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  • LPG बुकिंग और डिलीवरी में बदलाव की तैयारी: उपभोक्ताओं के लिए नया सिस्टम ला सकता है बड़ी सुविधा और सख्ती

    LPG बुकिंग और डिलीवरी में बदलाव की तैयारी: उपभोक्ताओं के लिए नया सिस्टम ला सकता है बड़ी सुविधा और सख्ती

    नई दिल्ली। रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 1 मई 2026 से LPG सिलेंडर वितरण प्रणाली से जुड़े नियमों में संशोधन की संभावना जताई जा रही है, जिससे बुकिंग और डिलीवरी की पूरी प्रक्रिया पहले से अधिक सख्त और तकनीकी रूप से नियंत्रित हो सकती है।

    हाल के समय में घरेलू रसोई गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जिससे उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ा है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के कारण आपूर्ति और कीमतों में बदलाव की स्थिति बनी रहती है, जिसका असर भारत की व्यवस्था पर भी दिखाई देता है।

    नए प्रस्तावित बदलावों के अनुसार LPG बुकिंग के नियमों में संशोधन किया जा सकता है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बुकिंग के बीच के समय अंतराल को फिर से तय करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि मांग और आपूर्ति के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सके और किसी भी तरह की कमी से बचा जा सके।

    इसके साथ ही डिलीवरी प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। डिलीवरी के समय उपभोक्ता की पहचान सुनिश्चित करने के लिए OTP आधारित सत्यापन प्रणाली को और मजबूत किया जा सकता है, जिससे गलत डिलीवरी और अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।

    सरकार की ओर से आधार आधारित eKYC प्रक्रिया को भी और सख्ती से लागू करने की संभावना है, खासकर उन उपभोक्ताओं के लिए जो सब्सिडी का लाभ प्राप्त करते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सहायता केवल सही और पात्र लोगों तक पहुंचे।

    इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) को बढ़ावा देने की दिशा में भी कदम तेज किए जा रहे हैं। जिन इलाकों में पाइप्ड गैस सुविधा उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे इस व्यवस्था की ओर शिफ्ट करने की योजना पर काम चल रहा है।

  • दिल्ली हत्याकांड ने पकड़ा राजनीतिक तूल, सत्ता-विपक्ष में तीखी बयानबाज़ी..

    दिल्ली हत्याकांड ने पकड़ा राजनीतिक तूल, सत्ता-विपक्ष में तीखी बयानबाज़ी..

    नई दिल्ली। दिल्ली में डिलीवरी बॉय की हत्या का मामला अब केवल एक आपराधिक घटना न रहकर राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन चुका है। इस घटना के बाद राजधानी की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं, जिसके चलते राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

    घटना के सामने आने के बाद विपक्ष की ओर से सरकार पर सीधा हमला किया गया। विपक्षी नेता ने इस वारदात को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह घटना समाज में असुरक्षा की भावना को दर्शाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पीड़ित युवक बिहार से था और उसके साथ हुई यह घटना क्षेत्रीय और सामाजिक संवेदनशीलता को उजागर करती है। विपक्ष का कहना है कि इस तरह की घटनाएं राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।

    विपक्षी बयान में यह भी कहा गया कि राजधानी में प्रशासनिक जिम्मेदारी कई स्तरों पर बंटी हुई है, ऐसे में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत और बढ़ जाती है। उन्होंने पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की बात कही।

    इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया। सत्ता पक्ष की ओर से इस पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। केंद्रीय स्तर के एक नेता ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि इस तरह के बयानों से न केवल गलत संदेश जाता है, बल्कि समाज में भ्रम भी पैदा होता है।

    सत्ता पक्ष ने स्पष्ट किया कि सरकार हर नागरिक की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच चल रही है और दोषियों को कानून के अनुसार सजा दी जाएगी।

