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  • क्रांति का तेजस्वी स्वर थे शहीद चंद्रशेखर आजाद : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    क्रांति का तेजस्वी स्वर थे शहीद चंद्रशेखर आजाद : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद भारत की क्रांति का तेजस्वी स्वर थे। राज्य सरकार अमर बलिदानी और क्रांतिकारियों के जीवन से प्रेरणा लेकर गरीब, किसान, युवा और नारी (जीवायएएन) कल्याण के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर आलीराजपुर में आयोजित सभा को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले मुख्यमंत्री ने शहीद चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर आलीराजपुर स्थित उनकी जन्मस्थली चंद्रशेखर आजाद नगर (भाबरा) पहुंचकर उनकी प्रतिमा को नमन किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में गुजरात के साथ-साथ पड़ौसी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले का भी आर्थिक तंत्र बदला है। आलीराजपुर भील जनजाति की संस्कृति और स्वाभिमान की भूमि है। आज देश प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।

    मुख्यमंत्री ने स्थानीय मान्यता के प्रतीक बाबा भीलट देव, बाबा डूंगर देव, बाबा पाटला देव, रानी काजल माता, डूंगरी माता और मालवाई माता को नमन करते हुए कहा कि आलीराजपुर की पावन मिट्टी ने चंद्रशेखर आजाद सहित शहीद छीतू किराड़ जी को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार स्थानीय नायकों के बलिदान और योगदान को नमन करते हुए प्रदेश के जन-जन तक पहुँचाने के लिये प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आलीराजपुर में 1800 करोड़ लागत वाली नर्मदा सिंचाई परियोजना का कार्य प्रगति पर है। इससे 170 गांवों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। हमारे जनजातीय अंचल के किसानों को भी सिंचाई सुविधाओं का पूरा लाभ मिलेगा। किसानों की समृद्धि के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को किसानों के लिए समर्पित किया है। हमारी सरकार लाड़ली बहनों को हर महीने 1500 रुपये की राशि दे रही है। साथ ही किसान भाइयों में खातों में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को प्रतिवर्ष 12 हजार (6 हजार केंद्र और 6 हजार रुपये राज्य) द्वारा दिये जा रहे हैं। प्रदेश के गरीब-जरूरतमंदों की सहायता के लिए जिलों में नि:शुल्क शव वाहन की व्यवस्था की गई है। सड़क हादसे में घायलों को त्वरित इलाज उपलब्ध कराने के लिए राहवीर योजना की शुरुआत की गई है। जनजातीय बच्चे पढ़-लिखकर शासकीय सेवा में आएं, इसके लिए नि:शुल्क कोचिंग योजना प्रारंभ की गई है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आलीराजपुर जिले के समग्र विकास के लिए 171 करोड़ लागत के 49 विकास कार्यों की अनुपम सौगात दी। उन्होंने आलीराजपुर जिले में ग्राम संपर्क मजबूत करने के लिए विभिन्न सड़कों के निर्माण की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने स्व-सहायता समूह, बैंक ऋण वितरण, मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना के हितग्राहियों को हितलाभ एवं प्रमाण-पत्र वितरित किए।

    मुख्यमंत्री ने आलीराजपुर के चहुंमुखी विकास के लिए रिमोट से 79.92 करोड़ की लागत से 14 विकास कार्यों का लोकार्पण किया। उन्होंने खंडाला में 34 करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित भव्य सांदीपनि विद्यालय, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 27 करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से निर्मित 4 उच्च स्तरीय पुलों, 7 करोड़ रुपये की लागत से नवीन बालक-बालिका छात्रावास भवनों एवं 8 करोड़ रुपये की लागत से बलेडी (जोबट) और नानपुर में नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने मोराजी, खामट, पिलियावट और बेकलगांव बड़ी में भी उप स्वास्थ्य केंद्रों का लोकार्पण किया।

    मुख्यमंत्री ने 119.01 करोड़ लागत के 35 विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। इसके अंतर्गत 40 करोड़ 58 लाख रुपये की लागत से 8 सीनियर और जूनियर विद्यालयों में बालक एवं बालिका छात्रावासों, 31 करोड़ रुपये की लागत से बालक-बालिकाओं के लिए 11 नवीन विद्यालय भवनों 24 करोड़ की लागत से दाबड़ी, बोरकुण्डिया और कड़वानिया में 100-100 सीटर बालक-बालिका छात्रावास भवनों, 7 करोड़ 36 लाख रुपये की लागत से रणजीतगढ़ और सूखीबावड़ी तालाब का भूमि-पूजन किया। इसके साथ ही सोंडवा में नवीन जनपद पंचायत और सामुदायिक भवन, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय सोंडवा और अन्य निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन किया।

