Blog

  • अचानक खरीदी केंद्र पहुंचे सीएम मोहन यादव ,व्यवस्थाओं की हकीकत जानी किसानों संग चाय पर चर्चा

    अचानक खरीदी केंद्र पहुंचे सीएम मोहन यादव ,व्यवस्थाओं की हकीकत जानी किसानों संग चाय पर चर्चा

    भोपाल/खरगोन । मध्यप्रदेश में किसान कल्याण को लेकर सरकार की सक्रियता एक बार फिर देखने को मिली जब Mohan Yadav ने अपने ही बयान को अगले ही दिन जमीन पर उतार दिया। 29 अप्रैल को उन्होंने कहा था कि वे किसी भी गेहूं उपार्जन केंद्र का आकस्मिक निरीक्षण कर सकते हैं और 30 अप्रैल की सुबह उन्होंने इसे सच कर दिखाया। मुख्यमंत्री अचानक Khargone जिले के कतरगांव स्थित खरीदी केंद्र पहुंच गए जहां उन्होंने व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया और किसानों से सीधे संवाद किया

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने न केवल उपार्जन की प्रक्रिया को देखा बल्कि किसानों के साथ बैठकर चाय भी पी और उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हों। यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं था बल्कि जमीनी हकीकत को समझने और सुधार की दिशा तय करने का प्रयास था

    दरअसल मुख्यमंत्री इससे एक दिन पहले महेश्वर में रात्रि विश्राम पर थे और वहीं से उन्होंने संकेत दिए थे कि वे कभी भी निरीक्षण कर सकते हैं। उनके इस कदम ने यह साफ कर दिया कि सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है बल्कि क्रियान्वयन पर भी उतना ही जोर दे रही है। प्रदेश सरकार ने उपार्जन केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए छाया बैठने की व्यवस्था और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए हैं ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े

    सरकार ने गेहूं खरीदी प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाने के लिए कई अहम बदलाव भी किए हैं। तौल में देरी से बचने के लिए उपार्जन केंद्रों पर तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर छह कर दी गई है और जरूरत के अनुसार इसे और बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा चमक विहीन गेहूं की स्वीकार्यता सीमा को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है जिससे अधिक किसानों को राहत मिल सके। सूकड़े दानों की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत और क्षतिग्रस्त दानों की सीमा को भी बढ़ाकर 6 प्रतिशत किया गया है

    खरीदी केंद्रों पर बारदाना तौल कांटे हम्माल तुलावटी सिलाई मशीन कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्शन जैसी सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और साफ सफाई के लिए पंखा और छन्ना जैसी व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं ताकि किसानों की उपज का सही मूल्य मिल सके

    यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो इस वर्ष गेहूं उपार्जन को लेकर किसानों की भागीदारी भी बढ़ी है। अब तक प्रदेश में 9.83 लाख किसानों ने 60.84 लाख मीट्रिक टन गेहूं बेचने के लिए स्लॉट बुक किए हैं जबकि 5 लाख से अधिक किसानों से 22.70 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। पिछले वर्ष जहां 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था वहीं इस बार सरकार ने 100 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा है

    मुख्यमंत्री का यह औचक दौरा यह संदेश देता है कि सरकार किसानों के हितों को लेकर गंभीर है और हर स्तर पर निगरानी रख रही है ताकि योजनाओं का लाभ सही समय पर और सही तरीके से किसानों तक पहुंच सके

  • उत्तराखंड में पांच भाइयों की एक साथ शादी, 'जोझोड़े' प्रथा ने बिखेरी सांस्कृतिक चमक।

    उत्तराखंड में पांच भाइयों की एक साथ शादी, 'जोझोड़े' प्रथा ने बिखेरी सांस्कृतिक चमक।


    नई दिल्ली । परंपराओं का अनूठा मिलन: चकराता के एक ही मंडप में पांच भाइयों ने रचाया इतिहास, जब खुद बारात लेकर दूल्हों के द्वार पहुँचीं दुल्हनें उत्तराखंड की हसीन वादियों में बसे चकराता के खरासी गांव ने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी गूँज पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है। आधुनिकता की चकाचौंध के बीच एक संयुक्त परिवार ने अपनी जड़ों और संस्कृति को जिस खूबसूरती से दुनिया के सामने रखा है, वह काबिले तारीफ है। यहाँ एक ही छत के नीचे, एक ही दिन और एक ही मंडप में एक परिवार के पांच भाइयों का विवाह संस्कार संपन्न हुआ। यह आयोजन न केवल पारिवारिक प्रेम और एकजुटता का प्रतीक बना, बल्कि इसने क्षेत्र की उस प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत कर दिया, जो सदियों से इस समाज की पहचान रही है।

