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  • गुजरात की विरासत ने जीता दुनिया का दिल, कच्छ की तांबे की घंटियां अब विदेशों में भी लोकप्रिय

    गुजरात की विरासत ने जीता दुनिया का दिल, कच्छ की तांबे की घंटियां अब विदेशों में भी लोकप्रिय

    नई दिल्ली। गुजरात के कच्छ क्षेत्र की पारंपरिक कॉपर बेल कला आज अपनी सीमाओं को पार करते हुए वैश्विक पहचान हासिल कर रही है। पीढ़ियों से चली आ रही यह हस्तकला अब केवल स्थानीय जरूरतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी खास जगह बना चुकी है। कच्छ के गांवों में रहने वाले कारीगर इस परंपरा को आज भी पूरे समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।

    कॉपर बेल बनाने की प्रक्रिया बेहद मेहनत और कौशल से जुड़ी होती है। इसमें सबसे पहले धातु की शीट से घंटी का ढांचा तैयार किया जाता है। इसके बाद उस पर तांबे या पीतल की परत चढ़ाई जाती है और फिर इसे भट्टी में पकाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के बाद घंटियों को अंतिम आकार दिया जाता है और उनमें एक विशिष्ट ध्वनि उत्पन्न की जाती है, जो इन्हें खास बनाती है।

    इस कला की खास बात यह है कि इसमें परिवार के सभी सदस्य शामिल होते हैं। अलग-अलग चरणों में सभी अपनी भूमिका निभाते हैं, जिससे यह केवल एक काम नहीं बल्कि पारिवारिक परंपरा का हिस्सा बन जाता है। समय के साथ कारीगरों ने इसमें नए डिजाइन और आधुनिक रूप भी शामिल किए हैं, जिससे इसकी मांग और अधिक बढ़ गई है।

    पहले ये घंटियां मुख्य रूप से पशुओं के गले में बांधने के लिए बनाई जाती थीं, लेकिन अब इनका उपयोग सजावट के रूप में भी व्यापक रूप से होने लगा है। घरों, होटलों और विभिन्न आयोजनों में इनका उपयोग बढ़ने से इनकी उपयोगिता और लोकप्रियता दोनों में इजाफा हुआ है।

    सरकारी सहयोग और योजनाओं के चलते इस पारंपरिक कला को नई दिशा मिली है। नए डिजाइनों और तकनीकों के जरिए इसे आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप ढाला जा रहा है। इससे कारीगरों को आर्थिक रूप से मजबूती मिल रही है और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

    जीआई टैग मिलने के बाद इस कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। अब कच्छ की कॉपर बेल्स अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में निर्यात की जा रही हैं, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

    इस बढ़ती लोकप्रियता ने न केवल कच्छ की सांस्कृतिक धरोहर को मजबूती दी है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। आज यह कला भारत की पारंपरिक विरासत का एक ऐसा उदाहरण बन चुकी है, जो वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बना रही है।

  • गंगा एक्सप्रेसवे पर तैयार हो रहा हाई-इंसेंटिव मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर..

    गंगा एक्सप्रेसवे पर तैयार हो रहा हाई-इंसेंटिव मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर..

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने के लिए गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे बनाए जा रहे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स अब तेजी से एक बड़े निवेश केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। यह पूरा क्षेत्र अब सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं रहा, बल्कि इसे एक हाई-इंसेंटिव इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के रूप में तैयार किया जा रहा है।

    इस क्षेत्र में निवेश करने वाले उद्योगों के लिए सरकार की ओर से कई स्तरों पर आर्थिक लाभ दिए जा रहे हैं। इसमें पूंजी निवेश पर आकर्षक सब्सिडी, टैक्स में छूट और अन्य वित्तीय प्रोत्साहन शामिल हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य उद्योग स्थापित करने की लागत को कम करना और निवेशकों के लिए माहौल को अधिक अनुकूल बनाना है।

    भूमि आवंटन और उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को सरल बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। निवेशकों को कम कागजी प्रक्रिया और तेज मंजूरी व्यवस्था का लाभ मिल रहा है, जिससे प्रोजेक्ट जल्दी शुरू हो सके। इसके साथ ही विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए भी विशेष रियायतों का प्रावधान किया गया है।