    उन्होंने विपक्ष पर यह आरोप भी लगाया कि ऐसे संवेदनशील मामलों को राजनीतिक रंग देकर मुद्दे को भटकाने की कोशिश की जा रही है, जो सही नहीं है। उनका कहना था कि किसी भी आपराधिक घटना को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना पीड़ित परिवार के साथ न्याय नहीं है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली की कानून-व्यवस्था को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ जहां पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक बयानबाज़ी ने मामले को और जटिल बना दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं में राजनीतिक बहस से ज्यादा जरूरी है कि जांच प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो, ताकि पीड़ित को समय पर न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

  • खलनायक के सीक्वल से लौटेगा बल्लू बलराम का खौफ; संजय दत्त की जिद पर सुभाष घई ने तैयार की कहानी,

    खलनायक के सीक्वल से लौटेगा बल्लू बलराम का खौफ; संजय दत्त की जिद पर सुभाष घई ने तैयार की कहानी,


    नई दिल्ली।हिंदी सिनेमा के इतिहास में जिस फिल्म ने ‘नायक नहीं खलनायक हूं मैं’ के नारे को घर-घर तक पहुँचाया, उस कल्ट क्लासिक फिल्म के सीक्वल की चर्चा एक बार फिर फिजाओं में तैर रही है। करीब तीन दशक पहले रिलीज हुई ‘खलनायक’ ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़े थे, बल्कि संजय दत्त के करियर को एक ऐसी नई पहचान दी थी जिसने एंटी-हीरो किरदारों की परिभाषा ही बदल दी।
    अब तीस साल के लंबे अंतराल के बाद संजय दत्त ने खुद अपनी इस यादगार फिल्म के सीक्वल का औपचारिक ऐलान कर दिया है। इस खबर के आते ही प्रशंसकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है, लेकिन इसी बीच एक अहम जानकारी सामने आई है कि फिल्म के मूल रचयिता सुभाष घई इस बार निर्देशन की कुर्सी पर नजर नहीं आएंगे।

    इस बड़े फैसले के पीछे की वजहें बेहद भावनात्मक और पेशेवर हैं। बताया जा रहा है कि संजय दत्त इस प्रोजेक्ट को लेकर वर्षों से खासे उत्साहित थे। उनकी यह इच्छा इतनी प्रबल थी कि जेल में रहने के दौरान भी उन्होंने पत्र लिखकर इस कहानी को आगे बढ़ाने की बात कही थी।

    संजय दत्त के प्रति पिता जैसा स्नेह रखने वाले सुभाष घई ने इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी सहमति तो दे दी है और फिल्म की मूल अवधारणा व पटकथा भी तैयार कर ली है, लेकिन वे अब इस विरासत को किसी नई दृष्टि के साथ विकसित होते देखना चाहते हैं। अस्सी वर्ष की आयु में सुभाष घई ने अब निर्देशन के चुनौतीपूर्ण कार्य से दूरी बनाने का फैसला किया है, हालांकि फिल्म के रचनात्मक पक्ष पर उनकी पकड़ पहले की तरह ही बनी रहेगी।

    फिल्म के इस दूसरे भाग में सुभाष घई एक मार्गदर्शक और ‘क्रिएटिव प्रोड्यूसर’ की भूमिका में नजर आएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भले ही वे कैमरे के पीछे निर्देशक के रूप में न हों, लेकिन फिल्म के निर्माण के हर पड़ाव पर वे संजय दत्त के साथ खड़े रहेंगे। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने फिल्म में एक छोटा सा कैमियो करने की इच्छा भी जताई है, जो पुरानी यादों को ताजा करने का काम करेगा।

    1993 में आई पहली फिल्म ने जो बेंचमार्क सेट किया था, उसे पार करना किसी भी नए निर्देशक के लिए बड़ी चुनौती होगी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सुभाष घई की सरपरस्ती में संजय दत्त का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट किस तरह पर्दे पर उतरता है और ‘खलनायक’ की इस विरासत को कौन आगे ले जाता है।
  • किसान कल्याण योजना की 14वीं किस्त टली, 85 लाख किसानों को अब मई का इंतजार