    इस विवाह की सबसे चर्चित और आकर्षक कड़ी यहाँ की विशेष ‘जोझोड़े’ परंपरा रही। जहाँ आमतौर पर दूल्हा बारात लेकर वधू के घर जाता है, वहीं इस पारंपरिक रिवाज के अनुसार पांचों दुल्हनें स्वयं गाजे-बाजे और बारातियों के साथ दूल्हों के घर पहुंचीं। नरेंद्र, प्रदीप, प्रीतम, अमित और राहुल नामक पांचों भाइयों ने अपनी जीवनसंगिनियों के साथ देवभूमि की पावन परंपराओं के बीच सात फेरे लिए। जौनसार-बावर क्षेत्र की यह अनूठी प्रथा न केवल महिलाओं के सम्मान को दर्शाती है, बल्कि यह संयुक्त परिवार के भीतर अनुशासन और आपसी तालमेल का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी पेश करती है।

    आयोजन की सादगी और भव्यता का संगम देखकर हर कोई दंग रह गया। गाँव के बुजुर्गों और मेहमानों का मानना है कि सामूहिक विवाह की यह पहल समाज के लिए प्रेरणादायक है। जहाँ एक ओर यह फिजूलखर्ची को रोकता है, वहीं दूसरी ओर यह रिश्तों की मिठास और सामूहिक आनंद को कई गुना बढ़ा देता है। इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए दूर-दराज के इलाकों से लोग जमा हुए थे। भाइयों की शादी के इस उत्सव के ठीक अगले दिन परिवार की बेटी का विवाह भी निर्धारित है, जिससे पूरा घर और गाँव खुशियों के दोहरे उल्लास में सराबोर नजर आ रहा है।

    सोशल मीडिया पर इस ‘यूनिक वेडिंग’ की तस्वीरें और वीडियो खूब पसंद किए जा रहे हैं। लोग इसे जौनसारी संस्कृति और लोक-परंपराओं के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम बता रहे हैं।

    पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर थिरकते ग्रामीण और रीति-रिवाजों का पालन करते ये पांचों जोड़े यह संदेश दे रहे हैं कि हम चाहे कितने भी आधुनिक हो जाएं, अपनी जड़ों से जुड़कर ही हम वास्तविक गौरव प्राप्त कर सकते हैं। यह सामूहिक विवाह उत्सव लंबे समय तक क्षेत्र के लोगों की यादों में एक प्रेरक गाथा के रूप में जीवित रहेगा।
  • भोजन की थाली में मौत का साया? बेंगलुरु बेकरी कांड के बाद पुलिस ने दर्ज की FIR, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट।

    भोजन की थाली में मौत का साया? बेंगलुरु बेकरी कांड के बाद पुलिस ने दर्ज की FIR, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट।

    नई दिल्ली । बेंगलुरु के मगदी मेन रोड पर स्थित एक नामी बेकरी से रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। एक टैक्सी चालक, जो अपनी दिनभर की थकान मिटाने के लिए नाश्ता करने रुका था, उसे स्वाद के बदले जानलेवा अनुभव मिला।
    पीड़ित दीपू एनके ने जब बेकरी से पनीर टिक्का रोल मंगवाया, तो उन्हें यह अंदाजा भी नहीं था कि उस रोल के अंदर एक मरी हुई छिपकली छिपी है। जैसे ही उन्होंने रोल का पहला बाइट लिया, उन्हें कुछ अजीब महसूस हुआ और गौर से देखने पर उनके होश उड़ गए। यह घटना न केवल बेकरी की साफ-सफाई पर सवाल उठाती है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति उनकी संवेदनहीनता को भी दर्शाती है।

    घटना के कुछ ही देर बाद दीपू की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें लगातार उल्टियां और दस्त होने लगे, जिसके बाद आनन-फानन में उन्हें पास के एक अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया।

    डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को गंभीर मानते हुए उन्हें अगले 24 घंटों तक मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा। पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने इस गंदगी के बारे में बेकरी कर्मचारियों को बताया, तो उन्होंने अपनी गलती मानने के बजाय बेहद गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाया। इतना ही नहीं, बेकरी प्रबंधन ने अस्पताल के खर्च की जिम्मेदारी लेने से भी साफ इनकार कर दिया, जिससे पीड़ित और उनके परिवार को भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

    इस गंभीर लापरवाही के खिलाफ अब कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है। गोविंदराज नगर पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।