    बनाएंगे आजाद पार्क

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद नगर को देश-विदेश से आने वाले लोगों के लिए प्रेरणा एवं गौरव का केंद्र बनाया जाएगा। यहाँ पर ऐतिहासिक शहीद पार्क निर्मित किया जायेगा। संस्कृति विभाग के माध्यम से इस स्थान को विकसित कर आकर्षक एवं दर्शनीय स्वरूप प्रदान किया जाएगा, ताकि भावी पीढ़ियाँ आजाद के जीवन, संघर्ष और बलिदान से परिचित हो सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजाद की जन्मभूमि केवल एक स्थान नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, साहस और आत्मसम्मान की जीवंत प्रतीक है, जिसे सहेजना और संवारना हम सभी का दायित्व है।

    आजाद कुटिया में किये श्रद्धासुमन अर्पित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने आजाद कुटिया में पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा चंद्रशेखर आजाद के जीवनकाल की वीरगाथाओं और दुर्लभ तस्वीरों का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि मेहनत, आत्मविश्वास और अदम्य साहस के बलबूते बुलंदियों को छूने वाले आजाद का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है। मात्र 15 वर्ष की बाल्यावस्था में वे वर्ष 1921 के असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए थे। गिरफ्तारी के बाद जब मजिस्ट्रेट के सामने उनका नाम पूछा गया तो उन्होंने गर्व से उत्तर दिया— “नाम: आजाद, पिता का नाम: स्वतंत्र और घर: जेल।” मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसा अद्वितीय साहस केवल अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद ही दिखा सकते थे।

    आजाद की वीरता का इतिहास स्वर्णाक्षरों में अंकित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बचपन में आजाद भील बालकों के साथ रहते हुए निशानेबाजी की कला में दक्ष हुए, जिसने आगे चलकर उन्हें एक अद्वितीय क्रांतिकारी बनाया। उनके जीवन से यह शिक्षा मिलती है कि सच्चा नेतृत्व वही है, जो अपने साथ-साथ अपने साथियों के लिए भी सदैव तत्पर रहे। अंग्रेजों के विरुद्ध हमारे जनजातीय नायकों ने अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ी और उनकी वीरता का इतिहास स्वर्णाक्षरों में अंकित है। उनकी रिवॉल्वर का निशाना अचूक था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के महान जनजातीय नायकों ने अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी है। राज्य सरकार जनजातीय महापुरुषों की विरासत के संरक्षण के लिए दृढ़ संकल्पित है। खरगोन में क्रांतिसूर्य टंट्या मामा के नाम पर विश्वविद्यालय की शुरुआत की गई है। इसी प्रकार अन्य नायकों से संबद्ध स्थलों को भी संरक्षित किया जा रहा है।

  • उमंग और सामाजिक स्नेह का जीवंत महोत्सव है भगोरिया पर्व : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    उमंग और सामाजिक स्नेह का जीवंत महोत्सव है भगोरिया पर्व : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि फाल्गुन मास के रंगों, मांदल की थाप और जीवन-प्रेम की उमंग से सराबोर भगोरिया पर्व जनजातीय संस्कृति, सामाजिक स्नेह और परंपरागत जीवन मूल्यों का जीवंत उत्सव है। इसको प्रत्यक्ष रूप से भगोरिया पर्व में शामिल होकर जिया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को अलीराजपुर के उदयगढ़ भगोरिया पर्व में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अलीराजपुर के उदयगढ़ भगोरिया पर्व स्थल पर पारंपरिक लोकधुनों, नृत्य और उल्लासपूर्ण वातावरण ने सम्पूर्ण क्षेत्र को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भगोरिया पर्व जनजातीय संस्कृति, प्रेम और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। मध्यप्र देश सरकार जनजातीय परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है और ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। विरासत को विकास की राह पर ले जाने के संकल्प के साथ इस उल्लासमय पर्व को गरिमा और भव्यता के साथ मनाया गया। यह आयोजन जनजातीय संस्कृति की सशक्त पहचान और राज्य सरकार की संवेदनशील सोच को प्रतिबिंबित करता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जनजातीय समाज एवं स्थानीय नागरिकों द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मंत्री जनजातीय संस्कृति के प्रतीक तीर कमान भेंट किया। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पुष्प-गुच्छ से स्वागत किया गया। मंत्री द्वारा मंच से सभी को राष्ट्रीय पर्व भगोरिया की शुभकामनाएं दी। अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह ने कहा कि आलीराजपुर जिले के उदयगढ़ में आयोजित स्थानीय भगोरिया पर्व में मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सहभागिता से उत्सव का उल्लास और अधिक बढ़ गया।

    भगोरिया उत्सव में जनजातीय युवक-युवतियां रंग-बिरंगी पारंपरिक वेषभूषा में सजे-धजे दिखाई दिए। पुरुष वर्ग पारंपरिक धोती, अंगोछा एवं साफा धारण किए हुए थे, जबकि महिलाएं कांचली, घाघरा, ओढ़नी तथा पारंपरिक कढ़ाईयुक्त परिधानों में सुसज्जित रहीं। चांदी के हार, हांसली, कड़े, पायल, बिछिया एवं अन्य पारंपरिक आभूषणों की झंकार ने पर्व को भव्यता प्रदान की। मांदल, ढोल एवं अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर कुर्ता कुर्राटियों के साथ लोकनृत्य करते जनजातीय समाज, सामूहिक उल्लास और आपसी मेल-जोल ने भगोरिया के माहौल को जीवंत एवं स्मरणीय बना दिया।