    किसान कल्याण योजना की 14वीं किस्त टली, 85 लाख किसानों को अब मई का इंतजार


    मध्य प्रदेश के लाखों किसानों के लिए किसान कल्याण योजना की अगली किस्त का इंतजार और लंबा हो गया है। राज्य के करीब 85 लाख किसान इस योजना के तहत मिलने वाली 14वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, लेकिन अब यह साफ होता दिख रहा है कि भुगतान की तारीख आगे खिसक गई है।

    पहले उम्मीद की जा रही थी कि किसानों के खातों में यह राशि अप्रैल महीने में किसी विशेष अवसर या त्योहार के आसपास पहुंच जाएगी। लेकिन महीने के अंत तक भी कोई आधिकारिक संकेत न मिलने से किसानों की उम्मीदों को झटका लगा है। अब माना जा रहा है कि यह भुगतान मई महीने में किया जा सकता है।

    इस देरी के पीछे मुख्य कारण प्रशासनिक प्रक्रियाओं और डेटा सत्यापन को बताया जा रहा है। लाभार्थियों की सूची को अंतिम रूप देने और बैंकिंग प्रक्रिया को पूरा करने में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। इसी वजह से किस्त जारी करने की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित हो गई है और इसे अगले महीने तक आगे बढ़ा दिया गया है।

    किसानों के बीच अब यह भी चर्चा तेज हो गई है कि क्या इस बार दो किस्तों की राशि एक साथ जारी की जा सकती है। अगर सरकार ऐसा निर्णय लेती है, तो किसानों को 2000 रुपये की बजाय 4000 रुपये तक की राशि एक साथ मिल सकती है। खेती के महत्वपूर्ण सीजन को देखते हुए यह राशि किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है, क्योंकि इस समय बीज, खाद और अन्य कृषि खर्चों में तेजी से बढ़ोतरी होती है।

    इस योजना के तहत किसानों को हर साल कुल 6000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन बराबर किस्तों में उनके बैंक खातों में सीधे भेजी जाती है। यह सहायता केंद्र की किसान सम्मान निधि योजना के अतिरिक्त होती है, जिससे किसानों को कुल मिलाकर एक निश्चित आर्थिक सहारा मिलता है।

    हालांकि इस बार की देरी ने किसानों की चिंता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि प्रक्रिया पूरी होते ही भुगतान जल्द जारी कर दिया जाएगा। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने बैंक खाते की जानकारी अपडेट रखें, ताकि किसी भी तकनीकी समस्या की वजह से भुगतान अटक न जाए।

    विशेष रूप से यह भी जरूरी बताया जा रहा है कि आधार लिंकिंग और डीबीटी सुविधा सक्रिय हो, क्योंकि इन्हीं तकनीकी प्रक्रियाओं के जरिए राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजी जाती है। कई बार मामूली गलतियों के कारण भी भुगतान में देरी हो जाती है।

    फिलहाल किसानों की नजर अब मई महीने पर टिकी हुई है, जब इस किस्त के जारी होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह इंतजार भले ही थोड़ा लंबा हो गया हो, लेकिन किसानों को उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें उनकी लंबित राशि प्राप्त हो जाएगी और खेती के कामों में उन्हें राहत मिलेगी।

  • गुजरात राजनीति में चर्चा का केंद्र बना जडेजा परिवार: नयनाबा की हार, रिवाबा की भूमिका पर सवाल

    गुजरात राजनीति में चर्चा का केंद्र बना जडेजा परिवार: नयनाबा की हार, रिवाबा की भूमिका पर सवाल

