13 से 2:49 बजे तक है, जो मंत्र जप और विशेष पूजा के लिए अत्यंत शुभ है। निशीथ मुहूर्त रात 12:08 से 12:57 बजे तक रहेगा।

    राहुकाल और अन्य अशुभ समय
    शुभ समय के साथ अशुभ काल का ध्यान रखना भी आवश्यक है। राहुकाल दोपहर 3:28 से 4:55 बजे तक रहेगा। इस अवधि में नए और शुभ कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए। यमगंड सुबह 9:39 से 11:06 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 12:33 से 2:00 बजे तक रहेगा।

    दुर्मुहूर्त सुबह 9:04 से 9:50 बजे तक है। गण्ड मूल सुबह 6:44 से 7:31 बजे तक रहेगा। वर्ज्य काल दोपहर 3:34 से 5:10 बजे तक रहेगा।

    पूर्णिमा और मंगलवार का यह संगम आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। यदि आप किसी नए कार्य की योजना बना रहे हैं या विशेष पूजा-अर्चना करना चाहते हैं, तो शुभ मुहूर्त का ध्यान रखकर शुरुआत करें।

  • मिडिल ईस्ट में बढ़ती आग, वैश्विक बाजार पर वार-क्रूड ऑयल की कीमतों में जोरदार तेजी

    मिडिल ईस्ट में बढ़ती आग, वैश्विक बाजार पर वार-क्रूड ऑयल की कीमतों में जोरदार तेजी

    नई दिल्ली। इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में 7 प्रतिशत से अधिक की तेज उछाल दर्ज की गई। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद निवेशकों ने संभावित आपूर्ति संकट का अंदेशा जताया, जिससे तेल के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई की ओर बढ़ने लगे।

    ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई में जोरदार तेजी
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude के वायदा भाव बढ़कर 82.37 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए, जो जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। ब्रेंट 7.60 प्रतिशत चढ़कर 78.41 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। वहीं अमेरिकी West Texas Intermediate (डब्ल्यूटीआई) क्रूड के वायदा भाव 7.19 प्रतिशत उछलकर 71.86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए।

    होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट की आशंका
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, Iran ने रणनीतिक Strait of Hormuz से गुजरने वाले नौवहन को सीमित करने के संकेत दिए हैं। यह वही मार्ग है, जिससे दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। भारत के 40 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल का आयात भी इसी रास्ते से होता है। ऐसे में आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने बाजार में जोखिम प्रीमियम बढ़ा दिया है।

    ओपेक का दांव, क्या थमेगी रफ्तार?
    इसी बीच OPEC ने अगले महीने से उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है। सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व में सदस्य देश प्रतिदिन 2.06 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन करेंगे। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि यदि भू-राजनीतिक तनाव गहराता है तो यह बढ़ोतरी कीमतों को स्थिर रखने के लिए पर्याप्त नहीं होगी।

    भारत पर सीधा असर
    विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। कीमतों में हर 1 डॉलर की वृद्धि से भारत का वार्षिक आयात बिल करीब 2 अरब डॉलर बढ़ जाता है। इससे महंगाई, चालू खाते का घाटा और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। अधिक तेल कीमतें परिवहन लागत, समुद्री बीमा और ऊर्जा आधारित उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती हैं।

    90 से 100 डॉलर का खतरा
    बाजार जानकारों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान जारी रहता है तो ब्रेंट 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकता है। व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की स्थिति में यह 100 डॉलर के स्तर को भी पार कर सकता है। फिलहाल बाजार का रुख कंपनियों की तिमाही आय से ज्यादा तेल की चाल पर निर्भर नजर आ रहा है। तनाव कम होने, नेतृत्व पर स्पष्टता आने और समुद्री मार्ग सुरक्षित रहने की ठोस गारंटी मिलने तक तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