    ऊर्जा क्षेत्र में भी उद्योगों को राहत दी जा रही है। कुछ श्रेणियों के निवेशकों को निर्धारित अवधि तक बिजली शुल्क में छूट दी जा रही है, जिससे उनके संचालन खर्च में कमी आए। इसके अलावा पर्यावरण के अनुकूल उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिए जा रहे हैं।

    नवाचार और तकनीकी विकास को मजबूत करने के लिए अनुसंधान आधारित परियोजनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत नए विचारों और आधुनिक तकनीकों को अपनाने वाले उद्योगों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

    निवेश प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाने के लिए एक डिजिटल सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया है, जहां सभी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। इससे निवेशकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और समय की बचत होती है।

    इन सभी प्रयासों के चलते गंगा एक्सप्रेसवे के आसपास का क्षेत्र तेजी से एक आधुनिक औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में उभर रहा है, जो आने वाले समय में राज्य की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभा सकता है।

  • दिल्ली विधानसभा में हंगामा, महिला आरक्षण बिल पर BJP का प्रदर्शन, सत्र से पहले गरमाया माहौल

    दिल्ली विधानसभा में हंगामा, महिला आरक्षण बिल पर BJP का प्रदर्शन, सत्र से पहले गरमाया माहौल

    नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में आज का दिन राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण और तनावपूर्ण बन गया है। महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर आयोजित विशेष सत्र शुरू होने से पहले ही माहौल गर्म हो गया, जब भाजपा विधायकों ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन उस राजनीतिक असंतोष को दर्शाता है, जो लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर बना हुआ है।

    सत्र की शुरुआत से पहले ही विधानसभा परिसर के बाहर और भीतर हलचल बढ़ गई। भाजपा विधायकों ने महिला आरक्षण बिल को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की और नारेबाज़ी करते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस प्रदर्शन ने पूरे राजनीतिक वातावरण को एक अलग दिशा दे दी।

    वहीं, सत्र के दौरान इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की संभावना जताई गई है। महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्ताव को लेकर सरकार की ओर से यह संकेत दिया गया है कि इस पर गंभीर विचार किया जाएगा। मंत्री स्तर से यह भी कहा गया कि मुख्यमंत्री स्वयं इस विषय पर एक प्रस्ताव लेकर आई हैं, जिस पर सदन में चर्चा की जाएगी।

    दूसरी ओर विपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि चुनाव से पहले किए गए वादों को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है। इसी क्रम में महिलाओं को दिए गए आर्थिक सहायता वादों का मुद्दा भी चर्चा में आ गया है, जिससे राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

    सत्र से पहले हुई इस राजनीतिक हलचल ने साफ कर दिया है कि महिला आरक्षण का मुद्दा केवल विधायी चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह आने वाले दिनों में एक बड़ा राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही इस मुद्दे को अपने-अपने दृष्टिकोण से पेश कर रहे हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय पर टकराव का माहौल स्वाभाविक है, क्योंकि यह सीधे सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा हुआ मामला है। ऐसे में हर पक्ष अपनी बात को मजबूती से रखना चाहता है।

    सत्र के दौरान आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस चर्चा से कोई ठोस नतीजा निकलता है या यह केवल राजनीतिक बयानबाज़ी तक ही सीमित रह जाता है। फिलहाल, दिल्ली विधानसभा का यह विशेष सत्र अपने शुरुआती चरण में ही राजनीतिक गर्मी का केंद्र बन चुका है, और आगे की कार्यवाही पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • सतना में सुरक्षा में बड़ी चूक वन स्टॉप सेंटर से तीन लड़कियां फरार पहले भी घर से भाग चुकी थीं

    सतना में सुरक्षा में बड़ी चूक वन स्टॉप सेंटर से तीन लड़कियां फरार पहले भी घर से भाग चुकी थीं