    नई दिल्ली। गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में इस बार नतीजों से ज्यादा चर्चा एक खास पारिवारिक कहानी की रही। राजकोट में हुए चुनाव ने राजनीतिक मुकाबले के साथ-साथ रिश्तों के बीच की दूरी को भी सुर्खियों में ला दिया। भारतीय क्रिकेटर रविंद्र जडेजा की बहन नयनाबा जडेजा इस चुनाव में मैदान में थीं, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
    नयनाबा जडेजा ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत इस चुनाव से की थी और उम्मीद की जा रही थी कि उनकी पहचान उन्हें बढ़त दिलाएगी। लेकिन मतदान के बाद सामने आए नतीजों ने उनके पक्ष में माहौल नहीं बनाया और उन्हें पराजय स्वीकार करनी पड़ी।
    इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि यह मुकाबला केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं था, बल्कि परिवार के भीतर भी विचारधारा की अलग राहें साफ दिखाई दीं। एक तरफ नयनाबा अपने राजनीतिक अभियान में सक्रिय थीं, वहीं दूसरी ओर रिवाबा जडेजा की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज रहीं, जिससे यह सीट और अधिक सुर्खियों में आ गई।
    राजकोट क्षेत्र में पहले से ही राजनीतिक मुकाबला कड़ा माना जाता है, और इस बार भी परिणामों ने यह साफ कर दिया कि यहां मतदाता स्थानीय समीकरणों को प्राथमिकता देते हैं। पार्टी स्तर पर भी इस सीट पर कड़ा संघर्ष देखने को मिला, लेकिन अंत में विजेता पक्ष ने बढ़त हासिल कर ली।
    नतीजों के बाद नयनाबा जडेजा ने जनता के फैसले को स्वीकार करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जीत और हार दोनों सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उन्होंने आगे भी सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहने की बात कही।
    यह पूरा घटनाक्रम इस बात का उदाहरण बन गया कि राजनीति में केवल नाम या पहचान ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि जमीनी स्तर पर जुड़ाव और संगठन की मजबूती भी निर्णायक भूमिका निभाती है। साथ ही, जब परिवार के सदस्य अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं में बंट जाते हैं, तो चुनावी मुकाबला और भी भावनात्मक और चर्चित हो जाता है।
  • बुधवार पूजा विधि: धन, सौभाग्य और सफलता के लिए जरूर अपनाएं ये 5 नियम, वरना रुक सकती है किस्मत

    बुधवार पूजा विधि: धन, सौभाग्य और सफलता के लिए जरूर अपनाएं ये 5 नियम, वरना रुक सकती है किस्मत

    नई दिल्ली|  हिंदू धर्म में बुधवार का दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश और बुध ग्रह की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से न केवल बुद्धि का विकास होता है, बल्कि व्यापार, करियर और जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी सफलता के रास्ते खुलते हैं। लेकिन अगर पूजा के दौरान छोटी-सी भी गलती हो जाए, तो इसका प्रभाव आपके भाग्य पर पड़ सकता है। इसलिए बुधवार की पूजा पूरी श्रद्धा और सही नियमों के साथ करना बेहद जरूरी है।

    बुधवार के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ और विशेष रूप से हरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। इसके बाद भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित कर उन्हें दूर्वा, मोदक और हरी मूंग अर्पित करें। घी और गुड़ का भोग लगाना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। मान्यता है कि इन चीजों से गणेश जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि, बुद्धि और सफलता का आशीर्वाद देते हैं।

    हालांकि पूजा के दौरान कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है। सबसे पहली बात, इस दिन काले वस्त्र पहनने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। इसके अलावा भगवान गणेश को कभी भी तुलसी पत्र अर्पित नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह पूजा में वर्जित माना गया है। साथ ही पूजा में टूटे हुए चावल यानी अक्षत का उपयोग न करें, बल्कि साबुत और स्वच्छ अक्षत ही चढ़ाएं।

    इसके अलावा चंदन, सफेद फूल या सफेद वस्त्र भी गणेश जी को अर्पित नहीं करने चाहिए। केतकी के फूल भी इस पूजा में निषिद्ध माने गए हैं। ध्यान रखें कि पूजा में कभी भी सूखे या मुरझाए फूलों का प्रयोग न करें, क्योंकि इससे पूजा का प्रभाव कम हो सकता है। पूजा के बाद दान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है, इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

    बुधवार की पूजा का मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि मानसिक, बौद्धिक और आर्थिक उन्नति भी है। कहा जाता है कि इस दिन की गई सच्चे मन से पूजा व्यक्ति की सोच, बोलचाल और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत बनाती है। साथ ही कुंडली में बुध ग्रह के दोष भी शांत होते हैं, जिससे जीवन में आने वाली बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं।