    इस अवसर पर पूर्व सांसद गुमानसिंह डामोर, पूर्व विधायक माधोसिंह डावर, विशाल रावत, जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, संभागायुक्त इंदौर डॉ सुदाम खाड़े, कलेक्टर नीतू माथुर, पुलिस अधीक्षक, प्रशासनिक अधिकारीगण, स्थानीय नागरिक तथा बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग उपस्थित रहे। सम्पूर्ण क्षेत्र में उत्सव, उल्लास और सांस्कृतिक चेतना का वातावरण व्याप्त रहा।

  • T20 World Cup: इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हराया, पाकिस्तान ने ली राहत की सांस

    T20 World Cup: इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हराया, पाकिस्तान ने ली राहत की सांस


    कोलंबो।
    इंग्लैंड (England) ने न्यूजीलैंड (New Zealand) को टी20 वर्ल्ड कप 2026 (T20 World Cup 2026) के सुपर-8 के रोमांचक मुकाबले में चार विकेट से हरा दिया। शुक्रवार को कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी न्यूजीलैंड (New Zealand) ने 20 ओवर में सात विकेट पर 159 रन बनाए। जवाब में इंग्लैंड की टीम ने 19.3 ओवर में छह विकेट पर 161 रन बनाए और मुकाबला अपने नाम कर लिया। विल जैक्स को उनके ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

    इंग्लैंड की इस जीत से पाकिस्तान ने राहत की सांस ली है। सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए उनके लिए अब भी रास्ता खुला है। पाकिस्तान को अपना आखिरी मुकाबला श्रीलंका के खिलाफ खेलना है, अगर टीम यह मैच बड़े अंतर से जीतती है और बेहतर नेट रन रेट कर लेती है तो सेमीफाइनल में प्रवेश कर सकती है।

    इस मुकाबले में न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का फैसला किया था और 20 ओवर में 7 विकेट पर 159 रन बनाए। उनके लिए ग्लेन फिलिप्स ने 39 और टिम सीफर्ट ने 35 रनों की पारियां खेलीं। इंग्लैंड के लिए आदिल रशीद, विल जैक्स और रेहान अहमद ने दो-दो विकेट लिए जबकि लियाम डॉसन को एक सफलता मिली।

    160 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत बेहद खराब रही। मैट हेनरी और लॉकी फर्ग्यूसन ने पहले आठ गेंदों में ही फिल सॉल्ट और जोस बटलर को आउट कर इंग्लैंड को 2 रन पर दो झटके दे दिए। इसके बाद कप्तान हैरी ब्रूक (26) ने पारी को संभाला और जैकब बेथेल (21) के साथ 45 रनों की साझेदारी की। लेकिन ग्लेन फिलिप्स ने पहले गेंद पर ब्रूक को आउट किया और फिर शानदार कैच लेकर बेथेल को भी पवेलियन भेज दिया। इससे इंग्लैंड दबाव में आ गया।

    मध्यक्रम में सैम करन (24) और टॉम बैंटन (33) ने 42 रनों की अहम साझेदारी की। रचिन रवींद्र ने करन को आउट कर मैच में फिर से संतुलन बनाया। आखिरी तीन ओवरों में इंग्लैंड को 43 रन की जरूरत थी। रेहान अहमद ने 7 गेंदों में नाबाद 19 रन की तेज पारी खेली, जिसमें एक चौका और एक छक्का शामिल था। मिचेल सैंटनर के ओवर में 16 रन और ग्लेन फिलिप्स के ओवर में 22 रन आने से मैच इंग्लैंड की ओर झुक गया। अंतिम ओवर में मैट हेनरी लक्ष्य नहीं बचा सके और इंग्लैंड ने 19.3 ओवर में 6 विकेट पर 161 रन बनाकर मुकाबला चार विकेट से जीत लिया।

    न्यूजीलैंड की टीम को इंग्लैंड के खिलाफ मिली हार के बाद 2 अंक का नुकसान हुआ और इस टीम के अभी 3 अंक ही हैं। वहीं पाकिस्तान के अभी एक अंक हैं। पाकिस्तान को अब श्रीलंका के खिलाफ मैच खेलना है और सलमान आगा की टीम ने श्रीलंका को हरा दिया तो उसके भी 3 अंक हो जाएंगे। इस स्थिति में पाकिस्तान और न्यूजीलैंड जिस टीम का रन रेट ज्यादा होगा वही सेमीफाइनल में पहुंचेगा।

  • भोपाल में पराली जलाने पर सख्ती: कलेक्टर ने बैरसिया दौरे में किसानों को दी समझाइश