  • सेफ हेवन की ओर भागे निवेशक, युद्ध की आहट से गोल्ड-सिल्वर में जबरदस्त तेजी

    सेफ हेवन की ओर भागे निवेशक, युद्ध की आहट से गोल्ड-सिल्वर में जबरदस्त तेजी

    नई दिल्ली। इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने वैश्विक बाजारों में घबराहट बढ़ा दी है। मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल की संयुक्त कार्रवाई और उसके बाद जवाबी हमलों की खबरों ने अनिश्चितता को और गहरा कर दिया। इसी माहौल में निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाते हुए सुरक्षित निवेश की ओर रुख किया, जिसका सीधा फायदा सोना और चांदी को मिला। सोमवार को कीमती धातुओं में 3 प्रतिशत से अधिक की तेज उछाल दर्ज की गई।

    एमसीएक्स पर रिकॉर्ड के करीब भाव
    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अप्रैल वायदा सोना कारोबार के दौरान 3 प्रतिशत से ज्यादा उछलकर 1,67,915 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। वहीं मार्च वायदा चांदी भी 3 प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ 2,85,978 रुपये प्रति किलोग्राम पर जा पहुंची। खबर लिखे जाने तक सुबह लगभग 10:46 बजे अप्रैल एक्सपायरी वाला सोना 4,612 रुपये यानी 2.85 प्रतिशत बढ़कर 1,66,716 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था, जबकि मार्च एक्सपायरी चांदी 7,311 रुपये यानी 2.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,82,309 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।

    भू-राजनीतिक जोखिम से बाजार में घबराहट
    तेहरान पर हमलों और जवाबी मिसाइल कार्रवाई के बाद व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका ने बाजारों को जोखिम से बचाव की मुद्रा में ला दिया है। हालांकि कुछ रिपोर्टों में Ali Khamenei को लेकर दावे किए गए, लेकिन ऐसी बड़ी खबरों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि आवश्यक होती है। भू-राजनीतिक तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका भी बढ़ी है, जिससे ऊर्जा बाजार में भी हलचल तेज हुई।

    डॉलर और कच्चा तेल भी चढ़े
    डॉलर इंडेक्स 0.24 प्रतिशत बढ़कर 97.85 पर पहुंच गया, जिससे अन्य मुद्राओं में खरीदारी करने वालों के लिए सोना अपेक्षाकृत महंगा हो गया। इसके बावजूद सुरक्षित निवेश की मांग इतनी मजबूत रही कि कीमतों में तेजी बनी रही। कच्चे तेल में भी 7 प्रतिशत से अधिक की उछाल दर्ज की गई, क्योंकि बाजार को डर है कि आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों की राय और आगे का अनुमान
    मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कमोडिटी विश्लेषक मानव मोदी के मुताबिक, अमेरिका-ईरान तनाव और टैरिफ नीति को लेकर अनिश्चितता ने सोने की तेजी को मजबूती दी है। 2025 में अब तक सोना करीब 64 प्रतिशत चढ़ चुका है, जिसे केंद्रीय बैंकों की खरीद, ईटीएफ में निवेश और ढीली मौद्रिक नीति की उम्मीदों का सहारा मिला है।

    वैश्विक निवेश बैंक JPMorgan Chase ने 2026 के अंत तक सोना 6,300 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान जताया है, जबकि Bank of America ने 6,000 डॉलर प्रति औंस तक जाने की संभावना व्यक्त की है। अब निवेशकों की नजर प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के विनिर्माण पीएमआई और अमेरिकी श्रम बाजार के आंकड़ों पर है, जो आगे की दिशा तय करेंगे।

  • भारत-कनाडा रिश्तों में नई गर्माहट! जयशंकर ने मार्क कार्नी से मुलाकात कर दिए बड़े संकेत

    भारत-कनाडा रिश्तों में नई गर्माहट! जयशंकर ने मार्क कार्नी से मुलाकात कर दिए बड़े संकेत

    नई दिल्ली। भारत और कनाडा के संबंधों में नई रफ्तार देखने को मिली जब विदेश मंत्री S. Jaishankar ने नई दिल्ली में कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश रिश्तों को सामान्य और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मुलाकात के बाद जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्नी से मिलकर खुशी हुई और आगे की साझेदारी को लेकर उनकी प्रतिबद्धता सराहनीय है।