    पुलिस मुख्य रूप से लापरवाही और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों को परोसने के बिंदुओं पर जांच कर रही है। हालांकि, जांच में एक तकनीकी बाधा यह आई है कि पीड़ित घबराहट और गिरती सेहत के कारण मौके पर छिपकली की फोटो नहीं ले सके, लेकिन अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट और शुरुआती बयानों के आधार पर पुलिस बेकरी के स्वच्छता मानकों की गहन जांच कर रही है।

    यह मामला उन सभी लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो बाहर के खाने पर निर्भर रहते हैं। खाद्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी किस कदर किसी की जान जोखिम में डाल सकती है, यह घटना इसका जीता-जागता उदाहरण है।

    स्थानीय प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग से अब यह मांग की जा रही है कि वे बेकरी और अन्य खाद्य केंद्रों की औचक जांच करें ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल, पुलिस की जांच जारी है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
  • 55 किमी रेंज वाली स्वदेशी NASM-SR मिसाइल ने समंदर में दिखाया अपना दम।

    55 किमी रेंज वाली स्वदेशी NASM-SR मिसाइल ने समंदर में दिखाया अपना दम।

    नई दिल्ली । भारतीय समुद्री सुरक्षा के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। रक्षा वैज्ञानिकों और नौसेना के साझा प्रयासों ने एक ऐसी स्वदेशी मिसाइल प्रणाली को जन्म दिया है, जो समंदर में दुश्मन की हर चाल को नाकाम करने की क्षमता रखती है। ओडिशा के चांदीपुर परीक्षण रेंज से दागी गई इस ‘Naval Anti-Ship Missile-Short Range’ (NASM-SR) ने अपनी पहली ही उड़ान में यह साबित कर दिया कि भारत अब रक्षा तकनीक के लिए विदेशी निर्भरता को पूरी तरह खत्म करने की राह पर है। इस परीक्षण की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘सॉल्वो लॉन्च’ मोड रहा, जिसमें एक के बाद एक दो मिसाइलों को अत्यंत कम समय के अंतराल पर दागकर उनकी अचूक मारक क्षमता को परखा गया।

    यह मिसाइल विशेष रूप से नौसैनिक हेलीकॉप्टरों के लिए तैयार की गई है, जो इसे अत्यंत लचीला और खतरनाक हथियार बनाती है। तकनीकी बारीकियों की बात करें तो यह मिसाइल ‘इमेजिंग इन्फ्रा-रेड’ (IIR) सीकर तकनीक से लैस है। यह आधुनिक तकनीक मिसाइल को अंधेरे या खराब मौसम में भी दुश्मन के जहाज की ऊष्मा (heat) को पहचान कर उस पर सटीक निशाना लगाने की अनुमति देती है।

    लगभग 55 किलोमीटर की मारक दूरी तय करने वाली यह मिसाइल हवा में 0.8 मैक की रफ्तार से दौड़ती है, जो ध्वनि की गति के करीब है। इसका 385 किलोग्राम का वजन और 100 किलोग्राम का शक्तिशाली विस्फोटक वारहेड किसी भी मध्यम श्रेणी के युद्धपोत को पल भर में जलसमाधि देने के लिए पर्याप्त है।

    दुश्मन के लिए यह मिसाइल एक अदृश्य काल की तरह है। इसकी सबसे बड़ी शक्ति इसकी ‘सी-स्किमिंग’ क्षमता है, जिसके तहत यह समुद्र की लहरों से मात्र 5 मीटर ऊपर उड़ती है। इतनी कम ऊंचाई पर उड़ने के कारण यह दुश्मन के शक्तिशाली रडार की नजरों से बच निकलती है और जब तक रडार इसे देख पाता है, तब तक प्रहार हो चुका होता है।

    इसके अलावा, ‘सॉल्वो लॉन्च’ की खूबी इसे और भी घातक बनाती है; यदि दुश्मन का एयर डिफेंस सिस्टम एक मिसाइल को रोकने की कोशिश भी करे, तो ठीक पीछे आती दूसरी मिसाइल लक्ष्य को भेदने में सफल रहती है। यह रणनीति दुश्मन के सुरक्षा घेरे को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए डिजाइन की गई है।

    भारतीय नौसेना की आक्रमण क्षमताओं में यह इजाफा ‘आत्मनिर्भर भारत’ की एक बड़ी जीत मानी जा रही है। अब तक इस तरह की मिसाइलों के लिए बाहरी देशों पर निर्भर रहने वाली नौसेना के पास अब अपना स्वदेशी विकल्प मौजूद है।

    इसे सीकिंग और अन्य आधुनिक नौसैनिक हेलीकॉप्टरों के बेड़े में शामिल किया जाएगा, जिससे गश्ती और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाएगी। छोटे युद्धपोतों और दुश्मन के रसद जहाजों के लिए यह मिसाइल एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। सफल परीक्षण के बाद अब इसे जल्द ही सेना के बेड़े में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू होगी, जो हिंद महासागर और उससे परे भारत की धाक को और मजबूत करेगी।

  • होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बीच भारत-ईरान का बड़ा कूटनीतिक कदम; विदेश मंत्री अराघची ने डॉ. जयशंकर के साथ की रणनीतिक वार्ता।

    होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बीच भारत-ईरान का बड़ा कूटनीतिक कदम; विदेश मंत्री अराघची ने डॉ. जयशंकर के साथ की रणनीतिक वार्ता।

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की संवेदनशील सुरक्षा स्थिति के बीच ईरान और भारत के बीच उच्च स्तरीय कूटनीतिक संवाद हुआ है। ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने बुधवार शाम भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर को फोन कर क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय हितों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा की।

    इस बातचीत में मुख्य रूप से होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ती सैन्य हलचल और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को रोकने के उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया। भारतीय विदेश मंत्री ने इस संवाद की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि दोनों देश मौजूदा संकट की गंभीरता को देखते हुए एक-दूसरे के निरंतर संपर्क में रहने पर सहमत हुए हैं। यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक व्यापार मार्ग पर युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं।

    ईरानी दूतावास के अनुसार, इस चर्चा में न केवल सुरक्षा मुद्दों बल्कि युद्धविराम की संभावनाओं और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसी बीच, ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से भारत को लेकर एक सकारात्मक संकेत मिला है। ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व के प्रतिनिधियों का मानना है कि भारत इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने और चल रही जंग को समाप्त करने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

    उन्होंने वर्तमान संकट को ‘दमन और आत्मरक्षा’ के बीच का संघर्ष करार देते हुए बढ़ते मानवीय नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की है। ईरान का मानना है कि वैश्विक समुदाय को अपनी प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है और भारत जैसे प्रभावशाली राष्ट्र इस दिशा में मध्यस्थता कर सकते हैं।

    दूसरी ओर, सैन्य मोर्चे पर ईरान का रुख बेहद सख्त नजर आ रहा है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की नौसेना ने अमेरिका को कड़े शब्दों में चेतावनी जारी की है। ईरानी सैन्य अधिकारियों का दावा है कि यदि अमेरिका ने कोई भी नई सैन्य गलती की, तो ईरान अपनी ‘आश्चर्यजनक रणनीतियों’ और नव विकसित रक्षा क्षमताओं का उपयोग करने से पीछे नहीं हटेगा।

    इसके साथ ही, ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर वह अपना नियंत्रण किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेगा। ईरानी संसद में दिए गए बयानों के अनुसार, देश के पास मिसाइलों और उन्नत ड्रोनों का इतना विशाल भंडार है कि वह किसी भी लंबे संघर्ष का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम है।

    कूटनीतिक स्तर पर यह भी खुलासा हुआ है कि तनाव के बावजूद पर्दे के पीछे कुछ वार्ताओं के रास्ते खुले हुए हैं। खबर है कि कुछ पड़ोसी देशों के माध्यम से अमेरिका और ईरान के बीच परोक्ष संवाद की प्रक्रिया जारी है, जिसका प्रबंधन ईरानी संसद के अध्यक्ष द्वारा किया जा रहा है।

    हालांकि, जमीन पर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। ईरान के कड़े सैन्य तेवर और भारत के साथ बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता यह दर्शाती है कि आने वाले दिन पश्चिम एशिया की भू-राजनीति के लिए अत्यंत निर्णायक होने वाले हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज मार्ग की सुरक्षा अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में आ गई है।

  • दुनिया के सबसे अमीर एलन मस्क का फोन चौंकाने वाला सच आया सामने

    दुनिया के सबसे अमीर एलन मस्क का फोन चौंकाने वाला सच आया सामने


    नई दिल्ली । दुनिया के सबसे अमीर और सबसे प्रभावशाली टेक लीडर्स में गिने जाने वाले एलन मस्क को लेकर अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर वह किस तरह की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं। खासतौर पर उनका स्मार्टफोन कौन सा है यह जानने की जिज्ञासा हमेशा बनी रहती है क्योंकि एलन मस्क जैसे इनोवेटर से लोग उम्मीद करते हैं कि वह कोई खास या बेहद एडवांस डिवाइस इस्तेमाल करते होंगे। लेकिन हाल ही में सामने आई एक तस्वीर ने इस जिज्ञासा को खत्म कर दिया और साथ ही लोगों को हैरान भी कर दिया