    भोपाल में पराली जलाने पर सख्ती: कलेक्टर ने बैरसिया दौरे में किसानों को दी समझाइश


    भोपाल। प्रदेश में पराली जलाने वालों पर प्रशासन की सख्ती बढ़ने वाली है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने यह संकेत शुक्रवार को बैरसिया के दौरे के दौरान दिए। उन्होंने एसडीएम आशुतोष शर्मा को निर्देश दिए कि गेहूं और चने की कटाई के बाद कृषि विभाग के साथ गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करें। किसानों को बताया जाए कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण फैलता है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी कम होती है।

    कलेक्टर ने बैरसिया तहसील कार्यालय और एसडीएम कार्यालय का निरीक्षण किया और कामकाज की समीक्षा की। उन्होंने फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति पर असंतोष जताया और तहसीलदार को निर्देश दिए कि ग्रामवार कार्यक्रम बनाकर पटवारियों को सक्रिय किया जाए ताकि लक्ष्य पूरा किया जा सके।

    कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों के समय पर निराकरण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन से जुड़े प्रकरणों का समय सीमा में शत-प्रतिशत निपटारा किया जाए और बैरसिया तहसील का प्रदर्शन राज्य औसत से कम न हो।

    दौरे के दौरान कलेक्टर ने नगर पालिका बैरसिया के विकास कार्यों की भी समीक्षा की। प्रभारी सीएमओ ने जानकारी दी कि नगर में अमृत 2.0 और कायाकल्प योजना के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्य जारी हैं। कलेक्टर ने बसई तालाब के पास माड़ा इमली क्षेत्र और तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तालाब की जल ग्रहण क्षमता बढ़ाने के प्रयास किए जाएं और जलग्रहण क्षेत्र में अतिक्रमण हटाया जाए, ताकि वर्षा ऋतु में तालाब अपनी पूरी क्षमता के अनुसार जल संचय कर सके।

    इस अवसर पर एसडीएम शर्मा ने अपने कार्यालय परिसर में विकसित पार्क का भी निरीक्षण कराया, जिसमें फूल, फल और छायादार पौधे लगाए गए हैं। इसे देखकर कलेक्टर ने प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि इस तरह के पहल से स्थानीय पर्यावरण और हरियाली बढ़ेगी।

    कलेक्टर का यह दौरा यह संदेश देता है कि कृषि और नगर विकास दोनों क्षेत्रों में सरकारी सक्रियता जारी रहेगी। किसानों को पर्यावरणीय दृष्टि से जागरूक करना, तालाबों और जल स्रोतों का संरक्षण, और स्थानीय विकास परियोजनाओं का समय पर निरीक्षण प्रशासन की प्राथमिकता बनेगा।

  • गौकाष्ठ और उपलों से होलिका दहन: कलेक्टर देंगे तीन दिन में रिपोर्ट, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा

    गौकाष्ठ और उपलों से होलिका दहन: कलेक्टर देंगे तीन दिन में रिपोर्ट, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा


    भोपाल। प्रदेश में इस वर्ष होली के अवसर पर होलिका दहन में लकड़ी की जगह गौकाष्ठ और उपलों का उपयोग करने का आदेश जारी किया गया है। सरकार ने सभी कलेक्टरों और संभागायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि गोबर आधारित होलिका दहन को प्रोत्साहित किया जाए और इसके बारे में रिपोर्ट सरकार को सौंपें।

    सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने निर्देश दिए हैं कि हर जिले में होलिका दहन कार्यक्रमों का सत्यापन और पंजीयन किया जाएगा। कलेक्टरों को आदेश दिया गया है कि वे तीन दिनों के भीतर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से जानकारी लेकर इसकी रिपोर्ट राज्य शासन को भेजें। इसके साथ ही यदि कोई संस्था या व्यक्ति इस दिशा में विशेष प्रयास करता है तो उसे प्रोत्साहित भी किया जाएगा।

    इस निर्णय के पीछे मुख्य उद्देश्य है लकड़ी की खपत कम करना और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना। साथ ही सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे प्राकृतिक रंगों से होली मनाएं और जल संरक्षण का ध्यान रखें।

    कलेक्टरों को दिए गए निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि सार्वजनिक होलिका दहन कार्यक्रमों का नि:शुल्क पंजीयन सुनिश्चित किया जाए। इसका पंजीयन जिला मुख्यालय, पंचायत, नगरीय निकाय और अन्य स्थानीय संस्थाओं के माध्यम से होगा। इसके अलावा आयोजनों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा और नगरीय निकाय एवं पंचायतों को सक्रिय रूप से शामिल किया जाएगा। आयोजकों से आवश्यक जानकारी जैसे पहचान पत्र और संपर्क विवरण भी ली जाएगी।