    मुंबई से दिल्ली तक-पहला आधिकारिक दौरा
    प्रधानमंत्री कार्नी अपनी पत्नी डायना फॉक्स कार्नी के साथ 27 फरवरी से 2 मार्च तक भारत के पहले आधिकारिक दौरे पर आए हैं। शुक्रवार को मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने कारोबारी जगत से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। भारतीय और कनाडाई सीईओ, उद्योगपतियों, वित्तीय विशेषज्ञों, इनोवेटर्स और एजुकेटर्स से बातचीत कर उन्होंने आर्थिक सहयोग के नए रास्ते तलाशने की बात कही। मुंबई पहुंचते ही उन्होंने भारत को “दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था” बताया और साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने की इच्छा जताई।

    मोदी से मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी पर फोकस
    नई दिल्ली पहुंचने के बाद कार्नी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह प्रधानमंत्री Narendra Modi से मिलने आए हैं। दोनों देशों को “आत्मविश्वासी और महत्वाकांक्षी” बताते हुए उन्होंने ऊर्जा, टैलेंट, इनोवेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की बात कही। हैदराबाद हाउस में दोनों नेताओं के बीच डेलीगेशन-स्तरीय वार्ता प्रस्तावित है, जिसमें व्यापार, निवेश, जरूरी खनिज, कृषि, शिक्षा, रिसर्च और लोगों के बीच संबंध जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

    पिछली बैठकों की समीक्षा, आगे की राह तय
    विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेता कनानास्किस (जून 2025) और जोहान्सबर्ग (नवंबर 2025) में हुई पिछली मुलाकातों के बाद हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे। भारत-कनाडा सीईओ फोरम में भी दोनों की मौजूदगी संभावित है, जहां क्षेत्रीय और वैश्विक विकास पर विचार साझा किए जाएंगे।

    यह दौरा ऐसे दौर में हो रहा है जब दोनों देश रिश्तों को संतुलित और रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। आपसी संवेदनशीलताओं का सम्मान, मजबूत आर्थिक गतिविधियां और लोगों के बीच गहरे संबंध-इन्हीं आधारों पर नई साझेदारी की नींव रखी जा रही है।

    सकारात्मक संदेश के साथ आगे बढ़ते कदम
    कार्नी ने मुंबई से साझा वीडियो में कहा कि भारत के साथ सहयोग कनाडाई श्रमिकों और व्यवसायों के लिए नए अवसर खोलेगा। वहीं जयशंकर की प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया कि भारत भी इस रिश्ते को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    दोनों देशों के बीच यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक कूटनीति नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक साझेदारी का संकेत मानी जा रही है-जहां ऊर्जा से लेकर एआई तक, कई क्षेत्रों में सहयोग की नई इबारत लिखी जा सकती है।

  • मध्य पूर्व में जंग का असर भारत पर? गृह मंत्रालय का राज्यों को अलर्ट, विरोध प्रदर्शनों पर खास नजर

    मध्य पूर्व में जंग का असर भारत पर? गृह मंत्रालय का राज्यों को अलर्ट, विरोध प्रदर्शनों पर खास नजर


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध जैसे हालात के बीच केंद्र सरकार ने देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र जारी कर ईरान के समर्थन या विरोध में संभावित प्रदर्शनों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर देश के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे सकता है, इसलिए कानून-व्यवस्था को हर हाल में प्राथमिकता दी जाए।

    विरोध प्रदर्शनों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश
    गृह मंत्रालय ने अपने पत्र में कहा है कि यदि किसी राज्य में ईरान के पक्ष या विपक्ष में प्रदर्शन आयोजित होते हैं, तो स्थानीय प्रशासन स्थिति पर पैनी नजर रखे। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, खुफिया तंत्र की सक्रियता और भीड़ प्रबंधन की ठोस तैयारी सुनिश्चित करने को कहा गया है। मंत्रालय ने यह भी चेतावनी दी है कि कुछ असामाजिक तत्व प्रदर्शनों की आड़ में माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं, जिन्हें समय रहते चिन्हित कर निष्प्रभावी किया जाए।

    सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ाने के आदेश
    मंत्रालय ने राज्यों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहे भड़काऊ या भ्रामक संदेशों पर सख्त नजर रखने के निर्देश दिए हैं। अफवाहों और उकसावे वाली सामग्री के जरिए तनाव फैलाने की कोशिशों को रोकने के लिए साइबर मॉनिटरिंग बढ़ाने को कहा गया है। जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को स्थिति के अनुरूप धारा 144 जैसे एहतियाती कदम उठाने की छूट भी दी गई है।

    हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पर सख्ती
    केंद्र ने दोहराया है कि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि, हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्यों से समन्वय बनाए रखते हुए शांति और सांप्रदायिक सौहार्द कायम रखने पर जोर दिया गया है।

    हालांकि, कुछ सोशल मीडिया दावों में कहा जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल के हमले में Ali Khamenei की मौत हो गई है। इस तरह के दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। Iran के सर्वोच्च नेता के संबंध में ऐसी किसी बड़ी घटना की पुष्टि विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से नहीं हुई है, इसलिए प्रशासन ने अफवाहों से बचने की अपील की है।

    जम्मू-कश्मीर में एहतियाती कदम
    इधर Jammu and Kashmir के कई इलाकों से विरोध प्रदर्शनों की खबरें सामने आई हैं। Srinagar में एहतियातन मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद की गईं और कुछ स्कूलों को भी सुरक्षा कारणों से बंद रखा गया। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और हालात सामान्य बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    मध्य पूर्व में जारी तनाव का सीधा असर भारत की कानून-व्यवस्था पर न पड़े, इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारें चौकन्नी हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां सतर्क मोड में हैं और किसी भी अफवाह या उकसावे से बचने की अपील की जा रही है।

  • IND vs AUS: अनुभव नहीं, जोश पर भरोसा! ऑस्ट्रेलिया ने टेस्ट के लिए दो नए चेहरों को दिया मौका

    IND vs AUS: अनुभव नहीं, जोश पर भरोसा! ऑस्ट्रेलिया ने टेस्ट के लिए दो नए चेहरों को दिया मौका

    नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वनडे सीरीज के बाद अब नजरें 6 से 9 मार्च तक खेले जाने वाले एकमात्र टेस्ट मैच पर टिक गई हैं। इस हाई-वोल्टेज मुकाबले से पहले ऑस्ट्रेलिया ने अपनी टेस्ट टीम की घोषणा कर दी है और चयनकर्ताओं ने दो अनकैप्ड खिलाड़ियों को मौका देकर सबको चौंका दिया है। भारत के खिलाफ इस ऐतिहासिक टेस्ट में युवा जोड़ी रेचल ट्रेनमैन और मैटलन ब्राउन को शामिल किया गया है, जिससे साफ है कि मेजबान टीम भविष्य की तैयारी के साथ मैदान में उतरना चाहती है।

    रेचल ट्रेनमैन और मैटलन ब्राउन को सुनहरा मौका

    ऑस्ट्रेलिया ने रेचल ट्रेनमैन और मैटलन ब्राउन को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। दोनों खिलाड़ियों ने पिछले अगस्त में ब्रिस्बेन में इंडिया ए के खिलाफ चार दिवसीय रेड-बॉल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ए का प्रतिनिधित्व किया था। उस प्रदर्शन के आधार पर चयनकर्ताओं ने इन पर भरोसा जताया है। यह अनकैप्ड जोड़ी इस सप्ताह पर्थ में टीम से जुड़ेगी और टीम संयोजन में नई ऊर्जा भरने की उम्मीद है।

    चोटों से जूझ रही ऑस्ट्रेलिया, मजबूती की तलाश

    ऑस्ट्रेलियाई टीम इस समय चोटों से परेशान है। तेज गेंदबाज किम गार्थ पहले ही बाहर हो चुकी हैं, जबकि स्टार ऑलराउंडर एलिस पेरी क्वाड इंजरी से जूझ रही हैं। अगर पेरी समय पर फिट नहीं होतीं तो वह सिर्फ बल्लेबाज के तौर पर खेल सकती हैं। कप्तान सोफी मोलिनक्स भी पीठ की समस्या के कारण इस टेस्ट से बाहर रहेंगी। ऐसे में रेचल ट्रेनमैन को पेरी के कवर के रूप में टीम में शामिल किया गया है, जिससे संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है। मैटलन ब्राउन की बात करें तो 28 वर्षीय इस तेज गेंदबाज को 2021 के बाद पहली बार ऑस्ट्रेलियाई टीम में जगह मिली है। उन्होंने इस सीजन में न्यू साउथ वेल्स के लिए 10 मैचों में 16 विकेट लेकर चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा था।