    रिपोर्ट्स के मुताबिक एलन मस्क को अमेरिका में एक कोर्ट हियरिंग के दौरान देखा गया जहां उनके हाथ में एक स्मार्टफोन साफ नजर आ रहा था। यह फोन कोई खास सीक्रेट डिवाइस नहीं बल्कि Apple iPhone 17 Pro Max था। फोटो में वह ब्लू कलर के इस फोन को इस्तेमाल करते दिखे जिससे यह साफ हो गया कि दुनिया के सबसे बड़े टेक लीडर्स में से एक भी आम लोगों की तरह ही मार्केट में उपलब्ध फोन का इस्तेमाल करते हैं

    यह खुलासा इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि एलन मस्क कई बार अपने खुद के स्मार्टफोन को लेकर चर्चाओं में रहे हैं। लंबे समय से Tesla Phone या Starlink Phone को लेकर अफवाहें चलती रही हैं। माना जा रहा था कि Tesla या SpaceX के जरिए एलन मस्क एक ऐसा स्मार्टफोन ला सकते हैं जो सैटेलाइट कनेक्टिविटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस होगा। हालांकि खुद एलन मस्क ने इन अटकलों को कई बार खारिज किया है और कहा है कि फिलहाल ऐसा कोई प्रोजेक्ट नहीं चल रहा

    इसके बावजूद उन्होंने यह जरूर संकेत दिया है कि भविष्य में अगर जरूरत पड़ी तो वह एक बिल्कुल नया और अलग तरह का डिवाइस बना सकते हैं जो आज के स्मार्टफोन्स से काफी आगे होगा। यह डिवाइस संभवतः AI आधारित होगा और इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल कर सकता है जिससे टेक्नोलॉजी की दुनिया में बड़ा बदलाव आ सकता है

    वायरल फोटो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया भी काफी दिलचस्प रही। कई यूजर्स को यह जानकर हैरानी हुई कि इतनी बड़ी टेक पर्सनैलिटी भी Apple के iPhone का इस्तेमाल कर रही है। कुछ लोगों ने मजाक में यह भी कहा कि इतना पैसा होने के बाद भी iPhone ही इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि कुछ ने इसे Apple के मजबूत इकोसिस्टम की जीत बताया

    दरअसल Apple का इकोसिस्टम अपनी सिक्योरिटी और यूजर एक्सपीरियंस के लिए जाना जाता है और यही वजह है कि दुनिया के कई बड़े बिजनेस लीडर्स और सेलिब्रिटीज इसे पसंद करते हैं। एलन मस्क का iPhone इस्तेमाल करना यह भी दिखाता है कि चाहे टेक्नोलॉजी कितनी भी आगे क्यों न बढ़ जाए लेकिन विश्वसनीयता और यूजर फ्रेंडली अनुभव हमेशा अहम रहता है फिलहाल यह साफ है कि Musk आम स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन भविष्य में उनकी किसी नई टेक्नोलॉजी की एंट्री से स्मार्टफोन इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव आ सकता है।

  • राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात में राघव चड्ढा को याद दिलाया गया पार्टी का सख्त प्रोटोकॉल।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात में राघव चड्ढा को याद दिलाया गया पार्टी का सख्त प्रोटोकॉल।


    नई दिल्ली । राजनीतिक गलियारों में अपनी अलग पहचान रखने वाले राघव चड्ढा ने जैसे ही एक नए राजनीतिक दल के साथ अपनी पारी शुरू की, उन्हें संगठन की गहराई और वहां के कड़े नियमों का अहसास पहले ही दिन हो गया। भारतीय राजनीति में कैडर आधारित व्यवस्था के लिए विख्यात भारतीय जनता पार्टी ने अपने इस नए सदस्य को स्पष्ट कर दिया है कि यहाँ व्यक्तिगत संबंधों से ऊपर पद की मर्यादा होती है।

    हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान जब राघव चड्ढा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुखातिब हुए, तो उन्होंने अनजाने में उन्हें उनके नाम से संबोधित कर दिया। पार्टी के भीतर इस तरह का संबोधन प्रोटोकॉल के खिलाफ माना जाता है, जिसके तुरंत बाद वहां मौजूद वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उन्हें शिष्टाचार के अनकहे लेकिन अनिवार्य नियमों की जानकारी दी।

    भाजपा जैसी विचारधारा आधारित पार्टी में अनुशासन का स्तर काफी ऊंचा रहता है, जहाँ जनसंघ के समय से ही पद की गरिमा को व्यक्तिगत पहचान से ऊपर रखा गया है। राघव चड्ढा और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के बीच हुई इस मुलाकात में जब राघव ने बार-बार अध्यक्ष का नाम लिया, तो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इसे तुरंत सुधारने की सलाह दी।