    अगर आप भी जीवन में सफलता, धन और सौभाग्य पाना चाहते हैं, तो बुधवार की पूजा को हल्के में न लें। सही विधि और नियमों के साथ की गई पूजा आपके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।

  • यात्रियों के लिए नई राहत: अमृत भारत एक्सप्रेस की दो नई ट्रेनें शुरू, उत्तर से महाराष्ट्र तक सीधी कनेक्टिविटी

    यात्रियों के लिए नई राहत: अमृत भारत एक्सप्रेस की दो नई ट्रेनें शुरू, उत्तर से महाराष्ट्र तक सीधी कनेक्टिविटी

    नई दिल्ली। भारतीय रेल ने यात्रियों को बड़ी सुविधा देते हुए अमृत भारत एक्सप्रेस की दो नई सेवाओं की शुरुआत की है, जो उत्तर भारत और महाराष्ट्र के बीच यात्रा को अधिक आसान और किफायती बनाएंगी। नई ट्रेन सेवाएं अयोध्या से मुंबई और वाराणसी से पुणे के बीच चलाई जा रही हैं, जिससे लाखों यात्रियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

    इन ट्रेनों के शुरू होने से लंबे समय से प्रतीक्षित सीधी कनेक्टिविटी अब साकार हो गई है। विशेष रूप से वाराणसी से पुणे तक चलने वाली ट्रेन उत्तर भारत और महाराष्ट्र के बीच यात्रा करने वाले लोगों के लिए एक सुविधाजनक विकल्प बनकर उभरेगी। यह ट्रेन अपने मार्ग में कई महत्वपूर्ण स्टेशनों पर ठहराव करेगी, जिससे विभिन्न शहरों के यात्रियों को भी इसका लाभ मिल सकेगा।

    इसी तरह अयोध्या से मुंबई के बीच शुरू की गई ट्रेन धार्मिक और व्यावसायिक दोनों दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है। यह सेवा राम मंदिर अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को सरल बनाएगी, वहीं मुंबई जैसे बड़े महानगर तक सीधी पहुंच भी उपलब्ध कराएगी।

    नई सेवाओं के संचालन के साथ रेलवे ने यात्रियों की बढ़ती मांग, तीर्थ स्थलों की लोकप्रियता और राज्यों के बीच बढ़ते आवागमन को ध्यान में रखा है। इन ट्रेनों के रूट ऐसे चुने गए हैं, जो प्रमुख शहरों और महत्वपूर्ण जंक्शनों को जोड़ते हैं, जिससे यात्रा समय और लागत दोनों में कमी आएगी।

    इस पहल का असर केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। छोटे व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और छात्रों के लिए यह कनेक्टिविटी नई संभावनाएं लेकर आएगी। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।

  • सिनेमा का सबसे विशाल सेट: बाहुबली 2: द कॉन्क्लूजन के महिष्मती राज्य ने रचा इतिहास

    सिनेमा का सबसे विशाल सेट: बाहुबली 2: द कॉन्क्लूजन के महिष्मती राज्य ने रचा इतिहास

    नई दिल्ली। भारतीय फिल्म जगत में बाहुबली 2: द कॉन्क्लूजन एक ऐसी ऐतिहासिक फिल्म के रूप में जानी जाती है, जिसने अपने शानदार निर्माण और विशालता से एक नया मानक स्थापित किया। इस फिल्म की सफलता के पीछे केवल कहानी या अभिनय ही नहीं, बल्कि इसकी भव्य प्रस्तुति और विशाल सेट भी बड़ी वजह रहे।

    फिल्म में दिखाया गया महिष्मती साम्राज्य वास्तव में एक कल्पनात्मक दुनिया था, जिसे बेहद वास्तविक रूप देने के लिए विशाल स्तर पर निर्माण कार्य किया गया। हैदराबाद के प्रसिद्ध रामोजी फिल्म सिटी में करीब 100 एकड़ क्षेत्र में इस सेट को तैयार किया गया। इस भव्य सेट को खड़ा करने में लगभग 60 करोड़ रुपये खर्च हुए और 500 से अधिक लोगों ने मिलकर इसे तैयार किया।