    सतना । मध्यप्रदेश के सतना शहर से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है जहां जवाहर नगर स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर से तीन नाबालिग लड़कियां देर रात खिड़की तोड़कर फरार हो गईं। यह मामला सामने आते ही प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    जानकारी के अनुसार तीनों बालिकाओं को बाल कल्याण समिति के आदेश पर वन स्टॉप सेंटर में अस्थायी आश्रय दिया गया था। इनमें से एक लड़की उत्तर प्रदेश के बिजनौर की रहने वाली बताई जा रही है जबकि अन्य दो सतना जिले के पौराणिक टोला और रामपुर बघेलान क्षेत्र से हैं। ये सभी पहले भी अपने घरों से भाग चुकी थीं जिसके बाद उन्हें सुरक्षा और देखरेख के लिए सेंटर में रखा गया था।

    बताया जा रहा है कि जिस डोरमेट्री में तीनों रह रही थीं वहां की खिड़की को उन्होंने रात के समय तोड़ दिया और एक-एक कर बाहर निकल गईं। इसके बाद वे सेंटर परिसर से बाहर निकलने में सफल हो गईं। हैरानी की बात यह है कि सेंटर में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं और मुख्य द्वार पर चौकीदार की तैनाती भी रहती है इसके बावजूद लड़कियों का इस तरह भाग जाना सुरक्षा में बड़ी चूक की ओर इशारा करता है।

    प्राथमिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि सेंटर के पीछे स्थित मैदान की ओर से तीनों ने भागने का रास्ता चुना। पीछे की दिशा में सीएम राइज स्कूल मैदान होने के कारण वहां निगरानी अपेक्षाकृत कम थी और इसी का फायदा उठाकर वे फरार हो गईं।

    घटना की जानकारी मिलते ही सेंटर की अधीक्षिका नीता श्रीवास्तव ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। इसके बाद सिटी कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने अलग-अलग टीमें गठित की हैं जो संभावित स्थानों पर लड़कियों की तलाश कर रही हैं। रेलवे स्टेशन बस स्टैंड और शहर के अन्य प्रमुख स्थानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

    इसके साथ ही स्मार्ट सिटी और रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं ताकि लड़कियों की मूवमेंट का पता लगाया जा सके। पुलिस उनके परिजनों और परिचितों से भी संपर्क कर रही है जिससे यह अंदाजा लगाया जा सके कि वे किन संभावित ठिकानों पर जा सकती हैं।

    यह घटना केवल एक फरारी का मामला नहीं है बल्कि यह बालिकाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह भी खड़ा करती है। जिस जगह को सुरक्षित आश्रय माना जाता है वहीं से इस तरह नाबालिगों का भाग जाना चिंता का विषय है। अब देखना होगा कि पुलिस कितनी जल्दी इन लड़कियों को सुरक्षित ढूंढ पाती है और साथ ही प्रशासन इस घटना से सबक लेकर सुरक्षा व्यवस्था को कितना मजबूत करता है।

  • सरकारी नौकरी मिलने पर खुशी की लहर, अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया को बताया निष्पक्ष और साफ-सुथरी

    सरकारी नौकरी मिलने पर खुशी की लहर, अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया को बताया निष्पक्ष और साफ-सुथरी

    नई दिल्ली। लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में सैकड़ों युवाओं के लिए खुशी का बड़ा मौका देखने को मिला, जब उन्हें सरकारी सेवा में चयन का नियुक्ति पत्र सौंपा गया। इस मौके पर पूरे आयोजन स्थल पर उत्साह और गर्व का माहौल था। लंबे समय से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह दिन उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया।

    कार्यक्रम में शामिल अभ्यर्थियों के चेहरे सफलता की खुशी से चमक उठे। कई युवाओं ने इसे अपने जीवन की पहली बड़ी उपलब्धि बताया, जबकि कुछ ने इसे अपने परिवार के सपनों की पूर्ति के रूप में देखा। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद युवाओं में आत्मविश्वास और संतोष साफ झलक रहा था।

    चयनित अभ्यर्थियों ने इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बताया। उनका कहना था कि इस बार चयन प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता की गुंजाइश नहीं रही, जिससे मेहनत करने वाले उम्मीदवारों को उनका सही हक मिला है। इसी वजह से युवाओं का सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर भरोसा और मजबूत हुआ है।