    उन्हें विनम्रतापूर्वक समझाया गया कि बातचीत के दौरान ‘राष्ट्रीय अध्यक्ष जी’ कहकर संबोधित करना ही पार्टी की संस्कृति का हिस्सा है। यह वाकया उस समय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब हम देखते हैं कि वर्तमान अध्यक्ष उम्र और अनुभव में कई नेताओं से छोटे होने के बावजूद संगठन के सर्वोच्च पद पर आसीन हैं, और पार्टी ने स्पष्ट निर्देश जारी कर रखे हैं कि प्रोटोकॉल में कोई ढील नहीं दी जाएगी।

    संगठन के भीतर यह नियम केवल नए सदस्यों के लिए ही नहीं, बल्कि उन पुराने दिग्गजों के लिए भी है जिनके अध्यक्ष के साथ बेहद करीबी या पुराने संबंध रहे हैं। पार्टी का मानना है कि यदि पद का सम्मान कम होता है, तो संगठन की शक्ति पर भी उसका असर पड़ता है।

    इसलिए, आधिकारिक चर्चाओं के दौरान निजी संबंधों को किनारे रखकर केवल पद के अनुरूप सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग करना अनिवार्य है। राघव चड्ढा के लिए यह अनुभव काफी अलग था, क्योंकि वे एक ऐसी राजनीतिक पृष्ठभूमि से आए हैं जहाँ कार्यशैली और संबोधन के तरीके काफी भिन्न रहे हैं। इस छोटी सी घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा में शामिल होने का अर्थ केवल विचारधारा अपनाना नहीं, बल्कि उसकी सख्त अनुशासन व्यवस्था का हिस्सा बनना भी है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस प्रकार के अनुशासन के जरिए पार्टी अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को एक सूत्र में पिरोकर रखती है। राघव चड्ढा को मिला यह सबक यह भी दर्शाता है कि पार्टी अपने हर सदस्य से पद की गरिमा बनाए रखने की उम्मीद करती है, चाहे वह कितना ही अनुभवी या चर्चित चेहरा क्यों न हो।

    आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि राघव चड्ढा पार्टी के इस नए सांचे में खुद को कितनी जल्दी और कितनी सहजता से ढाल पाते हैं। फिलहाल, ‘नाम नहीं, पद का सम्मान’ के इस सिद्धांत ने स्पष्ट कर दिया है कि यहाँ संगठन ही सर्वोपरि है।

  • 'राघव चड्ढा पर था मेरा क्रश लेकिन उन्होंने शादी कर ली': अर्चना गौतम ने बयां किया अपना अधूरा प्यार।

    'राघव चड्ढा पर था मेरा क्रश लेकिन उन्होंने शादी कर ली': अर्चना गौतम ने बयां किया अपना अधूरा प्यार।

    नई दिल्ली । टेलीविजन की दुनिया में अपनी बेबाकी और चुलबुले अंदाज के लिए पहचानी जाने वाली अर्चना गौतम एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी और पसंद को लेकर सुर्खियों में छा गई हैं। हाल ही में एक बातचीत के दौरान उन्होंने अपने उस गुप्त क्रश का नाम उजागर किया है, जिसकी चर्चा वे अक्सर एक रियलिटी शो के दौरान ‘सांसद’ कहकर किया करती थीं।

    अर्चना ने स्वीकार किया कि वे राजनेता राघव चड्ढा को काफी पसंद करती थीं और उनके प्रति उनके मन में एक खास आकर्षण था। अभिनेत्री ने चुटकी लेते हुए कहा कि जिस समय वे उनके बारे में सपने बुन रही थीं, उसी दौरान उन्होंने शादी कर ली, जिससे उनका यह क्रश अधूरा ही रह गया।

    अर्चना ने अपनी पसंद के बारे में विस्तार से बात करते हुए समाज की सामान्य धारणाओं से हटकर अपनी राय रखी। उन्होंने बताया कि उन्हें फिल्मी ‘चॉकलेट बॉय’ जैसे लड़के बिल्कुल आकर्षित नहीं करते। उनकी पसंद में ऐसे पुरुष शामिल हैं जिनकी शख्सियत में एक वजन हो, जिन्हें वे ‘गुंडा’ या ‘राउडी’ कहती हैं।

    उनके अनुसार, ‘गुंडा’ शब्द से उनका मतलब किसी आपराधिक गतिविधि से नहीं, बल्कि एक ऐसे निडर और रसूखदार इंसान से है जिसके सामने कोई दूसरा आवाज उठाने की हिम्मत न कर सके। अर्चना मानती हैं कि एक पुरुष का व्यक्तित्व धाकड़ और सुरक्षा देने वाला होना चाहिए। इसी सिलसिले में उन्होंने एक अन्य युवा राजनेता चिराग पासवान की भी तारीफ की और उन्हें एक प्रभावशाली व्यक्तित्व बताया।