    इस विशाल प्रोजेक्ट के पीछे कला निर्देशक साबू सिरिल और उनकी टीम की अहम भूमिका रही। उन्होंने हर एक संरचना, महल और युद्धस्थल को इस तरह डिजाइन किया कि वह पर्दे पर पूरी तरह जीवंत नजर आए। सेट की बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे दर्शकों को एक वास्तविक साम्राज्य का अनुभव मिल सके।

    फिल्म की शूटिंग केवल स्टूडियो तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई महत्वपूर्ण दृश्यों को प्राकृतिक लोकेशनों पर भी फिल्माया गया। केरल के प्रसिद्ध अथिरप्पिल्ली जलप्रपात जैसे स्थानों पर शूट किए गए दृश्य फिल्म की खूबसूरती और भव्यता को और बढ़ाते हैं। खासकर झरनों के आसपास फिल्माए गए सीन दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने।

    एक रोचक तथ्य यह भी है कि फिल्म के पहले भाग की शूटिंग के दौरान ही दूसरे भाग के कुछ हिस्सों को पहले ही शूट कर लिया गया था। इससे फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित किया गया और समय की बचत भी हुई। बाद में शेष हिस्सों को पूरी सावधानी और सुरक्षा के साथ पूरा किया गया।

    फिल्म की लोकप्रियता इतनी अधिक रही कि इससे जुड़ी चीजों को संरक्षित रखने के लिए एक विशेष संग्रहालय भी बनाया गया, जहां फिल्म में इस्तेमाल किए गए हथियार, कवच और सेट के हिस्से आज भी सुरक्षित रखे गए हैं। यहां आने वाले लोग उस भव्य दुनिया को करीब से महसूस कर सकते हैं, जिसे उन्होंने पर्दे पर देखा था।

    इस तरह बाहुबली 2: द कॉन्क्लूजन ने यह साबित कर दिया कि अगर कल्पना, तकनीक और मेहनत का सही तालमेल हो, तो सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक भव्य अनुभव भी बन सकता है।

  • गुरु को सम्मान, युवाओं को संदेश: Virat Kohli ने किया नए क्रिकेट हब का शुभारंभ..

    गुरु को सम्मान, युवाओं को संदेश: Virat Kohli ने किया नए क्रिकेट हब का शुभारंभ..

    नई दिल्ली में एक खास अवसर देखने को मिला, जब भारतीय क्रिकेट के स्टार बल्लेबाज Virat Kohli ने अपने शुरुआती क्रिकेट सफर से जुड़े एक अहम पड़ाव को फिर से जिया। उन्होंने अपने बचपन के कोच Rajkumar Sharma की क्रिकेट अकादमी के नए ब्रांच का उद्घाटन किया। यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इसमें भावनाएं, यादें और प्रेरणा तीनों का संगम देखने को मिला।

    इस नए प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत के साथ ही स्थानीय युवा खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाओं का रास्ता खुल गया है। यहां आधुनिक संसाधनों और अनुभवी मार्गदर्शन के जरिए उभरते क्रिकेटरों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान कई लोग मौजूद रहे, जिससे इस पहल की अहमियत साफ नजर आई।

    मौके पर मौजूद छात्रों से बातचीत करते हुए कोहली ने अपने जीवन के शुरुआती अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि किस तरह उन्होंने कम उम्र में ही क्रिकेट को लेकर अपनी सोच स्पष्ट कर ली थी और उसी दिशा में पूरी लगन से काम करना शुरू कर दिया था। उनके अनुसार, जीवन में लक्ष्य तय करना और उसके प्रति ईमानदार रहना बेहद जरूरी है।

    उन्होंने छात्रों को यह भी समझाया कि स्कूल का समय केवल पढ़ाई के लिए नहीं होता, बल्कि यह वह दौर होता है जहां इंसान अपने व्यक्तित्व को आकार देता है। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया और कहा कि छात्रों को अपने गुरुओं के प्रति सम्मान और ध्यान बनाए रखना चाहिए, क्योंकि वही उन्हें सही दिशा दिखाते हैं।

    अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कोहली ने बताया कि उन्होंने बहुत छोटी उम्र से ही नियमित अभ्यास शुरू कर दिया था। इस अकादमी के साथ उनका गहरा जुड़ाव रहा है और आज भी जब समय मिलता है, वह यहां आकर अपने पुराने दिनों को याद करते हैं। उनके लिए यह जगह केवल अभ्यास का मैदान नहीं, बल्कि उनके सपनों की शुरुआत का केंद्र है।

    उन्होंने यह भी कहा कि जब उन्होंने क्रिकेट को अपने करियर के रूप में चुनने का फैसला लिया, तब उन्होंने अपने परिवार और शिक्षकों से पूरी ईमानदारी के साथ यह बात साझा की। यही पारदर्शिता और समर्पण आगे चलकर उनके सफल करियर की नींव बनी।

    इस नए ब्रांच के शुरू होने से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में यहां से कई नए खिलाड़ी निकलेंगे, जो क्रिकेट के क्षेत्र में अपना नाम बनाएंगे। कार्यक्रम के अंत में कोहली ने सभी युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि अगर वे अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहेंगे, तो सफलता जरूर मिलेगी।

    यह आयोजन न केवल एक नई शुरुआत का प्रतीक बना, बल्कि इसने यह भी दिखाया कि कड़ी मेहनत, सही मार्गदर्शन और स्पष्ट लक्ष्य के साथ कोई भी अपने सपनों को हकीकत में बदल सकता है।

  • सोमनाथ दौरे पर अमित शाह, पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक और सामाजिक पहलों की शुरुआत

    सोमनाथ दौरे पर अमित शाह, पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक और सामाजिक पहलों की शुरुआत

    नई दिल्ली। गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में स्थित प्रसिद्ध सोमनाथ धाम में एक विशेष धार्मिक अवसर देखने को मिला, जब देश के गृह मंत्री अमित शाह ने यहां पहुंचकर भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी उपस्थित रहे।

    मंदिर पहुंचने के बाद उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। ध्वजा पूजा, तग पूजा और महापूजा जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने अपनी आस्था प्रकट की। इस दौरान एक विशेष भेंट भी अर्पित की गई, जो भारतीय परंपरा और ऐतिहासिक विरासत से प्रेरित थी। इस पूरे आयोजन ने मंदिर की प्राचीन परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

    पूजा के बाद मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराने की परंपरा भी निभाई गई, जिसे अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान मंदिर प्रशासन द्वारा उनका स्वागत किया गया और उन्हें स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह पूरा दृश्य श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना रहा।

    इस अवसर पर एक विशेष धार्मिक आयोजन की शुरुआत भी की गई, जिसमें भक्तों को भाग लेने का अवसर मिलेगा। इस आयोजन के तहत भगवान शिव का अभिषेक पंचामृत, दूध और अन्य पवित्र सामग्री से किया जाएगा। साथ ही वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच पूजा संपन्न होगी। इसमें गौ-पूजा, ब्राह्मण भोजन और अन्य पारंपरिक अनुष्ठान भी शामिल किए गए हैं, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।

    धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सांस्कृतिक और ज्ञानवर्धक पहल भी इस मौके पर शुरू की गई। इसके तहत एक डिजिटल माध्यम के जरिए प्राचीन भारतीय ज्ञान और परंपराओं को लोगों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और उन्हें भारतीय परंपरा के महत्व से अवगत कराना है।

    इसके अलावा, सामाजिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए जरूरतमंद लोगों के लिए एक विशेष पहल भी की गई। स्वास्थ्य से जुड़ी इस पहल के अंतर्गत पोषण सामग्री का वितरण किया गया, जिससे जरूरतमंदों को सहायता मिल सके। यह कदम दर्शाता है कि धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ समाज सेवा को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है।

    इस पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में आस्था, संस्कृति और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। यह दौरा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं रहा, बल्कि इसमें समाज और संस्कृति के प्रति समर्पण का व्यापक संदेश भी निहित था, जिसे वहां मौजूद लोगों ने गहराई से अनुभव किया।