    कई अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि इस तरह की पारदर्शी प्रक्रिया से युवाओं में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। उनका मानना है कि जब चयन प्रक्रिया साफ और ईमानदार होती है, तो मेहनत का परिणाम भी सही दिशा में मिलता है। इस अवसर पर कई युवाओं ने अपने परिवार के साथ इस खुशी को साझा किया और इसे जीवन का यादगार पल बताया।

    कार्यक्रम के दौरान अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि सरकारी सेवा में चयन होना केवल नौकरी नहीं बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है, जिसे वे पूरी ईमानदारी के साथ निभाएंगे। उनका कहना था कि अब उनका लक्ष्य प्रशिक्षण पूरा करके सेवा में योगदान देना है।

    कुछ चयनित युवाओं ने यह भी उम्मीद जताई कि भविष्य में और अधिक युवाओं को ऐसे अवसर मिलेंगे, जिससे रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। उनका कहना था कि यह अवसर न केवल उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में जिम्मेदारी निभाने का भी मौका देता है।

    पूरे कार्यक्रम के दौरान माहौल बेहद सकारात्मक रहा और हर ओर खुशी और संतोष का भाव दिखाई दिया। यह अवसर उन युवाओं के लिए एक नई शुरुआत साबित हुआ, जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है।

  • 1 से 30 मई तक बीजेपी का मेगा प्रशिक्षण अभियान ,नई कार्यसमिति जल्द राम नगरी ओरछा में होगी अहम बैठक

    1 से 30 मई तक बीजेपी का मेगा प्रशिक्षण अभियान ,नई कार्यसमिति जल्द राम नगरी ओरछा में होगी अहम बैठक


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है जहां भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को और मजबूत बनाने के लिए बड़ा रोडमैप तैयार किया है। राजधानी भोपाल स्थित पार्टी कार्यालय में हुई अहम बैठक में आने वाले दिनों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बैठक में प्रदेश स्तर के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए और संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने पर जोर दिया गया।

    इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में 1 मई से 30 मई तक व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जाएंगे। इन प्रशिक्षण सत्रों में पार्टी कार्यकर्ताओं को कुल 11 अलग-अलग विषयों पर प्रशिक्षित किया जाएगा। उनका कहना था कि भाजपा की कार्यप्रणाली में नियमित प्रशिक्षण का विशेष महत्व है और इसी के माध्यम से कार्यकर्ताओं को विचारधारा संगठनात्मक कौशल और जनसंपर्क के तरीकों में दक्ष बनाया जाता है।

    बैठक में डॉ. मोहन यादव सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे जिन्होंने इस अभियान को सफल बनाने के लिए अपने सुझाव भी दिए। इसके अलावा राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश प्रदेश प्रभारी डॉ महेन्द्र सिंह और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल समेत अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी प्रशिक्षण महाअभियान की रूपरेखा को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    इस पूरी प्रक्रिया के बीच सबसे महत्वपूर्ण घोषणा प्रदेश कार्यसमिति को लेकर सामने आई। हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट संकेत दिए कि नई प्रदेश कार्यसमिति की सूची जल्द जारी की जाएगी। यह कार्यसमिति आगामी समय में पार्टी के संगठनात्मक फैसलों और राजनीतिक रणनीति का केंद्र होगी। कार्यसमिति के गठन को लेकर कार्यकर्ताओं और नेताओं में उत्सुकता भी बढ़ गई है क्योंकि इसमें शामिल नाम भविष्य की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

    खास बात यह है कि नई कार्यसमिति के गठन के बाद उसकी पहली बैठक ऐतिहासिक स्थल ओरछा में आयोजित की जाएगी। यह बैठक भगवान राम के दरबार में आयोजित करने की योजना है जिससे इसे सांस्कृतिक और वैचारिक महत्व भी दिया जा रहा है। पार्टी इसे केवल एक संगठनात्मक बैठक नहीं बल्कि एक प्रतीकात्मक और प्रेरणादायक शुरुआत के रूप में देख रही है।