    आगामी दिनों में जिलेवार सम्मान समारोह भी आयोजित किए जाएंगे, जिनमें पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली संस्थाओं और पदाधिकारियों को सम्मानित किया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि इन संस्थाओं को किसी अन्य प्रकार का प्रोत्साहन या सहयोग दिया जाता है तो इसकी जानकारी अलग से साझा की जाएगी।

    इस पहल से न केवल होलिका दहन के दौरान पर्यावरणीय नुकसान कम होगा, बल्कि सामाजिक जागरूकता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में भी एक सकारात्मक संदेश जाएगा। कलेक्टर और अधिकारियों की यह रिपोर्टिंग व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि राज्य में होली का पर्व सुरक्षित, पर्यावरण अनुकूल और सामाजिक सद्भाव के साथ मनाया जाए।

  • होली से ठीक पहले MP में बस हड़ताल, 20 हजार बसें एक दिन के लिए रहेंगी ठप

    होली से ठीक पहले MP में बस हड़ताल, 20 हजार बसें एक दिन के लिए रहेंगी ठप


    भोपाल। होली के त्योहार से ठीक पहले मध्य प्रदेश में यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी पैदा हो सकती है। ट्रेनों में पहले से लंबी वेटिंग चल रही है, वहीं 2 मार्च को प्रस्तावित बस हड़ताल के कारण करीब 20 हजार बसें प्रदेशभर में बंद रहेंगी। सामान्य दिनों में लगभग 12-15 हजार बसों का संचालन होता है, यानी हड़ताल के दिन लगभग पूरा निजी बस परिवहन ठप रहेगा।

    मध्य प्रदेश बस ऑनर एसोसिएशन के महामंत्री जय कुमार जैन ने कहा कि परिवहन विभाग की दमनकारी नीतियों और प्रस्तावित योजनाओं के विरोध में बस मालिकों को मजबूर होकर हड़ताल पर जाना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि सरकार परमिट नीति और राष्ट्रीयकरण के जरिए निजी बसों के व्यवसाय को बड़ी कंपनियों के हाथ में देने की तैयारी कर रही है।

    प्रदेश में कुल 12,780 परमिट वाली और 7,000 से अधिक कॉन्ट्रैक्ट वाली बसें हैं। जय कुमार जैन का कहना है कि परिवहन विभाग योजना बना रहा है कि निजी बस मालिकों से किराया लेकर कंपनियां बस चलाएँ, जबकि मोटर व्हीकल कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इस विरोध में एसोसिएशन ने विस्तृत प्रेस नोट भी जारी किया है।

    हड़ताल में केवल कुछ ही नहीं, बल्कि सभी निजी बस ऑपरेटरों की भागीदारी रहेगी। इसमें कई कांग्रेस और बीजेपी से जुड़े नेताओं की बसें भी शामिल हैं। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यह राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि व्यवसाय और परिवहन नीति से जुड़ा सवाल है।

    वर्तमान में VLT (व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग) प्रणाली लागू है, जो बस की लोकेशन, गति और रूट की जानकारी ऑनलाइन जोड़ती है। ऑपरेटरों का आरोप है कि तकनीकी खामियों और ठेकेदार व्यवस्था के कारण उन्हें बार-बार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

    यात्रियों पर असर:
    होली के दौरान गांव से शहर और शहर से गांव जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है। ट्रेनों में लंबी वेटिंग की स्थिति में बसें सबसे बड़ा विकल्प होती हैं। ऐसे में 2 मार्च को हड़ताल होने से हजारों लोग मुश्किल में पड़ सकते हैं। अब सबकी नजर सरकार और बस मालिकों के बीच बातचीत पर टिकी है।

    बस मालिकों के आरोप और वजहें:

    निजी बस मालिकों के परमिट निरस्त कर राष्ट्रीयकरण की तैयारी।

    मल्टीनेशनल कंपनियों को बस संचालन का व्यापार देने का प्रयास।

    छोटे और पुराने बस मालिकों का व्यवसाय खतरे में।

    VLT प्रणाली और पंजीयन, फिटनेस प्रक्रियाओं में अवरोध।

    स्थायी अनुज्ञा और नवीनीकरण मामलों में लंबित निर्णय।

    अवैध वसूली और शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई का अभाव।

    बस ऑपरेटरों का कहना है कि पहले भी राज्य में परिवहन व्यवस्था के प्रयोग विफल रहे, जैसे MPSRTC का संचालन, और वर्तमान प्रस्ताव भी उसी तरह छोटे और मध्यम बस मालिकों को बाहर करने जैसा है।

    इस बार की हड़ताल का मकसद है कि प्राइवेट बस मालिकों का व्यवसाय सुरक्षित रहे और पेरेंट्स और यात्रियों पर अनावश्यक दबाव न डाला जाए।

  • भोपाल में यूनिफॉर्म और बुक खरीद पर स्कूलों को नहीं होगा दबाव, 8 SDM करेंगे कार्रवाई

    भोपाल में यूनिफॉर्म और बुक खरीद पर स्कूलों को नहीं होगा दबाव, 8 SDM करेंगे कार्रवाई