    कप्तान सोफी मोलिनक्स की गैरमौजूदगी में विकेटकीपर बल्लेबाज एलिसा हीली टीम की कमान संभालेंगी। यह हीली का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला होगा, जिससे मैच और भी भावुक हो गया है। उन्होंने हाल ही में भारत के खिलाफ वनडे में 98 गेंदों पर 158 रन की विस्फोटक पारी खेलकर अपने इरादे साफ कर दिए थे। ऐसे में वह इस टेस्ट को यादगार बनाना चाहेंगी।

    दोनों टीमों की संभावित टक्कर

    ऑस्ट्रेलिया टेस्ट टीम में एलिसा हीली (कप्तान), डार्सी ब्राउन, मैटलन ब्राउन, एश्ले गार्डनर, लूसी हैमिल्टन, अलाना किंग, फोएबे लिचफील्ड, बेथ मूनी, ताहलिया मैकग्राथ, एलिस पेरी, एनाबेल सदरलैंड, जॉर्जिया वोल और जॉर्जिया वेयरहैम शामिल हैं।

    वहीं भारतीय टीम की कमान हरमनप्रीत कौर संभालेंगी, जबकि स्मृति मंधाना उपकप्तान होंगी। टीम में शेफाली वर्मा, जेमिमा रोड्रिग्स, ऋचा घोष, दीप्ति शर्मा और रेणुका ठाकुर जैसे अहम खिलाड़ी मौजूद हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यह एकमात्र टेस्ट मुकाबला रोमांच, रणनीति और भावनाओं का संगम बनने जा रहा है, जहां युवा जोश और अनुभव की टक्कर देखने को मिलेगी।

  • 45 साल तक दाहिना हाथ छिपाए रहे अयातुल्लाह अली खामेनेई, जानिए क्‍या थी वजह ?

    45 साल तक दाहिना हाथ छिपाए रहे अयातुल्लाह अली खामेनेई, जानिए क्‍या थी वजह ?


    नई दिल्ली। ईरान की सत्ता पर तीन दशक से अधिक समय तक मजबूत पकड़ बनाए रखने वाले अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर ने पश्चिम एशिया की राजनीति में हलचल मचा दी है। अमेरिकी और इजरायली हमलों में उनके मारे जाने की सूचना के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और कई देशों में विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिल रहे हैं। 36 वर्षों तक सर्वोच्च नेता रहे खामेनेई का राजनीतिक जीवन जितना प्रभावशाली रहा उतना ही विवादों से भी घिरा रहा। लेकिन उनके जीवन का एक ऐसा पहलू भी था जिसने उन्हें 45 साल तक अपना दाहिना हाथ सार्वजनिक रूप से छिपाने पर मजबूर कर दिया।

    1981 का वह धमाका जिसने बदल दी तकदीर

    साल 1981 में जब खामेनेई ईरान के राष्ट्रपति थे और ईरान-इराक युद्ध का दौर चल रहा था तभी उन पर एक जानलेवा हमला हुआ। नमाज के बाद वह लोगों से बातचीत कर रहे थे कि एक व्यक्ति उनकी मेज पर टेप रिकॉर्डर रखकर चला गया। कुछ ही देर बाद उसमें विस्फोट हो गया। इस हमले की जिम्मेदारी फुरकान ग्रुप ने ली और इसे इस्लामिक रिपब्लिक के लिए तोहफा बताया।
    विस्फोट में खामेनेई गंभीर रूप से घायल हो गए और कई महीनों तक अस्पताल में भर्ती रहे। इस हमले का सबसे बड़ा असर उनके दाहिने हाथ पर पड़ा जो हमेशा के लिए निष्क्रिय हो गया। उसमें लकवा मार गया। बाद में उन्होंने कहा था कि उन्हें एक हाथ की जरूरत नहीं अगर उनका दिमाग और जुबान काम करते रहें तो वही काफी है। इसके बाद से वह शपथ या सार्वजनिक कार्यक्रमों में बायां हाथ ही उठाते थे।