    निगम मंडलों में नियुक्तियों को लेकर भी प्रदेश अध्यक्ष ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कई बार सभी की सहमति एक नाम पर नहीं बन पाती इसलिए प्रक्रिया में समय लगता है लेकिन सरकार और संगठन योग्य और काबिल लोगों को ही जिम्मेदारी देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध और मतभेद हर युग में रहे हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है।

    कुल मिलाकर देखा जाए तो भाजपा ने मध्यप्रदेश में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है। मई का महीना पार्टी के लिए बेहद अहम रहने वाला है जिसमें प्रशिक्षण अभियान के साथ-साथ नई कार्यसमिति का गठन और उसकी पहली बैठक राजनीतिक रूप से कई संकेत देने वाली होगी।

  • सिक्किम दौरे के दूसरे दिन पीएम मोदी ने खेला मैच, आज कई बड़ी परियोजनाओं का करेंगे शिलान्यास

    सिक्किम दौरे के दूसरे दिन पीएम मोदी ने खेला मैच, आज कई बड़ी परियोजनाओं का करेंगे शिलान्यास

    नई दिल्ली। सिक्किम की स्थापना के 50 गौरवशाली वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल होने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बेहद ऊर्जावान और अनूठे अवतार में नजर आए। गंगटोक की ठंडी और ताजी सुबह में प्रधानमंत्री ने प्रोटोकॉल से हटकर स्थानीय बच्चों और युवाओं के साथ फुटबॉल के मैदान पर समय बिताया। स्पोर्ट्स जैकेट पहने प्रधानमंत्री ने न केवल गेंद पर अपने हाथ आजमाए, बल्कि युवाओं के साथ मैदान की दौड़ भी लगाई।

    खेल के प्रति प्रधानमंत्री का यह समर्पण और उनका ‘सुपर एनर्जेटिक’ अंदाज़ वहां मौजूद खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया। प्रधानमंत्री ने इस पल को यादगार बताते हुए युवाओं की असीमित ऊर्जा की जमकर सराहना की।

    प्रधानमंत्री का यह दो दिवसीय दौरा केवल खेल और उत्साह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सिक्किम के भविष्य की नई इबारत लिखने वाला है। आज के विशेष कार्यक्रम में वे राज्य के बुनियादी ढांचे को नई मजबूती देने के लिए 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजनाओं का उपहार देंगे। इन योजनाओं का मुख्य केंद्र शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी है।

    गंगटोक के पलजोर स्टेडियम से प्रधानमंत्री एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे और राज्य के पहले मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ सिक्किम विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर का भी लोकार्पण करेंगे। इसके अतिरिक्त, प्रदेश के 160 स्कूलों को आधुनिक आईटी सुविधाओं से लैस कर बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जाएगा।

    सिक्किम की दुर्गम भौगोलिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बड़ा निवेश किया जा रहा है। तीस्ता नदी पर दो विशाल स्टील आर्च पुलों का निर्माण शुरू होगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिए यात्रा सुगम हो सकेगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए आयुर्वेद और सोवा रिग्पा अस्पतालों की आधारशिला रखी जाएगी।

    इसके अलावा, पर्यटन और पर्यावरण को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए आधुनिक ऑर्किड सेंटर और कैलाश मानसरोवर यात्रा की नई सुविधाओं का उद्घाटन भी प्रस्तावित है। कृषि क्षेत्र में किसानों की समृद्धि के लिए नए प्रोसेसिंग प्लांट और खेल प्रतिभाओं के लिए इनडोर क्रिकेट स्टेडियम जैसी सुविधाएं सिक्किम के समग्र विकास को एक नई गति प्रदान करेंगी।

  • हाईकोर्ट सुनवाई से पहले सरकार का मास्टरस्ट्रोक ,विशेष अधिवक्ताओं को हटाया अब दिग्गज वकील संभालेंगे मोर्चा

    हाईकोर्ट सुनवाई से पहले सरकार का मास्टरस्ट्रोक ,विशेष अधिवक्ताओं को हटाया अब दिग्गज वकील संभालेंगे मोर्चा