    नई दिल्ली। भोपाल जिला प्रशासन ने नए शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले प्राइवेट स्कूलों में यूनिफॉर्म और किताबों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने का बड़ा फैसला किया है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने आदेश जारी कर 8 एसडीएम को जिम्मेदारी सौंपी है कि वे सुनिश्चित करें कि पेरेंट्स पर किसी भी प्रकार का दबाव न डाला जाए।

    आदेश के मुताबिक, प्राइवेट स्कूल प्रबंधन और प्राचार्य बच्चों के माता-पिता को यूनिफॉर्म, जूते, टाई, किताबें या स्टेशनरी खरीदने के लिए निर्धारित दुकानों पर मजबूर नहीं कर सकते। इस कदम के पीछे यह वजह है कि वर्तमान में कई स्कूल पेरेंट्स को केवल कुछ चुनिंदा दुकानों से ही सामान खरीदने के लिए बाध्य करते हैं।

    कलेक्टर ने हर अनुभाग में 5 सदस्यीय टीम गठित की है। टीम में संबंधित एसडीएम, तहसीलदार और सरकारी स्कूल के प्राचार्य शामिल हैं। इन टीमों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि नए सत्र में किसी भी स्कूल द्वारा पेरेंट्स पर दबाव न डाला जाए।

    स्कूलों की स्थिति और टाइमलाइन:
    अभी स्कूलों में परीक्षाएं चल रही हैं, जो मार्च तक जारी रहेंगी। अप्रैल में स्कूल फिर से खुलेंगे और इस दौरान अक्सर पेरेंट्स पर यूनिफॉर्म और बुक्स खरीदने का दबाव बनाया जाता है। पिछले साल भी कलेक्टर ने इसी प्रकार का आदेश जारी किया था, ताकि पेरेंट्स की परेशानियों को कम किया जा सके।

    जिम्मेदार टीमों के विवरण:

    एमपी नगर: एसडीएम एलके खरे, तहसीलदार दीपक कुमार द्विवेदी, प्राचार्य एसके खांडेकर, वंदना शुक्ला, नूतन सक्सेना।

    टीटी नगर: एसडीएम अर्चना शर्मा, तहसीलदार कुणाल राउत, प्राचार्य अभिषेक बैंस, सरला कश्यप, मनोज रोहतास।

    कोलार: एसडीएम पीसी पांडेय, तहसीलदार एनएस परमार, प्राचार्य आरके यादव, शीला मौर्य, बीआरसी रूपाली रिछारिया।

    शहर वृत्त: एसडीएम दीपक पांडेय, तहसीलदार रामप्रकाश पांडे, प्राचार्य एसके उपाध्याय, एसएस सिसौदिया, बीआरसी अमित श्रीवास्तव।

    बैरागढ़: एसडीएम रविशंकर राय, तहसीलदार हर्षविक्रम सिंह, प्राचार्य अनामिका खरे, नीलम बसानिया, वेरोनिका मंडल।

    गोविंदपुरा: एसडीएम भुवन गुप्ता, तहसीलदार सौरभ वर्मा, प्राचार्य विनोद राजोरिया, स्मिता मेश्राम, चक्रेश कुमार जैन।

    हुजूर: एसडीएम विनोद सोनकिया, तहसीलदार आलोक पारे, प्राचार्य सुनीता जैन, रचना श्रीवास्तव, अमिता शर्मा।

    बैरसिया: एसडीएम आशुतोष शर्मा, तहसीलदार दिलीप चौरसिया, बीईओ आरएन श्रीवास्त्री, प्राचार्य गीता जोशी, बृजेंद्र कुमार कटारे।

    कलेक्टर ने इन टीमों को निर्देश दिए हैं कि जैसे ही किसी पेरेंट्स की शिकायत मिले, तुरंत कार्रवाई करें। स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने में देरी न हो।

    इस आदेश का उद्देश्य है कि नए शिक्षा सत्र में पेरेंट्स पर अनावश्यक दबाव न डाला जाए, और बच्चों की पढ़ाई और स्कूली माहौल सुचारू रूप से चले। जिला प्रशासन का यह कदम पेरेंट्स की राहत और शिक्षा में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

  • डायरेक्टर प्रियदर्शन का बड़ा खुलासा: इस साल नहीं शुरू होगी हेरा फेरी 3 की शूटिंग, म्यूजिक और राइट्स को लेकर मचा घमासान!

    डायरेक्टर प्रियदर्शन का बड़ा खुलासा: इस साल नहीं शुरू होगी हेरा फेरी 3 की शूटिंग, म्यूजिक और राइट्स को लेकर मचा घमासान!