    खोमैनी की विरासत और सत्ता तक सफर
    1989 में रूहोल्ला खोमैनी की मृत्यु के बाद खामेनेई को ईरान का सर्वोच्च नेता चुना गया। इससे पहले वह राष्ट्रपति रह चुके थे और क्रांति के शुरुआती दौर से ही सक्रिय थे। 1939 में मशहद में जन्मे खामेनेई ने नजफ और क़ुम के धार्मिक मदरसों में शिक्षा प्राप्त की। किशोरावस्था में ही उन्होंने क्रांतिकारी इस्लामी विचारधारा अपनाई जिसमें नवाब सफावी जैसे धर्मगुरुओं का प्रभाव था।

    1958 में उनकी मुलाकात खोमैनी से हुई और उन्होंने उनकी विचारधारा को अपना लिया। खोमैनीवाद का मूल सिद्धांत विलायत-ए-फकीह था जिसके तहत सर्वोच्च धार्मिक नेता को व्यापक राजनीतिक और धार्मिक अधिकार मिलते हैं। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यही व्यवस्था ईरान की सत्ता संरचना का आधार बनी।

    सत्ता सख्ती और विरोध

    सर्वोच्च नेता बनने के बाद खामेनेई ने घरेलू राजनीति पर मजबूत नियंत्रण स्थापित किया। उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर आईआरजीसी के साथ करीबी संबंध बनाए जो समय के साथ देश की सबसे प्रभावशाली ताकतों में से एक बन गई। उनके शासनकाल में आंतरिक विरोध को सख्ती से दबाया गया। हाल के वर्षों में हुए जनआंदोलनों को भी कठोरता से नियंत्रित किया गया जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत की खबरें सामने आईं।

    हालांकि उनकी नियुक्ति भी विवादों से घिरी रही। कुछ धर्मगुरुओं ने सवाल उठाया कि उनके पास ग्रैंड अयातुल्ला का दर्जा नहीं था जो संवैधानिक रूप से जरूरी माना जाता था। बाद में संविधान संशोधन और जनमत संग्रह के जरिए सर्वोच्च नेता बनने की शर्तों में बदलाव किया गया और उन्हें औपचारिक मान्यता दी गई।

    प्रभाव जो दशकों तक कायम रहा

    खामेनेई को अक्सर आधुनिक ईरान का सबसे शक्तिशाली नेता माना गया। भले ही इस्लामी क्रांति के जनक खोमैनी थे लेकिन लंबे समय तक सत्ता में बने रहकर खामेनेई ने राजनीतिक सैन्य और धार्मिक संस्थाओं पर गहरी पकड़ स्थापित की। उनका दाहिना हाथ भले ही निष्क्रिय रहा लेकिन सत्ता पर उनकी पकड़ मजबूत बनी रही। उनकी मृत्यु के बाद अब ईरान एक नए दौर की ओर बढ़ रहा है लेकिन खामेनेई का नाम देश के राजनीतिक इतिहास में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा।

  • Israel-Iran युद्ध के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति की चिंता… क्या रूस से आयात बढ़ाएगा भारत?

    Israel-Iran युद्ध के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति की चिंता… क्या रूस से आयात बढ़ाएगा भारत?


    नई दिल्ली।
    ईरान संकट (Israel-Iran War) के बीच भारत (India) समेत दुनिया के तमाम देशों के सामने तेल से जुड़ी समस्याएं खड़ी होने की चिंता है। हालांकि जानकारों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे कच्चे तेल (Crude Oil) के प्रमुख आपूर्ति मार्ग के बंद होने से भारत को निकट भविष्य में कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान का सामना करने की आशंका नहीं है। अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि कच्चे तेल का भंडार कम से कम 10 दिन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।


    भारत के पास आकस्मिक योजनाएं

    ईरान पर अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों के बाद तेजी से बदलते घटनाक्रम में इस्लामिक गणराज्य के सर्वोच्च नेता के मारे जाने की खबरें भी शामिल हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह संघर्ष बहुत लंबा नहीं चलेगा। हालांकि, शीर्ष अधिकारियों और विश्लेषकों का कहना है कि यदि तनाव बढ़ता है, तो भारत के पास आकस्मिक योजनाएं तैयार हैं।