    जबलपुर । मध्यप्रदेश में लंबे समय से सुर्खियों में बना ओबीसी 27 प्रतिशत आरक्षण मामला एक बार फिर नए मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। हाईकोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई से ठीक पहले राज्य सरकार ने अपनी कानूनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए दो विशेष अधिवक्ताओं को मामले से अलग कर दिया है। इस फैसले ने न सिर्फ कानूनी हलकों में हलचल मचा दी है बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

    जानकारी के मुताबिक राज्यपाल की मंजूरी से पहले नियुक्त किए गए विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह अब इस मामले में सरकार का पक्ष नहीं रखेंगे। सरकार की ओर से जारी नई अधिसूचना में साफ कर दिया गया है कि इन दोनों को इस जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब मामला अपने निर्णायक चरण की ओर बढ़ रहा है और हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है।

    इस घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर चलती प्रक्रिया के बीच यह बदलाव क्यों किया गया। क्या सरकार अपनी कानूनी तैयारी को और मजबूत करना चाहती है या फिर अब तक की रणनीति से संतुष्ट नहीं थी। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस बदलाव के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं की गई है लेकिन संकेत यही मिल रहे हैं कि सरकार इस मामले को लेकर कोई भी जोखिम लेने के मूड में नहीं है।

    अब इस केस में सरकार की ओर से देश के वरिष्ठ और अनुभवी कानून अधिकारी पैरवी करते नजर आएंगे। हाईकोर्ट में सरकार का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज और मध्यप्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह रखेंगे। इन दिग्गज नामों की एंट्री से साफ है कि सरकार ने इस केस को पूरी ताकत के साथ लड़ने का मन बना लिया है और वह अदालत में हर पहलू को मजबूती से प्रस्तुत करना चाहती है।

    गौरतलब है कि ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का मुद्दा लंबे समय से न्यायालय में लंबित है और इसका सीधा असर प्रदेश की भर्ती प्रक्रियाओं पर पड़ रहा है। हजारों अभ्यर्थी इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि यह मामला उनके भविष्य से जुड़ा हुआ है। ऐसे में सरकार की ओर से किया गया यह बड़ा बदलाव आने वाले फैसले की दिशा पर भी असर डाल सकता है।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुनवाई से पहले वकीलों की टीम बदलना एक रणनीतिक कदम हो सकता है जिससे सरकार अपने पक्ष को अधिक प्रभावी तरीके से रख सके। वहीं विपक्ष और कुछ विश्लेषक इसे सवालों के घेरे में भी देख रहे हैं और इसे सरकार की पिछली रणनीति पर अविश्वास के तौर पर पेश कर रहे हैं।

    अब सभी की नजरें हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं जहां यह तय होगा कि यह नया दांव सरकार के लिए कितना कारगर साबित होता है। आने वाले दिनों में यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि राजनीतिक रूप से भी और ज्यादा गर्माने वाला है।

  • यूपी पुलिस में बंपर भर्ती का ऐलान: योगी आदित्यनाथ बोले-इस साल एक लाख नई नौकरियां

    यूपी पुलिस में बंपर भर्ती का ऐलान: योगी आदित्यनाथ बोले-इस साल एक लाख नई नौकरियां

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने कहा कि राज्य में इस वर्ष पुलिस विभाग में बड़े पैमाने पर भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे हजारों युवाओं को सरकारी नौकरी पाने का अवसर मिलेगा।

    मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि यूपी पुलिस में लगभग एक लाख नई भर्तियां इस साल की जाएंगी। इसके साथ ही अन्य सुरक्षा और सहयोगी विभागों में भी भर्ती प्रक्रिया तेज गति से जारी है। उन्होंने बताया कि हाल के समय में कई चरणों में भर्ती परीक्षाएं आयोजित की गई हैं, जिससे बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को चयन का अवसर मिला है।

    एक कार्यक्रम के दौरान चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए और उन्हें ईमानदारी, अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की सलाह दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस बल का काम केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि समाज में विश्वास और सुरक्षा का माहौल स्थापित करना भी है।

    उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब चयन पूरी तरह पारदर्शी और योग्यता आधारित है। किसी भी तरह की सिफारिश या अनियमितता की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है, जिससे योग्य उम्मीदवारों को न्याय मिल सके।

    मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों में पुलिस बल को काफी मजबूत किया गया है और प्रशिक्षण सुविधाओं में भी सुधार किया गया है। इससे नए भर्ती जवानों को बेहतर माहौल में ट्रेनिंग मिल रही है और वे अधिक सक्षम बनकर सेवा में उतर रहे हैं।

    अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि मजबूत कानून व्यवस्था किसी भी राज्य के विकास की नींव होती है। जब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती है, तो निवेश, विकास और रोजगार के अवसर अपने आप बढ़ते हैं।

    अंत में उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि फिटनेस और अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है, ताकि वे न केवल नौकरी में सफल हों बल्कि समाज और देश की सेवा भी बेहतर तरीके से कर सकें।

  • उज्जैन यूनिवर्सिटी में दहशत का साया नई बिल्डिंग पर लिखी धमकी ने बढ़ाई चिंता सुरक्षा पर उठे सवाल

    उज्जैन यूनिवर्सिटी में दहशत का साया नई बिल्डिंग पर लिखी धमकी ने बढ़ाई चिंता सुरक्षा पर उठे सवाल


    उज्जैन । मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित सम्राट विक्रम विश्वविद्यालय एक अजीब और चिंताजनक घटना के बाद सुर्खियों में आ गया है जहां शिक्षा के माहौल के बीच अचानक दहशत का साया छा गया है विश्वविद्यालय की कृषि अध्ययनशाला की नई बिल्डिंग में अज्ञात शरारती तत्वों की हरकत ने छात्रों और स्टाफ दोनों को भयभीत कर दिया है

    करीब 17 करोड़ की लागत से तैयार इस नई इमारत को हाल ही में शैक्षणिक गतिविधियों के लिए शुरू किया गया था लेकिन अब यह बिल्डिंग एक सनसनीखेज घटना की वजह से चर्चा में है बताया जा रहा है कि सुबह जब लोग परिसर पहुंचे तो मुख्य द्वार पर लाल रंग से लिखे शब्दों ने सभी को हैरान कर दिया गेट पर बड़े अक्षरों में तुम सब मरोगे लिखा हुआ था जिसे देखकर मौके पर मौजूद लोगों के बीच हड़कंप मच गया

    सिर्फ यही नहीं बल्कि गेट के पास कुछ संदिग्ध सामान भी रखा हुआ मिला जिसमें एक मटकी लाल कपड़ा और अन्य वस्तुएं शामिल थीं इन चीजों को देखकर कई लोगों ने तंत्र क्रिया जैसी आशंका जताई हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन इस तरह का दृश्य देखकर छात्रों और कर्मचारियों में डर का माहौल बनना स्वाभाविक था

    घटना की जानकारी मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन तुरंत सक्रिय हुआ और सबसे पहले मौके से उस संदिग्ध सामान को हटाया गया साथ ही दीवार पर लिखे धमकी भरे शब्दों को भी मिटा दिया गया विभागाध्यक्ष ने इस पूरी घटना को असामाजिक तत्वों की शरारत बताया है और उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दे दी गई है

    इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहा है क्योंकि जिस स्थान पर यह घटना हुई वहां सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगे हैं ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो गया है कि यह हरकत किसने और कब की छात्रों का कहना है कि अगर परिसर में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम होते तो शायद ऐसी घटना को रोका जा सकता था

    करीब 1100 छात्रों और स्टाफ के बीच इस घटना के बाद भय का माहौल है कई छात्र अब अकेले उस बिल्डिंग की ओर जाने से भी हिचकिचा रहे हैं शिक्षा का माहौल जहां सुरक्षित और सकारात्मक होना चाहिए वहां इस तरह की घटनाएं चिंता बढ़ाने वाली हैं

    प्रशासन अब पूरे मामले की जांच में जुट गया है और यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इसके पीछे कौन लोग हैं और उनका उद्देश्य क्या था साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो

    यह घटना सिर्फ एक शरारत नहीं बल्कि एक गंभीर चेतावनी भी हो सकती है जो यह संकेत देती है कि शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा को लेकर और अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है फिलहाल सभी की नजरें जांच के नतीजों पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस रहस्य से पर्दा उठेगा