    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा की सबसे कल्ट कॉमेडी फिल्मों में शुमार ‘हेरा फेरी’ के तीसरे पार्ट का इंतजार कर रहे करोड़ों फैंस के लिए एक निराशाजनक खबर सामने आई है। लंबे समय से चर्चा में रही ‘हेरा फेरी 3’ अब कानूनी विवादों और राइट्स के पचड़े में बुरी तरह फंस गई है। फिल्म के निर्देशक प्रियदर्शन ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में साफ कर दिया है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इस साल फिल्म की शूटिंग शुरू होना नामुमकिन है।

    प्रियदर्शन ने फिल्म की स्थिति को काफी कॉम्प्लिकेटेड बताते हुए कहा कि फिलहाल फिल्म के मालिकाना हक Rights को लेकर कई दावेदार सामने आ गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसारप्रोड्यूसर जेपी विजयकुमार ने मद्रास हाई कोर्ट में दावा किया है कि फिल्म के वास्तविक राइट्स उनके पास हैंन कि फिरोज नाडियाडवाला के पास। वहीं’सेवेन आर्ट्स इंटरनेशनल’ नामक प्रोडक्शन हाउस का तर्क है कि नाडियाडवाला के पास केवल साल 2000 में आई पहली फिल्म के मलयालम रीमेक राइट्स थे। मामला तब और उलझ गया जब यह दावा किया गया कि फ्रेंचाइजी के राइट्स अक्षय कुमार की कंपनी ‘केप ऑफ गुड फिल्म्स’ को अवैध रूप से ट्रांसफर किए गए हैं।

    विवाद सिर्फ कहानी या फिल्म के टाइटल तक सीमित नहीं हैबल्कि इसके म्यूजिक राइट्स पर भी तलवार लटकी हुई है। प्रियदर्शन ने बताया कि भूषण कुमार ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया है कि ‘हेरा फेरी 3’ के म्यूजिक राइट्स उनके पास हैं। जब तक ये तमाम कानूनी मसले हल नहीं हो जातेतब तक टीम एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा सकती। जब प्रियदर्शन से पूछा गया कि क्या 2026 में शूटिंग शुरू हो पाएगीतो उन्होंने दो टूक जवाब दियाइस साल तो बिल्कुल नहीं।

    गौरतलब है कि इससे पहले फिल्म की कास्टिंग को लेकर भी काफी ‘हेरा फेरी’ देखने को मिली थी। परेश रावल ने फिल्म छोड़ दी थीजिसके बाद अक्षय कुमार ने उन पर 25 करोड़ रुपये का केस कर दिया था। हालांकिबाद में समझौता हुआ और अक्षय ने केस वापस ले लिया। इस पर प्रियदर्शन ने चुटकी लेते हुए कहा कि सिनेमा और राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन नहीं होता। इसके अलावाउन्होंने ‘भागम भाग’ के सीक्वल में गोविंदा को मनोज बाजपेयी से रिप्लेस करने की खबरों पर भी अनभिज्ञता जताई। फिलहाल’राजूश्याम और बाबू भैया’ की आइकॉनिक तिकड़ी को बड़े पर्दे पर साथ देखने का सपना देख रहे दर्शकों को अभी लंबा इंतजार करना होगा।

  • गर्मियों में नहीं होगा चेहरा काला और ऑयली! अपनी डेली रूटीन में शामिल करें ये 3 जादुई बदलाव

    गर्मियों में नहीं होगा चेहरा काला और ऑयली! अपनी डेली रूटीन में शामिल करें ये 3 जादुई बदलाव


    नई दिल्ली । गर्मी का मौसम शुरू होते ही हमारी त्वचा की परेशानियां भी बढ़ने लगती हैं. तेज धूप और पसीने की वजह से चेहरा न सिर्फ काला पड़ने लगता है बल्कि बार-बार तेल आने से चेहरे की चमक भी खो जाती है. बहुत से लोग महंगे क्रीम और फेशवॉश इस्तेमाल करते हैं लेकिन फिर भी उन्हें सही रिजल्टनहीं मिलता. असल में गर्मियों में त्वचा का ख्याल रखने के लिए आपको बहुत ज्यादा तामझाम की जरूरत नहीं है. बस अपनी रोज की आदतों में कुछ छोटे और सही बदलाव करने से आप धूप से होने वाले नुकसान से बच सकते हैं. इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे 3 आसान और जादुई तरीकों के बारे में बताएंगे जिन्हें अपनाकर आप तपती गर्मी में भी अपने चेहरे को ठंडा साफ और चमकदार बनाए रख सकते हैं.

    चेहरे को धोने का सही तरीका और समय
    गर्मियों में बार-बार चेहरा धोने से त्वचा का कुदरती तेल खत्म हो जाता है जिससे चेहरा और ज्यादा ऑयली हो जाता है. दिन में सिर्फ दो या तीन बार ही अच्छे फेसवाश का इस्तेमाल करें. जब भी आप बाहर से आएं तो चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे जरूर मारें. इससे धूल-मिट्टी साफ हो जाएगी और चेहरे की गर्मी भी कम होगी. रात को सोने से पहले चेहरा साफ करना कभी न भूलें ताकि आपकी स्किन रात भर सांस ले सके.