    रूस से आयात बढ़ा सकता है भारत

    ईरान के सरकारी मीडिया ने 28 फरवरी को कहा था कि अमेरिका और इजरायल के मिसाइल हमलों के जवाब में उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा निकासी बिंदुओं में से एक है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। अधिकारियों ने कहा कि कम अवधि के लिए इसके बंद होने से भारत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उसके पास ईंधन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त आपूर्ति है। उन्होंने आगे कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो देश रूसी तेल की खरीद बढ़ाकर अपने आयात स्रोतों में बदलाव कर सकता है।


    भारत के पास कितना तेल भंडार

    हालांकि, इसका तत्काल प्रभाव तेल की कीमतों पर दिखेगा। ब्रेंट क्रूड इस सप्ताह सात महीने के उच्चस्तर लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। यदि आपूर्ति बाधित होती है, तो कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ सकती हैं। एक अधिकारी ने कहा, ”भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के पास टैंक और पारगमन में मिलाकर 10 से 15 दिन का कच्चा तेल भंडार है। इसके अलावा, उनके ईंधन टैंक भरे हुए हैं, जो देश की 7-10 दिन की ईंधन जरूरत को आसानी से पूरा कर सकते हैं।” एक अन्य अधिकारी ने कहा कि भारत वेनेजुएला, ब्राजील और अफ्रीका जैसे दूरदराज के देशों से भी तेल खरीद सकता है।

  • साल का पहला चंद्रग्रहण मंगलवार को… जानिए ग्रहण और सूतक काल की टाइमिंग

    साल का पहला चंद्रग्रहण मंगलवार को… जानिए ग्रहण और सूतक काल की टाइमिंग


    नई दिल्ली।
    कल 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2026) लगने जा रहा है. यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. खास बात यह है कि यह चंद्र ग्रहण भारत (India) में दिखाई देगा, इसलिए यहां सूतक काल (Sutak Period) मान्य होगा और धार्मिक नियमों का पालन किया जाएगा. मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ नहीं किया जाता. ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों की सफाई कर गंगाजल का छिड़काव किया जाता है और फिर नियमित पूजा-अर्चना शुरू होती है।

    ज्योतिष के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लग रहा है. इसका प्रभाव खासतौर पर कुछ राशियों पर अधिक देखने को मिल सकता है।

    चंद्र ग्रहण 2026 सूतक काल टाइमिंग (Chandra Grahan 2026 Sutak kaal Timing)
    यह चंद्र ग्रहण भारत के पूर्वी हिस्सों में ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, जबकि अन्य क्षेत्रों में आंशिक रूप से नजर आ सकता है. भारत के अलावा यह ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी दिखाई देगा.


    चंद्र ग्रहण का प्रभाव

    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस चंद्र ग्रहण का असर सबसे पहले मन और भावनाओं पर पड़ेगा. इस दौरान व्यक्ति को मानसिक अस्थिरता, चिंता या निर्णय लेने में भ्रम महसूस हो सकता है. इसलिए इस समय शांत रहना और बड़े फैसलों से बचना बेहतर माना जाता है. तो आइए पंडित प्रवीण मिश्र के द्वारा जानते हैं कि चंद्रग्रहण किन राशियों के लिए अशुभ रहेगा।


    कर्क राशि (Cancer)

    कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा होते हैं, इसलिए इस राशि के जातकों पर ग्रहण का प्रभाव अधिक महसूस हो सकता है. आर्थिक मामलों, निवेश और प्रॉपर्टी से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचें. परिवार, खासकर माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें और वाणी में संयम बनाए रखें.
    उपाय: भगवान शिव को जल अर्पित करें और ”ऊं नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें.


    सिंह राशि (Leo)

    यह ग्रहण सिंह राशि में ही लग रहा है, इसलिए इस राशि के लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. आने वाले 15 दिनों तक बड़े फैसले टालें, खर्चों पर नियंत्रण रखें और रिश्तों में संतुलन बनाए रखें.
    उपाय: ग्रहण के बाद स्नान करें, दान करें और भगवान शिव का अभिषेक करें.


    कन्या राशि (Virgo)

    कन्या राशि वालों के लिए यह ग्रहण खर्च और मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है. अनावश्यक खर्च से बचें और नकारात्मक सोच से दूरी बनाए रखें. करियर से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी न करें.
    उपाय: भगवान शिव की पूजा करें, बेलपत्र अर्पित करें और नियमित मंत्र जाप करें.