    अपने भविष्य के इरादों और खुद के स्वभाव पर चर्चा करते हुए अर्चना ने एक अनोखी बात कही। उन्होंने कहा कि वे अब खुद को भी एक ‘गुंडी’ के रूप में तैयार कर रही हैं। उनका मानना है कि वर्तमान समय में वही लोग सफल और सुरक्षित हैं जो निडर और साहसी होते हैं।

    वे चाहती हैं कि उनकी पहचान एक ऐसी महिला के रूप में हो जो न केवल अपनी रक्षा कर सके, बल्कि दूसरों के लिए भी ढाल बनकर खड़ी हो सके। उनका यह बोल्ड और बेपरवाह अंदाज हमेशा से उनके प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय रहा है, चाहे वह ग्लैमर की दुनिया हो या राजनीति का मैदान।

    अर्चना के करियर की बात करें तो उन्होंने साल 2018 में एक प्रतिष्ठित सौंदर्य प्रतियोगिता जीतकर अपनी पहचान बनाई थी और उसके बाद कई बड़े रियलिटी शोज और फिल्मों का हिस्सा रहीं। राजनीति में भी वे अपनी किस्मत आजमा चुकी हैं और अब एक बार फिर अपनी पुरानी पार्टी में लौटने और समाज सेवा से जुड़ने की इच्छा रखती हैं।

    उनके इस ताजा खुलासे ने मनोरंजन और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है, जहाँ लोग उनकी स्पष्टवादिता की सराहना कर रहे हैं। अर्चना का यह अंदाज साफ करता है कि वे जिंदगी को अपनी शर्तों पर जीना पसंद करती हैं और अपनी भावनाओं को छिपाने में यकीन नहीं रखतीं।

  • करण कुंद्रा और तेजस्वी? शूटिंग सेट से लीक हुए बैनर ने किया बड़ा खुलासा।

    करण कुंद्रा और तेजस्वी? शूटिंग सेट से लीक हुए बैनर ने किया बड़ा खुलासा।

    नई दिल्ली । टेलीविजन और फिल्मी गलियारों में इस समय अटकलों का बाजार बेहद गर्म है। सबसे बड़ी चर्चा लोकप्रिय जोड़ी करण कुंद्रा और तेजस्वी प्रकाश को लेकर हो रही है। एक कुकिंग रियलिटी शो के सेट से छनकर आई खबरों ने प्रशंसकों के बीच खलबली मचा दी है। सेट पर मौजूद टीम के सदस्यों द्वारा एक भव्य बैनर लहराया गया, जिस पर इस प्रेमी जोड़े को उनके जीवन के नए सफर की शुभकामनाएं दी गई थीं।
    हालांकि इस जोड़े ने हमेशा अपनी शादी की योजना को निजी रखने की कोशिश की है, लेकिन कैमरे के पीछे की इन गतिविधियों ने यह इशारा कर दिया है कि शायद जल्द ही शहनाइयां बजने वाली हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह कोई विशेष एपिसोड का हिस्सा है या फिर वास्तव में यह शादी का आधिकारिक एलान है।

    सिनेमाघरों की बात करें तो अक्षय कुमार की हॉरर-कॉमेडी ‘भूत बंगला’ ने दर्शकों को बांधे रखा है। फिल्म अपनी रिलीज के दूसरे हफ्ते में भी मजबूती से डटी हुई है और अब यह वैश्विक स्तर पर 200 करोड़ रुपये के मील के पत्थर को छूने के करीब है। यह फिल्म न केवल घरेलू बाजार में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शानदार प्रदर्शन कर रही है।

    वहीं दूसरी ओर, ‘धुरंधर 2’ ने कमाई के मामले में एक ऐसी ऊंचाई हासिल कर ली है, जहां तक पहुंचना कई बड़ी फिल्मों का सपना होता है। करीब सवा महीने से सिनेमाघरों में टिकी इस फिल्म ने हजार करोड़ से कहीं अधिक का व्यवसाय कर भारतीय सिनेमा के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया है। इसके भारी-भरकम बजट और असली धमाकों के साथ शूट किए गए एक्शन दृश्यों का जादू अब भी दर्शकों के सिर चढ़कर बोल रहा है।

    मराठा साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास पर आधारित फिल्म ‘राजा शिवाजी’ को लेकर भी एक बड़ा खुलासा हुआ है। इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट में सलमान खान का शामिल होना सबसे बड़ी खबर बनकर उभरी है। बताया जा रहा है कि अभिनेता ने खुद इस फिल्म का हिस्सा बनने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद उनके लिए एक विशेष और प्रभावशाली भूमिका तैयार की गई।