    सनस्क्रीन को अपनी आदत बना लें

    सूरज की तेज किरणें चेहरे को काला करने और झुर्रियां पैदा करने का सबसे बड़ा कारण होती हैं. बहुत से लोग सोचते हैं कि घर के अंदर सनस्क्रीन की जरूरत नहीं है लेकिन यह गलत है. घर के अंदर हों या बाहर सनस्क्रीन जरूर लगाएं. यह आपके चेहरे पर एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है और धूप से होने वाले कालेपन को रोकती है. हर 3 से 4 घंटे बाद इसे दोबारा लगाना सबसे अच्छा रहता है.

    पानी और खानपान पर खास ध्यान दें

    बाहर से महंगी क्रीम लगाने से ज्यादा जरूरी है कि आप अंदर से अपनी स्किन का ख्याल रखें. गर्मियों में ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं ताकि शरीर की गंदगी बाहर निकल सके और स्किन हाइड्रेटेड रहे. अपनी डाइट में खीरा तरबूज और नींबू पानी जैसी ठंडी चीजें शामिल करें. तेल-मसाले वाला खाना कम खाएं क्योंकि इससे चेहरे पर पिंपल्स और तेल आने की समस्या बढ़ जाती है. जितना ज्यादा आप फल और सब्जियां खाएंगे आपका चेहरा उतना ही ज्यादा चमकेगा.
  • तापसी पन्नू का इंडस्ट्री पर बड़ा प्रहार: "चाहे साउथ हो या बॉलीवुड, सबको क्लीवेज और कमर से ऑब्सेशन है!

    तापसी पन्नू का इंडस्ट्री पर बड़ा प्रहार: "चाहे साउथ हो या बॉलीवुड, सबको क्लीवेज और कमर से ऑब्सेशन है!


    नई दिल्ली। अपनी बेहतरीन अदाकारी और बेबाक बयानों के लिए मशहूर अभिनेत्री तापसी पन्नू एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में फिल्म ‘अस्सी’ (80) में अपनी परफॉरमेंस के लिए वाहवाही बटोर रहीं तापसी ने ग्लैमर वर्ल्ड के उस काले सच से पर्दा उठाया है, जिसे अक्सर दबा दिया जाता है। तापसी का कहना है कि फिल्म इंडस्ट्री, चाहे वह बॉलीवुड हो या साउथ, महिलाओं के खास बॉडी पार्ट्स को लेकर एक अजीब तरह के ‘ऑब्सेशन’ (जुनून) का शिकार है।

    एक हालिया इंटरव्यू में तापसी ने स्पष्ट किया कि उनके पिछले बयानों को लोगों ने गलत तरीके से समझा। उन्होंने उत्तर बनाम दक्षिण का मुद्दा नहीं बनाया था, बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री की मानसिकता पर सवाल उठाए थे। तापसी ने कहा, “मुद्दा यह नहीं है कि कौन सा हिस्सा हाइलाइट किया जा रहा है, मुद्दा यह है कि यह एक तरह की ‘ताड़ना’ है। लोग कहते हैं कि साउथ में कमर (मिडरिफ) पर फोकस होता है और हिंदी फिल्मों में क्लीवेज पर, लेकिन मेरे लिए यह सिर्फ एक ऑब्सेशन है जो दोनों जगह मौजूद है।”

    तापसी ने अपने करियर के शुरुआती दिनों का एक बेहद असहज कर देने वाला किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह साउथ की फिल्मों में काम कर रही थीं, तब उन्हें ब्रा में पैड लगाने (Padding) के लिए कहा गया था। तापसी ने बताया कि सेट पर जब महिलाएं कम होती हैं, तो इस तरह की बातें कहना डायरेक्टर के लिए भी अजीब होता है, इसलिए वे किसी और के जरिए यह संदेश भिजवाते हैं। उन्होंने उस असहज प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा, “जब हिरोइन वैन से बाहर आती है, तो डायरेक्टर को चेक करना होता है कि जो लुक उन्होंने चाहा था, वह मिला या नहीं। यह पूरा प्रोसेस एक कलाकार के लिए बहुत अनकम्फर्टेबल होता है।”

    बॉलीवुड में अपने सफर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यहां उन्हें कभी कमर दिखाने या पैडिंग के लिए मजबूर नहीं किया गया, क्योंकि उन्होंने यहां ज्यादा ग्लैमरस रोल नहीं किए। हालांकि, करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने डायरेक्टर्स की इन मांगों को एक हद तक माना भी। तापसी के अनुसार, तब मैं नई थी और मुझे लगता था कि डायरेक्टर ‘शिप का कैप्टन’ है, उसे सब पता होगा। जब आप देखते हैं कि बाकी सभी हिरोइनें ऐसा कर रही हैं, तो आप भी इसे प्रोफेशन का हिस्सा मान लेते हैं।” तापसी का यह बयान अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जो इंडस्ट्री में महिलाओं के चित्रण और जेंडर सेंसिटिविटी पर नई बहस छेड़ रहा है।