    इसके अतिरिक्त, दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज कलाकार यश ने अपनी महाकाव्य फिल्म ‘रामायण’ के बारे में बताते हुए कहा कि फिल्म में तकनीक और भावना का अद्भुत मेल होगा। विशेष रूप से रावण और जटायु के बीच होने वाले युद्ध को आधुनिक विजुअल इफेक्ट्स के जरिए जिस तरह पर्दे पर उतारा गया है, वह भारतीय सिनेमा के लिए एक नया अनुभव साबित होगा।

    भविष्य के प्रोजेक्ट्स पर नजर डालें तो विक्की कौशल अपनी आगामी पौराणिक फिल्म ‘महावतार’ के लिए एक लंबी तपस्या शुरू करने जा रहे हैं। वे अगले छह महीनों तक विशेष प्रशिक्षण लेंगे ताकि फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले वे अपने किरदार में पूरी तरह ढल सकें। इसी तरह, अपराध और थ्रिलर पर आधारित फिल्म ‘डकैत’ की डिजिटल रिलीज को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं, जो जल्द ही घर-बैठे दर्शकों का मनोरंजन करेगी। अंत में, नाना पाटेकर की फिटनेस ने सोशल मीडिया पर सबको हैरान कर दिया है। 76 वर्ष की आयु में उनके कठिन व्यायाम के वीडियो ने यह साबित कर दिया है कि उम्र महज एक आंकड़ा है। फिल्मी दुनिया की ये तमाम घटनाएं दर्शाती हैं कि आने वाला समय दर्शकों के लिए रोमांच और भावनाओं से भरपूर होने वाला है।

  • सीमा विवाद पर फिर बवाल: नेपाल एयरलाइंस की पोस्ट से भड़का भारत, तुरंत हटानी पड़ी

    सीमा विवाद पर फिर बवाल: नेपाल एयरलाइंस की पोस्ट से भड़का भारत, तुरंत हटानी पड़ी


    नई दिल्ली । नेपाल की राष्ट्रीय विमानन कंपनी नेपाल एयरलाइंस एक गंभीर चूक के चलते विवादों में घिर गई है। कंपनी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए एक ग्राफिक में भारत के अभिन्न अंग जम्मू-कश्मीर को गलत तरीके से पाकिस्तान का हिस्सा दिखा दिया। जैसे ही यह पोस्ट सामने आई, भारत में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

    यह मामला तब सामने आया जब एयरलाइंस ने अपने किसी प्रमोशनल या नेटवर्क मैप से जुड़ा एक पोस्ट साझा किया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का गलत चित्रण किया गया था। सबसे गंभीर बात यह रही कि इसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को भारत से अलग दिखाया गया। भारत और पाकिस्तान के बीच यह क्षेत्र लंबे समय से विवाद का विषय रहा है, ऐसे में किसी भी अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा इस तरह की गलती को बेहद संवेदनशील माना जाता है।

    सोशल मीडिया पर भारतीय यूजर्स ने इस गलती पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने इसे भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर सीधा प्रहार बताया। यूजर्स ने भारत सरकार के संबंधित विभागों को टैग करते हुए इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की। बढ़ते विवाद को देखते हुए नेपाल एयरलाइंस ने तुरंत डैमेज कंट्रोल करते हुए विवादित पोस्ट को हटा दिया।

    इसके बाद एयरलाइंस ने X पर एक आधिकारिक बयान जारी कर अपनी गलती स्वीकार की और माफी मांगी। कंपनी ने कहा कि साझा किए गए नेटवर्क मैप में नक्शानवीसी से जुड़ी कई त्रुटियां थीं, जो उनके आधिकारिक रुख को नहीं दर्शातीं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के लिए आंतरिक समीक्षा की जा रही है।

    भारत का इस मुद्दे पर रुख हमेशा स्पष्ट रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख देश का अभिन्न हिस्सा हैं। भारत सरकार के नियमों के अनुसार, देश की सीमाओं का गलत चित्रण करना एक गंभीर और दंडनीय अपराध माना जाता है। इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और कंपनियों को ऐसी गलतियों के लिए भारत की आपत्ति का सामना करना पड़ा है।

    नेपाल एयरलाइंस की इस चूक ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को संवेदनशील मुद्दों पर सामग्री साझा करते समय अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। डिजिटल दौर में एक छोटी सी गलती भी बड़े विवाद का रूप ले सकती है और देशों के बीच रिश्तों पर असर डाल सकती है।